Village Girl Bur Chudai
मैं विक्की, छत्तीसगढ़ से हूँ। आज मैं आपको अपने साथ हुई एक घटना के बारे में बताऊंगा। मैं अपने काम के सिलसिले में रायपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर बालोद जा रहा था। बाइक पर। जब मुझे आधा सफर हाईवे से फिर रूरल रोड पर चलते हुए अभी 15 मिनट ही हुए होंगे कि मुझे एक लड़की पैदल जाते हुए दिखी। Village Girl Bur Chudai
चूँकि वह गाँव का इलाका था तो वहाँ यातायात न के बराबर चल रहा था। तो मैं थोड़ा बकचोड़ी के मूड में आ गया। वैसे वो लड़की थी भी मस्त माल। साली का पिछवाड़ा मस्त गोल था। जब वो चलती तो पूरी तरह झूल-झूल के हिल रहा था। और जब मैं उसके बगल में जाकर अपनी बाइक स्लो की तो उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को देखते ही मुंह में पानी आ गया। उसने लाल कलर का सलवार-कुर्ता पहना था। मस्त गोरा बदन। बढ़िया मेकअप वाले चेहरे से लग रहा था कि किसी अच्छे घर की लड़की है।
फिर मैंने उसके बगल में जाकर उसको बोला, “कहाँ जाना है? चलो मैं छोड़ देता हूँ।”
उसने मेरी तरफ देखा और फिर आगे चलने लगी। तो मैं फिर उसके बगल में गया और बोला कि “कब तक पैदल चलोगी? मैं कोई मदद कर दूँ।” तो वो रुक गई और बोली कि “क्या आपके पास मोबाइल है? एक कॉल करना है।” मैंने मोबाइल निकालकर उससे नंबर पूछकर लगाकर उसको दिया।
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फिर उसने मोबाइल पर किसी लड़के से बात की और कहा कि “कहाँ हो तुम? मैं घर छोड़कर आ गई हूँ।” और फिर उनकी बातें हुईं, फिर उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया और रोने लगी। तब मैंने पूछा तो उसने कहा कि “क्या आप मुझे लोहारा पहुँचा देंगे?” मैंने ओके कहा और उसे बाइक पर बिठा लिया।
फिर रास्ते में उसने बताया कि उसके घर वाले जबरदस्ती उसकी शादी करा रहे हैं। इसलिए वो घर से भाग आई है। पर जिस लड़के के लिए वो भागी, वो भी मुकर रहा है। और इतना कहकर वो रोने लगी। इस पर मैंने बाइक साइड में रोकी और उसे समझाने लगा।
पर वो रोते ही जा रही थी। मैंने उसके आँसू पोछे और उसके सर को सहलाते हुए उसको हिम्मत दी। इस पर वो मेरे कंधे पर सर रखकर रोने लगी। और बोली कि “लड़के सब ऐसे ही होते हैं।” तो मैंने कहा कि “कुछ अच्छे भी होते हैं।” वो बोली, “हाँ, आप वैसे नहीं हैं।” और उसका रोना बंद हुआ।
रोड पूरी तरह सुनसान थी। तो मैंने उसके बदन को देखते हुए सोचने लगा कि कैसे इसको चोदा जाए। फिर हम आगे जाने को बाइक में बैठे। तो मैंने उसको दोनों तरफ पैर करके बैठने को बोला, क्योंकि मुझे बैलेंस में प्रॉब्लम होती है, बोलकर। वो मान गई। फिर मैंने बाइक आगे बढ़ाई और तेज चलाते हुए अचानक ब्रेक मारने लगा, जिससे वो आगे खिसक जाती और उसकी गोल-गोल चुचियाँ मेरी पीठ पर दब जातीं।
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मैंने कई बार ऐसा करके मज़ा लिया। और उसे भी मज़ा आने लगा। वो पूरी तरह मुझसे चिपक गई। फिर कुछ दूर में एक अच्छी सी पहाड़ी जंगल देखकर मैंने उससे कहा कि “क्या तुमने कभी काजू का पेड़ देखा है?” उसने कहा नहीं। मैंने कहा, “देखोगी?” उसने हाँ कहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तो मैंने बाइक को जंगल की एक पगडंडी वाले रास्ते में ले गया। और थोड़ी दूर में बाइक रोककर खड़ी कर दी। और हम पैदल आगे जाने लगे। रास्ता जंगली था तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। अब शायद वो भी समझ गई थी कि मैं उसे वहाँ क्यों लेकर आया हूँ। फिर रास्ता और खराब होने के कारण मैं उसके बगल में आकर उसकी कमर को थाम लिया। वो भी मुझसे पूरी तरह चिपक गई।
उसके इस ग्रीन सिग्नल को समझते ही मैं उसके पीछे होकर अपने पूरी तरह तना चुके लौड़े को उसकी मोटी गांड़ में धँसाते हुए अपने हाथ को उसकी कमर पर फिराने लगा। तब उसने पूछा कि “कहाँ है काजू का पेड़?” तो मैंने उसकी दोनों चुचियों को दबाते हुए बोला कि “वो ऊपर है।”
और वो ऊपर देखते हुए अपनी चुचियों को दबवा रही थी और गांड़ में मेरे लंड का मज़ा ले रही थी। फिर मैंने उसको अपनी तरफ घुमा कर अपनी बाहों में कर लिया। और उसके गोरे गालों और रसीले होंठों को चूमने-चाटने लगा। तब उसने कहा कि “सारे लड़के एक से होते हैं।”
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इस पर मैंने कहा कि “तू चीज़ ही ऐसी है।” और फिर मैंने उसके कुर्ते को ऊपर करके उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चुचियों को दबाने-चूमने लगा। उसके मुंह से “आह्ह्ह… उउह्ह्ह” जैसी आवाज़ आने लगी। फिर मैंने अपने हाथ को पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
और ब्रा को ऊपर करके उसकी मस्त गोरी-गोरी चुचियों को और उसके हल्के गुलाबी चूचों को देखकर तो मेरा दिमाग ही घूम गया। इतने मस्त चिकनी चुचियाँ कम ही दिखती हैं। मैंने तुरंत ही उसे पकड़ के मसल दिया। उसके मुंह से “उई माँ… धीरे करो…” ही निकला।
फिर मैंने नीचे झुक के उसकी एक चुची को अपने मुंह में भर लिया। और जोर-जोर से चूसने-पीने लगा। वो मेरे सर को अपनी चुचियों पर कभी दबाती तो कभी मेरे काटने से ऊपर करती। उसके मुंह से लगातार सेक्सी आवाज़ में “आह्ह्ह… उउह्ह्ह” जैसी कराहने और मज़े की आवाज़ें आ रही थीं, जिसे सुनकर मेरा जोश और बढ़ जा रहा था।
चुची चूसते हुए मैं अपने एक हाथ को नीचे ले जाकर सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहला रहा था। और सोच रहा था कि जब साली के स्तन इतने गोरे हैं तो बुर कितनी प्यारी होगी। फिर मैंने उसकी चुननी ली और एक साफ जगह पर बिछा दी। और उसे उस पर लिटाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तो वो बोली कि “नहीं प्लीज, और कुछ मत करो ना।” तो मैंने कहा कि “ओके, मैं कुछ नहीं करूँगा। पर बैठो तो।” वो बैठ गई। मैं भी उसके बगल में बैठकर उसके चुचों को चूमने लगा। इधर मेरा लौड़ा फूल टाइट हो गया था और पैंट के अंदर उछल-कूद कर रहा था। वो फिर से गर्म होने लगी।
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इस बीच मैंने धीरे से अपने पैंट का हुक और जिप खोलकर, फ्रेंची को नीचे करके अपने तन-तना गए लंड को बाहर निकाल लिया। और उसकी चुचियों को चूसते हुए ही उसके हाथ को पकड़ के धीरे से अपने खड़े लंड पर रख दिया। उसका हाथ जैसे ही मेरे लंड पर पड़ा वो बोली, “उई माँ, ये कितना गरम और टाइट है।” मैंने कहा, “ये तुम्हें देखकर ही ऐसा हुआ है।”
अब वो मेरे लौड़े को पूरी तरह अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी। और मैंने भी उसकी पायजामे के नाड़े को खोलकर उसे नीचे करके चड्डी के ऊपर से ही उसकी पुदी को सहलाने लगा। उसकी चड्डी उसकी बुर के रस से पूरी गीली हो गई थी। फिर मैंने अपने हाथ को उसकी चड्डी में डाल दिया। और उसकी रसीली चूत को मसलने लगा। वो “आह्ह्ह… उउह्ह्ह” करते हुए मेरे लंड से खेलती रही।
फिर मैं खड़ा हुआ और अपना पैंट-चड्डी उतार के पूरा नंगा हो गया। और अपने लंड को उसके मुंह के पास ले जाकर उसे चाटने को बोला। तो उसने मना किया। तो मैंने नीचे होकर उसकी चड्डी उतार दी, फिर कुर्ता और ब्रा भी। अब उस सुनसान जंगल में हम दोनों बिल्कुल नंगे थे।
फिर मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपने होंठों को उसकी चूत में लगा दिया। और ऊपर से नीचे तक चूसने लगा। उसने जोर से चिल्लाया, “नाहीं!” और अपने गांड़ को ऊपर करने लगी। फिर मैंने उसकी बुर के छेद को अपनी जुबान से चेदना शुरू किया।
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तो वो पूरी तरह कसमसाने और तड़पने लगी। कभी मेरे सर को दबाती, कभी उठाने की कोशिश करती। फिर मैं उठा और उसके पैरों को फैलाकर अपने लौड़े के सुपाड़े को उसकी बुर में रगड़ने लगा। जिससे वो और बेचैन और चुदासी हो गई और बोली कि “ये क्या कर रहे हो? क्यों तड़पा रहे हो? आग तो लगा दी है अब बुझाओ भी।” मैंने उसके चुचियों को थाम के एक ज़ोरदार झटका दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी चूत में घुस गया। वो चीख उठी। मैंने तुरंत उसके होंठों पर अपने होंठ रख के दबाया और फिर एक धक्का दिया।
तो मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में धँस गया। वो चाहकर भी चीख नहीं पाई। मैंने उसके होंठों को चूसते हुए वैसे ही लंड को रखा रहा। कुछ देर बाद जब उसको भी मज़ा आने लगा तो उसने खुद नीचे से लंड को और अंदर लेने की कोशिश करने लगी। तब मैंने उसकी बुर में अपने लौड़े से झटके-धक्के मारने लगा। वो फुल मज़ा लेते हुए “वाह्ह्ह… आह्ह्ह… उआआ… उईई…” कर रही थी। फिर मैंने करीब 15 मिनट तक उसकी चूत को बजाया। और अपने लंड का गरम पानी से उसकी बुर को भर दिया।
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