Free Handicap Porn Story
मैं पंकज हूँ, मैं 26 साल का हूँ। मीडियम हाइट, रंग गोरा लेकिन मैं हैंडीकैप्ड व्यक्ति हूँ, मैं अपंग हूँ। मेरे राइट लेग में पोलियो हुआ है, मैं स्टिक के बिना चल नहीं सकता लेकिन मैं वो सब कुछ कर सकता हूँ जो एक नॉर्मल इंसान कर सकता है। देखने में स्मार्ट हूँ लेकिन आप सब जानते ही होंगे कि अपंग इंसान से कौन प्यार कर सकता है। Free Handicap Porn Story
एनिवे, लेट्स कम टू स्टोरी जो एक पल के लिए मुझे कुछ हँसने पल दे गई। बात उन दिनों की है जब मेरे डैडी गुजरात गए थे अपनी बहन से मिलने गए थे। वो 4 दिन बाद लौटने वाले थे। 3 दिन बाद उनका फोन आया कि मैं आ रहा हूँ। तो मैंने मम्मी से कहा कि रात का खाना पापा के साथ खाएँगे।
रात 9 बजे डोर बेल बजी और मेरे छोटे भाई ने दरवाजा खोला तो पापा के साथ मेरी बुआ, उसका लड़का जो साल का होगा और 1 लड़की जो 18 साल की होगी। मैं तो देखता ही रह गया। मैंने बुआ की लड़की को पहली बार देखा था। मैंने बुआ के पैर छुए और रिश्ते में तो (अंकिता) मेरी बुआ की लड़की का नाम।
अंकिता मेरी बहन हुई। तो मम्मी ने कहा कि अंकिता के भी पैर छुओ। तो मैंने उसके भी पैर छुए। फिर हम लोगों ने खाना खाया और मम्मी-बुआ आपस में बातें कर रही थीं लेकिन अंकिता को सोफे पर बैठे ही नींद लग गई। मैं उसे देख रहा था लेकिन मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं था।
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वो बहुत खूबसूरत थी, उसका पूरा जिस्म भरा हुआ था। सुबह सब उठकर अपने काम में लग गए। मुझे भी ऑफिस जाना था तो मैं जल्दी से रेडी हो गया। अंकिता भी उठ चुकी थी और शायद मम्मी की किचन में हेल्प कर रही थी। थोड़ी देर बाद वो चाय लेकर मुझे देने आई।
मैं काफी शर्मीला किस्म का लड़का हूँ और हैंडीकैप होने के कारण मुझे किसी लड़की से बात करना अच्छा नहीं लगता है, ऐसी मेरी सोच है। तो मैंने चाय ले ली। लेकिन वो काफी मिलनसार लड़की थी, एकदम बिंदास। मेरा छोटा भाई तो उससे काफी घुलमिल गया था।
वो काफी हँसी-मजाक भी करते थे। अंकिता हमेशा मुझसे मेरे काम के बारे में पूछती थी। उसे कंप्यूटर का नॉलेज नहीं था तो मुझसे पूछती कि कंप्यूटर पर क्या-क्या होता है। इसी तरह हम थोड़ा-थोड़ा खुलने लगे। एक दिन उसने मुझसे मेरे पैर (लेग) के बारे में पूछा कि कैसे हुआ और कैसा लगता है तुमको जब एक नॉर्मल आदमी को देखते हो तो…
मैंने कोई जवाब नहीं दिया उससे और देता भी क्या। अब अंकिता को हमारे घर में 5 दिन हो चुके थे। मैंने बहुत बार नोटिस किया था कि अंकिता की नजरें मुझे अलग तरह से देखती थीं। सब घरवाले जब साथ होते तो वो मेरे साथ ही ज्यादा बातें करती और मेरे पास ही बैठती थी।
बात उस रात की है जब हम हॉल में टीवी देख रहे थे। तब मैंने नोटिस किया कि अंकिता मुझे आइने (मिरर) में मुझे देख रही थी। मैं सोफे पर बैठा था और वो चेयर पर मुझसे थोड़ा दूर अपने भाई के साथ बैठी थी। जब मैंने उसे मिरर में देखा तो उसने अपनी आँखें मिरर से हटा लीं और अनजान बनने का नाटक कर रही थी।
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लेकिन मुझमें कोई गलत विचार नहीं आया। मैंने सीरियसली नहीं लिया इस बात को। टीवी देखते-देखते मुझे तो पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई। मैं सोफे पर ही सो गया। रात को अचानक मुझे ऐसा फील हुआ कि कोई मेरे बालों (हेयर) में उँगली फेर रहा है और बाल भी खींच रहा है।
मैंने नींद का नाटक करके करवट बदली तो मैं देखता ही रह गया। अंकिता जाग रही थी और ये उसी का हाथ था। वो काफी गरम लग रही थी। मैंने नींद में उसका हाथ पड़कर झटक दिया। उसे लगा कि मैं नींद में ये सब कर रहा हूँ। उसने इस बार मेरे लिप्स पर अपनी उँगलियाँ फेरना शुरू कर दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे भी कुछ होने लगा (मैं भी इंसान हूँ यार, हैंडीकैप हुआ तो क्या हुआ) लेकिन मैंने कंट्रोल किया ये सोचकर कि रिश्ते में तो अंकिता मेरी बहन लगती है। लेकिन इस वक्त वो एक सेक्स की भूखी शेरनी लग रही थी। उसने मुझे बहुत परेशान कर दिया। मेरे इतना इग्नोर करने के बाद भी वो नहीं मान रही थी।
मुझे गुस्सा भी आ रहा था और मेरा दिल भी कर रहा था कि उसे कम्प्रोमाइज करूँ। इस बार मैंने उसका हाथ पकड़कर धीरे से कहा कि, क्या कर रही हो अंकिता? वो जैसे चौंक सी गई और अपनी नजरें झुका ली। फिर मैंने करवट बदली और सोने लगा लेकिन इस बार मुझे लगा कि जब उसे रिश्ते की नहीं पड़ी है तो मैं क्यों बहन-भाई का रिश्ता देख रहा हूँ। और वो भी कोई मेरी सगी बहन थोड़ी है ना।
मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसके गालों पर रखा लेकिन वो कुछ नहीं बोली। इस बार वो सोने का नाटक कर रही थी लेकिन थोड़ी देर में वो अचानक मुझसे लिपट गई। मैंने कहा कि तुम्हारा भाई जाग जाएगा जो कि हॉल में ही सो रहा था (हॉल में हम सिर्फ 3 लोग ही थे) लेकिन वो बोली कि वो रात में नहीं जागता।
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मैंने उसके लिप्स को अपने लिप्स से लगा दिया और चूसने लगा। ये मेरा पहली बार था जब किसी लड़की को मैंने किस किया या छुआ। किस करते-करते मैंने उसके बूब्स पर अपना हाथ रखकर दबाना शुरू कर दिया। मैं काफी गरम हो गया था। मेरी 25 साल की भूख मिट रही थी।
अब मैं बहुत गरम हो चुका था और शायद वो भी। काफी समय तक हम किस करते रहे। रात के करीब 3 बज रहे थे। मैंने अंकिता से कहा कि चलो मेरे बेडरूम में चलते हैं क्योंकि अभी हमारे पास 3 घंटे का टाइम और था और वहाँ कोई डिस्टर्ब भी नहीं करेगा। जैसे ही हम बेडरूम में घुसे, अंकिता ने एक पल में अपने सारे कपड़े उतार दिए।
मैं देखता ही रह गया। उसका गोरा, भरा हुआ बदन, मोटे बूब्स, गुलाबी निप्पल्स, पतली कमर और साफ मुंडी हुई चूत… सब कुछ परफेक्ट था। मैंने भी अपने कपड़े उतारे। अंकिता मेरे पास आई, मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।
मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया। उसके बूब्स मेरे मुँह के सामने थे। मैंने एक ब्रेस्ट मुंह में ले लिया, चूसने लगा, जीभ से निप्पल को चाटने लगा। दूसरा ब्रेस्ट हाथ से मसल रहा था। अंकिता सिर पीछे करके आहें भर रही थी, “आह्ह… पंकज… और चूसो…” मैंने उसे लिटा दिया। अब मैं उसके ऊपर था। उसके दोनों बूब्स को चूसते हुए मैं नीचे उसकी चूत तक पहुँचा।
मेरी उँगलियाँ उसकी चूत पर गईं। वो पहले से ही बहुत गीली थी। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। अंकिता कराह रही थी, “उफ्फ़… हाँ… ऐसे ही… गहरी करो…” मैंने अपनी जीभ भी उसकी चूत पर फेरी, क्लिट को चाटा। वो तड़प उठी। काफी देर तक मैंने उसे फोरप्ले किया… उसके पूरे शरीर को चूमा, चाटा, चूसा। वो बार-बार कह रही थी, “पंकज… अब मत सताओ… अंदर डाल दो…”
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फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया… मेरा लंड उसकी चूत से टकरा रहा था। बाद में मैंने उसे सीधा लिटाया। अब मैं बेकरार था उसकी चूत में डालने को। मेरा लंड एक गरम रॉड की तरह खड़ा था। मैंने देर न करते हुए लंड को धीरे उसकी चूत में डालना शुरू किया। वो बहुत बुरी तरह तड़प रही थी। मेरा भी पहला एक्सपीरियंस था। क्या बताऊ दोस्तों, मुझे सारे जहाँ की खुशियाँ मिल गई हों ऐसा लग रहा था। फिर मैं धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाकर उसे चोदने लगा। उसके बाद हम बहुत सारे पोजीशन में अलग-अलग तरह से चुदाई की। फिर फ्रेश होकर फिर से हॉल में सोने चले आए।
सुबह मैंने मौका देखकर उससे बात की और कहा कि थैंक्स अंकिता, कल रात जो तुमने मुझे मेरी जिंदगी के जो कुछ हसीन पल दिए हैं वो मैं कभी नहीं भूलूँगा क्योंकि मैं एक हैंडीकैप (अपंग) लड़का हूँ, मेरे साथ कौन इतना सब करेगा… थैंक्स। उसने मुस्कुराकर कहा कि कभी अपने आप को हैंडीकैप नहीं समझना। रात में मुझे ऐसा कुछ भी फील नहीं हुआ कि तुम हैंडीकैप हो। तुम किसी भी लड़की को संतुष्ट कर सको हो। बाकी भगवान की मर्जी के आगे किसकी चलती है। उसके ये दो शब्दों ने मुझे जीने की नई राह दिखाई है।
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