First Foursome Chudai XXX
हाय फ्रेंड्स, मैं विक्की गोरखपुर से हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। यह बात आज से 12 साल पहले की है, जब मैं 18 साल का था। मेरे बगल में एक पंजाबी परिवार रहता था। उनकी फैमिली में अंकल, उनकी मिसेज़ और उनकी एक बेटी रहती थी, जिसका नाम प्रीति था। उस समय उसकी उम्र करीब 21 साल की थी। First Foursome Chudai XXX
उनके घर में कोई लड़का नहीं था, इसलिए अगर उन्हें बाज़ार से कोई सामान मँगवाना होता था तो वे मुझे बुला लेती थीं और मैं ले आता था। वैसे तो मैं उनके घर ज्यादा नहीं जाता था, लेकिन सामान देने चला जाता था। उनकी लड़की प्रीति मुझसे ज्यादा बात नहीं करती थी, लेकिन जब उसे कोई काम होता था तो बुला लेती थी।
उसका फिगर 32-28-34 था। लेकिन उस समय मुझे सेक्स की कोई जानकारी नहीं थी। मैं एकदम अनजान था। एक दिन उसके मम्मी और पापा किसी की शादी में पंजाब चले गए और मेरे घर में बोल गए कि प्रीति का एग्ज़ाम है, तो थोड़ा ख़याल रखना और मुझसे बोला कि उसकी मदद कर देना अगर उसे किसी चीज़ की ज़रूरत लगे तो ला देना। मैंने कहा ठीक है और वो लोग चले गए।
शाम को करीब 4 बजे का समय था। मैं बाहर जा रहा था तो प्रीति ने मुझसे कहा, “कहीं जा रहे हो?”
मैंने कहा, “हाँ।”
वो बोली, “मेरे लिए ब्रेड और बटर ला देना।”
मैंने कहा, “मैं देर में आऊँगा।”
वो बोली, “मुझे कल के लिए चाहिए।”
मैंने कहा, “ठीक है।” और पैसे लेकर चला गया।
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मैं करीब 8 बजे आया और घर में मम्मी से बोला, “मैं प्रीति को सामान देकर आता हूँ।”
मम्मी बोलीं, “उसके लिए खाना लेते जाओ।”
मैंने कहा, “दे दो।” और खाना लेकर उसके घर गया।
जब मैं उसके घर में एंटर हुआ तो हॉल में वो नहीं दिखी। मैं उसे देखते हुए उसके रूम में गया तो मैंने देखा वहाँ उसकी दो फ्रेंड्स थीं। एक का नाम था रिम्पी और दूसरी का पम्मी। दोनों फ्रेंड्स बहुत सेक्सी थीं, बिल्कुल एक जैसी ही थीं — गोरी, मस्त फिगर, लंबे बाल, गोल-गोल चूचियाँ और गोल गांड।
मैं रूम में गया और बोला, “प्रीति, खाना ले लो और खाकर टिफिन हमें दे दो।”
वो बोली, “तुम रुक जाओ, मैं खा लेती हूँ, तब ले जाना।”
उसने चट से मेरे घर में बोल दिया कि मैं टीवी देख रहा हूँ और वो खाना खाने लगी। उसकी फ्रेंड्स मूवी देख रही थीं।
मैंने पूछा, “कौन सी मूवी देख रही हो?”
वो बोलीं, “देख लो।”
मैंने कहा, “नाम तो बताओ।”
वो बोलीं, “देख लो।”
उसमें कोई फेमस हीरो नहीं दिखा। तब मैंने देखा कि वो लोग xxx मूवी देख रही थीं।
मैंने कहा, “तुम लोग ऐसी मूवी देख रही हो?”
वो बोलीं, “तो क्या? तुमको पसंद नहीं है?”
मैंने कहा, “ये सब गंदी बात है।”
वो बोलीं, “यहाँ आओ।”
मैंने पूछा, “क्या?”
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तो उन्होंने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया और बोलीं, “तुम्हारे पास भी तो है ये। क्या कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया है तुमने?”
मैंने पूछा, “इसका क्या इस्तेमाल होता है? सिर्फ टॉयलेट करता हूँ और क्या?”
वो बोलीं, “कभी किसी लड़की से सेक्स नहीं किया क्या?”
मैंने पूछा, “वो क्या होता है?”
वो बोलीं, “आओ, तुमको बताते हैं।”
उन लोगों ने मेरा लंड बाहर निकाल लिया और लंड पकड़कर सहलाने लगीं। मेरा लंड एकदम नॉर्मल था। फिर पम्मी ने मेरा लंड पकड़कर चूसना शुरू कर दिया और मेरा हाथ अपने स्तनों पर रख दिया और बोली, “इसे दबाओ।” अब मेरे अंदर एक करंट सा दौड़ गया। मैंने उसकी टी-शर्ट के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर रिम्पी ने अपने कपड़े उतार दिए और एकदम नंगी हो गई और बोली, “मेरी चूत को चाटो।”
मैंने कहा, “ये गंदी बात है।”
तो बोली, “रिम्पी, तुम्हारा लंड भी तो चूस रही है। तुम मेरी चूत को चाटोगे तो मज़ा आएगा।”
मैंने कहा, “ओके।”
और वो लेट गई। मैं उसकी चूत में अपनी जीभ डालने लगा। अब मैं रिम्पी की चूत चाट रहा था और पम्मी मेरा लंड चूस रही थी। फिर प्रीति खाना खाकर रूम में आई तो वो एकदम शॉक हो गई। बोली, “तुम लोग ये क्या कर रही हो?”
तो पम्मी बोली, “यार, घर में इतना कुंवारा लड़का है और हम लोग xxx मूवी देखकर लेस्बियन सेक्स से अपना काम चलाते हैं। तूने पहले इसके बारे में क्यों नहीं बताया?”
वो बोली, “यार, इसको जाने दो, कहीं घर वालों को बता न दे।”
तो रिम्पी बोली, “यार, इसको एक बार चूत का मज़ा तो लेने दे, फिर देख, ये हम लोगों के कितने काम आएगा।”
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वो नाराज़ होने लगी। फिर पम्मी ने उसका हाथ पकड़कर मेरे लंड पर रख दिया और बोली, “देख, ये एकदम कुंवारा है और इसका लंड तो देख, 7.5” इंच का लंड कहाँ मिलेगा? तू और रिम्पी अभी तक वर्जिन हो। आज लंड का मज़ा तो लेकर देख।” और हमको भी लेने दे।
जैसे ही उसने मेरा लंड पकड़ा, वो एकदम मस्त हो गई और मेरा लंड चूसने लगी और बोली, “प्लीज किसी को बोलना मत।” अब मुझे भी मज़ा आने लगा था। फिर पम्मी और रिम्पी ने मिलकर प्रीति के कपड़े उतार दिए। अब तीनों मेरे सामने एकदम नंगी थीं।
रिम्पी और प्रीति मेरे लंड को बारी-बारी से चूस रही थीं और मैं पम्मी की चूत और चूचियों को चूस रहा था। फिर तीनों ने बारी-बारी से मुझसे अपनी चूत चटवाई। करीब 1 घंटे तक चाटने का सिलसिला चलता रहा। फिर पम्मी ने बोला, “आज प्रीति को चोद दे। वो अभी तक वर्जिन है।”
मैं जानता ही नहीं था कि वर्जिन क्या होती है और चोदा कैसे जाता था। पम्मी को एक्सपीरियंस था। वो जैसा बता रही थी, मैं कर रहा था। उसने प्रीति को लिटा दिया और रिम्पी से बोली, “तू आज इसकी चूत चटवा। मैं इन दोनों को चुदवाने में मदद करती हूँ और इसका लंड भी चाट लूँगी पीछे से।”
रिम्पी बेड के ऊपर बैठ गई और प्रीति लेटी हुई थी और पम्मी प्रीति के पैरों के पास बैठ गई। अब पम्मी ने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़ा और प्रीति के पैर फैलाए और बोली, “रिम्पी, तू प्रीति का हाथ पकड़ और उसकी चूचियों को चूस।” और मुझसे बोली, “तो धीरे-धीरे अपना लंड इसकी चूत में डालना, ताकत धीरे-धीरे लगाना।”
और मैं प्रीति के ऊपर आ गया। जैसे ही पम्मी ने मेरा लंड प्रीति की चूत पर रखा, क्या हॉट चूत थी उसकी, उससे पानी निकल रहा था। उसने प्रीति की चूत को अपनी उँगली से फैला दिया और मेरी गांड में हाथ लगाकर धीरे से दबाया। प्रीति चीख पड़ी, “प्लीज इसे हटाओ, मैं मर जाऊँगी।”
अभी मुझे लगा कि मेरे लंड का सुपाड़ा 25% ही गया होगा और वो चीख पड़ी। पम्मी बोली, “थोड़ा दर्द होगा प्रीति, अभी मज़ा आएगा।” वो मुझसे बोली, “तो इसके होंठों पर अपने होंठ रख दे।” मैं उसके होंठ चूसने लगा। 10 मिनट तक रुकने के बाद पम्मी बोली, “थोड़ा ऊपर हो।”
और मैं ऊपर हो गया। अब उसने मेरी गांड को अपने दोनों हाथों से दबा दिया और प्रीति चीख पड़ी, “प्लीज अब नहीं, मैं मर जाऊँगी।” मेरा 50% लंड उसकी चूत में चला गया और मैं फुल मूड में आ चुका था। मैं प्रीति की चीख सुनकर बिना ही धक्के मारता जा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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वो चिल्ला रही थी और उसकी चूत से ब्लीडिंग होती जा रही थी। पम्मी मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं अब झड़ने वाला था तो मैं रुका ही नहीं और धक्के मारता रहा और प्रीति चीखती जा रही थी, “प्लीज पम्मी, इसे हटा, मेरी जान निकली जा रही है।”
पम्मी ने मुझे धक्का देकर किनारे कर दिया और बोली, “चल आ, अब मुझे दिखा अपनी गर्मी। मैं भी तुझ जैसे लंबे लंड से चुदवाने के लिए तरस रही हूँ। इस कुंवारी लड़की की चूत का तो तूने भर्ता बना डाला। मेरी चूत को फाड़ कर दिखा।” मैंने उसको पकड़ा और लंड उसकी चूत पर रखकर धक्का मारा कि वो भी चीख पड़ी, “प्लीज थोड़ा धीरे।”
मैंने कहा, “अभी तो बहुत डायलॉग मार रही थी, अब क्या हो गया तुमको?”
वो बोली, “अब और अंदर मत करना।”
मेरा 50% लंड उसकी भी चूत में जा चुका था। तब मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा। वो चीखी, “ओई माँ, मर गई।” और उसकी भी चूत से थोड़ी सी ब्लीडिंग होने लगी। उन दोनों को देखकर रिम्पी बाहर भाग गई और उसने लॉक कर लिया। अब मैं पम्मी को चोदता रहा।
वो भी चिल्लाती जा रही थी लेकिन तब तक प्रीति नॉर्मल हो चुकी थी और वो बोली, “एक बार हमको फिर से चोद दो। इसको रेस्ट करने दो। ये तो मर गई। अब मुझे पूरा मज़ा लेने दो। पम्मी को छोड़ दो। ये तो मज़ा कई बार ले चुकी है।” मैंने प्रीति को पकड़ा और एक ही शॉट में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया।
वो इस बार रो पड़ी। उसकी आँखों से आँसू निकल आए और तड़पने लगी। पम्मी उसके पैर पकड़ने लगी और मैंने उसके हाथ पकड़ लिए और मैं ज़ोर-ज़ोर से उसको चोदने लगा। वो रोती जा रही थी और मैं चोदता जा रहा था। थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हो गई और अब गांड उठाकर मेरा साथ देने लगी।
मैं अब पूरी तरह से गरम हो चुका था। तभी मुझे ऐसा लगा जैसे प्रीति का पूरा बदन एकदम टाइट होने लगा। उसको देखकर मुझे भी लगा जैसे मेरा बदन भी टाइट हो रहा है और मेरा लंड अपना पानी छोड़ने लगा और शायद तभी प्रीति भी झड़ रही थी।
मैं प्रीति के ऊपर से हटा और उसके बगल में लेट गया। तभी पम्मी मेरे लंड को अपनी जीभ से साफ करने लगी और बोली, “आओ मेरे विक्की, मेरी चूत की गर्मी भी शांत कर दो।” और उसने मेरा लंड चाट-चाटकर फिर से खड़ा कर दिया। अब मैं उसको चोदने लगा। अब प्रीति मेरी गांड अपनी जीभ से चाट रही थी।
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तभी मैंने पम्मी की चूत पर लंड रखकर एक ज़ोरदार धक्का मारा कि पम्मी उछल पड़ी। तभी प्रीति ने उसकी टांगें पकड़ ली और बोली, “विक्की, अब इसको इतना चोद कि ये मर जाए। इसको भी तो पता चले कि मैं कैसे चटपटा रही थी। इसको मुझसे भी ज़ोर-ज़ोर से चोदना।”
उन दोनों की चुदाई देखकर रिम्पी दूसरे रूम में चली गई और उसने लॉक कर लिया। अब मैं फिर से पूरी तरह गरम हो चुका था और पम्मी को ज़ोर-ज़ोर से चोदता जा रहा था। अब पम्मी का जिस्म भी टाइट होता जा रहा था और मैं भी झड़ने वाला था।
तभी प्रीति रिम्पी के रूम में दूसरे दरवाज़े से घुस गई और उसका हाथ पकड़कर उसको बुला लाई और बोली, “अब हम दोनों को चुदवाया है तुमने। तुम कैसे बच पाओगी? और अब तो वो २ बार झड़ चुका है। अब ज़्यादा दर्द होगा तेरे को। सारी गर्मी तो उसने मेरे साथ निकाल दी। बची हुई पम्मी ने निकाल दी। अब तो बस वो तेरे को मज़ा ही देगा।”
वो रेडी हो गई और जैसे ही वो रूम में आई, मैं झड़ने ही वाला था और पम्मी भी। तभी पम्मी ने मेरा लंड बाहर निकाल दिया और रिम्पी से बोली, “जल्दी से इसको चूस।” और वो लंड को चूसने लगी। मुझे लगा कि अब मैं झड़ जाऊँगा। उसको मुँह में ही मेरा सारा माल निकल जाएगा।
तभी मैंने पम्मी को पकड़ा और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा और पम्मी भी एकदम टाइट हो गई और मैं भी झड़ने लगा और मेरा सारा माल पम्मी की चूत में समा गया। मैं बेड पर लेटा था और अब रिम्पी मेरा लंड चाट रही थी।
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थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर टाइट हो गया और दोनों ने मिलकर रिम्पी को लिटा दिया और मैं रिम्पी की चूत को चाटने लगा। प्रीति रिम्पी के निप्पल्स चूस रही थी और पम्मी उसके होंठ। अब रिम्पी गांड उठा-उठाकर अपनी चूत मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रही थी।
फिर प्रीति रिम्पी के सिर के पीछे आ गई और अपने होंठ रिम्पी के होंठों पर रख दिए और पम्मी ने रिम्पी के पैर फैला दिए और मैं उसकी चूत पर अपना लंड रखकर धीरे से अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा। तभी रिम्पी के मुँह से आवाज़ आई, “ओईई प्रीति।”
प्रीति ने रिम्पी के हाथ पकड़कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और पम्मी ने कसकर उसके पैर पकड़ लिए और बोली, “चोद इसको साली। चुदाई से डरकर भाग रही थी। इसकी चूत में अपना 7.5 इंच का लंड तो एक बार में ही डालना और इस साली का सारा ब्लड एक बार में निकाल देना।”
और मैं पूरे जोश में आ गया और एक ज़ोरदार शॉट मारा लेकिन उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड पूरा गया ही नहीं और वो चटपटाने लगी जैसे कोई मछली बिना पानी के तड़पती है। उसकी चूत से ब्लीडिंग होने लगी लेकिन मैं उसको चोदता ही जा रहा था और वो तड़पती जा रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसको करीब 35 मिनट तक मैं चोदता रहा बिना रुके। वो तो जैसे मर ही गई थी, जैसे उसके अंदर जान ही नहीं बची हो। प्रीति ने उसके होंठों से अपने होंठ हटा लिए और अब मैं उसकी चूचियों को अपनी जीभ से सहलाने लगा और पम्मी उसकी चूत को सहला रही थी।
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अब शायद उसका दर्द कुछ कम हो गया था और वो नॉर्मल हो रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने जैसे ही एक और धक्का मारा, वो उछल पड़ी क्योंकि अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था और उसकी ब्लीडिंग अब बंद हो चुकी थी लेकिन अब वो मज़ा ले रही थी। फिर मैंने अपनी स्पीड तेज़ कर दी और हम सब लोग एक-दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। एक बार फिर मेरा जिस्म टाइट होने लगा और रिम्पी भी झड़ने लगी थी और मैं भी उसके साथ झड़ गया। फिर हम सब लोगों ने साथ में नंगे होकर नहाया और अब करीब 11:30 हो चुका था।
मैंने कहा, “अब मैं जाता हूँ।” वो बोली, “कल आओगे?” मैंने कहा, “ओके।” वो बोली, “जल्दी आना।” मैंने कहा, “11 बजे आ जाऊँगा।” वो बोली, “किसी को बताना मत।” मैंने कहा, “अगर डेली ऐसे ही मज़ा दोगी तो क्यों बताऊँगा?” वो बोली, “ओके।” फिर मैं घर आ गया। और उसके बाद पूरे 9 दिनों में मैंने उन तीनों को कितनी बार चोदा होगा, मुझे याद नहीं। उन लोगों को जब भी मौका लगता, वो तीनों एक साथ सेक्स करवाती थीं। लेकिन अब तीनों की शादी हो चुकी है, लेकिन वो जब भी लखनऊ आती हैं, मेरे साथ सेक्स ज़रूर करती हैं।
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