Desi School Teacher Chudai Story
मैं शाहिना हूँ, 35 साल की हूँ, ओरंगी टाउन में रहती हूँ। मैं एक सरकारी स्कूल की टीचर हूँ। मैं एक तलाकशुदा औरत हूँ। यह आज से 3 महीने पहले की बात है। जब हमारे स्कूल में सरकार ने एक स्कूल और बनवाया था। वहाँ स्कूल की शुरुआत आज से तक़रीबन 7 महीने पहले हुई थी। वहाँ का इंजीनियर और ठेकेदार दोनों एक ही था। Desi School Teacher Chudai Story
उसका नाम शाकिर है। उसकी उम्र लगभग 25 साल है। वह बहुत हैंडसम और गुड लुकिंग लड़का है। हुआ कुछ यूं था कि उनका सारा सीमेंट, स्टील बार, सारे औज़ार वग़ैरह वहीं हमारे स्कूल में रखे हुए थे। और वह आफ्टरनून में हमारे ऑफिस में अकेला बैठता था।
हमारी प्रिंसिपल हमारे स्टाफ रूम में बैठ जाया करती थीं। वह देखने में ऐसा है जैसे उसे कुछ पता नहीं। वह हम सब टीचर्स की बहुत इज़्ज़त करता था। आते-जाते सलाम करना, खैरियत वग़ैरह का पूछना, यह सब वह करता था। एक दिन 12:00 बजे के टाइम पर स्कूल के बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी।
तो वह फोन पर किसी आदमी या लड़के से बात कर रहा था कि यार यहाँ किसी टीचर का खांचा वांचा मिल जाए तो मज़ा आ जाएगा। थोड़े बहुत उसे पैसे वग़ैरह दे देंगे और काम उतार लेंगे। यहीं स्कूल में लाकर। यह सब मैं दीवार के साथ लगकर चोरी-चोरी सुन रही थी।
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उसकी बातों से मेरे जिस्म में करंट सा दौड़ गया। इतने में मेरी मैडम ने मुझे आवाज़ लगाई घर चलने के लिए। मैं बेताब होकर वहाँ से उसे सलाम करती हुई चली गई और उसे बार-बार पलट-पलट कर अपनी तरफ ध्यान दिलवाया कि मेरे जाँ मैं भूखी हूँ। मैं दिल ही दिल में बोलती हुई चली गई।
एक दिन मैं उसे चाय का पूछने चली गई। हाथ में अपना पर्स लेकर उसके रूम को नॉक किया और उससे चाय का पूछा तो उसने नो थैंक्स कर दिया। मुझे उसे देखने का बहुत दिल कर रहा था। मैंने अपना पर्स जानते-बूझते नीचे गिरा दिया और मेरा दुपट्टा सिर्फ एक ही शोल्डर पर डाला हुआ था।
जब मैं अपना पर्स नीचे उठाने झुकी तो उसे देखती हुई झुकी। वह भी मुझे देख रहा था। उसकी नज़र मेरे मिल्क शेक पर पड़ी। जैसे ही मैंने उसे देखा उसने अपनी नज़र फौरन हटा ली और मैं पर्स उठाकर मुस्कुराती हुई चली गई। मैं उसे अपनी तरफ मग्न करना चाहती थी और जहाँ तक मेरा ख़याल था वह भी मुझमें इंटरेस्ट लेने लगा।
मैं आए दिन कोई न कोई बहाना बनाकर अंदर चली जाती थी क्योंकि मेरी अलमारी मैडम के रूम में थी और उस बहाने से आए दिन कुछ न कुछ नीचे गिराकर उसे अपनी मोटी-मोटी सीने की गोलियाँ दिखाती थी। एक दिन ऐसा ही हुआ कि मैं नीचे झुकी तो उसकी पैंट ऊपर से गीली हो गई थी मनी की वजह से। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरी नज़र उसकी पैंट पर पड़ी तो उसने बहाने से अपनी गीली पैंट की जगह पर हाथ रख लिया और मैं मुस्कुराती हुई। उसके दूसरे दिन मैंने बहाने से उसका फोन नंबर माँगा और कहा कि मुझे अपना घर की आरसीसी छत डलवानी है। उसने अपना कार्ड दे दिया और मैंने उसे दूसरे दिन पीसीओ से कॉल करना शुरू कर दिया।
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मैं उसे कॉल कर कर के उससे दोस्ती का कहा तो उसने दोस्ती कर ली। फिर हमारी बात तक़रीबन 3 महीने तक फोन पर होती रही। हालाँकि मेरे पीसीओ पर पैसा बहुत बर्बाद हुआ मगर मुझे अपनी चूत की खुजली मिटानी थी इसलिए करना पड़ा। एक दिन मैंने उसे फोन कर के कहा कि मैंने आपसे मिलना है.
तो वह राज़ी हो गया और मैंने उसे ओरंगी टाउन 10 नंबर के स्टॉप पर बुलवाया और मैंने उसे अपनी ड्रेसिंग बता दी। दूसरे दिन मैं उससे मिलने के लिए गई। मैं उसे जानती थी उसकी कार भी इसलिए मैंने उसे अपना ग़लत हुलिया बताया था क्योंकि जैसे ही वह अपनी कार बस स्टॉप पर रोकता और मैं खुद ही बैठ जाती और ऐसा ही हुआ।
वह आया उसने कार रोकी इधर-उधर देख ही रहा था कि मैंने फौरन कार का दरवाज़ा ओपन करके अंदर बैठ गई। वह मुझे देखकर चौंक गया और कहा टीचर आप। मैंने कहा हाँ मैं आप कार चलाओ रास्ते में बताएँगी। उसने कार चलाइ। फिर मैंने उसे बताया कि मैंने उस दिन आपकी फोन पर बातें सुन ली थीं आप अपने फ्रेंड से क्या बात कर रहे थे।
उसने कहा कि आपका कहने का क्या मतलब है। मैंने भी कह दिया मतलब साफ है मुझे आप तुम से अपना काम उतरवाना है। वह एकदम घबरा गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा घबराओ मत तुम्हें कुछ नहीं होगा। वह मुझे लॉन्ग ड्राइव पर ले गया। पूरे रास्ते हमारी बात होती रही।
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मैं उसे देख-देख कर गर्म हो रही थी। दिल चाह रहा था अभी अपने कपड़े उतारूँ और उसकी पैंट से उसका लंड निकालकर अपनी चूत में डाल लूँ मगर मैं मजबूर थी क्योंकि हम कार में थे। वैसे तो उसकी कार के ब्लैक शीशे थे मगर फ्रंट से सब दिखता। फिर भी मैंने उसके जिस्म पर थोड़ा बहुत हाथ फेरा था।
तक़रीबन हाफ़ आवर ड्राइव के बाद उसने मुझे छोड़ा। मैंने उसे 2 दिन बाद का टाइम दे दिया था क्योंकि मेरे 2 बच्चे थे बस और मैं अकेली ही रहती हूँ। मैंने सैटरडे वाले दिन अपने बच्चों को अपनी अम्मी के यहाँ छोड़ दिया और रात को मैं भी वहीं रुक गई थी।
संडे को मैंने अम्मी को कहा कि मैं मैडम के घर काम से जा रही हूँ 7 या 8 बजे तक आऊँगी। मैंने उसे संडे का सुबह 10 बजे बुलाया था मगर वह ठीक 11 बजे के दरमियान बस स्टॉप पर पहुँच गया। मैं उसे स्टॉप पर रिसीव करने गई और सुबह इतने लोग बाहर नहीं निकलते ख़ास कर संडे को।
मैं उसे पिक करके अपने घर लाई और उससे पानी का पूछा तो उसने कहा कि अब पानी की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आज मैं मिल्क शेक पियूँगा और उसने मुझे सोफे पर ही अपनी बाहों में खींचकर किस की बौछार कर दी और मैं भी पागलों की तरह उस पर टूट पड़ी क्योंकि मैं 3 साल से प्यासी थी। मुझे कोई मिला ही नहीं था।
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तक़रीबन 10 या 12 मिनट तक हमने एक-दूसरे की किस ली। उसके बाद मैंने उसकी शर्ट उतारी और उसकी पैंट भी उतारी। वह सिर्फ बनियान पहने हुए था बाक़ी फुल न्यूड था। मैंने भी उसे बिल्कुल हिला दिया। अपनी क़मीज़ उतारी। जैसे ही मैंने क़मीज़ उतारी मेरे दूध ब्रेज़ियर के अंदर झटका खाकर हिलने लगे।
उसने फौरन मुझे अपनी तरफ खींचा। मैंने उसे कहा जानी इतनी जल्दी भी क्या है अब यह सब तुम्हारा ही है मगर मुझे अपना ब्रेज़ियर और शलवार तो उतारने दो फिर कुछ भी कर लेना। मैंने अपना फुल क्लोथ उतारे और बेड पर जाकर लेट गई। वह भी मेरे पीछे-पीछे आ गया और मेरे मिल्क शेक पर पागलों की तरह टूट पड़ा।
उसका मेरे दूध के निप्पल पर किस करने का स्टाइल ही अलग था। ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान का सब से बड़ा प्लेबॉय हो। वाक़ई में मज़ा आ रहा था और मेरी आवाज़ें पूरे रूम में गूँजने लगीं ईईई सीईई आह्ह्ह्ह। मैं उसे अपनी बाहों में भिंच चुकी थी और उसके सर के बालों को ज़ोर से जकड़ा हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके बाद वह मेरे जिस्म पर किस करता हुआ मेरी चूत के लबों को खोलकर तक़रीबन 10 मिनट तक किसें की। मेरी जान निकली जा रही थी। मेरी आवाज़ें पूरे रूम में गूँज रही थीं आह्ह्ह्ह ओईईई माँ मर गए मर ददा रे मगर मैं किस करने में इतना मगन था कि मेरी चूत से पानी आना शुरू हो गया।
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वह सब पी गया। फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और अपना 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड मेरी चूत में डाला। मेरी चूत उस वक़्त ऐसी थी जैसे कि नया डब्बा क्योंकि 3 साल से प्यासी थी। जैसे ही उसने डाला मेरी चीखें पूरे रूम में गूँज उठीं और मैं मज़े लेने में मस्त थी और वह मुझे कभी घोड़ी बनाकर कभी सीधा लिटाकर तक़रीबन 15 मिनट की चुदाई में मैं 2 बार फ्री हो चुकी थी। आख़िरकार मेरा भी टाइम पूरा हुआ और मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। मेरी चूत ने उसका लंड अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया.
और मैंने उसे अपने ऊपर से हटाकर उसका लोहे की रॉड को अपने मुँह में लेकर उसे भी फ्री कर दिया। मैंने उसकी सारी मनी को अपने माउथ में लेकर फ्री करके पी लिया। पूरे दिन मैं रात 8 बजे तक मैंने 18 या 19 बार चुदवाया। फिर मैंने वीक में एक बार चुदवाती थी। उस लड़के जैसा मज़ा मैंने आज तक अपने हसबैंड से नहीं पाया था। जैसे उसने मुझे सारी ज़िंदगी का मज़ा दिया एक ही पल में। जब से मेरी मॉम मेरे घर में आई हैं तब से मैंने उसे चुदवाना बंद कर दिया है।
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