Desi Horny Widow Chudai
ये कहानी मेरे दोस्त नितेश की माँ की है, जिसने पहले अपने परिवार के लिए और फिर अपने बेटे के लिए पराए मर्दों के बिस्तर पर अपनी जिंदगी गुजार दी। कहानी एक साल पहले की है, जब मैं कॉलेज की छुट्टियों में नितेश के घर गया था। नितेश की माँ आनंद की एक कंपनी के क्वार्टर में रहती है और उसके पिताजी नितेश के बचपन में गुजर गए थे। Desi Horny Widow Chudai
हम उस दिन शाम को 7 बजे उसके घर पहुँचे। जैसे ही हम उसके घर के अंदर गए, मैंने वहाँ एक कमाल की औरत देखी। उसकी हाइट 5’3″ होगी और उसका फिगर करीब 38-30-36 का होगा। उसने लाइट ब्लू साड़ी पहनी थी और नीचे ब्लैक ब्लाउज पहना था, जिसमें से उसकी व्हाइट ब्रा साफ दिखाई दे रही थी।
उसके पूरे बदन पर कहीं भी चर्बी जमा हुआ नहीं था। वो गोरी थी और उसके बदन पर एक भी दाग नहीं था। वो नितेश की माँ निर्मला थी। उन्होंने हमें खाट पर बैठने को कहा और पानी दिया। उसके बाद हम फ्रेश हुए और घूमने चले गए। रात को करीब 9 बजे आकर खाना खाया और फिर छत पर जाकर बातें करने लगे।
जब हम नीचे आए तो देखा कि नितेश की माँ ने बिस्तर लगा दिया था। उनका क्वार्टर छोटा था, इसलिए वहाँ सिर्फ एक ही कमरा था। वहाँ पर एक ही खाट था, इसलिए उन्होंने मेरा बिस्तर ऊपर लगाया था और उन दोनों का नीचे था। मैंने अपने कपड़े चेंज किए और खाट पर लेट गया।
उसके बाद नितेश की माँ ने खिड़की-दरवाजे बंद किए और हमारे सामने ही अपनी साड़ी उतार दी। उसके बाद उन्होंने ब्लाउज को उतारना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी ब्लाउज उतार दी और ऐसे ही वहाँ का बचा हुआ काम करने लगी। उनको इस हालत में देखकर मेरी हालत खराब हो गई।
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उसके बाद उन्होंने मेरी ओर अपनी पीठ करके अपनी ब्रा उतार दी और दूसरी ब्लाउज पहन ली और वो लाइट बंद करके नितेश के पास सो गई। मैं उस दिन थका हुआ था और मुझे नींद आ गई। थोड़ी देर के बाद मेरी नींद खुल गई। मुझे किसी के सिसकने की आवाज सुनाई दी। मैंने नीचे देखा तो वहाँ का नजारा देखकर चौंक गया।
नितेश उसकी माँ को चूम रहा था। उसकी माँ की ब्लाउज खुली हुई थी और नितेश उसकी माँ की चुचियों को जोर-जोर से दबा रहा था, जिससे उसकी माँ सिसक रही थी। तभी नितेश थोड़ा नीचे की ओर बढ़ा और अपनी माँ की चुचियों पर टूट पड़ा। ऐसा लग रहा था जैसे कई दिनों से भूखा हो और शायद वो सचमुच भूखा था। उसने एक महीने से अपनी माँ को चोदा नहीं था।
मैंने पहली बार किसी औरत को अपने बेटे के साथ इस तरह देखा था। नितेश की माँ भी गरम हो चुकी थी और जोर-जोर से आवाज करने लगी। नितेश ने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा। थोड़ी देर के बाद उसने अपनी माँ को दबी हुई आवाज में कहा कि “मेरी प्यारी रानी थोड़ा कंट्रोल कर, वो उठ जाएगा।”
तो उसकी माँ ने कहा कि कंट्रोल नहीं हो रहा है, कई दिनों से प्यासी हूँ, जल्दी करो। उसके बाद नितेश ने अपना हाथ उसकी माँ के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और उनके चूतड़ मसलने लगा। वो अपनी माँ के गले के पास जोर-जोर से चूम रहा था। उसकी माँ ने नितेश को कस के अपनी बाहों में जकड़ लिया था और नितेश के सिर में हाथ डालकर नितेश को डायरेक्ट कर रही थी।
तभी नितेश ने उसकी माँ की पैंटी उतार दी और उसकी माँ की चूत में उँगली डालकर चूत को टटोलने लगा। वो दोनों इसी तरह एक-दूसरे को चूमते रहे और फिर नितेश उसकी माँ के पैरों के बीच में आ गया। उसने पेटीकोट को ऊपर उठाया और उनकी चूत को चाटने लगा। नितेश ने अपनी माँ की दोनों चुचियों को अपने हाथ में ले लिया और उनकी चूत को चाटते हुए जोर-जोर से दबाने लगा।
उसकी माँ भी नितेश के सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी और अपने चूतड़ उठा-उठाकर नितेश की जीभ को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। थोड़ी देर के बाद नितेश की माँ ने कहा, “अबे मादरचोद, अब जल्दी मेरी चूत में अपना लंड डालकर मेरी प्यास बुझा।”
उनकी बात सुनकर नितेश ने उसकी माँ के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार दिया। फिर वो उसकी माँ की चुचियों पर बैठ गया और उसकी माँ के मुँह में लंड डाल दिया। करीब 5 मिनट के बाद नितेश ने अपना लंड निकाला और उसकी माँ के बगल में लेट गया। नितेश ने अपना लंड उसकी माँ के हाथ में दे दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उसकी माँ ने नितेश के लंड को अपनी चूत के दरवाजे पर रखा और नितेश ने धक्का मारकर अपना पूरा लंड अपनी माँ की चूत में पेल दिया। नितेश ने अपनी माँ का पैर अपने पैरों पर खींच लिया और अपनी माँ की चुदाई शुरू कर दी। नितेश एक हाथ से उसकी माँ के पैर को सहला रहा था। उसकी माँ भी नितेश की कमर को पकड़कर नितेश का लंड अपनी चूत में घुसा रही थी।
दोनों एक साथ अपनी कमर हिलाकर चुदाई का मजा ले रहे थे और मैं लाइव ब्लू फिल्म देख रहा था। दोनों एक-दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे एक-दूसरे को खा जाएंगे। करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद नितेश अपनी माँ के ऊपर आ गया और जोर-जोर से अपनी माँ को चोदने लगा। करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद दोनों एक-दूसरे से लिपट गए और शांत पड़ गए।
दोनों इसी तरह एक-दूसरे से लिपटकर एक-दूसरे के होंठों को चूमते रहे और मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता ही नहीं चला। जब मैं दोबारा उठा तो देखा कि नितेश की माँ उसके ऊपर थी और वो अपनी कमर हिलाकर अपनी चूत मरवा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो नितेश को चोद रही हो। नितेश भी उसे नीचे से पेल रहा था। उसके बाद मैं वापस सो गया।
दूसरे दिन जब मैं सुबह उठा तो देखा कि नितेश की माँ पूरी नंगी सो रही थी और नितेश उनकी चूत में अपना लंड डाले हुए उनकी चुचियों के बीच सिर रखकर सो रहा था। मैं उसकी माँ की खूबसूरती को निहार रहा था, तभी वहाँ कुछ हरकत हुई और मैं वापस अपने खाट पर लेट गया।
नितेश की माँ जग गई थी और वो अपनी वासना से भरी आवाज में नितेश के बालों को सहलाते हुए उठाने लगी। नितेश उठ गया और उसने मेरी ओर देखा। शायद उसे लगा कि मैं सो रहा हूँ और वो उसकी माँ को बाहों में भरकर उनके होंठों को चूमने लगा। उसकी माँ भी उसके होंठ चूमने लगी। दोनों कुछ देर तक ऐसे ही चूमते रहे और फिर उसकी माँ उठ गई।
वो थोड़ी देर तक घर में ऐसे ही नंगी घूमती रही। फिर उसने अपनी नाइटी पहन ली और घर का काम करने लगी। मुझे फिर से नींद आ गई और मैं करीब 8 बजे उठा। उस वक्त भी उसकी माँ ने सिर्फ नाइटी पहन रखी थी और वो खाना बना रही थी। नितेश भी तैयार होकर बैठा हुआ था।
मैं भी नहा-धोकर फ्रेश हो गया। नितेश की माँ को 9:30 को ऑफिस जाना होता है, इसलिए वो तैयार हो रही थी। उन्होंने हम दोनों के सामने ही अपनी पिंक कलर की पैंटी, जो सूखने के लिए रखी थी, उसे अपनी नाइटी को उठाकर पहन ली। उसके बाद उन्होंने उसी तरह अपना पेटीकोट भी पहन लिया। फिर वो पलट गई और अपनी नाइटी निकाल दी। फिर उन्होंने अपनी ब्रा पहनी और वापस हमारी ओर घूम गई।
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वो इसी हालत में खाट के पास आई और वहाँ से अपनी ब्लाउज पहन ली। फिर उन्होंने अपनी साड़ी पहन ली और वो चली गईं। उनके जाने के बाद मैं नितेश के साथ बातें करने लगा। तभी बातों-बातों में मैंने उसे पूछ लिया कि कल रात को तुम अपनी माँ के साथ क्या कर रहे थे।
तो वो चौंक गया और उसने मुझे कहा कि ये बात किसी को मत बताना। फिर उसने कहा कि जब वो छोटा सा था तब उसका बाप गुजर गया। उसके बाद उसकी माँ पैसों के लिए पराए मर्दों के साथ सोना पड़ता था। जब हम यहाँ आए तब से उनको अपनी वासना की प्यास बुझाने के लिए वो अपनी उँगली से काम चलाती थी।
एक दिन रात को मैंने उनको चोद दिया और उस दिन से वो अपनी इज्जत बचाने के लिए घर में ही मेरे लंड से अपनी प्यास बुझाती है। फिर उसने अचानक मेरे पैंट के ऊपर से मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया। उसने मेरे लंड को रगड़ते हुए कहा, “कैसी है मेरी माँ?” मैं उसकी बात सुनकर चौंक गया।
उसने कहा, “शर्मा क्या रहा है, ऐसे मौके बार-बार नहीं मिलते, जी भरकर ऐश कर ले।”
यूँ ही बातों-बातों में कैसे वक्त गुजर गया, कुछ पता ही नहीं चला। 12:30 बज गए, नितेश की माँ वापस घर आ गई। उन्होंने आते ही गर्मी की वजह से अपनी साड़ी उतार दी। वो उसी हालत में मेरे और नितेश के बीच में खाट पर बैठ गई। उन्होंने नितेश को कहा कि आज दो बजे तुम्हें तीन दिन के लिए मैनेजर के साथ मुंबई जाना पड़ेगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर हमने खाना खाया और नितेश अपने कपड़े लेकर मैनेजर के घर चला गया। उस वक्त डेढ़ बज गए थे। फिर नितेश की माँ नीचे बिछे बिस्तर पर सो गई और मैं खाट पर से उनके बदन को निहारने लगा। साँस लेने की वजह से उनकी दोनों चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनका पेटीकोट उन्होंने गर्मी की वजह से घुटनों तक उठा लिया था।
उनकी गोरी टाँगें और ऊपर-नीचे हो रही चुचियों की वजह से मेरा लंड तन गया और मुझे लगा कि क्यों न मैं इस मौके का फायदा उठाऊँ। मैं जाकर उनके दाहिनी ओर जाकर सो गया। मैंने अपना दाया पैर उनके पैरों पर रख दिया और उनकी बाईं चुची को अपने दाए हाथ से दबाने लगा और उनके होंठों को चूम लिया।
वो तुरंत जग गई और उन्होंने मुझे धकेल दिया और मुझे गुस्से में कहा, “ये तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारे दोस्त की माँ हूँ। तुम्हें उम्र का जरा भी लिहाज नहीं।”
तो मैंने उनसे कहा कि जब तुम अपने खुद के बेटे से अपनी चूत मरवा सकती हो तो मैं तो पराया हूँ। तो वो नर्म पड़ गई और मुझे पूछा, “तुम्हें कैसे पता?” तो मैंने उनको वापस नीचे बिछे बिस्तर पर लिटा दिया और वापस उनके पैरों पर पैर डाल दिया और उनकी चुची को हाथ में लेते हुए कहा, “मैंने कल रात तुम माँ-बेटे की पूरी कामलीला देखी है।”
और मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके मुँह में अपनी जीभ डालकर चूमने लगा। उन्होंने इस बार कोई विरोध नहीं किया और वो भी मेरे मुँह में अपनी जीभ डालकर घुमाते हुए मेरे किस का जवाब देने लगी। थोड़ी देर तक इसी तरह चूमने के बाद मैंने अपना सिर हटाया और उनकी ब्लाउज खोल दी।
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उन्होंने भी मुझे पूरा साथ दिया और बैठकर ब्लाउज और ब्रा को अपने से अलग कर दिया। फिर वो बैठे-बैठे ही मेरी बाहों में समा गई, जिससे उनकी दाईं चुची मेरे सीने से दब गई और मैंने अपने बाएँ हाथ से उनकी पीठ पीछे से उनकी बाईं चुची पकड़ ली। मैंने अपना दाया हाथ से उनका पेटीकोट ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर पैंटी खींचकर निकाल दी और उनकी चूत में उँगली डालकर दबाने लगा।
थोड़ी देर तक हम ऐसे ही एक-दूसरे के साथ वासना का खेल खेलते रहे। फिर मैंने उनका पेटीकोट खोल दिया और निकाल दिया। अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी। फिर मैं भी नंगा हो गया। तभी उन्होंने कहा कि 2 बज गए, जल्दी करो, मुझे जाना होगा। और मैंने अपना लंड उनकी चूत में ठूँस दिया।
मैंने करीब दस मिनट तक चोदा और दोनों झड़ गए। फिर उन्होंने मुझे लंबी किस की और वो तैयार होकर चली गई और जाते-जाते कहा कि आज की पूरी रात हम मजे करेंगे। उनके जाने के बाद मैंने एक बार मुठ मारी और मैं ऐसे ही सो गया। दूसरे दिन नितेश के जाने के बाद मैंने उसकी माँ निर्मला को चोदा लेकिन वो ऑफिस चली गई।
उस दिन मैं निर्मला के जाने के बाद मुठ मारकर सो गया। शाम के बजे वो फिर घर लौटी। उसके अंदर आते ही मैंने दरवाजा बंद किया और निर्मला को पीछे से पकड़ लिया और उसे दीवार से सटा दिया। उनका मुँह दीवार की ओर था और उनकी चुचियाँ दीवार से सटकर दब गईं। मेरा लंड उनकी चूतड़ों के बीच था और वो पूरी तरह दीवार से सटी हुई थी।
मैंने उनकी पीठ और कंधों को मुँह में लेकर चूमने-चाटने लगा। तभी उन्होंने कहा, “अरे इतनी जल्दी क्या है? आज तो पूरी रात हमें इसी तरह गुजारनी है।” तो मैंने उनकी दोनों चुचियों को अपने हाथ में ले लिया और निप्पल्स को उँगलियों से दबाने लगा और पीछे से थोड़ी देर तक उनके होंठों को चूमने के बाद कहा, “दोपहर को तो तुम चली गई थी, उसके बाद मैं तुम्हारे जिस्म के मजे लेने के लिए मैंने 4 घंटे इंतजार किया है। अब मैं तुम्हें चोदकर रहूँगा।”
उसके बाद मैंने फिर से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके मुँह में अपनी जीभ डालकर उनके होंठों को चूसने लगा। मैं अपनी जीभ से उनके मुँह को चोद रहा था और उनके चूतड़ों के बीच अपने लंड को दबा-दबाकर रगड़ रहा था। उस वक्त मैंने टी-शर्ट और बर्मुडा पहना था।
मैं उनके गालों और गर्दन को चूमते-चाटते हुए फिर से उनके कंधों तक पहुँच गया। मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा को उनके दाएँ कंधे पर से अपने दाँतों से खींचकर हटा दिया और अपने मुँह में लेकर उनके कंधे को चाट-चाटकर चूसने लगा। उन्होंने अपने हाथ पीछे किए और मेरी कमर पकड़कर अपने चूतड़ों पर दबाने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी।
मैं इसी तरह कुछ देर तक उनके दाएँ कंधे को चूमता-चाटता रहा। उसके बाद उनकी पीठ पर अपनी जीभ घुमाने लगा, जिससे उनकी सिसकारियाँ बढ़ गईं और वो अपने होंठों को काटने लगी। फिर मैं उनके बाएँ कंधे की ओर बढ़ा और पिन खींचकर साड़ी को ब्लाउज से अलग कर दिया, जिससे उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। उसके बाद मैं उनकी ब्लाउज को हटाकर उनके कंधे और गर्दन को चूमने-चाटने लगा।
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मैं और एक्साइट हो गया और उनकी चुचियों को जोर-जोर से मसलने लगा, जिसकी वजह से ब्लाउज की ऊपरी हुक टूट गई। इसलिए मैंने उनकी चुचियाँ छोड़ दी और उनके पेट को सहलाने लगा। तब मुझे पता चला कि उनकी ब्लाउज का नीचे की हुक पहले से खुली हुई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने अपने अँगूठे से उनकी चुचियों को चीड़ने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उनकी चूत की ओर बढ़ाया पर साड़ी की वजह से उनके पेटीकोट में हाथ न घुसा पाया, इसलिए मैंने साड़ी खींचकर पेटीकोट से अलग कर दी। अब उनकी साड़ी उनके जिस्म से अलग होकर नीचे गिर गई।
फिर मैंने अपना हाथ पेटीकोट में डाला और चूत में अपनी उँगलियाँ डाल दी। उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी। मैं कुछ देर तक उनकी चूत को सहलाता रहा। उनकी चूत से चिपचिपा पानी बहने लगा। वो इतनी गरम हो गई कि मुझे धकेलकर मेरी ओर पलटी और मुझसे लिपटकर मेरे होंठ चूमने लगी।
मैंने भी उनको अपनी बाहों में ले लिया और उनका साथ देने लगा। थोड़ी देर के बाद मैं उनको धकेलते हुए खाट तक ले गया और उनको खाट पर डाल दिया। मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनकी छाती को चूमने लगा। फिर मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा खोल दी और उनकी चुचियों को दबा-दबाकर चूसने लगा।
वो मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी पीठ सहलाने लगी तो मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया। उन्होंने तुरंत मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया। मैंने भी अपना हाथ उनके पेटीकोट के अंदर डालकर उनकी चूत सहलाने लगा। फिर उन्होंने कहा, “जल्दी करो, डाल दो तुम्हारे इस लंबे चौड़े लंड को मेरी चूत में और बुझा दो अपनी प्यास।”
मैंने उनके पैरों को फैलाया और उनके बीच आ गया और पेटीकोट को खींचकर उनके चूतड़ों के ऊपर कर दिया और उनकी चूत के दरवाजे पर अपना लंड रख दिया और उनकी चूत में पेल दिया। मैंने उनके पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और धक्के मारना शुरू कर दिया। मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी चुचियाँ पकड़ ली और दोनों को दबाते हुए उनको चोदने लगा।
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उन्होंने भी अपने हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और अपने चूतड़ों को उछाल-उछालकर मेरा साथ देने लगी। मैंने इस पोजीशन में उनको करीब 10 मिनट तक चोदा और फिर मैं उनके ऊपर सोकर चोदने लगा। वो मुझसे लिपट गई और मेरी पीठ को सहलाते हुए मेरा साथ देने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद फिर मैं उनके बगल में लेट गया और उनका पैर अपने पैरों पर खींच लिया और उन्हें चोदने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों ने पानी छोड़ दिया। हम दोनों कुछ देर एक-दूसरे से लिपटे रहे और एक-दूसरे को हल्की-हल्की किस करने लगे।
दोनों थोड़ी देर खाट पर लेटे रहे। फिर वो मुझसे अलग हुई और मेरा लंड चूसकर साफ कर दिया और फिर उन्होंने अपने पेटीकोट से अपनी चूत साफ की और फिर वो खाट पर से उठी और पेटीकोट को अपनी चुचियों पर बाँधकर नहाने चली गई। हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे और मैं भी बाथरूम में गया और उनके साथ नहाने लगा। दोनों ने एक-दूसरे को रगड़-रगड़कर नहलाया और फिर हम थोड़ी देर के बाद वहाँ से निकले। उन्होंने ब्लाउज और पेटीकोट पहना और खाना बनाने लगी। मैं भी उनके पास बैठकर उनके जिस्म से खेलने लगा और वो खाना बनाने लगी।
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