Hot Chudai Story
मेरा नाम पल्लव है और मेरी उम्र 34 साल है। मैंने आईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग करने के बाद कानपुर में अपने परिवार के साथ रह रहा हूँ। पिछले 7 दिनों में स्टोरीज पढ़ने के अलावा कोई और काम नहीं किया। मैं अपनी पहली स्टोरी लिख रहा हूँ। यह स्टोरी एक रियल स्टोरी है, बस नाम में बदलाव किए हैं। याद आया दोस्तों, मैं पहले भी अपनी कहानी हमारी वासना में दे चुका हूँ। आज बहुत दिनों बाद फिर एक सच्चाई बताने का मूड हुआ है तो मैं फिर अपनी बात कह रहा हूँ। Hot Chudai Story
याद तेरी यूँ ही क्यों कर आई नहीं
इस लंड को दिनों से कोई चूत चुदवाई नहीं
तेरे दर पे जब भी आया हूँ आए खुदा
तूने ही इस लंड को चूत दिलवाई है
यारो मेरा मूड उस दिन बहुत खराब था। मुझे चोदने का बहुत मूड था लेकिन मेरी बीबी ने हाथ लगाने से भी मना कर दिया। लेकिन साला लंड बेचैन हुए जा रहा था, संभाले नहीं आ रहा था। करूँ तो क्या करूँ। अपना मोबाइल लेकर बैठ गया। उसी पर अपना मेल चेक कर रहा था। मुझे क्या पता था मेल से भी किस्मत खुल सकती है।
मेरे मेलबॉक्स में एक लड़की की एक कहानी के साथ मेल पड़ी थी। लड़की भी कानपुर की ही थी। उसमें उसने अपनी सेक्स की मंशा को दर्शाते हुए सेक्स संतुष्टि की बात कही थी। मैंने तुरंत पूरी मेल को दो-तीन बार पढ़ा और लगा वास्तव में इस लड़की को सेक्स की संतुष्टि चाहिए।
मैंने उसी मेल आईडी पर रिप्लाई किया तो अगले दिन ही उसने अपने एड्रेस के साथ मिलने की इच्छा जताई। मैं तो पहले से ही बेचैन था। मेरे लंड का बुरा हाल हो रहा था और मैं चोदने के लिए बेकरार हुआ जा रहा था। उसकी मेल पढ़कर मेरे लंड ने अँगड़ाई ली और लगा अब मेरे लंड की प्यास बुझेंगी।
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मैंने उसी दिन उसे मिलने का फैसला कर डाला। यह भी नहीं सोचा कि क्या घटना हो सकती है। कोई फ्रॉड तो नहीं, लेकिन लंड की प्यास कुछ भी नहीं सोचने देती। वो तो प्यासा सागर होती है और कहीं भी लेके जा सकती है। मैंने ऑफिस में तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और निकल लिया उसे मिलने को। दिल जोर से धड़क रहा था। उसके बताए एड्रेस पर पहुँचा, बेल बजाई… कुछ ही पलों में एक सुंदर सी कन्या ने दरवाजा खोला।
“मैं वो आपकी मेल” थोड़ा झिझकते हुए बोला।
उसने कहा, “अंदर आ जाओ, बैठकर बात करेंगे।”
मुझे एकदम उम्मीद नहीं थी कि ऐसा रिप्लाई मिलेगा। मैं अंदर चला गया। देखने में 27-28 साल की सुंदर कन्या थी। हाँ थोड़ी मोटी जरूर थी लेकिन एकदम मस्त। उसके होठों से, चेहरे से मासूमियत टपक रही थी। एक पल में ही चुपा खा जाने को मन कर रहा था।
मैं सपने में ही उसे लिपट गया… कि आवाज आ रही थी। उसके बादन को चूमने लगा। वो अंदर दूसरे कमरे में चली गई। मैं तो उसी के खयालों में डूब गया। वो कुछ ही देर में वापस आ गई। कुछ देर हम यूँ ही बैठे रहे। मुझसे की शांति सही नहीं जा रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उठकर उसके हाथ को पकड़ लिया। वो थोड़ा झिझकी लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। वो भी अंदर से बेचैन थी। झट से लिपट गई। बहुत सुकून आ रहा था पूरे बदन में। सुरसुरी दौड़ गई। हम दोनों ने एक-दूसरे को कसके पकड़ लिया था जैसे बरसों के बिछड़े मिल रहे हों।
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मैंने उसके होठों को किस किया। “एकदम मक्खन जैसे मुलायम थे”। मैं उसकी जीभ को अपने मुंह के अंदर करके चूसने लगा। थोड़ी ही देर में सिसकारियाँ गूँजने लगीं। धड़कनें जोर से चल रही थीं। एक पल हमने अलग होकर एक-दूसरे को देखा और फिर बेताबी से एक-दूसरे को चूसने लगे।
पागल हो रहे थे हम। इधर मैं उसके हालात को समझ चुका था। अब किसी बात का डर मन से निकल गया था। मेरे हाथ उसके बूब्स से खेलने लगे थे। एक हाथ से उसकी चुचियों को दबा रहा था तो दूसरा हाथ उसके सर को पकड़कर होठों को चूसने में मदद कर रहा था। अब बदन पर कपड़े बोझ बने हुए थे।
मैंने उसके कपड़ों को उतारकर फेंकना शुरू कर दिया। उसे भी मस्ती आ रही थी। मैंने उसके हाथों में अपना 6 इंच का मोटा लंड पकड़ा दिया। लंड को पकड़ते ही वो चीख उठी, “कितना मोटा है”। मुझ पर मस्ती छाने लगी। मैंने उसे बाहों में कस लिया। उसके होठों पर अपने होठ रखकर जोर से चूसने लगा।
बहुत ही हॉट थी वो। आज पहली बार अहसास हुआ उसके नर्म होठों का। वो भी मुझे सहयोग कर रही थी। हाथों से उसके बूब्स दबा रहा था और वो मुंह से आवाजें निकाल रही थी… और जोर से… अब तक हम एक-दूसरे को बिना जाने ही सब कुछ जान चुके थे और हमारे बीच की शर्म गायब हो चुकी थी।
इस समय वो मेरी जान और मैं उसका प्रेमी था जो बरसों बाद मिले थे। मस्ती में वो चिल्लाने लगी थी, “पल्लव चोद डालो मेरी चूत प्यासी है…” मैंने उसके दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूस रहा था। वो आँखों को बंद किए मदक आवाजें निकाले जा रही थी जैसे जन्मों की प्यासी हो… हह्ह्ह…
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उसके बूब्स को चूसते हुए आगे उसके पेट, नाभि पर किस लेते हुए उसकी चूत को चूसने लगा था और वो मस्ती में आकर कह रही थी, “खा जाओ मेरी चूत को… पी जा… आआओ…” वो किसी मदहोश जानवर की तरह चिल्ला रही थी। अपने पूरे बदन को तोड़कर दोहरा किए जा रही थी…
“ओओओह…” उसके हाथ मेरे पूरे बदन से लिपटे जा रहे थे। हाँ रंग में मस्ती भर रहे थे। तभी मैंने अपने लंड को उसके मुंह में दिया। उसके मदहोशी का ये आलम था कि वो लंड को लॉलीपॉप की तरह बार-बार मुंह लेकर निकाल रही थी। मैं भी मस्ती में आ गया और खुद उसकी चूत चाटने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हम 69 पोजीशन में थे। मैं अपनी जीभ से उसकी चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। वो चिल्लाए जा रही थी। अचानक उसका टेम्परेचर बढ़ गया था… उसने मुझसे कहा, “अब तुम चूत में घुसाओ, मेरी बरसों की प्यास बुझा दोगे”। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
वो बड़ी सेक्सी आवाज निकालने लगी। मैं भी मस्त हो गया था। मेरे मुंह से भी हॉट बातें निकल रही थीं। “हाँ रानी अपनी चूत को इस लंड के लिए हमेशा खोले रखना… लो मजा… लो रानी…” ऊपर से बोल रहे थे और मैं नीचे से उनका पूरा लौड़ा लेने के लिए जोर लगाते हुए बड़बड़ा रही थी,
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“ओओह मेरे चुदक्कड़ राजा चोद दो… अपनी बिना झंटों वाली इस बुर को और चोदो… फाड़ दो इस साली बुर को…” बड़ी चुदासी हो रही थी… सुबह से… साथ-साथ गिराना… हाँ अब… मैं चुदाई का मजा लेने लगा। नीचे से चूतड़ को उछका-उछका कर चुदाई में भरपूर सहयोग करने लगी।
मन में कई सवाल भी उठ रहे थे लेकिन अभी मन सिर्फ चोदने में लगा हुआ था और हम दोनों एक-दूसरे में समा जाने को बेताब हुए जा रहे थे। “तुम्हारा लंड बड़ा जोरदार है। न जाने कितनी बार चुद चुकी हूँ पर लगता है पहली बार चुद रही हूँ… मारो राजा धक्का… और जोर से… पूरा पेल दो अपना लौड़ा…”
मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था और वो… “मारो राजा और जोर से… थक गए हो तो बताओ मैं ऊपर आकर चोद दूँ… इस भोसड़ी को… ओह अब मैं… ओह राजा तुम भी आ जाओ…” वो नीचे से झड़ने के लिए बेकरार हो रही थी और मैं ऊपर से दना-दन धक्के-पर-धक्के मार रहा था। पूरे कमरे में चुदाई का संगीत बज रहा था।
“मैं तुम्हें इतना मजा दूँगा कि मुझसे चुदे बिना रह ही नहीं पाओगी… चुदाई के लिए सब समय बेकरार रहूँगा… ओह मेरी जान एक बार फिर साथ-साथ झरेंगे… ओह अब तुम भी आ जाओ…” कहते हुए मैं उसकी बुर की गहराई में झर गया और वो भी साथ-साथ खामोश हो गई… मैं उसकी छाती से चिपक गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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कुछ पल तो ऐसा लगा कि उसकी चूत में मेरा लंड को फँसा लिया है। वाह खुदा तेरा करम दिखाई देता है। देर से सही मगर सुनाई देता है। प्यासे को पानी और लंड को चूत देता है देर से सही मगर क्या खूब देता है। दोस्तों हम संतुष्ट होकर अलग हुए तो एक बार फिर आँखों में झाँका। अब एक-दूसरे से दूरी नहीं रही थी। उसने बताया अभी एक साल पहले जनवरी में ही उसकी शादी हुई थी लेकिन जुलाई में ही एक एक्सीडेंट हो जाने से उसके हस्बैंड को चोटें आ गईं। अब वो अच्छे से चल-फिर नहीं सकते और न ही अच्छे से चुदाई कर सकते हैं।
हर बार चोदने की कोशिश तो करते हैं लेकिन बीच रास्ते में ही छोड़ जाते हैं। तो वो हमेशा प्यासी रह जाती है। पिछले 8 महीनों से एक बार भी संतुष्ट नहीं हुई। साथ ही उसने मुझसे ये वादा लिया कि मेरी कोई भी बात कहीं किसी से नहीं कहोगे और न ही मेरी इस सच्चाई को किसी से बताओगे। मैंने भी फिर मिलने के वादे के साथ उसे विदा ली। अब जब भी मन करता है तो मैं उसके पास जाकर अपनी और उसकी प्यास बुझा लेता हूँ और वो भी मुझे अपने हस्बैंड की तरह ही प्यार देती है।
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