Desi Blackmail Chudai
दोपहर का समय था। मैं टीवी देख रही थी। लेकिन मेरा टीवी में भी ध्यान नहीं लग रहा था। आज सुबह से मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी। टीवी देखते-देखते मुझे चक्कर सा आने लगा। मैं वहाँ से उठी और सोचा कि थोड़ा मुँह पर पानी मारूँ तो शायद अच्छा लगेगा। वॉश बेसिन के पास पहुँची कि मुझे उल्टी हो गई। Desi Blackmail Chudai
मैं बहुत ही परेशान हो गई। सोचा कि अंकल को फोन करूँ। और वहाँ से फिर लिविंग रूम में आई। मोबाइल उठाया और फिर सोचा कि शायद अंकल साइट विजिट के लिए गए होंगे तो क्यों उनको तकलीफ दूँ। उससे अच्छा मैं खुद ही डॉक्टर के पास जाऊँ तो वो ठीक रहेगा। यह सोचकर मैं उठी, थोड़ा हल्का सा मेकअप किया।
Wardrobe में से एक ब्लैक कलर की साड़ी और ब्लाउज निकाला। और अंदर व्हाइट कलर की ब्रा और व्हाइट पैंटी पहनकर मिरर में झाँका। वाह क्या खूबसूरत लग रही थी मेरी जवानी। मेरे स्लीवलेस और लो कट ब्लाउज में मेरी बड़ी-बड़ी और सुडौल चुचियाँ बहुत ही मदहोश लग रही थीं, जैसे वो बाहर आने को बेताब थीं।
साड़ी मैंने नाभि के नीचे पहनी थी। वैसे मेरी नाभि आकर्षक होने की वजह से मैं हमेशा साड़ी नाभि के नीचे ही पहनती थी। मैंने थोड़ा सा टर्न किया, मेरी साड़ी मेरे चूतड़ों को एकदम चिपकाकर पहनी थी और मेरे चूतड़ों का अंदाजा उससे साफ आ रहा था। ब्लैक कलर के ब्लाउज के अंदर व्हाइट ब्रा पहनने से किसी का भी ध्यान जल्दी मेरी चुचियों पर जाता था।
फिर मैं घर के बाहर आई और दरवाजा लॉक किया। कार चलाने की ताकत तो मुझमें नहीं थी। वैसे अस्पताल तो हमारे सोसाइटी के आखिरी प्लॉट पर ही था। मैं पैदल चल नहीं सकती थी तो मैंने ऑटो में जाने का फैसला किया। मैं वहाँ ऑटो के लिए रुकी थी कि वहाँ पर हमारे पड़ोस के बंगले वाला लड़का पप्पू बाइक पर आया।
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अठारह साल का लड़का रहेगा वो। उसने मेरी चुचियों को घूरते हुए मुझसे पूछा, ‘आंटी, कहाँ जाना है आपको। कहो तो मैं छोड़ दूँ।’ मैंने उसे कहा, ‘अरे नहीं मैं तो ऑटो के लिए रुकी हूँ क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है।’ तो वो बोला, ‘डोन्ट वरी, आंटी, मैं आपको संभालकर लेके जाऊंगा। यहाँ दोपहर को ऑटो मिलना मुश्किल है।’
कुछ सोचकर फिर मैंने हाँ कर दी और उसकी बाइक पर बैठी। वो बाइक धीरे-धीरे चलाने लगा। बाइक चलाते चलाते वो बार-बार ब्रेक मार रहा था जिससे मेरी चुची उसके पीठ से टकरा रही थी। मैंने उसे पूछा क्यों बार-बार ब्रेक मारते हो। तो वो बोला अरे आंटी क्या करूँ, रोड पर खड्डे इतने ज्यादा हैं।
फिर मैं चुप बैठी। लेकिन मैंने नोटिस किया कभी-कभी वो ऐसे ही ब्रेक मार रहा था। पप्पू का मेरे बेडरूम के सामने ही किचन था। वो हमेशा हमारे घर में झाँकने की कोशिश करता था। बार-बार किचन में पानी पीने के लिए आता था। और मेरा ध्यान जाते ही वो नजरें चुराता था। वैसे वो मुझसे कभी-कभी बाहर बात करता था। लेकिन मेरे घर पर कभी आया नहीं था।
जैसे ही अस्पताल आया उसने कसकर ब्रेक लगाया। मैं सोच में डूबी थी तो मेरा थोड़ा सा बैलेंस गया। मेरी चुचियाँ उसके पीठ से टकराईं और मैं अपने आप को संभालने लगी। मैंने सहारा लेने के लिए उसके थाइज पर हाथ रखा तो उसके तने हुए लंड का मुझे थोड़ा एहसास हुआ। मैंने जल्दी से उतारकर अपना हाथ हटाया। और उसकी ओर देखा।
जींस पैंट में भी उसका तना हुआ लंड समझ में आ रहा था। न जाने उसे लगा कि मेरा बैलेंस जाने की वजह से मैं गुस्सा करूंगी। उसने मुझे सॉरी बोला और शर्म के मारे वहाँ से जल्दी निकल गया। मुझे हँसी आ रही थी कि मैं उसे थैंक्स कहने वाली थी लेकिन वो तो डरकर भाग गया। इस उम्र में ऐसा ही होता है। बेचारा…
मैं अस्पताल के अंदर गई, रिसेप्शनिस्ट को डॉ. राज के बारे में पूछा जो मेरे शौहर के खास दोस्त थे। उसने मुझे बैठाने के लिए कहा और इंटरकॉम पर राज को मेरे आने की सूचना दे दी। दो मिनट में ही मुझे अंदर बुलाया। अंदर उसके कंसल्टेंसी में जाते ही उसने स्माइल के साथ कहा, ‘ओहो ज़रीना, आज यहाँ पर?’ मैंने उसे कहा मेरी तबीयत ठीक नहीं है।
तो उसने मुझे एग्जामिनेशन टेबल पर सोने को कहा और बोला तुमने मुझे बुलाया होता मैं तुम्हारे घर पर आ जाता। मैंने कहा ऐसी कोई बात नहीं है, उतनी ही तकलीफ होती तो जरूर बुलाती। राज बिल्कुल हमारा फैमिली फ्रेंड था। और हम एक दूसरे को नाम से ही पुकारते थे। उसने पूरी तरह से मुझे एग्जामिन किया।
एग्जामिन करते वक्त वो ज्यादातर मेरी चुचियों को ही घूर रहा था। उसने अपने स्टेथोस्कोप से मेरी चुचियाँ दबाईं तब स्टेथो के साथ उसकी उँगलियाँ भी मेरी चुचियों को टच कर रही थीं। मुझे अच्छा लग रहा था। वो बहुत देर तक मेरी चुचियों को इधर-उधर स्टेथो लगाए रहा था।
फिर उसने मेरे राइट हैंड के रिस्ट को पकड़ा और मेरा पल्स रेट चेक कर रहा था तभी मेरी कोहनी को उसके लंड का स्पर्श हो रहा था, मैं चुप बैठी थी। मुझे अंदाजा आ रहा था कि उसका लंड तन रहा था। फिर उसने मुझे उठाने को कहा और अपने लंड को पैंट के अंदर सेट करते हुए कहा, ‘देखो सबसे पहले मैं तुम्हें खुशखबरी दूँ या जावेद को?’
मैं कुछ समझी नहीं तो वो बोला, “कॉन्ग्रेचुलेशंस, तुम माँ बनने वाली हो।” मैं तो जैसे दंग हो गई। मुझे बहुत बड़ा शॉक लगा। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब कैसे और क्यों? क्योंकि जावेद के जाने के बाद केबल वाले से जो गड़बड़ हुई थी उसका रिजल्ट आज आया था। मुझे टेंशन आ गया। मेरा गला सूख गया।
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैंने सब कैसे इतना आसानी से लिया था। इतने में राज ने बोला, रुको मैं जावेद को भी बताता हूँ। और मोबाइल पर नंबर डायल करने लगा। मुझे कुछ सूझा नहीं। मैं एक झटके से वहाँ से उठकर उसके हाथ से मोबाइल छीनने की कोशिश की। मेरा पल्लू नीचे गिर गया।
और मेरे काले ब्लाउज में से मेरी गोरी-गोरी दोनों चुचियाँ उसे दिखने लगीं। वो देखकर एकदम हैरान हो गया। उसने कभी मेरी चुचियाँ ऐसे नहीं देखी थीं। इतनी बड़ी-बड़ी और सुडौल चुचियाँ देखकर उसके मुँह से लार टपकने लगी। मुझे इतना भी ध्यान नहीं था कि मेरा पल्लू गिर गया है।
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मोबाइल को पकड़ के वो मुझे पूछने लगा कि क्या हुआ? तो मैंने उसे कहा कि ये बात मैं ही बताऊंगी। वो मेरी चुचियों को देखे ही जा रहा था और उसने मुझे पूछा क्या तुम जावेद को नहीं बताना चाहती। मैं सुन हो गई, मैंने कहा क्या मतलब। तो वो तुरंत बोला, ‘देखो ज़रीना, जावेद को दुबई जाकर चार महीने हो गए हैं और ये संभव ही नहीं हो सकता कि तुम अभी जावेद के बच्चे की माँ बन जाओ?’
मेरी आँखों से आँसू निकल पड़े। मैं रोने लगी। तो उसने मेरे दोनों हाथ पकड़कर मुझे उठाया और कुर्सी पर बिठाया। फिर बोतल से ग्लास में पानी भरके मेरे हाथ में दिया। और मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोला कि क्या प्रॉब्लम हुआ? मैंने पानी की एक सिप लेकर कहा राज तुम मेरे दोस्त हो। मुझसे बड़ी भूल हो गई है। प्लीज मुझे बचाओ। मैं जावेद को दुख नहीं देना चाहती।
तो उसने कहा चिंता मत करो मैं तुम्हारा एबॉर्शन कर दूँगा। किसी को पता भी नहीं चलेगा। लेकिन मुझे सच बताओ क्या हुआ। मैंने भी उसे हिम्मत करके पूरी हकीकत बताई कि कैसे उस दिन केबल वाले से मेरा संबंध हुआ। कहानी पूरी सुनाने के बाद उसकी आँखों में कुछ चमक आ गई और उसने कहा ठीक है मैं तुम्हारा एबॉर्शन कर दूँगा लेकिन तुम्हें इसके बदले में मेरा एक काम करना होगा।
मैंने उसकी ओर सवाल भरी नजर से देखा तो वो मुस्कुराते हुए बोला। तुम्हें मेरे साथ यही खेल खेलना होगा। मैं दंग हो गई। राज ऐसा करेगा ये मैंने सोचा भी नहीं था। मैंने उसे बहुत रिक्वेस्ट किया कि प्लीज एक बार मेरे हाथ से भूल हो गई है फिर से मुझे वही भूल नहीं करनी। चाहो तो मैं तुम्हें मुंहमाँगा पैसा भी दूंगी।
उसने कहा, ‘सोच लो। तुम्हें अगर ये राज रखना है तो मुझसे चुदवाना ही होगा।’ उसके मुँह से चुदाई की बात सुनकर मैं हैरान हो गई। वो अपनी जिद पर अड़ा था और मेरे पास इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं था। मैं असहाय सी हो गई थी। मैंने असहायता में उसे हाँ कर दी।
तो वो फौरन खुश होकर मेरे पास आया और मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोला कि तुम सच में बहुत ही सेक्सी हो। मैं तुम्हें आजादी दूँगा अगर तुमने मुझे खुश किया तो? मैंने कहा ठीक है और मैंने फौरन उठकर अपना पल्लू नीचे गिराया तो उसने पल्लू पकड़कर मेरे कंधे पर ठीक से रखा और बड़े ही प्यार से मेरी नितंबों को सहलाते बोला-
इधर नहीं, मैं तुम्हें तुम्हारे घर पर आकर चोदूँगा। यहाँ पर बहुत डिस्टर्ब हो जाएगा। तुम एक काम करो मैं अपने घर पर मेरी बीवी को बोलूँगा कि मुझे कॉन्फ्रेंस के लिए जाना है और मैं कार लेकर नहीं जाऊंगा। और मैं सुबह छह बजे ही तुम्हारे घर पर आऊंगा। और रात को थोड़ा लेट जाऊंगा तो सोसाइटी में किसी को शक नहीं होगा।
राज हमारे सोसाइटी में ही रहता था। तो लोगों को कुछ शक हो सकता था। और वो अपनी मैरिटल लाइफ को सेफ रखना चाहता था। ये मेरे लिए भी ठीक था। नहीं तो अननेसेसरी मेरी बदनामी हो सकती थी। क्योंकि हमारे सोसाइटी में सबको मालूम था जावेद दुबई में है और मेरे घर पर बाकी किसी का आना-जाना नहीं था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वहाँ से उठकर मैं बाहर आई, और अपने खयालों में ही घर पहुँच गई। घर का दरवाजा खोलकर अंदर गई। दरवाजा बंद किया और मेरा पर्स टी-पॉय पर फेंककर सोफे पर जाकर गिरी। मुझे बहुत ही रोना आ रहा था। मैं मन में ही सोचने लगी कि ज़रीना तू ये क्या कर रही है। ये तेरे साथ क्या हो रहा है। अगर मुझे पहले ही पता चल जाता तो मैं दूसरे डॉक्टर के पास जाती।
लेकिन मुझे कुछ भी एक्सपीरियंस नहीं था, इसलिए ही पता भी नहीं चला कि प्रेग्नेंसी कैसी होती है। और ऐसा एक बार में ही हो सकता है इसका मुझे एहसास भी नहीं हुआ था। नहीं तो मैं राज के पास क्यों जाती। मैं खुद को बहुत कोस रही थी कि आज ये मेरे ऊपर क्या बीत रही है। राज पर मुझे गुस्सा भी आ रहा था।
वो पूरी तरह से मेरी मजबूरी का फायदा उठाने जा रहा था। मेरी नादानी अब मेरे साथ क्या खेल खेलने वाली थी पता नहीं। सोचते-सोचते मेरी आँख लग गई। जब आँख खुल गई देखा तो रात के दस बज चुके थे। मैं उठी मुँह-हाथ धो लिया और साड़ी उतारकर नाइटी पहन ली। और किचन में आई, खाने को दिल नहीं कर रहा था, फिर भी थोड़ा हल्का खाना खाया और लिविंग रूम में आकर टीवी देखने लगी।
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टीवी देखने को मन नहीं कर रहा था। दिमाग जैसे सोच-सोचकर सुन्न हुआ था। मैं मेरे हबी के बारे में सोचने लगी कि उसको पता चलेगा तो उसको कितना शॉक लगेगा। बेहद प्यार करता है वो मुझसे। घड़ी आगे सरकाने का नाम नहीं ले रही थी। लगभग दो ढाई बजे के आसपास मुझे नींद आ गई और मैं वहीं सोफे पर लेट गई।
सुबह छह बजे डोर बेल बजी और मेरी नींद टूट गई। मैंने जाकर फौरन दरवाजा खोला तो पेपर वाला पेपर देकर चला गया था। मैंने बाथरूम में जाकर ब्रश किया और चाय बनाने के लिए किचन की ओर जा रही थी तो फिर से डोर बेल बजी। मैंने जाकर दरवाजा खोला तो सामने राज मुस्कुराते हुए खड़ा था।
मैं बिना कुछ बोले वहाँ से निकली। उसने अंदर आते ही दरवाजा लॉक किया। और पीछे से आकर मुझे पकड़ा और बोला कि तुम नाराज हो क्या? मैंने कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। तो वो बोला देखो ज़रीना, अगर तुम्हें मेरे साथ खुशी से कुछ करना नहीं है तो मैं जाता हूँ। वो मुझे अलग शब्दों में ब्लैकमेल कर रहा था।
मैंने उसे मनाते हुए कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है actually मैं रात भर तुम्हारे बारे में ही सोचती रही और मैं सो न सकी। वो हँसने लगा शायद वो समझ गया कि मैं झूठ बोल रही हूँ। उसने कहा ज़रीना एक काम करो तुम पहले नहा लो। और फिर दुल्हन की तरह सज-संवरके आना। मैंने कहा ठीक है।
मैं नहाने बाथरूम में गई। मैंने नाइटी उतार फेंकी। फिर मेरी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। शावर ऑन किया, पानी सर पर पड़ते ही मुझे अच्छा लगने लगा। मैं अपने चुचियों पर साबुन मलने लगी और मिरर में देखा। मुझे अपनी सुंदरता पर अब गुस्सा आ रहा था। थोड़ा समय मैं ऐसे ही शावर के नीचे बिना सोचे रुक गई और सिर्फ पानी का फव्वारा अपने बदन पर ले रही थी।
फिर मैंने सोचा कि जाने दे ज़रीना राज क्या करेगा सिर्फ तुझे चोदेगा ही न? तो उसे चोदने दे। नहीं तो भी तेरे हबी के सिवा और दो लोगों ने तुझे चोदा ही है। इससे अच्छा होगा कि राज नाराज न हो जाए और तू भी लुत्फ उठा ले और राज से प्रॉमिस भी करा ले कि वो इस राज को राज ही रखेगा। फिर मैंने शावर बंद किया और तौलिए से अपना बदन पोंछकर नंगी ही बाहर आई।
अब मेरा दिल थोड़ा हल्का सा हो गया। wardrobe से एक नेवी ब्लू कलर की साड़ी निकाली और मैचिंग ब्लाउज भी निकाला। फिर नीचे वाले कपड़ों से एक व्हाइट लेस वाली ब्रा और एक स्काई ब्लू कलर की पैंटी निकाली। फटाफट कपड़े पहन लिए। फिर मेकअप किया और परफ्यूम लगाकर हॉल में गई।
राज वहाँ सोफे पर बैठकर टीवी देख रहा था। मुझे देखकर खुश हुआ और बोला, ‘दैट्स लाइक ए गुड गर्ल। आओ यहाँ बैठो।’ मैं जाकर उसके बाजू में बैठी। तब उसने बोला ब्रेकफास्ट के लिए क्या बनाओगी। मैंने पूछा ऑमलेट और ब्रेड चलेगा। उसने कहा ठीक है। मैं वहाँ से उठकर किचन में चली गई।
मैं हैरान हो रही थी राज कुछ भी नहीं कर रहा था। मैंने नाश्ता बनाकर डाइनिंग टेबल पर रखा और उसे आवाज दी। वो अंदर आया और टेबल पर बैठकर नाश्ता करने लगा। नाश्ता करते वक्त मैं उसे ही देखे जा रही थी। राज एक लंबा-चौड़ा ३५/३६ साल का पंजाबी नौजवान था। करीब ६ फीट के ऊपर हाइट रहेगी।
गोरा चिट्टा और सुनहरे बाल वाला था। बहुत ही आकर्षक पर्सनैलिटी वाला था। आज उसने व्हाइट कलर की टी-शर्ट पहनी थी और उस पर क्रीम कलर का ब्लेजर और ब्लू पैंट पहनी थी। उसने मूँछों के साथ पूरा शेव किया था। बड़ा ही हैंडसम लग रहा था। हमारा नाश्ता खत्म होने के बाद प्लेट उठाकर मैं किचन में गई।
अब मैं कुछ ज्यादा ही परेशान हो रही थी कि अब तक ये कुछ क्यों नहीं कर रहा है। इस वजह से मैं और उत्तेजित हो रही थी। इतने में डोर बेल बजी मैंने थोड़ा ही दरवाजा खोला सामने हमारी कामवाली सरला थी। मैंने उसे वहाँ से ये बोलकर काटा कि मैं अभी बाहर जा रही हूँ तू कल आना। वो भी खुश होकर निकल गई।
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मैं फिर आकर हॉल में बैठी। तब वो मुझसे इधर-उधर की बातें करने लगा। फिर उसने घड़ी में देखा। ग्यारह बज चुके थे। उसने मुझे पूछा कि तुम क्या खाओगी, मटन बिरयानी मँगाऊँ। मैंने हाँ में अपना सिर हिलाया। उसने फौरन मेरा फोन उठाया और पास वाले होटल में फोन करके मटन बिरयानी, कबाब, कुछ स्नैक्स और व्हिस्की एंड सोडा मँगाया।
फोन रखके फिर से वो मेरे साथ बात करने लगा। लेकिन वो मेन टॉपिक के ऊपर नहीं आ रहा था। मेरी बेचैनी और बढ़ रही थी। थोड़ी देर बाद पार्सल आया। मैंने जाकर बिल दिया और वो पार्सल लेकर अंदर आई। व्हिस्की और सोडा टेबल पर रखा और खाना जाकर अंदर ओवन में रख दिया।
राज ने मुझे आवाज देकर दो ग्लास और ठंडे पानी की बोतल लाने को कहा। मैं डर गई ये दूसरा ग्लास क्यों मंगवा रहा है। मेरा दिल धड़क रहा था। राज ने किसी और को तो नहीं बुलाया था। मुझे अब डर लगने लगा था। लेकिन चुपचाप दो ग्लास लाकर टेबल पर रख दिए। और सोफे पर जा बैठी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। उसने दोनों ग्लास में शराब भर दी और सोडा और पानी डालके मेरे हाथ में एक ग्लास देने लगा तो मैंने इंकार करते हुए कहा राज तुम्हें पता है ना कि मैं शराब नहीं पीती। तो वो हँसकर बोला लेकिन आज तो पीना ही पड़ेगा नहीं तो मजा कैसे आएगा। वो मुझपर अलग तरह की जबरदस्ती कर रहा था।
मतलब जबरदस्ती भी कर रहा था और ऊपर से शराफत दिखा रहा था। मैंने ग्लास हाथ में लेकर एक हल्का सा सिप मारा। छी कितनी कड़वी और गंदी चीज थी। मर्द कैसे पीते हैं क्या मालूम। वो आराम से पिए जा रहा था। उसके बाद उसने ब्लेजर उतार दिया और पैर टी-पॉय पर रखके पीने लगा।
फिर मैंने जल्दी वो कड़वी व्हिस्की खत्म करने के लिए एक ही दम में खत्म कर दी। मुझे थोड़ी सी खाँसी आई। वो हँसकर बोला अरे ज़रीना आराम से पियो। इस तरह नहीं पिया जाता। फिर मेरे मना करने के बावजूद उसने मेरे लिए दूसरा पेग बनाया और मेरे हाथ में दिया। मैं आराम से पीने लगी।
मेरे दिमाग पर शराब का असर होना शुरू हुआ था। आज मैं जिंदगी में पहली बार शराब पी रही थी। मेरा पल्लू नीचे खिसक गया था। मुझे पता भी नहीं चल रहा था। मेरे लो कट ब्लाउज से मेरे बूब्स बाहर आने को बेताब हो गए थे। चुदाई की कल्पना दिमाग में जग रही थी। मैं चुदासी भरी नजरों से राज को देखे जा रही थी।
उसने अपना तीसरा पेग खत्म किया लेकिन मेरा दूसरा भी खत्म नहीं हो रहा था। तो उसने कहा लाओ मुझे दे दो, मैं खत्म कराता हूँ। मैं ग्लास हाथ में देने के लिए वहाँ से उठी। मेरा पल्लू नीचे गिर गया था उसी अंदाज में मैं लड़खड़ाते हुए उसके पास गई। मेरा बैलेंस गया और मैं जाकर उसकी गोद में गिरी।
उसने मुझे पकड़कर एक लंबा सा चुम्बन मेरे गाल पर किया और मेरी चुचियों को देखने लगा। और फिर ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी चुचियों को चुमने लगा। जैसे इतनी बड़ी और सुंदर चुचियाँ पहली बार उसके हाथ में थीं। उसकी बीवी की चुचियाँ तो छोटी थीं। पर मेरी चुचियाँ हाथ में लेकर मानो उसको खजाना मिल गया था।
वो ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को मसने लगा। उसके लंड ने अब हरकत शुरू कर दी थी। मैं नशे में चूर हो गई थी। वासना का तूफान मेरे अंदर आ चुका था। तब उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। उसने मेरा ब्लाउज उतारा और व्हाइट लेस वाली ब्रा में मेरी कसी हुई मोटी चुचियाँ देखकर वो पागल हो गया।
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और फिर एक बार वो ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुचियाँ चूसने लगा। उसका लंड मेरी पीठ को धक्के मारने लगा। मैं उसका लंड देखने के लिए बेताब थी। उसने ब्रा के ऊपर से ही मेरे निप्पल्स पर दाँत गड़ा दिए। मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था, पर मजा ज्यादा आ रहा था। मेरी ब्रा उसके थूक से पूरी गीली हो गई थी। मेरी चुचियों में कसाव आने लगा था।
ब्रा में से मेरे निप्पल्स दिखाई देने लगे थे। वो तो जैसे पागल हो गया था। फिर उसने मुझे वहाँ से उठाया मैं खड़ी हो गई तो उसने फौरन मेरी साड़ी को खींचा और वो नीचे गिर गई फिर मेरे पेटीकोट का भी नाड़ा खींचा तो वो सरककर मेरी पायों में गिरा। इसके बाद उसने आहिस्ते से मेरे ब्लाउज को निकालना शुरू किया।
मेरा सिर नशे में घूम रहा था। मैं केवल ब्रा और पैंटी में थी। फिर उसने उठकर अपने कपड़े उतारने शुरू किए। मैं उसको जाकर चिपकने लगी। मैं बहुत कामुक होने लगी थी। उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए। वाह क्या लंड था उसका। इतना बड़ा लंड मैं जिंदगी में पहली बार देख रही थी। उसका लंड एकदम गोरा और सुपाड़ा गुलाबी था।
फिर मेरी ब्रा का हुक निकालकर उसने दोनों हाथ मेरी चुचियों पर रखे। और चुचियाँ दबाते-दबाते मेरी ब्रा निकाल फेंकी। अब मेरी दोनों चुचियाँ खुली हवा में आजाद थीं। वो मुझे किस करने लगा। मेरे निप्पल्स कड़क हो गए थे। मैंने उसका लंड हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी। उसका लंड पूरी तरह से तन गया था।
किस करते-करते वो मेरे पूरे बदन को चुमने लगा। किस करते-करते वो नीचे जाने लगा मेरे बदन में गुदगुदी हो रही थी। मेरी चूत में सौ चींटियाँ रेंगने लगी थीं। मैं अपने होश में नहीं थी। मैं उसके बालों को सहलाने लगी। फिर वो चूमते-चूमते मेरे पेट तक आया। और उसने मुझे सोफे पर धकेल दिया।
मैं सोफे पर गिरी तो मेरी दोनों टांगें ऊपर हो गई थीं। वो मेरी टांगों को चूमते-चूमते मेरी थाइज तक आ गया। फिर मेरी पैंटी को एक साइड में करके मेरी चूत को देखा और एक चुम्बन लिया और बोला, ज़रीना जान तेरी चूत तो कयामत है। क्या सुंदर और सेक्सी हो तुम। तुम्हारी झांटे कितनी मुलायम हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और मेरी झांटों पर जुबान फेरते हुए बोला जी करता है मैं तुम्हें जन्म भर चोदता रहूँ। मैं उसके तने हुए मूसल लंड की ओर देखकर बोली। जन्म भर नहीं पर सिर्फ आज तुम मुझे चोद सकते हो। इस पर वो उठा और कुछ खास सोचकर बोला कि ज़रीना चलो एक खेल खेलते हैं। अगर चोदते वक्त तू मुझसे पाँच मिनट के लिए भाग सकी तो फिर मैं तुम्हें कभी चोदूँगा नहीं। और अगर तुम तुम्हारी चूत में पानी पड़ने से पहले ऐसा कर सकोगी तो फिर मैं तुम्हें कभी छुऊँगा भी नहीं।
इस खेल में मेरी जीत हुई तो राज मुझे कभी ब्लैकमेल नहीं करेगा। जैसा मैं कहूंगी उसे मानना पड़ेगा। लेकिन अगर मैं हार गई तो मुझे उसकी रखैल बनकर रहना पड़ेगा। फिर जब मर्जी हुई वो मुझे चोद सकता था। बड़ी अजीब शर्त उसने रखी थी। मैंने उसे पूछा और अगर मैं ये शर्त नहीं मानूँ तो….. उसने कहा तो मैं मेरा काम करता रहूँगा।
मतलब उसने मुझे ब्लैकमेल करने की चेतावनी दी थी। मैंने पूछा लेकिन अगर तुम हारोगे तो तुम अपनी जुबान पर कायम रहोगे इसकी क्या गारंटी। उसने कहा आजमाकर देख लो। ये मर्द की जुबान है। मैंने कुछ सोचकर हाँ कर दी। क्योंकि ये मेरे बचने के लिए अच्छा मौका था। ये जुआ खेलना जरूरी था।
मैंने हाँ करते ही उसने मुझे कसकर पकड़ा और सोफे पर लिटा दिया। और मेरी दोनों टांगों को कसकर पकड़के मेरी पैंटी उतारकर चूत को चाटने लगा मुझे अजीब सा मजा आने लगा। वो कभी मेरी चूत की फाँकों के ऊपर जुबान फेरता था, कभी मेरी मुलायम झांटों पर जुबान चलाता तो कभी मेरी चूत के अंदर अपनी जुबान घुसा देता, मैं चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई और मेरा पानी छूटने लगा।
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मेरी साँसें तेज हो गई थीं मेरी चुचियाँ ऊपर-नीचे होने लगीं। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मेरे बदन में अकड़न होने लगी मैंने उसका मुँह हटाया और अपना पानी छोड़ना शुरू किया। राज मेरी हालत देख रहा था। वो बोला, ‘जान तुम सच में बहुत सेक्सी हो।’ फिर मैं शांत हो गई और भागने के लिए मौका ढूँढ रही थी।
मैंने कहा राज मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ। तुम सोफे पर बैठ जाओ। तो वो चालू आदमी मेरे हाथ को पकड़कर सोफे पर बैठा। मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया। मैं नीचे बैठकर उसका लंड हाथ में लिया और उसे चुमने लगी। सच बताऊँ तो राज का लंड एकदम घोड़े जैसा था। और उसकी झांटे उसने हल्की सी ट्रिम करवाई थी।
उसकी झांटे भी उसके बाल की तरह सुनहरे और घुँघराले थीं जबकि मेरी सीधी और काली पर मुलायम थीं। उसका लंड एकदम गोरा था। मैं पहली बार इतना गोरा लंड देख रही थी। उसके बॉल्स भी एकदम कड़क थे। मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसके बॉल्स का एक लंबा चुम्बन किया। एक अलग ही टेस्ट था।
मैं उसके बॉल्स को जोर-जोर से चूसने लगी। तो वो जैसे पागल हो उठा, और उसके हाथ की पकड़ थोड़ी ढीली हो गई। मुझे भागना था तो मैं उसके लंड के सुपाड़े के छोटे से छेद को अपनी जुबान से चाटने लगी। अपनी दो उँगलियों से उसके सुपाड़े को दबाकर उस छेद का मुँह खोल रही थी। फिर उस छेद में अपनी जुबान डाल रही थी।
वो मस्त हो रहा था। उसका सुपाड़ा पूरी तरह से फूल गया था, जिसकी वजह से उस पर चमक आ गई थी। मस्ती में उसकी आँखें बंद हो गईं। वो उऊँ आऊँ उऊऊँ करने लगा। मौका देखकर मैं फौरन वहाँ से भागने में कामयाब हो गई। मेरे पीछे वो भी अपना मूसल लंड हाथ में लेकर भागने लगा।
मैं बेडरूम में गई, वो भी मेरे पीछे आया। और बोल रहा था, ‘जानू आज तो तुझे नहीं छोडूँगा। तू इस लंड से कब तक बचेगी। तुझे तो आज पटक-पटककर चोदूँगा।’ मुझे भी मजाक करने की सूझी तो मैंने कहा पहले मुझे पकड़ो तो सही, फिर मेरी चूत चोदना। इस पर वो अपनी दोनों बाहें फैलाए मेरे करीब आ रहा था।
मैं झटके से बेड पर चढ़ी। तो वो भी बेड पर आया। मैं जल्दी से नीचे उतर गई। अब वो मेरे करीब आ रहा था उसका लंड हवा में लहरा रहा था। छूटने की कोई गुंजाइश नहीं थी। मैंने दिमाग लगाया और पीछे जल्दी से सरकाने लगी, और जानबूझकर अपना सिर दीवार से टकराया। मुझे ज्यादा लगा तो नहीं था।
पर मैं सर पकड़कर रोने का नाटक करने लगी वो मेरे पास आके घबराके पूछने लगा क्या हुआ। इतने में मैंने उसे जोर का धक्का दिया वो नीचे गिर गया और मैं वहाँ से भागने में कामयाब हुई। दूर जाकर अपनी जुबान बाहर निकालकर और अपने दोनों हाथ की उँगलियाँ सिर पर रखकर उसे चिढ़ाने लगी। गुस्से से वो लाल हुआ था।
वो मेरे पीछे भागने लगा। मैं फिर लिविंग रूम में आई। और वहाँ उसको दौड़ाने लगी। दौड़ते-दौड़ते मेरी दोनों चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं पहली बार पूरी नंगी होकर भाग रही थी। मुझे इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था। लगभग चार मिनट हो गए थे बस अब एक मिनट ही दौड़ाना था। फिर मैंने किचन की ओर भागने का फैसला किया।
राज लगातार मुझे पकड़ने की कोशिश कर रहा था। मैं जैसे किचन की ओर भागने लगी, वैसे ही उसने सोफे के ऊपर से छलांग लगाई और मेरी कमर पकड़ने की कोशिश की लेकिन मैं उसके हाथ से सटक गई। वो फिर तेज भागा और मुझे उसने पीछे से पकड़ लिया और अपनी ओर खींचा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसका लंड बिल्कुल मेरी चूतड़ों में घुस गया था उसने उसके एक हाथ से मेरी चुची को पकड़ा और दूसरा हाथ मेरी चूत पर रखकर सहलाने लगा। और मेरी गर्दन पर किस करने लगा। ऐसा करते हुए वो मुझे किचन प्लेटफॉर्म के पास लेके गया और अपने पैर की बड़ी उँगली (अंगूठा) नीचे वाली ट्रॉली में फँसाकर बाहर खींच लिया।
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और मेरा एक पाँव उठाकर उसके ऊपर रख दिया। और मुझे थोड़ा सा किचन प्लेटफॉर्म पर झुकाया। इससे मेरी चूत उसके लंड के निशाने पर आ गई। उसने एक झटके में अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया। मेरी चूत पनीयाँ गई थी इसलिए वो लंड घुसा सका। लेकिन मैं बेहाल हो गई। मेरी आँख फट गई, मेरी साँस मानो थम सी गई।
मेरा मुँह पूरा खुल गया और मुँह से सिर्फ आऊँ की आवाज निकली। मुझसे ये स्ट्रोक बर्दाश्त नहीं हुआ। ऐसा लग रहा कोई मेरी चूत में गरम लोहे की सलाख डाल रहा है। इतनी बेरहमी से किसी ने भी मुझे चोदा नहीं था। उसने मेरी बिना परवाह किए चुदाई शुरू कर दी। स्ट्रोक पे स्ट्रोक मारे जा रहा था।
उसका लंड मैं अपनी चूत से जितना महसूस कर रही थी कि शायद ही इतना बड़ा लंड किसी का होगा। वो एकदम मजबूत था। उसने मुझे कसके पकड़ा था। लाजवाब मर्दानगी थी उसमें। उसके स्ट्रोक में इतनी ताकत थी कि बस मेरे मुँह से सिसकारियाँ भी नहीं निकल रही थीं। मेरी तो जैसे साँसें रुक सी गई थीं।
थोड़ी देर इस तरह चोदने के बाद उसने अपना लंड निकाला। फिर एक करारा शॉट मारा। मैं उसे रिक्वेस्ट करने लगी प्लीज राज मुझे दर्द हो रहा है, जरा धीरे से करो ना। वो बोला ज़रीना आज मुझसे चुदवाओगी तो जन्म भर मेरी बनके रहोगी। थोड़ी देर बाद तुम्हें अच्छा लगेगा। फिर अपना लंड उसने बाहर निकाला और मुझे गोदी में उठाया। और बाहर लेके आने लगा।
बाहर आते-आते उसकी नजर डाइनिंग टेबल पर गई। उसने एक हाथ से वहाँ की सारी चीजें उठाकर एक कुर्सी पर रख दी। मैं उसकी गोद में उसकी मजबूती नाप रही थी। उसका लंड मेरी चूतड़ों से टकरा रहा था। बहुत ही हट्टा-कट्टा था। न जाने उसकी पतली बीवी की चूत का भोसड़ा बना दिया होगा।
उसने मुझे बड़े प्यार से टेबल पर लिटाया और फिर एक बार मेरी टांगों के बीच आकर मेरी चूत का चुम्बन लिया। और फिर चूत पर सुपाड़ा रखके एक जोरदार शॉट मारा। जिससे मैं थोड़ा ऊपर सरक गई। वो अपने दोनों हाथ से मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे के ऊपर रख के धना-धन शॉट मारने लगा।
बड़े ताकत के साथ वो मुझे चोदे जा रहा था। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैंने अपनी लिप्स को दाँतों तले दबाए रखा था। फिर उसने मेरी एक टांग उठाई और बिना अपना लंड निकाले मुझे उसने साइड पर लिटाया और फिर चुदाई चालू की इस बार वो अपना पूरा लंड बाहर निकालकर फिर अंदर पेल रहा था।
हर वक्त उसका लंड अंदर जाते मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरी सील हर बार टूट रही है। मुझे दर्द भी हो रहा था पर दर्द में मजा भी आ रहा था। मुझे इतना मजा पहले तो कभी भी नहीं आया था। मैं फिर मौका देखके डाइनिंग टेबल से एक झटके में उतर गई और फिर भागने लगी मेरी चूत ने इस खेल में फिर एक बार पानी फेंकना शुरू किया।
सारा पानी मेरी टांगों पर फैलने लगा उसी हालत में मैं अपनी बड़ी-बड़ी चुचियाँ हिलाते हुए और बड़े चूतड़ हिलाते-हिलाते भाग रही थी। उसे भरपूर जोश आ गया था। हम दोनों हॉल में ही भाग रहे थे। मुझे खूब आनंद मिल रहा था। और वो मुझे बोल रहा था, आ जा मेरी प्यारी चूत। आज तो तेरे चिथड़े उड़ा देगा मेरा ये लंड। जल्दी से खुद आकर मेरे लंड पर बैठ। इसका इम्तिहान मत ले नहीं तो तेरी ऐसी गांड मारूँगा कि चलने के काबिल ही नहीं रहेगी।
मैंने भी उसे कहा तू क्या मुझे पकड़ेगा तेरे लंड की वैसे भी ताकत मेरी चूत ने खल्लास कर दी है। वो तो कभी भी झुक जाएगा। शराब की वजह से मैं बहुत ही मदहोश हो चुकी थी। तो उसने कहा। तुमने मेरे लंड की ताकत पूरी कहाँ देखी है। इसने तो तुम्हें आज दिन भर चोदना है। आज तू मेरे हाथ से बच नहीं सकती। आज तो मैं तुझे चोद-चोदकर अपनी रंडी बनाऊंगा।
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मैंने अपने चूत पर मिडिल फिंगर रखके उसे चिढ़ाते हुए बोली तो आ और चोदके दिखा। और फिर मैं बाथरूम की ओर भागी वो भी मेरे पीछे-पीछे भाग रहा था। बाथरूम में घुसते ही मैंने दरवाजा लॉक करने की कोशिश की तो उसने पूरी ताकत से दरवाजा धकेल दिया। मैं गिर गई और उसने मुझे पकड़कर मेरी गांड पर जोर से एक थप्पड़ मारा।
मेरी गांड लाल हो गई थी। उसने शावर ऑन किया और मुझे घोड़ी की तरह झुकाके मेरी चूत में एक बार फिर पेल दिया। ऊपर शावर का पानी गिर रहा था और वो मुझे चोद रहा था। उसका लंड अंदर-बाहर करते वक्त शावर का पानी गिरने से फचक-फचक की आवाज आ रही थी। फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे लेकर बाहर आया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरा पूरा बदन गीला था। मैं फिर एक बार उसके हाथ को झटककर वहाँ से भागी। वो फिर मेरे पीछे भागने लगा। मैं जल्दी से बेडरूम में घुसी। वो मेरे पीछे भागते-भागते बेडरूम में आया। मैं फिर बेड के ऊपर चढ़ गई। उसने एक छलांग लगाकर मुझे पकड़ लिया। उसकी साँसें तेज चल रही थीं। वो नीचे सो गया और मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा।
मैं उसके दोनों टांगों पर आई। अपनी गांड के पीछे से एक हाथ लेकर उसके लंड के सुपाड़े को चूत पर सेट करने लगी। उसने अचानक मुझे पीछे धकेल दिया। उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मेरे मुँह से एक जोर की चीख निकली। मेरी हालत खराब हो गई जैसे मैं बेहोश होने वाली थी। पर वो थोड़ा रुक गया।
वो मुझे खिलौने जैसा इस्तेमाल कर रहा था। जैसे ही मैंने अपने आप को संभालने की कोशिश की उसने नीचे से धड़धड़ शुरू किया। मैं मस्त हो रही थी। शराब का असर मेरे दिमाग से लगभग कम हुआ था। थोड़ी देर बाद मैं उत्तेजित होकर ऊपर-नीचे होने लगी। मुझे बहुत आनंद मिल रहा था। फिर मैं उसे तेज चोदने लगी।
मेरी चूत ने फिर पानी उँड़ेलना शुरू किया। उसके लंड पर मेरी पानी की पिचकारी पड़ते ही वो मस्त होने लगा। मेरा पानी उसके लंड पर से बहकर उसके बॉल्स पर से होते हुए उसकी गांड की दरार से निकलकर बेड पर गिर रहा था। थोड़ी ही देर बाद उसकी आँखें बंद होने लगीं। उसका सुपाड़ा थोड़ा फूलने लगा कि मैं वहाँ से उठी।
चूत से लंड निकलते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा। तो मैंने कहा डरो नहीं, मैं कहीं भाग नहीं रही। मुझे तुम्हारा लंड चूसना है। फिर भी उसने मेरा हाथ छोड़ा नहीं फिर मैं थोड़ा नीचे सरककर दूसरे हाथ में उसका लंड पकड़ा और हिलाने लगी मैंने दो-तीन स्ट्रोक मारे नहीं तो उसके लंड ने मेरे बालों पर एक पिचकारी मारी।
फिर मैंने उसका लंड मुट्ठी में जोर से पकड़ा, ताकि उसका पानी बाहर न निकले। उसका लंड मेरे हाथ पर झटके मार रहा था। राज तो जैसे पागल हो गया। बीस-पच्चीस सेकंड पकड़ने के बाद मैंने हाथ की पकड़ थोड़ी कम कर दी तो फचा-फच उसने मेरे हाथ पर सारा पानी छोड़ दिया। मैंने वो सारा पानी अपने उँगलियों पर लेकर उसके लंड की मालिश करने लगी।
उसका लंड सफेद हो गया था। मुझे एक अजीब सा आनंद मिल रहा था। और राज तो पूरा पागल हो रहा था। थोड़ी देर के बाद उसका लंड सिकुड़ने लगा तो मैं उसे छोड़कर बाथरूम में गई। फिर एक बार नहाकर सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनी और बाहर आई। बाहर आते ही राज सामने खड़ा था।
मैंने उसे मुस्कुराकर कहा राज तुम हार गए। उसने पूछा वो कैसे, तो मैंने तुरंत जवाब दिया कि तुमने शर्त लगाई थी कि तुम्हारी चूत में मेरा पानी पड़ने से पहले अगर तुम पाँच मिनट के लिए भागी तो तुम जीती। तुम्हारा पानी मेरी चूत में तो गया भी नहीं और मैं तुमसे लगभग बीस मिनट दूर रही।
राज इस पर बोला सच तुम औरतों को हराना मुश्किल काम है। तुमने बराबर दिमाग से मेरा पानी बाहर गिराया। चलो कोई बात नहीं मैं तो अपनी जुबान का पक्का हूँ। अब के बाद मैं तुम्हें छुऊँगा भी नहीं। और आज से मैं तुम्हारा गुलाम हूँ। इतना बोलकर वो नहाने गया। मेरे पूरे घर में हम लोगों ने चुदाई का काम किया था।
कुछ भी हो इस खेल में मुझे बड़ा मजा आया था। उसने मेरी चूत का रेशा-रेशा ढीला किया था। मेरी चूत सूजकर बड़ी और लाल हो गई थी। मैं बीच-बीच में उसे हल्का सा दबा रही थी। मैं सीधी तरह से चल भी नहीं पा रही थी। वो नहाकर सिर्फ तौलिए में लपेटकर बाहर आया तब तक मैं खाना लगा चुकी थी।
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तो उसने कहा मैं बहुत थक गया हूँ। इसलिए मैं पहले दो पेग मारूँगा। मैंने कहा ठीक है। फिर उसने अपने लिए और मेरे लिए भी पेग बनाया। मैं मना करने लगी तो उसने कहा देखो मैं अब तुम पर जबरदस्ती नहीं करूँगा। पर तुम भी थकी होगी तो इससे तुम्हें थोड़ी एनर्जी आएगी। और फिर एक जाम तो होना चाहिए हमारे दोस्ती के और तुम्हारे जीत के नाम।
मेरा तो पूरा बदन दर्द कर रहा था। और चूत की हालत तो और खराब थी। फिर शराब से तो मुझे मजा भी आया था। मैंने उसके हाथ से ग्लास लिया। उसने चीयर्स किया और हम पीने लगे। मैं भी उसकी ओर देखके उसी स्टाइल में पीने लगी। मैंने दो पेग पिए, फिर जोर से भूख लगी थी इसलिए खाना खाने लगे।
राज को तो रात को जाना था इसलिए हम हॉल में आके बातें करने लगे। शराब मेरे दिमाग पर हावी होने लगी थी। मेरे बदन में सनसनी शुरू हो गई थी। मैंने राज से पूछा क्या तुम अपने घर में बीवी को भी ऐसा ही भगाते हो क्या। तो वो हँसने लगा और बोला अगर घर पे बीवी को भगाऊंगा तो सबसे पहले मेरे डैड ही उसे चोद देंगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इस पर मैं भी हँसने लगी। बहुत देर तक हम बात कर रहे थे। फिर मैंने उसे ये भी पूछा कि इतनी देर तक वो कैसे चोद पाता है। तो उसने फौरन जवाब दिया कि माइंड कंट्रोल करके अगर चुदाई की जाए तो बहुत देर तक रुक सकते हैं। मैंने पूछा कि कैसे माइंड कंट्रोल किया जाता.
तो वो बोला कि शॉट मारने के वक्त कहीं और ध्यान लगाने का और चाहे तो गिनती भी कर सकते हैं। और स्ट्रोक मारते वक्त अगर तुम्हें समझ आए कि तुम अभी झड़ने वाले हो तो इमीडिएट अपना लंड निकालकर थोड़ा टाइम पास करने का। जैसे पोजीशन चेंज करना या प्लेस बदलना।
वो अपनी डॉक्टर की स्टाइल में मुझे बता रहा था। शराब का नशा मुझ पर कुछ ज्यादा ही भारी हो रहा था। और सेक्सी बात करते-करते राज का लंड भी बाँस जैसे तनकर तौलिए का टेंट बना चुका था। फिर राज ने मुझे सारी बातें बता दी कि उसने हमारी सोसाइटी की कितनी लड़कियाँ और औरतों को चोदा है।
एक-एक नाम सुनकर मैं परेशान हो गई। राज ने कहा कि कई औरतें ऐसी भी हैं जो बहुत ज्यादा इच्छा हो गई तो बहाना बनाकर क्लिनिक में आती हैं मेरा लंड चूसकर जाती हैं, तो कोई लड़कियाँ सलवार नीचे करके मेरा लंड अंदर लेती हैं और जल्दी में चुदाके निकल जाती हैं। लेकिन वहाँ मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं रहता है।
मुझे उनको या उन लोगों को मुझे कुछ बोलने की जरूरत नहीं पड़ती। बस अपना काम हो गया के बाहर जाकर रिसेप्शनिस्ट के पास फीस जमा करके निकल जाती हैं। यहाँ तक कि कोई न मिलने पर मैं रिसेप्शनिस्ट को ही चोद डालता हूँ। और ऑपरेशन थिएटर में तो हर नर्स और असिस्टेंट डॉक्टर को चोदा है।
और तो और हमारी कामवाली सरला और उसकी भाभी को भी घर में चोदा है। मेरे घर वाले किसी रिश्तेदार के घर पर या फंक्शन में गए तो मैं उन दोनों को एक साथ ही चोद डालता हूँ। सरला तो रोज सुबह मेरे बेडरूम में झाड़ू लगाते वक्त मेरे लंड को चुमकर और थोड़ा सा सहलाकर जाती है।
मेरी बीवी किचन में रहती है तो कभी-कभी सरला की भाभी रेखा कपड़े सुखाने के लिए छत पर जाती है तो उसे वहीं पटक कर चोद देता हूँ। मुझे रोज एक नई औरत को चोदना पसंद है। उसकी सेक्सी बातें सुनकर मुझे फिर से चुदवाने की इच्छा हो गई। लेकिन राज अपनी तरफ से कुछ भी पहल नहीं कर रहा था।
मैं जानबूझकर दो-तीन बार झुकी। एक-दो बार बात करते-करते उसके लंड को टच किया। लेकिन वो अपने वादे पर कायम था। मैं बहुत कामुक हो गई थी। मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसका तौलिए सरकाकर उसके लंड का सुपाड़ा मुँह में लिया। तो वो शरारत भरे अंदाज में कहने लगा, अरे ये क्या कर रही हो तुम?
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उसका सुपाड़ा मेरे मुँह में ही था कि मैंने अपनी चार उँगलियों से उसके लंड पर एक जोर की चपत मारी। उसको जोर का करंट लगा। मैंने उसकी ओर देखके उसे बोला साले हरामी, तूने मेरे साथ जो खेल खेला उसका मैं बदला ले रही हूँ। कुत्ते बड़ी बेरहमी से मुझे चोदकर मेरे सब पुर्जे ढीले कर दिए। और फिर उसका लंड चूसने लगी।
शराब कुछ ज्यादा ही मेरे दिमाग पर असर दिखा रही थी, क्योंकि मेरे मुँह से कभी भी गालियाँ नहीं निकलती थीं। फिर उसको सोफे पर लिटाकर मैं उसके लंड पर चढ़ गई लंड का सुपाड़ा अपनी चूत पर रगड़के फिर उसको धीरे-धीरे अंदर करने लगी। लंड अंदर जाते ही उसने थोड़ा स्ट्रोक मारना शुरू किया.
तो मैं उसे बोलने लगी, अबे भड़वे चुपचाप बैठ अब मैं तुझे चोदूंगी। साले कमीने कभी अपनी माँ-बहन को चोदा था क्या ऐसे मेरी चूत का पूरा सत्यानाश किया है तूने। आज तुझे चोद-चोदकर तेरे लंड की जान ही निकाल दूंगी। न जाने क्या लंड को लगाके आया था। लोहे का तो लंड नहीं बनाया है न तेरा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरे मुँह से गालियाँ सुनकर वो भी पीछे हटने वाला नहीं था। वो बोलने लगा। साली आज तो तू मेरे हाथ से बच गई वरना तुझे रंडी बनाकर तेरी चूत और गांड को एक कर देता। साली किधर मुँह काला करके आई थी क्या मालूम। मेरा लंड नहीं दिखा था क्या तेरी चूत को। मैं बोली अरे मैं किसका भी लंड अपने चूत में डलवाऊँ तुझे इससे क्या। और तू इतना बड़ा मर्द बनाता है तो फिर पहले क्यों नहीं मुझे पटकाकर चोदा।
वो बोला वैसे तो तुझे चोदने की बहुत चाहत थी। लेकिन डरता था कि तू बड़ी शरीफ है। मुझे मालूम पड़ता कि तू बड़ी चुदक्कड़ है। तो कब का तुझे चोदा होता। सच-सच बता कितने लौड़े तूने खाए हैं। मैं मस्त हो रही थी। शराब ने मुझे जंगली बना दिया था। मैंने कहा मैं पूरी दुनिया से चुदा लूँ। तू अपना काम कर।
फिर मैं वहाँ से उठी और नीचे लेट गई। फिर राज मेरे ऊपर आया और चोदने लगा। थोड़ी ही देर में मैं झड़ गई लेकिन राज चोदे ही जा रहा था। शायद वो माइंड कंट्रोल कर रहा था। मुझे अब इस चुदाई में ज्यादा मजा आ रहा था। मैं उसे कहने लगी, चोोोद मेरीी राजाा, जााल्दीीसे चोोोद। आज तोोो तुमने मुझेए पाागल कर दिया हैीी। खूब चोोोदोो। बाास इसी तरह चोदते रहोोो।
दो मिनट के बाद उसने लंड मेरी चूत से निकाला और फिर एक करारा शॉट मारा। हाय दैया मैं तो मरी जा रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरी पूरी प्यास आज मिटने वाली है। फिर उसने बिना लंड निकाले मुझे अपनी गोद में उठाया। मैंने अपनी बाहें उसके गले में डाल दी और उसे किस करने लगी।
मेरे दोनों पैर उसके कमर को जकड़ रखे थे। उसने दोनों हाथ से नीचे मेरी चूतड़ों को पकड़ा और खड़े होकर चुदाई करने लगा। इस स्टाइल में मैंने कभी चुदाई की कल्पना भी नहीं की थी। वो बहुत ही ताकतवर था। वो चोदते वक्त मेरी चूतड़ों को दबाते हुए उठाता था और धन से अपने लंड पर छोड़ देता था।
इससे उसका लंड पूरा मेरी जड़ तक जाता था। उसने दस-बारह स्ट्रोक लगाए मैं उसके लंड पर खुशी से झूल रही थी कि फिर से मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू किया। सारा पानी चूत से बाहर निकलकर उसकी झांटों पर से बहकर उसके बॉल्स तक पहुँच गया था। मैं उसके मुँह में अपनी जुबान डालकर उसकी जुबान को चूस रही थी।
राज एक परफेक्ट मर्द था। वो मुझे चोदे ही जा रहा था। फिर वो थक गया तो उसने मुझे बिना लंड निकाले नीचे उतारा और दीवार का सहारा लेकर मुझे दीवार से सटकर खड़ा किया। फिर मेरी एक टांग ऊपर करके मुझे चोदने लगा। मुझे जन्नत का मजा नसीब हो रहा था। और फिर थोड़ी देर के बाद राज मेरी चूत में ही झड़ गया।
मुझे बड़ा आनंद मिल गया था। मैंने उसे किस किया। और फिर मुझे गोदी में उठाकर बाथरूम में ले गया। मुझे पेशाब लगी थी इसलिए मैं उसके सामने ही पेशाब करने के लिए बैठने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे उठाया और बोला कि खड़ी होकर ही पेशाब करना।
मैंने उसे कहा कि तुम पागल हो क्या मेरी टांगें गंदी हो जाएंगी। तो उसने कहा कोई बात नहीं मैं तुम्हें नहलाऊंगा। फिर मेरी कुछ नहीं चली। मैं खड़े होकर मूतने लगी। उसने मेरी चूत पर अपनी दो उँगलियाँ रखी और चूत की फाँकों को साइड में किया। मेरी चूत से पहले बहुत जोर से सीटी जैसे आवाज के साथ धार निकली.
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उसके बाद आहिस्ता-आहिस्ता पूरा मूत नजदीक आके उसके हाथ के ऊपर मेरी दोनों टांगों पर बारी-बारी बहने लगा। मैं राज को ही देख रही थी। वो बहुत खुश हो रहा था। फिर उसने कहा मुझे भी मूतना है तो मैंने उसका लंड पकड़ा। उसने भी अपनी धार जोर से छोड़ना शुरू किया। मैं उसके लंड को इधर-उधर हिलाने लगी। उसकी पेशाब पिचकारी की तरह मैं सब जगह उड़ा रही थी। फिर उसने मुझे अपनी बाहों में लेकर किस किया। हम दोनों ने एक दूसरे को खूब प्यार से नहलाया। रात को राज ग्यारह बजे मेरे घर से गया।
तब तक उसने मुझे और एक बार चोदा। जाते वक्त उसको छोड़ने को दिल नहीं कर रहा था पर कोई चारा भी नहीं था। उसकी बीवी उसकी राह देखती होगी ये सोचकर उसे जाने दिया। बड़ा ही मजा आया था। मुझे राज से अब लगाव हो रहा था। फिर आठ दिन के बाद उसने मेरा एबॉर्शन कराया। और एक बात राज के आजकल कॉन्फ्रेंस बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। और वो अब मुझ पर दिलो-जान से प्यार करता है। और हमने एक वादा भी किया है कि जावेद के आने के दो दिन पहले ही हम ये नया रिश्ता खत्म करेंगे।
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