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बहन को चुदाई के लिए राजी किया भैया ने

जून 13, 2026 by hamari Leave a Comment

Young Sister Chut XXX

दोस्तों, यह एक मुस्लिम फैमिली की स्टोरी है। इस फैमिली में 6 लोग रहते हैं — मॉम, डैड, दादा, बुआ, और बहन-भाई। यह स्टोरी बहन-भाई के दरमियान है। भाई की उम्र 23 साल है, नाम कामरान (कामी), हैंडसम, एम.एससी. किया हुआ, जॉब की तलाश में है। बहन का नाम ताहिरा, निकनेम टीना, उम्र 22 साल, बहुत सेक्सी, आकर्षक, शानदार बॉडी और फिगर 36बी-28-36। Young Sister Chut XXX

दोस्तों, यह उन दिनों की बात है जब मैं जॉब की तलाश में था और ज़्यादातर समय घर में ही रहता था। मेरी बहन भी पढ़ाई खत्म कर चुकी थी, वो भी घर पर ही रहती थी। हमारे फैमिली का माहौल कुछ तंग नज़र आता था, टिपिकल मुस्लिम घरों की तरह। मैं टाइम पास करने के लिए इंटरनेट यूज़ करता था।

बहन घर का काम करती थी। चैट के दौरान हर किस्म के फ्रेंड मिलते हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मुझे एक फ्रेंड मिली जिससे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई। उसने मुझे अपना और भाई का अफेयर के बारे में बताया। मैंने पहली बार झूठ समझकर इग्नोर कर दिया, मगर मेरे जहन में उसकी बात बैठ गई।

एक दिन मैंने अपनी बहन को घूरकर देखा, गंदी नज़र से तो वो मुझे बहुत प्यारी लगी और मैंने उसे आगे बढ़कर उसके माथे पर किस कर दिया। वो भी परेशान हो गई। मगर फिर मैंने कंट्रोल किया और यह सोचकर पीछे हट गया कि वो मेरी रियल बहन है, ऐसा नहीं हो सकता जो मैं सोच रहा हूँ।

कुछ दिनों बाद मैं अपनी बहन को बाज़ार ले गया शॉपिंग के लिए। मेरे पास बाइक थी। वापसी पर ताज़ा-ताज़ा बारिश शुरू हो गई, जिससे वो गीली हो गई और उसका जिस्म नज़र आने लगा। मेरे अंदर का सोया हुआ शैतान एक बार फिर जाग गया। मैंने देखा कि बहन काँप रही है, हल्की ठंड लग गई है उसे।

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मैंने बहन से कहा, “मेरे साथ चिपक जाओ।”

इससे उसने अपनी छाती मेरी कमर से चिपका ली और मुझे कसकर पकड़ लिया। मैंने बाइक की स्पीड आहिस्ता कर ली और बहन के स्तनों का मज़ा लेने लगा। मेरे जहन में गंदा ख्याल आ रहा था और बहन के स्तनों का मज़ा न मेरे लंड को खड़ा कर दिया।

चूँकि बहन ने मुझे कसकर मजबूत पकड़ा हुआ था, जिससे उसका हाथ मेरे पेट से थोड़ा नीचे था, जिससे हल्का सा मेरा लंड उसके हाथ पर टच करने लगा। बहन को समझ नहीं आई और वो ऐसे ही चिपककर बैठी रही। वापसी पर मैं अपने रूम में चला गया और बहन अपने रूम में। अब मैं अपनी बहन से कुछ ज़्यादा पहले से प्यार करने लगा।

एक दिन मौसम काफी अच्छा था, मैं उसे घुमाने ले गया अपनी बाइक पर और 3 से 4 घंटे हम लोग इधर-उधर घूमते रहे और फिर घर आ गए। अब मैं हफ्ते में एक बार बहन को ज़रूर घुमाने ले जाया करता था। इससे हमारा रिश्ता दोस्ती में बदल रहा था और हम एक-दूसरे के करीब आ रहे थे।

एक दिन मैंने प्लान बनाया कि मैं बहन को बीच पर ले जाकर जाऊँगा। वहाँ तो आप लोग जानते ही हैं जो सब होता है। मैं अपनी बहन को एक सैटरडे की शाम ले गया। वहाँ कुछ कपल्स आ हुए थे। मैंने रात होने का इंतज़ार किया और बहन को बीच पर घुमाता रहा। और तकरीबन रात के 8 बज गए।

अब कपल्स रात के अंधेरे में एक-दूसरे को किसिंग और कहीं-कहीं तो इससे भी ज़्यादा कर रहे थे। मैंने बहन को नॉर्थ साइड पर ले जाकर लगाया। वहाँ बहुत सी रॉक्स थीं और कपल्स उन रॉक्स के बीच में छुपकर बहुत कुछ करते हैं। बहन इन कपल्स को बड़ा घूरकर देख रही थी। एक जगह तो एक कपल चुदाई में लगा हुआ था। बहन ने उन्हें देखा तो उसके मुँह में भी पानी आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जब मैंने बहन को देखा तो मैं अचानक बोला, “क्या देख रही हो?”

तो वो घबरा कर बोली, “कुछ नहीं, चलो अब वापस चलते हैं।”

मैंने कहा, “अभी तो 8:30 हुआ है, थोड़ा आगे चलते हैं।”

तो वो चुप हो गई। ऐसे ही हमने तकरीबन 20 से ज़्यादा कपल्स देखे जो सेक्स कर रहे थे। मैं एक जगह बैठ गया।

मैंने कहा, “ताहिरा, यहाँ बैठ जाओ, मैं थक गया हूँ।”

तो वो फौरन बैठ गई और इधर-उधर देखने लगी।

उसने पूछा, “भाई, आप यहाँ रोज़ आते हो?”

मैंने कहा, “नहीं, बस ऐसे ही आज मूड हुआ तो तुम्हें ले कर आ गया।”

ताहिरा बोली, “यह जगह अच्छी नहीं है।”

मैंने पूछा, “क्यों, क्या हुआ?”

तो वो बोली, “ऐसा काम तो लोग घर में करते हैं, इन लोगों को शर्म नहीं आती।”

तो मैं फौरन बोल पड़ा, “इन्हें घर में जगह नहीं मिलती होगी ना, क्यों ये कपल्स हैं…”

मैं बोला, “इनमें सब मैरिड नहीं हैं, कुछ का रिश्ता तो भाई-बहन का भी होगा…”

(मैं सिर्फ अपनी बहन को इस तरफ लाना चाहता था जो मैं लाया)।

ताहिरा बोली, “भाई और बहन? यह कैसा मुमकिन है?”

मैं ज़्यादा बहस नहीं करना चाहता था। “तुम्हें एक बुक दूँगा, खुद ही पढ़ लेना।”

और हम वहाँ से वापस घर आ गए। और मैंने एक इनसेस्ट बुक ताहिरा को दे दी, जिसमें डिफरेंट स्टोरीज़ थीं, जो मेरे प्लान का हिस्सा था और मैंने स्पेशल ताहिरा के लिए ली थी। पहले तो उसने बुक लेने से इनकार कर दिया, मेरे इसरार पर उसने बुक पकड़ ली और बोली, “मैं कहाँ पढ़ूँगी इसे?”

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मैंने कहा, “मेरे रूम में पढ़ लो, दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दो, मैं थोड़ी देर के लिए बाहर जा रहा हूँ।”

तो उसने ऐसा ही किया। मैं 1 घंटा बाद आया तो ताहिरा रूम में ही थी। मैंने दरवाज़ा नॉक किया तो उसने दरवाज़ा ओपन कर दिया।

मैंने फौरन पूछा, “अब बोलो, बुक पढ़ी?”

तो ताहिरा बोली, “हाँ, मगर यकीन नहीं आता।”

फिर मैंने उसे अपनी डिफरेंट फ्रेंड्स से चैट भी करवाई, जिन्होंने अपना-अपना सेक्स के बारे में तफसील से बताया। अब मेरा रास्ता साफ था मगर सिर्फ अच्छा मौका की तलाश थी, जो मुझे नज़र नहीं आ रहा था। इसी दौरान इस टॉपिक पर हमारे बहुत बातें भी हुईं। मैं नेक्स्ट वीकेंड पर ताहिरा को फिर बीच पर ले गया। इस दफा हम ज़रा लेट पहुँचे और माहौल बहुत गरम था।

मैं ताहिरा को ले कर नॉर्थ में एक जगह बैठ गया और उससे बातें करने लगा। एक-दो दफा मैंने अपना हाथ उसकी लेग्स पर रखा, तो वो सिमट कर पीछे हो गई। मैंने सोचा शी इज स्केयरिंग। अब हमारी नज़र एक कपल पर पड़ी जो किसिंग कर रहा था। हम दोनों उनको देखने लगे और बातें करने लगे। मैंने अपना हाथ तीसरी बार उसकी लेग्स पर रखा और रब करना लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

ताहिरा बोली, “देखो भाई, मैं जानती हूँ जो तुम करना चाह रहे हो, मगर ऐसा हो नहीं सकता। प्लीज यह सब मत करो, अगर किसी ने देख लिया या फैमिली में पता चल गया तो बहुत मुश्किल होगी।”

मैं फौरन बोला, “क्या तुमने जो बुक पढ़ी वो झूठी थी? मेरी जिन फ्रेंड्स से बात की वो सब झूठ बोल रही थीं?” मैं प्रॉमिस करता हूँ किसी को भी पता नहीं चलेगा और जितना तुम चाहोगी उतना होगा।

ताहिरा बोली, “फिर भी भैया, आप कुछ सोचो, क्या यह सब ठीक है?”

मैंने कहा, “एक हद तक…” मैंने कहा, “तुम जवान हो, तुम्हारा दिल नहीं करता सेक्स के लिए?”

वो बोली, “करता तो है मगर…”

मैंने कहा, “अगर तुम बाहर जाकर यह सब करोगी तो क्या अच्छा लगेगा? जब तुम बाहर सेक्स करोगी तो पैरेंट्स इससे क्या खुश होंगे?”

वो बोली, “अगर आप मुझसे करोगे तो क्या पैरेंट्स खुश होंगे?”

मैंने कहा, “मेरी बात घर की है, पैरेंट्स कभी खुश नहीं होंगे, मगर यह भी तो सोचो क्या मैं किसी को तुम्हारा और अपना रिलेशन के बारे में बताऊँगा?”

“ओके, मुझे सोचने का मौका चाहिए।”

मैंने कहा, “जितना मर्ज़ी वक्त सोच लो।”

और हम लोग वापस घर आ गए। इसी बीच मेरी जॉब कन्फर्म हो गई और मैंने ऑफिस जाना शुरू कर दिया। फर्स्ट पे मिलने पर मैंने बहन से पूछा, “चलो तुम्हें शॉपिंग करवा लाता हूँ और 1 महीना हो गया है, हम कहीं घूमने भी नहीं गए, तुम्हारा मूड है मेरे साथ जाने को?”

वो बोली, “हाँ, मैं वैसे भी कुछ शॉपिंग करने थी।”

मैंने उसे फर्स्ट खूब सारी शॉपिंग कराई और फिर एक रेस्टोरेंट में उसे डिनर कराया। जब हम वहाँ से निकले तो रात के 9 बज चुके थे। मैंने घर फोन किया कि हम लेट हो जाएँगे। और मैं ताहिरा को ले कर बीच पर चला गया। वहाँ रूटीन की तरह कपल्स सेक्स में लगे हुए थे।

मैंने भी एक जगह देखी और वहाँ हम दोनों एक कोने में बैठ गए। अब मैंने एक हाथ अपनी प्यारी बहन की लेग्स पर रखा और उससे पूछने लगा, “फिर तुमने क्या सोचा?”

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वो मासूम बनकर बोली, “भैया, किस बारे में?”

मैंने कहा, “लास्ट टाइम जिस बारे में सोचने के लिए वक्त माँगा था।”

“भैया, आप भी न… मैंने बताया था यह सब ठीक नहीं है।”

“ओके, चलो तुम सच बोल रही हो, मैं तुमसे कुछ क्वेश्चन पूछ सकता हूँ?”

“हाँ भैया, पूछिए।”

“अच्छा, तुम्हें कोई बॉय पसंद है?”

“ओन्न…… नहीं। और आपको कोई गर्ल?”

“हाँ।”

“कौन?”

“तुम…”

“है है है है.”

“मैं सच बोल रहा हूँ, मुझे तुम ही अच्छी लगती हो।”

“लगता है अब आपकी शादी करनी पड़ेगी।”

“ताहिरा, प्लीज आई एम सीरियस, तुम बताओ न तुमने क्या सोचा?”

“भैया, सच बताऊँ तो मुझे यह सब ठीक लगा मगर डरते हैं तो बहुत सारी बदनामी भी हो जाएगी।”

मैं बोला, “अच्छा अपनी आँखें बंद करो और कुछ देर आराम से सोचो, जो मैं चाहता हूँ क्या तुम भी वही चाहती हो या नहीं।”

अब मैंने अपना हाथ ताहिरा की लेग्स को रब करना शुरू कर दिया। वो आँखें बंद करके सोच रही थी। अब मैंने दूसरा हाथ उसके स्तनों पर रख दिया और उसके स्तनों को ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा, जिससे उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मैंने अब उसका जवाब पूछा तो वो कुछ न बोली और आँखें बंद ही रखीं।

मैंने अपना हाथ को आगे बढ़ा दिया और लेग्स से उठाकर बहन की चूत पर रख दिया और चूत को मसलने लगा पैंट के ऊपर से। और ताहिरा का हाथ पकड़कर अपना लंड पर रख दिया। वो कुछ सिमट गई और घबरा भी गई। जैसे ही उसका हाथ मेरे लंड पर लगा तो 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड खड़ा हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब मैंने ताहिरा की पैंट की ज़िप खोलकर उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया जिससे वो कुछ घबरा गई। मैं बोला, “कुछ नहीं होगा, मैं तुम्हारा भाई हूँ।” फिर मैंने चूत को मसलना शुरू कर दिया और ताहिरा का मुँह अपने पास लाकर उसके पहले मुँह पर, फिर रसीले होंठों को चूसना शुरू कर दिया। वो भी मेरा साथ देने लगी, मगर उसका मेरे लंड पर नहीं चल रहा था, बस उसने पकड़ा हुआ था।

मैंने कहा, “ताहिरा, अपने हाथों को हिलाओ मेरे लंड पर, जैसा मेरा हाथ तुम्हारी चूत पर हिल रहा है।”

उसने आहिस्ता-आहिस्ता हिलाना शुरू कर दिया। आहिस्ता से बोली, “भैया, यह तो बहुत बड़ा है। क्या सबका ऐसा ही होता है?”

मैं बोला, “हाँ, तकरीबन।”

“इससे तो बहुत दर्द होता होगा?”

“हाँ, फर्स्ट टाइम होता है मगर जितना बड़ा हो मज़ा भी उतना ही देता है।”

तकरीबन 20 मिनट तक ताहिरा को किसिंग करना, चूत को मसलना हुआ और उसके स्तनों को दबाने से उसकी चूत गीली हो गई। जिससे थोड़ा सा पानी उसकी पैंट पर आ गिरा और पैंट गंदी हो गई। मैंने अब अपनी पैंट की भी ज़िप खोलकर अंडरवियर के बीच में से अपना लंड को बाहर निकाल दिया.

और ताहिरा का हाथ पकड़कर उसे ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगा और 5 मिनट में मेरा भी पानी निकल गया। अब हम नीचे पानी चले गए और बहन की पैंट उसने थोड़ी सी खुद ही धो दी और हम वापस आकर बैठ गए और पैंट सूखने का इंतज़ार करने लगे।

मैंने पूछा, “तुम्हें मज़ा आया?”

वो शर्मा कर बोली, “हाँ, थोड़ा सा।”

फिर बोली, “भैया, आपको.”

मैं हँस पड़ा और बोला, “तुमने कौन सी मेहनत की थी जो पूछ रही हो?”

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वो भी हँस पड़ी। हम तकरीबन रात 12 बजे घर लौटे, मगर अब मेरे जहन में यही चल रहा था कि कब चोदूँ बहन को। फिर मेरी ट्रांसफर कोलकाता में हो गई और मुझे वहाँ जाना पड़ गया। मुझे एक अच्छा घर मिल गया। मैं और बहन चैट के दौरान बहुत सी बातें करते थे और एक-दूसरे को अपना लंड और चूत भी दिखाते थे।

मेरे जाने के बाद मेरा रूम ताहिरा को मिल गया इसलिए रात में वो मेरे साथ कई-कई घंटे बात करती थी और कैम होने के कारण हम एक-दूसरे को कई बार कंपलीट नंगे भी करके मुझे वो सब कुछ दिखाती थी और मैं उसे दिखाता था। ऐसा ही 2 महीने और गुज़र गए।

अब ताहिरा भी मुझसे चुदवाने के बारे में बोलती थी और कहती थी, “भैया जल्दी से आ जाओ और मेरी चूत की प्यास बुझा दो।” एक दफा मेरी एक हफ्ता बात नहीं हुई ताहिरा से। यह फ्राइडे का दिन था। मुझे ताहिरा ने फोन किया और बोली, “भैया, लगता है बहुत मसरूफ हो, अपनी बहन को तो नहीं भूल गए?”

मैंने कहा, “नहीं, काम बहुत है आजकल इसलिए तुमसे बात नहीं हो सकी। आज नाइट में मिलते हैं।”

उसने ओके करके फोन बंद कर दिया।

अब जो हमारी चैट हुई वो ज़रा प्यारी थी। (रात 11 बजे का टाइम था, हम माइक और कैम यूज़ कर रहे थे)-

मैं: हेल्लो, कैसे हो मेरी प्यारी बहन?

 ताहिरा: जाओ भैया, मैं आपसे बात नहीं करती, आपको लगता है मुझे अच्छे कोई दूसरे मिल गए हैं।

मैं: नहीं, मुझे तुम्हारी कसम, ऑफिस में बहुत काम था इसलिए बात नहीं हो सकी।

ताहिरा: भैया, सच बोल रहे हो?

मैं: हाँ।

ताहिरा: अच्छा… आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो, क्या बात है?

मैं: घर में सब ठीक हैं?

ताहिरा: हाँ, सब ठीक हैं, एक मैं ही बीमार हूँ।

मैं: क्यों, क्या हुआ?

ताहिरा: आपको नहीं पता क्या हुआ? एक तो इतने दिनों बाद बात कर रहे हो और बोलते हो क्या हुआ है।

मैं: अच्छा बताओ, आज तुम्हारा मूड क्यों इतना खराब है?

ताहिरा: मेरा मूड तो ठीक है, मेरा मूड को क्या होना है।

मैं: नहीं, आज तुम बहुत गुस्से में लग रही हो।

ताहिरा: भैया जान, आए तो इतने दिन मिला नहीं, बात नहीं की, और कहते हो गुस्सा भी न करूँ।

मैं: ओह अच्छा, मैं समझ गया, मेरी प्यारी गुड़िया का मूड क्यों खराब है।

ताहिरा: शुक्र है आपको समझ तो लगी।

मैं: मुझे तो पहले से ही पता था मगर मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता था। वो तो तुमने बोला ही नहीं। खैर बताओ, मूड है तुम्हारा?

ताहिरा: कैसा मूड?

मैं: अब बनो मत वरना मैं ऑफलाइन हो रहा हूँ।

ताहिरा: भैया हो जाओ फिर मैं कभी बात नहीं करूँगी।

मैं: अरे, मैं तो मज़ाक कर रहा था।

ताहिरा: अच्छा……

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मैं: अच्छा, डोर लॉक है?

ताहिरा: हाँ, वो तो 2 घंटे से लॉक है भैया जान।

मैं: तो मेरी गुड़िया मेरा बहुत देर से इंतज़ार कर रही थी।

ताहिरा: हाँ ना।

मैं: अच्छा जी, चलो अब भैया आ गए हैं गुड़िया के सामने।

ताहिरा: भैया प्लीज जल्दी करो, मुझे सब्र नहीं है।

मैं: कहो तो तुम्हारे पास आ जाऊँ…

ताहिरा: भैया पता नहीं वो दिन भी आएगा या नहीं आएगा।

मैं: नेक्स्ट मंथ आने की कोशिश करूँगा।

ताहिरा: सच?

मैं: हाँ।

ताहिरा: ओके।

मैं: अच्छा, यह नई नाइटी ली है, बहुत सुंदर है।

ताहिरा: हाँ, वो मॉम के साथ शॉपिंग करने गई थी तो मॉम ने दिलवा दी।

मैं: अच्छा, ज़रा नाइटी को उतारोगी? बहुत दिन हो गए हैं तुम्हें नहीं देखा।

ताहिरा: या लो भैया (खड़ी होकर नाइटी खोल दी)

मैं: पैंटी और ब्रा भी।

ताहिरा: भैया या लो, बस अब खुश?

मैं: हाँ।

ताहिरा: अब आप भी तो कुछ दिखाओ, या सिर्फ मुझे ही देखना है।

मैं: (मैंने भी जल्दी से कपड़ा उतार दिया और कंपलीट न्यूड हो गया) बस…

ताहिरा: भैया, आज तो आपकी नुन्नी बहुत छोटी लग रही है।

मैं: बहन का हाथ जो नहीं लगा इतने महीनों से…

ताहिरा: भैया, इसे थोड़ा बड़ा करो ना।

मैं: हाँ, तुम ज़रा अपनी लेग्स को फैला कर बैठो चेयर पर और अपने स्तनों तो दिखाओ, हाथ में पकड़कर।

ताहिरा: ओके (और उसने स्तन मसलना शुरू कर दिया और चूत को लेग्स के बीच में खोल दिया.)

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मैं: (अब मैंने अपना लंड हाथ में पकड़कर हिलाना लगा और बहन को चोदने की सोचता मेरा लंड में जान आ गई) अब बड़ा हो गया है।

ताहिरा: हाँ भैया, अब पहला जैसा लग रही है आपकी नुन्नी।

मैं: अरे, अब यह नुन्नी नहीं, इसे लंड कहो।

ताहिरा: हाँ हाँ…

मैं: प्लीज एक बार कहो ना…

ताहिरा: आपका लंड बहुत बड़ा है।

मैं: तुम्हारे स्तन कौन से छोटे हैं… गजब ढाती हैं मुझ पर जब भी मैं इन्हें देखता हूँ।

ताहिरा: अब इतना भी बड़ा नहीं हैं।

 मैं: अच्छा, चलो अब सीट पर खड़ी हो जाओ, पीछे से मुझे दिखाओ, खोलकर।

ताहिरा: भैया, इसे गाँड ही कहते हैं ना?

मैं: हाँ, मगर तुम्हारी गाँड थोड़ी है, या तो पूरी एक हंडिया है।

ताहिरा: क्या मतलब?

मैं: बहुत मोटी हो गई है, क्या करते हो इसमें?

ताहिरा: बस ऐसे ही थोड़ी ही मोटी हो रही है।

मैं: अरे पगली, मोटी गाँड बॉयज़ को बहुत अच्छी लगती है।

ताहिरा: अच्छा (फिर वो सीट को पकड़कर घोड़ी बन गई और गाँड का सूराख एक हाथ से खोल दिया और मैं मुठ मारने लगा.)

मैं: बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हारी गाँड को देखकर मुठ मारने का। गाँड का सूराख थोड़ा और खोलो।

ताहिरा: भैया, मैं गिर जाऊँगी, चेयर को अगर छोड़ दिया।

मैं: ओके, सीधा हो जाओ।

ताहिरा: भैया, अब आप भी दिखाओ अपनी गाँड।

मैं: तुमने क्या करनी है?

ताहिरा: ऐसे ही बस देखनी है।

मैं: ओके (और मैं घोड़ा बनकर अपनी बहन को गाँड का सूराख दिखाने लगा.)

ताहिरा: इस पर तो बहुत सारे बाल हैं, कभी साफ नहीं किया क्या?

मैं: तुम करोगी साफ, तो मैं करवा लूँगा (और मैं भी सीधा हो गया.)

ताहिरा: भैया, मेरी चूत में पानी आ गया है।

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मैं: ओके, तो मेरी प्यारी बहन चेयर पर चूत को फैला लो और अपनी मिड फिंगर गीली करके अपनी चूत में डाल लो।

ताहिरा: ओके (और उसने मिड फिंगर चूत में डालकर हिलाना शुरू कर दिया) ओह… आह… भैया, काश तुम्हारा लंड होता तो मज़ा आ जाता। आप भी तो अपना लंड मुझे देखा-देखकर हिलाओ ना।

मैं: हाँ, मगर मैं सोच रहा हूँ काश तुम मेरे पास होती। तो कितना मज़ा आता।

ताहिरा: ताहिरा ने अब चूत में फिंगर डाली हुई है और बोल रही है, आह्ह्ह… भैया… मेरे पास आ जाओ और मुझे खूब प्यार करो, नहीं तो मैं मर जाऊँगी।

मैं: मैं आऊँगा तुम्हारे पास और तुम्हें खूब प्यार करूँगा। तुम अपनी चूत खोलोगी, मैं अपना लंड डालूँगा, तुम दर्द से आह्ह्ह… ओईईई… मर्र्र गई… कहोगी और मैं लंड चूत में डालता ही जाऊँगा।

ताहिरा: कब आएगा वो दिन? मैं तो थक गई हूँ इस फिंगर से। आह्ह्ह्ह… अपना स्तन दबाते हुए और चूत में फिंगर हिलाते हुए, आह्ह्ह्ह… भैया प्लीज जल्दी आ जाओ, मैं सालों की प्यासी हूँ, मेरी चूत को ठंडक पहुँचा दो, प्लीज जल्दी आ जाओ।

मैं: अपना लंड हिलाते हुए, कौन कंबख्त ऐसी चूत को छोड़ेगा? मगर मजबूरी है, मेरा लंड देख-देखकर तुम चूत ठंडी करो, मैं अपना लंड ठंडा करता हूँ।

ताहिरा: वही तो कर रही हूँ मगर सब्र नहीं होता। (और उसकी चूत से वीर्य का दरिया निकल आता है.)

मैं: और मेरा लंड का पानी कंप्यूटर स्क्रीन पर गिरता है, ऐसा लगता है जैसे बहन के मुँह पर छोड़ दिया हो।

ताहिरा: भैया, बिल्कुल भी मज़ा नहीं आया।

मैं: एक बार फिर करें? नहीं, बस अब तुम जल्दी से आ जाओ और फिर थोड़ी सी चैट के बाद बाय, गुड नाइट। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

और महीना बाद मुझे छुट्टी मिल गई और मैं घर पहुँच गया। यह एक सरप्राइज़ था सबके लिए, स्पेशली ताहिरा के लिए। वो मुझे देखकर शर्मिंदा भी हुई और खुश भी बहुत हुई और मुझे देखते ही मॉम के सामने गले लगा लिया। बातें करना और खाना के बाद मैं अपने जो अब ताहिरा का रूम था उसमें चला गया। मॉम ने एक बेड एक्स्ट्रा लगा दिया, जिससे मेरी और ताहिरा की खुशी 100% बढ़ गई। मैं नहा लेने के बाद नीचे मॉम और सब घर वालों से बातें करने लगा।

मॉम ने पूछा, “कितने दिनों के लिए आए हो?”

मैंने बताया, “15 दिनों के लिए।”

जिससे ताहिरा का मुँह लटक गया।

फिर मैंने बताया, “मेरी जल्द ट्रांसफर हो जाएगी।”

जिससे ताहिरा दोबारा खुश हो गई। अब रात के 12 बज चुके थे। मुझे सोने की जल्दी थी। ताहिरा भी मेरे रूम में इंतज़ार कर रही थी। मैंने मॉम, डैड से इजाज़त ली और सोने के लिए रूम में चला गया। रूम में जाते ही मैंने रूम की कुंडी लगाई और देखा ताहिरा मेरे बेड पर बैठी हुई है और उसकी आँखें बंद हैं। यह फर्स्ट टाइम था जब हमें सेक्स का मौका मिला और हम एक-दूसरे को न्यूड देखेंगे।

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ताहिरा बोली, “भैया, मुझे शर्म आ रही है, आज मत करना, कल करेंगे।”

मैंने कहा, “लाइट ऑफ कर देता हूँ।”

ताहिरा कुछ न बोली। मैंने राम से उसके पास बेड पर बैठ गया और उसकी नाइटी का बटन खोलने लगा। जैसे ही नाइटी उतरी, उसका व्हाइट बदन ने मुझ पर बिजली गिरा दी। फिर मैंने उसके स्तनों को ब्रा से आज़ाद करवाया तो वो उछलकर मेरे सामने आ गए।

फिर मैंने कंपलीट नाइटी उतार दी और उसको बेड पर लिटाकर पैंटी भी उतार दी। अब मेरी बहन मेरे सामने कंपलीट नंगी थी। और मैंने उसके होंठों को चूसना लगा। फिर मैंने होंठों को उसके स्तनों पर रख दिया और ज़ुबान निकालकर उसकी निप्पल्स और स्तनों को चाटने लगा।

हाईई… आज मैं और ताहिरा बहुत खुश थे। हम दोनों की मुराद पूरी हो गई। मैंने एक हाथ ताहिरा की चूत पर रख दिया जिससे वो तड़प उठी और मैं उसके स्तन चाटता रहा और उसकी चूत को हाथ से मसलता रहा। 20 से 30 मिनट तक यह जारी रहा और फिर ताहिरा ने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरे कपड़े उतारकर मेरे लंड को ज़ोर से दबा दिया, जिससे मेरी चीख निकल गई।

पहले उसने खूब दबाकर मुठ मारी, फिर लंड को चूसने लगी, फिर लंड की गेंदों से खेलने लगी और मुझे उल्टा होने को कहा। मैं हो गया तो मेरी गाँड को चाटने लगी और अपनी ज़ुबान और फिंगर से गाँड मारने लगी। उसने 30 मिनट तक मेरे लंड, लंड की गेंदों और मेरी गाँड का मज़ा लिया।

अब ताहिरा चुदवाने के लिए तैयार थी। अब मैंने अपना लंड पर और ताहिरा की चूत पर खूब सारा ऑयल लगा दिया (जो पहले से ही ताहिरा रूम में ले आई थी)। अब मैंने ताहिरा की गाँड के नीचे तकिया रख दिया और उसकी लेग्स को थोड़ा ऊपर उठाकर लंड को चूत के पास ले गया और ताहिरा से बोला, “अपना हाथ में मेरा लंड पकड़ लो और अपनी मर्ज़ी से चूत में डालो।”

और मैंने अपना होंठ ताहिरा के होंठों के साथ जोड़ दिया ताकि अगर उसकी चूत में दर्द हो और वो चिल्लाए तो आवाज़ बाहर न जाए। उसने आहिस्ता-आहिस्ता मेरा लंड चूत में लाना शुरू किया। मैं भी चूत में थोड़ा-थोड़ा ज़ोर लगा रहा था। आधा लंड तो चूत में चला गया और ताहिरा की चूत से ब्लड निकल आया, जिससे वो डर गई। मैं थोड़ी देर रुक गया और ताहिरा की चूत साफ करने लगा। उसे बहुत दर्द हो रहा था।

मैंने उसे समझाया, “यह तुम्हारी फर्स्ट टाइम चुदाई है इसलिए ऐसा हुआ है, फिर नहीं होगा और तुम्हें मज़ा भी आएगा।”

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मैंने एक बार फिर लंड को चूत में आधा डाल दिया और मैंने स्ट्रोक लगाना शुरू कर दिया। आधा लंड अब आहिस्ता-आहिस्ता चूत में शॉट्स लगा रहा था। और जैसे-जैसे चूत का सूराख खुलता जा रहा था ताहिरा खुद ही मेरा लंड अंदर ला रही थी। “भैया आज बहुत मज़ा आ रहा है तुमसे चुदवाने का। तुम मुझे रोज़ ऐसे ही चोदा करो।”

और मैं उसे चोदने में मसरूफ था। अब जब मेरा पूरा लंड अंदर चूत में चला गया तो मैंने अपनी स्पीड तेज़ कर ली और नीचे से ताहिरा भी झटके मारने लगी। ऐसी चुदाई 30 मिनट की। फिर मैं थक गया और ताहिरा मेरे ऊपर आ गई। अब चूँकि ताहिरा को मज़ा आ रहा था इसलिए उसने 2 से 3 झटके ऊपर से लगाए और पूरा लंड चूत में उतार लिया और ऊपर बैठकर उछलने लगी।

पूरा रूम में आवाज़ें चट-चट की आ रही थीं मगर बहुत आहिस्ता। और मैं और ताहिरा चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे। “आह्ह… आह्ह… आह… भैया तुम बहुत अच्छा हो… तुमने मुझे बहुत प्यार दिया… तुम मुझे चोद रहे हो और मुझे ज़रा भी दर्द नहीं हो रहा… मज़ा बहुत आ रहा है… ऐसे ही आराम-आराम से चोदा करो।”

और जैसे ही उसने स्पीड बढ़ा दी तो मैं समझ गया वो इंतहा पर आ गई है। मैंने भी नीचे से स्पीड बढ़ा दी। और ताहिरा की चूत ठंडे पर गई। मैंने अपना लंड निकाल लिया और ताहिरा को नीचे लिटाकर उसके स्तनों के दरमियान रखकर स्तनों की चुदाई करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

ताहिरा अपना हाथ पर थूक लगाकर मेरे लंड का हेड को रब कर रही थी और मेरा पानी आज फर्स्ट टाइम रियल में बहन के मुँह पर गिर गया। और मैंने अपनी ज़ुबान से चाटकर अपना मुँह का पानी ताहिरा के मुँह में डाल दिया और दोनों किसिंग करते हुए सुद लेट गए।

आधा घंटा बाद ताहिरा ने मेरा लंड दोबारा पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगी और बोली, “कितना मज़ा का लंड है भैया तुम्हारा। मुझे फिर मूड हो रहा है चुदवाने का। प्लीज एक बार और करते हैं।” मैंने कहा, “ठीक है, अब तुम्हारी प्यारी मोटी सी गाँड मारूँगा।”

वो खुश हो गई और उल्टी होकर लेट गई। मैं भी ऐसे स्टाइल में आ गया कि मेरा लंड उसके हाथ में आराम से आ जाए। अब वो मेरे लंड को अपने हाथों से मसल रही थी और मैं उसकी गाँड को चाट रहा था, फिंगर से गाँड का सूराख बड़ा कर रहा था। 20 मिनट में मेरा लंड फिर से तैयार हो गया।

अब मैंने ताहिरा को कंप्यूटर चेयर के साथ घोड़ी बना लिया और अपना लंड पर और ताहिरा की गाँड में खूब सारा ऑयल गिराकर चिकना बना दिया। फिर चिकनी गाँड पर 2-3 प्यार से थप्पड़ लगा दिए। फिर अपने हाथ से बहन की गाँड का सूराख खोलकर उसमें लंड घुसाने लगा। उसको बहुत दर्द हो रही थी और उसकी आँखों में से आँसू निकल रहे थे।

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मगर मैंने आहिस्ता-आहिस्ता लंड गाँड में डालता ही गया और अपनी फिंगर्स उसके मुँह में डाल दीं. जिससे उसकी चीखों की आवाज़ बाहर नहीं जा रही थी। अब मेरा लंड आधे से ज़्यादा 36 की गाँड में था और मैं मोटी कुंवारी गाँड का मज़ा ले रहा था। 10 मिनट में ताहिरा को मज़ा आने लगा और वो भी गाँड पटाख-पटाख कर मरवाने लगी। “ओह्ह्ह… मुझे तो बहुत दर्द हो रही है भैया… पहले बोली, जब मज़ा आने लगा तो बोली, भैया और घुसाओ ना गाँड में और भी मज़ा आ जाएगा। येस… चोदो मेरी गाँड भैया…

यह तुम्हारे लिए बहुत तड़पी है… इस तरह तड़पाया-तड़पाया कि चोदो… यह सिर्फ तुम्हारा लंड से ही चुदवाएगी… ज़रा ज़ोर से गाँड मारो… हाँ… थोड़ा तेज़… थोड़ा और… और मारो… मारो… मारो… अपनी बहन की गाँड मारो… पटाख-पटाख कर मारो और तेज़ मारो…” और तकरीबन 20-35 मिनट तक पटाख-पटाख कर गाँड मारने के बाद मेरा वीर्य बहन की गाँड में निकल गया और फिर मैं बस लेट गया बहन के साथ चिपककर और सो गया। मेरी बहन मेरे लंड के साथ पता नहीं कर तक खेलती रही और क्या-क्या किया…

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