Chudai Virgin Girl
मेरा नाम मुकेश है। मैं दतिया से हूँ। मेरी हाइट 5’10” है। जिम में नियमित रूप से 1 घंटा व्यायाम करने की वजह से मेरी बाइसेप्स, छाती, जांघों और फोरआर्म पर काफी मसल्स हैं। मेरी यह कहानी 1 साल पहले की है। मैं लगभग 4 साल से हमारी वासना पर सेक्स स्टोरीज़ पढ़ता आ रहा हूँ। मुझे स्टोरीज़ पढ़ने में बहुत ही मजा आता है। इससे पहले मैंने किसी लड़की को टच भी नहीं किया था। Chudai Virgin Girl
मेरा एक दोस्त है आशीष। हमारी अच्छी दोस्ती थी। मैं उसके घर जाया करता था। उसके घर पर आशीष के पापा और उसकी बड़ी बहन शिखा रहती थी। हम सब आपस में घुल-मिलकर बातें किया करते थे। आशीष के पापा बिजनेस में थे और बिजनेस की तरफ ही ज्यादा ध्यान था उनका।
शिखा की उम्र उस समय 26 साल थी और वह आशीष और मुझसे 3 साल बड़ी थी। शिखा प्राइवेट जॉब करती थी। वह देखने में बहुत ही खूबसूरत है। हाइट 5’5”, स्वस्थ लड़की, बड़ा-बड़ा जिस्म। बड़े-बड़े स्तन जो बिल्कुल गोल-गोल थे, अच्छी भारी और कसी हुई गांड। वह ज्यादा सलवार-कमीज पहनती थी।
सलवार ढीली-ढाली और कमीज़ थोड़ी टाइट पहनती थी, जिसमें से उसकी स्तनों की गोलाई साफ दिखाई देती थी। चलते-चलते उसके स्तन बहुत हिलते थे जैसे वह बाहर आना चाहते हों। जब वह चलती थी तो गांड को हिला-हिलाकर चलती थी। जिसे देखकर मेरा मन बहुत खराब हो जाता था। और मैं उसके बारे में गलत सोचने लगा। अब मैं ज्यादा आशीष के घर जाने लगा।
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एक दिन मैं उनके घर गया तो शिखा कपड़े धो रही थी। मैं उसके पास बैठ गया। उसके स्तन बहुत हिल रहे थे। मैं मजे लेकर शिखा के स्तनों को देख रहा था, लेकिन उसे मेरी इस हरकत की ओर ध्यान ही नहीं था। वो बोली, “मुकेश, मैं बहुत थक गई। तुम लड़के ही अच्छे हो, ये सब नहीं करना पड़ता है तुम लोगों को।”
मैंने कहा, “करो काम, मसल्स बढ़ जाएंगे।”
वो अपनी बाइसेप्स दिखाकर बोली, “मेरी बाइसेप्स देखो।”
इतने में आशीष आकर बोला, “मसल्स शो फिर कभी यार, अभी कुछ काम है। चल मेरे साथ।”
मैं और आशीष चल दिए। और कुछ 4 घंटे के बाद मैं अपने घर चला गया। दूसरे दिन छुट्टी थी और सुबह 10 बजे मैं आशीष के घर चला गया। सोचा चलो शिखा रानी का हिलता हुआ जिस्म ही देख लेता हूँ। लेकिन मैं कुछ भी करने से डरता था। मैं आशीष के घर गया। वहाँ शिखा अकेली थी क्योंकि आज छुट्टी थी।
मैंने कहा, “आशीष कहाँ है?”
वो बोली, “पापा ने उसे बिजनेस के सिलसिले में कहीं भेज दिया है। वो 2 दिनों तक आ जाएगा।”
उसने व्हाइट कलर की सलवार और रेड कलर की कमीज़ पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। हम कुछ देर बातें करने लगे।
मैंने कहा, “क्या बोल रही थी तुम कल मेरी बाइसेप्स देखो?”
वो बोली, “हाँ मुकेश बेटा, ये देख।”
मैंने अपनी टी-शर्ट हटाकर बोला, “मेरे देख बची, और ये देख मेरा चेस्ट मसल्स देख।”
वो बोली, “मेरा चेस्ट…….” बोलके रुक गई और थोड़ी शर्मा गई।
मैंने कहा, “बोल बोल, रुक क्यों गई?”
वो बोली, “चल छोड़, तुम जीत गए।”
बोली, “टी ले लोगे?”
मैंने कहा, “हाँ, लेकिन साथ बनाएंगे।”
उसने कहा, “ठीक है।”
वो उठी और किचन की ओर चल दी। मैं पीछे उसकी हिलती गांड को देखता रहा और उसके पीछे चल पड़ा। चाय बनाते समय वो मेरे साथ टच कर रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। एक बार वो पलटी और उसके स्तन मेरी आर्म के साथ टच हुए। वाह, मजा आया। मैंने एक हाथ उसके शोल्डर पर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। फिर हम चाय पीने लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर उसने कहा, “एक बात बोलूँ मुकेश?”
मैंने कहा, “हाँ बोलो।”
“तुम बहुत मस्कुलर हो। मुझे बहुत शौक है तुम्हारी मसल्स देखने का। बुरा मत मानना प्लीज।”
मैंने कहा, “इसमें बुरा ही क्या है?” कहते हुए मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी।
वो बोली, “वाह! तुम्हारी मसल्स तो बहुत बढ़िया हैं मुकेश। तुम बहुत स्मार्ट हो।”
मैंने कहा, “तुम कुछ कम नहीं हो।”
उसने कहा, “मैं क्या हूँ, झूठी तारीफ मत करो प्लीज।”
मैंने कहा, “सच, तुम बहुत ही खूबसूरत हो। मुझे तुम्हारे जैसी ही वाइफ होनी चाहिए।”
वो बोली, “चल बदमाश।”
मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया। बोला, “सच, तुम बहुत सेक्सी हो। मैं तो तुम्हारे लिए ही ज्यादा यहाँ आता हूँ। तुमने मुझे पागल कर दिया है। तुम क्या जानो अपने इस जिस्म की कदर। मेरा तो बहुत मन करता है तुमको छूने को और किस करने को।” (मैं आहिस्ता बोला)।
उसने मेरा हाथ हटाते हुए कहा, “तुम ऐसा सोचते हो मेरे बारे में? ये सब ठीक नहीं है मुकेश। मुझे पता नहीं था कि तुम ऐसे हो।”
मैं चुप रहा और टी-शर्ट हाथ में लेकर उठ गया और बोला, “सॉरी, मुझे माफ कर प्लीज। किसी को मत बताना। मैं अब कभी यहाँ नहीं आऊँगा।” और चलने लगा। उसने आवाज दी, “मुकेश रुको प्लीज। ये सब ठीक नहीं है। मेरी वजह से तुम यहाँ आना क्यों छोड़ दोगे?”
मैंने कहा, “तुमको देखता हूँ तो कुछ होता है और घर पर भी तुम्हारे ही खयालों में खोया रहता हूँ। मैं यहाँ नहीं आ सकता अब।”
वो थोड़ी मायूस सी होके बोली, “अच्छा बोलो, क्या चाहते हो तुम? और प्लीज किसी को पता नहीं चलना चाहिए। बोलो अब बूत की तरह खड़े क्यों हो?”
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मैंने अपने दोनों हाथ उसके शोल्डर पर रख दिए। बोला, “तुम बहुत स्वीट हो।” और उसे लिप किस करने लगा। मैं पागल सा हो गया। जिस परी को मैं छूना चाहता था, वो मेरी बाहों में थी। मैंने दोनों हाथ उसकी गांड पर ले गए और उसकी गांड को दबाने-मसलने लगा। मजा आ रहा था। मुझे उसके बड़े स्तन मेरे नंगे चेस्ट से चिपक गए। मैंने उसके स्तनों को हाथों में लेकर कमीज़ के ऊपर से ही दबाने लगा।
वो बोली, “मुझे क्या है कि तुम मेरे दीवाने हो गए हो?”
मैंने कहा, “तुम्हारी ब्रेस्ट्स जैसे ये कहते हैं, ‘आओ मुकेश पकड़ो प्लीज, पियो सारा दूध’। और तुम्हारी गांड, इस का तो मैं सच में दीवाना हूँ।” और बोला, “सुना है लड़की के दूध में बहुत एनर्जी होती है। मुझे नहीं पिलाओगी?”
वो मुझे हटाकर खड़ी हो गई। बोली, “मैं दरवाजा बंद करके आती हूँ।”
इस बार वो अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही हिलाती हुई चल पड़ी और दरवाजा बंद करके वहीं दरवाजे की ओर मुँह करके बड़े ही सेक्सी अंदाज में गांड को हिलाने लगी। मैं उठकर उसके पास गया और उसे पीछे से पकड़ लिया। मेरा लंड उसकी गांड की क्रैक में फंस गया और उसके स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगा।
वो बोली, “आह्ह्ह आहिस्ता प्लीज, यहाँ नहीं।” और हम बेडरूम में चले गए। उसने अपनी कमीज़ ऊपर की और अपनी एक ब्रेस्ट ब्रा में से निकाल के बोली, “ले पी दूध।” और मैंने उसका लेफ्ट ब्रेस्ट मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा। कुछ 10 मिनट के बाद मैंने उसकी कमीज़ उतारनी चाही लेकिन उसने नहीं माना। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बोली, “मुझे डर लगता है और ये सब ठीक नहीं है। और तो और पापा ने कहा था मैं लंच के लिए घर आऊँगा। प्लीज और अब तो ये सब चलता रहेगा ना मेरी जान। लेकिन आशीष और पापा की गैरमौजूदगी में ठीक है ना। चल मुकेश, टी-शर्ट पहन ले।” मेरा मूड खराब हो गया और मैं टी-शर्ट पहन ली और बैठ गया। तब तक वो खाना गर्म करने लगी। इतने में उसके पापा आ गए।
वो बोले, “मुकेश कब आए?”
मैंने कहा, “अंकल आज छुट्टी थी, सोचा आशीष के साथ कुछ गप्पे मार लूँ पर वो है ही नहीं।”
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अंकल बोले, “उसे मैंने काम से भेजा था। सुबह ही निकम्मा है, वो कुछ काम आता ही नहीं। अब मुझे भी जाना है। अच्छा हुआ तुम मुझे मिल गए। मैं आज शाम की गाड़ी से वहाँ जाऊँगा और कल शाम तक आशीष और मैं वापस आएंगे। बेटा प्लीज ऐसा करो, तुम आज रात यहीं आ जाना। शिखा को मैं तुम्हारे ही भरोसे अकेली छोड़ूँगा।”
मैंने कहा, “ठीक है अंकल, मैं अब जाऊँ, कुछ काम है और शाम को एक छोटी सी बर्थडे पार्टी में जाना है। मैं 9 बजे तक आ जाऊँगा।”
अंकल ने कहा, “ठीक है, शाम का खाना यहीं खाना।”
मैंने कहा, “मैं पार्टी में खा के आऊँगा। शिखा तुम खाना खा लेना प्लीज।”
अंकल बोले, “बेटा कल शाम तक यहीं रहना जब तक हम न आएँ। मैं 6:30 शाम की गाड़ी से जाऊँगा। बेटा थोड़ा जल्दी आना। शिखा का खयाल रखना। और शिखा तुम भी मुकेश का अच्छे से खयाल रखना। तुम जाओ अब अपना काम जल्दी खत्म कर लेना। मैं शाम तक यहीं हूँ, थोड़ा हिसाब करना है।” और मैं चला गया। मन में लड्डू फूट रहे थे।
शाम 7 बजे मुझे शिखा का फोन आया। बोली, “मुकेश आज कौन सा दिन है?”
मैंने कहा, “मंडे।”
वो बोली, “आज कोई खास दिन है क्या?”
मैंने कहा, “नहीं।”
वो बोली, “बुद्धू, आज हमारी शादी का दिन है। आज हमारी सुहागरात है। जल्दी घर आना पति देव जी।”
मैंने कहा, “ठीक है शिखा रानी।” और मैं खुशी से शाम का इंतजार करने लगा। 8:50 को मैं शिखा के घर पहुँचा। दरवाजा नॉक किया तो अंदर से आवाज आई, “दरवाजा खुला है, आ जाओ।” मैंने दरवाजा खोला। अंदर थोड़ी सी लाइट थी। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया और “शिखा शिखा” बोलके बेडरूम की ओर गया।
जब मैंने दरवाजा खोला तो देखा रूम सजा हुआ है जैसे सुहागरात वाला कमरा होता है। और शिखा रेड कलर के ड्रेस में बिल्कुल सजी-धजी, दुल्हन की तरह बेड पर पूरा घूँघट ओढ़े बैठी थी। मैं शिखा के पास बैठ गया और बोला, “क्या तैयारी की है यार?”
वो बोली, “मेरे पति के साथ मेरी पहली रात है और मैं इसको ऐसे ही कभी नहीं… मैंने उसका घूँघट उठाया। उसने शर्मा के अपनी आँखें नीचे कर लीं।”
मैंने बोला, “तुम अब इतना कैसे खुल गई हो? पहले तो बहुत नखरे कर रही थी।”
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वो बोली, “सच तो ये है मुकेश, मुझे तुम तब से अच्छे लगने लगे। अब मेरी एक फ्रेंड ने मुझसे कहा, ‘शिखा मुझे मुकेश से मिलवा दो, वो बहुत हैंडसम लड़का है। मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती हूँ।’ वैसे मेरी जो फ्रेंड्स हैं हरेक का बॉयफ्रेंड है लेकिन मेरा नहीं है।
जब मैंने तुम्हारी तारीफें अपनी सारी फ्रेंड्स से सुनी तो मैं सोचने लगी, सच में तू कितना हैंडसम है। मैंने अपनी फ्रेंड से कहा, ‘तुझे पता है मुकेश कौन है?’ वो बोली, ‘हाँ, तेरे ब्रदर का फ्रेंड।’ मैंने कहा, ‘नहीं, वो मेरा बॉयफ्रेंड है।’ और फिर उसने कहा, ‘सॉरी, मुझे पता नहीं था।’ मैंने कहा, ‘ठीक है, कोई बात नहीं।’
फिर कभी हम फ्रेंड्स बैठ के आपस में अपने-अपने बॉयफ्रेंड्स के बारे में बातें करते। सेक्स के बारे में भी बातें होती थीं। सब कहती थीं, ‘यार शिखा तुम लकी हो। तुम्हारा मुकेश के साथ कितना मजा लेती हो। वो तो तुमको जबरदस्त ठोके मारता होगा…’ सच यही है मुकेश, मैं भी तुमको कब से चाहती थी लेकिन डर लगता था। लेकिन आज तुम वो सारा सच कर दो जो मैं तुम्हारे बारे में सोचती और अपनी फ्रेंड्स से कहती थी।”
मैंने छेड़ते हुए कहा, “क्या करूँ?”
वो शर्मा गई और कुछ न बोली।
मैंने कहा, “बोलो ना, अपने पति से क्या डर, क्या शर्म?”
वो सर झुकाकर बोली, “मुझे किस करो, मेरे स्तन दबाओ और चूसो और… मुझे जम के चोदो।”
मैंने कहा, “शिखा रानी, गंदी बातें तेरे मुँह से सुनके मुझे नशा चढ़ रहा है। और बोलो ना रानी।”
वो बोली, “राजा, आज मेरा पूरा जिस्म तेरे हवाले। आज अपनी रानी को खूब चोदना। अपना प्यारा लंड मेरी चूत में डाल के जोर से चोदना।”
चूत का शब्द सुनते ही मैंने शिखा को पकड़ा और किस करने लगा। वो भी अच्छे से साथ देने लगी। शिखा को किस करते हुए मेरा दिमाग पूरी तरह से पागल हो चुका था। उसके होंठ नर्म और गर्म थे। हम दोनों की जीभ एक-दूसरे से लड़ रही थी। मैंने उसके होंठों को चूसते हुए एक हाथ से उसके बालों को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी कमर को अपनी तरफ खींच लिया।
वो भी मेरे साथ पूरी तरह से जुड़ गई थी। उसके बड़े-बड़े स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। कुछ देर किसिंग के बाद मैंने उसके होंठ छोड़े और उसके गले पर किस करने लगा। वो सिसकार रही थी, “आह्ह्ह मुकेश… राजा… धीरे…” मैंने उसके कान में फुसफुसाकर कहा, “रानी, आज तो मैं तुझे रात भर चोदने वाला हूँ। तेरी हर चीज मेरी है आज।”
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ये सुनकर वो और शर्मा गई लेकिन उसका शरीर गर्म हो रहा था। मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। उसकी रेड ड्रेस अभी भी उसके शरीर पर थी। मैंने ड्रेस के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। वो बहुत बड़े और भारी थे। मैंने ड्रेस के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके बटन खोलते हुए मैं उसके गले, छाती और पेट पर किस करता जा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आखिरकार ड्रेस पूरी तरह खुल गई। अंदर उसने ब्लैक कलर की लेस वाली ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी, जो उसके गोरे जिस्म पर बहुत हॉट लग रही थी। मैंने ब्रा के हुक खोल दिए। उसके दोनों बड़े-बड़े गोल स्तन छूटकर बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही खड़े हो चुके थे।
मैंने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा स्तन हाथ से मसल रहा था। शिखा कराह रही थी, “आह्ह्ह… मुकेश… चूसो… और जोर से चूसो… हाय मेरा दूध पियो राजा…” मैंने निप्पल को दांतों से हल्का-हल्का काटा भी। वो तड़प उठी। फिर मैंने नीचे की तरफ मुंह ले जाया।
उसके पेट पर किस करते हुए उसकी नाभि में जीभ डाल दी। वो हंसते हुए कराह रही थी। आखिरकार मैं उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर किस करने लगा। पैंटी पहले से ही भीगी हुई थी। मैंने पैंटी उतार दी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, सिर्फ ऊपर हल्की सी लाइन थी। गुलाबी और फूली हुई चूत देखकर मेरा लंड और भी ज्यादा खड़ा हो गया।
मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत की लिकोर चाटनी शुरू कर दी। शिखा चीख पड़ी, “आआह्ह्ह… मुकेश… क्या कर रहे हो… हाय… चूत चाट रहे हो… ओह्ह मादरचोद… और चाटो…” मैंने उसकी चूत में पूरी जीभ डालकर अंदर-बाहर करने लगा। साथ ही क्लिटोरिस को चूस रहा था।
वो अपने कूल्हे ऊपर-नीचे कर रही थी। कुछ ही मिनटों में वो पहली बार झड़ गई। उसका गर्म पानी मेरे मुंह पर छूटा। मैंने सारा पानी पी लिया। अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। मेरा 7 इंच लंबा और मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था। शिखा ने उसे देखा तो उसकी आँखें फैल गईं। “राजा… ये तो बहुत मोटा है… डर लग रहा है…”
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मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “रानी, ये तेरी चूत के लिए ही बना है। ले मुंह में लेके चूस।”
वो शर्मा रही थी लेकिन मैंने उसके सिर को पकड़कर लंड उसके मुंह के पास कर दिया। उसने हिचकिचाते हुए मुंह खोला और लंड का सुपाड़ा चूसने लगी। धीरे-धीरे वो पूरा लंड मुंह में लेने की कोशिश करने लगी। मैं उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुंह में धक्के मारने लगा। “हाँ रानी… अच्छे से चूस… जैसे तेरी फ्रेंड्स को चूसती होगी…” वो गैग हो रही थी लेकिन चूसती जा रही थी।
कुछ देर बाद मैंने उसे रोक दिया। अब मैं उसकी टांगों के बीच आ गया। लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो अधीर होकर बोली, “राजा… डाल दो… अब और इंतजार नहीं… अपनी रानी की चूत फाड़ दो…” मैंने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया।
वो चीख पड़ी, “आआह्ह्ह… धीरे… फट जाएगी…” मैं रुका नहीं। दूसरे धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। फिर मैंने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। शिखा के मुँह से सिर्फ आह्ह और उफ्फ निकल रहे थे। “जोर से… राजा… और जोर से चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… हाय मादरचोद… कितना मोटा लंड है तेरा…”
मैं उसके स्तनों को दबाते हुए तेज-तेज धक्के मार रहा था। कमरे में चूत चोदने की आवाजें गूंज रही थीं। पहली राउंड में करीब 15 मिनट चोदने के बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। उसकी कसी हुई गांड देखकर मेरा मन गांड मारने को हो रहा था। लेकिन पहले चूत ही पूरी करनी थी।
मैंने पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से ठोके मारने लगा। उसके स्तन लटककर हिल रहे थे। मैंने आगे हाथ बढ़ाकर उन्हें मसलने लगा। वो चिल्ला रही थी, “हाँ… इसी तरह… मेरी गांड पकड़ो… चोदो अपनी रानी को…” आखिरकार मैं झड़ने वाला था। मैंने तेजी बढ़ाई और अपना सारा माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। वो भी दूसरी बार झड़ गई। हम दोनों थककर लेट गए।
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लेकिन रात अभी बाकी थी। कुछ देर आराम करने के बाद शिखा मेरे लंड को फिर से चूसने लगी। मैंने उसे 69 पोजीशन में किया। वो ऊपर थी। मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को खा रहे थे। फिर मैंने उसे मिशनरी में फिर से चोदा। इस बार बहुत धीरे-धीरे, प्यार से। किस करते हुए, आँखों में आँखें डालकर। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो बार-बार कह रही थी, “मुकेश… मैं तुम्हारी हूँ… हमेशा तुम्हारी रहूँगी… चोदते रहो मुझे…”
तीसरी राउंड के बाद हमने थोड़ा ब्रेक लिया। मैंने किचन से पानी पिया और उसके लिए भी लाया। हम दोनों नंगे ही बैठकर बातें कर रहे थे।
शिखा बोली, “राजा… तुमने तो मुझे स्वर्ग पहुंचा दिया। मेरी फ्रेंड्स को भी नहीं पता होगा कि असली चुदाई कैसी होती है।”
मैंने हंसकर कहा, “अभी तो रात बाकी है रानी। तेरी गांड भी मेरी करनी है।”
ये सुनकर वो शर्मा गई लेकिन बोली, “जो चाहो करो… आज मैं पूरी तरह तुम्हारी हूँ।”
मैंने उसे घुमाकर पेट के बल लिटाया। उसकी मोटी और गोरी गांड देखकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने लंड पर थूक लगाया और उसकी गांड की दरार पर रगड़ने लगा।
शिखा घबराकर बोली, “धीरे करना मुकेश… पहली बार है… दर्द होगा…”
मैंने धीरे से सुपाड़ा गांड में डाला। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…” लेकिन मैंने रुककर उसे सहलाया, उसके बालों को चूमते हुए कहा, “आराम से रानी… थोड़ी देर में मजा आएगा।” धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी गांड में उतार दिया। कुछ देर रुकने के बाद मैंने हल्के-हल्के धक्के मारने शुरू किए। शिखा अब दर्द के साथ-साथ सिसकार रही थी, “आह्ह… ओह्ह… राजा… धीरे… हाँ… अब अच्छा लग रहा है…”
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मैंने स्पीड बढ़ाई। अब वो पूरी तरह गांड मरवा रही थी। “जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… मादरचोद… चोदो अपनी रानी की गांड…” मैंने उसे घोड़ी बनाकर, फिर साइड में, अलग-अलग तरीकों से उसकी गांड मारी। बीच-बीच में गंदी-गंदी बातें करते रहे। “तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हैं आज से।” “हाँ राजा… दोनों तुम्हारी हैं… जब चाहो चोद लेना…” “तेरी फ्रेंड्स को बता देना कि उनका मुकेश कितना जोर से चोदता है।” “हाय… शर्म आ रही है… लेकिन सच है… तुम बहुत जबरदस्त हो…” रात भर हमने चार बार चुदाई की।
दो बार चूत में, एक बार गांड में पूरा, और आखिरी राउंड फिर चूत में। हर बार वो झड़ रही थी। सुबह होने तक हम दोनों थककर चूर हो चुके थे। सुबह जब वो उठी तो नंगी ही मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी रही। बोली, “मुकेश… ये रात कभी नहीं भूलूँगी। अब तुम मेरे हो।” मैंने उसे चूमते हुए कहा, “और तू मेरी। जब भी मौका मिले, हम ऐसे ही मजे करेंगे।” उस दिन शाम को जब आशीष और अंकल वापस आए तो हम दोनों सामान्य व्यवहार कर रहे थे। लेकिन हमारी नजरों में एक नया मुकेश था।
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