Village Randi
मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो पूरी तरह से सच्ची है। यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त की है। मैं और मेरा दोस्त एक ही क्लास में पढ़ते हैं। यह घटना आज से तीन साल पुरानी है। वैसे मुझे अभिजित से बहुत पटती है। हम दोनों सेक्स की बातें भी करते थे और सेक्सी किताबें तथा फिल्में भी देखा करते थे। Village Randi
यह बात तब की है जब मैं अभिजित के भाई की शादी में गाँव गया था। मैं और अभिजित गाँव में शादी पर गए। हम दोनों शाम को 5 बजे गाँव पहुँचे। उसका घर 2 किलोमीटर चलकर था। हम पैदल चलकर ही घर पहुँचे। घर पर पहुँचते ही उसने सभी घर वालों से मेरा परिचय करवाया।
उसके घर में उसके माता-पिता, भाई-बहन और दो भाभियाँ भी थीं, जो कि छोटी थीं। उस रात हम दोनों खाना खाकर ऊपर छत पर जाकर सो गए। सुबह ही अभिजित मेरे पास आया और बोला, “मेरे साथ चल।” मैंने घड़ी देखी तो उस समय 5 बजे थे। मैंने बोला, “कहाँ पर?” तो वो बोला, “चल तो सही।”
हम दोनों थोड़ी दूर एक पहाड़ी पर गए। उस जगह पर कई पेड़ लगे थे। उसने मुझे पेड़ पर चढ़ने के लिए कहा। मैंने कहा, “क्यों?” तो बोला, “चढ़ तो सही।” हम पेड़ पर चढ़ गए। फिर उसने मुझे झाड़ी के पीछे देखने को कहा। मैंने देखा तो मैं देखता ही रह गया। वहाँ पर करीब 30-40 गाँव की औरतें टट्टी (हग) कर रही थीं।
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मैं यह सब देखकर पागल हो गया। एक साथ इतनी सारी चूत और गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने कभी भी ऐसा नजारा नहीं देखा था। उन औरतों की चूत पर बड़े-बड़े बाल थे और उनमें से किसी की गांड काली तो किसी की गोरी थी। मेरा दिमाग और भी ज्यादा खराब हो गया।
तब मैंने अभिजित की भाभी को भी टट्टी करते देखा। वो उनमें सबसे सुंदर थी। उसकी काली चूत और गोरी गांड अलग ही थी। वो सब टट्टी करके धो रही थीं और खड़ी हो रही थीं। वो कोई भी चड्डी (पैंटी) नहीं पहने थीं। जब मैंने अभिजित से कहा कि “तुम्हारी भाभी भी कर रही है,” तो अभिजित बोला, “मुझे पता है। मैंने अपनी माँ, बहन, भाभी सबकी चूत और गांड देखी है।”
और सभी औरतें अपने-अपने रास्ते चल दीं। अब हम दोनों ही रह गए। मेरा तो बहुत बुरा हाल था। मेरा लंड पूरा तना हुआ था। फिर हम घर को चल दिए। घर पर आकर मैं नहाने को गया। वैसे तो सब खुला हुआ था, पर एक कोने में छोटा सा बाथरूम था। मैं उस जगह जाकर नहाने बैठ गया।
मेरा ध्यान तो कहीं और था। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। मेरा लंड 8 इंच की पूरी लंबाई में था। वो शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैंने मुठ मारी, तब जाकर शांत हुआ। फिर मैं नहाकर बाहर आया। मैं अभिजित को ढूँढने लगा। मुझे अभिजित मिल गया।
मैंने कहा, “यार, तूने तो लंड खड़ा तो करवा दिया, अब शांत तो करवा।”
वो बोला, “कैसे?”
मैंने कहा, “कोई चूत नहीं मिलती यहाँ पर।”
फिर वो सोचकर बोला, “चल मेरे साथ।” उसने कहा कि पैसे लगेंगे। हम चल दिए। वो बोला, “हाल तो मेरा भी बहुत बुरा हो रहा है। मैं भी लंड को शांत करना चाहता हूँ।” हम चले जा रहे थे। दूर पहुँचकर एक कच्चा सा मकान बना हुआ था। बाहर चारपाई (खाट) पर एक औरत बैठी थी।
अभिजित उसके पास जाकर बैठ गया। फिर वो उससे बात करने लगा। उसने उसे मेरे बारे में बताया। वो उसे चाची बोल रहा था। चाची की उम्र 35 के आसपास होगी। बहुत सुंदर तो नहीं पर ठीक-ठाक थी। उसका फिगर 32-34-36 था, पर उसके स्तन (बूब्स) बहुत बड़े थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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अभिजित बोला, “यार 500 रुपये ले रही है, दे दे यार।”
अभिजित बोला, “पहले अंदर मैं जाऊँगा। घर पर शादी का काम चल रहा है, मैं जल्दी करके घर जाता हूँ। तू फिर आराम से करना।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
वैसे भी मैं कोई जल्दबाजी नहीं चाहता था। यह मेरी पहली चुदाई होने वाली थी। वो करीब आधे घंटे के बाद बाहर आया और बोला, “जा आराम से मजे कर।” मैं अंदर गया। वो खाट पर लेटी थी।
वो बोली, “चल जल्दी आ जा।”
मैंने कहा, “पहले उसको धो तो ले।”
वो बोली, “किसको?”
मैंने कहा, “चूत को।”
वो बोली, “खाएगा इसे?”
मेरा तो दिमाग खराब। फिर भी मैंने उसे समझाया कि ऐसे लगातार दो लोगों के करने से बीमारी लग जाती है।
वो बोली, “ठीक है, धो कर आती हूँ।”
मैं भी कोई रिस्क नहीं चाहता था।
फिर वो आ गई और खाट पर लेटकर बोली, “चल जल्दी कर।” और उसने अपना पेटीकोट ऊपर उठाकर बोली, “चल डाल दे जल्दी से।”
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मैंने बोला, “पूरे कपड़े नहीं उतारोगी क्या?”
वो बोली, “नहीं।”
मैंने कहा, “उतार दो ना, मैं तुम्हारे बूब्स देखना चाहता हूँ।”
मैंने उसके बूब्स की तरफ इशारा किया। मेरे को देखते हुए बोली, “अच्छा तो तू दूध देखना चाहता है।”
मैंने कहा, “हाँ।”
तो उसने अपना कुरता उतारा। वो अंदर ब्रा नहीं पहने थी। उसके बूब्स बहुत बड़े थे। एक हाथ में तो आ ही नहीं सकते। मैं उसके पास गया, उसके बगल में जाकर लेट गया और उसके बूब्स दबाने लगा। मैं उसके बूब्स जोर-जोर से मसल रहा था। वो एकदम गर्म हो गई। मैं उसको सिर से पैर तक चूमने लगा। वो तड़पने लगी।
वो बोली, “ये क्या कर रहा है? जल्दी से चूत में लंड डाल।”
मैंने कहा, “पहले लंड तो चूसो।”
वो मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। अब मैं एकदम मस्त हो रहा था। मुझे बहुत मजा आने लगा। मैं उसके मुँह में धक्के मारने लगा। और अब मैं उसकी चूत को मसलने लगा। मैंने उसकी चूत में उँगली डालकर अंदर-बाहर करने लगा। वो एकदम मस्त हो गई। अब मैं उसकी चूत की तरफ मुँह करके बैठ गया और उसकी चूत को चूम लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो बोली, “ये क्या कर रहा है?”
मैंने कुछ नहीं बोला और उसकी चूत जोर-जोर से चाटने लगा। वो चिल्ला रही थी, “मर गई आज! पहली बार कोई मेरी चूत को चाट रहा है। हाय मादरचोद! और चाट चूत को। बहुत मजा आ रहा है। और चाट! ओह्ह आह्ह्ह! और मादरचोद खा जा मेरी चूत को। अब तू इस चूत का पानी भी पीना।”
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मुझे उस साली रंडी की झांट बड़ी परेशान कर रही थी। साली बड़ी-बड़ी झांट मेरी नाक में घुस रही थी। मन करता था इसकी झांट नोच लूँ। फिर मैं और जोर से चाटने लगा। वो बाँछोद की रंडी झड़ने वाली थी। साली चूत उठाकर मार रही थी, चिल्ला रही थी, “वाह मादरचोद! आज तूने मुझे आसमान में पहुँचा दिया। चाट कुत्ते चाट! आह्ह्ह ओह्ह्ह! और जोर से।”
अब बस वो अपनी चरम सीमा पर थी और फिर उसने अपना पानी मेरे मुँह पर छोड़ दिया। उसका पानी ज्यादा था। कुछ उसकी झांट पर फैल गया और कुछ मेरे मुँह पर आ गया। मैं उसे चाटने लगा। फिर वो शांत पड़ गई। मैंने अपना लंड फिर से उसके मुँह में डाल दिया और वो चूसने लगी।
फिर मैंने जल्दी से अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और एक जोरदार झटका मारा। एक ही बार में पूरा लंड अंदर। मैं उसे चोदने लगा। मैं पूरी स्पीड से धक्के मार रहा था। वो मुझे गालियाँ दे रही थी, “जोर-जोर से मार मादरचोद! बहन के लौंडे! फाड़ दे साली इस चूत को। आज मुझे पहली बार इतना मजा आ रहा है। और मार!”
अब मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा। वो बन गई। फिर मैं चूत में पेल रहा था। एक बार उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया। मेरी नजर अब उसकी गांड पर थी। क्या मस्त गांड थी उसकी! मैं चोदते हुए एक उँगली उसकी गांड में डाल दी। वो चिल्ला पड़ी, “ये क्या कर रहा है?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं, मैं चेक कर रहा था। तुम्हारी गांड तो बहुत टाइट है। मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ।”
चाची बोली, “नहीं! मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई है। मैं गांड नहीं मरवा सकती।”
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मैंने कहा, “प्लीज एक बार मारने दो ना।”
वो बोली, “नहीं, गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है। और वैसे भी तुम्हारा लंड बहुत मोटा-लंबा है। मुझे तो डर लगता है।”
मैंने कहा, “मैं तुम्हारी गांड धीरे-धीरे मारूँगा। तुमको बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा। एक बार तुमने गांड मरवा ली ना तो हमेशा गांड ही मरवाती रहोगी। गांड मरवाने में बहुत मजा आता है।”
वो मान गई। “ठीक है।”
मैंने कहा, “पहले तेल (ऑयल) लेकर आ।”
वो नंगी तेल लेने गई। उसके चूतड़ बड़े मस्त लग रहे थे। वो तेल लेकर आ गई। अब हम खाट से जमीन पर बैठ गए।
“पहले तुम मेरे लंड पर तेल लगाओ। थोड़ा सा तेल मुझे दो, मैं तुम्हारी गांड पर लगाता हूँ।”
वो मेरे लंड पर तेल की मालिश कर रही थी। मैं उसकी गांड में तेल लगाकर एक उँगली उसकी गांड में अंदर-बाहर कर रहा था। फिर मैंने उसको कहा, “तुम घोड़ी बन जाओ।” वो बोली, “पहली बार है, धीरे से करना।” मैंने कहा, “तुम बिल्कुल चिंता मत करो।”
मैंने अपना लंड उसकी गांड के मुंह पर लगाया। मैंने धीरे से एक धक्का दिया। लंड का सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया। वो चिल्ला पड़ी, “बाहर निकालो! बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने नहीं माना। अगर एक बार बाहर निकाल लिया तो ये गांड नहीं मरवा पाएगी। मैंने एक जोरदार झटका मारा। लंड आधे से ज्यादा गांड में अंदर चला गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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वो चीख रही थी, “निकाल बाहर लंड! मुझे नहीं मरवानी। निकाल बाहर! छोड़ कुत्ते! मुझे माधरचोद! हरामी की पिल्ले! इस शहर वाले कमीने ने आज मेरी गांड फाड़ दी।” मैंने उसकी एक नहीं सुनी और एक झटका और दिया। पूरा लंड अंदर। उसकी गांड से खून निकल रहा था। वो रो रही थी। फिर मैंने हल्के-हल्के धक्के देना शुरू कर दिए। थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई। मैंने धक्के और तेज कर दिए। उसको भी मजा आने लगा और सिसक रही थी, “ओह्ह्ह आह्ह्ह!” चिल्ला रही थी। मैंने स्पीड और बढ़ा दी।
मेरा भी पानी छूटने वाला था। मैं पहली बार किसी की चुदाई और गांड मार रहा था। वो भी जमकर मजा ले रही थी। मैं लगातार झटके मार जा रहा था। मैंने बोला, “मैं अब झड़ रहा हूँ।” और फिर मेरा पानी उसकी गांड में निकल गया। और मैं उसके ऊपर ही लेट गया। फिर थोड़ी देर बाद मैं उठा। मैंने पानी से अपना लंड धोया। वो भी चूत और गांड साफ कर रही थी। मैंने उसको 100 रुपये दिए। वो बहुत खुश हुई पर बोली, “मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने कहा, “1-2 दिन में सही हो जाएगा।”
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