Chudai Ki Purani Yaadein
दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस (CP) की शामें हमेशा से ही एक अलग तरह के रोमांस और कशिश से भरी होती हैं। सेंट्रल पार्क की हरी-भरी घास पर उमड़ती चहल-पहल, सफेद पिलरों के बीच से छनकर आती गाड़ियों की हेडलाइट्स की रोशनी और हवा में तैरती कॉफी व सिगरेट की खुशबू मिलकर यहाँ एक अनोखा ही माहौल बनाती हैं। Chudai Ki Purani Yaadein
इसी CP के इनर सर्किल के एक बेहद आलीशान, महंगे और मशहूर लेडीज़ लाउंज-बार की मालकिन थीं—रोहिणी। उम्र करीब ३८ साल, लेकिन ढलती उम्र का कोई निशान उनके बदन पर नहीं था। गोरा मखमली रंग, कमर तक लहराते घने काले बाल, सुडौल कामोत्तेजक शरीर और तीखे नैन-नक्श।
रोहिणी की आँखों में एक ऐसा कठोर और राजसी रौब था कि दिल्ली के बड़े-बड़े रईसज़ादे, रसूखदार औरतें और बड़ी-बड़ी गाड़ियों से उतरने वाली लड़कियाँ भी उनके सामने आते ही अदब से बात करने लगती थीं। उनके बार में काम करने वाले लड़के और लड़कियाँ तो उनके एक बार पलटकर देखने भर से थर-थर कांपते थे। अनुशासन और सख्त मिजाज रोहिणी की पहचान थी।
कुछ साल पहले एक दर्दनाक कार एक्सीडेंट में उनके पति का साया हमेशा के लिए सिर से उठ गया था। उस हादसे ने रोहिणी को अंदर से तोड़ ज़रूर दिया था, लेकिन उन्होंने दुनिया के सामने आंसू बहाने के बजाय खुद को पत्थरीला बना लिया। पति की मौत के बाद इस पूरे बिज़नेस और बार के साम्राज्य को रोहिणी ने अकेले अपने दम पर खड़ा किया और संभाला।
बार की रंग-बिरंगी चकाचौंध, कानों को फाड़ देने वाला तेज़ म्यूज़िक, छलकते हुए महंगे कॉकटेल और हर रात आने वाले अमीर ग्राहकों की भारी भीड़ के बीच रोहिणी हमेशा एक सख्त, गंभीर और पहुंच से दूर रहने वाली ‘बॉस लेडी’ के रूप में ही जानी जाती थीं। कोई नहीं जानता था कि उस महँगी सिल्क की साड़ी और कड़क अंदाज़ के पीछे एक ३८ साल की जवान औरत का अकेलापन भी सिसक रहा था…
उसी लाउंज-बार के चमचमाते और शोर-शराबे वाले माहौल के बीच काम करता था—रोहित। उम्र महज़ २१ साल, बिहार के एक छोटे से शांत कस्बे से दिल्ली आया बेहद शर्मीला लड़का। लेकिन उसका बदन किसी साधारण लड़के जैसा नहीं था; छरहरा सुडौल शरीर, चौड़ी कसरती छाती, लंबा कद और दूध जैसा गोरा रंग।
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उसके चेहरे पर एक ऐसी गजब की मासूमियत और कशिश थी, मानो देवलोक से कोई युवा देवता ज़मीन पर उतर आया हो। रोहित दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक नामी कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर (अंग्रेजी साहित्य) की पढ़ाई कर रहा था। वह दिन भर शेक्सपियर, कीट्स और ग़ालिब की किताबों की दुनिया में खोया रहता था।
रोहित को एकांत में बैठकर कविताएं और शायरियां लिखने का एक गहरा शौक था। उसकी लिखी कविताएं बेहद रोमांटिक, भावुक और कभी-कभी ज़रा सी शरारती होती थीं। लेकिन उसका स्वभाव इतना शर्मीला और संकोची था कि वह अपनी लिखी लाइनें कभी किसी के साथ शेयर नहीं करता था, उन्हें अपनी डायरी के पन्नों में ही छुपाकर रखता था।
दिल्ली जैसे महंगे शहर में पढ़ाई का खर्च उठाने और पैसों की तंगी को दूर करने के लिए, उसने शाम के वक्त रोहिणी के इसी आलीशान बार में एक पार्ट-टाइम वेटर और हेल्पर के रूप में काम करना शुरू किया था। भले ही रोहित वहाँ एक अदना सा कर्मचारी था, लेकिन अपनी उस गज़ब की कद-काठी, गोरे बदन और सादगी भरे चेहरे के कारण वह बहुत जल्द बार में आने वाली रईस औरतों और जवान लड़कियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
जब वह ब्लैक शर्ट और ट्राउज़र पहनकर ट्रे हाथों में लिए टेबल के पास से गुज़रता, तो बार की मदहोश कर देने वाली लाइटों में उसका हुस्न और खिल उठता था। ड्रिंक के नशे में डूबी अमीर घराने की लड़कियां अक्सर उसे छूने या उससे बात करने के बहाने ढूंढती थीं, लेकिन रोहित अपनी नज़रें झुकाए, मर्यादा में रहकर बस मुस्कुरा देता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रोहिणी की तीखी और कड़क नज़रें भी कई बार अपने केबिन के शीशे से इस २१ साल के कसरती और मासूम लड़के को देर तक निहारती रहती थीं। उन्हें हैरानी होती थी कि इस हवस और शराब के दलदल जैसे बार में इतना पवित्र और सम्मोहक लड़का कैसे काम कर रहा है…
शुरुआत में रोहिणी के लिए रोहित बस बार का एक आम कर्मचारी था, लेकिन उस लड़के की बेदाग ईमानदारी, काम के प्रति निष्ठा और उसका शांत, गंभीर स्वभाव रोहिणी के सख्त दिल को धीरे-धीरे भाने लगा था। बार के उस शोर-शराबे और हवस से भरे माहौल में रोहित किसी शांत दरिया जैसा लगता था।
एक रात, बार बंद होने का वक्त हो चुका था। रोहित कॉलेज के असाइनमेंट की जल्दबाज़ी में अपनी शिफ्ट खत्म करके काउंटर साफ कर रहा था और उसी हड़बड़ाहट में वह अपनी पुरानी लेदर-कवर वाली नोटबुक बार काउंटर पर ही भूलकर घर निकल गया। देर रात जब रोहिणी राउंड पर निकलीं, तो उनकी नज़र उस डायरी पर पड़ी।
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कौतूहलवश उन्होंने उसे उठाया और केबिन में आकर जैसे ही पन्ने पलटे, उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह कोई मामूली नोटबुक नहीं थी; उसमें रोहित की रूह बंद थी। उसके भीतर बेहद रोमांटिक, गहरी, कामुक और कहीं-कहीं शरारत से भरी फ्लर्टी कविताएं लिखी थीं। हर शब्द में एक जवान पुरुष की तड़प और कल्पना साफ झलक रही थी।
अगले दिन जब रोहित बार में आया, तो वह अपनी डायरी को लेकर बुरी तरह परेशान था। तभी रोहिणी के पर्सनल वेटर ने आकर कहा, “रोहित, बॉस ने तुम्हें केबिन में बुलाया है।” रोहित की धड़कनें बढ़ गईं। वह जैसे ही केबिन के अंदर गया, रोहिणी अपनी महँगी सिल्क की साड़ी पहने, हाथ में वाइन का ग्लास लिए बैठी थीं और उनकी मेज़ पर वही डायरी रखी थी।
रोहिणी ने अपनी कत्थई आँखों से रोहित के छरहरे, कसरती बदन को ऊपर से नीचे तक निहारा और उनके होंठों पर एक ऐसी कटीली मुस्कान उभर आई जो रोहित ने पहले कभी नहीं देखी थी। रोहिणी ने डायरी की तरफ इशारा करते हुए बेहद मखमली और भारी आवाज़ में कहा, “तो… ये तुम्हारी अमानत है न रोहित? मैंने इसके सारे पन्ने पढ़ लिए हैं।”
रोहित का गोरा चेहरा शर्म और डर के मारे एकदम लाल हो गया। उसने नज़रें झुकाकर लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, “मैडम… वो… मुझे माफ़ कर दीजिए। मुझे बार में ये सब नहीं लिखना चाहिए था। मैं बस…” “माफ़ी किस बात की, रोहित?” रोहिणी अपनी कुर्सी से उठीं और हौले-हौले चलकर रोहित के बिल्कुल करीब आ खड़ी हुईं।
उनके महँगे फ्रेंच परफ्यूम की तीखी खुशबू ने रोहित के दिमाग में एक नशा सा घोल दिया। रोहिणी ने उसके चौड़े कंधे पर हल्की सी उंगली फेरते हुए कहा, “तुम्हारी कविताएं कमाल की हैं… बेहद खूबसूरत और मदहोश कर देने वाली। इतना गज़ब का टैलेंट इस मासूम चेहरे के पीछे छुपाकर रखते हो? वैसे… क्या तुम मेरे लिए भी कुछ लिखोगे? बस यूँ ही… मजे के लिए।”
रोहित ने अपनी जिंदगी में कभी किसी महिला को इतने करीब से नहीं देखा था। उसका दिल सीने में हथौड़े की तरह बज रहा था, लेकिन रोहिणी की आँखों का सम्मोहन ऐसा था कि वह मना नहीं कर पाया। उसने हाँ में सिर हिला दिया। अगली ही शाम, रोहित ने अपनी पहली कविता सीधे रोहिणी के हाथ में थमाई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वह कविता बार की धुंधली लाइटों, छलकती शराब और उस चकाचौंध के बीच बैठी एक अधूरी, अकेली मालकिन की हुस्न-ए-मल्लिका जैसी खूबसूरती पर थी। रोहिणी ने जब उसे पढ़ा, तो उनके भीतर सदियों से सोई हुई एक औरत अचानक जाग उठी। उन्होंने रोहित की आँखों में सीधे झांकते हुए कहा, “बहुत खूब रोहित… इसके अलफ़ाज़ तो सीधे दिल को छूते हैं। मेरे हुस्न को थोड़ा और बयां करो… और लिखो।”
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मंज़ूरी मिलते ही रोहित की कलम जैसे आज़ाद हो गई। अब उसकी कविताएं और अधिक फ्लर्टी, भड़काऊ और सीधे रोहिणी के जिस्म को छूने लगीं। एक शाम उसने लिखा कि ‘रोहिणी की आँखें कनॉट प्लेस की उस चांदनी जैसी हैं जो किसी को भी भटका दें’, तो दूसरी कविता में उसने उनके कत्थई होंठों की तुलना ‘बार की सबसे महँगी और मीठी वाइन’ से कर दी, जिसे चखे बिना कोई मर्द पूरा नहीं हो सकता।
इन लाइनों को पढ़कर रोहिणी का सख्त मिजाज पूरी तरह पिघलने लगा। वे कभी उन अलफ़ाज़ों को पढ़कर अकेले में हंसतीं, तो कभी जब रोहित उनके सामने आता, तो वे अपनी उम्र का लिहाज़ कर अपनी आँखें चुराने लगतीं। रोहित को भी अब साफ़ अहसास होने लगा था कि उनकी मालकिन और उसके बीच का यह रिश्ता अब सिर्फ ‘मालिक और नौकर’ का नहीं रहा, बल्कि उनके बीच एक बेहद गर्म और अनकहा कामुक बंधन बन रहा है।
वह अपनी उम्र के उस लंबे फासले को पूरी तरह भूलने लगा था—रोहिणी ३८ साल की थीं, उससे लगभग दोगुनी उम्र की, लेकिन उनकी आँखों की परिपक्वता, उनकी भारी आवाज़ और उनके सुडौल बदन का तीखा आकर्षण रोहित को किसी चुंबक की तरह अपनी तरफ खींच रहा था।
रोहित का शारीरिक और व्यावहारिक अनुभव इस मामले में बिल्कुल शून्य था; वह आज तक किसी लड़की के हाथ को छूने में भी शर्माता था, किसी के साथ करीब आना तो दूर की बात थी। वह एक मुकम्मल वर्जिन (अछूता) लड़का था। लेकिन रोहिणी की यह कड़क और कामुक मौजूदगी उसे वासना और सुख की एक ऐसी नई, अनदेखी दुनिया की झलक दे रही थी, जहाँ जाने के लिए उसका २१ साल का जवान, कसरती बदन अब हर रात सुलगने लगा था…
एक रात, बार बंद होने का वक्त हो चुका था और आखिरी ग्राहक भी जा चुका था। बाहर कनॉट प्लेस की रात धीरे-धीरे ठंडी और सुनसान हो रही थी, लेकिन बार के भीतर का तापमान अचानक बढ़ने लगा था। रोहिणी ने रोहित को रुकने का इशारा करते हुए कहा, “रोहित, आज थोड़ा रुक जाओ… तुरंत मत निकलो। मैंने अपने पर्सनल कलेक्शन से एक बेहद स्पेशल वाइन निकाली है। आज हम कुछ बातें करेंगे… सिर्फ तुम और मैं।”
रोहित का दिल सीने के भीतर हथौड़े की तरह बजने लगा। वे दोनों वीआईपी लाउंज के आलीशान काउंटर के पास बैठ गए। कांपते हाथों में क्रिस्टल वाइन के ग्लास थे। बातें शुरू हुईं—रोहित की कामुक कविताओं से, और फिर धीरे-धीरे ज़िंदगी के खालीपन पर आकर टिक गईं।
रोहिणी ने वाइन की चुस्की लेते हुए अपने कत्थई होंठों को जीभ से चाटा और रोहित के कसरती बदन को घूरते हुए बेहद भारी, मादक आवाज़ में कहा, “तुम्हें क्या लगता है रोहित… इस आलीशान बार और रसूख के पीछे मैं बहुत खुश हूँ? मेरे इस जिस्म और ज़िंदगी में सालों से प्यार की, एक मर्द के छुअन की भयानक कमी है। तुम्हारी इन भड़काऊ कविताओं ने मेरे भीतर सोई हुई उस भूखी औरत को दोबारा ज़िंदा कर दिया है। ये लाइनें मुझे जीने का बहाना देती हैं।”
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रोहित ने हिम्मत जुटाकर रोहिणी की कटीली आँखों में सीधे झांका। वहाँ मर्यादा की कोई दीवार नहीं थी, बल्कि वहाँ ३८ साल की एक तजुर्बेकार औरत की बेकाबू कामुक आग और भूख साफ़ झलक रही थी। बातें करते-करते रोहिणी अचानक अपनी कुर्सी से उठीं और रोहित के दोनों घुटनों के बीच अपनी सुडौल जांघों को फंसाते हुए उसके बिल्कुल करीब आ गईं।
उन्होंने रोहित की चौड़ी छाती पर अपनी गर्म हथेली रखी और धीरे से उसका हाथ पकड़कर अपने मखमली बदन पर फेरते हुए बोलीं, “तुम जितने मासूम दिखते हो रोहित… तुम्हारी कविताएं उतनी ही ठरकी और भड़काऊ हैं। कसम से, मुझे तुम्हारी इन कविताओं से ज़्यादा तुम्हारी यह सुडौल मर्दानगी और तुम खुद पसंद हो।” रोहित की सांसें इतनी तेज़ हो गईं मानो उसका दम निकल जाएगा।
उसने हाँफते हुए कहा, “मैडम… आप… आप होश में तो हैं ना? मैं आपका एक मामूली वेटर हूँ, मेरी उम्र…”
“शट अप रोहित!” रोहिणी ने उसकी बात बीच में ही काट दी और अपनी सुराहीदार गर्दन को थोड़ा झुकाते हुए उसके कानों के पास फुसफुसाई, “इस बंद कमरे में कोई मालकिन और वेटर नहीं है… यहाँ सिर्फ एक प्यासी औरत है और उसके सामने एक बेहद हॉट और जवान मर्द है। क्या तुम आज अपनी इस मालकिन की प्यास नहीं बुझाओगे?”
इतना कहते ही रोहिणी ने बिना एक पल गंवाए अपने मदहोश कर देने वाले होंठ सीधे रोहित के अछूते होंठों पर टिका दिए। यह रोहित की ज़िंदगी का पहला चुंबन (First Kiss) था—बेहद गहरा, पैशनेट और भड़काऊ। रोहिणी अपनी जीभ उसके मुँह के भीतर डालकर उसके सीधेपन का रस चूसने लगीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रोहित का पूरा बदन बिजली के झटके की तरह कांप उठा, लेकिन उसके २१ साल के जवान बदन की मर्दानगी ने अंगड़ाई ली और उसने भी पागलों की तरह रोहिणी के होंठों को भींचना शुरू कर दिया। रोहिणी ने मदहोशी में सिसकते हुए रोहित की कलाई पकड़ी और उसे खींचते हुए बार के पीछे बने उस पर्सनल बैक-रूम (रेस्ट रूम) के अंदर ले गईं, जहाँ एक छोटा सा मखमली बेड लगा हुआ था।
वहाँ की लाइट्स एकदम डिम और गुलाबी थीं, और बाहर से कनॉट प्लेस की रात का मद्धम सन्नाटा छनकर आ रहा था। कमरे के अंदर पैर रखते ही रोहिणी का सब्र पूरी तरह टूट गया। उन्होंने रोहित को दीवार से सटाया और एक-एक करके उसकी ब्लैक शर्ट के बटन खोलने लगीं।
जैसे ही शर्ट खुली, रोहित की चौड़ी कसरती छाती और गोरा सुडौल बदन रोहिणी के सामने बेपर्दा हो गया। रोहिणी ने झुककर उसकी छाती के कड़े निप्पलों को अपने मुँह में भरा और काटने लगीं। रोहित मारे उत्तेजना के कांप रहा था, उसका ९ इंच का हथियार उसकी पैंट के अंदर पूरी ताकत से कड़ा होकर बाहर आने को मचल रहा था।
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रोहिणी ने उसकी बेताबी को देखा, उसके गालों को चूमा और शरारत से हंसते हुए फुसफुसाई, “आराम से मेरे शेर… इतनी भी क्या जल्दी है। आज मैं तुम्हें जवानी के उस सुख का स्वाद चखाऊँगी जिसकी तुमने सिर्फ किताबों में कल्पना की होगी।”
उन्होंने रोहित को उस मखमली बेड पर चित लेटा दिया और खुद उसके ऊपर आकर बैठ गईं। रोहिणी का हाथ जैसे ही नीचे बढ़ा और उन्होंने रोहित की पैंट के ऊपर से ही उसके उस कड़े, विशाल अंग को अपनी मुट्ठी में भींचा, तो उनकी आँखें भी फटी की फटी रह गईं।
उन्होंने मदहोश होकर रोहित के कान में कहा, “ओह माय गॉड रोहित… इस मासूम चेहरे के पीछे इतना बड़ा और कड़ा मूसल छुपा रखा है? आज तो मज़ा ही आ जाएगा।” रोहित ने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी औरत के जिस्म की इतनी तीखी गर्माहट, उसके भारी बूब्स का दबाव और उसके परफ्यूम की मादक खुशबू को इतनी नज़दीकी से महसूस किया था।
रोहिणी ने नीचे झुककर अपने रेशमी बालों को उसके पेट पर बिखेरा और हॉट रोमांस की एक भड़काऊ शुरुआत की—पहले उसके होंठों को चूसते हुए वे धीरे-धीरे नीचे उतरीं, उसकी पैंट और अंडरवियर को एक ही झटके में पैरों से बाहर निकाला और रोहित के उस अछूते, कुँआरे लंड को पूरा अपने मुँह के हलक में उतारकर पागलों की तरह ओरल सेक्स करने लगीं।
रोहित बेड पर अपनी गांड उठा-उठाकर तड़पने लगा। रोहिणी की गर्म जीभ और मुँह के उस तीखे वैक्यूम ने रोहित को एक ऐसी चरम खुशी और हवस की दुनिया की झलक दी, जिसकी उसने अपनी किसी भी रोमांटिक कविता में कभी कल्पना तक नहीं की थी…
रोहिणी उस बैक-रूम के मद्धम सन्नाटे में ओरल तरीके से, धीरे-धीरे रोहित के उस ९ इंच के कुँआरे लंड को चूसते हुए उसे मदहोशी के सातवें आसमान पर ले जा रही थीं। उनकी गर्म जीभ जब लंड के सुपाड़े पर गोल-गोल घूमती, तो रोहित बेड की चादर को मुट्ठियों में भींचकर ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगता।
कमरे में उसकी मर्दानी कराहें गूँज रही थीं—”रोहिणी… आआह्ह… ओह… रोहिणी, मैं मर जाऊँगा!” तभी रोहिणी ने पूरी तरह हावी होते हुए अपने मुँह से लंड बाहर निकाला। उनके होंठ रोहित के वीर्य के शुरुआती पानी से चमचमा रहे थे। वे घुटनों के बल उठीं और रोहित के चेहरे के ठीक ऊपर आकर बैठ गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उन्होंने रोहित का हाथ पकड़ा और ज़बरदस्ती अपने भारी, उभरे हुए स्तनों पर रगड़ते हुए बेहद तीखी और जोशीली आवाज़ में कहा, “बहुत हुआ सब्र रोहित… अब ज़रा भी देर मत करो, अपनी इस मालकिन का यह महँगा ब्लाउज फाड़कर अलग करो और मेरी इस जवानी को आज़ाद करो!”
रोहित ने कांपते हुए हाथों से उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोल दिए। जैसे ही ब्लाउज और ब्रा बदन से अलग हुए, रोहिणी के ३८ साल के बेहद सुडौल, भारी और गोरे बूब्स रोहित के चेहरे के ठीक सामने आ गए। उनके जिस्म के ये तीखे कर्व्स, उनकी मखमली स्किन और निप्पलों का कड़ापन रोहित को पूरी तरह पागल कर रहा था।
रोहिणी ने झटके से अपनी आखिरी पैंटी भी पैरों से निकाल फेंकी और रोहित को ऊपर खींचते हुए अपनी दोनों चौड़ी जाँघों को पूरा फैला दिया। अब दोनों के बीच कोई पर्दा नहीं था। रोहिणी ने रोहित के ९ इंच के कड़े मूसल को अपने हाथ में पकड़ा और उसे अपनी पूरी तरह गीली और चिपचिपी हो चुकी फुद्दी के मुहाने पर टिका दिया।
उन्होंने रोहित की आँखों में आँखें डालकर अपनी गांड नीचे की तरफ दबाई, और मंदीप का वह भारी हथियार एक ही झटके में रोहिणी की गहराई को चीरता हुआ अंदर धँस गया। “आआआआह्ह्ह्ह… यस रोहित! गॉड… कितना बड़ा है तुम्हारा!” रोहिणी ने अपनी आँखें भींच लीं।
इस पहले प्रहार के साथ ही रोहिणी ने रोहित की वर्षों की मासूमियत को हमेशा के लिए तोड़ दिया। शारीरिक संबंध बनाते हुए, वे बेहद गहराई से और एक ख़ास रिदम के साथ अपनी गांड ऊपर-नीचे करने लगीं। रोहित का व्यावहारिक अनुभव भले ही शून्य था, लेकिन उसका २१ साल का खून इस वक्त उबाल मार रहा था।
वह एक अनाड़ी घुड़सवार की तरह अपनी इस ३८ साल की मदमस्त घोड़ी को अंधाधुंध दौड़ा रहा था—बिना रुके, ताबड़तोड़ और भारी झटके मारते हुए। कमरे में दोनों के कूल्हों के टकराने की ‘थप-थप-थप’ की आवाज़ें गूँज उठीं। पर रोहिणी कहाँ हार मानने वाली थीं! वर्षों से तड़पती हुई इस कामुक औरत ने अपनी काम-कला के पूरे अनुभव को निचोड़ दिया था।
वे नीचे से अपनी गांड को गोल-गोल घुमाकर रोहित के हर झटके को अपने गर्भाशय की आख़िरी दीवार पर झेल रही थीं और चरम सुख की ऊँचाइयों को छू रही थीं। उन्होंने अपनी दोनों टांगें रोहित की कमर पर कसीं और मदहोशी में चीखते हुए निर्देश दिया, “हाँ… मेरे राजा… ऐसे ही… और ज़ोर से पटको मुझे… पूरा ९ इंच अंदर तक डालो!”
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रोहिणी की आँखें बंद थीं, उनके घने काले बाल बेड पर बिखरे हुए थे, और उनका पूरा बदन ऐसे हिल रहा था जैसे कमरे के भीतर कोई भयानक तूफ़ान आ गया हो। रोहित ने उनकी चौड़ी और सॉफ्ट हिप्स को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और झटकों की रफ़्तार को और तेज़ करते हुए उन्हें पूरी तरह गाइड किया।
लगभग ४५ मिनट के इस भीषण और लगातार चलने वाले संभोग के बाद, दोनों का क्लाइमेक्स इतना इंटेंस और ज़बरदार था कि दोनों का पूरा बदन थरथरा उठा। रोहित ने अपनी कमर को पूरी ताकत से रोहिणी की चूत के अंदर भींचा और अपना सारा गाढ़ा, गर्म वीर्य उनकी फुद्दी की गहराई में खाली कर दिया, जबकि रोहिणी भी ज़ोर से चिल्लाते हुए पूरी तरह झड़ गईं।
दोनों पूरी तरह निढाल होकर एक-दूसरे की बाहों में लिपटकर बेड पर गिर पड़े। वह रात सचमुच दोनों का दिमाग हिला देने वाली थी—रोहित के लिए उसकी ज़िंदगी की यह पहली शारीरिक शुरुआत थी, और रोहिणी के उस अनुभवी साम्राज्य की सबसे यादगार और मदहोश कर देने वाली रात! ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उस तूफ़ानी रात की अगली सुबह जब रोहित सोकर उठा, तो उसके ज़हन में एक अजीब सी सिहरन थी। उसने धड़कते दिल से रोहिणी को मोबाइल पर एक मैसेज किया। लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। रोहित ने बार में भी उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन रोहिणी ने अचानक उससे एक गहरी दूरी बना ली थी।
शायद ३८ साल की तजुर्बेकार रोहिणी को अपनी उम्र के फासले का अहसास हो गया था, या फिर समाज का वह डर उसके मन में बैठ गया था कि यह रिश्ता अगर और आगे बढ़ा, तो तबाही लाएगा। इसी कशमकश के बीच रोहित की कॉलेज की फाइनल परीक्षाएं आ गईं।
पढ़ाई ख़त्म होते ही वह हमेशा के लिए दिल्ली छोड़कर अपने गृह राज्य बिहार (पटना) लौट आया। वहाँ उसने कड़ी मेहनत की और एक बड़ी सरकारी नौकरी हासिल कर ली। समय अपनी रफ़्तार से भागता रहा, लेकिन कनॉट प्लेस के उस बैक-रूम की वह रात रोहित के दिल के किसी कोने में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।
अब, पूरे दो दशक (२० साल) बीत चुके हैं। रोहित आज ४० साल का एक परिपक्व और ज़िम्मेदार मर्द है। उसकी शादी हो चुकी है, घर में एक प्यारी पत्नी और बच्चे हैं। वह अपनी पत्नी से बेहद मोहब्बत करता है और उनकी जिंदगी पूरी तरह से स्थिर और खुशहाल है।
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लेकिन इंसानी दिमाग भी बड़ा अजीब होता है; आज भी कभी-कभी, अपनी पत्नी के साथ बिताए जाने वाले उन बेहद निजी और इंटिमेट मोमेंट्स (शारीरिक संबंधों) के दौरान रोहित के ज़हन में अचानक ३८ साल की रोहिणी का वह सुडौल बदन और उसकी मदहोश कर देने वाली कराहें तैर जाती थीं।
उसकी बंद आँखों की फैंटेसी में वह रात आज भी पूरी तरह जीवित हो उठती। रोहित अक्सर अकेले में सोचता—ऐसा क्यों होता है? शायद इसलिए क्योंकि वह उसकी ज़िंदगी का पहला शारीरिक अनुभव था, या फिर इसलिए कि उस रात में एक ऐसा बेकाबू और आदिम जुनून था, जो आज के इस ठहराव भरे वैवाहिक जीवन में कहीं मिसिंग (गायब) था।
अपनी पत्नी के साथ चरम सुख पाते समय जब भी वह रोहिणी की कल्पना करता, तो अंदर ही अंदर एक भयानक गिल्ट (अपराधबोध) और घुटने वाले दर्द से भर जाता। वह जानता था कि वह अपने इस अतीत को कभी बदल नहीं सकता। आखिरकार, एक दिन रोहित ने इस कशमकश को ख़त्म करने का फैसला किया।
उसने तय किया कि वह अपनी पत्नी से बात करेगा—पूरी पुरानी कहानी या रोहिणी का नाम लिए बिना, वह सिर्फ अपनी भावनाओं को उसके सामने रखेगा। एक शांत शाम को उसने अपनी पत्नी का हाथ थामा और उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ… तुम मेरी ज़िंदगी हो। लेकिन कभी-कभी मुझे ऐसा महसूस होता है कि हमारे इस रिश्ते में, इस बिस्तर पर वो पुराना जुनून कहीं खो गया है, कुछ मिसिंग है। क्या हम अपनी इस नीरस होती ज़िंदगी में कुछ नया, कुछ अलग ट्राई कर सकते हैं?”
उसकी समझदार पत्नी ने उसकी आँखों के खालीपन को समझा। वे दोनों किसी ईगो को बीच में लाए बिना साथ में एक मैरिज काउंसलर के पास गए। वहाँ थेरेपी और काउंसलिंग के दौरान रोहित ने सीखा कि शादी के बरसों बाद पुरानी यादों का आना या किसी फैंटेसी का जागना बिल्कुल सामान्य (नॉर्मल) है, लेकिन अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को मज़बूत बनाए रखना ही सबसे ज़रूरी काम है।
रोहित ने रोहिणी की उस २० साल पुरानी याद को एक अफ़सोस बनाने के बजाय उसे एक सबक में बदल दिया—कि प्यार समय के साथ अपना रूप बदलता है, लेकिन बिस्तर के जुनून को दोनों को मिलकर ज़िंदा रखना पड़ता है। अब, वह अपनी पत्नी के साथ नए सिरे से रोमांस की नई यादें बुनने लगा। इसी सिलसिले में वे दोनों एक रोमांटिक ट्रिप पर दिल्ली आए—उसी शहर में, जहाँ से रोहित की जवानी की शुरुआत हुई थी।
कनॉट प्लेस के एक आलीशान होटल के कमरे में, जब बाहर दिल्ली की रात मद्धम हो रही थी, दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आए। उस रात अपनी पत्नी के जिस्म की छुअन में रोहित को वही पुराना जुनून महसूस हुआ। उसे अहसास हो गया कि रोहिणी का वह अतीत अब सिर्फ उसकी डायरी का एक पन्ना था, जबकि उसका वर्तमान उसकी पत्नी की बाहों में पूरी तरह मुकम्मल था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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यह कहानी हमें सिखाती है कि अतीत की पुरानी और अधूरी यादें कभी-कभी इंसान की ज़िंदगी के बंद कमरों में दस्तक देती रहती हैं। उन्हें मन में दबाकर रखने या छुपाने से इंसान के भीतर का गिल्ट और मानसिक तनाव बढ़ता है। अगर आप भी कभी अपनी जिंदगी में ऐसी किसी स्थिति से गुज़र रहे हैं, तो सबसे पहले खुद से ईमानदारी से बात करें कि वह पुरानी याद इतनी मजबूत क्यों है? क्या आपके वर्तमान रिश्ते में उस जुनून या संवाद की कमी है? अपने पार्टनर से खुलकर कम्युनिकेट करें.
बिना अतीत की गंदी डिटेल्स शेयर किए अपनी इच्छाओं को उनके सामने रखें। ज़रूरत पड़ने पर प्रोफेशनल काउंसलिंग लें, और वैवाहिक जीवन में नयापन लाने के लिए रोमांटिक ट्रिप्स या अपनी फैंटेसीज़ को एक-दूसरे से शेयर करना शुरू करें। याद रखें: शादी के बाद भी रिश्ते में उस शारीरिक और मानसिक जुनून को बनाए रखना पति और पत्नी, दोनों की बराबर की ज़िम्मेदारी है। अतीत को एक खूबसूरत याद के रूप में सम्मान दें, लेकिन अपनी प्राथमिकताओं में हमेशा अपने वर्तमान को सबसे ऊपर रखें। इसी से आपकी जिंदगी और आपका परिवार हमेशा महकता रहेगा।
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