Bahu Sasur Sex
हमारे घर के पड़ोस वाले घर में राजाराम नाम का जो आदमी रहता था, उसकी दो बहुएँ थीं। घर पर सास नहीं थी, केवल दो लड़के थे। वे गाँव के रहने वाले थे और लड़के दोनों सीधे-सादे थे। दोनों बहुएँ भी अभी कम उमर की थीं। बड़ी बहू 20 की और छोटी वाली तो 18 की ही लगती थी। मुझे तो छोटी बहू अभी कुंवारी ही लगती थी। Bahu Sasur Sex
दोनों साड़ी पहनती थीं और घूँघट भी करती थीं, पर जब दोनों लड़के काम पर चले जाते तो दोनों सलवार-कमीज पहन लेती थीं। उनकी इस हरकत से मुझे एक शक सा हुआ। मैं ताक-झाँक करने लगा। एक महीना इसी तरह बीत गया। एक दिन करीब 11 बजे मैंने उसे अपनी बड़ी बहू को आवाज देते देखा तो जल्दी से दीवार से उचक कर देखने लगा। वह एक कुर्सी पर बैठा था। बड़ी बहू आई तो वह उसकी चुचियों को देखता बोला, “आओ मेरी जान।”
यह देख मैं समझ गया कि मेरा शक सही था। वह पास आई तो उसकी दोनों चुचियों को पकड़ बोला, “छोटी वाली कहाँ है?”
“वह कपड़े बदल रही है बाबूजी।”
उस बूढ़े को जवान बहू की चुचियाँ पकड़ते देख मैं तरप गया। मेरा लंड तड़पने लगा। मैं इसी दिन के इंतज़ार में था। चूची पकड़ने के साथ बड़ी बहू ने अपनी कमीज़ के बटन खोल दोनों को नंगा किया तो वह मजे से दोनों को चूसने लगा। मुझे सब साफ दिख रहा था।
तभी वह बोली, “कल की तरह पियो न बाबूजी।” और चूची की घुंडी को ससुर के होंठों से लगा ज़रा सा झुकी।
तब वह बूढ़ा ससुर अपनी जवान बहू की एक चूची को मुँह से दबा-दबा चूसने लगा और दूसरी को दबाने लगा। बड़ी बहू प्यार से ससुर के गले में हाथ डाल बोली, “बाबूजी आप घुंडी चूसते हैं तो खूब मज़ा आता है।”
इस पर वह घुंडियों को चूसने लगा। कसी-कसी जवान चुचियों का मज़ा बूढ़े को लेते देख मैं तड़प गया। मैं समझ गया कि दोनों बहुएँ जवानी से भरी हैं और चोदने पर पूरा मज़ा देंगी। आज मैं मौका जाने नहीं देना चाहता था पर रुका रहा कि थोड़ा और मस्त हो जाएँ दोनों।
वह बार-बार “चूसिए बाबूजी” कह रही थी। बूढ़ा ससुर जवान बहू के निप्पल चूस रहा था। अभी छोटी वाली नहीं आई थी।
पड़ोस की दोनों बहुओं को बूढ़े ससुर से मज़ा लेते देख समझ गया कि दोनों प्यासी हैं और अपने पति से उनकी प्यास नहीं बुझती। फिर जब सहा नहीं गया तो अपना डिजिटल कैमरा ले उनकी तरफ कूद गया। धप्प की आवाज़ से दोनों चौंक कर देखा। मुझे देख दोनों घबरा गए और बड़ी बहू अपनी चुचियों को अंदर करने लगी और बूढ़ा मेरे हाथ में कैमरा देख काँपने लगा।
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मैं तेज़ आवाज़ में कहा, “तुम दोनों की हरकतें कैमरा में आ गई हैं। पिलाओ अपनी जवान चुचियाँ इस मरियल बूढ़े को।”
बड़ी बहू तो थर-थर काँप रही थी। उसने चुचियों को अंदर कर लिया था पर घबराहट में बटन नहीं बंद किया था। दोनों मस्त चुचियों को पास से देख मेरा लंड झटके लेने लगा।
मैं मौके का फायदा उठाने के लिए बूढ़े से बोला, “कमीने बहुओं को चोदता है, सबको बता दूँगा।”
वह गिड़गिड़ाने लगा, “नहीं भगवान के लिए ऐसा नहीं करना, अब कभी नहीं करूँगा।”
ससुर को गिड़गिड़ाते देख बड़ी बहू भी घबरा गई।
“कमीने मैं सब देख रहा था। बुढ़ापे में बहुओं के साथ मज़ा ले रहे थे तो जवानी में अपनी बेटी को भी चोदा होगा। सच बताओ कितनी बार चोदा है?”
“एक बार भी नहीं बेटे, अब नहीं करूँगा।”
“जब चूची पीते हो तो दोनों को चोदते भी होंगे, तुम बताओ चुदवाती हो?”
बड़ी वाली से पूछा तो वह मेरी ओर देखती चुप रही। बूढ़ा बोला, “भगवान कसम बेटा केवल दिल बहलाता हूँ।”
“छोटी बहू कहाँ है?”
“अंदर है अभी।”
“जाओ उसे लेकर मेरे पास आओ।”
मेरी बात सुन वह अंदर गया तो मैं बड़ी वाली को अपने पास बुलाया। जब वह पास आई तो उसके चूतड़ पर हाथ लगा बोला, “तुम दोनों तो अभी जवान हो, तुम लोगों का मज़ा लेना तो समझ में आता है पर यह साला बूढ़ा। केवल चुचियों को चूसता है?”
“जी।”
“चूत भी चाटता है?”
“जी।”
“हमें तुम दोनों की जवानी पर तरस आ रहा है। तुम दोनों की उम्र है मज़ा लेने की। पर यह तो तुमको गरम करके तड़पाता होगा। बताओ चोदता है?”
मेरी बात सुन वह कुछ सहमी तो उसकी चूचियों को पकड़ हल्का सा दबाया बोला, “मुझे लगता है यह तुम दोनों को चोदता भी है?”
“न्न्न नहीं।” वह सहमकर बोली।
तभी वह घबराया सा अपनी छोटी बहू के साथ वापस आया। टाइट सलवार-कमीज़ में छोटी बहू की छोटी-छोटी चुचियों को देख लंड ने तेज़ झटका लिया। बड़ी वाली के साथ मुझे देख वह घबराई। छोटी को देख मैं बेचैन हो गया। बहुत कसा माल था। वह भी डरी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर बूढ़ा पास आ मेरे सामने हाथ जोड़ बोला, “बेटा मेरी इज्जत तुम्हारे हाथ में है..”
मैं दोनों कुंवारी लड़कियों सी बहुओं को देखते बोला, “चूचियों को पीते हुए फोटो आया है।”
“भगवान के लिए बेटा।” वह गिड़गिड़ाया।
अब वह मेरे बस में था। लंड को दोनों के सामने पैंट पर से मसलता बोला, “जब लोग जानेंगे कि तुम अपनी बहुओं को चोदते हो तो क्या होगा।”
“नहीं नहीं बेटा।”
“तुम्हारे लड़के नामर्द लगते हैं जो इन बेचारियों को चोदकर ठंडा नहीं कर पाते। ज़रा इधर आओ।”
फिर उसे अपने रूम में ले जाकर बोला, “खूब मज़ा लेते हो अकेले-अकेले। चोदते भी हो दोनों को?”
“नहीं बेटा अब ताकत नहीं रही।”
“अपने लड़कों के जाने पर अपनी बहुओं से मज़ा लेते हो, मैं एक शर्त पर अपनी ज़ुबान बंद रख सकता हूँ।”
“बेटा मुझे मंजूर है।”
“तुम्हारी बहुएँ प्यासी हैं। इस उम्र में उन्हें पूरी खुराक चाहिए। लड़के तो तुम्हारे बेकार लगते हैं। इस उम्र में तो दो-चार से चुदने पर ही मज़ा आता है। उंगली से चोदते हो?”
“कभी-कभी।”
“देखो मेरी बात मानो तुम जो करते हो करते रहना, किसी को पता नहीं चलेगा। अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो वह दोनों अपनी प्यास बुझवाने को बाहर के चक्कर में पड़ जाएँगी।”
“बेटा यही सोचकर तो दोनों को चूम-चाटकर उंगली से चोदता हूँ।”
“तुम दोनों को चूस-चाटकर गरम करो और मैं दोनों को चोदकर ठंडा कर दिया करूँगा। उंगली से तो बुढ़ियों को चोदा जाता है। जवान तो लंड खाती हैं। दोनों जवान हैं, जब तक लंड डालकर न चोदा जाए उनको मज़ा नहीं आएगा। बोलो तैयार हो?”
“हाँ बेटा आओ।”
“जाओ पूछकर आओ। मेरी ड्यूटी रात की है। दिन भर हम दोनों एक-एक को मज़ा दिया करेंगे। जाओ।”
“दोनों हमारी बात मानती हैं। आओ बेटा अभी से काम शुरू कर दें।”
“चलो, मुझसे चुदकर तुम्हारी बहुएँ ख़ुश हो जाएँगी। तुमको भी खूब मज़ा देंगी क्योंकि तुम उनके लिए लंड का इंतज़ाम कर रहे हो न।”
“हाँ बेटा दोनों मेरे साथ ही रहती हैं।”
“मैं भी अकेला हूँ। दिन भर मज़ा लिया जाएगा। छोटी वाली तो कुंवारी लगती है?”
“हाँ बेटा अभी ठीक से चुद़ी नहीं है, मुझसे शर्माती है।”
“जब मेरा जवान लंड खाएगी तो शर्माना छोड़ देगी।”
और पैंट खोल लंड बाहर किया तो वह मेरा लंड देख बोला, “अरे बेटा तुम्हारा तो बहुत लंबा-मोटा है। ऐसा तो घोड़े का होता है।”
“इसे अपनी दोनों बहुओं को खिला दोगे तो तुमसे ख़ुश हो जाएँगी। सोचेंगी कि बाबूजी की वजह से ऐसा लंड मिला है। जाओ आवाज़ दे लेना।”
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वह चला गया। मैं ख़ुश था कि एक साथ दो गदराई जवान चूत मिल रही हैं। जब बूढ़े के साथ मज़ा लेती थी तो मेरे साथ तो दोनों मस्त हो जाएँगी। पेशाब कर केवल लुंगी बाँधा। तभी बूढ़े की आवाज़ आई कि आ जाओ बेटा तो मैं फौरन दीवार फाँद उसकी तरफ गया। दोनों उसके अगल-बगल खड़ी थीं और दोनों का चेहरा लाल था और अब डर नहीं रही थीं।
मैं पास पहुँचा तो वह बोला, “बेटा किसी से कहना नहीं, जाओ दोनों को ले जाओ।”
मैं दोनों को देखते बोला, “अभी आपने तो मज़ा लिया नहीं।”
“कोई बात नहीं बेटा जाओ अंदर रूम में जाओ।”
“आप जैसे रोज़ मज़ा लेते थे वैसे ही लीजिए। एक को मेरे साथ भेजिए और दूसरी को आप चूसिए-चाटिए।”
और लंड को लुंगी से बाहर कर दोनों को दिखाया तो दोनों मेरे पास आ बोलीं, “अब क्या हुआ बाबूजी।”
मेरे लंड को देख दोनों मस्त हो गईं। अब वह खुद तैयार थीं मेरे साथ चलने को।
मैंने कहा, “ऐसा है आज पहला दिन है इसलिए मेहनत करनी पड़ेगी, आज एक-एक को भेजिए, कल दोनों को साथ ही मज़ा दूँगा।”
“ठीक है बेटा।”
“जाओ बाबूजी को ख़ुश करो।”
और छोटी की गांड़ पर हाथ लगाया तो वह चुपचाप मेरी ओर देखने लगी। गांड़ में उंगली करते कहा, “आज तुम दोनों को मज़ा आएगा। बाबूजी जिस बहू को भेजिएगा उसे एकदम नंगा कर दीजिएगा और पेशाब ज़रूर करवा दीजिएगा। एक बार एक लड़की को पेला तो वह मूतने लगी।”
“ऐसा हो जाता है बेटा।”
मेरी चुदाई की रसीली बातें सुन दोनों लाल हो गईं। पेशाब की बात से दोनों शर्माईं तो मैं छोटी वाली का हाथ पकड़ अपनी ओर करता बोला, “बड़ी को अपने पास रखिए, इसको ले जाते हैं। इसके साथ ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इसको चोदकर बाहर भेजूँ तब बड़ी को अंदर भेजिएगा। अभी तो यह ठीक से जवान भी नहीं है।”
फिर छोटी को अपने बदन से लगाकर उसकी गदराई गांड़ को दबाया तो लगा कि जन्नत में हूँ। छोटी को चिपकाकर उसकी चूचियों को पकड़ा तो वह मुझे देखती इशारे से बोली कि जल्दी चलो। उसके इशारे से मैं ख़ुश हो गया। जान गया कि पूरी तरह से चुदासी है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पहले छोटी को ले जाने की बात से बड़ी वाली का चेहरा फक्क हो गया। इससे उसकी बेकरारी भी पता चली। उसका ससुर तो कुछ कहने की पोजीशन में नहीं था। छोटी की चुचियों को दबाते ही लंड में करंट दौड़ा। अनार सी कड़ी-कड़ी थी, एकदम लड़की ही कुंवारी सी। पति और ससुर से मज़ा लेने के बाद भी कली से फूल नहीं बनी थी।
मैं कामयाबी की शुरुआत छोटी बहू के साथ कर रहा था। कई दिनों तक दोनों को चोद सकता था। मज़ा देने वाली थीं दोनों। दोनों फँसी थीं और खूब जवान थीं। मैं छोटी वाली के साथ पहली चुदाई के लिए कमरे की तरफ चला। रास्ते में उसकी एक चूची को पकड़कर दबाते उसे मस्त करने के लिए कहा, “हाय अभी तो तुम लड़की हो। बड़ी वाली तो औरत लगती है। मेरे साथ बहुत मज़ा आएगा।”
मुझे चुदासी औरतों से मज़ा लेना आता था। वह चूची दबवाते ही गरम हो गई, ऐसी शानदार चुचियों को पा लंड बेकरार हो गया और पानी भर गया। माल तगड़ा था इसलिए झड़ने का डर था। चूचियों को पकड़ते ही समझ गया कि इसकी चूत भी कसी होगी।
कमरे में फौरन कुर्सी पर बैठा और उसकी कमर में हाथ डाल उसके चूतड़ को अपने लंड पर खींचकर गोद में ले लिया और दोनों चुचियों को जैसे ही शर्ट के ऊपर से पकड़कर गाल को चूमा, वह मजे से भर गदराए चूतड़ को लंड पर रगड़ती बोली, “छोड़िए ना बटन खोल दें।”
“ऐसे ही दबवाओ। बाद में खोलना। घबराओ नहीं पूरा मज़ा मिलेगा। तुम छोटी हो इसीलिए पहले लाया हूँ। बताओ बूढ़ा ससुर तुम्हारे साथ क्या-क्या करता है।”
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नयी जवानी को फनफनाए लंड पर बिठा पूछा तो वह बोली, “जी केवल चूमते और चाटते हैं हम दोनों को।”
“इसको पीते भी हैं?”
“जी।”
“चुसवाने में मज़ा आता होगा?”
मैंने अनार सी चुचियों को कसकर दबाते हुए लंड को गांड़ की दरार में रगड़ते कहा तो बोली, “जी आता है।”
“चूत भी चटाती हो?”
“जी।” वह मदहोश हो बोली।
“यह सब कराती हो तो चूत नहीं गरमाती क्या? चुदवाने का मन नहीं करता क्या? चोदता है या नहीं?”
“नहीं बाबूजी का तो खड़ा ही नहीं होता।”
“तुम्हारा आदमी तो चोदता होगा?”
“कभी-कभी। बहुत पतला सा है ज़रा भी मज़ा नहीं आता। हाय आप करिए ना आपका तो तैयार है।”
वह मेरे लंड पर अपना चूतड़ रगड़ती बेताबी के साथ खुलकर चोदने को बोली। मैं उसको गोद में बिठाकर जन्नत में पहुँच गया था। उसका गदराया चूतड़ लंड को गज़ब का मज़ा दे रहा था और गरम पानी उसमें उतर रहा था। जब खुलकर अपने आदमी (हसबैंड) के मरियल लंड के बारे में बताया तो मैं लंड को उभारता मस्ती के साथ दोनों चुचियों को दबाता प्यार से उसको गोद में संभालता बोला, “तुम्हारे आदमी का लंड बहुत छोटा है क्या?”
“जी बच्चे सा। मज़ा नहीं आता। हाय करिए ना। आपका तो खड़ा हो गया है। पजामा आगे से फटा है।”
वह मेरी जवान गोद में हैवी लंड पर अपनी गांड़ को रख चुचियों को दबवाती चुदास से भर गई थी पर मुझे तो अभी मज़ा लेकर एक बार लंड की मस्ती झाड़कर प्यार से दमदार तरीके से चोदकर इसकी चूत को पहली चुदाई में इतना मज़ा देना था कि हरदम मुझसे मज़ा लेने के लिए बेकरार रहे। पजामा दोनों का फटा रहता था। ससुर चूत चाटता था पर अभी तक मैंने उसकी चूत पर एक बार भी हाथ नहीं लगाया था।
जब तनी-तनी चुचियों के निप्पल पकड़कर मसला तो पजामा की चूत गंगना गई और वह खुलकर बोली, “हाय मेरी मस्त है, चोदिए।”
“अभी नहीं चोदेंगे। पहले जवानी का मज़ा लो। पानी निकल जाने दो। बताओ तुम्हारा आदमी कितनी देर चोदता है?”
हाथ में आसानी से आने वाली मस्त चुचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाते कहा तो वह बोली, “जी बहुत जल्दी बस 1 मिनट।”
“अरे तब तो वह साला नामर्द है। मज़ा क्या आएगा, कम से कम 10 मिनट तक न चोदा तो मर्द ही क्या। शर्माओ नहीं अब तुम मेरा मज़ा लो। आज से तुम अपने आदमी को भूल जाओ और मेरी बीवी बनकर मज़ा लो। बड़ी बहू से ज़्यादा मज़ा तुमको देंगे। अब बराबर दिन में आया करेंगे। तुम लोग ससुर को चटाकर मस्त किए रहना। लो हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रखो देखो मेरा लंड तुम्हारी चूत में जाएगा या नहीं। देखो कितना मोटा है।”
मैं जानता था कि खुलकर चुदाई की बात करने से चूत कुलबुलाती है। छोटी बहू अभी एकदम लौंडिया सी थी। एकदम जवान मस्त चुचियाँ थीं। उसकी चुचियाँ इतना मज़ा दे रही थीं कि लंड झड़ने के करीब था।
मैंने उसकी चुचियों को मसलते हुए कहा, “बताओ मेरा मोटा है ना?”
“जी बहुत अच्छा है।”
वह लंड पर अपनी गांड़ दबा मेरे लंड की तारीफ करती बोली। वह चूत में लंड लेने को उतावली थी पर मैं ताजी हसीन चूत को मस्ती के साथ चोदकर मज़ा लेने के मूड में था।
धीरे से एक हाथ को उसकी एक रान पर लगा सलवार की फटी मियानी पर लाता बोला, “ज़रा अपनी चूत तो दिखाओ।”
मेरी बात सुन उसने प्यार से टाँग को फैलाकर चूतड़ को उभारा तो सलवार के आगे के फटे हिस्से से हाथ से फैला दिखाया तो उसकी जवान चूत को देखते लंड झड़ते-झड़ते रुका। चूत अभी कच्ची थी। पति और ससुर का लंड खाने के बाद भी फांक कसी थी। बाल भी हल्के से थे। एकदम गुदाज़ मस्ती से भरी गरम चूत थी। जैसा सोचा था उससे भी खूबसूरत चूत थी। छोटी बहू ने मेरे जैसे जवान की हरकत से मस्त हो अपनी चूत को मेरे हाथों में दे दिया था।
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मैंने उसकी चूत को दबाते एक चूची को पकड़ कहा, “तुम्हारी तो बिना सलवार उतारे चोदने वाली है। सलवार खुद फाड़ा है?”
“जी।”
“बाबूजी मज़ा लेते हैं तुमसे?”
“जी हाय राम इसको छोड़िए।”
तनी-तनी फांक को उंगली से मसला तो वह तड़प कर बोली।
“पहले यह बताओ कि मेरा बहुत मोटा है। अगर चोदने में चूत फट गई तो?”
“हाय फाड़ दीजिए ओह इसे छोड़ दीजिए।”
उसकी चूत लिप्स के मसलन पर ही लीक होने लगी थी। गदराई चूत को हाथ से सहलाते मुझे भी जन्नत दिखने लगी थी। लंड को झड़ने से रोकने के लिए सुपाड़े को कसकर दबाया। वह मस्त हो मेरे लंड पर बैठी थी। उसकी दोनों चुचियों को उसकी शमीज़ के बटन खोल बाहर किया तो अनार सी कड़ी-कड़ी नंगी चुचियों को देख तड़प उठा। बहुत मस्त माल हाथ लगा था। नंगी चुचियों में और मज़ा आया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने दोनों चुचियों पर हाथ फेरते कहा, “इस समय तुम्हारा ससुर बड़ी वाली बहू की चुचियों को पी रहा होगा।”
“जी।”
“तुम्हारी भी तो पीता होगा?”
“जी।”
“मज़ा आता हो तो मुझे भी पिलाओ।”
“पीजिए ना हाय आप कितने अच्छे हैं।”
“डर है कहीं तुम्हारी चूत फट न जाए। वैसे बड़ी वाली में मेरा आराम से जाएगा।”
“हाय नहीं फटेगी, मुझे ही चोदिए।”
वह उतावलेपन से बोली तो मैंने कहा, “बात यह है मेरी जान कि मैं सूखी चूत चोदता हूँ, तेल या क्रीम लगाकर नहीं। तुम्हारी चूत छोटी है पर तुम्हारी जेठानी की औरत वाली होगी।”
“हाय सूखी ही चोदिए। फटने दीजिए।”
“एक बात और मैं नंगा करके चोदता हूँ।”
“रुकिए मैं सारे कपड़े उतार देती हूँ।”
अब मुझे यकीन हो गया था कि छोटी बहू मेरे मज़े को पकड़ मस्त है।
इधर कमरे में मैं छोटी बहू के साथ मज़ा ले रहा था, उधर वह बूढ़ा आँगन में जवान बड़ी बहू के साथ मज़ा ले रहा था।
“तुम्हारा आदमी बस एक-आध मिनट में ही चोदकर हट जाता है?”
चूत को हाथ से सहलाते बोला तो वह चूत को उचकाते बोली, “जी।”
“तभी तो तुम्हारी प्यास नहीं बुझती। घबराओ नहीं देखना कम से कम 25 मिनट तक चोदकर 5-6 बार झाड़ूँगा आज। पर जैसे कहे वैसे मस्त होकर करना तभी मज़ा आएगा।”
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और फनफनाए लंड से नीचे उतारा तो फौरन पलटकर मुझे देखने लगी। उस समय मेरा लंड लुंगी से बाहर था। उस लंड को वह बड़े प्यार से देखने लगी तो मैं खड़ा हो उसकी चुचियों को दबाता बोला, “देख लो।”
मेरे कहते ही उसने मेरी लुंगी को अपने हाथ से हटाकर मेरे लंड को नंगा किया तो मैं तनकर खड़ा हो गया जिससे मेरा 9 इंच का लंड खूँटे सा खड़ा हो गया। मेरा जानदार लंड देख जाने कितनी ही चूत वाली मेरी दीवानी हो गई थी। आज यह भी मेरी दीवानी हो गई। उसकी चूत चिपचिपाने लगी थी।
इस तरह से चुदाई का मज़ा ही कुछ और है। वह मेरे मूसल लंड को देखती बेताबी के साथ बोली, “लुंगी खोल दे।”
“हाँ खोल लो रानी, आज से यह तुम्हारा है। घबराओ नहीं बुलबुल मैं तुमको ही ज़्यादा चोदूँगा। बड़ी वाली को तो बस कभी-कभी टेस्ट चेंज करने के लिए। आज जमकर चुदवा लो ऐसा लंड कहीं मिलेगा नहीं। लुंगी खोलो तो तुमको नया मज़ा दे।”
“जी।”
“देखना अब मेरे साथ कितना मज़ा आता है।”
और उसके दोनों गुलाबी हो गए गाल को सहलाया।
तभी उसने मेरी लुंगी को खोलकर अलग किया। मुझे नया मज़ा आया। नंगा होते ही मैं अपने लंड को उसके हाथ में देते बोला, “मुझे तो डर लग रहा है, तुम्हारी चूत फट न जाए।”
वह एक हाथ को सलवार के हिस्से पर लगा दूसरे हाथ से मेरे लंड को कसती बोली, “हाय कितना तगड़ा है। नहीं फटेगी राजा अब चोदो।”
मेरे लंड को पकड़ते ही वह चुदवाने को बेचैन हुई तो मैं उसकी नशीली चुचियों को पकड़ते बोला, “घबराओ नहीं शाम तक रहूँगा। जो कहे वह करो। चलो कुर्सी पर बैठो। आज तुमको वह मज़ा दूँगा जो कभी नहीं पाया होगा। इस लंड के एक पानी को निकाल दो तब आएगा इससे चुदवाने का असली मज़ा। मैं एक मिनट वाला नहीं हूँ। ससुर को चटा-चटाकर खूब पानी निकाला है वरना मेरे लंड को देखते ही चूत पानी छोड़ देती।”
“जी हाय।”
“पानी निकला।”
उसकी दोनों चुचियों को दबाता उसे कुर्सी पर बिठाता बोला तो वह बेताबी से बोली, “अभी नहीं निकला हाय राजा।”
मैं तो बेताब प्यासी लौंडिया को पकड़ मस्त था और पूरी तरह से मस्त करके चोदने के चक्कर में था। कुर्सी पर बिठाने के साथ अपने लंड को हाथ से पकड़ उसके गुलाबी नरम-नरम होंठों के पास करते कहा, “लो मेरी जान आगे वाला सुपाड़ा मुँह में लेकर चूसो, देखना अभी चूत पानी निकाल देगी।”
मुझे लंड चुसाने में बहुत मज़ा आता था। छोटी बहू को पिलाने में अनोखा मज़ा आता। अब तक जितनी चोदा था सब 25 से ऊपर थीं। यह पहली थी 18 साल की। अगर आज चूसती तो फिर रोज़ ही लंड पिलाकर मनपसंद मज़ा ले सकता था। वह हिचकी तो मैं लंड को उसके मुँह के पास से अलगकर बोला, “नहीं चूसना तो जाओ बड़ी वाली को भेज दो। हम उसे चुसाकर उसी को चोदेंगे। चूसने में बहुत मज़ा आता है। लंड चूसते ही चूत से पानी निकलता है। जाओ तुम अपने मरियल आदमी से ही चुदवाओ।”
बड़ी वाली को भेजने की बात सुन वह फौरन अपने हाथ से लंड को पकड़ मुँह में ले सुपाड़े को दबा-दबा चूसने लगी। अब मैं तनकर खड़ा हो लौंडिया जैसी छोटी बहू को सबसे प्यारे मज़े को लेने लगा। उसे मेरे मोटे तगड़े लंड को चूसने में मज़ा आया हो या ना पर मुझे तो गज़ब का मज़ा आ रहा था। उसने 18 बार ही चूसा था कि मैंने लंड को उसके मुँह से बाहर किया और झड़ने लगा। वह मेरे झड़ते लंड को प्यार से देखने लगी।
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झड़ने के बाद मैंने उसको अपने बदन से चिपकाते गांड़ की तरफ से उसकी चूत को टटोलते पूछा, “क्यों रानी तुम्हारी चूत झरी?”
“हाँ राजा सच बहुत मज़ा आया। अब रोज़ लंड चुसाना।”
“इसीलिए तो चुसाया था कि एक पानी तुम्हारा भी निकल जाए तो चुदाई का मज़ा आ जाता है। अब तुम सब कपड़े उतारकर नंगी होकर चूत को पोंछकर बैठो। मैं पेशाब करके आता हूँ तब चोदूँगा।”
“हाय आपका तो…..”
“तुम्हारी गदराई रसीली चुचियाँ पीते ही फिर खड़ा हो जाएगा।”
झड़ने से मस्ती हल्की हुई पर लंड खड़ा था। मैं नंगा ही बाहर आया। मुझे एक तीर से दो शिकार करने थे। बाहर आया तो देखा कि बड़ी बहू ससुर के सामने टाँगें फैलाए फटी सलवार से चूत को बाहर किए हाथ से फैलाए चाट रही थी। उसका बूढ़ा ससुर उसकी गांड़ पर हाथ रख घुटनों के बल बैठ कुत्ते की तरह जीभ से अपनी बड़ी जवान बहू की चूत को चाट रहा था। मेरी आहट पा वह खड़ा हो गया। मैं पूरा नंगा था। मुझे देख बड़ी बहू मेरे पास आ मेरे लंड को देखती अपने ससुर के सामने ही बोली, “अब मुझे चोदिए।”
“अभी नहीं।”
“हाय उसको कितनी देर से मज़ा दे रहे हैं आप। मुझे भी।”
उसने मेरे लंड को पकड़कर कहा तो मैं उसकी शमीज़ से बाहर झाँक रही चुचियों को पकड़ दबाते बोला, “अभी ससुर से मज़ा लो ना।”
“हाय आपका लंड कितना तगड़ा है। मुझे भी एक बार चोदकर ही जाइएगा।”
“घबराओ नहीं पहले छोटी वाली की कसी चूत को ठीक से चोदकर अपने लायक फैला लूँ फिर प्यार से तुम्हारी जवान चूत को चोदूँगा। जाओ जब तक ससुर से चटवाओ।”
मैं उसे ससुर के पास पहुँचाकर पेशाब करने चला गया। बड़ी बहू को ससुर के सामने ही खुद चुदवाने को कहते सुन बड़ा मज़ा मिला। बड़ी वाली तो छोटी वाली से ज़्यादा चुदासी लग रही थी पर मज़ा छोटी में ज़्यादा था। मूतकर वापस कमरे में आया तो चुदवाने के लिए सारे कपड़े उतार एकदम नंगी बैठी 19 साल की छोटी बहू को देखते झड़े लंड में गर्मी आने लगी। एकदम चिकना गुलाबी बदन था। चुचियाँ तनी थीं और निप्पल भी खड़े थे।
मैंने उसको बेताबी के साथ चिपकाया और चूतड़ पर हाथ फेरते कहा, “अब तुम हमको भी अपनी चुचियाँ पिलाओ ना।”
इस पर उसने मस्ती के साथ अनार सी चूची को मेरे मुँह के पास किया तो मैं उसकी चूची को प्यार से चूसते हुए अपने लूज़ लंड को झड़ी कसी चूत में पेलने के लिए टाइट करने लगा। चूचियाँ छोटी थीं और मुँह में पूरी जा रही थीं इसलिए चूसने का मज़ा अनोखा था। वह भी एक पानी झर चुकी थी इसलिए चुचियाँ चुसवाने से उसमें भी मस्ती आ रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोनों चुचियों को प्यार से चूसकर लंड को खड़ा करते बोला, “बोलो मुझे पिलाने में ज़्यादा मज़ा आ रहा है या ससुर से?”
“हाय आपसे ओह अब चोदिए ना।”
“एक बार मुझसे भी चूत चटवाकर देखो फिर मजे ही।” मैं उसकी हल्के बाल वाली कसी चूत पर हाथ लगा बोला।
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जवानी की तड़प के साथ गोद में उठा उसे बेड पर लिटाया और चुदासी खूबसूरत मस्त गरम गुलाबी चूत को पूरी नंगी देख मस्त हो गया। चूत चुदने के बाद भी कुंवारी लग रही थी। मैंने झुककर 8-10 बार जीभ से चाटा तो वह अपने आप हाथ से चूत को फैलाती सिसक कर मुझे देखते बोली, “हाय राजा मर गई। बाद में चाट लेना अब चोद दो। हाय मर गई।”
मैं तो अब चोदने के चक्कर में था ही। लंड भी तैयार था। उसकी फैलाई गई चूत पर लंड लगा उसकी दोनों टाँगों के बीच आ चुचियों को पकड़ दबाते बोला, “फट जाएगी रानी।”
“फटने दो राजा अब डाल दो।”
और चूत को लंड पर दबाया। सुपाड़ा गरम था।
मैंने उसे बाँहों में ले इतना करारा धक्का मारा कि उसने तड़पकर मेरी जाँघें पकड़ लीं। सिर्फ अपने आदमी के मरियल लंड से चुद़ी थी इसलिए गज़ब का कसाव था। पेलने लगा पर लंड बार-बार बाहर निकल जाता। चुचियों को पकड़ ताकत से पेला तो सुपाड़ा जाते ही मैं मस्त हो गया। नयी चूत का मज़ा मिला तो धीरे-धीरे पेलने लगा। छोटी बहू होंठों को कसे पेलवा रही थी। आधा गया कि वह कराहने लगी तो मैंने चुचियों को मसलते हुए कहा, “लगता है पूरा नहीं जाएगा। बहुत कसी चूत है तुम्हारी।”
“फटने दो राजा और पेलो पूरा डाल दो।”
वह मेरे लंड को पा तड़प उठी थी। पूरे 9 इंच का लंड जब उसकी चूत को फाड़ते हुए घुसने लगा तो वह हाँफने लगी। उसका चेहरा पसीने से भीग गया। आधा घुस चुका था।
फिर एक कसा धक्का मारा तो वह तड़प कर बोली, “हाय अब छोड़ दो नहीं तो मर जाऊँगी।”
“तुमने अपने आदमी के सिवा किसी का लंड नहीं चखा है ना इसीलिए लग रहा है। देखना अभी मज़ा आएगा तो अपने मरियल आदमी को भूल जाओगी।”
वह तड़पती बोली, “नहीं नहीं राजा निकाल लो, मैं मर जाऊँगी।”
“ज़रा सा सह लो फिर देखना कितना मज़ा आता है।”
और ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी।
कुछ देर बाद ही उसे मज़ा मिलने लगा तो वह नीचे से गांड़ उछालने लगी। उसकी चूत से फचाफच पानी निकलने लगा तो मैंने कहा, “अब कैसा लग रहा है?”
“हाय राजा अब बहुत मज़ा आ रहा है। चोदते रहो ऐसे ही।”
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मैं उसे आधे लंड से ही चोद रहा था। दमदार लंड की चुदाई पा वह हाय-हाय करती प्यार से चुदवा रही थी। मैं भी इतनी खूबसूरत चूत को पा बहुत ख़ुश था। कुछ देर बाद मैंने उसे पकड़ हचाहच चोदने लगा। उसकी चूत अब फुच-फुच पानी छोड़ रही थी। वह दिल खोलकर साथ दे रही थी।
मैं मस्ती से छोटी बहू को पूरी ताकत से चोद रहा था। छोटी बहू इतनी खूबसूरत और गदराई थी देखकर कोई भी तड़प उठता। मैं ऐसी लड़की पा बहुत ख़ुश था। बहुत आराम से चोदकर मज़ा ले रहा था। जल्दी कोई नहीं थी। वह एक बार झर चुकी थी। दूसरी बार झरी तो मेरे लंड की तारीफ करने लगी जिसपर मैंने कहा, “अभी एक बार और चूत से पानी निकलेगा तब मेरा निकलेगा।”
मैंने लंड को बाहर कर तौलिए से पोंछकर सुखाया और कड़ी-कड़ी चुचियों को दबा उसे फिर तैयार करने लगा। वह फिर मस्त हुई तो उसी तरह से उसको चोदने लगा। वह दो बार झर चुकी थी और अब पस्त हो गई थी।
वह मुझे कसती बोली, “चोदो हाय अब हमको अपने पास रख लो। मैं अपने मरियल पति के साथ नहीं रहूँगी।”
छोटी बहू तो मेरी दीवानी हो गई थी। वह चुदाई को पा तड़प उठी थी।
“हाय तुम्हारा तो लोहे की तरह है। राजा लगता है तुम पानी नहीं छोड़ोगे कभी।”
“मेरी जान इतनी जल्दी नहीं झड़ता। आज तुम्हारी चूत को चार बार झाड़कर ही लंड का पानी पिलाऊँगा तुमको।”
मैं अभी छोटी बहू को चोद ही रहा था कि बड़ी बहू एकदम नंगी हो कमरे में आई। वह मेरे पीछे आ अपनी कम उम्र की देवरानी को चुदते देखकर मेरे कान में बोली, “हाय जल्दी करो ना।”
मैं बड़ी को मस्त देख छोटी को तेज़ी से चोदने लगा। तभी तीसरी बार झरते ही छोटी बहू सिसक कर हाय-हाय करती बोली, “हाय राजा तीसरा पानी भी निकला। हाय दीदी यह बहुत दमदार हैं। मेरी तीन बार झर चुकी है। दीदी अपने पति तो 20-25 सेकंड में दम तोड़ देते हैं। हाय राजा फाड़ दो आज। दीदी अब तो मैं इनसे रोज़ चुदवाऊँगी। हाय रोज़ दिन में हमारे घर आना।”
“मज़ा लो देवरानी जी। खूब मज़ा लो।”
और दमदार चुदाई को देखती अपनी चूत में उंगली पेलती बड़ी बहू मुझसे जल्दी करने का इशारा करने लगी।
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