Jawan Ladki Chudai Sex Story
दोस्तों मेरी पिछली कहानी में अपने पढ़ा कि कैसे नफ़ीसा को मैंने चोद कर लड़की से औरत बना दिया था। अब तो मैं कभी कभी ऑफिस से जल्दी घर लौट आता था और नफ़ीसा अपने भाई बहन को छोड़ कर मेरे पास चुदवाने आ जाती थी। नफ़ीसा को चोद कर मेरा दिल नहीं भरता था। Jawan Ladki Chudai Sex Story
एक दिन मैं ऑफिस जल्दी घर आया तो बाहर ही नफ़ीसा दिख गई। उसने कहा कि आज उसके घर में करेंगे। मैंने कहा कोई आ गया तो। उसने कहा कि मेरे पैरेंट्स तो एक रिश्तेदार के घर गए हैं और बहन आशिया कॉलेज गई है। वो शाम को लौटेगी। मैंने कहा ठीक है।
मैं उसके घर चला गया और मुझे वो अपने बेडरूम में ले गई जो कि ऊपर था। उसके बेडरूम के सामने ही उसकी बहन आशिया का बेडरूम था। उसके पैरेंट्स और भाई नीचे रहते थे। कमरे में जाते ही मैंने नफ़ीसा को जकड़ लिया। और उसके होंठों को चूसे हुए उसकी चूंचियों को कमीज के ऊपर से मसलने लगा।
चूंकि घर में कोई नहीं था इसलिए दरवाजा बंद करने की जरूरत नहीं समझी। दरवाजे पर एक मोटा सा पर्दा था। मैंने उसकी कमीज के ऊपर से ही उसके थोस चूंचियों को मसलते हुए उसके गालों को चूम रहा था। नफ़ीसा ने मेरे पैंट और शर्ट को खोला। मैंने भी उसकी कमीज ऊपर उठा के खोल दी।
अब वो एक सेक्सी ब्रा में थी। मैंने ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों पर मुंह रखा तो वो सिहर उठी। आह्ह.. ऐसा मत करो.. मुझे कुछ होने लगता है.. मैंने कहा.. मेरी जान अभी तो बहुत कुछ होगा.. कह कर मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। वो ऊपर से नंगी हो गई थी। गोरा बदन.. हालांकि मैं उसे चोद चुका था फिर भी मेरा लंड बेकाबू हो रहा था।
उसने हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को मेरे अंडरवियर के ऊपर से पकड़ा और दबाने लगी। मैंने कहा क्या कर रही हो? उसने कहा मेरी चीज है प्यार कर रही हूं। और वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लंड अंडरवियर से निकाल लिया.. और कहा.. ये तो हर रोज ज्यादा लंबा और मोटा होता जा रहा है.. कितना सलोना है कह कर उसने मेरे लंड को किस किया और उसके सुपाड़े को जीभ निकाल कर चाटने लगी।
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थोड़ी देर चाटने के बाद उसने मेरा अंडकोष को हल्के से जीभ लगा कर चूसने लगी.. मैंने उसे खड़ा किया और कहा.. मेरी जान आज तुम्हें तुम्हारे बेडरूम में ही नंगा कर के चोदूंगा.. उसने अकड़ते हुए कहा.. चोदो ना किसने मना किया.. इतना सुनते ही मैंने उसकी सलवार का नाडा खिंच के खोला सलवार जमीन पर गिरी..
उसने पैर झटकते हुए उसे दूर फेंका और सिर्फ पैंटी में मेरे सामने खड़ी हो गई। पैंटी गुलाबी रंग की थी और चूत भी गुलाबी.. लेकिन उसके जेल से चूत की लाइन और सामने का गिला हिस्सा दिखने लगा था। मैंने उसे खड़ी किया और उसके पीछे आ गया.. नफ़ीसा को मैंने पलंग पकड़ कर सामने झुकाया।
उसकी गोरी उभरी हुई गांड मेरे सामने थी.. ओह्ह क्या गोल और चिकनी गांड.. मैंने उसे चूमा.. चूत दिख रही थी.. लेकिन पीछे उभरने के लिए मैंने उसे सामने और झुकाया.. फिर चूत को पैंटी के ऊपर से कुरेडा.. और पीछे चूतड़ के अंदर हाथ डाल कर पैंटी नीचे किया.. उसकी गांड का गुलाबी टाइट छेद और गिली चूत मेरे सामने आ गया.. अब नफ़ीसा पूरी नंगी थी।
मैं अब रुक नहीं सकता था। मेरा लंड के अंदर तूफान मचा हुआ था। मैंने लंड पर थूक लगाया.. उसकी चूत तो वैसे ही बहुत गिली हो रही थी। मैंने उसकी चूत के छेद पर लंड को रख कर दबाया.. पुच. की आवाज के साथ मेरा सुपाड़ा अंदर हो गया.. और नफ़ीसा.. उयीयी.. धीरे.. अभी भी दर्द होता है..
मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरा फिर कमर को कस के पकड़ कर एक धक्का लगाया इस बार मेरा आधे से ज्यादा लंड चूत में जा चुका था। मैंने हाथ बढ़ा कर उसकी चूंचियों को मेरी हथेली में ले लिया। वो हल्के हल्के चिल्ला रही थी.. ओह्ह कितना मोटा है.. मेरी तो बहुत चौड़ी हो जाएगी.. ये सुन कर मुझे और जोश आ गया.. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने लंड को पीछे खिंचा और इस बार पूरी ताकत से धक्का लगाया और.. पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत के बहुत गहरी में पहुँच गया.. नफ़ीसा आगे की तरफ और ज्यादा झुक गई.. सिर पलंग पर टिका दिया.. अब मैंने उसे मसलते हुए जोरदार चुदाई शुरू कर दी.. उसकी चूत तो लगातार पानी छोड़ रही थी..
इससे लंड और तेजी से अंदर जा रहा था और.. फच.. फचाक.. फच. फचाक की आवाज और नफ़ीसा की आह्ह.. ओह्ह.. जोर से.. पूरा कमरा भर गया था.. तभी मैंने देखा उसकी दरवाजे का पर्दा थोड़ा हिला.. मैं थोड़ा डर गया कि इस जगह और कौन आ गया है.. फिर नीचे देखा तो दो गोरे नाजुक पैर दिखे..
मैं समझ गया कि ये और कोई नहीं नफ़ीसा की कमसिन बहन आशिया है। जो कॉलेज गई थी.. शायद उसके पास भी फ्लैट की चाबी होगी और वो अंदर आ गई है.. आज न जाने क्यूं मेरा दिल हुआ कि उसकी चूत का भी मजा लिया जाए.. मैंने नफ़ीसा से कुछ नहीं कहा.. आशिया की भी चूंचियां मस्त थीं और चूतड़ भी उभरे हुए थे..
वैसे मैंने बताया था कि आशिया अलग थी.. लेकिन मैं देख रहा था कि पर्दे के पीछे से वो झांक कर अंदर देख रही है.. और शायद उसे भी मजा आ रहा था। मेरी चुदाई पूरे स्पीड में थी। तभी नफ़ीसा बोली.. हाय्यि.. मैं गई.. और अंदर डालो.. जोर से.. आह.. आह्ह.. उफ्फ मैं गईइईईई.. और वो झड़ गई और पलंग पर ही पेट के बल लेट गई.. मेरा लंड उसकी चूत के अंदर ही था।
मैंने धीरे से लंड को बाहर निकाला और जल्दी से जाकर पर्दा हटाया.. देखा सामने आशिया है.. वो जींस और टॉप में थी.. मैंने उसका हाथ पकड़ा और कमरे में ले आया.. वो बिल्कुल नशे की हालत में थी.. हम दोनों नंगे थे.. मैंने आशिया को पलंग पर बिठाया तो उसे देखते ही नफ़ीसा गबरा गई.. हायी अल्लाह्ह.. ये कैसे आ गई..
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मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया और आशिया के होंठों पर मेरे होंठ रख दिए.. अब जैसे उसे होश आया.. वो छुटने की कोशिश करने लगी.. लेकिन मैंने मेरा हाथ उसके मम्मों पर रखा और हल्के हल्के दबाने लगा… कुछ देर रेसिस्ट करने के बाद वो शांत हो गई.. असल में वो नफ़ीसा की चुदाई देख कर वैसे ही गरम हो चुकी थी..
मैं उसके करीब बैठा और फिर उसे मैंने अपनी गोद में खिंचा.. वो कहने लगी.. प्लीज कुछ मत करना.. मैंने कहा नहीं करूंगा.. गोद में तो बैठो.. किसी तरह से वो मेरे खड़े लंड पर बैठी.. मैंने उसके होंठों को चूमा.. नफ़ीसा देख रही थी.. उसने कहा.. ये अभी कुंवारी है। इसके साथ ज्यादा कुछ मत करना..
मैंने कहा फिकर मत करो.. इसे भी मजा लेने दो.. जितना इसका दिल चाहे उतना तो लेने दो.. क्यों आशिया.. अच्छा लग रहा है? कहते हुए मैंने उसकी टॉप के अंदर हाथ डाल कर उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके 34 साइज के बूब्स मेरे हाथ में लिए.. अब वो सिसियाने लगी.. उसके होंठ मेरे होंठों से जुड़े थे.. नीचे मेरा लंड उसकी जींस के ऊपर से उसे मजा दे रहा था।
उसकी हाइट 5 फुट 2 इंच है। उसकी चूंचियों का शेप एकदम सख्त और गोल गोल होने के कारण मेरी हथेली में टॉप के ऊपर से ही पूरी समा रहे थे। आशिया का बदन कांप रहा था। मैं समझ गया कि उसकी आंखों के सामने अभी भी नफ़ीसा की छोटी से छोटी चूत में मेरे मोटे और लंबे लंड का नजारा घूम रहा है।
शायद वो नीचे गिली भी हो चुकी थी। आशिया और नफ़ीसा दोनों एक ही हाइट के हैं। शी इज 5 फुट 2 इंच और हेविंग अ रिज़न बूब्स और अ वेरी गुड शेप्ड बटॉक्स। उसके गुदाज नितंब मेरे लंड के ऊपर थे। उसे मैंने अपनी तरफ घुमाकर फिर से उसके होंठों को चूमा चूसा और पीछे से हाथ डाल कर टॉप को ऊपर करते हुए मैंने उसका टॉप निकाल दिया..
टॉप निकलते ही गुलाबी ब्रा में उसके उभरे मेरे सामने आ गए और वो भी जैसे होश में आ गई। और जल्दी से खड़ी होती हुई बोली.. आपा.. इन्हें कहो मेरे साथ कुछ ना करे.. मुझे डर लग रहा है.. लेकिन नफ़ीसा का राज उसे पता चल गया था और वो किसी से भी कह सकती थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसलिए नफ़ीसा ने उससे कहा.. देख ये कुछ नहीं करेंगे.. तुझे थोड़ा प्यार करेंगे मैं तब तक टॉयलेट जाकर आती हूं तू इंसे़ बात कर कहती हुए नफ़ीसा ने अपनी पैंटी पहनी और अपने दोनों चूंचियों को उभारे अपने चूतड़ मटकाती कमरे से निकल गई.. अब कमरे में मैं नंगा और आशिया कमर से ऊपर आधी नंगी थी।
मैंने कहा.. डरो मत मैं तुम्हें सिर्फ प्यार करूंगा.. अभी जब तुम नफ़ीसा को देख रही थी तो कैसा लग रहा था? उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ कर फिर मेरे पास खिंचा.. और पूंछा.. बोलो ना.. अच्छा नहीं लगा? उसने कहा.. अच्छा लगा लेकिन मेरे पूरे बदन में कुछ अलग फील हो रहा है.. और उसकी नजर मेरे उचलते हुए मोटे लंड पर पड़ी..
वो अभी भी नफ़ीसा के चूत के जूस के कारण चमक रहा था और ठुमके लगा रहा था। मैंने उसे पूछते हुए फिर मेरी गोद में खिंचा और उसके ब्रा के ऊपर से उसकी चूंचियों को सहलाते हुए कहा.. कितने सुंदर हैं ये.. इन्हें हाथ लगाने से कैसा लग रहा है? उसने कहा.. अच्छा।
अब मैंने उसके ब्रा के ऊपर से उसकी चूंची पर किस किया.. तो वो सिहर उठी.. इश्श.. करते हुए वो मेरे से चिपकने लगी.. मैंने उसके होंठ पर चुम्मा लिया और हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया.. उसने जल्दी से अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रखे.. आशिया जान इन्हें छुपाओगी तो फिर मैं तुम्हें मजा कैसे दूंगा कहते हुए मैंने उसका हाथ हटाया.
और उसका हाथ मेरे फड़कते हुए लंड पर रखा और कहा.. पकड़ना है तो अपने नाजुक हाथ से इसे पकड़ो.. उसने मेरे लंड को टच किया और बोली पड़ी.. कितना सख्त है.. और कितना मोटा और लंबा.. बाजी के अंदर डाला तो उन्हें बहुत दर्द हुआ होगा? मैंने कहा हां थोड़ा दर्द तो हुआ.. लेकिन अभी तुमने देखा बाजी कैसे प्यार से इसे अंदर ले रही थी..
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उसे मजा आ रहा था.. और मैंने अब उसकी जींस के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ रखा.. उसने मेरा हाथ वहीं दबा दिया.. मैं समझ गया और मैंने उसकी जींस के बटन खोलने शुरू किए.. उसने हल्का सा रेसिस्ट किया.. लेकिन मैं कहां सुनाने वाला था.. मैंने उसकी जींस खोल दी.. अंदर एक बहुत छोटी से गुलाबी जालीदार पैंटी थी.. और.. उफ्फ. उसके चूत का वो उभरापन.. गद्देदार चूत..
आशिया और नफ़ीसा दोनों की चूत एक जैसी थी.. लेकिन आशिया की चूत कमसिन थी.. पैंटी के सामने वाला हिस्सा गिल हो चुका था.. उस गिले हिस्से पर मैंने हाथ लगाया.. और आशिया के मुंह से.. ओउच्छ. निकला.. मैंने अब उसके निप्पल पर मेरी जीभ सख्त करके उसे थोकर मारने शुरू किया.. और वो मस्त होने लगी..
मैंने उसे पलंग पर बिठाया.. और उसका हाथ फिर से मेरे लंड के ऊपर रखा.. और उसके चेहरे से शुरू किया और उसके पूरे बदन को किस करना शुरू कर दिया.. उसने मेरे लंड को पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी। इतने में नफ़ीसा भी कमरे में आ गई.. ओह्ह.. तो मेरी गुड़ो मजा ले रही है.. कहते हुए वो भी आशिया के पास बैठ गई।
वो पूरी नंगी थी.. मैंने आशिया को बेड पर थोड़ा पीछे झुकाया और उसके बूब्स और निप्पल को चूमने लगा.. वो.. आह्ह.. ओह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है.. और चूसो.. मैंने उसके निप्पल एक एक कर मुंह में ले कर जोर से चूसना शुरू किया और इधर उसकी पैंटी के ऊपर से चूत को दबाया.. चूत क्या एक नरम मांस का टुकड़ा थी.. पूरी गिली हो रही थी।
मैंने उसकी पैंटी नीचे की तरफ खिंची.. तो उसने जल्दी से उसे हाथ से पकड़ लिया और कहने लगी.. नह्हि.. उसे मत निकालो.. मुझे शर्म आती है.. मैंने कहा.. वही तो असली जगह है प्यार करने की.. उसने कहा.. नहीं उसे निकलने के बाद तुम ये मेरे अंदर डाल दोगे.. मैं मर जाऊंगी।
मैंने तो आज तक एक उंगली भी नहीं डाली.. बाजी ने न जाने कैसे ये इतना मोटा और लंबा पूरा ले लिया था.. मुझे तो उसमें भी बहुत दर्द होता है.. मैंने कहा.. नहीं तुम जब तक नहीं कहोगी मैं नहीं डालूंगा और अभी तो मैं इसे देख रहा हूं.. और मैंने उसकी पैंटी नीचे की उसने अब अपने चूतड़ ऊपर उठाए और मैंने पैंटी उसके पैरों तक खिंच कर निकाल दिया.. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसकी पैंटी को देखा वो चूत वाले हिस्से में पूरी गिली हो चुकी थी। मैंने उस हिस्से को पहले सुंघा.. वाह.. क्या सेक्सी स्मेल थी उसके चूत की.. और उसके बाद मैंने अपनी जीभ निकाल कर उस गिले हिस्से को जीभ से चाटा.. ये सब आशिया देख रही थी। अब मैंने उसकी गुलाबी चूत की तरफ देखा और मेरी तो जैसे नजर अटक गई..
कुंवारी चूत.. गोरी.. एक भी बाल नहीं.. और चूत जैसे एक मोटी दरार.. दोनों तरफ फुली हुई और बीच की दरार एकदम चिपकी हुई गुलाबी.. मैंने हल्के से उस दरार पर हाथ फेरा.. चिपचिपा रही थी.. मैंने एक उंगली से उस दरार के अंदर से झांकते हुए उसके चूत के दाने को टच किया.. वो हमारी चुदाई देख कर सख्त हो चुका था और लाल हो गया था..
उसे मैंने अंगूठे से रगड़ते हुए दबाया और आशिया चीख पड़ी.. ओह्ह.. बाजी.. ये क्या हो रहा मुझे.. आह्ह्ह.. मैंने उसके होंठों को चूमा और मैं हल्के हल्के उसे सेहलाने लगा और आशिया बेकरार होती जा रही थी.. उसकी चूत फड़कने लगी.. और उसमें से और पानी निकलने लगा.. मैंने अब अपना चेहरा नीचे किया..
उसकी जांघों को और फैलाया और चूत के ऊपर अपनी होंठ रखे और चूत को चूसे हुए चूमना शुरू किया.. अब आशिया मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी थी.. तभी मैंने देखा नफ़ीसा ने अपनी होंठ आशिया के होंठों पर रखे और उसका हाथ आशिया की चूंचियों पर उसके निप्पल को निचोड़ने लगे थे..
मैंने उसकी रानों को हल्के से सहलाया और मेरे हाथ उसके चूतड़ पर पहुंच गए.. मैंने उसके चूतड़ ऊपर उठाए और अब मेरी जीभ सख्त ली और चूत के गुलाबी दरार को कुरेडने लगा.. मेरी जीभ उसके चूत के फड़को को थोड़ा फैलाती हुई अंदर गई.. वो अपने जांघों को सिकोड़ने लगी.. मैंने अपने हाथ से उन्हें दूर किया अब उसके मुंह से.. उम्म.. आह.. अच्छा.. लग रहा है.. ओह्ह.. हां..
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अब मैंने उसके साइड में पोजीशन लिया और मेरे सख्त उछलते हुए लंड पर उसका हाथ रखा.. उसने अब मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ा और हल्के से उसे ऊपर नीचे किया.. मेरे मुंह से आह्ह.. निकल गई.. उसके नरम हाथ लगते ही मेरा लंड मानो और सख्त होने लगा। मेरा आठ इंच का लंड अब लोहे के रोड जैसा हो चुका था।
मेरा लंड एक कुंवारी नंगी को बेड पर देख कर मानो पागल हो रहा था.. एक ही घर की दो कुंवारी चूत मेरे लंड के नसीब में आई थी। आशिया का बदन मख्खन जैसा मुलायम था। और पूरा बदन लाल हो रहा था जैसे दूधिया रंगत आ गई थी। उसकी चूंचियां बड़ी नहीं थीं लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे दो आधे नारियल उल्टे रखे हों।
उसका पेट चिकना और एकदम सपाट था। और उसकी चूत.. उसका तो क्या कहना.. लेकिन बहुत टाइट और छोटी सी थी, मेरी जीभ अब आधी अंदर जा चुकी थी। मैंने मेरे उंगलियों से चूत को फैलाया ओह्ह चूत का छेद एकदम लाल था.. मैंने उस पर जीभ लगाई और आशिया उचल पड़ी.. आह्ह.. ये कर दिया.. हां वही चाटो.. और जोर से.. ओह्ह मेरा पेशाब निकलेगा.. मुझे बाथरूम जाने दो.. और वो उठने लगी..
मैं समझ गया वो झड़ने वाली है.. मैंने सिर उठा कर कहा.. तुम यहीं पेशाब करो मेरे मुंह में.. और फिर से मैंने अपनी जीभ अंदर डाल दी। और तेजी से अंदर बाहर करने लगा। वो अपने चूतड़ ऊपर नीचे कर रही थी.. तभी मुझे लगा कि मेरा लंड किसी के मुंह में है.. देखा तो नफ़ीसा ने मेरा लंड अपने मुंह में लिया था.. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आशिया उसके जड़ पर पकड़े हुए थी.. और नफ़ीसा अपना मुंह हिलाते हुए मेरे लंड से अपना मुंह की चुदाई कर रही थी। और इधर आशिया ने.. आह्ह्ह्ह.. मेरा कुछ.. निकलााा.. ओउह्ह.. ओउह्ह.. आह्ह्ह.. गायी.. और मेरे मुंह में उसने बहुत तेजी से गरम गरम पानी छोड़ दिया.. मेरा मुंह भर गया.. अब वो मेरी जीभ हटाने लगी..
वो एकदम शांत हो गई थी.. उधर नफ़ीसा अभी भी उसके मम्मों और निप्पल चूस रही थी और हबा भी रही थी.. अब नफ़ीसा ने भी समझ लिया कि आशिया झड़ गई है.. उसने अपनी होंठ आशिया के होंठों पर रखा.. और हाथ बढ़ा कर मेरा फनफनाता लंड पकड़ लिया.. मैंने अब नफ़ीसा को मेरी तरफ खिंचा और किस करने लगा…
नफ़ीसा मेरी तरफ आई तो वो लेटी हुई आशिया के ऊपर से इस तरह आई कि उसकी चूत आशिया के मुंह के ठीक ऊपर थी.. उसकी चूत को अपनी मुंह के ऊपर पाकर आशिया ने उसकी चूत में पहले तो उंगली डाली.. नफ़ीसा ने पलट कर देखा.. और मुस्कुराते हुए कहा.. बनो.. चाट इसे.. और झिझकते हुए आशिया ने अपनी जीभ निकाल कर नफ़ीसा की चूत पर लगाया..
और जीभ सीधी.. नफ़ीसा के चूत के दाने से टकराई तो नफ़ीसा ने अपनी चूत उसके मुंह के ऊपर दबाई.. और आशिया ने जीभ चूत के अंदर डाल दी और नफ़ीसा के चूत का नमकीन जूस चाटने लगी.. तभी नफ़ीसा के हाथ मेरे लंड पर आ गया और उसने मेरे सीने को चूमते हुए अपना मुंह मेरे लंड पर लाया.. उसे चाटा.. और फिर मुंह में ले लिया..
वो इस तरह चूस रही थी कि इतनी देर से आशिया की चूत और नफ़ीसा की जीभ की गर्मी से परा पानी निकलने वाला था.. मैंने उसके मुंह से लंड को खिंचा और फिर मैंने नफ़ीसा को खड़ी किया.. . आशिया जो कि बेड पर लेटी थी उस को बेड के किनारे लाकर उसके पैर फैला दिए और फुली हुई चूत को सहलाया..
फिर मैंने नफ़ीसा को जमीन पर घुटनों के बल बैठने को कहा.. उसने बैठाते ही फिर से मेरा लंड मुंह में ले लिया.. और मैंने झुक कर आशिया की चूत में अपनी जीभ लगा दी.. आशिया . फिर से गरम होने लगी.. वो अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरी जीभ अंदर ले रही थी..
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और अपने हाथ से अपने निप्पल मसलने लगी.. आह्ह्ह.. हां.. उफ्फ.. मैं पागल हो जाऊंगी.. बाजी.. मेरी चूत में भी .. आज लंड डलवा दो.. ओह्ह अंकल.. आज मुझे भी मजा दे दो.. मैंने अब नफ़ीसा से बेड पर आने के लिए कहा और उसे डॉगी स्टाइल में इस तरह किया ताकि उसकी चूत आशिया के मुंह के पास आ जाए..
और मैंने आशिया से उसकी चूत को चाटने को कहा.. और पीछे से मेरा लंड.. नफ़ीसा की चूत पर टिकाया.. ऐसा करते हुए.. आशिया को जीभ मेरे लंड से टकराई.. तो उसने चूत में डालने से पहले ही मेरा लंड को पकड़ा और अपना मुंह में ले लिया और 2 मिनट तक चाटने के बाद मैंने उसे नफ़ीसा की चूत में डाला..
नफ़ीसा की हालत खराब हो रही थी.. मेरा लंड का आगे का सुपाड़ा अंदर जाते ही उसने खुद अपनी चूतड़ से पीछे जोर से धक्का दिया और पूरा लंड अंदर ले लिया.. मैंने उसकी कमर पकड़ ली और उसे जोरदार धक्कों के साथ चोदना शुरू किया.. तभी आशिया उसके नीचे से निकल कर आई और मुझे किस किया.. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी.. फिर उसने अपनी जीभ मेरा मुंह में डाली.. आशिया भी अब बहुत गरम हो रही थी.. मेरे धक्के नफ़ीसा की चूत पर बहुत जोरों से लग रहे थे.. नफ़ीसा की मम्मों धक्कों के कारण बहुत तेजी से झूल रहे थे.. इधर आशिया ने उठ कर अपना लेफ्ट मम्मा हाथ में पकड़ा और मेरे मुंह के पास लेटे हुए कहा.. इसे.. चूसो.. मुंह खोलो..
और मेरे मुंह खोलते ही उसने जबरदस्ती मेरे मुंह में उसके मम्मों का आधे से ज्यादा हिस्सा अंदर धकेला.. मैंने उसे जोर से चूसे हुए हल्के से काटने लगा.. और तभी नफ़ीसा चिल्लाई.. जोर से;; ओउह.. हां.. मेरी चूत.. गईइई.. ओह्ह.. मुझे चोदो .. और अंदर.. मैं छुटने वाली हूं.. और इसके साथ वो अपनी चूतड़ और जोर से हिला रही थी.. और फिर वो झटके देने लगी..
मेरा लंड को अंदर से गरम जूस का अहसास हुआ.. झड़ते ही नफ़ीसा अलग हो गई और उसने आशिया को खिंच कर लिटाया और कहा.. अंकल.. इसकी चूत फाड़ दो.. मैंने कहा आशिया तैयार है क्या? आशिया ने मेरी तरफ देखा और कहा.. हां.. डालो.. अब जो होगा देखा जाएगा.. कहते हुए वो अपने पैर फैला कर लेट गई..
मेरा लंड.. मैंने उसके चूत को फैलाकर उसपर रगड़ा.. ऊपर नीचे.. आशिया की चूत से बहुत पानी निकल रहा था.. मैंने झुक कर उसे किस किया.. और उसके पैरों के बीच अपनी को अडजस्ट करते हुए लंड को चूत पर टिकाया.. और तभी नफ़ीसा ने मुझे इशारा किया.. और खुश उसके होंठों पर चुक कर उसके मुंह को बंद कर दिया..
मैंने आशिया की कमर और जांघ सख्त पकड़ी और ताकत लगाते हुए लंड को अंदर दबाया.. सुपाड़े के अंदर घुंसते ही.. आशिया चटपटा उठी.. लेकिन नफ़ीसा ने उसका मुंह बंद कर रखा था इसलिए.. वो चिल्ला नहीं पाई.. मैंने थोड़ा और दबाया.. लेकिन 2 इंच जाते ही लंड फंस गया.. मैं समझ गया कि आगे उसकी सील है..
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मैं रुक गया.. क्योंकि आशिया दर्द से कराह रही थी.. उसकी आंखों से आंसू निकल आए थे.. उतन लंड अंदर डाले हुए मैंने उसके निप्पल मुंह में ले लिए.. और 3-4 मिनट उसे बहुत चूमा.. नफ़ीसा भी उसे सेहल रही थी.. दर्द थोड़ा कम होते ही मैंने नफ़ीसा को इशारा किया..
उसने फिर उसके मुंह पर मुंह रखा और मैंने लंड को हल्के हल्के आगे पीछे किया और एक जोरदार धक्का दिया और आशिया बुरी तरह चटपटी.. उसने नफ़ीसा का मुंह हटा दिया.. मैंने उसे बहुत कस के पकड़ा था.. वो ऊपर की तरफ सरकने की कोशिश करते हुए चिल्लाई.. मार गईइई.. मार डालला.. निकाल.. लो.. मुझे नहीं चुदवाना..
मैं रुका.. और अब मेरा हाथ उसके बगल से डाल कर उसके कंधे पकड़े.. और उसे चूमते हुए लंड को अंदर बाहर करने लगा.. उसकी चूत भी बहुत टाइट थी.. थोड़ी देर ऐसा करने से उसे थोड़ा आराम मिला.. लेकिन वो रोते हुए कह रही थी.. बस अब निकाल लो.. मैं सहन नहीं कर पा रही हूं.. लेकिन मैंने एक नहीं सुनी..
और फिर कुछ देर में आशिया के मुंह से.. आहह.. ओउह्ह.. श्ह्श.. जैसी दर्द और आनंद की आवाज आने लगी.. मैंने अब लंड को सुपाड़े तक बाहर खिंचा.. और उसे कस के पकड़ते हुए एक धक्क दिया और लंड गिली चूत में रास्ता बनाता हुआ.. पूरा अंदर गुस गया.. मेरा लंड पर कुछ गरम गरम महसूस हुआ..
मैंने देखा.. आशिया के खून से चादर लाल हो रही थी उसकी गांड के नीचे…. कुंवारी चूत की सील टुट चुकी थी। मैं बहुत देर से रुका हुआ था.. पहले.. नफ़ीसा की चुदाई.. फिर.. आशिया के चूत की चाटाई और मेरा लंड की नफ़ीसा ने की चूसाई.. फिर नफ़ीसा की चूत की चुदाई.. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे लगने लगा कि मैं ज्यादा देर नहीं रुक पाऊंगा.. लंड और सख्त और मोटा होने लगा था.. और उस पर आशिया की टाइट चूत.. मैंने अब उसके दर्द की परवाह ना करते हुए अपने धक्कों की स्पीड बढ़ाई.. और अब आशिया भी अपनी कमर हिला कर.. आह्ह.. हां.. जोर से.. और जोर से.. अंकल.. मेरा फिर से पेशाब निकलेगा.. आह्ह.. आह्ह.. वो मुझे अपनी करीब खिंच रही थी.. मेरे पीठ को जकड़ लेती।
शायद उसके लंबे नाखून मेरे पीठ में गड़ने लगे.. और मुझे से जोर से चिपक कर आशिया ने अपना पानी चिल्लाते हुए निकाला.. आह्ह.. आह्ह.. अंकल.. मेरा निकलााा। मैं.. मूत.. रही.. हूउउउउ.. ओह्ह.. आम्मा.. गईइई.. और उसने जो झटके लिए.. उसकी झटको के साथ मैंने अपना लंड जड़ तक उसकी चूत में धंसा कर.. मेरी पिचकारी भी चालू कर दी.. बहुत देर चुदाई के बाद झड़ने के कारण मेरा लंड से बहुत सारा पानी निकला..
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और आशिया की चूत पूरी भर गई थी.. मैं उसके ऊपर ही लेट गया.. नफ़ीसा भी बाजू में नंगी लेटी हुई थी.. थोड़ी देर बाद दोनों की सांस थोड़ी नॉर्मल हुई.. अब मैंने मेरा लंड बाहर निकाला.. पच्च.. की आवाज हुई.. आशिया की चूत देखने लायक थी.. मेरा व्हाइट क्रीम.. उसका पानी और खून सब एक साथ बाहर निकल कर गांड से होते हुए चादर पर गिर रहे थे.. और वो पतली दरार फैल चुकी थी.. नफ़ीसा ने मेरा लंड को हाथ में लिया.. और मुंह में लेकर चाटने लगी.. आशिया ने सिर उठा कर देखा..
और इशारा किया कि उसे भी चाटना है.. मैंने लंड को उसके पास ले गया.. और दोनों बहनों में मेरा लंड को चाट चाट कर साफ किया.. अब शाम हो रही थी.. इसलिए हम तीनों ने बाथरूम जाकर नहाने का फैसला किया.. . तीनों नंगे ही बाथरूम में गए.. और वहां फिर दोनों बहनों की डॉगी स्टाइल में चुदाई करते हुए एक दूसरे को साफ किया.. और मैं कपड़े पहन कर वापस अपने घर आ गया.. दूसरे दिन से.. दोनों बहनें कभी एक साथ या फिर अकेले में आ कर मेरे लंड का मजा लेती हैं..
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