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अब्बा जान ने किया बेटी का हलाला 1

अक्टूबर 26, 2026 by hamari Leave a Comment

Halala Ki Sexy Kahani

इस कहानी का मुख्य पात्र अरशद अली खान है. और उंसकी आयु 53 साल है। वह पेशे से एक मौलवी है और उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहता है. कद 5 फीट 6 इंच और रंग गेहूंआ है। जिस्म बहुत ही तगड़ा है और चेहरा पर हम मौलवी वाली दाढ़ी है। दिखने में वो एक पहलवान की तरह लगता है. उसके पास पैसा काफ़ी है। आंखों का रंग काला है और बाल सफेद हैं। Halala Ki Sexy Kahani

अरशद के घर में उसकी बेटी ही हैं। क्योंकि उसकी बीवी एक दुर्घटना में देहांत हो गया था और खुदा का बंदा होने के कारण उसने शादी नहीं की। वो दिन में ५ बार का नमाज़ी है और उसका काम मस्जिद मैं ५ बार नमाज अदा करवाना और किसी की शादी या मौत आदि मैं मौलवी का दाम करना है।

अब थोड़ा सा उसकी बेटी के बारे मैं भी बता देते हैं. अरशद की बेटी का नाम नगमा है. उसकी उम्र लगभग २२ साल की है। वो बहुत ही सुन्दर है और उसका बदन बहुत गोरा और शरीर थोड़ा मोटा और भरा पूरा है. अल्लाह ने उसको बहुत प्यार से बनाया है। खूब मोटे मोटे मुम्मे और बड़े बड़े चूतड़.

जिन्हे देख कर तो शायद किसी मुर्दे का भी लौड़ा खड़ा हो जाये। वो दिखने में एकदम मस्त माल है और बहुत नमकीन है। उसका कद 5 फीट 4 इंच है। और होंठ लाल एवं रसीले हैं। उसका बदन भरा हुआ और सेक्सी है। उसके बूब्स और चूतड़ काफ़ी बड़े-बड़े और उभरे हुए हैं।

अगर कोई उसको देखता है तो उसके नाम की मुठ जरूर मारेगा और उसको चोदने केलिए तड़पेगा। अरशद ने कपड़े पहनने के मामले में कोई पाबंदी नहीं लगाई। वो ज्यादातर जींस टॉप या जींस शर्ट पहनती है और एमए दूसरे साल की छात्रा है। जींस के साथ जब हाई हील के सैंडिल पहनती है तो एक दम सेक्सी माल लगती है।

उसकी मोटी गांड, बड़े-बड़े गोल बूब्स और भरी हुई जांघों को देखकर मुंह से लार टपकने लगती है। उसकी फिगर का साईज 36-30-36 है और बूब्स के निप्पलों का रंग हल्का गुलाबी है। उसकी गांड और बूब्स काफ़ी भारी हैं और चलते हुए तो उसकी गांड कहर ढाती है। उसके बूब्स और गांड काफ़ी बड़ी है।

अरशद को उसकी बीवी की मौत के बाद से सेक्स की बहुत कमी हो रही थी. उसके शरीर में खूब ताकत थी हर रोज उसका लौड़ा खड़ा हो जाता. तो रात कटनी उसे मुश्किल हो जाती थी, गांव का मौलवी होने के कारण गांव के लोग उसकी बहुत इज्जत करते थे, पर इस कारण वो बेचारा किसी औरत को चोद भी नहीं पाता था। बस उसके जीवन में एक चुदाई की ही कमी थी।

रात को खाना खाकर अरशद अपने रूम में बैठा कोई मजहबी किताब पढ़ रहा था और नगमा रूम में दूध लेकर आ गई। उसने अपनी अम्मी की लाल साड़ी पहनी हुई थी जो अरशद को बहुत पसंद थी। वो हमारी शादी की पहली सालगिरह पहन कर मेरे सामने आई थी।

वो साड़ी बहुत झीनी है और उसके पल्ले से पेट साफ दिखाई देता है। उसका ब्लाउज़ पीछे से खुला है और आगे से गला बहुत गहरा है. (हालाँकि हम मुसलमान लोग साड़ी नहीं पहनते पर बंगाल के उस इलाके में सभी लोग साड़ी पहनते हैं.

ब्लाउज़ के पीछे सिर्फ इलास्टिक की दो बारीक पट्टियां हैं और आगे से बूब्स की गोलाइयां दिखाई देती हैं। नगमा को उस साड़ी में देख कर एक बार तो अरशद को लगा कि सामने उसकी बीवी खड़ी है। उस दिन अरशद ने अपनी बेटी के बदन को गौर से देखा। वो बिल्कुल अपनी अम्मी पर गई है।

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उसके बूब्स उसकी बीवी जितने बड़े हैं लेकिन गांड उससे बड़ी है। वो सोच रहा था काश जुनैदा होती तो उसको चोद देता। नगमा सामने खड़ी थी लेकिन अब वो उसे अपनी बेटी नहीं बल्कि बीवी लग रही थी। उसका मन कर रहा था की काश वो अपनी बेटी को चोद पाता।

पर उसे पता था की वो दोनों बाप बेटी हैं और इस तरह का सम्बन्ध उन दोनों के बीच में संभव ही नहीं है. अरशद सोचने लगा की इस से पहले की उसका खड़ा लौड़ा उसके दिमाग को हरा दे और वो कोई गलत कदम उठा न बैठे, इस लिए उसे अपनी बेटी की शादी कर देनी चाहिए.

अगले दिन से उसने बेटी के लिए लड़का देखने का काम शुरू कर दिया. किस्मत से उसी गांव में एक दूसरी मस्जिद थी जिस में नौशाद नाम का एक नौजवान लड़का मौलवी का काम करता था. नौशाद काफी शरीफ था और दीन की भी अच्छा जानकर था.

मौलवी होने के कारण उसे मस्जिद की तनख्वाह के अलावा लोगे की मौत, शादी आदि का भी काम मिल जाता था जिस से उसे अच्छी आमदनी हो जाती थी. अरशद को लगा की नौशाद उसकी बेटी के लिए एक अच्छा वर हो सकता है. क्योंकि एक तो वो उसी गांव में था उसे अपनी बेटी को भी देखने मिलने में आसानी होगी क्योंकि आखिर बीवी की मौत के बाद उसका दुनिया में कोई था तो उसकी नगमा बेटी ही थी.

हालाँकि नौशाद शरीर से कोई ख़ास तगड़ा नहीं था, वो काफी पतला सा था पर ऊपर वाली सारी बातें सोच कर, उसने नौशाद से अपनी बेटी नगमा की शादी कर दी, नगमा की शादी के बाद कुछ दिन तो ठीक ठाक बीते, पर अरशद और नगमा को यह पता नहीं था की उन का दामाद मौलवी नौशाद चोरी छुपे शराब पीने का शौकीन है.

यह बात तो नगमा को अपनी सुहागरात के दिन ही पता चल गयी जब उस का शौहर नौशाद शराब के नशे में उस से सुहागरात मनाने आया. नगमा को यह बात बहुत बुरी लगी पर अब क्या हो सकता था. शादी तो हो चुकी थी और एक औरत होने के नाते उसे तो अब यह सब सहन करना ही था.

हालाँकि उसने बाद में बहुत कोशिश करी परन्तु नौशाद की आदत को वो बदल न पायी. अब तो बीत रहे समय के साथ नौशाद ने उस के साथ मार पीट भी शुरू कर दी थी. नगमा इस को अपना किस्मत मान कर चुप रह गयी और अपने अब्बू अरशद को भी कुछ न बताया।

खैर यह सब तो चल ही रहा था परन्तु एक दिन तो हद ही हो गयी। नौशाद शराब के नशे में था और नगमा को चोदना चाहता था पर नगमा नहाने के लिए बाथरूम में गयी थी. वहां पर उसने देखा की उस के कुछ कपडे पड़े थे तो उंसने सोचा कि चलो लगे हाथ वो उनको भी धो देती है.

बस इसी चक्कर में उसे कुछ समय लग गया जो नौशाद को बड़ा नागवार गुजरा। जब नगमा नहा कर बाथरूम से बाहर आयी तो नौशाद का गुस्सा शराब के कारण बहुत बढ़ा था. उसने नगमा को कस कर दो थीं थप्पड़ लगा दिए। नगमा को भी गुस्सा आ गया और उसने मार पीट का विरोध किया।

बस फिर क्या था नौशाद से यह बात सहन न हुई और क्यूंकि शराब के कारण उसका दिमाग भी सही काम नहीं कर रहा था तो उसने गुस्से में नगमा को तलाक तलाक तलाक बोल दिया. तीन बाद तलाक सुनते ही नगमा तो जैसे मिटटी की मूर्ति की तरह खड़ी ही रह गयी।

नौशाद ने भी जब नगमा का मुँह देखा तो उसका भी दिमाग घूम गया की अरे यह क्या हो गया? पर अब क्या हो सकता था. तलाक तो हो गया था. धर्म के अनुसार अब उनका निकाह टूट गया था और अब वो पति पत्नी नहीं रहे थे. नौशाद को समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या करे.

उसने समझाने के अंदाज में नगमा को कहा- “नगमा यह तो मैंने मजाक में कहा है. तुम इसे सीरियसली न लेना. चलो आओ बेड पर आओ ताकि हम अपना रात का मजे वाला काम शुरू करें। “

पर नगमा भी तो एक मौलवी की बेटी थी. वो बुरी तरह से परेशान थी और रो रही थी. बहुत बड़ी गड़बड़ हो चुकी थी. तीर तो कमान से निकल चूका था. पूरी रात दोनों ने रो रो कर गुजारी. नौशाद को अपनी गलती का एहसास था क्योंकि वो खुद भी तो एक मौलवी था. पर अब वो करे भी तो क्या करे.

अगले दिन नगमा अपने अब्बू के घर वापिस आ गयी. अरशद को भी पता चल गया कि उसकी बेटी के साथ क्या वाकया हो गया है. दोनों बाप बेटी बड़े परेशान बैठे थे. नौशाद भी पास में था. सभी परेशान थे की क्या किया जाये. नौशाद ने हाथ जोड़ कर अपने ससुर मौलवी अरशद से कहा-

“अब्बा जान, मैं मानता हूँ कि मेरे से गलती हो गयी है. पर मैं मन से नगमा को तलाक नहीं देना चाहता था. वो तो बस मेरे से गुस्से में मुँह से निकल गया। आप कुछ कीजिये और नगमा को समझाइये की सच में मैंने तलाक नहीं दिया है और वो मेरे साथ वापिस चले.”

अरशद ने न में सर हिलाते हुए कहा-

“बेटा मैं जानता हूँ की तुम नगमा से बहुत प्यार करते हो और तुम्हारे मन में को ऐसी बात नहीं है. पर हम सब गैरतमंद मुस्लमान है और ऊपर से हम दोनों ही एक मौलवी है. इसलिए हम को तो मजहब का पालन करना होगा. तुमने चाहे गुस्से में तलाक दिया है पर के अनुसार तलाक तो हो चूका है. अब नगमा तुम्हारी बीवी नहीं रही. तुम दोनों में कोई भी रिश्ता अब नहीं है इसलिए नगमा अब तुम्हारे साथ नहीं जा सकती.”

नौशाद बोला, “मैं नगमा से दोबारा निकाह करने को तैयार हूँ।”

नगमा के पिता ने नौशाद को फिर समझाया, “बेटा, इससे दोबारा निकाह करने के लिए नगमा को हलाला करना होगा, हलाला मतलब नगमा को किसी दूसरे से निकाह करके उसके साथ कम से कम एक रात उसकी पत्नी के रूप में गुजारनी होगी,

उसके बाद नगमा का शौहर जब अपनी मर्जी से इसे तलाक देगा तभी इसके साथ तुम्हारी दोबारा शादी हो सकती है। इसमें अहम है दोनों को पति पत्नी के रूप में रिश्ता कायम करना, और इसके लिए हर कोई तैयार भी नहीं होता, और यह रिश्ता दोनों की रजामंदी से बनाया जाता है किसी की ज़ोर जबरदस्ती से नहीं।”

नौशाद ने कहा, “अगर मैं अपने किसी जानकार को हलाला के लिए तैयार कर लूँ तो क्या आप रजामंद होंगे?”

नगमा के पिता बोले, “हाँ! अगर कोई विश्वसनीय व्यक्ति हुआ तो अवश्य हम रजामंद हो जाएंगे, हमारी बेटी के जीवन का जो सवाल है।”

(यही मैं अपने उन पाठको को जो हमारे मजहब के बारे में या हलाला प्रथा के बारे में नहीं जानते उन्हें बता दू की हलाला क्या होता है. किसी शौहर द्वारा अपनी पत्नी (बेगम) को तीन तलाक दिए जाने के बाद यदि वहः उससे दोबारा निकाह करना चाहे तो वो तब तक नहीं कर सकता जब तक वो औरत दूसरा निकाह करके उससे तलाक ना ले ले।

यहाँ दूसरे विवाह के बाद शारीरिक संबंध आवश्यक है। औरत दूसरे निकाह के तलाक के बाद जब पहले शौहर से दोबारा निकाह करे इसे निकाह हलाला कहा जाता है। कुरान के मुताबिक तीन तलाक एक औरत का अपमान है और अब तलाक देने वाले शौहर का अधिकार अपने बेगम पर से खत्म हो जाता है.

औरत के दूसरे निकाह के बाद पहला शौहर दूसरे शौहर को तलाक के लिए मजबूर नहीं कर सकता दूसरा शौहर यदि तलाक ना दे तो हलाला नही होगा। यदि दूसरे शौहर के साथ औरत के शारारिक संबंध नहीं बने तो भी हलाला मान्य नही होगा। हलाला में औरत की शादी किसी दूसरे मर्द से कर दी जाती है.

फिर वों नया मर्द औरत के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाता है और उसे कुछ रांते टांग उठा कर पेलता है. हलाला होने के लिए औरत का उसके नये शौहर से जिस्मानी रिश्ता होना जरूरी है. इसके बिना दूसरा निकाह पूरा नही होता. उसके बाद वों नया शौहर कुछ दिन बाद औरत को तलाक दे देता है. अब वों औरत अपने पहले शौहर से निकाह कर सकती है. ये पूरी रस्म हलाला की होती है.)

नगमा के अब्बा अरशद और पति नौशाद दोनों बैठे सोच रहे थे और नगमा बैठी रो रही थी. आखिर बेचारी करती तो करती भी क्या. जबकि दोष उसका तो नहीं था। उसके पति मौलवी नौशाद ने उसे गुस्से में तलाक दे दिया था। पर जिंदगी तो बेचारी नगमा की खराब हो रही थी..

नौशाद ने कहा- “अब्बाजान (वो अपने ससुर को अब्बा ही कहता था ), हम दोनों ही दिन के जानकर और मौलवी है तो मजहब का नियम खूब जानते हैं. अब हलाला के बिना कोई चारा भी तो नहीं है. हमें कोई ऐसा आदमी ढूंढना होगा. जो नगमा के साथ निकाह कर ले और फिर उसके साथ औरत मर्द का रिश्ता कायम करे और फिर वो उसे तलाक दे दे. तभी मैं फिर से नगमा से शादी कर सकता हूं.”

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अरशद :- “बेटा नौशाद तुम तो जानते हो की आजकल क्या चल रहा है. हम मौलवियों ने तो हलाला को एक व्यापार बना रखा है. क्योंकि कई बार आम लोग निकाह के बाद में अपनी नयी बीवी को पसंद करने लग जाते है या यदि वो औरत नौजवान या बहुत सुन्दर हो तो बाद में तलाक देने से इंकार कर देते है.

और बेचारा पुराना शौहर कुछ भी नहीं कर पता. इसलिये लोग आजकल अपने जान पहचान या रिश्तेदारी में हलाला करवाने के बजाए किसी मौलवी से हे हलाला करवाते है. मौलवी हलाला शादी करता है और फिर उस औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बना कर बाद में उसे तलाक दे देता है।

पर क्योंकि मौलवी यह सब उस मियां बीवी के मदद के लिए करता है तो वो उस के लिए खूब पैसे भी मांगता है. तुम खूब भी मौलवी हो और कितनी ही बार तुम खुद भी ये हलाला शादी कर चुके हो. तुम जानते ही हो की आजकल कोई भी मौलवी कम से कम पचास हज़ार रुपये लेता है. ये हम मौलवियों का कमाई का एक बड़ा साधन है. अब इतना बड़ा पैसे का इंतजाम मेरे पास तो नहीं है.

और इस के अलावा और भी एक मुश्किल है कि आम तोर पर फिर ये मौलवी लोग हलाला तलाक के बाद में आपस में या दुसरे लोगों मैं चटकारे ले ले कर और मजे ले ले कर उस औरत के साथ गुजारी रातों और जिस्मानी ताल्लुकात की जिक्र करते है. इस तरह बहुत बदनामी होती है. मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि करे तो करे क्या?”

नौशाद भी बेचारा बड़ा मायूस सा हो कर बोला- “हाँ अब्बाजान कह तो आप सही रहे हैं. इस बात के इलावा के बात और है की हम दोनों खुद मौलवी है तो हमारी तो और भी ज्यादा बदनामी होगी. लोग तो नमक मिर्च लगा लगा कर बातें करेंगे.

की देखो यह मौलवी आज तक हम लोगों की औरतों के साथ हलाला निकाह कर के जिस्मानी ताल्लुकात बनता था आज खुद इस की बीवी के साथ फलाने आदमी ने वो ही सब कुछ किया है. अब्बाजान हम लोगों की बहुत बदनामी भी होगी. अभी तो हम तीनो (नगमा, आप और मैं) के सिवा किसी को भी पता नहीं है कि मेरा और नगमा का निकाह टूट गया है.

आप कोई ऐसा रास्ता खोजिये और ऐसा कोई आदमी खोजिये कि जो नगमा के साथ निकाह और हलाला कर के उसे बाद में बिना दिक्कत या मना किये तलाक दे दे जिस से मैं दुबारा नगमा से शादी कर सकू. और कोई पैसा भी न ले। और समाज में हमारी बदनामी भी न हो.”

अरशद ने इंकार में सर हिलाते हुए कहा- “नौशाद बेटा। ऐसा आदमी कहाँ से मिल सकता है. जो हलाला करने के बाद चुप चाप तलाक भी दे दे और कोई पैसा भी न ले. ऊपर से हम ये भी चाहते हैं कि वो बाहर लोगों में इस बात का कोई जिक्र भी न करे. ताकि हम लोगों की कोइ बदनामी भी न हो. यह सब तो मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन ही है. ऐसा खुदा का बंदा कहाँ मिलेगा.”

दोनों चुप रह गए क्योंकि यह एक बड़ी ही मुश्किल घडी थी जिसका कोई भी हल भाई सूझ रहा था. नगमा भी बेचारी चुप चाप बैठी रो रही थी, उसकी तो पूरी जिंदगी का सवाल था। पर किसी को भी समझ नहीं आ रहा था कि करें तो क्या करें.

नौशाद बोला:- “अब्बा जान ऐसा कोई लड़का जो पैसा भी न मांगे और बाद में आराम से तलाक भी दे दे और ऊपर से हमारी बेइज्जती भी न करे। ऐसा कोई लड़का को अपने किसी रिश्तेदारी में ही हो सकता है. आप सोचिये कि क्या आपकी रिश्तेदारी में ऐसा कोई लड़का आपकी नजर में है क्या?”

अरशद:- ” बेटा मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा है. मेरी रिश्तेदारी में तो ऐसा कोई लड़का मेरी नजर में नहीं है. तुम्हारी रिश्तेदारी में है क्या कोई.?”

नौशाद:- “नहीं अब्बा। में तो पहले ही सोच चूका हूँ पर कोई भी लड़का मेरी नजर में नहीं है. वैसे हमारे मजहब के मुताबिक कोई भी ऐसा व्यक्ति जिस के साथ माँ के दूध का सम्बन्ध न हो हलाला कर सकता है. यानि सगे भाई बहन के बीच हलाला नहीं हो सकता. बाकि कोई भी हो।”

इतना कह कर नौशाद चुप हो गया. अरशद और नौशाद दोनों सोच में बैठे थे.

अचानक नौशाद बोला- “अब्बाजान मैं एक बात कहूं यदि आप बुरा न माने और ध्यान से मेरी बात सुने. एक आदमी मेरी दिमाग में अभी आया है. जिस के साथ यह डर भी नहीं रहेगा की वो बाद में तलाक देने से इंकार न कर दे और न ही बदनामी का कोई डर रहेगा और ऊपर से कोई पैसा भी देना नहीं पड़ेगा.”

अरशद भी एकदम ख़ुशी से उछल पड़ा और बोला- ” या अल्लाह, जल्दी बोलो। नेकी और पूछ पूछ.”

नौशाद:- “अब्बाजान ऐसा है कि कहते हैं के शादी के बाद लड़की परायी हो जाती है. उसका ससुराल ही उसका घर होता है. तो इस हिसाब से तो आप के साथ नगमा का कोई रिश्ता नहीं रहा. और नगमा के साथ आपका माँ के दूध का भी रिश्ता नहीं है. तो क्यों न आप के साथ नगमा की शादी कर दी जाये और आप नगमा के साथ हलाला कर के उसे तलाक दे दे और फिर मेरी शादी दोबारा से नगमा से हो जाये.”

यह बात सुनते ही अरशद और नगमा दोनों हैरानी से उछल पड़े। नगमा की तो मरे हैरत से आँखें ही जैसे फटी की फटी रह गयी. अरशद का भी हैरानी से मुँह ही खुला रह गया.

अरशद हैरत से बोला- “लौहौल विला कुव्वत। नौशाद तुम्हे पता भी है कि तुम यह क्या कुफ्र बोल रहे हो? नगमा मेरी सगी बेटी है. भला बाप बेटी में हलाला कैसे हो सकता है.”

नौशाद शांति से बोला- “अब्बा आप जरा ठन्डे दिमाग से सोचिये। शादी के बाद नगमा मेरी बीवी बन गयी है. वो अब हमारे घर का मेंबर है न कि आपके घर की सदस्य। तो आप आराम से उस से शादी कर सकते है. फिर आप उसे तलाक दे देंगे तो मेरी शादी उस से हो जाएगी.

अभी क्योंकि मेरा नगमा से तलाक हो चूका है तो हमारा सम्भन्ध टूट चूका है. और मैं खुद एक मौलवी हूँ तो मैं आप दोनों की शादी करवा दूंगा. फिर जब आप हलाला करने के बाद नगमा को तलाक दे देंगे तो आप का मिया बीवी का रिश्ता नगमा से टूट जायेगा तब आप मौलवी के नाते मेरा और नगमा का निकाह पढ़वा देना.

इस तरह मजहब का काम भी हो जायेगा. और सारी समस्या भी हल हो जाएगी। हम दोनों ही मौलवी हैं तो हम दोनों एक दुसरे का निकाह करवा देंगे तो बाहर समाज में किसी को कानों कान खबर भी नहीं होगी और हमारी समस्या का समाधान भी हो जायेगा. आप जरा एक बार ठन्डे दिमाग से सोचिये. मेरे ख्याल में तो इस मुसीबत का इस से अच्छा कोई इलाज हो ही नहीं सकता.”

नौशाद यह कह कर चुप हो गया. सरे घर में एकदम से चुप्पी छा गयी जैसे सभी के मुँह पे ताले लग गए हो. नगमा भी चुप थी। अरशद भी सोच में पड गया। उसे इस बात मैं दम तो दिखाई दे रहा था. उस के मन में तो यह बात सुन कर असल में लड्डू ही फूटने लग गए थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

हे अल्लाह तु कितना मेहरबान है? अपनी जिस बेटी के सेक्सी जिस्म को देख देख कर मैंने न जाने कितनी बार मुठ मारी है, और न जाने उसको चोदने के कितने सपने देखे है. क्या उस को चोद पाने का तूने यह क्या मौका पैदा किया है.

पर प्रगट में वो नाराजगी दिखते हुए बोला (हालाँकि उसके मन मैं तो सैंकड़ों पटाके छूट रहे थे और ख़ुशी के लड्डू फुट रहे थे.)- “नौशाद यह नहीं हो सकता। बाप बेटी में कभी हलाला नहीं हो सकता. तुम कोई और लड़का ढूंढो. जरा तुम ही सोचो कि यदि किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे.”

उधर नगमा भी मन ही मन खुश हो रही थी. उसे भी यह बहुत बढ़िया मौका लग रहा था कि जिस से वो अपने अब्बा से चुदवाने का जो सपना कितने ही सैलून से मन में बसाये बैठी थी वो अल्लाह की रेहमत से पूरा होने का एक मौका लग रहा था.

उसने न जाने कितनी ही बार अपने बाप को अपनी मरहूम माँ की याद में मुठ मरते देखा था. उसका बापू उसके खविंद नौशाद से चाहे उम्र में बड़ा था पर वो सेहत में नौशाद से बहुत हत्ता कट्टा था और नगमा को पूरा यकीं था की उसका अब्बा उसे जिंदगी का सेक्स का वो मजा चखा सकता था जो उसका शौहर उसे आज तक नहीं चखा सका था.

नगमा ने न जाने कितनी बार अपने अब्बा का नाम ले कर अपनी चूत मैं ऊँगली करि थी. नौशाद के इस बात से उसे अपनी अधूरी ख्वाहिशों को पूरा करने का मौका मिल रहा था. उसका मन कर रहा था कि उसका बाप झट से नौशाद के उस बात पर हाँ बोल दे. पर जब उसने अपने अब्बा को हामी भरते न देखा तो उसे मन ही मन मैं अपने बाप पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

नौशाद बोला- “अब्बूजान मेरे ख्याल में इस से बढ़िया कुछ हो नई नहीं सकता. आप एक बार हाँ बोल दें. किसी को कानो कान खबर भी न होगी. और मजहबी काम भी पूरा हो जायेगा.”

अरशद जिस के मन मैं तो खुशियों के लड्डू फुट रहे थे, पर प्रगट में वो उदास सा मुँह बना कर बोला- “नौशाद देख लो अगर और कोई चारा नहीं है तो मैं तुम्हारी और नगमा की जिंदगी बचाने के लिए इस के लिए भी तैयार हूँ। शायद अल्लाह को यही मंजूर है.”

ज्योंही अरशद ने हाँ करी, नगमा के भी मन में ख़ुशी के लड्डू फूटने लगे. उसका मन कर रहा था की वो ख़ुशी से नाच उठे. पर उसका बाप और शौहर पास में थे तो वो दिखावे के लिए चुप बैठी रही.

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अरशद बोला- “ठीक है नौशाद, हम बाजार से तो नगमा के लिए शादी का जोड़ा नहीं खरीदने जा सकते. तो ऐसा करते है कि नगमा की माँ का जो शादी का जोड़ा पड़ा है नगमा वो ही पहन लेती है तुम मौलवी हो तो तुम हम दोनों का निकाह पढ़वा दो।”

अरशद ने अंदर से अपनी मरहूम बीवी का शादी का लाल लेहंगा चोली का सूट निकल कर नगमा को दे दिया. जिसे नगमा ने बाथरूम मैं जाकर पहन लिया. फिर नौशाद ने दोनों बाप बेटी अरशद और नगमा को बिठा कर निकाह पढ़वा दिया.

नौशाद- “आप दोनों आज से बाप बेटी नहीं बल्कि मिया बीवी हो। नगमा अब अरशद तुम्हारा शौहर है. इस को शौहर का प्यार देना. और अब्बाजान अब काफी शाम हो गयी है रात होने ही वाली है. आप आज रात को हलाला कर लीजिये (दुसरे शब्दों में कहें तो भरपूर चुदाई कर लीजिये). मैं कल सुबह आऊंगा और तब आप नगमा तो तलाक दे कर मेरे साथ उसकी शादी कर देना. अब मैं अपने घर जाता हूँ. खुदा हाफिज.”

यह कह कर नौशाद अपने घर चला गया और इधर घर में रह गए दोनों बाप बेटी। जिन्हे अब हम बाप बेटी नहीं बल्कि बीवी और शौहर कहेंगे. अब दोनों को इंतजार था अपनी सुहागरात का।

अरशद ने कहा- “नगमा रात होने ही वाली है. में बाजार से कुछ खाने को ले आता हूँ, खाना बनाने में तो बहुत टाइम लगेगा. फिर हम सोने चलेंगे.”

नगमा मन ही मन मुस्कुरा दी. वो समझ गयी की उस का बाप खाना बनाने का भी टाइम खराब नहीं करना चाहता और उस के साथ हलाला करने को उत्सुक है. वो खुद भी चाहती थी कि खाना तो रोज ही खाते हैं बस आज तो जितनी जल्दी हो सके असली काम को शुरु किया जाये.

उसने हाँ में सर हिला दिया. अरशद जल्दी से बाजार से खाना लाया और दोनों बाप बेटी ने फटाफट खा लिया. दोनों एक दुसरे से शर्मा रहे थे. चाहे उनकी शादी हो गयी थी पर असल में वो थे तो बाप बेटी ही, कुछ शर्म तो होनी लाजमी ही थी, (चाहे वो शर्म थोड़ी देर मैं बेडरूम में उतर जाने वाली थी.)

खाना खाने के बाद अरशद ने नगमा से कहा- “बेटी बर्तन साफ़ करने को तो आज रहने दो। तुम जल्दी से मुँह हाथ धो कर बेडरूम में चलो मैं मैं दो घंटे में आता हूँ, तुम तब तक तैयार हो जाओ.”

नगमा समझ गयी की उस का बाप उसे सुहागरात (हलाला) के लिए तैयार होने को कह रहा है. नगमा समझ गयी की जिस घडी का उन दोनों को सालों से इन्तजार था वो आ गयी है. वो चुपचाप उठी और बेडरूम में जा कर नयी नवेली दुल्हन की तरह बेड़ पर जा कर बैठ गयी और अपने सईया (आज उसे अपना बाप, अपना सईयां ही लग रहा था) के इंतजार में बैठ गयी.

फिर उसके दिमाग में एक बात आयी कि उसके बाप अरशद ने उसे दो घंटे में आने को क्यों बोला है, सोच सोच कर उसके दिमाग में आया कि अरशद असल मैं उसे चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार होने के लिए समय दे रहा है ताकि वो अपनी सुहागरात के लिए अच्छी तरह से तैयार हो जाये।

वो समझ गयी कि उस का पिता असल में उसको अच्छी तरह से चोदना चाहता है और इसीलिए वो २ घंटे का समय दे रहा है. ये सोच कर ही की उस का बाप उसे चोदने को मरा जा रहा है, नगमा की चूत गीली हो गयी और वो शर्मा गयी.

फिर उसने भी सोचा कि जब वो दोनों बाप बेटी एक दूसरे के लिए इतने दीवाने हैं, तो उस का भी फर्ज बनता है की वो अपने बाप से चुदवाने के लिए पूरी तैयारी करे. ये सोच कर वो चुदाई के लिए तैयार होने को उठ खड़ी हुए. नगमा के पास दो घंटे थे सजने के लिए वो अपनी सजावट में लग गई। चुदवाने की सजावट में।

नगमा पूरी तरह नंगी हो गई और आईने में खुद को देखने लगी- चलो नगमा रानी, सुहागरात मानने के लिए तैयार हो जाओ। उसका पूरा जिस्म चिकना तो था ही फिर भी वो चूत, गाण्ड और कांखों के बालों पर बाल साफ करने वाली क्रीम लगा कर अपनी चूत अच्छी तरह से साफ़ की।

फिर नगमा अपनी कमर के नीचे चूत, गाण्ड और जांघ एरिया और चूची में फेंशियल मसाज की। नहाते वक्त नगमा अपनी चूत में उंगली कर रही थी। वो अपनी चूत से पानी निकालना चाह रही थी। वह चाहती थी की जब अरशद उसके जिस्म से खेलें तो वो अरशद का भरपूर साथ दे।

चूत से पानी निकला हुआ रहेगा तो वो देर तक अरशद का साथ दे पाएगी और अरशद से मिलता सुख महसूस कर पाएगी। नगमा सोचने लगी की कैसे उसका बाप उसे चोद रहा है। वैसे तो अब्बा के बारे में सोचते ही उसकी चूत गीली हो जाती थी, लेकिन अभी तो कुछ हो ही नहीं रहा था।

तभी साचते-सोचते उसका ख्याल बनने लगे की अरशद बेरहमी से उसके साथ पेश आ रहा है। ये सब सोचते ही नगमा की चूत गीली हो गई और उंगली करती हुई वो चूत से पानी निकाल ली। पानी निकलने के बाद उसे खुद में बुरा भी लगा की मैं अपने पिता में किस तरह चुदवाना चाहती हैं.

नगमा नहाकर वो अपने रूम में आ गई। नहाने के बाद उसका जिस्म और चमक रहा था। नगमा अपने पूरे जिस्म में चाकलेट फ्लेवर की बाडी लोशन लगाई। फिर नई पैंटी ब्रा निकली, लाल रंग की पैंटी ब्रा डिजाइनर थी और ट्रांसपेरेंट थी। पैंटी ब्रा को पहनने के बाद वो घूम-घूमकर आईने में खुद को देख रही थी।

कितनी सेक्सी लग रही हैं मैं। आह्ह… मेरे प्यारे अब्बा, इस चमकते जिस्म पे आज आपका अधिकार है। इतनी मेहनत तो मैं अपनी ओरिजिनल सुहागरात के लिए भी नहीं की थी, जितनी आपके लिये कर रही हैं। मसल देना मुझे, रौंद डालना मेरे जिस्म को, अपने मन में कोई कसर मत छोड़ना मेरे दूल्हे राजा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

नगमा चेहरे का मेकअप पूरा की और उसके बाद नगमा अपने बालों को सवार ने लगी। आधे घंट लग गये उसे बाल बनाने में। 7:30 बज चुके थे। नगमा लहँगा पहन ली। पहले तो बो नाभि से कुछ नीचे पहनी लहँगा को, जहाँ से नार्मली पहनती थी।

लेकिन फिर कुछ सोचकर वो लहँगा को और बहुत नीचे कर ली। उसकी कमर पे बने मेहन्दी का डिजाइन अब साफ-साफ दिख रहा था। फिर वा चोली पहन ली। चोली कंधे के किनारे पे थी और सामने थोड़ा डीप था जिससे क्लीवेज थोड़ा सा दिखाते हुए नगमा को सेक्सी बना रहा था। पीठ पे सिर्फ 2 इंच की पट्टी थी।

नगमा अपनी बा को चोली के अंदर करके हुक लगा ली। अब वो पूरी तैयार थी अपनी सुहागरात के लिए। 8:00 बज चुके थे। नगमा अपनी चुदाई के लिए पूरी तैयार थी। पूरा मेकअप और पूरी ज्वेल्लरी में वो बहुत ही हसीन लग रही थी। उसकी धड़कन तेज हो गई थी।

वो किचन में जाकर जूस पी ली थी। अब उसे ठीक लग रहा था। नगमा 8:00 बजने का इंतजार कर रही थी। ठीक 8:00 बजे अरशद खान ने दरवाजा नाक किया। वो भी नये कुर्ता पायजामा और स्कल कैप में था। नगमा कौंपते हाथों से दरवाजा खोली।

जैसे वो अपने घर का नहीं चूत का दरवाजा खोल रही थी अपने पिता अरशद खान के लिए। अरशद नगमा को देखता ही रह गया। नगमा बहुत हसीन थी, लेकिन आज तो वो कयामत लग रही थी। उफफ्फ.. अरशद की आँखें चौंधिया गई थी इस बेपनाह हुस्न को देखकर।

नगमा सुहाग सेज पर सर झुके बैठी थी जब अरशद कमरे में आए। उस ने कमरे के दरवाज़े को बंद कर दिया और चुपचाप आ कर नगमा के पास बैठ गए। अरशद खामोशी से नगमा को देख रहे थे जो लाल जोड़े में दुल्हन बनी बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

अरशद :- बेटी…!!

नगमा:- कृपया मुझे बेटी नहीं बुलाएं। मैं आज आपकी बीवी हूं. मुझे मेरे नाम से बुलाएं.

अरशद :- लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता।

नगमा:- क्यू नहीं??

अरशद :- नगमा यह ठीक है कि हमारी शादी हुई है पर फिर भी असल में तुम मेरी बेटी हो. हमने मजहब का अपना फर्ज पूरा करने के लिए शादी की है न की शादी के लिए। इस लिए मैं तुम्हे छू कर तुम्हे नहीं करना चाहता। तुम कहो तो मैं तुम्हारे साथ औरत मर्द वाला कोई काम नहीं करूँगा और ऐसे ही हम सो जायेंगे, मैं कल सुबह ही नौशाद को कह दूंगा कि हमारा हलाला हो चूका है और मैं तुम्हे तलाक दे कर आजाद कर दूंगा.

(असल में अरशद तो अपनी बेटी को चोदने को पूरी तरह से तैयार था पर वो झूठ मूठ बोल कर नगमा को चेक करना चाह रह था कि वो उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहती है या नहीं.)

नगमा:- लेकिन एक बात आप भूल गए। जब तक आप मेरे साथ सुहागरात नहीं मनाएंगे, मेरे अंदर अपना बीज नहीं डालेंगे तब तक हमारा हलाला पूरी तरह से नहीं हो सकता और बगैर हलाला किये, हमारी तलाक नहीं हो सकती।

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अरशद :- हम झूठ भी तो कह सकते हैं।

नगमा:- बेशक हम झूठ कह सकते हैं लेकिन हकीकत से तो मुँह नहीं मोड सकते। अगर हमारा मिलन नहीं हो सकता, तो शादी ख़त्म नहीं हो सकती।

अरशद :- इसका मतलब???

नगमा:- इसका मतलब मैं हलाला के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ. आज आप मेरे पिता नहीं बल्कि मेरे शौहर हैं। आप आगे बढ़ें और एक शौहर का अपना हक़ मुझसे से लें। मैं पूरी तरह से तैयार हूं।

ये सुनते ही अरशद खुश हो गए।

नगमा ने फिर कहा.”अब्बा जान मैं जानती हूँ की आप यह सब मेरा मन रखने के लिए कह रहे हैं. असल में तो आप मेरे से बहुत सालों से प्यार करते हैं और जिस्मानी ताल्लुकात भी बनाना चाहते हैं. मैं जानती हूँ की अम्मी के मौत के बाद आप अकेले रह गए हैं और आप के पास अपनी जिस्मानी जरूरतों को पूरा करने का कोई साधन नहीं है.

मैं जानती हूँ की आप सालों से औरत के जिस्म के लिए तड़प रहे हैं. मैंने अपनी शादी के पहले कई बार आपको मुझे छुप छुप कर देखते हुए देखा है. आप को शायद पता नहीं है पर मैंने आप को कितनी ही बार अपने बेडरूम में मु…… (फिर वो मुठ शब्द कहने मैं शर्मा गयी ), मेरा मतलब अपने अंग से खुद ही खेलते देखा है.

मैंने आप को उस वक़्त मेरा नाम लेते सुना है. मैं जानती हूँ की आप बहुत सालों से मेरे से सेक्स करना चाहते हो. पर शायद बाप बेटी के रिश्ते के कारण आप हिम्मत न कर सके. मैंने तो आप को कई बार मेरी पैंटी, जो मैंने नहाते हुए बाथरूम में उतार दी थी, को सूंघते और अपने गुप्त अंग पर लपेट कर मु…….. मारते देखा है.

मैं तो शर्म के कारण कुछ नहीं कह सकी पर मैं जानती हूँ की आप मेरे से सेक्स करने के लिए बहुत सालों से तड़प रहे हो. अल्लाह बहुत ही मेहरबान है उस ने देखो तो आज आप को अपने मन की सालों से दबी हुई इच्छा को पूरा करने का मौका दिया है। और अब तो आप का यह मजहबी हक भी है क्योंकि अब मैं आप की बेटी नहीं बल्कि आपकी बीवी हूँ. आप कुछ मत सोचो और आगे बढ़ कर अपना पति का हक़ ले लो. मैं इसके लिए तैयार हूँ.”

यही सुनते ही अरशद ख़ुशी से मानो पागल ही हो गया. फिर भी उसे शर्म आ रही थी कि उस का अपनी बेटी के प्रति शारीरिक आकर्षण उसकी बेटी को पता चल गया है. पर वो जानना चाहता था की उसकी बेटी नगमा का उस के प्रति का विचार है. क्या वो निकाह के कारण उसको चोदने को कह रही है या उसके मन मैं भी उसके बाप के लिए वही भावनाएं है जो खुद अरशद के मन मैं हैं.

तो वो नगमा से बोला. “बेटी नगमा। मैं बहुत शर्मिंदा हूँ कि मेरी उस बात का तुम्हें पता चल गया. पर जब तुम्हें पता चला तो तुमने मुझे रोका क्यों नहीं? क्या तुम उस से नाराज नहीं थी. क्या तुम्हारे मन में भी ऐसी ही भावनाएं थी?”

नगमा शर्म से मुँह छुपा कर बोली “अब्बा, अम्मी की मौत के बाद आप बिलकुल अकेले हो गए थे. हर आदमी की अपनी जरूरतें होती हैं, जिन में सेक्स भी एक जरुरत है, मैं जानती थी की आप की इस जरुरत का कोई इंतजाम नहीं है. पर फिर भी आप ने बाज़ारू औरतों से अपनी जरूरत पूरी न कर के, अपनी भावनाओं को मार कर पाक साफ़ जिंदगी जी है.

इसलिए मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूँ. मैं चाहती थी कि किसी तरह हो सके तो आपके किसी काम आ सकूँ, पर आप ने अपने आप पर काबू रखा और कभी आगे बढ़ कर कोई हरकत मेरे साथ न की, मैं हालाँकि मन से तैयार थी की अपने प्यारे अब्बू को खुश कर सकूँ.

पर हम दोनों की बाप बेटी की मर्यादा की सीमा को न तोड़ सके. पर अल्लाह बहुत मेहरबान हैं इसीलिए तो उसे रहीम कहते है, देखो उसने कैसे आज हम दोनों को अपने मन की छुपी हुइ इच्छाएं पूरी करने का मौका दिया है. इसलिए आप ज्यादा सोच विचार न करे.”

अरशद अपनी बेटी रुपी बीवी की बात सुन कर बहुत खुश हो गया और आगे आ कर सुहाग सेज पर अपनी बेटी नगमा के पास बैठ गया. और उसके बाद आगे बाढ़ कर नगमा को अपनी बाहो में भर लिया। साथ ही उन दोनों के होंठ भी आपस में मिल गए। दोनों जोश में एक दूसरे को किस करने लगे। अरशद तो बहुत अरसे से प्यासे थे लेकिन नगमा को सेक्स किये हुए इतने दिन नहीं हुए थे।

लेकिन फिर भी वो खुल केर उनका साथ दे रही थी। नगमा अब्बू की आँखों में देखती हुई शर्मा गई और उसकी नजरें झुक गई। अरशद के लिए ता नगमा का ये अंदाज जानलेवा था। अरशद यूँ ही खड़ा रहा तो नगमा एक कदम आगे बढ़कर उसके गले से लिपट गई, और कहा- ” अब्बू, ऐसे क्यों देख रहे हैं, मुझं शर्म आ रही है…

अरशद अपने होश में लौटा, और बोला- “मैंने सुना था हूरों के बारे में, आज यकीन हो गया की वो होती होगी, सुभान अल्लाह, तुम्हारा हुस्न तो बेमिशाल है…”

नगमा अपनी तारीफ सुनकर और शर्मा गई और अरशद को कसकर पकड़ ली। अरशद ने भी प्यार से उसकी पीठ पे हाथ फेरा। नगमा उसे देख रही थी। नगमा उसके सीने से लग गई और महसूस करने की कोशिश करने लगी की अब्बू ही उसका सब कुछ है नगमा का रोम-रोम सिहर उठा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब वो अब्बू की दुल्हन है, अब्बू की बीवी है। अब अगर मैं अब्बू के साथ कुछ भी करती हैं तो कुछ गलत नहीं कर रही हैं मैं। अब अब्बू का पूरा हक है मेरे पे। अब मुझे कुछ भी सोचने की जरुरत नहीं है। अब्बू अब मेरे पति हैं। नगमा थोड़ी देर बाद अरशद से अलग हुई एक ग्लास उठाकर अरशद को दी जिसमें दूध भरा हुआ था।

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अरशद की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने खुद इतना उम्मीद नहीं किया था। वो दूध पी लिया तो नगमा दूसरे ग्लास से उसे पानी दी। अरशद ने पानी पी लिया और नीचे रख दिया। उसने एक हाथ से नगमा का एक हाथ पकड़ लिया था।

अरशद ने पाकेट में हाथ डाला और अब उसके हाथ में सोने का कंगन था। उसने दोनों कलाइयों में कंगन पहना दिया। अब नगमा बहुत खुश थी। उसे भी इसकी उम्मीद नहीं थी। एक औरत को जेवर से बहुत प्यार होता है। एक बार वो सोची की मना कर दें, लेकिन फिर सोची की क्यों मना करे?

अब्बू उसके पति हैं और उनका पूरा हक है और मेरा भी हक है उनसे तोहफा लेने का। अरशद आगे बढ़ा और नगमा के कंधे को पकड़कर अपने सीने से लगा लिया और नगमा शर्माकर उसके सीने में लिपट गई। अरशद ने नगमा का चेहरा ऊपर किया और उसके फूल से नाजुक होठों पे एक हल्का सा चुंबन लिया।

नगमा शर्मा शर्माकर एई-मुई की तरह सिमट गई और अरशद का लण्ड टाइट हो गया। और फिर नगमा की चुनरी को नीचे गिरा दिया और उसे गोद में भर लिया और उसे धीरे से बेड पैर लिटा दिया। अरशद ख़ुशी से झम उठा। इसी बेड पे वो नगमा के बेपनाह हुस्न के मजे लेगा।

नगमा तब तक छई-मुई सी बनी हुई ही नजरें झकाए लेती रही। सच में शर्म में उसकी हालत खराब हो रही थी। सोचने और करने में वाकई फर्क होता है। वो सुहागरात मानने जा रही थी। ठीक है उसने अरशद से शादी कर ली थी, पर फिर भी आखिर वो था तो उसका बाप ही और अब्बू के साथ सेक्स करने और सुहागरात मनाने का सोच कर ही उसकी चूत गीली हो रही थी।

अरशद नगमा के बगल में बैठ गया। नगमा शर्माती हुई बेड में खुद को सिकोड़ने लगी। अरशद में एक हाथ नगमा के कंधे पे रखा और उसके माथे पे चूमा। नगमा और सिमटने लगी और इस चुबन में उसके जिस्म को झकझोर दिया। अरशद ने नगमा को थोड़ा सा झुकाया और उसकी दोनों आँखों में बारी-बारी से किस किया।

नगमा की आँखें बंद हो गई थी अब। अरशद की नजरों के सामने नगमा के रसीले होंठ थे। अरशद पहले भी इन हसीन लबों को कितनी ही बार सोच कर मुठ मर चूका था, लेकिन आज की तो बात ही कुछ और थी। उसने नगमा को थोड़ा और झुका दिया, तो नगमा के होंठ अपने आप खुल गये।

अरशद ने भी देरी नहीं की और अपने होंठ नगमा के होठों पे रख दिया और उनके रस को चूसता हुआ नगमा को बेड पे गिराता चला गया। नगमा अब सीधी लेटी हुई थी और अरशद उसके बगल में लेटा हुआ नगमा के होठों को चूमने लगा और साथ ही साथ नगमा के पेट को भी सहलाने लगा था।

अब अरशद के लिए खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। अरशद नगमा के पेंट को चूचियों से नीचे तक और लहँगे तक सहला रहा था। लाल लहँगा और चोली के बीच में गोरा चिकना पेट चमक रहा था। अरशद नगमा के होठों को चूसता हुआ उसके पेट को सामने से और बगल से सहला रहा था।

नगमा गरमा रही थी। वो अपने पेंट को अंदर करने लगी, ताकी अरशद का हाथ उसके लहँगे के नीचे उसकी चूत पे चला जाए। अरशद समझ तो गया था लेकिन उसे कौन सी हड़बड़ी थी। पूरी रात उसकी थी और आज उसे रूकना भी नहीं था। नगमा को पूरी तरह पा लेना था।

अरशद अपनी जीभ को नगमा के मुँह में करने लगा। नगमा को समझ में नहीं आया की क्या करना है, तो वो भी अपनी जीभ बाहर करके अरशद के जीभ से टकराने लगी। अरशद ने नगमा की जीभ को अपने होठों के बीच में पकड़ लिया और चूसने लगा।

नगमा अब पूरी तरह गरमा गई थी। अब अरशद ने अपना हाथ आगे किया और नगमा की चूचियों को चोली के ऊपर से दबाने लगा। चोली डीप कट की थी तो उसे कोई तकलीफ नहीं थी। वो अपने हाथ को थोड़ा सा तिरछा किया और अरशद का हाथ नगमा की चोली और ब्रा के अंदर उसकी चूची पे था।

अरशद ने नगमा के निपल के करारेपन को महसूस किया। उसने चूची को हल्का सा दबाया और नगमा आह करती हुई कमर को उठाकर बदन ऐंठने लगी। अरशद चोली के हक को खोलने लगा। सारे बटन खोलने के बाद उसने चोली के दोनों कपों को किनारे कर दिया।

नगमा की लाल ब्रा चमक उठी। निपल और गोरा जिस्म लाल ब्रा के अंदर से चमक रहा था। अरशद ने ब्रा के ऊपर से ही एक चूची को कस के मसल डाला। उफफ्फ… नगमा की हालत खराब होती जा रही थी। अरशद नगमा की ब्रा को किनारे करता हुआ निपल को मसलने लगा और बीच-बीच में चूचियों को भी मसल देता था।

ब्रा बहुत साफ्ट और ट्रांसपेरेंट थी तो वो बस दिखावे के लिए ही थी। नगमा अब जल्दी से जल्दी नंगी होना चाहती थी। उसे अपने कपड़े और ज्वेलरी बोझ लग रहे थे। अरशद नगमा की हालत समझ रहा था। वो नगमा की ज्वेलरी उतरने लगा।

फिर उसने नगमा के कंधे को पकड़कर उठाया और उसके पीछे बैठते हुए उसके गर्दन पे किस किया। अरशद नगमा की चिकनी पीठ को चूम रहा था और पीठ को बगल को सहला रहा था। फिर अरशद ने नगमा की चोली को उसके बदन से अलग कर दिया। अरशद चिकनी पीठ को अपने होठों से चूमता जा रहा था।

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नगमा अपने पैर को मोड़ ली और सिर को घुटने में टिकाकर बैठ गई थी। अरशद ने नगमा की ब्रा का भी हक खोल दिया और नंगी पीठ को चूमने सहलाने लगा। अब अरशद के लिए खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। उसका लण्ड कंट्रोल के बाहर हो रहा था।

उसने नगमा को फिर से झुकाया और उसके साथ उसके बगल में लेट गया। वो नगमा को करवट कर लिया और उसके सामने उसके जिस्म से चिपकता हुआ लेट गया। वो फिर से नगमा के होंठ चूमने लगा और उसकी पीठ, पेट को सहला रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अरशद में हाथ को सामने किया और नीचे से ब्रा के अंदर हाथ डालता हुआ चूचियों को मसलने लगा। वो जोर जोर से चचियों और निपलों का मसलने लगा। अरशद ने ब्रा को हाथ से निकाल दिया। अब नगमा ऊपर से टापलेश थी। अब अरशद ने नगमा को फिर से सीधा लिटा दिया और चूचियों को चूस रहा था।

अरशद एक निपल को मुँह में लेकर बच्चों की तरह चूस रहा था। अगर नगमा दूध दे रही होती तो अरशद तुरंत ही उसका टैंकर खाली कर देता। वो दूसरे निपल को मसलता उंगली में लेकर जा रहा था। गोरी चूचियां लाल हो रही थी। नगमा आह्ह… उह्ह.. करने लगी थी।

उसे लग रहा था की अरशद जल्दी में उसे नंगी करतें और तुरंत ही चोद डालते। फिर अरशद दूसरे निपल को चूसने लगा और नगमा के पेंट, बगल को सहलाने लगा और पेंट सहलाते हए लहँगा के ऊपर से जांघों को सहला रहा था। नगमा का एक पैर सीधा था और दूसरा पैर उसने मोड़ लिया था।

अरशद लहँगा ऊपर करना शुरू कर दिया और फिर लहँगे के अंदर हाथ डालकर वो नगमा की नंगी जांघों को सहलाने लगा था। नगमा का जिस्म हिलने लगा था अब। अरशद का हाथ पैंटी के ऊपर से चूत में था और वो चूत के आसपास के एरिया को सहला रहा था। अरशद ने लहँगा का पूरा ऊपर कर दिया।

नगमा अंदर में लाल रंग की डिजाइनर पैटी पहनी थी जो आधी ट्रांसपेरेंट थी चूत के ऊपर। अरशद नगमा के पैरों के बीच में आ गया और अच्छे से पेंटी को देखता हुआ जाँघों और पैंटी को सहलाने लगा। नगमा की चूत तो कब से गीली थी और वो गीलापन पैटी पे भी आ चुका था।

अब नगमा के लिये बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। अरशद को अपनी गीली पैंटी को देखते पाकर वो शर्मा गई। अरशद में नगमा के लहंगे को उतार दिया और अपने कुर्ते को उतारते हुए नगमा के बगल में लेट गया। नगमा चाह रही थी की जल्दी से अरशद उसकी पेंटी भी उतार दे और चोदना शुरू कर दें।

लेकिन अरशद को बिना पेंटी उतारे बगल में लेटता हुआ देखकर उसे मायूसी हई। नगमा सिर्फ एक लाल पैंटी में अरशद खान के साथ लेटी हुई थी। नगमा के हिलने से चूड़ी और पायल की आवाज आ रही थी, और कमरे में बैंड में हर तरफ फूल बिखरे हए थे।

अरशद नगमा के बगल में लेटकर उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके होंठों को चूसने लगा और पीठ को सहलाते हए पैंटी के अंदर हाथ डालकर गाण्ड को सहलाने लगा। पीछे से नगमा की आधी गाण्ड दिख रही थी तो, अरशद अपना हाथ सामने लाया और नगमा की चिकनी चूत को सहलाने लगा।

अरशद का हाथ नगमा की लाल पैंटी के अंदर उसकी चिकनी गीली चूत पे था। अरशद चूत को सहला रहा था और उसने अपनी एक उंगली गरमाई नगमा की गीली चूत के अंदर डाल दिया। उफफ्फ… चूत के अंदर का तापमान पूरा बढ़ा हुआ था। उंगली चूत में जाते ही नगमा का बदन हिलने लगा और वो अरशद को कस के पकड़ ली और उसके होठों को चमने लगी।

पेंटी सामने में भी चूत में नीचे हो चुकी थी। अरशद चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगा और पैटी को नीचे करता गया। पैंटी घुटने तक पहुँच चुकी थी। अरशद उठकर बैठ गया और नगमा को सीधा किया। अरशद नगमा के पैरों के बीच बैठ गया और उसकी पैंटी को उतार दिया।

नगमा अब पूरी नंगी लेटी हुई थी अरशद के आगे। अब उसके जिस्म में बस चूड़ी, कंगन, पायल ही थे। अरशद नगमा के चमकतें जिस्म को निहारने लगा। नगमा उस तरह अब्बा को देखता देखकर शमां गई और अपनी मेहन्दी लगे हाथों से अपना चेहरा छुपा ली।

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अरशद मुश्कुरा दिया। उसने नगमा के पैर फैलाए तो गोली चूत के होंठ आपस में खुल गये। वो अपने एक हाथ से चूत को फैलाया। नगमा आँख से थोड़ा सा देखी और अपने अब्बा को इस तरह उसकी चूत के प्यार से देखता देख कर देखकर और शर्मा गई। अरशद अपनी उंगली चूत में अंदर-बाहर करने लगा।

अरशद की उंगली चूत से बाहर आई तो पूरी तरह गीली थी। अरशद नगमा को अपनी गीली उंगली दिखाने लगा और उसी हाथ से नगमा की एक चूची और निपल को मसलने लगा। अरशद निपल को कस के मसलकर ऊपर खींचने लगा।

नगमा आउ: करती हई दर्द कम करने के लिए अपने बदन को ऊपर उठाई और चेहरे से हाथ हटाकर अरशद का हाथ पकड़ ली। अरशद मुस्करा दिया। अरशद फिर से नगमा के पैरों के बीच बैठ गया। अरशद ने नगमा के पैरों को अच्छे से फैला दिया, और अपने हाथों से चूत को फैलाता हुआ चूत पे किस किया और फिर चूसने लगा।

वो अपनी उंगली भी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था और चूत को चूस भी रहा था। हाथ से चूत के छेद को फैलाकर अपनी जीभ को चूत के अंदरूनी हिस्से में सटा रहा था अरशद अपनी जीभ से ही नगमा की चुदाई कर रहा था। अरशद जीभ को चूत के अंदर सटाकर चूस रहा था और फिर चूत के दाने को मुँह में भरकर खींचने लगा था।

नगमा अब खुद को नहीं रोक पाई और उसके मुँह से आऽ5 उड्… की आवाज निकलने लगी। अरशद नगमा की चूत को चूसता जा रहा था और बीच-बीच में उंगली भी करता जा रहा था। नगमा अपने बदन को ऐठने लगी और उसकी चूत में कामरस छोड़ दिया और अरशद को पता चला गया। नगमा हाँफ रही थी।

अरशद अब लेटी हूई नगमा के मुँह के पास आया और अपने पायजामें को नीचे कर दिया और उसका विशाल सा लण्ड उसके अंडरवेर को फाड़ने के लिए तैयार था। उसने नगमा का हाथ पकड़कर अपने अंडरवेर पे रखा और नगमा ने अपने बाप का लण्ड धीरे से शरमाते हुए पकड़ लिए और उसे सहलाने लगी। अरशद नगमा के बगल में सीधा लेट गया।

नगमा करवट होकर अरशद से चिपक गई, उसकी चूचियां अरशद के जिस्म से दब रही थी। अब वो अरशद के लण्ड का अंडरवेर के ऊपर से सहला रही थी। नगमा से अब रहा नहीं जा रहा था उस का मन तो कर रहा था की उस का अब्बा अरशद जल्दी से जल्दी लण्ड को उसकी चूत के अंदर डाल दे और खूब जोर जोर से उसे चोद दे.

पर जब उसने अब्बू को ऐसा कुछ न करते देखा तो तो उसे लगा की ऐसे तो उस का अब्बा पूरी रात ऐसे ही गुजार देगा तो उसे खुद ही कुछ करना पड़ेगा. यस सोच कर नगमा थोड़ा सा उठी और अंडरवेर को नीचे कर दी। अंडरवियर नीचे करते ही फुफकारते हए सौंप की तरह लण्ड बाहर निकला और तनकर खड़ा हो गया। नगमा मुस्करा दी।

उसे लण्ड और बड़ा और मोटा नजर आया। आज फाइनली उस के प्यारे अब्बा के इस मोटे और बड़े से लण्ड को नगमा की छोटी सी चूत के अंदर की सैर करनी थी। नगमा उस लण्ड को सहलाने लगी यह उस के बाप का वही प्यारा सा लण्ड तह जिसने कई बार उसके नाम का मूठ मारा था।

नगमा का ये सब पहला अनुभव था। वो अपने पति नौशाद के साथ ये सब कुछ नहीं की थी, फिर भी अब्बा को बुरा ना लगे और उसे खुशी मिले, उसने अरशद का पायजामा और अंडरवेर को नीचे करके उतार दिया और अरशद के पैरों के बीच बैठ गईं।

नगमा लण्ड को पूरे हाथ में लेकर पकड़ ली और झुकती हुई उसे किस की। लण्ड की खुश्ब उसे दीवाना कर गई। वो लण्ड पे झुकती गई और मुंह को फैलाती गई और फिर उसे मुंह में लेकर चूसने लगी। उसकी चूचियों अरशद के जांघों को सहला रही थी। नगमा अपने मुँह का और फैलाई और अच्छे से लण्ड का मुँह में भर कर चूसने लगी।

उसने अपनी सहेलियों से लण्ड को चूसने के बारे में सुना तो जरूर था पर उस ने कभी भी अपने पति नौशाद का लण्ड चूसा नहीं था. नौशाद भी इसको बड़ा गन्दा समझता था. पर नगमा के मन में लण्ड को चूसने की एक दबी हुई इच्छा जरूर थी.

उसने सोचा की आज यही अच्छा मौका है जब वो अपने जनम देने वाले अब्बा का लण्ड चूस सकती है और लण्ड चूसने का स्वाद भी चख सकती है, अरशद ने नगमा को रोक दिया और उसका मुंह हटा दिया। नगमा चौंक गई की अब क्या हो गया? कहीं मेरे अब्बा को मेरा लण्ड चूसना अच्छा नहीं लगा क्या क्या? लेकिन आज बहुत कुछ होना था।

अरशद उठकर बेड के किनारे पैर लटका कर बैठ गया और नगमा अब नीचे बैठकर अरशद का लण्ड चूस रही थी। नगमा बहुत जतन और ध्यान से अरशद का लण्ड चूस रही थी। वो इस तरह कोशिश कर रही थी की पूरा लण्ड वो मुँह में ले पाए लेकिन ये हो नहीं पा रहा था।

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नगमा बहुत सेक्सी लग रही थी इस तरह अपने बाप अरशद का लण्ड को चूसते हुए। अरशद ने नगमा को बेड पे लेटने के लिए कहा। नगमा बेड पर आकर लेट तो गई, लेकिन उसकी टाँगें आपस में सटी हुई थी और एक तरह से वो अपने नंगे बदन को समेट रही थी।

वो समझ रही थी की अरशद ने उसे चोदने के लिए बैंड पे लिटाया है और अब उसकी चुदाई होने वाली है। चुदाई के इस एहसास ने उसे रोमांचित कर दिया और वो फिर से शर्मा रही थी। अरशद नगमा के पैर को फैलाता हुआ बीच में बैठ गया। उसने नगमा के पैर को अच्छे से फैला दिया और चूत में किस करता हुआ उंगली करने लगा।

अब वो नगमा के पैरों के बीच में थोड़ा आगें आ गया और अपने लण्ड को नगमा की चूत में सटा दिया और फिर चूत को लण्ड से सहलाने लगा। लण्ड चूत में सटते ही नगमा के जिस्म में करेंट दौड़ गया। वो पूरी तरह गरमा गई और चूत गीली हो गईं।

अरशद अपने लण्ड से नगमा की चूत को सहलाते जा रहा था और जगह बनाते जा रहा था। नगमा चूत में अरशद का लण्ड लेने के लिए आतुर हो रही थी। लण्ड के अंदर जाने पर होने वाले दर्द को सहनें के लिए भी वो मेंटली तैयार हो चुकी थी।

नगमा सोच रही थी “आहह… अब्बा डालिए ना अब अंदर। मेरी चूत आपके सामने हैं। डाल दीजिए अपने लण्ड को अंदर और चोदिए मुझे। जितने सपने आपने देखें हैं मुझे सोचते हुए, सब पूरे कर लीजिए आह्ह… रौंद डालिए मेरे जिसम को आहह… अब्बा प्लीज़… डालिए ना अंदर” .. लेकिन उसके मुँह से बस आहह… उम्म्म ह… की आवाज ही आ रही थी।

अरशद लण्ड के लिए रास्ता बनाता हुआ चूत सहला रहा था और नगमा अपनी कमर उठाकर लण्ड अंदर ले लेना चाहती थी। अरशद लण्ड को चूत से सटाकर नगमा के ऊपर लेट गया और उसके होठों को चूमने लगा और चचियों मसलने लगा।

नगमा अब बर्दाश्त नहीं कर पाई, कहा- “डालिए ना अब्बू अंदर, क्या कर रहे हैं आप?”

अरशद नगमा के गालों को चूमता बोला- “क्या डालं मेरी जान?”

नगमा एक झटके में बोली- “लण्ड…” लेकिन तुरंत ही उसे एहसास हो गया की वो क्या बोली और शर्मा गईं।

अरशद उसकी चूचियों पे दाँत काटता हुआ पूछा- “कहाँ मेरी जान?”

नगमा दो सेकेंड के लिए रुकी लेकिन फिर अपने शर्म को त्यागती हुई बोली- “मेरी चूत में। ओह्ह… अब्बा क्यों तड़पा रहे हैं आज तो हमारी सुहागरात है. इस रात के लिए तो मैं और आप न जाने कितनी सालों से तड़पे है आज अल्लाह के रेहमत से यह दिन आया है तो आप मुझे क्यों तड़पा रहे हैं?”

अचानक नगमा को अपना जिस्म फटता हुआ महसूस हुआ। वो दर्द से बिलख गई। अरशद ने नगमा को कस के अपनी बाहों में पकड़ लिया था। अरशद का लण्ड नगमा की चूत के रास्ते को खोल चका था। अरशद ने अपनी कमर का भार नगमा की चूत पे बढ़ाया और अपने दर्द को सहती हुई नगमा आह्ह… आह करती हुई दोनों पैर को पूरी तरह फैला ली.

और फाइनली अरशद खान का लण्ड नगमा शर्मा की चूत के अंदर आ चुका था। अरशद ने अब एक धक्का मारा और उसका लण्ड नगमा की चूत की गहराइयों में उतरता चला गया। नगमा को बहुत दर्द हो रहा था. पर यह तो वो दर्द था जिस के लिए वो दोनों बाप बेटी न जाने कब से तड़प रहे थे. इसलिए चाहे नगमा को कितना भी दर्द हो रहा था पर वो अपने होंठ भींचे लेती थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसको डर था कि कहीं उसके अब्बा को लगा कि उसकी प्यारी बेटी को उसके हल्लाबी लण्ड से दर्द हो रहा है तो कहीं उसका बाप अपने लण्ड बाहर न निकल ले, लेकिन अरशद भी तो उम्रदराज था. अपनी बेटी की शक्ल से ही वो समझ गया कि नगमा को दर्द हो रहा है, तो वो थोड़ा रुक गया और प्यार से नगमा के होंठों को चूमता हुआ बोला.

“क्या बाप है बेटी? क्या बहुत दर्द हो रहा है? तुम अगर कहो तो मैं अपना लण्ड बाहर निकल लेता हूँ.”

नगमा ने एकदम से आँखें खोली जैसे उसे डर हो कि कहीं उस का अब्बू अपना लण्ड सच में ही बाहर न निकल ले, वो अपने अब्बा की आँखों में प्यार से देखते हुए बोली.

“अब्बा आप चिंता न करें। बस थोड़ी देर रुक जाइए, असल में आप का ये (वो अभी भी शर्म के कारण लण्ड शब्द का प्रयोग नहीं कर पा रही थी) हथियार तो बहुत ही बड़ा है, इतना बड़ा लेने की मुझे आदत नहीं है न. बस थोड़ी ही देर में दर्द कम हो जायेगा.”

अरशद अपनी बेटी की एक चूची को मसलता हुआ बोला- ” बेटी क्या नौशाद का लण्ड मेरे से कुछ छोटा है। जो तुम कह रही हो कि तुम्हे इतना बड़ा लेने की आदत नहीं है.”

नगमा ने शर्म से अपने अब्बा की छाती में मुँह छुपा लिया और बोली- “अब्बा नौशाद का लण्ड तो मुश्किल से ४-५ इंच का होगा, पर आप का तो लगभग ८ इंच का है. ऊपर से असली दिक्कत तो इसकी मोटाई से है. नौशाद का लण्ड तो ज्यादा से ज्यादा २ -३ इंच मोटा होगा.

पर आप का तो बेलन की तरह इतना मोटा है की शायद मेरी कलाई भी इतनी मोती न होगी. तो आप ही बताइये कि मैं भी क्या करूँ. चाहे नौशाद से मेरी शादी को कितना ही समय हो चूका हो पर फिर भी मुझे इतना मोटा झेलने में दर्द तो होगा ही ना?”

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अरशद समझ गया की उसकी बेटी को चोदने के लिए उसे थोड़ी सबर से काम लेना पड़ेगा. उसने अपने लण्ड अपनी बेटी की चूत में ही रहने दिया और उसने नगमा के मम्मो को चूसना शुरू कर दिया. इस से नगमा का दर्द थोड़ा कम होना शुरू हो गया और उसे फिर से मजा आने लगा.

थोड़ी देर ऐसे हे करते रहने से नगमा का दर्द कम हो चुका था। वो कोई कुँवारी लड़की तो नहीं थी फिर भी अभी भी पूरा लण्ड अंदर नहीं गया था। अरशद नगमा के होठों को चूमने लगा, चूसने लगा। अरशद ने एक धक्का और मारा और बचा खुचा लण्ड भी नगमा की चूत में समा गया। अरशद अब कस कस के धक्के लगाने लगा।

नगमा आहह… उऊहह… करने लगी। अरशद के धक्के में नगमा का पूरा जिस्म हिल रहा था। नगमा की मुलायम चूचियां पूरी तरह से उछल रही थी, और अरशद अपने अरमान पूरे कर रहा था। तुरंत ही नगमा की चूत में अपना पानी छोड़ दिया। लेकिन तुरंत ही वो फिर से गरमा गई थी।

लण्ड डाले डाले ही अरशद ने अपनी बेटी को अपने ऊपर कर दिया और खुद नीचे लेट गया। अब नगमा अरशद के लण्ड पे उछल रही थी। नगमा की चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थी। नगमा पूरा ऊपर आ रही थी और फिर पूरा नीचे जा रही थी।

थोड़ी देर बाद अरशद ने नगमा को कुतिया की तरह चार पैरों पे कर दिया और उसकी गाण्ड पे कम के एक हाथ मारा। नगमा इस तरह हो गई की उसकी गाण्ड बाहर की तरफ निकल गई और कमर नीचे हो गई। अरशद नगमा के पीछे आया और उसकी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

नगमा की चूत में फिर पानी बह निकला और अरशद के हर धक्के से नगमा की चूत से वो पानी बाहर आ रहा था। अरशद नगमा को जोर जोर से चोदने लगा। नगमा पस्त हो चुकी थी। बहुत देर हो चुकी थी। नगमा आधे घंटे से इतने विशाल लण्ड को अपनी नाजुक सी चूत में झेल रही थी।

अरशद नगमा से पूरी तरह चिपक गया और लण्ड चूत के आखिरी छोर में जा सटा और अरशद के लण्ड में पानी गिरा दिया। अंदर वीर्य की गर्मी पाते ही नगमा की चूत तीसरी बार पानी छोड़ दी। जब बीर्य की आखिरी बंद भी नगमा की चूत में गिर गई तो अरशद ने अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया और नगमा के बगल में ढेर हो गया।

लण्ड के बाहर आते ही नगमा की चूत में वीर्य का और चूत के पानी का मिक्स्च र बाहर बेड पे बहनें लगा। दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे। इस महयुद्ध में एक बार फिर से चूत की ही जीत हुई और इतना विशाल लण्ड भी अब थक हार कर मुर्दे की तरह पड़ा हुआ था। बेड के सारे फूल रौदे मसले जा चुके थे।

आखिरकार, नगमा आज अपने बाप अरशद से चुद ही गई। इतनी मजेदार चुदाई उसकी आज तक नहीं हुई थी। वो पसीने से लथपथ थी। अरशद भी अपनी बेटी रूपी इस अप्सरा को अपने मन मुताबिक चोदकर निढाल पड़ा था। नगमा ऐसे ही नंगी लेटी रही।

उसकी चूत में अभी भी अरशद का वीर्य और खुद उसकी चूत का पानी मिलकर बाहर बह रहा था और बेंड को गीला कर रहा था। नगमा के जिस्म में तो जैसे जान ही नहीं थी। ३ बार उसकी चूत से पानी निकला था। एक बार तो वो खुद नहाते वक़्त निकाली थी और तीन बार अरशद ने चोदते हुए निकाल दिया।

नगमा मन में- “उफफ्फ… ऐसे भी कहीं चदाई होती है। इतनी देर तक। एक तो इतना बड़ा घोड़े का लण्ड है और उसमें इतनी देर तक चोदते रहे। मेरी तो चूत छिल गई है। पूरा बदन दर्द कर रहा है। लेकिन एक बात की खुशी है की में इनका साथ दे पाई। मुझे ख़ुशी है कि मेरे अब्बा को आज मुझे चोद कर मजा तो आया होगा ना? संतुष्ट तो हए होंगे? पता नहीं, लेकिन इतने में भी अगर कोई संतुष्ट ना हो तो अब क्या जान निकल के मानेगा?”

थोड़ी देर में अरशद बेड से उठा। उसका लण्ड इतनी पुरजोर चुदाई के बाद ढीला था। लेकिन उसकी जांघों के बीच ऐसे लटक रहा था जैसे कोई काला नाग झल रहा हो। उस झूलते लण्ड को देखकर नगमा की चूत में फिर से आग भर गई। अरशद ने प्यार से लेटी हुई नगमा को देखा। नगमा शर्मा गईं।

नगमा अरशद से पूछना चाहती थी- “कैसा लगा मुझे चोदकर? अब तो आप खुश हैं ना? अब तो आप संतुष्ट हैं ना? अब तो आप रिलैक्स रहेंगे ना?”

लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हई। वो अभी भी एक संस्कारी औरत थी जो सेक्स के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकती थी। नगमा भी बेड से उठ गई। उसका पूरा मेकप बिगड़ा हुआ था। आँखों का काजल और लिपस्टिक फैल गया था और बाल बिखरे हुए थे। वो बहुत ही कामुक लग रही थी।

अरशद पूरी तरह झड़ने के बाद अपनी बेटी के ऊपर ही निढाल होकर ढेर हो गया और उसका लंड सिकुड़कर नगमा की चूत से निकल गया। नगमा की चूत से उसके अब्बा का लंड निकलते ही उसकी चूत से वीर्य निकलकर बेड पर गिरने लगा।

“ओह्ह्ह्ह आई लव यू अब्बा”, नगमा ने अपने अब्बा को जोर से अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगी।

“ओह्ह्ह्ह बेटी आज मुझे जो मज़ा तुमने दिया है, उसका एहसान मैं कभी नहीं भुला सकता”, अरशद ने अपनी बेटी के होंठों को चूमने के बाद उसकी साइड में लेटते हुए कहा और अपनी बेटी की गोरी चुचियों से खेलने लगा।

“आआहाह अब्बा इसमें एहसान की क्या बात है, मैं आपकी ही बेटी हूँ और मैं आपकी मेहनत से ही पैदा हुई हूँ, इसलिए मुझपर सबसे ज्यादा हक आपका ही है”, नगमा ने अपने अब्बा के बालों में हाथ डालकर उसके मुंह को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा।

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नगमा के ऐसा करने से अरशद का मुंह उसकी बेटी की दोनों चुचियों के बीच आ गया। अरशद भी अपनी बेटी की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों में थामकर जोर से दबाते हुए उन्हें चूमने और चाटने लगा। दोनों बाप बेटी कुछ देर तक ऐसे ही मस्ती करते रहे और कुछ देर बाद नगमा अपने अब्बा से अलग होते हुए बाथरूम जाने लगी। नगमा बिलकुल नंगी ही वहां से उठकर बाथरूम जा रही थी। नगमा के बाथरूम जाते हुए अरशद की नज़रें अपनी बेटी के नंगे जिस्म को घुर रही थी।

नगमा के बाथरूम घुसने के बाद अरशद भी बेड से उठते हुए अपनी बेटी के पास बाथरूम जाने लगा। अंदर से नल खोलने की आवाज आई। अरशद उसके पीछे-पीछे गया तो पाया कि नगमा यूं ही बैठ कर सुसु कर रही थी। अरशद को यूं देख कर नगमा शर्मा गई। नगमा यह नहीं चाहती थी कि अरशद उसे सुसु करते हुए देखे। दोस्तों अभी हलाला पूरा नहीं हुआ है आगे की कहानी पढ़ने के लिए हमारी वासना डॉट नेट पढ़ते रहिये…

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