Free Maa Beta Chudai Story
ये उस समय की बात है जब मेरी उम्र 18 साल की थी। मुझमें जवानी कूदने लगी थी और मुझे औरतों और लड़कियों में इंटरेस्ट आने लगा था। मेरी माँ बहुत प्यार से मेरा ख़याल रखती थीं और मैं हमेशा उनके पास-पास रहना पसंद करता था। मेरी मॉम बहुत ही सेक्सी और सुंदर थीं। क्या बॉडी शेप था — एकदम गोरी-चिट्टी, लंबे-लंबे काले बाल, करीब 5’5″ और फिगर 38-26-38 था। Free Maa Beta Chudai Story
मैंने कई बार मॉम और डैड को सेक्स करते हुए देखा था। मॉम और पिताजी एकदम नंगे होते थे। कभी तो मॉम की चूचियों को डैड किसी बच्चे की तरह चूसते थे, कभी तो मॉम डैड का लंड चूसती रहतीं। फिर डैड मम्मी के ऊपर लेट जाते और डैड अपना लंड मॉम की चूत में घुसा देते तो मॉम के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकलती थी।
और फिर डैड ज़ोर-ज़ोर से झटके लेने लगते। मॉम भी नीचे से अपनी गांड़ को उठा-उठाकर मज़ा लेती थीं और फिर थोड़ी देर बाद दोनों शांत हो जाते। इधर ये सब देखकर मेरा भी बुरा हाल हो जाता था। मैं उसी रूम में सोता था। वो सोचते थे मैं सो रहा हूँ, लेकिन मैं उनके सेक्स देखने के लिए आँख बंद करके जागा रहता था।
उनकी सेक्स की आवाज़ें और बातें सुनता था। अंधेरे में ब्लैक एंड व्हाइट छाया जैसी दिखती थीं, और मन में सोचता रहता था कि मुझे कब मौका मिलेगा। मॉम के शरीर को जब मौका लगता, निहारता रहता था। मैं उनकी चूचियों पर फ़िदा था और हमेशा उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहता था।
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जब-जब काम करते वक्त उनका अंचल उनकी छाती पर से फिसलकर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकतीं, मैं उनकी चूचियों की एक झलक पाने की कोशिश करता था। मॉम को इस बात का पता था और वो जानबूझकर मुझे अपनी चूचियों का जलवा दिखा देती थीं।
फिर मॉम को बच्चा हुआ काफी गैप के बाद। मॉम उस समय बेड पर रेस्ट में थीं, और मॉम को घर के कामों में भी हेल्प कर देता था तो वो खुश रहती थीं। फिर कुछ दिनों के बाद मॉम नॉर्मल हो गई थीं। ये बात तब हुई जब मेरे पिताजी काम के सिलसिले में बाहर गए। सुबह के 10 बजे की ट्रेन से पिताजी चले गए।
उसी दिन शाम को बेबी की तबीयत कुछ ख़राब हो गई, और उसने दूध पीना बंद कर दिया, जिससे मॉम की चूचियों में दूध न निकलने से भारी हो गईं। अगले दिन डॉक्टर को दिखाया और उसने कहा कि बेबी अगर दूध नहीं पीता है तो पंप से चूचियों का दूध बाहर निकालना पड़ेगा। मैं भी मॉम के साथ डॉक्टर के पास गया था।
मैं उस दिन दिन भर घर पर ही था और घर पर अपनी पढ़ाई कर रहा था। मैंने देखा कि मॉम की छाती में दर्द होने लगा था और वो चूचियों को दबाए जा रही थीं। मुझे अचानक डॉक्टर की बात याद आई। मैंने मॉम से कहा, “कल डॉक्टर ने कहा था कि दूध जमा होने से आपको तकलीफ होगी। ऐसा करते हैं कि मैं आपकी चूचियों को दबा-दबाकर दूध निकाल देता हूँ। आज तो पंप भी नहीं लाया हूँ।”
मैंने खिड़कियाँ बंद कर दीं। मैंने कहा, “मॉम ठीक है ना?” वो बोलीं, “जैसे भी कुछ करो, मुझे तकलीफ हो रही है।” और मॉम ने ब्लाउज़ के बटन खोले और बड़े से बूब्स बाहर निकाले। मैंने चूचियों को दबाया तो उन्हें दर्द हुआ और वो बोलीं, “ऐसे दर्द हो रहा है।” मैं बोला, “तो एक तरीका है, आप बोलो तो बेबी की जगह मैं आज आपका दूध पी लेता हूँ।”
वो बोलीं, “चल तू इतना बड़ा हो गया है।” मैं बोला, “क्या हुआ, मैं भी आपका बेटा हूँ। मैंने भी तो पहले पिया था। इन्हीं से तो आप मुझे पिलाती थीं। उस समय आप मेरे लिए पिलाती थीं, आज मैं आपको आराम देने के लिए पियूँगा, इसमें क्या बात है।” चूँकि उन्हें बहुत ही ज़ोर का दर्द हो रहा था, इसलिए वो बोलीं, “ठीक है, जल्दी करो।” मैं बोला, “अभी पीकर आपकी चूचियों को खाली कर देता हूँ।”
और मैंने उनके निप्पल में मुँह लगाया तो मेरे तो बदन में सनसनी फैल गई। मैंने निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया तो मेरे मुँह में दूध आ गया और मैं चूस-चूसकर पीने लगा। और लगातार मेरे मुँह में दूध भर रहा था। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।
मैंने मॉम से पूछा, “क्यों, मैं दूध पीना भूला तो नहीं?” मॉम हँसकर बोलीं, “माँ का दूध कोई बेटा नहीं भूल सकता।” और मैं चूचियों को दबा-दबाकर दूध पीने लगा। और मॉम को आराम मिलने लगा। मैंने चूचियों का दूध पी लिया। मॉम की चूचियाँ हल्की हो गईं और उन्हें दर्द भी दूर हो गया।
अब वो बोलीं, “बेटा, आज तूने मेरा बहुत हेल्प की है। आज तो मैं दर्द से मर जाती, तूने मुझे बचा लिया।” मैंने कहा, “मॉम कोई बात नहीं, अब तुम्हें इस कारण तकलीफ नहीं होगी। बेबी जब तक दूध नहीं पीने लगता, तो मैं पी लूँगा। हाँ, ये बात हम दोनों किसी को नहीं बताएंगे।” मॉम बोलीं, “अपने पिताजी को भी नहीं।” मैं बोला, “पक्का, मैं किसी को भी नहीं बोलूँगा। सिर्फ तेरे-मेरे बीच में ही रहेगी।”
रात को मैं ट्यूशन से लौटा, खाना खाया तो मॉम बोलीं, “आज तो तेरे पिताजी नहीं हैं, तू मेरे पास ही सो जाना।” मैं बोला, “ठीक है।” मैं भी मन में बहुत खुश हुआ। रात को जब हम सोने लगे तो मॉम बोलीं, “बेटा, 2-3 दिनों की बात है, तुम्हें तकलीफ उठानी होगी और मेरा दूध पीना होगा।” मैं बोला, “मॉम इसमें तकलीफ की क्या बात है।”
फिर रात को मैंने मॉम के बगल में लेटकर उनका दूध पीने लगा, और उनकी चूचियों को सहलाता भी जा रहा था। हाय, क्या मदमस्त चूचियाँ थीं! कभी दबा देता था, और कभी धीरे-धीरे, कभी ज़ोर से चूसता था। मुझे तो मानो स्वर्ग मिल गया। क्या मस्ती आ रही थी। मैं एक-एक करके दोनों चूचियों का दूध पिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दूध पीते-पीते मैं अपना हाथ उनकी कमर पर ले जाता था और एक बार तो चूतड़ों पर भी रख दिया, और दबा भी दिया। वो कुछ नहीं बोलीं। फिर मैंने देखा मॉम अपनी बुर पर साड़ी के ऊपर से ज़ोर से हाथ फेर रही थीं, और फिर साड़ी-पेटीकोट के अंदर हाथ देकर बुर खुजाने लगीं। मैं समझ गया मॉम कुछ एक्साइट भी हो गई हैं।
मैं अब दूध पीते-पीते उनकी पेट के नीचे तक हाथ ले गया और फिर अपना एक पाँव उनकी जाँघों के ऊपर रख दिया। फिर मॉम बोलीं, “हाँ अब रहने दे, आराम मिल गया।” मैं हँसकर बोला, “तेरा मतलब पूरा होते ही दूर हटा दिया। चल बदमाश कहीं का, अभी तो कई बार पीना है तुझे।”
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“तुझे दूध अच्छा लगा?” मैं बोला, “दूध भी और उसकी ये टंकी भी।” बूब्स को सहलाते हुए कहा, “आज मुझे नींद नहीं आ रही थी।” मैं मॉम की जाँघ के ऊपर टाँग रखकर लेट गया। वो कुछ नहीं बोलीं। फिर उनको नींद आ गई और मैंने उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया। फिर नींद में वो मुझसे लिपट गईं। मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। पूरे बदन में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी।
फिर मॉम घूमकर सो गईं तो मैंने अपने लंड को उनकी गांड़ की दरार में सटा दिया। मुझे तो बहुत मज़ा आने लगा। मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर तक कर दिया था, और अपने लंड को उनकी गांड़ से सटाते हुए उनसे चिपककर सोने का नाटक कर रहा था। नींद मुझे कहाँ आ रही थी।
फिर थोड़ी देर के बाद मॉम ने करवट ली, शायद उनकी नींद खुली होगी। उन्होंने अपनी साड़ी थोड़ी नीचे की और सीधी लेट गईं। फिर कुछ देर के बाद मैं उनके ऊपर अपने पैर और हाथ रखकर लिपटकर सो गया। उस रात और कुछ भी नहीं हुआ, लेकिन मेरी तमन्ना थी कि मॉम की बुर देखूँ और कुछ सेक्स का मज़ा लूँ।
इस तरह फिर सुबह हो गई। मैं खा-पीकर कॉलेज चला गया। दोपहर में घर पर था, और दोपहर में उनका दूध पिया। आज बीच में चूचियों को ज़ोर से दबाकर दाँत भी गड़ाया, तो वो सिसकार मारकर बोलीं, “क्या करता है, ऐसे पिया जाता है क्या?” मैं बोला, “कैसी अलके बाद पी रहा हूँ, आदत छूट गई। अब तू सिखा दे ना प्लीज़।”
वो बोलीं, “चल ठीक है, एक-दो दिन की और बात है।” मैं बोला, “इसमें क्या है, ये तो मेरे-तेरे बीच की है। जितने भी दिन हो, क्या फर्क पड़ता है।” मैंने आज बोला, “तेरे ये बड़े ही गुदगुदे हैं। दूध पीने में मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है। तेरे को पिलाने में कैसे लगता है?” वो हँसकर बोलीं, “चल, मुझे तो आराम मिलता है।”
फिर मैं शाम को ट्यूशन में चला गया और रात को लौटा। माँ ने खाना पका लिया था और हम दोनों ने साथ-साथ खाना खाया। आज वो मुझ पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थीं और बार-बार किसी न किसी बहाने से अपनी चूचियों का जलवा मुझे दिखा रही थीं।
खाने के बाद माँ ने मुझे फल खाने को दिया। फिर उन्होंने आम काटने लगीं, तो मैं बोला, “मैं तो ऐसे ही चूसकर खा लूँगा। मुझे चूस-चूसकर खाने में मज़ा आता है।” और मैं उनके सामने आम को धीरे-धीरे दबाते हुए चूसने लगा। वो बोलीं, “तुझे तो आम बहुत बढ़िया चूसना आता है।”
फिर मैं भी डबल मीनिंग में बोला कि “तुम बोलो तो दोनों आम को चूस-चूसकर खा लूँ, बड़ा मज़ा आता है।” वो भी देखकर एक्साइट हो रही थीं। मैं बोला, “मॉम तुमको आम नहीं खाना हो तो केले खा लो, बड़े अच्छे और बड़े-बड़े हैं, मज़ा आएगा।” और वो केला लाईं और बोलीं, “बढ़िया केला है।” मैं बोला, “मैं लाया हूँ तेरे लिए, तुझे शौक है ना।” और वो खाने लगी। वो भी केले पर होंठ फेरते हुए जीभ से चूसती हुई खा रही थीं।
मैं बोला, “मॉम तुम भी आज केला मस्ती में खा रही हो।” वो बोलीं, “चल तू आम चूस सकता है तो मैं केला नहीं खा सकती क्या?” मैं बोला, “नहीं, तेरी इच्छा है उतने केले ले लो।” फल देते वक्त उन्होंने मेरा हाथ मसल दिया और बड़े ही मादक अंदाज़ से मुस्कुरा दिया। मैं शर्मा गया क्योंकि ये मुस्कान कुछ अलग किस्म की थी और उसमें शरारत झलक रही थी।
खाने के बाद मैं तो पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपड़े चेंज करने लगीं। गर्मी के दिन थे और गर्मी कुछ ज़्यादा ही थी। मैं अपनी शर्ट उतारकर केवल लुंगी पहनकर पढ़ने बैठ गया। मेरी टेबल के ऊपर दीवार पर एक शीशा टंगा था और मॉम को मैं उस शीशे में देख रहा था। वो मेरी तरफ देख रही थीं और अपना कपड़ा उतार रही थीं।
वो सोच भी नहीं सकती थीं कि मैं उनको शीशे के अंदर से देख रहा था। उन्होंने अपना ब्लाउज़ खोलकर उतार दिया। मैं पहली बार लेस वाली ब्रा में बंधी उनकी चूचियों को देख रहा था। उनकी चूचियाँ काफी बड़ी-बड़ी थीं और वो ब्रा में समा नहीं रही थीं। आधी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से झलक रही थीं।
कपड़े उतारकर वो बिस्तर पर चित लेट गईं और अपने सीने पर एक दुपट्टे से छाती ढक लिया। एक पल के लिए तो मेरा मन किया कि मैं उनके पास जाकर उनकी चूचियों को देखूँ, फिर सोचा ये ठीक नहीं होगा और मैं पढ़ने लग गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेटे ही वो सो गईं और कुछ ही देर में उनका दुपट्टा उनके सीने से सरक गया और साँसों के साथ उठती-बैठती उनकी मस्त रसीली चूचियाँ साफ-साफ दिख रही थीं। रात के बारह बज चुके थे। मैं पढ़ाई बंद की और बत्ती बुझाने ही वाला था कि माँ की सुरीली आवाज़ मेरे कानों में पड़ी, “बेटे इधर आओ ना।”
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मैं उनकी तरफ बढ़ा। अब उन्होंने अपनी चूचियों को फिर से दुपट्टे से ढक लिया था। मैंने पूछा, “क्या है माँ?” उन्होंने कहा, “बेटे मेरा दूध पी लेना, ये फिर भारी हो गई हैं।” मैंने कहा, “पहले बोलती तो पहले पी लेता, तुम्हें आराम मिल जाता।” वो बोलीं, “तुम पढ़ रहे थे इसलिए मैंने डिस्टर्ब नहीं किया। कोई बात नहीं, अभी पी लो। आओ मेरे पास ही लेट जाओ।”
मॉम बोलीं, “लाइट भी बंद कर दो।” मैंने लाइट बंद कर दी और नाइट लैंप जला कर मैं बिस्तर पर उनके पास लेट गया। जिस बदन को सालों से निहारता था, आज मैं उसी के पास लेटा हुआ मॉम का दूध पी रहा था। क्या मस्त चूचियाँ थीं — बड़ी-बड़ी फूली हुई। मैं उनके निप्पल्स को दबा-दबाकर बूब्स को चारों ओर से हाथ फेरते हुए दबाते हुए पूरी मस्ती भी ले रहा था, और हाथ उनके बदन पर फेर रहा था।
माँ का अर्धनग्न शरीर मेरे बिल्कुल पास था। फिर मैं मॉम से बोला, “मॉम तुम घुटनों के बल सामने हाथ टिकाकर खड़ी हो जाओ घोड़ा बनकर, मैं नीचे से मुँह लगाकर दूध पीऊँगा तो दूध जल्दी उतर जाएगा।” वो तैयार हो गईं। मैं नीचे से उनकी चूचियों को मुँह में लेकर खींच-खींचकर चूसने लगा और अपना हाथ उनकी कमर में डाल दिया। उन्हें भी बहुत मज़ा आने लगा था। वो भी खुश हो रही थीं।
वो अचानक बोलीं, “हाँ बेटा ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर से चूस, बहुत अच्छा लग रहा है। आज तू ठीक से पी रहा है।” मेरे भी पूरे बदन में सनसनी होने लगी थी। लंड भी खड़ा होकर टाइट हो गया था। वो बोलीं, “बेटे ये ब्रा का हुक खोल दो और ठीक से पी लो।” फिर मैंने चूचियों का दूध पीते-पीते अपने हाथ से उनका ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा अलग कर दी और बोला, “ये बार-बार हाथ में फंस रही थी।”
मैं भी काफी उत्तेजित हो गया और जोश में आकर उनकी रसीली चूचियों से जमकर चूसा। चूचियाँ और लंबे-लंबे निप्पल। क्या बड़ी-बड़ी चूचियाँ थीं। मॉम कुछ नहीं बोलीं और फिर मैंने अपनी टाँग से मॉम की टाँग को सहलाने लगा। अचानक उनका बैलेंस बिगड़ा और वो मेरे ऊपर गिर गईं।
उनके बूब्स मेरी छाती से सट गए और मेरा लंड दबाव उनकी जाँघों या चूत के कुछ हिस्से पर पड़ा तो उन्हें भी करंट सा लगा और उनके मुँह से निकला, “उईई।” मैं बोल, “क्या हुआ?” “कुछ नहीं रे, चल ठीक से पी।” मॉम सीधी लेटी और मैं उनके ऊपर लेटकर चूचियों को चूस-चूसकर दूध पीने लगा।
मॉम अपनी बुर पर अब लगातार हाथ फेरा रही थीं, और फिर पेटीकोट में हाथ देकर शायद बुर में उँगली डालने लगी थीं। उनका पेटीकोट जाँघों के ऊपर आ गया था। मैंने बोला, “मॉम क्या हो गया, आज नीचे भी भारी हो गई है क्या? कुछ तकलीफ हो रही तो वहाँ भी ठीक कर दूँ?” वो बोलीं, “क्या बोलता है?”
मैं बोला, “मॉम मेरे को क्या पता, जैसे बोलोगी वैसा कर दूँगा। तू बोलो तो वहाँ भी कुछ चूसना हो तो चूस लेता हूँ। सिर्फ तुम्हें आराम मिलना चाहिए।” और मैंने अब मॉम का किस किया और बोला, “मेरी प्यारी मॉम, मेरी अच्छी मॉम, क्या खूबसूरत हो तुम। तेरा बदन बड़ा ही कोमल है।”
क्या हसीन नज़ारा था। मैं बोला, “मॉम तेरे दूध में एक अजीब नशा है, पीकर मस्ती आ जाती है। डैड भी पीते हैं ना?” वो बोलीं, “तुझे क्या मालूम?” मैं शर्माते हुए धीरे से बोला, “हाँ, मैंने देखा था उनको चूस-चूसकर पीते हुए।” बोलीं, “ना रे!” मेरा लंड अब अंडरवियर से बाहर निकलने के लिए ज़ोर लगा रहा था।
मेरा 8 इंच का लंड पूरे जोश में आ गया था। माँ की चूचियाँ मसलते-मसलते हुए मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लंड उनकी जाँघों में रगड़ मारने लगा था। वो बोलीं, “क्या बोल रहा है तू?” मैं बोला, “मॉम आज तू मुझे बहुत अच्छी लग रही हो।”
अचानक वो बोलीं, “बेटे ये मेरी टाँगों में क्या छू रहा है?” मैंने हिम्मत करके जवाब दिया, “कुछ नहीं तो।” “हाथ लगा कर देखूँ?” उन्होंने पूछा और मेरे जवाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लंड पर रखकर उसको टटोलने लगीं। अपनी मुट्ठी मेरे लंड पर कस के बंद कर ली और बोलीं, “बाप रे, बहुत कड़क है।”
“तेरा तो एकदम खड़ा हो गया।” और वो बोलीं, “तू क्या बातें करता है?” अब मैं मॉम से बोला, “मॉम बुरा मत मानना, आज मुझे अपना सब दिखाओ ना जो तुम और डैड करते हो रात को।” वो बोलीं, “तेरे को क्या पता?” मैंने कहा, “मैंने कई बार आपको देखा है ना।” वो बोलीं, “अरे तू तो चालाक निकला।”
मॉम बोलीं, “किंतु ये तो सिर्फ पति-पत्नी के बीच ही होता है। तुम अभी बच्चे हो, मेरे बेटे हो, अभी तेरी शादी नहीं हुई है, ये शादी के बाद होता है।” मैं बोला, “क्या हुआ, हम सिर्फ आज करेंगे।” “हाय मेरी मॉम! आज प्लीज़ ये मौका दो ना, शादी के बिना भी तो कर सकते हैं।” लेकिन “ये पाप है” उसने उत्तर दिया।
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मैं उसकी निप्पल अपने उँगली के बीच लेकर मसलते हुए बोला, “ये पाप करने में बहुत मज़ा आता है ना, मेरी मॉम प्लीज़ मुझे मज़ा दो। प्लीज़ करने दो ना वो सब जो तुम रोज़ डैड के साथ करती हो। प्लीज़।” वो मेरी तरफ घूमी और अपना हाथ मेरे अंडरवियर में घुसाकर मेरे फड़फड़ाते हुए लंड को इलास्टिक के ऊपर निकाल लिया।
लंड को कसकर पकड़े हुए वो अपना हाथ लंड के जर तक ले गईं और मैंने भी तुरंत ही उनकी चूत पर उँगलियाँ चला दीं। लंड की साइज़ और आकार देखकर वो बहुत हैरान हो गईं। “बेटा तू तो बड़ा हो गया।” उन्होंने पूछा। “तू और क्या जानता है इसके बारे में?” मैंने कहा, “मैंने तो कई बार तुमको डैड के साथ करते और उछाल-उछालकर खेलते देखा है। आज हम भी खेलेंगे मेरी प्यारी-प्यारी मॉम, प्लीज़ ना मत करना। तुम मेरा ख़याल नहीं रखती हो, ना मेरा ध्यान रखती हो।”
मॉम बोलीं, “मुझे क्या पता था कि तुम्हारा इतना बड़ा होगा।” वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खींच रही थीं और कसकर दबा रही थीं। फिर मैंने भी मॉम का पेटीकोट ऊपर उठा दिया और बोलीं, “क्या करता है?” मैं बोला, “मॉम सिर्फ आज एक बार, फिर नहीं बोलूँगा। देखने दो ना कैसे मज़ा आता है। आज तो कोई भी नहीं है।” मेरे तने हुए लंड को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगीं।
वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गईं ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सकें। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के बिल्कुल पास थीं और मैं उन्हें कस-कसकर दबा रहा था। फिर बोलीं, “अच्छा ले चल।” अचानक उन्होंने अपनी एक चूची मेरे मुँह में ठेलते हुए कहा, “चूसो इनको मुँह में लेकर।” “अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भरकर दबाओ, चूसो और मज़े लो।”
मैंने इनकी दोनों चूचियाँ बारी-बारी से अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। सारी चूची पर जीभ फेरता और चूसता, कभी दाँत गड़ाता, और मॉम सिसकारी मारती, बोलती, “मज़ा आ रहा रे, ज़ोर-ज़ोर से चूस ना।” मैं ऐसे कसकर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ भी पूरा साथ दे रही थीं। उनके मुँह से “ओह! ओह! आह! सी! सी!” की आवाज़ निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे थोड़ी देर के लिए मैंने उनकी चूची को मुँह से निकाला और बोला, “मैं हमेशा तुम्हारे ब्लाउज़ में कसी चूचियों को देखता था और हैरान होता था। इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हें मुँह में लेकर चूसूँ और इनका रस पीऊँ। पर डरता था, पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ।”
“ये तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ, जैसा चाहे वैसा ही करो।” माँ ने कहा। मैं भी बोला, “तुम नहीं जानती माँ कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है?” “माँ आज तो पूरा मज़ा दे दो ना, रहा नहीं जा रहा है, देखो ना क्या हाल हो गया है।” एक बार मैं फिर से टूट पड़ा माँ की चूचियों पर।
मैंने दोनों अनारों को कसकर पकड़े हुए था और बारी-बारी से उन्हें चूस रहा था। अब उनसे भी नहीं रहा जा रहा था, वो भी मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थीं और मरोड़ रही थीं। उन्होंने अपनी लेफ्ट टाँग को मेरी टाँग के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जाँघों के बीच रख लिया।
मुझे उनकी जाँघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। ये उनकी चूत थी। माँ ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरा लंड का सुपाड़ा उनकी झाँटों में घूम रहा था। मैं बोला, “मॉम तेरा नीचे वाली चीज़ तो बहुत ही मुलायम है।” मेरा सब्र का बंध टूट रहा था।
मैं माँ से बोला, “माँ मुझे कुछ हो रहा है और मैं अपने आप में नहीं हूँ। प्लीज़ मुझे बताओ मैं क्या करूँ?” माँ बोलीं, “तू मानेगा नहीं, चल तेरी इच्छा वो कर ले।” “तू और क्या जानता है आज तक?” मैंने बोला, “कुछ भी नहीं, मैंने सिर्फ तुझे और डैड को रोज़ रात को करते देखता था, और एक दिन तेरी अलमारी में वो किताब पढ़ी थी, उसमें सेक्सी फोटो और पोज़ भी थे, जैसे तुम और डैड करते हो।”
“माँ अब रहा नहीं जा रहा है, वैसे ही करो ना, जैसे तुम करती हो।” “शादी तक वेट करना पड़ता है इसके लिए, मैं तुम कैसे कर सकते हैं?” मैं क्या बोलता। मेरे मुँह में कोई शब्द नहीं थे। मैं चुपचाप उनके चेहरे को देखते हुए चूचियाँ मसलता रहा। मॉम कुछ करो और उनकी चूची को ज़ोर से दबाया और अपना मुँह मॉम के मुँह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसाकर बोला, “मेरी लवली सेक्सी मॉम, सिर्फ आज के लिए प्लीज़।”
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और वो बोलीं, “चलो सिर्फ आज, क्या करोगे? चलो आज के लिए अलाउ करती हूँ।” मैं बोला, “तुम जैसे बोलोगी करता जाऊँगा।” वो बोलीं, “तो मुझे आज चोदोगे?” “का-का-का क्यों नहीं?” मैं बड़ी मुश्किल से कह पाया। जैसे बोलोगी मेरा गला सूख रहा था।
वो बड़े मादक अंदाज़ में मुस्कुरा दीं और मेरे लंड को आज़ाद करते हुए बोलीं, “ठीक है, लगता है अपने इस बेटे राजा को मुझे ही सब कुछ सिखाना पड़ेगा। पर गुरु दक्षिणा पूरे मन से देना।” मैंने तुरंत ही उनके पेटीकोट का नाड़ा खींचा और कहा, “अब तो इसके दर्शन करा दो।” कहते हुए मैंने उनका पेटीकोट खींचा।
माँ अपने चूतड़ ऊपर कर दिया जिससे कि पेटीकोट उनकी टाँगों से उतरकर अलग हो गया। मैंने भी पलंग पर से उतर गया और अपना अंडरवियर उतार दिया। मैं अपने तने हुए लंड को लेकर अपनी मॉम के सामने खड़ा था। माँ अब पूरी तरह नंगी होकर मेरे सामने चित पड़ी हुई थीं और मॉम अपने रसीले होंठों को अपने दाँतों में दबाकर देखती रहीं।
माँ ने अपनी टाँगों को फैला दिया और मुझे रेशमी झाँटों के जंगल के बीच छुपी हुई उनकी रसीली गुलाबी चूत का नज़ारा देखने को मिला। नाइट लैंप की हल्की रोशनी में चमकते हुए नंगे जिस्म को देखकर मैं उत्तेजित हो गया और मेरा लंड मारे खुशी के झूमने लगा।
मैं तुरंत उनके ऊपर लेट गया और उनकी चूचियों को दबाते हुए उनके रसीले होंठ चूसने लगा। माँ ने भी मुझे कसकर अपने आलिंगन में कसकर जकड़ लिया और चुम्मा का जवाब देते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ ठेल दी। हाय क्या स्वादिष्ट और रसीली जीभ थी। मैं भी उनकी जीभ को ज़ोर-शोर से चूसने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरा किस पहले प्यार के साथ हल्के में था और फिर पूरे जोश के साथ। कुछ देर तक तो हम ऐसे ही चिपके रहे। फिर मैं अपने होंठ माँ की नाजुक गालों पर रगड़-रगड़कर चूमने लगा। फिर माँ ने मेरी पीठ पर से हाथ ऊपर लाकर मेरा सर पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ ठेला।
मैं अपने होंठ उनके होंठों से उनकी ठोड़ी पर लाया और कंधों को चूमता हुआ चूचियों पर पहुँचा। मैं एक बार फिर उनकी चूचियों को मसलता हुआ और खेलता हुआ काटने और चूसने लगा। उन्होंने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकाल लिया और हमारी टाँगें एक-दूसरे से दूर हो गईं।
अपने दाएँ हाथ से वो मेरा लंड पकड़कर उसे मुट्ठी में बाँधकर सहलाने लगीं और अपने बाएँ हाथ से मेरा दाहिना हाथ पकड़कर अपनी टाँगों के बीच ले गईं। जैसे ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँचा उन्होंने अपनी चूत को ऊपर से रगड़ दिया। समझदार को इशारा काफी था।
मैं उनकी चूचियों को चूसता हुआ उनकी चूत को रगड़ने लगा। और मैंने अपनी उँगली मॉम की चूत के मुँह पर दबा दी। फिर मैंने अपनी उँगली उनकी चूत की दरार में घुसा दी और वो पूरी तरह अंदर चली गई। और मैं अपनी उँगली उनकी चूत में घुमाने लगा।
जैसे ही मेरी उँगली उनके चूत के दाने से टकराई उन्होंने ज़ोर से सिसकारी लेकर अपनी जाँघों को कसकर बंद कर लिया और चूतड़ उठा-उठाकर मेरे हाथ को चोदने लगीं। उनकी चूत से पानी बहा रहा था। थोड़ी देर बाद तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैंने अपनी उँगली उनकी चूत से बाहर निकाल ली और सीधा होकर उनके ऊपर लेट गया।
मॉम ने अपनी टाँगें फैला दीं और मैंने अपने फड़फड़ाते हुए लंड को चूत के मुहाने पर रख लिया। और हल्के चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। उनकी चूत गीली भी हो गई थी। तभी अचानक मेरा लंड सटाक से उनकी चूत में थोड़ा अंदर चला गया। मॉम बोलीं, “प्यार से घुसरो, नहीं तो मुझे दर्द होगा। आह्ह्ह्ह!”
उनकी झाँटों और चूत का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था। और अब तो जैसे ही मैंने धक्का लगाया, एक ही धक्के में लंड अंदर चला गया। इससे पहले कि माँ संभले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में अंदर हो गया।
मॉम चिल्लाईं, “उईईईई माँ उहुहुह्ह ओह बेटे, ऐसे ही कुछ देर हिलना-डुलना नहीं, ही! बड़ा जलीम है तुम्हारा लंड।” मैं अपना लंड उनकी चूत में घुसाकर चुपचाप पड़ा था। माँ की चूत अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उनकी उठी-उठी चूचियाँ काफी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने हाथ बढ़ाकर दोनों चूचियों को पकड़ लिया और मुँह में लेकर चूसने लगा।
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मॉम को बड़ी मस्ती मिलने लगी और उन्होंने कमर हिलानी शुरू कर दी। अब मॉम बोलीं, “अब देर न करो, चोदो मुझे। ले लो मज़ा जवानी का मेरे राजा।” और अपनी गांड़ हिलाने लगीं। मुझे तो इतना मालूम नहीं था। समझ नहीं पाया कि कैसे करूँ। पहले अपनी कमर ऊपर किया तो लंड चूत से बाहर निकल गया।
फिर जब नीचे किया तो ठीक निशाने पर नहीं बैठा और चूत को रगड़ता हुआ नीचे फिसलकर गांड़ में जाकर फंस गया। बस इसी तरह से करते रहो और जैसे मॉम बोलीं मैं करने लगा। मैंने वैसी ही करना शुरू किया और मेरा लंड धीरे-धीरे उनकी चूत में अंदर-बाहर होने लगा। फिर माँ ने स्पीड बढ़ाकर करने को कहा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा।
माँ को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा-उठाकर हर शॉट का जवाब देने लगीं। लेकिन जैसे ही मैं ज़्यादा स्पीड बढ़ाता लंड बाहर निकल जाता। इससे चुदाई का सिलसिला टूट जाता। आखिर मॉम से रहा नहीं गया और करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से उतार दिया और मुझको चित लेटाकर मेरे ऊपर चढ़ गईं।
अपनी जाँघों को फैलाकर बगल करके अपने गद्देदार चूतड़ रखकर बैठ गईं। उनकी चूत मेरे लंड पर थी और हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थे और बोलीं, “मैं दिखाती हूँ कि कैसे चोदते हैं।” और मेरे ऊपर लेटकर धक्का लगाया। मेरा लंड घप से चूत के अंदर दाखिल हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मॉम ने अपनी रसीली चूचियाँ मेरे सीने पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिए और मेरे मुँह में जीभ ठेल दी। फिर मॉम ने मज़े से कमर हिला-हिलाकर शॉट लगाना शुरू किया। बड़े कस-कसकर शॉट लगा रही थीं मेरी प्यारी मॉम। चूत मेरे लंड को अपने में समाए हुए तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुँच गया हूँ।
जैसे-जैसे मॉम की मस्ती बढ़ रही थी उनके शॉट भी तेज़ होते जा रहे थे। अब मॉम मेरे ऊपर मेरे कंधों को पकड़कर घुटनों के बल बैठ गईं और ज़ोर-ज़ोर से कमर हिलाकर लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर लेने लगीं। उनका सारा बदन हिल रहा था और साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं। मॉम की चूचियाँ तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं।
मुझसे रहा नहीं गया और हाथ बढ़ाकर दोनों चूचियों को पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा। उनकी रफ्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच-फच की आवाज़ गूँज रही थी। जब उनकी साँस फूल गई तो खुद नीचे आकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और टाँगों को फैलाकर ऊपर उठा लिया और बोलीं, “मैं थक गई मेरे राजा, अब तुम मोर्चा संभालो।”
मैं झट उनकी जाँघों के बीच बैठ गया और निशाना लगाकर झटके से लंड अंदर डाल दिया और उनके ऊपर लेटकर दनादन शॉट लगाने लगा। मॉम ने अपनी टाँग को मेरी कमर पर रखकर मुझे जकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उठा-उठाकर चुदाई में साथ देने लगीं।
मैं उनकी चूचियों को मसलते हुए ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था। कमरे में आवाज़ भरी थी। मॉम अपनी कमर हिलाकर चूतड़ उठा-उठाकर चुदा रही थीं और बोलती जा रही थीं, “आह्ह्ह आह्ह्ह उन्ह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह हाँ हाई मेरे राजा, मार गए रे, चोद रे चोद। उईई मेरी माँ, मज़ा आ गया रे आज तो मेरी चूत को। मेरा को एकदम मस्त कर दिया तूने तो आज। बड़ा मस्त है तुम्हारा, अंदर तक पहुँचा दिया रे। ऐसी मस्ती कभी नहीं आई रे।”
मैं भी बोल रहा था, “ले मेरी मॉम रानी, ले ले मेरा मूसल सा लौड़ा अपनी ओखली में। बड़ा तड़पाया है तूने मुझे। ले ले, ले मेरी मॉम ये लंड अब तेरा ही है। आह्ह्ह! उह्ह्ह क्या जन्नत का मज़ा दिया है तूने। मैं तो तेरा गुलाम हो गया। ऐसे देती रहना रोज़।”
मॉम गांड़ उछाल-उछालकर मेरा लंड अपनी चूत में ले रही थीं और मैं भी पूरे जोश के साथ उनकी चूचियों को मसल-मसलकर अपनी मॉम को चोदे जा रहा था। मॉम भी पूरी मस्ती में आ गई थीं और बोलीं, “किए जा और ज़ोर — लगाओ शॉट मेरे राजा।”
और मैं बोला, “ये ले मेरी मॉमी, ले ले।” “ज़रा और ज़ोर से।” “ये ले मेरी प्यारी रानी, ये लंड तो तेरे लिए ही है।” “देखो राजा मेरी चूत तो तेरे लंड की दीवानी हो गई, और ज़ोर से और ज़ोर से आआए मेरे राजा। मैं गई रे।” कहते हुए मेरी माँ ने मुझको कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया।
अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला, “मैं भी गया मेरी जान।” और मैंने भी अपना लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हाँफते हुए उनकी चूचियों पर सर रखकर कसके चिपककर लेट गया। ये मेरी पहली चुदाई थी। इसलिए मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मॉम भी एक हाथ से मेरे सर को धीरे-धीरे से सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रही थीं। मॉम ने करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से हटाया और मुझे अपनी बाहों में कसकर कान में फुसफुसाकर बोलीं, “बेटे तुमने तो कमाल कर दिया, क्या गज़ब का ताकत है तुम्हारे लंड में।” मैंने उत्तर दिया, “कमाल तो आपने कर दिया है मॉम, आज तक तो मुझे मालूम ही नहीं था इतनी मस्ती आती है चूत और लंड के इस खेल से। ये तो आपकी मेहरबानी है जो कि आज मेरे लंड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला।”
अब तक मेरा लंड उनकी चूत के बाहर झाँटों के जंगल में रगड़ मार रहा था। माँ ने अपनी मुलायम हथेलियों में मेरा लंड को पकड़कर सहलाना शुरू किया। फिर अचानक बेबी की रोने की आवाज़ आई और वो उसे संभालने लगीं। फिर हम सो गए। फिर सुबह होश आया तो मैंने माँ के रसीले होंठों के चुम्बन लेकर उन्हें जगाया। और बोला, “मेरी ग्रेट मॉमी गुड मॉर्निंग।” और हँस के बोला, “अब गुड नाइट होगी ना?” वो बोलीं, “चल जल्दी तैयार हो और कॉलेज जा।”
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