Maa Beti Suhagrat Porn
हेल्लो मैं आपकी फ्रेंड वैशाली कहानी का अगला भाग लेकर आई हूँ. आपने मेरी कहानी का पिछला भाग शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 2 पढ़ा होगा. जिसमें मैंने बताया था की सुशांत ने मेरी बेटी को चोद लिया था और मुझे भी ब्लैकमेल करके चोदा. और मुझे भी उससे चुदवाने में मजा आने लगा. फिर वो मेरी बेटी से शादी करके हम दोनों के साथ में सुहागरात मानना चाहता था और ये बात उसने मेरी बेटी से कहलवाया. अब आगे- Maa Beti Suhagrat Porn
रश्मि: माँ फिर क्या सोचा तुमने……
में: अब में तुमसे क्या कहूँ रश्मि…… जैसे तुम्हारा दिल करता है वैसे करो.
वो तो बेड पर ही उछल पड़ी…. और बेड से उतार कर मुझे गले लगा लिया…. फिर मेरे कान में धीरे से फुसफुसाई…..
रश्मि: माँ तू मेरी सौतन बनेगी ? (फिर रश्मि जोर जोर से हँसने लगी…….)
में: (उसकी ये बात सुन कर में एक दम से दंग रह गयी)चुप कर बेशरम. अपनी माँ के साथ ऐसे बात करते है…..
में किचन में आ गयी….. पर सच कहूँ तो, मेरे मन में भी अजीब से हलचल मच गयी थी… रश्मि की आवाज़ मुझे आई, वो फोन पर बात कर रही थी… मुझे मालूम था कि, वो सुशांत से ही बात कर रही थी.. थोड़ी देर बाद रश्मि ने मुझे रूम में आने को कहा… में अपने रूम में गयी…
में: क्या है?
रश्मि: लो सुशांत से बात करो. वो आप से बात करना चाहता है……
में (मैंने रश्मि से फोन लेकर कान पर लगाया) हेल्लो.
सुशांत: बहुत जल्दी मान गयी आप…..
उसकी इस बात पर में खामोश हो गयी….
सुशांत: अच्छा सुनो. हम इस सनडे को शादी कर लेंगे….. सबसे पहले तुम एक काम करो….. अपने सब किरायेदारो को रूम खाली करने के लिए बोल दो…..
में: क्यों? ऐसे अचानक वो कहाँ जाएंगे…
सुशांत: अर्रे कह देना कि रश्मि की शादी है, मेहमान आएंगे तो उनको ठहराने के लिए जगह भी तो होनी चाहिए…. और उनको बता कर तुम रश्मि को लेकर मार्केट में आ जाओ…… में तुम दोनों का वही वेट कर रहा हूँ.
में: मार्केट में क्या करना है….
सुशांत: अर्रे भाई शादी है, तो थोड़ी शॉपिंग करना तो बनता है ना…
में: ठीक है हम दोपहर को १ बजे आ जाएँगे…
उसके बाद मैंने अपने सभी किराएदारों से बात की, और उन्हें २ दिन में कमरे खाली करने को कहा….दोपहर को में रश्मि के साथ तैयार होकर, मार्केट आ गयी… हम सुशांत की बताई हुई जगह पर पहुँच गयी… वहाँ पर सुशांत हमारा इंतजार कर रहा था…
उस दिन सुशांत नॉर्मल बिहेव कर रहा था…. रश्मि शॉपिंग को लेकर इतनी एक्ससाईटेड थी कि, उसे ये ख़याल भी नहीं था कि, सुशांत किस शर्त पर उससे शादी के लिए तैयार हुआ था…. में बार बार रश्मि की तरफ देख रही थी…. पर मुझे उसके चेहरे पर कोई शिकन नज़र नहीं आ रही थी…
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मुझे ऐसा लग रहा था. जैसे वो सुशांत के साथ शादी करने के लिए बहुत खुश है…. में औलाद के मोह में बँधी सब कुछ चुप चाप देख रही थी… शॉपिंग के बाद हम दोनों घर वापिस आ गये…. सुशांत अपने घर चला गया…. अगले कुछ दिनो में हमारे सारे किरायेदार रूम खाली कर चले गये….
मैंने अपने जेठ जेठानी और प्रिया को फोन पर ही बता दिया था, सब मेरे इस फैसले को सही मान रहे थे….. पर असल बात उनको पता नहीं थी.. खैर वो दिन भी आ गया……… जब रश्मि और सुशांत की शादी होनी थी…..मेरे कहने पर सुशांत रश्मि के साथ कोर्ट मैंरेज करने के लिए तैयार हो गया.
क्यों कि में ये पक्का कर लेना चाहती थी कि, मेरी बेटी के साथ धोखा ना हो…. हम सब लोग कोर्ट गये, और रश्मि और सुशांत की शादी करवा दी गयी….. शाम को घर में मेरे जेठ जी का परिवार और प्रिया का पति और उसके सास ससुर आए थे… इसलिए घर में छोटी सी पार्टी अरेंज करी थी…
अगले दिन सुबह सब अपने अपने घर के रवाना हो गये….. आज मेरे और रश्मि के लिए सुबह थी…. और आज के बाद मेरी लाइफ पूरी तरह से बदल जानी वाली थी…. शायद में इस समाज की पहली औरत होने वाली थी…. जो अपनी बेटी के साथ साथ उसके पति के साथ एक ही सेज पर ठुकने वाली थी……..
डर भी लग रहा था….. और इस नये अनुभव के बारे में सोच सोच कर मेरे पूरे बदन में सरसराहट सी दौड़ जाती….. मन में भी अजीब सी हलचल बनी हुई थी……. “हाईए कैसे में ठुकुन्गि…. अपनी बेटी के सामने…… कैसे अपने बेटी को अपनी योनि में लंड लेते देखूँगी…. ये सोच कर ही मेरी योनि काँप जाती….”
सभी मेहमानो के जाने के बाद सुशांत घर से निकल गया…. जब मैंने रश्मि से पूछा तो उसने कहा कि वो उस को भी कुछ बता कर नहीं गया…. दोपहर को सुशांत घर वापिस आया….. में रश्मि के साथ किचन में खाना बना रही थी… सुशांत सीधा किचन में आ गया…. मेरा दिल उस समय थम गया.
जब उसने मेरे सामने ही रश्मि को पीछे से अपनी बाँहों में भर कर उसके गर्दन पर अपने होठों को रख दिया…. मैंने शरमा कर दूसरी तरफ मूह कर लिया…… मुझे रश्मि के सिसकने की आवाज़ आई “आह सुशांत छोड़ो ना” मैंने अपनी कनखियों से देखा तो, वो रश्मि के ब्लाउज के ऊपर से उसकी स्तनों को मसल रहा था….
और रश्मि अपने एक हाथ को पीछे लेजा कर उसके सर को थामे हुए थी….. और उसने अपने सर को सुशांत के कंधे पर रख कर आँखें बंद कर रखी थी….. फिर सुशांत बाहर चला गया….. आज मेरे लिए एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था.
में कैसे सुशांत और रश्मि के साथ एक बिस्तर पर नहीं नहीं मुझसे नहीं होगा. वैसे भी सुशांत पर अब सिर्फ़ रश्मि का हक़ है. अभी तो उसने भोलेपन में ये सब करने के लिए हां कर दी. पर कौन सी पत्नी अपनी पति को किसी दूसरी औरत के साथ शेयर करना पसंद करेंगे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बाद में आगे चल कर कही गड़बड़ हो गयी तो, नहीं में अभी सुशांत से बात करती हूँ. ये सोचते हुए, मैं रश्मि के रूम में चली गयी….. जहा पर सुशांत बैठा टीवी देख रहा था. मुझे देखते ही उसने टीवी का वॉल्यूम कम कर दिया. और मेरी तरफ देखने लगा…. मैंने हिम्मत करते हुए, सुशांत से कहा.
में: सुशांत ये सब करना ज़रूरी है क्या?
सुशांत: तुम किस बारे मे बात कर रही हो.. साफ साफ बताओ ना.
में: (थोड़ी देर और हिम्मत जुटाने के बाद) एक साथ सहवास करने के बारे मे. में अपनी बेटी के सामने नहीं कर पाऊंगी ये सब.
सुशांत: ठीक है. जब तक तुम नहीं मानोगी, तो मैं और रश्मि भी अपनी सुहागरात नहीं मनाएँगे…
मैं: ये क्या बच्चों वाली ज़िद्द है. देखो सुशांत रश्मि अब तुम्हारी पत्नी है. और तुम उसके पति. कोई भी औरत अपने पति को दूसरी औरत के साथ बरदाश्त नहीं कर सकती. और मैं तो उसकी माँ हूँ. मैं कैसे अपनी बेटी के प्यार को शेयर कर सकती हूँ.
सुशांत: अच्छा इस बारे में रश्मि से ही पूछ लो.
में सुशांत को रोकना चाहती थी. पर उसने मेरे कुछ कहने से पहले ही रश्मि को आवाज़ लगा दी.
रश्मि सुशांत की आवाज़ सुन कर रूम में आ गयी. “क्या हुआ सुशांत?”
रश्मि ने हम दोनों की तरफ देखते हुए कहा. “देखो ना तुम्हारी माँ क्या कह रही है.”
सुशांत ने मुसकुराते हुए, रश्मि की तरफ देख कर बोला. “क्या हुआ माँ कोई प्रॉब्लम है क्या?”
अब मैं कहती. मैं थोड़ी देर वहाँ चुप खड़ी रही. और जब मेरे कुछ बोलने की हिम्मत ना हुई, तो में रूम से बाहर आकर अपने रूम में चली गयी…. मुझे सुशांत और रश्मि की बातों की आवाज़ हल्की हल्की आ रही थी. पर वो क्या बात कर रहे थे. मुझे समझ नहीं आ रहा था. थोड़ी देर बाद रश्मि मेरे रूम में आई, और मेरे पास आकर बेड पर बैठ गयी. थोड़ी देर के लिए वो रूम में इधर उधर देखती रही, और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली.
रश्मि: माँ प्लीज़ मान जाओ ना. तुम्हे मेरी खुशी की ज़रा भी परवाह नहीं है क्या….. प्लीज़ मान जाओ ना.
ये कहते हुए रश्मि रूम से बाहर चली गयी…. में उसे हैरत से जाते हुए देख रही थी….. और सोच रही थी कि, आख़िर सुशांत ने रश्मि पर ऐसा क्या जादू कर दिया कि, वो मेरे सामने ही सुशांत से ठुकने के लिए तैयार हो गयी है…. मैं अभी यही सोच ही रही थी कि, रश्मि एक बार फिर से रूम मे आई….
उसके हाथ मे एक शॉपिंग बॅग था… उसने वो शॉपिंग बॅग मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा “ये तुम्हारे लिए सुशांत लाया है. और आज रात को आपको इसे पहनना है” वो बॅग मेरे सामने रख कर बाहर चली गयी….. मैंने वो बॅग उठाया, और उसमे से वो ड्रेस निकाली.
उसमें पिंक कलर की शॉर्ट और स्लीव्लेस्स नाइटी थी….. उसमे स्तनों की जगह पर नेट का कपड़ा लगा हुआ था…. और ब्रा शेप सी बनी हुई थी…. जिसमे आगे की तरफ तीन हुक्स थे…. अब मैं खुद भी अपनी योनि के हाथों लाचार महसूस कर रही थी…..
आख़िर वो घड़ी भी आ गयी…… रात को खाना खाने के बाद रश्मि मेरे रूम मे आई…… उसका चेहरा एक दम खिला हुआ था…. उसकी खुशी उसके चेहरे को देखते ही बन रही थी…. उसने अंदर आते ही मुझे बाहों में भर लाया, और मेरे गालो को चूमती हुई बोली, “माँ जल्दी से तैयार हो जाओ…….. सुशांत वेट कर रहा है. प्लीज़ जल्दी करना….” ये बोल कर रश्मि बाहर चली गयी…..
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मैं बेड से खड़ी हुई, और नाइटी को उठा कर एक बार देखा. और फिर मन ही मन सोचा. “आख़िर तू भी तो चाहती है कि, सुशांत तुझसे भी प्यार करे…..तेरी भी तो कुछ ज़रूरते है… उन्हे कौन पूरा करेगा…. अब अगर रश्मि को कोई एतराज नहीं तो मैं क्यों इस भोलेपन का ढोंग करू.”
मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए…. और फिर वो नाइटी पहन कर मिरर के सामने आई तो मैं खुद पर शर्मा गयी…. वो स्लीव्लेस नाइटी मेरी जाँघो तक मुश्किल से आ रही थी….. उसमे मेरा जिस्म एक दम कसा हुआ लग रहा था…. ऊपर से मेरी स्तनों की शेप उसमे अलग ही नज़र आ रही थी…..
में घबराते हुए, अपने कमरे से बाहर निकली, और काँपते हुए कदमो से चलते हुए, रश्मि के रूम के डोर के पास पहुची. अंदर से रश्मि और सुशांत के हँसने की आवाज़ आ रही थी….. डोर पर खड़े हुए मेरे हाथ पैर एक दम सुन्न पड़ गये थी…. आखिर मैं इस हालत मे अंदर जाऊँ तो जाऊँ कैसे.
तभी रूम मे एक दम से सन्नाटा छा गया…. जैसे रश्मि और सुशांत को मेरे रूम के बाहर खड़े होने का अंदेशा हो गया हो…. मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था… साँसे ऐसे चल रही थी… मानो मीलो दौड़ कर आई हूँ…. मैं अपने सांसो को थामने की कोसिश करते हुए, डोर के बाहर खड़ी थी….
और अंदर जाने के लिए हिम्मत जुटा रही थी…. तभी एक दम से डोर खुला…. सामने सुशांत खड़ा था….उसने एक बार ऊपर से लेकर नीचे तक मेरे बदन को देखा, और फिर मेरा हाथ पकड़ कर अंदर ले जाने लगा…. मैं किसी कठपुतली की तरह उसके साथ खिंचती चली गयी…..
वो मेरी स्तनों को घुरे जा रहा था…. मेरी नाइटी में से मेरे काले रंग के मोटे स्तनाग्र साफ झलक रहे थे…. में शरम के मारे अपना सर भी ऊपर नहीं उठा पा रही थी…. रूम के बीचों बीच आकर सुशांत ने मेरा हाथ छोड़ दिया…. और फिर मुझे पीछे से डोर बंद होने की आवाज़ आई…. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुशांत अंदर से डोर को लॉक कर रहा था…. वैसे तो घर में अब हम तीनों के सिवाय कोई नहीं था….. पर उसके डोर को लॉक करने की आवाज़ सुन कर मुझे ये अहसास होने लगा कि, अब आगे क्या होने वाला है….. फिर मुझे अपने पीछे से सुशांत मेरी तरफ बढ़ता हुआ महसूस हुआ…
मैंने हिम्मत करके, अपनी नज़रे ऊपर उठाए, तो देखा सामने रश्मि बेड पर रेड कलर की नाइटी पहनी हुई घुटनो के बल बैठी थी….. उसके माथे पर ज़रा भी शिकन नहीं थी. वो एक दम नॉर्मल लग रही थी…… तभी सुशांत मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया……
उसकी बॉडी मेरी बॅक से सट गयी थी….. मैंने फौरन ही अपना सर फिर से झुका लिया…. और अगले ही पल सुशांत के दोनों हाथ मेरी कमर के बगलों से होते हुए, मेरे पेट पर आ गये…. उसने पीछे से मेरे को बाँहों में जकड़ लिया था…. मुझे उसका तना हुआ लंड अपनी नितंब की दरार में साफ महसूस हो रहा था….
जिसके कारण मेरे पैर मेरा साथ छोड़ने लगे थी….. वो धीरे धीरे अपने दोनों हाथों को मेरे पेट पर घुमाते हुए सहला रहा था….. और पीछे से अपनी कमर को हल्का हलका सा घुमा रहा था…. मुझे शरम भी आ रही थी….. और सुशांत के लंड को अपनी नितंब की दरार में महसूस करके में एक दम से गरम भी होने लगी थी….
फिर मुझे उसकी साँसे मेरे कान पर महसूस हुई, मेरा पूरा जिस्म एक दम सिहर गये…. मैंने अपने दोनों हाथों को सुशांत के हाथों पर रख कर दबा दिया…. “आज तेरे पिछले छेद का उद्घाटन करना है….. सुहागरात पर मुझे ये तोहफा चाहिए… बोल मुझे अपनी नितंब मारने देगी ना.”
सुशांत की ये बात सुन कर तो जैसे मेरे दिल की धड़कने ही थम गयी…. उस दिन मैंने अली को नगमा की नितंब मारते हुए देखा था. वही सीन मेरी आँखों के सामने घूम गया…. दूसरा सुशांत ने ये बात धीरे नहीं बोली थी…. रश्मि को ज़रूर इस बात को सुन लिया होगा…..
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मैं एक दम से शर्मसार हो गयी….. फिर सुशांत ने अपने होठों को मेरे गले पर रख दिया…. और मेरी गरदन को चूमने लगा….. मेरी आँखें सुशांत के होंठों को अपनी नेक पर महसूस करते ही, बंद हो गयी…. पूरा बदन कांप गया…. मेरे हाथ अभी भी उसके हाथों के ऊपर थे….. और वो अपने हाथों से मेरे पेट को मसलते हुए, मेरी स्तनों की तरफ बढ़ रहा था…..
ये जानते हुए भी कि रश्मि बिकुल मेरे सामने बैठी है….. मैं एक दम मदहोश सी होती हुई उसके हाथ को रोक नहीं पा रही थी….. धीरे धीरे उसके दोनों हाथ मेरी स्तनों पर आ पहुंचे……. और नाइटी के ऊपर से मेरे स्तनों के स्तनाग्र को अपनी उंगलियों में लेकर मसलने लगा…… “आह सुशांत रश्मिआ” मैं एकदम सिसक उठी…..
तभी मुझे अहसास हुआ कि, मेरे घुटनो से कुछ टकरा रहा है….. मैंने सर झुका रखा था…… मैंने अपनी आँखें खोल कर देखा तो, वो बेड का किनारा था….. मदहोशी के आलम में मैं कब बेड तक पहुच गयी मुझे पता ही नहीं चला…. फिर अचानक से उसने मुझे बेड पर धकेल दिया….. मैं बेड पर जा गिरी…
जैसे ही मैंने आँखे खोली तो मैंने देखा कि मेरी आँखो के सामने रश्मि वैसे ही बैठी हुई थी… मैं बेड पर पेट के बल थी…. फिर मुझे अपनी जाँघो पर कुछ महसूस हुआ…. मैंने लेटे हुए, पीछे गर्दन घुमा कर देखा तो, सुशांत मेरी जाँघो पर बैठा था….. उसके वजन के कारण मैं हिल भी नहीं पा रही थी.
पता नहीं कब उसने अपना पायजामा उतार दिया था…. अब उसके बदन पर सिर्फ़ अंडरवेयर था….. जो आगे से उभरा हुआ था….. उसने अपने दोनों हाथों को मेरी जाँघों पर रख दिया…. और मेरी जाँघों को मसलते हुआ, ऊपर की तरफ बढ़ने लगा…. मेरे पुरे बदन में सनसनी दौड़ गयी….
मेरे आँखें फिर से बंद होने लगी…. मेरे फेस के बिलकुल सामने बैठी रश्मि अपनी आँखें फाड़े देख रही थी…. मैंने अपने चेहरे को अपने हाथों से ढक लिया….. सुशांत मेरी जाँघों को मसलते हुए, धीरे धीरे ऊपर बढ़ रहा था…. मैंने नाइटी के नीचे पैंटी भी नहीं पहनी थी…..
फिर सुशांत ने एक झटके से मेरी नाइटी को मेरी कमर तक ऊपर उठा दिया….. मेरी नितंब मेरी बेटी रश्मि के आँखों के सामने नंगी हो गयी होगी…… मैं यही सोचते हुए शरम से मरे जा रही थी…… उसने अपने दोनों हाथों से मेरे नितंबो को फैला कर मसलना शुरू कर दिया…..
मैं एकदम से सिसक उठी…… मैंने सिसकते हुए सुशांत को रुकने के लिए कहा…. पर वो मेरी एक नहीं सुन रहा था….. उसने मेरे दोनों नितंबो को पकड़ कर फैला दिया….. फिर थोड़ी देर वैसे ही बैठा रहा….. मैं नीचे चद्दर मे अपने हाथों से अपने मूह को ढके हुए थी…..
इसीलिए मैं देख तो नहीं पा रही थी. पर मुझे अहसास हो रहा था कि, रश्मि मेरे आगे से उठ कर सुशांत के बगल मे जाकर बैठ चुकी थी….. शायद सुशांत ने उसे इशारे से पास बुलाया था…. ये सोच कर मैं शरम से दोहरी हो गयी…… मेरी अपनी बेटी मेरे नंगे नितंबों को देख रही है…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और सुशांत ने जिस तरह से मेरे नितंबों को फैला रखा था… मुझे यकीन है कि, उसे मेरी योनि के लिप्स भी दिख रहे होंगे…. फिर मुझे अपनी जाँघो पर वजन हल्का होता हुआ महसूस हुआ…… फिर मुझे कुछ सरकने की आवाज़ आई……. और अगले ही पल एक गरम और सख्त चीज़ मेरी नितंब के छेद पर आ लगी…..
में एक दम सिसक उठी….. वो चीज़ कुछ और नहीं…. सुशांत के लंड का मोटा और गरम सुपाडा था…… जैसे ही मैंने अपनी नितंब के छेद पर सुशांत के लंड के सुपाडे को महसूस किया…. मेरा पूरा बदन एन्ठ गया….. योनि के अंदर सरसराहट दौड़ गयी….. मैंने अपने चेहरे से हाथों को हटा लिया. और मेरे मूह से सिसकारी ना निकले.
इसलिए मैंने बेडशीट को अपने दाँतों में दबा लिया……. पर फिर भी मूह से घुटी हुई आह निकल गयी….. सुशांत के लंड के सुपाडे की गरमी को महसूस करते ही….. मेरी जांघे अपने आप खुलने लगी….. फिर मुझे कुछ पच पच की आवाज़ आने लगी…..
में शरम से अपना सर घुमा कर भी नहीं देख सकती थी… .पर वो आवाज़ और उँची होती गयी. और जब मेरे सब्र का बाँध टूटा तो, मैंने पीछे की तरफ सर घुमा कर कनखियों से देखा….. तो मेरे रोंगटे खड़े हो गये….. रश्मि और सुशांत एक दूसरे के होठों में होंठ डाले हुए, स्मूच कर रहे थे…..
मैं हैरत से ये सब देख रही थी….. कि मेरी अपनी बेटी मेरी मौजूदगी में इतनी वाइल्ड्ली स्मूच कर रही है. उसको तो जैसे किसी बात की परवाह ही नहीं थी….. सुशांत ने अपना एक हाथ रश्मि की पीठ के पीछे से घुमा कर उसके नितंबो पर रखा हुआ था…… और दूसरे हाथ से वो रश्मि की नाइटी के ऊपर से ही उसकी स्तनों को मसल रहा था…..
रश्मि अपनी दोनों बाहों को सुशांत की कमर पर लपेटे हुए उससे एक दम चिपकी हुई थी.. ये देख कर मेरी योनि में सरसराहट और बढ़ गयी…… फिर अचानक से सुशांत ने रश्मि के होठों से अपने होठों को अलग किया….और फिर मेरी जाँघो से ऊपर उठाते हुए, मुझे एक झटके से सीधा पीठ के बल लेटा दिया….
मैं एक दम से हड़बड़ा गयी….. इस पहले कि मैं संभाल पाती….. सुशांत ने मेरी दोनों टाँगो को घुटनो से पकड़ कर ऊपर उठा दिया…. और फिर मेरी टाँगो को फैला दिया….. अगले ही पल उसके लंड का सुपाडा मेरी योनि के छेद पर भिड़ा हुआ था…. मैंने अपनी अधखुली आँखों से देखा…..
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रश्मि सुशांत की चेस्ट पर अपनी हथेलयों को फेर रही थी…. सुशांत ने अपने लंड के सुपाडे को मेरी योनि के छेद पर दबाना शुरू कर दिया…. और उसके लंड का सुपाडा मेरी योनि की फांको और छेद को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा… मैं मस्ती में एक दम से सिसक उठी……. और सीईईई और सिसकने की आवाज़ मेरे कानो में गूँज उठी….
ये रश्मि की आवाज़ थी…. जो सुशांत की ओर वासना से भरी नज़रों से देखते हुए सिसकारियाँ भर रही थी…. उसने सुशांत के फेस को अपनी तरफ घुमाया, और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए. सुशांत बेदर्दी से रश्मि के होठों को चूसने लगा……. एक तो योनि में लंबा और मोटा लंड ऊपर से मेरी बेटी अपने होठों को चुसवा रही थी…….
मेरी योनि की दीवारो ने सुशांत के लंड को अपने अंदर जकड़ना शुरू कर दिया……. फिर एक तेज मस्ती से भरी सरसराहट मेरी योनि मे उस समय दौड़ गयी. जब सुशांत के लंड का सुपाडा मेरी योनि की दीवारो से बुरी तरहा रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आया.
मैं एक दम से मचल उठी. और अपने सर के नीचे रखे तकिये को दोनों हाथों से पकड़ लिया.. “आहह सुशांत सीईइ” मैंने अपनी अध खुली आँखो से सुशांत और रश्मि की ओर देखते हुए सिसकारी भरी…सुशांत ने रश्मि के होठों से अपने होठों को अलग किया, और फिर मेरे ऊपर झुकते हुए, मेरे स्लीव्लेस्स नाइटी के स्ट्रॅप को पकड़ कर कंधो से नीचे सरकाना शुरू कर दिया.
मैंने उसे रोकने की कोशिश की, पर उसके आगे मेरी एक ना चली, जैसे ही मैंने उसके हाथो को पकड़ कर रोकना चाहा. उसने अपने लंड को दो तीन बार पूरी तेज़ी से मेरी योनि के अंदर बाहर कर दिया…… मेरे पूरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया….. और मेरी पकड़ सुशांत के हाथों पर ढीली हो गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और उसका फ़ायदा उठाते हुए, उसने मेरी नाइटी के स्ट्रॅप्स को मेरे कंधो से नीचे सरका कर, मेरी बाहों से बाहर निकालते हुए, नीचे खींच दिया. मेरे स्तन अब नाइटी की क़ैद से बाहर आ गयी थी….. जो मेरे तेज़ी से साँस लेने से ऊपर नीचे हो रही थी…..
फिर सुशांत ने झुकते हुए, मेरे हाथो को पकड़ कर बेडशीट से टिका दिया. और मेरी एक स्तन मूह मे भर कर चूसने लगा. उसने मेरे दोनों हाथो को पकड़ कर मेरे सर के दोनों तरफ बिस्तर पर दबाया हुआ था…… मेरी आँखे मस्ती में बंद होने लगी……
तभी मेरा पूरा बदन एक दम से कांप गया…… मुझे मेरे दूसरे स्तनाग्र पर मुझे कुछ गरम और नरम सा अहसास हुआ. मैंने अपनी आँखो को ज़ोर लगा कर खोल कर देखा, तो में एक दम से हैरान रह गयी….. मेरे एक स्तन को सुशांत चूस रहा था. और दूसरे स्तन को रश्मि अपने मूह मे भर कर चूस रही थी….
मेरे पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और साथ ही शर्मसार भी हुए जा रही थी. मेरी योनि और ज़्यादा पानी छोड़ने लगी…… नीचे सुशांत के धक्के और तेज हो गये. वो अपने लंड को पूरा बाहर निकाल निकाल कर मेरी योनि में पेल रहा था. अब मुझसे भी बरदाश्त से बाहर होता चला जा रहा था.
मेरी योनि की आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि, मैंने खुद ही अपनी नितंब को ऊपर की ओर उछालना शुरू कर दिया…… मेरी इस हरकत को देख रश्मि ने अपना मूह मेरी स्तनाग्र से हटा लिया. और फिर मेरी योनि की तरफ देखने लगी. जिसमे सुशांत का लंबा मोटा लंड बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था…. “आह धीरे आह अहह उंह.”
सुशांत: ले साली और ले……. देख तुझे तेरे बेटी के सामने ठोक रहा हूँ. देख रश्मि तेरी माँ की योनि कितनी गरम है. देख कैसे पानी छोड़ रही है….
सुशांत ने अपना लंड मेरी योनि से बाहर निकाल कर दिखाते हुए कहा. उसका लंड मेरी योनि के पानी के कारण ट्यूब लाइट की रोशनी मे चमक रहा था. उसका झटके ख़ाता हुआ लंड आज और ज़्यादा विकराल लग रहा था. फिर रश्मि ने वो क्या जिसके बारे में मैंने सोचा भी नहीं था.
सुशांत ने रश्मि की गर्दन के पीछे एक हाथ डाल कर उसे अपने लंड पर झुका लिया. जो मेरी योनि के ठीक ऊपर झटके खा रहा था. और मेरे देखते ही देखते. रश्मि ने अपने मूह को खोल कर सुशांत के लंड के बड़े और मोटे लाल सुपाडे को अपने होठों में कस लिया. “आह” सुशांत भी सिसक उठा….
उसने अपने दोनों हाथों से रश्मि के सर को पकड़ कर अपनी कमर को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया. रश्मि भी सुशांत के लंड आधे से ज़्यादा निगलते हुए चूस रही थी…. उसका एक हाथ मेरे पेट के ऊपर था. और दूसरा हाथ उसने बेड पर टिका रखा था.
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“पुच पबब्ब पबब्ब की आवाज़ें रश्मि के मूह से निकल रही थी…. फिर थोड़ी देर बाद रश्मि ने लंड को मूह से बाहर निकाला. और फिर हाथ से पकड़ कर तेज़ी से हिलाने लगी. और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली. “मम्मी ये तुम्हारी बेटी की तरफ से तुम्हारे लिए तोहफा है” और फिर उसने हाथ से सुशांत के लंड को पकड़ कर मेरी योनि के छेद पर लगा दिया…..
में भी अपनी योनि की फांको को अपने हाथों से फैलाते हुए, उसे अपनी योनि का गुलाबी छेद दिखाया. और सुशांत का लंड एक बार फिर से मेरी योनि के छेद पर था. “अह्ह्ह्ह रश्मि बेटा मुझी ये गिफ्ट बहुत पसंद है…. अहह अह्ह्ह्ह धीरे सुशांत आह मर गयी. मेरी योनी अह्ह्ह्ह.”
सुशांत ने फिर से अपना पिस्टन चलाना शुरू कर दिया था….. उसके हर झटके के साथ ठप ठप की आवाज़ पूरे रूम में गूँज रही थी….. तभी मुझे अपने ऊपर कुछ महसूस हुआ. मैंने मस्ती में सिसकते हुए अपनी आँखो को खोल कर देखा तो, रश्मि मेरे ऊपर थी. उसके दोनों पैर मेरी कमर के दोनों तरफ थे.
और वो बिलकुल डॉगी स्टाइल मे मेरे ऊपर थी….. “माँ मुझे भी तुमसे गिफ्ट चाहिए” रश्मि ने मेरी अध खुली आँखो में झाँकते हुए कहा. पर मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी… उसने मेरे कोई जवाब देने से पहले ही, अपने होठों को मेरे होठों की तरफ बढ़ा दिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“आह नहीं” मैंने अपनी योनि मे महसूस हो रहे धक्को से सिसकते हुए कहा, और अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लिया. सुशांत और ज़ोर से अपना लंड बाहर निकाल निकाल कर अंदर पेलने लगा था. उसके हर धक्के से मेरा पूरा बदन हिल रहा था. उसके बॉल्स मेरी नितंब के छेद पर टकरा रहे थे.
“उम्मह सीईईई सुशांत आह धीरे आह” फिर रश्मि ने मेरे फेस को अपने हाथों में पकड़ कर जबरन अपने होंठों को मेरे होंठों पर लगा दिया. मैंने शरम के मारे अपने होंठों को आपस मे भिंच लिया. पर सुशांत के लंड के झटके अब मेरी योनि में इतने तेज हो गये थे कि, मुझे अपने होंठों को खोलना पड़ा.
जैसे ही मैंने अपने होठों को खोला, रश्मि ने अपनी जीभ मेरे मूह मे घुसा दी. उसकी जीभ मेरे मूह के हर कोने में घूम रही थी. उसके दोनों हाथ मेरे स्तनों पर थे. जिसे वो दबा दबा कर खेंच रही थी. फिर उसने मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया. अब मेरे भी बरदाश्त से बाहर होता जा रहा था.
मैंने मन में सोच लिया था कि, अगर मेरे बेटी मुझसे इस तरह बेशर्मी से पेश आ सकती है, तो में क्यों पीछे रहूं. मैंने भी रश्मि का साथ देना शुरू कर दिया. कभी वो मेरे होठों को चुस्ती, तो कभी मैं उसके होठों को चुस्ती……… “आहह सालियो मुझे भूल गयी क्या ?”
सुशांत ने नीचे से मेरी योनि में अपना लंड पेलते हुआ कहा. और फिर उसने एक ज़ोर दार थप्पड़ रश्मि की नितंब पर मारा. जिसकी आवाज़ मुझे साफ सुनाई दी, और फिर रश्मि के सिसकने की आवाज़ आई. मैंने देखा, रश्मि मेरे ऊपर से उठ कर फिर से सुशांत के पास जाकर घुटनो के बल बैठ गयी.
सुशांत ने अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकाला, और रश्मि की तरफ देखने लगा. रश्मि ने सुशांत को लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया. सुशांत का लंड मेरी योनि के कामरस से पूरी तरहा भीगा हुआ था. रश्मि उसके लंड को हिलाते हुए धीरे धीरे नीचे झुकने लगी.
उसके होंठों और मेरी योनि के बीच सिर्फ़ थोड़ा ही फासला ही रह गया था. और योनि के ठीक सामने सुशांत का लंड था. उसने झुकते हुए सुशांत के लंड को मूह में भर लिया. और जोर जोर से सर हिलाते हुए, सुशांत के लंड को चूसने लगी. में ये सब देख कर और गरम हुई जा रही थी…..
सुशांत ने मेरी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाया, और मेरी जाँघो को ज़ोर से पकड़ लाया. फिर उसने एक हाथ से रश्मि के बालों को पकड़ा और उसका सर पीछे खिंचते हुए, अपने लंड को उसके मूह से बाहर निकल लिया. फिर उसने रश्मि के बालो को पकड़े हुए, उसके फेस को मेरी योनि की तरफ बढ़ा दिया.
अगले ही पल उसने रश्मि के बालो को छोड़ कर मेरी टाँगो को पकड़ कर और फैला दिया. इससे पहले कि मैं कुछ कर पाती, रश्मि ने अपनी जीभ को नोकदार बनाते हुए, मेरी योनि के छेद पर लगा दिया. मैं जल बिन मछली की तरह तड़प उठी. पर मैं अपने आप को छुड़ा नहीं पा रही थी.
क्योंकि सुशांत ने मेरी टाँगो को फैला कर ज़ोर से पकड़ रखा था…… रश्मि अपनी जीभ मेरी योनि के छेद पर रगड़ रही थी. सुर्प सुर्प की आवाज़ से ऐसा लग रहा था. जैसे कि वो मेरी योनि से बह रहा सारा पानी पी जाएगी. मेरे आँखें फिर से मस्ती मे बंद हो गयी…..
मैं: अह्ह्ह्ह सोइना आहह ईए ईए क्याअ कर मत करो अह्ह्ह्ह उंह सीयी आह बेटाअ अहह हट जाअ….
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मेरी मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था. मेरी कमर अपने आप ही झटके खाने लगी. जिससे मेरी योनि बार बार रश्मि के मूह पर दब जाती, और वो और ज़ोर से मेरी योनि की फांको को मूह में भर कर चूसने लगती….. फिर सुशांत ने मेरी टाँगो को पकड़ और ऊपर उठा दिया. इतना ऊपर कि, मेरी नितंब बेड से ऊपर उठ गयी…
और अगले ही पल रश्मि ने मेरी योनि को चाटते हुए, एक तकिया मेरी नितंब के नीचे लगा दिया. मेरी योनि से निकल रहा पानी, और रश्मि का थूक बहता हुआ मेरी नितंब के छेद की तरफ जा रहा था…. जैसे ही रश्मि ने मेरी नितंब के नीचे तकिया लगाया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुशांत ने मेरी टाँगो को छोड़ दिया. नीचे तकिया होने के कारण मेरी नितंब अब कुछ ज़यादा ही ऊपर उठ चुकी थी……. रश्मि अभी भी मेरी योनि को चाट रही थी. मैं मस्ती आहह ओह्ह्ह्ह बस उफ्फ किए जा रही थी…. तभी मेरा पूरा बदन एक दम से कांप गया.
जब सुशांत ने अपने फन्फनाते हुए लंड का गरम सुपाडा मेरी नितंब के छेद पर लगा दिया. मेरे पूरे बदन में सनसनी दौड़ गयी…… “आह नहीं सुशांत वहाँ नहीं प्लीज़” मैंने सिसकते हुए कहा…… एक तो सुशांत के लंड का गरम सुपाडा मेरी नितंब के छेद पर रगड़ खा रहा था. और ऊपर से रश्मि मेरी योनि के छेद को चाट रही थी.
बस सिर्फ़ कहने को मना कर रही थी….. पर मैं बिकुल भी विरोध नहीं कर पा रही थी….. मेरी योनि से निकला काम रस और रश्मि का थूक मेरी नितंब के छेद पर आ रहा था……. जिससे मेरी नितंब का छेद नरम हो गया था. सुशांत ने धीरे अपने लंड के सुपाडे को मेरी नितंब के छेद पर दबाना शुरू कर दिया.
सुपाडा मेरी नितंब के छेद को फैलाता हुआ थोड़ा सा अंदर घुसा, मेरे पूरे बदन में दर्द की तेज लहर दौड़ गयी. मेरा पूरा बदन एक दम से ऐंठ गया. मैंने अपने आप को दर्द से बचाने के लिए अपने पैरो को हिलाना शुरू कर दिया. पर सुशांत ने मेरी टाँगो को कस के पकड़ा हुआ था.
सुशांत अपने लंड के सुपाडे को मेरी नितंब के टाइट छेद में अंदर घुसाने लगा…… में दर्द से एक दम चीख उठी. “अहह सुशांत मर गयी मैं छोड़ दे मुझे आह मेरी नितंब फॅट जाएगी. ओह्ह्ह सुशांत अह्ह्ह्ह आहह माआ” सुशांत ने अपने लंड के सुपाडे को दबाते हुए, मेरी नितंब के छेद मे घुसा दिया था.
दर्द की तेज लहर मेरे बदन में दौड़ गयी. मेरा पूरा बदन दर्द के कारण काँपने लगा…… पर सुशांत को मेरी हालत पर ज़रा भी तरस नहीं आया….. उसने मेरी जाँघो को पकड़ कर ऊपर उठाते हुए, मेरी स्तनों से सटा दिया. और अपनी पूरी ताक़त से एक जोरदार धक्का मारा.
सुशांत का आधा लंड मेरी नितंब में घुस कर फँस गया……. “हाए ओई मारा डाला हरामी अह्ह्ह्ह फाड़ दी अह्ह्ह्ह मेरीए माआ बहुत दर्द हो रहा है अहह ओह ओह्ह्ह्ह निकालो ईससीए सुशांत मेरी.” पर सुशांत तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.
उसने अपने लंड को ही मेरी नितंब के छेद के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….. मेरी आँखे दर्द के कारण बंद हो चुकी थी…. और मेरे आँसू भी निकल आए थे….. जब मेरी आँखे बंद थी, तब पता नहीं कब रश्मि एक बार फिर से मेरे ऊपर आ गयी……
इस बार वो मेरे ऊपर ६९ की पोज़िशन मे थी. उसका फेस मेरी योनि की तरफ था. और उसकी योनि मेरे फेस के ठीक ऊपर थी…. मेरी टाँगो के दरमियान बैठा, सुशांत अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल कर फिर से नितंब मे पेल देता. मेरी तो दर्द से जान ही निकली जा रही थी…..
पर मुझे तब दर्द से थोड़ी राहत मिली, जब रश्मि ने फिर से मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया. कहाँ तो मुझे ये सोच कर ही घिन आ रही थी, कि मेरे अपनी बेटी ही, मेरी योनि को चाट रही है. और कहाँ अब मैं उसकी योनि चाटने से मस्त होने लगी थी.
“आह क्या कर रही हो रश्मि आह हाई मेरीए नितंबड़ अह्ह्ह्ह मत कर रश्मिअ अहह आह तू तू येयी सब क्यो कर रही है अहह” पर वो तो जैसे मेरी बात ही नहीं सुन रही थी…..अब धीरे धीरे मेरा दर्द भी कम होने लगा. पर सुशांत के धक्को की रफ़्तार जैसे जैसे बढ़ती दर्द भी बढ़ता….. पर थोड़ी देर बाद कम हो जाता……..
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अब सुशांत पूरी रफ़्तार से अपने मूसल लंड को मेरी नितंब के छेद के अंदर बाहर कर रहा था….. “अहह क्या टाइट नितंब है साली अहह मेरा लंड पिघल जाएगाअ अह्ह्ह ले मेरीई रानी मैं आयाअ अहह” सुशांत झड़ने के करीब था…. लेकिन इससे पहले कि सुशांत झाड़ता.
रश्मि बोल पड़ी…… “नहीं सुशांत मुझे तुम्हारा पानी पीना है… प्लीज़ कम ऑन माइ फेस.”
सुशांत: आहह हां ले नाआ आ जल्दी आ…….
सुशांत की बात सुनते ही रश्मि मेरे ऊपर से उतर कर बेड पर घुटनो के बल बैठ गयी….. सुशांत ने मेरी नितंब से अपना लंड बाहर निकाला, और रश्मि के सामने खड़ा होकर तेज़ी से मूठ मारने लगा. और अचानक ही वो गरजते हुए झड़ने लगा. उसके लंड से वीर्य की धार निकल कर रश्मि के चेहरे को भिगोने लगी.
जैसे ही रश्मि के चेहरे पर सुशांत के लंड से निकला पानी गिरने लगा तो रश्मि के होठों पर ऐसी मुस्कान आ गयी……… जैसे उसे अमृत मिल गया हो. ये सब देखते हुए मुझे पता नहीं कब मेरा हाथ मेरी योनि की भगनासा पर चला गया. और मैं अपनी उंगलियो से योनि की क्लिट को मसलने लगी…. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जैसे जैसे सुशांत के लंड के सुपाडे से वीर्य की बौछार निकल कर रश्मि के चेहरे पर गिर रही थी…… वैसे वैसे मेरी योनि ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मैं भी झड कर हाँफने लगी…… सुशांत भी झड कर बेड पर लेट गया….. रश्मि एक दम से बेड से नीचे उतरी, और बाथरूम के लिए बाहर चली गयी…..
मेरी हालत बहुत बुरी हो चुकी थी….. थोड़ी देर बाद रश्मि वापिस आ गयी. और मैं उठ कर बाथरूम में चली गयी…… मैं बड़ी मुश्किल से चल पा रही थी….. सुशांत के मूसल लंड ने तो सच मे मेरी नितंब को फाड़ कर रख दिया था. जब बाथरूम से वापिस आई, तो मैंने देखा.
सुशांत बेड पर पीठ के बल लेटा हुआ था. और रश्मि उसकी जाँघो के पास बैठी हुई झुक कर उसके लंड को चूस रही थी…….. मेरे कदमो की आहट सुन कर रश्मि ने सुशांत के लंड को मूह से बाहर निकाला, और मेरी तरफ देखा. पर उसे शायद अब मेरी मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.
उसने फिर से मेरी ओर देखते हुए, सुशांत के लंड के सुपाडे पर जीभ बाहर निकाल कर चाटने लगी. ये सब वो मेरी ओर देखते हुए कर रही थी….सुशांत भी मेरी ओर देख कर मुस्करा रहा था. उसने मुझे अपने पास आने का इशारा किया. मैं अपने सामने ठुकाई के इस खुले खेल को देख कर मंत्र मुग्ध सी बेड की ओर खिचती चली गयी.
जैसे ही, मैं बेड पर आई. सुशांत ने मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खेंचते हुए, अपने ऊपर झुका लिया. अब मैं और रश्मि एक दूसरे के बिलकुल सामने थी. वो सुशांत के लंड को बार बार अपने मूह से निकालती, और मेरी तरफ देखते हुए, अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके लंड के मोटे लाल सुपाडे को चाटने लगती.
मैं एक टक हैरानी से उसे ये सब करता हुआ देख रही थी. जब वो सुशांत के लंड के सुपाडे को जीभ बाहर निकाल कर चाटती, तो वो सुशांत के लंड को नीचे से पकड़ कर मेरे होठों की तरफ करती. जैसे कहना चाहती हो. तुम क्यों फ्री बैठी हो…… फिर उसने सुशांत के लंड को चूसना छोड़ कर सुशांत के बगल मे लेट गये.
सुशांत ने एक हाथ से मेरे बालो को पकड़ कर मुझे अपने लंड पर झुकाना शुरू कर दिया….. मैं भी इतनी मस्त हो चुकी थी, कि किसी बात की परवाह किए बिना सुशांत के लंड के मोटे सुपाडे के चारो तरफ अपने होठों को कस लिया. और फिर उसके लंड के सुपाडे को अपने होठों के बीच में दबाते हुए चूसने लगी.
मैंने सुशांत के लंड को चूस्ते हुए देखा के रश्मि ने अपनी नाइटी के स्ट्रॅप्स को अपने कंधो से सरका कर निकाल दिया था. और सुशांत रश्मि की स्तनों को चूस रहा था. “अहह श्ह्ह सुशांत “ रश्मि सुशांत के बालो को सहलाते हुए, उसके सर को अपनी स्तनों पर दबा रही थी.
रश्मि: आहह सुशांत चूसो ना मेरे स्तनों को अह्ह्ह्ह देखो ना माँ कैसी तुम्हारे लंड को चूस रही है…..
ये सुनते ही मैंने शरम के मारे सुशांत के लंड को मूह से बाहर निकाल दिया. और फिर रश्मि मुस्कुराते हुए, सुशांत के ऊपर आ गयी. अब उसकी योनि भी बिलकुल मेरी आँखो के सामने थी……
”माँ डालो ना मेरी योनि के अंदर सुशांत का लंड” रश्मि ने पीछे फेस घुमा कर मेरी तरफ देखते हुए कहा. मैं बुत सी बनी वैसे ही बैठी रही…..
सुशांत: डाल ना साली देख नहीं रही, तेरी बेटी कैसे मेरे लंड के लिए तरस रही है. चल डाल जल्दी…..
सुशांत की रोबदार आवाज़ सुन कर मुझे झटका सा लगा. मैंने अपने काँपते हुए हाथो से सुशांत के लंड के पकड़ कर रश्मि की योनि के छेद पर लगा दिया. जैसे ही सुशांत के लंड का सुपाडा रश्मि की योनि के छेद पर लगा…. रश्मि के मूह से मस्ती भरी आह निकल गयी……..
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उसने अपनी योनि को सुशांत के लंड के सुपाडे पर दबाना शुरू कर दिया….. मैं उसके पीछे बैठी हुई ये सब देखते हुए हैरान हो रही थी. सुशांत का लंड रश्मि की योनि के टाइट छेद को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा…… जैसे जैसे सुशांत का लंड रश्मि की योनि की गहराइयों में समाता जा रहा था.
रश्मि की सिसकारियाँ उँची होती जा रही थी. मेरे देखते ही देखते, सुशांत का मूसल जैसा लंड रश्मि की टाइट योनि में समा गया. सुशांत ने फिर मुझे अपने पास आने का इशारा किया. मैं उठ कर सुशांत की बगल मे जाकर लेट गयी….. उधर रश्मि ने अपनी नितंब को ऊपर नीचे हिलाते हुए सुशांत के मूसल लंड से ठुकवाना शुरू कर दिया था….
सुशांत ने मुझे पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया, और मेरे होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा. मैं अपने सामने अपनी बेटी को ठुकते देख और मदहोश होती जा रही थी. जिसके कारण मैं सुशांत को किसी भी बात के लिए रोक नहीं पा रही थी.
ठुकाई का जो सिलसिला आज शुरू हुआ था. वो अब मेरे जीवन में सदा के लिए रहने वाला था. ये सिर्फ मेरी उस छोटी सी भूल की सजा है जो मैंने एक शिकारी को अपने घर में पनाह देते हुए की थी. लेकिन यह सज़ा अब मुझे अच्छी लगने लगी है. जिसके लिए मैं अब कुछ भी कर सकती हूँ. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अगली सुबह जब में उठ कर रूम से बाहर आई तो देखा, रश्मि अभी तक सो रही थी… मैंने उसे आवाज़ देकर उठाया, और फिर फ्रेश होकर नाश्ता बनाने लगी. रश्मि भी फ्रेश होकर मेरी हेल्प करने लगी…. नाश्ता तैयार करने के बाद अपने रूम में गयी, और अपनी जेठानी को फोन लगाया….
विमला: हेलो…..
में: हेलो दीदी में बोल रही हूँ वैशाली…..
विमला: हां वैशाली बोलो. इतनी सुबह सुबह……..
में: हां दीदी दरअसल मुझे कुछ काम था….
विमला: हां बोलो क्या काम है?
में: दीदी आज तो सनडे है ना….. बच्चे और भाई साहब घर पर ही होंगे…
विमला: बच्चे तो घर पर है, पर ये काम पर गये है….. रात को आएँगे…
में: दीदी क्या आप आज बच्चो के लेकर हमारे घर आ सकती हो…….. दरअसल मुझे किसी काम से बाहर जाना है……. तो रश्मि घर पर अकेली है…..
विमला: हां हां क्यों नहीं…. वैसे भी मेरा भी दिल कर रहा था. वहाँ आने को… तुमने कब जाना है…..
में: बस जैसे ही आप आएँगी में चली जाऊंगी….. और शाम तक आ जाऊंगी……
विमला: ठीक है तो में इनको फोन कर देती हूँ…… शाम वो हमें तुम्हारे घर से लेते आएंगे……..
में: ठीक है दीदी…….
१० बजे विमला दीदी आ गयी अपने बच्चों के साथ…… मैंने थोड़ी देर उनके साथ बातें की, और फिर इजाजत लेकर सुशांत के बताए हुए पते पर जाने के लिए घर से निकली…… मुझे मालूम नहीं था कि जो में करने जा रही हूँ….. वो ठीक है या नहीं….. पर उस मुसीबत की घड़ी में मुझे जो सही लगा….. में करती गयी…
बाहर रोड पर आकर मैंने एक ऑटो वाले को वो पर्ची दिखाई, और बोला इस पते पर जाना है….. ऑटो वाले, ने इशारे से बैठने को कहा.. में ऑटो में बैठ गयी…. और ऑटो वाला ऑटो चलने लगा….. मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. आगे क्या होगा यही सब सोच सोच कर मेरे हाथ पैर थर थर कांप रहे थे.
मुझे लग रहा था. जैसे में किसी दलदल में धँसती जा रही हूँ, और उम्मीद की कोई किरण नज़र नहीं आ रही थी…. जैसे जैसे ऑटो उस बताए हुए पते की तरफ बढ़ रहा था… मेरे हाथ पैर सुन्न होते जा रहे थे…. मेरा दिल पूरे जोरों से धड़क रहा था…. तभी अचानक ऑटो वाले ने ब्रेक लगा दी, और पीछे पलट कर बोला.
ऑटो वाला: लो जी मेडम जी. पहुँच गये…. वो जो सामने वाइट पैंट वाला घर दिखाई दे रहा है ना… वही घर है….
उसकी बात सुन कर मानो जैसे मेरी साँस ही रुक गयी हो….. में ऑटो से नीचे उतरी ,और ऑटो वाले को पैसे दिए….. ऑटो वाले ने ऑटो स्टार्ट किया, और वापिस मूड गया…… मैंने हिम्मत करके उस घर की तरफ चलना शुरू किया… पूरी गली सुनसान थी.. ऐसा लग रहा था जैसे इस गली में कोई रहता ही ना हो….
जैसे जैसे में उस घर की तरफ बढ़ रही थी……. मेरा दिल डर के मारे बैठा जा रहा था….कि सी तरह काँपते पैरों से चलते हुए, में उस घर के गेट के बाहर पहुँची, और वही खड़ी होकर सोचने लगी. कि जो में कर रही हूँ ठीक कर रही हूँ या नहीं…… मुझे ये बात किसी को तो बतानी चाहिए थी…
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फिर अगले ही पल सुशांत की वो धमकी याद आ गयी…… जब उसने कहा था कि, वो तो अनाथ है. मर भी जाएगा तो कोई रोने वाला भी नहीं…… मुझे सच में लग रहा था कि, सुशांत कुछ भी कर सकता था….. मुझे उस पर गुस्सा भी आ रहा था और हैरत भी हो रही थी….. कि इतनी सी उम्र में ये सब उसके दिमाग़ में कहाँ से आ गया……..
मैंने हिम्मत करते हुए डोरबेल बजाई, और थोड़ी देर बाद गेट खुला, तो सामने सुशांत खड़ा मेरी तरफ देखते हुए अजीब से ढंग से मुस्करा रहा था. उसने एक बार मुझे सर से पाँव तक घूर कर देखा, और फिर चेहरे मुस्कान लाते हुए बोला. “चल अंदर आ जा”.
में किसी बुत की तरह घर के अंदर आ गयी….. अंदर आते ही, उसने गेट बंद कर दिया, और बिना कुछ बोले, घर के अंदर जाने लगा….. में बिना कुछ बोले उसके पीछे चली गयी….. जैसे ही में उसके पीछे रूम में दाखिल हुई, तो मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी…… ये वही रूम था. जो मैंने उस क्लिप में देखा था….मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि, रश्मि इतनी दूर यहाँ कैसे आ गयी……. दिल में हजारों सवाल घर किए हुए थे….
में: आखिर तुम चाहते क्या हो? क्यों कर रहे हो ये सब हमारे साथ?
सुशांत: (गुस्से से गुर्राते हुए) साली अब तो ऐसी भोली बन रही है….. जैसे तुझे कुछ पता ही ना हो…….. मादरजात उस दिन तो तू मुझे जान से ही मार देती…. अब में बताता हूँ कि सुशांत से पंगा लेने का अंजाम क्या होता है…..
में: देखो सुशांत में तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ…… अपनी ग़लती की माफी मांगती हूँ ! प्लीज़ कुछ ग़लत ना करना…….. हमारी तो दुनिया ही बर्बाद हो जाएगी..
सुशांत: ये तो तुम्हें पहले सोचना चाहिए था…… जब तूने मुझे पिटा था.
में: प्लीज़ सुशांत मुझे माफ कर दो….. वो क्लिप मुझे दे दो….. तुम जो कहोगे में करूँगी……
सुशांत: अच्छा जो में कहूँगा वो तुम करोगी?
मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुआ, कि मैंने डर में क्या बोल दिया था…… सुशांत मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ, और अलमारी के पास जाकर उसे खोल कर कुछ ढूँढने लगा…. और फिर वो मेरी तरफ पलटा….. उसके हाथ में एक रेड कलर की पैंटी और ब्रा थी….. वो मुझे पैंटी और ब्रा दिखाते हुए बोला……
सुशांत: तुम्हे पता है ये किसकी है?
में मूह फाड़े उसकी तरफ देखे जा रही थी……. में कुछ भी बोल ना पा रही थी…… “ये तुम्हारी बेटी रश्मि की है. मैंने उसे गिफ्ट में लाकर दी थी. अब अगर तुम चाहती हो कि, में वो क्लिप तुम्हें दे दूं…. तो इसे लेकर बाथरूम में जाओ और पहन कर मेरे सामने आओ.”
सुशांत की ये बातें तीर की तरह मेरे कानों में लग रही थी…… मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि, मेरे बेटे की उम्र का लड़का मेरे सामने मुझसे ये बात कर रहा है….. इसमे इतनी हिम्मत आई कहाँ से……. मुझे यकीन नहीं हो रहा था….. “अब सोच क्या रही है… जा जल्दी से जाकर इसे पहन कर आ…….. साला आज लंड ने सुबह से ही, तंग कर रखा है…… देखना आज तेरी योनि का कैसे पानी निकालता हूँ..”
में: अपनी बकवास बंद करो…….. में कुछ नहीं करने वाली…….. और तुम जो मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो ना…… तुम्हारे लिए बहुत बुरा होगा…… तुम जानते नहीं में कौन हूँ……
सुशांत: (हंसते हुए)हाँ हाँ जानता हूँ अच्छी तरह जानता हूँ……. साली घर में तेरे खाने के लाले पड़े है, और बन तो ऐसी रही है……. जैसे कमिश्नर की बीवी हो…. चुप चाप जैसे में कहता हूँ कर वरना यहाँ मैंने तुझे तेरी शकल देखने के लिए नहीं बुलाया…… नहीं तू फुट यहा से……. में देखूँगा मुझे क्या करना है…… साली पूरे देश में तेरी बेटी की नंगी क्लिप को ना बेचा तो मेरा नाम सुशांत नहीं…… तो आज ही देख लेना……
में: (सुशांत की बातें सुन कर में बुरी तरह घबरा चुकी थी) नहीं सुशांत तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे….. में में तुम जो कहो करने को तैयार हूँ….
सुशांत: तो चल फिर ये ले, और जाकर बाथरूम में ये पहन कर मेरे सामने आ…. आज तो तेरी योनि मार मार कर सूजा दूँगा…….
ये कहते हुए, उसने वो ब्रा और पैंटी बेड पर फेंक दी…….. में नीचे फर्श की तरफ देखते हुए घबरा रही थी….. अब मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. “जल्दी कर मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं” सुशांत ने घुरते हुए कहा…. मैंने नीचे की ओर देखते हुए वो ब्रा और पैंटी उठा ली…… और काँपते हुए कदमों से बाथरूम की तरफ जाने लगी…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुशांत: जल्दी कर……. टाइम वेस्ट ना करना……
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में बाथरूम में घुस गयी…… मेरी आँखें नम हो चुकी थी….. मैंने जैसे ही मैंने उस पैंटी और ब्रा को देखा…… तो में सोचने लगी कि ये तो रश्मि के साइज़ की है, मेरे कैसे आएगी….. मैंने डरते हुए अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए…. और धीरे धीरे सारे कपड़े उतार दिए…. फिर मैंने उस वी शेप पैंटी को अपने हाथ में लिया…. और झुक कर उसे पहनने लगी…. पैंटी तंग तो थी, पर स्ट्रिचबल थी, मैंने झुक कर उसे पहनना शुरू किया. और में एक दम हैरान रह गयी…..
वो छोटी सी वी शेप पैंटी मेरे नितंबो पर चिपकी हुई थी…. फिर मैंने वो ब्रा उठा कर पहनी, मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि, वो ब्रा भी मेरे ३८ डी साइज़ की स्तनों पर आ गयी….. तभी बाथरूम का डोर एक दम से खुल गया… सामने सुशांत खड़ा मेरी तरफ वासना भरी नज़रों से देख रहा था… वो अपने सारे कपड़े उतार कर सिर्फ़ अंडरवेयर में खड़ा था… और उसका लंड उसके अंडरवेयर में बड़ा सा तंबू बनाए हुए था…… आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में पढ़े…
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