Maa Beta Ki Chudai Jungle Me
मेरा नाम आकाश है मै भोपाल का रहने वाला हूँ. मेरे परिवार मै माँ डैड और मै हूँ. हम एक मिडिल क्लास फॅमिली से है. डैड प्राइवेट कंपनी मै काम करते है और माँ हाउस वाइफ है. ये स्टोरी मेरी और मम्मी के बीच हुवी एक घटना के आधार पर है. तो चलिए दोस्तों बिना समय बर्बाद किये स्टोरी पे आते है. ये मेरी पहली स्टोरी है अगर कुछ गलती हुई तो माफ़ कर देना. Maa Beta Ki Chudai Jungle Me
मुझे ट्रैकिंग का बहुत शौक है. एक बार मैंने डैड से ट्रैकिंग पे जाने की ज़िद की लेकिन डैड को काम से कही जाना था. तो डैड बोले मम्मी को ले के जाओ. मम्मी तैयार नहीं थी लेकिन डैड और मेरे काफी मनाने के बाद रेडी हो गयी. अगले दिन हम अपना बैग पैक किया और ट्रैकिंग के लिए निकल गए. सतपुड़ा साइड एक वॉटरफॉल है हमने वहाँ पे ट्रैकिंग करने का प्लान बनाया था. लेकिन हम दोनों कभी वहाँ गए नहीं थे.
माँ– बेटा तुम्हें रास्ता तो मालूम है न?
मैं– माँ रास्ता मालूम नहीं लेकिन गूगल की हेल्प से हम जायेंगे.
माँ– जैसे तुम्हें ठीक लगे लेकिन शाम तक घर तो पहुंचेंगे न? तुम्हें पता है न मुझे अंधेरे में बहुत डर लगता है.
मैं– माँ हम अंधेरा होने से पहले पहुंच जायेंगे.
फिर हम बाते करते करते चलने लगे. 1 घंटे तक रास्ता सीधा था तो हमें कोई दिक्कत नहीं हुई. लेकिन 1 घंटे बाद 3 रास्ते अलग अलग दिशा में थे.
माँ– बेटा अपना मोबाइल निकालो और चेक करो किस रास्ते से जाना है.
मैं– ठीक है माँ.
मैंने अपना मोबाइल निकाला लेकिन ये क्या यहाँ तो सिग्नल ही नहीं था.
मैं– माँ यहाँ तो सिग्नल ही नहीं है.
माँ– तो अब क्या करें हम किस रास्ते से जायेंगे?
मैं– शायद बीच वाला रास्ता सही होगा…
माँ– मुझे कुछ ठीक नहीं लगता हम वापस घर चलते है.
मैं– माँ अब हम इतने दूर आ गए और वापस जायेंगे?
माँ– तो फिर क्या करें अगर हम रास्ता खो गए तो इतने बड़े जंगल में कहा जायेंगे?…
मैं– नहीं माँ मुझे वॉटरफॉल देखना है.
माँ– किसी और दिन आएंगे प्लानिंग करके.
मैं– नहीं माँ हम इतना तो चल के आये है मुझे वापस नहीं जाना.
माँ– तो अब क्या करें..?
मैं– एक काम करते है थोड़ा आगे चल के देखते है अगर लगा की रास्ता खो गए तो वापस आएंगे.
माँ– ठीक है.
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हम बीच वाले रास्ते से निकल पड़े. लेकिन आगे बहुत सारे रास्ते आ गए और हम चलते रहे. 2 घंटे चलने के बाद माँ थक गयी.
माँ– मैं थक गयी कुछ देर आराम करते है.
मैं– ठीक है माँ.
फिर हमने थोड़ा खाना खाया जो अपने साथ लाये थे और एक पेड़ के नीचे बैठ गए.
माँ– बेटा मुझे तो लगता है हमें वापस चलना चाहिए अब.
मैं– नहीं माँ कुछ देर चलते है फिर भी नहीं मिला तो वापस आएंगे.
माँ– ठीक है.
फिर हम आगे बढ़ने लगे चलते चलते कब शाम हो गयी पता ही नहीं चला.
माँ– अब तो शाम हो गयी और वॉटरफॉल का कोई अता पता नहीं। अब तो घर चलो नहीं तो अंधेरा हो जायेगा.
मैं– मुझे भी अब लगता है घर चलना चाहिए. रास्ता ही नहीं मिल रहा.
फिर हमने सोचा की घर चलना ही ठीक रहेगा. कुछ देर में अंधेरा हो गया और माँ को अंधेरे से डर लगता है. हम वापस चलने लगे लेकिन हम बहुत दूर आ गए थे और रास्ता भी झाड़ियों से था और आपको तो पता है जंगल में सब रास्ते एक जैसे लगते है. हमें चलते चलते अंधेरा हो गया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ– मैंने बोला था न अब क्या करें अंधेरा भी बहुत हो गया और कुछ ठीक से दिख भी नहीं रहा अब क्या करें??
मैं– माँ सब मेरी गलती है हमें आना ही नहीं चाहिए था!
माँ– मुझे तो बहुत डर लग रहा है अब.
मैं– डरो मत मैं हूँ न.
माँ– लेकिन अब घर कैसे जायेंगे ऐसे अंधेरे में?
मैं– लगता है आज की रात जंगल में ही काटनी पड़ेगी.
माँ– क्या तुम पागल तो नहीं हो गए. इस घने जंगल में वो भी बिना सामान के मुझसे नहीं होगा!
मैं– माँ और कोई रास्ता भी नहीं है.
माँ– लेकिन हम सोयेंगे कहा..?
मैं– टॉवल बिछा के और कुछ कर भी तो नहीं सकते…
माँ– कहा फसा दिया तुमने!
मैं– सॉरी माँ मेरी वजह से तुम्हें बहुत तकलीफ सहनी पड़ रही है. आज के बाद कभी किसी चीज़ के लिए ज़िद नहीं करूँगा.
माँ – तुम बुरा मत मानो मै आज की रात एडजस्ट कर लुंगी.
फिर हमने कुछ खाना बचा था वो खा लिया और 2 टॉवल अलग अलग बिछा के लेट गए.
माँ– बेटा मुझे डर लग रहा है क्या हम साथ में सो नहीं सकते?
मैं– ठीक है माँ.
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फिर हमने टॉवल एक साथ बिछाये और सो गए. माँ बहुत डरी हुई थी और मुझसे चिपक कर सो गयी. मैंने कभी माँ के बारे मै गलत नहीं सोचा था. लेकिन पता नहीं क्यों माँ के बूब्स टच होने से मुझे कुछ कुछ होने लगा. मैं भी माँ से चिपक गया.
माँ– बेटा मुझे बहुत डर लग रहा है…
मैं– मैं हूँ न माँ.
माँ– मुझे रात को लाइट चली जाए तो अपने रूम मे भी डर लगता है और ये तो जंगल है.
मैं– डर लगता है तब क्या करती हो?
माँ– तब तुम्हारे डैड होते है न… वो होते तो इतना डर नहीं लगता.
मैं– लेकिन मैं तो हूँ न फिर इतना क्यों डरती हो?…
माँ– तुम्हारे और डैड के होने में फर्क है.
मैं– कैसा फर्क?
माँ– कुछ नहीं…
मैं– बोलो न माँ.
माँ– हम वो कर सकते है जिससे मेरा डर कम होगा.
मैं– क्या करते है डैड जिससे आपका डर कम होता है?
माँ– वो मैं तुम्हें नहीं बता सकती.
मैं– क्यों?
माँ– शादी के बाद पता चलेगा.
मै– अभी बताओ ना माँ, मैं आपका डर काम करूँगा.
माँ– तुम नहीं कर सकते.
मै– क्यों?
माँ– ये सिर्फ तुम्हारे डैड कर सकते है.
मै– ठीक है मत बताओ.
माँ– अब सो जाओ.
मै– मुझे नींद नहीं आ रही है.
माँ– क्यों तुम भी डर लग रहा है?
मै– नहीं!
माँ– फिर…?
मै– माँ आपके ये टच हो रहे है…
माँ– ये मतलब..?
मै– वह आपके…
माँ– मेरे क्या??
मै– बूब्स!
माँ– तो..?
मै– मुझे कुछ हो रहा है.
माँ– क्या हो रहा है?
मै– पता नहीं…
माँ– ठीक है फिर मैं दूसरी तरफ मुंह करके सोती हु.
मै– नहीं माँ मेरा मतलब है की मुझे अच्छा लग रहा है. मुझे इन्हें छूने का मन हो रहा है.
माँ- बेटा तुम इन्हें नहीं छू सकते यहाँ सिर्फ तेरे पापा ही हाथ लगा सकते है।
मैं- पर ऐसा क्यों माँ?
माँ- वो तुम्हें शादी के बाद पता चलेगा, अभी चुपचाप सो जा.
फिर हम दोनों सो गए. सुबह होते ही माँ ने मुझे जगाया और बोली…
माँ- बेटा जल्दी चलो तुम्हारे पापा बहुत परेशान होंगे, उनको ये भी पता नहीं होगा की हम किस हालत में है.
मैं- लेकिन माँ मुझे वॉटरफॉल देखना है।
मॉम- बेटा समझने की कोशिश करो, तुम्हारे पापा को हमारी चिंता सता रही होंगी, उन्हें तो ये भी मालूम नहीं होगा की हम किस हालत में है.
मैं- माँ मै वॉटरफॉल देखे बिना घर नहीं जाऊंगा, तुम्हें जाना है तो जाओ.
माँ- बेटा मै तुम्हें अकेले छोड़ के नहीं जा सकती और मुझे रास्ता भी मालूम नहीं है।
मैं- फिर चलते है ना वॉटरफॉल के पास।
मॉम- तुम्हारे पापा बहुत परेशान होंगे, प्लीज समझने की कोशिश करो।
मैं- एक काम करते है यहाँ आस पास देखते है कही नेटवर्क है तो फिर पापा को कॉल करेंगे. फिर तो कोई परेशानी नहीं है न आपको.
माँ- लेकिन यहाँ नेटवर्क मिलेगा नहीं।
मैं- ट्राई करते है अगर नेटवर्क नहीं मिला तो फिर हम वापस चलते है घर.
माँ- ठीक है!
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15 मिनट भटकने के बाद हमें एक जगह थोड़ा सा नेटवर्क मिला. मैंने जल्दी से पापा को कॉल किया और सारी बात बता दी, फिर पापा बोले कोई बात नहीं तुम दोनों आराम से घूम के आ जाओ. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं- माँ अब तो कोई प्रॉब्लम नहीं है ना? अब पापा ने भी परमिशन दे दी है।
मॉम- लेकिन हम वहाँ कैसे जायेंगे? हमें तो रास्ता भी मालूम नहीं कही!! फिर से भटक गए तो?
मैं- आप मेरे पीछे पीछे चलो जो होगा देख लेंगे।
फिर 2 घंटे चलने के बाद हम वॉटरफॉल तक पहुंच गए. वॉटरफॉल देख के हम दोनों ख़ुशी से झूम उठे. वॉटरफॉल बहुत ही सुंदर था.
मैं- माँ चलो न वॉटरफॉल में नहाते है।
मॉम- लेकिन हम और कपड़े नहीं लाये फिर कैसे नहायेंगे?
मैं- माँ यहाँ हम दोनों के अलावा कोई नहीं है. क्या हम कपड़े उतार के…
माँ- पागल हो गए हो क्या? बिना कपड़े मैं नहीं नहा सकती तुम्हें नहाना है तो नहा लो!
मैं- माँ प्लीज चलो ना!!
मॉम- मै तुम्हारे सामने बिना कपड़ों में नहीं नहा सकती समझा करो।
मैं- ठीक है अगर आपको मुझसे शर्म आती है तो एक काम करते है मैं अपनी आँखों पे पट्टी लगा लूंगा फिर तो कोई प्रॉब्लम नहीं है ना?
मॉम- लेकिन मैं तुमको भी बिना कपड़े नहीं देखना चाहती हूँ।
मैं- माँ लेकिन आपने तो मुझे बिना कपड़ों के देखा है ना बचपन में।
मॉम- लेकिन अब तुम बच्चे नहीं रहे।
मैं- ठीक है तुमको नहीं नहाना है तो चलते है घर और बहाने मत बनाओ।
मॉम- ठीक है नाराज मत हो मै नहाने चलती हूँ लेकिन तुम अपनी आँखों की पट्टी मत हटाना.
मैं- ठीक है मॉम!!
फिर मैंने पेड़ के कुछ पत्ते निकाले और माँ से कहा की पत्तों से मेरी आँखे बंद करो, जिससे कि मै कुछ देख नहीं सकूँ। फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाले और माँ के पास दे दिए रखने के लिए. माँ ने भी सारे कपड़े निकाले और मेरा हाथ पकड़के मुझे वॉटरफॉल के पास लेके जाने लगी.
वॉटरफॉल के पास पहुंचते ही ऊपर से तेज पानी की धार सीधे आके मेरे चेहरे पे गिर गयी और मेरी आँखों से पत्ते निकल गए. हड़बड़ाहट में मैंने आँखे खोली और मुझे एक झटका सा लगा… माँ मेरे सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी. पहली बार मैंने किसी औरत को नंगी देखा था. माँ को देख के ना चाहते हुवे भी मेरा लंड खड़ा हो गया. माँ ने मेरी तरफ देखते ही अपना शरीर ढकने की कोशिश की और वहाँ से भाग के पेड़ के पीछे छुप गयी.
माँ- (गुस्से से) तुम्हें कहा था ना आँखें मत खोलना, फिर तुमने आँखें क्यों खोली?
मैं- माँ मैंने जान बूझ के नहीं खोली, आई ऍम सॉरी….
माँ- मुझे कुछ नहीं सुनना, मैं जा रही हूँ कपड़े पहनने तुम नहा लो..
माँ कपड़े लेने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी तो वहाँ पे 1 आदमी हमारा बैग हाथ में पकड़े खड़ा था. माँ को नंगी देख के वो हँसने लगा और बोला-
आदमी- वाह क्या मस्त माल है यार… आज तो बहुत मजा आने वाला है… आजा मेरी रानी…
माँ उसको देख के बहुत डर गयी और मेरी तरफ भाग के आ गयी. मै भी बहुत डर गया क्योंकि वो एक बहुत हट्टा कट्टा आदमी था. मैंने माँ का हाथ पकड़ा और जंगल के रास्ते भागने लगा।
आदमी- अबे साले बिना कपड़े कहा भाग रहे हो (और हमारा पीछा करने लगा)।
हम दो- तीन किलोमीटर नंगे ही भाग गए, फिर हम बहुत थक गए. लेकिन वो आदमी अभी भी हमारा पीछा कर रहा था…
माँ- बेटा मै और नहीं भाग सकती!
मैं- मै भी थक गया हूँ लेकिन हम रुक गए तो वो सांड पता नहीं क्या करेगा तुम्हारे साथ. फिर कुछ देर और भागने के बाद हमें घनी झड़ियों में एक जगह मिली छुपने के लिए.
मैं- माँ यहाँ छुपते है!!
मॉम- लेकिन ये जगह तो बहुत छोटी है, मुश्किल से एक आदमी जा पायेगा.
मैं- हम दोनों थक गए है और भागने लगे तो वो हमें पकड़ लेगा इससे अच्छा यहीं छुपते है. तुम नीचे लेट जाओ और मै तुम्हारे ऊपर लेट जाऊंगा.
माँ- लेकिन हमने कपड़े नहीं पहने है और ऐसी हालत में एक दूसरे के ऊपर….
मैं- माँ सोचने का टाइम नहीं है जल्दी छुप जाओ वो आदमी आता ही होगा.
माँ जल्दी से उन झड़ियों में लेट गयी, मै भी बिना कुछ सोचे माँ के ऊपर लेट गया. कुछ ही देर में उस आदमी कि वहाँ से दौड़ने की आवाज आयी.
माँ- लगता है वो चला गया हमे अभी जाना चाहिए.
मैं- अभी नहीं माँ अगर वो आदमी फिर से लौट के आया तो… हमें कुछ देर और रुकना होगा.
माँ- हाँ शायद तुम ठीक कह रहे हो!
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छुपने के समय हम दोनों घबराहट में थे, इसलिए कुछ सोच नहीं पाए लेकिन अब हम दोनों को शर्म आने लगी. एक माँ- बेटा वो भी बिलकुल नंगे एक दूसरे के ऊपर लेटे हुवे थे. माँ के नंगे जिस्म पे टच करने के कारण मेरा लंड खड़ा हो गया था और शायद माँ को चुभ रहा था, लेकिन माँ कुछ बोल नहीं पायी. कल रात माँ के जिस बूब्स को मैं टच करना चाहता था, आज वही बूब्स पे मेरा सर था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं- माँ आई ऍम सॉरी!!!
माँ- क्यू!!
मैं- वो मेरा आपको चुभ रहा होगा… सॉरी माँ मेरे मन में आपके बारे में कुछ गलत नहीं है लेकिन.
माँ- कोई बात नहीं बेटा तुम्हारी उम्र में हो जाता है ऐसा और तुम तो मेरा बेटा है मुझे मालूम है तू मेरे बारे में कभी गलत नहीं सोच सकता.
मैं- माँ अब हम इस हालत में घर कैसे जाएंगे?
मॉम- वो बाद में सोचेंगे पहले इस मुसीबत से निपटते है.. वो आदमी इतनी आसानी से नहीं जायेगा.
माँ के ऊपर लेते मुझे 10 मिनट ही हुवे थे की हमें किसी के पैरो की आवाज सुनाई दी. हम बहुत डर गए हमें लगा वो आदमी फिर से आ गया. हम वैसे ही चुपचाप बिना हिले डुले लेटे रहे. तभी हमें एक लड़की की आवाज सुनाई दी-
लड़की- जानूँ सच मे यहाँ कोई आता जाता नहीं है न? मुझे तो बहुत डर लग रहा है अगर हमें किसी ने देख लिया तो बहुत प्रॉब्लम होगी.
तभी एक लड़के की आवाज आयी- लड़का- डार्लिंग डरो मत यहाँ इतने घने जंगल में कौन आएगा.
लड़की- फिर भी अगर रूम पे जाते तो ज्यादा अच्छा रहता.
लड़का- आजकल रूम पे सेफ नहीं रहता. वहाँ हिडन कैमरा भी रहते है. अगर हमारा वीडियो रिकॉर्ड किया तो क्या करते? ऊपर से पुलिस की रेड का भी डर रहता है.
लड़की- हां ये बात भी सही है. लेकिन यहाँ जंगल में भी तो सेफ नहीं है ना?
लड़का- रूम से ज्यादा तो यही सेफ है.
लड़की- लेकिन फिर भी मुझे डर लग रहा है.
लड़का- तुम लड़कियों के ना हजार नखरे होते है. अब कॉलेज बंक करके इतने दूर आये है और बिना कुछ किये ही जाना है क्या?
लड़की- ठीक है करते है अब गुस्सा मत हो…
फिर हमें उन दोनों की आवाज नहीं सुनाई दी. मैंने झड़ियों में से थोड़ा झांककर देखा, हमारी कुछ ही दूरी पे वो दोनों खड़े हुवे थे और एक दूसरे को किसिंग कर रहे थे. मैंने धीरे से माँ को इशारा किया. माँ भी उस तरफ देखने लगी… कुछ देर किसिंग करने के बाद लड़के ने लड़की का टॉप उतार दिया और पीछे हाथ करके उसकी ब्रा के हुक खोल दिए.
अब लड़की ऊपर से बिलकुल नंगी थी. लड़का अब उसके बूब्स दबाने लगा. बूब्स ज्यादा बड़े तो नहीं थे पर बहुत प्यारे लग रहे थे. कुछ देर दबाने के बाद उसने बूब्स को चूसना शुरू किया… उनको ऐसा करते देख मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा. मैंने भी अपना हाथ माँ के लेफ्ट बूब पे रखा. माँ ने मेरा हाथ हटाया और गुस्से से मेरी तरफ देखने लगी. मै धीमी आवाज में बोला-
मैं- सॉरी माँ उनको ऐसी हालत में देख कर मेरा हाथ अपने आप वहाँ चला गया.
माँ- बेटा मत भूलो कि मै तुम्हारी माँ हूँ. हम हालात की वजह से इस हालत में फंसे है, इसका मतलब ये नहीं की हम अपनी लिमिट क्रॉस करे.
मैं- सॉरी माँ लेकिन मै क्या करू? उनको देख के मै कण्ट्रोल खो गया.
माँ- फिर मत देख उनको. वो लवर्स है इसलिए कर रहे है और इस तरह दुसरो के निजी पल देखना भी गलत है.
फिर मै सॉरी बोल के सर नीचे झुकाये अपनी फीलिंग्स पे कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगा. 15 मिनट तक मै सर नीचे करके लेटा रहा, लेकिन उसके बाद लड़की की जोर से सिसकियाँ लेने की आवाज आयी और मै ना चाहते हुवे भी उनकी तरफ देखने लगा. लड़की नीचे दुपट्टे पे बिलकुल नंगी लेटी हुवी थी और लड़का उसको जोर जोर से चोद रहा था. उनकी चुदाई देख के मेरा फिर से खड़ा होने लगा…
माँ- तू फिर शुरू हो गया?!
मैं- माँ क्या करू कण्ट्रोल करने की ही तो कोशिश कर रहा हूँ, मैं एक काम करता हूँ अगर आप को परेशानी हो रही है, तो मैं उठ रहा हूँ।
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(और मै उठने लगा). मैने उठने की जैसे ही कोशिश की तभी झट से माँ ने मुझे पकड़ के नीचे खींचा. अचानक नीचे खींचने से मै माँ के ऊपर जोर से गिर गया और मेरे दोनों हाथ माँ के बूब्स पे टच कर गए. मेरे नीचे गिरने की वजह से झाड़ियों से थोड़ी आवाज आ गयी जिससे वो लड़की घबरा गयी और बोली-
लड़की- लगता है कोई आ रहा है.
लड़का- अरे कोई नहीं है, सूखी लकड़ी गिर गयी होगी.
लड़की- नहीं मुझे अब डर लग रहा है, लगता है अब हमें जाना चाहिए.
लड़का- सिर्फ और 5 मिनट मैं जल्दी जल्दी करूँगा.
फिर लड़के ने अपनी स्पीड बढ़ायी और ज़ोर ज़ोर से उसको चोदने लगा… इधर मेरी हालत भी ख़राब हो चुकी थी. मेरे दोनों हाथ अभी भी माँ के बूब्स पे थे. माँ ने फिर से मेरे हाथ हटाए और धीरे से बोली-
मॉम- अरे. !!! यार उठ क्यों रहे थे, हम पकड़े जाते ना अभी.
मैं- तो फिर क्या करूँ? एक तो उन दोनों की चुदाई की आवाज, दूसरी तरफ हमारा नंगा जिस्म एक दूसरे से टच हो रहा है, ऐसी हालत में मै कैसे कण्ट्रोल करू?
माँ- कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा है इसका मतलब तुम मेरे साथ…
मैं- माँ ये क्या कह रही हो आप! मै आप की बहुत इज़्ज़त करता हूँ, मैं सपने में भी आपके साथ ऐसी घटिया हरकत करने का सोच नहीं सकता.
माँ- सॉरी बेटा मैंने तुम्हें गलत समझा.
मैं- कोई बात नहीं माँ, ये खड़ा है इसलिए आप ने ऐसा सोचा. लेकिन माँ मेरा इस पर कोई कण्ट्रोल नहीं है.
माँ- मैं समझ सकती हूँ तुम्हारे जज्बात. लेकिन मुझे जोर से चुभ रहा है और दर्द हो रहा है.
मैं- क्या करूँ फिर आप ही बताइये माँ?
माँ- इसे शांत करो तभी तुझे आराम मिलेगा और मुझे भी.
मैं- लेकिन मैं आप के सामने कैसे कर सकता हूँ.
माँ- मैं आँखें बंद कर लेती हूँ तुम जल्दी से इसे शांत करो.
मैं- ठीक है माँ.
फिर माँ ने अपनी आँखें बंद की. मैंने अपना एक हाथ लंड पे रखा और धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. 5 मिनट हिलाने के बाद भी मेरा निकल नहीं रहा था.
माँ- हो गया क्या तुम्हारा?
मै – नहीं माँ कुछ हो ही नहीं रहा है.
माँ- एक काम करो उन दोनों को देख के अपना काम करो शायद उनको देख के तुम्हारा जल्दी होगा.
मैंने झाड़ियों को साइड में किया और उनकी तरफ देखने लगा लेकिन वो लोग वहाँ नहीं थे. शायद उन लोगो का हो गया था और वो दोनों चले गए थे.
मैं- माँ लगता है उनका काम हो गया वो दोनों चले गए.
माँ- फिर हमें भी अब निकलना होगा. तुम धीरे से जाके देखो कोई आस पास तो नहीं है ना.
मै चारों तरफ देखने लगा पास में कोई नहीं दिखा.
मैं- माँ कोई नहीं है, शायद अब हमे निकलना चाहिए.
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फिर हम धीरे से बाहर निकल गए और माँ और मैंने कुछ पेड़ से पत्ते तोड़े और अपने पूरी बॉडी पे बांधे जिससे हमारा नंगा शरीर ढक जाए. हम ऐसी ही हालत में घर जाने के लिए चल पड़े. रास्ते में नेटवर्क आने की वजह से मेरा फ़ोन बजा. मैंने फ़ोन चेक किया तो पापा के 5 मिस्ड कॉल होने की नोटिफिकेशन थी. मैंने तुरंत पापा को कॉल किया और फ़ोन माँ को दे दिया. माँ ने कुछ देर पापा से बात की. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं- क्या बोल रहे थे पापा?
माँ- पापा को काम के सिलसिले में 5 दिन के लिए बैंगलोर जाना पड़ा. बताने के लिए कॉल कर रहे थे अब वो निकल गए.
मैं- माँ फिर तो हम कुछ देर और रह सकते है यहाँ. मुझे वॉटरफॉल में एन्जॉय करना था लेकिन उस आदमी ने हमे ठीक से नहाने भी नहीं दिया.
माँ- अब और 1 मिनट भी यहाँ रुकने की मत सोचना, पहले ही इतनी मुसीबत में है हम. मुझे तो बिना कपड़े घर कैसे जाये ये चिंता सत्ता रही है और तुम्हें यहाँ रुकना है.
मैं- माँ मेरे पास 1 आइडिया है बिना कोई देखे हम यहाँ से विथाउट क्लॉथ जा सकते है.
माँ- कैसा आईडिया मुझे भी बताओ?
मैं- हम रात के 2- 3 बजे निकलें तो? रात को सब सो रहे होंगे, तब हम जा सकते है और पापा भी घर पे नहीं है फिर तो कोई टेंशन ही नहीं होगी.
माँ- बात तो तू ठीक कह रहा है लेकिन अभी तो सिर्फ 11 बजे है दोपहर के, फिर इतनी देर हम क्या करेंगे यहाँ?
मैं- वॉटरफॉल में थोड़ी देर नहाएंगे, फिर कुछ देर यहाँ वहाँ घूमकर रात होने का इंतजार करेंगे और कोई रास्ता भी नहीं है.
माँ- ठीक है ऐसे बिना कपड़े जायेंगे तो बहुत बेइज्जती होगी हमारी, लोग क्या क्या बातें करेंगे, इससे अच्छा यही रहते है रात होने तक।
अभी भी हमे और 10 घंटे यहाँ रुकना था. हम वॉटरफॉल की तरफ जाने लगे.
माँ- बेटा मुझे तो अब डर लग रहा है कही कोई और न आ जाये यहाँ पे. पहले ही हम इस वॉटरफॉल के चक्कर में बहुत प्रॉब्लम झेल चुके है.
मैं- लेकिन और कोई उपाय भी तो नहीं है, हमे और 10 घंटे यहाँ बिताने है, अब इतना कुछ हो गया कि हमें प्रॉब्लम के सिवा कुछ नहीं मिला, अब जो टाइम बचा है कम से कम थोड़ा एन्जॉय करके तो निकल सकते है न.
माँ- बात तो ठीक है तुम्हारी लेकिन अब इस हालत में एन्जॉय कैसे कर सकते है, टेंशन के कारण मेरा तो मूड भी नहीं है कुछ करने का, अब सिर्फ घर जाने का इंतजार है मुझे.
मैं- माँ टेंशन लेने से टाइम जल्दी तो नहीं जायेगा न? उल्टा एन्जॉय करेंगे तो टाइम का पता भी नहीं चलेगा.
माँ- ठीक है मै कोशिश करती हूँ, लेकिन ये पत्ते जो हमने लपेटे है वो पानी के कारण खुल जायेंगे.
मैं- माँ अब भी तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है? मुझे कुछ करना होता तो मै तभी करता जब मैं तुम्हारे ऊपर लेटा था.
माँ- मुझे तुमपे पूरा भरोसा है लेकिन कोई और आ गया तो प्रॉब्लम होगी.
मैं- अब कोई नहीं आएगा और आ भी गया तो मैं संभाल लूंगा.
फिर हम वॉटरफॉल के नीचे नहाने चले गए. वॉटरफॉल के पानी से हमारे पत्ते खुल चुके थे और माँ भी मेरे साथ बिना शर्माए एन्जॉय कर रही थी. हम यहाँ अपनी मस्ती में इतने खोये हुवे थे की आने वाले खतरे को समझ नहीं पाए. जो आदमी हमारे पीछे पड़ा हुवा था वो फिर से आ गया. वो हमें देख के जोर से बोला।
आदमी- कमीनो मुझे इतना दौड़ाया और तुम लोग मजे कर रहे हो, अब भाग के दिखाओ! ये वीडियो इंटरनेट पे वायरल कर दूंगा(उस के हाथ में मोबाइल था)।
हम दोनों बहुत डर गए.
माँ- (उसके सामने हाथ जोड़ते हुवे) प्लीज हमे जाने दो हम बहुत अच्छे परिवार से है.
आदमी- साली रंडी कही की, यहाँ नंगी नहा रही हो अपने यार के साथ, थोड़ी देर मुझे भी नहाना है फिर चली जाना आराम से.
मैं- मै इसका यार नहीं, ये माँ है मेरी।
आदमी- वाह रे मादरचोद तेरी तो मौज है, अपनी ही माँ के साथ नंगा नहा रहा है, सिर्फ नंगा करके तो ऐसी आइटम को कोई छोड़ेगा नहीं! बोलो कितनी बार चोदा है इस रंडी को.
मैं- हम तुम्हारी वजह से इस हालत में है वरना मै अपनी माँ की बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ.
आदमी- रेस्पेक्ट करता है तो फिर सुबह मेरे आने से पहले भी तो तुम दोनों नंगे ही थे.
मैं- वो.. वो.. गलती से….(मेरे मुंह से शब्द निकल नहीं रहे थे)।
आदमी- चुप कर मादरचोद मैं यहाँ तुम्हारी स्टोरी सुनने नहीं आया. अब जो मैं बोलता हूँ वो करो, नहीं तो ये वीडियो वायरल कर दूंगा.
माँ- क्या करना होगा हमें?
आदमी- रुको जरा रंडी कितनी उतावली हो रही हो चुदने के लिए.
माँ- प्लीज ऐसी बाते मत करो मेरे बेटे के सामने.
आदमी- चुप साली नखरे बंद कर और मेरे पास आकर कपड़े निकालो मेरे.
माँ- ये क्या कह रहे हो?
आदमी- साली रंडी जो बोलता हूँ वो कर नहीं तो पता है न क्या करूँगा.
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माँ की आँखों में अब आँसू आने लगे, वो मेरी तरफ देखने लगी. लेकिन मै भी कुछ नहीं कर सकता था, अगर वो वीडियो वायरल होता तो हमारी इज़्ज़त चली जाती. माँ भी समझ चुकी थी अब कुछ नहीं हो सकता. वो रोते हुवे उस आदमी के पास गयी और उसके कपड़े निकालने लगी. पहले शर्ट उतारी फिर पैंट और फिर उसकी अंडरवियर भी उतारी. उसका लंड माँ को नंगा देख के पहले ही खड़ा था.
आदमी- चलो अब तीनों मिलकर नहाते है.
उसने मोबाइल पैंट की जेब में डाला और हमें लेकर वॉटरफॉल के नीचे गया. नहाते हुवे वो माँ के पीछे गया और पीछे से दोनों हाथ आगे लेके गया और माँ के बूब्स पकड़ लिये. माँ अचानक हुवे इस हमले से कांपने लगी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ- प्लीज ऐसा मत कीजिये.
आदमी- लास्ट वार्निंग देता हूँ अब फिर एक बार भी नखरे किये तो वीडियो वायरल कर दूंगा.
फिर वो माँ के बूब्स जोर जोर से दबाने लगा. माँ सर नीचे झुकाकर चुपचाप खड़ी थी. 10 मिनट बूब्स दबाने के बाद. वो आगे की तरफ आ गया और बूब्स चूसने लगा. माँ की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं था वो मूरत बनकर खड़ी थी. उसको माँ के बूब्स के साथ खेलता हुवा देख के मेरा भी लंड खड़ा हो गया. वो मेरी तरफ देखने लगा और बोला-
आदमी- साले तेरा भी मन कर रहा है क्या इसे चूसने का?
मैं- नहीं!
आदमी – तो फिर ये खड़ा किसको देख के हुवा है?
मैं कुछ जवाब नहीं दे पाया.
आदमी- मैं आज तक बहुत औरतों को चोद चूका हूँ लेकिन कभी माँ- बेटे को सेक्स करते नहीं देखा, लगता है आज मेरी ये ख्वाहिश भी पूरी होगी.
मैं- नहीं मै ऐसा कुछ नहीं करने वाला.
आदमी- अब तुम दोनों मेरे खिलौने हो मैं जैसा चाहूँ तुम लोगो को इस्तेमाल कर सकता हूँ.
माँ- प्लीज हमारे रिश्ते को कलंकित मत करो.
आदमी- ठीक है मै तुमको 2 चॉइस देता हूँ, एक तो तुम मुझसे चुदो या फिर अपने बेटे से. अब तुम चूस करो क्या तुम एक अजनबी के साथ चुदना पसंद करोगी, जो की बहुत रफ़ चुदाई करेगा या फिर अपने बेटे के साथ जो तुम्हारी मुलायम चूत की आराम से चुदाई करेगा.
माँ कुछ नहीं बोली सिर्फ सर नीचे करके खड़ी थी.
आदमी- क्या सोच रही हो? जल्दी बोलो मेरे पास टाइम नहीं है.
माँ- मै अपने बेटे के साथ कैसे कर सकती हूँ।
आदमी- तो फिर मेरे साथ करो!
माँ- मैंने आज तक अपने पति के अलावा और किसी से नहीं किया है प्लीज मुझे जाने दो.
आदमी- चुदाई तो तेरी आज होगी अब तुम डीसाइड करो किस्से करवानी है.
माँ- लेकिन मैं ये कैसे मान लूँ की बेटे के साथ करने के बाद तुम मुझे कुछ किये बिना जाने दोगे?
आदमी- मतलब तुम अपने बेटे के साथ करने को रेडी हो?
माँ- और कोई रास्ता छोड़ा है तुमने?
आदमी- ठीक है फिर शुरू करो।
माँ- लेकिन तुम पहले वादा करो इसके बाद हमें जाने दोगे और वो वीडियो भी डिलीट करोगे।
आदमी- ठीक है मैं वादा करता हूँ अगर तुम अपने बेटे से चुदती हो तो फिर मैं तुम्हारी चुदाई नहीं करूँगा.
आदमी- चलो अब इस शुभ काम की शुरुवात मुंह मीठा करके करते है…एक दूसरे को किस करो.
माँ मेरे पास आके मेरे गाल पे किस किया।
आदमी- आज ये तुम्हारा बेटा नहीं आशिक है और आशिक को लिप किस करते है इतना भी नहीं पता.
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माँ मुझे किस करने से शर्मा रही थी. लेकिन उस आदमी के डर से वो अपने होंठ मेरे होंठों के पास बढ़ाने लगी. जैसे जैसे माँ के लिप्स मेरे लिप्स के करीब आने लगे, वैसे वैसे मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी… माँ ने अपने लिप्स मेरे लिप्स पे रखे और धीरे धीरे चूसना शुरू किया. मैं भी माँ का साथ देते हुवे माँ के लिप्स चूसने लगा. करीब 10 मिनट हम दोनों एक दूसरे को किस किये जा रहे थे.. तभी उस आदमी ने हमे रोकते हुए कहा–
आदमी- लगता है दोनों को मजा आ रहा है, अब किसिंग ही करते रहोगे या आगे भी बढ़ोगे, चलो बेटा अपनी मम्मी के बूब्स चुसो.
मैं- मुझे शर्म आ रही है मैंने कभी किसी के बूब्स नहीं चूसे है।
आदमी- तो फिर बचपन में लंड चुसकर बड़ा हुवा है? साले इसी बूब्स को चुसकर बड़ा हुवा है और अब शर्म आ रही है.
मैं- लेकिन अब मैं बच्चा तो नहीं रहा न.
आदमी- हां तो अब एक मर्द की तरह चुसो चूसते हो या में चुसकर दिखाऊ?!
(ऐसा कहते हुवे वो माँ की तरफ आने लगा)। उसको आते देख मैने तुरंत अपना मुह माँ के बूब्स पे रखा और चूसने लगा. माँ के मुह से “आह” निकल गया.
आदमी- लगता है तुम्हारी माँ को अपने बेटे से बूब्स चुसवाना अच्छा लगा.
कुछ देर चूसने के बाद फिर उसने मुझे रोका और बोला।
आदमी- बेटे ने तो चूस लिया अब माँ चूसेगी बेटे का।
माँ- क्या मतलब है तुम्हारा?
आदमी- साली कभी लंड मुंह में नहीं लिया क्या?
माँ- मै क्या तुम्हें वैसी औरत लगती हूँ मैंने कभी नहीं लिया.
आदमी- लंड मुंह में लेने के लिए रंडी होना जरूरी नहीं, आजकल हर औरत अपने पति का चूसती है.
माँ- लेकिन मैं नहीं चूसती.
आदमी- तो बेटे का चूस ले, ये जवान भी है और फ्रेश भी है..
माँ- नहीं मुझे नहीं करना ये सब.
आदमी- अगर इसका नहीं लिया तो मेरा डालूंगा मुंह में.
माँ ये सुनकर डर गयी और नीचे बैठ गयी अब मेरा लंड माँ के मुंह के सामने था.. माँ ने अपना हाथ बढ़ाया और मेरा लंड पकड़ लिया…. माँ का हाथ जैसे ही मेरे लंड पे टच हुवा, मेरे शरीर में हलचल होने लगी. पहली बार किसी औरत ने मेरे लंड को पकड़ा था और वो भी मेरी माँ ने. थोड़ी देर आगे पीछे करने के बाद माँ ने मुंह खोला और मेरा लंड मुंह में ले लिया…
मेरे मुंह से सिसकारी निकल गयी. एक अजीब सा मजा आने लगा. ऐसा लग रहा था की जैसे मै जन्नत में पहुंच गया हूँ… माँ मेरा लंड मुंह में ले के चूसने लगी. ये मेरा पहली बार था इसलिए कुछ देर चूसने के बाद ही मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया, जो माँ के मुंह में ही निकल गया. माँ ने मेरा वीर्य थूक दिया… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आदमी- क्या हुवा बेटे का रस अच्छा नहीं लगा?
माँ चुप हो गयी… झड़ने के कारण मेरा लंड ढीला पड़ गया.
आदमी- लगता है इसका तो काम तमाम हो गया… (लंड की तरफ इशारा करते हुए) साले इसको जगाओ और भी बहुत कुछ करना बाकी है.
मैंने हाथ में लेके बहुत हिलाया लेकिन कुछ फायदा नहीं हुवा, लंड खड़ा ही नहीं हुवा..
आदमी- एक काम करो अपनी माँ को रिटर्न गिफ्ट दे दो शायद इससे ये फिर खड़ा हो जायेगा.
मैं- रिटर्न गिफ्ट मतलब?
आदमी- साले तेरा तो हो गया अब माँ को मजे लेने दो उसकी चूत चाटो…
माँ- प्लीज मेरे बेटे से ऐसा गन्दा काम मत करवाओ..
आदमी- गन्दा काम? कभी किया नहीं इसलिए ऐसा बोल रही हो एक बार चूत पे मुंह लग गया तो जन्नत की सैर करोगी…
उसने मुझे इशारा किया और बोला-
आदमी- चल अब जल्दी से अपनी माँ को जन्नत की सैर कराओ…
मैं माँ के पास गया-
माँ- नहीं बेटे ये मत करो!!
मैं- माँ मुझे भी ये सब नहीं करना है पर अब और कोई रास्ता नहीं है.
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फिर मैंने माँ को एक पत्थर पे बैठने को बोला और नीचे मुंह ले गया. मैंने अपना मुंह माँ की चूत पे रखा और चाटने लगा. कुछ देर चाटने के बाद अब माँ को भी शायद मजा आने लगा. वो दोनों हाथो से मेरे सर को पकड़के चूत पे दबाने लगी… कुछ देर चूत चाटने के बाद माँ भी झड़ गयी और जोर जोर से सिसकियाँ लेते हुवे मेरे सर से हाथ हटा लिया.
आदमी- चाटना- चूसना बहुत हुवा अब चुदाई शुरू करो. अपने लंड को उसकी असली जगह दिखाओ…
मैं फिर से लंड हाथ में लेके हिलाने लगा पर इस बार भी कुछ नहीं हुवा.
आदमी- लगता है माँ को चोदना तेरे नसीब में नहीं है… मुझे ही ये काम करना पड़ेगा.
माँ- लेकिन तुमने तो वादा किया था की तुम नहीं करोगे…
आदमी- मैंने ये वादा किया था की अगर तेरा बेटा तुझे चोदता है तो मै नहीं चोदूँगा. लेकिन तेरा बेटा तुमको चोद नहीं पाया इसमें मेरी क्या गलती.
माँ- प्लीज उसको थोड़ा टाइम दो उसने ये सब किया नहीं, ये पहली बार है उसका.
आदमी – ठीक है 15 मिनट का टाइम देता हूँ अगर तेरा बेटा का 15 मिनट में खड़ा नहीं हुवा तो फिर मै चोदूँगा तुमको..
माँ को समझ नहीं आ रहा था की क्या करे और वह बहुत डरी हुई थी. क्युकी माँ उस आदमी से सेक्स नहीं करना चाहती थी, लेकिन उस आदमी से छुटकारा पाने का सिर्फ 1 ही उपाय, की कैसे भी करके मेरा खड़ा करें. माँ अब मेरे पास आ गयी और मेरे लंड को हाथ में लेके हिलाने लगी.
मैं भी माँ को बचाने के लिए खड़ा करने की कोशिश कर रहा था, पर मेरा खड़ा होने का नाम ही नहीं ले रहा था. 10 मिनट निकल गए फिर भी मेरा खड़ा नहीं हुआ. माँ अब हार मान चुकी थी. वो दुःख भरी आँखों से मेरी तरफ देख के बोली-
माँ- बेटा मैने आज तक तुम्हारे पापा के सिवाय किसी और से नहीं किया.. आज सिर्फ तू ही अपनी माँ की इज्जत बचा सकता है, मै ये तो नहीं चाहती की तू मेरे साथ सेक्स करे पर इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है, बेटा कैसे भी करके इसे खड़ा करो और मेरी… (इतना कह कर माँ चुप हो गयी.)।
माँ की बातें सुनकर मेरे लंड में थोड़ी सी हलचल हुई जो माँ ने महसूस किया. माँ अब समझ चुकी थी की मेरा लंड हाथों से नहीं बातों से खड़ा हो सकता है. फिर उसने आंसू पोछे और बोली-
माँ- बेटा जल्दी से अपना लंड खड़ा कर और डाल दे अपनी माँ की चूत में. देख तेरी माँ की ये चूत तेरा लंड लेने के लिए तड़प रही है. अगर आज इस चूत को नहीं चोद सका तो कभी नहीं चोद पायेगा. और अगर आज चोद लिया तो ये चूत तेरी हो जाएगी. अगले 5 दिन तुम्हारे पापा नहीं होंगे घर पर. ये 5 दिन हम रोज चुदाई करेंगे. आज ये मत सोचो की तुम्हारी माँ है तुम्हारे सामने. ये सोचो की एक नंगी रंडी है तुम्हारे सामने जो अपनी चूत चुदवाना चाहती है…
माँ के मुंह से ऐसे शब्द सुनकर मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा. माँ का ये नया रूप देख के वो आदमी भी दंग रह गया. अब मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. मैंने बिना देरी किये माँ को नीचे लेटा दिया। माँ ने अपने पैर फैलाये. अब माँ की चूत बिलकुल मेरे सामने थी.
मैं माँ के ऊपर लेट गया और लंड माँ की चूत पे रख के रगड़ने लगा. माँ की चूत भी गीली थी इसलिए मेरा लंड आसानी से माँ की चूत में चला गया. मैं अपने दोनों हाथो से माँ के बूब्स दबाने लगा और कमर ऊपर नीचे करके माँ की चुदाई करने लगा. माँ भी गरम हो चुकी थी वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
माँ- आह आह यस… बेटा चोद आज अपनी माँ को.. आज ये चूत तेरी है…जोर से चोद…. आह और जोर से…पूरा लंड डाल दो अंदर….. आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है.
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मैं- माँ मुझे भी बहुत मजा आ रहा है.. माँ आज के बाद मै रोज चोदूँगा तुझे.. चोदने दोगी ना मुझे अपनी ये मुलायम चूत..?
माँ- बेटा अब ये चूत भी तेरी और मैं भी. तुम मुझे जब मन करे चोदना आह… हम्म्म्म… सससस.. आह्हः बहुत मजा आ रहा है…
हमारी बातें सुनकर उस आदमी को भी कुछ होने लगा. वो नंगा होकर हमारे पास आ गया और बोला—
आदमी- वाह यहाँ तो पार्टी हो रही है… तुम दोनों मजा कर रहे हो और मै तुमको खड़ा होके देखु ये तो नाइंसाफ़ी है!
माँ- लेकिन तुमने तो वादा किया था..?
आदमी- चोदूँगा नहीं ये वादा किया था बाकी सब तो कर सकता हूँ ना.
माँ- नहीं ये गलत है..!
आदमी- साली रंडी अपने सगे बेटे से मजे से चुदवा रही है और मुझे ज्ञान दे रही है!
इतना कह के वो माँ के पास आ गया और बोला—
आदमी- चल अब घोड़ी बन जा अपने बेटे का पीछे से चूत में ले और मेरा मुंह में.
माँ ने इस बार कुछ नहीं कहा और घोड़ी बन गयी. मै माँ के पीछे गया और पीछे से माँ की चूत में लंड डाला और चुदाई करने लगा. वो आदमी अपना लंड माँ के मुंह के करीब ले गया माँ ने मुंह में लेने से मना किया.
आदमी- रंडी जल्दी से मुंह खोल साली अपने बेटे का तो लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी. अब जल्दी मुंह में लो नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा!!
माँ अब डर गयी और बिना कुछ कहे उसका लंड मुंह में लेके चूसने लगी. अब मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ायी और 5 मिनट जोर जोर से चोदने के बाद माँ की चूत में ही झड़ गया. कुछ देर बाद वो आदमी भी माँ के मुंह में झड़ गया. फिर हम तीनो नंगे ही वॉटरफॉल के नीचे गए और नहाने लगे.
कुछ देर नहाने के बाद उस आदमी ने माँ को एक पत्थर पे बैठने को कहा. फिर उस आदमी ने माँ के पैर फैलाये और चूत पे अपना मुंह ले गया और अपनी जीभ माँ की चूत में डालकर चाटने लगा. चूत चाटने से माँ फिर से गरम हो गयी.. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ- आअह्ह्ह….मजा आ रहा है और अंदर डालो जीभ…
आदमी- क्या मस्त चूत है तेरी.. अगर मैं तेरा पति होता तो रोज इसे चाट के रस पीता…
कुछ देर चूत चाटने के बाद वो आदमी खड़ा हो गया.
माँ- क्या हुवा तुम रुक क्यों गए?
आदमी- तुम्हारी चाटने से मेरा फिर से खड़ा हो गया है. अगर और चाटा तो मै अपना वादा तोड़ के कही तुम्हारी चुदाई न कर बैठु इसलिए और नहीं चाटा.
माँ मेरी तरफ नशीली नजरों से देखने लगी लेकिन मेरा लंड ढीला पड़ चुका था जो 2 बार झड़ने से फिर शायद ही खड़ा हो.
माँ- बेटा क्या हम फिर से कर सकते है… मुझे तुम्हारी जरुरत है.
मैं- माँ अब मुझे नहीं लगता मैं फिर से कर पाउँगा..
माँ निराश हो गयी.
आदमी- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी गर्मी ठंडी कर सकता हूँ…
माँ- (अपने आप को कण्ट्रोल करते हुवे) मुझे नहीं करना.
आदमी- ठीक है चूत में न सही कम से कम इससे मुंह में तो ले लो एक बार. इसके बदले में तुम्हारी चूत चाटकर पानी निकालूँगा.
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माँ बहुत गरम थी इसलिए बिना देर किये उसके पास गयी और लंड मुंह में लेके चूसने लगी. फिर उस आदमी ने माँ को नीचे लेटने को कहा और वो माँ के ऊपर 69 की पोजीशन मे लेट गया. वो माँ की चूत चाटने लगा और माँ उसका लंड. कुछ देर बाद वो दोनों एक दूसरे के मुंह में झड़ गए. माँ ने उसका वीर्य थूक दिया लेकिन वो माँ का जूस बड़े स्वाद के साथ चाट रहा था. फिर उस आदमी ने हमे वॉटरफॉल में नहाने को कहा और बोला—
आदमी- तुम दोनों एन्जॉय करो मैं तुम्हारा बैग लेके आता हूँ. तुम्हारा पीछा करते वक़्त वो बैग मैंने झड़ियों मे फेंक दिया था.
फिर मैं और माँ वॉटरफॉल के नीचे गए माँ मेरे पास आ गयी और मेरा सर पकड़कर अपने लिप्स मेरे लिप्स पे रख के किस करने लगी. मैं भी माँ की गांड पे हाथ फेरते हुवे वॉटरफॉल के ठन्डे पानी के नीचे माँ के लिप्स चूसने लगा. हम किसिंग करने में इतने खो गए की हमे पता नहीं चला वो आदमी कब वहाँ आ गया.
आदमी- तुम लोग फिर से शुरू हो गए.. कोई बात नहीं तुम एन्जॉय करो मैं चलता हूँ ये रहा तुम्हारा बैग.
उसने बैग पत्थर पे रखा और वो चला गया. कुछ देर नहाने के बाद हम भी बहार आ गए और कपड़े पहन लिए.
माँ– अब हमें घर जाना चाहिए.
मैं- ठीक है माँ.. लेकिन माँ घर जाने के बाद तुम्हे ये कपड़े निकालने होंगे.
माँ- क्यों?
मैं- क्युकी तुमने वादा किया था की पापा आने तक मै तुम्हें रोज कर सकता हूँ.
माँ- ठीक है बाबा अगले 5 दिन हम बिना कपड़े के ही रहेंगे. तुम जब चाहे मुझे चोद लेना, अब तो खुश..?
फिर हम अपने घर की ओर चल पड़े, जिंदगी का असली मजा लेने.
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