Maa Gand Chudai
घर में मेरे अलावा मम्मी, पापा और एक बड़ी बहन हैं। पापा टूरिंग जॉब होने से बाहर ज्यादा रहते हैं और बड़ी सिस, जो मुझसे दो साल बड़ी है, एमसीए के बाद पुणे में ट्रेनिंग जॉब में है। घर में मम्मी और मैं, हम दो प्राणी ही हैं। मम्मी, जिनकी उम्र अब 38-40 होगी, एक भरे-पूरे बदन की महिला हैं और वैसे ही मेरी बहन भी, जो अभी 20 साल की है। Maa Gand Chudai
वह दोनों बहनें लगती हैं। हमारे घर का माहौल बड़ा खुला हुआ है। मम्मी और मेरी बहन बड़े और खुले गले के कपड़े ज्यादा तर पहनती हैं, जिनमें से उन दोनों के शरीर के गदराए मांसल हिस्सों को देख मैं कई बार बाथरूम में उन दोनों को विचारों में लेकर मुठ मार चुका हूँ।
यह बात पिछले महीने की है। पापा एज यूजुअल टूर पर थे और अगले 15 दिनों तक उनका आने का कोई प्रोग्राम नहीं था। सिस भी जॉब ट्रेनिंग पर पुणे में थी। गर्मी के दिन थे कि अचानक मम्मी को पाइल्स की बीमारी की शुरुआत हो गई। ऐसा उन्हें पहले भी एक-दो बार हुआ था, लेकिन इस बार उन्हें समस्या कुछ ज्यादा ही हो गई।
तब उन्होंने मुझसे इस बीमारी का जिक्र किया। मेरे लिए यह सब कुछ नया था। पूछने पर पता चला कि इस बीमारी में पेशेंट को लैट्रिन के साथ ब्लड जाता है और इससे बहुत कमजोरी आ जाती है। मम्मी पहले तो एक-दो दिन वैसे ही देसी इलाज करती रहीं लेकिन जब समस्या ज्यादा हुई तो हम हमारे फैमिली डॉक्टर के पास गए।
उन्होंने हमें बताया कि इसका सिर्फ एक ही इलाज है और वह है ऑपरेशन। इसका नाम सुनते ही मैं घबरा गया, लेकिन उन्होंने मेरी हिम्मत बँधाते हुए बताया कि उनका एक बहुत बढ़िया डॉक्टर फ्रेंड है जो गवर्नमेंट रिटायर्ड सर्जन हैं और सिर्फ ऐसी बीमारी के स्पेशलिस्ट हैं। “तुम उनके क्लिनिक चले जाओ और मेरी बात करवा कर तुरंत ही ऑपरेट करवा लो। वे दूसरों की तरह एडमिट भी नहीं रखेंगे और कुछ दिनों के आराम के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा।”
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हम वहाँ से सीधे उन डॉक्टर के पास गए और उन्होंने हमारे डॉक्टर से फोन पर बात करके मम्मी को एग्जामिन किया। वे एक उम्रदराज डॉक्टर थे। उनके साथ उनका एक हेल्पर था और उन्होंने वहीं पर एक छोटा सा ऑपरेशन थिएटर बना रखा था। उनका अनुभव इतना था और उन्होंने हमें इतने विश्वास के साथ डिटेल में इस डिजीज के बारे में बताया कि हम उनसे तत्काल ही ऑपरेट करवाने के लिए तैयार हो गए।
उन्होंने मम्मी को ओटी में ले जाकर लिटा दिया। अचानक वे बाहर आए और मुझसे बोले कि अंदर आओ। जब मैं ओटी के अंदर गया तो वे बोले कि हमारे यहाँ कोई लेडीज नर्स या लेडी डॉक्टर नहीं है, इसलिए हम लेडीज पेशेंट के फैमिली मेंबर्स को भी ओटी के अंदर बुलवा लेते हैं, ताकि बाद में किसी को कोई समस्या न हो। और तुम तो उनके बेटे हो तो तुम्हें यहाँ अंदर ही खड़े रहना पड़ेगा।
उन्होंने मम्मी की साड़ी कुल्हों के ऊपर तक उठा दी। इस समय मम्मी होश में थी, इसलिए उन्हें मालूम था कि मैं भी अंदर ओटी में मौजूद हूँ। मम्मी की पैंटी उनके असिस्टेंट ने घुटनों तक उतार दी और डॉक्टर साहब ने मम्मी को एक करवट से लिटाकर उनके दोनों घुटने पेट से सटा दिए, जिस वजह से मम्मी का गुदा द्वार उभरकर सामने की ओर आ गया।
तब डॉक्टर साहब मुझसे बोले, “देखो बेटा, तुम्हारी मम्मी को क्या समस्या है।”
मम्मी के गुदा द्वार पर अंदर की ओर से अंगूर की तरह दो पाइल्स के ब्लड से भरे मस्से लटक रहे थे। उन्होंने मम्मी के कुल्हों को और ऊपर उठाकर मुझे पास से यह सब समझाया और फिर उन्होंने मम्मी को लोकल एनेस्थीसिया देकर थोड़ी देर के लिए बेहोश कर दिया और मम्मी के गुदा द्वार को भी सुन्न कर दिया।
उनके असिस्टेंट ने मम्मी के गुदा द्वार और योनि के आस-पास के हल्के भूरे मुलायम बालों को एक इलेक्ट्रिक शेवर से साफ किया। इस दौरान मुझे मम्मी की योनि के दर्शन हो गए। मम्मी भी यह जानती थी कि मैं उन्हें इस हालत में देख रहा हूँ। तब डॉक्टर साहब ने मम्मी से कहा कि 1 से 10 तक गिनती बोलो।
मम्मी 1 से 5 तक बोलते हुए बेहोश हो गई। और डॉक्टर साहब ने मुझे बोला कि घबराने की कोई जरूरत नहीं, यह सब तो हमारे लिए आम बात है। तुम दस मिनट पीछे कुर्सी पर बैठो। लगभग दस मिनट के बाद वे बोले, “आओ बेटा।” मैंने जाकर देखा तो पाया कि उन्होंने मम्मी के गुदा द्वार से बाहर निकल रहे दोनों मस्सों को काटकर एक ड्रेसिंग प्लेट में रखा हुआ था.
और मम्मी का गुदा द्वार तो ऐसा दिखाई पड़ रहा था मानो ऐसे कभी कुछ हुआ ही नहीं। इसके बाद उन्होंने हैंड ग्लव्स पहनकर उँगली पर क्रीम लगाकर मम्मी के गुदा द्वार में अंदर तक क्रीम लगा दी, जो कि एक आम इंसान सोच भी नहीं सकता। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उन्होंने मेरे सामने ही मम्मी की योनि में भी उँगली से दवा लगाई और मुझे बोला कि घर जाकर अगले 18 दिनों तक दिन में तीन बार इस तरह से क्रीम लगाना और आराम करवाना। जब मैंने उनसे पूछा कि यह क्रीम दोनों जगह क्यों, तो वे बोले, “बेटा ऐसा है कि अंदर से यह दोनों अंग आपस में कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं और किसी एक का इंफेक्शन दूसरे नाजुक अंग को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए हर बार दोनों जगह में क्रीम लगाना।”
शाम तक उन्होंने मम्मी की छुट्टी कर दी और वे यह बात जानते थे कि घर में मम्मी और मेरे अलावा और दूसरा कोई नहीं है। वे मम्मी से भी बोले कि तुम चाहो तो किसी हॉस्पिटल में एडमिट हो जाओ लेकिन वहाँ पैसे बिगाड़ने के सिवा कुछ नहीं होगा और तुम्हारा बेटा भी बड़ा होशियार है। मैंने इसे सब समझा दिया है कि कैसे क्रीम लगाना।
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उन्होंने कुछ मेडिसिन भी दी और कहा कि यदि रात में दर्द के कारण नींद न आए तो ही लेना, क्योंकि इससे बहुत गहरी नींद आएगी। इसके साथ उन्होंने मुझे दो-तीन हैंड ग्लव्स भी दिए और कहा कि तुम इन्हें हाथों में पहनकर अपनी मम्मी की सेवा करना, क्योंकि बीमार आदमी की सेवा ही सच्ची सेवा है।
तुम चाहे कमा कर कितना ही धन-दौलत इकट्ठा कर लो लेकिन बीमार आदमी के पास बैठकर उससे दो शब्द बोलने वाला कोई अपना न हो तो हजारों रुपए की दवा और जमाने के डॉक्टर भी उसकी बीमारी को ठीक नहीं कर सकते। एक दवा लिखते हुए उन्होंने कहा कि जब ज्यादा कमजोरी हो तभी इसका इस्तेमाल करना क्योंकि इसमें स्टेरॉयड्स हैं जिससे हार्मोन्स बढ़ते हैं।
जब मैं इस दवा को लेने के लिए मेरे परिचित ड्रग स्टोर पर गया तो उन्होंने बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के इसे देने से मना किया और मेरे पूछने पर बताया कि इसमें स्टेरॉयड्स होने से यह काम वासना बढ़ाती है, इसलिए यह उम्रदराज और बच्चों को नहीं दी जाती। कुछ लोग इसका सेक्स पावर बढ़ाने के लिए गलत इस्तेमाल करते हैं।
खैर, घर आकर मम्मी को दर्द तो बहुत हुआ लेकिन पेन किलर खाने से आराम भी मिला। रात में पापा और सिस दोनों को मम्मी के बारे में बताया तो वे दोनों बहुत टेंशन में आ गए, लेकिन मम्मी ने उन्हें बताया कि चिंता न करें, मामूली सा ऑपरेशन था और फिर मैं तो यहाँ हूँ ही। यदि कोई समस्या हुई तो उन्हें तुरंत बुलवा लेंगे। पापा को तो अभी आने में और ज्यादा समय था।
यह अच्छी बात थी कि मेरी छुट्टियाँ होने से मुझे भी कहीं बाहर नहीं जाना था। अगले दिन सुबह मम्मी जब टॉयलेट से बाहर आईं तो उनकी हालत बहुत खराब दिखी। मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि ब्लड तो नहीं गया लेकिन दर्द के कारण जान निकल गई। मम्मी का हाथ पकड़कर मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया।
मम्मी ने मुझसे कहा कि क्या किसी आस-पास के हॉस्पिटल से बात करके किसी नर्स को दिन में दो-तीन बार नहीं बुलवा सकते। तो मैंने तुरंत ही आस-पास के सभी अच्छे हॉस्पिटल में ट्राई किया लेकिन हमारा घर कॉलोनी में अंदर और दूर होने से कोई भी आने को राजी नहीं था।
तब मैंने मम्मी से कहा कि अपनी कम वाली से बोलते हैं तो मम्मी बोलीं कि वह तो पहले से ही सात दिनों की छुट्टी पर है। तो मैं बोला कि अब तो केवल हॉस्पिटल में एडमिट करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा। लेकिन मम्मी केवल क्रीम लगवाने के लिए हॉस्पिटल में एडमिट नहीं होना चाहती थीं, इसलिए बोलीं, “बेटा यदि तुम्हें कोई परेशानी न हो तो तुम ही दवा लगा देना।”
तो मैं बोला, “मम्मी मुझे कोई समस्या नहीं, वैसे भी डॉक्टर साहब ने मुझे दवा लगाना सिखा ही दिया है।”
तो वो बोलीं, “ठीक है, फिर मुझे भी कोई समस्या नहीं।”
मैं बोला, “मुझे तो आपकी सेवा का ऐसा अच्छा मौका नहीं मिलेगा।”
कुछ देर बाद मैंने मम्मी से कहा कि यदि आप तैयार हो तो मैं आपको दवा लगा देता हूँ।
मम्मी बोलीं, “ठीक है।” और वे पेट के बल लेट गईं।
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मैंने मम्मी की साड़ी उनके कुल्हों के ऊपर करके उनकी पैंटी घुटनों तक कर दी और अपने हाथों में ग्लव्स चढ़ाकर डॉक्टर की दी हुई क्रीम उँगलियों पर लगाकर मम्मी के गुदा द्वार पर लगाना चाहा। ओटी में तो डॉक्टर की मौजूदगी और माहौल तनावपूर्ण होने के कारण मेरे मन में कोई भी विचार नहीं आ रहा था, लेकिन आज घर में अकेले माहौल में मम्मी को इस हालत में देख मेरा लंड जोर मारने लगा।
मैंने मम्मी को एक और करवट से लिटाते हुए उनके गुदा द्वार में धीरे से उँगली घुसाना चाही तो वे चीख पड़ीं, लेकिन मैंने भी हिम्मत करके जल्दी-जल्दी से दो-तीन बार अपनी उँगली अंदर-बाहर कर दी। मैं मम्मी की योनि में भी दवा लगाना चाहता था लेकिन संकोच के कारण कर नहीं पाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोपहर में मम्मी को दर्द काफी बढ़ गया। जहाँ-जहाँ डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाए थे वह सब जगह कड़क हो गई थी और मम्मी को योनि में भी दर्द महसूस हो रहा था। तब हमने डॉक्टर को फोन लगाया तो वे मम्मी से बोले कि चिंता की कोई बात नहीं, बर्फ (आइस) से सिकाई करो और मेरे बताए अनुसार योनि में भी दवा लगवाओ। डॉक्टर ने मुझे भी बताया कि क्या और कैसे करना है।
शाम को दवा लगवाने के समय तक तो मम्मी के कुल्हों पर इंफेक्शन के कारण हल्की सी दानेदार फुंसियाँ आ गईं और मम्मी के जाँघों के जोड़ में भी दर्द बढ़ गया, जिस कारण उन्हें कपड़ों का स्पर्श भी तकलीफ दे रहा था। तब मैंने मम्मी से कहा कि मैं अभी वापस दवा लगा देता हूँ।
तब मैंने मम्मी के कुल्हों की बहुत देर तक बर्फ से सिकाई की जिससे उन्हें कुछ आराम मिला। इसके बाद मैंने उनकी गुदा में भी क्रीम लगा दी, लेकिन मैंने इस बार भी शर्म के कारण मम्मी की चिकनी सफेद मुलायम चूत में क्रीम नहीं लगाया। तब मम्मी ने धीरे से अपनी चूत को चौड़ी कर दी और मैंने अपनी एक उँगली में क्रीम लेकर मम्मी की चूत में अंदर घुसा दी।
यह मेरे जीवन का पहला मौका था जब मैं किसी लेडीज की चूत को छू रहा था। मम्मी कुछ देर तक तो दर्द के मारे यूँ ही अपनी टाँगें चौड़ी किए आँख मिचे पड़ी रहीं और मैं अपनी फटी-फटी आँखों से उनकी खूबसूरती निहारता रहा। फिर रात में जब उनके कुल्हों का इंफेक्शन बढ़ा तो मैंने उन्हें कहा कि आप कुल्हों के नीचे कुछ न पहनें, तो वे इसके लिए तैयार हो गईं क्योंकि अब उनसे मुझसे कुछ छुपा तो नहीं था।
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रात में मैंने उन्हें नींद की गोली दे दी, बर्फ से अच्छी सिकाई कर दी। अब वे केवल ब्रा और ब्लाउज पहने हुए थीं, कमर के नीचे उन्होंने कुछ नहीं पहना था। उन्हें शर्म तो बहुत आ रही थी लेकिन मेरी निस्वार्थ सेवा भावना के आगे उन्हें कोई संकोच नहीं था। कुछ देर में वह ऐसी सोई कि उन्हें कुछ होश ही नहीं था। मैं लगातार उन्हें देखता रहा।
अगले दिन सुबह मम्मी को दर्द में आराम तो था लेकिन कुल्हों के इंफेक्शन की वजह से वह कपड़े नहीं पहन पा रही थीं। अगले दिन भी मैंने दिन में दो बार मम्मी की गुदा और चूत में उँगली घुसा-घुसाकर क्रीम लगाई। इस तरह अर्ध-नग्न हालत में होने के कारण वो मुझसे आँखें मिलाने में भी शर्मा रही थीं।
मैंने एक बार गौर किया कि उन्होंने सिस और पापा के फोन आने पर एक बार भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि उनकी गुदा और चूत में मैं अपनी उँगलियों से क्रीम लगा रहा हूँ, या फिर कि वह घर में कपड़े नहीं पहन पा रही हैं। शाम को डॉक्टर बोले कि यदि कमजोरी लगे तो वह स्टेरॉयड्स की दवा दे देना, लेकिन साथ में नींद की भी देना।
रात में मैंने घर के बाहर दरवाजे पर लॉक लगा दिया ताकि कोई फालतू परेशान न करे और मैंने मम्मी के दूध में वह स्टेरॉयड्स की दवा मिलाकर दे दी और नींद की भी। कुछ ही देर में वह नींद के आगोश में चली गईं। तब मैंने हिम्मत करके उनकी चूत को सहलाया।
थोड़ी देर में मैंने गौर किया कि मैं जब भी उनकी चूत को सहलाता हूँ वे नींद में अजीब सी कसमसाहट वाली आवाज करती हैं और उनके चेहरे पर एक कामुकता भरी हँसी की लकीर उभर जाती है। तब मैंने हिम्मत कर अपनी दो उँगलियाँ उनकी चूत में आहिस्ता से घुसा दीं।
तब मुझे चूत की गरमाहट का अहसास हुआ, क्योंकि अभी तक तो मैं हैंडग्लव्स पहनकर क्रीम लगाता था, लेकिन इस बार मुझे सीधे चूत की गरमाहट का अनुभव हुआ। मम्मी की चूत मक्खन की तरह मुलायम थी। मैंने कई बार उसे चूमा। चाटने की इच्छा तो बहुत थी लेकिन चूत में से क्रीम की महक आने के कारण मैं यह कर नहीं पा रहा था।
तब मैंने हिम्मत करके मम्मी के ब्लाउज के हुक भी खोल डाले और उनके मांसल उभारों को मुँह में लेकर खूब चूसा। मैंने महसूस किया कि मम्मी के निप्पल्स पहले की तुलना में काफी कड़क और बड़े हो गए थे। मैंने वहीं पर अपना बर्मुडा उतारा और मम्मी के नंगे बदन पर ही उन्हें विचारों में लाते हुए मुठ मारी तो मेरा सफेद वीर्य मम्मी की सफेद चिकनी केले के तने के समान जाँघों पर गिरा, जिसे मैंने बाद में साफ किया।
अगले दिन मम्मी पहले की तुलना में काफी आराम महसूस कर रही थीं और अब वे कपड़े पहनना चाहती थीं। जब वो नहाकर वापस आईं तो मैंने उन्हें झूठ कहा कि अभी डॉक्टर साहब का फोन आया था और वे आपके हाल-चाल पूछ रहे थे। उन्होंने कहा है कि अभी एक-दो दिन और कपड़े मत पहनो नहीं तो इंफेक्शन शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी फैल जाएगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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तो मम्मी हँसकर बोलीं, “ठीक है चलो वो कहते हैं तो यही सही।” दोपहर में मम्मी पूरे घर में केवल ब्लाउज पहने घूम रही थीं। उनकी गदराई मटकते कुल्हों को देख मेरा लंड तना हुआ था, जिसे मैं अपने टी-शर्ट से छुपाने की कोशिश कर रहा था। दोपहर में मैंने उन्हें ऑरेंज जूस के साथ वही स्टेरॉयड्स वाली दवा दे दी.
और फिर मैं और मम्मी दोनों लेटे-लेटे टीवी पर एनीमल मूवी देखने लगे जिसमें तृप्ति डिमरी और रणवीर कपूर के कुछ रोमांटिक सीनों को देखते हुए मम्मी अपनी चूत को अपने हाथ से सहला रही थीं लेकिन वह अपनी इस हरकत को मुझसे छुपाना चाहती थीं, जो कि वास्तव में उस दवा का असर था जिस कारण मम्मी की कामुकता बढ़ रही थी। फिल्म खत्म होने पर मैंने मम्मी को दवा लगाने की तैयारी की तो पाया कि हैंड ग्लव्स फट चुके हैं।
तो मम्मी बोलीं, “चल अब तो आराम है, ऐसे ही उँगली से लगा दे।”
मैंने अपनी उँगली में दवा ली और मम्मी से कहा कि आप खड़े-खड़े ही झुक जाएँ। मम्मी वही सोफे के ऊपर कमर झुकाकर पैर फैलाकर झुक गईं, जिस कारण उनकी चूत मुझे खुला आमंत्रण दे रही थी। मैंने अपनी एक उँगली में क्रीम लगाया और मम्मी की गुदा में घुसाकर अच्छी तरह से क्रीम लगा दी और अपनी दो उँगलियों पर क्रीम लगाकर मम्मी की चूत में घुसा दी। इस बार मैं पहले की तुलना में काफी अंदर तक उँगली घुसा रहा था।
मम्मी के मुँह से मदकता भरी सिसकारी सुनते ही मेरा लंड टाइट हो गया। मैंने करीब 10-15 बार मम्मी की चूत में उँगली अंदर-बाहर की लेकिन मम्मी ने मुझे मना नहीं किया और न ही खुद सीधी हुईं। रात में मम्मी को जब मैं क्रीम लगाने गया तो देखा कि उनके ब्लाउज के ऊपर के दो-तीन हुक खुले हुए थे.
और उन्होंने ब्रा भी नहीं पहनी थी, जिस कारण उनके रूबिया के ट्रांसपेरेंट ब्लाउज में से उनकी काली-काली निप्पल्स साफ दिखाई पड़ रही थीं। उनकी गुदा में क्रीम लगाने के बाद मैंने जब उनकी चूत में क्रीम लगाना चाहा तो देखा कि क्रीम खत्म हो गई है, लेकिन मैंने उन्हें नहीं बताया कि क्रीम खत्म हो गई है।
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तब मम्मी ने बड़ी स्टाइल से करवट बदली और अपनी पीठ के बल लेट गईं और उन्होंने अपनी चूत को मेरी ओर करके दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया, जिससे उनकी चिकनी चूत उभरकर सामने की ओर आ गई। मैंने अपनी दो उँगलियों पर थूक लगाकर उनकी मांसल चूत में घुसा दी।
एक बार तो वह हल्के से हिली लेकिन बाद में मैंने दोपहर की ही तरह अपनी उँगली अंदर-बाहर करनी शुरू की तो उन्होंने अपनी दोनों आँखें मिच लीं और जोर-जोर से कराहने लगीं। उन्हें उत्तेजित होता देख मैंने भी अपनी उँगलियों की रफ्तार तेज कर दी। अब तो उनकी चूत मानो भट्ठी की तरह तपने लगी और उसमें इतनी ज्यादा चिकनाई पैदा हो गई कि मेरी उँगलियाँ उनके चूत के रस से सराबोर हो गईं।
वह अपने सारे दर्द को भूलकर चूत की खुजली मिटवाने का मजा लूटने लगीं। मैं ऐसा करीब दस मिनट तक करता रहा तब जाकर वह शांत हुईं। मेरा हाथ पूरी तरह से उनके चूत के रस में भीग चुका था, लेकिन वह तो ठंडी होकर बिस्तर पर पड़ी तो फिर उठी ही नहीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अगले दिन रविवार था। मैंने सुबह के दूध में ही मम्मी को वह स्टेरॉयड्स की टैबलेट मिलाकर दे दी, जिस कारण वह उत्तेजना महसूस करने लगी थीं और वे बार-बार अपनी चूत को सहला रही थीं। जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया तो मम्मी ने मुझे आवाज लगाई।
मैं जान-बूझकर उनके सामने अपने v-शेप अंडरवियर में आया, जिसमें से मेरा उत्तेजित लंड साफ दिखाई पड़ रहा था। मम्मी बेड पर अपनी टाँगों को चौड़ा कर अपनी चूत को रगड़ रही थीं और बोलीं कि मेरी योनि में बहुत जोर की खुजली मच रही है, क्या तू मुझे क्रीम लगा देगा।
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तो मैंने मम्मी की चूत में अपनी दो उँगलियाँ थूक लगाकर घुसाईं और बोला कि क्रीम तो खत्म हो गई है, आप चाहो तो मैं वैसे ही आपको आराम पहुँचा देता हूँ। मेरे जोर-जोर से उँगली अंदर-बाहर करने से मम्मी की उत्तेजना और बढ़ गई और वह उछाले मारने लगीं। मैं उनकी चूत से बहते रस को अपने मुँह से चाटने लगा जिससे वो और गरम हो गईं और उन्होंने अपना ब्लाउज खोल दिया। उनके मोटे ताजे पपीते के समान स्तनों को देख मैंने उन्हें मुँह में भर लिया, लेकिन कुछ ही पलों में उन्होंने मेरा अंडरवियर निकाल फेंका.
और मुझे भी अपनी तरह मादरजात नंगा कर मेरा सात इंच का लंड को मुँह में चूसने लगीं। अब मैंने भी बिना देर किए अपने लंड को अपनी माँ की चिकनी चूत में पेल दिया। मम्मी जोर-जोर से चीखती-चिल्लाती रहीं और चुदाई के मजे लूटती रहीं। करीब बीस मिनट बाद हम दोनों एक साथ खाली हुए। इसके बाद से अब हम दोनों माँ-बेटे लगातार पति-पत्नी के सुख को लूटते रहते हैं। सिस या पापा के सामने हम बिल्कुल अलग व्यवहार करते हैं और बाकी समय अपने मजे लूटते हैं।
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