Free Hindi Sexy Sahitya
चंदर सुधा के गोरे जाँघों को देखकर पागल हो जाता है। चंदर फिर जाकर बरामदे में बैठकर सुधा को निहारने लगता है। कुछ देर बाद सुधा उठकर नहाने बाथरूम चली जाती है। चंदर सुधा को नहाते वक्त देखने के लिए घर के पीछे बाथरूम के रोशनदान से झाँकने लगता है। Free Hindi Sexy Sahitya
सुधा अंदर नंगी नहा रही थी पर चंदर को सुधा की नंगी गांड ही दिखाई देती है। क्योंकि सुधा का पीठ चंदर की ओर था जिस कारण चंदर को सुधा की चूत और चुचियों की झलक नहीं मिल पाती। चंदर का लंड काफी कड़ा हो जाता है। चंदर अपने एक हाथ से अपने लंड को मसलने लगता है।
थोड़ी देर उसी मसलने से चंदर का पानी उसके पैंट में ही छूट जाता है। चंदर रोशनदान से हटकर घर की छत पर चला जाता है। सुधा जब नहाकर छत पर अपने कपड़े सुखाने जाती है तो चंदर सुधा को देखकर मुस्कुराने लगता है और सुधा से कहता है, “लाओ भाभी मैं आपके कपड़े सुखाने के लिए डाल देता हूँ।”
और कहकर सुधा के हाथों से उसके गीले कपड़ों को लेकर सुखाने के लिए डालने लगता है। उन कपड़ों में सुधा की ब्रा और पैंटी भी थी। उन्हें हाथ में लेकर चंदर बोला, “भाभी ये तो वही पैंटी है जो उस दिन आपने काढ़ी थी।” और कहकर पैंटी को सूँघने लगता है।
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सुधा बोली, “चल दे, इसमें डाल देती हूँ।”
पर चंदर बोला, “नहीं भाभी, इस पर से बहुत सुंदर खुशबू आ रही है। कौन सा इत्र लगाती हो?” कहकर पैंटी को सूँघने लगता है।
सुधा थोड़ा झेंप जाती है पर फिर बोली, “ला दे मुझे।”
और फिर पैंटी को चंदर के हाथों से लेकर उसे सुखाने के लिए डाल देती है। और फिर नीचे जाने लगती है। चंदर छत पर ही खड़ा पैंटी की मदहोश खुशबू को सूँघ रहा था।
दोपहर में जब दोनों खाना खा रहे थे तो चंदर बोला, “भाभी आपने बताया नहीं कि कौन सा इत्र लगाती हो?”
सुधा बोली, “चल तेरे भैया से पूछ लेना।”
चंदर चुप हो जाता है। खाना खाने के बाद चंदर कमरे में जाकर सोचने लगता है कि कैसे सुधा को चोदा जाए। और फिर वो अपने एक दोस्त के घर जाता है और उससे सेक्स की किताब ले आता है जिसमें देवर अपने भाभी को कैसे सिड्यूस करके चोदता है। घर जाते वक्त चंदर मार्केट से एक कंडोम का पैकेट भी ले लेता है और घर आ जाता है।
और फिर रात में खाना खाने के बाद अपने कमरे में जाकर किताब को पढ़ने लगता है। सुबह-सुबह ही चंदर घर से बाहर चला जाता है और करीब 9-10 बजे घर आता है। उसी वक्त सुधा चंदर को नाश्ता देकर नहाने चली जाती है। अभी सुधा को गए 10 मिनट ही हुए होंगे कि सुधा चीखती देती है। चंदर दौड़कर बाथरूम की ओर जाता है।
“भाभी क्या हुआ?” सुधा चीख बोलकर बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाहर आ जाती है और चंदर से लिपट जाती है। चंदर सुधा को कसकर अपनी बाँहों में पकड़ लेता है। सुधा उस समय सिर्फ तौलिए में लिपटी थी। तौलिया काफी छोटा था। सुधा उससे सिर्फ अपनी चूत को ही ढक पाई थी। उसके आधे चुचे तौलिए के बाहर ही थे।
चंदर सुधा के मोटे-मोटे गांड के दोनों गोलों को हाथ में भर लेता है और उन्हें दबाते हुए कहता है, “भाभी साँप।”
सुधा बोली, “उहाँ अंदर बाथरूम में।”
चंदर बोला, “भाभी कहाँ है?” कहकर सुधा के कूल्हों को और दबाने लगता है। सुधा को भी अब ऐसा लगने लगा कि चंदर उसकी गांड के मजे ले रहा है और सुधा थोड़ा और कसकर चंदर से चिपक जाती है। वहाँ बाथरूम में चंदर सुधा की गांड को सहलाते हुए बोला, “चलो मैं देखता हूँ कौन सा साँप है।”
सुधा बोली, “बहुत बड़ा है।”
सुधा भी चंदर की इस हरकत का आनंद ले रही थी। अब चंदर थोड़ा अपना हाथ तौलिए के नीचे ले जाता है और तौलिए को थोड़ा ऊपर करके अपना हाथ सुधा की नंगी गांड में रख देता है। सुधा जानबूझकर न समझने का नाटक कर रही थी। “बाप रे कितना बड़ा था।” पर चंदर सुधा की गांड को सहलाता ही रहता है।
कुछ देर बाद सुधा अंदर अपने कमरे में चली जाती है। सुधा काफी गर्म हो गई थी। इतने दिनों से उसे जिस लंड की ज़रूरत थी वो उसे मिल गया पर चंदर उसका देवर था। ओह थोड़ा मन ही मन उदास हो गई पर चंदर को अब चैन कहाँ। सुधा ने अपना पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना ही था कि चंदर कमरे में आ जाता है।
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“भाभी कहाँ है? साँप मुझे तो नहीं दिखा।” और सुधा को ऊपर से नीचे तक देखने लगता है।
सुधा बोली, “चंदर तुम बाहर बैठो, मैं अभी आई।”
दोपहर में खाना खाने के वक्त चंदर अपना पैर सुधा के पैरों से रगड़ने लगता है और सुधा की साड़ी को उसके घुटनों तक कर देता है। सुधा थोड़ी देर तो चुप रहती है पर बोली, “चंदर ये क्या कर रहे हो? अपना पैर हटाओ।” पर चंदर पर नहीं आता था। थोड़ी देर बाद सुधा उठकर अपने कमरे में चली जाती है।
शाम को चंदर चाय लेकर सुधा के कमरे में जाता है। “भाभी उठो।” सुधा की कोई आवाज़ न पाकर चंदर सुधा की गांड को दबाने लगता है। तभी सुधा की आँख खुल जाती है। भाभी चाय। दोनों चाय पी ही रहे थे कि भाभी आपने बताया नहीं कि साँप कहाँ था? ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुधा बोली, “वहीं था, चला गया होगा।” चंदर धीरे से अपना हाथ सुधा के कमर पर रख देता है। तभी सुधा बोली चंदर तुम जाओ। पर चंदर बोला, “क्यों भाभी नहीं, तुम जाओ।” चंदर बाहर आ जाता है। रात में जब चंदर खाना खाने आता है तो भाभी बोली, “तुम नहीं बैठोगे कि नहीं? पहले तुम खा लो।”
चंदर बोला, “नहीं साथ में बैठेंगे।” सुधा और चंदर फिर साथ में बैठ जाते हैं। चंदर फिर से सुधा के जाँघों पर अपना हाथ रख देता है। सुधा झट से उठकर खड़ी हो जाती है और अपने कमरे में चली जाती है। चंदर भी थोड़ी देर बाद सुधा के कमरे में पहुँच जाता है। सुधा चंदर को देखकर बोली, “क्या चाहिए चंदर?”
चंदर धीमे स्वर में बोला, “तुम भाभी।”
सुधा बोली, “क्या कुछ नहीं?”
चंदर बोला, “भाभी बस ऐसे ही।”
और चंदर जाकर बिस्तर में लेट जाता है। सुधा भी बगल में लेटी थी। चंदर अपना हाथ सुधा के पेट पर रख देता है।
सुधा उठकर बैठ जाती है, “चंदर ये क्या कर रहे हो?”
चंदर बोला, “भाभी कुछ तो नहीं।”
सुधा बोली, “चंदर क्या हुआ?”
चंदर बोला, “भाभी मुझे आपकी उदासी देखी नहीं जाती।” कहकर अपना हाथ सुधा के जाँघ पर रख देता है।
चंदर बोला “मैं आपकी उदासी दूर करना चाहता हूँ।”
सुधा बोली, “कैसे?”
चंदर अपने जेब से कंडोम का पैक निकालकर सुधा के हाथों में रख देता है। सुधा थोड़ी देर चंदर को देखने के बाद उसे वापस देती है और कमरे से निकल जाने को कहती है। चंदर चुपचाप अपने कमरे में चला जाता है। अगले दिन सुबह चंदर बिना नाश्ता किए कॉलेज चला जाता है और शाम को लौटता है।
शाम को चंदर आता है तो सुधा उसके कमरे में जाती है और बोली, “चंदर क्या हुआ? तुम नाश्ता भी नहीं किया और दोपहर का खाना भी नहीं किया।” चंदर से कोई जवाब न पाकर सुधा उसके सामने जाकर खड़ी हो जाती है और चंदर के हाथों को अपने हाथों में लेकर बोलती है, “क्या हुआ चंदर? तुम पहले तो ऐसे नहीं थे।”
चंदर बोला, “मैं तो आपकी खुशी के लिए ही कर रहा था। भैया तो आपको देखते भी नहीं।”
सुधा बोली, “न देखे तू तो है ना, मेरा ख्याल रखने के लिए।”
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सुधा चंदर के कंधों पर अपना सिर रख देती है और बोलती है, “चल बहुत दिन हुए हम मूवी देखने नहीं गए। आज चलते हैं।” और दोनों मूवी देखने चले जाते हैं। दोनों 9 से 12 के शो देखने जाते हैं। चंदर थिएटर में पहुँचकर कोने की दो सीट के टिकट लेता है। वैसे भी ज्यादा भीड़ नहीं थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अंदर 15 से 20 जन ही होंगे और सब कपल ही थे। चंदर अंदर का पूरा फायदा उठाना चाहता था। चंदर अपना हाथ सुधा के कंधे में ऐसे रखता है कि जिससे सुधा के चुचियों को छू सके। पिक के दौरान चंदर कभी अपना हाथ सुधा के चुचियों पर तो कभी उसके जाँघ पर रखता है।
सुधा उसका विरोध कर उससे नाराज नहीं करना चाहती थी। वह मन ही मन अपने को कोस रही थी कि क्यों वो मूवी देखने आई। मूवी खत्म होने के बाद दोनों बाहर आए। सुधा की साँस थोड़ी तेज़ थी। दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा देते हैं।
चंदर बोला, “भाभी चलो आज होटल में खाना खाते हैं।”
होटल में पहुँचकर दोनों खाने बैठते हैं। चंदर वहाँ भी अपनी हरकत जारी रखता है। चंदर टेबल के नीचे से सुधा के पैरों पर अपने पैर घिसता है। सुधा अपने गर्दन को झुकाए रखती है और चंदर की इस हरकत को नज़रअंदाज करने की कोशिश करती है।
चंदर सुधा की खामोशी का फायदा उठाते हुए सुधा की साड़ी को उसके घुटनों तक उठा देता है और अपना एक पैर सुधा के पैरों के बीच में ले जाकर उसके नंगे जाँघों पर रगड़ने लगता है। फिर खाना खाने के बाद दोनों घर लौट रहे थे। रात के करीब एक सवा एक बज रहे थे। एक सुनसान सड़क पर चंदर अपनी बाइक को रोक देता है।
सुधा बोली, “क्या हुआ?”
चंदर बोला, “बाथरूम लगी है भाभी।”
और वो थोड़ा झाड़ियों के अंदर चला जाता है। 4-5 मिनट बाद जब चंदर नहीं आता तो सुधा बोली, “चंदर क्या हुआ? इतनी देर क्यों लग रही है?”
चंदर बोला, “भाभी चेन अटक गई है। घर जाकर ठीक कर लेंगे।”
“नहीं मेरी उसमें अटक गई है।”
सुधा बोली, “थोड़ा ज़ोर लगाओ।”
“नहीं हो रहा।”
सुधा बोली, “ठहरो मैं आती हूँ।” और सुधा भी अंदर चली जाती है।
सुधा बोली, “अरे यहाँ तो बहुत अंधेरा है।” कहकर चंदर से लिपट जाती है। “और यहाँ तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा। कैसे होगा?”
चंदर बोला, “भाभी ठहरो मैं अपने मोबाइल की लाइट ऑन करता हूँ।” चंदर अपने मोबाइल की लाइट ऑन करता है और सुधा के एक हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख देता है। सुधा उसके लंड को कुछ देर यूँ ही देखती है।
फिर चंदर बोला, “क्या हुआ भाभी?”
सुधा बोली, “कुछ नहीं।” और कसकर चंदर की चेन को ऊपर खींचती है। “चंदर अब ठीक है?”
पर भाभी देखो खून निकल रहा है।
सुधा बोली, “ओह सॉरी मैंने जानबूझकर नहीं किया चंदर।”
पर भाभी बहुत दर्द हो रहा है।
“ला दिखाओ।”
सुधा चंदर के लंड को अपने हाथ से सहलाने लगती है।
“चंदर अब कैसे लग रहा है?”
“भाभी अब भी दर्द हो रहा है।” चंदर बोला, “भाभी कुछ करो जल्दी। आप इसे अपने मुँह में ले लो।”
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सुधा थोड़ा चौंककर चंदर को देखती है। चंदर यह बोलकर सुधा के सिर को पीछे से पकड़ लेता है और उसे नीचे बैठा देता है। सुधा अपनी साड़ी को घुटनों के ऊपर रखकर बैठ जाती है। और फिर चंदर का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है। चंदर सुधा के मुँह में अपने लंड को आगे-पीछे करने लगता है। थोड़ी देर की चुसाई में चंदर का लंड फनफना के 8 इंच का हो जाता है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चंदर बोला, “भाभी ऐसे ही करो, आराम मिल रहा है।” और तेज़ी से सुधा के मुँह में लंड ठेलने लगता है।
थोड़ी देर बाद सुधा बोली, “अब हो गया। चलो घर।”
“नहीं भाभी अभी नहीं।”
सुधा बोली, “क्यों?”
चंदर बोला, “भाभी मुझे कुछ और करना है।”
“क्या करना है चंदर?”
चंदर बोला, “भाभी मैं आपके चूत में लंड को ठेलना चाहता हूँ।”
सुधा बोली, “पहले घर चलते हैं।”
“अच्छा भाभी थोड़ा चूसने दो।” कहकर चंदर सुधा को पेड़ पर टिका देता है और उसकी साड़ी को कमर तक उठा देता है और चूत में जीभ डालकर चूसने लगता है। थोड़ी देर बाद सुधा बोली, “बस हो गया। चलो घर। कोई आ जाएगा।”
“नहीं भाभी बस थोड़ा और। अब लंड भी ले लो ना अंदर।”
और चंदर सुधा को एक हाथ से उसके दोनों हाथों को पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से लंड को सुधा की चूत में डाल देता है। सुधा को थोड़ा दर्द होता है पर चंदर अपना आधा लंड सुधा की चूत में डालकर चोदने लगता है। करीब 10 मिनट बाद चंदर सुधा की चूत में झड़ जाता है।
चंदर सुधा की चूत में झड़ते ही थककर उसके ऊपर लुढ़क गया। सुधा की साँसें तेज़ चल रही थीं। उसकी चूत से चंदर का गर्म वीर्य बाहर निकल रहा था। सुधा ने धीरे से चंदर को धक्का दिया और बोली, “चंदर अब बस करो, बहुत हो गया। कोई देख लेगा तो क्या कहेंगे?”
चंदर मुस्कुराते हुए बोला, “भाभी, इतने दिनों से आपकी उदासी देख रहा था। आज तो बस शुरूआत है।”
सुधा शर्म से लाल हो गई। उसने अपनी साड़ी नीचे की, तौलिए की जगह अब साड़ी को ठीक किया और दोनों जल्दी से बाइक पर बैठकर घर लौट आए। घर पहुँचकर सुधा सीधे अपने कमरे में चली गई। चंदर भी अपने कमरे में गया लेकिन उसकी नींद उड़ चुकी थी। रात भर वह सुधा के नंगे शरीर, उसके मोटे गांड और गीली चूत की याद में अपना लंड मसलता रहा।
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सुबह होते ही चंदर उठा। सुधा रसोई में चाय बना रही थी। चंदर पीछे से चुपके से आया और सुधा को कमर से पकड़ लिया। सुधा चौंक गई, “चंदर! छोड़ो, भैया कहीं आ गए तो?” चंदर ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा, “भाभी, भैया तो दफ्तर गए हैं। अब तो पूरा दिन हमारा है।”
उसने सुधा के ब्लाउज़ पर हाथ फेरा और चुचियों को दबाने लगा। सुधा थोड़ा प्रतिरोध कर रही थी लेकिन उसका शरीर पहले ही गर्म हो चुका था। चंदर ने सुधा को घुमाकर दीवार से सटा दिया। उसने सुधा की साड़ी ऊपर की और पेटीकोट के साथ पैंटी नीचे सरका दी। सुधा की चूत अभी भी रात की चुदाई से गीली थी।
चंदर घुटनों पर बैठ गया और सुधा की चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ चूत के होंठों को अलग करके अंदर तक घुस रही थी। सुधा सिसकारियाँ भर रही थी, “चंदर… उफ्फ… धीरे… आह्ह!” चंदर ने अपनी उँगलियाँ भी डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। सुधा का शरीर काँपने लगा और वह पहली बार झड़ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसका रस चंदर के मुँह में आ गया। चंदर ने सब चाट लिया। फिर चंदर उठा। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था। उसने कंडोम निकाला, पहना और सुधा को रसोई के टेबल पर झुकाकर पीछे से चोदने लगा। हर झटके के साथ सुधा की गांड लहरा रही थी। चंदर उसके बाल पकड़कर खींच रहा था और जोर-जोर से धक्के दे रहा था।
“भाभी, आपकी चूत तो बहुत टाइट है। भैया तो शायद आपको ठीक से चोदते भी नहीं।” सुधा शर्म और मजे के मिश्रण में बोली, “चंदर… चुप… आह्ह… और तेज़…” चंदर ने रफ्तार बढ़ा दी। करीब 15 मिनट तक चुदाई के बाद चंदर सुधा की चूत में ही झड़ गया।
दोपहर में दोनों ने साथ में खाना खाया। खाने के बाद चंदर सुधा को गोद में उठाकर बेडरूम ले गया। अब दोनों पूरी तरह नंगे थे। सुधा चंदर के ऊपर चढ़ गई और उसका लंड अपनी चूत में लेकर खुद हिलने लगी। उसके बड़े-बड़े चुचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे। चंदर उन्हें मसल रहा था और निप्पल चूस रहा था।
सुधा तेज़ी से कूद रही थी। कमरे में चूत की चिपचिप की आवाज़ और दोनों की सिसकारियाँ गूँज रही थीं। इस बार सुधा दो बार झड़ गई और चंदर तीसरी बार उसके मुँह में झड़ा। सुधा ने पूरा वीर्य निगल लिया। शाम को जब भैया आने वाले थे तब दोनों ने कपड़े ठीक किए।
लेकिन चंदर का मन अब सुधा को पूरी तरह अपना बनाना चाहता था। रात में भैया सो जाने के बाद चंदर चुपके से सुधा के कमरे में घुस गया। सुधा जाग रही थी। उसने चंदर को देखा तो मुस्कुराई। चंदर उसके बगल में लेट गया और धीरे से उसकी साड़ी ऊपर की। इस बार बिना कंडोम के।
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उसने सुधा की टाँगें फैलाकर मिशनरी स्टाइल में लंड डाला। दोनों धीरे-धीरे प्यार से चुदाई कर रहे थे। चंदर सुधा के होंठ चूस रहा था, गर्दन चूम रहा था और बोले जा रहा था, “भाभी, अब आप मेरी हो। मैं रोज आपको चोदूँगा।” सुधा भी गर्म होकर जवाब दे रही थी, “हाँ चंदर… मुझे रोज चोदो… तुम्हारा लंड बहुत मज़ेदार है।”
इसके बाद तो रोज नई-नई जगहों पर चुदाई होने लगी। कभी छत पर, कभी बाथरूम में, कभी रसोई में, कभी भैया के जाने के बाद पूरे दिन नंगी घूमते हुए। एक दिन चंदर सुधा को ले जाकर होटल गया। वहाँ उसने सुधा को डॉगी स्टाइल, 69 पोजीशन और कई तरीकों से चोदा। सुधा अब पूरी तरह चंदर पर फिदा हो चुकी थी। वह खुद चंदर को सेड्युस करने लगी थी।
कभी-कभी वह चंदर के लंड को चूसते हुए कहती, “चंदर, तुम्हारा लंड मेरे पति से कहीं बेहतर है।” कुछ दिनों बाद भैया फिर दफ्तर के काम से बाहर गए। तब चंदर ने सुधा को तीन दिन तक घर में कैद करके रखा। दोनों लगातार सेक्स करते रहे। सुधा की चूत सूज गई थी लेकिन वह फिर भी चंदर का लंड माँगती रहती। चंदर ने उसे नहाते वक्त, सोते वक्त, खाते वक्त हर जगह चोदा। सुधा अब पूरी तरह चंदर की रखैल बन चुकी थी।
चंदर और सुधा की रोज़ की चुदाई अब बेकाबू हो चुकी थी। भैया (सुधा का पति और चंदर का बड़ा भाई) दफ्तर से लौटते ही महसूस करने लगे कि घर का माहौल कुछ बदला-बदला सा है। सुधा पहले की तरह उनसे बात नहीं करती थी, उसकी चाल में एक अजीब सी चमक थी और वह अक्सर मुस्कुराती रहती थी। एक दिन भैया रात को घर आए तो देखा कि सुधा की साड़ी में पीछे से कुछ सफेद दाग थे।
उन्होंने पूछा, “सुधा, ये क्या है?”
सुधा घबरा गई और बोली, “कुछ नहीं, दूध गिर गया होगा।”
लेकिन भैया को शक हो गया। उसके बाद भैया अक्सर अचानक घर आने लगे। एक दिन उन्होंने देखा कि चंदर सुधा के कमरे से बाहर निकल रहा है जबकि सुधा का चेहरा लाल था और बाल बिखरे हुए थे। भैया ने चंदर से पूछा, “तुम सुधा के कमरे में क्या कर रहे थे?”
चंदर ने बहाना बनाया, “भैया, भाभी को सिरदर्द था, मैं दवा दे रहा था।”
लेकिन भैया का शक और गहरा हो गया। वे रात में सुधा से सेक्स करने की कोशिश करते तो सुधा मना कर देती, “आज नहीं, थक गई हूँ।” जबकि चंदर के साथ वह घंटों चुदाई करती। एक शाम भैया ने छिपकर देखा कि चंदर सुधा को रसोई में चोद रहा है। सुधा टेबल पर झुकी हुई थी और चंदर पीछे से जोर-जोर से धक्के दे रहा था। भैया का खून खौल गया लेकिन वे चुप रहे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रात को उन्होंने सुधा से कहा, “मुझे शक है कि चंदर तुम्हारे साथ गलत काम कर रहा है।”
सुधा डर गई लेकिन उसने इनकार कर दिया।
भैया ने कहा, “अगर सच्चाई निकली तो दोनों को घर से निकाल दूँगा।”
इधर चंदर को पता चल गया कि भैया को शक हो गया है। लेकिन इससे उसकी हिम्मत और बढ़ गई। एक रात जब भैया सो रहे थे, चंदर सुधा को लेकर उनके बेडरूम के पास ले गया।
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उसने सुधा से कहा, “भाभी, कल्पना करो अगर भैया भी हमारे साथ हों तो कितना मज़ा आएगा।”
सुधा शर्म से लाल हो गई लेकिन चंदर की बात सुनकर उसकी चूत गीली हो गई।
चंदर ने कहा, “मैं सोचता हूँ कि भैया तुम्हें चोदें और मैं तुम्हारा मुँह चोदूँ। या फिर दोनों मिलकर तुम्हें सैंडविच करके चोदें।”
सुधा ने शर्माते हुए कहा, “चंदर, तुम बहुत गंदे हो गए हो… लेकिन… कल्पना में तो अच्छा लगता है।”
चंदर और सुधा अब अक्सर थ्रीसम की कल्पना करते हुए सेक्स करते। चं
दर सुधा को कहता, “कल्पना करो भैया तुम्हारी गांड में लंड डाल रहे हैं और मैं तुम्हारी चूत में।”
सुधा उत्तेजित होकर बोली, “हाँ चंदर… दोनों तरफ से चोदो मुझे… मैं दोनों लंड लेना चाहती हूँ।”
चंदर ने सुधा को डॉगी स्टाइल में चोदते हुए उसके गांड के छेद में उँगली डाल दी और कहा, “एक दिन भैया को भी शामिल करेंगे।”
सुधा ने जवाब दिया, “अगर वो मान गए तो… मैं दोनों देवर और पति से एक साथ चुदना चाहूँगी।”
कुछ हफ्तों बाद सुधा को उल्टी आने लगी। उसने टेस्ट करवाया तो पता चला कि वह प्रेग्नेंट है। सुधा डर गई।
उसने चंदर को बताया, “चंदर, मैं प्रेग्नेंट हूँ। और मुझे लगता है ये तुम्हारा है क्योंकि भैया से तो कई महीने से कुछ नहीं हुआ।”
चंदर खुश हो गया। उसने सुधा को गले लगाया और कहा, “भाभी, ये हमारा बच्चा है। अब हम और भी करीब हो जाएँगे।”
भैया को जब पता चला तो वे बहुत खुश हुए क्योंकि उन्हें लगा कि बच्चा उनका है। लेकिन अंदर ही अंदर शक बरकरार था। सुधा अब पेट के साथ भी चंदर के साथ चुदाई करती। चंदर बहुत सावधानी से उसे चोदता — कभी मिशनरी, कभी साइड पोजीशन में। सुधा के स्तन बड़े हो गए थे और चूत ज्यादा गीली रहती थी।
चंदर कहता, “भाभी, गर्भावस्था में तुम और भी सेक्सी लग रही हो।”
सुधा मुस्कुराकर कहती, “ये सब तुम्हारी वजह से है चंदर।”
एक दिन भैया ने दोनों को फिर संदिग्ध हालत में पकड़ लिया। उन्होंने गुस्से में कहा, “सच बता सुधा, बच्चा किसका है?”
सुधा रोते हुए बोली, “ये चंदर का है।” भैया पहले तो गुस्सा हुए लेकिन फिर शांत हो गए।
उन्होंने कहा, “मैं जानता था। लेकिन अब बच्चा आ रहा है तो मैं कुछ नहीं कहूँगा। बस एक शर्त है…”
भैया ने आगे कहा, “मैं भी तुम दोनों के साथ शामिल होना चाहता हूँ।”
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उस रात पहली बार थ्रीसम हुआ। भैया और चंदर दोनों सुधा को चोद रहे थे। भैया सुधा की चूत में लंड डाल रहे थे जबकि चंदर उसका मुँह चोद रहा था। सुधा दोनों लंडों का आनंद ले रही थी। बाद में दोनों ने पोजीशन बदली — भैया ने सुधा की गांड में डाला और चंदर चूत में। सुधा चीख रही थी मज़े से, “आह्ह… दोनों… मुझे फाड़ दो…!”
दोनों भाई बारी-बारी से सुधा को चोदते रहे। सुधा कई बार झड़ गई। अंत में दोनों ने उसके मुँह और चूत में वीर्य भर दिया। इसके बाद घर में तीनों का खुला संबंध हो गया। सुधा अब दोनों पति और देवर की साझा रखैल बन चुकी थी। गर्भावस्था के नौ महीने तक भी सुधा दोनों से चुदाई करवाती रही।
प्रातिक्रिया दे