Kamuk Bhabhi Wet Chut
ये बात है कोई 3 साल पुरानी। मैं अपने दोस्त के भाई की बारात में नागपुर गया था। अब आप तो जानते ही हैं कि शादी की रात हर लड़का-लड़की क्या चाहती है… चूत और लंड। बस यही मैं भी चाहता था। चूँकि मैं लड़के वालों की तरफ से आया था तो वैसे भी थोड़ी छूट थी। बस चूत चाहिए थी। Kamuk Bhabhi Wet Chut
उस शादी में बहुत सारी और सेक्सी माल जैसी लड़कियाँ थीं। बारात का स्वागत हुआ, हम सब अंदर गए। वो बहुत बड़ा भवन था, 3 मंजिला, बीच में ग्राउंड, चारों तरफ भवन। अब हम सबी लड़के एक साथ एक तरफ बैठ गए। मेरे साथ के बहुत से लड़कों ने शराब पी रखी थी। इसलिए मैं वहाँ से उठकर दुल्हे के घर वालों के पास चला गया।
वहाँ बहुत सारी लड़कियाँ टी, कोल्ड ड्रिंक, नाश्ता सर्व कर रही थीं। लेकिन मेरी नज़रें किसी ऐसी लड़की को खोज रही थीं जो आसानी से पट जाए और मेरी रात रंगीन हो जाए। पर आजकल सुंदर लड़कियों के माँ-बाप भी साले बहुत चालू हो गए हैं, हर वक्त नज़र रखते हैं अपनी लौंडियों पर।
खैर, मैं बहुत देर तक इधर-उधर आती-जाती लड़कियों को नज़रों से नापता रहता। किसी की गांड़, किसी का दूध, किसी की जाँघ देखने की कोशिश कर रहा था। ऐसे ही करीब 1 घंटा हो गया। उधर शादी में पंडित मंत्र चालू कर चुका था। मैं उठकर घूमने लगा कि शायद किसी कोने में कोई मालदार लड़की मिल जाए। फिर थककर वापस अपनी जगह आ गया।
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कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा कि कोई मुझे घूर रहा है। मैंने ध्यान दिया तो देखा कि वो हमारे साथ बारात में आई थी और दुल्हे की चचेरी भाभी थी। वो मुझे चोरी-छिपे बार-बार घूर रही थी। असल में मैं इतने देर से सिर्फ लड़की वालों की तरफ ही चिंगारी खोज रहा था। लेकिन इधर बारात में ही कई धधकती आग के शोलों पर मेरा ध्यान ही नहीं गया।
अब मैं भी उन पर ध्यान देने लगा। भाभी के बारे में बताऊँ। उनका नाम फाल्गुनी था। वो दुल्हे (मेरे दोस्त के बड़े भाई) के चचेरे भाई की पत्नी थी। उनकी शादी भी अभी 6-7 महीने पहले हुई थी। फाल्गुनी भाभी का बदन भरा-भरा था। फिगर 34-32-34 होगा। मस्त गोरी चिकनी। काली नशीली आँखें। पतले गुलाबी होंठ। मस्त फूली हुई गांड़।
अब जब मैं भी उन्हें घूरने लगा तो कई बार हमारी नज़रें मिलीं। और फिर उसने एक प्यारी सी स्माइल दी। तो मैंने भी रिप्लाई दिया। पर वहाँ बहुत लोग बैठे थे। इसलिए आगे नो चांस। फिर थोड़ी देर बाद भाभी मुझे गहरी नज़रों से घूरते हुए अपनी जगह से उठी और कहीं जाने लगी।
मैं उनकी नज़रों को समझकर 5 मिनट बाद उठकर उसी तरफ चला गया जिधर वो गई थी। वो भवन के ऊपरी फ्लोर को जाने वाली सीढ़ी के पास खड़ी थी और मुझे आता देख ऊपर जाने लगी। पहली मंजिल पर कुछ लोग थे। तो वो सीधे तीसरी मंजिल के छत पर चली गई। उनके पीछे मैं भी छत पर पहुँच गया।
हम दोनों छत के अंधेरे में कुछ फीट की दूरी पर टहल रहे थे। मैंने पहले कभी उनसे बात नहीं की थी तो थोड़ा संकोच हो रहा था। फिर मैं आगे बढ़कर शुरुआत की और कहा कि “आप मनोज (मेरा दोस्त) के रिश्तेदार हैं क्या?”
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उसने कहा, “हाँ, मैं उसकी भाभी हूँ।”
तो मैंने कहा, “पर मैंने तो आपको पहले कभी नहीं देखा।”
इस पर उसने तपाक से कहा कि “देखोगे कहाँ से? तुम्हारी नज़रें और ध्यान दोनों तो कहीं और ही लगे हुए थे… शादी में।”
मैं उनकी बात समझकर मुस्कुराते हुए बोला कि वो सब तो बस उसी टाइमपास था।
तो उसने कहा कि “और क्या-क्या टाइमपास करते हो तुम…? या सिर्फ नैनसुख ही बस?”
मैं उनकी बात और इच्छा समझके उनके करीब जाकर उनके हाथों को अपने हाथ में लेकर बोला कि “कर तो बहुत कुछ सकता हूँ, बस मंजूरी मिलने की दरकार है।”
इस पर फाल्गुनी भाभी ने बहुत ही अदा से, इठलाते हुए कहा कि “कोई बिना बोले खुद छत के अंधेरे में तुम्हारे पास आ जाए तो क्या ये मंजूरी नहीं है?”
उसके इस जवाब को सुनते ही मैंने उसे अपनी तरफ खींचते हुए अपनी बाहों में भर लिया। हायययय क्या मुलायम, मखमली जिस्म था उसका! छूते ही करंट लग गया। मैंने अपने होंठ उसके होंठों में रख दिए। और उनका रस पीने लगा तो भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। और मैं उसे चूसने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मों पर ले गया और दबाया। व्व्वाहह्ह्ह क्या ठोस और कड़े मुम्मे थे… जैसे पहली बार दब रहे हों। एक-एक करके मैंने उसकी दोनों चुचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से ही दबाया, मसला। फिर ब्लाउज़ के सामने के हुक खोलने लगा तो उसने कहा कि “विक्की, ऊपर कोई आएगा तो नहीं ना?”
इस पर मैं जाकर सीढ़ी के छत आने वाले दरवाजे को लॉक कर दिया। और फिर भाभी के पास जाकर उनके ब्लाउज़ को खोल दिया। और ब्रा को भी। और उनकी चुचियों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। उधर भाभी के मुंह से मज़े की सिसकारी की “आऊऊ… च्च्छ्ह्ह… आह्ह्ह्ह…” जैसी सेक्सी आवाज़ें आ रही थीं।
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मैं एक चुची को मुंह में लेकर चूसता तो दूसरे को अपने हाथों से दबाता। फिर चुची बदल लेता। 10 मिनट में ही भाभी एकदम गरम हो गई। और एकदम से मुझे हटाकर नीचे घुटनों के बल बैठकर जल्दी-जल्दी मेरे बेल्ट और पैंट को खोलने लगी। और अंडरवीयर को नीचे करके मेरे खड़े लंड को अपने हाथ में थाम लिया।
और तुरंत ही गप से मेरे लौड़े को अपने मुंह में घुसेड़ लिया, जैसे बरसों की प्यासी हो। और पूरे लंड को चूसने लगी। उसकी इस तेजी और मुंह की गर्मी से मेरे पूरे बदन में सनसनाहट दौड़ गई। और मेरे मुंह से “व्व्वाहह्ह्ह” निकल गया। मैं उसके सर को पकड़ के अपने लंड को उसके मुंह में अंदर-बाहर करने लगा। मतलब मुंह को ही चोदने लगा।
वो भी मेरे लौड़े को अपने मुंह के ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। मैं तो जैसे हवा में ही उड़ रहा था। पहली बार लौड़े में इतना ज़्यादा मज़ा आया था। वो इतनी तेजी से चुप्पा मार रही थी कि जैसे कोई ट्रेन छूट रही हो। उसके मुंह की गर्मी, लंड में महसूस हो रही रगड़न, उसके थूक के कारण हो रही चप-चप की आवाज़ें… सब मज़े को कई गुना बढ़ा रही थीं।
मैं तो बिल्कुल मदहोश हो गया था। और बस उसके मुंह में लौड़े का धक्का दिए जा रहा था… “आआय्य्यी… स्स्से… ओओह्ह्ह…” ही बार निकल रहा था मेरे मुंह से। 10 मिनट भी नहीं लगा होगा कि मेरे लंड ने अपना सारा गाढ़ा रस उसके मुंह में भर दिया। जिसे उसने पूरा का पूरा पी लिया। तब ही उसने मेरे लंड को मुंह से बाहर निकाला। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने उसकी साड़ी-पेटीकोट उठा के उसकी चड्डी के अंदर हाथ डाला। उसकी बुर बिल्कुल चिकनी थी और एकदम गीली थी। मैंने तुरंत उसकी चड्डी को नीचे खींच दिया। और उसको दीवार से टिका कर उसके दोनों टांगों के बीच में अपना मुंह घुसा दिया। फिर जेब से अपना मोबाइल निकालकर उसकी चूत में लाइट मार कर देखा।
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ओओह्ह्ह क्या मस्त चिकनी गोरी पुदी थी उसकी! उसे देखते ही मेरा लंड फिर तैयार हो गया। मस्त गुलाबी फाँके थीं उसकी गोरी चूत की। मुझसे रुका नहीं गया और मैंने उसकी बुर को पूरा का पूरा अपने मुंह में भर के निचोड़-निचोड़ लिया। और बहुत तेजी से अपनी जीभ से उसकी बुर को चाटने-खोदने लगा।
भाभी की बुर पूरी भट्ठी की तरह गरम हो चुकी थी और नल की तरह पानी छोड़ रही थी। उनके मुंह से… “चाटो विक्की… आह्ह्ह… खा जाायो मेरी चूत को ओह्ह… साले बहुत तड़पाती है… डालो अपनी जीभ और अंदर तक डाल दो विक्की… चोद दो मुझे… हायययय माँर्रर्र गई… आह्ह्ह…” पर ये मज़ा वो ज़्यादा नहीं सह पाई और मुझे ऊपर उठा लिया।
और बोली, “बस मेरी जान… चाट फिर कभी लेना। बस अब जल्दी से अपने लंड को मेरी प्यासी बुर में घुसा कर इस कामिनी की खुजली मिटाओ। साली बहुत गरम हो गई है।”
मैंने उसे उल्टा करके दूसरी तरफ झुकाया। और कुत्ते-कुतिया की स्टाइल में लाकर उसकी साड़ी को उसकी कमर तक ऊपर कर दिया। जिससे उसकी मोटी गांड़ मेरे सामने फैल गई। साली की गांड़ चूत की तरह लाल दिख रही थी। और चूत के पानी के कारण छेद भी चमक रहा था। साली का अगड़ा-पिछड़ा सब मज़ेदार था।
फिर मैंने अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गांड़ से चूत तक रगड़ा। तो उसने कहा, “विक्की क्यों तड़पा रहे हो? डालो ना अंदर अपना लौड़ा। देखो मेरी चूत कैसे तड़प रही है।” फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी बुर के छेद पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का लगाया। वो “आआय्य्यूऊ… धीरे से… क्या फाड़ोगे क्या…” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं बोला, “इतनी मस्त चिकनी पुदी देखकर मेरा लंड पागल हो गया है। इसे धीरे का मतलब नहीं मालूम।” और मैं उसके बुर में फचा-फचा करके अपना लंड तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। वो भी अपनी गांड़ पीछे करके धक्कों में साथ देने लगी और साथ-साथ बोले जा रही थी… “ह्ह्हाा… चोदो ओ ओ… विक्की… डाल दो ओ… अपना लंड… फाड़ डालो ओ… आज मेरी चो… चूत को ओ… बहुत मज़ा आ रहा है… आह्ह्ह… ऐसे ही…”
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इधर मैं भी पूरे जोश में उसकी चूत में अपना लंड ठाँस रहा था। और फिर अपने हाथ को आगे ले जाकर उसके झूलते मुम्मों को थाम के तेजी से चोद रहा था। इस बीच वो 1 बार झर चुकी थी। फिर जब मैं झरने के करीब आया तो उसकी कमर को पकड़ के तबड़तोड़ शॉट मारने लगा। और 20-25 धक्कों के बाद हम दोनों साथ-साथ झर गए। और मैं उसके ऊपर ही ढल गया। उसकी चूत दोनों के रस से भर गई और उसके जाँघों पर नीचे बहने लगा। 5 मिनट बाद हम अलग हुए और अपने कपड़े ठीक करने लगे।
फिर उसने मुझे गले लगाकर एक लंबा फ्रेंच किस किया। फिर उसने कहा कि “डार्लिंग, आज सच में चुदाई का सही मज़ा आया।” फिर हमने एक दूसरे का मोबाइल नंबर लिया और नीचे आ गए। किसी को कुछ पता भी नहीं चला। फिर 6 महीने तक हमारे बीच ये चुदाई का खेल चला। उसने मुझे 2 और चूत दिलाईं। 1 तो सील पैक थी। फिर उसके हस्पताल का ट्रांसफर हो गया। और फिर हम नहीं मिले। उसने मुझे जो 1 सील बंद चूत कैसे दिलवाई, वो मैं आपको अगली बार बताऊंगा।
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