Friend Wife Share XXX
मेरा नाम अंशिका है। मेरे पति सुजीत एक केमिकल कंपनी में अच्छे पद पर हैं। हम लोग वैसे तो बिहार के रहने वाले हैं पर पिछले ४ सालों से हरियाणा में रह रहे हैं। सुजीत की उम्र ३६ साल की है पर ३३ से ज्यादा नहीं दिखते। ५’१०” कद है, हल्के से मोटे हैं, गोरे और सुंदर हैं। मेरी उम्र ३३ साल है, पर ३० साल की दिखती हूँ, ५’३” कद है, जिस्म ३६-२७-३६ है। Friend Wife Share XXX
हमने अपनी इस जिंदगी की शुरुआत कैसे की, अब मैं ये बताना चाहूंगी। मुझे लंबे अरसे से यहाँ शक था कि सुजीत दूसरी औरतों को चोदने का बहुत इच्छुक था। पर कोई १ साल पहले उसने कहना शुरू किया कि “अंशिका, उमर बहुत छोटी होती है और हमें यहाँ भी अनुभव करना चाहिए कि दूसरों के साथ चुदाई करने में कैसा मज़ा आता है क्योंकि हम दोनों ने विवाह के पहले किसी से चुदाई नहीं की थी।”
वो किसी दूसरी स्त्री के साथ चुदाई का लुत्फ उठाना चाहता था और मुझे भी उत्साहित करता था कि मैं भी किसी दूसरे मर्द के साथ चुदाई का आनंद उठाऊँ। इन बातों के दौर से हमारी चुदाई में आनंद और बढ़ गया था। जब दोस्तों को अपने घर में बुलाते तो सुजीत किचन में मुझसे आकर बताता कि आज उसे किस दोस्त की बीवी को चोदने का मन कर रहा है।
वहाँ मुझसे भी पूछता कि आज मेरा मन किस दोस्त से चुदवाने को कर रहा है। यह सब बातें करके हमें बड़ा मज़ा आने लगा और हम सबके जाने के बाद उस दोस्त और उसकी बीवी का नाम लेकर एक-दूसरे को चोदने लगते थे। कुछ दिनों तक बिस्तर में चोदते समय इस बारे में बातें करते-करते मेरी भी हिम्मत बढ़ गई और मैं दूसरे जोड़े के साथ कल्पनिक अदला-बदली चुदाई के लिए तैयार हो गई।
फिर हमने ढूँढना शुरू किया और हमारी नज़र अंकेश और खुशबू पर पड़ी जो हमारे ही पड़ोस में कुछ ही दूर में रहते थे। इन कुछ सालों में हमारी उनसे दोस्ती काफी गहरी हो गई है। ये दोनों भी लगभग हमारी ही उम्र के थे। अंकेश ३८ साल का था और खुशबू ३२ की। खुशबू का शरीर बहुत सुंदर (३२-२६-३८) था।
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वो काफी पतली थी और नयन-नक्ष तीखे थे। हम दोनों उनके स्वभाव और सुंदरता से काफी प्रभावित हुए थे। अपनी चुदाई के समय अब हम अंकेश और खुशबू के बारे में सोचने लगे और उनके साथ चुदाई की कल्पना करने लगे। जब भी सुजीत मुझे चोदता था तो मुझसे यही कहता कि मेरी चूत कितनी रसीली और सुंदर है और मैं बड़ी आसानी से अंकेश को अपने साथ चुदाई कराने के लिए पटाकर सकती हूँ।
फिर मैंने भी सुजीत से कहा कि उसका लंड इतना अच्छा है कि खुशबू भी उसके लंड का स्वाद लेने के लिए आसानी से आतुर हो जाएगी। वो मुझसे पूछता कि आज मुझे किसके लंड से चुदवाना है, उसके या अंकेश के। मैं भी सुजीत से पूछती कि आज उसे किसकी चूत चोदने का मन कर रहा है, मेरी या खुशबू की।
सुजीत ने महसूस किया कि मुझे इन बातों से बहुत मज़ा आता है और मैं खूब उत्तेजित होकर सुजीत से चुदवाने लगी थी। दिन तो सुजीत चुदाई के दौरान मुझसे पूछने लगा, “अंशिका, बताओ तो सही, अभी तुम्हारी चूत के अंदर किसका लंड घुसा है?” मैंने भी बिना ज्यादा हिचक के बोला, “सुजीत, इस समय तो मेरी चूत अंकेश के लंड का मज़ा ले रही है।”
जल्द ही मैंने भी सुजीत से पूछा, “सुजीत, तुम्हारा लंड किसकी चूत में है?” तो सुजीत बड़े मज़े से बोला कि खुशबू की चूत में। सुजीत ने कुछ कहा नहीं पर यह ज़रूर महसूस किया कि जब मैं अंकेश के साथ चुदाई की कल्पना करती हूँ तो मेरा चुदाई में उत्साह और बढ़ जाता है और मैं सुजीत से खूब जोर से चुदवाती हूँ।
फिर एक दिन मैंने उससे कहा कि क्यों नहीं वो मुझे चोदते वक्त यह कल्पना करता है कि वो खुशबू को चोद रहा है और चोदते समय मुझे खुशबू कहकर ही पुकारे। काफी दिनों तक रोज हम लोग इस कल्पनिक दुनिया में एक-दूसरे को अंकेश और खुशबू के नाम से चोदते रहे। मैं उसे अंकेश पुकारती और वो मुझे खुशबू।
फिर लगभग आज से ५ साल पहले, एक दिन अचानक अनजाने में ही, अंकेश और खुशबू के साथ यह कल्पना हकीकत में बदल गई। एक दिन अंकेश और खुशबू ने हमें रात को डिनर पर बुलाया। हम उनके घर गए और वहाँ सुजीत और अंकेश ने साथ बैठकर थोड़ी व्हिस्की पी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने और खुशबू ने भी थोड़ी सी ली। तभी एकाएक अंकेश ब्लू फिल्म के बारे में बात करने लगा, क्योंकि उसे भी पता था कि हम दोनों ऐसी पिक्चर अक्सर देखा करते थे। अंकेश ने सुजीत से पूछा कि क्या उसने कभी कोई इंडियन ब्लू फिल्म देखी है? उसने कहा ऐसी फिल्म देखने में बड़ा मज़ा आएगा।
सुजीत ने अंकेश को बताया कि अब ऐसी फिल्में धीरे-धीरे सब जगह पर मिलती हैं और हमने कुछ देखी भी हैं। ये ज्यादा मज़ेदार होती हैं क्योंकि साड़ी और पेटीकोट उठाकर भारतीय औरतों को अलग-अलग लोगों से अपनी चूत चुदवाते देखने में अलग ही आनंद आता है।
जब भारतीय औरतें अपनी सुंदर सी मुंह खोलकर किसी का लंड चूसती हैं तो अपना लंड तो खड़ा हो जाता है। सुजीत ने अंकेश को बताया कि उसके कार में एक वीडियो सीडी पड़ी है जो हम वापस लौटाने वाले थे। उसने कहा कि अगर अंकेश चाहे तो उसे वापस करने के पहले देख सकता है।
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क्योंकि खुशबू ने भी कभी भारतीय ब्लू फिल्म नहीं देखी थी, अंकेश ने उसे सुझाव दिया कि वे दोनों उसे अपने बेडरूम में देख लेंगे और हमारी वापसी पर लौटा देंगे। सुजीत ने उन्हें उत्साहित करते हुए कहा कि हम दोनों तब तक कोई दूसरी हिंदी फिल्म वहीं ड्राइंग रूम में देखेंगे। पर अंकेश ने कहा कि ये तो बदतमीज़ी होगी और चूँकि हम सब एडल्ट हैं, हमें सबको ब्लू फिल्म का आनंद एक साथ उठाना चाहिए।
हालाँकि सुजीत और मुझे इसमें कोई एतराज नहीं था पर खुशबू को कुछ संशय में लग रही थी। उसके बाद खुशबू के साथ मैं रसोई में गई और उसे हिम्मत दी कि नजदीकी दोस्तों के साथ ऐसी फिल्म देखने में कोई हर्ज नहीं है। हम रसोई से कुछ और समोसे और ड्रिंक्स लेकर आए।
कुछ समय बाद खुशबू ने हल्के से कहा कि उसे भी वह फिल्म देखने में कोई एतराज नहीं है। सुजीत बाहर जाकर कार से कैसेट निकाल लाया जिसका नाम ‘बॉम्बे फ़ैंटसी’ था। हम सब उनके बेडरूम में चले गए। मैं और सुजीत सोफे पर बैठ गए और अंकेश और खुशबू अपने बिस्तर पर।
अंकेश ने लाइट बंद करके फिल्म चालू कर दी। हम लोगों ने यह फिल्म देखी हुई थी जिसमें दो मर्द और दो औरत के एक ही बिस्तर पर चुदाई की कहानी थी। हम शांति से सोफे पर बैठकर अंकेश और खुशबू के भाव पढ़ने की कोशिश कर रहे थे। कमरे में टीवी की रोशनी के अलावा अंधेरा था।
कुछ देर में हमें लगा कि अंकेश और खुशबू गरम हो रहे थे और उन्होंने अपने आप को कंबल से ढक लिया था। ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकेश, खुशबू के साथ चुदाई से पूर्व की हरकतों में मशगूल हो गया था। यह देखकर सुजीत भी गरम हो गया और मुझे चूमने लगा और मेरी चुचियों से खेलने लगा।
अब अंकेश और खुशबू अपने आप में इतने व्यस्त थे कि उनका ध्यान हमारी ओर नहीं था। यह जान मैंने भी सुजीत के लंड को हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया। सुजीत ने भी अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया, और हम भी अंकेश और खुशबू के बीच चल रहे संभावित खेल में शामिल हो गए।
अचानक सुजीत ने देखा कि अंकेश और खुशबू के ऊपर से कंबल एक ओर सरक गया था और उसकी नज़र अंकेश के नंगे चूतड़ों पर पड़ी। खुशबू की साड़ी उतर चुकी थी और अंकेश खुशबू के ऊपर चढ़ा हुआ था। वे दोनों पूरी तरह चुदाई में लग गए थे। अंकेश अपना ८ इंच का खड़ा लंड खुशबू की चूत में घुसा चुका था और अपने हाथों से खुशबू की चुचियों को मसल रहा था।
यह देखकर सुजीत ने कहा कि वो भी मुझे चोदना चाहता है और यह कहकर सुजीत ने मेरी दोनों चुचियों को पकड़कर कस-कसकर दबाने लगा। पर मैं शर्मा रही थी क्योंकि अंकेश और खुशबू की तरह हमारे पास हमारे नंगे बदन को ढकने के लिए कुछ नहीं था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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पर थोड़ी ही देर में मैं भी चुदाई की चलती हुई फिल्म, अपनी चुची की मसलाई और अंकेश-खुशबू की खुली चुदाई से काफी गरम हो गई और सुजीत से मैं भी अपनी चूत चुदवाने के लिए तरपने लगी। अब अंकेश और खुशबू के ऊपर पड़ा हुआ कंबल बस नाम मात्र को ही उनके नंगे बदन को ढँक रहा था।
खुशबू की नंगी चुचियाँ और उसकी पेट तथा नंगी जाँघें साफ-साफ दिख रही थीं। अंकेश इस समय खुशबू के ऊपर चढ़ा हुआ था और अपनी कमर उठा-उठाकर प्रिये की चूत में अपना ८ इंच का लंड पेल रहा था। और खुशबू भी अपनी पतली कमर उठा-उठाकर अंकेश के हर धक्के को अपनी चूत में ले रही थी और धीरे-धीरे बड़बड़ा रही थी, “हाई, और ज़ोर से चोदो, बहुत मज़ा आ रहा है।”
यह देखकर मेरी चूत गीली हो गई और मैं भी सुजीत से वहीं सोफे पर चुदवाने को राजी हो गई। मेरी राजामंदी पाकर सुजीत मुझ पर टूट पड़ा और मेरी दोनों चुचियों को लेकर पागलों की तरह उन्हें मसलने और चूसने लगा। मैं भी अपने हाथ आगे ले जाकर सुजीत का तना हुआ लंड पकड़कर सहलाने लगी।
जब मैं सुजीत के लंड को सहला रही थी तो मुझे लगा कि आज सुजीत का लंड कुछ ज्यादा ही अकड़ा हुआ है। सुजीत तेजी से अपने कपड़े उतारे और मेरे ऊपर आते हुए मेरी भी साड़ी उतारने लगा। कुछ ही देर में हम दोनों सोफे पर अंकेश और खुशबू की तरह नंगे हो चुके थे।
टीवी की धुंधली रोशनी में भी इतना तो साफ दिख रहा था कि कंबल अब पूरी तरह से हट चुका था और अंकेश खुले बिस्तर पर हमारे ही सामने ही खुशबू को जमकर चोद रहा था और खुशबू भी अपने चारों तरफ से बेखबर होकर अपनी कमर उठा-उठाकर अपनी चूत चुदवा रही थी।
मेरे ख्याल से अंकेश और खुशबू की खुल्लम खुल्ला चुदाई देखकर मैं भी अब बहुत गरम हो चुकी थी और सुजीत से बोली कि अब जल्दी से तुम मुझे भी अंकेश की तरह चोदो, मैं अपनी चूत की खुजली से मरी जा रही हूँ। मेरी बात खत्म होने से पहले ही सुजीत का तनतनाया हुआ लौड़ा मेरी चूत में एक जोरदार धक्के के साथ दाखिल हो गया।
सुजीत अपने लंड से इतने जोर से मेरी चूत में धक्का मारा कि मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकल गई। मैं तो इतनी जोर से चीखी जैसे कि उसका लंड मेरी चूत के अंदर पहली बार गया हो! एकाएक पूरा माहौल ही बदल गया। मेरी चीख सुनकर अंकेश और खुशबू को भी पता लग गया था कि हम दोनों भी उसी कमरे में हैं और अपनी चुदाई में लग चुके हैं।
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यह हमारे जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत थी जिसने हमें अदला-बदली करके चुदाई के आनंद का रास्ता दिखाया। मेरी चीख सुनकर खुशबू ने अंकेश का लंड अपनी चूत में लेते हुए धीरे से बोली, “लगता है कि सुजीत और अंशिका भी अपनी चुदाई शुरू कर दी है।”
यह सुनकर अंकेश ने आवाज दी, “क्या सुजीत, क्या चल रहा है? क्या तुम और अंशिका भी वही कर रहे हो जो हम और खुशबू कर रहे हैं?” सुजीत ने जवाब दिया, “क्यों नहीं, तुम दोनों का लाइव शो देखकर कौन अपने आप को रोक सकता है। इसलिए मैं और अंशिका भी वही कर रहे हैं जो इस वक्त तुम और खुशबू कर रहे हो।”
अंकेश बोला, “अगर हम लोग सब एक ही काम कर रहे हैं तो फिर एक-दूसरे से क्या छिपाना और क्या पर्दा? खुले मंच पर आ जाओ सुजीत। आओ हम लोग एक ही पलंग पर अपनी-अपनी बीवियों को चित लेटा करके उनकी टाँगें उठाकर उनकी चूतों की बखिया उधेड़ते हैं।”
सुजीत ने पूछा, “तुम्हारा क्या मतलब है अंकेश?” “मेरा मतलब है कि तुम लोगों को सोफे पर चुदाई करने में मुश्किल आ रही होगी, क्यों नहीं यहीं पलंग पर आ जाते हो हमारे पास, आराम रहेगा और ठीक तरीके से अंशिका की चूत में अपना लंड पेल सकोगे, मतलब अंशिका को चोद सकोगे।”
सच्ची बात तो यह थी कि हम वाकई सोफे पर बड़ी विचित्र स्थिति में थे। सुजीत ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे पलंग पर जाने में और खुशबू के बगल में लेटकर चूत चुदवाने में कोई आपत्ति है। मैंने कहा नहीं। मैं उन दोनों की चुदाई देखकर काफी चुदासी हो उठी थी और उनकी चुदाई को नज़दीक से देखना चाह रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
टीवी की धीमी रोशनी में मैं यह सोच रही थी कि एक ही पलंग पर लेटकर खुशबू के साथ-साथ चूत चुदवाने में कोई परेशानी नहीं। पर मुझे आने वाली घटना का अंदेशा नहीं था। सुजीत ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और पलंग की ओर चल पड़ा जहाँ अंकेश और खुशबू चुदाई में लगे थे।
हमें आता देख अंकेश ने अपनी चुदाई को रोककर हमारे बिस्तर पर आने का इंतज़ार करने लगा। अंकेश ने खुशबू की चुदाई तो रोक ली थी लेकिन अपना लंड खुशबू की चूत से नहीं निकाला था, वो अभी भी खुशबू की चूत में जड़ तक घुसा हुआ था और अंकेश और खुशबू की झांटें एक-दूसरे से मिली हुई थीं।
सुजीत ने पलंग के नज़दीक पहुँचकर मुझे खुशबू के पास चित होकर लेटने को कहा। जैसे ही मैं खुशबू के बगल में चित होकर लेटी, अंकेश मुझे छोड़कर उठा और कमरे की लाइट जलाकर वापस बिस्तर पर आ गया। हम लोगों को एकाएक सारा का सारा माहौल बदला हुआ नज़र आने लगा।
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हम चारों एक ही पलंग पर चमकती रोशनी में सार्वजनिक रूप से नंगे-धड़ंग चुदाई में लगे हुए थे। अंकेश और खुशबू बिना कपड़ों के काफी सुंदर लग रहे थे। खुशबू की चुचियाँ छोटी-छोटी थीं पर चूतड़ काफी बड़े थे। उसकी छोटी-छोटी झांटें बड़ी सफाई से उसकी सुंदर चूत को ढँके हुए थीं।
कमरे की हल्की रोशनी में खुशबू की चूत जो कि इस समय अंकेश के लंड से चुद रही थी, काफी खुली-खुली सी लग रही थी। कमरे की चमकती रोशनी में अंकेश के खड़े लंड को खुशबू की चूत के रस से चमचमाते हुए देखा। उसका लंड सुजीत से थोड़ा लंबा रहा होगा, पर सुजीत का लंड उससे कहीं ज्यादा मोटा था।
सुजीत भी खुशबू को नंगा देखकर बहुत खुश था। मुझे याद आया कि सुजीत को हमेशा बड़े माम्मों और बड़े चूतड़ों वाली औरतें पसंद थीं। मैंने अंकेश को अपने नंगे जिस्म को भारी नज़रों से अंकता पाया और उसे शर्तिया मेरे भारी माम्मे और गोल-गोल भरे-भरे चूतड़ भा गए थे।
अंकेश ने बिस्तर पर आकर खुशबू की खुली जाँघों के बीच झुकते हुए अपना लंड उसकी गीली चूत से फिर से भिड़ा दिया। खुशबू भी जैसे ही अंकेश का लंड अपनी चूत के मुँह में पाए तो झट से अपनी टाँगों को ऊपर उठा दी और घुटनों से अपने पैरों को पकड़ लिया। अब खुशबू की चूत बिल्कुल खुल गई और अंकेश ने एक जोरदार झटके के साथ अपना लंड खुशबू की चूत में डाल दिया।
यह देख सुजीत ने भी अपना लंड अपने हाथ से पकड़कर मेरी चूत के छेद से लगाया और एक झटके के साथ मेरी चूत के अंदर घुसेड़कर मुझे चोदने लगा। अंकेश हालाँकि खुशबू को बहुत जोर से चोद रहा था पर उसकी नज़र मेरी चूत पर टिकी हुई थी। सुजीत का भी यही हाल था और उसकी नज़र खुशबू की चुदती हुई चूत पर से हट नहीं पा रही थी।
मुझे इन अंकेश और प्रिया के साथ-साथ चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आ रहा था और अब मैं भी गरम होकर अपनी कमर उचक-उचककर सुजीत का लंड अपनी चूत में डलवा रही थी और मेरे बगल में खुशबू भी अपनी टाँगों को उठाकर अंकेश का लंड अपनी चूत से खा रही थी।
पलंग पर चार लोगों के लिए जगह कम थी और हमारे जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे। खुशबू का पैर मेरे पैर से और सुजीत की जाँघ अंकेश की जाँघ से छू रहा था। थोड़ी देर तक मैं अपनी चूत चुदवाते हुए खुशबू को देख रही थी और थोड़ी देर के बाद मैंने अपनी हाथ आगे बढ़ाकर खुशबू का हाथ पकड़ लिया।
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खुशबू ने खुशी का इज़हार करते हुए मेरे हाथ को दबाया और अपनी कमर उचकाते हुए मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई। यह देख अंकेश ने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे पेट पर मेरी चूत से थोड़ा ऊपर रख दिया। मुझे अंकेश का हाथ अपने पेट पर बहुत अच्छा लगा और मैंने अंकेश से कुछ नहीं कहा।
अंकेश की हरकत देखकर सुजीत ने भी अपना हाथ खुशबू की जाँघ पर उसकी चूत के पास रख दिया और खुशबू की जाँघों को हल्के-हल्के से सहलाना और दबाने लगा। अंकेश और सुजीत की इन हरकतों से हम सबमें एक नई तरह की चुदास भर गई और दोनों मर्द हम दोनों औरतों को जोर-जोर से चोदने शुरू कर दिए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अचानक सुजीत को हमारा वो वार्तालाप याद आया जिसमें हम किसी दूसरे जोड़े के साथ चुदाई की कल्पना की थी। सुजीत ने मुझसे पूछा, “अंशिका क्या तुम आज किसी नई चीज़ का आनंद उठाना चाहोगी?” मैं सुजीत से पूछी, “तुम्हारा क्या मतलब है सुजीत? तुम और किस नए आनंद की बात कर रहे हो? अभी तो मुझे खुशबू के साथ उसकी पलंग पर लेटकर तुमसे अपनी चूत चुदवाने में बहुत आनंद मिल रहा है।”
तब सुजीत मुस्कुराते हुए मेरी चुचियों को अपने हाथों से मसलते हुए बोला, “आज अंकेश से चुदवाने का मज़ा लेने के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?” मैं और सुजीत कल्पना में अंकेश और खुशबू के साथ इतनी बार एक-दूसरे को चोद चुके थे कि ये सब बातें मेरे लिए नई नहीं थीं।
इसलिए मैं सुजीत से बोली, “सुजीत, आज मेरी चूत इतनी गर्म हो चुकी है कि मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आज मुझे कौन चोदता है, तुम या अंकेश। बस मुझे अपनी चूत में कोई न कोई लंड का ठोकर चाहिए और वो लंड इतना ठोकर मारे कि मैं जल्दी से झड़ जाऊँ। इस समय मैं अपनी चूत की खुजली से बहुत परेशान हूँ।”
यह सुनते ही सुजीत ने अंकेश की ओर मुड़कर कहा, “अंकेश, क्या तुम आज एक नए आनंद के लिए अंशिका की चूत में अपना लंड डालना चाहोगे? क्या तुम आज अंशिका को चोदना चाहोगे?” सुजीत की बात सुनकर अंकेश झटपट खुशबू की चूत में चार-चार कस-कसकर धक्के मारे और खुशी से बोला, “ज़रूर सुजीत, पर अगर खुशबू भी एक नए आनंद के लिए सुजीत से अपनी चूत चुदवाना चाहती है तो।”
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जब मैंने देखा कि अंकेश और सुजीत अपने-अपने बीवियों को दूसरे से चुदवाना चाहते हैं तो फिर मैंने हिम्मत करके खुशबू से पूछी, “खुशबू, क्या तुम भी एक नया आनंद लेना चाहती हो, सुजीत का लंड अपनी चूत में डलवाकर उससे चुदवाना चाहती हो?”
खुशबू थोड़ी देर तक सोचने के बाद अंकेश के गले में अपनी बाहों को डालकर और उसके सीने से अपनी चुचियों को रगड़ते हुए बोली, “क्यों नहीं! अगर दूसरे मर्द के साथ अंशिका अपनी चूत चुदवा सकती है और यह अंशिका के लिए ठीक है तो मुझे क्यों फर्क पड़ना चाहिए?
मैं भी सुजीत के लंड से अपनी चूत चुदवाना चाहती हूँ और यह भी देखना चाहती हूँ कि अंकेश का लंड कैसे अंशिका की चूत में घुसता है और निकलता है और कैसे अंशिका अपनी चूत अंकेश से चुदवाती है। आज मैं भी अंशिका की तरह चिनाल बनना चाहती हूँ और किसी दूसरे मर्द का लंड अपनी चूत में पिलवाना चाहती हूँ।”
और यहीं हम लोगों की अदला-बदली चुदाई का आगाज था। खुशबू की बातों को सुनकर अंकेश ने अपना लंड खुशबू की चूत से बाहर खींच लिया और सुजीत से बोला, “चल अब हम अपनी-अपनी बीवियाँ बदलकर उनकी चूत को चोदने का सबसे अद्भुत नज़ारा लेते हैं।”
अंकेश की बात सुनकर सुजीत ने भी अपना लंड मेरी चूत में से निकाला और खुशबू की ओर बढ़ गया। अंकेश भी अपने हाथ से अपना लंड पकड़कर मेरे पास आया। अंकेश मेरे पास आकर मेरी जाँघों के बीच झुकते हुए उसने पहले मेरी चूत पर एक जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपना लंड मेरी कुलबुलाती हुई चूत में लगाया और एक धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अंदर घुसा दिया।
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मैं भी अपनी कमर उचकाकर अंकेश का पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में डलवा लिया। फिर मैं अपनी चूत में अंकेश का लंड लेती हुई मुड़कर देखी कि सुजीत ने भी खुशबू की चूत मारने का आसन बदल लिया है और वो अब खुशबू को घोड़ी बनाकर कुंडे होने के लिए कहा। उसके बाद सुजीत ने खुशबू के बड़े चूतड़ों को पकड़कर उसे पीछे से चोदना शुरू कर दिया। खुशबू घोड़ी बनकर सुजीत के धक्कों का जवाब देने लगी और मैं भी अंकेश के ऊपर से तेजी से अंकेश को चोदने लगी।
थोड़ी ही देर में हम चारों एक साथ झड़ गए। झड़ते समय अंकेश ने मुझे अपने से चिपका लिया और अपना लंड जड़ तक मेरी चूत में घुसाकर अपना पूरा का पूरा माल मेरी चूत की गहराई में छोड़ दिया। उधर सुजीत भी खुशबू को अपने से चिपकाकर खुशबू की चूत अपने लंड के पानी से भर दी। झड़ते वक्त मैं और खुशबू ने अपने हाथों से अंकेश और सुजीत को अपने से सटा लिया था और जैसे ही चूत के अंदर लंड का फव्वारा छूटा, चूत ने भी अपना-अपना फव्वारा छोड़ दिया।
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