Kamuk Malkin Chudai Kahani
मैं खुशबू हूँ, 25 साल की एक खूबसूरत महिला। अभी तीन साल पहले ही मेरी शादी मनीष से हुई है। मनीष रेलवे में एक अच्छे पद पर कार्य करते हैं। हमें सरकार की तरफ से रहने के लिए एक काफी बड़ा बंगला मिला हुआ था। मैं शादी के दो साल बाद गौना होने पर अपने पति के साथ रहने आ गई थी। Kamuk Malkin Chudai Kahani
मैं एक बहुत ही सेक्सी लड़की हूँ। मेरी शादी से पहले कई लड़कों से अफेयर रहे थे। शादी से पहले मेरे एक बॉयफ्रेंड ने मेरी सील तोड़ी थी। शादी के बाद जब मेरा पति वापस चला गया तो मैंने उस बॉयफ्रेंड के साथ खूब ऐश किए। अब तो किसी का डर नहीं था।
मैं शुरू से ही काफी खुले विचारों की लड़की थी। और शादी के बाद पति भी वैसा ही मिला था। मैं तो शादी के दो दिनों बाद चौंक गई जब मनीष ने कहा, “क्या अम्मा की तरह घूँघट लिए रहती हो? मुझे मॉडर्न ड्रेस पसंद हैं। मेरे साथ जब भी रहोगी, कम कपड़ों में रहोगी।”
उन्होंने शादी के बाद मुझे ट्रांसपेरेंट गाउन, छोटी स्कर्ट और गहरे गले वाले कपड़े खरीद दिए। अपने साथ ले जाते समय उन्होंने मुझे एक भी भारी साड़ी या लंबे कपड़े नहीं ले जाने दिए। दो साल बाद जब गौना होने के बाद मैं अपने ससुराल आई तो उस लड़के का साथ छूट गया।
कुछ ही दिनों में मनीष मुझे अपने साथ ले आए। मनीष का बंगला काफी बड़ा था। उसमें सामने एक गार्डन था और काफी पेड़-पौधे लगे थे। हम दोनों को ही बागवानी का शौक था। यहाँ सरकार की तरफ से एक माली और एक घर में काम करने वाला नौकर मिला हुआ था। दोनों आदमी सरकारी मुलाजिम थे।
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माली एक बिहारी था — राम लाल। कोई 55 साल का, बहुत ही तंदरुस्त आदमी था। नौकर का नाम सुरेश था। वो मनीष से कुछ ही बड़ा था। उसकी उम्र 30-32 के आसपास होगी। राम सुबह 7 बजे काम पर आ जाता था। गार्डन की सफाई और पानी खाद देने में ग्यारह बज जाते थे, फिर वो स्टेशन पर काम करने चला जाता था।
वो अकेला ही हमारे बाउंड्री के अंदर बने सर्वेंट्स क्वार्टर में रहता था। वो दिन भर एक चौड़ी हाफ पैंट और खाली बदन में बगीचे में काम करता रहता था। गर्मी में पसीने से उसके काले बदन में मसल्स शीशे की तरह चमक उठते थे। मैं कई बार चोरी-छिपे उसके बदन को निहारती थी।
एक दिन मैं किचन में थी। उसका कमरा किचन की खिड़की के सामने ही था। मैंने देखा कि वो बाहर निकलकर चारों ओर देखा। मैं झट से ओट में हो गई। फिर वो अपना लिंग निकालकर पेशाब करने लगा। उसका लिंग उसके हाथों में ऐसा लग रहा था मानो वो किसी मोटे पाइप से बगीचे में पानी दे रहा हो।
पेशाब करने के बाद वो किचन की खिड़की की तरफ एक बार देखा। मैं वापस छिप गई। अब वो अपने लिंग को सहला रहा था। कुछ ही देर में उसका लिंग खड़ा हो गया। मैंने देखा उसका लिंग करीब-करीब 2 इंच मोटा और दस इंच से ज्यादा लंबा था। मैं छिप-छिपकर उसके लिंग को निहारती रही।
सुरेश पास के गाँव में रहता था। वो भी काफी तंदरुस्त आदमी था। रोज सुबह 9:30 से 10 बजे के बीच आ जाता। फिर किचन का काम और सारे घर में सफाई करता। खाना भी मेरे साथ ही खाता। शाम को सारे काम निबटा कर घर चला जाता। मैं सुबह घर में घुटनों तक के झीने गाउन पहने रहती थी।
अंदर तो मनीष कुछ भी पहनने नहीं देते थे। उनके जाने से पहले ही राम लाल काम पर आ जाता था। उसके सामने अर्धनग्न अवस्था में घूमने में शुरू-शुरू में काफी शर्म आती थी। ट्रांसपेरेंट गाउन से मेरा नग्न बदन साफ दिखता था। थोड़ा सा झुकती तो मेरी छातियाँ आँखों के आगे झूलने लगतीं और पीछे से टांगों का जोड़ नजर आ जाता। मेरी गांड साफ बाहर दिख जाती।
मैंने कई बार राम लाल के लंड को फूलकर खड़ा होते देखा था। मैंने बातों-बातों में मनीष को समझाने की कोशिश की कि सारा दिन वो घर पर नहीं रहते और मुझे लगभग नग्न हालत में दो गैर-मर्दों के साथ पूरा दिन रहना पड़ता है। कहीं किसी दिन कुछ हो जाता। लेकिन वो नहीं मानते थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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कहते, “ये शीशे सा बदन कम कपड़ों में तुम्हें एकदम परी के जैसा बना देता है। अगर किसी दिन जोश में किसी ने कुछ कर भी दिया तो कौन सा तुम घिस जाओगी। एक राज की बात बताऊँ। मेरी तो काफी दिनों से तमन्ना है कि तुम्हारे इस नाजुक बदन को अपनी आँखों के सामने किसी अजनबी के द्वारा मसला जाता देखूँ।”
धीरे-धीरे मैं भी लोगों की भूखी नजरों के आदी हो गई। अब मुझे भी लोगों को सताने में मजा आने लगा था। मैं सारा दिन घर में नाममात्र के कपड़ों में रहती थी। कई बार किचन में काम करते-करते राम के हाथ मेरी छातियों को छू जाते या मेरी जाँघों के अंदरूनी भाग पर रगड़ खा जाते।
मैं कुछ नहीं बोलती थी। बस मुस्कुरा के रह जाती थी। धीरे-धीरे उसकी हरकतें बढ़ने लगीं। अब वो जानबूझकर ऐसे मौके ढूँढता था जिससे वो मेरे बदन को छू सके। उस दिन की बात है। मनीष के जाने के बाद मैं झीनी नाइट्टी में ही बाहर आई। मेरी नाइट्टी कंधे पर सिर्फ दो डोर से टिकी थी।
अंदर कुछ नहीं पहन रखा था। राम लाल क्यारियों में पानी दे रहा था। एक गुलाब बहुत प्यारा लग रहा था। उसे पास से देखने के लिए मैं झुकी, लेकिन राम लाल की आँखों से आँखें मिली तो मैंने पाया वो मेरे गाउन के खुले गले से झाँकती गोलाइयों को निहार रहा था।
मैं ये देखकर घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई। लेकिन जैसे ही उठने लगी, पैर में पता नहीं कैसे गाउन फँस गया। जैसे ही उठी, “चट्” की आवाज के साथ मेरे दाहिने कंधे का स्ट्रैप टूट गया। मेरी गाउन खुल गई और मेरा दाया बूब बाहर निकल आया।
इससे पहले कि मैं अपने बूब को ढकती, राम लाल अपनी जगह से कूदकर खड़ा हुआ और एक झटके में मुझे किसी खिलौने की तरह गोद में उठा लिया और अपने कमरे की तरफ बढ़ चला। मेरे बड़े-बड़े बूब्स गाउन से बाहर निकलकर राम लाल के पसीने से लथपथ चौड़े सीने से रगड़ खा रहे थे।
उसके सीने से पिसे जा रहे थे। मैं अपने बचाव के लिए हाथ-पैर मार रही थी। लेकिन उसकी पकड़ काफी मजबूत थी। “छोड़ दे… छोड़ दे कमीने! मैं तेरे साहब से शिकायत कर दूँगी तो तुझे वो पुलिस से इतनी मार खिलवाएगा कि तेरी रूह भी काँप उठेगी।”
मैं अपने नाखूनों से उसके सीने को नोच रही थी। मगर उस पर किसी बात का कोई असर नहीं हो रहा था। उसने मुझे ले जाकर अपनी चारपाई पर पटक दिया। मैं झपटकर उठने को हुई तो उसने मेरे गालों पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। मैं कुछ सेकंड तो सदमे जैसी हालत में रही। मुझे अपना सिर घूमता सा लगा। इसी दौरान उसने मेरे गाउन को मेरे शरीर से नोचकर फेंक दिया।
“साली नखरे करती है। मेरे सामने नंगी होकर घूमती रहती है, उसमें कोई बुराई नहीं। आज चोदने के लिए उठा लाया तो आसमान सिर पर कर रही है।”
मैं वापस उठने लगी तो उसने दोनों गालों पर दो करारे थप्पड़ और मार दिए। मैं नंगी उसके गंदे बिस्तर पर गिर पड़ी। मेरी साँसें जोर-जोर से चल रही थीं। आँखों से आँसू बह निकले। अब मुझमें अपने बचाव की क्षमता खत्म हो चुकी थी। मैंने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और उसकी अगली हरकत का इंतजार करने लगी।
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उसने अपनी हाफ पैंट को शरीर से अलग कर दिया। उसका काला लिंग मेरे सामने था। उसका लिंग काफी मोटा था। मैं अपनी योनि में उसके लिंग के घुसाए जाने की कल्पना से काँप उठी। उसका बदन पूरा पसीने से भीगा हुआ था। बदन से पसीने की बदबू आ रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मौसम भी गर्मी का था और कमरे में कोई पंखा भी नहीं था। मेरे बदन पर भी पसीने की बूँदें चमकने लगी थीं। उसने मेरे ऊपर लेटकर पहले मेरे स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें जोर-जोर से मसलने लगा। “साली रांड, क्या मम्मे हैं तेरे! कब से इन गुब्बारों को मसलने की तमन्ना थी। आज तो इनसे जी भरकर खेलूँगा।” वो मेरे बूब्स को बुरी तरह मसलने लगा। “आह्… ओह्ह्… म्म्मा…” मैं चीख रही थी।
उसने एक बूब को अपने मुँह में भरकर उस पर तेजी से दाँत गड़ा दिए। मैं दर्द के मारे उछल पड़ी। वो दोनों निप्पल्स को पकड़कर एक साथ अपने मुँह में डाल लिया और मेरी दोनों छातियों को अपने हाथों से पकड़कर निचोड़ रहा था। अभी बच्चे नहीं हुए थे, इसलिए उनमें से कुछ निकलने का सवाल ही नहीं था। लेकिन वो ऐसे उन्हें निचोड़ रहा था जैसे कि अगर एक बूँद दूध भी हो तो वो निकलकर रहेगा। मैं जोर-जोर से चीख रही थी।
“साली अब कैसे चीख रही है! अब पता चलेगा इन कबूतरों को नचाते हुए घूमने का फायदा। चल रांड, उठकर मेरे लंड को चूस।”
“नहीं… नहीं… मैं ये नहीं कर सकती। तुम मेरे शरीर से जैसे और जितना खेलना चाहो खेल सकते हो, मगर मैं ये गंदा काम नहीं कर सकती।”
“साली, तुझसे किसी ने तेरी राय पूछी क्या? अगर मेरे हाथों से पीटना नहीं चाहती तो जैसा कहता हूँ, वैसा करती रह। नहीं तो मार-मारकर भूरता बना दूँगा।”
मैं सुबकने लगी, “प्लीज… कम से कम इसे धो तो लो… कितना गंदा है ये।”
“मुँह खोल छिनाल!” उसने मेरे निप्पल्स को जोर से उमेठते हुए कहा।
मैं दोनों जबड़ों को कसकर बंद किए हुए थी। ये देखकर उसका गुस्सा और बढ़ गया। उसने मेरे निप्पल्स को इतनी जोर से उमेठा कि लगा वो टूटकर ही अलग हो जाएंगे। मैं दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाई और मैंने अपना मुँह खोल दिया चीखने के लिए।
उसने अपना काला और मोटा लिंग मेरे मुँह में डाल दिया। उसके लिंग से गंदी बदबू आ रही थी। मुझे एक जोर की उबकाई आई। लेकिन उसने अपना लिंग बाहर नहीं निकाला। मैं अपना पेट पकड़े अपनी उबकाई को काबू कर रही थी। वो मेरे मुँह में अपना लंड जितना अंदर तक गड़ सकता था, गड़ दिया।
मेरा दम घुटने लगा था। लेकिन कुछ ही देर में उसने अपने लिंग को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया, जिससे साँस में साँस आई। उसका लिंग मेरी हूक से लिसड़ गया था। वो तेज-तेज धक्के मारने लगा। मैंने अपना सिर हटाना चाहा तो उसने मेरे सिर को बालों से पकड़कर अपने लिंग पर दबा दिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
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मेरा जबड़ा दुखने लगा था। उसका लिंग मुँह में फूलने लगा। मुझे लगा बस अब छूटने ही वाला है। मेरा गला भी उसके लिंग के धक्कों से दुख रहा था। मुझे चाहती थी कि उसका मुँह में ही निकल जाए, जिससे मेरी चूत में वो अपना रस नहीं डाल सके। मैंने कोई दवाई नहीं ली हुई थी, इसलिए बच्चा ठहरने का डर था।
लेकिन उसने अपना लिंग बाहर खींच लिया। उसका काला लिंग मेरे थूक और उसके रस से चमक रहा था। उसके लिंग से रस की एक धार मेरे होंठों पर चिपकी हुई थी। “चल रांड, अब टांगें फैलाकर मेरे लिंग को अपनी चूत से चूस।” उसने मुझे धक्का देकर चारपाई पर गिरा दिया और मेरी टांगों को पकड़कर अपनी ओर खींचा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चारपाई की रस्सियों पर रगड़ने से मेरी पीठ दुखने लगी थी। उसने मेरी टांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर फैलाया। मेरी योनि का मुँह उसके सामने था। मैं अपने बचाव में कुछ भी नहीं कर पा रही थी। मैं अपने मुँह में हाथ रखकर अपनी मुँह से निकलती आवाज को रोकने की कोशिश कर रही थी। कहीं उसे ये न लगे कि मुझे मजा आ रहा है। उसने मेरी योनि पर अपना लिंग सटाया और धक्का मारा। उसका लिंग थोड़ा सा ही अंदर गया।
“बड़ी टाइट है तेरी साली! तुझे तेरा पति चोदता भी है या नहीं?” वो हँसा, “होगा साले का बच्चे के साइज का। आज तुझे पता चलेगा किसी मर्द का लिंग कैसा होता है।”
यह कहकर उसने एक और धक्का मारा। मेरे मुँह से “आह्ह्ह्” की आवाज निकली और उसका लिंग मेरी योनि को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। ये गरीब लोग अपने लंड को अक्सर खुला रखते हैं, बिना कच्छे के, इसलिए इनका लिंग अक्सर काफी बड़ा होता है। इन्हें झेलने में हम जैसी नाजुक कलियों को पसीना आ जाता है। लेकिन एक बार अगर आदत पड़ गई तो फिर दूसरा कोई लिंग भाता ही नहीं है।
वो मुझे तेज-तेज धक्के मारने लगा। इस उम्र में भी राम लाल में काफी दम था। मेरे पति तो आज तक पाँच-दस मिनट से ज्यादा कभी चोद नहीं पाए थे। लेकिन वो एक ही पोज में मुझे दस मिनट तक चोदता रहा। मैंने हाथ बढ़ाकर पास पड़ी अपने फटे हुए गाउन को उठाया और उसके पसीने से भरे सीने को पोंछने लगी। उसके धक्कों में कोई कमी नहीं आई।
दस मिनट बाद वो उठा और चारपाई पर सीधा होकर लेट गया। मैं उसके लिंग पर अपनी चूत रखकर अपने हाथ उसके घुटनों पर रखकर उसके लिंग पर बैठ गई। मैं अब उसके लिंग पर अपनी चूत को ऊपर-नीचे चला रही थी। वो पीछे से मेरे बगलों से अपने हाथ निकालकर मेरे मम्मों को मसल रहा था।
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हमें समय का ध्यान नहीं रहा। इसी तरह मैंने उसे कोई पाँच मिनट चोदा होगा कि दरवाजे को किसी ने खटखटाया और आवाज आई, “चाचा कहाँ हो? मेमसाहब को देखे रहे का?” और इसी के साथ दरवाजा खुल गया। ये सब एक सेकंड में हो गया। इससे पहले कि हम संभालते, दरवाजे पर सुरेश खड़ा था।
मेरी हालत देखकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया। मैंने जल्दी से अपने गाउन से अपनी छाती को ढकना चाहा, मगर राम लाल ने मेरे हाथ से गाउन को खींचकर अलग कर दिया। मैं उठकर भाग जाना चाहती थी, मगर राम लाल ने सख्ती से मेरे बूब्स पकड़ लिए।
“का टुकुर-टुकुर देख रहा है बाबुआ? आ जा, इस बुरचोदी का सम्हाल।”
सुरेश जैसे होश में आया और कूदकर अंदर आ गया।
“ए ले, इन दुद्दू को चूस-चूस कर देख, मजा आ जाएगा।” राम लाल ने मेरे स्तनों को खींचकर उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा।
सुरेश ने आगे बढ़कर मेरे निप्पल्स मुँह में ले लिए और उन्हें चूसने लगा। मैं उनसे अपने को छुड़ाने के लिए हाथ-पाँव मार रही थी। लेकिन दो लंबे-चौड़े आदमियों के आगे खुद को बिल्कुल बेबस महसूस कर रही थी। कुछ देर तक मेरे बूब्स को मसलने के बाद मुझे उठाकर चारपाई पर हाथ-पैरों के बल डॉगी पोजीशन में झुकाकर राम लाल ने पीछे से मेरी योनि में अपना लिंग डाल दिया और सामने की तरफ से सुरेश आकर अपना लिंग मेरे मुँह में डाल दिया।
दोनों एक साथ धक्के मारने लगे। कुछ देर तक यूं ही धक्के मारने के बाद सबसे पहले राम लाल ने मेरी योनि में अपना रस उड़ेल दिया। वो वैसे ही काफी देर से कर रहा था। वो मेरी बगल में चारपाई पर गिरकर लंबी-लंबी साँसें ले रहा था। सुरेश ने ये देखकर अपना लिंग मेरे मुँह से निकाल लिया और मेरे पीछे आकर मेरी टपकती हुई चूत पर अपना लंड सटाकर एक धक्के में अंदर कर दिया।
फिर शुरू हो गया मेरी योनि में धक्के मारने का सिलसिला। मैं धक्के खाते-खाते थक गई और चारपाई के ऊपर पसर गई। सुरेश ने मेरी कमर को खींचकर उठा रखा था और पूरा बदन चारपाई पर था। चारपाई की रस्सियों की रगड़ से मेरे बूब्स दुखने लगे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
काफी देर तक चोदने के बाद उसने मेरी योनि के अंदर अपना रस उड़ेलना शुरू किया। उसके लिंग से कई मिनट तक रस निकलता रहा। इतना वीर्य निकाला कि मेरी योनि से निकलकर मेरे जंतनों के ऊपर से होते हुए चारपाई पर गिरने लगा। मैं थककर चारपाई पर ही ढेर हो गई।
सुरेश कुछ देर तक इंतजार करता रहा फिर मेरी बाँह पकड़कर मुझे अपनी ओर खींचा, “अब तो छोड़ दो। तुम दोनों ने जितना जी चाहा, जैसा चाहा मुझे रगड़ा। अब और नहीं। मैं थक गई हूँ।” मैंने अपने को उससे छुड़ाते हुए कहा।
“अरे अभी तो मेरे बदन की गर्मी बुझी ही नहीं। आज तो सारा दिन तुझे रगडूँगा, तब जाकर मिटेगी मेरे बदन की प्यास।”
यह कहकर उसने एक झटके में मुझे खींचकर अपनी गोद में उठा लिया और मुझे नंगी हालत में लेकर राम लाल के कमरे से निकल गया। वो खुद भी बिल्कुल नंगा था। गनीमत थी कि बाउंड्री के साथ-साथ ऊँचे पेड़ों की वजह से बाहर का आदमी कुछ देख नहीं पाता था, नहीं तो गजब ही हो जाता। मुझे उसी हालत में उठाए हुए वो मेरे घर के अंदर घुसा। मुझे लेकर सीधा बेडरूम में आया।
“पहले मैं नहाना चाहती हूँ,” मैंने कहा।
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वो मुझे उसी तरह बाहों में लेकर बाथरूम में घुसा। फिर हम दोनों शावर के नीचे एक-दूसरे के बदन को मसल-मसलकर नहाए। मैंने अपने हाथों में उसके लिंग को लेकर उसे साबुन से साफ किया। वो मेरे कंधे के ऊपर दबाव डालकर मुझे अपने घुटनों पर झुकने के लिए बाध्य कर रहा था।
मैं उसके इशारे को समझकर उसके सामने घुटनों के बल बैठकर उसके लिंग को होंठों से चूमने लगी। फिर जीभ निकालकर उसके लिंग के ऊपर और उसके बालों पर फिराई। फिर मुँह खोलकर उसके लिंग को मुँह में लेकर चूसने लगी। काफी देर तक उसे चूसने के बाद उसने मुझे ऐसा करने से रोका और मुझे खींचकर अपने सामने खड़ा किया।
फिर मुझे बाहों में भरकर मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए। मैंने अपनी जीभ निकालकर उसके मुँह में डाल दी। हमारे गीले बदन एक-दूसरे के बदन से चिपक गए थे। उसने कुछ झुककर मेरे दोनों निप्पल्स को चूमा। मेरे स्तनों पर उसके और राम लाल के दाँतों के लाल-लाल निशान साफ दिख रहे थे।
फिर बदन पोंछकर वो मुझे किसी फूल की तरह उठाकर बेडरूम में लेकर आया। फिर मुझे अपने सामने नंगी खड़ा करके मेरे नग्न बदन को हर एंगल से देखा। मुझे अब बिस्तर पर लिटाकर मेरे बदन को अपने होंठों से चूमने लगा। मेरे पैरों के अँगूठे से लेकर सिर तक पूरे बदन पर उसने अपने होंठ फिराए। इस तरह कोई मुझे पहली बार प्यार कर रहा था। मैं उत्तेजना में काँप रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसने मुझे आखिर में सीधा करके मेरी टांगों को अपने कंधे पर रखा। पास पड़ा तकिया उठाकर मेरी कमर के नीचे रख दिया। इससे मेरी योनि ऊपर की ओर उठ गई थी। उसने मेरी योनि में अपना लिंग डालकर मेरे ऊपर धक्के मारने लगा। काफी देर तक यूं ही चोदने के बाद मुझे बिस्तर से उठाकर जमीन पर खड़ा किया और खड़े-खड़े ही कुछ झुककर मेरी योनि में अपना लिंग डालकर चोदने लगा।
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इस पोज में ज्यादा देर तक नहीं कर पाया और मुझे उठाकर वापस बिस्तर पर गिर गया। अब वो नीचे था और मैं ऊपर। अब मैं उसे उछाल-उछालकर ठोक रही थी। अब तक मेरा दो बार रस निकल चुका था। मैं अब उसे पूरी संतुष्टि देना चाहती थी। वो काफी देर तक बिना झड़े चोद रहा था। अब मैं उसे खल्लास करना चाहती थी। मैंने अपनी योनि के मसल्स का दबाव उसके लिंग पर बढ़ा दिया और उसके लिंग को अपनी योनि से एक तरह से चूसने लगी। वो ज्यादा देर ठहर नहीं पाया और मेरे अंदर ढेर सारा डिस्चार्ज कर दिया।
हम इसी तरह काफी देर तक लेटे रहे। पूरे दिन मैं उनके साथ नंगी रही। दोपहर को एक बार फिर दोनों ने मुझे बिस्तर पर सैंडविच बनाकर रगड़ा। इस बार राम लाल ने अपना मोटा लिंग मेरी गांड में डाल दिया था। मैं दर्द से बिलखती रही। लेकिन मेरी गांड में डिस्चार्ज हुए बिना उसने मुझे नहीं छोड़ा। इस तरह अब रोज मैं मनीष के जाने के बाद दोनों के लिंग अपनी योनि में लेती हूँ। अब तो मैं मल्टीपल सेक्स की आदी हो चुकी हूँ। मुझे सिर्फ एक बार करवाकर मजा ही नहीं आता है। मैं तो सामूहिक सेक्स की आदी हो गई हूँ।
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