Hot Padosan Fuck XXX
इस बार की स्टोरी कुछ अलग है क्योंकि आज से पहले मुझे लड़की या औरत को चोदने में ज्यादा जुगाड़ नहीं भिड़ानी पड़ती थी क्योंकि घर में ही मम्मी और सिस को चोदा था फिर अपनी एक बुआ भी थी जिसको मैंने जमकर चोदा और कई बार गांड भी मारी जोकि आप सब को मालूम है। Hot Padosan Fuck XXX
इस बार की कहानी में अलग ये है कि इस बार की कहानी में एक लड़की जिसका नाम संगीता है वो बचपन से मेरे पड़ोस में रहती थी। वो जब छोटी थी तब भी बहुत खूबसूरत थी मगर जब बड़ी हुई तो जैसे क़यामत ही आ गई। उसने कमाल का उत्थान लिया था। उसके लाल-लाल गाल और सुर्ख होंठ ऐसे लगते थे जैसे कि लिपस्टिक लगाए हो पर वो कभी भी लिपस्टिक का इस्तेमाल नहीं करती थी।
खैर हम लोग साथ-साथ ही पढ़े थे पर उसको देखकर कभी भी मेरे दिल में उसके लिए कोई गलत विचार नहीं आया और कुछ दिन बाद ही उसकी शादी हो गई। शादी के 6 महीने बाद वो जब वापस घर आई तो और भी कमाल की हो गई थी। उसकी चूचियाँ जो कभी बहुत छोटी हुआ करती थीं अब बिलकुल शेप में आ गई थीं और उसकी गांड का उभार भी सलवार के ऊपर से कहर ढा देता था।
एक दिन जब मैं घर आया तो वो मम्मी से बात कर रही थी। मैं पहली नज़र में तो पहचान ही नहीं पाया तब मम्मी ने कहा- बेटा ये संगीता है। तब मैंने उसे गौर से देखा तो वो मुस्कुरा दी और थोड़ी देर तक हम लोग इधर-उधर की बात करते रहे और फिर हफ्ते भर बाद वो चली गई पर मेरे दिल में उसकी उभरी हुई गांड और खूबसूरत चूचियाँ समा गई थीं।
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मैंने तब ही सोच लिया था कि साली के ससुराल जाकर अगर इसको अपने लंड के नीचे नहीं लिटाया तो कुछ भी नहीं किया और यही सोचकर मैंने उसका ऐड लिया था और हफ्ते भर बाद मैं भी उसकी ससुराल पहुँच गया। और जब वहाँ देखा तो संगीता और उसकी काम वाली बाई जिसकी उम्र 42-45 के लगभग होगी उन दोनों के अलावा वहाँ कोई नहीं था।
तब मैंने कहा- बाकी लोग कहाँ हैं?
वो बोली कि हम लोग अलग ही रहते हैं कभी-कभी सास-ससुर से मिलने चले जाते हैं और ये तो अक्सर ही टूर पर रहते हैं अभी कल ही पंजाब गए हैं 10 दिन बाद आएँगे।
फिर उसने पूछा- यहाँ कैसे आना हुआ?
तब मैंने कहा- काम के सिलसिले में।
उसने कहा- कहाँ ठहरे हो? मैंने कहा- होटल में।
तब वो नाराज़ हो गई और कहने लगी- आप मुझे गैर समझते हो इतना बड़ा घर होने के बाद भी आप होटल में रुके हो। जाओ जाकर सारा सामान ले आओ।
मैंने कहा- अगर तुम्हारे हसबैंड को बुरा लगा तब?
वो हँस दी और बोली- वो बहुत एडवांस है और ये कहकर मैं बाहर गया और होटल से सारा सामान ले आया।
उसका घर वाकई बहुत बड़ा था। जब रात को आया तो देखा वो एक निहायत ही खूबसूरत साड़ी पहने थी आसमानी कलर की जो बिलकुल प्लेन थी और जिसमें से उसके जिस्म का गोरा रंग और चमक रहा था। वो हमेशा से अपनी ब्लाउज़ अलग ही स्टाइल का पहनती थी जिसका बैक पोर्शन काफी खुला होता था और आगे से बिलकुल नॉर्मल और उसकी हुक भी आगे से ही लगी होती थीं।
जब मैंने उसकी पीठ देखी तो एक ठंडी आह निकल गई मेरे मुँह से। मैंने बहुत सारी लड़कियाँ देखी थीं पर पता नहीं उसमें कैसे कशिश थी जो मुझे हमेशा अपनी तरफ अट्रैक्ट करती थी पर मैंने कभी भी उसको ज़ाहिर नहीं किया था। उसके बाद हम दोनों ने साथ-साथ खाना खाया और फिर उसने मुझे मेरा बेडरूम दिखाया और कहा कि अब आप आराम करो.
पर मुझे आराम कहाँ मैं यहाँ आराम करने तो आया नहीं था सो मैंने कहा- आओ अभी बातें वगैरह करते हैं फिर सो जाना और ये कहकर वो वहीं बैठ गई और मैंने नोटिस किया था कि उसकी नज़रें भी मुझ पर ही जमी थीं या शायद ये मेरी गलतफहमी थी। उसने अपना डी.वी.डी. ऑन किया और एक इंग्लिश मूवी लगा दी जिसका नाम था अनफेथफुल।
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हालाँकि ये मूवी मैं देख चुका था जो जिस पर यहाँ मर्डर बनी थी जस्ट बिलकुल वैसी ही थी पर मर्डर में उतना ओपन नहीं दिखाया था जितना इस मूवी में था पर स्टोरी सेम थी। खैर हम दोनों ने मूवी देखी और जब भी कोई किस या चोदा-चोदी का शॉट आता था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तब मेरी नज़रें झुक जातीं और वो भी शरमा जाती पर हम दोनों ही देख रहे थे और मैं मन ही मन सोच रहा था जैसे ये लाइन पर आ रही हो पर ऐसा नहीं था वो शायद मुझे तड़पा रही थी और मूवी खत्म होने के बाद वो मुझ पर एक स्माइल करते हुए अपने होंठ बहुत ही सेक्सी अंदाज़ में काटते हुए अपने रूम में चली गई।
मैं रात को सिर्फ लुंगी ही पहनता था और जिसके नीचे फ्रेंची भी उतार देता था और रात को ही मैंने सोचा कि क्यों न मम्मी वाला तरीका ही अपनाया जाए साली पर हो सकता है लंड देखकर चुदवाने का मूड बन जाए उसका और मैंने किया भी यही।
सुबह-सुबह जब वो चाय देने रूम में आई तब उसके आने की आहट से मैंने अपनी लुंगी एक तरफ सरका दी और अपने लंड महाशय को थोड़ा सा सामने लाकर आँख मूँदकर सोने का नाटक करने लगा। वो पहले तो रूम में आई और फिर मेरे लंड की तरफ देखा और थोड़ी देर तकने के बाद उसने मुझे आवाज़ दी-
राज उठो भाई सुबह हो गई और जब मैं तब भी नहीं उठा तो उसने मुझे झकझोर दिया और मैं हड़बड़ा कर कुछ इस अंदाज़ में उठा कि मेरी लुंगी पूरी तरह से हट गई और अब मेरा लंड बिलकुल खुला नज़र आ रहा था। वो उसको देखते हुए फिर मुस्कुराती हुई चली गई।
और मैं और उलझन में पड़ गया और अपने इरादे पर एक बार फिर से गौर करने लगा कि बेटा राज तू वापस घर को चल यहाँ तेरी दाल नहीं गलने वाली। बहुत मज़बूत किस्म की लड़की से पाला पड़ा था और फिर तब ही संगीता की आवाज़ सुनाई पड़ी- राज प्लीज़ ज़रा मुझे टॉवल दे देना और वहीं पर मैं अपनी ब्रा और पैंटी भी भूल आई हूँ वो भी उठा देना और तब तो जैसे मेरी लॉटरी ही खुल गई।
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मैं समझा कि लंड दिखाना काम आया अब वो मुझे टॉवल समेत बाथरूम में खींच लेगी यही सोचकर मैं उसके रूम में जब गया तो वहाँ रेड कलर की ब्रा और पैंटी जो शायद ब्रांडेड थी क्योंकि इतनी खूबसूरत ब्रा मैंने आज तक नहीं देखी थी और पैंटी ऐसी कि मैं सोच में पड़ गया इतनी छोटी सी पैंटी आखिर उसकी चूत ढाँप कहाँ पाती होगी.
और तब मैंने उसकी पैंटी उठाकर सूँघी तो उसमें से बहुत अच्छी स्मेल आ रही थी। मैंने उसकी पैंटी को अपने होंठ के अंदर रखा और उसकी चूत समझकर चूसने लगा बाद में मुझे अपनी इस हरकत पर खुद भी बहुत हँसी आई कि मैं ऐसा दीवाना आखिर हो कैसे गया और फिर बड़े ही मूड के साथ मैंने बाथरूम का दरवाज़ा नॉक किया.
और फिर उसने अंदर से अपना गोरा-गोरा हाथ निकाला और मेरे हाथ से ब्रा पैंटी और टॉवल लेकर इतनी ज़ोर से दरवाज़ा बंद किया कि मेरी झाँटें लाल हो गईं। जी में आ रहा था कि अभी दरवाज़ा तोड़कर साली की चूत की इतनी जमकर चुदाई करूँ कि सारी हेकड़ी निकल जाए और मन ही मन उसको बहुत सारी गालियाँ दे डाली।
पता नहीं साली किस बात पर इतना भांव खा रही है अरे मेरा लंड देखकर तो कोई भी लड़की या औरत फटाक से चुदवाने को तैयार हो जाती पर अब तो संगीता मेरे लिए चैलेंज बन गई थी और अब मुझे 5 दिन हो गए थे पर मैं अभी तक झाँट भी टेढ़ी नहीं कर पाया था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और अब तो वो मुझे अपनी चूचियाँ ऐसे दिखाने लगी थी जैसे कि मैं उसका खसम हूँ और बातें भी बहुत फ्रैंक होकर करती थी पर इतना सब होने पर भी जैसे ही मैं उसके करीब आता वो मेरा इरादा भाँपकर कोई न कोई काम निकालकर उठ जाती थी।
उस दिन अचानक मौसम बहुत खूबसूरत हो गया था चारों तरफ से बादल घिर आए और पानी बरसने लगा तब वो छत पर चढ़ गई और खूब नहाने लगी और मुझको भी आवाज़ दी पर मैं गया नहीं। मैंने सोचा साली अभी नहाएगी और अपने जिस्म के दर्शन करवा कर मुझे परेशान करने के बाद अपने रूम में जाकर सो जाएगी.
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पर तब ही उसकी एक आवाज़ और आई- अरे यार राज यहाँ ऊपर आओ क्या लड़कियों की तरह घबरा रहे हो और जब मैं ऊपर गया तो देखा वो ब्लैक साड़ी में पूरी तरह से भीगी हुई बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। हमेशा की तरह से उसका ब्लाउज़ का बैक पोर्शन काफी डीप तक खुला हुआ था और शायद ब्लाउज़ बहुत टाइट था.
जिसकी वजह से उसके हुक आगे से चिर गए थे जिसके अंदर उसकी व्हाइट ब्रा नज़र आ रही थी। जब उसके गोरे गाल पर पानी की बूँदें गिर रही थीं और उसकी पीठ पर पानी इतना खूबसूरत लग रहा था जिसे देखकर मेरी साँस रुकने लगी। अब वो मेरा हाथ खींचकर छत के बीच में ले आई और बोली कि आज बरसात का मज़ा ले लो और फिर हम दोनों साथ ही में नहाने लगे।
तब ही मेरे दिल से रहा नहीं गया और मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसके सुर्ख होंठ को चूमने लगा। पहले तो वो मुझे चिपककर किस करने लगी फिर धक्का देकर दूर कर दिया और मुस्कुराने लगी। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये चाहती क्या है।
आखिर मैंने अपने हथियार डाल दिए और अपना सर झुकाकर बोला- संगीता प्लीज़ आज मुझे अपने मन की कर लेने दो मैं तुम्हें बहुत दिन से चाहता हूँ यहाँ तक कि तुम्हारी शादी से पहले से पर आज तक हिम्मत नहीं हो पाई।
तब उसने कहा- राज आखिर मैंने तुम्हारे अंदर हिम्मत जगा ही दी मैं भी तुमको चाहती थी पर मैं हमेशा से चाहती थी कि पहल तुम करो पर तुम कभी भी हिम्मत नहीं कर पाए और यहाँ तक कि तुम यहाँ आकर भी आज 10 दिन बाद मुझसे इज़हार कर रहे हो और वो भी इस तरह यार तुम आखिर लड़के हो और मैं लड़की पहल तो तुमको ही करनी थी। चलो देर आए पर दुरुस्त आए। अच्छा ये बताओ अभी तक कुंवारे ही हो या किसी के साथ…..
मैंने कहा- क्या मतलब? तब संगीता खुलकर बोली- अरे मेरे राजा ये बताओ अभी तक किसी लड़की को चोदा है या नहीं।
मैंने नाटक करते हुए कहा- नहीं अभी तक मुझे कुछ भी पता नहीं।
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तब उसने मेरी लुंगी एक झटके से उतारकर बहुत दूर फेंक दी और मैं बिलकुल नंगा हो गया और फटाक से मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैंने उसे आगे बढ़कर चूमना शुरू कर दिया। पहले मैंने उसकी साड़ी उतारी अब वो सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में ही रह गई थी।
बरसात में पूरी तरह से भीगने के बाद भी ऐसा लग रहा था जैसे सारे बदन में आग लगी हो। तब मैं उसकी ब्लाउज़ के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाने लगा और फिर उसके साया को भी कमर की तरफ उठाने लगा और जब मैंने उसकी चिकनी-चिकनी जाँघें देखीं तो मेरे होश ही गुम हो गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो मेरे लंड को रगड़कर सहला रही थी और मेरा लंड पूरी तरह से अकड़कर 9” का हो चुका था। तब मैंने उसकी ब्लाउज़ के हुक खोले और कहा कि मैं हमेशा से तुम्हारे ब्लाउज़ को देखकर सोचा करता था कि कब मुझे इसे उतारने का मौका मिलेगा और आज किस्मत ने साथ दिया।
तब ही संगीता ने कहा- आखिर तुम रहे बेवकूफ के बेवकूफ अरे यार जब मैं राज़ी हूँ तो मेरा एहसान मानो तुम किस्मत को किसलिए सिर पर चढ़ा रहे हो।
फिर मैंने हँसते हुए उसका ब्लाउज़ उतार दिया और जैसे ही ब्लाउज़ उतारा उसकी रेड ब्रा जिसमें उसकी चूचियाँ पूरी तरह संभाल भी नहीं पा रही थी उसी के ऊपर से मैंने निप्पल्स को होंठ में दबा लिया और दूसरों को हाथ की उंगली से मसलने लगा। निप्पल्स के मसलने का उस पर बहुत जल्दी असर हुआ और अब वो सिसकने लगी थी।
तब ही मैंने उसके पेटीकोट के नाड़े को खींचा और वो सरसराता हुआ वहीं ज़मीन पर गिर गया और अब मुझे वही रेड कलर की पैंटी नज़र आ रही थी जिसे मैंने सुबह देख चुका था। मैं तुरंत झुककर सूँघने लगा तब संगीता मुस्कुराकर बोली- ऊऊफ्फ्फ क्या कर रहे हो गुदगुदी हो रही है।
तब मैंने कहा- जानेमन मैं कब से तुम्हारी चूत का प्यासा हूँ आज जी भरके अपनी प्यास बुझाऊँगा और अब तो वाकई बरसात में प्यार करने का मज़ा ही बढ़ गया था। ऊपर से पानी बरस रहा था और नीचे हम लोग एक-दूसरे पर प्यार की बरसात कर रहे थे। तब ही मैंने देखा कि छत पर एक तरफ झूला पड़ा है।
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मैंने संगीता से कहा- यार इस झूले पर तो प्यार करने का मज़ा ही आ जाएगा और ये कहकर मैं झूले पर बैठ गया और फिर वो झट से मेरी गोदी में मेरे लंड पर बैठने को आई। तब मैंने कहा- ऐसे नहीं पहले मैं तुम्हारी चूत का रस पियूँगा तुम ऐसा करो कि झूले पर चढ़ जाओ।
जब संगीता चढ़ गई तब मैंने कहा कि अब अपने दोनों पैर मेरे कंधे के दाएँ-बाएँ करो। वो कहने लगी- राज मुझ लग रही कहाँगीर न जाऊँ। तब मैंने कहा- नहीं मेरी संगीता ऐसे कैसे गिरने दूँगा तुम्हें और फिर संगीता अपने दोनों पैर मेरे कंधे पर रखकर बैठ गई। इस तरह से उसकी चूत मेरे बिलकुल मुँह के पास आ गई और मैं उसकी चूत को पहले अपने हाथ से सहलाने लगा।
फिर मैंने कहा कि संगीता तुम्हारी चूत पर बाल बहुत हैं साफ क्यों नहीं करती। संगीता बोली- यार मैं अपने बाल अपने हाथ से नहीं बनाती जब मेरे हसबैंड आएँगे तब वही अपने हाथ से बनाएँगे वो बहुत अच्छी शेविंग करते हैं। तब मैंने कहा- अब तुम फिकर न करो मैं खुद तुम्हारे बाल बना दूँगा और फिर मैंने उसकी चूत को अपने दोनों हाथ की उंगलियों से फैलाया और तब मुझे उसके अंदर का गुलाबी नज़ारा नज़र आया।
फिर मैं उसकी चूत की दरारों पर अपने होंठ फिराने लगा। अब तो वो भी मुझे बहुत ज़ोर से पकड़कर अपनी चूत मेरे मुँह पर चिपकाने लगी और बोली- आआह्ह्ह राज बहुत मज़ा आ रहा है इस तरह और फिर मैंने अपने पैरों से झूले को थोड़ा सा हिलाया और झूला हिलने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब तो जन्नत का मज़ा आ रहा था। तब ही संगीता ने कहा- राज इस तरह तो बहुत मज़ा आ रहा है आआह्ह्ह आआह्ह्ह चूस लो आज मेरी चूत को निकाल दो सारी अपने दिल की भड़ास आआह्ह्ह और अब मैंने अपनी लिबलिबी जीभ पक्क से उसकी चूत में घुसेड़ दी। कसम से मुझे ऐसा लगा कि मेरी जीभ जल जाएगी बहुत गर्म थी उसकी चूत और अब संगीता मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत को आगे-पीछे कर रही थी।
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मैंने अपने हाथ ऊपर को बढ़ाए मगर वो मेरे कंधे पर बैठी थी तो मेरे हाथ उसकी चूचियों तक नहीं पहुँच पाए क्योंकि वो अपने हाथ से अपनी चूचियाँ मसल रही थी और मुझसे रहा नहीं जा रहा था मगर अफसोस कि मेरे हाथ वहाँ तक पहुँच ही नहीं पाए। तब ये देखकर संगीता हँसने लगी और बोली- राजा अगर हाथ चूचियों तक नहीं आ पा रहे तो गांड ही मसल दो और ये कहकर मेरे दोनों हाथ अपनी चूतड़ पर रख दिए जिसे मैं सहलाने लगा। कसम से उसके चूतड़ भी बहुत ग़ज़ब के थे।
अब वो पूरी तरह से बेकरार हो चुकी थी और ऊऊफ्फ ऊऊफ्फ आआह्ह्ह आआह्ह्ह राज प्लीज़ जल्दी-जल्दी करो मैं झड़ने वाली हूँ और फिर मैंने अपने पैर का एक और धक्का ज़मीन पर मारा और झूला बहुत ज़ोर से हिलने लगा और तब ही खचाखचा उसकी चूत में अपनी ज़बान अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर में ही वो धड़-धड़ाकर झड़ने लगी और मैं उसकी चूत का रस किसी मदिरा की तरह पी रहा था। जब उसके रस का एक-एक कतरा मैंने चूस लिया तब वो मेरे कंधे से उतरकर मेरी गोदी में बैठ गई।
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