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यह कहानी है एक स्वामी जी की, जिन्होंने निशा को माँ बनाया। एक महिला थी, जिसका नाम निशा था। उसकी शादी को काफी समय हो गया था, पर उसके कोई संतान नहीं थी। उसकी पड़ोसन ने उसे कहा कि गाँव के बाहर जो स्वामी जी की कुटिया है, वहाँ पर काफी चमत्कारी साधु बाबा रहते हैं। तुम उनके पास जाओ, उनकी पूजा से तुम्हें जरूर संतान होगी। Sadhu Baba Porn
फिर एक दिन निशा अपनी पड़ोसन के साथ स्वामी जी के पास गई। पड़ोसन ने स्वामी जी को निशा से मिलाया। स्वामी जी ने कहा, “ठीक है, हम भगवान से प्रार्थना करेंगे कि निशा के घर बच्चा पैदा हो। निशा, तुम ऐसा करो कि कल सुबह हमारे पास आ जाओ, मिलकर मंत्र जाप करना होगा।”
दूसरे दिन निशा सुबह स्वामी जी के पास आ गई। स्वामी जी अपनी कुटिया में अकेले रहते थे। उन्होंने निशा से कहा, “दरवाजा बंद कर लो।” निशा काफी डरी हुई थी स्वामी जी को देखकर। पर स्वामी जी समझ गए कि निशा डरी हुई है, इसलिए उन्होंने निशा से कहा, “शांत हो जाओ बेटी, डरो मत। बस आराम से बैठ जाओ।”
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जब निशा बैठ गई तो स्वामी जी ने उसे पानी पिलाया और पूछा, “शादी को कितने दिन हो गए?”
निशा ने कहा, “पाँच साल।”
स्वामी जी ने निशा से पूछा, “पुत्री, क्या तुम्हारे और तुम्हारे पति के बीच सब ठीक है? शर्मा मत, मुझे बता कि तुम दोनों में शारीरिक संबंध ठीक तो है?”
निशा ने कहा, “जी स्वामी जी।”
फिर स्वामी जी ने कुछ मंत्र पढ़े और कहा, “बेटी, लगता है कि कुछ मंत्र जाप करना पड़ेगा। इसके लिए कुछ चीजों की जरूरत होगी। मैं जो कहता हूँ, वह तुम्हें देना पड़ेगा।”
निशा ने हामी भरी।
फिर स्वामी जी ने कहा, “बेटी, जो-जो मंत्र मैं पढ़ता हूँ, वह तुम भी पढ़ो।”
निशा ने भी वे मंत्र पढ़े।
फिर स्वामी जी ने कहा, “बेटी, अब घर जाओ। और सुनो, कल मुझे कुछ सामान चाहिए। क्या तुम ला दोगी?”
निशा ने कहा, “हाँ।”
फिर स्वामी जी ने कहा, “बेटी, कल तुम्हें एक गिलास दूध लाना होगा और सुनो, मुझे तुम्हारे कुछ बाल चाहिए। सिर के बाल नहीं, बल्कि तुम्हारी बगल के और तुम्हारी टांगों के बीच के जो बाल हैं, वह चाहिए।”
निशा एकदम शर्मा गई और पूछा, “स्वामी जी, वो किस लिए?”
स्वामी जी ने कहा, “बेटी, कल उन बालों को जलाएँगे। यह एक प्रकार का मंत्र जाप है। और हाँ, याद रखो, बाल सारे के सारे निकाल कर लाना। और सबसे जरूरी बात — जब तक वे बाल वापस नहीं उग जाएँ, तुम अपने पति से संभोग नहीं कर सकती।”
निशा ने कहा, “ठीक है स्वामी जी,” और चली गई।
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अगले दिन निशा सवेरे स्वामी जी की कुटिया पर पहुँच गई — दूध लेकर और स्वामी जी के बताए हुए बाल लेकर। स्वामी जी ने निशा से कहा, “बेटी, अंदर जाकर हाथ-मुँह धोकर आओ और यह दूध का गिलास यहाँ रखो।” निशा अंदर गई और मुँह धोकर आई। इसी बीच स्वामी जी ने दूध में नशीले दवा मिला दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जब निशा वापस आई तो स्वामी जी ने कहा, “बेटी, मैं भी मुँह धोकर आता हूँ। तब तक तुम यह दूध पी लो।”
स्वामी जी के वापस आने तक निशा ने दूध पी लिया था। अब स्वामी जी ने निशा से वे बाल माँगे। निशा ने वो बाल स्वामी जी को दे दिए। स्वामी जी ने वे बाल आग में डालने शुरू किए। अब निशा को नींद आ रही थी। तो स्वामी जी ने कहा, “बेटी, अब तुम्हें अपने कपड़े उतारने होंगे, क्योंकि मंत्र जाप नंगी अवस्था में करना होता है।”
निशा तो पहले मना करती रही, मगर जब स्वामी जी ने उससे कहा, “मैं तो बूढ़ा हूँ बेटी, तेरे बाप के उम्र का। मेरे से क्या शर्माना? मेरे से मत शर्मा,” तब वह मान गई और अपने सारे कपड़े उतारकर स्वामी जी के सामने बैठ गई। अब स्वामी जी ने पूजा शुरू की।
निशा को नींद आ रही थी और फिर दवा ने अपना असर दिखा दिया। निशा बेहोश हो गई। बस फिर क्या था, स्वामी जी ने जल्दी से अपनी लुंगी उठाई और निशा की चुदाई शुरू कर दी। स्वामी जी काफी बूढ़े थे और उनका लंड तो निशा को नंगी देखते ही तन गया था। स्वामी जी के वीर्य काफी दिनों से जमा था।
उन्होंने सारी की सारी वीर्य निशा की चूत में छोड़ दी और जल्दी से वापस अपने कपड़े ठीक करके अपनी जगह पर बैठ गए और मंत्र पढ़ने लगे। कुछ देर बाद दवा का असर खत्म होने लगा तो निशा की नींद टूट गई और वह होश में आ गई। वह एक तरफ लुढ़की हुई थी। निशा उठी और एकदम उसे याद आया कि वह स्वामी जी की कुटिया में है और नंगी भी है। और जब उसने स्वामी जी की ओर देखा तो स्वामी जी मंत्र पढ़ रहे थे।
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निशा को देखकर बोले, “बेटी, ठहरो। अभी पूजा खत्म होने वाली है।”
तभी निशा को महसूस हुआ कि किसी ने उसके साथ चुदाई की है। वह एकदम चिंतित हो गई। स्वामी जी ने अपना मंत्र खत्म किया।
निशा स्वामी जी से बोली, “स्वामी जी, यह आपने क्या किया मेरे साथ?”
स्वामी जी ने कहा, “बेटी, मैंने नहीं, बल्कि मंत्र जाप की वजह से हुआ है। तुम्हारा संभोग हुआ है मेरी शक्तिशाली मंत्र जाप की वजह से। यह मैंने नहीं किया है।”
निशा स्वामी जी पर काफी गुस्सा हुई। तो स्वामी जी ने निशा को यकीन दिलाया कि यह उन्होंने नहीं किया है। और फिर यकीन दिलाने के लिए उन्होंने अपनी लुंगी उठाकर निशा को दिखाई और कहा, “देखो बेटी, मैं बूढ़ा हो चुका हूँ। मेरा लंड देखो — तुम्हें नंगी अवस्था में देखकर भी सो रहा है।”
निशा ने जब स्वामी जी का लंड देखा तो वह एकदम चूहे के तरह छोटा था और सो रहा था। तब जाकर निशा को यकीन आया कि यह चुदाई स्वामी जी ने नहीं की है। फिर निशा जब अपने घर वापस आ रही थी तो उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसके साथ काफी जोर से चुदाई की है और उसे चलने में दिक्कत हो रही थी।
रात को उसकी टांगें भी दर्द कर रही थीं, पर उसे मज़ा आया था कि किसी ने काफी बड़े लंड से उसकी चुदाई की थी, क्योंकि उसके पति का लंड काफी छोटा था। दूसरे दिन निशा फिर उसी समय पर स्वामी जी की कुटिया पर चली गई। फिर वही कहानी दोहराई गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
स्वामी जी ने निशा को उसका लाया हुआ दूध पिलाया और खुद मुँह-हाथ धोकर वापस आए और मंत्र जाप करने लगे। फिर निशा बेहोश हो गई और स्वामी जी ने फिर से उसकी चुदाई की। स्वामी जी के पास काफी मात्रा में वीर्य था, इसलिए वे रोज चुदाई कर रहे थे। यह सिलसिला काफी दिनों तक चला।
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फिर एक दिन निशा ने स्वामी जी से कहा, “स्वामी जी, मेरे बाल जो आपने कटवाए थे, वह वापस उग चुके हैं। क्या मैं अपने पति से अब संभोग कर सकती हूँ?”
स्वामी जी ने निशा को अपने हाथ ऊपर उठाने को कहा और उसके बगल के बाल देखे और फिर निशा की दोनों टांगें खोलकर भी देखा। तो सचमुच उसके बाल उग गए थे।
स्वामी जी ने कहा, “बेटी, कल हम आखिरी बार पूजा करेंगे।”
निशा ने कहा, “ठीक है।”
फिर दूसरे दिन भी वही हुआ। निशा वापस स्वामी जी के पास आ गई। फिर से स्वामी जी ने उसे बेहोश किया और उसकी चुदाई की। अब स्वामी जी के पास उनकी वीर्य खत्म हो गई थी, इसलिए स्वामी जी जल्दी ही झड़ गए। और फिर कुछ देर बाद निशा को होश आया तो वह उठी और चली गई।
इस तरह स्वामी जी का इलाज पूरा हुआ और निशा को कुछ दिन बाद पता चला कि वह माँ बनने वाली है। वह खुशी से स्वामी जी के पास गई और उनको खुशखबरी सुनाई। स्वामी जी भी बहुत खुश हुए। और फिर कुछ दिन बाद निशा के घर एक लड़का पैदा हुआ।
फिर कुछ दिन बाद निशा को पता चला कि स्वामी जी की तबीयत बहुत खराब है। उनके दोनों हाथ आग में जल गए हैं। एक दिन रात को उनकी कुटिया में आग लगने के कारण। स्वामी जी काफी बूढ़े हो गए थे, जिसके कारण उनके मुँह के दाँत भी झड़ गए थे। स्वामी जी को खाना खाने में काफी दिक्कत हो रही थी।
निशा को स्वामी जी की हालत पर काफी रहम आया और निशा ने स्वामी जी से कहा, “स्वामी जी, आज से आप बेफिक्र हो जाइए। मैं आपका ख्याल रखूँगी।”
फिर निशा ने स्वामी जी से कहा, “स्वामी जी, क्या आप मेरा दूध पिएँगे?”
स्वामी जी एकदम चमक गए। पर निशा ने स्वामी जी का सर अपनी गोद में रखा और अपना ब्लाउज खोलकर स्वामी जी को दूध पिलाने लगी। स्वामी जी के दाँत टूट चुके थे, इसलिए उनके लिए निशा का दूध सही भोजन था।
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निशा ने स्वामी जी को दूध पिलाते हुए कहा, “स्वामी जी, मेरा बच्चा पाँच साल का है। मैं उससे दूध पिलाती हूँ, पर अब छुड़ा दूँगी और सारा दूध आपको ही पिलाऊँगी।”
इस पर स्वामी जी ने कहा, “बेटी, इतनी हमदर्दी क्यों मुझसे?”
निशा ने कहा, “स्वामी जी, आपके ही कारण तो मैं माँ बनी हूँ। मेरे ऊपर आपके एहसान बहुत हैं।”
और दूध पिलाते हुए निशा बोली, “स्वामी जी, हम फिर से मंत्र जाप करेंगे, क्योंकि मुझे एक और बच्चा चाहिए। वरना मेरे पति मुझे डिवोर्स दे देंगे।”
इस पर स्वामी जी, जो दूध पी रहे थे, रुके और कहा, “बेटी, यह अब मुमकिन नहीं है।”
इस पर निशा हँस पड़ी और कहा, “बिल्कुल मुमकिन है स्वामी जी, बिल्कुल मुमकिन है।”
और निशा ने स्वामी जी से कहा, “स्वामी जी, आपको सच्चाई पता नहीं है, पर मुझे सब पता है।”
फिर निशा ने स्वामी जी से कहा, “स्वामी जी, जब पहले दिन मैं आपके पास आई थी मंत्र जाप करने, तब आपने मुझे बेहोश करके मुझे चोदा था। मेरी चूत में आपकी वीर्य थी, काफी ज्यादा थी। मैंने घर जाकर एक प्लान बनाया। उस दिन और दूसरे दिन जब मैं आपके पास आई, तो आपके अंदर जाने के बाद मैंने वह दूध नहीं पिया, बल्कि उसे खिड़की से बाहर फेंक दिया और कुछ देर बाद बेहोश होने का नाटक किया।
और आप मुझे बेहोश समझकर मेरी चुदाई करते रहे। ऐसा मैंने रोजाना किया था। आपके साथ मैं बेहोशी का नाटक करती रही, क्योंकि मुझे अच्छा लगने लगा था आपके साथ चुदाई करके। आपका लंड काफी बड़ा है। मेरे पति का काफी छोटा है और उसकी वीर्य बहुत थोड़ी निकलती है, इसलिए वह मुझे बच्चा नहीं दे सकता। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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और अब मुझे एक और बच्चा चाहिए, जिसके लिए मुझे आपकी वीर्य चाहिए। आपसे चुदाई नहीं, क्योंकि आपका सिर्फ लंड बड़ा है और आप बूढ़े हो चुके हो और कमजोर भी। आप चुदाई नहीं कर सकते, पर आपके पास आपके लंड के नीचे की पोटली में काफी वीर्य है।”
यह कहकर निशा ने स्वामी जी की धोती खोल दी। स्वामी जी के हाथ जल हुए थे, इसलिए वह कुछ भी नहीं कर सकते थे। बस वह काफी दिनों से भूखे थे, इसलिए वह निशा का दूध पी रहे थे। स्वामी जी रुके और कहा, “बेटी, तुम जो चाहे मैं वो तुम्हें दूँगा, पर तुम्हें मुझे दूध पिलाना होगा।” तो निशा राज़ी हो गई।
और निशा की एक चुची में दूध खत्म हो गया तो स्वामी जी निशा की दूसरी चुची चूसने लगे। अब निशा ने अपने हाथ से स्वामी जी के लंड को तनाने की कोशिश करने लगी। स्वामी जी काफी बूढ़े हो चुके थे, उनका लंड नहीं तन रहा था। निशा के काफी कोशिश के बाद स्वामी जी का लंड तन गया।
तो निशा ने स्वामी जी को ताना मारते हुए कहा, “मेरी एक चुची में है और मेरा हाथ तुम्हारे लंड पर, फिर भी तुम्हारा लंड नहीं तन रहा। हूँ… तुम काफी बूढ़े हो चुके हो स्वामी जी।” फिर निशा ने अपनी साड़ी खोले बिना ही स्वामी जी के लंड पर बैठ गई। बस सिर्फ दो मिनट वह ऊपर-नीचे होती ही स्वामी जी ने अपनी सारी की सारी वीर्य निशा की चूत में छोड़ दी।
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निशा काफी खुश हो गई और स्वामी जी से कहा, “अरे बूढ़े स्वामी, तूने मुझे धोखा दिया था। अब मैं तुझसे बदला लूँगी। रोजाना तुझसे तेरी वीर्य लूँगी और नंगी भी नहीं होऊँगी और तेरे हाथ जल हुए हैं, इसलिए तू मुझे छू भी नहीं सकता। वह तो तू काफी बूढ़ा है और भूखा कर मर न जाए, इसलिए तेरे को सिर्फ मेरा दूध पिलाऊँगी, क्योंकि तेरे मुँह में दाँत नहीं हैं और बिना दाँतों के तू मेरी निप्पल काफी अच्छे तरह से चूसता है।” और यह सब कहकर निशा चली गई। अब यह निशा का रोज का मामूल था।
वह रोजाना अपने पति से भी चुदवाती थी और स्वामी जी को दूध पिलाती थी। दूध पीते समय वह स्वामी जी का लंड तनाती थी और उनकी वीर्य अपनी चूत में लेकर स्वामी जी को गालियाँ देती हुई चली जाती। अब तो वह दिन में तीन या चार बार ऐसा करती थी। फिर एक दिन निशा को महसूस हुआ कि स्वामी जी की वीर्य खत्म हो गई है। तो वह उन्हें नामर्द कहकर स्वामी जी को छोड़कर चली गई। फिर कुछ दिन बाद स्वामी जी की वीर्य के कारण वह फिर से माँ बनी। और स्वामी जी बुढ़ापे के कारण अपनी कुटिया में ही मर गए।
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