New First Night Sex Kahani
यह मेरी सुहागरात की कहानी है, जो कहानी नहीं, हकीकत है। जो मेरे ज़ेहन में अब तक नक़्श हो चुकी है। एक-एक लफ़्ज़ मुझे याद है। क्यों न याद हो? वो रात मेरी ज़िंदगी का अहम दिन था जिसमें मेरी चूत की ओपनिंग होने वाली थी। उस रात को कैसे भूल सकती हूँ जब पहली बार मेरी चूत में लंड गया था। हाँ, मैं नहीं भूल सकती उस ख़ूबसूरत रात को। तो सुनो… New First Night Sex Kahani
पहली रात मेरे हसबैंड की भाभी मुझे कमरे में अकेला छोड़ कर चली गईं। पूरा कमरा सजा हुआ था। बेड के चारों तरफ़ गुलाब के फूलों की सजावट बनी हुई थी जिससे कमरे में खुशबू फैली हुई थी। मैं बहुत परेशान थी कि अब क्या होने वाला है। मैं बहुत शर्मीली थी।
मेरी एक सहेली की शादी हो चुकी थी, वो अपनी स्टोरी सुनाया करती थी। मैं सुनकर हैरत में रह जाती थी। आज मेरे साथ भी वही कुछ होने वाला था। मैं बार-बार अपनी चूत को हाथ लगा कर देखती कि इतने छोटे से सुराख में लंड कैसे जाएगा। मैं इसी परेशानी में मुब्तला थी।
मेरी सहेली ने कहा था कि ये रात बहुत ही अहम होती है। जितना अच्छा सेलिब्रेट कर सकूँ, उतना कम है। बस तुम अपने आप को उसके हवाले कर देना और जो तुम्हारा पति चाहे करने देना। उसी ने मुझे कहा था कि अपने पति के आने से पहले ही तुम अपनी पैंटी और ब्रा में फूल रख लेना।
उससे फूल की खुशबू जिस्म में बस जाती है। मैंने मौका देखकर ऐसा ही कर लिया था। मैं इसी सोच में थी कि मेरे हसबैंड आए। मेरे बराबर में बैठ गए। मैं सिमट कर एक तरफ़ हो गई। वो मुझे देखने लगे और प्यार से मेरा घूँघट उठा कर गुनगुनाए – “घूँघट की आड़ से दिलबर का दीदार अधूरा रहता है…”
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फिर मेरा हाथ पकड़ कर हाथ पर किस किया। मैंने झटके से हाथ खींच लिया। वो बोले – “ये तो स्टार्टिंग है, अभी तो बहुत कुछ होना बाक़ी है।” मैं शर्मा गई और सिमट कर बैठ गई। मेरी ख़ामोशी को देख कर बोले – “क्या तुम्हें बोलना भी आता है या…” मैंने हाँ में सर हिला दिया।
वो खूब हँसे और कहने लगे – “बोलने का कहा है, सर हिलाने का नहीं।” मैं फिर भी ख़ामोश रही। उन्होंने फिर कहा – “कुछ तो बोलो।” मैं सिर्फ़ “जी अच्छा” कह कर रह गई। वो बोले – “शुक्र है कुछ तो बोली। मैं समझ रहा था कि तुम गूंगी हो।” फिर मुझे हँसी आ गई।
मुझे हँसता देख कर बोले – “तुम हँसती हुई कितनी अच्छी लगती हो।” और फिर प्यार से मुझे गले लगा कर किस करने लगे। मैं सिमट कर रह गई। फिर उन्होंने मेरे सारे ज़ेवर उतार कर टेबल पर रख दिए। मैं घबरा गई कि अब मेरी ख़ैर नहीं है। पर मेरी सहेली की बात याद आई – “अपने आप को उनके हवाले कर देना।”
फिर वो उठे, अलमारी से एक बॉक्स निकाल कर लाए। उसे खोला तो उसमें एक बहुत ख़ूबसूरत गोल्ड सेट था। उन्होंने कहा – “ये मेरी तरफ़ से गिफ़्ट है।” वो सेट मुझे अपने हाथों से पहना कर मुझे देखने लगे। फिर कहा – “तुम कितनी ख़ूबसूरत हो। इस तरह मेरी ज़िंदगी में ख़ूबसूरती बख़्शती रहो।” और मुझे गले लगा लिया।
मैं सोच रही थी कि अब खेल शुरू होने वाला है। उन्होंने ऐसे ही गले लगाए-लगाए मेरी कमर पर हाथ फेरने लगे। मेरी साँसें तेज़ होने लगी। मैंने जल्दी से उन्हें दूर कर दिया और कहा – “मेरा दम घुट रहा है।” मेरा गला सूख चुका था। उन्होंने टेबल से ग्लास उठा कर पानी पिलाया।
फिर मैंने कहा – “प्लीज़ लाइट बंद कर दें। मुझसे ऐसे कुछ नहीं होगा।” वो बोले – “क्या तुम्हें भी कुछ आता है?” मैंने सर हिला दिया – नहीं। वो बोले – “आज सारी मेहनत मुझे ही करनी है।” मैं “मेहनत” का सुन कर फिर घबरा गई। मुझे लगा कि मेरा BP लो हो गया है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चोदवाने का सोच-सोच कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी। फ़र्स्ट एक्सपीरियंस था। एक खुशी भी थी, एक अजीब सी कैफ़ियत थी। बता नहीं सकती। ये भी सोच रही थी कि जल्दी से काम हो जाए पर घबराहट भी थी कि दर्द होगा। मेरे छोटे से सुराख में कैसे जाएगा।
मैं अपने हसबैंड के गले लगे-लगाए यही सोच रही थी और वो मेरी कमर पर हाथ फेरते जा रहे थे और कुछ कहते भी जा रहे थे जो मैं सुन नहीं रही थी क्योंकि मैं तो अपनी सोचों में डूबी हुई थी। जब उन्होंने मेरे बोब पर हाथ लगाया तो मैं एकदम झटके से अलग हो गई।
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मैंने फिर कहा – “प्लीज़ लाइट बंद कर दें।” उन्होंने मुझे बहुत क़यल करने की कोशिश की कि “लाइट से क्या होता है? अब तू मेरी बीवी हो। सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी। तुम्हारे जिस्म पर सिर्फ़ मेरा हक़ है। तुम मेरा लिबास हो और मैं तुम्हारा।” पर मैं मानने को तैयार नहीं थी क्योंकि मुझे उनको देख कर ही सेक्स हो रहा था।
अजीब सी कैफ़ियत थी। फिर वो हार मानते हुए उठे और लाइट बंद कर के ज़ीरो वाट का बल्ब ऑन कर दिया। पर अभी भी वो मुझे साफ़ नज़र आ रहे थे। मुझे शर्म आ रही थी कि वो मेरा जिस्म देखेंगे पर मैं चोदवाना भी चाहती थी। अजीब कश्मकश में थी। फिर मैंने आँखें बंद कर के कहा – “अब जैसे मर्ज़ी करो।”
वो बोले – “हूर, तुम अपने नाम की तरह बहुत ख़ूबसूरत हो। तुमने लाइट बंद करवा कर अच्छा नहीं किया? मैं तुम्हारी अंदर की ख़ूबसूरती भी देखना चाहता था।” मैं चुप रही पर मैं अंदर ही अंदर सोच रही थी कि मैं ग़लत कर रही हूँ। उसके साथ जो मेरा ज़िंदगी का साथी है, मेरा शरीक-ए-हयात है, उसकी खुशी मेरी खुशी है। पर मेरा दिल नहीं मान रहा था। सिर्फ़ शर्म आ रही थी।
मैंने कहा – “सरताज, मैं अपने आप पर क़ाबू नहीं पा रही। मैं लाइट में तुमसे नहीं मिल सकती। प्लीज़ मेरे ख़ातिर ऐसे ही सही है। जब हम फ़्री हो जाएँगे तो जो चाहे करना। मैं तुम्हारी ही हूँ। मुझे एहसास है पर मैं बता नहीं सकती। प्लीज़ मेरी बात मान लो।”
वो मेरी बात रखने के लिए बोले – “ठीक है हूर, आज न सही। पर मेरा ये तुमसे वादा है कि मैं तुमको इतना फ़्री कर लूँगा कि तुम ख़ुद मुझसे चोदवाओगी और मेरा लंड पकड़ कर ख़ुद ही अपनी चूत में डालोगी।” मैं बुत बनी बैठी थी और सोच रही थी कि आज इस अहम रात में भी मैंने अपने महबूब का दिल तोड़ दिया।
अपने आप को कोसते हुए सिर्फ़ चुप ही बैठी रही। वो आगे बढ़ कर मेरा दुपट्टा मेरे सर से उतार कर एक तरफ़ रख दिया। मैंने हिम्मत करते हुए कहा – “सरताज, तुम नाराज़ तो नहीं हो?” उन्होंने मुझे किस करते हुए कहा – “नहीं जान, मैं तुम्हारी कैफ़ियत समझ सकता हूँ।”
मैं ख़ुश हो गई और जज़्बात में आकर उन्हें अपने गले लगा कर ज़ोर से भींच लिया। फिर उन्होंने मेरे ज़ेवर उतारना शुरू कर दिए। मैंने भी साथ-साथ अपने ज़ेवर उतारने शुरू कर दिए। फिर वो मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे अपने आप से लिपटा लिया। मेरे बूब्स उनके मज़बूत सीने से चिपक गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर मेरी कमर पर हाथ रख कर ज़ोर से दबाया। उससे मेरे बूब्स और मज़ीद प्रेस हो गए जिससे मुझे मज़ा आ रहा था। उस वक़्त मेरे बूब्स का साइज़ 32 था। बहुत ही नाज़ुक से, जिसे आज से पहले किसी मर्द ने नहीं छुआ था। वो बोले – “हूर, तुम्हारा जिस्म तो फूलों की तरह नाज़ुक है।” मैं शर्मा गई।
फिर मुझे और क़रीब करते हुए मेरी कमर पर मेरी कमीज की ज़िप खोलने लगे। मैं सिमटने लगी क्योंकि मेरी कमीज मेरे शोल्डर से नीचे हो गई थी। वो पीछे से मेरी कमीज में हाथ डाल कर मेरी कमर पर हाथ फेरने लगे। मुझे ऐसा लगा जैसे करंट लग गया हो क्योंकि पहली बार मेरी नंगी कमर पर किसी मर्द का हाथ लगा था।
वो भी वो शख़्स जो मेरी जान है। वो मेरी कमर पर हाथ फेरते रहे और मेरी ब्रा की स्ट्रिप को आगे-पीछे करने लगे। मैं अच्छा महसूस कर रही थी। ऐसा मज़ा आज से पहले मेरे जिस्म ने नहीं देखा था। साथ ही मेरी गर्दन पर किस करने लगे जिससे मुझे मज़ा भी आ रहा था और गुदगुदी हो रही थी।
मैं मज़े से लुत्फ़ अंदूज हो रही थी और सोच रही थी कि अभी तो चूत में लंड जाना बाक़ी है। इसमें इतना मज़ा आ रहा है। ये स्टोरी तो बड़ी होती जा रही है। जब भी मैं अपनी सुहागरात का सोचती हूँ तो एक फ़िल्म की तरह मेरे ज़ेहन में चलना शुरू हो जाती है और मैं लिखती चली जाती हूँ। शायद तुम बोर होने लगे हो।
तो वो मुझे गले लगाए, मुझे किस करते-करते मेरी कमर पर हाथ फेर रहे थे जिससे मेरे जिस्म में बिजली सी महसूस हो रही थी। मैं मज़े में मगन उनकी प्यारी-प्यारी हरकतों को अपने अंदर जज़्ब कर रही थी। मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं। वो मशीन की तरह दीवाना-वार किस कर रहे थे।
फिर उन्होंने मेरे हाथ ऊपर कर के मेरी कमीज मेरे जिस्म से अलग कर दी। मैंने दोनों हाथों से अपने बूब्स को छुपा लिया। उन्होंने मेरे हाथ पकड़ कर अपने हाथों में ले लिया और दोनों हाथ फेर कर अपने सीने से लगा दिया। मेरी नंगी कमर पर सिर्फ़ ब्रा की स्ट्रिप थी जिसे वो आगे-पीछे कर रहे थे।
मैं समझ गई कि अब ये भी उतरने वाली है। ये सोच कर मैंने उन्हें ज़ोर से दबोच लिया। फिर वही क्या जो मैं सोच रही थी। उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा भी मेरे जिस्म से अलग कर दी। जैसे ही ब्रा हटा, एक खुशबू का झोंका पूरे कमरे में फैल गया और मेरी गोद में फूलों की पत्तियाँ गिर गईं जो मैंने ब्रा में डाली हुई थीं।
वो अपने सर को मेरे बूब्स पर ला कर खुशबू को अपने अंदर उतारने लगे। फिर बोले – “हूर, ये तुमने बहुत ही अच्छा किया। क्या खुशबू है फूलों की!” खुशबू मेरे बूब्स में उतर चुकी थी और वो खुशबू की तरह महक रहे थे। ये उनके लिए सरप्राइज़ था। अभी एक सरप्राइज़ और बाक़ी था जो मेरी पैंटी में थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैं ख़ुश हो गई और अपनी सहेली को दाद देने लगी जिसने ये मश्वरा दिया था। मेरे नर्म-नर्म उभरे हुए बूब्स में हरकत शुरू हो गई। बूब्स को देख कर कहने लगे – “काश इन्हें मैं लाइट में देख सकता।” और दोनों हाथों से मेरे बूब्स पकड़ लिए। मेरे मुँह से अचानक अजीब सी आवाज़ निकली।
मैं सिमट कर रह गई। अब उन्होंने भी अपनी कमीज और बनियान उतार कर मेरे नंगे जिस्म को अपने जिस्म से लगा लिया। उनका तपता हुआ जिस्म मुझे अच्छा लगा। मैंने भी उन्हें ज़ोर से पकड़ लिया। मेरे नंगे बूब्स उनके सीने से लगे हुए थे। वो मेरी कमर पर मुसलसल हाथ फेर रहे थे और किस भी कर रहे थे।
फिर अचानक उन्होंने मेरे सर को पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर कर लिया। मैंने फ़ौरन आँखें बंद कर लीं। उन्होंने आहिस्ता से अपने लरज़ते होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैंने उनकी कमर और ज़ोर से दबाई। फिर वो मेरे ऊपर वाले होंठ को अपने मुँह में चूसने लगे। मेरी जिस्म की अजीब सी हालत थी।
साँसें तेज़ हो रही थीं। दिल ऐसा लग रहा था कि अब बाहर निकल जाएगा। मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से दबा रही थी। मेरी दिल की धड़कन को वो अपने सीने पर महसूस कर रहे थे। कहने लगे – “हूर, ये क्या हो गया है तुम्हारे दिल को?” पहले तो मैं चुप रही। फिर बोली – “ये तुम्हारे सीने में जाने को मचल रहा है।”
फिर उन्होंने मुझे लिटा कर मेरे पैर सीधे कर दिए। मैं डर गई कि अब तक तो सही था, बहुत मज़ा कर लिया। अब मेरी चूत की ख़ैर नहीं है। मैं अभी तक पूरी नंगी नहीं हुई थी। अभी सलवार और पैंटी मेरे जिस्म पर थी। मैं सोचने लगी कि ये भी कब तक मेरे जिस्म पर रहेंगी। बस अब उतरने ही वाली हैं…
उन्होंने मेरी सलवार की नाड़ी खोल दी। मैंने आँखें और ज़ोर से बंद कर लीं। सलवार धीरे-धीरे मेरी जाँघों से नीचे सरकने लगी। जब वो पूरी उतर गई तो उन्होंने मेरी पैंटी पर हाथ रखा। पैंटी भी भीग चुकी थी। उन्होंने धीरे से पैंटी को भी नीचे सरका दिया। अब मैं पूरी नंगी थी।
जब उन्होंने मेरी पैंटी पूरी तरह उतार दी और मेरी टाँगें फैला दीं, तो मैं पूरी तरह नंगी उनके सामने थी। मेरी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे और फूलों की खुशबू से महक रही थी। उन्होंने पहले अपनी उँगलियों से मेरी चूत को सहलाया। उनकी उँगली धीरे-धीरे चूत के होंठों के बीच सरक रही थी।
मैं काँप रही थी। फिर उन्होंने अपनी एक उंगली अंदर डाली। दर्द हुआ लेकिन साथ में अजीब सा सुकून भी। मैंने “आह…” कहकर सिसकी ली। उन्होंने दूसरी उंगली भी डाल दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे। मेरी चूत गीली हो गई थी, पानी निकल रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर उन्होंने अपना लंड मेरे हाथ में दिया। मैंने पहली बार इतने करीब से देखा – 7 इंच लंबा, मोटा, सुपाड़ा लाल और चमकदार। बहुत गरम था। उन्होंने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख दीं। मैं डर से आँखें बंद कर ली। उन्होंने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाव डाला।
पहला झटका – सुपाड़ा अंदर घुसा। मैं चीख पड़ी – “आआआह्ह्ह्ह… दर्द हो रहा है…” आँसू आ गए। उन्होंने रुककर मुझे चूम लिया, मेरे होंठ चूसे, बूब्स दबाए। फिर दूसरे झटके में आधा लंड अंदर चला गया। दर्द इतना था कि मैंने उनकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
वे बोले – “हूर… बस थोड़ा और… सह ले… मैं धीरे कर रहा हूँ।” तीसरे झटके में पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। मैंने महसूस किया कि मेरी चूत पूरी तरह भरी हुई है। दर्द कम होने लगा। उन्होंने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की। थप… थप… थप… हल्की-हल्की आवाज आने लगी।
मैं दर्द और मजे के बीच में थी। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ी। मैं भी अब उनके साथ कमर हिलाने लगी। मेरे बूब्स उछल रहे थे। उन्होंने मेरे बूब्स को दबाते हुए कहा – “हूर… कितनी टाइट है तेरी चूत… मजा आ रहा है…” मैं चीख रही थी – “आह्ह… जी… और जोर से… अह्ह्ह…”
करीब १५-२० मिनट तक ऐसे ही चुदाई चली। आखिर में उन्होंने जोर-जोर से धक्के मारे। मैंने महसूस किया कि उनका लंड फड़क रहा है। फिर एक जोरदार धक्का और वो मेरी चूत में ही झड़ गए। गरम-गरम पानी मेरी चूत में भर गया। मैं भी उसी वक्त झड़ गई। हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए हाँफ रहे थे।
लंड अभी भी अंदर था। उन्होंने मुझे बहुत देर तक चूमते रहे। थोड़ी देर आराम करने के बाद उन्होंने मुझे पलटकर डॉगी स्टाइल में किया। मेरी गांड ऊपर थी। उन्होंने मेरी गांड के दोनों गालों पर हाथ फेरा, फिर हल्के थप्पड़ मारे। मैं शरमा गई। फिर उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद पर रखी और धीरे से अंदर डाली।
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मैं चीखी – “नहीं… वहाँ नहीं… दर्द होगा…” लेकिन वो बोले – “बस थोड़ा… मैं धीरे करूँगा।” उन्होंने पहले एक उंगली अंदर-बाहर की, फिर दो उँगलियाँ। मेरी गांड ढीली होने लगी। फिर उन्होंने लंड पर थूक लगाया और सुपाड़ा मेरी गांड के छेद पर रख दिया। धीरे-धीरे दबाव डाला। सुपाड़ा अंदर घुसा तो मैंने जोर से चीख मारी – “आआआह्ह्ह… बहुत दर्द है…” आँसू बह रहे थे।
उन्होंने रुककर मेरी कमर सहलाई, बूब्स दबाए। फिर धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में डाल दिया। दर्द असहनीय था लेकिन साथ में अजीब सा मजा भी। उन्होंने धीरे-धीरे धक्के मारे। थप… थप… मैं कराह रही थी – “आह्ह… जी… धीरे… अह्ह्ह…” 10-12 मिनट बाद दर्द कम हुआ और मैं भी कमर हिलाने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उन्होंने मेरी चूत में उँगलियाँ डालकर साथ-साथ चुदाई की। मैं दो जगह से उत्तेजित हो रही थी। आखिर में उन्होंने गांड में ही जोर से झटके मारे और गरम पानी गांड के अंदर छोड़ दिया। मैं थककर बेड पर गिर पड़ी। वो मेरे ऊपर लेट गए। हम दोनों पसीने से तर थे।
इस बार उन्होंने मुझे कहा – “हूर… अब तुम मेरे लंड को चूसो।” मैं शरमा गई लेकिन उनकी बात मान ली। मैंने लंड हाथ में लिया, जीभ से सुपाड़ा चाटा। नमकीन स्वाद था। फिर धीरे-धीरे मुंह में लिया। उन्होंने मेरे बाल पकड़कर सर आगे-पीछे किया। मैं गैग कर रही थी लेकिन कोशिश करती रही।
5-7 मिनट तक मैंने चूसा। उनका लंड फिर से कड़क हो गया। फिर उन्होंने मुझे लिटाया और मिशनरी स्टाइल में चोदा। इस बार दर्द कम था। चूत पहले से गीली थी। वो जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। मेरे बूब्स उछल रहे थे। मैं चिल्ला रही थी – “आह्ह… जी… और तेज… चोदो मुझे…” उन्होंने मेरे होंठ चूसे, गर्दन चाटी।
करीब 15 मिनट बाद वो फिर मेरी चूत में झड़ गए। मैं भी साथ में झड़ गई। इस बार उन्होंने मुझे ऊपर बिठाया। मैं उनके लंड पर बैठ गई। लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया। मैं ऊपर-नीचे होने लगी। मेरे बूब्स उनके मुँह के सामने थे। वो बूब्स चूस रहे थे, निप्पल काट रहे थे।
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मैं तेज-तेज ऊपर-नीचे हो रही थी। थप-थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। मैं चीख रही थी – “आह्ह… जी… मैं झड़ने वाली हूँ…” उन्होंने मेरी कमर पकड़कर नीचे से धक्के मारे। हम दोनों एक साथ झड़े। उनका पानी मेरी चूत में और मेरा पानी उनके लंड पर। मैं थककर उनके सीने पर गिर पड़ी। सुबह होने लगी थी। हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके थे। उन्होंने धीरे से मुझे चूमना शुरू किया। इस बार कोई जल्दबाजी नहीं थी। उन्होंने धीरे-धीरे लंड मेरी चूत में डाला।
हम दोनों आँखों में आँखें डालकर देख रहे थे। धीरे-धीरे धक्के लग रहे थे। मैं उनकी पीठ सहला रही थी, वो मेरे बूब्स दबा रहे थे। करीब 20 मिनट तक धीमी चुदाई चली। आखिर में वो मेरी चूत में ही झड़ गए और मैं भी हल्के से झड़ गई। हम दोनों ऐसे ही लिपटे हुए सो गए। सुबह जब आँख खुली तो मेरी चूत सूजी हुई थी, दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सी तृप्ति थी। वो रात मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रात थी। आज भी जब याद आती है, तो चूत गीली हो जाती है और मन करता है कि फिर से वही सब हो जाए।
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