Muslim Bahan Bhai Porn
हुआ कुछ ऐसा था कि मेरे ताऊ के बेटे की शादी थी महीना नवंबर का था तो बहुत ही शानदार ठंड पड़ रही थी। घर के सभी 18 से 25 साल के लड़के और लड़कियों को ताऊ जी ने अपने घर पानीपत बुलवा लिया था। सब कजिन अपना अपना बोरिया बिस्तर बांध कर भाई की शादी की तैयारियां कराने पहुंच गए। Muslim Bahan Bhai Porn
मैं अपने रिश्तेदारों से कुछ ज़्यादा खास परिचित नहीं था, मैं बस अपने ताऊ जी के बेटे अरमान को जनता था और एक दो भाई बहनों को। शनिवार रात मैं उनके घर पहुंचा, जाकर देखा तो 8 से 10 लड़के और 12 से 14 लड़कियां काम में लगे थे, कुछ मुझसे छोटे थे तो कुछ मुझसे बड़े।
मेरी उमर तब 21 थी गांव वाले लड़के जैसा सख्त जिस्म और दिल्ली वाले लड़कों जैसा चालू दिमाग था मेरा। उस समय तक मैंने लड़कियों को पटाना शुरू कर दिया था, मैंने अपने आपको ऐसे सेट किया था के कोई भी लड़की मुझसे 3 या 5 सेकंड अगर नज़रे मिला लेगी तो वो मुझसे आसानी से पट जाएगी।
ताऊ जी का घर बहुत बड़ा तो नहीं था मगर इतना था के उसमें 6 कमरे थे जिनमें काफी लोग एक समय में सो सकते थे। मेरे जिस भाई की शादी थी यानी अरमान वो खुद एक आर्किटेक्ट है तो उसने अपने घर को काफी अच्छे से बनाया था।
मैं अंदर गया ताऊ जी, ताई जी और बाकी घर में बड़े बुजुर्गों से मिला फिर अरमान के बड़े भाई सफिक के पास गया और उसने मुझे बताया की क्या काम करना है। उसने मुझे पूरे घर में लाइटें लगाने को बोला और कहा कि पैसों के बारे में मत सोचना जो चाहिए रोजा से ले लेना और लिखवा देना।
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मैं उनसे बात कर के रोजा के पास जाने को मुड़ा और एक लड़की से टकरा गया, उसके और मेरे होंठ धड़ से मिले के एक नर्म सा दर्द महसूस हुआ। मैंने अपने आपको संभाला अपने होंठ को सहलाते हुए नज़रे उठाकर ऊपर देखा, तो सामने एक सोन पारी जैसी लड़की खड़ी थी।
पीला टी शर्ट,उससे बाहर निकलती नर्म सांवली सी बाहें, जालीदार चुनरी से झांकता गला, सादी सफेद 6 जेबों वाली जींस, पैरों में स्पोर्ट्स शूज़ पहने अपने नर्म हाथों से वो अपने होंठ सहला रही थी। सफिक भाई बोले के सम्हाल कर काम करो दोनों।
उनके सामने ही हम टकराये थे ये बस एक संयोग था, तो किसी ने कुछ नहीं कहा। उसने अपनी भूरी आँखें नादानी से उठाकर देखी और प्यार से कहा “बेवकूफ गधे, अंधे हो क्या!” भाई उसने मुझे बस मुंह से गाली ही नहीं दी वहां पर बाकी मुझे फील पूरी हो गई थी।
लेकिन उसका चेहरा मेरी आँखों में बस गया था, हमारी आँखें पूरे 4 सेकंड मिली रही मैंने अपनी ज़बान से इस दौरान एक लफ्ज़ नहीं निकाला था। वो मुझे कंधे से धकेलते हुए अपनी सहेली के साथ चली गई, उसका चेहरा गालों से गोल और होठों के नीचे से नुकीला था।
जाते जाते उसने पलट कर मुझे देखा और मैंने अपने होठों पर ज़बान घुमा कर उसके होठों के स्वाद को अपने दिल में बसा लिया। ये सब बस पांच मिनट में हुआ लेकिन मुझे लगा के घंटों बीत गए, मैं फिर रोजा के पास गया मैंने उसे बस थोड़ा बहुत ही जानता था जान पहचान उतनी थी जितनी शादियों में अपने परिवार वालो को खाना खिलाते समय हो जाती है।
रोजा ने मुझे 5000रु दिए और कहा हमारे पास दो दिन का समय है और पैसे चाहिए हो तो ले लेना मगर अच्छे से लाइट्स लगाओ। जो खर्चा हो मुझे बाद में हिसाब दे देना। रोजा को बहुत समय बाद मैंने देखा था, उसकी चूची मस्त आकर्षक थी, उसने बहुत सलीके से कपड़े पहने थे फिर भी उसके चूंचे की गहराई मैं देख पा रहा था।
उसके मोटे गुलाबी होठों को देखकर मेरा मन हुआ के यही चूस लूं मगर मुझे अपनी जान प्यारी है तो मैंने ऐसा कुछ नहीं करा। वो अपनी मस्त मादक गांड़ को हिलाते हुए लकड़ी की कुर्सी छोड़ के उठी मुझे पैसे दिए और बताया कि बाहर इवेंट मैनेजर सफीना होगी रिश्ते में मेरी बहन है वो ख्याल रखूं उसका बाकी उससे बात कर के लाइट के रंग और डिज़ाइन समझ लूं।
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मैं बाहर गया, सफिक भाई से सफीना के बारे पूछा तो वो बोले “जिस लड़की के तुमने लिप्स चखे थे वहीं थी सफीना।”
मुझे एक ही समय में खुशी और डर महसूस हुआ। मैंने घर के बाहर सफीना को देखने गया तो वो मजदूरों को काम बता रही थी, मैं वहां पहुंचा तो वो मुझे देखते ही भड़की बोली : “तुम शहर के आवारा लड़के क्या समझते हो की गांव की लड़की को कैसे भी मना पटा लोगे फिर मौज कर के निकल लोगे, जाओ निकलो इधर से नहीं तो यही सूत दूंगी।”
अब मुझे बुरा लगा मैंने भी चालू बनते हुए कहा “ओ मैडम! मेरे भाई की शादी है इसलिए यहां आया हूं भले ही आप कितनी ही खूबसूरत सोन परी लगो इस समय, लेकिन मुझे बस अपने काम से मतलब है। मुझे आपके इन सुनहरे हाथों और खूबसूरत मॉडल फिगर में कोई इंटरेस्ट नहीं मुझे आप बस लाइटिंग का बताइए।”
वो शर्माती हुई मुझे हल्का सा डाटी फिर बताया की लाइट्स के लिए वो काम करने जा रही है मुझे उसके साथ साथ ही रहना है। काम करते करते उसने मुझसे मेरा नाम पूछा मैंने बता दिया मेरा नाम अफरोज है सब प्यार से जानूँ बुलाते है!
वो बोली “मैं नहीं बुलाऊंगी।”
मेरी लंबाई 5 फुट 5 इंच है उसकी लंबाई 5 फुट 2 इंच थी, वो सामान पकड़ते हुए मेरे करीब आती तो उसका माथा मेरे होठों के करीब हो जाता। मैंने एक अच्छे बच्चे की तरह उसके काम मैं हाथ बटाया, एक दो बार मार्केट के चक्कर हमने बाइक पर साथ साथ लगाए, अब गांव का रास्ता था तो गड्ढे भी काफी थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बाइक जितना झटके लेती मेरी बहन सफीना के चूंचे मुझसे पीठ पर उतने लड़ते, थोड़ा तो मैंने भी चांस मारा। मार्केट में उसने मुझसे कुछ खाने-पीने को पूछा। तो मैंने मुस्कुराते हुए कह दिया कि आते ही मैंने मुंह मीठा कर लिया था, उसका स्वाद नहीं भूलना चाहता! सोचता हूं आज न खाऊं कुछ।
वो थोड़ा चिढ़ी फिर मुझसे चलने को बोला आते समय वो बाइक पर मुझसे दूर होकर बैठी, लेकिन गड्ढों की कृपा थी के वो मुझसे फिर आकर चिपक गई। रास्ते भर उसने मुझसे कोई बात नहीं की, हम वापस घर आ गए, आते आते देर हो गई थी।
रात के 7 बज रहे थे सबको खाने के लिए बुलाया जाने लगा। उसकी सहेलियां आकर उसे ले गई। जब तक में घर आया तो इतने में अरमान भी आ चुका था, मैं उससे मिला अच्छे से हाल चाल पूछा। हमने खूब बाते की मैंने उसे सफीना के बारे में बताया तो वो खूब हंसा और बोला “साले आते ही शुरू हो गया” हालांकि जो हुआ उनमें मेरी कोई खास गलती नहीं थी।
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मैं और अरमान छुप छुपाकर घर से निकले, उसको उबटन लगाया जा चुका था और हमारे घर कहते है उबटन के बाद लड़के को या लड़की को बाहर नहीं निकलना चाहिए। फिर भी हम बाहर गए मस्त चिकन फ्राई खाए पीए और कुछ देर में घर आ गए, सबने पूछा खाना खालों लेकिन मेरा पेट भर चुका था तो मैंने मना कर दिया।
फिर धीरे धीरे सोने का इंतज़ाम होने लगा, सब बड़ों ने खबरदार कर दिया की रात को देर तक कोई नहीं जगेगा क्योंकि अगली सुबह जल्दी उठकर कामों में लगना है। मैं छत पर लेटने की तैयारी करने लगा, बिस्तर लगाकर घर से बाहर खेत की तरफ वाली सड़क पर टहल रहा था। सामने से सफीना अपनी असिस्टेंट के साथ सिगरेट पी रही थी।
उसकी असिस्टेंट मुझे देखकर बोली “आपने खाना क्यों नहीं खाया?”
मुझे ध्यान आया की वो भी वहां खाना खा रही थी जब मुझसे पूछा गया था। तो मैंने चांस लेते हुए बोला कि “मैंने आते ही मुंह मीठा कर लिया था तो अपना टेस्ट बदलना नहीं चाहता।”
सफीना ने हमदर्दी भरी आँखों से देखा और बोली “क्या बकवास है , बेशर्म”।
फिर वो वहां से चली गई, एक-एक कर के सब सोने लगे रात के करीब एक बजे मेरी आँख खुली तो मैं अंगड़ाई लेते हुए उठा। काफी देर लेटे रहने के बाद भी मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं छत पर इधर उधर घूमने लगा। मैंने ध्यान दिया की घर के बाहर दरवाज़े के पास कोई घूम रहा है.
मैं आराम आराम से बिना शोर करे वहां जाने लगा , जाते हुए अरमान के कमरे से आह! आओह ! भाई आह धीरे! की मस्तानी सी आवाज़ें आ रही थी। मैंने खिड़की से देखा तो अंदर अरमान और रोजा के जिस्म एकदम नंगे आपस में रगड़ खा रहे थे, रोजा तेज़ी से आह! आफ आआह! भाई धीरे! ओह ! की आहे भर रही थी।
दोनों भाई बहन की चुदाई मेरी आँखों के सामने चल रही थी। मेरा मन किया के मैं इस नज़ारे को पूरा देखूं लेकिन मेरा ध्यान तो सोन परी पर था। मैं दबे पाऊं वहां पहुंचा तो उधर सोन परी यानी सफीना खड़ी थी। वो मुझे देखकर हैरान हो गई, वो मुझसे बोलने लगी “तुमको रात में भी सुकून नहीं है क्या, क्यों पीछे पीछे घूम रहे हो।”
मैंने उसे शांत करने के अंदाज़ में कहा “मुझे खाली पेट नींद नहीं आ रही थी।”
मैंने उसके चेहरे के रंग बदलते देखकर बोला “यार, कुछ दिन हम यहां रहेंगे फिर पता नहीं कब मिलेंगे जो स्वाद मुझे आज मिला था तुमसे, वो दोबारा तो कभी मिलने से रहा, तो सोचता हूं जितना हो सके उसे महसूस कर लूं।”
अब उसके पास शर्माने के अलावा कोई चारा न था तो वो शर्माते हुए बोली “तुम सच में कुछ नहीं खाओगे क्या ?”
मैंने भी ईमानदारी से कहा “मेरी भी एक हद है अगर मैं तुमसे कहूं के कुछ नहीं खाऊंगा तो वो झूठ होगा, लेकिन कम से कम सुबह तक तो तुम्हारे दिए हुए स्वाद के साथ ही रहूंगा।”
फिर उसने जो बोला तो मेरे कानों को यकीन नहीं हुआ वो मुंह फेरती हुई बोली “तुम खालों खाना, तुमको वो स्वाद दोबारा दे दूंगी मैं।”
मेरा ये सुनकर दिमाग घूम गया मैंने कंफर्म करने के लिए उससे कहा “क्या कहा तुमने फिर से कहना?”
वो हस्ती हुई बोली “जाओ जाकर खाना खालों, इससे पहले मेरा इरादा बदल जाए।”
मैंने उसके गालों को पकड़ा और चूमने के लिए आगे बढ़ा, मगर उसने मुझे रोक दिया वो बोली “पहले खाना खाओ जाकर।”
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भाई मैं सच कहता हूं मैं भागा भागा गया मुझे भूख नहीं थी फिर भी जुगाड कर के 2 रोटी लेकर आया और उसके सामने खाई। वो मुझे खाता देखती जाती और मुझे देखकर मुस्कुराती जाती, जब मेरी रोटियां खत्म होने को आई तो उसने अपनी पॉकेट से एक लिपस्टिक निकाली और अपने होठों में रंग भर लिए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैं सफीना के करीब पहुंचा उसकी कमर पकड़ कर उसे अपनी तरह खींचा, कुछ पल हमने एक दूसरे की आँखों में देखा फिर धीरे धीरे कर के हमारे होठ क़रीब आने लगे। मेरी बहन ने अपनी बाहे मेरे गले में बांध ली उसने अपनी आँखें बंद कर ली मैं हल्की चांद की रोशनी में उसके चेहरे को देख रहा था।
वो वाकई सोन परी जैसी सोने की बनी लग रही थी, उसके होठों से चॉकलेट की मीठी खुशबू आ रही थी। उसकी खुशबू से मुझे अपने होठों पर मीठी कप कपि लगने लगी। मैंने भी अपनी आँखें बंध की और उसके होठों को अपने होठों में दबा लिया।
उफ्फफ! उसके होठ सच में चॉकलेट के बने थे शायद इतने मीठे एहसास उनके होठों को चूमते समय मुझे मिल रहे थे जो कभी नहीं मिले थे। उम्मम! मोह्हम्म! उम्मं! ओहम! उम्म्म्हन्हं! मैं आम तौर पर बहुत शांति से किस करता हूं लेकिन उसके साथ, मैं खुद को रोक न सका। उम्मम! मोह्हम्म! उम्मं! ओहम! उम्म्म्हन्हं!
हमारी आवाज़ थोड़ी ज़्यादा निकल रहीं थी, वो अब गर्म होने लगी उसने मेरे होठ चूसना बंद करे फिर मुझे एक नज़र नीचे से ऊपर तक देखा। आँखें बंद कर के एक लम्बी सांस उसने ली फिर आँखें खोली और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचती हुई घर के पीछे तबेले की तरफ ले गई।
तबेले में कुछ लोग सोए थे तो वो मुझे तबेले के भी पीछे ले गई, फिर उसने मुझे एक बैल गाड़ी पर धक्का दिए और मेरे ऊपर आकर चढ़ गई। वो पूरे जोश में मुझे चूस रही थी, उसने अपने चॉकलेट वाले होठ मेरे होठों पर इतना रगड़े कि मेरे होठ भी चॉकलेट के हो गए थे।
उसने अपनी पीली कुर्ती उतारी, और अपनी गर्दन मेरे चेहरे के ऊपर लगाई। फिर मैंने उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया। मैं उसे एक तरफ चूमता तो धीरे धीरे वो अपना चेहरा घुमा देती वो मुझसे अपने चेहरे को चूमाती जा रही थी।
मैंने अपना हाथ नीचे डाला और लन्ड को पेंट से आज़ाद कर दिया, हमारी आह! उफ्फफ! हम्मम! की धीमी आवाज़ गूंजने लगी। वो अपने 26 के चूंचे मेरे चेहरे पर मसल रही थी, मैं रुक रुक कर उसके गले से चूचों तक एक एक हिस्से को चूमने लगा।
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उसकी 24 की कमर मेरे हाथ में मक्खन की तरह फिसल रही थी मुझसे नहीं रहा गया तो मैं उसकी 30 की गांड़ को दबाने लगा। उसके होठ चूमते चूमते मैंने उसकी जींस को खोल दिया। थोड़ी देर बाद मैंने उसे पलटा और उसकी ब्रा उतारने लगा, उफ्फ! उसके चूंचे इतने मोटे तो नहीं लेकिन शानदार तरह से नुकीले थे उसके निप्पल एकदम खड़े हो गए थे।
मैंने उसके नाज़ुक निप्पल चाटे उसके चूची को बहुत प्यार से चूमा उसकी नर्म चूंची सख्त और गद्दीदार थी। मैंने उसकी चूचियां भींची तो उसकी अआह! निकल गई। मैं ज़ोर से उसके दूध दबाने लगा, उसकी अआह! आह! आहओह! धीरे आह! निकलते निकलते मेरी धड़कने बढ़ा रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं चूंचे चूमते हुए पेट की तरफ गया, फिर थोड़ा पेट को चाटकर पेट के नीचे आया। उसकी सांसे बुरी तरह बढ़ गई थी वो हांफे जा रही थी, मैं आगे उसकी चूत की तरफ बढ़ा वो कामुकता से भर चुकी थी, उसकी चूत गीली हो गई थी।
मैंने उसको लन्ड चूसने के लिए बोला तो उसने साफ मना कर दिया बोली की “मज़ा खराब मत करो।”
मैंने भी ज़िद नहीं की अपना लन्ड बहन की चूत पर लगाया।
उसने अपनी टांगे मेरी कमर पर बांधी फिर चूत लन्ड पर दबाई, मैं लन्ड अंदर नहीं डाल रहा था मुझे उसको तड़पते देखना अच्छा लग रहा था। उसका चेहरा पसीने से बेचैन था, उसका जिस्म आग जैसे तप रहा था वो वासना भरी आवाज़ में बोली “डालना क्यों तरसा रहा है, कोई आ जाएगा”।
मैंने अपनी बहन का चेहरा बाँहों में भरा उसकी आँखें अपनी आँखों से मिलाई उसके होठों को चूसते हुए चूत में एक धक्का लगाया। उसकी अआह! निकल गई, पहली बार में ही समझ आ गया कि ये इसका पहली बार नहीं है। मैंने फिर थोड़ा थोड़ा कर के रफ्तार बढ़ानी शुरू करदी।
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आह! अआआह! यस। आआह! हुह्मम्मम! ओह अफरोज। मुझे उसकी प्यारी सी आहे अच्छी लग रही थी, मैंने उनकी गर्दन चूमनी शुरू कर दी। वो लगातार अआह! हम्मम! ओह अफरोज और तेज़! आआह!
मैंने कहा “थोड़ा आवाज़ धीमी करो अरमान का कमरा पास ही है वो सुन लेगा”।
वो कहने लगी “तुम उसके कमरे के पास से आए थे तुमको रोजा और अरमान चुदाई करते हुए नहीं देखे क्या?”
मैंने अपने धक्के हल्के करे और उससे पूछा तुमको कैसे पता तब उसने सच बताया।
“रोजा मेरी बेस्ट बहन के साथ ही बचपन की दोस्त भी है हमने एक दूसरे की चूत भी चाटी है और नहाए भी है साथ, अरमान और वो सौतेले भाई बहन है उनका ये चुदाई का रिश्ता बहुत सालों से है।”
मैं ये सब सुनकर हैरान था तभी सफीना ने मुझे अपनी तरफ खींचा और बोली “तुम धीमे क्यूं पड़ गए जल्दी करो!”
मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई आआह! हम्मम! आआअह! ओह! मैंने बुरी तरह उसकी चूचियां और निप्पल नोच दिए वो चीखने लगी। अआआह! अफरोज आगाह! ऊईझ! मज़ा आ गया अआआह! अफरोज अआआह ओह। मेरी जान, बहुत गर्मी है तुममें आआह.
मैं लगातार धक्के मार रहा था, वो भी मस्त होकर गांड़ उठाते हुए मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। हम ऐसे ही आधा घंटा होश हवास खोकर एक दूसरे को चोदते रहे। कुछ ही देर में हम दोनों साथ ही चरमसुख को पहुंचे और अआह अआआह की मादक सिसकारियों के साथ एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही नंगे सो गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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करीब तीन बजे उसने मुझे उठाया और बोली “अफरोज जल्दी उठो वरना कोई आ जाएगा अब, हमने कपड़े बदले फिर अपने अपने कमरे की तरफ बढ़ गए। जाते जाते हम एक बार गले मिले उसने मुझे कान में बोला “तुमको जो चाहिए था वो मिल गया है अब न भूखे रहना और न मेरे पीछे आना।” मुझे थोड़ा बुरा लगा की मैंने चालाकी से उसे अपने लन्ड के नीचे लिया। उसी अफसोस में मेरे मुंह से निकल गया
“मैं तुमको देखते ही पसंद करने लगा था, तुम्हारे पीछे इसलिए नहीं था की मुझे चोदना था तुमको, बल्कि मुझे तुम्हारे साथ एक लंबा रिश्ता बनाना है।” मेरी बात सुनकर वो मुझसे लिपट गई, वो इतना ज़ोर से गले लगी के चूंचे और निप्पल दब गए, मेरे गाल चूमते हुए सफीना ने कहा “कल बात करते है इस बारे में अभी सो जाओ, और खबरदार जो ब्रश कर मेरा स्वाद अपने होठों से हटाना मत नाश्ते तक, मैं भी नहीं हटाऊंगी।” और हम कमरे में चले गए।
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