Maa Ki Chut Gand Dekha
मैं 20 साल का लंबा-चौड़ा लड़का हूँ। मेरी हाइट 5’10” है। ये स्टोरी के मुख्य पात्र हैं मैं और मेरी 45 साल की माँ। मेरी माँ का नाम विभा है। दिखने में मस्त लगती हैं। ज्यादा गोरी तो नहीं हैं मगर माल लगती हैं। मेरी फैमिली में 5 मेंबर हैं। एक छोटा भाई और एक बहन और है। हम नॉएडा में रहते हैं और एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं। पापा का बिजनेस है और मम्मी हाउसवाइफ हैं। Maa Ki Chut Gand Dekha
मेरी मम्मी पढ़ी-लिखी नहीं हैं और पापा भी ज्यादा नहीं पढ़े। मैं बी.टेक थर्ड ईयर में हूँ और छोटा भाई 11th स्टैंडर्ड में है। हमारा मकान 2 मंजिला है जिसमें 3 रूम नीचे और 3 ऊपर। हम ऊपर रहते हैं। नीचे किरायेदार रहते हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा सच में होगा।
मेरी मम्मी पर गंदी नजर बहुत साल पहले से थी। जब मैं 18 साल का था और मम्मी-पापा की चुदाई करते देखा था। अंधेरे में कुछ दिखाई तो दे नहीं रहा था मगर सुनाई दे रहा था और पच-पच की आवाज सुनाई दे रही थी। तभी से मेरा नजरिया माँ की ओर गलत हो गया और फिर कई बार ये हुआ। और अब तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था। और मैं जब पापा मम्मी की चूत मारते थे तो मैं इमेजिन करके मुठ मारता था।
धीरे-धीरे समय गुजरता गया और मुझे पता चला कि मम्मी पैंटी और ब्रा नहीं पहनती हैं। और मेरी मम्मी साड़ी ही पहनती थीं ज्यादातर और रात में कभी-कभी नाइटी। एक दिन गर्मियों का टाइम था। मैं अपने रूम में मूवी देख रहा था और मम्मी हॉल में सो रही थीं। पापा छत पर सो रहे थे।
तो अचानक मुझे प्यास लगी और मैं पानी पीने के लिए उठा और फ्रीज की तरफ गया। और हॉल की लाइट ऑन की तो मेरे होश उड़ गए और शरीर में सरसराहट सी होने लगी। मेरी मम्मी खाट पर सो रही थीं। उस दिन मम्मी ने नाइटी नहीं पहनी थी और पेटीकोट-ब्लाउज में सो रही थीं।
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मैंने देखा कि मम्मी का पेटीकोट घुटनों तक उठा हुआ है और मम्मी बेसुध होकर सो रही हैं। मैं दबे पाँव आगे बढ़ा और देखा तो मुझे मम्मी की चूत के काले बाल दिखाई दे रहे थे। घने बाल थे और गोरी-गोरी नंगी जाँघें क्या लग रही थीं। मेरा लंड खड़ा हो गया और मुँह में पानी आने लगा।
मैंने पहली बार किसी भी औरत को नंगा देखा था। आप लोग अंदाजा लगा ही सकते हैं वो क्या पल रहा होगा मेरे लिए। थोड़ी देर बाद मम्मी ने हरकत ली और मैं डर के मारे जल्दी से लाइट बंद करके अपने बिस्तर पर आ गया। और लंड निकालकर सहलाने लगा। और वही सीन मेरी आँखों के सामने आ रहा था बार-बार।
मेरा लंड पूरी तरह से टाइट था और मुझसे अब रहा न गया। और मुझे और देखने की जिज्ञासा थी। तो मैं इस बार बाथरूम के बहाने बाहर गया और लाइट ऑन की तो बस मेरी मानो कामना पूरी हो गई थी। मम्मी का पेटीकोट लगभग कमर तक आ गया था।
मैंने जल्दी से मम्मी की चूत की झलक देखी। पूरी तरह से चूत पर झांटों ने कब्जा कर रखा था। वाह क्या चूत थी। चूत के होंठ बहुत बड़े थे। पापा ने खूब चोदा होगा मम्मी को। जाँघ पर एक मसा था। टाँगें फैलाई हुई पड़ी हुई थीं माँ बेसुध। और जल्दी से मैं बाथरूम गया और गेट बंद करते ही मम्मी की आँख खुल गई और उन्होंने अपनी हालत ठीक की।
मैं अंदर आया तो देखा मम्मी ने पेटीकोट ठीक कर लिया था। फिर मैं जल्दी से रूम में एंटर हुआ और लाइट बंद कर दी। फिर अपना कच्छा उतारा और उस रात 2 बार मुठ मारी और सुबह को लेट उठा। लगभग 9.30 बजे काफी अच्छी रात बीती थी ये मेरी। लंड अभी भी टंच था और वो सीन सामने आए जा रहे थे सब।
भाई स्कूल जा चुका था और पापा अपने काम पर। और घर में बस मैं और मम्मी ही थे। मम्मी नीचे थीं और मैं 10 बजे तक फ्रेश हो गया था और चाय पीने लगा और टीवी देखने लगा था। उस दिन मैं कॉलेज नहीं गया था। थोड़ी देर बाद मम्मी भी आ गईं और काफी खुश दिखाई दे रही थीं। और मुझसे पूछने लगीं—
माँ- आज कॉलेज नहीं जाएगा क्या?
मै- नहीं आज नहीं जा रहा मैं।
फिर मम्मी नहाने चली गईं। उस दिन फ्राइडे था। और आप लोगों को मैं एक बात बता दूँ कि थर्सडे को हमारे यहाँ कपड़े नहीं धुलते हैं। कोई साबुन का भी इस्तेमाल नहीं करता है। यहाँ तक कि अंडरवियर भी नहीं धुलते हैं। और हमें वही पुराने अंडरवियर पहनने पड़ते हैं फ्राइडे को।
पर शायद उस दिन मम्मी भूल गई थीं और पेटीकोट में ही नहा लीं और गीला कर दिया। फिर बाद में उसे ध्यान आया कि आज शुक्रवार है और उसका पेटीकोट नहीं धुला है। वो अब क्या पहनेगी क्योंकि उसके सभी पेटीकोट गीले पड़े थे। बस न्यू पेटीकोट ही बेड में था।
मम्मी ने मुझसे कहा—
माँ- प्रशांत मेरा बेड में से एक ग्रीन कलर का पेटीकोट होगा। दे देना।
मै- ठीक है।
पर पेटीकोट मुझे नहीं मिला। मैंने 2-3 बार ढूँढा और बोल दिया कि मुझे नहीं मिल रहा। तभी मुझे पेटीकोट मिल गया और मेरे दिमाग में शरारत सूझी। और मैंने पेटीकोट बेड के नीचे डाल दिया और बोल दिया—
मै- मुझे नहीं मिल रहा वहाँ।
मम्मी परेशान गीले पेटीकोट में खड़ी थीं तभी क्योंकि मम्मी की नाइटी भी गंदी और भीगी पड़ी थी। तो मम्मी नीचे क्या पहनतीं। तभी मुझे एक स्कर्ट दिखाई दी। बहुत पुरानी स्कर्ट थी मेरी बहन की थी स्कूल की। बहुत छोटी लग रही थी। मैंने मन ही मन कहा—अगर ये मम्मी पहनें तो कैसा रहेगा क्योंकि वो तो कच्छी पहनती नहीं हैं तो मुझे उसकी चूत दिन में भी दिखने का मौका मिलेगा साफ-साफ।
तो मैंने मम्मी से कहा—
मै- मम्मी एक स्कर्ट है। पेटीकोट नहीं मिल रही। इससे पहनकर आ जाओ जब तक पेटीकोट नहीं मिल जाता।
मम्मी गुस्सा हो रही थीं पर थोड़ी देर बाद बोलीं—
माँ- ले आ। और बोलीं कि ये तो मेरे नहीं आने वाली है।
मै- यही है यहाँ पर। तो फिर मैं देने चला गया। लो।
मम्मी ने दरवाजा खोला। बोलां—
माँ- ला।
और एक हाथ बाहर निकालकर स्कर्ट अंदर खींच लीं। और कहने लगीं—
माँ- क्या बदल लाया है?
और पेटीकोट उतारकर पहनने लगीं। और बहुत जोर से कहने लगीं—
माँ- ये मेरे नहीं आ रही है। बहुत टाइट है।
और फिर बाथरूम का दरवाजा खुला। मैं अपने कमरे में था उस टाइम। मम्मी ने हॉल में कदम रखा और मैं तो जैसे मानो देखता का देखता ही रह गया। ओह माय गॉड क्या लग रही थीं मेरी माँ विभा। ब्लू कलर की चेक वाली स्कर्ट में। तौबा रे तौबा। स्कर्ट बहुत टाइट आ रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कमर से घुटनों तक ही आ रही थी स्कर्ट। और ऊपर मम्मी ने ब्लाउज पहना था। पर मेरी नजर तो नीचे थी। गाँड क्या गदर मचा रही थी। उस दिन मुझे अपनी माँ के सेक्सी रंडी जैसे फिगर का एहसास हुआ। मम्मी कमरे में आईं और बोलीं—
माँ- तुझे कुछ मिलता भी है?
और बेड खोलने के लिए आईं। और मुझसे कहा—
माँ- बेड पकड़ ले।
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और बेड खोलके नीचे झुक गईं और पेटीकोट ढूँढने लगीं। जब वो झुकीं तो उनकी गाँड मेरी तरफ थी। मेरी तो हालत ही खराब हो गई।
माँ- प्रशांत उठ बेड पर से। तुझे जिंदगी में कुछ मिला भी है?
मम्मी अपनी गाँव की लैंग्वेज में मुझसे बोलती हैं। मैं बेड पर से उठकर खड़ा हो जाता हूँ और मम्मी के पीछे खड़ा हो जाता हूँ। मम्मी एक झटके में बेड खोलती हैं और थोड़ी सी कमर को नीचे झुकाती हैं। और मेरी तो कच्छे में हालत खराब हो रही थी। मुझे मम्मी की घुटनों से ऊपर तक की जाँघें साफ दिखाई दे रही थीं और मैं इसका पूरा आनंद ले रहा था। थोड़ी देर तो मम्मी पेटीकोट ढूँढती रहीं। फिर जब उनके हाथ में दर्द होना स्टार्ट हुआ तो मुझसे बोलीं—
माँ- खड़ा क्या है (हरामखोर)? बेड को पकड़ ले। पता ना कहाँ आग लग गई पेटीकोट में।
जाहिर था कि मम्मी को काफी गुस्सा आ रहा था उस टाइम क्योंकि स्कर्ट काफी टाइट थी। फिर मैंने कहा—
मै- लाओ मैं पकड़ लेता हूँ बेड। तुम ढंग से ढूँढ लो।
और मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था। लंड फुल्ली टाइट था मेरा। मैं खाली अंडरवियर में था। फिर मैंने बेड पकड़ लिया और मम्मी के बहुत करीब पीछे आ गया। बस मुझमें और मम्मी में मुश्किल से 2 इंच की दूरी होगी। और फिर मम्मी थोड़ी और झुकीं। बड़ी लगन से पेटीकोट ढूँढ रही थीं।
जैसे ही मम्मी झुकीं मुझे उनके 60% चूतड़ साफ दिखाई दे रहे थे। और मम्मी के चूतड़ों पर गाँड की दरार भी दिखाई देने स्टार्ट हो गई थी। चूतड़ों पर भी मम्मी के हल्के-हल्के बाल साफ दिखाई दे रहे थे। मैं तो मानो अपने चरम पर था। इतना एक्साइटेड हो गया था कि लंड पर कोई हाथ भी लगा दे तो मेरे पानी की धार निकल जाती। मम्मी को करीब 5 मिनट हो गए थे।
पेटीकोट को ढूँढते-ढूँढते कि अचानक उनकी कमर में झुकने की वजह से दर्द होना स्टार्ट हो गया। तो वो एकदम से ऊपर की तरफ उठीं और उनका सिर बेड पर बहुत जोर से लग गया। क्योंकि मेरा ध्यान तो मम्मी की मस्त काली गाँड देखने में था। इसलिए मुझे पता ही नहीं चला कि जो बेड का सिरा मैंने उठा रखा था वो बहुत नीचे हो गया था। और मम्मी का सिर उसमें लग गया।
एक तो मेरी मम्मी पहले से ही गुस्से में थीं। ऊपर से सिर बेड पे लगने की वजह से मेरी तो शामत आ गई। और मम्मी ने मुझ पर अपनी गाँव की गालियों की बरसात कर डाली। और मैं चुपचाप सुनता रहा। पर मम्मी हार कहाँ मानने वाली थीं। उन्होंने मुझसे कहा—
माँ- ढंग से बेड पकड़ ले।
और फिर झुक गईं। और मम्मी गुस्से में इस बार कुछ ज्यादा ही झुक गईं। और मेरी तो लॉटरी ही लग गई। मम्मी की पूरी की पूरी गाँड-चूत झुकी हुई मेरे सामने थी। मम्मी के राइट चूतड़ पर एक बहुत मोटा मस्सा था काले कलर का। और उसके नीचे तिल। मम्मी की सांवली गाँड ने मुझे दीवाना बना दिया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मम्मी की चूत चॉकलेटी कलर की थी और चूत का छेद भी साफ दिखाई दे रहा था। मम्मी की चूत का छेद इतना बड़ा था कि मानो शायद उसमें दो लंड आराम से आ जाएँगे। शायद ये मेरी कल्पना थी। चूत के बीच में से मास बाहर को आ रहा था। और मम्मी की गाँड के छेद के क्या कहने। दोस्तों शायद आपने कभी इंडियन औरतों की गाँड का छेद ना देखा हो।
उसकी गाँड में किसी की भी 2 उँगलियाँ आराम से आ सकती थीं बिना तेल लगाए। मैं आपको कैसे शब्दों में बयान करूँ कि मम्मी की गाँड का छेद कितना मनमोहने वाला था। वो तो दोस्तों मैं था वहाँ पर। वरना किसी और के साथ ऐसा होता तो मैं विश्वास से कह सकता हूँ वो अपना लौड़ा निकालकर मम्मी की गाँड में दे चुका होता। मेरा ध्यान पूरी तरह से गाँड पर ही था कि मम्मी जोर से चिल्लाईं—
माँ- बेड ढंग से पकड़ ले।
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झुकने की वजह से मम्मी मुझसे मुश्किल से आधा इंच दूर थीं। जैसे ही मैंने वहाँ से ध्यान हटाया बेड को और ऊपर कर दिया। जिस वजह से मैं और आगे की ओर आ गया। और मेरा लंड अब पूरी तरह से मम्मी की नंगी गाँड में चुभ गया। और मेरा तो मानो गला सूख गया हो। और मैं तो बस मूर्ति की तरह वहीं जम गया।
मम्मी की भी साँसें वहीं अटक गईं जब उन्होंने अपनी गाँड पर मेरे लंड का दबाव पड़ा। आप इमेजिन कर सकते हैं हम किस पोज़ में होंगे उस टाइम। एक पल के लिए तो मम्मी हटना चाहती थीं। बट ना चाहते हुए भी मेरे लंड की जो गरमी थी उन्हें हटा नहीं पाईं। और वो अब उत्तेजित होने लगीं। और शायद उनकी चूत में भी नमी आ गई थी।
अब मम्मी को मेरे लंड का एहसास अच्छा लग रहा था। और एक बार उन्होंने जरूर सोचा—ये मैं क्या कर रही हूँ। प्रशांत मेरा बेटा है। पर दोस्तों जब जिस्मों की गरमी बढ़ती है ना तो लोग रिश्ता नहीं, औरत-मर्द देखते हैं। मम्मी वैसे ही पेटीकोट ढूँढने का नाटक करने लगीं। और मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुल थी।
मम्मी को अब मस्ती चढ़ने लगी थी। और फिर मम्मी थोड़ा सा पीछे और हुईं। अब मेरे पूरे लंड का दबाव मम्मी की गाँड पर था। मेरे लंड पर झटका लगा। और फिर मम्मी पेटीकोट ढूँढने के बहाने आगे हुईं। पर वो जाहिर ऐसे कर रही थीं कि ये सब अनजाने में हो रहा है। और फिर मम्मी रुक-रुक के चूतड़ आगे करतीं फिर पीछे करतीं। आगे-पीछे, आगे-पीछे, आगे-पीछे।
और मम्मी अनजान बन रही थीं। मुझे भी यही लग रहा था कि पेटीकोट ढूँढने के चक्कर में ऐसा हो रहा है। पर दोस्तों वो पल मेरे लिए किसी भी स्वर्ग से कम नहीं थे। मैं तो जन्नत महसूस कर रहा था। और मम्मी भी मेरे लंड से अपनी गाँड रगड़ रही थीं। और मेरी भी लिमिट खत्म होने वाली थी।
तो मैंने पूरे जोर से लंड का गाँड पर दबाव बना दिया। और मेरा पानी यानी कि वीर्य कच्छे में ही झड़ गया। उस दिन मैं पहली बार इतना ज्यादा झड़ा था। बहुत सफेद-सफेद वीर्य निकला था। मम्मी भी एक जगह शांत हो गईं। और वीर्य ज्यादा होने की वजह से क्योंकि मेरा लंड मम्मी की गाँड से सटा हुआ था तो वीर्य कच्छे से बाहर आकर गीला-गीला हो गया और गाँड पर लग गया।
मम्मी को जब गीलापन महसूस हुआ तो उन्हें पता चल गया था कि मैं झड़ गया हूँ। और उनकी आधी गाँड मैंने गीली कर दी थी। मम्मी को गरम-गरम वीर्य उत्तेजित कर रहा था। पर मेरी तो फटी पड़ी थी कि कहीं मम्मी को पता ना चल जाए। उनकी गाँड पर गीला माल महसूस ना कर लें।
पर पता नहीं क्या होगा अगर ऐसा हुआ तो। मैं ये सब नेगेटिव बातें सोचकर काँप रहा था। और चढ़ने के बाद जैसे सब गिल्टी फील करते हैं वैसे ही मैंने भी किया। पर मम्मी तो अनजान बन रही थीं। फिर जैसे ही उन्हें पता चला कि मेरा लंड ढीला पड़ चुका है तो वो एकदम से बोलीं—
माँ- रहने दे। नहीं मिल रहा पेटीकोट। पता नहीं कौन खा गया।
और वो ऊपर को आ गईं और हट गईं। जैसे ही वो मुझसे हटीं तो मुझे मम्मी की गाँड पर वीर्य लगा दिखाई दिया। एक तरफ से गाँड उनकी गीली हुई पड़ी थी। और मेरी फटी पड़ी थी। और फिर मम्मी हट गईं और खड़ी हो गईं। और मैंने बेड बंद कर दिया और तुरंत अपने कच्छे को दुबका कर मतलब हाथ से छिपा कर बाथरूम की ओर भागा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
क्योंकि मेरा कच्छा आगे से पूरा गीला पड़ा था। बट मम्मी ने देख लिया था। मेरे और मम्मी के चेहरे पर एक खुशी थी। और उनका चेहरा तो लाल हो चुका था। क्योंकि मम्मी बहुत एक्साइटेड हो गई थीं इस घटना से। मैं झाड़ चुका था और बाथरूम में जाकर लंड साफ करके आया था।
फिर मैं बाहर आया और जल्दी से डर की वजह से कपड़े चेंज करके बाइक लेकर बाहर चला गया था। करीब मैं तीन बजे घर वापस आया। मुझे अभी भी डर लग रहा था, पर अब घर पर छोटा भाई भी स्कूल से आ गया था। मम्मी ने भी साड़ी पहन ली थी और वह सो रही थी। मैं भी खाना खाकर अपने रूम में सो गया और शाम को उठा। रूम से बाहर आया तो मम्मी बोलीं,
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मम्मी: खा गया था तू?
तब मैंने बोला,
मैं: मम्मी, दोस्त का फोन आ गया था इसलिए गया था।
मम्मी बोलीं,
मम्मी: कम से कम बता कर तो जाया कर।
फिर चार-पाँच दिन ऐसे ही गुजर गए। मैं डेली कॉलेज जाने लगा था। शनिवार को मेरी छुट्टी होती है तो मैं उस दिन घर पर ही था। पापा और भाई जा चुके थे, मैं और मम्मी ही थे। उस दिन हमारे यहाँ रात के दो बजे से ही लाइट नहीं आ रही थी। मैं उठकर इन्वर्टर से टीवी देख रहा था, तभी मुझे मम्मी की आवाज आई। मम्मी बहुत देर से मुझे आवाज लगा रही थीं। मैं दौड़कर बाहर गया और मुझे मम्मी कहीं दिखाई नहीं दीं। फिर मैंने बोला,
मैं: मम्मी कहाँ हो?
तो मुझे मम्मी की आवाज टॉयलेट में से आ रही थी। मम्मी उस समय पॉटी कर रही थीं। मैंने बोला,
मैं: हाँ बोलो क्या बात है?
मम्मी बोलीं,
मम्मी: बेटा, टंकी में पानी नहीं आ रहा है और मैं करने के लिए बैठ गई हूँ। हमारी टंकी में पानी खत्म हो गया था क्योंकि कल रात से लाइट नहीं थी।
मैं यह शब्द सुनकर एकदम चौंक गया और खुश भी हुआ। फिर मम्मी बोलीं,
मम्मी: देख किसी बाल्टी वगैरह में थोड़ा-बहुत पानी हो तो मेरी टॉयलेट के डब्बे में डाल दे।
मैं तो एकदम खुश हो गया कि मम्मी की चूत के दर्शन आज मुझे सामने से करने का मौका मिलेगा, वह भी चुपके से नहीं, बिल्कुल सामने से। मैं खुश होकर बोला,
मैं: रुको, मैं पानी देखता हूँ।
और फिर मैं बाथरूम में चला गया। एक बाल्टी में पानी था। मैं उसे लेकर टॉयलेट के बाहर चला गया और आवाज दी,
मैं: मम्मी पानी ले आया हूँ, ले लो।
तभी मम्मी ने टॉयलेट का दरवाजा खोला और मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। मम्मी की काली चूत मुझे साफ दिखाई दे रही थी। मम्मी ने अपना पेटीकोट कमर तक चढ़ा रखा था। उसकी चूत खुली हुई थी। काले-काले झाँट के बाल उसकी चूत पर चार चाँद लगा रहे थे और मम्मी की चूत से पेशाब की बूँदें टिप-टिप गिर रही थीं।
पर दोस्तों, मुझे उसकी गाँड पर कोई गंदगी नहीं दिखाई दी और सीट पर भी कोई पॉटी नहीं पड़ी थी। इस बात से मैं थोड़ा परेशान और शंका में था। दोस्तों, ऐसा लग रहा था जैसे मम्मी ने पॉटी करी नहीं थी। बाद में मुझे पता चला यह सब नाटक मम्मी ने मुझे अपना भोसड़ा, अपनी चूत के दर्शन कराने के लिए किया था।
फिर मैंने जल्दी से पानी डाला और बाहर आ गया। और फिर बार-बार बस वही पोज़ मुझे दिमाग में आये जा रही थी। क्या मम्मी सच में मुझे अपनी चूत दिखा रही थीं या यह अनजाने में हो रहा था—यह सोच-सोचकर मेरा लंड मेरा पजामा फाड़ने को तैयार था। तभी मम्मी अपनी तटी धोकर बाहर आईं और बोलीं,
मम्मी: मेरे हाथ धुलवा दे।
और मैं वैसे ही मम्मी के हाथ धुलवाने चला गया। पजामे में मेरे लंड का उभार साफ देखा जा सकता था। जब मैं मम्मी के हाथ धुला रहा था तो मम्मी मेरा लंड ही देखे जा रही थीं। उस दिन दोस्तों, मेरे लिए बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल हो रहा था। तभी हमारे यहाँ लाइट आई और हमने पानी चलाकर टंकी को भर लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं रूम में नहा-धोकर बैठा था तभी मम्मी रूम में पोछा मारने आ गईं और उसने अपना पेटीकोट और साड़ी घुटनों तक कर ली और बैठ गई। दोस्तों, मेरा यह सीन देखकर दिमाग खराब हो गया। मुझे मम्मी की चूत साफ-साफ दिखाई दे रही थी। आप सोच सकते हो वह किस पोज़ में पोछा लगा रही होगी।
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मैं एकदम कामुक हो गया। मम्मी की चिकनी जाँघों ने मुझे दीवाना बना दिया था। मुझसे बर्दाश्त करना अब नामुमकिन था और मैं फिर बेड पर से उठा और बाथरूम में चला गया। और लंड बाहर निकाल के जोर-जोर से हिलाने लगा। फिर मैंने सोचा—यही सही मौका है। प्रशांत, लोहा गरम है। मम्मी बार-बार मुझको क्यों अपना नंगा शरीर दिखा रही है?
आज जो होगा होने दे और आज उसकी चूत में अपना लंड पेल दे। माँ है तेरी, किसी से कुछ कहेगी भी नहीं। फिर मैं बाथरूम से बाहर आया और अपना पजामा उतार दिया। मम्मी अपनी तिरछी नजर से मुझको देखे जा रही थीं। फिर मैं बेड पर लेट गया और थोड़ी देर चुप रहने के बाद मैंने मम्मी से बोला,
मैं: मम्मी, मेरे यहाँ बहुत तेज दर्द हो रहा है।
फिर मम्मी बोलीं,
मम्मी: कहाँ पर?
मैंने बोला,
मैं: पेट के थोड़ा नीचे।
दोस्तों, उस समय मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन यह सब मुझे मेरी हवस ने बुलवा दिया। मैंने बोला,
मैं: मम्मी, तेल गरम कर दो, मैं लगा लूँगा।
फिर मम्मी तेल गरम करने चली गईं और एक कटोरी में गुनगुना तेल लेकर आ गईं और बोलीं,
मम्मी: ले, लगा ले।
मैंने तेल लिया और बिना शर्म के मम्मी के सामने ही अपना खड़ा काला लंड बाहर निकाल लिया। मम्मी मेरे लंड को देखती की देखती ही रह गईं। उसकी आँखों में मानो एक नशा सा छा गया हो, चेहरे पर चमक आ गई थी। फिर मैंने उँगली में तेल लिया और लगाने लगा और धीरे से चीखा,
मैं: ओह्हाआ… ओय मर गया।
मम्मी बोलीं,
मम्मी: क्या हुआ? कहीं चोट मरवा के आया है क्या? किसी से लड़ाई तो नहीं हुई?
मैं बोला,
मैं: नहीं, अभी स्टार्ट हुआ है दर्द।
फिर मम्मी थोड़ी देर सोचने के बाद बोलीं,
मम्मी: ला, मैं लगा देती हूँ।
मेरी तो दोस्तों, मानो मन की मुराद पूरी हो गई हो। पर मैंने मना कर दिया और बोला,
मैं: नहीं मम्मी, रहने दो, मैं लगा लूँगा।
पर मम्मी बोलीं,
मम्मी: शर्मा मत, मैं लगा दूँगी वरना कोई प्रॉब्लम हो जाएगी।
फिर मम्मी बेड पर आकर बैठ गईं और मुझसे बोलीं,
मम्मी: अपना कच्छा नीचे कर ले, तेल से खराब हो जाएगा।
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और एक हाथ में तेल लेकर उसने मेरे लंड पर पहला स्पर्श किया। मानो मैं तो जन्नत में आ गया था दोस्तों। जिस बारे में सोचता था कि माँ मेरा लंड पकड़ेगी, आज वह रियल में हो रहा था। फिर मम्मी ने दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ा और तेल लगाने लगी। फिर अचानक दोस्तों, मुझे क्या हुआ यह तो मैं खुद भी आपको बता नहीं सकता।
मैंने जल्दी से मम्मी को एकदम पीछे की ओर धक्का दिया और उसको लिटा दिया। मम्मी इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। वह एकदम से चौंक गई थीं। फिर मैंने कुछ नहीं बोला और तुरंत मम्मी का पेटीकोट कमर तक चढ़ा दिया। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि मम्मी कुछ नहीं कर सकीं और मेरे सामने नंगी पड़ी थीं।
फिर मैंने अपने तेल वाले लंड को जल्दी से मम्मी की चूत में लगाया ही था कि मम्मी ने मुझे एक थप्पड़ मार दिया और मुझे धक्का देके भाग गईं और मुझे गालियाँ देने लगीं। दोस्तों, मुझे लगा था सब आसानी से हो जाएगा। मैं हवस में सब कुछ भूल चुका था कि मैं आखिर क्या कर रहा हूँ। बस मुझे तो चूत का नशा चढ़ चुका था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मम्मी यह सब देखकर एकदम पागल हो गई थीं और उन्होंने मुझे झाड़ू, चप्पल और जो उनके हाथ में आया उससे मारा। साथ ही उन्होंने मुझे बहुत गालियाँ दीं। दोस्तों, मुझे बहुत ग्लानि फील हुई। फिर मैं खुद से भी नजर नहीं मिला पा रहा था। उस दिन मैं घर से बाहर चला गया। और मैं देर रात को घर आया।
मम्मी मुझसे नजर नहीं मिला रही थीं और वे मुझे बहुत गुस्से में लग रही थीं। मुझे डर लग रहा था कि कहीं वे पापा को इस बात के बारे में न बता दें। पर ऐसा नहीं हुआ था। उस दिन मैं बाहर से खाकर आया था। और मैं साइड में अपने रूम में चला गया। और मुझे बार-बार उसी बात का डर लग रहा था कि अब मेरा क्या होगा, यह मैंने क्या कर दिया। मैं कभी ऐसा नहीं था।
दोस्तों, मैं बस यह सब सोच रहा था। और मैं बड़ी मुश्किल से मुझे नींद आ रही थी। और मैं गहरी नींद में सो गया था। दोस्तों, फिर करीब रात को तीन बजे मैं सो रहा था। तभी मेरी नींद टूटी और मेरी आँख एकदम से खुली। मेरे रूम में एकदम अँधेरा था। बस इंडिकेटर की थोड़ी सी रोशनी थी।
जब मेरी आँख पूरी खुली तो मुझे होश आया कि मेरे अंडरवियर में कुछ चल रहा है और अंडरवियर के ऊपर से कोई मेरा लंड दबा रहा है। दोस्तों, जब मैंने ध्यान से देखा तो वह और कोई नहीं, मेरी मम्मी थीं। मैंने देखा कि वे मेरे पैरों में बैठी हुई थीं और उन्होंने ब्लाउज और पेटीकोट पहना हुआ था।
उन्हें देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए थे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। सुबह मम्मी ने इतना मारा था और अब वे रात के तीन बजे मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरा लंड सहला रही हैं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मम्मी की चूड़ियाँ खनक रही थीं।
फिर मुझे ध्यान आया कि मम्मी मेरी चोट देखने आई होंगी। आखिर माँ की ममता जाग गई होगी। यह देखने आई होंगी कि उनके बेटे को दर्द तो नहीं हो रहा है। मैं असमंजस में पड़ा हुआ था। तभी मैं अंडरवियर में सोया हुआ था और मम्मी ने उसे पकड़ा और नीचे कर दिया। मैं एकदम से शॉक हो गया। मेरा लंड सोया हुआ था।
फिर मम्मी ने धीरे से मेरे लंड को हाथ से सहलाने लग गईं। दोस्तों, मेरी तो हालत ही टाइट हो गई थी। इतना मस्त एहसास आज तक कभी नहीं हुआ था। मम्मी की चूड़ियाँ खनक रही थीं। मम्मी ने मेरे लंड को पूरा अपनी मुट्ठी में भर लिया। अब मम्मी के टच की वजह से मेरा लंड अपने असली आकार में आने लग गया।
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पर मुझे डर था कि इसकी वजह से मेरा लंड पूरा खड़ा न हो जाए। दोस्तों, आप सोच सकते हो कि वह क्या पल रहा होगा एक बेटे के लिए। पर दोस्तों, मैंने इस बार कोई तेजी या अपनी तरफ से कुछ नहीं किया। क्योंकि उसका अंजाम मैंने सुबह भुगत लिया था।
अब मम्मी की मुट्ठी में अपने बेटे का लंड था और मेरी मम्मी उसको अपने हाथ से सहला रही थीं। मैं सोने का नाटक कर रहा था। मेरा लंड अभी भी ढीला ही पड़ा हुआ था। कुछ पाँच मिनट तक मम्मी ऐसे ही करती रहीं। बीच-बीच में वे मुझे भी देखती रहीं कि कहीं मैं जाग न जाऊँ।
दोस्तों, फिर मैंने जब ध्यान से देखा तो मम्मी का दूसरा हाथ उनके पेटीकोट में था। और वे लंड को पकड़कर धीरे-धीरे अपनी चूत उस पर रगड़ रही थीं। फिर एकदम से मम्मी ने मेरा लंड अपने हाथ से छोड़ दिया और मेरा अंडरवियर भी ऊपर कर दिया। दोस्तों, मेरा सपना खुद मेरे पास चलकर आया था।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। पर मैं बहुत खुश था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मम्मी के हाथ अभी भी मेरे लंड पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। नेक्स्ट डे मैं सोकर उठा और सब नॉर्मल था। मम्मी मुझसे बात नहीं कर रही थीं और मेरे लिए उन्होंने चाय और खाना कुछ भी नहीं बनाया था। मैं उस दिन भी कॉलेज नहीं गया था।
मैं भी मम्मी से डरा हुआ था और मैं उनसे नजर नहीं मिला पा रहा था। पापा भी काम पर चले गए थे और मम्मी नाइटी में अपना घर का काम कर रही थीं। मैं अपने रूम में था। नहा-धोकर मैं वहीं पर बैठा वह सब याद कर रहा था कि कैसे कल रात मम्मी मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत उससे सहला रही थीं।
दोस्तों, फिर कुछ देर बाद मम्मी मेरे रूम में झाड़ू-पोछा करने के लिए आईं। और दोस्तों, पोछा मारने के लिए जब मम्मी अपनी पिंक नाइटी में नीचे बैठीं तो मैंने चोरी नजरों से मम्मी को देखा। मम्मी घुटनों के बल बैठकर पोछा मार रही थीं। मम्मी की पीठ मेरी साइड थी।
दोस्तों, मम्मी की मैक्सी उनके बड़े चुतरों के बीच फँसी हुई थी। सच बताऊँ दोस्तों, ऐसा लग रहा था मम्मी ने मैक्सी के नीचे न तो पेटीकोट और न ही पैंटी पहनी थी। क्योंकि मम्मी की गाँड की दरार साफ-साफ गहरी दिख रही थी और दोस्तों, मैक्सी का हिस्सा मम्मी की गाँड की दरार में घुसा हुआ था। पर मैंने ज्यादा नहीं देखा। फिर मम्मी पोछा मारकर चली गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और मुझसे उन्होंने बात भी नहीं की और न ही मेरी हिम्मत थी उनसे बात करने के लिए। फिर मैं घर से बाहर चला गया और रात को मैं घर से वापस आया। मम्मी नहा-धोकर सजी हुई थीं। अब रात हो चुकी थी। घर में सब आ गए थे। मम्मी ने मेरे लिए आज भी खाना नहीं बनाया था। मैं वैसे भी बाहर से खाकर आया था।
मैं रूम में चला गया और कुछ देर फोन चलाने लग गया। फिर रात हो गई और मैं कल रात के बारे में सोचने लग गया और फिर मेरा लंड खड़ा हो गया। मेरे मन में सवाल थे कि मम्मी रात को मेरे रूम में क्यों आई थीं। क्या वे मेरी इंजरी देखने आई थीं या कुछ और। मैं अभी असमंजस में था।
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और दोस्तों, मैं आज भी आस लगाए हुए था कि मम्मी आज भी आएंगी। फिर मैं उनके आने का वेट करने लग गया। रात के बारह बजे और फिर एक और फिर दो बजे। मैं तब तक जगता रहा। फिर मुझे लगा कल इसी समय मम्मी आई थीं। पर मम्मी तीन बजे भी नहीं आईं। उनका वेट करते मुझे चार बजे गए थे। अब मुझे यकीन हो गया कि जैसा मैं सोच रहा था वैसा कुछ नहीं था।
फिर पाँच बजे गए और फिर मैं हारकर सो गया। और फिर मैं ऐसा सोया कि मैं सीधा सुबह ग्यारह बजे उठा। और फिर से घर में वही माहौल था। मम्मी ने मेरे लिए कुछ भी नहीं बनाया था। फिर मैं नहा-धोकर रेडी हो गया और मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया। फिर मैं उसके साथ मूवी देखने चला गया।
फिर शाम तक मैं घर आया। फिर मैं सीधा अपने रूम में कुछ देर स्टडी करने बैठ गया। धीरे-धीरे रात हो गई और फिर दोस्तों, मैं कल पूरी रात जागा था। इसलिए मुझे आज ग्यारह बजे ही नींद आने लग गई। फिर मैं सो गया और मैं गहरी नींद में था। क्योंकि मैं कल रात का जागा हुआ था।
तभी मेरी एकदम से नींद टूटी और मैं नींद के आगोश से धीरे-धीरे बाहर आने लग गया। मेरे रूम में मैंने देखा कि पायल और चूड़ियों की आवाज आ रही है। जब मैं नींद से बाहर आया और मैं समझने की कोशिश करने लग गया। फिर मैंने देखा कि मेरा अंडरवियर उतारा हुआ था। और वह घुटनों के नीचे था।
मेरी शर्ट पेट तक चढ़ी हुई थी। और मेरा लंड गीला हो रखा था। ऐसा लग रहा था वह एक गरम चीज के अंदर-बाहर हो रहा था। दोस्तों, जब मैं इस हालत को समझा तो कुछ इस प्रकार की थी। मम्मी मेरे पैरों के पास, कमर के पास बैठी हुई थीं और मेरे लंड का मुँह उनके मुँह में था। और वे मेरा टोपा मम्मी अपनी जीभ से सहला रही थीं।
दोस्तों, जैसे ही मुझे ऐसा लगा कि मैं अंदर ही अंदर पागल हो रहा था। ऐसा लग रहा था मेरी लाइफ ही बन गई हो। अब मुझे कुछ समझने की जरूरत नहीं थी। मैंने एक बार अपने आप को चुटकी काटी कि कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा था। पर मेरी माँ सच में मेरा लंड चूस रही थीं। मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था। अब वह छह-सात इंच का हो गया था।
मम्मी बड़े प्यार से अपने होठों से उसे चूस रही थीं। और अपना थूक वे मेरे लंड पर गिरा रही थीं। मम्मी की चूड़ियाँ और पायल की आवाज सुनसान रूम में अपना ही गीत गा रही थीं। मम्मी लंड के टोपे पर अपना मुँह आगे-पीछे कर रही थीं। कभी-कभी वे अपनी पूरी जीभ लंड पर फेरतीं तो कभी पूरे होठ उस पर लगातीं।
दोस्तों, एक बेटे के लिए इससे बड़ी क्या बात होगी कि उसकी सगी, अकड़ से भरी और गुस्से वाली माँ रात को आकर उसका लंड चूस रही हो और उसका पति दूसरे रूम में सो रहा हो। मैं मन ही मन आसमान में उड़ रहा था और मैं अपने आप पर प्राउड फील कर रहा था।
मम्मी की चूड़ियाँ खनक रही थीं और इस अँधेरी रात में मम्मी मेरा लंड अपने मुँह में अंदर-बाहर कर रही थीं। मैं पूरा गरम हो चुका था। मन कर रहा था कि अभी मम्मी को बेड पर लिटा दूँ और फिर उनका पेटीकोट ऊपर कर उनके भोसड़े में अपना लंड घुसेड़ दूँ।
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पर मैं पहले जैसी कोई गलती नहीं करना चाहता था। और अपना एंजॉय कर रहा था। उधर मम्मी अपनी जीभ अपना जादू मेरे लंड पर चला रही थीं। मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरा लंड किसी गरम भट्टी में तप रहा है। मेरे लंड पर मम्मी की थूक की बौछार बिखरी पड़ी थी। फिर एकदम मम्मी ने लंड मुँह से बाहर निकाला और बेड से उठीं और रूम से बाहर चली गईं। पर वे फिर से रूम में आ गईं। मैं समझ गया कि वे क्यों बाहर गई थीं। शायद वे पापा के रूम में पापा को चेक करने गई होंगी।
फिर वे बेड पर आ गईं। मेरा लंड वैसा ही पड़ा हुआ था। और मैं नीचे से पूरा नंगा लेटा हुआ था। मेरा लंड थोड़ा सा मुरझा गया था। मम्मी ने एकदम से उसे थाम लिया और मुझे एक अलग ही मजा आया। मम्मी ने अपने बेटे का लंड हाथ में टाइट पकड़ लिया था। फिर वे उसे ऊपर-नीचे कर रही थीं। पर तभी रूम के बाहर से कुछ आहट होती है। मम्मी हड़बड़ाते हुए हाथ से लंड छोड़ देती हैं और मेरा अंडरवियर ऐसे नीचे था और वे उसे ऊपर कर जल्दी से बाहर निकल जाती हैं।
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