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ताश के पत्तो की तरह ढह गए रिश्ते

जुलाई 18, 2026 by hamari Leave a Comment

Double Suhagrat Incest

मैं सुधा आप लोगों को अपनी स्टोरी बताती हूँ। ये तब की बात है जब मैं 10+2 में पढ़ती थी। मेरी सहेली थी रौशनी। हम दोनों बहुत खुले हुए थे, घर आना-जाना बहुत था। रौशनी का भाई बलवंत 25-26 साल का लंबा लड़का था। मैं उसकी तरफ आकर्षित थी। हम तीनों आपस में बहुत मजाक करते रहते थे। Double Suhagrat Incest

रौशनी और मैं बहुत नटखट थे। हम आपस में लड़कों की बातें किया करते थे। मैंने उससे कई बार बलवंत के बारे में बात की। वो समझती थी कि मैं बलवंत को चाहने लगी हूँ। धीरे-धीरे वो अकेले में मुझे भाभी कहने लगी। रौशनी के मुँह से ‘भाभी’ शब्द मुझे अच्छा लगता था।

एक बार रौशनी के मम्मी-पापा मैरिज में गए हुए थे। घर में रौशनी और बलवंत थे। रौशनी मुझसे बोली, “आज घर में कोई नहीं है, आज मेरे पास रुक जा और रात को अपनी सुहागरात बना ले।” मेरी चूत एकदम से सुहागरात का नाम सुनते ही पानी छोड़ने लगी।

मैं और रौशनी अपने घर गए। रौशनी ने मम्मी को बताया कि आज सुधा मेरे पास रुक लेगी, आज घर पर हमें पढ़ाई करनी है। मैं 5 बजे के करीब रौशनी के साथ उसके घर आ गई। शाम को बलवंत दीपक के साथ वहाँ आया। बलवंत बोला, “आज दीपक यहीं सोएगा।” मेरा मन भुज गया।

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मैं बोली, “रौशनी, मेरी सुहागरात तो गई पानी में।”

रौशनी बोली, “कोई तरीका अपनाते हैं यार।”

वो मजाक में बोली, “तू दो के साथ सुहागरात बना ले।”

मैं बोली, “तू बना ले।”

हम ऐसी ही बातें करती रही।

रौशनी बोली, “आज तेरी सुहागरात जरूर बनेगी, चाहे कुछ भी करना पड़े।”

रात को दीपक जा कर व्हिस्की ले आया और दोनों पीने लगे। पर दीपक ने खुद कम पी और बलवंत को ज्यादा पिलाई।

फिर जब हम चारों बैठे थे तो दीपक बोला, “कुछ खेलते हैं।”

बलवंत बोला, “क्या?”

वो बोला, “ताश में।”

और रौशनी भी तैयार हो गई। रौशनी ने मुझे आँख मारी और बोली, “क्या शर्त होगी?”

बलवंत बोला, “बोल दीपक, क्या शर्त लगानी है? बाकी तुम दोनों के पास है क्या जो लगाओगे?”

मैं बोली, “बलवंत ये क्या बात हुई? हमारे पास क्या, पैसे नहीं हैं? ये सूट 5000 का है, तो क्या तुम सूट लगाओगी?”

हम ऐसी ही बातें करते रहे।

दीपक बोला, “चलो जो हारता जाएगा अपना 1 कपड़ा उतारता जाएगा।”

मैं मान गई पर रौशनी और बलवंत नहीं माने।

वो बोले, “नहीं, हम भाई-बहन हैं।”

दीपक बोला, “यार क्या पुराने जमाने की बात करते हो?”

मैं भी यही बोली। मैंने रौशनी के कान में कहा, “यार मेरे साथ तेरी भी सुहागरात बन रही है, क्या तकलीफ है?”

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थोड़ी देर ना-ना करके वे मान गए। हम रम्मी खेलने लगे। सबसे पहले बलवंत की टी-शर्ट उतारी। फिर रौशनी का टॉप उतारा। अब रौशनी ब्रा और जींस में थी। बलवंत बनियान और शॉर्ट में। दीपक बोला, “लगता है आज भाई-बहन ने नंगे होने की ठान ली है।”

रौशनी की कसी-कसी चुचियाँ ब्रा में से बाहर आने को थीं। दीपक घूर-घूर के देख रहा था। रौशनी बलवंत के कारण शर्मा रही थी। अगली बाजी फिर बलवंत हारा। उसने अपनी शॉर्ट उतारी। उसका अंडरवियर फुला पड़ा था। मैं उसकी तरफ देख रही थी। अगली बारी मेरी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने खुशी से अपना टॉप निकाला। लाल ब्रा में मेरी 32 की चुचियाँ। बलवंत और दीपक घूर-घूर कर देख रहे थे।

मैं बोली, “दीपक चीटिंग कर रहा है, ये बाजी नहीं हारा।”

दीपक बोला, “हम तो नंगे होने को तैयार हो, कोई बोले तो सही।”

इसी तरह हमारे कपड़े उतरते गए। अब मैं और रौशनी ब्रा और पैंटी में थीं तो वे दोनों सिर्फ अंडरवियर में। अगली बाजी रौशनी हारी। हमने ब्रा उतारने को कहा तो वो ना-ना करने लगी। दीपक बोला, “गलत बात।” दीपक उसके पीछे गया और हुक खोल दिया और उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा।

रौशनी की आँखें बंद हो गईं। दीपक बोला, “बलवंत तेरी बहन तो चिकनी पड़ी है।” बलवंत को भी कुछ नहीं समझ आ रहा था, वो चुप रहा। दीपक ने अगली बाजी लगाई और खुद हार गया। वो जानबूझकर ना-ना करने लगा। रौशनी उठी और उसका अंडरवियर नीचे किया तो मोटा सा लंड स्प्रिंग की तरह उसके गालों से टकराया।

हम दोनों स्तब्ध हो गए। 8 इंच लंबा प्यारा सा लंड देखा। रौशनी ने हाथ फिराया और अपनी सीट पर आ गई। रौशनी और मेरी नजरें दीपक के लंड पर थीं। अगली बारी मेरी थी। बलवंत ने मेरी ब्रा उतारी। फिर रौशनी की पैंटी उतारी। उसकी चूत गुलाबी और साफ थी। बलवंत और दीपक की नजरें उसकी चूत पर टिकी थीं। फिर थोड़ी देर में मैं और बलवंत भी नंगे हो गए। हम पूरे हॉट हो गए थे।

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मैं बोली, “अब?”

दीपक बोला, “जो हारेगा वो तीनों के किस करेगा, जहाँ जितने वाला चाहेगा।”

पहली बाजी बलवंत हारा। उसने दीपक से पूछा। दीपक ने लंड पर इशारा किया। बलवंत ने दीपक के लंड पर हल्का सा किस किया। रौशनी से पूछा तो वो शर्मा गई, चुप रही।

मैंने बलवंत से कहा, “इसके दोनों बूब्स पर किस करो।”

बलवंत ने किस किया। मैंने अपनी चूत आगे की तो उसने किस करते जीभ भी अंदर कर दी। आह निकली। उसने मेरी चुची पकड़ के चूत पर किस करने लगा।

दीपक बोला, “यार खेलना नहीं है?”

बलवंत बोला, “छोड़ ना यार।”

उसने ताश फेंकी और रौशनी के किस करने लगा। दीपक ने एक बार सब रुकवा दिया। बलवंत नीचे लेट गया और मुझे उसके मुँह पर बिठा दिया। बलवंत मेरी चूत पर हार्ड किस कर रहा था। दीपक आगे आया, मेरी चुचियाँ दबाता हुआ मुझे बोला, “Suck it baby.”

मैंने उसका लंबा लंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी। रौशनी कुछ पल तो देखती रही, फिर बलवंत का लंड चूसने लगी।

रौशनी बोली, “भाभी कैसे लग रहा है?”

दीपक बोला, “भाभी कैसे है?”

फिर उसने बताया, “आज इसकी सुहागरात है, ये भैया से प्यार करती है।”

मैं बोली, “तेरी भी तो है। दीपक मेरे जीजू बनना ही तो मेरी ननद तैयार है।”

“जरूर साली, अगर तुम्हारी ननद तैयार है तो हम भी तैयार हैं। आज तो भाभी-ननद एक साथ ही चुदेंगी। क्यों रौशनी?”

दीपक बोला। मैं झड़ने वाली थी। मैं अपने जोर-जोर से बलवंत के चेहरे पर रगड़ने लगी। “ओह्ह बलवंत प्लीज जोर से चूसो ना… म्म्म… आआह्ह्ह…” करते हुए मैं झड़ गई। मेरा पानी बलवंत के मुँह पर पड़ा। उधर बलवंत का पानी रौशनी के मुँह में निकल गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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दीपक ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और रौशनी के पास चला गया। रौशनी के मुँह पर बलवंत का वीर्य लगा पड़ा था। मैं और बलवंत झड़ चुके थे। हम दोनों सुस्त पड़े थे। दीपक रौशनी के पास जा कर बोला, “मेरी छोटी सी दुल्हन मेरे लंड को प्यार नहीं करेगी?” रौशनी ने मुस्कुराकर उसका लंड पकड़ लिया।

दीपक बोला, “मुँह से प्यार कर।”

रौशनी ने लंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी। क्योंकि दीपक ने मुझे अपना लंड चुसवा रखा था, इसलिए झड़ने को था। जल्दी ही उसका वीर्य भी रौशनी के मुँह पर कर दिया। रौशनी का मुँह और बाल वीर्य से भरे पड़े थे। उसने मुँह धोया और वापस आ गई।

दीपक बलवंत से बोला, “यार आज तो रिश्ते ही बदल गए।”

बलवंत बोला, “कैसे?”

वो बोला, “तुम रौशनी के भाई से जीजू बन गए। बोलो मानते हो इस रिश्ते को?”

बलवंत मान गया। बोला, “अकेले में ये मुझे जीजू कह सकती है। वैसे भी इसने मेरे लंड का पानी निकाला है। आधी घरवाली का काम तो कर ही दिया।”

दीपक रौशनी की 32 इंच की चुचियाँ मसल रहा था। बलवंत ने मुझे अपने लंड पर दोबारा झुका दिया। मैं लंड चूसने लगी। वो मेरे मुँह में फूलता जा रहा था। बलवंत ने लंड बाहर निकाला और मुझे लिटा कर मेरी टाँगें पूरी खोल दीं। मेरी चूत पर 1 कसकर चुम्मा लेने के बाद मेरी चूत पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा।

फिर जब एकदम से धक्का मारा तो लंड मेरी चूत चीरता हुआ आधा अंदर घुस गया। मैं जोर से चीखी, “आआह्ह्ह… ओह्ह हाई… माार गई रे… चोोोद रे चोोोद… उईई मेरी माँ… फट गई रे आज तो मेरी चूत… मेरा तो दम निकाल तूने तो आज।” पर वो कहाँ सुनता मेरी.

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इतने में रौशनी की चीख आई, “माार दिया… निकालो प्लीज।” इधर मेरी चूत से खून निकल रहा था। उधर दीपक हँस रहा था। रौशनी की चूत फटी पड़ी थी। अगला झटका बहुत जानलेवा था। मैं फिर चीखी। मुझे लगा मेरी चूत कोई चाकू से काट रहा है। बलवंत मेरी चुची पीने लगा, मेरे चूतड़ सहलाता रहा। उधर रौशनी चीख रही थी, “भैय्या… माार डाला।” दीपक हँसते हुए बोला, “ये लौड़ा ना बहन देखता है ना बेटी।” मुझे आराम आना शुरू हो गया था। मैं अपने चूतड़ ऊपर करने लगी।

बलवंत समझ गया। उसने थोड़ा सा लंड बाहर निकाला और दोबारा जड़ तक डाल दिया। “उईई माँ…” उधर रौशनी बोल रही थी, “प्लीज धीरे करो जानू।” धक-धक दोनों की चूत में धक्के पड़ रहे थे। हम दोनों अब अपने-अपने चूतड़ उछाल रही थीं और कह रही थीं, “जोर से करो, मार डालो।” मैं 1 बार झड़ चुकी थी। गीली होने के कारण लंड आराम से आ जा रहा था। थोड़ी देर बाद बलवंत मुझे जोर-जोर से चोदने लगा और वो “आआ…” करता झड़ गया। उसके साथ ही मैं दोबारा झड़ गई। उधर रौशनी झड़ चुकी थी।

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