Grihani Chudai
मोबाइल बजते ही मेरी आँख खुल गई। मैंने घड़ी में देखा सुबह के ७ बज चुके थे। मैंने अपना हाथ लंबा करके मोबाइल उठाया और हेल्लो कहा। सामने से आवाज़ आई, ‘हैप्पी बर्थडे, डार्लिंग’। मेरे शौहर जावेद का फोन था। मैंने उसे थैंक्स कहते हुए कहा, ‘डार्लिंग तुम्हारे बिना ये कैसा बर्थडे। अगर तुम यहाँ होते तो मैं ज़रूर बर्थडे मनाती। तुम वहाँ दुबई में मैं यहाँ इंडिया में। डार्लिंग सच कहूँ तुम्हारे बिना मेरा यहाँ जी नही लगता। दिन भर सिर्फ टीवी देखकर बोर हो जाती हूँ।’ Grihani Chudai
इस पर जावेद ने मुझे मनाते हुए कहा, ‘जान, बस थोड़े ही दिनों की तो बात है। बाकी बचे हुए ढाई साल ऐसे ही खत्म हो जाएंगे कि पता भी नहीं चलेगा। और हाँ मेरा इंडिया में फैक्टरी बनाने का सपना भी तो पूरा करना है। यहाँ रहकर मैं पैसा कमाकर इंडिया में ही बसने वाला हूँ।’
मैंने कहा, ‘ठीक है, कोई बात नहीं। मैं और इंतज़ार करूँगी। आप अपना ध्यान रखो। वक्त पर खाना खाते जाओ। और देर रात कहीं भटकते मत जाओ।’
जावेद ने कहा, ‘हाँ हाँ तुम बस अपना ख्याल रखो, और किसी चीज़ की ज़रूरत पड़े तो अंकल को फोन करो। और हाँ एक और बात। तुम शॉप में जाकर अपने लिए एक अच्छी सी ड्रेस खरीदना। ओके। बस अब फोन रखता हूँ।’
मैंने कहा, ‘ओके बाय’।
फिर मैं उठकर बेड पर बैठी रही और जावेद के बारे में सोच रही थी। जावेद दुबई से आया तो मुझे ऐसा लगा था कि बस पूरे एक महीने तक हम दोनों ही साथ में रहेंगे। पर मेरी सब ख्वाहिशों पर पानी फिर गया। जावेद ने आते ही दूसरे दिन मुझे अपने माँ-बाप के घर लेके गया।
वहाँ से फिर हम लोग रोज़ एक नए रिश्तेदार के यहाँ जाते। और जावेद ने सबके लिए कुछ न कुछ लाया था। सब लोग खुश होते थे। जाने से पहले सिर्फ एक दिन हम हमारे बंगले में आए थे। घर में आने के बाद मैंने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की तो जावेद ने मुझे मनाते हुए कहा, ‘जान, मैं पहली बार फॉरेन से आया हूँ ना इसलिए सबके पास जाना पड़ा, लेकिन अगली बार जब आऊँगा तो तुम्हारे सिवा कहीं नहीं जाएंगे।’ मैं खुश हो गई।
बस उस रात जावेद ने मेरी चुदाई की। दूसरे दिन जावेद ट्रेवल की बस से मुंबई चला गया जहाँ से उसकी दुबई के लिए फ्लाइट थी। और मैं अधूरी और प्यासी ही रह गई थी। मेरे मन में संजय की चुदाई के विचार आने लगे थे। कितनी मस्ती से और तबीयत से उसने मुझे चोदा था। मेरे शरीर के हर हिस्से को चूमा था।
उसकी याद आते ही मैं सिहर उठी, कामवासना मेरे मन में जगने लगी। मैं बेड पर ही इधर-उधर होने लगी। मैं बहुत ही बेचैन हो गई। फिर मैंने सोचा कि ज़रीना आज तो तुम्हारा जन्मदिन है। कम से कम आज तो इन बातों पर ध्यान देना ठीक नहीं, और तुम शादी-शुदा भी हो।
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और मुझे याद आया कि जावेद और उसके जीजू अकेले में बैठे तब जीजू ने पूछा था कि भाई जावेद वहाँ क्या तू हाथ से ही सब करता है। और हँसने लगे थे। इस पर जावेद ने कहा था कि अरे जीजू वहाँ तो एक से एक रंडी मिलती है। कभी आप आओ तो सही। मैंने चोरी से ये बात सुनी थी। जीजू और जावेद दोनों दोस्त के जैसे रहते थे।
फिर मैंने सोचा कि चलो ये तो टेम्पररी एडजस्टमेंट है। विचारों ने जैसे मुझे घेर रखा था। अपना ध्यान हटाने के लिए मैं बिस्तर से उठी और बाथरूम में जाकर नहा ली। उसके बाद किचन में जाकर चाय बनाई और पी ली। फिर सोचा चलो आज शॉपिंग करती हूँ।
मैं बेडरूम में जाकर फटाफट तैयार हो गई और कार निकालकर एक बड़े मॉल में गई। वहाँ मैंने एक सुंदर व्हाइट कलर की सलवार कमीज निकाली जिसके नेक पर लाइट ब्लू कलर की हल्की सी डिज़ाइन थी। मैंने प्राइस देखा तो वो ₹४५०० की थी। मुझे वो बहुत पसंद आई।
मैं ट्रायल रूम में गई। मैंने अपनी सलवार कमीज उतार दी और ये न्यू ड्रेस पहनी। मैंने मिरर में देखा, वो ड्रेस मुझ पर बहुत ही सुंदर दिख रही थी। मैं बहुत ही मदाक दिख रही थी। उस हल्के से ट्रांसपेरेंट ड्रेस में से मेरी काली ब्रा और निक्कर दिख रही थी जो उस ड्रेस के साथ सूट नहीं कर रही थी।
तो मैं वहाँ से मेरे कपड़े हाथ में लेकर वैसे ही बाहर आई। मेरी बड़ी-बड़ी चुचियाँ उसमें से बाहर आने को बेताब थीं। कमीज थोड़ा सा ही लो कट था। मैं अपने चूतड़ मोहक स्टाइल में हिलाते हुए बाहर आई और गारमेंट्स सेक्शन में चली गई। सब लोग, ज़्यादातर मर्द मेरी ओर देख रहे थे। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
अंडरगारमेंट्स देखने के लिए मैं झुकती तो आगे वाले मेरी चुचियों को प्यासी नज़र से देखते और पीछे वाले तो मेरा चूतड़ देखकर बस वहीं मुझे चोदने की कामना करते होंगे। मैंने वहाँ से मेरी ४० डी साइज़ की ब्रा और एक्सएक्सएल साइज़ का निक्कर लिया और फिर ट्रायल रूम में गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने मेरे कपड़े फिर से उतारकर सब न्यू कपड़े पहने। सब बिलकुल फिट थे। फिर मैंने अपना ओल्ड ड्रेस हाथ में लेकर काउंटर पर गई और उसे पैक कराके देने के लिए बोला। तो उसने कहा, ‘मैडम उसका टैग निकालना पड़ेगा नहीं तो सिक्योरिटी चेक में प्रॉब्लम आएगा।’
मैंने कहा कि क्या मुझे फिर से चेंज करना होगा, तो वो बोला, ‘ठीक है मैडम अगर आप कहेंगी तो ऐसे ही निकालेंगे।’
मैंने कहा, ‘चलेगा’।
इस पर वो इलेक्ट्रॉनिक यूनिट लेकर मेरे पीछे खड़ा हुआ और मेरे बाल आगे करके मेरी गर्दन पर वो यूनिट लगा दी और टैग निकालने लगा। उसका लंड खड़ा होकर मेरी गांड को चुभ रहा था। उसने वो टैग निकालके भी वहाँ से हटा नहीं। थोड़ी देर का आनंद लेकर फिर मैंने ही पूछा हुआ कि नहीं। तो वो हड़बड़ाकर सरककर बोला, ‘जी मैडम’।
मैंने उसकी ओर मुड़कर देखके एक हल्का सा स्माइल दिया। और बिल पे करके मैं वहाँ से निकली। पार्किंग से कार निकालकर मैं जैसे ही रोड पर आई, मेरी नज़र कार के रियर व्यू मिरर पर पड़ी तो वो बेचारा काउंटर वाला लड़का रोड पर आके मुझे ढूँढ रहा था। उसको देखकर मैं मन ही मन मुस्कुराने लगी।
मुझे उस पर तरस आ रहा था। लेकिन मैं वैसी टाइप की नहीं थी। संजय के साथ जो हुआ था वो तो एक अनहोनी थी। वहाँ से निकलकर मैं एक बड़े होटल के सामने रुकी। कार पार्क करके अंदर गई। दोपहर का समय था तो ज़्यादा भीड़ नहीं थी। जो थे उनमें ऑफिस वाले ही ज़्यादा थे। सब मेरी ओर देखने लगे।
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जिनका ध्यान नहीं था उनके दोस्त उनको इशारा करके मेरी ओर देखने के लिए कहते। मैं बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही थी। काउंटर पर जाकर मैंने उसे कुछ स्नैक्स और चिकन बिरयानी ऑर्डर की और पार्सल बनाने को कहा। उसने मुझे १५/२० मिनट बैठने के लिए कहा, और वेटर को पानी देने के लिए बोला।
मैंने टेबल पर अपने दोनों हाथ रख जुड़कर रख दिए और थोड़ा सा झुक गई थी। इतने में वेटर आया और उसकी नज़र मेरी मदाक चुचियों पर पड़ी। वो हैरान हो गया और मेरी चुचियों को देखते-देखते वो पानी का ग्लास टेबल पर रखने लगा कि उसके हाथ से ग्लास थोड़ा तिरछा हो गया और उसमें से थोड़ा पानी नीचे गिर गया।
पानी मेरे ड्रेस पर भी गिर चुका था। पानी सीधा मेरी चूत वाली जगह पर गिरा था। पानी मेरी चूत से बहकर मेरी गांड में भी घुस गया। मेरी हल्की सी ट्रांसपेरेंट ड्रेस भीगने की वजह से ज़्यादा ट्रांसपेरेंट हो गई थी। मेरी नई निक्कर जो कि साइड में सिर्फ स्ट्राइप वाली थी और उसके आगे सिर्फ चूत ढकने तक का ही कपड़ा यूज़ किया था और पीछे तो मेरे चूतड़ के लिए शायद बनाते वक्त कपड़ा ही नहीं बचा था।
वो अब पूरी तरह दिखने लगी थी। बेचारा वेटर मुझे सॉरी बोलके नीचे गर्दन झुकाए खड़ा था। क्या शायद वो मेरे नीचे का नज़ारा ही देख रहा था। मैंने कहा, ‘इट्स ओके’। फिर वो वहाँ से निकल गया। मैं थोड़ी सी परेशान ज़रूर हुई थी। सब लोग मुझे घूर रहे थे। मैं किसी की ओर भी नहीं देख पा रही थी।
शर्म के मारे मुझे ऐसा लग रहा था कि क्यों मैंने आज ये ड्रेस पहनी। इतने में मेरा पार्सल आया। बिल पे करके पार्सल हाथ में लेकर मैं वहाँ से जाने लगी तो एक लड़के ने मेरे नीचे के नज़ारे को देखकर एक लंबी साँस छोड़ दी। कार बंगले के पार्किंग में पार्क करके मैं घर में गई।
अंदर जाकर सारा सामान डाइनिंग टेबल पर रख दिया। और वहाँ से मेरा पुराने ड्रेस का थैला लेकर बेडरूम में चली गई। बेड पर बैग फेंक दिया और मिरर में झाँका। वाह क्या सुंदर लग रही थी मैं। मस्त गोरा-गोरा रंग, सुंदर चेहरा, थोड़ा मोटा पर सुडौल बदन। मेरा ड्रेस अब सूख गया था।
फिर मैंने सोचा कि आज घर पर ही हूँ तो ये ड्रेस निकालने की क्या ज़रूरत। जोर से भूख लगी थी इसलिए मैं मुँह और हाथ धोने के लिए बाथरूम में गई। मुँह और हाथ धोते-धोते थोड़ा सा पानी मुँह से बहकर मेरी छाती पर गिरा। मेरे ड्रेस से फिर मेरी चुचियाँ दिखने लगी। लेकिन इस बार मैं घर में ही रहने की वजह से मैंने उसे इग्नोर किया।
बाहर आकर ड्रेसिंग टेबल पर बैठकर हल्का सा मेक-अप किया। आफ्टर ऑल आज मेरा बर्थडे जो था। फिर उठकर डाइनिंग टेबल पर जा बैठी। खुद के लिए एक प्लेट लिया और सामने दूसरा प्लेट हब्बी के नाम से रखा। मैं बिलकुल अकेलापन नहीं चाहती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर उठकर सीडी प्लेयर ऑन किया और उसका वॉल्यूम कम रखकर अपनी सामने वाली जगह जाकर बैठ गई और अपना राइट हैंड आगे बढ़ाकर मर्दानी स्टाइल में बोली, ‘हे जानू, हैप्पी बर्थडे टू यू’। और फिर वहाँ से उठकर अपनी जगह जाकर बैठी और अपना हाथ आगे किया और थोड़ा शर्माकर नीचे देखकर बोली, ‘थैंक्स, बस इतना ही। मुझे कोई गिफ्ट नहीं दोगे क्या।’
इतना कहकर सामने वाली चेयर पर जाकर बैठी। मेरी फैंटसी मुझे मज़ा देने लगी थी। सामने बैठते ही फिर मर्दानी स्टाइल में बोली, ‘जानू, जो माँगना है माँगो। आज तुम्हें सब दूँगा’। और फिर मैंने मेरा ही एक हाथ अपने दूसरे हाथ से उठाकर चूमने लगी।
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फिर वहाँ से उठकर सामने बैठ गई और बोली, ‘प्लीज़, छोड़ो ना, कोई आ जाएगा’। और अब मैं बिना जगह बदले उसी चेयर से दोनों की एक्टिंग करने लगी। ‘चिंता मत करो। कोई नहीं आएगा। आज तुम्हारे बर्थडे का गिफ्ट जो देना है’। इस पर मैंने कहा, ‘आज तुम्हें मेरा ख्याल आया। इतने दिन छुट्टी थी तब भी ध्यान भी नहीं दिया’।
फिर मुस्कुराकर मर्दानी स्टाइल में बोली, ‘अच्छा, तो आज तुम्हें मेरा लंड चाहिए। दे दूँगा मेरी जान। थोड़ा सब्र कर। मेरा लंड है ही तुम्हारे लिए। आज तुम्हारी खूब चुदाई करूँगा। कि कम से कम २ साल तक लंड का और चुदने का नाम नहीं लेंगी। जितना जी चाहे मेरे लंड से चुदाई करवा ले।
आखिर मेरे लंड से प्यार करने वाली तू ही तो है। रानी मैं भी आज तुम्हारी चुचियों से खूब खेलूँगा। इसको मसल-मसलकर इसका पूरा रस पी जाऊँगा। तू मतक-मतक कर चलती है तो तेरी गांड मुझ पर क़यामत ढाती है। ऐसा लगता है कि उन्हें ज़ोर-ज़ोर से मसल डालूँ। तेरे मुँह में मेरा ये लंड डालकर दिन भर तुम्हारे पास बैठूँ’।
मैं पूरी तरह से सपने में मशगूल थी कि अचानक डोर बेल की आवाज़ आई। मेरा सपना टूट चुका था। सपने से मैं बाहर आई तो थी पर मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर गया था। मैंने गुस्से से जाकर दरवाज़ा खोला तो केबल वाला लड़का खड़ा था। वैसे भी मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था तो उसे वहाँ से जल्दी कटाने के लिए मैं गुस्से से बोली, ‘६ महीने का पेमेंट मैं तुम्हें एडवांस में देती हूँ पर तुम्हारे चैनल ठीक से दिखते ही नहीं’।
वो बोला, ‘भाभी, ऐसा हो ही नहीं सकता’। और इतना बोलकर मुझे सरकते हुए वो घर के अंदर घुस गया। अंदर घुसते वक्त उसका शोल्डर मेरी चुचियों को और हाथ चूत को स्पर्श कर गए। वो लगभग ५ फीट हाइट का और साँवले रंग का था। लेकिन बातों में बड़ा माहिर था। उसके स्टाइल से उस पर कोई गुस्सा हो ही नहीं सकता था।
और उसने हॉल के सोफे पर पड़ा रिमोट उठाकर टीवी ऑन किया। तो सभी चैनल अच्छी तरह से दिख रहे थे। तो उसने स्टाइल में मेरी तरफ देखकर बोला, ‘भाभी जी, आप खुद ही देख लो। यहाँ के सब लोग मुझसे खुश हैं’। मैंने उसे टोकते हुए फिर से गुस्से में कहा, ‘ये टीवी नहीं अंदर वाला’।
मेरे इतना बोलते ही वो बिना मुझसे पूछे मेरी बेडरूम में घुस गया। और वहाँ बेड पर पड़े मेरे कपड़े उठाकर रिमोट खोजने लगा। मेरे कपड़ों में उसे रिमोट मिला लेकिन वो मेरी पैंटी के साथ हाथ में लेकर मुझसे पूछने लगा, ‘भाभी ये नया कवर बिठाया है क्या?’
मैं उसे मारने के लिए भागी तो वो भागकर बेड की दूसरी ओर चला गया। मैं वहाँ गई तो वो तुरंत बेड पर चढ़कर भागने लगा। इतने में मेरी ब्रा में उसका पाँव अटक गया और ब्रा का हुक बेडशीट में फँसा था इसलिए वो गिर गया। मुझे अब हँसी आ रही थी। बड़ा कॉमेडी सीन लग रहा था।
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मैंने जाकर मेरी ब्रा से उसका पाँव निकाल दिया। मैं हँस रही थी। वो भी हँसने लगा। फिर रिमोट से टीवी ऑन किया तो उसमें पिक्चर बराबर नहीं दिख रही थी। वो टीवी के पीछे गया और देखने लगा और बोला, ‘भाभी इसकी पिन खराब हो गई है, मैं इसे तुरंत बदल देता हूँ फिर कोई प्रॉब्लम नहीं आएगा’। और बोलते वक्त वो मेरी चुचियों को ही देख रहा था।
मैंने कहा, ‘ठीक है, तुम ठीक कर दो मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूँ’। और मैं किचन की ओर निकली। तब ही मैंने जाते-जाते देखा वो मेरी चूतड़ों को देखके अपने लंड को पकड़ रहा था। मैंने उसकी ओर ज़्यादा ध्यान देना ठीक नहीं समझा। वैसे भी मुझे उसमें बिलकुल इंटरेस्ट नहीं था।
मैं चाय बनाकर वापस आई और टीपॉय पर रखने लगी तो वो बड़े गौर से मेरे अंदर झाँक रहा था। मैंने उसे पूछा, ‘शुगर कितनी डालूँ?’ तो वो बोला, ‘२ स्पून’। मैंने उसकी चाय में शुगर डाल दी और स्पून से हिला रही थी कि मेरी दोनों चुचियाँ आपस में टकराकर हिल-डुल रही थीं। वो गरम हो रहा था।
फिर उसने चैनल सेट करना चालू किया। मैं नीचे ही ज़मीन पर घुटनों के बल बैठी थी। सभी चैनल सेट करने के बाद मैंने उसे कहा, ‘सब हिंदी चैनल पहले सेट करवा दो ना और उसके बाद इंग्लिश चैनल सेट करवा दो’। उसने हाँ कहा। और एक हाथ में रिमोट से चैनल सेट कर रहा था और दूसरे हाथ से चाय पी रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चैनल सेट करते-करते वो बीच-बीच में मेरी चुचियों को देखकर मुझसे बातें कर रहा था। अपनी चाय खत्म करके कप नीचे रखते हुए उसने मुझे पूछा कि ‘आपके घर में कोई बच्चा तो नहीं है ना?’ मैंने ना में गर्दन हिलाई और उसे पूछा, ‘तुमने ऐसा क्यों कहा?’ तो वो बोला, ‘नहीं भाभी अगर बच्चा घर में होता तो मुझे ये २६ नंबर का चैनल चाइल्ड लॉक करना पड़ता था’।
मैंने फिर पूछा, ‘वो क्यों?’ तो वो बोला, ‘उस पर हम कभी-कभी ब्लू फिल्म चलाते हैं ना’। मैं उसकी ओर सरप्राइज़ होके देखने लगी तो उसने कहा, ‘भाभी आपने कभी देखी नहीं क्या ब्लू फिल्म?’ मैंने ना में गर्दन हिलाई। तो वो बिना मेरी परवाह करते बोला, ‘रुको अभी दिखाता हूँ’।
ऐसा बोलके उसने २६ नंबर का चैनल लगाया जिस पर ब्लू फिल्म चालू थी। एक गोरा आदमी एक गोरी मेम को बड़ी सख्ती से चोद रहा था। और लड़की ज़ोर-ज़ोर से ‘फक मी, कम ऑन, फक मी, यी लाइक दिस, यी फक मी हार्ड, फक मी इन माय ऐस होल। कम ऑन योर डिक इज़ सो बिग’। ऐसे चिल्ला रही थी और उस आदमी को उत्तेजित कर रही थी।
मैं एकदम परेशान हो गई थी। मेरी साँसें तेज़ होने लगी थीं। मैं जीवन में पहली बार ब्लू फिल्म देख रही थी और वो भी एक पराए आदमी के साथ। मेरा गला सूखने लगा था। बदन में आग सी लग गई थी। मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। मैं उसे बंद करने के लिए बोलना चाहती थी पर मेरे गले से आवाज़ बाहर नहीं निकल पा रही थी। मैं सुन्न होकर रह गई थी। एक डर सा लग रहा था।
मेरी छाती ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाकर उससे कहा कि बदल दो तो वो बेवकूफ अपने लंड को सहलाते और हँसते हुए बोला, ‘हाँ वैसे भी अभी शॉट बदलने वाला है’। मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। मैं जैसे मजबूर होती जा रही थी।
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वो फिल्म देखकर मानो मेरी प्रतिकार शक्ति खत्म हो रही थी। मैंने उसे देखा वो लंड सहलाए जा रहा था कि अचानक उस फिल्म वाले मर्द ने अपना मोटा गधे जैसा लंड निकालकर उस गोरी मेम के मुँह में ठूँस दिया। और वो गोरी मेम जिसके मुँह में वो लंड समा नहीं पा रहा था। वो कोशिश करके उसे चूसे जा रही थी।
थोड़ी देर चूसने के बाद उस लंड ने तोप की तरह पानी फचफच फेंकना शुरू किया। उस गोरी मेम के मुँह से सारा वीर्य टपककर बाहर गिर रहा था। वो फिर चाट-चाट कर उसे साफ कर रही थी। और दूसरा शॉट चालू हुआ। जिसमें एक नंगी लड़की रूम में चली आई जहाँ पर पहले से ही दो मजबूत लड़के सोफे पर बैठे थे।
वो लड़की सीधे उनकी पास गई। उनमें से एक लड़का उठकर खड़ा हुआ और पीछे से उस लड़की को पकड़कर उसके गालों पर किस करने लगा। दूसरा लड़का उसके बड़े-बड़े दोनों मम्मों को मसलने लगा। ये देखकर मैं बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई। मेरी साँसें फूलने लगीं और मेरी छातियों का उभार नीचे-ऊपर होने लगा।
मेरे मुँह से मदाक आवाज़ें निकलनी चालू हो गईं। मैं पहली बार ब्लू फिल्म देख रही थी। मैं अपनी दोनों टाँगें एक दूसरे पर रगड़ने लगी। मेरी चूत पनीयाँ गई थी। ये देखकर केबल वाला मेरे पास आकर बैठ गया और मेरी चुचियों पर उसने अपना हाथ रख दिया। मैं आउट ऑफ कंट्रोल हो गई थी।
उसके गरम हाथ का स्पर्श पाकर मैं बेताब हो उठी। उसे इंकार करना अब मेरे बस में नहीं था। उसने मेरी कमीज के अंदर हाथ डालकर वो मेरी निप्पल को घुंडियों की तरह घुमाने लगा। मैंने अपने आपको उसके हवाले करते हुए तुरंत उसकी जींस पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ लिया।
वो ऊपर से मस्त मेरी चुचियाँ मसल रहा था। मैं पूरी तरह गरम हो चुकी थी। फिर उसने अपना हाथ ऊपर से निकालकर मेरा कमीज ऊपर करके मेरी नाभि पर हाथ फेरता रहा। मेरे मम्मों में कसाव आने लगा था। और मेरे निप्पल भी कड़क हो रहे थे। मैं उसके लंड को सहलाए जा रही थी।
मेरी बर्दाश्तगी की हदें टूट रही थीं कि उसने एक झटके से मेरी सलवार का नाड़ा खींचा और मेरी टाँगों को सलवार से बाहर निकालकर आज़ादी देने लगा। मैं भी उसका साथ देते हुए अपनी गांड ऊपर उठा ली तो उसने फटाक से सलवार खींच ली। मेरी छोटी सी पैंटी को देखकर वो एकदम खुश हो गया।
उसने उठकर अपना शर्ट और पैंट उतार दिए और फिर निक्कर भी निकाल दी। और बेदहद नंगा होकर मेरे मुँह के पास खड़ा हो गया। उसकी हाइट कम थी इसलिए बिना कोई तकलीफ के वो मेरे मुँह में लंड पेल सका। मैं ज़ोर से उसका लंड चूसने लगी। उसने मेरी कमीज को पकड़कर निकाल दी।
और मेरी ब्रा ऊपर सरकाकर मेरे बड़े स्तनों को उसने आज़ाद किया। ब्रा ऊपर सरकाते ही मेरे स्तन उसमें से निकलकर बाउंस होने लगे। मैं उसके लंड को चूसे जा रही थी तो वो बोला, ‘क्या लॉलीपॉप की तरह चूस रही हो। ज़रा कोन आइसक्रीम की तरह प्यार से चूसो ना’। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर मैं धीरे-धीरे उसके लंड को प्यार से चूमने लगी, कभी उसके बॉल्स को मुँह में लेकर चूसती। उसका लंड ज़्यादा बड़ा तो नहीं था पर सख्त ज़्यादा हो रहा था। फिर उसने मुझे रोकके बेड पर ले गया और मुझे लिटा दिया और मेरी पावरोटी जैसी फूली चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। ऐसा लग रहा था कि वो चुदाई में माहिर है।
थोड़ी देर में मेरी चूत ने उसके मुँह पर पानी उँड़ेलना शुरू किया। फिर वो बाजू हट गया। और जाकर अपनी जींस हाथ में पकड़ ली। मैं घबरा गई क्या हुआ? लेकिन उसने शांति से अपनी जेब में हाथ डालकर उसमें से एक सेक्स बढ़ाने वाला स्प्रे निकालकर अपने लंड पर मारा।
मैं देख रही थी। फिर मेरी तरफ देखकर हँसा और मेरी चूत के पास आकर अपना सुपाड़ा मेरी चूत के मुहाने पर रगड़ने लगा। रगड़ते-रगड़ते उसने धीरे से मेरी चूत में अपना लंड सरकाना शुरू किया। मुझे अति आनंद हो रहा था। फिर उसने थोड़ा सा बाहर निकालकर फिर थोड़ा अंदर घुसा दिया।
ऐसा वो १०/१२ बार करने के बाद मैंने कहा, ‘जल्दी से डालो ना। क्यों तड़पा रहे हो?’ तो वो बोला, ‘चुदाई का पूरा लुत्फ उठाना चाहिए। पाँच मिनट में चुदाई का असली मज़ा नहीं आता’। मैं चुप हो गई। वो मुझे बहुत मस्त किए जा रहा था। फिर उसने मेरी दोनों टाँगें उठाकर अपने कंधे पर रखी। और एक ज़ोर से करारा शॉट मारा।
मेरी साँस जैसे कुछ पल के लिए रुक सी गई। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। मुझे दर्द हो रहा था। मैंने उसे टाँगें नीचे करने को कहा तो वो ज़ालिम मेरी परवाह किए बिना शॉट पे शॉट मारता रहा। थोड़ी देर तक ऐसी ही मेरी ठुकाई के बाद उसने अपना लंड निकाल दिया।
मेरी टाँगें नीचे करके वो मेरी मम्मों को मसलते मुझे चूमने लगा। मैं भी उसके लंड को बड़े प्यार से सहला रही थी। फिर उसने मुझे उठाया और उल्टा होके कुत्तिया की तरह पोज़ लेने को कहा। मैंने ऐसा करते ही मेरे चूतड़ उभरकर उसके लंड के सामने आए। वो अपने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड पर रगड़ने लगा तो मैंने उसे मना किया।
उसने मुझे कहा, ‘भाभी एक बार गांड मरवा लोगी तो ज़िंदगी भर गांड में ही सब लौड़े लोगी। आजकल की औरतें चूत से ज़्यादा गांड मरवाना पसंद करती हैं’। मैंने कहा, ‘लेकिन मुझे ये पसंद नहीं’। उसने समय का गंभीरता समझाते हुए कहा, ‘ठीक है आज तुम्हारी बुर ही चोदूँगा’। और फिर धड़ाम से मेरी चूत में लंड पेल दिया।
मैं उस प्रहार से आगे जाकर गिरने वाली थी कि उसने जल्दी से मेरी कमर को पकड़कर मुझे कसकर चोदने लगा। उसका लंड बहुत ही सख्त था। मैं दूसरी बार झड़ने लगी लेकिन उसका लंड सिकुड़ने का नाम नहीं ले रहा था। उसके लंड पर स्प्रे का असर था। वो चोदे जा रहा था। और मैं बेशर्म होकर चिल्ला रही थी, ‘मेरी बुर को जल्दी-जल्दी चोदो ना’।
वो भी बोल रहा था, ‘हाँ भाभी हम बहुत तबीयत से चोदेंगे। आपकी चूत की पूरी प्यास बुझा देंगे। आपकी ये बड़ी-बड़ी चुचियाँ वाकई कमाल की हैं। आप इतनी सुंदर चुचियों को क्यों कपड़े में बंद करती हो। इन्हें खुली हवा में रहने दो। हाय भाभी और आपकी गांड तो इससे भी ज़्यादा खूबसूरत है।
ऐसा लगता है कि बस गांड में लंड डाल दूँ। इतनी बड़ी गांड फिर क्या काम की। आप तो ऐसी सुंदर गांड पर अन्याय कर रही हैं। मेरा बस चले तो तुम्हारी गांड में घोड़े का मूसल लंड डालकर उसकी ठुकाई करूँ। ऐसी गांड चोदने के लिए कम से कम १०/१२ लौंडे एक साथ चाहिए’।
मेरे मम्मों को मसलने लगा और शॉट पे शॉट धड़ाधड़ मार रहा था। मेरी चूत के दरवाज़े ढीले पड़ चुके थे। बुर सूखने लगी। उसके लंड के घिसने की वजह से मेरी चूत की फाँकें लाल हो गई थीं। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं उसे जल्दी अपना पानी छोड़ने को कह रही थी। वो सुनने को ही तैयार नहीं था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उसने अपना लंड बाहर निकाला उस पर ढेर सारा थूक लगाया और फिर मिशनरी पोजीशन में मुझे चोदने लगा। मेरी पूरी ताकत खत्म हो गई थी। और आधे घंटे की चुदाई के बाद उसने मेरी चूत में पानी डाला। मैं हिल भी नहीं सकती थी। उसने अपना लंड बाहर निकाला और मेरी न्यू ड्रेस से साफ करने लगा। मैं कुछ नहीं बोली। आखिर मेरी बर्थडे का तोहफा मुझे मिल चुका था। मुझे चुदाई का इतना दर्द और मज़े का कॉम्बिनेशन पहले कभी नहीं मिला था। मैं खुश हो गई थी।
वो कपड़े पहनकर जाने लगा तो मैंने उससे पूछा, ‘फिर कब आओगे?’ तो वो आँख मारकर बोला, ‘अगले ६ महीने के बाद, क्योंकि मैं रोज़ एक ही घर पर कलेक्शन के लिए जाता हूँ। और हाँ एक बात, जब भी चैनल २६ चालू करोगी और वहाँ ब्लू फिल्म चालू रहेगी तो समझना मेरी चुदाई का दौर चालू है’। और फिर मुझे नंगी उसी हालत में छोड़कर वो चला गया। दो दिन तक मैं कपड़े भी नहीं पहन पाई। इतनी सूजन और दर्द था मेरी चूत में। मैं सिर्फ नाइटी ही पहना करती थी।
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