Didi Group Chudai Kahani
नमस्ते दोस्तों, मैं प्रथम अग्रवाल आप सभी का फिर से स्वागत करता हूँ. आप सभी ने मेरी कहानी का पिछला भाग मेरी दीदी एक मोची की रंडी बन गई 2 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था की धृति दीदी परवेज की परमानेंट रंडी बन गई थी और साथ ही साथ उसके दोस्तों के लंड का भी मजा लेने लगी थी. एक दिन जब मैं मामा के घर गया था तो परवेज दीदी को मेरे ही घर चोद रहा था, जो मैंने छुप कर देखा. अब आगे- Didi Group Chudai Kahani
मैं अपने दोस्त के घर गया हुआ था और उधर से मैं वापस घर पाँच बजे निकल गया क्योंकि मुझे लगा कि परवेज अपने घर चला गया होगा। अब घर चलते हैं क्योंकि हिलाने के बाद थकान हो जाती है तो घर जाकर आराम करना चाहता था। तो अपने घर की तरफ निकल गया और मैं अपने घर पहुँच गया तो मैंने सोचा कि क्यों न एक बार दीदी का रूम चेक कर लिया जाए कि दीदी अकेली हैं या परवेज अभी भी है।
तो मैं दीदी के रूम की तरफ गया और मैंने अंदर देखा और मैंने देखा कि दीदी अपने कमरे में… नहीं हैं। तो मुझको अब कन्फर्म हो गया था कि परवेज अपने घर चला गया है। तो मैं वापस से मैंने डोर की तरफ गया और मैंने जब मैंने गेट चेक किया तो गेट तो ओपन ही था। लॉक था ही नहीं।
मैंने सोचा दीदी कितनी केयरलेस हो गई हैं। गेट बंद भी नहीं किया। कब कौन चोर आकर चोरी कर ले। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मैंने गेट ओपन किया और अंदर घुस गया। और मैं अंदर घुस गया था। मैंने जो देखा चौंक गया। उसे देखकर तो बुरा हाल था। आँखें खुली की खुली रह गई थीं। सीन ही ऐसा था।
मैं जैसे ही घर में घुसा तो दीदी सामने सोफे पर पूरी नंगी थीं और डॉगी स्टाइल में थीं और दीदी का फेस मेरी तरफ था लेकिन दीदी की आँखें बंद थीं और परवेज ने दीदी की चूत में लंड डाल रखा था और दीदी को चोद रहा था। परवेज का एक हाथ दीदी की कमर पर था और दूसरा हाथ से दीदी की गाँड पर हाथ फेरकर दीदी के पीछे से धक्का दे रहा था।
जैसे ही गेट खुला तो गेट खुलने की आवाज़ आई जिससे दीदी की आँख जो बंद थीं वो खुल गईं और परवेज की नज़र भी गेट की तरफ गई। सीन कुछ ऐसा था कि मैंने दीदी को लाइव परवेज से चुदते हुए पकड़ लिया था। मैंने ये जानबूझकर नहीं किया था। मुझे क्या पता था कि दीदी इतनी केयरलेस हो सकती हैं और हॉल में चुदाई करवा सकती हैं। जैसे ही दीदी ने मुझको देखा अब मैं भी नाटक करने लगा कि मैं भी दीदी को पहली बार देख रहा हूँ चुदते हुए।
मैं: (चौंकते हुए) दीदी ये आप क्या कर रही हो?
दीदी: (घबराहट से) प्रथम… तू… तू… इधर…
फिर दीदी जल्दी से उठीं और जल्दी से दीदी ने एक कपड़ा लिया और अपने ऊपर डालने लगीं। लेकिन मैंने तो दीदी को देख लिया था पूरा नंगा। और परवेज को तो जैसे कोई फर्क भी नहीं पड़ा। साला मुझको देखकर हँसने लगा। मादरचोद। जब उसने देखा दीदी अपने आपको ढक रही हैं तो साला भड़वा अपनी धोती लपेटने लगा।
दीदी को समझ नहीं आ रहा था कि अब दीदी क्या करें। दीदी के मन में तो बस यही चल रहा था कि अब मेरा क्या होगा। अब मैं मुँह दिखाने लायक नहीं रही। अगर प्रथम ने मम्मी और पापा को बता दिया तो क्या होगा। दीदी के दिमाग में यही सब चल रहा था तो मैं बोला—
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मैं: दीदी बोलो क्या कर रही थीं आप ये सब वो भी इस मोची के साथ?
दीदी अब डर के मारे रोने लगीं और रोते-रोते मेरे पास आईं।
दीदी: प्रथम… प्लीज मुझे माफ कर दे प्रथम।
मैं: दीदी मुझे आप पर विश्वास नहीं हो रहा कि आप ऐसी…
दीदी: प्रथम प्लीज माफ कर दे। प्लीज मम्मी-पापा को मत बताइए इसके बारे में। प्लीज प्रथम।
और दीदी बहुत रोने लगीं। अब दीदी को देखकर मुझको भी बुरा लगने लगा तो पहले मैं दीदी को चुप करने की कोशिश करने लगा।
मैं: दीदी चुप हो जाओ। नहीं बताऊँगा मैं किसी को। पहले चुप तो हो जाओ।
फिर परवेज दीदी के पास आया और वो भी चुप करने लगा। फिर थोड़ी देर बाद थोड़ी नॉर्मल हुईं तो मैं बोला—
मैं: अंकल तू इधर क्या कर रहा है मेरे घर पर भोसड़ीके बूढ़े?
दीदी: प्रथम प्लीज इनको कुछ मत बोल।
मैं: क्यों दीदी? साले बूढ़े की हिम्मत कैसे हुई?
परवेज: बेटा मैं तेरी बहन से प्यार करता हूँ।
उसने सीधा ये बोल दिया।
मैं: दीदी क्या बोल रहा है ये?
दीदी: हाँ प्रथम परवेज जी सही बोल रहे हैं। मैं भी परवेज जी से प्यार करने लगी हूँ।
मैं: दीदी आप भी?
दीदी: प्लीज प्रथम किसी को मत बताइयो।
मैं: ठीक है दीदी किसी को नहीं बताऊँगा लेकिन ये आपका कब से चल रहा है…
तब परवेज हँसते-हँसते लगा तेज-तेज कि मुझे समझ नहीं आ रहा था साला बूढ़ा हँस क्यों रहा है। जिसे देखकर दीदी बोलीं—
दीदी: परवेज जी आप पागल हो गए हो क्या?
परवेज: बेगम देखो तो अपने भाई को कैसे भोला बन रहा है जैसे इसको कुछ पता ही नहीं है।
मैं: क्या क्या नहीं पता मुझको?
दीदी: क्या बोल रहे हो परवेज जी आप?
थोड़ा दुखी होकर।
परवेज: बेगम तेरे भाई को तो ये कब का पता था कि तू मेरे साथ सोती है।
दीदी एकदम से चौंकते हुए—
दीदी: क्या…… क्या बोल रहे हो आप?
परवेज: बेगम पूछो अपने भाई से।
दीदी: (दीदी को चौंकते हुए) क्या…… बोल सही बोल रहे हैं क्या परवेज जी?
मैं: मुझे क्या पता ये साला बूढ़ा क्या बोल रहा है।
तब परवेज हँसते हुए बोला—
परवेज: बेटा झूठ मत बोल।
मैं: मैं क्या झूठ बोल रहा हूँ?
परवेज: अच्छा तो उस दिन तू क्या कर रहा था जब तेरी बहन नंगी मेरे गोदी में बैठी हुई थी और तू खिड़की से देख रहा था?
दीदी: क्या…… प्रथम सच बता तुझे पता था?
अब मैंने सोचा अब झूठ बोलकर कोई फायदा नहीं है। सच ही बोल देता हूँ।
मैं: हाँ दीदी मैंने आपको उस दिन देख लिया था जब आप केला लेने गई थीं।
दीदी: क्या तुझे पता था? तब तूने क्यों नहीं बताया तुझे?
मैं: दीदी वो……
अब दीदी एकदम नॉर्मल हो गई थीं। दीदी ने अभी भी एक कपड़ा लपेट रखा था। दीदी की थाई और क्लीवेज बहुत अच्छे से दिख रहे थे।
दीदी: क्या वो……
मैं: दीदी…… दीदी मुझको ना……
दीदी: क्या तेरे को?
मैं: दीदी आप परवेज के साथ बहुत खुश थीं तो मैंने किसी को बोलना ठीक नहीं समझा।
मैं: दीदी मुझे पता था कि आप परवेज से प्यार करती हो तो चाहता था आप खुश रहें इसलिए।
दीदी: (प्यार से) प्रथम तू अपनी दीदी से इतना प्यार करता है।
और आकर मेरे गले लग गईं।
तब परवेज हँसते हुए बोला—
परवेज: पूरा तो बताओ साले साहब।
मैं: क्या पूरा बताऊँ?
परवेज: मैं बताता हूँ फिर।
परवेज: बेगम जब मैं तुम्हें उस दिन चोद नहीं रहा था और आज भी तब तेरा भाई तुझे चुदते हुए देखकर हिला रहा था।
दीदी: क्या प्रथम तू ये कर रहा था?
मैं: दीदी……
दीदी: क्या दीदी बोल अब।
मैं: दीदी मुझको आपको दूसरे से चु……
दीदी: क्या चु आगे बोल।
दीदी अब मेरे से खुल गई थीं क्योंकि दीदी को मेरे बारे में पता जो चल गया था।
मैं: दीदी मुझको आपको दूसरे से चुदते हुए देखना अच्छा लगता है।
दीदी: तू मुझको देखकर हिला रहा था?
मैं: हाँ दीदी।
परवेज हँसते हुए—
परवेज: बेगम तेरा भाई तो बहनचोद निकला।
दीदी नकली गुस्सा करते हुए—
दीदी: परवेज जी आप भी ना।
दीदी: कब से कर रहा है ये?
मैं: दीदी जब आप परवेज का केला ले रही थीं।
दीदी ब्लश करते हुए—
दीदी: हाथ बेशर्म।
परवेज—
परवेज: बेगम तेरा भाई तो तुझसे भी तेज निकला।
दीदी रंडी की तरह हँसते हुए—
दीदी: आप भी ना।
परवेज: साले साहब अब तुम आदत डाल लो इस चीज के। अब तेरी दीदी मेरे साथ रहेगी।
मैं: दीदी……
दीदी: अरे प्रथम परवेज जी मजाक कर रहे हैं।
परवेज: भूल गई बेगम निकाह की बात?
दीदी: हाँ याद है परवेज जी।
परवेज: साले जी तेरी दीदी मुझसे निकाह करना चाहती है।
मैं: दीदी क्या बोल रहा है ये?
दीदी ब्लश करते हुए हाँ में सर हिलाती हैं।
परवेज: साले जी अब मुझको जीजा बोलने की आदत डाल लो।
और हँसने लगा। जिसे देखकर दीदी भी खिलखिलाकर हँसने लगीं।
मैं: दीदी आप मनीष जीजा को और मम्मी-पापा से क्या बोलोगी अगर उनको पता चल जाएगा तो?
परवेज: अरे साले साहब किसी को कुछ नहीं पता चलेगा।
मैं: दीदी अगर पता चल जाएगा तो?
दीदी: नहीं पता चलेगा किसी को।
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परवेज दीदी का रिप्लाई देखकर खुश हो गया। उसने मेरे सामने ही दीदी को पकड़ा और अपने पास खींचा और दीदी के बूब्स पकड़के दबाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: परवेज जी क्या कर रहे हैं मेरे भाई के सामने?
परवेज: इससे क्या छुपाना बेगम। इसने तो सब देख ही लिया है।
दीदी नॉटी स्माइल के साथ—
दीदी: फिर भी परवेज जी नहीं इसके सामने नहीं।
मैं: अच्छा दीदी अब आपको मेरे सामने शर्म आ रही है जब आप रहीम अंकल का लंड ले रही थीं तब नहीं आई?
दीदी: हाथ बदमिजाज।
परवेज हँसने लगा।
दीदी: वो परवेज जी के दोस्त हैं।
मैं: अच्छा उसके दोस्त से आप कुछ भी कर लोगी?
परवेज: अरे बेगम देखने दो।
दीदी: ठीक है प्रथम तुझे मुझे चुदते हुए देखना है ना तो देख आज कैसे तेरे सामने चुदती हूँ मैं।
मैं: सच दीदी?
दीदी नॉटी स्माइल।
परवेज: बेगम तेरा पूरा घर रंडी वाला है क्या?
और हँसने लगा।
दीदी: हाँ परवेज जी हूँ ना मैं आपकी रंडी। और हँसने लगीं।
परवेज ने दीदी ने जो कपड़ा लपेटा था उसे उतारकर फेंक दिया और दीदी के बूब्स को दबाने लगा और दीदी के नेक पर किस करने लगा। दीदी अपनी आँखें बंद करके मजा लेने लगीं और मैं उनको देखने लगा। मुझे दीदी की पहली बार दीदी की गुलाबी चूत इतनी पास से दिख रही थी और दीदी के बूब्स क्या ही कमाल के थे। मजा आ गया था दीदी को देखकर।
फिर परवेज ने दीदी को अपने साइड घुमाया और दीदी को लिप्स टू लिप्स किस करने लगा और साथ में दीदी भी साथ दे रही थीं। परवेज का एकदम अच्छे से परवेज दीदी के मुँह में अपनी जीभ डाल रहा था साथ में दीदी भी दोनों एक-दूसरे की जीभ चूस रहे थे।
मुझको अब दीदी दूध जैसी गोरी गाँड दिखाई दे रही थी। दीदी की गाँड कितनी बड़ी थी। ऐसे ही परवेज और दीदी किस कर रहे थे। फिर परवेज अपना हाथ नीचे ले आकर दीदी की गाँड को दबाने लगा और मसलने लगा। परवेज ने एक बार तेज से दीदी की गाँड दबा दी जिससे दीदी—
दीदी: उह्ह्ह्ह…
फिर भी परवेज को किस करती रहीं। दीदी अब कोई रंडी की तरह परवेज से प्यार कर रही थीं। परवेज दीदी को अपना थूक खिला रहा था और दीदी उसे खा भी जा रही थीं। दीदी बहुत अच्छे से किस कर रही थीं। परवेज साथ में दीदी की गाँड मसल रहा था। फिर दीदी भी अपना एक हाथ ले जाकर परवेज का लंड मसलने लगीं।
पाँच मिनट तक ऐसा ही करा। फिर दीदी खुद परवेज की धोती उतार दीं और परवेज को सोफे पर धक्का दे दिया और अब परवेज पूरा नंगा था साथ में दीदी भी। अब जैसे ही परवेज सोफे पर बैठ गया दीदी फर्श पर बैठ गईं और परवेज का लंड हाथ में पकड़कर हिलाने लगीं.
और फिर खुद ही अपनी जीभ से पूरे लंड पर जीभ से चाटने लगीं ऊपर से नीचे तक अच्छे से पूरा लंड दीदी चाट रही थीं। दीदी के मुँह में परवेज के झांट के बाल भी आ रहे थे। दीदी फिर भी उसका लंड बड़े मज़े से चाट रही थीं। फिर दीदी ने उसका लंड मुँह में डाल लिया और चूसने लगीं जिससे परवेज कराह गया—
परवेज: आह्ह… बेगम क्या चूस रही है मजा आ रहा है।
दीदी परवेज की आँख में देखकर नॉटी स्माइल दे दीं और चाटने लगीं।
परवेज: आह… आह… आह……
मैं: दीदी आप तो प्रोफेशनल रंडी की तरह चाट रही हो।
दीदी ने लंड मुँह से निकाला और बोलीं—
दीदी: हट बदमिजाज। मुझको रंडी बोलेगा।
परवेज हँसने लगा और साथ में मैं भी। फिर दीदी ने परवेज का लंड वापस से मुँह में लिया और दीदी लंड को पूरा मुँह में ले रही थीं। परवेज का लंड दीदी के गले तक जा रहा था। ऐसे ही दीदी परवेज का लंड चाटने लगीं। उसके बाद मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने अपना लंड पैंट से निकाला जो कि इतना टाइट हो गया था पूछो मत। मैंने लंड निकाला और लंड को हिलाने लगा जिसे देखकर परवेज हँसने लगा और बोला—
परवेज: बेगम पीछे तो देख।
दीदी ने लंड निकाला।
दीदी: वो बेशर्म मेरे सामने ही हिलाने लगा।
मैं: दीदी आप जो मेरे सामने ही अंकल का चूस रही हो वो क्या?
दीदी हँसने लगीं और मैं भी।
परवेज: साले साहब अंकल मत बोल। जीजा बोल। बेगम बोलो ऐसे।
दीदी: प्रथम अंकल मत बोल परवेज जी को।
और शरमाने लगीं।
मैं: अच्छा दीदी अभी निकाह करा नहीं और अभी से ही साला बनवा दिया मुझको।
जिस पर सब हँसने लगे।
उसके बाद परवेज बोला—
परवेज: चल आ जा बेगम। लेट जा ऊपर आकर।
दीदी: इधर ही करोगे परवेज जी? अंदर बेडरूम में चलो।
परवेज: चल फिर बेगम।
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दीदी खड़ी हुईं और परवेज का लंड पकड़ा और पकड़कर परवेज को साथ में लेकर चलने लगीं और मैं भी पीछे-पीछे जाने लगा लंड हिलाते-हिलाते। दीदी बेडरूम में गईं और परवेज भी। जब मैं जाने वाला था तो दीदी—
दीदी: अरे चल भाग यहाँ से। बहुत देख लिया। जा अपने कमरे में।
मैं: दीदी देखने दो ना।
दीदी: चल भाग बेशर्म। बड़ा मजा आ रहा है तुझे मुझको चुदने देखने में।
मैं: दीदी देखने दो ना।
दीदी: भाग यहाँ से बेशर्म। (रंडी जैसी आवाज में।)
उसके बाद दीदी ने गेट बंद कर दिया और खुद परवेज और वो रूम में चले गए और मैं उनके रूम के बाहर था। उसके बाद मैं उनके रूम के बाहर खड़ा थक गया था तो मैं अपने रूम में चला गया। मुझको अपने रूम में गए पंद्रह मिनट हुए थे तभी मुझको दीदी की चिल्लाने की आवाज़ आने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: आआह्ह… परवेज जी… आआह्ह्ह…
परवेज: मजा आ रहा है ना बेगम?
दीदी: कितना बड़ा है आपका। इसने तो मेरी चूत ही फाड़ दी।
परवेज: अभी तो चूत ही फाड़ी है तो तेरी गाँड भी रह रही है बेगम।
दीदी: नहीं परवेज जी आज नहीं।
परवेज: आज कौन कर रहा है मेरी जान। तेरी तो निकाह के बाद फाड़ूँगा।
उसके बाद रूम में से थप-थप की बहुत तेज-तेज आवाज़ आने लगी। मैं उनकी सभी चीखें सुन रहा था क्योंकि दीदी कुछ ज्यादा ही चिल्ला रही थीं और वो भी लंड के मजे में। ऐसे ही परवेज दीदी को छह बजे तक चोदा। उसके बाद दीदी रूम से बाहर आईं खाली ब्रा और पेटीकोट में। मैं उस समय दीदी की चीखें सुनकर हिला रहा था।
दीदी: अभी तक तू यही कर रहा है?
मैं: आपने तो मजे कर लिए ना।
नाराज होकर।
दीदी: अरे नाराज मत हो। मैं तुझे नहीं दिखा सकती ना बाबू।
मैं: तो आप मेरे सामने तो बड़े रंडी की तरह चूस रही थीं वो क्या?
दीदी: वो बात अलग है।
तब परवेज भी रूम से आया धोती और कुर्ते में।
परवेज: बेगम तूने तो आज मजा दिला दिया। कितने अच्छे से तूने चुदाई के बाद मेरा लंड साफ किया। वाह्!!
दीदी शरमाने लगीं।
परवेज: तो बेगम आज रात का क्या प्लान है?
दीदी: कुछ भी नहीं है। अब जाइए।
परवेज: अच्छा ठीक है। कल तुम रेडी रहना। कल हम अपनी निकाह की प्लानिंग करेंगे।
दीदी: अच्छा ठीक है बाबा। अब जाइए। अगर किसी पड़ोसी ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा।
परवेज: बेगम अब शर्माना छोड़ दो। निकाह के बाद तो तुमको मेरे साथ ही घूमना है।
दीदी: मुझको पता है आप मेरे कैसे घुमाने वाले हैं।
परवेज हँसने लगा—
परवेज: अच्छा फिर मैं चलता हूँ।
दीदी: अच्छा ठीक है।
परवेज: बाय मेरी डार्लिंग।
दीदी शरमाने लगीं।
परवेज: साले साहब अपनी बहन का ख्याल रखना।
मैं: अच्छा अंकल मजे आप लो और ख्याल मैं रखूँ।
परवेज: साले जी अंकल नहीं जीजा बोल।
दीदी हँसने लगीं। उसके बाद परवेज अपने घर चला गया। जब दीदी परवेज को छोड़ने गेट पर जा रही थीं तो दीदी की चाल अजीब-सी ही थी। हो भी क्यों न, दीदी ने परवेज का इतना बड़ा लंड लिया है। दीदी की चाल देखकर मैं दीदी से मजे लेने की सोचने लगा। मैं दीदी से बोला—
मै: दीदी क्या हो गया? ठीक से चल क्यों नहीं पा रही?
दीदी: अरे कुछ नहीं, पैर में लग गई है।
मै: दीदी पैर में लगी है या कहीं और? लगता है नए जीजा ने बड़ी बेरहमी से मारी है आपकी।
दीदी: पिटेगा तू मेरे हाथ से।
मै: दीदी पहले हाथ धो लेना। ऐसे हाथ से अपने नए जीजा का हिलाया था।
मैं हँसने लगा।
उस समय दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। दीदी क्या ही लग रही थीं। अब तो दीदी के बूब्स और गाँड का साइज भी पहले से ज्यादा बढ़ गया था।
दीदी: अच्छा, बड़े मजे ले रहा है मुझसे तू? तो पिटेगा अब।
मै: मैं कहाँ मजे ले रहा हूँ? मजे तो नए जीजा ले रहे हैं आपके।
दीदी अब शरमाते हुए मुझे मारने आने लगीं। मैं उधर से अपने रूम की तरफ भागने लगा। लेकिन दीदी भाग नहीं पा रही थीं क्योंकि परवेज ने दीदी को दर्द जो दे दिया था।
मै: क्या हुआ दीदी? दर्द हो रहा है?
दीदी: भाग यहाँ से बेशर्म।
मै: दीदी जब दर्द हो रहा है तो लिया क्यों था?
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उसके बाद दीदी नहाने चली गईं और नहाकर आईं। अब रात के आठ बज गए थे। दीदी रात का खाना बनाने चली गईं और मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा रेस्ट करने लगा। उसके बाद दीदी ने नौ बजे खाना खाने के लिए बुलाया। दीदी ने आज रात को पेटीकोट और ब्लाउज ही पहना था। मैं खाना खाने के लिए बैठ गया। फिर दीदी भी खाना लगाकर खाना खाने के लिए बैठ गईं। खाना खाते समय मैं दीदी से बात करने लगा—
मै: दीदी आप सच में परवेज अंकल से निकाह करने वाली हो क्या?
दीदी: हाँ प्रथम, मुझे परवेज जी से प्यार हो गया है। अब उनके बिना रह नहीं सकती।
मै: परवेज अंकल के बिना या उनके लंड के बिना?
दीदी (हँसते हुए): अरे बाबा, दोनों के लिए।
फिर हम हँसने लगे।
मै: तो फिर दीदी क्या सोचा है? कैसे करोगी सब? अगर किसी को पता चल गया तो आप तो गईं।
दीदी: अब पता लगने दे। अब मुझे कोई डर नहीं है। मैं खुलकर जीना चाहती हूँ।
मै: अच्छा दीदी। तो फिर कब कर रही हो निकाह?
दीदी: परवेज जी खुद बता देंगे पता करके। उन्होंने बोला है।
मै: अच्छा दीदी। निकाह के बाद तो आपके दो-दो हसबैंड हो जाएँगे।
दीदी: लेकिन मैं परवेज जी को ही अपना पति मानूँगी।
मै: ओह दीदी, इतना प्यार।
दीदी: चल चुपचाप से खाना खा।
फिर हम खाना खाने लगे। और उसके बाद हम टीवी देखने लगे। दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में बड़ी सेक्सी लग रही थीं। जब दीदी टीवी देख रही थीं तो मैं दीदी को देखकर अपना लंड मसल रहा था। दीदी ने मुझे देख लिया लंड मसलते हुए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: बेशर्म, क्या कर रहा है?
मै: कुछ तो नहीं।
दीदी: अच्छा, जैसे मैंने तो देखा ही नहीं।
मै: अच्छा, क्या देखा आपने?
दीदी: जो तू कर रहा था। मुझे देखकर अपना नुनू हिला रहा था।
मै: दीदी नुनू नहीं है वो, कोबरा है।
दीदी: अच्छा जी, खच्चे में तेरे कोबरा है?
प्रथम (हँसते हुए): दीदी ध्यान से रहना। कहीं वो कोबरा कहीं आपके बिल में न घुस जाए।
दीदी: तू बहुत बिगड़ गया है।
मै: कहाँ दीदी?
दीदी: पहले तू कितना सीधा था, अब देख।
मै: दीदी आप भी तो संस्कारी थीं, लेकिन अब तो आप रन…
दीदी: क्या? क्या रन… बोल।
प्रथम (हँसते हुए): रंडी बन गई हो।
दीदी ने मेरे सर पर नकली गुस्से से मारा।
दीदी: अच्छा जी, अब रंडी बोलेगा मुझको?
मै: दीदी मजाक कर रहा था।
दीदी: अच्छा समझ रही हूँ तेरा मजाक।
हम दोनों बात ही कर रहे थे तो दीदी को परवेज का कॉल आया।
मै: दीदी किसका कॉल आ रहा है?
दीदी (रंडी जैसी आवाज में): तेरे जीजा का।
मै (हँसते हुए): कौन से जीजा? मेरे तो दो जीजा हैं।
दीदी: चल भाग जा अपने कमरे में।
दीदी फिर उठकर अपने कमरे में चली गईं और कॉल पिक अप किया।
परवेज: बेगम, क्या कर रही थी?
दीदी: कुछ नहीं। तुम्हारा साला मुझसे बड़ा मजाक कर रहा था।
परवेज (हँसते हुए): अच्छा।
परवेज: बेगम, और कितना दिन वेट करना पड़ेगा? अब मुझे तुमसे दूर रहना का मन नहीं करता। बताओ तो कब की डेट निकालूँ?
दीदी: मुझे भी अब आपके बिना मन नहीं करता।
परवेज: तो बताओ कब की डेट निकालूँ?
दीदी: जितना जल्दी हो सके उतना कर लीजिए।
परवेज: फिर परसों का करता हूँ। कल हम सब तैयारी कर लेंगे।
दीदी: अच्छा जी।
परवेज: बेगम, ये बताओ तुम किसी को बुलाओगी अपनी तरफ से?
दीदी: नहीं परवेज जी। खाली प्रथम रहेगा।
परवेज: बेगम, मेरे सारे दोस्त आ रहे हैं। बोल रहे थे भाभी जी के मजे लेने हैं हमको।
दीदी (नॉटी स्माइल के साथ): अच्छा जी, मेरे मजे लेने हैं?
उसके बाद दोनों की ऐसी ही बात होने लगी। थोड़ी देर बाद परवेज बोला—
परवेज: अच्छा बेगम, मैं फिर सब चीजों की तैयारी करता हूँ कैसे क्या करना है।
दीदी: अच्छा जी।
परवेज: बाय बेगम।
दीदी: बाय जानू।
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रात के ग्यारह बज गए थे। दीदी अब अपने फोन में कुछ यूज करने लगीं। तब जो परवेज ने ग्रुप बनाया था “धृति बेगम” नाम से, उस पर मैसेज आया।
रहीम: हाय भाभी जी।
दीदी ने फिर थोड़ी देर के बाद उसका रिप्लाई किया।
दीदी: हाय रहीम जी, कैसे हैं आप?
रहीम: बस भाभी जी, मजे में हूँ।
दीदी: अच्छा जी।
रहीम: भाभी जी, मैंने सुना आप परवेज भाई से परसों निकाह करने वाली हो।
दीदी: हाँ रहीम जी।
रहीम: भाभी जी, मुझे एक बात पता चली है।
तभी राशिद का मैसेज आया।
राशिद: क्या बातें हो रही हैं भाभी जी? नमस्ते। और क्या बात पता चली है?
दीदी: नमस्ते राशिद जी।
रहीम: भाई, तेरे को नहीं बताई क्या परवेज भाई जान ने?
राशिद: नहीं, क्या बात है?
रहीम: अरे भाभी के भाई को भाभी जी के बारे में पता चल गया।
राशिद: क्या बात कर रहा है?
रहीम: भाई, मेन बात ये नहीं है। बात तो ये है कि भाभी के भाई को कब का पता चल गया था भाभी के बारे में।
राशिद: क्या बोल रहा है? कैसे पता चला?
रहीम: भाई, उस दिन जब भाभी जी परवेज भाई का और मेरा केला ले रही थीं तो उनके भाई ने देख लिया था।
रहीम: क्यों भाभी जी?
दीदी: रहीम जी, आप भी ना।
राशिद: भाभी जी, आपका भाई ने आपको कुछ बोला नहीं?
दीदी: नहीं राशिद जी। प्रथम मेरे साथ है।
राशिद: अच्छा, सही है भाभी जी।
रहीम: भाई, आगे तो सुन। जब भाभी हमारा केला ले रही थीं तो उनका भाई अपना लंड हिला रहा था अपनी बहन को देखकर।
राशिद (हँसते हुए): क्या बात कर रहा है? अपनी बहन को देखकर हिला रहा था?
राशिद: अरे भाभी जी, आपका भाई तो बड़ा बहनचोद है।
दीदी: राशिद जी, अब आप भी शुरू हो गए।
राशिद: अरे भाभी जी, मजाक कर रहा हूँ।
रहीम: लेकिन उस दिन भाभी ने क्या ही चूसा था मेरा लंड। क्यों भाभी?
दीदी: रहीम जी, चुप रहिए ना।
राशिद: भाभी जी, आपने रहीम भाई जान को तो मजे ही दिला दिए हैं। हमें भी मजे दे दो।
दीदी: कैसी बात कर रहे हैं? अब मैं आपके भाई से निकाह करने वाली हूँ।
राशिद: तो क्या हो गया? हमारे में चलता है। निकाह के बाद भी देवर या भाई का अब्बू भी बहू के मजे ले लेता है।
दीदी: अच्छा जी, फिर तो आप सबसे बचकर रहना पड़ेगा।
रहीम: क्यों भाभी जी?
दीदी: क्या पता आप निकाह के बाद मेरे साथ क्या कर दें।
इस पर सब हँसने लगे।
राशिद: भाभी जी, निकाह तो होने दीजिए। देखिए उसके बाद मैं क्या करता हूँ।
दीदी: अच्छा, क्या करेंगे आप?
राशिद: आपको आपके घर से उठाकर ले जाऊँगा और सात दिन तक अपने साथ रखूँगा।
दीदी: अच्छा जी, और परवेज जी आपको ले जाने देंगे?
राशिद: अरे भाभी जी, देख लेना आप कैसे मैं आपको लेकर जाता हूँ। उसके बाद मैं फिर आपकी जमकर मारूँगा।
दीदी: हटो बदमाश। भाभी से कोई ऐसी बात करता है?
राशिद: हाँ भाभी जी।
रहीम: राशिद भाई, फिर मुझे भी बुला लेना। दोनों मिलकर फिर मारेंगे भाभी की।
दीदी: अब आप भी शुरू हो गए।
रहीम: राशिद भाई जान, भाभी को एक साथ चोदेंगे। एक चूत में, एक गाँड में।
राशिद: हाँ भाई।
दीदी: अच्छा जी, और मैं आपको करने दूँगी?
राशिद: मतलब आप मेरा लेने के लिए रेडी हैं?
दीदी: मैंने ऐसा तो नहीं बोला।
रहीम: भाई जान, भाभी के बारे में सोचकर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया।
दीदी: अरे रहीम जी, सो जाइए जाकर।
रहीम: भाभी जी, अब इसको शांत किए बिना नींद नहीं आएगी।
राशिद: तो करवा ले भाभी से शांत।
और सब हँसने लगे।
रहीम: हाँ भाभी जी, आपने खड़ा किया है तो आप ही बैठाएँगी।
दीदी: अरे मैंने क्या किया?
रहीम: भाभी जी, अब आप ही शांत करो इसे।
दीदी (नॉटी स्माइल के साथ): मैं क्यों करूँ?
रहीम: अपनी एक सेक्सी-सी फोटो भेज दीजिए भाभी जी। मैं हिलाकर सो जाऊँगा।
राशिद: हाँ भाभी जी।
दीदी: नहीं जी, मैं नहीं भेज रही।
रहीम: भेजना पड़ेगा आपको।
दीदी: आप लोग पीछे पड़ गए हैं। ठीक है, भेजती हूँ एक।
उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी।
रहीम: अरे भाभी, बवाल लग रही हो।
राशिद: क्या माल हो भाभी जी। अब तो आपको पक्का उठाकर ले जाऊँगा।
दीदी: चलिए जाइए सो जाइए। मैं भी सोने जा रही हूँ। गुड नाइट।
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उसके बाद दीदी भी फोन रखकर सो गईं। और मैं भी। उसके बाद मैं सुबह आठ बजे सोकर उठा। और मैं जब हॉल में गया तो दीदी उठ चुकी थीं और नाश्ता बना रही थीं। दीदी रोज की तरह आज भी बड़ी सेक्सी लग रही थीं। मुझे दीदी को देखकर अब रहा नहीं जा रहा था। मैं अब परवेज से जलने लगा था कि कैसे परवेज को इतनी सेक्सी माल मिल गई। काश दीदी मेरी होती तो कितना मजा आता।
दीदी को देखकर मेरे मन में यही सब चल रहा था और मेरे से कंट्रोल भी नहीं हो रहा था। मेरा लंड पूरी तरह से पजामे में खड़ा हो गया था। दीदी ने आज नेट वाली साड़ी पहनी थी। और दीदी नाश्ता बना रही थीं। दीदी की बैक मेरी तरफ थी। दीदी की गाँड एक नंबर की लग रही थी। आह्ह, मेरा लंड भी दीदी की गाँड को देखकर झटके मारने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर पता नहीं मुझे क्या हुआ उस समय। मेरे दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया था। मुझे तो बस दीदी की गाँड ही दिख रही थी। ब्लैक साड़ी में मोटे-मोटे तरबूज जैसे गाँड। और मैं दीदी की गाँड देखते-देखते दीदी के पास जाने लगा और एकदम से पीछे से दीदी को हग कर दिया। जिससे मेरा लंड दीदी की गाँड की दरार में घुस गया। और दीदी एकदम से शॉक हो गईं।
दीदी: क्या कर रहा है प्रथम?
मैं तो दीदी के गाँड के नशे में पागल ही हो गया था। मुझे तो कुछ नहीं पता था मैं क्या कर रहा हूँ क्या नहीं। जब दिमाग पर हवस चढ़ जाती है तो दिमाग काम करना बंद हो जाता है। और मेरा इस समय वही हाल हुआ था। दीदी वापस से मुझे बोलीं—
दीदी: सुनाई नहीं दे रहा क्या तुझे प्रथम… प्रथम…
मैं जैसे होश में आया।
मै: हाँ दीदी, क्या हुआ?
दीदी: क्या कर रहा है तू?
मुझे रियलाइज हुआ कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं दीदी को पीछे की साइड से हग किया था जिससे किसी को भी उल्टा लगेगा। और ऊपर से मेरा लंड भी पूरा खड़ा था। मैं दीदी से अलग हुआ।
मै: दीदी कुछ तो नहीं कर रहा। वो मैं तो आपको गुड मॉर्निंग बोलने आया हूँ।
(बात को टालते हुए)
दीदी: अच्छा, आज से पहले तो मुझको गुड मॉर्निंग नहीं किया।
मै (हँसते हुए): अरे दीदी…
दीदी: चल छोड़। जा नहा ले जाकर।
मैं मन में – सही है, दीदी ने कुछ और नहीं पूछा।
मै: ठीक है दीदी।
उसके बाद मैं नहाने चला गया। और फिर साढ़े आठ बजे मैं और दीदी साथ में नाश्ता करने लगे।
मै: दीदी आज क्या करोगी?
दीदी: क्यों, क्या हुआ?
मै: कुछ नहीं, बस ऐसे ही।
दीदी (शरमाते हुए): कुछ नहीं। आज परवेज जी के साथ जा रही हूँ मार्केट कपड़े लेने के लिए।
मै: कपड़े लेने… लेकिन क्यों दीदी?
दीदी (शरमाते हुए): अरे तू भूल गया क्या? हम निकाह करने वाले हैं। उसके लिए कपड़े लेने जा रहे हैं।
मै: अच्छा दीदी।
दीदी को शरम आ रही थी मेरे इस बारे में बात करते हुए। उसके बाद हम नाश्ता करके अपने-अपने रूम में चले गए। और दस बजे के करीब परवेज का दीदी के पास कॉल आया।
परवेज: क्या कर रही हो मेरी बेगम जान?
दीदी: कुछ नहीं परवेज जी। बस आपको याद कर रही थी।
परवेज: अच्छा, मेरी बेगम को मेरी याद आ रही है।
दीदी नॉटी स्माइल कर दीं।
परवेज: बस एक दिन और बेगम साहिबा। उसके बाद तो तुम मेरी हो। उसके बाद तो हम तो साथ में ही रहने वाले हैं।
परवेज: अच्छा बताओ कब चलें मार्केट?
दीदी: आप जब बोलें तभी चल लेंगे।
परवेज: ठीक है बेगम साहिबा। ग्यारह बजे चलते हैं। रेडी हो जाना। मैं आ रहा हूँगा तुमको लेने।
दीदी: ना बाबा ना। मत आना। कोई देख लेगा तो गलत सोचने लगेगा। मैं आपको आपके घर के पास आ जाऊँगी।
परवेज: ठीक है बेगम साहिबा।
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दीदी भी अजीब ही हैं। खुद परवेज के दोस्तों के सामने मजे करती हैं, उनका लंड चूसती हैं, उनके सामने नंगी होकर परवेज के साथ मजे करती हैं। और फिर बाकी लोगों के सामने शरीफ बनती हैं। परवेज से बात करने के बाद दीदी रेडी होने के लिए चली गईं।
और रोज की तरह आज भी दीदी एकदम देसी रंडी की तरह लग रही थीं। अगर दीदी किसी कोठे की रंडी होतीं तो सारे मर्द पागल हो जाते दीदी के लिए। क्योंकि दीदी हैं ही इतनी सेक्सी माल। किसी के भी लंड में आग लगा देती हैं। मेरी रंडी दीदी। रेडी होने के बाद दीदी मेरे पास आईं और बोलीं—
दीदी: प्रथम, मैं परवेज जी के साथ शादी के लिए शॉपिंग करने जा रही हूँ।
मै: दीदी बड़ी खुश लग रही हो शादी के लिए।
दीदी: चल हट पागल। घर का ध्यान रखियो ठीक है।
मै: दीदी मैं भी चलूँ क्या आपके साथ?
दीदी: तू क्या करेगा हमारे साथ? कभी और चलियो तू।
मै: ठीक है दीदी।
दीदी फिर घर से निकल गईं परवेज के घर के पास। और मैं कहाँ घर में बैठने वाला था। मुझे भी देखना था कि दीदी और परवेज क्या शॉपिंग करते हैं जो दीदी मुझे लेकर नहीं जा रहीं। तो मैं भी जल्दी से डोर लॉक करके दीदी के पीछे निकल गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी रोड पर अपनी मोटी-मोटी बड़ी-बड़ी तरबूज हिलाते हुए जा रही थीं। वाह! क्या ही गाँड लग रही थी दीदी की… रोड पर आने-जाने वाले लोग भी दीदी को गंदी-गंदी नजर से घूर रहे थे जैसे कि अभी ही रोड पर ही नंगा करके चोद देंगे। कुछ लोग तो आपस में ही दीदी के ऊपर गंदी-गंदी बातें कर रहे थे।
कोई: क्या माल है भाई।
दूसरा: हाँ यार, सही बोल रहा है।
पहला: देख तो साली कैसे गाँड हिला रही है।
दूसरा: हाँ भाई, लगता है रंडी रोज अपनी गाँड मरवाती होगी।
फिर दोनों हँसने लगे। यह सब बातें सुनकर मेरा लंड और भी ज्यादा पैंट में झटके देने लगा। फिर दीदी परवेज की दुकान के पास पहुँचीं। उधर भोसड़ी का बूढ़ा पहले से ही दीदी का वेट कर रहा था। गंदी की धोती और कुर्ते में। और दीदी को देख-देखकर हँस जा रहा था। फिर दीदी उसके पास पहुँच गईं।
परवेज: अरे बेगम, क्या लग रही हो…
बेगम अब कंट्रोल नहीं हो रहा। निकाह कर मन कर रहा है अभी तुम्हें झोपड़ी में ले जाकर तुम्हारी गाँड मार लूँ…
दीदी: कैसी बात कर रहे हो परवेज जी? आप भी बाकी लोगों की तरह बातें कर रहे हो।
परवेज: बेगम नाराज क्यों हो रही हो?
दीदी: मत बोलिए मुझसे।
परवेज: अरे बेगम, मैं तो मजाक कर रहा था।
और हँसने लगा।
दीदी: ऐसे कोई मजाक करता है?
परवेज: अच्छा सॉरी। बस अब चलें।
दीदी: नहीं रहने दीजिए आप तो।
परवेज: सॉरी बेगम साहिबा। अब नहीं करूँगा ऐसा मजाक।
दीदी: अच्छा ठीक है।
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उसके बाद परवेज एक ऑटो रोकता है और दोनों मार्केट चले जाते हैं शॉपिंग करने के लिए। मैं भी ऑटो ढूँढ़ने लगा उनके पीछे जाने के लिए। लेकिन कोई ऑटो ही नहीं आ रहा था। पंद्रह मिनट के बाद एक ऑटो आया तो मैं मार्केट गया और उन लोगों को ढूँढ़ने लगा। लेकिन इतने बड़े मार्केट में उनको ढूँढ़ना कोई आम बात तो नहीं थी।
मैं उन लोगों को हर दुकान में ढूँढ़ने लगा। करीब तीस मिनट बाद मुझे वो दिखे। वो शायद किसी और दुकान में जा रहे थे। जब मुझे वो दिखे फिर मैं उनके पीछे-पीछे जाने लगा। दीदी और परवेज के हाथ में शॉपिंग बैग थे। परवेज दीदी की कमर में हाथ डालकर चल रहा था और दीदी उसको कुछ नहीं बोल रही थीं। जैसे दीदी को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था कि कोई उनको देखे या न देखे।
परवेज और दीदी अंडरगारमेंट्स की शॉप पर गए और मैं भी उनके पीछे-पीछे जाने लगा। शॉप में ज्यादा लोग नहीं थे। बस एक-दो आंटी थीं और एक ही सेल्सगर्ल थी। दीदी और परवेज अंदर गए और मैं भी चुपके से अंदर गया और उनको देखने लगा।
सेल्सगर्ल: मैम, आपको क्या चाहिए?
परवेज: बेगम बताओ क्या चाहिए।
दीदी को शरम आ रही थी परवेज के सामने ब्रा-पैंटी खरीदने में।
दीदी: वो… जरा अंडरगारमेंट्स चाहिए।
सेल्सगर्ल: ओके मैम।
फिर सेल्सगर्ल दीदी को अलग-अलग ब्रा-पैंटी दिखाने लगी जो कि दीदी और परवेज देख रहे थे। परवेज का एक हाथ अभी भी दीदी की कमर पर ही था और वो मादरचोद दीदी की कमर को मसल रहा था और धीरे-धीरे अपना हाथ दीदी की गाँड के पास लेकर जा रहा था। दीदी सारी ब्रा और पैंटी देखने लगीं लेकिन दीदी को कोई पसंद नहीं आ रहा था।
दीदी: आपके पास कोई और डिजाइन में नहीं है क्या?
सेल्सगर्ल: येस मैम। और डिजाइन के भी कुछ अंडरगारमेंट्स के न्यू कलेक्शन भी आए हैं। आप मेरे साथ आइए।
सेल्सगर्ल दीदी और परवेज को अपने साथ बेसमेंट वाले फ्लोर पर लेकर गई। उधर उस समय कोई भी नहीं था। नीचे वाले फ्लोर पर बहुत सारे ब्रा और पैंटी के कलेक्शन दीवार पर लगे हुए थे। वैसे तो मैंने भी कभी नहीं देखा था।
सेल्सगर्ल: मैम ये देखिए। ये सारे न्यू आए हैं।
और वो दीदी को नेट वाली डिजाइन्स वाले ब्रा और पैंटी दिखाने लगीं। दीदी फिर सारी देखने लगीं। और परवेज भी ब्रा और पैंटी देखने लगा और साथ में दीदी की गाँड पर हाथ रगड़ना स्टार्ट कर दिया। वो शायद ब्रा-पैंटी में दीदी को इमेजिन करके अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाया होगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और कोई कैसे भी कंट्रोल कैसे कर पाएगा अगर दीदी को वैसे देख लेगा तो उसका अपने आप ही पानी निकल जाए। ऐसी हैं दीदी। दीदी जब अंडरगारमेंट्स देख ही रही थीं तो ऊपर वाले फ्लोर पर कुछ लोग आ गए जिसकी वजह से सेल्सगर्ल ऊपर जाने लगीं।
सेल्सगर्ल: मैम आप देखिए और आप ट्राई भी कर सकती हैं। उधर ट्रायल रूम है।
फिर सेल्सगर्ल ऊपर चली गईं। उसके बाद परवेज बोला—
परवेज: बेगम तुम तो इसमें कमाल की लगोगी। तुम तो पागल कर दोगी मुझको।
दीदी: आप भी ना परवेज जी।
उसके बाद परवेज की एक पैंटी-ब्रा पर नजर गई जो कि ब्लैक गिरल की थी और नेट वाली थी जिसमें अंदर का सारा चीज दिख जाए वैसी ब्रा-पैंटी थी।
परवेज: बेगम वो देखो कितनी अच्छी है वो वाली।
दीदी: कौन सी परवेज जी?
परवेज: अरे वो देखो।
दीदी: अच्छा वो।
फिर दीदी ने वो वाली अंडरगारमेंट्स देखा। दीदी ने जब वो देखा था वो ऐसा था जिससे अंदर का सब कुछ दिखे।
दीदी: आप भी ना परवेज जी। आपको खाली ऐसी ही पसंद आती है।
परवेज (हँसने लगा): बेगम देखो तो कितने बढ़िया हैं। तुम तो इसमें एक नंबर की माल लगोगी।
दीदी रंडी की तरह शरमाने लगीं।
परवेज: बेगम ये वाली जरूर लेना।
दीदी: अच्छा ठीक है परवेज जी।
परवेज: बेगम जरा ट्राई करके तो आओ। मुझे देखा है तुम पर कैसे लगती है ये।
दीदी: हाँ मुझे पता है आप ट्राई करने के लिए क्यों बोल रहे हो।
परवेज (हँसते हुए): क्यों बेगम?
दीदी परवेज की पैंट के ऊपर इशारे करते हुए बोलीं—
दीदी: ऐसे देखो।
परवेज का लंड पैंट में पूरा खड़ा था। उसका कोबरा पैंट से निकलने के लिए तड़प रहा था।
परवेज (अपनी पैंट की तरफ देखते हुए हँसने लगा): अरे बेगम… ये सब तुम्हारे लिए ही हो रहा है।
दीदी: परवेज जी, मैं आपको इधर कुछ भी नहीं करने दूँगी। ठीक है ना?
परवेज (हँसते हुए): ठीक है बेगम। जाओ ट्राई तो करो।
दीदी: ठीक है।
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दीदी अंदर आईं और दीदी ने अपना ब्लाउज उतारा और फिर ब्रा। उसके बाद दीदी ब्रा पहनने लगीं। दीदी के चूचों का साइज थोड़ा बड़ा हो गया था जिससे ब्रा के हुक नहीं लग रहे थे। दीदी ट्राई कर रही थीं लेकिन नहीं हो रहा था। फिर दीदी को लगा अब परवेज जी को बुलाना ही पड़ेगा।
दीदी: परवेज जी, थोड़ा इधर आना।
परवेज: क्या हुआ बेगम?
दीदी: वो… आपकी थोड़ी हेल्प चाहिए।
परवेज: ओके बेगम।
परवेज दीदी के पास गया। दीदी ने गेट ओपन किया और फिर परवेज दीदी को घूरने लगा। क्योंकि दीदी ब्रा में एकदम कयामत लग रही थीं। दीदी के निप्पल्स साफ-साफ दिख रहे थे।
परवेज: क्या हुआ बेगम?
दीदी (नॉटी आवाज में): वो हुक नहीं लग रहा।
परवेज जैसे ऐसी ही का वेट कर रहा था।
परवेज (हवस भरी हंसी के साथ): अच्छा बेगम, अभी लगा देता हूँ।
उसके बाद दीदी अपनी पीठ परवेज की तरफ करके खड़ी हो गईं। परवेज दीदी की पूरी नंगी पीठ और कमर देखने लगा। वो अपनी जीभ होंठ पर फेरने लगा। उसके बाद परवेज अपना हाथ दीदी की पीठ पर लेकर गया और दो-तीन बार अपना हाथ दीदी की पीठ पर फेरा और दीदी की पीठ पर एक किस कर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: क्या कर रहे हो आप?
परवेज: कुछ नहीं बेगम। वो थोड़ा बाहर गया था।
दीदी: मैंने आपको बोला है कि मैं आपको इधर कुछ भी नहीं करने दूँगी।
परवेज: ठीक है जान।
उसके बाद परवेज ब्रा को पकड़कर दीदी की ब्रा के हुक लगाने की कोशिश करने लगा लेकिन ब्रा के हुक लग ही नहीं रहे थे।
परवेज (हँसते हुए): बेगम, तुम्हारे चूचों के साइज बढ़ गए हैं तभी नहीं लग रहे हैं।
दीदी: आपकी वजह से ही हुए हैं।
परवेज हँसने लगा।
दीदी: आप भी हर जगह मेरे बूब्स बढ़ाते रहते हो। देखो आपकी वजह से कितने बड़े हो गए हैं।
और दीदी रंडी जैसे हँसने लगीं। और परवेज भी हँसने लगा।
परवेज: मेरे पास एक आइडिया है। उससे हुक लग जाएँगे।
दीदी: क्या?
परवेज: रुको।
परवेज दीदी के बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ा और दबाने लगा।
दीदी (रंडी जैसे हँसते हुए): परवेज जी, मुझे पता था आपकी पास ऐसा ही आइडिया होगा। छोड़ो मुझे।
परवेज: रुको बेगम। अभी ढीला करता हूँ इनको। तभी ये ब्रा में फिट आएँगे।
और उसके बाद परवेज दीदी से पूरी तरह से चिपक गया। परवेज का लंड जो कि पूरी तरह से खड़ा था वो दीदी की गाँड में चुभने लगा। और दीदी के बूब्स को दबाने लगा। दीदी को जैसे ही अपने पीछे चुभने लगा तो दीदी बोलीं—
दीदी: परवेज जी, आपका कोबरा मेरे पीछे दस्तक दे रहा है।
दीदी ये बात एकदम रंडी जैसे बोलीं।
परवेज (खुश होकर): तो बेगम उसको गुफा में जाने दो ना।
दीदी: कैसे जाने दूँ? वो किसी और ही गुफा में जाना चाहता है।
परवेज: तो क्या हुआ? जाने दो।
दीदी: नहीं परवेज जी। आपका कोबरा मेरे गुफा में नहीं जा पाएगा।
परवेज: एक बार जाने तो दो उसको।
परवेज और दीदी की बातों से दीदी गरम हो रही थीं। साथ में परवेज भी दीदी के चूचों को दबा रहा था जिससे दीदी और भी ज्यादा गरम हो गई थीं। परवेज ने एक हाथ से दीदी की कमर को पकड़ा और एक हाथ से दीदी के बूब्स को। और दीदी की गाँड में तीन-चार झटके मारे।
दीदी: आह्ह परवेज जी, आप तो मेरी जान निकलने में लगे हुए हो।
परवेज: अभी कुछ करा भी क्या है?
और फिर वो दीदी के बूब्स को मसलने लगा और साथ में दीदी की गर्दन पर किस करने लगा और दीदी की गाँड में लंड रगड़ने लगा। और पाँच मिनट तक वही किया। उसके बाद उसने दीदी को अपनी साइड घुमाया और दीदी के शरीर से ब्रा को अलग किया और दीदी के बूब्स को दोनों हाथों से दबाने लगा।
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दीदी: आह्ह परवेज जी, मैंने मना किया था आपको कि मैं कुछ नहीं करने दूँगी। लेकिन आप फिर भी…
परवेज: बेगम तूने मना तो किया था लेकिन तुझे देखकर मेरा लंड पागल हो गया था तो क्या करूँ?
दीदी: आह्ह मम्मी… ये कोई जगह है ये सब करने की…
परवेज: लेकिन बेगम तुम्हारा हाथ कहाँ पर है? तुमको भी तो मजा आ रहा है।
दीदी: क्या? मेरा हाथ कहाँ पर है?
परवेज: नीचे देखो।
दीदी ने जब नीचे देखा तो दीदी का हाथ परवेज के लंड पर था पैंट के ऊपर से। और दीदी उसको मसल रही थीं। दीदी इतनी गरम हो गई थीं कि दीदी को पता भी नहीं था कि दीदी क्या कर रही हैं। दीदी नीचे देखकर शरमाने लगीं। जिसे देखकर परवेज हँसने लगा।
परवेज: बेगम अब रोको मत और मजे करने दो।
और फिर वो दीदी के लिप्स पर अपने काले फटे हुए गंदे से लिप्स रखकर दीदी के प्यारे मुलायम गुलाबी रसीले होंठों को चूसने लगा। और दीदी भी उसका पूरा साथ देने लगीं। दीदी का एक हाथ परवेज की गर्दन पर था और दूसरा परवेज की पैंट के ऊपर। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी को भी अब बहुत मजा आ रहा था। किसी रंडी जैसे चोरी-छुपे ये सब करने में दीदी को एक थ्रिल आ रहा था। परवेज और दीदी एक-दूसरे के मुँह में अपना-अपना थूक पास करने लगे। परवेज अपना थूक दीदी के मुँह में डालने लगा। दीदी उसको पी जातीं।
फिर दीदी परवेज के मुँह में अपना रस भरा नशीला थूक परवेज के मुँह में डालने लगीं जिसे परवेज पूरा पी जाता। दोनों दस मिनट तक ऐसे ही कर रहे थे। उसके बाद परवेज दीदी के मुँह से अपना मुँह अलग किया और दीदी के बूब्स को मुँह में लेकर चूसने लगा और एक हाथ से दीदी के बूब्स को अच्छे से मसलने लगा।
दीदी: आह्ह परवेज जी आम्म…
परवेज: बेगम ऊपर से क्या मसल रही हो अपने आशिक को? आजाद करो।
दीदी: आह्ह परवेज जी, मेरा आशिक तो पैंट में ही इतने झटके दे रहा है। अगर इसे आजाद कर दिया तो फिर ये क्या करेगा?
परवेज: मेरी जान, वो तो उसको आजाद करके ही पता चलेगा।
फिर दीदी किसी रंडी की तरह परवेज के पैरों में बैठ गईं और पैंट के ऊपर से परवेज के लंड पर एक किस दिया। जिसे देखकर परवेज मुस्कुरा दिया और बोला—
परवेज: बेगम तुम तो दिन पर दिन बहुत ही सेक्सी होती जा रही हो।
जिसे दीदी रंडी की तरह शरमाने लगीं। उसके बाद दीदी ने परवेज की पैंट को खोलने लगीं और पैंट को खोल दिया। और पैंट परवेज के पैरों में गिर गई। उसके बाद दीदी अंडरवियर को नीचे करने लगीं। जैसे ही दीदी ने परवेज के अंडरवियर को नीचे किया परवेज का कोबरा दीदी के मुँह पर जा लगा। जिसे दीदी देखकर हँसने लगीं।
परवेज: देखा धृति मेरी जान, कैसे ये तुम्हारे लिए पागल है। कैसे तुम्हारे लिए ये खड़ा हुआ है।
दीदी: उसको देखकर अपने होंठों पर अपनी जीभ फेरने लगीं और उसके बाद बोलीं— देखिए परवेज जी, कैसे देख रहा है मुझको ये। जैसे खा जाएगा मुझको।
और हँसने लगीं।
परवेज: धृति मेरी जान, इसको और मत तड़पाओ। अगर कोई आ गया तो इसका क्या होगा?
दीदी: आप भी परवेज जी।
परवेज: धृति डार्लिंग, जरा अपने मुँह का जादू तो दिखाओ अपने छोटे शौहर को।
दीदी: अच्छा जी, छोटे शौहर?
परवेज: हाँ मेरी जान।
दीदी: देखो मेरे छोटे शौहर मेरे लिए कितना तड़प रहे हैं। अभी इनकी तड़प दूर करती हूँ।
उसके बाद दीदी परवेज के लंड को दोनों हाथों से पकड़कर पहले थोड़ा हिलाती हैं और फिर उसके बाद दीदी परवेज के टोपे को हल्का-सा चाटती हैं। जिसे परवेज की आह्ह निकल जाती है।
परवेज: आह्ह बेगम आह्ह, मत तड़पाओ।
दीदी परवेज को देखकर हँसने लगती हैं और परवेज को तड़पाने के लिए फिर से परवेज के टोपे को मुँह में लेकर अपनी जीभ को टोपे पर गोल-गोल फेरने लगती हैं और फिर टोपे को बाहर निकाल देती हैं। जिससे परवेज की हालत खराब हो जाती है। जैसे ही उसको आराम मिलता है दीदी उसके लंड को बाहर निकाल देती हैं। ऐसा दीदी दो-तीन बार करती हैं और हँसने लगती हैं रंडी की तरह।
परवेज: आह्ह मेरी धृति डार्लिंग, तू कितना तड़पा रही है। मत तड़पा मेरी जान।
दीदी (हँसते हुए): परवेज जी, अपनी हालत तो देखिए कैसे मेरे छोटे शौहर मेरे लिए तड़प रहे हैं।
परवेज: बेगम तू इसको शांत कर रही है या मैं अपने आप करूँ?
दीदी (हँसते हुए): अच्छा बाबा, रुको करती हूँ।
फिर दीदी अपना जादू शुरू कर देती हैं। दीदी परवेज के लंड को ऊपर से नीचे तक पूरी जगह अपनी जीभ फेरने लगती हैं। दीदी के मुँह में परवेज के बदबूदार झाँट भी आ रहे थे लेकिन दीदी फिर भी परवेज का लंड चाट रही थीं। दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उल्टा दीदी को तो मजा आ रहा था।
दीदी परवेज के लंड को मुँह में लेना स्टार्ट कर दिया। दीदी जितना हो सकता उतना मुँह में लेने की कोशिश कर रही थीं। और परवेज लंड चुसाई के कारण आवाजें निकालने लगा। दीदी परवेज का लंड दस मिनट तक चूसती रहीं। और मैं ये सब छुपकर देख रहा था। तभी मुझे ऊपर से नीचे आने की किसी की आवाज आई। वो कोई और नहीं सेल्सगर्ल थी। वो नीचे आईं और दीदी को परवेज को ढूँढ़ने लगीं।
सेल्सगर्ल: अरे वो दोनों कहाँ चले गए? थोड़ी देर पहले तो यहीं थे।
तभी परवेज की आह्ह की आवाज सेल्सगर्ल को सुनाई देने लगी।
सेल्सगर्ल: ये आवाज तो उन अंकल की है लेकिन…
तब सेल्सगर्ल चेंजिंग रूम के पास जाने लगीं और वो देखकर शॉक हो गईं कि इतना बड़ा लंड जिसे आज तक सेल्सगर्ल ने नहीं देखा था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि किसी का इतना बड़ा भी हो सकता है। और कैसे दीदी परवेज का लंड चूस रही थीं।
वो भी खुल्लम-खुल्ला। और परवेज पूरा मजा ले रहा था। दीदी परवेज का लंड पूरा मुँह में ले रही थीं और बड़े मजे से चूस रही थीं जैसे दीदी लंड खा ही जाएँगी। दीदी को लंड चूसते-चूसते पंद्रह मिनट हो गए थे। और सेल्सगर्ल को जैसे ही रियलाइज हुआ कि ये रियल है वो बोलीं—
सेल्सगर्ल: आप दोनों यहाँ क्या कर रहे हैं?
जैसे ही सेल्सगर्ल की आवाज आई परवेज का पानी दीदी के मुँह में और दीदी के फेस पर गिर गया। और परवेज जैसे ही सेल्सगर्ल की तरफ मुड़ा तो उसके माल की एक धार सेल्सगर्ल के ड्रेस पर जा गिरी। दीदी के मुँह में, मुँह पर और शरीर पर परवेज का सफेद गाढ़ा माल लगा हुआ था।
और दीदी भी सेल्सगर्ल की तरफ मुड़ीं तो दीदी भी शॉक हो गई थीं। दीदी जल्दी से मुँह का सारा माल पी गईं और अपनी साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे का माल साफ करने लगीं और जल्दी से ब्लाउज और ब्रा पहनने लगीं। सेल्सगर्ल दीदी और परवेज की हरकत पर बौखलाती हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सेल्सगर्ल: आप लोग क्या कर रहे हैं ये सब? ये कोई जगह है ये सब करने की?
जिसे सुनकर परवेज बोला—
परवेज: क्या हो गया? मैं अपनी बेगम के साथ कुछ भी करूँ तुम्हें क्या?
परवेज का लंड अभी भी बाहर ही था। जिस पर सेल्सगर्ल की नजर उसी पर ही थी। और फिर बोलीं—
सेल्सगर्ल: आपको यहीं सब करना था?
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और परवेज के लंड को देखने लगीं। जिसे देखते हुए दीदी ने देख लिया। सेल्सगर्ल परवेज के लंड को देखकर अपने होंठों पर जीभ फेर रही थीं। दीदी को ये देखकर जलन होने लगी कि कोई दूसरी औरत उसके शौहर के लंड पर नजर डाल रही है। दीदी उसी वक्त परवेज के लंड को पकड़कर पैंट के अंदर करने लगीं और परवेज से बोलीं—
दीदी: आपको बड़ा मजा आ रहा है इसको दूसरों को दिखाकर।
परवेज: नहीं बेगम, मैं भूल गया था। अभी ठीक करता हूँ।
परवेज ने पैंट बंद की और दोनों चेंजिंग रूम से बाहर आए।
सेल्सगर्ल: मैम, आपको शरम नहीं आई खुले में ये करते हुए?
दीदी: तुम्हें शरम नहीं आई मेरे शौहर के लंड को देखते हुए हाँ?
परवेज: छोड़ो बेगम, जाने दो।
दीदी: आप चुप रहिए।
सेल्सगर्ल: मैम ठीक से बात कीजिए।
दीदी: तू ठीक से बात कर।
सेल्सगर्ल: कैसी बदचलन औरत है। पब्लिक प्लेसेस में ये सब करती है।
दीदी: मैं अपने शौहर के साथ कहीं भी कुछ भी करूँ तुम्हें क्या?
सेल्सगर्ल: मैम आप कुछ भी करो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन हमारी शॉप में मत करो।
ऐसे ही उनकी बातें हो रही थीं कि परवेज दीदी को समझाकर शॉप से बाहर लेकर गया और वो दूसरे शॉप में चले गए अंडरगारमेंट्स के लिए। और थोड़ी-बहुत और शॉपिंग करके वो लोग घर चले गए। जिसे देखकर मैं भी घर चला गया।
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