Chudai Ka Param Sukh
एक दिन मैं सामने सविता भाभी के घर सोया क्योंकि भैया नहीं थे। मॉम बोली जाकर सो जा वहाँ पर। मैं खाना खाकर भाभी के घर चला गया। भाभी की तबीयत शायद ठीक नहीं थी। वो बोली मुझे नींद आ रही है देवर, मैं सोने जा रही हूँ। वैसे सविता भाभी हैं बहुत सुंदर और सेक्सी। Chudai Ka Param Sukh
फिर मैं अपने कमरे में चला गया और भाभी अपने कमरे में चली गई। मैं खिड़की के उसी सुराख से आँख सटा कर भाभी के कमरे में झाँकने लगा। उसने दरवाजा बंद किया और कपड़े बदलने लगी। उसने अपनी साड़ी खोल दी। पेटीकोट और ब्लाउज में वो काफी सुंदर और सेक्सी लग रही थी।
फिर उसने ब्लाउज का हुक खोलना शुरू किया और ब्लाउज निकाल कर सोफे पर फेंकते हुए नाइट गाउन अपने बदन पर डाल लिया। ब्रा में कसी उसकी चुंचियों को मैं कुछ ही देर के लिए देख पाया लेकिन उसका सीधा असर मेरे लंड पर पड़ा। मेरा लंड बिलकुल तन गया। भाभी अपने रूम की लाइट ऑफ करके सो गई और मैं भी लाइट ऑफ कर के भाभी के बारे में ही सोचता हुआ सो गया। रात को एकाएक भाभी के कराहने की आवाज से मेरी नींद खुल गई।
मैंने पूछा, “क्या हुआ भाभी, तबीयत तो ठीक है ना।”
“मेरे सिर में काफी दर्द है,” भाभी कराहते हुए लगभग रोती हुई आवाज में बोली।
“जरा दरवाजा तो खोलो देखूँ क्या हुआ।”
भाभी ने दरवाजा खोल दिया। उसके माथे को मैंने छू कर देखा जो हल्का हल्का गरम लगा। “अरे भाभी तुम्हें तो बुखार है, ठहरो मैं कोई दवा लेकर आता हूँ।”
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“अब रात को दवा कहाँ मिलेगी, जाओ सो जाओ।”
“मैंने कहा था ना भैया के लिए इतना बेचैन ना रहो। देखो ये सब टेंशन की वजह से हुआ है।”
मैं ड्रेसिंग टेबल के ड्रावर से तेल की बोतल निकाल लाया और अपने हाथों में तेल लेकर भाभी के सिर में मालिश करने लगा। वो रोकती और मना करती जा रही थी लेकिन जब मैं नहीं माना तो चुपचाप तकिये पर सिर रख कर सो गई।
मैं उसके बालों में उँगली डाल कर मालिश करने लगा। भाभी के बालों में उँगली करने की वजह से मेरे बदन में एक अजीब किस्म की सनसनी फैलने लगी। मेरा लंड पजामे के भीतर खड़ा होने लगा। मैं उनके सिर की मालिश करता रहा जिससे भाभी को कुछ राहत मिलने लगी।
“और भी कोई तकलीफ हो तो कहो मैं ठीक कर दूँ,” मैंने अपनी आँख मारते हुए भाभी से पूछा।
“तुम फिर मजाक पर उतर आए,” भाभी ने हल्के हँसते हुए मुँह बिगाड़ कर कहा।
“नहीं भाभी। भैया ने तुम्हारा हर तरह से खयाल रखने को कहा है। सो तो मुझे करना ही होगा। बोलो और कहाँ दर्द है,” मैंने अपने अंदाज में कहना जारी रखा।
भाभी ने संकोच करते हुए कहा, “दर्द तो पूरे बदन में है लेकिन तुम कहाँ-कहाँ मालिश करोगे। जाओ अब सो जाओ।”
“नहीं भाभी, आओ मैं तुम्हारे बदन की मालिश कर देता हूँ।”
भाभी ने इस पर बनावटी गुस्से में कहा, “भगते हो कि नहीं। शरारती कहीं के।”
“अरे भाभी मैं कोई गड़बड़ नहीं करूँगा। मैं आँखें बंद कर लेता हूँ और तुम्हें शर्म आ रही हो तो लाइट ऑफ कर लो,” कहते हुए मैंने ही लाइट ऑफ कर दी और भाभी के गाउन के अंदर हाथ डाल कर मालिश करने लगा।
“भाभी गाउन में तेल लग जाएगा इसे निकाल दो। अंधेरे में मुझे कुछ दिख थोड़े ही जाएगा,” मैं अंधेरे में अब्हास देते भाभी के चेहरे की तरफ देखते हुए बोला।
“तुम बड़े बेशर्म हो। जाओ मैं तुम से मालिश नहीं करवाती।”
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मुझे मालूम था ये सब बनावटी नखरे हैं। इसलिए मैंने अपने हाथ नहीं हटाए। मेरे हाथ गाउन के भीतर भाभी की टांगों की मालिश कर रहे थे। पता नहीं भाभी को कैसा लग रहा था लेकिन भाभी के बदन की गर्मी से मेरा तो पूरा बदन जल रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरे हाथ धीरे-धीरे भाभी की जाँघों की तरफ बढ़ते गए। अब उसका गाउन भी कमर तक उठ गया था। मैं उसकी गोरी जाँघों को देख तो नहीं सकता था लेकिन उसकी चिकनाई को महसूस कर कर के मेरा लंड खूँटे की तरह खड़ा हो गया था।
अब मेरा लंड झटके खाने लगा। मेरा हाथ अब धीरे-धीरे भाभी की जाँघों के भीतरी भाग की तरफ बढ़ रहे थे। भाभी ने पैंटी नहीं पहन रखी थी, इसलिए मेरे हाथ सीधे भाभी की बुर पर चला गया। मैं भाभी की बुर को अपनी उँगलियों से सहलाने लगा।
“ये क्या कर रहे होओओओ…. छोड़ो भी तुम बड़ेड़ेड़ेड़े वोओओओ होओओओ…”
ये कहते हुए भाभी की जबान लड़खड़ा भी रही थी।
“अरे भाभी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। थोड़ा और कर लेने दो ना,” काँप तो मेरे हाथ भी रहे थे। मैं अब ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहता था।
“और क्या…. सीईईई… करना…. उफ्फ…. चाहते हो… ह्य्य्य….” भाभी कहती जा रही थी और सिसकारी भी लेती जा रही थी।
भाभी की सिसकारियों से मेरा हौसला बढ़ता गया। मैं अब अपनी उँगली से उसकी बुर को हल्के-हल्के मसाज दे रहा था। भाभी कसमसाते हुए मालिश भी करवा रही थी और ना-ना भी कर रही थी। अपनी जाँघों को जकड़ कर मेरे हाथ को दबा रही थी और अपने हाथों से मेरे हाथ को निकालने की कोशिश भी कर रही थी। जब बदन में आग लगी हो तो सब कुछ चाहिए लेकिन रिश्ते की शर्म ना भी करवा देती है।
फिर मुझसे रहा नहीं गया, “मैं तुम्हारी बुर को मसलना, चूमना, चाटना और चोदना चाहता हूँ। प्लीज लाइट ऑन करो ना। मैं तुम्हारे पूरे बदन को देखना चाहता हूँ।”
“ये गलत बात है। भाभी के साथ क्या ये सब किया जाता है,” भाभी बोली।
“भाभी कुछ गलत नहीं है ये।” हाँ भाभी। अभी तुम्हें मेरी जरूरत है और मुझे तुम्हारी। प्लीज एक बार कर लेने दो ना,” मैंने अपनी भूख जाहिर कर दी।
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ये सुनकर भाभी ने हाथ बढ़ा कर लाइट ऑन कर दी। उसका गाउन कमर तक उठा हुआ था सो लाइट ऑन होते ही मेरे आँखों के सामने भाभी की चिकनी बुर चमक पड़ी। उफ्फ। उभरी हुई बुर। गोरी-गोरी चमड़ी पर हल्की लाल कलर के लिप्स। कोमल। खूबसूरत। मेरे मुँह में पानी आने लगा।
लंड खड़ा था ही और अब बाहर आने के लिए झटके मारने लगा। मैंने थोड़ी देर तक सविता भाभी की बुर को अपनी उँगलियों से सहलाया फिर अपना मुँह उस पर रख कर भाभी की बुर को चूमने लगा। भाभी ने अपनी टाँगों को फैला दिया जिसे उसकी बुर दो फाँकों में बँट गई।
अब उसके बुर के अंदर का चना दिखने लगा। मैंने मेरी जीभ को बाहर निकाला और उसकी बुर के आस-पास के एरिया को चाटने लगा। भाभी के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी। अब मैंने अपनी जीभ को बुर के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया। बुर ने अपना जूस निकालना शुरू कर दिया।
गीली बुर को मेरी जीभ और गीली करने लगी। अपनी जीभ को बुर के अंदर धकेलना शुरू किया जिसका स्वागत भाभी ने अपने चूतड़ उठा कर किया। मेरी जीभ भाभी की बुर में धँसते चली गई। जीभ का नुकीला भाग बुर की हर दीवार को टटोल रहा था। बुर की गर्मी से मेरे चेहरा झुलसने लगा था।
भाभी अपनी टाँगों से मेरी बदन को अपने लपेटे में ले लिया। अपनी जाँघों से मेरे मुँह को दबा लिया। उसकी तड़फती हुई बुर मेरी जीभ की स्पीड के साथ चूतड़ उछाल कर दे रही थी। भाभी अपने हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबा रही थी। मैं अपनी जीभ से उसकी बुर को चोद रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरा चेहरा उसकी बुर के जूस से सराबोर हो चुका था। फिर मैंने अपने बदन के निचले हिस्से को भाभी की टाँगों से छुड़ाया और सरकते हुए अपनी टाँगों को भाभी के सिर की तरफ करना शुरू कर दिया। अब भाभी ने मेरी टाँगों को अपनी और खींचना शुरू कर दिया। मैं अपना चेहरा और जीभ भाभी की बुर से लगा रखा था और मेरी टाँगें उसके मम्मे से होते हुए उसके चेहरे के ऊपर से जाते हुए दीवार से जा लगी।
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भाभी ने अपने दाँतों से मेरे पजामा में छिपे लंड को पकड़ लिया। और अपने हाथों से पजामा की डोरी खींच दी। पजामा की डोरी को खोल उससे टाँगों से निकाल दिया और मेरा लंड अब भाभी के हाथ में उसके चेहरे के सामने था। मेरे लंड को भाभी ने हाथ से कड़क पकड़ कर रखा था। मेरा फौलादी लंड इससे और कड़क हो कर झटके खाने लगा।
हाय रब्बा मेरे प्यारे सेक्सी देवर इसकी ही मुझे तलाश थी। क्यों नहीं दिखाया कभी, पागल है कितनी बार घर आया है, तू बड़ा जालिम निकला रे। तेरा लंड बड़ा ही प्यारा है। आज इससे मैं जम कर चुदवाऊँगी। मजा आ जाएगा मेरी चूत को। खूब चोदना मेरी चूत को तुम आज,” भाभी मेरे लंड को हिलाते हुए बोली।
मैंने अपना मुँह भाभी की बुर से हटाते हुए बोला, “जब तक मैं तुम्हारी बुर को चूसता और चाट रहा हूँ भाभी तुम भी मेरे लंड को चूसो और चाटो,” मैंने खुली हवा में साँस लेते हुए कहा और फिर से बुर को चाटने लगा। भाभी ने मेरे लंड को गुप्प से अपने मुँह में डाल लिया। मुझे बड़ा सुकून मिला।
अब मैं अपनी जीभ से भाभी की बुर को चूस रहा था और भाभी मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। मेरा लंड मतवाला होकर भाभी के मुँह में मस्त हो रहा था। अब मैं अपने चूतड़ के हल्के हल्के झटके भाभी के मुँह में मारने लगा।
लंड को भाभी के मुँह में अंदर बाहर करने लगा। मुँह चुदाई और बुर चूसाई दोनों साथ-साथ हो रही थी। काफी देर तक ये हमारा 69 आसन चला। फिर मैंने अपनी जीभ हटा कर अपनी उँगली से भाभी की बुर को चोदना शुरू कर दिया।
“मैं पहले से ही काफी गर्म हो चुकी हूँ। अब और कितना तड़फाओगे। चलो अब सीधे अपना लंड मेरी चूत में पेल दो,” भाभी ने लंड को मुँह से निकाल कर कहा।
मैंने अपना लंड उसकी बुर पर रखकर एक जोरदार धक्का लगा दिया। मेरा लंड फिसलते हुए भाभी की बुर में करीब आधा घुस गया। मैंने धीरे से अपना लंड थोड़ा बाहर खींच के फिर से अंदर ठेल दिया, अब मेरा पूरा लंड भाभी की बुर में समा चुका था।
मैं दना-दन अपने लंड को भाभी की बुर में अंदर बाहर करने लगा। भाभी की बुर में मेरे लंड के धक्कों की स्पीड धीरे-धीरे बढ़ने लगी। जो ज्ञान मैंने सेक्स का और लड़कियों, भाभियों और आंटियों से पाया उसका पूरा उपयोग आज किसी की बुर में कर रहा था। जोश काफी था।
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लंड का तनाव सहा नहीं जा रहा था। धक्के पर धक्के मार रहा था। लगभग 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं भाभी के बुर में ही खलास हो गया। और भाभी की चूत की भी चूत पानी छूट गई। अरे ये तूने क्या किया जालिम। मुझे तुम्हारे लंड का रस पीना था।
“लेकिन मेरा लंड तो अब सिकुड़ गया है अब भला ये कैसे घुसेगा,” सविता भाभी अपनी सेक्सी आवाज में बोली मेरे प्यारे सेक्सी देवर।
“आओ मैं तैयार कर देती हूँ,” कहती हुई भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगी।
अब मेरा लंड भाभी के मुलायम हाथों की गर्मी से फिर से खड़ा होने लगा। मैंने भाभी के गाउन को खींच कर उनके बदन से निकाल दिया और उनकी ब्रा को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया। भाभी के मुलायम, ठोस और सुडौल चुंचियाँ अब मेरे सामने बिलकुल नंगी थी।
मैं उन्हें सहलाने और मसलने लगा। भाभी मेरे लंड पर अपनी जीभ फिराने लगी और उसे अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। मेरा लंड अब भाभी के मुँह में फूलने लगा था। थोड़ी देर में मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। भाभी फिर से चित हो कर लेट गई और मुझे अपने ऊपर खींच ली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसने मेरा लंड पकड़ कर अपने बुर पर रखते हुए बोली, “लो अब अपना लंड मेरी चूत में डाल कर फिर से चुदाई शुरू करो।”
“अच्छा भाभी”, कहते हुए मैं भाभी की बुर में फिर से अपना लंड पेलने लगा। दो ही धक्कों में मेरा लंड भाभी की बुर में पूरी तरह समा गया। अब मैं ऊपर से और भाभी नीचे से धक्के लगाने लगे। मैं भाभी के ऊपर झुके हुए उनकी चुंचियों को मसलते हुए उनकी बुर में अपना लंड पेले जा रहा था। कभी-कभी उनके बुर में लंड पेलते हुए मैं अपने मुँह में उनकी चुंची लेकर चूसता भी जा रहा था।
मेरे इस प्रयास में भाभी की बुर में पड़ते धक्कों की स्पीड थोड़ी कम हो जाती थी। इसलिए भाभी ने झुंझलाते हुए कहा, “चुंचियों से बाद में खेल लेना। अभी जोर जोर से धक्के मार के चूत की चुदाई करो।” मैं एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी चुंचियों को छोड़ कर तेज रफ्तार में बुर की चुदाई में जुट गया। अब भाभी की बुर में काफी तेज गति से मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था।
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मेरे हर धक्कों का जवाब में भाभी नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी और अपनी बुर को चुदवा रही थी। करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद भाभी की बुर ने पानी छोड़ दिया। उसके लगभग पाँच मिनट बाद तक मैं भाभी की बुर में धक्के मारता रहा। अब भाभी शिथिल पड़ी हुई थी और उसकी बुर भी अब ढीली लग रही थी। लेकिन मेरा लंड अब भी ताव में था इसलिए मैं पहले से भी ज्यादा स्पीड में धक्के मारता रहा। करीब पाँच मिनट बाद मेरा लंड भी पानी छोड़ने को तैयार हो गया तो मैंने कहा भाभी मेरा आ रहा है।
भाभी फौरन खड़ी हो गई और लंड मुँह में डालकर पागलों की तरह चूसने लगी और मेरे लंड का सारा रस पी गई और संतुष्ट हो गई। भैया 7 दिन बाद दिल्ली से आए तब तक मैं भाभी को बहुत बार चोद चुका था। हर बार की चुदाई निराली होती थी। भैया के आने के बाद जब भी हमें मौका मिलता हम चुदाई का आनंद लेने लगते। अब तो भाभी के सहयोग से मैं और भी कई औरतों के साथ चुदाई का अनोखा आनंद प्राप्त कर चुका हूँ। जो मैं अगली स्टोरी में बताऊँगा।