Bhabhi Riding Devar Dick XXX
ये कहानी किसी और की नहीं मेरी अपनी है। संध्या भाभी भी मेरी अपनी एक कजिन के साथ किये गये सेक्स की कहानी। लेकिन इससे पहले कि मैं अपनी कहानी शुरू करूँ मैं आपको उस लड़की का परिचय करा दूँ जिसके बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूँ। जैसा कि मेरे बारे में आप सभी को पता है कि मैं अभी हूँ मेरी उम्र 23 साल की है। Bhabhi Riding Devar Dick XXX
दूसरी तरफ मेरी कजिन जिनका नाम बेबी है मेरे से पाँच साल बड़ी है। संध्या भाभी वैसे तो शादीशुदा हैं लेकिन देखने पर कभी ऐसा नहीं लगता कि संध्या भाभी शादीशुदा हैं। संध्या भाभी काफी सुन्दर और स्मार्ट लड़की हैं। आज मैं जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ संध्या भाभी कहानी आज से 15 दिन पहले की है।
तब संध्या भाभी की नयी-नयी शादी हुई थी। संध्या भाभी को एक दिन किसी काम से दूसरे शहर जाना था। जीजाजी को उसी दिन अपने काम से कहीं और जाना था। सो संध्या भाभी को मेरे पास छोड़ के चले गये। हम लोगों ने अगले दिन शहर जाने का प्लान बनाया।
अगले दिन हम दोनों सुबह अपनी गाड़ी से उस शहर में पहुँचे। पूरे दिन संध्या भाभी ने अपने काम को खत्म किया जिसके चलते काफी लेट हो गया। संध्या भाभी ने बोला कि आज हम यहीं रुक जाते हैं। मैंने भी हामी भर दी। अपना काम खत्म करने के बाद हम लोगों ने होटल में चलने का प्लान किया.
तो संध्या भाभी ने एक नम्बर देकर मुझे किसी से बात करने के लिए बोला और पूछने के लिए बोला कि रूम बुक है या नहीं। मैंने उस आदमी से बात की तो संध्या भाभी बोली कि रूम बुक था। हम सीधे उस होटल पर आ गये। रात के 9 बजने वाले थे। मैं उनके साथ रूम में आ गया और बैठकर टीवी देख रहा था।
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रात के 10 बजे संध्या भाभी ने खाना मँगवाया। हम दोनों ने खाना खाया। खाना खाने के बाद मैं नीचे गाड़ी में सोने के लिए जाने लगा तो संध्या भाभी बोली, “अभी, तुम यहीं सोफे पर सो जाओ। मुझे अकेले में डर लगता है।” मैंने कहा कि मैं आपके रूम में कैसे सो सकता हूँ। संध्या भाभी बोली कि मैं कह रही हूँ ना।
मैं वहीं रुक गया। संध्या भाभी ने कहा कि तुम सोफे पर सो जाओ और खुद बेड पर सोने चली गयीं। मैं सोफे पर सो गया। रात के लगभग 12 बजे मौसम खराब हो गया। जोर-जोर से आँधी चलने लगी और बिजली भी कड़कने लगी। संध्या भाभी ने उठकर मुझे जगाया और बोली, “अभी, मुझे बहुत डर लग रहा है।”
मैंने कहा, “मैं तो यहीं हूँ। आप आराम से सो जाइये।”
संध्या भाभी बोली, “नहीं तुम मेरे साथ चलकर बेड पर एक किनारे सो जाओ। मुझे बिजली कड़कने से बहुत डर लगता है।”
मैं चुप-चाप उठकर उनके साथ बेड पर आ गया। मैंने एक चादर ओढ़ ली और बेड के एक किनारे सो गया। संध्या भाभी बेड के दूसरे किनारे पर सोने की कोशिश करने लगीं। कुछ देर बाद बहुत जोर से बिजली कड़की तो संध्या भाभी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और चिपक गयीं। मैं घबरा गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उनके कसे हुए बूब्स को मैं अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था। मुझे भी जोश आने लगा और मैं चुप रहा। थोड़ी देर बाद संध्या भाभी मेरे सीने के बालों को सहलाने लगीं। मैंने उनका हाथ पकड़कर हटा दिया लेकिन संध्या भाभी फिर अपने हाथों से मेरे सीने को सहलाने लगीं।
मुझे और ज्यादा जोश आने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया। संध्या भाभी मेरे सीने को सहलाती रहीं। मुझे मजा आ रहा था इसलिए मैं कुछ नहीं बोल रहा था। कुछ देर तक मेरे सीने को सहलाने के बाद उनका हाथ धीरे-धीरे मेरे पेट पर आ गया और संध्या भाभी मेरा पेट सहलाने लगीं।
थोड़ी ही देर बाद उनका हाथ मेरे लंड पर था। मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था। जैसे ही संध्या भाभी का हाथ मेरे लंड पर पड़ा तो संध्या भाभी उसे टटोलने लगीं और बोलीं, “अभी, तुम्हारा तो बहुत लम्बा चौड़ा लग रहा है। क्या साइज होगा इसका।” मैंने कहा, “यही कोई 8” लम्बा और 2” मोटा।”
संध्या भाभी चौंककर बोलीं मुझे विश्वास नहीं होता। तुम अपना मुँह मेरी तरफ करो, मैं इसे अभी देखना चाहती हूँ। मैंने करवट बदल ली। उन्होंने मेरा नेकर खोल दिया और मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ लिया। मेरे सारे बदन में आग-सी लग गयी और मेरा दिल तेजी के साथ धड़कने लगा।
संध्या भाभी अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाने लगीं। मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था, उनके सहलाने से एकदम तन गया। संध्या भाभी मुझसे एकदम चिपक गयीं। कुछ देर तक मेरे लंड को सहलाने के बाद बोलीं, “तुम्हारे बाल बहुत बड़े-बड़े हैं। तुम साफ नहीं करते हो क्या।”
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मैंने कहा, “अभी 15 दिन पहले ही साफ किया था।”
संध्या भाभी बोलीं, “मुझे नीचे के बाल नहीं पसन्द हैं। मैं अभी तुम्हारे बाल साफ कर देती हूँ।”
संध्या भाभी उठीं और लाइट ऑन करके ड्रेसिंग टेबल से शेविंग किट निकालकर लायीं और बोलीं, “तुम लेटे रहो, मैं तुम्हारे बाल साफ कर देती हूँ।” मैं लेटा रहा और संध्या भाभी मेरे बाल साफ करने लगीं। बाल साफ करने के बाद उन्होंने मेरे लंड पर हाथ फेरा और कहा, “अब ये और अच्छा लग रहा है।”
कुछ देर तक मेरे लंड पर हाथ फेरने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद संध्या भाभी बोलीं, “अभी, तुम्हारा उंड तो बहुत ही बड़ा है और जब तुम अपने पड़ोसन को चोदते हो तो उसे दर्द नहीं होता।” मैंने कहा, पहली बार हुआ था पर अब संध्या भाभी मेरे लंड की आदी हो चुकी है और खूब मजे के साथ चुदवाती है।
एक बार मैं नंगा नहा रहा था तो उसने मेरा लंड देख लिया था। मेरे लंड की साइज को देखकर संध्या भाभी मुझ पर फिदा हो गयी थी। हमेशा किसी न किसी बहाने मेरे पास आती थी और खूब बातें करने लगी थी। एक दिन उसने मुझसे बिना किसी शरम के कह दिया कि संध्या भाभी मुझसे चुदवाना चाहती है।
मैंने बिना कोई मौका दिये उसे खूब चोदा। पहली बार उसकी चूत से खून भी आ गया था। संध्या भाभी बोलीं, “तुम्हारा लंड तो है ही इस काबिल कि कोई भी औरत इसे देखकर तुमसे चुदवाना चाहेगी। मेरे पति का लंड तुम्हारे लंड से छोटा लेकिन बहुत छोटा नहीं है। संध्या भाभी लगभग 5” का होगा।”
संध्या भाभी ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया और कुछ देर बाद बोलीं, “क्या तुमने कभी किसी औरत की चूत को चाटा है।” मैंने इनकार कर दिया। संध्या भाभी बोलीं, “चलो, अब तुम मेरी चूत को चाटो और मैं तुम्हारे लंड को चूसती हूँ।” मैं और जोश में आ गया। मैं संध्या भाभी की टाँगों के बीच आ गया।
मैंने संध्या भाभी की साड़ी ऊपर कर दी। नीचे उन्होंने पैंटी पहन रखी थी। मैंने पैंटी भी उतार दी। संध्या भाभी की चूत एकदम गोरी और चिकनी थी। मैंने अभी तक ऐसी चूत नहीं देखी थी। थोड़ी देर बाद संध्या भाभी बोलीं, “क्या तुमने ऐसी चूत अभी तक नहीं देखी है। तुम देखते ही रहोगे क्या, चाटोगे नहीं मेरी चूत को।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “मैंने इतनी गोरी और चिकनी चूत कभी नहीं देखी है। मेरी पड़ोसन की चूत तो साँवली है।”
संध्या भाभी बोलीं, “ठीक है। चलो अब मेरी चूत को चाटना शुरू करो।”
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मैंने संध्या भाभी की चूत पर अपनी जीभ फेरना शुरू कर दिया। संध्या भाभी जोश में आकर सिसकारियाँ भरने लगीं। फिर मैंने अपनी एक उँगली संध्या भाभी की चूत में डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा। संध्या भाभी मेरा लंड चूस रही थीं। थोड़ी देर बाद मैं बहुत ज्यादा जोश में आ गया और मेरे लंड ने उनके मुँह में पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
संध्या भाभी सारा पानी पी गयीं। 5 मिनट बाद संध्या भाभी की चूत से भी पानी निकला तो मैंने भी सारा पानी चाट लिया। संध्या भाभी मेरे लंड का पानी निगलने के बाद मेरे लंड को फिर चूसने लगीं और मैं संध्या भाभी की चूत को चाटने लगा। लगभग 10 मिनट के बाद मेरा लंड फिर तैयार हो गया।
संध्या भाभी बोलीं, “अभी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है। जल्दी चोदो मुझे।” मैं उठकर उनकी टाँगों के बीच आ गया। मैं जानता था कि मेरा मोटा और लम्बा लंड संध्या भाभी की चूत के अन्दर आराम से नहीं जाएगा और उनको बहुत तकलीफ होगी। मैं अपनी पड़ोसन की हालत पहली बार की चुदाई के समय देख चुका था।
लेकिन मैं संध्या भाभी की गोरी और चिकनी चूत को बिना कोई तेल या क्रीम लगाये चोदना चाहता था। मैंने उनके चूतड़ के नीचे दो तकिये रख दिये और संध्या भाभी की टाँगों को पकड़कर फैला दिया। अब संध्या भाभी की चूत ऊपर उठ गयी और उसका मुँह खुल गया। मैंने अपने लंड के सुपाड़े को संध्या भाभी की चूत के बीच रखा।
संध्या भाभी एकदम मस्त हो गयी थीं और बोलीं, “इतनी देर क्यों लगा रहे हो, अभी। जल्दी डालो अपना लंड मेरी चूत में। मुझसे अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं होता। डाल दो अपना पूरा लंड एक ही झटके से मेरी चूत में। फाड़ दो मेरी चूत को।” मैं और ज्यादा जोश में आ गया।
मैंने लंड को संध्या भाभी की चूत में एक झटके से डाल दिया। लेकिन संध्या भाभी की चूत में केवल 5” ही घुस पाया और उनको दर्द होने लगा। उन्होंने दर्द की वजह से अपने होंठों को जोर से जकड़ लिया। मैंने फिर एक धक्का मारा तो संध्या भाभी दर्द नहीं बर्दाश्त कर पायीं और उनके मुँह से एक हल्की-सी चीख निकल गयी।
अब तक मेरा लंड संध्या भाभी की चूत में 6” तक घुस चुका था। मैंने फिर धक्का लगाया तो संध्या भाभी जोर से चीखीं और बोलीं, “अभी अब नहीं बर्दाश्त हो रहा है, बाहर निकालो अपना लंड।” मैंने अपना आधा से ज्यादा लंड बाहर निकाल लिया। मैं संध्या भाभी की गोरी और चिकनी चूत को तकलीफ देकर चोदना चाहता था.
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इसलिए संध्या भाभी कुछ और बोल पाती इसके पहले मैंने अपने लंड को वापस उनके चूत में एक जोरदार धक्के के साथ घुसा दिया। संध्या भाभी बहुत जोर से चीखीं और फिर कुछ बोल पाती कि मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक फाइनल धक्का लगा दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मेरा 8” का पूरा लंड संध्या भाभी की चूत में जड़ तक घुस चुका था। संध्या भाभी अभी भी चीख रही थीं। उन्होंने मुझसे फिर अपना लंड बाहर निकालने को कहा तो मैंने कहा, “संध्या भाभी, थोड़ा सब्र करो। अब तो ये पूरी तरह से आपकी चूत में अन्दर घुस चुका है। अभी कुछ और धक्कों के बाद आपका दर्द भी खत्म हो जाएगा।”
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। 5 मिनट तक धीरे-धीरे चोदने के बाद उनका दर्द कम हो गया और उन्हें मजा आने लगा। संध्या भाभी बोलीं, “अभी, खूब जोर-जोर से धक्के लगाओ और तेजी के साथ चोदो मुझे।” मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। संध्या भाभी और तेज और तेज कहती रहीं और मैं अपनी स्पीड बढ़ाता रहा।
अब मैं बहुत ही तेजी के साथ संध्या भाभी की चूत की धुनाई कर रहा था। लगभग 20 मिनट तक चोदने के बाद मेरे लंड ने संध्या भाभी की चूत को भरना शुरू कर दिया। अब तक संध्या भाभी भी 3 बार झड़ चुकी थीं। मैं उनके ऊपर ही लेट गया और उनके होंठ चूसने लगा। संध्या भाभी भी मेरे होंठ चूमने लगीं।
संध्या भाभी बोलीं, “मैं कितनी खुशकिस्मत हूँ कि मुझे आज जिंदगी में दूसरी बार सुहागरात का मजा मिला। आज मुझे जिंदगी में पहली बार चुदवाने में बहुत मजा आया। मैंने जब तुमसे लंड को बाहर निकालने को कहा था, अगर तुम रुक जाते और अपना लंड बाहर निकाल लेते तो मैं ये मजा कभी भी नहीं ले पाती।”
थोड़ी देर बाद मैं उनके ऊपर से हट गया। उन्होंने एक कपड़ा उठाकर अपनी चूत को साफ किया तो उस पर कुछ खून के धब्बे भी लग गये। उन धब्बों को देखकर संध्या भाभी और खुश हो गयीं और बोलीं, “ये धब्बे तो किसी कुंवारी चूत की पहली बार की चुदाई के निशान जैसे ही हैं। मेरी चूत भी तो तुम्हारे लंड के लिए कुंवारी चूत जैसी ही थी।”
20 मिनट बाद संध्या भाभी मेरा लंड फिर से चूसने लगीं। मैं समझ गया कि संध्या भाभी मुझसे दोबारा चुदवाना चाहती हैं। मैंने उनकी चुचियों को मसलना शुरू कर दिया और संध्या भाभी मेरा लंड चूसने लगीं। 5 मिनट में ही मेरा लंड पूरी तरह से फिर तैयार हो गया।
संध्या भाभी बेड पर ही डॉगी स्टाइल में हो गयीं और बोलीं, “अभी, पीछे से आकर चोदो मुझे। खूब जोर-जोर से चोदना। मुझे अगर तकलीफ होने लगे तो तुम उसकी परवाह मत करना।” मैं उनके पीछे आ गया। मैंने संध्या भाभी की गोरी और चिकनी चूत को फैलाकर अपने लंड के सुपाड़े को बीच में रखा और एक जोरदार धक्का मारा। संध्या भाभी की चीख निकल गयी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मेरा आधा लंड संध्या भाभी की चूत में घुस चुका था। मैंने बिना रुके तेजी के साथ उनको चोदना शुरू कर दिया। संध्या भाभी चीखती रहीं और मैं अपना लंड संध्या भाभी की चूत में घुसाता रहा। बेबी को बहुत दर्द हो रहा था लेकिन इस बार उसने मुझसे एक बार भी अपना लंड बाहर निकालने को या रुकने को नहीं कहा बस केवल चीखती रहीं। मैंने चोदना जारी रखा। कुछ ही धक्कों के बाद मेरा पूरा लंड संध्या भाभी की चूत में घुस गया। मैं अपना आधे से ज्यादा लंड बाहर निकालकर पूरी ताकत के साथ वापस संध्या भाभी की चूत में गहराई तक घुसा देता था।
फच-फच की आवाजें रूम में गूँज रही थीं। संध्या भाभी आवाज सुनकर मुझे और जोश आने लगा और मैंने और बहुत ही तेजी से साथ उनकी चूत की धुनाई शुरू कर दी। थोड़ी देर बाद उन्हें भी मजा आने लगा। संध्या भाभी अपने चूतड़ को आगे-पीछे करके मेरा साथ दे रही थीं। इस बार मैंने उनको लगभग 30 मिनट तक चोदा और संध्या भाभी मेरे झड़ने के पहले ही 4 बार झड़ चुकी थीं। लंड का पानी पूरी तरह निकल जाने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। संध्या भाभी पलटकर मेरे लंड के पास आयीं और अपनी जीभ से उसे चाट-चाटकर साफ करने लगीं।
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