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बारिश में जाग गया मेरे लंड का भाग्य

अगस्त 9, 2026 by hamari Leave a Comment

Barish Me Chudai Story

तो यह बरसात के सीजन की बात है। एक दिन मैं जब शाम को घर अकेला था तो करीब 6:30 पर तेज बारिश शुरू हो गई। बाहर बारिश बड़ी तेज हो रही थी तो मैं विंडो से बारिश का नजारा लेने लगा। बाहर रोड पर पानी भरा हुआ था और वाहन भी बहुत कम चल रहे थे और जो चल रहे थे वह भी बहुत स्लो थे। Barish Me Chudai Story

मेरा फ्लैट पहली मंजिल पर था और ऊपर आने वाले स्टेयर्स के लिए नीचे अलग गेट था और नीचे वालों के लिए अलग। मैं करीब 7:00 पर नीचे गेट बंद करने गया तो मैंने देखा कि वहाँ पर एक लेडी खड़ी थी। लेडी दिखने में स्लिम, मीडियम हाइट की थी और उसका कॉम्प्लेक्शन व्हाईटिश था। वह भीगी हुई थी और ठंड से काँप रही थी।

मैंने उससे रिक्वेस्ट किया, “मैडम, बारिश तेज है और आप यहाँ पर अकेले कब तक खड़ी रहेंगी, ऊपर आ जाइए। जब बारिश बंद हो जाएगी तो चले जाइएगा।”

वह काँपते हुए बोली, “कोई बात नहीं, आप तकलीफ क्यों करते हैं, मैं बारिश बंद होते ही चली जाऊँगी।”

मैं उसकी हालत और उम्र देखकर उसके वहाँ खड़े रहने से वॉरिड था क्योंकि एक जवान औरत का इस तरह मेन रोड के किनारे रात के सन्नाटे में खड़ा रहना ठीक नहीं था। मेरी रिक्वेस्ट करने पर वह ऊपर आने को तैयार हो गई। मैंने उससे कहा कि अगर वह चाहे तो घर पर फोन कर सकती है।

उसने कहा कि वह पहले ही बता चुकी है और बारिश रुकते ही उसके हस्बैंड उसे लेने आ जाएँगे। मैंने इंसिस्ट करके अपने पीछे आने को कहा तो वह मेरे पीछे आ गई। रूम में पहुँचकर मैंने उसे रुकने को कहा और नीचे जाकर मैंने दरवाजा बंद कर दिया। जब मैं वापस आया तो वह खड़ी थी।

उसकी बॉडी मीडियम और हाइट मुझसे करीब 2-3 इंच ज्यादा थी। भीग जाने के कारण उसकी साड़ी उसके नितंबों (butts) से चिपक गई थी और उसकी गुदा (asshole) वाली घाटी में अंदर तक चिपक गई थी, जिसका उसे शायद ध्यान नहीं था। उसका ब्लाउज पीछे से करीब पूरा खुला हुआ था, बस 4 इंच की पट्टी उसे पीछे से जोड़े हुए थी।

जब मैंने उसकी नंगी पीठ को नजदीक से देखा तो उसका बदन एकदम चिकना था। मुझसे नहीं रहा गया और मैं बोला, “आप तो बुरी तरह भीगी हुई हैं, आप तो बैठ भी नहीं पाएँगी, मैं टॉवल लेकर आता हूँ।” जब मैं वापस टॉवल लेकर आया तो पता नहीं मेरे डर से या ठंड के कारण वह बुरी तरह से काँप रही थी।

मुझे डर लगा कि कहीं सच में वह बीमार पड़ गई तो मेरे लिए बड़ी मुसीबत हो सकती है। उसकी हालत ऐसी थी कि वह अपने आप को पोंछ भी नहीं सकती थी, वह बुरी तरह काँप रही थी। मैंने हिम्मत करके उसके गीले बदन पर टॉवल से पोंछने लगा। वह मुझे रोकना चाह रही थी पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।

उसके अंदर इतनी ताकत उस समय नहीं थी कि वह मुझे रोक सके। पहले जब मैंने उसकी नंगी पीठ को पोंछा तो उसका नंगा गीला बदन एकदम ठंडा था तो मैंने टॉवल से उसके गीले बालों को पोंछा। उसके बाद मैंने हिम्मत करके उसे ब्लाउज के ऊपर से उसके नेक और क्लिवेज वाले एरिया पर टॉवल से रगड़ा।

जब वह कुछ नहीं बोली तो मैंने जानबूझकर उसके ब्लाउज के ऊपर से टॉवल को उसके क्लिवेज की गहराई पर टॉवल से रगड़ा। जब उसने कोई विरोध नहीं किया तो मैं उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही टॉवल से रगड़ दिया। इस बार भी उसने कुछ नहीं बोला तो मुझे मजा आने लगा और मैंने टॉवल जानबूझकर नीचे गिरा दिया और अपने हाथ से उसके बूब्स को 2-3 बार रगड़ दिया।

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इस बार उसने रिएक्ट किया और वह तेज साँसें लेने लगी। मैं समझ गया कि वह मस्त हो रही है। अब मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने उसकी साड़ी का पल्लू अलग कर दिया और उसे कमर से पकड़कर उसके नेक और ब्लाउज के ऊपर चूमना शुरू कर दिया। फिर जब वह थोड़ा मना करने लगी तो मैंने दोबारा से अपने लिप्स से उसके इसी एरिया पर फिर रगड़ा।

फिर मैं अपना एक हाथ फ्री करके उसके बड़े-बड़े नितंबों पर फेरना शुरू किया। उसके नितंब उसकी साड़ी के बाहर से ही बड़े चिकने थे। उधर मैंने इस बार उसके ब्लाउज के बाहर से ही उसके स्तनों (बूब्स) को चूमना शुरू कर दिया। मेरे बदन की गर्मी से अब वह उत्तेजित होने लगी थी और उसके स्तनों में कसाव आने लगा था।

मैं उसके गीले ब्लाउज के बाहर से ही उसके स्तनों को चूम तो नहीं रहा था पर लिप्स से रगड़ कर रहा था। मेरा हाथ उसके दोनों नितंबों पर रगड़ रहा था। जब उसने कोई विरोध नहीं किया तो मैंने एक-दो बार उसके नितंबों पर स्लैप भी किया। अब उसके बदन में गर्मी आने लगी थी और उसका बदन अब पहले जितना ठंडा नहीं था।

मैंने फिर उसे कमर से पकड़ा और उसकी नंगी पीठ पर लिप्स से रगड़ने लगा पर मैंने उसके बदन पर किसी प्रकार का प्रेशर नहीं दिया। मैं अपने लिप्स से उसकी नंगी पीठ पर सब जगह रगड़ने लगा। उसके बाद मैंने साथ-साथ ही अपने दोनों हाथों को उसके दोनों बूब्स पर फिराना शुरू कर दिया।

ऐसा करते हुए मुझे थोड़ा परेशानी हो रही थी क्योंकि उसकी लंबाई मुझसे ज्यादा थी। पर मैं उसके बूब्स को प्रेस नहीं किया, बस जैसे टच करते हुए पूरे बूब्स को मसाज सा कर रहा था। मैं बस इतना कर रहा था कि उसका बदन और मेरा हाथ एक-दूसरे को महसूस कर सके। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

ऐसे ही उसकी नंगी पीठ पर मेरे लिप्स भी बस रगड़ कर रहे थे और मेरे लिप्स और उसकी नंगी पीठ एक-दूसरे को महसूस कर रहे थे। फिर मैंने पोजीशन चेंज की और अब मेरे हाथ उसकी नंगी पीठ पर फिरने लगे और मेरे लिप्स उसके बूब्स के ऊपर फिसल रहे थे। फिर जैसे मुझे मौका मिला मैंने अपने लिप्स उसके लिप्स के ऊपर रख दिए।

जवाब में उसने अपने दोनों हाथों से मुझे मेरी पीठ से पकड़ लिया। इस बार उसने पहली बार मेरे एक्शन का जवाब दिया था। अब मुझे और मजा आने लगा तो मैंने अपनी जीभ उसके लिप्स के अंदर डालने लगा। वह मेरा इशारा समझकर अपनी जीभ मेरी जीभ से मिला दी। अब मैं और वह एक-दूसरे को लिप्स टू लिप्स और टंग टू टंग किस करने लग गए।

अब मैं उसे खींचकर सोफे पर ले आया और उसे सोफे पर चित बिठा दिया। पर अभी भी हमारे लिप्स एक-दूसरे से चिपके हुए थे। फिर मैंने अपने हाथ उसकी पीठ से हटाकर उसके कमर पर रगड़ने लगा और एक-दो बार मैंने अपनी फिंगर से उसके नाभि के अंदर भी घुसा दी।

फिर अचानक क्या हुआ कि उसने अपने लिप्स को आजाद किया और मुझे धक्का देते हुए अपने आप को मुझसे अलग कर लिया। मैं कुछ समझ नहीं पाया और वह अपनी साड़ी का पल्लू संभालते हुए मुझे कहने लगी, “प्लीज अपने आप संभालिए, मुझे आपने समझ क्या रखा है?”

मैंने कहा, “आप नाराज हो रही हैं, चलो आप को ठंड लग रही है, मैं चाय बनाकर लाता हूँ।”

मैं जानता था कि वह नाटक कर रही है और मुझे आजमाना चाहती है, नहीं तो मुझे इतनी छूट नहीं देती।

वह जाने को उठी तो मैंने कहा, “आप जाना चाहती हैं तो जाएँ, मैं नहीं रोकूँगा पर बाहर बारिश तेज है और आप जा नहीं पाएँगी। पर एक रिक्वेस्ट है कि आप 15 मिनट रुक जाइए और कम से कम चाय पीकर जाइएगा।”

इतना कहकर मैं किचन में जाकर चाय बनाने लगा और वह सोफे से उठकर जाने लगी। मैंने उसे देखते हुए भी अनदेखा किया। मैं यह जानता था कि एक तो बाहर तेज बारिश थी और दूसरा मैंने उसे पूरी तरह उत्तेजित किया हुआ था और वह मेरे बदन की गर्मी से गर्म होकर अब जाने वाली नहीं थी। मैं टी-पॉट में चाय लाया तो वह दरवाजे पर खड़ी होकर जाने का नाटक कर रही थी।

मैंने कहा, “सॉरी मैम, अगर मुझसे कोई गलती हुई हो पर प्लीज चाय से तो गुस्सा मत करो।”

फिर वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई तो मैंने कहा, “देखो अगर विश्वास न हो तो पहले मैं चाय पीकर दिखाता हूँ फिर तुम पीना।” और मैं पॉट से चाय निकालकर पीने लगा। वह फिर बाहर देखने लगी। जब मैंने चाय के 2-3 सिप ले लिए तो उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने कहा, “मैम कम से कम चाय पीकर तो जाओ।”

पता नहीं उसने क्या सोचा और वह फिर मेरे बगल में आई और खुद चाय कप में ले ली और फिर वह भी चाय सिप करने लगी। फिर वह मुस्कुराते हुए मुझसे थैंक्स बोली तो पहली बार मुझे वह सेक्सी के साथ खूबसूरत लगी। मैं उससे आगे बात करता, उसने मुझसे पूछा, “क्या बात, आपके घर में कोई और नहीं क्या?”

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मेरे बिहेवियर से वह अब थोड़ा कॉन्फिडेंट लग रही थी।

मैंने कहा, “नहीं, केवल मम्मी हैं, वह किसी रिश्तेदार के यहाँ गई हैं और भाई बाहर पढ़ाई करता है।”

फिर उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और पूछा कि क्या मेरी शादी नहीं हुई तो मैंने कहा, “नहीं, अभी कोई बेहतर जॉब के बाद शादी की सोचूँगा।”

मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम शिल्पा है और उसके हस्बैंड किसी बड़ी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हैं और आजकल कंपनी के काम से चेन्नई गए हैं। इस तरह हमारी बातचीत शुरू हो गई। अभी भी बाहर बारिश चलू थी जबकि करीब 8:00 का टाइम हो गया था।

फिर अचानक शिल्पा का मोबाइल बज उठा और वह “मम्मी” कहकर बातें करने लगी। उसने कहा कि वह ठीक-ठाक अपनी कॉलिग के घर पर है और बारिश बंद होते या फिर मॉर्निंग में आ जाएगी। उधर से फिर बात हुई तो उसने इतना कहकर कि वह बारिश रुकते ही चल पड़ेगी।

मैंने शिल्पा से पूछा कि तो आपने मेरी रिक्वेस्ट मान ही ली तो वह मुस्कुराने लगी पर “तुमसे अगर पूछा कि कौन सी सहेली के पास थी तो वह बोली कि मैं मैनेज कर लूँगी, तुमको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।” फिर वह बोली कि अगर पड़ोस में से या कोई तुम्हारा रिश्तेदार आ गया तो तुम क्या बताओगे तो मैंने कहा, “आई कैन अल्सो मैनेज।”

अब मुझे उसका सेक्सी फिगर ललचाने लगा तो मैं उसके करीब उसकी जाँघों से जाँघें मिलाकर बैठ गया। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी जाँघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसकी जाँघें बड़ी सुदौल और चिकनी थीं। वह कुछ नहीं बोली। बाहर बारिश जारी थी। फिर मैं उसके और नजदीक गया और उसके नंगे पेट और नाभि पर रगड़ने लगा बिना किसी प्रेशर दिए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

शिल्पा मेरे एक्शन को इग्नोर करके नींद का सा नाटक करने लगी। इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने फिर अपना हाथ का दायरा उसके ब्लाउज तक बढ़ा दिया। मैं अब उसके स्तनों के ऊपर हल्का सा प्रेशर देकर रगड़ कर रहा था पर मैंने उसके बूब्स को मसला नहीं। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और हल्की साँसें लेने लगी जैसे सो रही हो।

मैं मौका देखकर उसके ब्लाउज के हुक पीछे से एक-एक कर खोल दिए और आराम से उसकी पीठ पर नीचे से रगड़ और उसके नेक और क्लिवेज वाले एरिया में लिप्स से रगड़ने लगा। मैं धीरे से उसका पल्लू हटा दिया और उसके ब्लाउज को उसके बदन से अलग करने लगा पर मैं यह काम आराम से कर रहा था।

जब उसका ब्लाउज पीछे से स्वतंत्र हो गया तो मैंने उसे आगे की तरफ से भी ऊपर कर दिया। पहले मैंने उसकी लेफ्ट आर्म ऊपर करके उसके शॉर्ट स्लीव को उसके आर्म्स से बाहर निकाला तो वह कुछ ऐसा रिएक्ट नहीं की जैसे कुछ पता चला हो तो मैंने दूसरे स्लीव को दूसरी साइड से पुल करके उसका ब्लाउज सोफे पर ही फेंक दिया।

उसकी ब्रा का रंग काला था जो उसके व्हीटिश गोरे बदन पर मस्त लग रही थी। उसके बूब्स उसके साइज के रेशियो में नॉर्मल थे पर मेरे हिसाब से पूरे तरबूज जैसे थे। उसकी ब्रा के बाहर से भी मेरे लिए उसके खरबूजे जैसे स्तन को एक हाथ से हैंडल कर पाना मुश्किल था। पर मैं अभी उसके खरबूजे जैसे स्तनों से ज्यादा छेड़छाड़ करने की जल्दी में नहीं था।

मैंने शिल्पा को पकड़ा और सोफे पर लिटा दिया और खुद भी उसके बगल में लेट गया। फिर मैं अपने लिप्स से उसके क्लिवेज, नेक और आर्मपिट्स पर किस करने लगा पर मैंने उसके बॉडी पर कोई दबाव नहीं बनाया था। मैं बस आराम से उसके नंगे चिकने बदन पर अपने लिप्स और टंग फेर रहा था।

ऐसे ही करते हुए मैंने उसकी ब्रा को अपने मुँह में ले लिया और धीरे ऊपर को खींचने लगा। फिर मैंने उसकी ब्रा को अपने दाँतों से पकड़कर जोर से खींचा और उसकी बॉडी से अलग करके बेड पर पटक दिया। शिल्पा ने शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं पर मैं उसके बड़े-बड़े खरबूजे जैसे बूब्स को देखकर हैरान रह गया कि कैसे वह ब्रा के अंदर समाए हुए थे।

मेरे हाथों के टच से वह पहले से ही टाइट थे। अब मैं उनको चूमना और चाटना चाहता था। मैं शिल्पा को कमर से पकड़ा और उसके स्तनों को चाटना शुरू कर दिया। उसके स्तनों पर जीभ से टच करने में मुझे बहुत एक्साइटमेंट हो रही थी। वहीं शिल्पा भी पूरा मजा ले रही थी।

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अब तो वह मजे में अपने हाथ-पाँव भी मारने लगी थी। इस बार मुझसे नहीं रहा गया तो मैं उसके दोनों स्तनों को दोनों हाथों में लेकर उसके नंगे बदन पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी जिससे शिल्पा की बेचैनी बढ़ गई। वह जोर-जोर से आवाजें निकलने लगी पर उसकी आवाज बाहर हो रही बारिश में कहीं दब सी गई थी।

ऐसा करने से उसकी साड़ी और पेटीकोट सिमटकर उसके घुटनों के पास तक आ गई, जिससे उसकी केले जैसी चिकनी टाँगें मुझे बेचैन करने लगीं। पर मैंने उसके स्तनों पर ही अपना ध्यान लगाए रखा क्योंकि मैं उनको पूरी तरह से उपभोग करना चाहता था। पर मैं उसकी टाँगों को देखकर भी ललायित था तो मैंने अपनी दोनों टाँगों से उसकी टाँगों को दबोच लिया।

फिर मैंने उसकी दोनों परियों की फिंगर्स को अपने पाँव की फिंगर से पकड़कर उसकी नंगी टाँगों को अपनी टाँगों से रगड़ने लगा। इससे मैं और शिल्पा दोनों ही एक्साइट होने लगे तो मैं एक्साइटमेंट में शिल्पा के खरबूजे जैसे स्तनों को अपनी जीभ से चूमना और चाटना शुरू कर दिया।

अब तो शिल्पा मस्ती में हाँगने लगी और उसने मुझे अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने स्तनों पर डाल दिया। वह मेरे सर को दबाकर अपने स्तनों को और अधिक चाटने और चूमने के लिए मुझे उत्तेजित कर रही थी। नीचे से वह अपनी नंगी टाँगों को मेरी टाँगों से पायजामे के ऊपर ही रगड़ने लगी।

मुझे भी मजा आने लगा तो मैं भी उसकी उत्तेजना को और बढ़ाते हुए उसकी टाँगों को और तेजी से रगड़ने लगा। उधर मैं उसकी नंगी ऊपर की बॉडी पर चूमना और चाटना जारी रखा। जैसे ही मैंने सुस्ती दिखाई तो शिल्पा ने पलटकर मुझे बेड पर नीचे धकेल दिया और मेरे ऊपर आकर मेरी टी-शर्ट उतारने लगी तो मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार दी और ऊपर से नंगा हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब शिल्पा मेरे ऊपर आकर मेरे नंगे बदन को चूमने और चाटने लगी। फिर उसने अपनी फिंगर मेरे मुँह में डाली तो मैंने उसे चूसने लगा। फिर वह उसे अपने मुँह में डालकर चूसने लगी। फिर मैंने अपनी फिंगर को अपने मुँह में डालकर जैसे छोटे बच्चे अँगूठा चूसते वैसे चूसा और बाहर निकाला तो शिल्पा ने उसे झट से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मुझे ऐसा लगा जैसे वह मुझे मुख मैथुन करने के लिए उत्तेजित कर रही हो।

मुझे जैसे ही लगा कि वह थोड़ा मस्त है मैंने तुरंत उसे शोल्डर से पकड़ा और पलटाकर बेड पर लिटा दिया और उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए। पहले तो शिल्पा थोड़ा सरप्राइज हुई पर अगले ही पल वह भी मेरे चुम्बन का उत्तर देने लगी। फिर उसने अपनी जीभ मेरे लिप्स के बीच डालकर अंदर से मैंने अपनी जीभ से जीभ मिलाकर चुम्बन का आनंद लेने लगा।

मुझे लिप्स टू लिप्स और टंग टू टंग चुम्बन का बड़ा मजा आ रहा था। मैंने अपने जानबूझकर शिल्पा को नीचे ले लिया जिससे वह अच्छी तरह से मेरा चुम्बन ले सके। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से शिल्पा के तरबूज जैसे नितंबों पर हाथ फिराना शुरू कर दिया। उसके बड़े-बड़े नितंब अब टाइट हो गए थे। वह उसकी साड़ी के बाहर से ही बड़े चिकने लग रहे थे और मेरे दोनों हाथ उसके मोटे-मोटे नितंबों पर फिसलने लगे।

मेरे ऐसे करने पर शिल्पा मस्त होकर और मस्ती में आ गई थी और मुझे और प्यार करने लगी। धीरे-धीरे मेरे हाथ उसके दोनों नितंबों के बीच की घाटी पर फिसलने लगे और मेरा एक हाथ उसके नितंबों के बीच की घाटी पर और दूसरा हाथ उसकी जाँघों पर फिसलने लगा। वह क्या मस्त जाँघें थीं उसकी, जो मुझे उसकी साड़ी के बाहर से ही उत्तेजित कर रही थीं।

पर जब मेरे हाथ उसकी जाँघ और नितंबों के बीच फिसल रहे थे तो उसे और आनंद आने लगा और वह मुझे और जोर से किस करने लगी। जैसे ही वह थोड़ी ढीली हुई तो मैंने अपने मुँह को उसके लिप्स से हटाकर उसके सर और उसके बालों को एक हाथ उसकी जाँघ से हटाकर सहलाने लगा।

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अब मेरा मन उसके स्तनों का रसपान करने को आतुर होने लगा और मैंने अपने लिप्स को उसके स्तन के चुचूक (nipple) पर रख दिया और ऐसा करते ही मुझे लगा कि उत्तेजना की वजह से उसमें कड़ापन आने लगा तो मुझे और मजा आया। फिर मैंने उसके स्तन के दूसरे चुचूक पर उसी तरह से चूमा तो वह भी कड़ा हो गया।

फिर मैंने उसे स्तन को अपने मुँह में लेकर धीरे चूसने लगा पर मैंने उसमें कोई ज्यादा फोर्स नहीं दिया, बस उसके स्तन को जितना मुँह के अंदर आ सकता था लेकर चूमने लगा। फिर मैंने उसके निप्पल के टॉप को अपनी जीभ से सहलाने लगा जिससे शिल्पा की उत्तेजना बढ़ने लगी और मेरा एक हाथ उसके नितंबों के बीच की घाटी पर मसाज कर रहा था।

कभी-कभी मेरी फिंगर उसकी गुदा से भी टकरा रही थी। उसकी गुदा टाइट थी, ऐसे मुझसे उसकी साड़ी, पेटीकोट और पैंटी के अंदर महसूस हो रहा था। मेरा दूसरा हाथ शिल्पा की जाँघों को उसकी साड़ी के बाहर से एक-एक कर मसाज कर रहा था। उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी जाँघों पर हाथ फिराने में एक अलग ही फीलिंग हो रही थी।

नीचे मेरी टाँगें उसके टाँगों के साथ रगड़ खा रही थीं। मैं अपने मुँह से शिल्पा के दोनों चुचूकों (nipples) को एक-एक बार मुँह में लेकर चूस और चूम रहा था। इसमें मुझे तो अत्यधिक आनंद आ रहा था। अब मुझे शिल्पा की हालत का पता नहीं था। मैंने अपने हाथ का दायरा उसके नितंबों की घाटी से नीचे की ओर बढ़ा दिया और अब मेरी हाथ की उँगलियाँ उसकी योनि के निचले भाग को छूने लगीं।

मैंने अपने हाथ को थोड़ा हल्का किया और पहले उसकी योनि के आकार का अनुमान लगाने की कोशिश करने लगा। शिल्पा की योनि मेरे क्रियाकलापों से उत्तेजित तो थी और उसमें हल्का गीलापन भी था पर उसकी योनि के आकार से लगता था कि उसको लिंग प्रवेश कराने का ज्यादा अनुभव नहीं था।

मतलब कि शिल्पा शायद अपने पति से ही सेक्स का मजा लेती थी और उसकी योनि संभोग का अधिक आनंद नहीं ले पाई थी, नहीं तो इतनी देर में तो उसकी उत्तेजना अपने चरम पर होनी थी। मैंने अपनी उँगली से आगे का जायजा लिया तो मेरी उँगली उसकी भगनासा (clitoris) तक जा पहुँची।

मैंने उँगली को उसकी भगनासा पर जाकर स्थिर कर दिया और उस पर हल्का सा दबाव बनाया तो उसका आकार मटर (pea) के दाने जितना था। उस पर हाथ रखते ही मुझे शरारत सूझी और मैंने उसको दो उँगलियों से पकड़कर पिंच करने वाली स्टाइल से मसल दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मेरा ऐसा करना था कि बेड पर जैसे तूफान आ गया। शिल्पा जोर से चीखी और बेड पर उछल पड़ी। मैंने उसे जबरदस्त ढंग से दबोच रखा था जिस कारण मैं भी उसके साथ उछल पड़ा। पर मैंने अपनी पकड़ शिल्पा पर कायम रखी। उधर मैंने अपनी उँगली को थोड़ा नीचे करके उसकी योनि के ऊपर स्थिर कर दिया।

उधर दूसरी उँगली से उसकी दोनों जाँघों को मसाज करता रहा जिससे उसकी साड़ी और पेटीकोट उसके घुटनों (knee) से ऊपर तक आ गए थे। फिर मैंने अपनी उँगली को शिल्पा की योनि पर धीरे-धीरे फिराना शुरू कर दिया पर मैंने अभी उसे मसलना शुरू नहीं किया था।

पहले मैंने उसकी योनि के दोनों पटों (lips) को पकड़कर दबाया तो शिल्पा को उत्तेजना होने लगी जो मैं उसकी योनि के पटों की हरकत से महसूस कर सकता था। वह मुँह से “सी सी आह आह” की आवाजें निकाल रही थी पर मैं उसकी परवाह किए बगैर अपने लिप्स से उसके दोनों चुचूकों को वन बाय वन चूस व चूमकर उत्तेजित करता रहा।

जब शिल्पा की उत्तेजना बढ़ने लगी तो उसकी बोलती बंद सी हो गई और उसने अपने मुँह को मेरे शोल्डर पर टिकाकर अपने दाँत वहाँ पर गड़ा दिए और वह अपने मुँह को बंद रखने का प्रयास करने लगी। इसका मतलब था कि उसकी उत्तेजना अपने चरम पर थी और वह अब ऐसी हालत में भी नहीं थी कि चिल्ला सके।

मैंने उसके हर अंग जैसे चुचूक, जाँघ और योनि को जबरदस्त ढंग से उत्तेजित कर दिया था। वह शायद शर्म भी महसूस कर रही थी और मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी। मेरा भी यह इस प्रकार का पहला अनुभव था क्योंकि मुझे भी ऐसा करने का मौका और किसी ने दिया नहीं था।

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अब मैंने शिल्पा को साइड पोजीशन पर लिटाकर उसके बगल में साइड पोजीशन में आ गया तो शिल्पा ने अपनी एक जाँघ मेरी जाँघ के ऊपर रख दी और आधी मेरे ऊपर आ गई तो मुझे थोड़ा एडजस्टमेंट करनी पड़ी और मैंने अपने हाथ की पोजीशन चेंज करते हुए अपनी उँगली सामने की तरफ से उसकी योनि पर रख दी और दूसरे हाथ से उसकी जाँघों को साइड और पीछे से वन बाय वन साड़ी के बाहर से ही मसलने लगा।

मैंने उसकी योनि को नीचे से ऊपर की तरफ बाहर से उसकी भगनासा तक धीरे मसल रहा था। कभी उसकी योनि के दोनों पटों को खोलता और कभी बंद करने के लिए दबाव देता। उधर अब मैंने अपने मुँह का दायरा उसके चुचूकों तक सीमित न रखकर उसके आर्मपिट्स, नेक, क्लिवेज, स्तन और नंगी पेट तक बढ़ा दिया था। मुझे जहाँ मौका मिलता मैं उसे चूमने और चाटने लगता।

नीचे उसकी नंगी टाँगें मेरी टाँगों के साथ पहले की तरह ही उलझी हुई थीं। अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ कि शिल्पा की योनि मेरी उँगलियों के कमाल से फिर से गीली हो गई थी, जिसका अनुभव मुझे उसकी गीली साड़ी से हो रहा था। उसकी योनि का रस उसके पैंटी और पेटीकोट को भिगोते हुए उसकी साड़ी तक पहुँच गया था।

अब शिल्पा को कुछ असहज (discomfort) महसूस हुआ और उसने मुझे अपने आप से अलग कर लिया और बेड पर खड़ी हो गई। मुझे भी राहत महसूस हुई क्योंकि उससे उत्तेजित करते-करते मैं खुद थक सा गया था और मुझे ब्रेक मिल गया। शिल्पा को शायद अपनी साड़ी का ध्यान आया और इस डर से कि कहीं उसकी साड़ी का गीलापन बाहर तक न आ जाए, उसने अपनी साड़ी उतार दी और फेंककर बेड से दूर रख दी।

शिल्पा का पेटीकोट उसकी योनि के नीचे और थाई के बीच पूरी तरह से गीली हो गई थी। मुझसे नहीं रहा गया और मैंने उसे पकड़कर फिर से बेड पर साइड पोजीशन पर दबोच लिया। अबकी बार मैंने उसके पेटीकोट को उसकी थाई तक ऊपर कर दिया या यह समझ लीजिए कि उसका पेटीकोट उसकी पैंटी के एरिया तक ही रह गया था।

इसी दौरान शिल्पा ने अपने दोनों हाथ ऊपर को कर दिए थे। उसके बूब्स और आर्मपिट मुझे और एक्साइट करने लगे। मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैं उसके बूब्स पर रगड़ किया तो मेरे हाथों को ऐसा मजा आने लगा कि वहाँ से हटे ही नहीं। शिल्पा को भी इससे एक्साइटमेंट हुई और वह एकदम से पलट गई।

अब मैंने दूसरे हाथ की उँगलियों को उसकी योनि पर रख दिया। अब उसके गीले पेटीकोट के बाहर से ही उसकी योनि को मसलना चाह रहा था पर उसकी गीली पेटीकोट से उसकी योनि पर मर्दन करने में कुछ दिक्कत हो रही थी। फिर मैंने शिल्पा के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसके नाभि के नीचे से उसके पेटीकोट के अंदर हाथ डाला। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसके पेटीकोट पर इलास्टिक भी लगी हुई थी, जिस कारण वह अभी भी उसके कमर पर टिका हुआ था। नीचे से मैंने शिल्पा की दोनों टाँगों को अपने टाँगों से जकड़कर रखा हुआ था। अब मैंने अपना पूरा हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाल दिया। उसकी योनि के चारों ओर काफी बड़े-बड़े और घने बाल थे जिस कारण मुझे उसकी योनि द्वार को थोड़ा आराम से ढूँढना पड़ा।

उसके योनि के चारों ओर के बाल भी गीले होकर आपस में चिपक गए थे। मैंने अपनी उँगलियों से इनको एक तरफ करते हुए योनि द्वार का रास्ता बनाया और अपनी फर्स्ट फिंगर उसके योनि द्वार पर रख दी। उधर शिल्पा की भी उत्तेजना बढ़ गई तो उसने मेरे पायजामे का नाड़ा खोल दिया और मेरे पायजामे को नीचे को करने लगी।

मैं सावधान हो गया। मैंने अपना पायजामा तो खुद ही उतार दिया। उसके हाथ को अपने अंडरवीयर से दूर करते हुए अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर मैंने अपनी फिंगर को शिल्पा के योनि द्वार के अंदर धीरे प्रवेश कराना शुरू कर दिया। उसकी योनि काफी टाइट लग रही थी पर थोड़ा मेहनत के बाद वह करीब आधा इंच अंदर तक चली गई।

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यह शायद उसके गीलेपन की वजह से हुआ। फिर मैंने अपनी उँगली को उसकी योनि के अंदर ऊपर-नीचे धीरे-धीरे करना शुरू कर दिया। शिल्पा को उत्तेजना तो हो रही थी जो मैं महसूस कर रहा था पर अब शायद उस दर्द कम हो रहा था जिस कारण उसकी उत्तेजना मेरी दोनों उँगलियों पर उसके मुँह के अंदर और उसकी योनि के अंदर महसूस हो रही थी।

उधर मैंने शिल्पा की योनि के अंदर अपनी फिंगर को इस तरह से प्रवेश करा रहा था कि मैं तेज से उसे उसकी योनि के अंदर ऊपर-नीचे करता और जब वह उत्तेजित हो जाती तो थोड़ा सा अंदर डाल देता और जैसे वह मुझे रोकती मैं फिर से उँगली उसकी योनि में ऊपर-नीचे करने लगता जिससे उसे आनंद आ रहा था।

इस तरह मेरी उँगलियाँ अब शिल्पा की योनि को रोंद रही थीं और शिल्पा शांति से अपनी योनि में मेरी उँगलियों के हरकतों से आनंदित हो रही थी। उधर शिल्पा ने उत्तेजना में फिर से मुझे चूमना और चाटना शुरू कर दिया और मैं उसकी योनि के अंदर अपनी दोनों उँगलियों से उसकी योनि को लिंग प्रवेश कराने के लिए तैयार करने लगा।

अब उसकी योनि के छिद्र का आकार बढ़ने लगा था और वह करीब-करीब मेरे लिंग को अपने अंदर लेने लायक हो गई थी। पर मैंने अपनी तैयारी जारी रखी और उसकी योनि की अपनी उँगली से तैयार करने लगा। अब तो मेरी उँगली उसकी योनि के अंदर आधी से भी ज्यादा अंदर तक जा चुकी थी।

शिल्पा बोली, “प्लीज मुझे घर भी जाना है, प्लीज फिनिश इट ऑफ एंड डू फास्ट, प्लीज कम ओवर मी। प्लीज मेरे साथ संभोग करो, मुझे और मत उत्तेजित करो, जल्दी करो।”

मैं तो ऐसा ही चाहता था क्योंकि मुझे औरतों के साथ जबरदस्ती संभोग पसंद नहीं है। संभोग का आनंद तो तब ही है जब दोनों उसके लिए पूरी तरह बेचैन हो जाएँ। मैंने शिल्पा को इस स्थिति तक पहुँचा दिया था। मैंने उसके पैंटी को नीचे को खींच दिया तो शिल्पा ने उसे अपनी टाँगों से निकालकर दूर कर दिया.

पर जैसे ही शिल्पा ने अपने आप को नग्न महसूस किया वह शर्मा गई तो मैंने पास ही पड़ी उसकी ब्रा उसके आँखों के ऊपर गॉगल की तरह रख दी और उसकी दोनों टाँगों को पकड़कर उनके पाँव से लेकर नी तक चूमते हुए चाटने लगा। उसकी चिकनी और पतली टाँगों पर मेरी टंग सुपर फास्ट ट्रेन की रफ्तार से चल रही थी।

शिल्पा को भी मजा आ रहा था और वह अधिक उत्तेजित (excite) हो रही थी। शिल्पा के हाथ मेरे अंडरवीयर के बाहर तहल रहे थे और जैसे ही उसे मेरे तने हुए लिंग का एहसास हुआ तो उसने मेरे अंडरवीयर को नीचे को खींच लिया। मेरा लिंग तो पूरी तैयारी से तैयार था।

मेरे अंडरवीयर के बाहर मेरा लिंग देखकर शिल्पा फिर से सर्माई, पर अब मैं कोई देरी करना नहीं चाहता था। बाहर बारिश भी धीमी हो गई थी और मैंने चित लेटी शिल्पा की दोनों टाँगों को फैला दिया। पर उसकी चिकनी पतली टाँगें और फ्लेशी थाई ने मुझे फिर बेचैन कर दिया और मैं उसकी दोनों पकड़ी हुई टाँगों को चूमने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

शिल्पा को मजा आ रहा था पर जैसे ही उसे अपने नंगेपन का एहसास हुआ उसने अपनी हथेली अपनी योनि के ऊपर रखकर उसे ढक दिया। पता नहीं वह मुझे उसकी योनि में लिंग प्रवेश करवाने से रोकना चाहती थी या मेरे लिंग को अपनी योनि के मर्दन के लिए आकर्षित कर रही थी। पर मुझसे उसकी फ्लेशी जाँघों (thigh) चूमने में बड़ा मजा आ रहा था।

जब मेरे से नियंत्रण नहीं हुआ तो मैं उसकी दोनों थाई को एक-एक कर चूमने, चाटने, चूसने और कभी-कभी काटने भी लगा पर बड़ा मजा आ रहा था। शिल्पा की हालत तो ऐसी थी कि वह अब हर बात का मजा ले रही थी और कभी कुछ तो कभी कुछ करके जवाब दे रही थी।

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अब मैंने शिल्पा की दोनों टाँगों को एक साथ चिपकाकर उनके पाँव से लेकर नी तक चूमता, चाटता और चूसता जा रहा था। फिर मैं उसकी नंगी टाँगों को इसी तरह एक साथ पाँव से लेकर उसकी जाँघों से उस योनि के पास तक चूमने लगा। शिल्पा अभी भी अपनी योनि को हथेलियों से ढके हुए थी।

इसी बीच मैंने उसकी दोनों टाँगों को पकड़े हुए ही उसके थाई के सामने आते हुए उसके लेफ्ट बूब के निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसा। जिससे शिल्पा की उत्तेजना बड़ी और उसने अपने दोनों हाथों को मेरे सर पर लेकर अपने बूब पर दबाया तो मैंने उसका लेफ्ट निप्पल छोड़कर उसके राइट निप्पल पर चुम्बन कर दिया।

उधर जैसे ही उसने अपना हाथ योनि से हटाया मैंने उसकी दोनों जाँघों को फैलाकर अपने आप को ऐसे फिक्स कर दिया कि उसकी योनि और मेरा तना हुआ लिंग एकदम आमने-सामने आ गए। पर अभी मुझे शिल्पा की योनि में अपने लिंग को प्रवेश कराने के लिए रास्ता बनाना था। मुझे उसकी योनि दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि मैं तो उसके स्तनों को चूस रहा था।

मेरी शिल्पा के साथ बाहर बारिश में संभोग करने की बड़ी इच्छा थी और आज मुझे यह मौका अनजाने में ही मिल गया था। फ्रेंड्स मेरा शिल्पा के साथ संभोग का कोई प्लान नहीं था जब वह मुझे नीचे खड़ी मिली थी। उधर मैं अपने लिप्स शिल्पा के लिप्स पर रख दिए जिससे उसकी मस्ती भी बढ़ जाए और वह बोलने की हालत में भी न रह पाए।

लिप लॉक पपी लेने में भी बड़ा मजा आता है फिर अगर शिल्पा की पपी लेने का तो मजा ही कुछ और है। उधर नीचे से मैंने अपनी फिंगर्स से शिल्पा की योनि एरिया का आइडिया ले लिया और अब मैं अपनी फिंगर से शिल्पा के योनि के अंदर लिंग प्रवेश हेतु स्थान बनाने के लिए अपनी फर्स्ट फिंगर उसकी योनि में डाल दी।

इस बार ज्यादा दिक्कत नहीं हुई तो मैंने तीन उँगलियाँ उसकी योनि के अंदर 1 इंच तक डाल दी। फिर मैंने अपने लिंग को उसकी योनि के पास लाया और अंदाजे से अपने लिंग का मुँह उसकी योनि के खुले कपाट पर रखकर अपनी उँगली बाहर निकाली और फिर एक जोरदार धक्का दिया पर मेरा लिंग उसकी योनि के अंदर तो नहीं गया पर इतना जरूर हुआ कि लिंग उसके योनि द्वार पर जाकर अटक गया और मैं अब उसे अंदर प्रवेश कराने के लिए रख सकता था।

शिल्पा की तो लगता था जैसे साँसें ही बंद हो जाती अगर मैं थोड़ा दे और ऐसा करता। शिल्पा की योनि का बुरा हाल हो गया था। अगर मैं नहीं होता तो वह अपनी योनि के अंदर कुछ भी डाल लेती। शिल्पा को मजा तो आ रहा था पर उसकी योनि की प्यास तरह से दूर नहीं हो रही थी।

वह मस्ती मेरे से चिपट गई जैसे कहना चाहती हो कि कब संभोग कब करोगे पर वह बोली कुछ नहीं। मैंने अपने आप को शिल्पा की दोनों टाँगों के बीच फिक्स कर रखा था और उसकी दोनों टाँगों को और फैलाकर उसकी योनि को और चौड़ा कर दिया।

मैंने बिना टाइम वेस्ट किए अपने लिंग को सीधा उसकी योनि के छेद में झोंक दिया और मेरा लिंग… मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो मेरा पूरा लिंग शिल्पा की योनि में कील की तरह ठोक गया। उसकी योनि चिकनी और गीली थी इसलिए अब मैं अपने लिंग को ऊपर-नीचे रगड़ने लगा तो शिल्पा की योनि में सरसराहट होने लगी।

शिल्पा ने भी नीचे से काउंटर अटैक कर दिया और अपनी गुदा का एरिया ऊपर को उठाकर खुद भी संभोग करवाने लगी। अब शिल्पा को दर्द नहीं हो रहा था और दोनों ही मस्त थे। वह बड़ी सैटिस्फाइड और हैप्पी लग रही थी। मैंने उसकी दोनों थाई को चिककर उसके बूब्स के ऊपर दबा दिया और उसकी योनि पर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

बेड पर इतना जबरदस्त तूफान आ गया था कि बुरा बेड ही हिल रहा था। कुछ मिनट तक इसी प्रकार संभोग करते हुए मेरे लिंग की उत्तेजना चरम पर आ गई तो मैंने अपनी रफ्तार कम की तो शिल्पा भी रिलैक्स हो गई। पर मैंने साथ-साथ शिल्पा पूरे बदन खासकर उसकी टाँगों और थाई को चूमना, चाटना, मसलना और रगड़ना चलू रखा था।

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मेरे इस एक्शन का शिल्पा भी समान जवाब दे रही थी बस जवाब के लिए उसके पास लिंग नहीं था। अचानक शिल्पा बेचैन सी हो गई और उसकी बेचैनी से मैं समझ गया कि वह गीली हो रही है और थोड़ी देर में मुझे उसकी योनि के अंदर गीला पन महसूस हुआ और अब वह कुछ सुस्त होकर रुक गई।

मैंने शिल्पा को फिर पहले वाली पोजीशन में करके अपने आप को उसके ऊपर ले आया और उसकी दोनों टाँगों को अपार्ट करके उसके ऊपर से धक्का लगाने लगा। अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ाकर शिल्पा की योनि को अपने लिंग से पूरी ताकत के साथ ठोकना शुरू कर दिया।

शिल्पा अब जोर-जोर से आवाजें निकाल रही थी पर अब वह पहले की तरह खुश नजर नहीं आ रही थी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था उसकी गीली योनि में मेरा लिंग फिसलता जा रहा था। मुझे वह इस तरह और एक्साइट कर रही थी और मैंने और जोर से उसकी योनि का मर्दन करने लगा।

मुझे शिल्पा की चीख में एक अलग ही मजा का एक्सपीरियंस हो रहा था और मैं और जोर से उसकी योनि को अपने लिंग से रोंद रहा था। करीब 2-3 मिनट बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और मैं थकने लगा तो मैंने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो शिल्पा थोड़ा रिलैक्स लगने लगी।

फिर से मैं अपनी पहली पोजीशन पर आ गया और अपने लिंग के प्रेशर को कम करने लगा। मैं अब अंतिम बार शिल्पा के साथ संभोग करना चाहता था। वह भी सबसे मुश्किल आसान यानी डॉगी स्टाइल में। शिल्पा अब मेरे ऊपर थी। मैंने उसे इतना उत्तेजित कर दिया था कि वह लाज-शर्म और अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। था तो बस वासना का जुनून।

अब वह बिल्कुल नहीं शर्मा रही थी जबकि यह हमारी पहली मुलाकात थी। मैंने उससे कहा कि वह बिना मेरे से अलग हुए मेरे शरीर के ऊपर एक राउंड इस तरह लगाए कि जैसे मेरा लिंग धुरी हो और वह पहिया। वह मेरी बात समझ गई पर करने में संकोच कर रही थी। मैं चित लेट गया तो वह कोशिश करने लगी और मैं भी उसको मदद करने लगा।

किसी तरह से वह अब ऐसे पोजीशन में थी कि उसकी गुदा का भाग मेरी तरफ था और मेरा लिंग उसकी योनि के अंदर ही था। मुझे ऐसा कोई एक्सपीरियंस पहले नहीं था फिर भी मैंने जब शिल्पा को डॉगी वाली पोजीशन बनाने का कहा तो उसने मेरी मदद की। उसको भी इसका एक्सपीरियंस नहीं था शायद पर मैंने वीडियो में देखा था और किसी तरह से मैं उसे करने में सफल हो गया।

तो मैंने शिल्पा को कमर से पकड़कर उसे घुटनों के बल कैटल की तरह लिटा दिया। फिर मैं भी अपने परियों पर नी को मोड़कर खड़ा हो गया और उसकी योनि का मर्दन करना शुरू कर दिया। बड़ी परेशानी हो रही थी पर शिल्पा को ज्यादा मजा आ रहा था।

इस पोजीशन में योनि और लिंग को स्थिर रखना बड़ा मुश्किल काम लग रहा था पर थोड़ी देर के बाद मैं आराम से उसकी योनि का इस पोजीशन में मर्दन करने लगा। मेरा लिंग फिर से उसकी योनि को रोंदने लगा और वह आवाजें निकालकर अपनी मस्ती जाहिर करने लगी।

पर इस पोजीशन में हम ज्यादा देर रह नहीं सके और जब एक बार मैंने जोर का धक्का लगाया तो शिल्पा दूर जा गिरी। मेरा तन हुआ लिंग बाहर आकर परेशान हो गया। उधर शिल्पा भी योनि में मेरे लिंग की कमी महसूस कर रही थी। वह चित लेट गई तो मैंने उसकी योनि में अपना लिंग इस बार बिना किसी परेशानी के डाल दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब मैं फिर से पूरी ताकत से उसकी योनि का मर्दन करने लगा और करीब 2 मिनट तक हम दोनों इसी प्रकार संभोग रत रहे। पर इसके बाद मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लिंग में कुछ सरसराहट सी हो रही है और अंदर नसों में कोई द्रव निकलने को बेताब है। मैं समझ गया कि अब मेरा लिंग स्खलित होने वाला है। शिल्पा तो शायद पहले ही गीली हो चुकी थी।

मैंने शिल्पा की योनि में अपना पूरा लिंग अंदर तक डालकर स्टॉप कर दिया। मेरे लिंग के अंदर से सारा रस धीरे-धीरे होता हुआ शिल्पा की योनि में जाता सा लगने लगा। उधर शिल्पा भी शायद अपनी योनि में मेरे लिंग का प्रभाव फील कर रही थी। वह हल्की सी आहें भरते हुए रिलैक्स और खुश नजर आ रही थी।

कुछ सेकंड्स के बाद मेरे लिंग का सारा रस उसकी योनि की गहराई में कहीं गुम हो गया। मैं एकदम सुस्त हो गया था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी पहाड़ पर चढ़ाई की हो और मेरा लिंग भी एकदम सिकुड़ गया था। मैं इतना सुस्त हो गया कि वैसे ही शिल्पा के ऊपर गिर गया और शिल्पा ने भी कोई जवाब नहीं दिया और हम दोनों ऐसे ही कुछ देर पड़े रहे।

फिर शिल्पा ने मेरे को अपने आप से अलग किया और मेरे गीले लिंग को देखने लगी। फिर उसने मेरे लिंग को अचानक अपने मुँह में लेकर चूस लिया। मुझे पहले अजीब पर बाद में अच्छा लगा। लेकिन उसने जल्दी से अपने मुँह से मेरे लिंग को छोड़ा और मुझसे बोली, “आप बाहर जाओ, मुझे शर्म आ रही है।”

अब मुझे भी होश आया तो मैं अपने आप को एक अनजान औरत के सामने नंगा देखकर शर्माने लगा। फिर मैंने भी अपने कपड़े पकड़े और बाथरूम में चला गया। जब तक मैं बाथरूम से बाहर आया, शिल्पा एकदम साड़ी पहनकर जाने को तैयार थी। बाहर बारिश भी रुक गई थी।

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अब दोनों सामान्य थे और ऐसा लग रहा था जैसे हमारे बीच कुछ हुआ ही नहीं हो। फिर मैं शिल्पा को छोड़ने नीचे तक गया और मैंने एक स्लिप पर अपना मोबाइल नंबर, नाम लिखकर उसके खुले हुए पर्स के अंदर डाल दिया। उसका ध्यान गया या नहीं पता नहीं। नीचे आकर शिल्पा एक बार मुझसे कहने को जैसे ही पलटी पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने उसका एक चुम्मा ले लिया तो उसने भी जवाब में मुझको किस किया और पलट कर तेजी से निकल गई और बाहर रोड क्रॉस करते हुए उस पार चली गई।

मैं बस उसे देखता रहा, न कुछ कह पाया और न ही कुछ समझ पाया। यह सब सपना सा लग रहा था। मैं जब रूम में ऊपर आया तो 10:35 का टाइम था। मैंने बाहर रोड पर देखा तो शिल्पा वहाँ पर नहीं थी पर वहाँ पर से एक कार अभी-अभी गुजरी थी। रात का सन्नाटा था और सुनसान सड़क। मुझे यह भी समझ नहीं आया कि यह सब ख्वाब था या हकीकत। मैं फिर अकेला था और अभी पूरी रात बाकी थी, यही सोचता हुआ मैं सोने की तैयारी करने लगा।

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