Assamese Bhabhi Chudai
मेरा नाम अमीषा है और मैं गुवाहाटी में रहती हूँ। मेरी उम्र 27 साल है और हाइट 5 फीट 4 इंच है। शादी को चार साल हो गए हैं लेकिन कोई भी बच्चा नहीं हुआ था। मेरा हस्बैंड (प्रमोद) गुवाहाटी में ही एक शॉप पर जॉब करते हैं और मुझसे बहुत ही लव करते हैं। मैं अभी तक प्रेग्नेंट नहीं हो सकी, उसकी वजह मुझे नहीं पता थी, लेकिन इच्छाएं बहुत थीं कि एक बालक तो होना ही चाहिए। Assamese Bhabhi Chudai
बस कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा, कोई भी सीरियस नहीं था। लास्ट ईयर 20 मई 2025 को एक रिश्तेदार की शादी थी जिसमें बहुत सारे लोग राजस्थान से आए थे जो कि मेरा नेटिव प्लेस है। और जब वो वापस जाने लगे तो मैंने भी राजस्थान जाने के लिए प्रमोद से बोला तो वो राजी हो गए।
उन लोगों में शैलेश भी आया था जो मेरी सिस्टर की ननद (सिस इन लॉ) का बेटा था और वो 2-3 दिनों के बाद में जाने वाला था तो प्रमोद ने मुझे उसके साथ ही जाने के लिए बोला। प्रमोद एक हैंडसम और मस्कुलर बॉडी वाला 27 साल उम्र वाला मर्द था और अकेला ही आया था।
वैसे तो वो शादीशुदा था और उसके दो बच्चे भी थे। 23 मई 2025 को हमारी ट्रेन थी लेकिन उसका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं था। इसके लिए उसने टीटी को पैसा देकर एसी फर्स्ट क्लास में रिजर्वेशन कन्फर्म करवा लिया था जो कि मेरा फर्स्ट एक्सपीरियंस था और वहाँ पर एक रूम में केवल दो बर्थ थीं।
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रास्ते में हम लोग घर-परिवार की ही बातें करते रहे और दोनों का कोई भी बद इंटेंशन नहीं था। कभी-कभी वो मजाक-मजाक में जोक भी सुनाता और हल्के से छू भी रहा था जिसका मुझे कोई आपत्ति नहीं थी। और देखते ही देखते रात भी होने लगी और हमने डिनर भी कर लिया था.
और मैं एक मैगजीन पढ़ने लगी और वो बोला कि मैं फ्रेश होकर चेंज करके आ रहा हूँ। मैंने कहा ठीक है और वो चला गया। जब वो वापस आया तो उसने व्हाइट शॉर्ट पहन रखा था और उसके शॉर्ट्स में बहुत बड़ा सा कुछ दबाया हुआ नजर आ रहा था तो मैंने बोला कि क्या बोतल को यहाँ पर क्यों रखा है.
तो वो जोर से हंसने लगा और बोला कहाँ है बोतल तो मैंने पकड़कर देखा तो वो उसका लंड था जो 10 इंच लंबा और बोतल के माफिक मोटा था। मैं तो देखकर घबरा ही गई थी और शर्म से लाल हो गई थी। लेकिन उसने बोला, “अमीषा मेरी एक प्रॉब्लम है कि जो भी औरत इसे हाथ लगाएगी वही औरत इसे शांत भी करेगी इसलिए अब तुम इसे शांत करो वरना मैं रात को सो भी नहीं सकता।”
यह बोलकर उसने अपना शॉर्ट उतार फेंका और उसका जंगली औजार मेरे सामने तना हुआ था और झूम रहा था। उसके बॉल भी बड़े-बड़े थे और चारों तरफ काले-काले कर्ली हेयर्स भी थे। उसे देख मैंने निगाहें झुका लीं और बोली, “हटाओ इसे मुझे शर्म आ रही है।”
लेकिन 20 मिनट तक वो नहीं माना और एक जिद्दी सांड की तरह खड़ा होकर मुझे सहलाना शुरू कर दिया था। मैं भी बेबस होकर उसका साथ देने लगी थी और मैंने बत्ती बुझाने के लिए बोला तो उसने बत्ती बंद करके मुझे उठाया और एक-एक करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे।
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मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी और मैं उसे चूमने लगी थी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी और सोच रही थी कि चुदवाऊँगी नहीं अन्यथा ये तो फाड़ ही देगा। तभी उसने मेरे बूब्स पर हाथ रखा और मैं सिहर उठी। उसने पीछे से चूतड़ पर दबाया तो ऊऊऊई…
मैं भी उसके लंड को ऊपर-नीचे कर रही थी और मेरी पैंटी अब पूरी भीग चुकी थी। वो कभी कहीं से कभी कहीं से मुझे दबाता जा रहा था और मैं भी ईऊऊ आह्ह्ह कर रही थी। उसने पीछे से मेरी ब्रा को अनहुक किया और मेरे मतवाले बूब्स को छूने लगा… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ऊऊऊई… बस अब छोड़ दो ज्यादा आगे मत बढ़ो लेकिन वो नहीं माना और बोलने लगा कि एक बार तुम्हारी चूत के दर्शन करवा दो। मेरे न करने पर भी उसने मेरी पैंटी उतार फेंकी। अब मैं उसके सामने बिल्कुल ही नंगी थी। वो मेरी झंटों पर हाथ फेर रहा था जो कि मुझे बहुत ही मजा दे रहा था।
उसका लंड भी मेरी टांगों के बीच फनफना रहा था और मेरे मुंह से अचानक निकल पड़ा कि “मुझे चोदो शैलेश चोद”। उसने बर्थ पर लिटाया और मेरी गांड के नीचे तकिया दबा दिया था। अब उसका लंड मेरी चूत पर टच हो रहा था। उसने 2-3 बार ट्राई किया लेकिन मोटा होने की वजह से फिसल रहा था।
तभी मैंने उसका लंड पकड़कर चूत के छेद पर टिकाया… ओऊई चीख पड़ी क्योंकि उसका आधा लंड मेरे अंदर जा चुका था। मेरे आँसू भी निकल पड़े तो वो रुक गया और धीरे-धीरे से धक्के लगा जा रहा था… सस्स्श्हह बस अब इतना ही… तभी उसने स्पीड… आह्ह्ह रुक… लेकिन वो तो बस पूरा अंदर डाल दिया था।
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तभी मुझे भी मस्ती चढ़ गई और बकने लगी… आह्ह्ह शैलेश चोदो और जोर से… आह्ह्ह मजा आ रहा है… आह्ह्ह ओह आई लव यू… गच्चा-गच्च की आवाजों के साथ वातावरण काफी सेक्सी था और वो भी ऊऊह्ह कर रहा था। बोला, “अमीषा तुम तो अभी तक कुँवारी ही हो।”
मैंने भी हामी भरी और बोली, “ह्ह्ह्हा बना दो आज मुझे पूरी औरत।” तभी उसने अपना गरम-गरम वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया और मैं भी उछल-उछलकर मजा ले रही थी। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे रहे फिर अपनी-अपनी बर्थ पर जाकर सो गए।
मॉर्निंग में मेरे से तो चलना मुश्किल लग रहा था। धीरे-धीरे अपने रूटीन वर्क के बाद टी और ब्रेकफास्ट किया तो वो मेरे सामने नंगा ही बैठकर मुझे घूर रहा था। बोला, “अमीषा रानी रात को कैसा लगा?” मैं तो बस शर्म रही थी। उह्ह नाक चढ़ाकर बोली। फिर वो मेरी सेक्स लाइफ के बारे में बातें करने लगा।
मैंने बोला, “अब कभी भी तुमसे नहीं चुदवाऊँगी क्योंकि तुम्हारा लंड तो खूंटे जैसा है। मेरे पति का लंड तो तुमसे हाफ से भी छोटा है और 2-3 मिनट में ही फ्री कर देता है। तुम तो बस हमारी रेल ही बना देते हो।” लेकिन उसने बोला कि “तुमने ही पूरा लंड अंदर डालने की जिद्द की थी।”
मैंने बोला, “हो ही नहीं सकता” और उसने बोला कि “मेरे पास प्रमाण है”। तभी उसने अपनी मोबाइल की रिकॉर्डिंग मुझे सुनाई तो मैं दंग रह गई। उसमें केवल मेरी चीख और चोदो पूरा डालो वाली आवाजें ही आ रही थीं। यह सब सुनकर उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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इस बार मैंने उसको मुंह में लेकर काफी देर तक चूसा। फिर उसने मेरे बूब्स चूसने लगा और मेरी गांड को साड़ी के बाहर से ही दबा रहा था। अब मैं तो सब भूलकर उसका साथ देने लगी और चिल्लाने लगी… प्फ्फाड़ दो चोदो… और इस बार एक ही धक्के में हाफ से ज्यादा लंड मेरी चूत में चला गया था।
मैं दो बार झड़ने के बाद उसका गरम-गरम लावा मेरी बुर को भर चुका था। ऐसे ही हमने 3 बार चुदाई की और सो गए। ईवनिंग में ट्रेन कानपुर स्टेशन पर खड़ी थी। शैलेश नीचे जाकर कुछ खाने के लिए लाया और खा-पीके हम दोनों बिल्कुल नॉर्मल और सेटिस्फाइड लग रहे थे।
तभी अनाउंसमेंट हुआ कि ट्रेन कैंसिल है क्योंकि जयपुर में गुर्जर लोगों ने दंगा-फसाद किया है और ट्रेन आगे नहीं जाएगी। मेरी मुश्किलें बढ़ रही थीं कि अब क्या करेंगे और देखते-देखते ट्रेन पूरी खाली हो गई थी। हम लोग स्टेशन से बाहर आकर एक होटल में रूम ले लिया।
शैलेश ने वहाँ पर रजिस्टर में अपना नाम-पता के साथ मेरे नाम के आगे वाइफ लिखा तो मैं तो बस सिहर उठी। सोचने लगी काश ये ही मेरा हस्बैंड होता। कितना मजा आता वगैरह-वगैरह सोचने लगी। तभी उसने एक चुटकी काटी बोली, “मैडम कहाँ खो गई हो? चलो रूम नंबर 410 अलॉट हुआ है।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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रूम बहुत ही आलीशान था। बाथरूम भी काफी बड़ा था जिसमें बाथ-टब और शावर लगे थे। शैलेश ने पीछे से आकर मुझे जकड़ लिया और बोला, “कैसा है रूम?” तो बोली कि “मुझे छोड़ो आज टब में नहाऊँगी।” उसने बोला, “अकेले ही या हमें भी इजाजत मिलेगी?” तो मैंने उसे बाथरूम में धक्का दिया और उसने मेरी बाहें पकड़ रखी थीं इसलिए मैं भी साथ ही उसके ऊपर गिर पड़ी। फिर हम दोनों ने 24 घंटे तक खूब मस्ती की और अगले दिन हम अपने गाँव पहुँच गए। उसके बाद शैलेश से मिलने का मौका ही नहीं मिला।
मैं तरसती रही। कई बार शैलेश से फोन पर ही बात हुई थी। 15-20 दिन बाद मुझे पता चला कि मैं तो प्रेग्नेंट हूँ तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था कि शैलेश को कैसे थैंक्स बोलूँ और मैंने उसे एक एसएमएस लिखा। वो मिलने तो आया लेकिन फकिंग का चांस नहीं मिला। उधर मेरे हस्बैंड को प्रेग्नेंसी की न्यूज मिली तो वो भी बहुत खुश हुआ। आज मेरे को 4 महीने का सन है और सेकंड प्रेग्नेंसी की तैयारी में हूँ। शैलेश ने भी मोबाइल नंबर चेंज कर लिया है। उसकी इंतजार में परेशान हूँ। मेरे पतिदेव को इसकी खबर नहीं है। उसी चुदाई की याद में कभी-कभी तो रोने भी लगती हूँ।
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