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एक माँ की कामुकता जाग गई

नवम्बर 5, 2026 by hamari Leave a Comment

Maa Beta Chudai Wali Sexy Kahani

चित्रा अपने बिस्तर पर बेचैनी से करवटें ले रही थी. उसे पिछले दो घण्टे से नींद नहीं आ रही थी. इस समय रात के दो बज रहे थे. उसका पति हमेशा की तरह खर्राटे ले रहा था. लेकिन उसे नींद न आने की कोई और ही वजह थी. अपने पति के खर्राटें के साथ सोने की तो उसे आदत पड़ चुकी थी. आखिरकार वो इन्हें पिछले 18 सालों से सुन रही थी. Maa Beta Chudai Wali Sexy Kahani

उसे तो थोड़ी देर पहले देखी एक फिल्म ने बेचैन कर रखा था. यह व्यस्क फिल्म थी. फिल्म की घटनाएँ बार-बार उसके दिमाग में आ रहीं थी. उसकी जिन्दगी भी फिल्म की हेरोइन से बहुत मिलती थी. उसे फिल्म में सब कुछ तो नहीं समझ में आया क्योंकि फिल्म अंग्रेजी में थी और उसे अंग्रेजी के कुछ शब्द ही आते थे.

फिर भी वो फिल्म का मतलब तो समझ ही गयी थी. फिल्म कि हेरोइन का पति भी उसके पति की तरह अपनी मर्दानगी खो चुका था. पहले वो औरत 5 सालों तक बिना सेक्स के रहती है फिर टूट जाती है और विवाहेतर सम्बन्ध बना लेती है. पिछले दो घंटे से वो अपनी जिन्दगी के बारे में सोच रही थी.

उसके पति उमेश 6 साल पहले अपना पुरूषत्व खो चुका था. बिना सेक्स के रहते हुये उसे अब 6 साल हो गये थे. इन 6 सालों से जैसे-तैसे वो सहन कर रही थी पर आज की रात यह सब असहनीय हो रहा था. उसे लगा कि क्या वो जिन्दगी में फिर से कभी सेक्स नहीं कर पायेगी.

कभी- कभी वो अफेयर बनाने के बारे में सोचती थी. पर उसे डर लगता था कि अगर किसी को पता चल गया तो? वो ये सब खतरे मोल नहीं लेना चाहती थी. पर सच यही था कि आज उसे एक मर्द की जरूरत थी क्योंकि उसका अपना पति नामर्द था. वो दिखने में बुरी नहीं थी. वास्तव में इस समय बिस्तर पर वो काफी आकर्षक लग रही थी.

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वो साड़ी में थी. प्रायः बिस्तर पर जाने से पहले वो गाउन बदल लेती थी पर आज उसका मन ही नहीं किया. उसका एक सुन्दर चेहरा था जो कि उदासी कि वजह से थोड़ा दयनीय लग रहा था. उसकी त्वचा का रंग एक औसत भारतीय औरत जैसा था. बाल लम्बे थे. थोड़ा मोटापा पूरे शरीर पर चढ़ गया था. इससे उसका आकर्षण और भी बढ़ गया था.

उसकी स्तन बड़े और अभी भी सुडौल थे जबकी अब वो 40 साल की हो रही थी और दो लड़कों की माँ थी. उसका बड़ा बेटा आकाश 18 साल का था और छोटा विक्की 16 का. उसे थोड़ी प्यास लग रही थी. इसलिये वो उठी और रसोई की ओर चल दी. वो रसोई में घुसने ही वाली थी तभी उसने अचानक देखा कि आकाश के कमरे से धीमी रोशनी आ रही थी.

वो चक्कर में पड़ गयी क्योंकि आकाश कभी भी कोई लाईट जला कर नहीं सोता था. इसलिये वो समझ गयी कि आकाश जग रहा था. पर उसे आश्चर्य हुआ कि इतनी देर रात तक आकाश क्यों जगा हुआ है? वो उसके कमरे की ओर चल पड़ी. दरवाजा थोड़ा सा खुला था. उसने दरवाजा खोल दिया.

जो कुछ भी उसने देखा, उसे देख कर वो हतप्रभ रह गयी. आकाश बिस्तर पर बैठा था. उसकी पैंट और अंडरवियर घुटने तक उतरे हुये थे. एक हाथ से वो मोबाइल पकड़े हुये था. उसके दूसरे हाथ में उसका खड़ा लंड था. आकाश भी पूरी तरह हतप्रभ रह गया. कुछ समय तक दोनों को ही समझ नहीं आया कि क्या करें?

फिर आकाश ने अचानक बिस्तर पर पड़े कम्बल से अपने आप को ढक लिया. वो बहुत ज्यादा शर्म का अनुभव कर रहा था. उसने अपने आप को दरवाजा बन्द न करने के लिये कोसा. चित्रा को भी शर्म आ गयी. वैसे इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी. आखिर वो तो कुछ गलत करते हुये नहीं पकड़ी गयी है.

पर वो शर्म का अहसास जा ही नहीं रहा था. उसे लगा कि क्या उसे आकाश को कुछ कहना चाहिये, पर क्या? इस पर उसे कुछ नहीं सूझा. वो अपने कमरे में वापस चली गयी. जैसे ही वो अपने बिस्तर पर लेटी, उसे अचानक अहसास हुआ कि उसकी चूत में गीलापन आ गया है.

उसके मन में अपराध बोध जाग गया और यह भी पता चल गया कि उसे शर्म क्यों आ रही थी. चूंकि उसके शरीर में अपने ही बेटे की नग्नता को लेकर उत्तेजना दौड़ गयी थी इसलिये दिमाग ने उसे शर्म का अहसास करा दिया था. अचानक ही, पैंट उतारे हुये बेटे की छवि उसके दिमाग में आ गयी और उसे पूरे शरीर में गुदगुदाहट भरी सनसनी का अनुभव होने लगा.

इस गन्दगी को दिमाग से निकालने के लिये वो कुछ और सोचने लगी पर वो छवियाँ घूम- घूम कर उसके दिमाग में आने लगी. गुदगुदाहट भरी सनसनी और तेज हो गयी तथा उसे अब ये मानना ही पड़ा कि यह सब सोचना उसे अच्छा लग रहा था. उसने अपनी उत्तेजना दबाने की कोशिश की तो वो और तेज हो गयी.

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थोड़े समय बाद उसने यह संघर्ष छोड़ दिया. वो अपने मन में अपने की बेटे के सख्त अंग की तस्वीर याद करने लगी. उसने उसके आकार के बारे में सोचा. वो उसके आकार से दंग रह गयी. आखिरकार, आकाश 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला एक बच्चा ही तो था. तो भी उसका आकार चित्रा को अपनी हथेली से बड़ा लग रहा था.

जब ये सब उधेड़बुन उसके दिमाग में चल रही थी, तभी अचानक उसके ख्याल आया कि अगर वो चाहे तो उसका बेटा उसकी आवश्यकतायें पूरी कर सकता है. जिस चीज की उसे इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है, वह उसे अपने बेटे से मिल सकती है. इस खयाल ने उसे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया.

वह जानती थी कि यह पाप है पर इस समय उसे यह सब इतना अच्छा लग रहा था कि उसने पाप-पुण्य के बारे में सोचना छोड़ दिया. उसे लगा कि जब यह ख्याल ही उसे इतना अच्छा लग रहा है तो वास्तविकता में कैसा लगेगा. वो लगभग आधे घण्टे तक यहीं सब सोचती रही.

फिर अचानक ही उसकी इच्छायें नियंत्रण से बाहर होने लगी. वो बिस्तर से उठी और बाहर चली गयी. उसके मन के किसी कोने में यह ख्याल भी आ रहा था “चित्रा, तू पागल तो नहीं हो गयी! क्या करने जा रही है तू! वो तेरा अपना बेटा है!!”. लेकिन वो इतनी ज्यादा उत्तेजित थी और 6 साल की अतृप्त कामोत्तेजना इतनी तीव्र हो चुकी थी कि उसने आत्मा की आवाज को अनसुना कर दिया.

आकाश के कमरे की तरफ बढ़ते समय उसके मन में कई आशंकायें थी. क्या आकाश को वो आकर्षक लगेगी? क्या वो इसके लिये तैयार होगा? क्या इस विचार से वो घृणा करेगा? लेकिन अब उसे इस सब की कोई चिंता नहीं थी. वो अपनी जरूरतों के चलते पागल सी हो चुकी थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

आकाश ने अब तक दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया था. उसने धीरे से खटखटाया. 2-3 बार खटखटाने पर दरवाजा खुला. कमरे में अंधेरा था पर धीमी रोशनी में वो आकाश को देख सकती थी जो उसे इस समय आया देख उलझन में पड़ा हुआ था. वो कमरे में घुस गयी और बल्ब जलाकर पीछे से कमरा बन्द कर लिया.

आकाश को यह लगा कि वो जरूर उसे डाटने आयी है और बताने आयी है कि वो उसकी इस हरकत से कितना शर्मिन्दा है. अपना मुंह झुकाकर वो इसकी प्रतीक्षा करने लगा. लेकिन उसे ये सुनकर अचम्भा हुआ कि “आकाश मैं तुझे डाटने नहीं आयी हूँ. मैं दरअसल यहाँ सोने आयी हूँ. तेरे पापा वहाँ इतनी आवाज कर रहे हैं कि मुझे नींद नहीं आ रही है”.

यह कह कर चित्रा बिस्तर पर लेट गयी. “चल अब तू भी आ जा”. आकाश ने उसे थोड़ी उलझन से देखा पर कहना मानते हुये उसके पास जाकर बैठ गया. चित्रा कुछ समय तक चुप रही फिर उससे पूछा “आकाश, तू वो रोज करता है?”. उसने शरमाते हुये अपनी गरदन हिला दी. “वो मूवी कौन सी है, जिसको तू देख रहा था उस समय? मुझे दिखा जरा.”

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आकाश ने उसे आश्चर्य से देखा कि वो मूवी क्यों मांग रही है. पर जब उसने दुबारा मूवी मांगी तो आकाश ने मूवी चलाकर कर दे दी. चित्रा ने मोबाइल हाथ में लिया और मूवी देखने लगी. यह दो लड़कियों के लेस्बियन सेक्स करने की मूवी थी. “आकाश इनमें से सबसे अच्छी कौन सी लगती है तुझे?”

जैसे ही आकाश ने यह सुना उसे उत्तेजना का अनुभव हो लगा. यद्यपि वो अभी भी बहुत उलझन में था. जो कुछ भी हो रहा था, उस पर यकीन करना कठिन था- उसकी माँ रात के 4 बजे उसके पास लेटी हुयी एक सेक्सी मूवी देख कर उसके बारे में पूछ रही हैं! उसे अपनी माँ के इरादों के बारे में कुछ भी पता नहीं था, लेकिन यह लगने लगा था कि कुछ दिलचस्प होने वाला है.

चित्रा ने एक बार फिर उससे पूछा “बता ना, सबसे अच्छा कौन लगती है तुझे?”.

आकाश ने शरमातें हुये मोबाइल ली और अपनी मन पसन्द लड़की की तरफ ऊँगली की. चित्रा ने लड़की को देखा. वो एक बड़ी छातियों वाली सेक्सी लड़की थी. चित्रा ने लड़की की छातियों की तरफ इशारा करते हुये आकाश से पूछा “ये इतने बड़े-बड़े है, इसलिये अच्छी लगती हैं ना तुझे?”

आकाश अबतक बुरी तरह से उत्तेजित हो चुका था. उसने अपनी माँ के चेहरे की ओर देखा. जो उसकी ओर बड़ी ममता और स्नेह से देख रही थी. फिर वो मुस्करायी और बोली, “आकाश इतना शरमा मत. मेरे सवाल का जवाब दे ना”. आकाश ने सिर हिलाया. बड़ी छातियों की वजह से ही वो लड़की उसे इतनी पसन्द थी.

चित्रा अब तक पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी. उसने सोचा कि यही समय वो पता करने का है जो वो अपने बेटे से चाहती थी. उसने साड़ी का पल्लू एक तरफ गिरा कर अपनी छातियों को अपने हाथों में भर लिया और बोली, “देख, मेरे तो इस लड़की से भी ज्यादा बड़े है”.

यह सुन कर आकाश उसके चेहरे को एकटक घूरता ही रह गया. उसका आवेश अब चेहरे पर साफ झलक रहा था, यह देखकर चित्रा का साहस और बढ़ गया. “रूक मैं तुझे ब्लाउज खोल कर दिखाती हूँ”. यह कह कर उसने तेजी से अपना ब्लाउज खोल दिया. ब्रा में कस कर बन्धी उसकी छातियाँ सामने आ गयी.

अब वो आकाश का एक हाथ ब्रा के हूक पर ले गयी और खोलने को कहा. कपकपांते हाथों से आकाश ने हूक खोल दिया. चित्रा ने जल्दी से ब्रा उतारी और फर्श पर फेंक दी. आकाश उसकी सुन्दर छातियों को एकटक घूरने लगा. वो बड़ी और सुडौल थीं तथा बाकी के शरीर की तरह ही साँवली थीं. चूचिया (निप्पल) बड़ी थी और सख्त लग रही थी.

आकाश पहली बार किसी औरत की छातियाँ देख रहा था और ये छातियाँ किसी और की नहीं बल्कि उसकी अपनी माँ की है, यह ख्याल उसे बुरी तरह उत्तेजित कर रहा था. इतना आवेश उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया था. अभी तक आकाश ने अपनी माँ के अलावा किसी ओर नजर से नहीं देखा था पर पहली बार उसे लगा उसकी माँ भी एक सेक्सी औरत है.

वास्तव में उसके स्कूल के दोस्त अगर उसकी माँ को देखेंगे तो “माल” बोलेंगे. आकाश अब चित्रा की छातियों को छूने के लिये बेताब हो रहा था और जब चित्रा ने उससे शरारती आवाज में कहा, “आकाश, इनको छूने का मन नहीं कर रहा क्या तेरा?”, उसने तुरंत अपने हाथ चित्रा की छातियों पर रख दिये.

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छातियों पर फेरते समय उसके हाथ उत्तेजना से काँपने से लगे. उसके दिमाग में कहीं न कहीं यह था कि जो कुछ हो रहा है वो गलत और पाप है पर अत्यधिक काम-वासना के कारण अपनी माँ की तरह वो भी आत्मा की आवाज की परवाह नहीं कर रहा था. फिर भी उसे यह सोचकर डर लगा कि कहीं उसके पापा उठ गये और उन्होंने उन लोगो को इस तरह देख लिया तो!

इसलिये उसने अपनी माँ से कहा,”मम्मी, पापा या विक्की जाग गये तो!”.

चित्रा जानती थी कि जो कुछ भी वो कह रहा था वो नामुमकिन नहीं था. लेकिन उमेश बहुत गहरी नींद में सोता था इसलिये उसके जागने की सम्भावना बहुत कम थी. उसका छोटा बेटा विक्की भी गहरी नींद में सोने वालों में था. इससे भी ज्यादा इस समय उस के ऊपर वासना इस कदर सवार थी कि अब वो रुकना नहीं चाहती थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

बड़ी मुलायम और शान्त आवाज में वह बोली,”उसकी चिंता मत कर. तेरे पापा रात को एक बार सोते हैं, तो फिर सीधा सुबह को ही उठते हैं. और तेरा छोटा भाई भी वैसा ही है.”

अब दोनों ही संयम खोते जा रहे थे. और अब तक उन्हें पता चल गया था कि उन्हें एक दूसरे की जरूरत है. नमता भी उतावली होने लगी थी. जल्दी से उसने अपने बेटे की शर्ट खोल दी. फिर पैंट खोल कर घुट्ने तक उतार दी. लंड के कसाव के कारण उसकी अण्डी एक तम्बू की तरह लग रही थी.

व्यग्रता से चित्रा ने उसे नीचे उतार दिया. वो एकटक अपने बेटे के पूरे कसाव को देखने लगी. प्यार से उसने लंड को हाथ में लिया और कोमलता से उसे सहलानी लगी. वो नहीं चाहती थी कि आकाश का अभी से वीर्य पतन हो. उसे लगा कि अब पूरे कपड़े उतारने का समय आ गया है.

वो बिस्तर के पास खड़ी हो गयी और अपनी साड़ी उतार दी. इसके बाद पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, पेटीकोट घुटनों से होता हुआ फर्श पर गिर पड़ा. फिर उसने पहले से ही खुले हुये ब्लाउज को उतार कर फर्श पर फेंक दिया. जब पेंटी की बारी आयी तो उसने सोचा कि ये काम आकाश को करने देते हैं. “आकाश ये उतार”.

आकाश उत्साहपूर्वक उसकी पेंटी उतारने लगा. माँ की रोयेंदार झाड़ियाँ सामने आने पर उसने किसी तरह अपनी उत्तेजना को दबाया. उन रोयेंदार झाड़ियों के बीच ही उसकी माँ की चूत थी. वो इतनी सुन्दर लग रही थी कि वो उसे छूने के लिये उतावला हो गया.

अपनी पेंटी उतारने के बाद चित्रा ने अपने बेटे को पूर्ण नग्न होने में मदद की. फिर वो बिस्तर पर लेट गयी और आकाश से फुसफुसा कर बोली, “चल मेरे उपर आ जा”. आकाश के ऊपर आने पर चित्रा ने उसे अपनी बाँहों मे कस लिया. दोनों ने एक क्षण के लिये एक दूसरे को देखा.

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अब चित्रा ने फुसफुसा कर कहा, “आकाश, एक पप्पी दे अपनी मम्मी को”. यह सुनते ही उसने अपने होंठ चित्रा के होंठों पर रख दिये. मुंह खोलने पर जब उनकी जीभें मिली तो ऐसे आनन्द की अनुभूति हुयी, जो पहले कभी भी नहीं हुआ था. इस चुम्बन के बाद आकाश की झिझक खत्म हो गयी.

चित्रा को अब उसे कुछ भी समझाने की जरूरत नहीं थी. उसने चित्रा के शरीर के हर हिस्से को बड़े ध्यान से देखा. उसके पूरे चेहरे को चूमने के बाद वो नीचे की ओर गया और छातियाँ चूसने लगा. आकाश ने उसकी छातियों को पुचकारा, गुदगुदाया,चूसा और सहलाया. अब चित्रा के मुंह से कराह निकलने लगी.

तब अचानक वो बोली, “आकाश एक पप्पी दे”. आकाश उसके मुख को चूमने ही वाला था कि वो मुस्करायी और बोली, “बुद्धु कही का, इन होंठों पर नहीं, नीचे वाले होंठों पर पप्पी चाहिये मुझे”. आकाश थोड़ी देर के लिये शरमाया फिर वो नीचे मुड़ गया. अपना मुंह उसकी चूत के पास ले जा कर वो थोड़ी देर के लिये रूक गया.

वहाँ से कस्तूरी जैसी गन्ध आ रही थी और उसे यह गन्ध बड़ी मादक लगी. उसने एक गहरी सांस नें इसे भर लिया और अपने होंट अपनी माँ की चूत के होंटों पर रख दिये. उसने कुछ समय पहले एक फोटो देखी थी जिसमें एक आदमी एक औरत की चूत चाट रहा था, उस समय उसे यह सब बड़ा घृणित लगा था.

पर इस समय बड़ा प्राकृतिक और सुन्दर लग रहा था. आकाश ने जब चूत को फैलाया और चूत पर गुदगुदाया तो चित्रा तेजी से कराहने लगी. जल्दी ही उत्तेजना अनियंत्रित होने लगी, अब चित्रा अपने बेटे को अपने अन्दर चाहती थी. वो कराहते हुये बोली, “आकाश अब अपनी मम्मी के अन्दर आ जा”.

आकाश ने एक बार उसकी चूत को चूमा, फिर अपना चेहरा उसके चेहरे के पास ले आया. उन्होनें कुछ समय तक एक दूसरे को देखा, फिर आकाश ने अन्दर डालना शुरू किया. अपने अनुभवहीनता के कारण आकाश लड़खड़ाया तो चित्रा ने उसे अपने अन्दर घुसाने में मदद की. लेकिन आकाश ने तुरंत ही बाहर निकाल लिया.

चित्रा ने पूछा,”क्या हुआ?”

आकाश ने उत्तर दिया,“ मम्मी कंडोम तो है नहीं. आप प्रेग्नेंट हो गयीं तो!”.

चित्रा ने सोचा कि वो सच कह रहा था. वो प्रेग्नेंट हो सकती थी. लेकिन काम-वासना के कारण उसे इसकी कोई परवाह नहीं थी. वो उतावली होकर मुलायम आवाज में बोली, “ मुझे परवाह नहीं उसकी. अभी बस मुझे तेरा प्यार चाहिये. चल फिर से अन्दर आ, जल्दी से. अगर प्रेग्नेंट होती हूँ, तो होने दो”.

इसलिये आकाश ने एक बार फिर से उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया. वो थोड़ा रुका फिर उसके अन्दर जाने लगा. इस समय चित्रा एक हाथ से उसकी पीठ सहला रही थी और दूसरा हाथ को उसके बालों में फिरा रही थी. यह सब बहुत समय तक नहीं चला.

2-3 मिनट के बाद ही आकाश उसके अन्दर फूट पड़ा. चित्रा को एक क्षण के लिये गुस्सा आया क्योंकि अभी वो संतुष्टि के आस-पास भी नहीं थी. लेकिन उसे जल्दी ही याद आ गया कि यह उसके बेटे का पहला मौका है. उसने उसके दुबारा कड़ा होने का इंतजार किया और इस बार जब उसने अन्दर किया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो बोली, “आकाश इस बार आराम से करना. जल्दबाजी मत करना.”

“ठीक है?” आकाश ने गरदन हिलायी.

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इस बार सब कुछ अच्छा गया. चित्रा को ऐसे चरम सुख का अनुभव हुआ जिसने उसके शरीर को कंपा कर रख दिया. आकाश का भी वीर्य-पतन हो गया. उन्होंने 3 बार और सेक्स किया और जब वो इससे निपटें किया तो 5.30 बज चुके थे. वो दोनों अब थका हुआ महसूस कर रहे थे. इससे भी ज्यादा, उन्हें इस बात का डर था कि उमेश या विक्की किसी भी समय उठ सकते हैं. इसलिये बेटे को अंतिम बार चूमने के बाद चित्रा ने अपने कपड़े उठाये और अपने कमरे में चली गयी. उस दिन जब दोपहर में वो लोग अकेले थे हो फिर से सेक्स किया.

चुदाई समाप्त होने के बाद चित्रा को एक अच्छा विचार आया. उस रात खाने के समय उसने अपने पति से खर्राटे के बारे में शिकायत की और कहा कि उसके लिये खर्राटे अब असहनीय हो गये हैं. इसलिये अब वो दूसरे कमरे में सोयेगी. उमेश यह बात मान गया. उस दिन के बाद से चित्रा दूसरे कमरे में सोने लगी. यह कमरा आकाश के कमरे के पास था और इसमें दोनों कमरों को जोड़ने वाला एक दरवाजा भी था. इसलिये हर रात चित्रा चुपके से आकाश के कमरे में आ जायेगी या वो उसके कमरे में आ जायेगा और वो बिना डरे सेक्स कर पायेंगे.

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