Sex Ki Pyas Hindi Kahani
ये बात आज से 7 साल पहले की है। जब भोपाल के दो अलग अलग गांवों के विकास और उसकी बुआ का लड़का प्रवीण दोनों एक ही क्लास में पढते थे। अब दोनों का परिचय भी करवा दूं। विकास की उम्र 18 साल और प्रवीण की उम्र 19 साल, दोनों कद काठी के लम्बे, गोरे रंग और कसरती शरीर वाले नौजवान है। Sex Ki Pyas Hindi Kahani
दोनों इक्कठे एक ही कक्षा की पढ़ाई करने की वजह से छूटी वाले दिन एक दूसरे के घर चले जाते थे। दोनों अपने दिल की अच्छी बुरी बात एक दूसरे से शेयर कर लेते थे, पूरा दिन क्लास में भी किसी लड़की की बाते करना, उसे किस पोज़ में चोदना है, उस समय कैसा मुँह बनाएगी, दर्द होने पे कैसे चिलायेगी, कैसे रोयेगी, कैसे मना करेगी, उसका नंगा बदन कैसा होगा आदि सब बातो को कॉपी करते और ठहाका लगाकर हँस पड़ते।
ऐसे ही खयाली पुलाव पकाते पकाते उन्हें पता नहीं लगा कब उनकी कल्पना की उड़ान क्लास से उड़कर उनके रिश्तेदारी एवम् परिवार में आ गयी। दोनों दोस्त काम वासना में इतने अंधे हो गए के अपनी रिश्तेदारियों की सभी स्त्रियों को ख्यालों में चोदने की प्लानिंग करने लगे।
एक दिन की बात है के स्कूल में छूटी की वजह से प्रवीण, विकास के घर यानि के अपने नौनिहाल आता है। विकास की माँ मधु जो के एक हाउसवाइफ है और रिश्ते में प्रवीण की मामी भी है। उसकी उम्र 40 साल के करीब थी। वो जैसे ही नहाकर बाथरूम से बाहर निकली तो ब्रा और पैंटी में, ऊपर से तौलिया लपेटे हुई थी और भाग कर अपने कमरे की तरफ जा रही थी।
इतने में प्रवीण का बाथरूम में पेशाब करने आना हुआ। दोनों आपस में भिड़ गए तो उसकी मामी का लपेटा हुआ तौलिया खुल गया और वो तौलिया सम्हालती सम्हालती खुद गिर पड़ी। प्रवीण की तो जैसी किस्मत खुल गयी। उसकी आँखे मामी के सुडोल बदन को घूर घूर कर देखे जा रही थी।
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जिसका मामी को भी पता चल चूका था। वो खुद का तौलिया ठीक करते हुए थोडा गुस्से से बोली “देख कर नहीं चल सकते क्या तुम, इतनी भी क्या जल्दी थी जो 6 फ़ीट की औरत नहीं दिखी? अब आँखे फाड़ फाड़ कर क्या देख रहे हो, हाथ पकडाओ और मुझे उठने में मदद करो? ध्यान किधर था तेरा?”
प्रवीण – (हाथ बढ़ाते हुए) – सॉरी मामी जी वो पेशाब का प्रेशर ज्यादा होने की वजह से गौर नहीं किया के आप आगे आ रहे हो नहो तो भूल कर भी आपके रास्ते में न आता। अब माफ कर दो आगे से ऐसा नहीं होगा।
मामी बड़बड़ाती उठ कर अपनी कमर मटकाती आपने कमरे में चली गयी और प्रवीण उसकी मटकती गांड देखता रह गया और पेशाब करने चला गया। बस उसी दिन से उसकी कल्पना की दुनिया में एक और स्त्री यानि की उसकी अपनी मधु मामी भी जुड़ गयी।
प्रवीण सोते जागते बस उसी के ख्यालों में खोया रहता। ऐसे ही एक दिन क्लास में बैठे बैठे प्रवीण कही खोया हुआ था, तो विकास ने बोला,” क्यों बे साले किसकी यादों में खोया हुआ है, सतना वाली भाभी या इंदौर वाली मौसी, दोनों ने ठहाका लगाया और हँसने लगे।
प्रवीण – नहीं यार इस बार एक नई मछली नज़र में आई है, पर तुझे नहीं बताऊंगा क्योंकि तू उसे बखूबी जानता है और मेरा बनता काम बिगड़ देगा। इस लिए तुझे कोई हिंट भी नहीं दूंगा।
विकास — बोल न यार कौन है, जिसे मैं जानता हूँ? मेरी नज़र में कोई ऐसी मछली नहीं है। जिसका हमने आज तक जिक्र न किया हो।
(अब उसे क्या पता, के उसकी ही माँ को चोदने की प्लानिंग बन रही है.)
प्रवीण — ह्म्म्म…. कोई भी नहीं है. छोड़ यार कोई और बात करते है।
विकास – नहीं पहले बताओ मुझे।
प्रवीण — नहीं यार कुछ नहीं बस ऐसे ही मज़ाक में बोल दिया मैंने तो। और बात टाल दी!
एक दिन विकास को बुखार था तो वो पूरा दिन स्कूल नहीं गया। उसी दिन स्कूल से आते वक़्त प्रवीण ने विकास का पता जानने के लिए उसके घर की तरफ आने वाली स्कूल वैन पकड़ ली ओर घर आकर अपने घर फोन कर दिया के आज रात यही रुकेगा सो फिक्र न करना।
उसी रात विकास के पापा को दफ्तर के कामकाज के सिलसिले में दिल्ली जाना था। तो वो प्रवीण से बोले, “अच्छा हुआ प्रवीण बेटा तू आ गया। मेरी एक चिंता तो खत्म हुई। अब मैं आसानी से जा सकूँगा। मुझे तो अब जाना पड़ेगा तू विकास, अपनी मामी और घर का ख्याल रखना, मैं बस एक दो दिन तक वापिस आ जाऊँगा। तब तक यही रुकना.”
फिर थोड़ी देर बाद विकास के पापा अपने काम पे चले गए। अब घर में विकास, प्रवीण और उसकी मामी यानि विकास की माँ तीनों रह गए। सबने मिलकर खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे। विकास को बुखार था तो उसकी माँ ने उसे अपने पास ही सुला लिया और प्रवीण को भी अपने पास सोने का आग्रह किया।
प्रवीण के पैर ख़ुशी से ज़मीन पर नहीं लग रहे थे। क्योंकि उसे अपने ख्यालों की रानी के साथ सोने का मौका जो मिल रहा था। एक डबल बेड पे तीनों जने सोये हुए थे। सबसे आगे की तरफ विकास, फिर बीच में उसकी माँ और फिर उसके पीछे प्रवीण। रात को मधु नाइट सूट पहनती थी।
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कुछ देर बाते करने के बाद जब तीनों गहरी नींद में सोये हुए थे तो प्रवीण बाथरूम जाने के लिए उठा। जब वापिस आया उसके दिमाग में आया क्यों न एक बार ट्राई करके देखा जाये। शायद जाल सही फेंका गया तो मछली सदा के लिए अपनी बन सकती है।
उसने अँधेरे का फायदा उठाते हुए ही अपनी मामी के साथ लिपट गया और ऐसे करने लगा जैसे के सब नींद में हुआ हो। जब आगे से कोई विरोध नहीं हुआ फिर उसने हिम्मत करके अपना हाथ मामी के मम्मो पे रख दिया। जब फिर कोई विरोध न हुआ तो उसकी हिम्मत बढ़ती गयी और उसने कपड़ों के ऊपर से ही धीरे धीरे मम्मो को दबाने लगा। जिस से उसको बड़ा मज़ा आने लगा।
फिर हिम्मत करके गालों को चूमने लगा, फिर पेट से कपड़ा उठाकर, पेट को सहलाने लगा। इतने में मामी ने अपनी साइड बदल ली, अब प्रवीण की तरफ मामी की गांड हो गयी। उसने धीरे से गांड के ऊपर से नाइटी उठाई और गांड सहलाने लगा और अपना लंड निकाल कर कपड़ों के ऊपर से ही मामी की गांड में घुसाने लगा और थोड़ी देर बाद इसने मामी के कपड़ों पर ही वीर्य निकाल दिया और अपने कपड़े ठीक करके सो गया।
सुबह जब उठा तो मामी का नॉर्मल व्यवहार देखकर उसकी जान में जान आई। उसे लगा के यदि मामी को पता चला होता तो मुझे डाँटती भी, इधर डाँटना तो दूर की बात, हंस हंस कर बात कर रही है। लगता है तीर सही जगह पर लगा है। या तो उसे पता ही नहीं लगा। या फिर ऐसा भी हो सकता है उसे पता चल गया हो और उसे मेरा ऐसा करना अच्छा लगा हो।
वैसे भी विकास के पापा बाहर ही रहते है, अपना काम आसानी से बन जायेगा और कोई शक भी नहीं करेगा। इसी गलतफहमी में वो आगे बढ़ता जा रहा था। अब अगले दिन विकास भी ठीक हो चूका था सो दोनों तैयार होकर स्कूल चले गए। फिर एक महीने बाद की बात है के एक बार रविवार के दिन सुबह ही प्रवीण, विकास के घर उससे मिलने आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तब विकास और उसके पापा सैर करने गए थे। बस मधु के इलावा घर में कोई नहीं था। सो अकेली होने की वजह से खिड़की, दरवाज़े बन्द करने की ज्यादा जरूरत नहीं समझी। इधर प्रवीण ने घर के अंदर आते ही आवाज़ दी, ओऐ विकास किधर है तू, बाहर आ।
आगे से कोई जवाब नहीं आया, एक दो आवाज़ फिर दी पर इस बार भी कोई नहीं बोला। सोचने लगा इतनी सुबह सुबह सब किधर चले गए। जब विकास के कमरे की तरफ जाने लगा तो क्या देखता है, उनके घर के बाथरूम से पानी चलने की आवाज़ आ रही है और बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है।
उसने सोचा कौन है जो दरवाजा खोलकर नहा रहा है। जब उसने दरवाजे की तरफ नज़र मारी तो क्या देखा के उसकी मामी बाथरूम में नहाकर वही खड़ी होकर पेटीकोट पहन रही है और अब कमर तक पेटीकोट उठाया हुआ है, और दाईं टांग उठाकर पेंटी पहन रही है, उसका पतला स्पॉट पेट, अंदर धँसी हुई नाभि और उसकी चूत पे घने घुंघराले काले बालो का गुच्छा उगा हुआ है।
वो अपने काम पे इतनी डूबी हुई ऐ उसे पता ही नहीं चला के कोई उसे देख भी रहा है। प्रवीण एक दीवार के पीछे छिप कर मामी को निहारने लगा और उसके दिमाग पे इस दृश्य का ऐसा असर हुआ के वो अपना लंड निकाल कर मुठ मारने लगा और करीब 5-7 मिनट बाद एक लम्बी आह्ह्ह्ह से दीवार पे ही झड़ गया। जिससे उसकी मामी का ध्यान भी अपनी तरफ से टूट गया और उसकी तरफ देखने लगी। अभी भी सिर्फ उसने पेंटी पहनी थी।
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प्रवीण को इस हाल में देख कर मामी के गुस्से का ज्वालामुखी फट गया और बोली, “प्रवीण यह क्या बेहूदा हरकत है। शर्म आनी चाहिए तुझे, मामी हूँ तेरी मैं, कोई गर्लफ्रेंड या रंडी नहीं जिसे अपना काला लंड दिखा रहा है। आज आने दो तेरे मामा और विकास को सब बताती हूँ के इसके दिमाग में क्या चल रहा है आजकल। उस दिन रात को तुमने जो किया मुझे सब पता है। मैं तेरा मुंह उसी वक़्त भी तोड़ सकती थी। पर मैंने यह सोचकर माफ कर दिया चलो आगे से शायद सुधर जायेगा।”
मामी का यह रूप देख कर प्रवीण डर गया और जल्दी से ज़िप बन्द करके मामी की तरफ भाग कर आया और उसके पैरी हाथ लगा कर माफ़ी मांगने लगा। मामी जी क्षमा कर दो, बस नादानी में हो गया ऐसा। किसी को कुछ न बताना वरना मेरी बहुत बेइज्जती होगी। विकास क्या सोचेगा मेरे बारे में।
मामी — ये तो पहले सोचना चाहिए था तुझे?
विकास – प्लीज़ मामी आखिरी बार छोड़ दो, आगे से शिकायत का मौका नहीं दूंगा। आप चाहो तो आपके घर भी नहीं आउंगा पर इस बार मेरी लाज रख लो।
मामी — चलो जाओ यहाँ से कपड़े पहन कर आती हूँ। तुझसे तो आकर बात करती हूँ ।
अब प्रवीण का वो हाल था के काटो तो खून नहीं। अपने इष्ट देवी देवता को याद कर रहा था। हे भगवान आज जान छुड़वा दो, मेरी तौबा, मेरे बाप की तौबा आगे से ऐसा काम कभी भी नहीं करूँगा। जब मामी कपड़े पहन कर उसके पास आई तो थोड़ा गुस्सा दिखाकर बोली, “हाँ अब बोलो क्या प्रॉब्लम है तुम्हारी? मैं क्या तुझे दिल्ली के जीबी रोड की रण्डी लगती हूँ। जो तेरी तरफ काला लंड देख कर भागी आउंगी।”
प्रवीण (गिड़गिड़ाते हुए) – मामी जी कृपया एक बार माफ कर दो, आइन्दा ऐसी गलती भूल कर भी नहीं होगी।
अब प्रवीण की पतली हालात देख कर मामी को उस पे तरस आ गया और थोड़ा अपना मूड बदल कर उसे पैरों से उठाकर बोली, “देख बेटा प्रवीण, जैसा मुझे विकास प्यारा है वैसे ही तू भी प्यारा है। शुरू से ही माँ बाप बच्चों की छोटी बड़ी गलतियाँ माफ करते आये है पर इसका मतलब यह भी नहीं है के आपकी हर नाजायज़ गलती माफ हो।
आज तूने जो किया, मैं तो क्या कोई भी पतिव्रता स्त्री माफ नहीं करेगी। वो भी रिश्तेदारी का लिहाज़ जान कर तुझे एक मौका सुधरने का और देती हूँ। सुधर जा नहीं तो बहुत देर हो जायेगी और हर बार माफ़ी नहीं मिलेगी। खैर छोड़ो इन बातों को आओ बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय लेकर आती हूँ।”
प्रवीण सोफे पे बैठ गया। करीब 10 मिनट बाद विकास और उसके पापा वापिस आ गए। सबने मिलकर चाय पी और विकास और प्रवीण बाहर खेलने चले गए। उस दिन से मधु के मन में उस प्रवीण के प्रति नफरत सी हो गयी। उसने घर में तो किसी को कुछ नहीं बताया पर अब जहाँ भी प्रवीण मिलता, उससे किनारा कर लेती।
पहले कई बार प्रवीण के साथ बाज़ार भी चली जाती थी। पर अब कभी भी बाज़ार जाती या तो विकास के पापा के साथ या फिर अकेली। प्रवीण को हर पल यही डर रहता के उसकी चोरी पकड़ी न जाये। उसके इतना हब्शी और कामुक होने का कारण उसके घर का अपना माहौल था। वो कई बार अपनी माँ को चुदते, नहाते, कपड़े बदलते देख चूका था। दिन बीतते गए प्रवीण दिन भर सुस्त रहने लगा।
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विकास – क्या हुआ बे साले दिन ब दिन सुस्त रहता है। पहले जैसी मस्ती नहीं करता। क्या दिक्कत है तेरे को बता न.
प्रवीण – कुछ भी नहीं यार बस ऐसे ही फालतू की टेंशन थी थोड़ी।
विकास — बोल न हुआ क्या है।
प्रवीण – बता देता हूँ पर वादा कर बुरा नहीं मानेगा और मुझसे बोलचाल बन्द नहीं करेगा।
राहल – क्या मतलब मैं कुछ समझ नहीं,
प्रवीण – देख यार तू तो मुझे भली भांति जानता है के मेरी कमज़ोरी लड़की है, जहाँ दिखी नहीं मेरी चड्डी गीली हुई नहीं।
(लड़ाई के डर से फिर भी आधी बात बताई.)
पिछले रविवार तेरे घर गया था। तब तू घर पे नहीं था। तू और मामा जी सैर को गए थे। घर पे अकेली मामी थी। मैंने बाहर से ही आवाज़ दी कोई नहीं बोला, जब अंदर गया तो मामी नहाकर कपड़े पहन रही थी। मैंने उन्हें नंगा देख लिया और काम वासना में अंधा होकर छिपकर ही मुठ मारने लगा।
जब स्खलित हुआ तो मामी ने मुझे देख लिया और डांटा भी था। पता नहीं उन्होंने तुझे या मामा जी को बताया या नहीं पर अब मैं शर्म के मारे उनके सामने भी नहीं जा सकता। तू बता मैं क्या करूँ अब? बस यही मेरे उदास होने की वजह है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसकी बात सुनकर विकास का भी खून खौल उठा, जो के स्वाभाविक भी था। क्योंकि उसकी जगह आपमें कोई भी होता, ये बात बर्दाश्त नहीं करता। उसने प्रवीण को उस समय कहा तो कुछ नहीं पर दिल में अपने इस अपमान का बदला लेने की कसम खा ली, और चेहरे पे स्माइल लाते हुए कहा, “चल कोई बात नहीं यार होता रहता है इतना तो, टेंशन न लेना अब किसी भी बात की।”
प्रवीण को लगा के उसकी गलती माफ कर दी गयी है। धीरे धीरे दिन बीतते गए। प्रवीण बात को भूल गया पर विकास के बदले का ज़ख़्म अभी भी ताज़ा था। वो बस एक मौके की तलाश में था, कब अपने मन की भड़ास निकाले। इस दौरान स्कूल की छुट्टियाँ हुई।
तो इस बार विकास अपनी बुआ के यहां रहने आ गया। उसकी बुआ रीना की उम्र भी 40 के करीब, शरीर थोड़ा सा भारी, रंग गोरा और साडी ब्लाऊज़ पहनती थी। वो थोड़ा खुले स्वभाव की स्त्री थी। मतलब जिन बातो को आम स्त्रियां बोलने से भी झिझकती है, रीना फटाक से बोल देती थी।
विकास और प्रवीण दोनों अपने माँ बाप की इकलौती सन्तानें थी। इन दिनों दशहरे का त्यौहार नजदीक आ रहा था। तो उसकी खूब तैयारियां हो रही थी। एक दिन प्रवीण और उसके पापा को घर के किस काम के लिए एक दिन के लिए बाहर जाना पड़ा।
पीछे विकास और रीना दोनों बुआ भतीजा घर पर रह गए। विकास उन दोनों बाप बेटे को स्टेशन तक छोड़कर आया और आते वक़्त मेडिकल स्टोर से कुछ नींद की गोलियां ले आया। शाम को उसके घर पे आते ही उसकी बुआ ने उसे खाना परोसा।
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विकास – बुआ नहीं आज मेरे साथ प्रवीण नहीं है सो आप भी मेरे साथ बैठ कर खाना खाइये न।
बुआ – नहीं बेटा तुम खालो, मैं बाद में सब काम काज निपटा कर फ्री होकर खाऊँगी। ऐसे जल्दबाजी में मुझसे नहीं खाया जायेगा।
विकास — तो ठीक है फिर मैं भी आपके साथ ही खाऊँगा ले जाओ वापिस खाना।
बुआ ने काफी मिन्नतें की के खा लो, पर विकास नहीं माना और उसे अपने भतीजे की ज़िद के आगे झुकना पड़ा।
बुआ — चलो ऐसे करो मैं थोड़ी घर की सफाई कर लू। फिर इकट्ठे बैठ कर खाना खाएंगे। तब तक तुम प्रवीण के कमरे में जाकर आराम कर लो और जाते जाते ये खाना रसोई में ढक कर जाना।
विकास ने उसकी आज्ञा का पालन किया। विकास को भूख तो बहुत लगी थी। पर बदले की आग ने उसे खाना खाने नहीं दिया। थोड़ी देर बाद रीना प्रवीण के कमरे में पसीने से भीगी हुई आई और जिस बेड पे विकास आराम कर रहा था। उसी पे थोड़ा सा हटकर विकास के साथ ही लेट गयी। ऊपर पंखा चल रहा था, थोड़ा थकी होने की वजह से लेटते ही गहरी नींद के आगोश में चली गयी।
इधर जब विकास ने लेटे लेटे साइड बदली तो उसका हाथ बुआ की चुचियो पे आ टिका। अपने हाथो के निचे मुलायम मुलायम चीज़ महसूस करके विकास की भी नींद टूट गयी और उठ कर बैठ गया और एक अजीब सी ख़ुशी महसूस करके खुद ही मुस्कराया। जैसे भगवान ने उसकी तपस्या मंजूर कर ली हो।
उसने कंधे से पकड़ कर बुआ को हिलाया और बुआ नींद में इतना डूबी थी के एक दो आवाजें उसे सुनाई न दी। उसने मौका देखते ही बुआ के गालों पे किस कर लिया और बैठ कर आगे की प्लानिंग सोचने लगा। फिर पता नहीं क्या मन में आया भाग कर रसोई में गया और दो प्लेटों में खाना परोस कर ले आया। उसने बुआ को झँझोड़ते हुए उठाया और कहा, “बुआ जी खाना खा लो पहले बाद में सो जाना। वरना ठंडा हो जायेगा। वैसे भी रात को भूख लगेगी आपको, जब अब न खाया तो…”
बुआ नींद से तो जाग गयी पर लेटी ही बोली’ रसोई से दो प्लेट में खाना ले आ।
विकास — खाना तो कब का आया हुआ है। आप उठो और खा लो।
बुआ बेड पे ठीक होकर बैठ गयी। विकास ने उनके आगे खाना परोसा और बुआ खाने लगी। आज बुआ को खाने के स्वाद में कुछ थोड़ा सा फर्क महसूस हो रहा था तो बोली,” विकास तुम अपनी प्लेट से एक निवाला उठाकर खाना जरा। मुझे पता नहीं क्यों आज खाने का स्वाद बदला बदला सा लग रहा है।
बुआ की बात सुनकर जैसे विकास के पैरो तले ज़मीन निकल गयी हो, उसका रंग फीका पड़ गया और घबराहट में बोला, “न.. न… नहीं तो बुआ, मैंने चख कर देखा है खाना। ठीक है खाना तो, आप थके हुए हो शायद इस लिए आपको लग रहा है।”
बुआ — हाँ हो सकता है, वैसे भी मैंने दोपहर में थोड़ा चटपटा खाया था, उसकी वजह से भी हो सकता है।
खाना खाते विकास बोला, “बुआ आज आप रात को यही सो जाओ न, मुझे अकेले में अच्छा नहीं लगेगा। क्योंकि पहले साथ में प्रवीण सोता था आज वो यहाँ नहीं है।”
बुआ — कोई बात नहीं विकास बेटा, प्रवीण नहीं है तो क्या हुआ मैं तो हूँ न. हम दोनों इसी बेड पे सोयेंगे।
बुआ की बात सुनते ही विकास का मुरझाया चेहरा खिल उठा और मन से आवाज़ आई। तू देखता जा प्रवीण बेटा, आगे आगे होता है क्या?
खाना खाकर बुआ ने जूठे बर्तन साफ किये और विकास को बोली, मैं नहाने जा रही हूँ। तब तक तुम भी अलमारी से अपने कपड़े निकाल लो, बाद में तुम भी नहा लेना।
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थोड़ी देर बाद बुआ बाथरूम से नहाकर आई और विकास अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गया। वहां जाकर शीशे के सामने खड़ा होकर अपनी ही तस्वीर से बाते करने लगा। विकास बेटा, आज की रात तुम्हारा बदला पूरा करने की रात है। साले प्रवीण हरामज़ादे तू भी क्या याद रखेगा किस से पंगा लिया है तूने? साले तूने तो मेरी माँ के सामने लंड ही हिलाया था, अब देख कैसे तेरी माँ की चूत की धज्जियां उड़ाता हूँ।
गुस्से में ही नहाकर बाहर आ गया और बुआ को देखते ही अपना मूड बदलते हुए चेहरे पे एक फेक स्माइल ले आया। उस वक़्त उसने अकेली घुटनो तक लोअर टाइप की निकर ही पहनी थी। अपना सर तौलिये से पोंछ कर बैड पे एक साइड पे बैठ गया। तब तक बुआ ने भी नाइटी पहन ली थी और निचे पतला सा पायजामा पहन लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोनों टीवी देखने में मस्त हो गए। फिर बुआ उठी और दो गिलासों में विकास और खुद के लिए दूध ले आई। रसोई से आती बुआ अब विकास को एक लाल जोड़े में सजी पत्नी के रूप में दिखी। जो अपनी शादी की पहली रात पे अपने पति के लिए दूध लेकर आई हो। दूध पकड़ते वक़्त विकास के होंठो पे एक स्माइल सी आ गयी।
बुआ – क्या हुआ नटखट इतना हँस क्यू रहा है।
विकास – कुछ नहीं बुआ, ऐसे ही कोई बात याद आ गयी थी।
बुआ – ऐसी क्या बात है, मुझे भी सुनाओ न।
विकास – नहीं बुआ इतनी भी खास नहीं है बस ऐसे ही और जल्दी से दूध का गिलास खाली करके रीना को पकड़ा दिया और मन में ही बोला, अब आगे देख रानी, कैसे निकालता हूँ तेरी चूत में अपना पानी?
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इतने में बुआ ने भी दूध पी लिया और दोनों गिलास रसोई में रखकर विकास के साथ आकर लेट गयी और इधर उधर की बाते करने लगी। विकास ने टीवी बन्द कर दिया और अपना सारा ध्यान बुआ पे केंद्रित करते हुए उनसे बाते करने लगा। कमरे की बड़ी लाइट बन्द कर दी गयी और जीरो वाट का बल्ब जला दिया गया।
अब बाते करते करते बुआ पे खाने में डाली दवाई का असर होने लगा और बाते करती करती सोने लगी। जब बुआ पूरी तरह से नींद में डूब गयी तो उसने बुआ के पास आकर उसे हिला डुला कर देखा। जब पूरी तरह से पक्का हो गया के अब सुबह तक नहीं जागेगी तो उसने बुआ को सीधा बेड पे लिटाया और उसके होंठ अपने होंठो से चूसने लगा।
उसकी गालो पे किस करने लगा। बुआ की कमीज़ टाइप नाइटी के सारे बटन खोल कर, उसके मम्मो को मुँह में लेकर चूसने लगा। कभी दायें मम्मे को मुँह में लेता, तो कभी बांए वाले मम्मे को,बुआ के तन का स्पर्श पाते ही उसका लंड तन गया और उसने अपना निकर भी उतार दिया।
अब धीरे धीरे बुआ के इलास्टिक वाले पयज़ामे को निचे किया और देखा क बुआ ने चूत पे शेव की हुई है। डबल रोटी की तरह फूली चूत उसकी टांगो में किसी ख़ज़ाने से कम नहीं लग रही थी। बुआ की टांगे थोड़ी चौड़ी करके हाथ की सबसे बड़ी वाली ऊँगली से उसकी चूत की गहराई को नापा और टांगो के बीच आकर बुआ की चूत चाटने लगा।
उसका स्वाद थोड़ा नमकीन सा लगा पर बदले में अंधे को वो भी किसी अमृत से कम नहीं लग रहा था। करीब 10 मिनट तक चूत चाटने के बाद जब बुआ की चूत अपने पानी और उसके थूक से भीग गयी। विकास ने बुआ का पायजामा एक टांग से निकाल करके उसकी एक टांग को अपने कन्धे पे रख कर चूत के मुंह पर लंड टिका कर हल्का सा धक्का दिया.
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और झट से सारा जड़ तक लंड बुआ की गुफा में चला गया और अपने मन ही मन में इस काम के लिये बहुत खुश हो रहा था। करीब 5-7 मिनट बाद जब उसका वीर्य निकलने वाला था तो उसने वीर्य की एक पिचकारी चूत के अंदर और बाकी बुआ के मम्मो और मुंह पे पिचकारियां छोड़ी और तब तक नहीं रुका जब तक एक एक बूँद निकल न गयी। इस वक़्त वो बहुत थक गया था। उसने जल्दी जल्दी बुआ को कपड़े पहनाये और बुआ का मुँह, चूत और मम्मे तौलिये से पोंछा.
और जब लगा के सब ठीक है फिर हाथ मुंह धोकर सो गया। अगली सुबह बुआ उसके लिए चाय लेकर आई और बोली “उठ जाओ नवाब साब। आप तो ऐसे सोये हो जेसे एक कर्ज़दार बहुत बड़ा क़र्ज़ उतार कर चैन की नींद सोता है।” विकास — (चाय पकड़ते हुए) — हाँ बुआ ऐसे ही समझ लो आप। कल रात सपने में एक काम निपटाते निपटाते देर हो गयी थी और हल्की सी स्माइल दिखी उसके होंठो पर। फिर अगले दिन विकास अपने घर आ गया और इस तरह से विकास का बदला पूरा हुआ।
प्रातिक्रिया दे