Muslim Bap Beti Anal Sex
दोस्तों आप सभी का मेरी कहानी के अगले भाग में फिर स्वागत है. दोस्तों आपने कहानी का पिछला भाग अब्बा जान ने किया बेटी का हलाला 1 पढ़ा होगा कि अरशद एक मौलवी है जिसका इस दुनिया में अपने बेटी नगमा के सिवा कोई नहीं है. और उसने नगमा का निकाह नौशाद के साथ कर दिया. एक दिन नौशाद ने शराब के नशे में नगमा को तलाक दे दिया. और हलाला के लिए अरशद को नगमा से निकाह करना पड़ा. और दोनों बाप बेटी अपनी सुहागरात मन रहे है. अब आगे- Muslim Bap Beti Anal Sex
नगमा बाथरूम में निचे बैठकर पेशाब कर रही थी। “अब्बा आप यहाँ? कुछ तो शर्म कीजिये”, नगमा ने अचानक अपने अब्बा को नंगा ही बाथरूम में दाखिल होता देखकर झूठमूठ के गुस्से से कहा। नगमा ने मुंह बनाया तो अरशद ने कहा कि, “मुझे भी पेशाब करना है”। नगमा चुप हो गयी.
उसे लगा के जैसे इतनी दमदार चुदाई के बाद उसे पेशाब लगी है तो उसी तरह उसके अब्बा को भी तो पेशाब लगी होगी. इसलिए वो चुप रही और शर्म के मरे मुँह नीचे को करके पेशाब करने लगी। अरशद उसके पीछे गया और वो भी नीचे बैठ गया और अपना हाथ पीछे से नगमा के नितंबों के नीचे से से होते हुए उसकी योनि पर रख दिया।
नगमा इस अचानक हमले से चमक गई। उसकी पेशाब की धार अरशद के हाथों से होते हुए जमीन पर जा रही थी। उसका गरम-गरम पेशाब और उसकी कोमल चूत गजब का एहसास दे रहे थी। अरशद ने उसकी चूत को अपने हाथों से मलना शुरू किया, और एक ऊंगली उसकी चूत में डाल दी।
वह पेशाब करती रही और अरशद मलता रहा। फिर वह खड़ी हुई और अपने बाप को प्यार से एक चपत लगाते हुए अरशद के हाथों को पकड़ कर एक मग पानी उसके हाथों में डाला। फिर अपनी चूत पर डाला और कहा, “यह क्या था?”
अरशद ने कहा, “नगमा अब जो कुछ तुम्हारा है, वह मेरा है”।
फिर अरशद ने उसे अपनी ओर खींचा और गले लगा लिया। अरशद का खड़ा लिंग नगमा की नाभि पर चिपक गया था। अरशद ने उसके कमर को जोर से सटा लिया, और उसके एक पैर को उठा कर अपनी कमर पर बांध दिया। वह समझ नहीं पाई तब तक उसके अब्बा ने उसे गोद में उठा लिया।
अब उसने खुद ही दूसरा पैर अरशद के कमर पर बांध दिया। अरशद ने नगमा के नितंबों को उठा कर लिंग को उसकी योनि पर एडजस्ट किया। उसे लगा कि अरशद उसे दोबारा चोदने वाला था। पर अरशद ने अपने पेशाब की धार उसकी योनि पर छोड़ दी। नगमा मुझसे लिपट गई और उसके शौहर रुपी अब्बा की गर्म पेशाब की धार उसकी चूत से होते हुए उसकी जांघों से बहने लगी।
अरशद ने जितना हो सके तेज पेशाब करना शुरू किया, और शावर को चला दिया। दोनों भीगने लगे। पानी की एक-एक बूंद का एहसास और अपनी नगमा के जिस्म की गर्माहट साथ ही पेशाब की धार कमाल कर गई। पेशाब रुकने के बाद नगमा ने अपनी आँखें खोली और अपने अब्बा से बोली-
“अब्बा आप तो नौजवान लड़कों से भी ज्यादा जवान और शरारती हैं, बस अब मुझे उतारिये मुझे कमरे में जाना है.”
पर अरशद ने अपनी नंगी बेटी को गोद में से उतारा और उसका हाथ पकड़ कर उसे बाहर जाने से रोकते हुए बोले- “अरे बेटी अब तुमसे क्या शर्म? मैं तो बस अपनी बेटी के साथ नहाना चाहता हूँ”, अरशद ने बाथरूम में अन्दर शावर को ओन करते हुए कहा।
“अब्बा मुझे शर्म आ रही है, मैं आपके साथ नहीं नहा पाऊँगी, मैं जा रही हूँ”, नगमा ने अपने अब्बा से कहा और उठकर वहां से जाने लगी।
बेटी क्यों इतना शर्मा रही हो, बस कुछ ही देर की तो बात है”? अरशद ने अपनी बेटी को कलाई से पकड़कर अपने साथ शावर के निचे खड़ा करते हुए कहा।
नगमा ने भी अब कोई विरोध नहीं किया और शावर के पानी से अपने पिता के साथ नहाने लगी। अरशद ने नहाते हुए साबुन उठा लिया और अपनी बेटी की पीठ पर मलने लगा। अरशद साबुन को नगमा की चिकनी पीठ पर मलते हुए निचे होते हुए उसके दोनों चूतडों तक आ गया और अपनी बेटी के दोनों नर्म चूतडों पर साबुन को मलते हुए उन्हें अपने दुसरे हाथ से दबाने लगा।
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“अआहाहह्ह्ह अब्बा क्या कर रहे हो, बस साबुन लगा लिया ना”, नगमा ने सिसकते हुए कहा।
“बेटी थोडा झुक जाओ, तुम्हारा हाथ इधर नहीं पहुच पाता, इस लिए यहाँ पर थोड़ी गंदगी है, मैं इसे साफ कर देता हूँ”, अरशद ने अपनी ऊँगली को नगमा के चूतडों के बीच फेरते हुए कहा।
“ओह्ह्हह्ह्ह्ह अब्बा” नगमा ने थोडा झुकते हुए सिसककर कहा। अरशद अब साबुन को अपनी बेटी की गांड के छेद से निचे लेजाकर उसकी चूत तक मलने लगा। अरशद के ऐसा करने से नगमा के मुंह से जोर की सिसकियाँ निकल रही थी।
अरशद थोड़ी देर तक अपनी बेटी के चूतडों को सही तरीके से साफ करने के बाद उठकर खड़ा हो गया। अरशद अब साबुन को अपनी बेटी की दोनों बड़ी बड़ी गोरी चुचियों पर मलने लगा। अरशद साबुन को अपनी बेटी की चुचियों पर मलते हुए उन्हें अपने हाथ से भी दबा रहा था।
“आह्ह्ह्हह्ह अब्बा क्या कर रहें हैं आप?”
अरशद का ऐसा करने से नगमा के मुंह से बहुत जोर की सिसकियाँ निकल रही थी। अरशद अब साबुन को नगमा के चिकने गोरे पेट पर मलते हुए निचे ले जाने लगा।अरशद का हाथ अब उसकी बेटी की चूत की हलकी झांटों तक आ गया था। नगमा ने मज़े के मारे अपनी आँखें बंद कर ली थी।
वो अपने पिता की हरकतों से बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी। अरशद अब साबुन को अपनी बेटी की चूत पे मल रहा था और नगमा मज़े से सिसक रही थी। अरशद ने कुछ देर तक अपनी बेटी की चूत को साबुन से साफ़ करने के बाद साबुन को निचे रख दिया और नगमा की चूत को गोर से देखते हुए अपने होंठों को उसकी चूत पर रख दिया।
“ओह्ह्हह्ह्ह्ह अब्बा क्या कर दिया आपने”, अपने अब्बा के होंठों को अचानक अपनी चूत पर महसूस करते ही नगमा ने जोर से सिसकते हुए कहा।
अरशद अपनी बेटी को कोई जवाब दिए बगैर उसकी चूत को चूमते और चाटते हुए उसकी चूत पर गिरता हुआ पानी भी चाटने लगा। नगमा की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। उसका पूरा बदन तप कर आग बन चूका था। अरशद ने अचानक अपनी एक ऊँगली को अपनी बेटी की चूत के छेद में डालते हुए उसकी चूत के दाने को अपने मुंह में ले लिया और उसे बहुत जोर से चूसने लगा।
नगमा अपने पिता की यह हरकत बर्दाश्त न कर सकी और उसका पूरा जिस्म कांपने लगा। “आहाह्ह्ह्हह इश….. अब्बा ओह्ह्ह्ह”, नगमा ने जोर से सिसकते हुए अपने अब्बा को बालों से पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी चूत झटके खाते हुए पानी छोड़ने लगी। अरशद अपनी बेटी की चूत का रस शावर के गिरते हुए पानी के साथ चाटने लगा। नगमा कुछ देर तक यूँ ही अपनी आँखें बंद करके झड़ने लगी।
“बेटी क्या हुआ, मज़ा आया?” कुछ देर बाद जब नगमा ने अपनी आखें खोली तो अरशद ने उठकर उसके सामने खड़ा होते हुए पूछा।
“अब्बा….” नगमा ने अपने अब्बा को अपनी बाँहों में भर लिया और दोनों बाप बेटी एक दुसरे के होंठों को चूमने लगे। कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठों से खेलने के बाद अरशद ने नगमा को गोद से उतारा और उसके चूचों को चूसने लगा। उसके एक हाथ उसके नितम्ब के छेद को रगड़ रहा था, और दूसरा हाथ उसकी पीठ को सहला रहा था।
अरशद ने नगमा को चूमते हुए उसे नहलाना शुरू किया। उसने बड़े प्यार से अपने बाप के पूरे शरीर को साफ किया और उसे गले लगा लिया। दोनो ने तौलिया से एक-दूसरे को पोंछा। इस बार नगमा ने शरारती अंदाज में अरशद के लंड को पकड़ कर उसे बाहर की ओर चलने का इशारा किया।
बस उसके पीछे-पीछे अरशद बाहर आ गया और पलंग पर गया और लेट गया। नगमा भी उसके बगल में लेट गई, और अरशद के लिंग को सहलाते हुए उसकी छाती पर अपना सर रख कर अरशद से बातें करने लगी। थोड़ी देर बातें करते रहने के बाद अरशद ने नगमा से कहा कि, “अपने छुटकु को प्यार नहीं करोगी”?
अरशद अपने इतने बड़े लण्ड को प्यार से छुटकु कह रहा था। नगमा ने शर्म के मरे कोई जवाब नहीं दिया पर उसकी आँखों के प्यार से अरशद समझ गया और उसका सिर अपने लंड की ओर किया। उसने बड़े प्यार से अपने अब्बा के लंड का अग्र भाग मुंह में लिया, और चूसते हुए आंख मारी। अरशद ने फिर उसे कहा, “पूरा लेलो मेरी जान”। तो नगमा ने अपने अब्बा के लंड को अपने मुंह में भर कर धीरे-धीरे अपनी गर्म सांसे उस पर छोड़ते हुए चूसने लगी।
थोड़ी देर बाद नगमा ने कहा- “अब्बा बहुत रात हो चुकी है लगभग रात के २ बजने वाले है. हलाला का काम तो बहुत हो चूका है, चलो थोड़ी देर सो जाते हैं.”
दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे। फिर वह अरशद से अलग हुई और उसके लिंग को सिकुड़ा हुआ देख कर हंसने लगी, और उसे चूम लिया। फिर दोनों एक-दूसरे की आगोश में गहरी नींद में सो गए। नगमा और अरशद दोनों रात के भयंकर चुदाई के कारण बहुत थक गए थे तो दोनों घोड़े बेच कर सोते रहे.
सुबह पहले नगमा के आँख खुली, उसकी चूत में रात के चुदाई के कारण अभी भी दर्द हो रहा था. पर उसे पेशाब लगी थी. तो वो उठकर बाथरूम में पेशाब करने चली गयी. पेशाब करते हुए उसे रात के चुदाई और इसी बाथरूम में इकठे नहाने और चूत चाटने वाली घटना याद आ गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अपने बाप के साथ बितायी पिछली रात को यद् करके उसकी चूत फिर से गीली हो गयी. पेशाब करने के बाद उसने अपनी चूत को पोंछा और नंगी ही बेडरूम में वापिस आ गयी. उसने देखा की अरशद अभी भी सो रहा था. वो भी पूरा नंगा था और उसका लण्ड नींद में भी उसे नौशाद से बहुत बड़ा और मोटा लग रहा था.
अपने अब्बा के मोटे लण्ड को देख कर वो सोच रही थी- ये आदमी है की कोई भूत प्रेत है। ऐसे भी कोई चुदाई करता है क्या? एक ही रात में तीन बार। मेरी तो जान निकाल दी। कितने अरमानों में सजी थी की सुहागरात मनाऊँगी। मुझे लगा था की सुहागरात को महसूस करेंगे अरशद। दुल्हन के कपड़े उतारेंगे और फिर चोदकर साथ में सो जाएंगे।
लेकिन इन्होंने तो हद ही कर दी। इनकी भी क्या गलती है भला, जिसे कोई औरत एक रात के लिये मिलेंगी तो क्या करेंगा? अरशद को लगा है की मैं बस आज की रात के लिए ही उनकी थी, तो रात भर में ही पूरी तरह मुझे पा लेना चाहते थें। और इसी चक्कर में मेरी चूत के चीथड़े उड़ा दिए। लेकिन क्या मस्त लण्ड है, मजा आ गया।
भले चूत छिल गई, जिस्म दर्द कर रहा है, लेकिन चुदवाने में मजा आ गया। आहह…. कितना अंदर तक जाता है लण्ड… जब वो धक्का लगा रहे थे तो मेरे तो पेट में चुभ रहा था। और जब वीर्य गिराया चूत में ता लगा की एकदम आग भर दिए हों अंदर गहराई में।
तभी तो एक बार चुदवाने के बाद मैं दूसरी बार के लिए भी तैयार थी और दूसरी बार के बाद और दो बार के लिए। अभी सुबह का समय है नौशाद के आने और फिर तलाक लेने में तो थोड़ा टाइम है तो एक और बार चुदवा ही लें क्या? छिल जाएगी चूत तो छिल जाएगी, लेकिन मजा आ जाएगा।
नहीं नहीं, अब अगर उन्होंने मुझे चोदा तो मैं मर ही जाऊँगी। और कौन सा वो भागे जा रहे हैं। उन्हें भी यहीं रहना है और मुझे भी। देखा नहीं कितने प्यासे हैं अरशद। तभी तो रात में पागलों की तरह कर रहे थे। अब चाहे जो भी हो मुझे उनसे चुदवाते रहना है। तभी उन्हें भी सुकून मिलेगा और मुझे भी।
मेरी चूत को अब वही लण्ड चाहिए। अब चाहे मेरा मेरे अब्बा अरशद से तलाक हो भी जाये पर में फिर भी उनसे अपना यह रिश्ता कभी ख़तम नहीं करुँगी. मेरे अब्बा बेचारे बीवी के बिना मुठ मार कर ही गुजारा कर रहे हैं अब तो जो भी हो जाये मैं उन्हें अब कभी भी चूत के लिए तड़पने नहीं दूँगी. यह सोच कर ही उसके होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी.
वो उठ कर किचन में गयी और अपने और अरशद के लिए चाय बना कर ले आयी. उसने चाय एक साइड में टेबल पर रखी और और अरशद के ऊपर आकर अपने दोनों हाथों को अरशद के अगल बगल में रखी और उसपे अपने जिस्म का भार देते हए अरशद के ऊपर झकने लगी।
अपनी लटकती चूचियों को अरशद के सीने पै सटा दी और रगड़तें हए थोड़ा ऊपर हो गई। अब वो अरशद के ठीक ऊपर थी और सिर्फ उसकी चूचियों का भार अरशद के सीने में पड़ रहा था। अरशद अपने जिस्म का सारा भार अपने हाथों पे रखी थी। (इस स्थिति मैं वो दोने पूरे नंगे थे).
नगमा अपने अब्बा अरशद के ऊपर झुक गई और उसके होंठ पे अपने होंठ रखकर चूमकर कहा- “गुड मानिंग अब्बा…”.
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अरशद नींद में था। अरशद की नींद खुल गयी. अपने नंगी बेटी को अपने ऊपर इस तरह झुके हुए देख कर और अपने होठों पे नगमा के मुलायम होठों का स्पर्श पाकर उसके भी जिस्म में करेंट दौड़ गया। उसका रोम-रोम सिहर उठा और लण्ड एक झटके में सलामी देने के लिए उठकर खड़ा हो गया।
अब अरशद नगमा को पकड़कर उसे अपनी बाहों में भरकर चूम सकता था, और चोद भी सकता था। नगमा इसके लिए तैयार थी और अरशद जो भी करता नगमा उसका साथ देती, और वो अरशद के लिए बोनस ही होता।
नगमा फिर से गुड मॉर्निंग की और बोली- “अब्बा जान उठिए, चाय तैयार है.”
नगमा इस उम्मीद में उठने लगी की अरशद उसे उठने नहीं देगा और अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूमने चूसने लगेगा और उसके जिस्म पे छा जाएगा। इसीलिए तो वो नंगी ही आई थी ताकी अरशद उसकी नर्म चूचियों को महसूस कर पाए और उसे कोई रुकावट ना लगे।
लेकिन अरशद में ऐसा कुछ नहीं किया और अरशद को उठकर अलग हो जाने दिया। वो भी गुड मार्निंग बोलता हुआ उठ बैठा और तब तक मायूस नगमा उस चाय का कप पकड़ा दी। उसने नगमाको अपने पास बुलाया तो नगमा उसके गोद में बैठ गईं। नगमा अरशद के कंधे पे सिर रख दी थी और अरशद से चिपक गई थी। अरशद का हाथ नगमा की कमर पे था।
अरशद ने अरशद के गर्दन पे किस की और मादक आवाज में बोली- “अब तो आप खुश हैं ना अब्बा, अब तो आपको कोई तकलीफ नहीं है ना?”
अरशद नगमा के नंगी कमर और पीठ का सहलाता हुआ बोला- ” नगमा तुम्हें पाकर कौन खुश नहीं होगा। तुम तो ऊपर बाले की नियामत हो जो मुझे मिली। मैं ऊपर वाले का और तुम्हारा बहुत-बहुत शुकरगुजार हैं.”
नगमा अरशद के जिस्म में और चिपकने की कोशिश करने लगी, और बोली- ” मैं तो बहुत डर रही थी की पता नहीं मैं कर पाऊँगी या नहीं ठीक से? मैं आपका साथ तो दे पाई न अब्बा? आपका संतुष्ट कर पाई ना?”
अरशद भी नगमा को अपने जिस्म पे दबाता हुआ बोला- “तुमनें तो मुझे खुश कर दिया। तुमने बहुत बड़ा काम किया है मेरे लिए। मैं बहुत खुश हैं। आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे हसीन दिन है। लेकिन मैं डर भी रहा हूँ की वक़्त धीरे-धीरे फिसलता जा रहा है।
चंद घंटे हैं मेरे पास, फिर तुम मेरी बाहों से गायब हो जाओंगी। फिर तुम मेरे लिए सपना हो जाओगी। फिर आज के बिताए इस हसीन लम्हों को याद करते हुए मुझे बाकी दिन गुजारने होंगे. अभी थोड़ी ही देर में तुम्हारा नौशाद आ जायेगा और मुझे तुम्हे तलाक देना पड़ेगा. और फिर तुम उसकी बीवी हो जाओगी.”
बोलते हुये अरशद नगमा के होठों को चूमने लगा और कस के उसे अपने में चिपकाने लगा, जैसे कोशिश कर रहा हो की उसे खुद में समा लें, कोशिश कर रहा हो की ये लम्हा यहीं रुक जाए। नगमा अरशद की तरफ घूमकर उससे चिपक कर बैठी हुई थी।
नगमा का पूरा जिस्म अरशद के जिस्म से सट रहा था। उसकी चूचियां अरशद के जिस्म में दब रही थी। अरशद की मुस्कराहट रूक गई थी। अरशद अपना चेहरा ऊपर की और अरशद के चेहरा को अपने हाथों से अपनी तरफ घुमाते हुए उसकी आँखों में देखती हुई बोली- “आप खुश हैं ना अरशद?”
अरशद ने अपनी नजरें नीची कर ली। अरशद अपने जिस्म को थोड़ा ऊपर उठाई और अपनी चूचियों को अरशद के बदन से रगड़ती हुई उसके नीचे के होठों को चूमने लगी। सिर्फ उसकी नंगी चूची अरशद के बदन को टच कर रही थी, लेकिन अरशद पूरी तरह से नगमा के जिस्म को महसूस कर पा रहा था।
अरशद होठ चूमती रही लेकिन अरशद ने साथ नहीं दिया। नगमा को लगा की कुछ गड़बड़ है। वो उठकर अरशद की जांघों पे बैठ गई और फिर से अरशद से चिपक गई। वो फिर से अरशद के होठों को चूमी और फिर हँसती हुई शरारत भरे अंदाज ने बोली- “क्या हुआ अब्बा?”
अरशद कुछ नहीं बोला। नगमा उसके सीने से लग गई और इमोशनल अंदाज में बोली- “क्या हुआ अब्बा, मुझसे कोई गलती हुई क्या?”
अरशद ने अरशद की पीठ पे हाथ रखा और सहलाता हुआ बोला “गलती तुमसे नहीं मुझसे हई है। मैं बहशी बन गया था रात में…”
नगमा अरशद के जिस्म को सहलाते हुए बोली- “तो क्या हुआ? इस टाइम में तो कुछ भी हो जाता है। और फिर आप तो बहुत दिन से खुद को दबाए बैठे हैं.”
अरशद- “नहीं नगमा, में जानवर बन गया था कल। तुमने मुझपर भरोसा करके, मेरा दर्द समझ कर अपना जिस्म मुझे सौंपा और मैं जानवरों की तरह तुम्हारे जिस्म को चोदता रहा। तुम्हें मेरे जैसे बड़े और लम्बे लण्ड को लेने की आदत नहीं है पर मैं अपने होश खो बैठा था। मुझे माफ कर दो नगमा..”
अरशद- “मैं तो आपको बोली ही हूँ की जैसे मन करें वैसे करिए। रोकिए मत खुद को। अपने अंदर के दर्द को बह जाने दीजिए। आपके अंदर का गुबार निकलने दीजिए बाहर.”.
अरशद: “नगमा, चाहे मेरा तुमसे हलाला निकाह हुआ है. पर फिर भी तुम मेरी बेटी हो. और एक बाप होने के नाते मेरा यह फर्ज है की अपनी बेटी के दुःख का ध्यान रखूं पर पर मैं सेक्स करते हुए तुम्हारे दर्द का ध्यान नहीं रखा. मुझे बहुत अफ़सोस है.”
नगमा- “ये कैसी बातें कर रहे हैं आप अब्बा? सेक्स करते वक़्त ता काई भी वहशी बन जाता है। और आप तो वर्षों के बाद सेक्स किए हैं। अगर कोई आदमी बहुत भूखा हो और उसके सामने लजीज पकवान थाली में सजाकर पेश किया जाए तो वो क्या करेंगा, बोलिए?” नगमा थोड़ा गुस्से में बोली।
अरशद कुछ नहीं बोला।
नगमा फिर से उसके सीने से लगती हई बोली- “प्लीज अब्बा, आप इतना मत सोचिए। खुद को बाँधकर मत रखिए अब। जो होता है होने दीजिए। जब मन करें मुझे पाइए। अगर अब भी आप सोचते रहेंगे और दर्द में ही रहेंगे.”
अरशद फिर बोला – “तुम ने मेरे लिए इतना किया, ये बहुत है। तुमने मेरा पूरा साथ दिया। खुद को पूरी तरह समर्पित कर दी मुझे। मैं खुश किश्मत हूँ की तुम जैसी हूर जितनी सुन्दर बेटी का जिस्म पा सका.”.
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नगमा अरशद के जिस्म को सहला रही थी। फिर से अरशद के जिस्म से चिपक गई। उसकी नंगी चूचियां अरशद के जिस्म से दब रही थी। वो अरशद के होंठ चूमने लगी।
नगमा बोली- “मुझे खुशी है की मेरी मेहनत कम आई। मैं आपको पसंद आई और खुद को पूरी तरह आपको साँप पाई। आप खुश हुए संतुष्ट हए यही बड़ी बात है मेरे लिए की मेरा जिस्म किसी के काम आ सका..”
अरशद बोला- “मैं तो ऊपर वाले का शुकर गुजार हैं की उन्होंने मुझे तुम्हें दिया। लेकिन एक अफसोस है की मेरे पास बस एक ही रात है। अफसोस है की बस इसी एक रात के सहारे मुझे सारी जिंदगी गुजारनी है। तुम फिर से नौशाद के पास चली जाओगी। तुम तो दरिया का वो मीठा पानी हो जिसे इंसान जितना पिता जाए प्यास उतनी बढ़ती जाती है। लेकिन ये भी कम नहीं जो तुमने मुझे दिया..” अरशद गहरी सांस लेता हुआ ये बात बोला था।
नगमा ने अरशद की ओर देखा। अरशद का चेहरा शांत और उदास हो गया था। नगमा उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ी और होंठ को चूमते हुए बोली- “आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? आपको को और तरसने की जरूरत नहीं है। आपको उदास रहने की जरुरत नहीं है। आप जब चाहे मुझे पा सकते हैं। मैं आपकी है पूरी तरह। सिर्फ आज की रात के लिए नहीं बल्कि हर रात के लिए…”
अरशद ऐसे हँसा जैसे किसी बच्चे में उसे कोई चुटकुला सुनकर हँसाने की कोशिश की हो। बोला- “नहीं अरशद, तुम्हारी आने वाली जिंदगी तुम्हारे होने वाली शौहर नौशाद के लिए हैं. अब मुझे तो बाकि की जिंदगी इस बीत चुकी रात को याद कर कर के और मुठ मार मार कर ही बितानी है. अभी थोड़ी देर में नौशाद आ जाएगा और मुझे तुम्हें तलाक देना पड़ेगा और फिर तुम नौशाद की हो जाओगी.”
नगमा बोली- “हाँ, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आपको तरसने की जरूरत है। आप जब चाहेंगे में आपके लिए हाजिर हैं। अब यह नहीं हो सकता कि आप तरसते ही रहे,अब मेरा एक बार आपके साथ जो रिश्ता बन चूका है उसे न तो मैं भुला सकती हूँ और न ही आप. इसलिए चाहे अल्लाह मुझे दोजख में डाल दे पर अब मेरे तन और मन पर मेरे अब्बू का ही हक़ रहेगा.
में चाहे दुनिया के नजरों में नौशाद की बीवी होउंगी पर असल में मेरे दिल पर आप का ही राज रहेगा। मैं आपके पास आती रहूंगी एक बेटी के तरह और आपको अपने जिस्म का सुख सदा देती रहूंगी. दुनिया की नजरों में मैं आपकी बेटी होउंगी और हमारी दोनों की नजरों में हम मियां बीवी ही रहेंगे और आप जब भी चाहे मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बना सकते है. मैं अपने प्यारे अब्बा के लिए सदा तैयार रहूंगी.”
अरशद- “नहीं, नौशाद ने मुझे एक रात के लिए तुम्हें दिया है। मैं उसके साथ गलत नहीं करना चाहता..”
नगमा- “वो मेरा काम है। लेकिन आपको तड़पने तरसने की जरूरत नहीं है। मैं आपको अपने जिस्म पे पूरा अधिकार दे चुकी हूँ। आप जब चाहे मुझे पा सकते हैं…”
अरशद फिर हल्का सा मुस्करा दिया, और बोला- “अच्छा। मेरे लिए इतना सब करोगी…”
नगमा : “हाँ अब्बा। अब हम दोनों का रिश्ता मौत तक का है. जिंदगी के लिए समझ लीजिये कि मैं आपकी बीवी हूँ और मेरे शरीर पर आप का पूरा हक़ है. मुझे दुःख है तो सिर्फ इस बात का कि में अपने शरीर का सुख आपको शादी से पहले न दे पायी. आप मुझे पाना चाहते थे और में भी तैयार थी पर शायद अल्लाह को उस समय यह मंजूर नहीं था. वरना मेरी सील तोड़ने का मौका मैं तो आप को ही देना चाहती थी. पर वो सील नौशाद की किस्मत मैं लिखी थी.”
अरशद उसे बाँहों में भर कर बोला- ” नगमा! यह ठीक है कि मैं तुम्हरी चूत की सील नहीं तोड़ पाया. पर औरत के शरीर में पीछे भी एक छेद होता है, यानि गांड का छेड़. क्या उसकी सील भी नौशाद ने तोड़ दी है या गांड में तुम अभी भी कुंवारी ही हो.”
यह सुन नगमा तो शर्म से लाल ही हो गयी। वो समझ गयी की उसके अब्बा का मन अब उसकी गांड पर आ गया है और वो उसकी गांड मारना चाहते है.
वो शरमाते हुए बोली-
“अब्बू आप कैसी बातें कर रहे है. नौशाद ने तो मेरे पीछे वाले छेद पर कभी ऊँगली भी नहीं रखी। पीछे के तरफ से तो मैं कुंवारी ही हूँ. मैं अब आप को अपनी आगे वाले छेद (वो अभी भी अपने अब्बा से चूत शब्द बोलने में शर्मा रही थी) की तो सील तोड़ने का मौका नहीं दे सकती पर आप चाहें तो आप मेरे पीछे वाले छेद की सील तोड़ सकते हैं और अपनी बेटी की पीछे वाली चुदाई के पहले मालिक हो सकते है.
मैं जानती हूँ की आपका यह (अपने अब्बा के लण्ड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए) हथियार मेरे लिए बहुत बड़ा और मोटा है पर आप मेरे गांड मार लीजिये। देखा जायेगा पर आज तो मैं आपके इस अरमान को पूरा कर कर ही रहूंगी, “
अरशद तो ख़ुशी के मरे उछल ही पड़ा.
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वो ख़ुशी से हकलाता हुआ सा बोला. “मेरी प्यारी बेटी नगमा. क्या सच में आज तक नौशाद ने कभी भी तुम्हारी गांड नहीं मरी. क्या सच में तुम गांड के तरफ से कुंवारी हो. क्या तुम मुझे अपनी गांड मार कर अपनी गांड की सील तोड़ने का मौका दोगी.? कया मैं तुम्हारी गांड का उद्धघाटन करने वाला पहला शख्स होऊंगा.?”
नगमा अपने बाप को प्यार से चूम कर बोली- “हाँ अब्बाजान, आज तक नौशाद ने मुझे पिछले छेद में कभी ऊँगली तक नहीं डाली है. पीछे तो मैं बिलकुल कुंवारी हूँ. हे अल्लाह तू कितना रहमत वाला है, कि मेरी गांड आज तक मेरे अपने अब्बा के लिए तूने बचा कर रखी है. आज मैं अपने अब्बा को अपनी पिछली सील तुड़वाने का मौका दे रही हूँ.”
अरशद का लण्ड तो ख़ुशी के मरे फटने को आ रहा था. नगमा ने उसे हाथ में पकड़ लिया. वो समझ गयी कि उसके बाप का लण्ड उसकी गांड मारने की आशा के कारण इतना उछाल रहा है.
वो प्यार से अपने अब्बा का लण्ड सहलाती हुई बोली- “अब्बाजान। मैं आज बहुत खुश हूँ की मैं अपने अब्बू को अपनी गांड का उद्धघाटन करने का मौका दे सकी. पर आप तो जानते ही है कि आपका लण्ड कितना बड़ा और मोटा है. मैं तो अपनी इतनी खुल चुकी और इतनी बार चुद चुकी चूत मैं भी इसे बड़ी दिक्कत और मुश्किल से ले पायी थी.
तो आप समझ सकते है कि मुझे इस को पिछले छेद में, जिसमे आज तक किसी की एक ऊँगली भी नहीं घुसी है, लेना मुश्किल होगा. इसलिए मेरी आप से बस एक ही गुजारिश है की इसे जरा धीरे धीरे से और तेल लगा कर डालना, मैं आपका साथ देने की पूरी कोशिश करुँगी.”
अरशद ने भी नगमा की गांड की दरार में अपनी ऊँगली सहलाते हुए कहा- “नगमा चाहे मेरा तुमसे हलाला निकाह हुआ है पर फिर भी तुम मेरी बेटी हो. एक बाप कैसे अपनी प्यारी बेटी को तकलीफ दे सकता है. तुम बिलकुल भी चिंता न करो. मैं खूब सारा तेल लगा कर ही तुम्हारी गांड का उद्धघाटन करूँगा और सील तोडूंगा. अगर तुम्हे जरा भी ज्यादा तकलीफ हुई जिसे तुम सहन न कर पायी तो मुझे बता देना मैं तुरंत अपना लण्ड तुम्हारी गांड से निकल लूँगा. ठीक है न?”
नगमा ने ख़ुशी से हां में सर हिलाया.
नगमा- आप जितना देर चाहें मेरी गांड मार लीजिये मैं उफ़ तक नहीं करुँगी. लेकिन मुझे अपनी गांड मे आपका मोटा लंड चाहिए।
अरशद- अच्छा ठीक है और नगमा की गदराई गान्ड को दबोचते हुए, लेकिन बेटी तुम्हारी गान्ड मे ज़्यादा दर्द ना हो इसके लिए मुझे तेल लगा कर तुम्हारी गान्ड को चिकना बनाना पड़ेगा।
अरशद अपनी बेटी की नंगी गदराई जवानी उसके मोटे-मोटे कसे हुए दूध और फूली हुई चूत को देख कर मस्त हो जाता है। और खुद भी अपने सारे कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो जाता है उसका मोटा लंड सर उठाए खड़ा रहता है और वह अपनी बेटी के पास जाकर उसकी नंगी गदराई जवानी को अपनी बाँहो मे भर कर पागलों की तरह चूमने लगता है। दोनो बाप बेटी एक दूसरे से पूरे नंगे खड़े होकर चिपके हुए एक दूसरे की गान्ड और पीठ को सहलाते हुए एक दूसरे के मुँह, होंठ को चूमने लगते है।
अरशद- बेटी चलो ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे एक दूसरे को नंगा देख कर मज़ा लेते है।
नगमा अपने अब्बा के लंड को अपने हाथो से पकड़ कर अपनी गान्ड मटकाती हुई धीरे-धीरे अरशद के लंड को अपने हाथो से खिचते हुए ड्रेसिंग टेबल की ओर जाने लगती है और अरशद अपनी बेटी के गदराए चुतडो की मस्तानी थिरकन को देखता हुआ चल देता है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने जाकर दोनो एक दूसरे से नंगे ही चिपक जाते है और शीशे मे एक दूसरे का चेहरा देख कर मुस्कुराते हुए एक दूसरे के नंगे बदन को सहलाने लगते है। नगमा अपनी मोटी गदराई गान्ड को शीशे के सामने करके थोड़ा अपनी गान्ड को बाहर निकाल कर अपने अब्बा को दिखाती है.
और अरशद अपनी बेटी की मस्तानी गान्ड को शीशे मे देखते हुए उसकी गदराई गान्ड के मोटे-मोटे पाटो को सहलाता हुआ अपनी बेटी की गहरी गुदा मे अपने हाथ की उंगलिया फेर-फेर कर सहलाने लगता है और नगमा अपने अब्बा के मोटे लंड के टोपे को खोल कर उसके टोपे को सहलाने लगती है।
तभी अरशद ड्रेसिंग टेबल के उपर रखी ऑमंड ड्रॉप्स की शीशी को उठा कर उससे तेल निकाल कर अपनी बेटी की मोटी गान्ड की दरार मे तेल लगा कर उसकी गदराई मोटी गान्ड के छेद मे अपनी उंगली घुसा-घुसा कर तेल लगाने लगता है तभी नगमा अपनी हथेली को आगे करके अरशद को अपने हाथ मे तेल डालने का इशारा करती है.
और अरशद उसके हाथो मे तेल डाल देता है और नगमा अपने हाथो मे तेल लेकर अपने अब्बा के मोटे लंड मे तेल लगा-लगा कर उसे सहलाने लगती है। अरशद अपनी बेटी के मोटे गदराए चुतडो को पूरा तेल से भिगो देता है और खूब कस-कस कर अपनी बेटी के मस्ताने चुतडो की मालिश करने लगता है।
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वह जितनी ज़ोर से अपनी उंगलियो को अपनी बेटी की गान्ड की छेद मे भरता है नगमा भी उतनी ही तेज तरीके से अपने हाथो को अपने अब्बा के लंड पर कस-कस कर तेल मलने लगती है। करीब 10 मिनिट तक दोनो एक दूसरे की गान्ड और लंड मे तेल लगा-लगा कर पूरी तरह चिकना कर देते है.
उसके बाद अरशद अपनी बेटी को बेड से सटा कर पेट के बल बेड के नीचे टाँगे झुला कर लिटा देता है और फिर अपनी बेटी की मोटी गान्ड के छेद को अपने हाथों से फैलाता है तो नगमा अपने अब्बा के हाथ को हटाते हुए अपने हाथो से अपनी गदराई मोटी गान्ड को खूब कस कर फैलाती है और अपने अब्बा को अपनी गान्ड का कसा हुआ छेद दिखा कर बोलती है।
अरशद- बस बेटी अब सही पोज़ में आ जाओ.. मुझसे सबर नहीं हो रहा.. तेरी मक्खन जैसी गाण्ड मुझे पागल बना रही है।
नगमा ठीक से घोड़ी बन गई और अपनी गांड को पीछे कर दी।
अरशद- हाँ बस ऐसे ही रहना बेटी.. आज तेरी गाण्ड में लौड़ा घुसा कर मैं धन्य हो जाऊँगा।
अरशद ने ऊँगली में खूब सारा तेल लगाकर नगमा की गाण्ड के सुराख पे रख दी और धीरे-धीरे उसमें घुसाने लगा।
नगमा- आ आ आह्ह.. अब्बा.. आईईइ आह्ह.. आराम से.. कुँवारी गाण्ड है मेरी…
अरशद- अरे बेटी अभी तो ऊँगली से तेल तेरी गाण्ड में भर रहा हूँ ताकि लौड़ा आराम से अन्दर चला जाए।
नगमा- ऊँगली से ही हल्का दर्द हो रहा है.. लौड़ा डालोगे तो मेरी जान ही निकल जाएगी।
अरशद-अरे कुछ नहीं होगा बेटी।मैं आराम आराम से पेलूँगा।
अरशद ऊँगली से नगमा की गाण्ड को चोदने लगा.. उसको मज़ा देने के लिए दूसरे हाथ से उसकी चूत में भी ऊँगली करने लगा। अब नगमा को बड़ा मज़ा आ रहा था.. अरशद ने तेल नगमा की गाण्ड में अच्छे से लगा दिया था। अब उसका लौड़ा झटके खाने लगा था।
उसने नगमा की गाण्ड पर एक चुम्बन किया और लौड़े पर अच्छे से तेल लगा लिया। अब अरशद ने लौड़ा अपनी बेटी की गाण्ड के सुराख पे रखा.. दोनों हाथों से उसको थोड़ा खोला और टोपी को उसमें फँसा दिया। नगमा दर्द के मारे सिहर उठी.. अरशद ने उसकी कमर को कस कर पकड़ा और जोरदार धक्का मारा.. आधा लंड गाण्ड में घुस गया। यह तो तेल का कमाल था.. वरना गाण्ड इतनी टाइट थी की टोपी भी नहीं घुसती।
नगमा- आआआअ आआआ उूउउ… माँ.
अरशद का लौड़ा एकदम फँस सा गया था.. इतना चिकना होने के बाद भी अब आगे नहीं जा रहा था।
अरशद- आह उफ़फ्फ़.. बेटी यह तेरी गाण्ड है या आग की भट्टी.. कैसी गर्म हो रही है.. उफ़फ्फ़ लौड़ा जलने लगा है और टाइट भी बहुत है.. साला लौड़ा तो एकदम फँस गया है।
अरशद आधे लौड़े को ही अन्दर-बाहर करने लगा.. उसको बड़ा मज़ा आ रहा था… अब गाण्ड में आधा लौड़ा ‘फॅक..फॅक.. फॅक’ की आवाज़ से अन्दर-बाहर होने लगा। तभी अरशद ने पूरा लौड़ा टोपी तक बाहर निकाला और ज़ोर से झटका मारा पूरा लौड़ा गाण्ड में जड़ तक घुस गया।
इसी के साथ नगमा झटके के साथ ही बिस्तर पर गिर गई। अरशद भी उसकी पीठ के ऊपर उसके साथ ही नीचे गिर गया। नगमा अब दर्द से चीखने लगी थी। अरशद वैसे ही पड़ा-पड़ा लौड़े को आगे-पीछे करता रहा। दो मिनट में ही उसने ना जाने कितने शॉट मार दिए थे। थोड़ी ही देर में नगमा का दर्द थोड़ा काम होने लगा था।
नगमा- “लो अब्बा अब डालो अपने लंड को अपनी प्यारी बेटी की गदराई गान्ड में.”
अरशद नगमा की बात सुन कर अपने लंड को अपनी बेटी की गान्ड के छेद मे लगा कर एक तगड़ा धक्का मारता है और उसका लंड अपनी बेटी की टाइट गान्ड के छेद को फैलाता हुआ लगभग आधा अंदर घुस जाता है और नगमा की गान्ड फॅट जाती है और वह ज़ोर से सीसियाते हुए ओह अब्बा बहुत मोटा है आपका लंड।
नगमा- ओह अब्बा प्लीज़ मे मर जाऊंगी, अब्बा रुक जाइये अब्बा प्लीज।
अपने आधे लंड को फसाए हुए अरशद अपनी बेटी की गान्ड के मोटे-मोटे पाटो को दबोच-दबोच कर सहलाते हुए अपने लंड को धीरे-धीरे अपनी बेटी की मोटी गान्ड मे पेलने लगता है। नगमा आह-आह करती हुई अपनी गान्ड के छेद को कभी सिकोडती है कभी फैलाती है.
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अरशद लगातार अपनी बेटी की गान्ड के मोटे- मोटे पाटो को मसल-मसल कर सहलाता रहता है जब नगमा कुछ शांत दिखाई देती है तो अरशद अपने लंड को एकदम से कस कर अपनी बेटी की मोटी गान्ड मे पूरा पेल देता है। उसका मोटा लंड उसकी बेटी की मोटी गान्ड को फाड़ता हुआ पूरा अंदर जड़ तक घुस जाता है और नगमा की गान्ड फॅट जाती है और वह ज़ोर-ज़ोर से सिसियाते हुए अपनी गान्ड के छेद को सिकोड़ने लगती है।
अरशद अपनी बेटी की गान्ड को बड़े प्यार से सहलाता हुआ धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगता है और नगमा आह-आह अब्बा सी आह-आह ओह अब्बा बहुत दर्द हो रहा है। प्लीज़ रुक जाइए। आह-आह। अरशद अपनी बेटी के मोटे चुतडो को कस-कस कर अपने हाथो से भिचता हुआ उसकी गान्ड मारने लगता है और नगमा अपने हाथो के पंजो से चादर को पकड़े हुए अपने अब्बा का मोटा लंड अपनी गदराई गान्ड मे लेने लगती है।
नगमा को बहुत दर्द हो रहा था. अरशद को डर था की कहीं नगमा दर्द के कारण गांड मरवाने से मना न कर दे तो इस बार अरशद ने नगमा की कमर को अच्छे से पकड़ा हुआ था ताकि वो आगे ना जा पाए। एक ही वार में लौड़ा गाण्ड के अन्दर और नगमा की चीख बाहर। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
नगमा- आह आआह्ह..अब्बा प्लीज़ आराम से करो ना.. आह अब्बा आप बहुत गंदे हो आह्ह.. आपने एक ही झटके में मेरी गांड फाड़ डाला। उईईइ आह…
अरशद- अरे कुछ नहीं होगा.. जब चूत का दर्द नहीं रहा.. तो ये भी ठीक हो जाएगा और इसमें भी मज़ा आने लगेगा। अरशद पागलों की तरह अपनी बेटी नगमा की गाण्ड में दे-दनादन लौड़ा पेल रहा था। नगमा दर्द के साथ साथ मज़े से कराह रही थी।
नगमा- अई आह मार लो आह्ह.. अगर आपका मन गाण्ड मारने का हुआ है.. तो ठीक है आह्ह.. मगर मेरी गांड में बड़ी खुजली और दर्द हो रही है आह्ह..
अरशद- आह्ह.. आह.. मज़ा आ रहा है बेटी क्या चिकनी गाण्ड है तेरी.. आह्ह.. लौड़ा खुश हो गया आह्ह.. आज तो.. हाँ जान.. रुक थोड़ी देर और गाण्ड का मज़ा लेने दे.. आह्ह.. उसके बाद तेरी चूत को भी शान्त कर दूँगा।
दस मिनट तक गाण्ड मारने के बाद अरशद और रफ़्तार से चोदने लगा। और अपना लंड नगमा की गांड में पेलने लगा।
नगमा – आह अब्बा। मेरी गांड बहुत कसी है। आप तो मेरी गांड फाड़ देंगे।
नगमा घुटनो पे हो कर डॉगी स्टाइल में अरशद से चुदवाने लगती है. अरशद नगमा की कमर को पकड़े कस के उसकी गांड मारने लगता है।
नगमा- आह अब्बा, और अंदर डालिये। चोदिये मुझे.
अरशद अपने लंड को अंदर ढकेल कर नगमा को चोदता है। जब जब उसकी कमर नगमा की बड़ी गांड से टकराती है तब-तब नगमा के मांसल गांड से फ्लैप-फ्लैप के आवाज आती है। अरशद जोश में नगमा को चोद रहा होता है, चोदते हुए नगमा की लटकी चूचियां हवा में झूल रही होती है। अरशद नगमा की चूचियां पकड़ दबाने लगता है। नगमा जोर से चिल्लाने लगती है।
अरशद – बेटी इतना मत चिल्लाओ, मोहल्ले वालों को पता चल जाएगा।
नगमा – आह अब्बा, क्या आपको मेरी गांड मारने में ज्यादा मजा आ रहा है?
अरशद – हाँ बेटी बहुत ज्यादा मजा आ रहा है।
नगमा – ओह अब्बा जब आपको मेरी गांड मारने में इतना मजा आ रहा है तो सोचिये जब जब आप अपनी बेटी के साथ मजा करेंगे तो कितना मजा आएगा आपको?
अरशद – ओह नगमा बेटी।
नगमा – सच तो कह रही हूँ अब्बा। क्या आपको बार बार अपनी बेटी को चोदने का मन नहीं करता? बोलिये।
अरशद – हाँ करता है बेटी, जी करता है कि तुम्हें मैं हर रोज चोदुं।
नगमा- आह अब्बा मुझे चोदिये। चोदिये न अब्बा। मुझे नगमा बेटी कह कर बुलाइये।
अरशद – आह नगमा आ, आज अपने अब्बा के लंड को अपने गांड में ले ले। मेरी प्यारी बेटी मुझसे चुदेगी न?
नगमा – हाँ अब्बा और चोदीये मुझे।
अरशद – आह बेटी, मेरे लंड से पानी निकलने वाला है।
नगमा – निकलने दिजिये अब्बा, गिरा दिजिये मुट्ठ मेरी गांड में।
अरशद – आह बेटी।। मैं छूट रहा हूँ।।।।आआआ हहह आआह्ह आआआह्ह्ह्हह।
अरशद ने अपना सारा मुठ नगमा के गांड के अंदर ही गिरा दिया।
नगमा – ओह अब्बा, आपका गरम-गरम मूठ मेरी गांड के अंदर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं तो आपके लंड की गुलाम हो गई अब्बा।
अरशद – सच बेटी? (अरशद ने अपना लंड नगमा की गांड से बाहर निकाल लिया.)
नगमा – हाँ अब्बा, मैं क्या कोई भी लड़की आपके लंड की गुलाम हो जाएगी। कितना बड़ा और मोटा है आपका लंड़।
अरशद बेड पे बैठ जाता है, नगमा अधमरी सी गहरी-गहरी साँसे लेती हुई पड़ी रहती है और अरशद उसकी गोरी-गोरी पीठ को सहलाता रहता है करीब 2 मिनिट तक अरशद उसके उपर लेटा रहता है उसके बाद उठ कर अपनी बेटी की गान्ड मे एक थप्पड़ मारते हुए।
अरशद- अब उठो भी बेटी कब तक पड़ी रहोगी।
नगमा- पलट कर पीठ के बल लेटती हुई, अब्बा कितने ज़ोर से चोद रहे थे आप।
अरशद- लो कर लो बात खुद ही तो कह रही थी कि अब्बा और ज़ोर से चोद खूब कस कर चोदिए और अब कह रही हो कितना ज़ोर से चोद रहा था।
नगमा- मुस्कुरकर अरे अब्बा उस समय होश रहता है क्या, पर आपको तो सोचना चाहिए था कि आपकी बेटी की क्या हालत होगी, मेरा तो सारा बदन दर्द करने लगा है अब मुझसे उठा भी नही जा रहा है।
अरशद- अरे बेटी तुम फिकर क्यो करती हो मैं तुम्हे अपनी गोद मे उठा लेता हू और अरशद अपनी बेटी को अपनी गोद मे उठा लेता है और नगमा उसके सीने से चिपक जाती है, अरशद अपनी बेटी के होंठो को चूमता हुआ।
अरशद- बेटी तुम्हारी गान्ड बहुत मस्त है।
नगमा- (मुस्कुरा कर)अब्बा अपनी बेटी को नंगी करके अपनी गोद मे उठाते हुए आपको शरम नहीं आती है।
अरशद- तुम्हारे जैसी बेटी को पूरी नंगी करके गोद मे उठाने और अपने लंड मे चढाने मे बहुत मज़ा आता है और (अपनी बेटी की चूत की फांको को फैलाकर देखते हुए) देखो तो बेटी तुम्हारी चूत कितना पानी छोड़ रही है, जानती हो यह क्या कह रही है।
नगमा- मुस्कुरा कर क्या कह रही है।
अरशद- बेटी यह कह रही है की अब्बा अपने मोटे लंड को मेरे अंदर फसा कर खूब कर कर मेरी चूत मार दीजिये।
नगमा- तो फिर देख क्या रहे है अब्बा जैसा वह कह रही है वैसा आप करते क्यों नहीं।
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अरशद – “नगमा बेटी. मैं तुम्हारा बहुत ही शुक्रगुजार हूँ की तुमने मेरी सालों की दबी हुई इच्छा पूरी कर दी और मुझे अपनी गांड मार कर उसका उद्धघाटन करने का मौका दिया. मुझे बहुत ही ख़ुशी है की मैने तुम्हारी गांड की सील तोड़ी और मैं पहला शख्स बना जिसने तुम्हारी गांड मारी है. तुमसे हलाला करके मेरा तो जनम ही सफल हो गया.
हे अल्लाह तुम्हारा लाख लाख शुक्रिया है कि तुमने मुझे अपनी बेटी को चोदने का मौका दिया. पर बेटी देखो ८ बजने वाले हैं. थोड़ी ही देर में नौशाद आता ही होगा. हमें यह नहीं भूलना चाहिए की अब मुझे तुम्हे तलाक देना होगा और फिर तुम उससे निकाह करके दोबारा उसकी बीवी बन जाओगी. तो चलो अब उठो और नहा धो कर कपड़े पहन लो और तैयार हो जाओ.”
नगमा ने अरशद को कस कर पकड़ लिया और बोली. – “अब्बा. आप बहुत खराब है. कल जब से नौशाद मेरी निकाह आपसे कर के गया है. आप ने मुझे कपड़े पहनने का मौका तक नहीं दिया और मुझे तभी से नंगी रखा है और खुद भी नंगे ही हो. अब आप कह रहे हो कि मैं कपड़े पहन लूँ. अब्बा मेरा आप से दूर जाने का बिलकुल भी मन नहीं है. आप नौशाद को आने से मना कर दीजिये और हम दोनों ऐसे ही रहेंगे. मेरा आप से दूर जाने का मन नहीं है.”
अरशद बोला “बेटी नगमा. मैं भी चाहता हूँ की मैं नौशाद को तलाक से मना कर दूँ और तुम्हे सदा के लिए अपनी बीवी बना कर रख लूँ. पर हम दोनों दुनिया की नजरों में बाप बेटी ही हैं, और अभी किसी को हमारी हलाला का पता नहीं है. यदि मैंने तलाक से मना कर दिया तो जरा सोचो की कितना बड़ा स्कैंडल और गड़बड़ हो जाएगी. इसलिए मुझे नौशाद से किया वादा निभाना ही होगा. शायद हमारी किस्मत में एक रात का ही मिलान लिखा था.”
नगमा ने अरशद को जोर से अपने आलिंगन में पकड़ लिया और बोली- “अब्बा। देखिये दुनिया चाहे कुछ भी कहे पर मैंने मन से आपको अपना शौहर मान लिया है. अब आप नौशाद को मना कर दीजिये वरना जब वो यहाँ आएगा तो मैं खुद उसे निकाह से मना कर दूंगी. कुछ भी हो जाये पर मैं आपके साथ बिताई इस रात को भूल नहीं सकती।
और न ही मैं आपको छोड़ कर जाउंगी. आप अम्मी की मौत के बाद से सिर्फ मुठ मार कर ही टाइम पास कर रहे थे. पर अब मेरे तीनो छेद अब आपकी अमानत हैं अब आपको अपनी बेटी की याद में तड़पना नहीं पड़ेगा. मैं इस तलाक और नौशाद से निकाह के लिए सिर्फ एक शर्त पर तैयार हो सकती हूँ.
कि चाहे दुनिया और नौशाद की नजरों मैं हम बाप बेटी होंगे पर असल में आप और मेरा यह शरीर का सम्बन्ध सदा रहेगा. मैं आप के पास आती रहूंगी और आज के बाद आप मुठ नहीं मारेंगे और मुझसे ही अपनी जरुरत पूरी करेंगे. मैं आपके साथ गुजारी यह रात को भूल नहीं सकती और इस को सदा चालू रखूंगी. बोलिये मंजूर है?”
अरशद -” नगमा बेटी. अब मैं क्या कहूं? तुमने तो मेरे मन की बात कह दी. मैं तुम्हे नौशाद के साथ जाने को कह तो रहा था पर असल में मैं अब तुम्हारे इस सुन्दर शरीर और तुम्हारी टाइट चूत और गांड को कैसे भूल पाउँगा. चलो ठीक हैं. अब नौशाद के साथ दोबारा निकाह के बाद भी हम अपना यह रिश्ता सदा कायम रखेंगे. दुनिया की नजरों में हम बाप बेटी होंगे और एक दुसरे के लिए हम मियां बीवी होंगे.
एक बेटी होने के नाते तुम कभी भी इस घर में आ सकती हो, न तो किसी को कोई शक होगा और न ही नौशाद को कोई एतराज हो सकता है. तुम्हारा जब भी चुदवाने का मन हो अपने अब्बा के पास आ जाना और मेरा भी जब तुम्हे चोदने का मन होगा मैं अपनी बेटी को बुलवा लिया करूँगा. ठीक है? चलो अब जल्दी से तैयार हो जाओ नौशाद के आने का टाइम हो रहा है.”
नगमा ने हाँ में सर हिलाया और उठ कर तैयार होने चली गयी. थोड़ी देर में दोनों बाप बेटी तैयार हो गए और तभी नौशाद भी आ गया. आते ही उसने अरशद को सलाम किया और बैठ गया. उसे यह पूछने में शर्म आ रही थी कि क्या दोनों बाप बेटी का हलाला हो गया है? (यानि क्या दोनों में चुदाई हो चुकी है?). नगमा भी चुप करके बैठी थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पर अरशद समझ गया और बोला- “बेटा नौशाद. यह हमारी जिंदगी का सबसे अजीब दिन था. नगमा मेरी बेटी है पर देखो अल्लाह ने हमें किस मोड़ पर ला खड़ा किया है कि मुझे ही उस से निकाह करना पड़ा और हलाला करना पड़ा. पर मैं यह नहीं भूल पाया की वो मेरी बेटी है. मैंने अल्लाह को खुश करने के लिए थोड़ा सा हलाला किया ताकि तुम्हारा निकाह उस से दोबारा हो सके.
पर अब मैं उसे तलाक दे देता हूँ ताकि तुम उस से दोबारा निकाह कर सको. पर अल्लाह गवाह है की अब मेरे तलाक देने के बाद में अपने जेहन से इस गुजर चुकी मनहूस रात के वाकया को सदा के लिए भुला दूंगा और आज के बाद अब नगमा फिर से मेरे लिए मेरी बेटी ही होगी. और मेरे दिल में उसके लिए एक बाप का ही प्यार होगा.”
अरशद झूठ मूठ कह रहा था और नगमा भी दिल ही दिल में हंस रही थी. खैर इसके बाद अरशद ने नगमा को तलाक दे दिया और फिर एक मौलवी के रूप में उसने दोबारा से नौशाद और नगमा का निकाह पढ़वा दिया. इस सब के बाद नगमा ने नाश्ता बनाया और तीनों ने बैठ कर नाश्ता किया.
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फिर नौशाद बोला- “अब्बा जान अब हम चलते हैं. अल्लाह के रहमोकरम से सब ठीक हो गया है और किसी को पता भी नहीं चला है. अब हम चलते हैं. नगमा अब भी आपकी बेटी है और वो जब चाहे आपसे मिलने आ सकती है.”
नगमा बर्तन उठा कर किचन में धोने चली गयी.
नौशाद बोला – “अब्बा मेरा थोड़ा पेट खराब है. मैं जरा टॉयलेट हो कर आता हूँ. फिर मैं और नगमा चलते हैं.”
यह कह कर नौशाद टॉयलेट चला गया. ज्योंही नौशाद टॉइलेट के लिए गया. तुरंत अरशद उठ कर नगमा के पास आया और बोला-
“नगमा बेटी. अब तुम मुझे छोड़ कर चली जाओगी. यह सोच कर ही मेरा दिल बैठा जा रहा है. मेरा और खास कर मेरे इस लण्ड का तुम्हारे बिना क्या होगा. देखो तुम्हारी याद में यह कब से टाइट होकर खड़ा है. और तुम्हारे जाने के दुःख से आंसू बहा रहा है.”
यह कहकर अरशद ने अपना लण्ड जो कि बिलकुल टाइट था, अपनी लुंगी हटा कर दिखाया। अरशद का लण्ड इतना टाइट था की उसकी नसें भी साफ़ दिखाई दे रही थी. नगमा ने अपने अब्बा का लण्ड हाथ में पकड़ लिया और उसे प्यार से सहलाते हुए बोली-
“अरे अब्बा! आप ऐसे न कहें. सच में मेरा भी दिल जाने का बिलकुल नहीं है. आप ऐसे बोलेंगे तो मैं अभी रो पड़ूँगी. आप चिंता न करें। मैं जल्दी ही कोई बहाना बना कर आपसे मिलने आ जाउंगी. और फिर आप जिस तरह चाहें मुझे चोद लेना. अभी तो मेरी दुबारा शादी भी हो चुकी है नौशाद से. और वो मेरे को लेकर जाने वाला है.”
अरशद बोला- “वो तो सब ठीक है बेटी. मैं तुम्हारे दिल का हाल भी जानता हूँ. पर इस खड़े लण्ड का क्या करूँ. तुम्हें देख देख कर तो यह और भी टाइट हो रहा है. तुम ऐसे करो, कि जब तक नौशाद टॉयलेट से बाहर आता है. तुम किचन में आ जाओ और अपना लेहंगा ऊपर उठा लो ताकि मैं जल्दी से एक राउंड छोड़ लेता हूँ फटाफट। हम किचन से देखते रहेंगे और ज्योंही नौशाद आएगा मैं अपना लण्ड निकाल लूंगा. अब जल्दी से किचन में चलो.”
नगमा ने कहा- “अब्बा. मन तो मेरा भी यही कर रहा है की जाने से पहले फटाफट एक राउंड चुदाई का हो जाये पर यह ठीक नहीं होगा। बहुत खतरा है. नौशाद किसी भी टाइम बाहर आ सकते हैं. यदि पकड़े गए तो बहुत मुश्किल हो जाएगी. और हमारा यह मिलान आगे भी नहीं चल पायेगा.
इसलिए आप किसी तरह अपने मन को समझा लीजिये. या एक काम करते है कि किचन में चलते है और मैं फटाफट आपकी मुठ मार देती हूँ. आपका पानी भी निकल जायेगा और आपको शांति भी मिल जाएगी. चुदाई का तो टाइम नहीं है. बस आप जरा जल्दी कीजिये.”
यह कहकर नगमा ने अरशद का लण्ड हाथ में पकड़े पकड़े ही उसे हिलाना शुरू कर दिया और उसे खींच कर किचन की ओर जाने लगी. इसी तरह मुठ मारते मारते दोनो किचन में चले गए. नगमा ने उन्हें हाथ से धीरे से दीवार की तरफ धकेला जिससे ठीक खिड़की के बगल की दीवार से चिपका कर खड़े हो गए.
फिर उन्हें वहीं खड़े रहने का इशारा किया। चूंकि किचन में लाइट थोड़ी काम थी तो बाहर से वैसे भी कुछ दिखाई नहीं देने वाला था। नगमा अब्बा के बगल में आकर खिड़की से सट कर ऐसे खड़ी हो गई कि उसे टॉयलेट का दरवाजा अंदर दिखाई देता रहा.
नगमा ने थोड़ा और एडजस्ट कर लिया उनके लंड को मुट्ठी में भर कर उस को आगे-पीछे कर खड़े-खड़े ही मुठ मारने लगी। अरशद थोड़े घबराते हुए नगमा हाथ को हल्का सा पकड़ते हुए धीमे से बोले- अरे बेटा, यहां मत करो, फर्श गंदा हो गया तो दिक्कत हो जाएगी।
दरअसल अब्बा डर रहे थे कि कहीं उनके लंड का पानी निकल कर फर्श पर गिर ना जाए। नगमा ने उंगली से चुप रहने का इशारा करते हुए कहा- कुछ नहीं होगा, आप चुपचाप खड़े रहिए! थोड़ी देर इस तरह हाथ से अब्बा का लंड हिलाने के बाद नगमा ने हाथ हटा लिया और उनसे खिड़की की तरफ इशारा करते हुए धीमे से उनसे कहा- यहां से अंदर ध्यान दिए रहिएगा.
अभी अरशद कुछ समझ पाते… तभी नगमा घूम कर उनके सामने आ गई और घुटनों के बल नीचे बैठ गई और उनके कुर्ते को ऊपर उठा कर नगमा ने अपना सिर कुर्ते के अंदर कर लिया, जिससे उनके कुर्ते से उसका सर ढक गया। फिर नगमा ने एक हाथ से लंड की पकड़ा और सुपारे को मुंह में लेकर चूसने लगी।
नगमा जान रही थी कि अबकी बार देर तक लंड चूसने को मिलेगा क्योंकि अब्बा पहले ही 2 बार झड़ चुके हैं तो तीसरी बार में वे थोड़ी देर से झड़ेंगे। वैसे भी लंड को चूसने में उसे बहुत मजा आता था इसलिए उसे उनके देर से झड़ने में कोई दिक्कत भी नहीं थी। बस एक ही डर था कि कहीं नौशाद जल्दी बाहर न आ जाये.
वहीं इस तरह घर में नौशाद से छुपकर अब्बा के लंड को चूसना दोनों को और उत्तेजित कर रहा था। अब इस बेटी अब्बा खेल में अरशद को भी मजा आने लगा था। उन्होंने कुर्ते के ऊपर से ही अपना एक हाथ नगमा सिर पर रख दिया था और मजे से अपनी कमर हल्का-हल्का हिलाते हुए लंड चुसवा रहे थे।
इसी तरह करीब ५-७ मिनट तक लगातर लंड चूसने के बाद अब्बा तेजी से अपनी कमर हिलाने लगे. नगमा समझ गई कि अब वे झड़ने वाले हैं। तो नगमा भी तेजी से सर को आगे-पीछे कर लंड चूसने लगी. फिर अचानक अब्बा अपनी कमर को तेज झटका देते हुए नगमा मुंह में लंड का सारा पानी निकाल दिया।
नगमा भी लंड को तब तक मुंह में लेने के लिए चूसती रही जब तक लंड का एक-एक बूंद पानी नहीं पी लिया। लण्ड से दो बार पहले भी पानी निकल चुका था तो इस बार बस थोड़ा ही पानी निकला जिसे नगमा पूरा पी गयी। कुछ ही देर में अब्बा का लंड ढीला हो गया था… उसके बाद नगमा ने लंड को मुंह निकाला और अब्बा की लुंगी से ही मुंह को पौंछा और खड़ी हो गई। अब्बा की सांसें अभी भी तेज चल रही थीं… जैसे कहीं से दौड़ कर आ रहे हों.
नगमा ने धीमे से अब्बा से कहा- देखा, फर्श भी गंदा नहीं हुआ और काम भी हो गया।
अब नगमा और अब्बा एक-दूसरे से इतने खुल चुके थे कि हमारी बातों से ऐसा लग ही नहीं रहा था कि नगमा और वे बाप-बेटी हैं। इतनी देर में टॉयलेट का दरवाजा खुलने की आवाज़ आयी. नौशाद बाहर आ रहा था. दोनों बाप बेटी फटाफट अलग हुए और नगमा ने फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक का बोतल निकाला और उसे गिलासों में डालने लगी.
अरशद भी प्लेटों में खाने का सामान डालने लगा। नौशाद दोनों बाप बेटी को किचन में देख कर उधर ही आ गया, पर तब तक दोनों लण्ड चुसाई का काम खतम कर चुके थे. फिर सभी बाहर सोफे पर आ गए और कोल्ड ड्रिंक वगैरह पी कर दोनों चलने लगे. नौशाद ने मोटरसाइकिल निकाला और दोनों उस पर बैठ गए.
अरशद ने धीरे से पीछे बैठी अपनी बेटी के चूतड़ पर चुपके से हाथ फेरते हुए कहा- “बेटी नगमा! अब जल्दी ही आना और कुछ दिन रह कर जाना। तुम्हें तो मालूम ही है की तुम्हारी अम्मी की मौत के बाद मैं कितना अकेला रह गया हूँ. तुम आ जाती हो तो घर में रौनक आ जाती है. और नौशाद बेटे तुम भी जल्दी जल्दी चक्कर लगा लिया करो. मुझे भी अच्छा लगता है.”
नौशाद बेचारा सोच रहा था की एक बाप अपनी बेटी को प्यार से बुला रहा है. पर उस बेचारे को क्या पता था की असली बात क्या है. उसे तो यह भी पता नहीं था की इस बात करते समय भी अरशद की ऊँगली उसकी बेटी नगमा की गांड की दरार में चल रही है.
वो बोला “जी अब्बा जान. हम अक्सर आते रहेंगे और यदि मुझे टाइम न भी लगे तो नगमा आ जाया करेगी.”
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नगमा भी मुस्कुरा कर चुपके से अपने बाप अरशद को आँख मार कर बोली- “जी अब्बा. मुझे मालूम है कि आप मुझे कितना प्यार करते है. आप फ़िक्र न करे. मैं अब आपको अम्मी की कोई भी कमी महसूस नहीं होने दूँगी.” नौशाद भी हाँ में गर्दन हिलता रहा. उस बेचारे को क्या पता था कि उस की बीवी अपने बाप को उसकी अम्मी की कमी किस तरह महसूस नहीं होने देगी. फिर नौशाद और नगमा जल्दी ही वापिस आने का वायदा करके चल पड़े.
इस तरह एक बाप और बेटी का हलाला निकाह हुआ। उस दिन के बाद आज तक उन दोनों काम सम्बन्ध उसी तरह चल रहा है. नगमा मौका मिलते ही अपने अब्बा के पास आ जाती है और दोनों खूब जोर जोर से चुदाई का खेल खेलते है. अरशद अपनी बेटी के तीनों छेदों (मुंह गांड और चूत )का भरपूर मजा लूट रहा है और नगमा को भी अब नौशाद के लण्ड के छोटे होने का कोई गम नहीं है क्योंकि उस की प्यास बुझाने के लिए उस के बाप का मोटा और खूब बड़ा लण्ड हमेशा तैयार है.
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