Hot Sexy Girl
मैं रोज़ सुबह 6:50 पर विरार स्टेशन पहुंच जाता था। दूसरी क्लास के कोच में गेट के बिल्कुल पास वाली जगह मैंने अपनी बना ली थी। भीड़ कितनी भी हो, मैं वहीं खड़ा रहता। पिछले तीन हफ्तों से यही रूटीन था। दादर के पास नई जॉब लगी थी, इसलिए हर दिन यही लंबा सफर करना पड़ता। Hot Sexy Girl
ट्रेन आई। लोगों ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। मैंने अपनी जगह संभाल ली। एक हाथ ऊपर की रॉड पर, दूसरा बैग पर। नालासोपारा स्टेशन आया। दरवाजे खुले और भीड़ एकदम पागलों की तरह घुसने लगी। तभी एक साफ, थोड़ी नर्वस लेकिन मीठी आवाज मेरे कान में पड़ी— “भैया… थोड़ी जगह दोगे क्या? खड़े होने की भी जगह नहीं है।”
मैंने मुड़कर देखा। वह खड़ी थी। उम्र करीब 23। गोरी-चिट्टी स्किन, जैसे ताजा दूध में हल्का गुलाबी रंग घुला हो। लंबे काले बाल आधे खुले-आधे बंधे हुए थे, कुछ लटें पसीने से गालों पर चिपक रही थीं। आँखों में हल्का काजल, होंठ प्राकृतिक गुलाबी।
हल्का गुलाबी रंग का बहुत फिटेड कुर्ता और काली लेगिंग। कुर्ता शरीर पर इतना सटीक था कि फिगर छुप नहीं पा रही थी। उसके 32 के स्तन गोल, भारी और कुर्ते के अंदर से साफ उभरे हुए थे। कपड़ा पतला और थोड़ा टाइट था, इसलिए उनके आकार, वजन और गर्माहट का अंदाजा आसानी से लग रहा था।
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28 की कमर इतनी पतली और नफीस थी कि देखने में ही हाथों में समा जाने जैसी लगती। 34 की गांड गोल-मटोल, भरी हुई, लेगिंग में कसकर फंसी हुई। जांघें मोटी, मुलायम और मजबूत। लेगिंग उनके शेप को और ज्यादा उभार रही थी। चलते समय उसकी गांड हल्के-हल्के हिलती थी। मैंने बिना कुछ कहे थोड़ा साइड होकर जगह बना दी।
“आ जाओ।”
वह अंदर आई और ठीक मेरे बगल में खड़ी हो गई। जगह इतनी कम थी कि हमारे शरीर लगभग सट गए। उसके कंधे का हल्का स्पर्श मेरी बांह से हुआ। ट्रेन चली। पहले कुछ पल दोनों चुप रहे। बस ट्रेन की आवाज और लोगों की भीड़। वसई तक सिर्फ हल्की रगड़ होती रही। मुझे उसके बालों की हल्की खुशबू आने लगी — साबुन की साफ सुगंध और हल्की फ्लोरल सी।
शरीर के इतने करीब होने से उसकी गर्माहट भी महसूस होने लगी थी। नायगांव में जोर का झटका लगा। ट्रेन ने अचानक ब्रेक मारा। उसका पूरा शरीर मुझ पर गिर पड़ा। उसके नरम, भारी स्तन मेरी बांह से जोर से दब गए। कुर्ते के कपड़े के ऊपर से भी उनकी गर्माहट और नरमी साफ महसूस हुई।
जैसे कोई गर्म, मुलायम और भारी चीज मेरी बांह पर टिक गई हो। गोल गांड मेरी जांघ पर पूरी तरह चिपक गई। लेगिंग इतनी पतली थी कि मुझे उसकी गांड का पूरा आकार, गर्माहट, नरमी और हल्का दबाव महसूस हो रहा था। दोनों की सांस एक साथ अटकी। मेरे सीने में एक अजीब सी गर्मी फैल गई।
मेरे शरीर में तुरंत हलचल हुई। पेट के निचले हिस्से में करंट जैसा दौड़ा। जांघ पर उसका नरम दबाव पड़ते ही मेरा लंड हल्का सा फड़का और धीरे-धीरे सख्त होने लगा। उभार जींस में उभर आया। छुपाना मुश्किल हो रहा था।
उसने धीमे से, थोड़ी शर्मिंदगी भरी आवाज में कहा, “सॉरी… बहुत भीड़ हो गई है।”
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मैंने सिर्फ सिर हिलाया। कोई जवाब नहीं दिया। वह हटी नहीं। हटना नामुमकिन था। और शायद वह हटना भी नहीं चाहती थी। उसका शरीर अभी भी पूरी तरह मुझसे सटा हुआ था। भायंदर तक शरीर सटा रहा। मुझे अब साफ-साफ महसूस हो रहा था — उसके स्तनों की गर्माहट, उनकी नरमी, उनका वजन, और गांड का नरम, भरा हुआ दबाव। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हर छोटे झटके के साथ उसका शरीर हल्के से आगे-पीछे हो रहा था। स्तन मेरी बांह पर रगड़ खा रहे थे — नरम, गर्म, भारी। गांड मेरी जांघ पर दब-दबकर रगड़ रही थी। हर रगड़ के साथ मेरे लंड पर दबाव पड़ता और शरीर में सिहरन दौड़ जाती। पेट में गर्मी बढ़ रही थी। सांसें थोड़ी भारी हो गई थीं। दिल तेज धड़कने लगा था।
इधर वह भी महसूस कर रही थी। मेरी जांघ पर जो सख्त और गर्म उभार था, वह उसकी गांड से बार-बार छू रहा था। हर छूने पर उसके शरीर में हल्की सिहरन होती। सांसें तेज हो रही थीं। गाल हल्के गुलाबी से लाल होने लगे थे। लेगिंग के अंदर हल्की नमी महसूस होने लगी थी।
निप्पल सख्त होकर कुर्ते से घिस रहे थे। वह जानबूझकर नजर नहीं मिला रही थी, लेकिन शरीर हटाने की कोई कोशिश भी नहीं कर रही थी। उल्टे कभी-कभी झटके के साथ थोड़ा और अपना शरीर मेरे करीब कर देती थी। जैसे वह भी इस स्पर्श का मजा ले रही हो।
मीरा रोड पर और लोग चढ़े। भीड़ और बढ़ गई। अब उसकी पीठ मेरी छाती से पूरी तरह सट गई थी। मुझे उसके बालों की खुशबू, गर्दन की गर्माहट और पीठ की नरमी साफ महसूस हो रही थी। मेरी छाती पर उसका नरम दबाव पड़ रहा था। हर सांस के साथ उसका शरीर हल्का ऊपर-नीचे हो रहा था।
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दहीसर तक दोनों की सांसें काफी तेज हो चुकी थीं। मेरी बांह अब उसके स्तनों के नीचे फंस गई थी। हर सांस के साथ स्तन हल्के ऊपर-नीचे हो रहे थे। उनकी गर्माहट मेरी बांह में उतर रही थी। मेरे लंड ने पूरी तरह सख्त होकर जींस में तना हुआ था।
हर छोटी रगड़ पर शरीर में तेज सिहरन दौड़ जाती। पेट के निचले हिस्से में बेचैनी और गर्मी दोनों बढ़ रहे थे। बोरीवली में थोड़ी जगह बनी तो उसने हल्के से मुड़कर मुझे देखा। आंखों में शर्म थी, लेकिन नजर जल्दी नहीं हटी। काजल लगी गहरी आंखें, हल्की नमी, और कुछ अनकहा सा भाव।
मैंने भी उसकी आंखों में देखा। दोनों ने एक पल के लिए एक-दूसरे को घूरा। उसके गाल और ज्यादा लाल हो गए। सांस उसकी थोड़ी अटकी। फिर उसने नजर फेर ली, लेकिन शरीर नहीं हटाया। उल्टे थोड़ा और सट गई। कंदिवली, मालाद, गोरेगांव, राम मंदिर, जोगेश्वरी होते हुए अंधेरी तक हमारा शरीर कभी पूरी तरह अलग नहीं हुआ।
कभी झटके से उसके स्तन और जोर से दब जाते — उनकी नरमी, वजन और गर्माहट मेरी बांह पर पूरा महसूस होती। कभी उसकी गांड मेरी जांघ पर कसकर रगड़ खाती — नरम, गोल, गर्म, भरी हुई। मुझे लग रहा था कि वह जानबूझकर थोड़ा और दबाव दे रही है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उसकी सांसें मेरे गले और कान के पास से गुजर रही थीं। मेरे शरीर में गर्मी और बढ़ रही थी। लंड इतना सख्त हो चुका था कि जींस में हल्का दर्द होने लगा था। पूरे शरीर में एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना फैली हुई थी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
इधर उसके शरीर में भी वही तूफान चल रहा था। लेगिंग के अंदर नमी काफी बढ़ चुकी थी। हर रगड़ पर उसके अंदर सिहरन दौड़ जाती। स्तनों के निप्पल पूरी तरह सख्त होकर कुर्ते से बार-बार घिस रहे थे। सांसें भारी और तेज थीं। मन में शर्म, डर और एक अजीब सी मीठी इच्छा एक साथ चल रही थी। वह चाहकर भी शरीर नहीं हटा पा रही थी। या हटाना नहीं चाहती थी।
विले पार्ले, सांताक्रुज, खार रोड, बांद्रा, महिम, माटुंगा और फिर दादर। दादर पर उतरते समय उसकी गांड एक बार फिर मेरे पूरी तरह सख्त लंड पर दबी। दोनों की नजर मिली। इस बार थोड़ी देर तक। उसके गाल लाल थे। आंखों में शर्म के साथ एक साफ सी इच्छा भी थी।
सांस उसकी अभी भी तेज चल रही थी। उसने कुछ नहीं कहा, बस प्लेटफॉर्म पर उतर गई। भीड़ में घुलते हुए एक बार पीछे मुड़कर देखा — आंखें मिलीं — फिर गायब हो गई। मैं खड़ा रहा। मेरे शरीर पर अभी भी उसकी गर्माहट महसूस हो रही थी।
बांह पर स्तनों का दबाव और नरमी, जांघ पर गांड की गर्माहट और आकार, बालों की खुशबू, और लंड पर उसका आखिरी नरम दबाव। जांघ पर लंड अभी भी पूरी तरह सख्त और तना हुआ था। पूरे शरीर में गर्मी, सिहरन और एक गहरी बेचैनी फैली हुई थी। पहली बार किसी अजनबी लड़की का शरीर इतनी देर तक इस तरह लगा था।
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और सबसे अजीब और गहरी बात — वह हटी नहीं थी। जानबूझकर नहीं हटी थी। हर झटके के साथ और करीब आती गई थी। उस दिन पूरे ऑफिस में मेरा ध्यान नहीं लग पाया। बार-बार वही गुलाबी कुर्ता, वही 32 के गोल भारी स्तन, वही 28 की पतली कमर, वही 34 की भरी गोल गांड, वही काजल वाली आंखें, वही गर्माहट और वही रगड़ याद आती रहीं। शरीर में गर्मी और बेचैनी शाम तक बनी रही। घर पहुंचकर भी वही अहसास बाकी था.
जैसे उसका शरीर अभी भी मेरे बगल में सटा हो, जैसे उसकी गांड अभी भी मेरी जांघ पर दबी हो, जैसे उसके स्तन अभी भी मेरी बांह पर नरम दबाव दे रहे हों। रात को सोते समय भी वही अहसास बार-बार लौट रहा था। शरीर में एक अजीब सी बेचैनी और इच्छा बाकी रह गई थी। अगर कोई भाभी या गर्ल्स को मेरी ये स्टोरी अच्छी लगे, मिलना चाहें, या स्टोरी के लिए टिप्स/आइडिया देना चाहें तो इस ईमेल पर संपर्क करें: men.virar@gmail.com
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