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शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 1

अक्टूबर 9, 2026 by hamari Leave a Comment

Hindi Thriller Story

शाम से बारिश हो रही थी….. और आसमान में अंधेरा छाता जा रहा था….. में अपनी दोनो बेटियों के साथ खाना बनाने के तैयारी कर रही थी. तभी फोन की घंटी बजी. में किचन से निकल कर अपने रूम में गयी. और फोन उठाया. दूसरी तरफ से किसी औरत की आवाज़ आई. “हेलो वैशाली कैसी हो? में बोल रही हूँ मधु” ये मेरी एक पुरानी सहेली की आवाज़ थी. आज बरसो बाद उसकी आवाज़ सुनी, तो कुछ बीते हुए पलों की यादें दिमाग़ में घूम गयी. Hindi Thriller Story

मधु: हेलो वैशाली तुम हो ना लाइन पर.

में: हां हां बोल मधु. में ठीक हूँ. तुम अपनी बताओ?

मधु: में भी ठीक हूँ. और तुम्हारी बेटियाँ कैसी है?

में: वो दोनो भी ठीक है. खाना खा रही है.

मधु: अच्छा वैशाली सुन मुझे तुझसे कुछ काम था.

में: हां बोल ना क्या काम था.

मधु: यार कैसे बोलूं समझ में नहीं आ रहा…..दरअसल बात ही कुछ ऐसी है.

में: तू ठीक है तो है. बोल ना क्या बात है.

मधु: वो.. वो.. मुझे क्या तुम मुझे एक रात के लिए अपने घर पर रुकने दे सकती हो?

में: हां क्यों नहीं इसमे पूछने की क्या बात है. कब आ रही है तू.

मधु: यार आ नहीं रही. आ चुकी हूँ. पर पहले मेरी पूरी बात सुन ले. वो वो मेरे साथ कोई और भी है.

में: हां तो क्या हुआ आ जा.

मधु: यार तू मेरी बात को समझ नहीं रही. वो मेरे साथ एक लड़का है.

में: क्या लड़का ! तेरा बेटा है क्या?

मधु: नहीं यार ! अब में तुम्हे कैसे बताऊ. वो वो समझ ना.

में: तू ये पहेलियाँ क्यों बुझा रही है. साफ साफ बता ना क्या बात है.”

मधु: यार वो छोड़ तू ये बता कि तुम मुझे एक रात के लिए अपने घर पर एक रूम दे सकती हो या नहीं…..वो मेरे साथ मतलब समझ ना.

कहाँ हम जैसे ग़रीब और मजबूर लोग जो पैसे पैसे के लिए तरसते है और कहाँ वो मधु जो अपने आशिक के साथ एक रात बिताने के लिए ५००० रुपये उड़ा रही है. पर फिर मुझे अहसास हुआ कि, ये मैंने क्या कर दिया. मेरी दोनो बेटियाँ अब बारहवीं क्लास पास कर चुकी थी. और आगे पैसे ना होने के कारण में उन्हे आगे नहीं पढ़ा पा रही थी.

मधु मुझसे उम्र में ४-५ साल कम थी. में कैसे इतने बड़े लड़के को उसका बेटा बता सकती हूँ. फिर सोचा चलो जो होगा देखा जाएगा. में बाहर आई, और किचन में चली गयी. अक्तूबर का महीना था. और बारिश से हवा भी ठंडी हो गयी थी. मतलब साफ था अब सर्दियाँ आने को है.

जब में किचन में पहुची, तो मेरी बड़ी बेटी प्रिया ने पूछा. “माँ किसका फोन था” मैंने अपने आप को संभाले हुए कहा.”वो मेरी एक सहेली का फोन था. तुम नहीं जानती उनको. वो किसी काम से अपने बेटे के साथ यहाँ आई थी. और टाइम से वापिस नहीं जा पाई तो, आज रात वो यहाँ हमारे घर पर रुकेगी. तुम थोड़ा सा खाना ज़्यादा बना लो.

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रश्मि: माँ ठीक है. पर घर पर दूध नहीं है. उनको चाय तो पिलानी है ना.

में: हां ठीक है में दुकान से दूध लेकर आती हूँ.

फिर में घर के बाहर आई, तो देखा बारिश अब धीमी पड़ चुकी है. तेज हवा के साथ बारिश की हल्की फुहार का भी अहसास हो रहा था. हमारा घर एक छोटे से कस्बे में था और एक घर दूसरे घर से काफ़ी दूरी पर थे. में रास्ते पर चलती हुई दुकान पर पहुचि, दूध का पैकेट लिया, और फिर घर की तरफ चल पड़ी.

में जैसे ही घर के बाहर पहुचि तो पीछे से गाड़ी की आवाज़ आई. गाड़ी हमारे घर के बाहर आकर रुकी, मैंने पलट कर देखा तो उसमे से मधु नीचे उतर रही थी. मधु ने मेरी तरफ मुस्कराते हुए देखा, और फिर मेरे पास आकर मुझे गले से मिली. “ओह्ह वैशाली. कितने सालो बाद देख रही हूँ तुझे.”

तभी मेरी नज़र पीछे खड़े लड़के पर पड़ी. जो टॅक्सी ड्राइवर को पैसे दे रहा था. जैसे मैंने उसकी तरफ देखा. में एक दम से हैरान हो गयी. मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था. सामने जो लड़का खड़ा था. वो मुश्किल से मेरे बेटी से एक दो साल बड़ा होगा.

में आँखें फाडे उसे देख रही थी. कभी मधु को देखती. मधु मेरे मन में उठ रहे सवालो को समझ चुकी थी. उसने अपने होंठो पर मुस्कान लाते हुए कहा. “अंदर चल बताती हूँ, सुशांत ये बॅग उठा कर अंदर ले आओ.’ उसके बाद हम दोनो अंदर आ गये. हमारे पीछे वो लड़का भी अंदर आ गया.

मैंने गेट बंद किया. और अंदर जाने लगी. मैंने देखा मेरी दोनो बेटियाँ बड़े ही उत्साह के साथ घर आए हुए मेहमानो को देख रही थी. जब से उन दोनो ने होश संभाला था. तब से पहली बार हमारे घर पर कोई आया था. हमारी जिंदगी बहुत ही नीरस होकर रह गयी थी.

जब रात होती तो, घर में अजीब सा सन्नाटा छा जाता. खाना खाने के बाद हम तीनो अपने अपने बिस्तरों पर लेट जाते. और सोने की कोशिश करते. ना कभी हँसी मज़ाक होता. और ना ही कभी किसी तरह का एन्जॉयमेंट. मेरे पति के गुजरने के बाद ये घर सिर्फ़ ईटो का मकान रह गया था.

पर आज मैंने कई सालो बाद अपनी दोनो बेटियों के चेहरे पर हल्की से मुस्कान देखी थी. हम लोग अंदर आए, और में उन्हें अपने रूम में ले गयी. अब ग़रीबो के पास सोफा तो था नहीं. इसलिए मैंने उन्हे बेड पर बैठाया. और अपनी बड़ी बेटी प्रिया को आवाज़ दी.

में: प्रिया बेटा ज़रा दो ग्लास पानी ले आना.

प्रिया: जी मम्मी.

थोड़ी देर में प्रिया पानी लेकर रूम में आई, और उसने मधु और उस लड़के सुशांत को पानी दिया. “प्रिया बेटा आंटी को नमस्ते कहो” प्रिया ने मधु को नमस्ते कहा.

मधु: (प्रिया को गले से लगाते हुए) ये प्रिया है, देखो तो सही कितनी बड़ी हो गयी है. पहचान में नहीं आ रही. बहुत खूबसूरत है तुम्हारी बेटी. और छोटी कहाँ है रश्मि.

मैंने रश्मि को आवाज़ दी, और रश्मि भी रूम में आ गये.

रश्मि: नमस्ते आंटी जी.

मधु: (रश्मि को गले लगाते हुए) नमस्ते बेटा. वैशाली तुम्हारी दोनो लड़कियाँ कितनी खूबसूरत है. बिलकुल तुम पर गयी है.

रश्मि: में नहीं आंटी जी. प्रिया गयी है माँ पर.

और फिर मधु और रश्मि हसने लगी. आज पता नहीं कितने सालो बाद मैंने अपने बेटियों के चेहरो पर खुशी देखी थी.”एक मिनिट” कहते हुए मधु अपना बॅग खोलने लगी. और उसने उसमे से दो पॅकेट निकाले, और प्रिया और रश्मि को देते हुए कहा “ये तुम दोनो के लिए” दोनो ये गिफ्ट लेकर बहुत खुश थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में: अर्रे इसकी क्या ज़रूरत थी?

मधु: अर्रे कितने सालो बाद देख रही हूँ. तो खाली हाथ आती क्या?

में: प्रिया जाकर आंटी के लिए चाय नाश्ते का इंतज़ाम करो.

प्रिया: जी मम्मी.

और फिर प्रिया और रश्मि दोनो किचन में चली गयी. मैंने मधु की तरफ देखा, तो उसने मुझे इशारे से बाहर चलने को कहा. में और मधु दोनो बाहर आ गये. में जानती थी कि मधु से नीचे बात करना ठीक नहीं होगा. क्योंकि नीचे प्रिया और रश्मि दोनो किचन में थी.

तभी अंदर से सुशांत ने आवाज़ लगाई “आंटी जी” मैंने उसकी तरफ पलट कर देखा तो वो मुझे ही बुला रहा था. में थोड़ा सा अनकंफर्टबल महसूस कर रही थी. में उसके पास गयी और बोली “क्या हुआ कुछ चाहिए क्या.”

सुशांत: नहीं वो में कह रहा था. कि क्या में टीवी देख सकता हूँ.

में: (थोड़ी देर सोचने के बाद) हां लगा लो.

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(जब से मेरे पति की मौत हुई थी. तब से ना तो कभी मैंने टीवी देखा था और ना ही मेरे बेटियों ने. इसीलिए में थोड़ा झिझक रही थी.) में मधु को लेकर ऊपर आ गयी. और ऊपर आते ही, उसने अपने पर्स से पांच सौ के दस नोट निकाल कर मेरे सामने कर दिए. मुझे इन पैसो की सख़्त ज़रूरत थी. पर ना जाने क्यों में अपने हाथ आगे नहीं बढ़ा पा रही थी.

मधु: अर्रे देख क्या रही है (और ये कहते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरे हाथ में पैसे थमा दिए) क्या सोच रही है.

में: तू ये सब क्यों मतलब उस लड़के की उमर तो देख ली होती. तेरे बेटे जैसा है वो. और आज कल के ये बच्चे भी.

मधु: क्या क्या कहा तूने बच्चा. मेरी जान वो शिकारी है शिकारी. एक बार उसका हथियार देख लेगी ना तो खड़े खड़े तेरी योनि मूत देगी.

में: होश में रह कर बात कर मधु. बच्चे नीचे है.

मधु: (मुझे बाहों में भरते हुए) ओह्ह हो नाराज़ क्यों हो रही है. वैसे एक बात कहूँ, लड़के में दम बहुत है. मेरी जैसी औरत की भी तसल्ली करवा देता है. लिंग नहीं मानो लोहे का रोड हो. साले का लिंग जब भी योनि में जाता है, तो कसम से योनि पानी की नदी बहा देती है.

मधु की बातें सुन कर मेरे बदन में अजीब से झुरझुरी दौड़ गयी. में उसकी ये बकवास बातें नहीं सुनना चाहती थी. पर न ज़ाने क्यों उसके और सुशांत के बीच की बातें जानने का दिल कर रहा था. अजीब सा अहसास हो रहा था. मेरा पूरा बदन रोमांच के कारण काँप रहा था. यही सोच कर कि, कैसे एक औरत अपने बेटे की उम्र के लड़के से ऐसे संबंध रख सकती है. एक अजीब सी उत्तेजना मुझमें भरती जा रही थी.

में: पर तू और वो लड़का कैसे ये कैसे हो सकता है. मतलब.

मेरे अंदर छुपी जिज्ञासा मधु से छुपी ना रही. और वो मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोली. “सब बता दूँगी. आगे चल कर तेरे काम आएगा” ये कहते हुए उसने शरारती मुस्कान के साथ मेरी कमर पर चुटकी काट दी.

में: आहह पागल है क्या कैसी बात करती है.

तभी नीचे रश्मि की आवाज़ आए. “माँ चाय तैयार है. नीचे आ जाओ” में और मधु नीचे आ गये. मधु सीधा रूम में चली गयी. और में किचन में चली गयी. जब में किचन में पहुची तो , मैंने देखा रश्मि और प्रिया दोनो टीवी पर चल रहे सॉंग की आवाज़ के साथ गुनगुना रही थी. आज सच में मैंने उनको पहली बार इस तरह खुश देखा था.

टीवी पर चले रहे सॉंग्स और मधु और सुशांत की मौजूदगी ने मानो जैसे इस घर में थोड़ी से जान डाल दी हो. मैंने चाय को कप्स में डाला, और रूम में चली गयी. दोनो को चाय दी, फिर वहीं बैठ कर मधु के साथ इधर उधर की बाते करने लगी. चाय पीने के बाद मधु बोली “चल वैशाली छत पर चलते है. ऊपर मौसम बहुत अच्छा है.”

में मधु के साथ बाहर आई, मैंने देखा प्रिया और रश्मि दोनो खाना बना रही थी. “प्रिया तुम खाना बनाओ में तुम्हारी आंटी के साथ ऊपर जा रही हूँ” में और मधु ऊपर आ गये. बारिश अब पूरी तरह बंद हो चुकी थी. और अंधेरा छा चुका था. मैंने ऊपर वाले रूम से एक चारपाई निकाली और बाहर बिछा दी. और फिर में और मधु वहाँ पर बैठ गये.

में: मधु में कहती हूँ. तू जो ये कर रही है, ठीक नहीं कर रही. अगर तेरे पति और घर वालो को पता चला तो क्या होगा?

मधु: क्या मेरा पति. उसे कभी अपने बिजनेस से फ़ुर्सत मिले तब तो उसे पता चले. और यार हम औरतें ही क्यों यूँ अपने अरमानों को मार कर घुट घुट कर जीती रहे. कब तक हां. में तो नहीं जी सकती.

में: पर एक बार उसकी उम्र का तो ख्याल किया होता. वो बच्चा है अभी, और अगर ग़लती से उसने किसी को तेरे बारे में बता दिया तो.

मधु: तूने आज कल की जनरेशन को क्या समझ रखा है. डियर ये आज की जनरेशन हमसे कही समझदार है. और वैसे भी में कौन सी इसके प्यार में पागल हूँ. बस मेरी ज़रूरत पूरी हो जाती है, और उसकी भी.

में: तू सच में बहुत कमीनी है. कहाँ से पकड़ लाई तू इसे.

मधु: अर्रे यार कुछ नहीं. अनाथ है बेचारा. तेरे शहर का ही है. पिछली मर्तबा जब में यहाँ अपनी बहन के यहाँ आई थी तो, मेरी बहन के घर नौकर था.

में: पर ये सब कैसे शुरू हुआ?

मधु: उस दिन जीजा जी, और दीदी किसी की शादी में गये हुए थे. तो में घर पर अकेली थी. और मैंने थोड़ी सी वाइन पी ली.मुझे हल्का हल्का नशा सा होने लगा था. में घर के हॉल में बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मुझे बहुत तेज पेशाब लगा. में अपने रूम की तरफ जाने लगी.

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जैसे ही में ऊपर वाली मंज़िल पर अपने रूम की तरफ बढ़ रही थी. तो मुझे स्टोर रूम से सुशांत के कराहने की आवाज़ सुनाई दी. मुझे लगा कि सुशांत किसी तकलीफ़ में है. में स्टोर रूम की तरफ बढ़ी. पर मेरे कदम स्टोर रूम के डोर पर ही रुक गये…. मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था.

जो में ये सब देख रही थी. एक लड़का अपने हाथ से अपने लिंग को तेज़ी से हिला रहा था. जैसे ही मेरी नज़र उसके लंबे और मोटे लिंग पर पड़ी….मेरी तो मानो जैसे साँसे ही रुक गयी हो. उसका गोरे रंग का लिंग इतना बड़ा था कि, मेरी योनि में एक टीस सी उठी. और मेरी योनि में झुरझुरी सी दौड़ गयी…. लाइट की रोशनी में चमक रहा उसका गुलाबी सुपाडा तो और भी बड़ा लग रहा था.

पता नहीं क्यों ये सब देख कर मेरे अंदर एक अजीब से खुमारी छाने लगी. पर तभी बाहर से डोर बेल बजी. मुझे लगा के, जीजा जी और दीदी आ गये हैं. में जल्दी से नीचे आ गयी, और डोर खोला. दीदी और जीजा जी वापिस आ चुके थे. वो दोनो खाना खा कर आए थे….

उसके बाद में अपने रूम में आ गयी. और सोने की कोशिश करने लगी. पर मेरे ध्यान में अभी भी सुशांत का विशाल लिंग छाया हुआ था. मैंने अपनी नाइटी को अपनी कमर तक ऊपर उठा रखा था. और अपनी योनि की आग को अपनी उंगलियों से शांत करने की कोशिश कर रही थी.

पर योनि की आग और बढ़ती जा रही थी…… में एक दम से बौखला सी गयी. और उठ कर वाइन के दो पेग और मार लिए. पर फिर भी सुशांत का वो फुन्कारता हुआ लिंग मेरी आँखों से हट नहीं रहा था. में काम वासना से एक दम विहल हो चुकी थी….

अब मेरी योनि की खुजली और बढ़ चुकी थी…. में बेड से खड़ी हुई, और अपनी नाइटी को ऊपर उठा कर अपनी पैंटी को उतार कर फेंक दिया. और फिर रूम से बाहर आकर स्टोर रूम की तरफ चल पड़ी. सुशांत उसी स्टोर रूम में सोता था.

मैंने उसके रूम का डोर नॉक किया. और थोड़ी देर बाद सुशांत ने डोर खोला. मेरे बाल बिखरे हुए थे. मैंने रेड कलर की नाइटी पहनी हुई थी. जो मेरी थाइस तक लंबी थी. मुझे इस हालत में देख कर सुशांत मुझे घुरने लगा. “जी आंटी क्या हुआ” सुशांत ने मेरे बदन को घुरते हुए कहा.

में: वो सुशांत बेटा……मेरी पीठ बहुत दर्द कर रही है……तू थोड़ी देर के लिए मेरी पीठ दबा दे ना. मुझे नींद नहीं आ रही….

मेरे ये बात सुनते ही उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी….और मुझे उसकी आँखों में वो वासना देख कर समझने में देर ना लगी की, ये भी मेरी तरह सहवास का मारा हुआ है….और इसे पटाने में कुछ ख़ास मेहनत नहीं करनी पड़ेगी…..

में पलट कर अपने रूम की तरफ जाने लगी. वो मेरे पीछे चल रहा था. में जानबूझ कर अपनी नितंब को मटका कर चल रही थी. मैंने तिरछी नज़रों से जब पीछे की ओर देखा, तो सुशांत अपने शॉर्ट्स के ऊपर से अपने लिंग को मसल रहा था.

में अपने रूम में आकर पेट के बल बेड पर लेट गयी. मैंने सुशांत को डोर लॉक कर आने को कहा. सुशांत ने डोर लॉक किया, और मेरे पास आकर बैठ गया. में बेड पर पेट के बल लेटी हुई थी…. मेरी नाइटी मेरी जाँघो के ऊपर तक चढ़ी हुई थी. और वो मेरी चिकनी जांघे देख रहा था. अभी मधु मुझे अपने और सुशांत के बारे में बता ही रही थी कि, प्रिया ऊपर आ गयी. प्रिया को देख कर मधु चुप हो गयी.

में: हां बेटा कुछ काम था क्या……

प्रिया: वो मम्मी खाना बन गया है. और लगा भी दिया है. नीचे आकर खाना खा लो.

में चाहती तो नहीं थी. पर फिर भी मुझे नीचे तो जाना ही था. मैंने मधु की तरफ देखा, तो उसने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा. “यार अब तुझमे इतनी भी ना समझ नहीं है कि, आगे क्या हुआ तुम्हे अंदाज़ा ना हुआ हो” मैंने हां में सर हिला दिया और प्रिया को बोला. “तुम चलो हम नीचे आ रहे हैं” प्रिया नीचे चली गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में: तो फिर ये तेरी बेहन के घर में नौकर है. और तू इसे यहाँ ले आई. तेरी बेहन को पता है क्या, ये तेरे साथ है.

मधु: नहीं उसे नहीं पता. अब ये उसके पास नहीं रहता. और इसने वहाँ पर काम करना भी बंद कर दिया है.

में: तो फिर ये रहता कैसे है. कहाँ रहता है.

मधु: यार ये शुरू से अनाथ नहीं है. बचपन में इसके माँ बाप की मौत हो गयी थी. इसके पिता सरकारी नौकरी करते थे. कुछ साल के होने पर इसे अपने पिता की नौकरी मिल जाएगी. अभी तो ये एक फॅक्टरी में काम कर रहा है. इसी शहर में. और अपने दोस्त के साथ उसके रूम में रहता है. और साथ में प्राइवेट स्टडी भी कर रहा है. अच्छा अब चल नीचे चल कर खाना खाते है……

में और मधु नीचे आ गये. नीचे प्रिया और रश्मि ने उन दोनों का खाना रूम में लगवा दिया. और मेरा और अपना दोनो का खाना दूसरे कमरे में. हमने खाना खाया. और फिर मैंने और प्रिया ने मिल कर दूसरे रूम में उन दोनो के सोने का इंतजाज़ कर दिया.

वो रात मुझ पर बहुत भारी रही. मुझे रह रह कर ये चिंता सता रही थी कि, कही प्रिया और रश्मि को किसी बात को लेकर शक ना हो जाए. रात के करीब १ बजे में पेशाब लगने के कारण उठी, तो में रूम से बाहर निकल कर बाथरूम की तरफ जाने लगी.

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मैंने देखा कि , उनके रूम में अभी भी लाइट जल रही थी. और अंदर से मधु की सिसकियों की आवाज़ आ रही थी. मुझे तो बस यही डर सता रहा था कि, कही प्रिया और रश्मि को कुछ पता ना चल जाए. पर किसी तरह रात काट गयी. सुबह हुई तो मैंने उनके रूम के डोर पर नोक कर उन्हे उठाया.

प्रिया और रश्मि पहले ही चाय नाश्ता तैयार कर चुके थे. सुशांत और मधु उठ कर फ्रेश हुए, नाश्ता किए और जाने की तैयारी करने लगी. में घर के काम में लगी हुई थी, तब मधु मेरे पास आई. “अच्छा वैशाली अब हमे चलना है” पर जाने से पहले मुझे तुझसे कुछ ज़रूरी बात करनी है.”

में: हां बोल ना.

मधु: देख तू तो जानती है कि, सुशांत का इस दुनिया में कोई नहीं है, और वो अपने दोस्त के साथ उसके रूम में रह रहा है. सुशांत अपने लिए रूम ढूँढ रहा है, और तुम्हारे पास तो इतने रूम खाली पड़े है. हो सके तो इसको अपने घर में रूम किराए पर दे दे. तेरा खर्चा पानी भी चलता रहेगा. देख ये तुझे महीने के ५००० रुपये देता रहेगा. बस एक आदमी का खाना ही देना पड़ेगा तुझे.

में मधु की बात सुन कर चुप हो गयी. में जानती थी कि, सुशांत देखने में चाहे ही बच्चा लगता हो. पर मधु के साथ रह कर वो कुछ ज़्यादा ही मैच्योर हो गया है. और मेरे घर में दो जवान बेटियाँ भी तो थी. इसीलिए में उससे हां नहीं कर पा रही थी.

में: मधु मुझे सोचने के लिए कुछ वक़्त चाहिए. तू तो जानती है ना कि, घर में दो दो जवान बेटियाँ है.

मधु: हां में समझ सकती हूँ. वैसे सुशांत वैसा लड़का नहीं है. बहुत ही समझदार है. में उसे समझा भी दूँगी. बाकी तू सोच ले.

उसके बाद मधु और सुशांत दोनो घर से चले गये. मधु ने जो ५००० रुपये मुझे दिए थे. उससे हमें बहुत राहत मिली. दिन रात फिर से उसी तरह काटने लगी. मैंने बाहर कई लोगो से भी कह दिया था कि, अगर कोई फॅमिली वाला रूम किराए पर रहने के लिए ढूँढे तो उसे हमारे घर के बारे में बता दें.

में नहीं चाहती थी कि, में अपने घर पर किसी अकेले लड़के को रखूं, जो मेरे ही लड़कियों की उमर का हो. में उन्हे समाज की इस गंदगी से बचा कर रखना चाहती थी. मेरा यही सपना था कि, वो अपने दामन पर किसी तरह का दाग लिए बिना अपनी ससुराल चली जाए.

पर अभी ना तो मेरे पास इतने पैसे थे और नी ही अभी उन दोनो की शादी की उम्र थी. अब वो ५००० हज़ार तो ख़तम होने ही वाले थे. और आख़िर कब तो उन पैसों से गुज़ारा होता. दिन बीत रहे थे. एक बार फिर से हमारी माली हालत खराब होती जा रही थी.

कभी कभी मुझे लगता कि, उस दिन मैंने सुशांत को कमरा देने से इनकार कर मैंने बहुत बड़ी ग़लती कर दी. पर अब ना तो मधु का कोई पता था और ना ही सुशांत का. में किसी तरह सिलाई का काम करके अपने घर का खर्च चला रही थी. नवंबर का महीना शुरू हो चुका था.

अब सर्दियाँ शुरू हो चुकी थी. एक दिन में अपनी छत पर बैठे हुई, धूप में सिलाई का काम कर रही थी. प्रिया और रश्मि दोनों अपनी सहेली के भाई की शादी में गयी हुई थी. तभी बाहर से डोर बेल बजी. मैंने छत की दीवार के पास आकर नीचे देखा तो, नीचे कोई खड़ा था. में उसका चेहरा नहीं देख पा रही थी.

में: (छत पर से आवाज़ लगाते हुए) जी किस से मिलना है.

मेरी आवाज़ सुन कर उसने ऊपर की तरफ देखा तो, मैंने देखा कि नीचे जो लड़का खड़ा है, वो कोई और नहीं सुशांत है. उसने मुझे नीचे से नमस्ते कहा. में नीचे आ गयी, और गेट खोला.

सुशांत: नमस्ते आंटी जी.

में: नमस्ते बेटा ! तुम इधर कहाँ?

सुशांत: वो उस दिन शायद मधु आंटी ने आपको बताया हो कि मुझे रूम की ज़रूरत है.

में: हां बताया था. तुम अंदर आओ.

में और सुशांत अंदर आ गये. मैंने उसे रूम में बैठाया. और उसे पानी के लिए पूछा, तो उसने मना कर दिया. “चाय तो पी लो.” पर सुशांत ने मना कर दिया ये कह के, उसे थोड़ा जल्दी है वापिस जाना है काम पर. वो लंच टाइम पर घर आया था. मुझे एक बार फिर से कुछ आमदनी की आस हुई. पर मुझे नज़ाने क्यों सही नहीं लग रहा था. मेरे अंदर हज़ारो सवाल थी. और आख़िर कार मैंने उससे अपनी मन की बात कह दी.

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में: देखो बेटा मुझे भी रूम को किराए पर देने की उतनी ही ज़रूरत है. जितनी तुम्हें. पर पहले मेरी बात ध्यान से सुन लो.

सुशांत: जी आंटी बोलिए.

में: देखो सुशांत में जानती हूँ कि, तुम्हारे और मधु के बीच में किस तरह का रिश्ता है…..में यी भी जानती हूँ कि तुम उम्र के किस दौर से गुजर रहे हो. और में नहीं चाहती कि, मेरी बेटियों पर इन बातों का असर पड़े.तुम समझ रहे हो ना में क्या कहना चाहती हूँ. मेरी दो जवान बेटियाँ है बेटा. हम बहुत ग़रीब लोग है. और हमारी इज़्ज़त के सिवा हमारे पास कुछ नहीं है. अगर तुम्हे मेरे घर में रूम चाहिए तो, अपनी हदों में रहना होगा.

सुशांत: (मुझे बीच में टोकते हुए) आंटी जी आप फिकर ना करे. आपको अपने घर में मेरी मौजूदगी कर अहसास तक नहीं होगा. में अपनी आँखें हमेशा फर्श की तरफ रखूँगा. आप मेरा यकीन मानिए……

में: देख लो सुशांत अगर मुझे तुम्हारी कोई भी हरकत अच्छी ना लगी तो, तुम्हे उसी वक़्त ये घर छोड़ कर जाना होगा….

सुशांत: ठीक है आंटी जी. में आपको शिकायत का कोई मोका नहीं दूँगा. आप ये बताए कि आपको कितना रेंट चाहिए.

में: (थोड़ी देर सोचने के बाद) बेटा मुझे मधु ने ५००० रुपये महीना कहा था.

सुशांत: आंटी अब आप से क्या छुपाना. में फैक्टरी में सिर्फ़ ८००० रुपये महीने का कमाता हूँ. बाकी आप जैसे कहे. वैसे ५००० हज़ार भी दे दूँगा. अगर आप खाना और मेरे रूम की साफ सफ़ाई और मेरे कपड़ों को धो सके तो.

में सुशांत की बात सुन कर सोच में पड़ गई. आख़िर अकेला कितना खा लेगा. और अगर दो तीन दिन में इसका एक सूट धोना भी पड़े तो कौन सी आफ़त आ जाएगी.

में: पर में घर पर बेटियों को क्या कहूँगी , कि तुम यहाँ पर किराए पर क्यों रहे हो.

सुशांत: आप उनसे कह देना कि में यहाँ पर पढ़ रहा हूँ. और मधु आंटी ने आप से मुझे यहाँ रखने के लिए कहा है.

मुझे सुशांत की बात सही लगी. मैंने उससे हां कर दी. “तो तुम कब अपना समान लेकर आ रहे हो” मैंने सुशांत से पूछा.

सुशांत: आंटी जी मेरे पास तो मेरे कपड़ो के सिवा कोई समान नहीं है. में कल सुबह आ जाऊंगा. कल सनडे है.

में: ठीक है तुम कल आ जाना. में तुम्हारे रहने वाले कमरे में एक सिंगल बेड लगवा देती हुई. पुराना है पर गुज़ारा कर लेना.

सुशांत ने हां में सर हिला दिया. और अपनी जेब से ५००० रुपये निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिए. मैंने हिचकते हुए उससे पैसे ले लिए. उसके सुशांत चला गया. पर में अजीब सी उलझन में थी. मेरे दिल के किसी कोने में शायद ये बात मुझे काट रही थी कि, में जो कर रही हूँ ठीक नहीं कर रही. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अगर तब मुझे इस बात का अहसास होता कि मै अपने घर मे किसी शिकारी को पनाह दे रही हु,तो शायद यह गलती में कभी नहीं करती. मैंने अपना ध्यान बटाने के लिए घर के काम में लग गयी. शाम हो चुकी थी, अब तक प्रिया और रश्मि वापिस नहीं आई थी. मुझे थोड़ी चिंता होने लगी. मैंने बाहर आकर गेट खोला और बाहर देखने लगी. पर मुझे ज़्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा.

थोड़ी देर में ही मुझे प्रिया और रश्मि आती हुई दिखाई दी. जब वो घर के सामने आई तो, मैंने उनसे पूछा कि इतनी देर कहाँ लगा दी, तो रश्मि बोली, माँ अब शादी में टाइम तो लगता है ना. उसके बाद दोनों अंदर आ गयी. मैंने रात के खाने की तैयारी पहले ही कर ली थी. थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद मैंने प्रिया और रश्मि को बुलाया, और उनको कहा. कि सुशांत कल से यहाँ रहने आने वाला है.

में: तुम दोनो ध्यान से सुनो. उस दिन जो आंटी और उनका बेटा हमारे घर आए थे ना. उनका बेटा सुशांत इसी शहर में आगे पढ़ रहा है. और वो कल से यही हमारे घर पर रहेगा.

प्रिया: जी माँ.

में: देखो बेटा में चाहती हूँ कि, तुम दोनों उससे ज़्यादा बात मत करना. अपने काम से मतलब रखना.

रश्मि: जी मम्मा.

में: मैंने उसको नीचे वाला ही रूम दिया है. खाना तो मैंने तैयार कर दिया है. अब तुम मेरे साथ मिल कर उस कमरे की थोड़ी सफाई कर दो. और हां जो बाहर बैठक में सिंगल बेड पड़ा है, उसे उसके रूम में शिफ्ट करना है.

दोनों ने हां में सर हिला दिया. उसके बाद हम तीनो ने कमरे की सफाई की, और उसके रूम में कुछ समान सेट करवा दिया. काम करने के बाद हम तीनों काफ़ी थक गये थे. थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने रात का खाना खाया, और सोने के लिए अपने अपने कमरो में चले गये. रश्मि और प्रिया दोनों मेरे रूम के साथ वाले रूम में सोती थी.

अगली सुबह में थोड़ा सा असहज महसूस कर रही थी. में सोच रही थी कि, मैंने कोई बड़ी गलती तो नहीं कर दी, सुशांत को रूम रेंट पर देकर. फिर मैंने सोचा, अभी हालत ऐसे है कि, में कुछ कर भी नहीं सकती, जब मेरे बाकी रूम रेंट पर चढ़ जाएंगे तो, में सुशांत को दूसरा रूम लेने के लिए कह दूँगी.

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सुबह के १० बजे में घर के आँगन में बैठी हुई, सिलाई का काम कर रही थी, कि तभी मुझे घर के बाहर बाइक के रुकने की आवाज़ आई. गेट बंद था, में गेट की तरफ देखने लगी. फिर थोड़ी देर बाद डोर बेल बजी, में खड़ी हुई, और गेट की तरफ जाकर गेट खोला, तो सामने सुशांत अपने बॅग के साथ खड़ा था.

मैंने अपने होंठो पर ज़बरदस्ती मुस्कान लाते हुए उसे अंदर आने को कहा. उसने पहले अपना बॅग घर के अंदर रखा, और फिर बाइक घर के अंदर कर ली. उसके अंदर आने के बाद मैंने गेट लॉक कर दिया. “नमस्ते आंटी जी” सुशांत ने मुस्कुराते हुए कहा.” मैंने उस के रूम की तरफ इशारा करते हुए कहा. “चलो तुम्हे रूम दिखा देती हूँ.” और उसके बाद में उसे उसके रूम में ले गयी.

में: सुशांत ये तुम्हारा रूम है. तुम अपना समान सेट कर लो. में तुम्हारे लिए चाय नाश्ते का इंतज़ाम करती हूँ.

सुशांत: ठीक है आंटी जी.

में रूम से बाहर आ गयी. मैंने देखा कि प्रिया और रश्मि दोनो अपने रूम के डोर के पीछे खड़े होकर बड़ी उत्सुकता से देख रही थी. मैंने रश्मि को आवाज़ लगाई , तो वो थोड़ी घबरा गयी. और मेरे पास किचन में आ गयी. “जी माँ.”

में: ऐसे छुप छुप कर क्या देख रही हो.

रश्मि: कुछ नहीं माँ वैसे ही.

में: चल छोड़ ये सब और चाय नाश्ता तैयार कर दे, सुशांत के लिए.

रश्मि: जी माँ.

में बाहर आकर फिर से अपने सिलाई का काम करने लगी….हमारा घर छत से पूरा कवर था. बस ऊपर जाने के लिए सीडया थी. और उन सीडयों पर पर लोहे का गेट लगा हुआ था. जो हमेशा खुला रहता था. जब कभी हम तीनो एक साथ बाहर जाते थे, तो छत वाला गेट भी बंद कर के जाते थे.

घर के पीछे की तरफ दो रूम थे. जिसमे से एक में में सोती थी, और दूसरे में प्रिया और रश्मि. उसके बाद हमारा किचन था. और गेट के पास एक तरफ दो रूम और थी. गेट के साथ वाला रूम खाली था. और उससे पिछले वाले रूम को सुशांत को दिया था.

तो में बाहर बरामदे में बैठी थी, ठीक सुशांत के रूम के सामने, उसका रूम का डोर खुला था. और वो अपनी पेंट शर्ट उतार रहा था. उसने पेंट उतारने के बाद अपने बॅग में से एक शॉर्ट निकाला, और पहन लिया. फिर टीशर्ट पहन कर बेड पर लेट गया.

शाम ढाल चुकी थी…….. आज में बहुत रिलॅक्स फील कर रही थी…… प्रिया और रश्मि दोनो बहुत खुश लग रही थी. और ऊपर छत पर बातें कर रही थी….इतने में सुशांत अपने रूम से बाहर आया, और बाथरूम में चला गया…. में बाहर बैठ कर काम कर रही थी….. बाथरूम से आकर वो मेरे साथ थोड़ी दूरी पर नीचे फर्श पर बैठ गया…….

में: चाय पीओगे बेटा…..

सुशांत: नहीं आंटी जी….

फिर थोड़ी देर खामोशी रही………

सुशांत: आंटी जी एक बात पुछू……

में: हां बोलो……..

सुशांत: आंटी जी दोपहर घर में बहुत शोर हो रहा था कोई आया था क्या ?

में: हां वो मेरे जेठ जी और जेठानी आए थे…..

सुशांत: ओह्ह अच्छा……. सॉरी आंटी ये आप की घर के निजी बातें है…… पर मैंने सुना कि आप किसी की शादी और रिश्ते की बात कर रही थी….किसकी शादी है…….

में: (खुश होते हुए) वो मेरी जेठानी है ना.. उसकी बहन के लड़के का रिश्ता आया है प्रिया के लिए…. बहुत अच्छे लोग है.. अगले सनडे को प्रिया की शादी है उससे…. लड़का सरकारी नौकरी करता है…… और पता है. दहेज भी कुछ नहीं माँग रहे…. बोल रहे थे अपनी लड़की को तीन कपड़ों में विदा कर दे…..

सुशांत: ये तो बहुत अच्छी बात है आंटी जी पर?

सुशांत बोलते बोलते चुप हो गया……..”पर क्या सुशांत”

सुशांत: जाने दीजिए…..ये आप के घर की बात है… और वैसे भी आपने सोच समझ कर ही फ़ैसला लिया होगा…….

में: (सुशांत की बात सुन कर सोच में पड़ गयी. कि कहीं मैंने कोई जल्द बाजी तो नहीं कर दी) बोलो सुशांत में बुरा नहीं मानूँगी…. .तुम्हे तो पता है कि मेरी बेटियों का मेरे सिवाय कोई नहीं है…. जो ऐसे फैसले ले सके…..

सुशांत: आंटी जी आप ने लड़के को देखा है?

में: हां उसकी फोटो देखी है……अंदर रूम में है…..

सुशांत: आंटी जी क्या में वो फोटो देख सकता हूँ……..

में: हां में अभी लेकर आती हूँ……..

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में रूम में गयी……और उस लड़के का फोटो ले आई……और सुशांत को देखते हुए बोली…..”ये देखो” सुशांत ने मेरे हाथ से फोटो ली, और बड़े गोर से देखने लगा. कोई ३-४ मिनिट देखने के बाद सुशांत बोला……. “आंटी जी हमारी प्रिया वहाँ पर राज करेगी” में उसके मूह से हमारी प्रिया सुन कर थोड़ा हैरान हो गयी. पर अगले ही पल जैसे उसको अपनी ग़लती का अहसास हुआ.

सुशांत: ओह्ह सॉरी आंटी जी…… वो  ऐसे ही मूह से निकल गया………. दरअसल में तो अनाथ हूँ ना….तो जब भी कोई मुझसे अपने दिल के बात करता है या फिर थोड़ा प्यार करता है…. में जल्द ही उनको अपना मानने लगता हूँ……

में: अर्रे कोई बात नहीं……. अब तुम अकेले नहीं हो……. वैसे तुम्हे कैसे लगा कि प्रिया वहाँ खुश रहेगी…. क्या तुम जानते हो इस लड़के को……

सुशांत: नहीं आंटी जी जानता तो नहीं…. पर आप यकीन नहीं करोगे……

में: क्या…….

सुशांत: में किसी के भी चेहरे को देख कर ये बता सकता हूँ कि, वो इंसान कैसा है….. उसकी फ़ितरत कैसी है….. और ये फोटो देख कर भी में किसी के बारे में बता सकता हूँ……….

में: तुम सच कह रहे हो सुशांत…….

सुशांत: हां आंटी जी…… अभी तक तो मैंने जिसके बारे में जो जो बताया है वो ठीक ही हुआ है……..

उसके बाद में और सुशांत यूँ ही इधर उधर के बातें करते रहे… मुझे मालूम ना था कि, सुशांत इतनी जल्दी मुझसे इतना घुल मिल जाएगा कि, में उससे अपने घर के बातें भी करने लगी…..

सुशांत: ठीक है आंटी जी…. अगर किसी तरह की मदद के ज़रूरत हो तो, मुझे बोल देना…. शर्माइयेगा मत…. मैंने कुछ पैसे जोड़ रखे है बैंक में… अगर ज़रूरत हो तो बता देना….. और समझ लेना कि मैंने आपको रेंट अड्वान्स दिया है…..

में: ठीक है बेटा….फिलहाल तो अभी ऐसे कोई ज़रूरत नहीं है……. पर हां तुम मेरी मदद कर दोगे……

सुशांत: हां आंटी जी क्यों नहीं…….

में: वो दरअसल बात ये है कि, अगले सनडे को प्रिया की शादी करनी है. तो उसके लिए नये कपड़े खरीदने है. तुम मुझे मार्केट ले चलोगे…… तुम्हारे पास तो बाइक है……

सुशांत: हां आंटी पर?

में: क्यों क्या हुआ?

सुशांत: में कह रहा था कि, आप प्रिया को भी साथ ले चलो….. आख़िर शादी उसकी है, उसे अपनी पसंद की ड्रेस खरीदने दो……

मुझे सुशांत के बात सही लगी.. इतनी कम उमर में ही कितना समझदार है. वरना ये बात तो मेरे दिमाग़ में भी नहीं थी……… अक्सर में ही प्रिया और रश्मि के लिए कपड़े खरीद कर लाती थी….. और उन्होंने ने भी कभी कोई शिकायत नहीं की थी…..

में: पर एक बाइक पर तीन लोग कैसे जा सकते है……

सुशांत: फिर टॅक्सी या ऑटो में चलते है……..

में: हां ये ठीक रहेगा…..

उसके बाद मैंने प्रिया को तैयार होने के लिए कहा…. जब उसने पूछा कि कहाँ जाना है तो, मैंने उसे बताया कि तुम्हारे लिए नये कपड़े खरीदने है.. जेठ जी मुझे ५०००० रुपये देकर गये थे…. मेरी बात सुन कर रश्मि भी ज़िद करने लगी साथ जाने के लिए……

फिर हम चारो ऑटो पकड़ कर मार्केट पहुँच गये….वहाँ पर ढेर सारी शॉपिंग की, आज प्रिया और रश्मि के चेहरे पर खुशी देखते ही बनती थी. मैंने कई बार गौर क्या कि, सुशांत दोनो की बहुत मदद कर रहा था….. और वो इतने कम समय में ही दोनों से बहुत घुल मिल गया था….. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कौन सी ड्रेस अच्छी है…कौन सा सूट प्रिया पर जँचेगा…. वगैरह वगैरह यहाँ तक कि कपड़ो का भाव तोल भी सुशांत ने किया……..में  उसे बार बार देख रही थी….. और मन में यही सोच रही थी कि, काश मेरा भी सुशांत जैसा बेटा होता…. तो वो अपनी बहनो की इसी तरह मदद करता…. सुख दुख में उनका साथ देता…

हमने प्रिया की शॉपिंग के साथ साथ रश्मि के लिए भी कुछ ड्रेस खरीद ली. उसके बाद हम चारो ने बाहर होटेल में ही खाना खाया….. रात के ८ बज चुके थे…… और और फिर हम घर वापिस आ गये…. भले ही में प्रिया की शादी में कोई ताम झाम नहीं कर रही थी.

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पर फिर भी शादी के कुछ रीति रिवाज करने के लिए सुशांत मदद को हर समय तैयार रहता. आख़िर वो दिन भी आ गया….. जिसका मुझे बेसबरी से इंतजार था…. जिसका हर माँ बाप को होता है, कि उनकी बेटी शादी करके खुशी खुशी अपनी ससुराल जाए….

हम तैयार होकर सीधा मंदिर में पहुच गये…. वहाँ पर मेरे जेठ जेठानी और उनके बच्चे और उनके जीजा और बहन, और उनका बेटा जिससे प्रिया की शादी होनी थी…. वो सब पहले से मौजूद थे……… और उनके साथ कुछ और लोग भी थे….

मंदिर के पीछे एक हॉल था. बहुत ज़्यादा बड़ा तो नहीं…. पर ठीक ठाक था. सुशांत ने हम सबसे वहाँ चलने के लिए कहा….. जैसे ही हम वहाँ पहुचे तो, मुझे यकीन ही नहीं हुआ…. सामने मेरे बेटी का मंडप सज़ा हुआ था. एक तरफ टेबल पर खाने पीछे का समान था……..

मैंने सुशांत की तरफ हैरान होते देखा. तो उसने मुस्कुराते हुए सर हिला दिया….. प्रिया को और उसके होने वाले पति को मंडप में बैठा दिया गया…… पंडित ने अपने मंतर पढ़ने शुरू कर दिए…. कुछ वेटर भी थे… जो सब को खाने वाली डिश परोस रहे थे….. में जब थोड़ा फ्री हुई तो, में सुशांत के पास गयी….. और अपनी नम आँखों से उससे पूछा……… “ये सब तुमने कब किया सुशांत” उस पर सुशांत ने मुस्करा कर कहा…

सुशांत: आंटी जी आप तो जानती ही हो… मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है…… और में ऐसा मोका कैसे छोड़ देता… अब मेरा कोई है तो नहीं जिसकी शादी में कोई मदद करता…. सो बस दिल किया और मैंने अपनी तरफ से ये छोटी से कोशिश कर दी.

मैंने सुशांत के बारे में जैसे सोचा था, सब उसके उलट हो रहा था….. अब में उस पर और भरोसा करने लगी थी.. उसने सब अरेंजमेंट बहुत अच्छे से किया था…… शादी हो चुकी थी…….. बेटी को भरे दिल से विदा करने के बाद हम लोग घर वापिस आ गये…..

पर आज घर में कुछ कमी लग रही थी…प्रि या के घर में ना होने से पूरा घर सुना सुना लग रहा था. सुशांत अपने रूम में चला गया. हम वहाँ से खाना साथ लेकर आए थे…इसीलिए खाना बनाने की ज़रूरत नहीं थी..मैंने खाना लगाया और प्लेट में खाना लेकर सुशांत के रूम की तरफ जाने लगी.

पर अभी उसके रूम की तरफ बढ़ ही रही थी कि, में रुक गयी. और फिर से वापिस आकर रश्मि और प्रिया के रूम में चली गयी.. जिसमे अब सिर्फ़ रश्मि को ही रहना था. मैंने वहाँ खाने की प्लेट रखी, और फिर सुशांत के रूम की तरफ चली गयी. सुशांत के रूम का डोर खुला था, और वो बेड पर लेटा हुआ था.

पर फिर भी मैंने डोर पर नॉक किया, तो उसने लेटे लेटे गर्दन घुमा कर देखा. इससे पहले कि वो कुछ बोलता…. मैंने उससे कहा. “सुशांत चलो चल कर खाना खा लो.” में उसका जवाब सुने बिना वापिस आ गयी….. कल तक जिसे मैंने अपने घर में मजबूरी में रखा था. आज में उसको खुद अपनी बेटी के रूम में बुला रही थी… थोड़ी देर बाद सुशांत रूम में आ गया.. रश्मि बेड पर बैठ कर खाना खा रही थी…..

में: आओ बेटा बैठो.

सुशांत हम दोनो के सामने आकर बैठ गया……. और अपनी प्लेट उठ कर खाना खाने लगा….. घर में सन्नाटा छाया हुआ था… जैसे इस घर में कोई रहता ही ना हो. खाना खाते खाते अचानक सुशांत उठा और टीवी ऑन कर दिया…… टीवी पर कोई सीरियल चल रहा था…… जिसे देखते ही, रश्मि उछल पड़ी…

रश्मि: ये ये रहने दो बहुत अच्छा सीरियल है…….

सुशांत ने मुस्कुरा कर फिर से खाना शुरू कर दिया…….. अब भले ही घर में कोई ना बोल रहा था. पर टीवी की आवाज़ से घर का माहौल बदल सा गया था. खाना खा कर सुशांत ने कुछ देर तक टीवी देखा और फिर अपने रूम में चला गया. दिन भर की थकान के कारण जल्द ही हम सब नींद आ गयी….

अगले दिन जब सुबह में उठ कर फ्रेश हुई, तो मैंने देखा सुशांत अभी भी अपने रूम में सो रहा था….. उसके रूम का डोर खुला हुआ था….. मैंने एक बार उसकी तरफ देखा, और फिर उसके रूम में जाकर उसको आवाज़ लगाने लगी…. वो जल्दी ही उठ कर बैठ गया…. और मेरी तरफ देखने लगा….

में: सुशांत तुम्हें आज काम पर नहीं जाना क्या?

सुशांत: नहीं आंटी आज मुझे वो वो कहीं और जाना है.

में: कहाँ जाना है….

सुशांत: वो वो आज मुझे मधु आंटी ने बुलाया है, उनके घर पर?

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सुशांत ने ये कह कर सर नीचे झुका लिया.. उसकी ये बात सुनते ही, मेरे दिल को नजाने क्या हुआ, में गुस्से से बाहर आ गयी…. इन चन्द ही दिनो में सुशांत हमारे घर का हिस्सा बन गया था….. और में उसे ऐसे अपनी लाइफ को बर्बाद करते हुए नहीं देखना चाहती थी…… मेरी नाराज़गी शायद सुशांत भी समझ चुका था… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में बाहर बरामदे में बैठ कर अपना काम कर रही थी…… थोड़ी देर बाद सुशांत अपने रूम से निकल कर बाथरूम में चला गया….. मैंने रश्मि को सुशांत का नाश्ता लगाने को कहा…… रश्मि किचन में चली गयी….थोड़ी देर बाद सुशांत नहा कर बाथरूम से बाहर आया, और अपने रूम में जाकर कपड़े पहनने लगा…

मुझे नज़ाने क्यों सुशांत का ऐसे मधु से मिलने जाना अच्छा नहीं लग रहा था….. में उठ कर सुशांत के रूम में चली गयी….. सुशांत कपड़े पहन चुका था…. “कब जाना है तुम्हे” मैंने सुशांत से रूखे अंदाज़ में पूछा… और सुशांत ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोला, दोपहर को जाऊंगा…

इतने में रश्मि रूम के बाहर सुशांत के लिए नाश्ता लेकर खड़ी हो गयी… मैंने जाकर रश्मि से नाश्ते की प्लेट ली, और सुशांत के रूम में बेड पर रख दी…… और फिर में बाहर आकर अपना काम करने लगी……. सुशांत नाश्ते के बाद ऊपर छत पर चला गया…..

क्योंकि सर्दियों का मौसम था इसलिए बाहर धूप में बैठना सब को अच्छा लगता था….. रश्मि अपने रूम में कुछ काम कर रही थी… .न ज़ाने क्यों मेरे मन में बार बार यही आ रहा था कि, मुझे उसे ऐसे करने से रोकना चाहिए……

फिर मन में आता में कौन होती हूँ, उसकी जिंदगी में दखल देने वाली……. पर न ज़ाने क्यों में अपने मन के हाथों मजबूर होकर, ऊपर छत पर चली गयी….. वहाँ सुशांत चटाई बिछा कर नीचे लेटा हुआ था.. में उसके पास जाकर बैठ गयी….

में: सुशांत एक बात कहूँ?

सुशांत: (मेरी तरफ देखते हुए) हां आंटी जी कहो ना क्या बात है?

में: देखो सुशांत वैसे तो मुझे तुम्हारी निजी जिंदगी में दखल देने का हक़ मुझे नहीं है……… पर फिर मुझे लगता है, कि तुम्हारे और जो मधु के बीच में है, वो सही नहीं है….. अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है….. वो तुम्हारा इस्तेमाल कर रही है….. एक दिन तुम अपनी जिंदगी उसके चक्कर में खराब कर लोगे…….

मैंने एक ही साँस में मेरे दिल में जो आया वो बोल दिया…… मेरी बात सुन कर सुशांत खामोश हो गया. फिर थोड़ी देर बाद उसने चुप्पी तोड़ते हुए बोला….

सुशांत: आंटी जी में अब आपको कैसे बताऊ……. आप तो जानती है कि में अनाथ हूँ…. और मेरा इस दुनियाँ में कोई नहीं है… जो मुझे अच्छा बुरा समझा सकता. पर मधु आंटी से मेरा सिर्फ़ वही रिश्ता नहीं है….. उन्होने मेरा हर मुश्किल वक़्त में साथ दिया है… में आप को बता नहीं सकता कि, किस कदर उन्होने मेरे हर कदम पर मदद की है, आज अगर में खुद कमा कर खा रहा हूँ, तो ये सिर्फ़ उनकी बदौलत है…… उन्होने ही मुझे मेरे पैरो पर खड़ा किया है….

में सुशांत के बात सुन कर चुप हो गयी…..पर फिर भी मेरा मन उसकी बातों को मानने के लिए तैयार नहीं था……

में: ठीक है पर मुझे नहीं लगता ये सब ठीक है……

और फिर में नीचे चली आई……. सुशांत दोपहर को घर से चला गया…… प्रिया तो पहले सी ही अपनी ससुराल में थी, और सुशांत के जाने के बाद घर और सुना सा लग रहा था….. रात हुई, और फिर सुबह, फिर रात हुई….पर सुशांत अभी तक वापिस नहीं आया था. मुझे उसकी थोड़ी चिंता होने लगी थी….. पर मेरे पास ना तो मधु का कोई फोन नंबर था, और ना ही सुशांत का……

में रात को सो रही थी कि, बाहर डोर बेल बजी…… में आँखें मलते हुए बेड से उठी, और दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखा… रात के १२ बज रहे थे…में  अपने रूम से बाहर आई, और गेट के पास जाकर पूछा कि कौन है…. तभी बाहर से सुशांत के लड़खड़ाती हुई आवाज़ आई…..

सुशांत: में हूँ में हम सुशांत आंटी जी….

मैंने गेट खोला तो देखा, सुशांत सर झुकाए खड़ा था…..बाहर कोहरा छाया हुआ था, और ठंड बहुत ज़्यादा थी….

में: सुशांत तुम इस वक़्त टाइम तो देखो……..

सुशांत बिना कुछ बोले और मेरी तरफ देखे बिना अंदर चला गया….. जब वो मेरे पास से गुज़रा तो मुझे एक अजीब सी स्मेल आई…… मैं गेट लॉक कर वापिस मुड़ी तो देखा, सुशांत अपने रूम में जा चुका था….. गेट बंद करने के बाद में वापिस आई, और रूम के बाहर से ही सुशांत को देखा, सुशांत बेड पर बैठा हुआ था…

उसने अपने सर को नीचे झुका रखा था, और मूह में कुछ बुदबुदाये जा रहा था….. मुझे लगा कि कुछ तो ग़लत हुआ है….. में सुशांत के रूम में चली गयी….. जैसे ही में सुशांत के पास पहुँची, तो मुझे फिर से अजीब सी स्मेल आई…… और फिर मुझे समझते देर ना लगी कि, सुशांत ने ड्रिंक कर रखी थी…… “क्या हुआ सुशांत. कुछ हुआ है क्या?”

सुशांत: (नीचे फर्श की ओर देखते हुए) आंटी जी में बहुत अपसेट हूँ, और रात बहुत हो चुकी है, सुबह बात करते है…….

में: हां ठीक है खाना तो खाया है ना…..

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सुशांत ने हां में सर हिला दिया… मैंने भी उससे ज़्यादा सवाल पूछना ठीक नहीं समझा. और अपने रूम में आ गयी….में बेड पर लेटी सोचने लगी कि, ये सुशांत को क्या हो गया…कही कुछ ग़लत तो नहीं हुआ उसके साथ. ड्रिंक भी करके आया है. बस यही सब सवाल मेरे जेहन में था.

रोशन दान से अभी लाइट अंदर आ रही थी. जो सुशांत के रूम की थी…. नज़ाने वो कब तक जागता रहा… पर में अपने रूम में लेटी रही… नज़ाने कैसे कैसे ख़याल मेरे दिमाग़ में आ रहे थे… कहीं मधु के ससुराल वालो या उसके पति को उन दोनो के रिश्ते के बारे में तो नहीं पता चल गया…..

में यही सब सोचते सोचते सो गयी……. अगली सुबह जब उठी, तो देखा रश्मि मुझसे पहले ही उठ कर घर के साफ सफाई कर चुकी थी……. और नाश्ता बना रही थी……. में किचन में गयी और बोली “क्या बात है आज सुबह सुबह ही घर के सफाई कर ली, मुझे उठाया भी नहीं…….”

रश्मि: ओह्ह माँ तुम भी ना कुछ याद नहीं रहता……. आज प्रिया दीदी और जीजा जी आने वाले है…..

में: ओह्ह हां में तो भूल ही गयी….. जल्दी से नाश्ता तैयार करो…में बाज़ार से कुछ खाने पीने का समान ले आती हूँ…..

में फिर से अपने रूम में गयी, और पैसे लेकर बाज़ार के तरफ जाने लगी, तो मैंने देखा सुशांत का रूम खुला था…… पर सुशांत अंदर नहीं था…….. में थोड़ा जल्दी में थी, इसीलिए सीधा बाज़ार चली गयी….. बाज़ार से कोल्ड्रींक्स और कुछ और खाने का समान लेकर में घर आ गयी…. अंदर आते वक़्त भी मैंने सुशांत के रूम में झाँका तो वो वहाँ नहीं था….. में किचन में गयी.. और साथ लाया समान सेल्फ़ पर रख कर रश्मि से पूछा…..

में: रश्मि सुशांत कहाँ है….. तुमने देखा है उसे……..

रश्मि: हां ऊपर है छत पर…

में: अच्छा प्रिया और तुम्हारे जीजा जी कब आने वाले है……

रश्मि: वो तो दोपहर तक आएँगे क्यों क्या हुआ.

में: कुछ नहीं…. अच्छा सुशांत को चाय दी……..

रश्मि: हां दी थी……वो कप लेकर ऊपर ही चला गया था…….

में: अच्छा ठीक है में कप लेकर आती हूँ….

उसके बाद में ऊपर आ गयी…… मैंने देखा सुशांत चारपाई पर बैठा हुआ था…. वो किसी बात को लेकर बहुत परेशान था……. मेरे कदमो की आहट सुन कर एक बार उसने मेरी तरफ देखा और फिर सर झुका लिया…… में उसके पास जाकर बैठ गयी.

में: क्या हुआ बहुत उदास लग रहे हो?

सुशांत: कुछ नहीं ऐसे ही……

में: सुशांत तुम कल रात को दारू पीकर आए थे ना?

सुशांत: (थोड़ा सा चौंकते हुए) हूँ हां वो सॉरी आंटी….

में: क्या कुछ तो बात है. जो तुम इतने परेशान हो?

सुशांत: नहीं ऐसी कोई बात नहीं……

में: देखो सुशांत भले ही तुम मुझे कुछ ना बताओ…. पर तुम मेरे बेटे जैसे हो उसकी उमर के ही हो बताओ ना क्या हुआ…..

मेरे इस तरह सवाल करने पर सुशांत ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखें नम हो चुकी थी…….. में उसकी आँखों में आँसू की नमी अच्छी से देख पा रही थी… फिर वो एक दम से रोने लगा…. मैंने उसे कंधे से पकड़ कर दिलासा देना शुरू कर दिया “क्या हुआ ऐसे क्यों रो रहे बच्चो की तरह…”

सुशांत: आंटी अब में उस औरत के पास कभी नहीं जाऊंगा, (सुशांत ने रोते हुए कहा.)

में: क्यों क्या हुआ कुछ कहा उसने……

(इस दौरान कब उसका सर मेरी छाती पर आ गया मुझे पता ही नहीं चला……. में उसे चुप करते हुए उसके सर पर हाथ फेर रही थी….. मुझे इसका अहसास तब हुआ जब उसकी आँखों से आँसू निकल कर मेरी स्तनों के दरमियान कमीज़ के गले से नीचे गये…. मेरा पूरा बदन काँप गया…..पर चाह कर भी उसे अपने से दूर ना कर पाई.)

सुशांत: (चुप होकर सीधे बैठते हुए) कल जब में उसके पास गया था, तब वो मुझसे कहने लगी कि, में उसके घर ही आ जाउ…… जब मैंने पूछा कि तुम घर वालो को क्या कहोगी तो उसने कहा कि, कहूँगी तुम्हे घर के कामो के लिए नौकर रखा है…. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जब मैंने उसे इस बात के लिए मना किया और कहा कि, में अब अपने पैरों पर खड़ा हो गया हूँ २ साल बाद मुझे पापा की सरकारी नौकरी भी मिल जाएगी…. में ये नौकरा वाला काम नहीं करना……. तो वो मुझ पर बरस पड़ी.. बहुत झगड़ा किया…… और मुझे थप्पड़ भी मार दिया.

में: अच्छा अब रोना बंद करो….. मैंने कहा था ना कि वो तुम्हारी जिंदगी खराब कर देगी…….. अच्छा किया जो उसे जवाब दे दिया….. अच्छा अब रोते नहीं तुम तो इतने बहादुर हो……..

मेरे काफ़ी समझाने के बाद उसने रोना बंद कर दिया…… और फिर वो मेरे साथ नीचे आ गया…….. हम तीनो ने साथ मिल कर नाश्ता किया.. और फिर प्रिया और उसके पति की मेहमाननवाजी की तैयारी करने लगी…… दोपहर तक हम सब तैयार कर चुके थे……

सुशांत ने रात को ड्यूटी पर भी जाना था… इसीलिए वो खाना खा कर अपने रूम में जाकर सो गया……. दोपहर को प्रिया और उसका पति विशाल दोनो घर पर आ गये…… मैंने बेटी को गले से लगा लिया…. बेटी को देखते ही मेरी आँखें नम हो गयी….. चाय नाश्ते के बाद प्रिया ने मुझसे पूछा….. माँ सुशांत भैया कहाँ पर है….

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में: अपने रूम में सो रहा है, उसकी रात की ड्यूटी है…..

उसके बाद मैंने और रश्मि ने प्रिया से ढेर सारी बातें की, उसके ससुराल के बारे में पूछा…. उसके चेहरे की खुशी ही बता रही थी कि, वो कितनी खुश है. उसने मुझे बताया कि उनका घर बहुत बड़ा है.. घर में उनके अलावा उसके सास ससुर ही है, और काम करने के लिए नौकरानी भी रखी हुई है…….

अपनी बेटी की बातें सुन कर मेरा दिल खुशियों से भर गया…. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि, मेरी बेटी की शादी इतने बड़े घर में होगी. और वो इतनी खुश रहेगी…….. रात को सुशांत खाना खा कर काम के लिए चला गया….

अब प्रिया घर पर थी तो, रश्मि के बाते ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रही थी.. वो तो ऐसे बातें कर रही थी…… जैसे अपनी बहन से बरसो बाद मिली हो… विशाल भी दिल का बहुत अच्छा था…….रश्मि के हर मज़ाक और बात का मुस्करा कर जवाब देता….

हम रात के १ बजे तक यूँ ही बातें करते रहे…… उसके बाद जब तक नींद ने अपना पूरा असर नहीं दिखाई तब तक बैठे रहे….ले टते ही नींद आ गयी….. कब सुबह हुई पता ही नहीं चला….. सुबह नाश्ते के वक़्त सुशांत भी आ गया….. फिर मैंने उसे भी अपने साथ नाश्ते के लिए कहा……. थोड़ी झिझक के साथ वो भी मान गया…….

नाश्ते के बाद विशाल ने कहा “मम्मी अब हमें चलना चाहिये.”

मैंने कहा एक दो दिन रुक जाते तो.”

विशाल: नहीं मम्मी जी काम बहुत है.…… ऊपर से पापा अकेले है काम संभाल नहीं पाएँगे……. अगली बार लंबी छुट्टी लेकर आएँगे…… पर पहले आप को और रश्मि को हमारे घर आना होगा.”

थोड़ी देर और हँसी मज़ाक चलता रहा……. फिर प्रिया और विशाल अपने घर के लिए चले गये…….. दिन इस तरह कट रहे थे…… सब कुछ नॉर्मल चल रहा था….. अब में सुशांत पर पूरा यकीन करने लगी थी…… और उसने भी कभी मुझे शिकायत मोका नहीं दिया था………

जब उसकी नाइट ड्यूटी होती, तो में कभी बाज़ार कुछ खरीदने के लिए जाती तो रश्मि और सुशांत दोनो घर पर अकेले होते…. पर अक्सर सुशांत सो रहा होता क्योंकि रात भर जाग कर काम करता था……… मेरे विश्वास भी उस पर बढ़ता जा रहा था…..

हर दुख सुख में उसने मेरी बहुत मदद की थी. वो मुझे बहुत ही नेक दिल बच्चा लगता था. वो तो उसे मधु ने अपने चुंगल में फँसा लिया………. नहीं तो वो ऐसी हरकत भी ना करता… एक दिन में किसी काम से बाज़ार गये हुई थी, लौटने में बहुत देर हो चुकी थी….

जब मैंने घर के बाहर पहुँच कर डोरबेल बजाई तो, काफ़ी देर तक गेट नहीं खुला…….. मैंने फिर से डोर बेल बजाई पर गेट नहीं खुला….. जब में तीसरी बार डोर बेल बजाने वाली थी……. तब जाकर गेट खुला…….. गेट सुशांत ने खोला था…. वो मेरे से नज़रे नहीं मिला रहा था…..

गेट खोलने के बाद वो अपने रूम में चला गया…… मैंने गेट बंद किया, और अपने रूम की तरफ जाने लगी….. जब में उसके रूम के सामने से गुज़री तो, उसके रूम का डोर बंद था….. मैंने रश्मि के रूम में देखा तो, रश्मि सो रही थी……… मुझे कुछ अजीब सा लगा….. पर मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया……

मैंने अपने रूम में आ गयी…… और बेड पर लेट गयी….. लेटते ही थके होने के कारण मुझे नींद आ गयी…. शाम को जब उठी, तो चाय बना कर किचन से रश्मि और सुशांत को आवाज़ दी…… में चाय लेकर बरामदे में आ गयी….रश्मि तो उठ कर बाहर आ गयी……..

पर सुशांत शायद अभी तक सो रहा था……. ये सोच कर में उसके रूम के तरफ गयी………. पर सुशांत रूम में नहीं था… में जैसे ही पलट कर वापिस जाने लगी तो, मेरा ध्यान बेड के नीचे पड़े ब्लॅक कलर के कपड़े पर गया….. वो क्या चीज़ थी….. जैसे ही मुझे इसका अहसास हुआ……..

मेरे हाथ पैर काँपने लगे…… “नहीं ये नहीं हो सकता…ये मेरी आँखों का धोखा भी हो सकता है” पर फिर भी मन नहीं माना….. और मेरे काँपते हुए पैर उस बेड की तरफ बढ़ने लगी….. बेड के पास जाकर में नीचे झुकी और उस कपड़े को अपने हाथों में उठा लाया…..

मेरे दिल के धड़कने मानो जैसे बंद हो गयी हो….. मुझे यकीन नहीं हो रहा था….. वो एक ब्लैक कलर की पैंटी थी.. जिसे पहचानने में मुझे एक पल ना लगा…… “ये ये तो रश्मि की पैंटी है” मेरी तो जैसे साँसे ही थम गयी हो…. सब कुछ मानो थम सा गया हो… ये ये यहाँ पर कैसे…… दोपहर को भी सुशांत ने बहुत देर बाद डोर खोला था…. कही सुशांत और रश्मि कुछ… नहीं नहीं …ये नहीं हो सकता…….

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सुशांत मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकता… मैंने उसे अपने बेटे जैसा माना है…… में बहुत परेशान हो गयी थी….. मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि, में क्या करूँ…. लाखों सवाल मेरे जेहन में घूम रहे थे…. तभी बाहर से रश्मि की आवाज़ आई “माँ कहाँ रह गयी” में एक दम से हड़बड़ा गयी….. और जल्दी से पैंटी को अपनी सलवार के जबरन में फँसा कर बाहर आई और सीधा अपने रूम में चली गयी, और उसे वहाँ पर रख दिया…. और बाहर आ गयी…. बाहर आकर में नीचे बैठ गयी…..

मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी दुनिया ही लुट गयी हो… तभी सुशांत बाथरूम से बाहर आया, और पास बैठ कर चाय पीने लगा…… मुझे परेशान देखकर सुशांत ने मुझ से पूछा कि क्या हुआ आप इतनी पेरेशान क्यों लग रही हो………. उस पर मैंने कहा नहीं कोई बात नहीं है……. पर मेरे मन में हज़ारो सवाल चल रहे थे……. कि आख़िर हो क्या रहा है……. मुझे पता करना ही होगा….रा त को सुशांत खाना खा कर ड्यूटी पर चला गया…… आगे कौन सा राज मेरे सामने खुला जाने के लिए कहानी का अगला भाग पढ़े…

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