Father Daughter Sex
मैं चंडीगढ़ में रहती हूं मैं कॉलेज में पढ़ती हूं और बीए थर्ड ईयर की स्टूडेंट हूं मेरी उम्र 21 साल है. मेरी हाइट 5 फुट है मेरा शरीर भरा हुआ है मेरा फिगर अच्छा है 34-28-34 का मुझे टाइट कपड़े पहनने का बहुत शौक है और मुझे लड़को को तड़पाना बहुत अच्छा लगता है. Father Daughter Sex
मैं अपनी दोस्तों में सबसे सेक्सी और स्मार्ट थी कॉलेज के सभी लड़के मुझ पर लाइन मारते थे मुझे भी ये सब अच्छा लगता था. मेरे कॉलेज में 3 बॉयफ्रेंड थे जिनके साथ मैं एक एक बार सेक्स कर चुकी थी ये कहानी मेरी और मेरे पापा की चुदाई की है.
हम घर में चार मेंबर है मैं मेरी मां मेरा भाई और मेरे डैड मेरे पापा की उम्र 50 साल है लेकिन वो बहुत ही कम उम्र के लगते है उन्हें देखकर कोई ये नहीं कह सकता की वो 50 के होंगे वो 40-41 साल के जवान लगते है और रोजाना एक्सरसाइज की वजह से उनकी बॉडी भी पूरी शेप में है.
अब मैं स्टोरी पर आती हूं बात गर्मियों में कॉलेज की छुट्टियों की है मेरा कॉलेज आउट ऑफ़ स्टेशन था और मैं हॉस्टल में रहती थी गर्मी की छुट्टियों में मैं घर वापिस जाती थी और इस बार भी मैं घर वापिस आ गई मेरे सब बॉयफ्रेंड मुझसे दूर हो गए थे और मुझे दुख था की अब मैं 2 महीने सेक्स नहीं कर पाऊंगी.
मैं घर आ गई मैं कॉलेज से बहुत मॉडर्न हो चुकी थी और बहुत फ्रैंक भी मैंने मिनी स्कर्ट और शर्ट डाली हुई थी. मैं घर के अंदर आ गई और सब से मिली और सब बहुत खुश हो गए उसके बाद मैं पापा से मिली, पापा भी बहुत खुश हुए.
उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोले “प्रतीक्षा तुम मर्यादाओं को भूल गई हो ? जो ऐसी ड्रेस मेरे सामने डाली हुई है.”
तो मैंने कहा ओके पापा आगे से ऐसी ड्रेसेस नहीं पहनूंगी मुझे थोड़ा गुस्सा आया और थोड़ा दुख भी हुआ. उसके बाद रात हो चुकी थी तो हम सब बैठ कर बातें करने लगे. पापा ने पूछा की प्रतीक्षा तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है.
तो मैंने कहा की ठीक चल रही है पापा. उसके बाद सब यूं ही बातें करने लगे और उसके बाद सोने के लिए चले गए मेरा अपना अलग एक रूम है और मैं काफी बोर हो रही थी घर आकर कॉलेज में तो हर टाइम फ़्लर्ट करती थी मैं लेकिन अब मैं घर में आ गई थी.
तो मैंने अपने आप को कण्ट्रोल करने की ठान ली बट मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मैं अपने रूम में बेड पर लेटी हुई थी और मेरे दिमाग में सेक्स चल रहा था और मैं हॉट हो रही थी मैंने अपने रूम का डोर लॉक किया और अपने फोन में ब्लू मूवीज देखने लगी और मज़ा करने लगी.
मूवी में किसिंग सीन चल रहा था बॉय और गर्ल दोनों ही न्यूड थे मुझे भी गर्मी चढ़ने लगी और मैंने अपनी नाइटी को ऊपर कर दिया और उतार दिया ऊपर चादर ओढ़ ली और मूवी को देखते देखते अपने मम्मों को मसलने लगी मुझे मज़ा आने लगा था उसके बाद जब मूवी में चुदाई होने लगी तो मैंने अपनी बीच वाली उंगली को अपनी चूत पर रगड़ा और अंदर दे दिया.
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मैं अपनी फिंगर को चूत में देकर आगे पीछे करने लगी जिससे में हॉट हो रही थी मेरे मुंह से हलकी हलकी सिसकारियां निकालने लगी मैं मूवीज को देख कर जोर जोर से अपनी चूत में उंगलियां करने लगी थोड़ी देर बाद मेरा पानी निकल आया और में शांत हो गई उसके बाद मुझे चेन की नींद आ गई.
मेरी तो ये सोच कर हालत ख़राब हो रही थी की मैं बिना सेक्स किए 2 महीने कैसे काटूंगी मैंने अपनी दोस्त को फ़ोन किया तो उसने कहा की मैंने घर आकर अपने कजिन ब्रदर के साथ अफेयर कर लिया है वो मुझे खूब चोदता है तो मैंने कहा की मैं क्या करू तो उसने कहा की तू भी कोई ऐसा ही जुगाड़ कर ले.
फिर उसने फोन काट दिया अब मैं सोचने लगी की मैं ऐसा जुगाड़ कैसे करू मेरे तो सारे रिश्तेदार भी दूर है और मेरा ब्रदर भी छोटा है उसके बाद मेरा ध्यान एक ही शख्स पर गया. वो थे मेरे पापा पहले मैंने सोचा की नहीं ये गलत है ऐसा नहीं होना चाहिए लेकिन मैं तो हवस में अंधी हो चुकी थी.
तो मैंने ये सोचा की अगर मेरी फ्रेंड ये सब कर सकती है तो में क्यों नहीं कर सकती घर की बात घर में ही रह जाएगी और किसी को पता भी नहीं लगेगा. फिर मैं ये सोचने लगी की पापा को मनाया कैसे जाये वो तो बहुत ही स्ट्रिक्ट नेचर के है मैं रात भर यही सोचती रही पहले मैंने ये पता लगाने की सोची की पापा औरतों को देखते है या नहीं.
तो मैंने सुबह से अपने मिशन पर काम करना शुरू कर दिया. अगली सुबह जब पापा सुबह सुबह वॉकिंग करने गए तो मैं भी उसी टाइम उठी और वॉकिंग करने के बहाने पापा का पीछा करने लगी पापा घर के बाहर निकल चुके थे मैं भी पापा के पीछे पीछे वॉकिंग कर रही थी हमारे घर के बाहर ही एक पार्क था इसलिए बिना किसी प्रॉब्लम के हम जब मर्जी आ जा सकते थे.
मैं पापा के पीछे पीछे थी और पापा आगे अब मैंने नोट किया की पापा रास्ते में जा रही सब सेक्सी लड़कियों और औरतों को देख रहे थे वो लड़कियों को एक्सरसाइज करते हुए देखते थे अब मुझे पता चल गया था की मेरे पापा एक नंबर के ठरकी पापा है, मतलब की काम बन जायेगा और में खुश हो गई.
मेरे दिमाग में एक प्लान चल रहा था मैंने सोचा की क्यों ना पापा को गरम किया जाये ताकि वो खुद ही मेरी प्यास बुझाने के लिए तैयार हो जाएँ. पापा पार्क में पेड़ के साथ वाली चेयर पर बैठे हुए थे और योग कर रहे थे. मैं पापा के सामने आ कर खड़ी हो गई मेरी बैक वाली साइड पापा को नजर आ रही थी मैं मुंह पर कपड़ा लगाकर खड़ी थी.
मैंने टाइट ट्रैक सूट डाल रखा था मैंने सोचा क्यों ना मैं पापा के सामने एक्सरसाइज करू उन्हें ये भी पता नहीं लगेगा कि मैं उनकी बेटी हूं और काम भी हो जायेगा. तो मैंने अपनी ट्रैक जैकेट उतार दी अब मैं सैंडो और टाइट लोअर में थी और एक्सरसाइज करते टाइम मेरी गांड पापा वाली साइड थी.
मैं सेक्सी पोज़ बना बना कर एक्सरसाइज कर रही थी मैंने हलकी सी नजर घुमा कर देखा तो पापा मेरे फिगर को ही देख रही थे. वो हवस की नजरो से देख रहे थे. मेरा मन एकसाइटेड हुआ और मैं जोर जोर से अपनी गांड हिला हिला कर एक्सरसाइज करने लगी. मैंने पापा को एकदम तड़पा दिया था फिर में जैकेट पहन कर वहां से घर आ गई और बैठकर न्यूज़ पेपर पढ़ने लगी.
थोड़ी देर बाद पापा आ गए जैसे ही पापा ने मुझे देखा वो मुझे देख कर थोड़े शोक हो गए. उन्हें अब समझ में आ गया था की जिसे वो घूर घूर कर देख रहे थे वो उनकी बेटी थी. मैंने कहा गुड मॉर्निंग पापा. तो उन्होंने टेंशन में जवाब दिया मैंने जानबूझकर कहा क्या हुआ पापा सब ठीक तो है ना?
तो उन्होंने कहा हां बेटी सब कुछ ठीक है. उसके बाद पापा नहाने चले गए. जब पापा नहा कर बाहर आए तो उनका शरीर देख कर मई तो पागल हो गई मेरा तो दिल कर रहा था की अभी जाकर पापा के सीने से लिपट जाऊ लेकिन मैंने कण्ट्रोल किया.
उसके बाद मैं नहाने चली गई मुझे पापा का शरीर याद आ रहा था तो मैंने नहाते वक्त अपनी चूत में उंगलियां कर ली और अपने आप को शांत कर लिया. उसके बाद सबने नाश्ता किया और पापा ऑफिस चले गए फिर मैंने घर में बैठे बैठे सोचा की ऐसा क्या करू जिससे पापा अपने आप ही मेरी चूत मारने के लिए तैयार जाए.
यही सोचते सोचते शाम हो चुकी थी पापा घर आए तो मैं तैयार होकर बैठी थी क्योकि मां ने कहा था की पापा के साथ मार्किट चली जा कुछ सामान मंगवाना है तो मैं तैयार थी मैंने ब्लैक कलर की मिनी स्कर्ट और रेड कलर का टॉप डाला हुआ था जो की मैं डेट पर डालती थी.
थोड़ी देर बाद पापा घर आए और मां ने कहा की बेटी के साथ मार्किट जाकर जरा सामान ले आओ तो पापा ने कहा ठीक है. मैं पापा के पास आई तो पापा मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक घूरने लगे. मुझे लगा आज फिर डांट पड़ेगी पर पापा ने मुझे मिनी स्कर्ट पहनने पर कुछ भी नहीं कहा था मैं खुश हो गई की पापा को मैं पसंद हूं.
पापा ने स्माइल करते हुए कहा कि चलें बेटी?
तो मैंने कहा जी पापा.
पापा तो कार ले कर जाना चाहते थे पर मैंने सोचा की यदि पापा को पटाना है तो स्कूटर ज्यादा ठीक रहेगा तो मैंने पापा को कहा- “पापा! मार्किट में तो बहुत भीड़ होती है. आप स्कूटर ले कर चलें तो आसान रहेगा। और रास्ते में मैं भी स्कूटर चलाना की थोड़ी प्रक्टिस कर लूंगी। बहुत देर से स्कूटर नहीं चलाया है.”
पापा मान गए, शायद वो भी चाहते थे क्योंकि स्कूटर पर उन्हें अपनी बेटी के कामुक शरीर के ज्यादा पास होने का मौका मिलता। खैर हम बाप बेटी स्कूटर पर चल पड़े. हम मार्किट की तरफ निकाल गए पापा की नजरे मेरी मिनी स्कर्ट पर थी मैं अनजान होने का नाटक कर रही थी मुझे लगने लगा कि पापा मेरी तरफ अट्रेक्ट होने लगे है मैं एक्साइटेड़ थी.
अब पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे। यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे। मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे। उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।
उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है। मैं तो इस चक्कर में थी कि किसी तरह कुछ मामला आगे बढ़ जाए। मैंने सोचा कि क्यों ना अभी गरम लोहे पर चोट की जाए.
जब हम घर से थोड़ी दूर आ गए वहां पर खुली सड़क थी और दोनों ओर जंगल ही था. कोई आता जाता भी नहीं था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने वहां पर कुछ कोशिश करने का सोचा और पापा से कहा- “पापा! यहाँ खुली जगह है. और जंगल है. आप पीछे बैठिये और मुझे थोड़ा स्कूटर चलाने की प्रैक्टिस करने दें. मैंने बहुत दिनों से स्कूटर नहीं चलाया है.”
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मैं चाहती थी कि जब पापा पीछे बैठे तो उनका लंड मेरी चूत को स्पर्श करे और अगर एक बार ऐसा हो गया तो शायद पापा खुद पर कंट्रोल न रखें और मुझे चोद डालें। पापा पीछे बैठ गए और मुझे आगे बैठने को कहा तो मैं जान बुझ कर उनसे चिपकी हुई बैठ गई मैंने देखा कि मुझे उनके लंड ने टच नहीं किया था मतलब अभी वो शांत था।
पापा ने मेरी दोनो बाहों के साइड से स्कूटर का हेंडल पकड़ा और मुझे भी हेंडल पकड़ने को कहा और फिर मुझे स्कूटर सिखाने लगे मैं जान भूज कर अपने बाजू दबा देती थी ताकि पापा के बाजू मेरे मुम्मों को टच करने लगें ऐसा करने से मुझे अब महसूस हो रहा था कि पापा का लंड खड़ा है होने लगा है मुझे अपनी पीठ पर कोई चीज़ टच करती महसूस हो रही थी।
अब मैं पापा के लंड पर बैठना चाहती थी तो कोई बहाना ढूंढने लगी। मैंने एक स्कीम सोची और फिर मैंने अपनी चप्पल नीचे गिरा दी और स्कूटर रोक कर कहा कि पापा मैं चप्पल ले कर आई। जब मैं चपल लेकर आई तो मैंने चोरी से देखा कि पापा का लंड फफक रहा है।
मैं जान भुज कर पापा के पेट से सट कर बैठ गई और इस बार उनका लंड मेरे चूतड़ों के नीचे दब गए तो पापा बोले प्रतीक्षा कैसे बैठी हो जरा आगे हो कर बैठो तो मैंने कहा कि आगे तो बहुत ही थोड़ी सी जगह है और स्कूटर चलाने लगी।
पापा का लंड मेरे चूतड़ों के नीचे ही दबा हुआ था फनकार रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मेरी चूत गीली हो रही थी। लेकिन मैं तो अंजान बनी बैठी थी जैसे कुछ पता ही नहीं हो कि उनका लंड मैं दबा के बैठी हूँ। मैंने पापा से कहा कि आप हेंडल छोड़ दीजिए मैं चलाती हूं.
तो मैं धीरे-धीरे स्कूटर चलाने लगी और पापा ने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और अंजाने में ही उनसे मेरे स्तन टच हो गए तो मुझे लगा कि पापा अपना कंट्रोल खो रहे हैं क्योंकि मैंने महसूस किया कि उनके हाथ मेरे मम्मों को हल्का हल्का टच करने की कोशिश कर रहे थे.
मैं तो यही चाहती थी कि मुझे और क्या चाहिए था। पापा का लंड अभी भी मेरी चूतड़ों के नीचे फंस रहा था। मैंने पापा से कहा कि एक मिनट जरा आप हैंडल को पकड़ लीजिये ताकि मैं जरा ठीक हो कर बैठ जाऊं और मैं थोड़ा और पीछे को हो कर बैठ गई ताकि उनका लंड मेरे नीचे से निकल न पाए।
अब शायद पापा समझ गए थे कि मैं भी उनसे चुदवाना चाहती हूँ, या कम से कम मैं उनके लौड़े का मजा तो ले ही रही हूँ, इस लिए वो भी चुपचाप बैठे रहे और उनका लौड़ा मेरे चूतड़ों के नीचे ही दबा रहा. वो बोले कुछ नहीं और मजा लेते रहे. उनकी भी भावनाएं मेरे लिए काफी हद तक बदल तो चुकी ही थी, तो उन्होंने भी शायद यही सोचा की मौका मिल रहा है तो लगे हाथ वो भी मजे ले ही लें.
और शायद वो भी सोच रहे थे कि इस तरह यदि उनकी प्यारी बेटी गर्म हो जाये तो शायद उन्हें भी इसके आगे यानि मुझे चोद पाने का मौका मिल जाये. आखिर वो भी तो चूत मारने का कोई मौका ढूंढ ही रहे थे. अब मेरे दिमाग में तेजी से सोच रहा था कि क्या करें जिस से बात थोड़ी और आगे को बढ़ सके. अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।
मैंने पापा से पूछा- पापा, यहां टॉयलेट किधर है, मुझे जाना है।
जबकि मुझे पता था कि वहां कोई टॉयलेट नहीं है।
पापा बोले- बेटा, यहां तो कोई टॉयलेट नहीं है। तुम्हें बाहर खुले में ही करना पड़ेगा।
मैंने नखरा दिखाते हुए कहा- ना बाबा ना… खुले में कैसे करूंगी।
इस पर पापा ने कहा- क्या हुआ बेटा। यहाँ कोई भी तो नहीं है. तुम थोड़ा साइड में स्कूटर ले लो और वहां झाड़ियों के पास जा कर कर लो।
मैंने कहा- नहीं मैं वहां अकेली कैसे अकेली जाऊँगी, मुझे डर लग रहा है।
तब पापा ने कहा- कोई बात नहीं बेटा, कोई चिंता की बात नहीं है, अच्छा ऐसा करते हैं की मैं भी पेशाब कर लूँगा. ठण्ड है न तो मुझे भी पेशाब आ रहा है. चलो दोनों बाप बेटी कर लेते हैं.
(पता नहीं पापा को सच में पेशाब आया था या वो भी मेरी तरह कोई चाल चल रहे थे.) हम दोनों एक साइड में चले गए जहाँ कोई नहीं आता था और वो जगह सुनसान थी.
मैंने कहा- आप यहीं रहियेगा, मैं आ रही हूं.
और फिर मैं एक तरफ बढ़ गई और एक ऐसी जगह चुनी जहाँ से पापा मुझे देख सकते थे. जानबूझ कर मैं ऐसी जगह में पेशाब करना चाह रही थी ताकि मैं इन्हें अपनी गांड दिखा सकूं। एक झाडी के पास पहुंच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो पापा मुझे देख रहे थे।
मैंने कहा- प्लीज़ जाइयेगा मत!
पापा ने कहा- ठीक है।
फिर मैंने अपनी स्कर्ट को ऊपर कर लिया और पैंटी को नीचे तक खिसका दिया,और जानबूझकर बैठने में थोड़ा टाइम लिया ताकि पापा मेरी गोरी-गोरी गांड देख सकें। और फिर धीरे से बैठ कर पेशाब करने लगी, साथ में मेरी नंगी गांड की नुमाइश करने लगी। मेरे पेशाब करने में छरछराहट की आवाज भी सन्नाटे में गूँज रही थी।
मैंने पापा को आवाज दे कर कहा “पापा आप भी पेशाब कर लीजिये ताकि फिर आप के पेशाब करने में समय खराब न हो.
पापा तो मेरी गांड देखने में मस्त थे, मेरी आवाज़ सुन कर पापा ने भी वहीँ खड़े खड़े अपना पैजामा खोला और वहीं खड़े खड़े अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और पेशाब करने लगे. पापा मेरी नंगी गांड देखते हुए पेशाब करने की कोशिश कर रहे थे.
पर पापा का लौड़ा तो पहले से ही टाइट था और अब अपनी प्यारी बेटी की गांड के दर्शन करने से और भी टाइट हो चूका था तो उनके लण्ड से पेशाब बहुत ही कम स्पीड से निकल रहा था. पेशाब करने के बाद मैं खड़ी हो गई और एक बार फिर लेगिंग ऊपर करने में थोड़ा समय लिया ताकि एक बार और पापा मेरी गांड देख सकें।
फिर एकदम से पापा की तरफ घूम गयी जैसे मुझे पता ही न हो कि पापा वहीं खड़े हो कर पेशाब कर रहे थे. पापा का लौड़ा मेरी ओर तना हुआ और तीर की तरह खड़ा था. मेरे अचानक उठने और उनकी तरफ घूम जाने के कारण पापा को लण्ड को पाजामे में करने और ढंकने का मौका ही नहीं मिल पाया.
वो एकदम से घबरा से गए और लंड को पजामे के अंदर करने की कोशिश करने लगे। उनका लंड अभी पजामे के बाहर था ही और खड़ा था जिसे वे पजामे के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे। पर क्योंकि उनके लौड़े से पेशाब निकल रहा था तो बेचारे उसे एकदम से अंदर भी नहीं कर सकते थे.
आप लोग तो जानते ही हैं कि जब आदमी के लंड से पेशाब निकल रहा होता है तो उसे एकदम से बंद नहीं किया जा सकता। तो पापा के लंड से पेशाब थोड़ी देर तक निकलता रहा और मैं उसे देखती रही. पापा पहले तो थोड़ा घबरा रहे थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पर जब उन्होंने मुझे कोई एतराज करते न देखा तो वो भी थोड़ा संतुष्ट हो गए और पूरा पेशाब किया और फिर अपने लौड़े को जो अब तक पूरा तन चूका था, को अंदर किया। पर मुझे लगा की पापा इतनी तेजी से फिर भी अपना लण्ड अंदर नहीं कर रहे थे जितना करना चाहिए था.
मैं समझ गई थी कि वे जानबूझकर अपना लंड मुझे दिखा रहे हैं। तो मैं भी आंखें फाड़े उनका लंड देख रही थी। पापा ने जब मुझे कुछ भी बोलते या कोई एतराज करते न देखा तो उन्होंने बड़े ही आराम से और धीरे धीरे अपना लण्ड पूरा समय ले कर पजामे में अंदर किया और इतनी देर मैंने भी पापा के लण्ड के खूब दर्शन किये.
हालाँकि मैंने पहले भी कई बार पापा का लण्ड देखा था पर आज पहली बार पापा के सामने उनकी जानकारी में उनका खड़ा हुआ लौड़ा देखा. और पापा ने भी मुझे लण्ड ठीक से दिखाया था. यह निश्चय ही हमारे आपसी संबंधों में एक अगले स्तर की कारवाही थी.
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मैंने अपनी गांड दिखा कर और पापा ने अपना लण्ड दिखा कर यह तो बता ही दिया था की हम बाप बेटी असल में क्या चाहते हैं. बस अब देर थी तो बाप बेटी के संबंधों की समाज की आपसी दीवार गिरने की. पापा का लण्ड देख कर मैं हल्का मुस्कुरा दी।
उधर पापा को तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था, मेरी मुस्कराहट देख कर, उनके दिल में यदि कोई छोटा मोटा डर था भी तो निकल गया. पापा भी मुस्कुरा पड़े। वो भी समझ रहे थे कि मैं और पापा दोनों अब खुलकर मजे लेना चाह रहे हैं। इस पेशाब करने के वाकये ने माहौल को सेक्सी बना दिया था।
मेरी चूत से भी पानी निकल कर मेरी पैंटी को हल्का-हल्का गीला कर रहा था इसलिए मैं भी शर्म लाज छोड़ कर मजे लेने का मूड आ चुकी थी। हम मार्किट पहुंच गए थे वहां बहुत ही भीड़ थी तो हमने स्कूटर को पार्किंग में लगा दिया और भीड़ में चले गए बाजार में सेल लगने के कारण बहुत ही ज्यादा भीड़ थी.
मैं आगे चल रही थी पापा पीछे चल रहे थे अचानक से भीड़ में धक्का मुक्की होने लगी हम भीड़ में फंस गए थे मुझे आगे से धक्के आ रहे थे और पापा को पीछे से धक्के लग रहे थे धक्का लगने के कारण पापा मेरे पीछे से टच हो गए थे उनका लंड मेरी गांड में टच हो गया.
मैं धक्का लगने का नाटक करते हुए पीछे की तरफ अपने आप धकेलने लगी और पापा के लंड का स्पर्श पा लिया . लंड मेरी गांड के साथ सट गया था और भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को पता नहीं चल रहा था अब मैं और पापा एक दूसरे के साथ साथ आ गए थे.
मेरा पूरा जिस्म मेरे पापा के सीने से लग रहा था मुझे मज़ा रहा था और मैं हॉट हो रही थी. और पापा का लंड भी खड़ा सख्त हो रहा था मैं पापा को और सेड्यूस करने लगी और अपनी गांड को हिलाने लगी अब मेरी गांड पापा के लंड को घिस रही थी और मैं अपना कण्ट्रोल खोती जा रही थी.
पापा का भी कण्ट्रोल लूज हो रहा था और पापा भी अपना लंड मेरी गांड पर लगा रहे थे. अचानक मैंने महसूस किया की पापा के दोनों हाथ मेरी कमर पर है उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा हुआ है. मैं हैरान हो गई थी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
पापा ने अपना कण्ट्रोल खो दिया था और उन्होंने अपना एक हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर डाल दिया और मेरी गांड को ऊपर से सहलाने लगे. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन मैं ऐसे रियेक्ट कर रही थी की जैसे भीड़ बहुत ज्यादा है मैं खुश हो गई थी की आखिर मैंने पापा को सेड्यूस कर ही दिया.
वो अपने साथ से मेरी गांड सहलाये जा रहे थे. थोड़ी देर हमने मज़े लिए उसके बाद वो नार्मल हो गए और हम भीड़ में से निकल गए.हम मार्किट में शॉपिंग करने लगे. लेकिन पापा ने मुझसे बात नहीं की मैंने भी नहीं की. हम शॉपिंग करने के बाद घर आ रहे थे तो पापा ने मुझे कहा की प्रतीक्षा जो भी हुआ उसको भूल जाओ और किसी को मत बताना.
तो मैंने कहा “कोई बात नहीं पापा. डोंट वरी. ऐसी गलतिया हो जाती है. आखिर हो तो आप भी एक मर्द.”
मैंने ये कहकर एक सेक्सी स्माइल देकर ग्रीन सिग्नल दे दिया पापा भी मुस्कुराये और कहा की “बेटी अब समझदार हो गई है.”
थोड़ी देर के बाद हम दोनों स्कूटर के पास आये घर जाने के लिए, तो देखा कि स्कूटर का अगला पहिया पंचर हो गया था. पास में कोई दूकान नहीं थी. तो पापा ने एक जान पहचान वाले दूकानदार के पास स्कूटर रख दिया और कहा कि वो उसे कल ले जायेंगे.
फिर हमने घर जाने के लिए कुछ और इंतजाम करने का सोच. मैं तो नाराज़ थी क्योंकि मैं सोच रही थी कि वापिसी में भी पापा से कुछ मजे ले लुंगी और अपनी कार्यवाही को कुछ और आगे ले जाउंगी पर सब गड़बड़ हो गया. फिर हमने बस से ही जाने का सोचा। 15 मिनट बीत चुके थें पर बस का कोई नमोनिशान नहीं था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“उबर बुला लूं क्या?”.
“रहने दो पापा… बेकार में पैसे खर्च होंगे. बस अभी आ जायेगी.”
मैंने कहा. “उबर पे पैसे बर्बाद ना करके उसी पैसों से आप मुझे एक साड़ी खरीद देना.”
“अच्छा? दो तीन सौ में कहाँ से आयेगी साड़ी?”.
“दो तीन सौ में कुछ और पैसे मिला लेना पापा…”. मैं हँसते हुए बोली.
कुछ देर में ही उनकी बस आ गई.
“आजाओ पापा…”.
“इसमें नहीं प्रतीक्षा… बहुत भीड़ है.”.
“पापा… यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं… चलो.”
पापा को आराम से सफर करने कि आदत पड़ी थी, बस में अंदर घुसते ही भीड़ देख कर उसका दिमाग़ घुमने लगा. मैं इन सब में निपुण थी, मैंने अपने पापा का हाथ पकड़ा और भीड़ में जगह बनाती हुई बस के एकदम पिछले हिस्से में चली गई.
भीड़ तो वहाँ भी कम नहीं थी पर बस के पिछले हिस्से में कम से कम आने जाने वाले लोगों कि धक्को से बचा जा सकता था. मुश्किल से खड़े होने कि जगह मिली थी उन्हें, दोनों एक दूसरे के अगल बगल खड़े हो गये, बस चल पड़ी.
“अच्छा प्रतीक्षा… यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं?”.
“हाँ पापा… तो ? वैसे आज थोड़ी ज़्यादा ही भीड़ है इस बारिश कि वजह से… रोज़ नहीं होता इतना… पर…”.
मैं जिस जगह खड़ी थी उसके पीछे एक आदमी बड़ा सा बैग लिये खड़ा था. उस बैग कि वजह से मैं ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी और बार बार ठोकर लग रही थी.
“इधर आ जा प्रतीक्षा.”.
पापा ने जब ये ध्यान किया तो उसने अपने सामने थोड़ी सी जगह बना ली और मैं वहाँ घुस कर अपने पापा के आगे खड़ी हो गई. अब पीठ अपने पापा के तरफ थी और धक्के मुक्के से बचाने के लिये पापा पीछे खड़े थें. पापा मेरे लिये इतने रक्षात्मक थें ये देख कर मैं मन ही मन मुस्कुराई पर कुछ बोली नहीं.
मुझे अपने पापा के साथ नोंक झोंक वाला रिश्ता ही ज़्यादा भाता था, औपचारिकता वाला नहीं! बाहर बारिश होने कि वजह से दिन के वक़्त भी अच्छा खासा अंधेरा छा गया था, बस कि सारी खिड़कीयां बंद थी तो अंदर बस में भी अंधकार ही था, जो जहाँ था वहीं चुपचाप खड़ा था, हिलने डूलने कि तो जगह ही नहीं थी. कुछ देर कि यात्रा के बाद पापा और मैं अब शिथिल हो गयें थें…
पापा ने अपनी बेटी को अपने सामने खड़े होने कि जगह तो दे दी थी पर वो आरामदायक नहीं हो पा रहा था, मेरा तो उसे पता नहीं. दरअसल, उसकी बेटी का बदन उसके जिस्म से एकदम चिपक गया था, उसपे उसकी बेटी का सलवार कमीज़ और खुद उसका पतलून और शर्ट भीग कर तर बतर हो चुका था.
शुरू में काफी देर तक उसने कोशिश कि, की उसका शरीर अपनी बेटी के बदन से ना सटे, पर पीछे से पड़ रहे लोगों की भीड़ के दबाव को वो ज़्यादा देर तक रोक नहीं पाया. मुसीबत तब हुई जब आखिरकार पापा के कमर का निचला हिस्सा उसकी बेटी के नितंब में जा सटा.
इतना तो फिर भी ठीक था पर सबसे शर्मनाक स्थिति तब आई जब पापा की टांगों के बीच वाला हिस्सा उसकी बेटी की कमीज़ और सलवार में लिपटी पानी से गीली हुई चूतड़ों के मध्य की पतली दरार के बीचो बीच फंस गया! पापा बस यही सोच रहा था की उसकी बेटी पता नहीं क्या सोच रही होगी, शायद उसे कुछ महसूस ही ना हो रहा हो, ना ही हो तो बेहतर है!
पापा की कमर और दोनों जांघो वाला हिस्सा अब मैं के गांड़ की दोनों गोल उभारों में सट गया था जबकि उसका लण्ड वाला हिस्सा उन दो गोल गुंबदो के बीच घुस गया था! अनुभूति तो आखिर अनुभूति ही होती है जो इंसान महसूस करता है और जिसका तर्क हर वक़्त ना खोजना संभव है और ना समझना. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पापा को भी जब किसी नरम मुलायम गद्दे जैसी अपनी बेटी के गांड़ का उभार अनुभव हुआ तो ना चाहते हुए भी, या फिर यूँ कहें, की उसकी इच्छा के विरुद्ध, उसका लण्ड उसकी पैंट में फूलने लगा !!! पानी में पूरी तरह से भीगे होने के कारण उसके पतलून के अंदर उसका अंडरवीयर भी ढीला और लचीला हो गया था, जिसकी वजह से उसका अंडरवीयर ज़्यादा देर उसके लण्ड के बढ़ते उभार और आकार को दबा नहीं पाया.
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उसका लण्ड उसके जांघिये में नीचे की ओर मुड़े हुए ही खड़ा होने लगा! मेरी ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी. परिस्थिति हाथ से बाहर जाता देख पापा ने धीरे से अपनी कमर पीछे खिसका कर अपने लण्ड को अपनी बेटी की गांड़ की दरारों से बाहर निकाला, और थोड़ा पहलू होने की कोशिश की ताकि वो उसकी गांड़ से ना सटे.
पर इस प्रयास में चूंकि पीछे से भीड़ का काफी दबाव था, उसका लण्ड बाहर तो निकला पर इस बार वापस जाकर मेरी बाई गांड़ के गुंबद पे टिक गया. और ये मैंने बहुत ही अच्छे से बिना किसी गलतफहमी के महसूस भी किया !!!
“आप ठीक है न पापा ? मैं थोड़ा हटूं क्या ?”. मैंने अपनी गर्दन पीछे की ओर बस इतना सा घुमा कर पूछा की उसकी आँख पापा के आँख से ना मिले.
“हाँ!”. पापा ने जितना हो सका अपनी आवाज को स्वाभाविक बना कर कहा, जैसे की कुछ हुआ ही ना हो. मैंने अपने पापा का लण्ड साफ अपनी गांड़ पर महसूस कर लिया था, थोड़ा अजीब लगा पर मैं जानती थी की ये जान-बूझकर नहीं था. मैंने अपनी गांड़ थोड़ी सी हिला कर ठीक करना चाहा पर उससे मामला और बिगड़ गया !
मेरी इस हरकत से पापा का लण्ड घिसट कर वापस मेरी गांड़ की दरार में फिट हो गया और इस बार पापा का नीचे मुड़ा हुआ लण्ड जांघिये में थोड़ी सी जगह पाकर सीधे ऊपर की ओर उठ गया !!! पापा और मैं इतने सालों से एक साथ रह रहें थें, पापा ने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया था जैसा वो अब कर रहा था.
ऐसी बात नहीं है की वो कभी अपनी बेटी के इतना करीब ना गया हो, इससे ज़्यादा करीबी और क्या हो सकती है. पर हमेशा से एक सामान्य बाप बेटी रहे इन दोनों के बीच अभी जो भी हो रहा था, ऐसा क्यूं हो रहा था !! दोनों बाप बेटी सामने ऊपर की तरफ बस का rod पकड़े खड़े थें. पापा का मुँह अपनी बेटी के भीगे खुले बालों के ठीक पीछे था…
उसके बालों से आ रही बारिश के पानी और शैम्पू की घुली मिली महक ने मानो बेटी और उसके बीच का संकरा फासला कम कर दिया था. अभी तक तो पापा असमंजस में था की क्या हो रहा है और वो क्या करे और क्या ना करे, पर अब जब उसका लण्ड पूरी तरह से टाईट ठनक कर खड़ा हो गया तो उसने समझ लिया की वो अपनी ही सगी बेटी के बदन से सट कर कामोत्तेजित हो रहा था !!!
अब पापा के पास बस एक ही रास्ता था… ये टेस्ट करना की उसकी बेटी क्या चाहती है, अगर वो तिनका भर भी आपत्ति दिखायेगी तो उसे तुरंत खुद को रोक लेना होगा. पापा ने अपनी कमर हल्के से सामने की ओर बढ़ाई तो मेरी गांड़ के बीच रगड़ खा कर उसके लण्ड का चमड़ा पीछे खिसक कर खुल गया और उसका मोटा सुपाड़ा बाहर निकल आया.
पापा का लंड इतना फूल गया था कि वो उनकी अंडरवियर टाइट हो रहा था. अब पापा अपने भीगे पतलून में अपने खड़े लौड़े का सुपाड़ा खोले अपनी बेटी की गोल गदराई चूतड़ से टिका खड़ा था !!! मेरा रहा सहा शक भी अब जाता रहा की जो कुछ भी हो रहा था वो अनजाने में हो रहा था.
वो समझ गई की उसके पापा बेचारे परिस्थिति के सताये कामोन्मादित हो रहें थें. परिस्थिति के सताये और मारे ही कहेंगे ना… क्यूंकि मैं समझ रही थी आज तक उसके पापा ने ना जाने कितनी बार मुझे नाईटी में और पजामे में देखा था, पर कभी भी मुझ पे गंदी नज़र नहीं डाली थी. आज का दिन मगर कुछ और ही था… मन ही मन मैं थोड़ा मुस्कुराई, पर कुछ ना बोली, चुप रही.
इधर पापा का मन बढ़ गया जब उसकी बेटी की ओर से ऐसा कोई इशारा नहीं हुआ जिसके द्वारा वो अपनी असहमति दिखाए. फिर क्या था, उसने एकदम धीरे धीरे मेरी नरम गांड़ में अपना लण्ड ठेलना शुरू किया. उसके खड़े लण्ड का सुपाड़ा तो पहले ही खुल चुका था, सो अपने पानी में गीले भीगे पैंट के अंदर अपना लौड़ा घिसने में उसे ऐसी आनंद की अनुभूति होने लगी की वो बयां नहीं कर सकता था !
अभी उसने तीन चार बार ही अपना लण्ड रगड़ा होगा की बस रुक गई… कोई स्टॉप आया था. वो थोड़ा संभल कर खड़ा हो गया पर उसने देखा की जितने लोग बस से उतरे नहीं उससे ज़्यादा लोग चढ़ गयें, भीड़ और बढ़ गई थी. बस फिर से चल पड़ी.
“अभी दूर है क्या प्रतीक्षा ?”. पापा ने अपनी बेटी के मूड का जायजा लेने के मकसद से पूछा.
“हाँ पापा… ये बस दूसरे रास्ते से जाती है ना. आपकी बाइक में तो ज़ल्दी हो जाता है.”. मैंने तुरंत जवाब दिया, पर अभी भी पीछे नहीं मुड़ी.
“हाँ…”.
पापा ने इधर उधर आस पास के लोगों को देखा पर सभी अपने में मगन और परेशान खड़े थें… बस में दो अच्छे घराने के बाप बेटी क्या कर रहें थें इसमें शायद ही किसी को रूचि हो !!! पापा अपना दाया हाथ नीचे सरका के अपने पतलून तक ले गया और पैंट की ज़िप यानि चैन खोल दी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं पीछे देख तो नहीं पा रही थो पर वो समझ गई की उसके पापा अब कोई और नई शैतानी करने वाले हैं. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा… अपने पतलून के अंदर हाथ डाल कर पापा ने अपना खड़ा लण्ड अपने जांघिये से बाहर निकाल लिया और फिर पैंट कि ज़िप वापस लगा ली.
अब उसका लण्ड अंडरवीयर से बाहर लेकिन पतलून के अंदर था. उसने ऐसा इसलिये किया था ताकि उसके लण्ड को अपनी बेटी के चूतड़ का ज़्यादा से ज़्यादा स्पर्श मिल सके. अब उसने अपनी बेटी कि गीली कमीज़ उठा कर सीधे उसके सलवार में लिपटी गांड़ में अपना लण्ड सटा दिया और उसकी कमीज़ से वो हिस्सा ढक दिया, जिससे अगर कोई देखे तो सिर्फ ये समझे कि दोनों बस ऐसे ही बाकि यात्रियों कि तरह खड़े हैं !
मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई पब्लिक में अपने पापा कि इस साहसी हरकत को देख कर ! मैंने अपने भीगे बालों और गर्दन पर अपने पापा कि गरम साँसे महसूस कि… पापा अब पहले से और ज़्यादा सट कर खड़ा हो गया था. अब पापा के लण्ड और मेरी गांड में सिर्फ उनके पैन्ट और मेरी स्कर्ट के कपडे का ही अंतर था.
टी शर्ट के अंदर ढकी मेरी गांड़ में पापा अब खुल कर लण्ड घिसने रगड़ने लगा. मेरी मांसल पुष्ट गांड़ कि गोलाईयां उसके लण्ड को इतना सुकून और आनंद देंगी, ये उसे अभी अभी पता चला था ! अपने पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके लण्ड से पापा ने ठेल ठेल कर अपनी बेटी कि स्कर्ट और उसके अंदर पहनी पैंटी को उसकी चूतड़ कि फांक में घुसा दिया था.
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मुझेतो मन ही मन हँसी आने लगी अपने पापा कि बेचैनी देख कर. अति कामोत्तेजना में पापा को पता ही नहीं चला कि कब रुकना है और उसने अपना लण्ड अपनी बेटी कि टाईट गांड़ में कुछ ज़्यादा ही घिस दिया था, इस वजह से वो स्खलित होने के करीब पहुंच गया.
उसने तुरंत अपना लण्ड मेरी गांड़ से हटा लिया और साँस रोक कर अपना माल गिरने से रोकने कि कोशिश करने लगा. इस कोशिश में उसके पेट मे बल पड़ गया, मगर अब काफी देर हो चुकी थी, उसका लण्ड उसके पैंट में एकदम से बड़ा होकर फूल गया और उसका वीर्य निकल आया !!!
जब पापा ने देखा कि अब कोई फायदा नहीं तो उसने वापस अपना लण्ड अपनी बेटी कि स्कर्ट में घुसा दिया और झड़ने लगा. उसका गाढ़ा वीर्य पतलून के कपड़े से बाहर रिस रिस कर बहने लगा. मैंने जब अपनी स्कर्ट में गांड़ और जांघो पर गरम गरम मलाई जैसी चिकनी रस के एक के बाद दूसरी धार को गिरता हुआ महसूस किया तो वो समझ गई कि उसके पापा का काम तमाम हो चुका है !!!
20 सेकंड के अंदर ही पापा कि पिचकारी पूरी खाली हो गई. उसके पैर अचानक से हुए इस शीघ्रपतन से काँप रहें थें और उसने बड़ी मुश्किल से खुद को अपनी बेटी के ऊपर गिरने से रोका था. मैंने अपने हाथ से अपनी गांड़ में घुस चुकी पैंटी और स्कर्ट को निकाला और अपने कपड़े ठीक करने लगी. पर पापा का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था !
अभी अभी थोड़ी सी शिथिल हुई मैंने अचानक अपने पापा का दाया हाथ सीधे अपनी चूत पे रेंगता हुआ महसूस किया. पापा चूत स्कर्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा ! पापा अचानक से इतने बेशरम कैसे हो गयें ???… मैं बेचारी ये सोच ही रही थी कि पापा ने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी ऊँगलीयां फंसा दी…
हाय !… पापा पागल हो गयें थें क्या… इतने लोगों के बीच भरी बस में अपनी सगी बेटी को नंगा करना चाहते थें क्या ??? घबरा कर मैंने तुरंत अपने पापा का हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया. पापा रुक तो गया… उसने अपनी बेटी कि स्कर्ट का नहीं खोला मगर अब अपना हाथ स्कर्ट के अंदर ही डाल दिया.
लेकिन मैंने स्कर्ट इतनी टाईट बाँध रखी थी कि मुश्किल से पापा का हाथ अंदर घुस पाया और पापा बेचारे सिर्फ पैंटी का ऊपरी हिस्से वाला इलास्टिक ही छू पायें थें !!! अब ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा था… मैं एकाएक अपने पापा के तरफ मुड़ कर खड़ी हो गई. पापा को ये अंदेशा नहीं था कि उसकी बेटी अचानक आमने – सामने हो जायेगी. उसने झट से अपनी नज़र घुमा ली.
“पापा ! मम्मी को फोन किया कि हम लेट हो जायेंगे ?”. मैंने पूछा.
पापा समझ गया कि मैं जानबूझ कर ज़ोर से बोल रही थी और “पापा” शब्द पर ज़्यादा दबाव डाल रही थी ताकि आस पास खड़े लोगों को उनकी हरकतों पे कोई शक ना हो. पापा कि हिम्मत नहीं हुई कि अपनी बेटी से आँख मिला सके… उसने कोई जवाब नहीं दिया… उसका गला सूख रहा था. मैं अब सीधे उसकी आँखों में देख रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“कितनी भीड़ है पापा… मैं गिर जाउंगी.”. मैंने अचानक अपने दाये हाथ से अपने पापा का कमर पकड़ लिया और बाये हाथ से बस का डंडा पकड़े खड़ी रही. पापा को और किसी इशारे कि ज़रूरत नहीं थी… वो समझ गया कि उसकी बेटी के साथ उसने जो कुछ किया था वो उसे अच्छा लगा हो या ना पर इतना तो तय था कि वो नाराज़ नहीं थी…
उसकी बेटी के गोल मम्मे अब उसकी छाती से दब रहें थें. उसकी कमीज़ बारिश में भीगे होने के कारण पापा महसूस कर पा रहा था कि मेरे दोनों निप्पल खड़े हो गयें थें. उसे अब बस में अपनी बेटी के अलावा कोई दिखाई नहीं दे रहा था ! पापा का पैंट मेरी स्कर्ट से ढक गया था…
उसने अंदर हाथ डाल कर अपने पैंट कि ज़िप खोल दी और इस बार अपना लण्ड पतलून से बाहर निकाल लिया. मुझे अपने पापा कि इस हरकत पे अब कोई आश्चर्य नहीं हो रहा था… सबसे नज़र बचा कर वो दोनों जो कुछ भी कर रहें थें उससे अब मुझे एक अजीब सा यौन किंक मिलने लगा था !!!
पापा का लण्ड अब अपने खुद के पेट और उसकी बेटी के पेट के बीच में दबा पड़ा था और ऊपर से बेटी कि स्कर्ट से पूरी तरह ढका हुआ था. मैंने उसके लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी नाभी में टच होता महसूस किया… अफ़सोस कि अपने पापा का लौड़ा देख नहीं पा रही थी…
पर उसके स्पर्श से इतना तो अंदाज़ा लगा लिया था कि पापा का लौड़ा अच्छा खासा बड़ा होगा. पापा धीरे धीरे अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपनी बेटी के पेट और नाभी में रगड़ने लगा. अब वो सीधा अपनी बेटी कि नज़रों से नज़रें मिलाये खड़ा था.
उसका चेहरा अपनी बेटी के चेहरे के इतने पास था कि उसका तो मन कर रहा था उसे चुम ही ले. चूंकि पापा का लण्ड अभी अभी झड़ा था, सो उसके लण्ड में ज़्यादा गर्मी नहीं आ रहा था पर उसका मन कर रहा था कि वो फिर एक बार माल गिराये.
“अब हम पहुँचने ही वाले हैं पापा…”. मैंने अपने पापा को आगाह किया!!!
पापा ने धीरे से अपना सिर हिला कर हामी भरी और लण्ड घिसता रहा… पर अब इससे बात नहीं बनने वाली थी… उसने तुरंत बेटी कि स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपना लण्ड पकड़ लिया और मूठ मारने लगा ! मैं अपने पापा का साथ देने के लिये उसके कमर को सहलाने लगी और अपनी जांघे पापा के पैरों में सटा दिया.
पापा अपनी बेटी के बदन, उसकी जांघ, उसकी चूचियाँ, सबका स्पर्श करते हुए, मूठ मारने लगा. उसकी मेहनत जल्द ही रंग लाई… उसके लण्ड का पानी छूट पड़ा. वीर्य कि पहली तीन चार धार तो इतनी तेज़ थी कि स्कर्ट के अंदर होती हुई ब्रा तक पहुंच गई.
फिर पेट और स्कर्ट पर गिरने लगी और फिर पापा ने झड़ता हुआ लौड़ा तुरंत अपने पैंट में घुसा लिया और बाकि का माल अपने पतलून के अंदर गिराने लगा. उसकी बेटी ने अगर उसकी कमर ना पकड़ी हुई होती तो बेचारा उत्तेजना के मारे गिर ही गया होता ! फिर भी वो थोड़ा सा लड़खड़ा गया तो पास खड़े एक आदमी ने उसे टोका.
“ओ भाई… थोड़ा संतुलन बना के रहो… तब से देख रहा हूं !”
“भाईसाहब… सॉरी !”. पापा कि आवाज गले में अटक गई.
मुझे हँसी आ गई अपने पापा कि हालत देख कर. उनका स्टॉप आ गया था… दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किये, पापा ने अपना शर्ट बाहर कर लिया ताकि उसके पैंट में बना लण्ड का तंबू और वीर्य का गीलापन का पता ना चले और बस से उतर गयें.
मौसम हमारे पक्ष में था, अभी भी तेज़ बारिश हो रही थी, सो उसके और उसकी बेटी के कपड़ों पे लगा वीर्य ऐसे ही धुल गया. हम दोनों बाप बेटी अब बस से उतर कर घर को चल दिए. पापा के दोनों हाथ हमारे सामान से भरे हुए थे. घर के पास पहुंचे तो घर के गेट पर ताला लगा हुआ था. पापा ने मुझे कहा-
“प्रतीक्षा बेटा! चाबी मेरी पैंट को जेब में है. मेरे हाथ भरे हुए हैं. तुम मेरी जेब से चाबी निकाल लो.”
मैंने पापा की कोई शरारत नहीं समझी और पापा के पैंट की जेब में हाथ डाल दिया। चाबी जेब मैं नहीं थी. मैंने कहा तो पापा ने मुस्कुराते हुए कहा-
“अच्छी तरह से देखो। चाबी वहीँ होगी।”
मैंने हाथ और अंदर तक घुसाया तो मेरा हाथ पापा के तने हुए लौड़े पर लग गया. मैं समझ गयी कि पापा नई शरारत कर रहे हैं. तो मैंने अभी अनजान बनने का नाटक करते हुए पापा के लण्ड पर उँगलियाँ घुमाते हुए कहा.
“पापा जेब में तो कुछ नहीं है.”
पापा ने मुस्कुराते हुए कहा- “बेटी! और कहाँ होगी चाबी? तुम्हारे ताले की चाबी तो यही होनी चाहिए.”
मैं अब समझ गयी कि पापा मेरे किस ताले की चाबी की बात कर रहे हैं. पापा शैतानी कर रहे थे. मैं उसी तरह अनजान होने का नाटक करते हुए बोली- “पापा! मेरे ताले की नहीं। बल्कि घर के ताले की चाबी चाहिए।”
पापा हँसते हुए फिर बोले “बेटी! घर भी तुम्हारा है और ताला भी तुम्हारा ही है. जो चाबी तुम्हारा ताला खोलेगी वो तो यही होनी चाहिए।”
मैं भी गर्म हो ही रही थी, बस में हुए घटना के बाद तो मुझे लग रहा था कि मेरी चुदाई की इच्छा जल्दी ही पूरी होने वाली थी. मैंने एक बार फिर से पापा के लण्ड पर और उनके सुपाडे पर उँगलियाँ चलाई और अपने नाखूनों से पापा के सुपाड़े पर रगड़ा और हाथ बाहर निकाल कर कहा-
“पापा यहाँ तो नहीं है चाबी। आप शायद कहीं भूल रहे हो.”
पापा ने फिर बात सँभालते हुए बोला “बेटा! तो फिर दूसरी जेब में चेक करो. शायद उस जेब में होगी।”
मैं अब क्या करती, मझा तो मुझे भी आ ही रहा था तो मैंने अपना हाथ पापा के दुसरे जेब में डाला। चाबी वहां थी. पर अब मैं शरारत करने के मूड में आ गयी थी तो चाबी के ऊपर से हाथ आगे ले जा कर फिर से उनके लौड़े पर फेरते हुए बोली-
“पापा! चाबी तो यहाँ भी नहीं मिल रही.”
पापा मेरी शरारत समझते हुए बोले- “प्रतीक्षा अब मेरी तो दो ही जेबें है. अच्छी तरह से देखो चाबी जरूर मिलेगी।”
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अब मैं कितनी देर तक नाटक कर सकती थी तो मैंने एक बार अच्छी तरह से जेब के अंदर से ही पापा के लण्ड पर हाथ फेरा और अच्छी तरह से उनके लौड़े तो टटोल कर फिर चाबी बाहर निकाल ली. पापा तो इस सब से बहुत मस्त तो गए थे. उनका लौड़ा तो बांस की तरह सख्त हो कर तन गया था. और झटके मार रहा था.
फिर हम घर के अंदर आ गए और पापा ने सामान टेबल पर रख दिया। मम्मी अभी घर में नहीं थी. शायद कहीं गयी थी तो पापा खली घर देख कर फिर शरारत के मूड में आ गए और मुझे बोले कि प्रतीक्षा आज कल चोरों का डर रहता है. तुम गेट को अंदर से ताला लगा दो. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं समझ रही थी की पापा ताला लगवाने को कह रहे हैं तो इसका कोई तो मतलब होगा। पर मैं समझ नहीं पायी, पर ताला ले कर लगाने लगी. गेट लॉक करने के वक्त मुझे देर लग रही थी. इतने में पापा ने पीछे से मेरी कमर को टच करते हुए मेरी मदद की.
मेरी हिप में उन्होंने अपने लंड का पूरा प्रेशर डाला हुआ था. मेरी मदद करने के बहाने से वे अपने लंड के उभार को मेरी गांड पर रगड़ने लगे थे. कहीं न कहीं मुझे भी ये नाटक अच्छा लग रहा था. हम दोनों लॉक करने में इतने व्यस्त हो गए कि शरीर के साथ क्या हो रहा था, भूल ही गए थे.
पापा- बेटा लॉक थोड़ा टाइट हो गया है, रुको.
वे अपने उभार को पीछे मेरी दरार में रगड़ते हुए हिल रहे थे.
मैं- हां पापा, आप आराम से करो.
मैं हिप पर थोड़ा दबाव बनाकर खड़ी थी! पापा का लौड़ा पहले से ही तना हुआ था. और वो उसे मेरी गांड की दरार में घुसा रहे थे. मेरी ड्रेस हिप के बीच में चली गई थी. पापा ने अपने लौड़े के जोर से मेरी स्कर्ट को मेरे चूतड़ों में घुसा दिया था. हम कुछ देर इसी तरह नाटक करके मजे करते रहे आखिरकार लॉक हो गया और वे पीछे हट गए. मैं पीछे से पापा को छेडते हुए बोली-
“पापा! किचन में सामान रख कर नहा लेना। आपके कपडे भीग गए हैं.”
यह कहते हुए मैं शरारत से मुस्कुरा रही थी. पापा मेरी मुस्कराहट से समझ गए कि मैं किस कपडे के भीगने की बात कर रही हूँ. पापा मेरे पास आये और मेरी चूतड़ों पर एक प्यार से थप्पड़ मारते हुए बोले- “प्रतीक्षा! तुम बहुत बिगड़ गयी हो. कपडे भी तो तुम्हारे ही कारण भीग गए हैं.”
यह कह कर वे मुस्कुराते हुए चले गए. मैं भी तौलिया ले कर अपने कमरे में नहाने चली गयी. पापा को उत्तेजित करने और पटाने का मेरा यह अभियान ठीक चल रहा था. मम्मी अभी भी नहीं आयी थी. मुझे विश्वास था की यदि मैं इसी तरह से कोशिश करती रही तो जल्दी ही पापा से चुदवाने में सफल हो जाउंगी और फिर हम बाप बेटी के मजे ही मजे हैं.
इसी तरह हम बाप बेटी शरारत करते मजे करते रहे. थोड़ी देर में मम्मी भी आ गयी. मम्मी के आने से हम दोनों बाप बेटी सावधान हो गए। पापा के सामने पड़ने पर वे और मैं दोनों एकदम नॉर्मल रहे। हालांकि मैंने महसूस किया कि पापा चोरी से कई बार मुझे देख रहे थे, साथ ही मुझसे किसी ना किसी बहाने ज्यादा बात भी कर रहे थे।
खैर… फिर रात हुई, सबने खाना-पीना खाया और फिर रोज की तरह हम सब कमरे में आ गए। मैंने कपड़े पहने और नाइट बल्ब जला कर बिस्तर पर आ गई. यह सिलसिला दो दिन तक चला. इस बीच पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।
यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे। उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए। उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।
अब मैं भी पापा के पास किसी ना किसी बहाने से जाने लगी। अगले दिन शाम को मम्मी को थोड़ा बुखार आ गया था. तो पापा ने मम्मी को दवाई दी और एक नींद की गोली भी दे दी ताकि उनको आराम मिल सके. रात में हम सब अपने कमरे में चले गये.
मैंने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई। मैं अँधेरे में ही बिस्तर पर लेटी रही। मेरी आँखों में नींद नहीं आ रही थी. कितने दिनों से चुदाई नहीं हुई थी तो चूत में खूब खुजली जो हो रही थी. काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी।
आंख बंद कर सोने की कोशिश की तो पिछले 3-4 दिनों में मेरे साथ जो भी हुआ था, ये सब सोच कर मुझे थोड़ी उत्तेजना भी होने लगी। फिर मैं मोबाइल पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी। मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने अपनी पैंटी उतार दी।
अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टी-शर्ट में थी। जब से मैंने पापा को पटाने के बारे में सोचा था तब से मैं डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज्यादा देखने लगी थी। तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 11.45 हो गए। मूवी देखते हुए मैं अपनी नंगी चूत भी सहलाती जा रही थी।
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अभी मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता था कि मुझे कुछ आवाज आयी। मैंने टाइम देखा तो 12.15 बज रहे थे। तो मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और आवाज सुनने की कोशिश करने लगी। जैसे ही मेरी निगाह दरवाजे के नीचे से गई तो परछाई से समझ गई कि कोई खड़ा है।
मैंने तुरंत हाथ से अपनी आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं समझ गई थी कि मम्मी के सो जाने के बाद मेरे पापा धीरे से मुझे सोती हुई देखने आए हैं। पापा ने मम्मी को बुखार की दवाई के साथ साथ नींद की भी तो दवा दी थी. तो शायद पापा हिम्मत करके मेरे कमरे में आ रहे थे.
अभी मेरी ये सोच ही रही थी कि कमरे का दरवाजा धीरे से बहुत थोड़ा सा खुला। पापा को लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्ब जल रहा होगा। मगर अंदर एकदम अंधेरा था। कुछ देर रुकने के बाद पापा ने दो बार धीरे से मेरा नाम लेकर बुलाया- प्रतीक्षा। ….. प्रतीक्षा !
पापा शायद कन्फर्म करना चाहते हैं कि मैं जागी हूं या सो रही हूं। जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उनको भरोसा हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ। इसके बाद उन्होंने दरवाजे को थोड़ा और खोला और धीरे से हाथ अंदर डाल कर स्विच की तरफ ले जाने लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं हाथ से आंखों को ढके चोरी से पापा की हरकत देख रही थी। जैसे ही पापा का हाथ स्विच की तरफ बढ़ा मैं समझ गई कि वे नाइट बल्ब जला कर मुझे देखना चाह रहे हैं। यह सोचकर ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। सच कहूं तो मुझे पसीना आने लगा था… पर मैं चुपचाप उसी तरह लेटी रही।
पापा ने हाथ बढ़ाकर नाइट बल्ब जला दिया। आज पापा खुद कुछ करने जा रहे थे. वरना अभी तक तो मैं ही पापा को उत्तेजित कर रही थी. उन्होंने बनियान और अंडरवियर पहना हुआ था। 1 मिनट तक वे दरवाज़े से ही देखते रहे। वहीं मेरी तरफ से कोई हरकत ना होने पर उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थी और वे दरवाज़े से कमरे के अंदर मेरे बिस्तर के पास आ गए।
अब मैं अपने पापा के सामने लेटी थी। मेरी छोटी सी स्कर्ट मेरी जांघों को पूरा ढक नहीं पा रही थी और पापा बिस्तर के बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों को निहार रहे थे। तभी पापा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया।
मैंने अपनी पैंटी पहले ही उतार ली थी जिससे मेरी नंगी चूत उन के सामने थी। मेरी सांस जोर-जोर से चल रही थी। पापा को शायद उम्मीद नहीं थी कि मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी। इसलिए उनकी आंखें एकटक मेरी चूत पर टिक गईं। अभी मैं कुछ सोचती कि तभी अचानक पापा ने अपने दोनों हाथ से अपने अंडरवियर को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
चड्डी नीचे खिसकते ही उनका लंड झटके से बाहर आ गया। इसके बाद वे अपने लंड को धीरे-धीरे एक हाथ से हिलाने लगे। पापा को इस तरह अपनी चूत को देखते हुए मुठ मारते देख एक्साइटमेंट और अजीब सी फीलिंग से मेरा शरीर और चेहरा गर्म होने लगा था।
उधर पापा खिसक कर बेड के बगल आ गए और मेरी चूत के पास आकर खड़े हो गए। मैं बेड के किनारे की तरफ ही थी इसलिए अब पापा के लंड और मेरी जांघ के बीच मुश्किल से 6 इंच की दूरी थी। चुपचाप मैं उसी तरह लेटी रही।
मेरी तरफ से कोई हरकत ना होते देख पापा की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और वे इतने एक्साइट हो गए थे कि पापा झुक कर अपने एक हाथ से धीरे से मेरी चूत के ऊपर मेरी झांटों को सहलाने लगे। पापा ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, वैसे ही मेरी बदन में करंट सा दौड़ गया।
मेरा उत्तेजना के मारे शरीर हल्का सा हिल गया. यह देख पापा रुक गये और जल्दी से उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपर कर लिया। वे डर गये थे कि कहीं मेरी नींद न खुल जाए। मगर करीब आधा मिनट तक रुककर पापा ने रुक कर चेक किया कि मैं जग तो नहीं गयी।
मैं भी सांस रोके उसी तरह पड़ी रही। मुझे लगा ऐसा ना हो कि पापा घबरा कर लौट जाएं। खैर जब पापा ने सुनिश्चित कर लिया कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने फिर से अपने अंडरवियर को थोड़ा नीचे खिसका कर लंड को बाहर निकाल लिया।
इस बार शायद पापा कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे तो उन्होंने मुझे हाथ से छुआ तो नहीं लेकिन वे मेरी चूत को देखते हुए मुठ मारने लगे। अभी मुठ मारते हुए करीब 2-3 मिनट हुए थे कि पापा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली और अचानक उनके लंड से धार के साथ वीर्य निकल गया।
जैसे ही वीर्य निकला तो पापा ने तेजी से अपने लंड को दोनों हाथ से ढकने लगे। शायद वे नहीं चाह रहे थे कि उनका वीर्य मेरे ऊपर गिरे या कमरे में इधर-उधर गिरे। लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी और तेजी से झड़ जाएंगे।
पापा के लंड का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चूत, जाँघ और चादर पर फैल गया। पहले पापा ने अपने लंड को लुंगी से पौंछा, फिर मेरी जांघ और चूत पर फैले लंड के पानी को धीरे से पौंछने की कोशिश करने लगे। मगर मेरी नींद खुलने के डर से बस हल्का सा ही पौंछ कर वो तेजी से कमरे से बाहर निकले और फिर धीरे से दरवाजे को बंद कर चले गए।
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अभी भी मेरी झांगों और चूत पर पापा के वीर्य का ढेर पड़ा था. कमरे से बाहर निकलते वक्त पापा ने घबराहट और जल्दबाजी में नाइट बल्ब बंद नहीं किया। मैं थोड़ी देर उसी तरह लेटी रही। जब पापा के सीढ़ी से नीचे उतरने की आवाज सुन ली, उसके बाद मैं धीरे से उठ कर बैठी। नीचे देखा तो फर्श पर भी वीर्य फैला हुआ था। मैंने बाथरूम में जाकर पहले अपनी जांघ और चूत पर फैले वीर्य को उंगली पर लेकर सूंघा. मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.
फिर मैंने अपनी वो ऊँगली अपने मुंह में डाल ली और पहली बार अपने प्यारे बाप का वीर्य चखा। पापा का वीर्य बहुत ही स्वादिष्ट था. मैंने पहली बार अपने पापा का माल का स्वाद लिया था. फिर तो मैंने अपने सारे बदन पर से वीर्य चाट चाट कर साफ किया। फिर कमरे में आकर बेड की चादर उठाई और उसी चादर से फर्श को भी साफ कर रख दिया और फिर दूसरी चादर बिछाई और फिर कपड़े पहन कर सो गई। आगे की कहानी अगले भाग में…
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