Horny Didi Ka Affair Sex
नमस्ते दोस्तों, मैं प्रथम अग्रवाल आप सभी का फिर से स्वागत करता हूँ. आप सभी ने मेरी कहानी का पिछला भाग मेरी दीदी एक मोची की रंडी बन गई 1 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था की दीदी शादी के बाद अपने मायके यानि हमारे घर आई थी, और एक बार मार्केट में दीदी की सैंडल टूट गई और हम ए मोची के पास गए. और उस बूढ़े मोची ने मेरी दीदी पर ऐसा जादू किया दीदी उसकी रंडी बन गई. और उससे मिलने जाती थी चुदने के लिए. अब आगे- Horny Didi Ka Affair Sex
परवेज दीदी को दूर से देखकर बहुत खुश हो रहा था। और अपनी पैंट के ऊपर से अपना लंड मसल रहा था। और दीदी को देख रहा था। दीदी उसके पास जाते हुए परवेज को लंड मसलते हुए देख लिया और दीदी ब्लश करने लगी।
परवेज: अरे बेगम आज तो तुम कहर ढा रही हो।
दीदी: अच्छा जी।
परवेज: तुम्हें देखकर मेरा अब मूवी देखने का मन नहीं कर रहा है।
दीदी: तो क्या मन कर रहा है परवेज जी?
दीदी ये बात एकदम सेक्सी अदा के साथ बोली।
परवेज: तुम्हें चोदने का मन कर रहा है मेरी धृति जान।
दीदी खिलखिलाकर हँसने लगी। और परवेज की छाती पर हाथ से हल्का सा मारकर बोली—
दीदी: आप बड़े नॉटी हो रहे हो।
परवेज: क्या करूँ। तुम हो ही ऐसी।
दीदी: चलो। जाओगे नहीं मूवी देखने?
परवेज: चलो।
उसके बाद परवेज ने एक ऑटो को रोका। जब ऑटो रुका तो रिक्शेवाला दीदी को ही देखने लगा। और सोचने लगा—साले बुड्ढे को ऐसा माल कहाँ से मिल गया। क्या ही माल है रे… काश मिल जाए ये एक बार।
परवेज: भाई इनॉक्स चलोगे?
रिक्शेवाला: हाँ बैठो।
उसके बाद परवेज और दीदी रिक्शे में बैठ गए। उसके बाद अगर परवेज ने दीदी के साथ कुछ किया होगा तो वो मैं नहीं देख पाया। क्योंकि मैं बाइक से उनका पीछा कर रहा था। उसके बाद दीदी और परवेज सिनेमा हॉल के सामने उतरे और अंदर जाने लगे। और वो चले गए।
मैं जल्दी से बाइक पार्क करके आया और जल्दी से मूवी की टिकट ली। लेकिन मुझे नहीं पता था कि उन्होंने किस मूवी की टिकट ली है। फिर मैंने टिकट काउंटर वाले से पूछा तो उसने बताया कि उन्होंने इस मूवी की टिकट ली है। फिर मैं भी जल्दी लेकर गया।
जब मैं पहुँचा तो मूवी स्टार्ट हो गई थी। जिसके कारण सिनेमा हॉल में अंधेरा था। मैं जल्दी से अंदर गया और दीदी को ढूँढने लगा। दीदी और परवेज सबसे लास्ट वाली रॉ के तीसरे वाले रॉ में बैठे थे। मैं भी उनके पीछे जाकर बैठ गया। उस समय हॉल में दस लोग और होंगे।
फिर दीदी और परवेज मूवी देखने लगे। और मैं उनको देख रहा था। परवेज दीदी के कंधे पर हाथ रख रखा था। और दीदी उसको कुछ नहीं बोल रही थी। इसका मतलब दीदी परवेज के साथ पूरी खुल चुकी है। परवेज दीदी के कंधे को अपने हाथ से मसलने लगा। दीदी कुछ नहीं बोल रही थी। बस मूवी देख रही थी।
उसके बाद परवेज दीदी की पीठ पर हाथ ले गया और दीदी की पीठ को अपने हाथ से मसलने लगा। दीदी की एकदम मुलायम पीठ पर परवेज अपना हाथ फेरने लगा। परवेज ने फिर वापस से दीदी के कंधे पर हाथ रख लिया और मूवी देखने लगा। उसके कुछ मिनट बाद परवेज धीरे-धीरे हाथ दीदी के बूब्स के पास ले जाने लगा। और ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स को पकड़ लिया। दीदी इस पर परवेज को देखने लगी।
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दीदी: अरे परवेज जी क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।
परवेज: कोई नहीं देखेगा।
फिर परवेज दीदी के बूब्स को एक हाथ से दबाने लगा। दीदी उसको कुछ नहीं बोल रही थी। क्योंकि दीदी को भी मजा आने लगा था। दीदी ने अपनी आँखें बंद कर दीं। और परवेज दीदी के बूब्स को दबाता रहा। अब दीदी परवेज को देखने लगी और परवेज भी दीदी को देखने लगा। फिर परवेज दीदी के बूब्स को छोड़ दिया। और दीदी के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ लिया।
परवेज: तुम्हारे होंठ कितने रसीले हैं बेगम।
दीदी कुछ नहीं बोली।
परवेज: मन तो कर रहा है कि इनको चूस जाऊँ।
दीदी इस पर मुस्कुरा दी।
फिर परवेज ने दीदी के लिप्स के करीब अपने लिप्स को कर दिया और एक किस कर दिया। और दूर हट गया। दीदी जैसे सरप्राइज सी हो गई। क्योंकि पहली बार कोई दूसरा आदमी दीदी को किस कर रहा था। परवेज ने वापस अपने होंठ दीदी के लिप्स पर रख दिए और दीदी को किस करता रहा।
पहले तो दीदी उसका साथ नहीं दे रही थी। लेकिन परवेज एक हाथ से दीदी के बूब्स को अपने हाथ में लेकर तेज दबा दिया। जिससे दीदी का मुँह खुल गया। और परवेज ने दीदी की जीभ को अपने होंठों से चूसने लगा। ऐसे करते-करते पाँच मिनट हो गए थे। दीदी अब बहुत गरम हो गई थी।
दीदी का अब कंट्रोल नहीं हो रहा था। क्योंकि परवेज दीदी के बूब्स भी दबा रहा था। साथ में दीदी के होंठ भी चूस रहा था। जिससे दीदी इतनी गरम हो गई कि अब दीदी की किस में परवेज का साथ देने लगी। और अपनी जीभ को जितना हो सके उतना बाहर निकाल दी। जिससे परवेज खुश हो गया।
और सोचने लगा अब दीदी भी मन लगा रही है। ऐसे ही दीदी और परवेज का किस दस मिनट चला। उसके बाद परवेज दीदी का पल्लू हटाकर दीदी के क्लीवेज पर किस करने लगा। और दोनों हाथों से दीदी के बूब्स दबाने लगा। दीदी अपनी आँखें बंद करके इसका मजा लेने लगी। परवेज इतना पागल हो गया था कि उसने दीदी के बूब्स को तेज दबा दिया। जिससे दीदी की सिसकी निकल गई।
दीदी: आआआआह्ह्ह्ह… परवेज जी थोड़ा धीरे करिए।
परवेज: अपना ब्लाउज खोलो ना। तुम्हारे बूब्स चूसने का मन कर रहा है।
दीदी: नहीं परवेज जी। कोई देख लेगा।
परवेज: अरे कोई नहीं देखेगा। देखो बहुत कम लोग हैं। खोलो ना।
दीदी: आप ना बहुत जिद्दी हैं। अपने मन की करवा लेते हैं।
परवेज मुस्कुराने लगा।
दीदी: अच्छा ठीक है। लेकिन जल्दी करना।
परवेज: ठीक है मेरी डार्लिंग।
दीदी अपना हाथ अपने पीछे ले जा रही थी। लेकिन दीदी को दिक्कत हो रही थी।
दीदी: आप ही खोल लीजिए। मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा।
परवेज को तो जैसे चाँदी ही चाँदी हो गई थी। वो खुद दीदी का ब्लाउज खोलने की सोचकर मुस्कुराने लगा। जिसे देखकर दीदी भी नॉटी स्माइल देने लगी। फिर परवेज अपना हाथ दीदी के पीछे ले गया और उस डोरी को खींच दिया। और दीदी का ब्लाउज दीदी के शरीर से अलग हो गया और नीचे गिर गया। परवेज पागलों की तरह दीदी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: अरे परवेज जी आराम से कीजिए। मैं कहीं नहीं भागी जा रही।
दीदी ने ये एकदम सेक्सी अदा के साथ बोला। परवेज ने दीदी के लिप्स पर एक किस दिया और वापस से बूब्स दबाने लगा और चूसने लगा। अब परवेज कंट्रोल नहीं कर पाया। और उसने दीदी के बूब्स को ब्रा के नीचे से निकाल लिया। जो कि बहुत बड़े थे। और दीदी के बूब्स के निप्पल्स एकदम गुलाबी-गुलाबी थे।
परवेज: बेगम तुम्हारे बूब्स तो इतने मुलायम हैं। मन तो कर रहा है इनको दिन-रात मुँह में डालकर रहूँ।
परवेज दीदी के बूब्स को चूसने लगा। और दूसरे हाथ से दीदी के ब्रा के हुक खोलने लगा। और खोलकर अलग कर दिया। अब दीदी ऊपर से पूरी नंगी थीं। दीदी के बूब्स इतने बड़े थे कि परवेज एक हाथ से बूब्स दबाता, दूसरे से चूसता और दीदी की सिसकियाँ निकलती रहीं।
दीदी: आाह… परवेज जी… आराम से… आाहह्ह्ह… परवेज जी… और चूसो… परवेज जी…
ऐसे करते समय दीदी परवेज के सर पर हाथ फेरने लगीं और अपने बूब्स पर दबाने लगीं। परवेज तो पागलों की तरह चूस रहा था। साथ में अब निप्पल पर काटने लगा। दीदी की एक तेज आह निकल गई।
दीदी: आआआआह्ह्ह्ह… काटिए मत परवेज… मम्मम्म जीईईईई… दर्द हो रहा है।
परवेज: तुम्हारे बूब्स कितने रसीले हैं मेरी जान।
दीदी: तो चूस लो ना… मेरे शौहर जी।
परवेज: मेरी जान, मैं तो पागल हो गया हूँ तुम्हारे बूब्स देखकर।
और चूसता रहा। फिर परवेज थोड़ा सीधा हुआ और दीदी का हाथ पकड़ लिया। दीदी का हाथ अपनी पैंट के ऊपर से लंड पर रख दिया। जिसे महसूस करके दीदी डर सी गईं और हाथ हटा दिया। फिर परवेज ने वापस से दीदी के हाथ को पकड़ा और लंड पर रख दिया।
परवेज: देखो मेरी जान, तुमने क्या किया मेरे लंड को। अब तो इसको तुम्हें ही शांत करना होगा।
दीदी: ना बाबा ना… ये देखो, ये तो पैंट में ही झटके दे रहा है।
परवेज: तुम्हारे कारण ही हुआ है। देखो तुम्हारे मुँह में देने के लिए कैसे झटके दे रहा है।
दीदी एकदम रंडी की तरह हँसने लगीं।
परवेज: लो ना मुँह में।
दीदी: अब भी ना।
फिर दीदी खड़ी हुईं और इधर-उधर देखा। मैं जल्दी से नीचे हो गया कि दीदी मुझे न देख सकें। फिर दीदी परवेज के पैरों के पास घुटनों के बल बैठ गईं। परवेज हँसने लगा। दीदी पहले पैंट के ऊपर से ही लंड को मसल रही थीं। फिर परवेज बोला—
परवेज: अब जल्दी करो ना।
फिर दीदी ने परवेज की पैंट का बटन खोला और पैंट नीचे की। उसके बाद दीदी ने परवेज के अंडरवियर को नीचे किया। वैसे ही परवेज का लंड दीदी के मुँह पर जाकर लगा। दीदी लंड देखकर डर गईं।
परवेज: देखो कैसे झटके दे रहा है।
दीदी: बाप रे… कितना बड़ा है।
दीदी ने उसके लंड को एक उंगली से टच किया। परवेज का लंड झटके देने लगा।
परवेज: देखो।
दीदी ने फिर परवेज के लंड को अपने हाथ में लिया। लेकिन लंड हाथ में भी नहीं आ रहा था। दीदी ने परवेज के लंड को अपने हाथ से नापने लगीं।
दीदी: बाप रे… कैसे लूँगी मैं ऐसे? कितना बड़ा है रे।
फिर दीदी परवेज के लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगीं और धीरे-धीरे हिलाती रहीं। दीदी परवेज के लंड को देखकर पूरी गरम हो गई थीं। अब दीदी लंड के पास अपना मुँह लेकर गईं और परवेज के टोपे पर अपनी जीभ फेर दी। परवेज जैसे पागल हो गया। फिर दीदी परवेज के लंड पर जीभ ही फेर रही थीं। लेकिन परवेज की हालत खराब हो रही थी।
परवेज: बेगम मुँह में लो जल्दी। अब बरदाश्त नहीं होगा।
दीदी ने फिर परवेज के टोपे को मुँह में लिया और टोपे को चूसने लगीं। दीदी पहले टोपे को ही चूस रही थीं और मुँह में लेकर अपनी जीभ टोपे पर घुमा रही थीं। जिससे परवेज की हालत खराब हो रही थी। परवेज दीदी को देखने लगा। दीदी भी परवेज की आँखों में देखने लगीं और लंड को मुँह में लेने लगीं।
परवेज: बेगम पूरा लो ना।
दीदी ने फिर और मुँह में घुसने की कोशिश की। लेकिन जा नहीं रहा था। लेकिन जब दीदी परवेज की आँखों में देखकर चूस रही थीं तो परवेज ने दीदी के सर पर थोड़ा अपने लंड पर धक्का दिया। जिससे पूरा लंड दीदी के मुँह में जाने लगा। फिर परवेज ने अपना हाथ हटा लिया।
फिर दीदी परवेज के लंड को जबरदस्ती पूरा मुँह में लेने लगीं। और अब दीदी को भी लंड लेने में मजा आने लगा। दीदी परवेज के लंड को अपने पूरे मुँह में ले लेतीं और थोड़ी देर बाद बाहर निकालतीं। परवेज दीदी के सर को सहलाने लगता। ऐसे ही दस मिनट और चला।
परवेज से कंट्रोल नहीं हुआ।
परवेज: बेगम मेरा होने वाला है। कहाँ निकालूँ?
दीदी: मुँह में ही निकाल दो परवेज जी। मैं भी इसका टेस्ट लेना चाहती हूँ।
परवेज: बेगम जल्दी मुँह खोलो।
फिर परवेज ने दीदी के मुँह पर अपना माल गिरा दिया। कुछ दीदी के चेहरे पर गया और कुछ दीदी के मुँह में। फिर दीदी ने अपने फेस का सारा माल साफ करके अपने मुँह में डाला। जिसके बाद परवेज बोला—
परवेज: बेगम अपना मुँह खोलो। तुम्हारी फोटो लेनी है।
फिर दीदी ने अपना मुँह खोला। परवेज ने दीदी की फोटो ली।
परवेज: बेगम पी जाओ।
और दीदी ने भी ऐसा ही किया। दीदी माल को पी गईं।
परवेज: कैसा लगा?
दीदी रंडी की तरह मुस्कुरा दीं। उसके बाद दीदी अपनी सीट पर बैठीं। दीदी ने अपने ब्लाउज से अपना मुँह पोंछा। ब्रा और ब्लाउज पहन लिया और अपने कपड़े ठीक किए। परवेज ने भी। उसके बाद मूवी खत्म हो गई और लाइट जल गई। मैंने दीदी का फेस देखा तो दीदी का लिपस्टिक हट गई थी और दीदी का मेकअप भी उतर गया था।
दीदी के फेस पर अभी भी कहीं-कहीं माल लगा हुआ था। दीदी और परवेज जाने लगे। मैं भी हिला-हिलाकर थक सा गया था। मैं भी हॉल से बाहर जाने लगा। उसके बाद दीदी घर की तरफ जाने लगीं और मैं जल्दी से घर पर पहुँच गया। मैं घर पहुँच चुका था। दीदी का वेट कर रहा था।
दीदी परवेज के साथ घर आ रही थीं। परवेज ने दीदी के फेस पर अपना स्पर्म निकाला था जिससे उसका फेस का मेकअप उतर गया था और साथ में कहीं-कहीं स्पर्म भी लगा हुआ था। घर पहुँचकर मैं जल्दी से अपने रूम में चला गया और दीदी का वेट करने लगा। दस मिनट के बाद दीदी आईं। दीदी ने बेल बजाया।
मैं: आ रहा हूँ।
फिर मैंने डोर खोला। दीदी की हालत बड़ी खराब थी। ऐसा लग रहा था कि दीदी के साथ परवेज ने ऑटो में भी कुछ किया है। क्योंकि दीदी के ब्लाउज पर कुछ लगा हुआ था। वो कुछ और नहीं, स्पर्म ही था। मतलब मेरे जाने के बाद परवेज ने दीदी के साथ कुछ और भी किया है। दीदी अंदर आईं। दीदी थोड़ा अजीब सा ही बिहेव कर रही थीं। जैसे वो मुझसे कुछ छिपा रही हों।
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मैं: दीदी ये आपने क्या हालत बना रखी है? और आपके कपड़े पर क्या लगा है?
दीदी: क्या बना रखी है? और कहाँ क्या लगा है?
(दीदी ने ये चौंकते हुए बोला)
मैं: दीदी आपके फेस और ब्लाउज पर कुछ लगा है।
दीदी: अरे हाँ… वो मैं मूवी देखते-देखते कोल्ड कॉफी पी रही थी। गलती से मेरी फ्रेंड की वजह से मेरे ऊपर गिर गया था।
मैं मन ही मन सोच रहा था—मुझे पता है दीदी, आपके कौन से फ्रेंड ने आपके ऊपर कौन सी कॉफी गिराई है।
दीदी: अच्छा मैं थोड़ा नहाकर आती हूँ। तूने खाना खाया?
मैं: हाँ दीदी।
दीदी: अच्छा जा फिर सो जा। मैं भी नहाकर सोने जा रही हूँ।
उसके बाद दीदी अपने रूम में चली गईं और मैं भी अपने रूम में चला गया। जाते ही मुझे भी नींद आ गई। क्योंकि आज मैंने थिएटर में चार बार हिला दिया था जिससे मैं सो गया। मैं सुबह सात बजे उठा। मैंने जल्दी से फोन चेक किया कि दीदी ने रात को क्या बात की है। लेकिन रात को दीदी और परवेज की कोई बात नहीं हुई। जिसके बाद मैं थोड़ी देर और सो गया। आठ बजे उठा। दीदी उठ चुकी थीं और दीदी नाश्ता रेडी कर रही थीं। दीदी मुझे देखकर बोलीं—
दीदी: अरे वाह! तू आज इतनी जल्दी कैसे उठ गया?
मैं: बस दीदी, आँख खुल गई।
दीदी: जा जल्दी नहाकर आ जा।
मैं: ओके दीदी।
उसके बाद मैं नहाकर आ गया और फिर दीदी ने नाश्ता लगा दिया। दीदी और मैं नाश्ता करने लगे। नाश्ते करते समय दीदी मुझसे बोलीं—
दीदी: सुन प्रथम।
मैं: हाँ बोलो, क्या हुआ?
दीदी: आज मार्केट जाना है सामान लेने।
मैं: ठीक है। कब जाना है?
दीदी: शाम को तो भीड़ रहती है। क्यों न दोपहर में चलें?
मैं: ठीक है दीदी।
उसके बाद मैं अपने रूम में जाकर फोन चलाने लगा और दीदी भी टीवी देखने लगीं। करीब साढ़े दस बजे परवेज का कॉल आया दीदी के फोन पर। दीदी ने कॉल पिक किया। सामने से परवेज बोला—
परवेज: बेगम क्या कर रही हो?
दीदी: कुछ नहीं परवेज जी। टीवी देख रही थी।
परवेज: अच्छा! बेगम कल तो तुमने मजा ही दिला दिया।
दीदी: (नॉटी आवाज में) आपने कल ठीक नहीं किया रिक्शे में।
परवेज: (हँसते हुए) मैंने क्या किया था बेगम जो तुम नाराज हो रही हो?
दीदी: अच्छा जी, आपने क्या किया था?
परवेज: वही तो पूछ रहा हूँ क्या किया था।
और हँसता रहा।
दीदी: जैसे आपको पता ही नहीं है कि आपने क्या किया था।
परवेज: (बेकसूर बनते हुए) मुझे तो नहीं पता मैंने क्या किया था।
दीदी: अच्छा जी… वो आप रिक्शे में ही मुझे अपना लंड चुसवाने लगे। पता है रिक्शेवाला कैसे देख रहा था।
परवेज: (हँसते हुए) क्या करूँ बेगम। तुमको देखते ही कंट्रोल नहीं हुआ था।
दीदी: अच्छा जी। आपने सिनेमा हॉल में भी इतना कुछ किया। आपका मन नहीं भरा था जो आपने रिक्शे में भी…
परवेज: क्या रिक्शे में भी?
दीदी: रिक्शेवाले के सामने ही शुरू हो गए।
परवेज: अरे बेगम, अरे वो मेरा दोस्त था। उसके सामने ही तो किया था। क्या हो गया?
दीदी: (रंडी जैसी आवाज में) मतलब आपका दोस्त था तो आप कुछ भी करेंगे?
परवेज: अपनी बेगम के साथ ही तो कर रहा था।
और हँसने लगा।
दीदी: अब हँसिए मत। पता है आपने मेरे मुँह और ब्लाउज पर ही वापस से अपना माल गिरा दिया था।
परवेज: अरे वो कंट्रोल नहीं हुआ था। एकदम से निकल गया था।
दीदी: आपके वजह से मैं तो कल फसते-फसते बची हूँ।
परवेज: कैसे?
दीदी: कल जब मैं घर पहुँची तो प्रथम ने मेरे कपड़े पर लगा हुआ आपका माल देख लिया।
परवेज: अच्छा?
और हँसने लगा।
परवेज: और क्या हुआ?
दीदी: वो पूछने लगा—दीदी ये क्या लगा है?
परवेज: अच्छा।
दीदी: मैंने बोल दिया था कि मेरे दोस्त की कोल्ड कॉफी गिर गई थी।
परवेज: (हँसते हुए) अच्छा… कोल्ड कॉफी गिरी थी।
दीदी: तो क्या बोलती उससे?
परवेज: बोल देती—तेरे नए जीजू का लंड चूसके आई हूँ।
दीदी: (हँसते हुए) आप भी ना। बड़ी जल्दी है आपको उसका जीजा बनने की।
(रंडी जैसी आवाज में)
परवेज: हाँ बेगम जी। कर लो ना निकाह।
दीदी: (मजाक करते हुए) जाइए। कौन करेगा आपसे निकाह। अपनी एज तो देखिए। दादा बनने की एज में निकल पड़े।
परवेज: अच्छा तो कर लो निकाह और बन जाओ उसकी दादी। फिर दोनों मिलकर खिलाएँगे।
दीदी: अच्छा जी मुझे दादी ही बना दिया।
परवेज: निकाह कर लो। अपने बच्चे की अम्मी भी बना दूँगा। वो भी सात बच्चों की।
दीदी: बाप रे… सात बच्चे!
परवेज: क्यों डर गईं? अभी भी बहुत जान है मेरे में।
दीदी: (सेक्सी आवाज में) ना बाबा ना। मुझे नहीं करनी आपके निकाह। आप तो मुझे मार ही डालोगे।
दीदी: वो तो कल मैंने आपकी ताकत देखी ही थी। आपने कैसे मुझे रिक्शे के अंदर ही उठाकर अपनी गोदी में बिठा दिया था।
परवेज: (हँसते हुए) बताओ तो कब का शादी का कार्ड छपवाऊँ?
दीदी: कार्ड क्यों छपवाओगे?
परवेज: निकाह नहीं करोगी मुझसे?
दीदी: अरे मैं अपने हसबैंड को कैसे धोखा दे सकती हूँ।
परवेज: अरे बेगम, कौन सा तुम्हारा हसबैंड तुम्हारे साथ रहता है। वो तो इतनी सेक्सी वाइफ को छोड़कर चला गया चेन्नई।
दीदी: फिर भी नहीं परवेज जी।
परवेज: बेगम मान जाओ। नहीं तो तुमको घर से भगाकर ले जाऊँगा।
दीदी: अच्छा जी मुझे भगा ले जाओगे?
परवेज: हाँ। और फिर निकाह करूँगा।
दीदी: मुझे पता है आप किस लिए निकाह करना चाहते हो।
परवेज: (हँसते हुए) अच्छा जी, किस लिए?
दीदी: (हँसते हुए) आप तो निकाह के बाद मुझे बेड से नीचे भी नहीं उतरने दोगे।
परवेज: अरे बेगम, बेड से नहीं… लंड से नहीं उतरने दूँगा।
(और हँसने लगा)
दीदी: अच्छा जी आप पूरे दिन मुझे उस पर ही बिठाकर रखोगे क्या?
(खिलखिलाकर हँसने लगीं)
परवेज: बेगम एक बार निकाह तो होने दो। एक दिन में ही तुम्हें अपने बच्चे की माँ बना दूँगा।
दीदी: अरे आपको इतनी जल्दी है मुझे माँ बनाने की?
परवेज: और क्या। तुम्हारे भाई को मामा भी तो बनाना है।
दीदी: उसको जब पता चलेगा कि बच्चा उसके जीजा का नहीं, किसी और जीजा का है तो क्या होगा?
परवेज: क्या होगा? कुछ नहीं होगा। तुम्हारे भाई को तो मैं पटा लूँगा।
दीदी: अच्छा जी।
परवेज: हाँ बेगम साहिबा। निकाह के बाद तो तुम्हें पूरे दिन-रात चोदता रहूँगा।
दीदी: अच्छा। खाना खाने भी नहीं जाने दोगे क्या?
परवेज: (हँसते हुए) खाना खाने की क्या जरूरत है। मेरा माल खाकर पेट भर लेना ना।
दीदी: छी… आप भी ना। कैसी गंदी बात करते हो।
परवेज हँसता रहा। ऐसे ही दीदी और परवेज की बात एक बजे तक चली। फिर दीदी ने कॉल कट कर दी। उसके बाद दीदी मार्केट जाने के लिए मुझे बोलीं और खुद रेडी होने चली गईं। करीब तीस मिनट के बाद दीदी एक ब्लू कलर की सेक्सी सी साड़ी पहनके आईं। साथ में बैकलेस ब्लाउज। दीदी को देखकर तो मैं जैसे पागल सा हो रहा था। मैं सोचने लगा—दीदी कैसे उस परवेज से पट गईं। काश दीदी मेरी रंडी होतीं। मैं दीदी को देखकर सोच ही रहा था कि दीदी बोलीं—
दीदी: अरे क्या देख रहा है घूर-घूर कर?
मैं: अरे दीदी आज तो आप बहुत सुंदर लग रही हो।
दीदी: अच्छा। आज से पहले तो कभी तूने नहीं बोला। आज क्या हो गया बेटे? पैसे की जरूरत होते ही मक्खन मारने लगा।
मैं: अरे नहीं दीदी। आप सच में आज बहुत सुंदर लग रही हो।
दीदी: अच्छा चल। चलें मार्केट।
मैं: चलो दीदी।
उसके बाद दीदी ने घर लॉक किया और हम मार्केट की तरफ निकल गए। जब हम मार्केट जा रहे थे तो हमारे एरिया के सारे बुड्ढे से लेकर जवान लड़के, सभी दीदी की गाँड को हिलते हुए देख रहे थे। और दीदी भी जानबूझकर आज कुछ ज्यादा ही अपनी गाँड हिला रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ लोग तो अपना लंड भी मसल रहे थे दीदी को देखकर। फिर हम मार्केट में पहुँच गए। आपको पता ही है गर्मी में दोपहर को बहुत कम लोग होते हैं। ऐसे ही आज भी बहुत कम लोग थे। हम कुछ सब्जी लेकर वहीं कोने वाली फ्रूट की दुकान गए। जैसे ही हम उधर पहुँचे—
रहीम: अरे भाभी जी, नमस्ते।
दीदी: नमस्ते रहीम जी।
रहीम ने मुझे नहीं देखा था। साला मेरी दीदी को ही घूरे जा रहा था। क्या करें, दीदी हैं ही इतनी सेक्सी कि किसी की नजर हटती ही नहीं। हँसते हुए रहीम बोला—
रहीम: क्या हुआ भाभी जी? परवेज भाई जान ने केला नहीं दिया कि जो आप हमारे पास आ गईं केला लेने?
दीदी हँसने लगीं। दीदी सोच रही थीं कि मैं कुछ समझ नहीं रहा। लेकिन उनका क्या पता मुझे सब पता है और किस केले की बात हो रही है।
रहीम: वैसे मेरे पास भी बहुत बड़ा केला है। लोगी क्या भाभी जी?
दीदी: (हँसते हुए) नहीं रहीम जी। हमें तो परवेज जी का ही पसंद है।
रहीम: तो क्या हुआ? कभी हमें भी मौका दीजिए।
ऐसे ही रहीम और दीदी बात कर रहे थे कि परवेज दूर से दीदी को देखा और बोला—
परवेज: अरे बेगम तुम यहाँ बिना बताए?
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दीदी जैसे डर ही गईं कि परवेज ने ये क्या बोल दिया। और मुझे देखने लगीं। लेकिन मैंने कुछ रिएक्ट नहीं किया। दीदी को लगा जैसे मैंने सुना ही नहीं। फिर परवेज हमारे पास आया और दीदी को देखकर बोला—
परवेज: बेगम बिना बताए आ गईं?
दीदी आँखें बड़ी करते हुए परवेज को देखने लगीं और आँखों से मेरी तरफ इशारा करने लगीं।
परवेज: क्या हुआ बेगम?
फिर मैं भी अब दीदी से मजे लेने के लिए बोला—
मैं: दीदी ये अंकल आपको बेगम क्यों बोल रहे हैं? और ये तो मोची वाले अंकल हैं ना?
दीदी थोड़े शॉक में। अब क्या बोलें, उसे क्या बोलूँ। फिर एकदम से रहीम बोला—
रहीम: भाभी जी ये आपका भाई है क्या?
दीदी: हाँ रहीम जी। ये मेरा भाई है।
मैं: दीदी बोलो तो क्यों बोल रहे हैं?
दीदी: अरे ये मुझे प्यार से बेगम बोलते हैं।
(दीदी के मुँह से एकदम से निकल गया)
मैं: प्यार से?
फिर दीदी को रियलाइज हुआ कि उन्होंने क्या बोल दिया। फिर दीदी घबराहट में बोलीं—
दीदी: ये मेरे फ्रेंड हैं प्रथम। इसलिए ये मुझे प्यार से बोलते हैं। निकनेम है प्रथम।
फिर परवेज बोला—
परवेज: हाँ साले साहब। प्यार से बोलता हूँ मैं तुम्हारी दीदी को बेगम।
और हँसने लगा।
मैं: दीदी देखो ये मुझे क्या बोल रहे हैं।
दीदी: (आँख दिखाते हुए) अरे परवेज जी क्या बोल रहे हो?
परवेज: अरे बेगम… निकनेम है।
दीदी फिर मुझसे बोलीं—
दीदी: देख प्रथम, तेरा निकनेम भी रख दिया। (और थोड़ी बनावटी हँसी हँसते हुए बोलीं।)
मैं: दीदी लेकिन इसका मतलब तो पत्नी होता है ना?
दीदी: हाँ बाबू। मुझे भी पता है। लेकिन इनको मेरा नाम याद नहीं रहता इसलिए ये मुझे बेगम बोलते हैं।
मैं: दीदी क्यों?
परवेज: साले साहब तुम्हारी बहन मेरी बेगम है। इसलिए बेगम बोल रहा हूँ। तुम्हारी बहन मेरे से निकाह करने वाली है।
मैं: दीदी क्या बोल रहे हैं ये? आपसे निकाह करने वाले हैं?
दीदी: अरे रहीम जी अब भी ना मजाक करते रहते हैं। मजाक कर रहे हैं। दोस्त हैं मेरे इसलिए मजाक करते रहते हैं।
मैं: अच्छा दीदी।
दीदी को लगा जैसे मुझे कुछ नहीं समझ रहा। फिर दीदी परवेज की तरफ देखकर घूरते हुए बोलीं—
दीदी: परवेज जी चुप रहिए। क्या बोल रहे हैं आप? मुझे फँसवाना चाहते हैं क्या?
परवेज: अच्छा ठीक है।
फिर थोड़ा माहौल ठीक हुआ। फिर रहीम बोला—
रहीम: अरे भाभी जी बोलिए क्या चाहिए?
दीदी: एक किलो सेब कर दीजिए।
रहीम: छाँट लो भाभी जी।
दीदी फिर सेब छाँटने लगीं। फिर एकदम से परवेज ने मेरे सामने ही दीदी की गाँड पर अपना हाथ रख दिया। उसको लगा मैं उसको नहीं देख रहा। दीदी जैसे डर सी गईं और मेरी तरफ देखने लगीं। मैं उस समय सेब छाँटने में दीदी की मदद कर रहा था। तो दीदी को लगा मैंने नहीं देखा। फिर दीदी परवेज की तरफ देखीं और आँखें बड़ी करते हुए धीरे से बोलीं—
दीदी: क्या कर रहे हो?
परवेज दाँत दिखाकर हँसने लगा। और परवेज ऐसे ही दीदी की गाँड को मसलता रहा। दीदी कुछ रिएक्ट नहीं कर रही थीं। क्योंकि अगर कुछ रिएक्ट करेंगी तो प्रथम को पता लग जाएगा। और मसलता रहा। और मैं परवेज को दीदी की गाँड मसलते हुए देखने लगा। फिर मैं तो चौंक ही गया परवेज की हरकत देखकर। साला बुड्ढा इतना हरामी है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
साला दीदी की साड़ी के अंदर हाथ डालने की कोशिश करने लगा। लेकिन हाथ नहीं जा रहा था क्योंकि कमर पर साड़ी टाइट होती है। तो उसका हाथ नहीं जा रहा था। लेकिन साला इतना हरामी है कि ट्राई करता रहा। और पूरी ताकत लगाकर दीदी की साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया। दीदी भी सरप्राइज हो गईं। दीदी ने इस चीज की उम्मीद नहीं की थी। साला परवेज दीदी की नंगी गाँड को मसलने लगा। दीदी परवेज को देखकर आँखें बड़ी करके बोलीं—
दीदी: परवेज जी क्या कर रहे हो? मेरा भाई देख लेगा।
परवेज: (धीरे से) नहीं देखेगा। तुम अपने काम करो।
और परवेज दीदी की नंगी गाँड को पागलों की तरह मसलने लगा और दबाने लगा। दीदी की हालत खराब होने लगी। फिर रहीम बोला—
रहीम: और क्या चाहिए भाभी जी?
परवेज बोला—
परवेज: भाई तरबूज कर दे।
और हँसने लगा। रहीम भी दीदी को देखकर हँसने लगा। एकदम से परवेज ने दीदी की गाँड के छेद में अपनी उंगली डाल दी। दीदी की आह निकल गई।
दीदी: आआआह्ह्ह्ह……
परवेज ने अपना हाथ निकाल लिया। मैं दीदी से बोला—
मैं: क्या हुआ दीदी?
दीदी: अरे कुछ नहीं। चींटी ने काट लिया।
मैंने सोचा पता है किसने काटा है दीदी। फिर दीदी वापस से सामने देखने लगीं और मैं भी। परवेज फिर से दीदी की साड़ी में वापस से हाथ डाला और गाँड को मसलने लगा। और इस बार वापस से दीदी की गाँड में उंगली डाल दी। दीदी दर्द को बरदाश्त करने लगीं।
परवेज दीदी की नाजुक सी छोटे से छेद में अपनी उंगली डाल रहा था। दीदी ने आज तक कभी भी अपनी गाँड नहीं मरवाई थी। दीदी को बहुत दर्द हो रहा था। दीदी के फेस से पता चल रहा था। जो कि रहीम को भी पता चल रहा था।
रहीम: केला नहीं लोगी भाभी जी?
दीदी: दे दीजिए। (थोड़े दर्द में)
रहीम: देख लीजिए भाभी जी। आपको कौन सा लेने हैं।
परवेज दीदी को देखकर आँखों से कुछ इशारा करने लगा।
रहीम: भाभी जी एक काम करिए। पीछे गली में मेरा घर है। उधर ताजे-ताजे केले रखे हैं। उधर से जाकर ले लो।
दीदी: क्यों रहीम जी?
परवेज: हाँ बेगम पीछे चलो। उधर से ले लो।
और दीदी को देखकर कुछ इशारा करने लगा। दीदी इशारे में उसे मना करने लगीं। फिर परवेज दीदी की गाँड से हाथ निकाला। और जो उंगली दीदी की गाँड में डाली थी उसको सूँघकर मुँह में डालकर चाटने लगा। दीदी एकदम शॉक हो गईं कि परवेज ने क्या किया।
फिर परवेज बोला—
परवेज: चलो बेगम।
परवेज जिद करने लगा तो दीदी बोलीं—
दीदी: चलिए।
और दीदी मुझसे बोलीं—
दीदी: प्रथम तू इधर मेरा वेट कर। मैं केला लेकर आती हूँ।
फिर परवेज बोला—
परवेज: साले साहब मैं तुम्हारी दीदी को केला देकर आता हूँ।
और हँसने लगा। दीदी की भी हँसी निकल गई। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दीदी कैसे परवेज के कंट्रोल में हो गई हैं। वो जो भी बोलता है दीदी कर लेती हैं। फिर परवेज और दीदी पीछे गली में चले गए। और दस मिनट हो गए अभी तक आए नहीं थे। फिर रहीम बोला—
रहीम: लगता है परवेज भाई जान तुम्हारी बहन को कोई बड़ा सा केला दे रहा है जो अभी तक नहीं आए।
और हँसने लगा। उसको लग रहा था कि जैसे मुझे नहीं पता। फिर वो मुझसे बोला—
रहीम: तुम इधर रुको। मैं अभी आता हूँ।
और वो भी पीछे गली में चल दिया। उसके गए दो मिनट हो गए और वो भी नहीं आया। फिर मैं भी उसके पीछे गया। और क्या देखा कि परवेज ने दीदी को अपनी गोद में बिठा रखा है। दीदी ऊपर से पूरी नंगी थीं। दीदी की साड़ी कमर तक थी। और परवेज दीदी के बूब्स एक हाथ से चूस रहा था और एक हाथ परवेज का दीदी की गाँड पर था। और एक उंगली दीदी की गाँड में डाल रहा था और अंदर-बाहर कर रहा था।
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दीदी: परवेज जी दर्द हो रहा है। धीरे-धीरे करिए… आाहहह आाहहह आाह्ह्ह्ह परवेज जी…… आाहहह.
परवेज: कहाँ दर्द हो रहा है?
दीदी: परवेज जी गाँड में हो रहा है।
फिर परवेज बोला—
परवेज: क्या करूँ मैं रंडी। तेरी गाँड ही इतनी मस्त है। बिना उंगली डाले रुका नहीं जा रहा।
दीदी और परवेज अंदर रूम में ये सब कर रहे थे। और रहीम बाहर गेट पर खड़ा था। और मैं खिड़की से देख रहा था।
रहीम: अरे भाई कब तक करेगा यार। मेरा भी मन कर रहा है।
परवेज: अरे कैसे बात कर रहा है साले। तेरी भाभी है।
रहीम: भाई कर नहीं सकता तो दिखा दे।
परवेज दीदी से बोला—
परवेज: बेगम उसको बुला लूँ क्या?
दीदी: कैसी बात कर रहे हो। मुझे क्या समझ रखा है?
परवेज: बेगम बाहर खड़ा है। देख लेगा बस।
दीदी: नहीं परवेज जी।
परवेज: तुमको मेरे पे विश्वास नहीं है क्या?
दीदी: है परवेज जी।
परवेज: तो बुला लो ना।
दीदी: ठीक है परवेज जी।
परवेज रहीम से बोला—
परवेज: भाई अंदर आ जा।
रहीम: अरे भाई जान क्या ही मजे ले रहे हो।
रहीम अंदर रूम में जाकर दीदी और परवेज के सामने बैठ गया। और अपनी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया। दीदी की पीठ थी रहीम के सामने। इसलिए दीदी ने नहीं देखा था। और मैं ये देखकर पागल सा हो गया। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दीदी कैसे रंडी जैसी हरकत करने लगी हैं। और परवेज ऐसे ही दीदी के बूब्स चूसता रहा और गाँड में उंगली करता रहा। और मैं बाहर दीदी को देखकर मुठ मार रहा था।
रहीम: भाभी जी आपकी गाँड कितनी बड़ी है।
दीदी: देखो परवेज जी। आपके दोस्त आपके सामने ही मुझसे मजे ले रहे हैं।
परवेज: अरे दोस्त है मेरा। करने दो।
दीदी परवेज से बोलीं—
दीदी: हाँ रहीम जी। बड़ी तो है लेकिन परवेज जी की है।
और हँसने लगीं। परवेज को किस करने लगीं। और बूब्स दबा रहा था और गाँड में उंगली कर रहा था। फिर परवेज ने दीदी से बोला—
परवेज: बेगम थोड़ा जरा घूमो तो। तुम्हारी गाँड का स्वाद लेना है।
फिर दीदी परवेज की गोदी से खड़ी होकर रहीम की तरफ। जैसे ही फेस किया दीदी की आँख फट गई। क्योंकि रहीम अपना 10 इंच का लंड हिला रहा था।
दीदी: परवेज जी देखिए क्या कर रहे हैं ये।
रहीम: क्या करूँ भाभी जी। आप हो ही ऐसी माल।
परवेज: करने दो बेचारे को। (और हँसने लगा)
फिर परवेज ने दीदी की गाँड को चाटने लगा।
परवेज: आाह बेगम। तुम्हारी गाँड की खुशबू तो मुझे पागल कर रही है।
दीदी बहुत गरम हो गई थीं। दीदी भी गाँड चटाई से पागल हो रही थीं।
दीदी: परवेज जी चाटिए… परवेज जी चाटिए… ओह मम्मी… अमम्म.
परवेज दीदी की गाँड के छेद पर अपनी जीभ से चाट रहा था। साथ में दीदी की गाँड के छेद में अपनी जीभ डालने की कोशिश करने लगा।
दीदी: आाह परवेज जी बहुत अच्छा लग रहा है। करते रहिए।
दीदी को इतना मजा आ रहा था कि दीदी फिर अपनी गाँड को खुद से परवेज के फेस पर रगड़ने लगीं। जिसे देखकर रहीम अपना लंड हिला रहा था। और दीदी उसको देख रही थीं। दीदी पहले से ही इतनी गरम थीं कि वो रहीम का लंड देखकर अपने होंठों पर जीभ फेरने लगीं। जिसे देखकर रहीम बोला—
रहीम: परवेज भाई लग रहा है भाभी को मेरा लंड चाहिए। दे दूँ क्या?
परवेज: क्या बोल रहा है बे।
रहीम: भाई भाभी को मेरा लंड मुँह में चाहिए।
परवेज: बेगम क्या बोल रहा है ये?
दीदी कुछ नहीं बोलीं और शर्माने लगीं।
रहीम: देख भाई भाभी भी शर्मा रही हैं।
परवेज: भाई अगर चाहिए तो दे दे। लेकिन उससे आगे कुछ मत करियो। ठीक है?
रहीम: ठीक है भाई।
रहीम ने अपनी पैंट अपने से अलग की और दीदी के पास गया। दीदी को देखकर बोला—
रहीम: बोल भाभी जी। जरा मुँह में तो लो।
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दीदी शर्माने लगीं। रहीम ने अपना लंड दीदी के होंठ से टच करने लगा। फिर दीदी ने खुद उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगीं। और उसके बाद दीदी उसका लंड मुँह में लेने लगीं। और पीछे परवेज खड़ा हुआ और अपना लंड पीछे से दीदी की गाँड की दरार में रगड़ने लगा। वो भी नंगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी इस समय मुझे एक सस्ती रंडी लग रही थीं जो एक साथ दो लोगों को खुश कर रही थीं। परवेज पीछे से दीदी की गाँड में लंड रगड़ रहा था और आगे से रहीम दीदी के मुँह में लंड दे रहा था। ऐसे ही पंद्रह मिनट चला। रहीम ने पहली बार इतनी सेक्सी लड़की के मुँह में दिया था। जिससे उसे कंट्रोल नहीं हुआ और दीदी के मुँह में झड़ गया।
और इतना माल गिरा कि दीदी का मुँह भर गया। और माल दीदी के मुँह से दीदी के बूब्स पर गिरने लगा। रहीम आह-आह करते-करते पीछे जाकर बैठ गया। दीदी ने मुँह का सारा माल पी गईं। दीदी इतनी गरम हो गई थीं कि दीदी को पता भी नहीं था कि दीदी किसके साथ क्या कर रही हैं। फिर परवेज ने दीदी को अपनी तरफ घुमाया।
परवेज: बेगम चूसो।
दीदी स्टार्ट हो गईं। दीदी परवेज का लंड चूस ही रही थीं कि दीदी भी झड़ गईं। और दीदी ने सारा पानी नीचे गिरा दिया। और कुछ दीदी की साड़ी पर गिर गया जिससे दीदी की साड़ी गीली हो गई। अब दीदी के अंदर जान नहीं थी।
दीदी: परवेज जी अब मेरे से नहीं हो पाएगा। आप अपने आप ही कर लो।
परवेज: ठीक है बेगम। तुम बैठ जाओ और बस मुँह में ले लो।
दीदी ने वैसा ही किया। बाकी का सारा काम जैसे परवेज खुद ही करने लगा। उसने दीदी के चेहरे को पकड़ा और दीदी के मुँह को चोदने लगा। दीदी तो जैसे सुन थीं। करीब दस मिनट ऐसा ही चला। उसके बाद दीदी वापस से गरम हो गईं और दीदी भी खुद अपना सर हिलाने लगीं। परवेज भी धक्के दे रहा था। ऐसे ही दस मिनट के बाद—
परवेज: आाह… बेगम… आाहहह… मेरा होने वाला है। जल्दी घूम जाओ। तुम्हारी गाँड पर निकालूँगा।
दीदी जल्दी से घूम गईं। और परवेज ने दीदी की गाँड पर माल गिरा दिया। और परवेज पीछे जाकर बैठ गया। दीदी भी जमीन पर बैठ गईं और पीछे हाथ ले जाकर अपने हाथ में माल लिया और चाट गईं। जिसे देखकर परवेज बोला—
परवेज: बेगम तुम तो प्रोफेशनल हो गई हो।
दीदी रंडी की तरह हँसने लगीं। बाहर मेरा भी लंड हिला-हिलाकर बुरा हाल हो गया था। फिर परवेज ने अपने कपड़े ठीक किए। दीदी और रहीम ने भी। फिर दीदी अपने कपड़े पहनने वाली थीं लेकिन दीदी की ब्रा नहीं मिल रही थी।
रहीम: अरे भाभी जी रहने दो। मुझे मिल जाएगी तो मैं आपको दे दूँगा।
दीदी: ठीक है रहीम जी।
फिर दीदी ने अपनी साड़ी कमर से नीचे की और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन लिया। दीदी की हालत देखने लायक थी। दीदी किसी रंडी की तरह लग रही थीं। जिसको लोग चोद देते हैं उसके बाद जो रंडी की हालत होती है ठीक वैसे ही दीदी की भी हालत थी। फिर तीनों बाहर जाने लगे। मैं जल्दी से दुकान के पास चला गया। वो तीनों हँस-हँसकर आ रहे थे। मैंने देखा दीदी के हाथ में तो केला था ही नहीं। दीदी मेरे पास आईं।
दीदी: चल प्रथम चलते हैं।
मैं दीदी से बोला—
मैं: दीदी आप तो केले लेने गई थीं ना?
इस बार परवेज और रहीम हँसने लगे। दीदी की भी हँसी निकल गई।
दीदी: प्रथम वो केले तो मैं खा गई थी उधर। बस वही बड़े केले थे। इसलिए मुझे अच्छे लग रहे थे तो खा गई।
इस बार रहीम बोला—
रहीम: तुम्हारी बहन ने आज बड़े अच्छे से केले खाए हैं।
फिर परवेज बोला—
परवेज: हाँ। साथ में अपने आम और तरबूज भी तो दिए। मजा आ गया खाकर।
दीदी उससे बोलीं—
दीदी: आप लोग भी ना। जो मर्जी बोलने लगते हो।
मैं: दीदी आपकी हालत तो देखो। क्या हो रही है?
दीदी: क्या हो रही है?
मैं: देखा कैसे आपके बाल बिखरे हुए हैं। और आपके ब्लाउज पर भी गीला है। और आपकी साड़ी भी आगे और पीछे से गीली हो रही है।
दीदी कुछ नहीं बोलीं और हँसने लगीं। जिस पर परवेज बोला—
परवेज: साले साहब बेगम ने आज बड़ी मेहनत की है। इसलिए ये हाल हुआ है।
जैसे इस फोटो में हालत है ठीक वैसे ही दीदी की हालत थी। इधर-उधर स्पर्म लगा हुआ था। फेस का स्पर्म सूख गया था। साड़ी आगे-पीछे से गीली थी। दीदी एक रंडी लग रही थीं। दीदी खिलखिलाकर हँसने लगीं। दीदी को अब लंड का नशा लग चुका था। अब दीदी को कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था कि कौन क्या कहेगा। दीदी को अब मेरी भी टेंशन नहीं थी।
मैं: दीदी आप तीनों एक घंटे से अंदर क्या कर रहे थे?
फिर तीनों हँसने लगे।
दीदी: तू घर चल। तुझे सब बताती हूँ।
फिर हम सामान लेकर चलने लगे।
परवेज: बाय बेगम जान।
दीदी: बाय शौहर जी।
दीदी को रियलाइज हुआ कि उन्होंने क्या बोल दिया। जब दीदी ने मुझे देखा तो बोलीं—
दीदी: अरे प्रथम गलती से बोल दिया। वो मुझे बेगम बोलते हैं ना इसलिए आदत हो गई है।
मैं: दीदी मैं समझ रहा हूँ।
दीदी: क्या समझ रहा है?
दीदी के फेस पर टेंशन आ गया था।
मैं: दीदी कुछ नहीं।
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उसके बाद हम घर पहुँच गए। दीदी घर आकर नहाने चली गईं। मैं हॉल में बैठकर उनका इंतज़ार कर रहा था। दस मिनट बाद दीदी नहाकर आईं और एक सेक्सी सी नाइटी पहन रखी थी। दीदी ने आज तक वैसी नाइटी कभी नहीं पहनी थी। पता नहीं दीदी के पास ऐसी नाइटी कहाँ से आ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर दीदी खाना बनाने चली गईं और मैं भी अपना फोन चलाने लगा। मैंने सोचा चलो छोड़ो क्या ही पूछूँ उस बारे में दीदी से। दीदी कौन सा सच बोलेगी। लेकिन मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दीदी एक सीधी-सी लड़की जो कभी किसी दूसरे लड़कों को नहीं देखती थी, अपने काम से काम करती थी, वो कैसे एक बूढ़े के हाथ आ गईं और दीदी उसके साथ वैसे काम करने लगीं साथ में उस बूढ़े के दोस्त के साथ भी।
पता नहीं उसने दीदी के ऊपर क्या जादू किया है। एक घंटे बाद दीदी ने खाना बना लिया और खाना लगा दिया। उसके बाद मैं और दीदी खाना खाने लगे। जब हम खाना खा रहे थे तो मैंने दीदी से मज़े लेने का सोचा। क्यों न दीदी से उस बारे में पूछकर मज़े लिए जाएँ। देखते हैं दीदी क्या बोलती हैं।
मैं: दीदी एक बात पूछूँ?
मैंने एकदम आराम से बोला।
दीदी: हाँ पूछ।
मैं: आप के एक घंटे से अंदर क्या कर रही थीं?
दीदी ने ये सुनते ही गले में खाना अटक गया। दीदी खांसने लगीं। मैंने दीदी को पानी दिया और वापस से बोला।
मैं: दीदी बताओ तो।
दीदी मन में सोच रही थीं— क्या बताऊँ इसको क्या बताऊँ।
फिर दीदी बोलीं—
दीदी: अरे तेरे सामने ही तो मैं अंदर केला लेने गई थी।
मैं: हाँ दीदी मुझे पता है लेकिन एक घंटा थोड़ी लगता है। आप कौन सा केला ले रही थीं जो एक घंटा लग गया। आप उगा रही थीं क्या?
दीदी मन में— केला ही तो लेने गई थीं लेकिन कोई और सा ही केला मिल गया था। और हँसने लगीं।
मैं: दीदी क्यों हँस रही हो?
दीदी: अरे कुछ नहीं।
मैं: पता है जब आप नहीं आई थीं तो मैं आपको देखने आया था।
दीदी चौंककर—
दीदी: क्या तू मुझे देखने आया था? क्या देखा था तूने?
मैं: दीदी चौंक क्यों रही हो? क्या हो गया?
दीदी: अरे नहीं… क्या देखा था तूने?
मैं: आया था जब रहीम अंकल आपको देखने गए थे लेकिन वो भी नहीं आए तो मैं भी देखने आया था।
दीदी: अच्छा तो क्या देखा?
मैं: रूम के पास गया और जैसे ही डोर खोलने लगा तो गेट खुल नहीं रहा था। शायद बंद था अंदर।
दीदी: हाँ वो इसलिए बंद किया था कि कुत्ता न जाए।
मैं: अच्छा।
दीदी: अच्छा फिर क्या किया था तूने?
मैं: मैं जैसे गेट बजाने ही वाला था उससे पहले आपकी अंदर आवाज़ आने लगी।
दीदी वापस से चौंककर—
दीदी: क्या आवाज़ आ रही थी?
मैं: दीदी आप चिल्ला रही थीं कि दर्द हो रहा है परवेज जी… आआह्ह… ऐसे ऐसी आवाज़ आ रही थी।
दीदी मन में— लगता है इसने सब कुछ सुन लिया। क्या करूँ मैं अब क्या करूँ।
मैं: दीदी आप क्यों चिल्ला रही थीं?
मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश था दीदी को परेशान देखकर।
दीदी सोचकर—
दीदी: अरे हाँ वो मेरे पैर में मोच आ गई थी तो परवेज जी ठीक कर रहे थे।
मैं: अच्छा इसलिए आप चिल्ला रही थीं परवेज जी आराम से… आराम से…
मैं अंदर ही अंदर हँस रहा था।
दीदी: चल बहुत बात कर ली जल्दी से खाना खा। गुस्से में।
मैं: खा रहा हूँ गुस्सा क्यों हो रही हो?
दीदी: मैं कहाँ हो रही हूँ।
मैं: अच्छा ठीक है।
उसके बाद हमने खाना खा लिया। फिर हम टीवी देखने चले लगे। थोड़ी देर बाद—
मैं: दीदी मैं सोने जा रहा हूँ नींद आ रही है।
दीदी: अच्छा ठीक है जा। मैं भी जा रही हूँ।
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उसके बाद मैं जैसे ही अपने कमरे में गया वैसे ही बेड पर लेटते ही नींद आ गई क्योंकि आज मैंने बहुत बार हिला लिया था। सुबह सात बजे उठा। दीदी उस समय सो रही थीं। मैंने सोचा दीदी इतनी देर तक आज कैसे सो रही हैं। मैंने फोन चेक किया तो देखा दीदी ने परवेज से चार बजे तक बात की है तभी दीदी अभी तक सो रही हैं। उसके बाद मैं चैट पढ़ने लगा।
परवेज: बेगम खाली हो गई?
दीदी: हाँ परवेज जी।
परवेज: अच्छा बेगम जी क्या कर रही हो?
दीदी: टीवी देख रही थी।
परवेज: अच्छा घर जाने के बाद कुछ हुआ था?
दीदी: नहीं लेकिन प्रथम पूछ रहा था कि हम अंदर क्या कर रहे थे।
परवेज: तुमने क्या बोला?
दीदी: उसको बोल दी कि केला लेने गई थी।
परवेज: तुमने तो अंदर कोई और सा ही केला लिया था। हँसने वाला इमोजी।
दीदी: आप भी ना कहीं भी शुरू हो जाते हो। और तो अपने दोस्त के सामने ही मुझको नंगा कर दिया था।
परवेज: अरे तो तुम भी तो बड़े मज़े से उसका लंड चूस रही थी।
दीदी: पता नहीं मुझको क्या हो गया था।
परवेज: बेगम मैं तुमसे निकाह करना चाहता हूँ।
दीदी शरमाने वाला इमोजी भेज दीं।
दीदी: परवेज जी…
परवेज: बताओ ना बेगम कब तक तड़पाओगी?
दीदी: मैं कहाँ तड़पा रही हूँ। मैं तो ये सोच रही हूँ कि अगर किसी को पता चल गया तो मेरा क्या होगा। मेरी फैमिली की तो रेप्युटेशन चली जाएगी।
परवेज: बेगम किसी को पता भी चलेगा मैं हूँ ना।
दीदी: यही बोलकर अपने दोस्त के सामने मेरे साथ वो किया था।
परवेज हँसने वाला इमोजी।
परवेज: बताओ ना।
दीदी: अच्छा परवेज जी मैं सोचकर बताऊँगी।
परवेज: कब?
दीदी: कल तक बता दूँगी।
परवेज: अच्छा आज क्या पहना है?
दीदी: आपको क्या। आप तो मुझको नंगा ही देखना चाहते हो।
परवेज: हँसने वाला इमोजी।
परवेज: निकाह तो हो जाने दो उसके बाद तुम्हें दिन-रात नंगा ही रखूँगा अपने झोपड़ी में।
दीदी: हँसने वाला इमोजी।
परवेज: निकाह के बाद तो तुमको मेरे साथ ही रहना है।
दीदी: ना बाबा ना। मैं नहीं रहूँगी आपके साथ। आपने आज की तरह किया तो।
परवेज: क्या किया था मैंने?
दीदी: आपने तो आज मेरी जान निकाल दी थी। पता है कितना दर्द हो रहा था पीछे।
परवेज: हँसने वाला इमोजी।
परवेज: तुम अभी उंगली से डर आई। अभी तो मेरा लंड लेना भी बाकी है उसमें।
दीदी: ना बाबा ना। मैं नहीं लूँगी पीछे आपका।
परवेज: क्यों नहीं लोगी?
दीदी: आपने देखा है आपका लंड कितना बड़ा है। कैसे जाएगा मेरे पीछे। मैं तो मर जाऊँगी।
परवेज: बेगम निकाह की पहली रात में तुम्हारी गाँड मारके ही सुहागरात मनाऊँगा।
दीदी: अच्छा जी आप सुहागरात तक सोच लिया। फिर भी मैं करने नहीं दूँगी।
परवेज: नहीं बेगम मुझको वही चाहिए।
दीदी: आगे कर लेना परवेज जी लेकिन पीछे नहीं।
परवेज: नहीं बेगम मुझे वही चाहिए।
दीदी: क्यों परवेज जी?
परवेज: तुम्हारी गाँड की खुशबू ने मुझे पागल कर रखा है।
दीदी: शरमाने वाला इमोजी।
परवेज: निकाह के बाद तुम्हारी गाँड पर ही खाना खाऊँगा। प्लेट की जरूरत ही नहीं है।
दीदी हँसते हुए—
दीदी: अच्छा परवेज जी और मेरा क्या?
परवेज हँसते हुए—
परवेज: तुम मेरे लंड पर खा लेना। तुमको तो अपना माल ही खिलाऊँगा वो भी रोटी के साथ।
दीदी: छी परवेज जी कैसी बात करते हो।
परवेज: बेगम मेरा लंड खड़ा हो रहा है।
दीदी: अच्छा तो मैं क्या करूँ?
परवेज: बताओ तो क्या पहना है?
दीदी शरमाते हुए—
दीदी: वही जो आपने दिया था।
परवेज: अच्छा अपनी वीडियो बनाकर भेजो ना। मेरा लंड तुम्हें देखना चाहता है।
दीदी: अच्छा छोटू परवेज मुझे देखना चाहता है। फिर तो भेजना पड़ेगा।
फिर दीदी ने परवेज को अपनी वीडियो भेजी।
परवेज: क्या ही माल लग रही हो।
दीदी: अच्छा जी बेगम से माल।
परवेज: बेगम तू तो मेरी रंडी है, माल है, डार्लिंग है।
दीदी: अच्छा जी अब रंडी भी बना लिया।
परवेज: हाँ मेरी जान तू मेरी ही रंडी है।
दीदी: अच्छा जी मुझको रंडी बोलेंगे।
परवेज: अरे मेरी जान प्यार करता हूँ तुझसे।
दीदी: अच्छा जी।
फिर दोनों ऐसे ही बात करने लगे।
उसके बाद परवेज ने दीदी को बोला—
परवेज: बेगम सुन। तुमसे मेरे दोस्त बात करना चाहते हैं।
दीदी: मुझसे क्यों बात करना चाहते हैं?
परवेज: बेगम देखना चाहते हैं कि मेरी होने वाली बेगम कैसी है।
दीदी: आपने किस-किस को बता दिया। अभी तो मैंने निकाह के लिए हाँ भी नहीं करी।
परवेज: अरे बेगम मैंने उसको तुम्हारे बारे में बता दिया है।
दीदी: अच्छा।
परवेज: हाँ तो वो तुझे देखना चाहते हैं।
दीदी: नहीं परवेज जी मैं नहीं मिल सकती।
परवेज: अच्छा नहीं मिल सकती तो मैं एक काम करता हूँ। मैं एक ग्रुप बनाता हूँ जिसमें मेरे दोस्त भी होंगे और तुम भी।
दीदी: नहीं परवेज जी मुझको शर्म आएगी। पहले ही आपने रहीम जी के सामने क्या-क्या कर दिया है।
परवेज हँसते हुए—
परवेज: बेगम मान है ना।
दीदी: ठीक है। आप तो अपनी बात बनवाकर ही रहते हैं।
परवेज: हँसने वाला इमोजी।
उसके पंद्रह मिनट बाद परवेज ने दीदी को एक ग्रुप में ऐड किया जिसका नाम था— धृति बेगम।
जिसे देखकर दीदी ने परवेज को मैसेज किया—
दीदी: आपने मेरे नाम पर ग्रुप का नाम क्यों रखा?
परवेज: अरे मुझको कुछ समझ नहीं आ रहा था तो इसलिए रख दिया।
तब ग्रुप में मैसेज आया।
ग्रुप में कुल चार लोग थे— दीदी, परवेज, रहीम और राशिद।
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जब मैंने राशिद अंकल की डीपी चेक की तो मैं शॉक हो गया क्योंकि राशिद अंकल तो मेरे दोस्त के पापा हैं। मुझको नहीं पता था कि परवेज और मेरे दोस्त के पापा दोनों दोस्त हैं। लेकिन एक बात थी कि दीदी को नहीं पता था कि राशिद मेरे दोस्त के पापा हैं और ना ही राशिद को क्योंकि आज तक कभी मिले ही नहीं हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन मैं फिर भी सोच रहा था अगर राशिद अंकल को पता चल गया कि परवेज की बेगम कोई और नहीं बल्कि मेरे बेटे के दोस्त प्रथम की ही बहन है तो… मैं तो पागल सा हो रहा था। क्या करूँ। अगर ये बात कहीं बाहर फैल गई तो… मेरे दिमाग में यही बातें चल रही थीं कि तभी ग्रुप में मैसेज आए।
परवेज: बेगम तुम तो रहीम को तो जानती ही होगी।
दीदी: हाँ परवेज जी।
रहीम: भाभी जी नमस्ते।
दीदी: नमस्ते रहीम जी।
तब परवेज बोला—
परवेज: मैं तुमको अपने नए दोस्त से मिलवाता हूँ। ये हैं राशिद।
परवेज राशिद को बोलता है—
परवेज: बोल भाई राशिद।
राशिद: नमस्ते भाभी जी।
दीदी: नमस्ते राशिद जी।
राशिद: परवेज भाई जान बहुत बात करते थे आपकी।
हँसने वाला इमोजी।
उसके बाद परवेज बोला—
परवेज: बेगम इसकी मार्केट के थोड़ी दूरी पर ही है मीट की शॉप।
दीदी: ओह अच्छा।
राशिद: आओ कभी भाभी जी हमारे शॉप पर। आपके दर्शन हो जाएँ।
दीदी शरमाते हुए—
दीदी: ओके राशिद जी कभी आऊँगी।
राशिद: जरूर आना भाभी जी।
उसके बाद ग्रुप में कुछ बात नहीं हुई। दीदी ने परवेज को पर्सनल में मैसेज किया—
दीदी: अच्छा मैं सोने जा रही हूँ।
परवेज: अच्छा भेज जा। गुड नाइट।
दीदी: गुड नाइट परवेज जी।
उसके बाद मैं नहाने चला गया और जब मैं नहाकर बाहर गया तो दीदी उठ चुकी थीं और नाश्ता रेडी कर रही थीं। दीदी ने आज कुछ अलग ही साड़ी पहनी थी जिसमें दीदी और दिनों से कुछ ज्यादा ही अलग लग रही थीं। दीदी ने आज एक पिंक कलर नेट की साड़ी पहनी थी और दीदी ने आज ब्लाउज नहीं पहना था। खाली ब्रा पहनी थी।
मुझको नहीं पता था कि ये ब्लाउज है कि ब्रा क्योंकि मैंने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं देखा था। मुझको तो वो एक ब्रा ही लग रही थी। छोड़ो कुछ भी हो लेकिन पता नहीं दीदी ने परवेज पर जो जादू किया था जो दीदी पूरी तरह से बदल गई थीं। दीदी अब जैसे पहले रहा करती थीं सीधी-सादी अब वैसे नहीं रहतीं। दीदी अब एक देसी रंडी की तरह बन गई थीं।
उसके बाद कुछ देर बाद दीदी ने नाश्ता लगा दिया और मैं और दीदी ने नाश्ता करने लगे। जब मैं नाश्ता कर रहा था तो मेरी नज़र दीदी पर गई। दीदी ने आज जो ब्रा या ब्लाउज पहनी थी उसमें दीदी की क्लीवेज इतनी दिख रही थी पूछो ही मत। साथ में दीदी के निप्पल का पूरा शेप पता चल रहा था।
शायद आज दीदी ने उसके अंदर कुछ नहीं पहना था। और साथ में दीदी की नेट वाली साड़ी जिसमें दीदी का हल्का-हल्का पेटीकोट भी दिख रहा था। जैसे कपड़े दीदी ने पहने थे वैसे कपड़े कोई अच्छे घर की लड़की नहीं पहनती। वैसे तो खाली कोई रंडी ही पहनती है। मेरे दिमाग में यही सब चल रहा था और मेरे पैंट में मेरा लंड दीदी को देखकर खड़ा हुआ जा रहा था और मुझको एक अलग सी ही फीलिंग आ रही थी जो मैं बता नहीं सकता।
हम नाश्ता करने लगे। मैं एक हाथ से नाश्ता कर रहा था तो मेरा दूसरा हाथ मेरे लंड पर था जो कि मैं उसको बैठाने का ट्राई कर रहा था लेकिन बैठ ही नहीं रहा था। और बैठेगा भी क्यों जब सामने एक ये रंडी जैसी लड़की होगी और वो भी खुद ही बहन तो लंड क्यों ही बैठेगा। मैं नाश्ता कर ही रहा था तभी दीदी बोलीं—
दीदी: प्रथम सुन।
मैं: हाँ बोलो दीदी।
दीदी: तेरे को आज मामा के घर जाना है। मम्मी ने फोन करके बोला था।
मैं: लेकिन क्यों? क्या हो गया?
दीदी: अरे उसके घर में कोई प्रोग्राम है तो दस बजे का है तो तू चला जाइयो।
मैं: अच्छा दीदी तो आप भी चलना ना।
दीदी: नहीं मेरा मन नहीं है। अगर मैं चली गई तो मामी मुझको अपने घर ही रोक लेंगी। इसलिए तू ही चला जा।
मैं: ठीक है। अच्छा दीदी कब तक का प्रोग्राम है?
दीदी: दस बजे का है और शायद शाम के सात बजे तक का है।
मैं: अच्छा दीदी चला जाऊँगा।
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उसके बाद मैं रेडी होने चला गया और दस बजे मैं मामा के घर पहुँच गया। मामा का घर हमारे घर से तीस मिनट की दूरी पर ही है अगर ट्रैफिक न मिले तो। मैं उसके घर पहुँचा तो देखा इधर तो जागरण है तो उसकी तैयारी चल रही थी। मैं अपने मामा-मामी से मिला। कुछ बात की।
उसके बाद जागरण की तैयारी में उनकी मदद करने लग गया और मुझको समय का पता भी नहीं चला। जब मैंने समय देखा तो एक बज रहे थे। मैंने काम करते समय अपना फोन भी चेक नहीं किया था। मेरा फोन साइलेंट था। जब मैं फ्री हुआ तो मैंने देखा कि परवेज और दीदी की बहुत बातें हुई हैं और साथ में परवेज की कुछ कॉल भी आई हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
परवेज: बेगम कहाँ? क्या कर रही हो?
दीदी: कुछ नहीं परवेज जी टीवी देख रही हूँ।
परवेज: अच्छा तुम्हारी बड़ी याद आ रही है।
दीदी: मुझे पता है आपको क्यों मेरी याद आ रही है।
परवेज हँसने वाला इमोजी भेज दिया।
परवेज: बता तो बेगम आज आ रही हो मार्केट?
दीदी: नहीं परवेज जी।
परवेज: अच्छा बेगम घर पर कोई है क्या?
दीदी: नहीं परवेज जी मैं अकेली हूँ। प्रथम मामा के घर गया है।
परवेज: तो बेगम तुमने मुझको बताया क्यों नहीं। मैं आ रहा हूँ तुम्हारे घर।
दीदी: नहीं परवेज जी घर मत आइए। कोई पड़ोसी देख लेगा तो तमाशा हो जाएगा।
परवेज: देख लेने दो। मैं आ रहा हूँ।
उसके दस मिनट बाद परवेज की दीदी को एक कॉल आई थी जो कि मुझको नहीं पता उसकी क्या बात हुई थी लेकिन उसकी कॉल एक मिनट की भी नहीं थी। मतलब परवेज दीदी को घर का गेट खोलने के लिए कॉल किया होगा। मतलब परवेज दीदी के साथ कुछ करने वाला है। मैं सोचने लगा यार अब इधर से कैसे निकलूँ। मैं मिस नहीं कर सकता दीदी और परवेज क्या करने वाले हैं। मैं मामा के पास गया और उनको बहाना बनाया—
मैं: मामा जी मेरा दोस्त है ना…
मामा: बोल बेटा क्या हुआ?
मैं: मामा जी मेरे दोस्त का एक्सीडेंट हो गया है। मुझको देखने जाना होगा।
मामा: अरे बहाने मत बना।
मैं: बहाने नहीं कर रहा।
मामा मुस्कुराकर—
मामा: मैं समझ रहा हूँ। तेरी उम्र में मैंने भी बड़े बहाने किए हैं। जीएफ से मिलने जा रहा है ना?
मैं मन में— अरे मामा को क्या पता मेरी जीएफ है कि नहीं। हाँ बोलकर निकलने की कोशिश करता हूँ।
मामा: कहाँ खो गया?
मैं: हाँ मामा।
मामा: बेटा मुझको पता था। चल कोई ना तू जा। मैं देख लूँगा।
मैं: थैंक यू मामा जी।
मामा: अच्छा ठीक है।
उसके बाद मैं मामा के घर से निकला और ऑटो किया। मुझको तीस मिनट हो गए। घर दस मिनट की दूरी पर ही था। मैं ऑटो से उतरकर पैदल आ रहा था तो मैंने दीदी को कॉल लगाने की सोची। देखते हैं दीदी क्या बोलती हैं। मैंने दीदी को कॉल किया। दीदी ने कॉल बहुत देर बाद पिक अप की।
मैं: हेलो दीदी।
दीदी: हाँ… प्रथम…
मुझको पीछे से परवेज की हँसी की आवाज़ आई।
मैं: दीदी क्या कर रही हो?
दीदी: कुछ नहीं…
मुझको वापस से दीदी की अजीब सी आवाज़ आई। शायद दीदी कुछ तो कर रही हैं तभी दीदी की अजीब सी आवाज़ आ रही है। तभी मैंने देखा कि जो कल परवेज ने ग्रुप बनाया था उस पर परवेज कॉल कर रहा है तो मैंने दीदी को बोला—
मैं: एक मिनट दीदी।
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मैंने दीदी को म्यूट किया और परवेज की ग्रुप कॉल पिक अप की। उधर से परवेज कुछ बोलने लगा और बाकी सुन रहे थे।
परवेज: भाई लोग मैं तुमको एक चीज दिखाता हूँ। तुम देखकर पागल हो जाओगे।
रहीम: क्या भाई?
राशिद: क्या दिखा रहा है परवेज?
रुको मैं वीडियो कॉल करता हूँ। मैं घर पहुँचने ही वाला था। मैंने वेट किया लेकिन एक मिनट में परवेज का कॉल नहीं आया तो मैंने दीदी का कॉल म्यूट से हटाकर बोला—
मैं: हाँ दीदी क्या कर रही हो?
दीदी: अरे कुछ नहीं कर रही।
उसी वक्त परवेज का कॉल आया ग्रुप में वीडियो कॉल। तो मैंने दीदी का वापस म्यूट किया और परवेज का कॉल उठाया तो मैंने जो देखा मुझे उस पर विश्वास नहीं हुआ। मैं तो सुन सा हो गया। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि दीदी ऐसा कर सकती हैं। दीदी ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी थीं और फर्श पर बैठी थीं। और परवेज ने पैंट नहीं पहनी थी और बेड पर बैठा था। और दीदी परवेज का लंड चूस रही थीं।
चौंकने की ये बात नहीं है बल्कि ये कि जो दीदी परवेज का लंड चूस रही थीं उस पर दीदी का मंगलसूत्र लपेटा हुआ था और दीदी उसको एक रंडी की स्माइल के साथ चूसी जा रही थीं। और साथ में दीदी कॉल पर थीं और वो कॉल मेरी ही थी। मैं मन में सोचा यार दीदी तो पूरी बदल गई हैं। अब दीदी संस्कारी नहीं रहीं। रंडी बन गई हैं।
उसके बाद परवेज की आवाज़ आने लगी। परवेज बोला—
परवेज: देखो दोस्तों कैसे मेरी जान कैसे मेरा लंड चूस रही है। और वही जब उसका भाई का कॉल आया है देखो।
उधर से सबकी हँसी की आवाज़ आने लगी। मैं ये देख ही रहा था कि दीदी बोलीं—
दीदी: क्या कर रहे हो परवेज जी? क्या दिखा रहे हो?
परवेज: बेगम तुमको दिखा रहा हूँ अपने दोस्तों को।
दीदी: हटो बदमाश। ये कोई दिखाने की चीज है?
परवेज: बेगम तू चीज ही ऐसी है। तुझे देखकर इन सबकी जलेगी।
जिसे देखकर दीदी रंडी की तरह हँसने लगीं। उधर कॉल पर रहीम ने और साथ में मेरे दोस्त का पापा उसने अपना लंड निकाल लिया और हिलाने लगा और बोले—
राशिद: अरे भाभी जी आप तो कमाल की हो।
रहीम: भाई कमाल नहीं है माल है। क्या ही चूसती है भाभी।
राशिद: तुझे ज्यादा पता है क्या चूसती है?
रहीम हँसते हुए—
रहीम: भाई भाभी जी ने मेरा भी चूस रखा है।
राशिद: परवेज भाई क्या बात रहा है रहीम?
परवेज: हाँ भाई सही बोल रहा है।
राशिद: भाई फिर मेरा नंबर कब है?
परवेज: बेगम ये कुछ बोल रहा है।
दीदी उस समय परवेज का लंड इतने मज़े से चूस रही थीं कि दीदी को कुछ चीज की पड़ी ही नहीं। दीदी ऐसे चूस रही थीं जैसे लंड खा ही जाएँगी।
राशिद: भाभी जी हमें भी कभी मौका दे दो।
दीदी सुनकर—
दीदी: किस चीज की?
राशिद: वही जो आपने रहीम को दिया है।
दीदी खिलखिलाकर रंडी की तरह हँसने लगीं।
तो परवेज बोला—
परवेज: चलो बहुत देख लिया। मैं कॉल रखता हूँ। आज तो बेगम की बहुत मारनी है।
और हँसने लगा। उधर सब हँसने लगे साथ में दीदी भी।
रहीम: भाई कॉल क्यों काट रहा है। हमें भी तो दिखा कैसे कर रहा है।
परवेज—
परवेज: अरे जा अपना काम कर साले।
और हँसने लगा और कॉल काट दी।
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उधर मैं भी अपने घर पहुँच गया और खिड़की से देखने लगा। उधर मेरा तो बहुत बुरा हाल था। दीदी को मैंने ऐसी हरकत करते हुए नहीं देखा था। दीदी अब पक्की एक रंडी बन गई थीं। मैं अंदर देखने लगा साथ में अपना लंड निकाल लिया। मैंने भी सोच लिया जो करना है साली रंडी को करने दो। मैं भी मज़े लेता हूँ। और मैं अंदर देखने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: परवेज जी आप भी ना। अपने सारे दोस्तों को मेरे को ये करते हुए दिखा दिया।
परवेज: तो क्या हो गया धृति मेरी जान?
दीदी: आप ना बहुत गंदे हो।
परवेज ने दीदी के बूब्स पकड़े और तेज से दबा दिए और हँसते हुए बोला—
परवेज: अच्छा मैं गंदा हूँ? बोल मैं गंदा हूँ।
दीदी: आआह्ह्ह… परवेज जी नहीं आप गंदे नहीं हैं।
परवेज हँसने लगा।
परवेज: चल आ जा मेरी जान। लेट जा बेड पर। आज तुझे अच्छे से रगड़ता हूँ।
दीदी शरमाने लगीं।
परवेज: आ जा लेट जा।
फिर दीदी उठकर बेड पर गईं और जाकर पीठ के बल लेट गईं। मैं ये सब बाहर खड़ा होकर देख रहा था। आज लगता है आज परवेज दीदी की चूत फाड़कर रख देगा। दीदी लेट गईं। परवेज दीदी के पास गया और बोला—
परवेज: चल मेरी बेगम अपनी टाँग खोल।
दीदी: मुझे शर्म आ रही है।
परवेज: अच्छा लंड चूसते हुए नहीं आ रही है?
दीदी: आप भी ना।
परवेज: चल खोल ना बेगम।
फिर दीदी ने अपनी टाँगें खोलीं और परवेज दीदी की चूत देखते रह गया। उधर मैं भी दीदी की चूत देखकर पागल हो गया। दीदी की चूत एकदम गुलाबी। ऊपर से दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था। दीदी की चूत पूरी क्लीन थी।
परवेज: अरे बेगम क्या ही चूत है तुम्हारी।
दीदी शर्मा गईं और अपने हाथ से दीदी ने चूत ढक ली।
परवेज: बेगम हटा हाथ।
दीदी: नहीं परवेज जी शर्म आ रही है।
परवेज फिर दीदी के पैरों के बीच में जाकर बैठा और दीदी के हाथ हटा दिए। और दीदी की चूत पर अपना हाथ रखा और फेरने लगा। उधर दीदी ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं। फिर परवेज ने दीदी की चूत पर अपना मुँह रख दिया और दीदी की चूत पर जीभ फेरने लगा। दीदी को तो जैसे जान ही निकल गई। दीदी की आज से पहले किसी ने भी चूत नहीं चाटी थी। दीदी पागल सी हो गईं और बोलीं—
दीदी: आआह्ह्ह… म्ह्ह… आआह्ह…
परवेज: बेगम अच्छा लग रहा है ना?
दीदी: हाँ परवेज जी अच्छ्छ्छाआआआ लग्ग्ग रहा है।
परवेज फिर दीदी की चूत को अच्छे से चाटने लगा। दीदी की हालत खराब होने लगी। दीदी ने परवेज का सर सहलाने लगीं और आआह्ह्ह… आआआ… अम्म्म्म आवाज़ निकालने लगीं। ऐसे ही दस मिनट तक परवेज ने दीदी की चूत चाटी। उसके बाद परवेज दीदी के पास जाकर बैठ गया और बोला—
परवेज: तैयार हो ना।
दीदी शरमाने लगीं। परवेज ने फिर दीदी की चूत पर लंड रखा। दीदी की हालत खराब होने लगी।
दीदी: परवेज जी धीरे से करना। आपका इतना मोटा है मैं मर जाऊँगी।
परवेज: बेगम आराम से ही करूँगा। थोड़ा दर्द तो होगा ही।
परवेज ने दीदी की चूत पर अपना लंड रखा और डालने की कोशिश करने लगा।
दीदी: आआह्ह… परवेज जी दर्द हो रहा है… आआआह्ह्ह…
परवेज: बेगम तेरी चूत तो बहुत टाइट है।
परवेज फिर बेड से उठा और तेल लेकर आया सरसों का और अपने लंड पर लगाया। और बोला—
परवेज: अब बेगम देखो अब दर्द नहीं होगा।
दीदी: ठीक है परवेज जी।
परवेज ने फिर दीदी की चूत पर लंड रखा और लंड के टोपे को चूत में घुसाने लगा और अंदर घुस गया।
दीदी: आआह्ह… परवेज जी दर्द हो रहा है प्लीज निकाल लीजिए।
परवेज: बेगम थोड़ा दर्द सह लो मेरे लिए।
दीदी की चूत अभी भी इतनी टाइट थी जैसे कोई कुँवारी लड़की है। परवेज ने फिर एक तेज का धक्का मारा और परवेज का लंड पाँच इंच दीदी के चूत में चीरता हुआ अंदर घुस गया और उधर दीदी की एक तेज की आवाज़ निकली—
दीदी: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह… मम्मीईईईईईईईई… आआआह्ह्ह्ह्ह… दर्द होओओ रहा आआआ है… आआआईईईईईईई… आआअम्म्…
दीदी: आआपरवेज म्म्म्म्म जी निकाल्ल्ल्ल्ल्लीजिएएएएएए…
परवेज फिर रुक गया और दीदी को बोला—
परवेज: बेगम थोड़ा सा और रह रहा है।
दीदी: नहीं परवेज जी मैं अब और नहीं सह सकती। प्लीज परवेज जी।
परवेज: बेगम थोड़ा सा रह रहा है।
दीदी: प्लीज परवेज जी।
फिर परवेज ने बोला ठीक है और उतना ही लंड अंदर डालकर बाहर करने लगा और दीदी आवाजें निकालने लगीं—
दीदी: आआह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… आआआआआह्ह्ह…
पाँच मिनट तक परवेज दीदी को पाँच इंच लंड से ही चोदने लगा। मैं ये बाहर देखकर लंड हिला-हिलाकर पागल हो गया था। मेरा तो एक बार झड़ भी गया था। अब दीदी भी नॉर्मल हो गई थीं और दीदी भी थोड़ा मजा ले रही थीं। और जैसे ही दीदी मजे ले रही थीं परवेज ने अपना लंड बाहर निकाला और एक इतनी तेज धक्का दिया कि परवेज का लंड दीदी की चूत को चीरता हुआ दीदी के बच्चेदानी में टकरा गया और दीदी की चीख भी निकल गई—
दीदी: आआआ… परवेज जीईईईईईईई… आआआह्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…
परवेज: बेगम हो गया हो गया बेगम।
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दीदी की चूत में परवेज का पूरा दस इंच का लंड चला गया था और परवेज थोड़ा सा दीदी को नॉर्मल होने के लिए दीदी के बूब्स को दबाने लगा और दीदी के होठों को चूमने लगा और पाँच मिनट तक यही किया। जब दीदी नॉर्मल हो गईं तो परवेज दीदी की चूत के धक्के देने लगा। पहले तो परवेज धीरे-धीरे धक्के दे रहा था और दीदी ने तकिए को दोनों हाथों से पकड़ लिया और दीदी बोलीं—
दीदी: परवेज जी आराम से।
परवेज: बेगम आराम से कर रहा हूँ।
परवेज: बेगम तुम्हारी चूत कितनी गरम है। एकदम गरम भट्टी की तरह।
दीदी इस बात पर मुस्कुरा दीं।
परवेज: मेरी जान तूने मुझको कितना तड़पाया था। अब जाकर तेरी चूत मिली है। आज तो तेरी चूत ही फाड़ दूँगा मेरी जान।
दीदी भी धीरे-धीरे नॉर्मल हो गई थीं और एकदम गरम भी। अब परवेज भी दीदी की चूत में तेज-तेज धक्के मारने लगा। दीदी को अब भी दर्द हो रहा था। उनके आँसू आ गए थे। परवेज अब धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाने लगे। अब थोड़ी दीदी भी चिल्लाना छोड़कर मोन करने लगी थीं।
परवेज: बेगम तेरी चूत कितना कसा हुआ है। लगता है तेरा हसबैंड ज्यादा चुदाई नहीं करता है।
आआआह्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह्ह… करके परवेज अपना लंड चूत में अंदर-बाहर कर रहे थे। अब दीदी को भी थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था। उनका दर्द अब बहुत कम हो गया था।
दीदी: उउउउम्म्म्म… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह…
परवेज ने देखा कि दीदी अब मजे ले रही हैं तो अब वो अपनी स्पीड बढ़ा रहे थे। अब दीदी और ज्यादा मोन कर रही थीं।
दीदी: आआआआव्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… परवेज जीईई… आआआआह्ह्ह्ह… आआआआह्ह्ह्ह… उउउम्म्म्म्म…
परवेज भी अब पूरे जोश में दीदी को चोद रहे थे।
परवेज: आआआह्ह्ह्ह… बेगम आआआह्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है… आप बहुत हॉट हो तू… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… मेरी रंड… मैं तुझे ऐसे ही हमेशा चोदना चाहता हूँ।
दीदी भी अब फुल मजे में थीं। वो भी अब खुलकर मोन कर रही थीं।
दीदी: आआआह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… परवेज जी… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह…
परवेज चुदाई के साथ दीदी को किस भी कर रहे थे। दोनों एक-दूसरे से ऐसे लिपटे थे जैसे अलग न होंगे। परवेज अब दीदी को फुल मजा दे रहे थे और परवेज भी फुल मजे में थे। परवेज दीदी के ऊपर लेटे-लेटे ही चुदाई कर रहा था। अब ऐसे चुदाई करते हुए पंद्रह मिनट से ज्यादा समय हो गया था.
पर न दीदी और परवेज थकने का नाम ले रहे थे। दोनों फुल मजे में चुदाई कर रहे थे। परवेज को मस्त माल मिल गया था और दीदी को मस्त चुदाई करने वाला। इसी पोजीशन में परवेज दीदी की जबरदस्त चुदाई करने लगे। अब दीदी झड़ने वाली थीं।
दीदी: आआआआआआआह्ह्ह्ह्ह… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… परवेज जी और जोर से करो… आआआआह्ह्ह्ह… आआआआआह्ह्ह्ह… और जोर से…
फिर थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गईं। परवेज जान गए कि दीदी झड़ गई हैं। पर उन्होंने अपना लंड निकाला और वो भी लेट गए। उनका अभी तक पानी नहीं निकला था। फिर थोड़ी देर बाद परवेज दीदी के चूत के पास आ गए और दीदी के रस भरे चूत को चाटने लगे। दीदी फिर उत्तेजित होने लगीं और कुछ ही देर में दीदी मोन करने लगीं।
दीदी और परवेज का ये पहला चुदाई था इसलिए परवेज दीदी को पूरी तरह से संतुष्ट करना चाहते थे। अब परवेज समझ गए कि दीदी फिर से रेडी हैं तो उन्होंने फिर से लंड को दीदी के चूत पर सेट किया और एक झटका मारा। इस बार ज्यादा परेशानी के बिना लंड चूत में चला गया। दीदी अब खुलकर मोन कर रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: आआआह्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है परवेज जी… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… ऐसे ही करते रहिए… प्रथम के जीजा ने तो कभी इतना देर मेरी चुदाई नहीं की… आआआआआह्ह्ह्ह्ह… आप तो इतने अच्छे से और इतने देर करते हो… आआआआआह्ह्ह्ह्ह… और जोर से करिए… आआआह्ह्ह…
परवेज: कोई बात नहीं बेगम। अब मैं तेरी ऐसे ही मजे से चुदाई करूँगा… तेरी प्यास अब मैं बुझाऊँगा… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… तू मुझसे निकाह करेगी ना बेगम?
दीदी पूरे जोश में बोल रही थीं—
दीदी: हाँ परवेज जी ऐसे ही जोर से चोदो मुझे… इतना मजा तो कभी नहीं आया जितना मजा आज आप दे रहे हैं… हाँ मैं आपसे निकाह करूँगी… आआआआआआह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… और जोर से करो… अब तो मैं आपसे ही चुदूँगी… रोज चोदना मुझसे… मेरी प्यास मिटा देना… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… उउउउउम्म्म… आआआआआआह्ह्ह… और जोर से… आआआआआआह्ह्ह्ह… मैं तो गई…
कहकर दीदी झड़ गईं। फिर भी परवेज नहीं रुके और पूरे जोश से चोदने लगे। दीदी चुदाई के नशे में डूब गई थीं। पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें आ रही थीं और आवाजें बाहर तक भी आ रही थीं।
परवेज: हाँ मेरी बेगम। निकाह के बाद मैं तुमको ऐसे ही रोज चोदूँगा… आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… अब अपने हसबैंड के साथ करने और उससे चुदने की जरूरत नहीं है… मैं तेरी रोज ऐसे ही चुदाई करूँगा… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… ये मेरी बेगम…
कहकर परवेज और जोर-जोर धक्के लगाने लगे और दीदी भी फुल रिस्पॉन्स देने लगीं अपनी गाँड उठा-उठाकर चुदवाने लगीं। अंदर का नजारा देखकर मेरे लंड पूरे तन गए थे। मैं अपने लंड को पैंट से बाहर निकालके सहला रहा था। अंदर का नजारा ऐसा था कि दो प्रेमी जोड़े बहुत दिनों बाद मिले हों और जबरदस्त चुदाई कर रहे हों। वो चुदाई में इतना खो गए थे।
परवेज: आआआआआह्ह्ह्ह्ह… और जोर से करिए… आआआह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह्ह्ह… उम्म्म्म…
परवेज जोर-जोर से चोदने लगे। दीदी भी खुलके जोर-जोर से मोन करने लगीं। फिर चालीस मिनट की चुदाई के बाद परवेज भी अब बहुत तेज चोदने लगे और दीदी भी बहुत मोन करने लगीं। फिर थोड़ी देर बाद दीदी का पानी फिर से निकलने लगा।
दीदी: आआआह्ह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह…
करने लगीं और पानी निकल गया। अब परवेज का भी निकलने वाला था। उन्होंने अपनी रफ्तार से चोदते रहे। दीदी झड़कर शांत हो गई थीं पर अंकल रुके नहीं और कुछ देर में वो भी दीदी के चूत में अपना वीर्य गिरा दिया और जब तक पूरा वीर्य न गिरा अंकल दीदी को चोदते रहे। फिर निढाल होकर दीदी के ऊपर लेट गए। दीदी ने भी उनको अपनी बाहों में समेट लिया। चुदाई के बाद दोनों ऐसे ही लिपटे रहे और अब भी परवेज का लंड दीदी के चूत में था।
परवेज दीदी को किस कर रहे थे और दीदी भी परवेज को किस कर रही थीं। फिर कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद जब दोनों थक गए थे और दोनों लेटे ही रहे। दीदी की चूत में अब भी परवेज का लंड था और दीदी के चूत से परवेज का गाढ़ा पानी निकल रहा था। उसके बाद दोनों बेड पर ही थककर सो गए। मैं भी वेट कर रहा था कि और कुछ होगा क्या लेकिन तीस मिनट तक कुछ नहीं हुआ।
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ढाई बज गए थे और वो दोनों लेटे रहे तो मैं अपने दोस्त के घर जाने का सोचा क्योंकि मैं अपने घर तो जा नहीं सकता था तो मैं अपने दोस्त के घर चला गया और वापस पाँच बजे आया। परवेज और दीदी की चुदाई हो गई थी और परवेज ने दीदी की चूत में अपना पानी छोड़ दिया था। दीदी परवेज के पीछे इतना पागल हो गई थीं वो भूल भी गईं कि परवेज बिना कंडोम के दीदी को चोद रहा था। परवेज और दीदी की चुदाई के बाद परवेज ने दीदी की चूत में पानी छोड़कर चूत में लंड अटकाकर ही दीदी के ऊपर लेट गया.
और मैं बाहर ये सब खिड़की से देखकर लंड हिला रहा था। मेरा दो बार पानी निकल गया था। मैंने थोड़ा वेट किया कि परवेज दीदी के साथ कुछ और करता है कि नहीं या परवेज अपने घर जाता है कि नहीं लेकिन ना ही परवेज घर गया और ना ही परवेज ने दीदी के साथ कुछ किया तो मैं बाहर खड़ा होकर थक गया था तो मैं अपने दोस्त के घर चला गया था ये सोचकर कि अब दोनों के बीच कुछ नहीं होने वाला। आगे की कहानी अगले भाग में तब तक पढ़ते रहिये हमारी वासना.
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