Hot Didi Sexy Jism Story
नमस्कार दोस्तों। मेरा नाम प्रथम है। ये मेरी फर्स्ट स्टोरी है जो मैं लिखने जा रहा हूँ। ये स्टोरी होगी मेरी दीदी पर जिसका नाम है धृति। ये स्टोरी एकदम रियल है जो मैं आपको आज बताने जा रहा हूँ। मेरे फादर का नाम शरद अग्रवाल उम्र 50। मम्मी का नाम दीक्षा अग्रवाल उम्र 45। Hot Didi Sexy Jism Story
हम लखनऊ के रहने वाले हैं लेकिन हम कई सालों से सूरत में रह रहे हैं। लेकिन हमारा गाँव लखनऊ में है। हमारा गाँव आना-जाना रहता है। मेरी दीदी की शादी को हुए 3 साल हो गए हैं। उनके हस्बैंड का नाम है विपिन। उम्र 29। और जो चेन्नई में जॉब करते हैं तो वो महीने या कुछ महीनों में 4 या 5 दिन के लिए ही घर आते थे। अब स्टोरी स्टार्ट करते हैं।
मेरी दीदी धृति दिखने में बहुत सुंदर हैं और उनका फिगर भी बहुत बढ़िया है। कोई भी अगर उसको देख ले तो चोदे बिना ना रह पाए। इतनी सुंदर हैं। खासकर उनकी बाहर को निकली हुई गाँड। आह! क्या ही गाँड है। मन तो करता है कि गाँड में लंड डाल दूँ लेकिन कभी कर नहीं पाया। चलो कहानी पर आते हैं।
दीदी के शादी के 2 साल बाद उनके हस्बैंड चेन्नई में जॉब करने चले गए। जिसके कारण दीदी का अपने ससुराल में मन नहीं करता था। जिससे दीदी ने सोचा क्यों ना वो अपने घर जाएँ कुछ महीनों के लिए। दीदी ने अपने हस्बैंड को सब बात बताई और दीदी लखनऊ से सूरत आ गईं हमारे साथ रहने के लिए। दीदी को सूरत में 1 महीना हो गया था। दीदी की कहानी की शुरुआत तब हुई जब दीदी एक दिन दीदी और मैं सब्जी लेने गए।
मैं: दीदी मम्मी ने क्या-क्या सब्जी लाने की बोली है? आपको याद है?
दीदी: हाँ मेरे को याद है क्या लेनी है क्या नहीं।
हमारे घर से मार्केट ज्यादा दूर थी। रिक्शा से आने-जाने में 15 से 20 मिनट लग जाते थे। दीदी और मैं सब्जी खरीदने के लिए बाजार जा ही रहे थे। हमने रिक्शा लिया और मार्केट की तरफ निकल गए। कुछ देर बाद हम मार्केट पहुँच गए। हम सब्जी लेने के लिए जैसे ही दीदी और मैं मार्केट में पहुँचे हमने देखा कि उधर बहुत भीड़ है। भीड़ इतनी थी कि पैर रखने की भी जगह नहीं थी। उसके बावजूद हम मार्केट में चलने लगे।
हम जिस एरिया में गए थे वो एरिया के पास एक और एरिया था जो कि उधर के लुच्चे लफंगे टाइप के हैं। दीदी और मैं मार्केट के अंदर गए और कैसे-कैसे मैंने कुछ सब्जी खरीद ली। जब हम आगे जा रहे थे तो किसी ने दीदी की सेंडल पर अपना पैर रख दिया। जैसी ही दीदी आगे बढ़ीं दीदी की सेंडल टूट गई।
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दीदी ने मेरे को बोला: प्रथम देख मेरी सेंडल टूट गई। अब क्या करूँ? इधर कोई आसपास ठीक करने वाली दुकान है क्या?
मैं: हाँ दीदी इधर एक मोची है। चलो हम उधर चलते हैं।
दुकान कुछ इस तरह से थी।
हम जब मोची की दुकान पहुँचे तो उधर 1-2 लोग और थे और मोची अपना काम कर रहा था। जैसे ही मैंने उससे पूछा अंकल कितना टाइम लगेगा वो मेरी तरफ देखा। जैसे ही उसने मेरी तरफ देखा उसने मेरी दीदी पर नजर डाली और वो मेरी दीदी को गंदी नजरों से देखता रहा।
मैंने वापस पूछा: ओ अंकल कितना टाइम लगेगा?
तो अंकल ने बोला: अभी बस 10 मिनट लगेंगे। तब तक तुम थोड़ा वेट करो।
मैं: दीदी अभी तो थोड़ा टाइम लगेगा। क्यों ना जब तक मैं सामान लेकर आ जाऊँ और आप अपनी सेंडल ठीक करवा लेना।
दीदी: ठीक है प्रथम तू जा। मैं तेरा इधर ही वेट करूँगी।
मैं सामान लेने चला गया।
मेरे को उधर सामान लेने गए 10 मिनट हो गए थे। मैं बाकी का सामान ले रहा था तब एकदम से बारिश स्टार्ट हो गई और मैं बारिश से बचने के लिए एक दुकान के नीचे आ गया। उधर मोची की दुकान पर दीदी और अंकल ही थे। जब बारिश स्टार्ट हुई तो दीदी बचने के लिए जगह ढूँढ रही थीं लेकिन अंकल की दुकान उतनी बड़ी नहीं थी।
दीदी को भीगता देख अंकल बोले: अरे बेटी तुम बारिश में क्यों भीग रही हो? तुम मेरे झोपड़ी में वेट कर लो बारिश रुकने का।
दीदी ने उनको मना कर दिया। एकदम से बारिश और तेज हो गई जिससे दीदी की साड़ी कुछ ज्यादा ही गीली हो गई और दीदी ने अंकल से बोला।
दीदी: ठीक है अंकल जी।
और दीदी उसके झोपड़ी के गेट पर जाकर खड़ी हो गईं। दीदी की साड़ी दीदी के शरीर से बिल्कुल चिपक गई थी और दीदी के बूब्स और गाँड का शेप एकदम अच्छे से दिखाई दे रहा था। दीदी बारिश में भीग रही थी। बारिश के साथ-साथ तेज-तेज हवा भी चलने लगी। जिसका फायदा अंकल को हो रहा था। दीदी को ठंड लगने लगी थी और अंकल दीदी को खा जाने वाली नजरों से देख रहे थे।
अंकल: बेटा अगर तुमको ठंड लग जाएगी तुम अंदर जाकर अपना शरीर को पोंछ लो।
दीदी: नहीं अंकल जी मैं ठीक हूँ।
अंकल: बात बनाओ नहीं तो तुमको ठंड लग जाएगी।
दीदी: ठीक है।
अंकल झोपड़ी के अंदर गए और अंदर उन्होंने शरीर को पोंछने के लिए अपनी एक धोती दे दी। दीदी ने वो धोती ले ली। दीदी अपना शरीर पोंछ रही थीं कि अंकल बाहर गए और अपनी दुकान के आगे प्लास्टिक का एक बड़ा सा पन्ना डाल दिया जिससे दुकान में बारिश ना आए। जिससे बाहर से अंदर नहीं देखा जा सकता था। फिर अंकल भी अपनी झोपड़ी में चले गए। दीदी ने अपना शरीर पोंछ लिया था लेकिन साड़ी अभी भी गीली थी।
अंकल: बेटा अब तुमको ठंड नहीं लग रही ना?
दीदी: नहीं।
अंकल: बेटा आपका नाम क्या है? मैंने आपको इस एरिया में देखा नहीं कभी।
दीदी: मेरा नाम धृति है और मैं इधर पास से ही हूँ। वो मैं घर से ज्यादा बाहर नहीं जाती। और आपका क्या नाम है?
अंकल दीदी का क्लीवेज देख रहे थे और मुस्कुराके दीदी से बोला।
अंकल: मेरा नाम परवेज है और मैं इधर ही रहता हूँ।
दीदी: ओह।
अंकल: वैसे मैंने इतनी सुंदर लड़की नहीं देखी आज तक। तुम तो कुछ ज्यादा ही सुंदर हो बेटा।
दीदी ने कुछ नहीं बोला और मुस्कुरा दिया। दीदी को अभी भी ठंड लग रही थी क्योंकि साड़ी अभी भी गीली थी। दीदी को ठंड से काँपता हुआ देखकर अंकल बोले।
परवेज: अरे बेटा तुम्हें तो अभी भी ठंड लग रही है।
दीदी ने बोला: मैं ठीक हूँ अंकल जी।
परवेज: कहाँ ठीक हो तुम तो अभी भी काँप रही हो।
दीदी: अंकल जी मैं ठीक हूँ।
परवेज: बेटा तुम एक काम करो। तुम अपने कपड़े उतार दो और ये धोती लपेट लो। जब बारिश रुक जाएगी तब अपने कपड़े पहन लेना।
दीदी इस बात पर शॉक हो गईं। कैसे दीदी किसी दूसरे के घर में वो भी किसी के सामने अपने कपड़े उतार सकती थीं।
दीदी: नहीं अंकल जी मैं ठीक हूँ।
परवेज मन में सोच रहा था: साली कपड़े नहीं उतार रही। साली को बिना साड़ी में देखने का मन कर रहा है लेकिन उतार नहीं रही।
परवेज: बेटा तुम बीमार हो जाओगी।
दीदी: नहीं मैं ठीक हूँ।
परवेज: अच्छा बेटा तुम अपने कपड़े उतार लो। मैं बाहर चला जाता हूँ।
दीदी ने मन में सोचा कि मैं फिर भी कैसे कपड़े बदल सकती हूँ लेकिन दीदी का दिल कर रहा था कि बदल लेती हूँ कपड़े क्योंकि दीदी मॉडर्न ख्यालों की थीं। फिर दीदी ने बोला।
दीदी: ठीक हाँ अंकल जी मैं बदल लेती हूँ लेकिन आप बाहर ही रहना।
मैं अभी भी दुकान के नीचे बारिश रुकने का वेट कर रहा था। दोपहर के टाइम वैसे भी ज्यादातर दुकानें बंद रहती हैं। ऊपर से बारिश हो रही है और कोई भी बाहर नहीं आने वाला। मैं बहुत देर से बाहर खड़ा था तो मैंने दीदी को कॉल किया।
मैं: दीदी आप ठीक हो ना? बाहर बारिश हो रही है।
दीदी: हाँ मैं ठीक हूँ। मैं मोची अंकल की दुकान पर ही खड़ी हूँ।
मैं: अच्छा दीदी मैं भी उधर आ रहा हूँ।
दीदी: अरे तेरे पास सामान होगा। अगर तू आएगा तो बारिश में सामान खराब हो जाएगा। तू बारिश के रुकने का वेट कर और जल्दी आ जइयो।
मोची की दुकान और मार्केट की दूरी 10 मिनट की थी पैदल। फिर मैंने कॉल काट दी और फोन में कुछ न कुछ करते रहा। बारिश रुकने का वेट कर रहा था। उधर दीदी अपने कपड़े चेंज कर रही थीं। दीदी ने झोपड़ी का दरवाजा लगा दिया लेकिन दरवाजा टूटा हुआ था। ठीक से नहीं लग रहा था।
फिर दीदी ने अपनी साड़ी उतारी और ब्लाउज और पेटीकोट में हो गईं। दीदी का ब्लाउज और पेटीकोट भी गीला था जो दीदी के शरीर से चिपक रखा था। फिर दीदी ने धोती को अपने शरीर पर लपेट लिया। वो धोती दीदी के थाई से थोड़ा सा ही नीचे आ रहा था। दीदी ऐसी लग रही थीं जैसे दीदी ने कोई नाइट सूट पहन रखा हो। दीदी ने उसको लपेटकर अपनी पेटीकोट भी उतार दी।
उसके बाद दीदी ने अंकल को बोला: अंकल जी मैंने कपड़े चेंज कर लिए हैं। आप आ सकते हैं।
अंकल के झोपड़ी में आते ही अंकल ने दीदी को देखा और आँखें फटी की फटी रह गईं। दीदी ने धोती इस तरह से लपेट रखा था कि दीदी के थाई पूरी दिख रही थीं। दीदी की थाई एकदम गोरी दूध की तरह। अंकल दीदी को देखते ही रहे। दीदी ने अपने आप को घूरता देखा। दीदी बोलीं।
दीदी: अंकल जी।
परवेज: हाँ बेटी।
दीदी: कर लिए मैंने चेंज।
परवेज: वो तो मैं देख रहा हूँ तुमने कपड़े चेंज कर लिया।
दीदी: हम्म।
परवेज: बेटा तुम खड़ी क्यों हो? चारपाई पर बैठ जाओ।
परवेज के झोपड़ी में ज्यादा सामान नहीं था। दीदी चारपाई पर बैठ गईं। और परवेज भी दीदी के बगल में बैठ गया।
परवेज: बेटा तुमको कुछ चाहिए?
दीदी: नहीं अंकल जी।
परवेज: बेटा तुम्हें अब तो ठंड नहीं लग रही ना?
दीदी: नहीं अंकल जी अब नहीं लग रही।
परवेज: वैसे बेटा मैं तो तुम्हारा नाम ही पूछना भूल गया। क्या नाम है तुम्हारा?
दीदी: धृति नाम है मेरा।
परवेज: अच्छा। और तुम्हारे घर में कौन-कौन है?
दीदी: मेरे हस्बैंड चेन्नई में जॉब करते हैं। अभी मैं अपने मम्मी-पापा के घर रह रही हूँ। उधर मैं, मम्मी-पापा और मेरा भाई ही है।
परवेज: अच्छा।
दीदी: आपके परिवार में कौन-कौन है?
परवेज: बेटा मेरे परिवार वाले तो सारे गाँव में रह रहे हैं। मेरे बेटे ने भी मुझे छोड़ दिया और मेरी बेगम को गुजरे 10 साल हो गए हैं। (अंकल ये बातें रोते हुए शक्ल के साथ बोल रहे थे।)
दीदी: अरे आप रोइए मत अंकल जी।
परवेज रोते-रोते अपना सर दीदी के शोल्डर्स पर रख देता है। दीदी को एकदम से शॉक लगता है लेकिन दीदी कुछ बोल नहीं पातीं। दीदी अंकल को चुप करवाती हैं और बोलती हैं।
दीदी: अंकल जी मत रोइए। मैं हूँ ना आपके परिवार की मेंबर। आज से मैं आपकी बेटी जैसी ही हूँ। आप मुझसे कोई भी काम बोल सकते हैं।
अंकल: सच बेटा तुम आओगी रोज़ मिलने मुझसे?
दीदी: ठीक है अंकल जी आ जाऊँगी रोज़ मिलने।
परवेज मन ही मन खुश होने लगा। उसका प्लान वर्क कर रहा था। दीदी उसके जाल में आ रही थीं। ऐसे ही दोनों बातें कर रहे थे। बारिश भी रुकने वाली थी। इधर मैं दुकान के नीचे खड़ा दीदी को कॉल लगाता हूँ।
मैं: हेलो दीदी बारिश रुक रही है। मैं आ रहा हूँ आपके पास।
दीदी: अच्छा ठीक है।
बोलकर दीदी ने कॉल काटना भूल गईं। दीदी की और परवेज की बातें मुझे सुनाई दे रही थीं।
दीदी: अंकल जी मेरा भाई इधर आ रहा है। मेरे को जल्दी कपड़े पहनने होंगे नहीं तो उसने मेरे को ऐसा देख लिया तो कुछ गलत सोच लेगा।
मैं उनकी सभी बातें सुन रहा था।
परवेज: अच्छा ठीक है बेटा बदल लो लेकिन तुम्हारे कपड़े तो सूखे नहीं हैं। तुम क्या पहनोगी?
दीदी: मैं वही पहन लेती हूँ।
परवेज: बेटा एक काम करो। तुम साड़ी पहन लो और बाकी का इधर छोड़ दो। कल जब तुम आओगी तो मैं तुम्हें दे दूँगा।
दीदी: अंकल जी मैं कैसे अपने कपड़े इधर छोड़कर जा सकती हूँ?
परवेज: बेटा अब तो हम दोस्त हैं। दोस्त में तो चलता है।
दीदी: अच्छा ठीक है अंकल। आप बाहर जाइए।
दीदी ने जल्दी से धोती को उतारी और बिना पेटीकोट में साड़ी पहन ली। और मैं दुकान के बाहर पहुँचने वाला था। मैंने कॉल काटकर दीदी को वापस से कॉल किया।
मैं: दीदी आप कहाँ हो?
दीदी: मैं मोची अंकल के दुकान के अंदर हूँ।
मैं: दीदी आप अंदर क्या कर रही हैं? बाहर आओ।
दीदी: आ रही हूँ।
दीदी ने जल्दी से कपड़े ठीक किए और बाहर आ गईं।
मैं: आप अंदर क्या कर रही थीं?
दीदी: बारिश से बचने के लिए अंदर गई थीं।
मैं: अच्छा।
दीदी और मैं जब जा रहे थे तो दीदी बोलीं एक मिनट।
दीदी: अंकल जी मेरी सेंडल ठीक कर देना। मैं कल आकर ले जाऊँगी।
परवेज: ठीक है बेटा।
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फिर हम निकल गए। अंकल पीछे से दीदी की हिलती हुई गाँड देख रहे थे। फिर हम घर पहुँच गए और रात हो गई। उधर परवेज दीदी की पेटीकोट को सूँघके दीदी के नाम की मुठ मार रहा था। ओह धृति मेरी रंडी। एक बार मिल जा। तेरे को रगड़-रगड़कर चोदूँगा मेरी रंडी। आह!!! और दीदी की पेटीकोट पर माल छोड़ दिया और सो गया।
नेक्स्ट डे मॉर्निंग में दीदी ने मेरे को उठाया और बोला जल्दी आ रेडी होकर नाश्ता कर ले। फिर मैं रेडी होकर नाश्ता करने चला गया। उधर पापा और दीदी बैठी थीं और मम्मी नाश्ता लगा रही थीं। फिर मम्मी भी आकर बैठ गईं।
पापा: अरे सुनो। मैं तुमको रात को बताना भूल गया। हमको आज 10:00 बजे गाँव के लिए निकलना है।
मम्मी: लेकिन क्यों? और आपने मेरे को रात को भी बताया नहीं।
पापा: अरे मेरे दिमाग से निकल गया था। वो जमीन को लेकर कुछ काम है और उधर मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए एक महीने के लिए जाना है।
मम्मी: एक महीने के लिए? और बच्चों का क्या? वो एक महीने के लिए उधर क्या करेंगे? प्रथम की पढ़ाई का क्या?
पापा: अरे इनको इधर ही रहने देते हैं। वैसे धृति है ही इधर।
दीदी: हाँ मम्मी मैं रख लूँगी इसका ख्याल। आप दोनों जाइए।
मम्मी: अरे तुम कैसे रख लोगी?
दीदी: मैं रख लूँगी।
पापा: अरे ये बोल रही है तो रहने दो इनको इधर।
मम्मी: ठीक है।
नाश्ता करने के बाद मम्मी ने अपना और पापा का सामान पैक किया। और 10:00 बजे गाँव के लिए निकल गए। इधर मैं और दीदी ही रह गए थे और दोपहर हो गई थी।
दीदी को याद आया: मेरे को तो सेंडल लेनी जानी है और कल के कपड़े भी।
मैं: दीदी मैं जा रहा हूँ अपने दोस्त के पास। अब सीधा शाम को आऊँगा।
दीदी: अच्छा ठीक है जा। लेकिन 5 बजे से पहले आ जइयो।
मैं: 5 नहीं 6 बजे तक आ जाऊँगा।
दीदी: ठीक है।
फिर मैं निकल गया। मैं घर से निकलकर अपने दोस्त राज के पास गया लेकिन वो घर पर था नहीं। फिर मैं अपने दोस्त हर्ष के पास जा रहा था तो मुझे याद आया वो तो अपने गाँव गया है। फिर मैं वापस घर की तरफ जा ही रहा था तो मैंने दीदी को देखा। वो मार्केट की तरफ जा रही थीं।
मैंने सोचा दीदी मार्केट की तरफ क्या करने जा रही हैं। फिर मुझे कल की बात याद आई तो मैं दीदी का पीछा करने लगा। दीदी ने आज येलो कलर की साड़ी और बैकलेस ब्लाउज पहना था और हाई हील्स की सेंडल पहन रखा था। दीदी को ऐसे देखकर मेरे अंदर कुछ होने लगा।
वैसे भी मैं गंदी-गंदी स्टोरी पढ़ता था जिसमें बहन किसी न किसी से चुद रही होती है। पता नहीं क्यों मैं दीदी को देखकर उस लड़की की जगह रखकर इमेजिन करने लगा और मेरा खड़ा होने लगा। चलते टाइम दीदी की गाँड क्या ही लग रही थी। फिर दीदी परवेज की दुकान पहुँचीं और मैं दूर से देख रहा था। अभी अंकल ने दुकान नहीं लगाई थी। वो अपने झोपड़ी में थे।
दीदी: अंकल जी! अंकल जी!
परवेज अंदर सो रहा था। तो दीदी ने उसके घर के आगे जो प्लास्टिक की बड़ी सी पन्नी हटाई और अंदर चली गईं। मेरे को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तो मैं उनके पास गया। लेकिन मैं उनको देख नहीं सकता था। बस आवाज सुन पा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: अंकल जी।
परवेज: (चिल्लाकर) कौन है जो दिमाग खराब कर रहा है?
दीदी: अंकल जी मैं।
परवेज: कौन मैं?
दीदी: अरे मैं धृति।
परवेज फिर जल्दी से दरवाजे के पास गया और गेट खोला और बोला।
परवेज: अरे बेटा तुम इस टाइम?
दीदी: वो मैं कल के कपड़े और सेंडल लेने आई हूँ।
परवेज: अच्छा धृति बेटा लेकिन सेंडल तो मैंने ठीक नहीं की। वो अभी धूप है ना इसलिए।
दीदी: अच्छा अंकल जी तो मेरे कपड़े दे दीजिए। मैं सेंडल शाम को लेकर चली जाऊँगी।
परवेज: अरे धृति बेटा तुम अंदर तो आओ। धूप में अभी वापस जाओगी फिर वापस आओगी। इससे अच्छा तुम थोड़ी देर इधर वेट कर लो। जैसे ही धूप कम होगी मैं सेंडल ठीक कर दूँगा।
दीदी मन में: हाँ थोड़ी देर वेट कर लेती हूँ। अभी प्रथम भी घर पर नहीं है। मेरा टाइम पास भी हो जाएगा।
दीदी: अच्छा ठीक है अंकल जी।
और दीदी और अंकल झोपड़ी में चले गए और दरवाजा लगा लिया। अब मैं अंदर देखने के लिए कोई जगह देख रहा था लेकिन मेरे को कोई जगह नहीं मिली तो मैं प्लास्टिक हटाकर गेट के पास गया और गेट टूटा हुआ था तो उसमें से अंदर देखने लगा।
उस समय परवेज धोती और बनियान में था। और दीदी को देखकर उसका लंड जैसे जान सी आ गई क्योंकि दीदी का ब्लाउज बैकलेस था। ऊपर से दीदी का क्लीवेज बहुत ज्यादा दिख रहा था जिसे देखकर परवेज अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। लेकिन कैसे-कैसे उसने अपने आपको कंट्रोल किया और दीदी से बोला।
परवेज: धृति बेटा खड़ी क्यों हो। चारपाई पर बैठ जाओ।
दीदी: ठीक है अंकल जी। अंकल जी सैंडल में कितना टाइम लगेगा?
परवेज: बेटा उसमें अभी तो टाइम लगेगा। धूप कम होते ही मैं ठीक कर दूँगा। तुम ये बताओ तुमको कुछ चाहिए?
दीदी: नहीं अंकल जी मैं ठीक हूँ। मेरे को कुछ नहीं चाहिए।
परवेज: बेटा कल तुम ठीक से तो घर पहुँच गई थीं ना?
दीदी: हाँ परवेज जी मैं कल ठीक से पहुँच गई थी।
परवेज दीदी से बात करते टाइम भी दीदी के क्लीवेज देख रहा था और अपना लंड मसल रहा था जो कि दीदी ने नहीं देखा था।
दीदी: आप बस मेरे बारे में ही पूछते रहेंगे क्या? कि मैं भी आपसे पूछूँ क्यों?
(दीदी ने ये मजाकिया तौर में कहा)
परवेज: अरे बेटा पूछो पूछो।
दीदी: आप बताइए आप कैसे हैं?
परवेज: (थोड़ा उदास होकर) क्या बताऊँ बेटा। अपनी बेगम के बिना बड़ी मुश्किल से रह पा रहा हूँ। दिन-रात उसकी ही याद आती है।
दीदी परवेज को दुखी ना होने के लिए बोलती है जिससे परवेज थोड़ा ठीक होता है।
दीदी: वैसे अंकल जी आंटी जी इतनी सुंदर थीं क्या?
परवेज: बेटा बेगम तुम्हारी तरह ही थीं। एकदम तुम्हारी तरह।
दीदी: अच्छा मेरी तरह।
(और दीदी मुस्कुराने लगी.)
परवेज: पता है बेटा जब भी तुम्हें देखता हूँ तो बेगम की याद आ जाती है।
दीदी: अच्छा अंकल जी मेरे कपड़े!
परवेज: रुको बेटा मैं तुम्हें लाकर देता हूँ।
ये वही पेटीकोट था जिस पर परवेज ने रात भर मुठ मारी थी।
परवेज: ये लो बेटा।
दीदी उसको लेने के लिए खड़ी हुईं और लेकर अपने पास रख लिया। जब दीदी वापस से बैठने जा रही थीं तो परवेज ने देखा दीदी के गाँड के पास कुछ लगा हुआ है साड़ी के ऊपर। परवेज देखकर बोला।
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परवेज: बेटा तुम्हारे पीछे कुछ लगा है।
दीदी: मेरे पीछे? क्या लगा है अंकल जी?
परवेज: हाँ बेटा तुम्हारे पीछे।
फिर दीदी उसको साफ करने लगीं। फिर अंकल से बोलीं।
दीदी: अंकल जी साफ हो गया।
परवेज: नहीं बेटा अभी भी लगा है।
दीदी वापस से साफ करी लेकिन साफ नहीं हुआ था। दीदी वापस से बोलीं।
दीदी: अब अंकल जी?
परवेज: नहीं बेटा।
दीदी: अंकल जी आप अच्छे से बताइए कहाँ लगा है।
परवेज: बेटा तुम्हारे गाँड पर कुछ लगा है।
दीदी गाँड सुनते ही शॉक हो गईं। और बोलीं।
दीदी: अंकल जी ऐसे कोई बोलता है क्या?
परवेज: बेटा तुमने ही तो बोला था ठीक से बोलने के लिए। तो बता दिया।
दीदी: फिर भी अंकल जी आप उसको कुछ और भी बोल देते।
परवेज: बेटा अब गाँड को गाँड ही तो बोलूँगा। तो क्या बोलूँ?
दीदी वापस से शॉक हो गईं। दीदी मन में अब क्या ही बोलूँ इनको। और दीदी साफ करने लगीं। लेकिन साफ नहीं हुआ। अभी भी थोड़ी-बहुत मिट्टी लगी हुई थी।
दीदी: अब साफ हो गया ना?
परवेज: नहीं बेटा अभी भी लगा है। रुको एक मिनट।
बोलकर दीदी के पास गया और अपने हाथ से दीदी की गाँड को साड़ी के ऊपर छुआ और साफ करने लग गया। जैसे ही परवेज ने दीदी की गाँड छुई दीदी शॉक हो गईं और दूर हट गईं। परवेज को मजे ही आ रहे थे। दीदी की गाँड इतनी मुलायम थी जिसका मजा वो ले ही रहा था लेकिन दीदी दूर हो गईं और बोलीं।
दीदी: क्या कर रहे हो आप?
परवेज: बेटा साफ कर रहा था।
दीदी: मैं खुद कर लूँगी अंकल जी।
और दीदी साफ करने लगीं लेकिन अभी भी ठीक से साफ नहीं हुआ था तो अंकल बोले।
परवेज: बेटा अभी भी साफ नहीं हुए। लाओ मैं कर देता हूँ। तुम ऐसे ही घर जाओगी क्या? करने दो।
दीदी: नहीं अंकल जी।
परवेज: बात मानो बेटा।
दीदी मन में सोची छोड़ो करवा लेती हूँ। ऐसे घर थोड़ी जाऊँगी।
दीदी: ठीक है अंकल जी।
फिर दीदी अंकल की तरफ अपनी पीठ कर दी। फिर अंकल ने अपना हाथ दीदी के मुलायम गाँड पर रखा और दीदी की गाँड महसूस करने लगे और साफ करते-करते परवेज से कंट्रोल नहीं हुआ और उन्होंने दीदी की गाँड दबा दी। दीदी की सिसकी निकल गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: आआह्ह्ह!! अंकल जी क्या कर रहे हो?
परवेज: बेटा साफ कर रहा हूँ। बस साफ होने वाला है।
फिर परवेज दीदी की गाँड देखकर पागल सा हो गया था और वो भूल गया हो क्या कर रहा है और दीदी की गाँड पर अपना मुँह लगाकर सूँघने लगा। दीदी एकदम से शॉक हो गईं अंकल को इस तरह से करने से और अंकल को दूर करने लगीं लेकिन अंकल पागल हो गया था दीदी की गाँड देखकर।
दीदी उससे दूर होने की कोशिश करने लगीं लेकिन परवेज ने दीदी की गाँड बिल्कुल टाइट पकड़ रखा था और अपना सिर दीदी की गाँड में रगड़ने लगा। और बोलने लगा लेकिन दीदी कैसे-कैसे अंकल से दूर हुईं और अंकल से बोलीं।
दीदी: अंकल जी क्या कर रहे थे आप? आपको बिल्कुल भी शर्म नहीं आई ये सब करते हुए?
परवेज: बेटा माफ कर दो। तुम्हारी गाँड देखकर मेरे को अपनी बेगम की गाँड याद आ गई थी और मेरे को लगा जैसे मेरी बेगम हो तुम। माफ कर दो बेटी।
दीदी: अंकल जी अब आप बहाने मत बनाइए और मेरी सैंडल दीजिए। मैं जा रही हूँ।
परवेज: बेटा सच में मेरे को तुम मेरी बेगम लगी थीं। प्लीज बेटा माफ कर दो। मत जाओ ऐसे प्लीज बेटा।
और रोने की एक्टिंग करने लगा। दीदी परवेज को रोता हुआ देख परवेज को चुप कराने लगीं और बोलीं।
दीदी: अंकल जी मैं इस बार तो आपको माफ कर रही हूँ लेकिन अगली बार ऐसा कभी मत करना। ठीक है?
परवेज: बेटा मैं क्या करूँ। तुम्हें देखकर बेगम याद आ गई और कंट्रोल नहीं हुआ। माफ कर दो।
मैं ये सब बाहर खड़ा होकर देख रहा था जिसे देखकर मैं पागल सा हो गया और मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपने लंड को कंट्रोल करके कैसे-कैसे अंदर देखने लगा।
दीदी: मैं आपकी बेगम थोड़ी हूँ जो आप ये सब करने लगे।
परवेज: बेटा फिर बन जाओ ना।
दीदी: अंकल जी आप फिर से?
परवेज: अरे बेटा मजाक कर रहा था।
(और हँसने लगा.)
जिसे देखकर दीदी भी हँसने लगीं।
ऐसे ही फिर दोनों हँसी-मजाक करने लगे।
फिर दीदी बोलीं।
दीदी: अंकल जी मैं घर जा रही हूँ। आप सैंडल में करो। कल दे देना। मैं बहुत देर से इधर हूँ।
परवेज: बेटा थोड़ी देर रुको। मैं अभी ठीक कर देता हूँ।
दीदी: अंकल जी नहीं। मेरे लेट हो रहा है।
परवेज: अच्छा बेटा एक काम करो। अपना नंबर मेरे को दे दो। मैं जब ठीक कर दूँगा तो मैं तुमको बता दूँगा।
दीदी: अच्छा ठीक है।
और नंबर बताने लगीं। परवेज दीदी का नंबर अपने स्मार्टफोन में नोट करने लगा और व्हाट्सऐप पर ऐड कर लिया। फिर दीदी निकलने ही वाली थीं कि मैं उधर से जल्दी भागकर छुप गया। फिर दीदी अपने घर चली गईं। और मैं भी थोड़ी देर बाद घर पहुँच गया।
दीदी: कहाँ था इतने देर से?
मैं: कहीं नहीं।
दीदी: जा जल्दी से हाथ-पैर धो ले। जब तक मैं खाना बना रही हूँ।
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उसके बाद कुछ नहीं हुआ। दीदी खाना बनाने लगीं और मैं वो सारी बातें सोचकर पागल सा हो रहा था। फिर मेरे को याद आया उसने दीदी का नंबर लिया है। दीदी का फोन रूम में था। मैं जल्दी से दीदी का फोन लिया और दीदी का व्हाट्सऐप को अपने फोन में भी लॉगिन कर लिया और दीदी के फोन में एक ऐप डाउनलोड कर दी जिससे दीदी की सारी कॉल मेरे पास आएगी और ऐप हाइड कर दी।
मेरे को लगा आज जो भी हुआ है उसके बाद परवेज कुछ ना कुछ जरूर करेगा। उसके बाद मैं फोन रखकर अपने रूम में गया और फोन चलाने लगा। 9:00 बजे दीदी ने मेरे को बुलाया और हमने खाना खाया। उसके बाद हमने टीवी देखा और मम्मी-पापा से बात की और फिर हम 10:00 बजे के बाद सोने चले गए।
रात के 11:00 बजे दीदी अपने रूम में सो रही थीं और मैं अपने रूम में रात को अपने फोन में ऐसे ही कुछ देख रहा था। एकदम से दीदी के फोन पर परवेज अंकल का मैसेज आया जिसे देखकर मैं शॉक हो गया। इतनी रात को परवेज अंकल मैसेज क्यों कर रहे हैं? वो भी दीदी को। फिर दीदी ने मैसेज सीन किया और रिप्लाई किया। दीदी और परवेज की चैट-
परवेज: हेलो
दीदी: कौन?
परवेज: बेटा मैं परवेज।
दीदी: अच्छा अंकल जी आप हैं। क्या हो गया अंकल जी इतनी रात को मैसेज कर रहे हैं?
परवेज: बेटा कुछ नहीं। घर पर अकेला बोर हो रहा था तो सोचा तुमसे ही बात करूँ।
दीदी: अच्छा अंकल जी।
परवेज: हाँ बेटा। जब तुम साथ रहती हो तो मेरे को अच्छा लगता है। इसलिए तुमसे बात करने का मन किया तो मैसेज कर दिया।
परवेज कोई गँवार नहीं था। परवेज 10वीं क्लास तक पढ़ाई किया।
परवेज: बेटा क्या कर रही?
दीदी: कुछ नहीं। सोने जा रही थी।
फिर परवेज और दीदी में ऐसे ही नॉर्मल बातें हुईं और सुबह हो गई। दीदी सुबह नाश्ता बना रही थीं। और मैं सोकर उठा और नहाकर दीदी के पास गया। दीदी को गुड मॉर्निंग बोला और नाश्ते के लिए बैठ गया। दीदी ने नाश्ता लगाया और दीदी और मैंने नाश्ता करने लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी ने आज जो साड़ी पहनी थी उसमें दीदी एकदम रंडी की तरह लग रही थीं। दीदी के क्लीवेज आज बाकी के दिनों से कुछ ज्यादा ही दिख रहे थे। ऊपर से दीदी का नाभि भी दिख रहा था। दीदी को देखकर मेरा मन दीदी को चोदने का करने लगा लेकिन मैंने अपने आपको कंट्रोल किया। वैसे भी मैं दीदी के साथ कुछ कर भी नहीं सकता था। फिर दीदी मुझसे बोलीं।
दीदी: तेरे कॉलेज कब से स्टार्ट हो रहे हैं?
मैं: दीदी बस कुछ दिनों में होने ही वाले हैं।
दीदी: अच्छा तो आज क्या करने का प्लान है? कि दिन भर घूमता ही रहेगा?
मैं: दीदी कुछ नहीं। थोड़ी देर बाद अपने दोस्त के घर जाऊँगा। उसके घर पर जाकर बीजीएमआई खेलूँगा।
दीदी: तू यही करता रहियो पूरे दिन। और कोई काम तो है नहीं तेरे को।
मैंने कुछ नहीं बोला और नाश्ता करके थोड़ी देर के लिए अपने रूम में चला गया और दीदी टीवी देखने लगीं। 11:00 बजे मैं दीदी को बोलकर अपने दोस्त विक्रम के घर चला गया। मेरे से पहले विक्रम के घर पर भावेश और नितेश भी आ रखे थे। फिर हम सारे विक्रम के रूम में गए और गेम खेलने लगे। ऐसे ही हम सब गेम खेल रहे थे। गेम खेलते टाइम मेरे फोन पर मैसेज आया परवेज का।
परवेज ने मैसेज किया था: बेटा तुम्हारी सैंडल ठीक हो गई है।
फिर थोड़ी देर बाद दीदी ने रिप्लाई किया: ओके अंकल। मैं आ रही हूँ लेने।
मेरे को लगा आज भी कुछ ना कुछ होने वाला है। मैं भी चलता हूँ। मैंने अपने दोस्तों से बोला कि मैं घर जा रहा हूँ लेकिन उन्होंने जाने नहीं दिया। और ऐसे ही 30 मिनट निकल गए। उसके बाद मैं अपने दोस्त के घर से निकला। उस टाइम 12:30 हो रहे थे। जब मैं परवेज की दुकान के पास पहुँचा और उसके घर देखा तो उसका दरवाजा बाहर से बंद था।
मैंने सोचा परवेज भी घर पर नहीं है और दीदी भी नहीं है तो दोनों गए कहाँ? मेरे दिमाग में गंदे-गंदे आइडिया आने लगे कि परवेज दीदी को कहीं ले जाकर चोद रहा होगा। ऐसे ही फिर मैं वापस से अपने दोस्त के घर जा रहा था तो मैंने दीदी और परवेज को देखा। दीदी और परवेज के हाथ में सामान था। मेरे को लगा दीदी सामान खरीदने गई होगी। फिर मैं उनको चुपके से देखने लगा।
दीदी: अंकल जी आज गर्मी कुछ ज्यादा ही है ना?
परवेज: हाँ वो तो दिख रहा है धृति बेटा। तुम्हारे पसीने से साड़ी गीली हो रही है।
दीदी इस पर मुस्कुराने लगीं।
फिर परवेज बोला।
परवेज: बेटा आइसक्रीम खाओगी?
दीदी: चलो अंकल जी। गर्मी में उसे खाकर ही अच्छा लगेगा।
परवेज मन में: तेरी गर्मी तो मैं अपने आइसक्रीम से निकालूँगा रंडी। एक बार बस हाथ आ जा मेरे।
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फिर दीदी और परवेज ने एक-एक आइसक्रीम ले ली। फिर दीदी और परवेज आइसक्रीम खाने लगे।
परवेज: बेटा आइस को हमने पहले चाटते हैं उसके बाद मुँह में लेकर चूसते हैं। वैसे खाओ तुमको और भी मजा आएगा।
दीदी: अच्छा अंकल जी।
फिर दीदी वैसे ही आइसक्रीम खाने लगीं और परवेज दीदी को देख रहा था खाते हुए।
परवेज: बेटा तुम्हारे होठ कितने गुलाबी हैं। एकदम मेरी बेगम की तरह।
दीदी: क्या अंकल जी। आप हमेशा मेरे को अपनी बेगम की तरह ही लग रही हो कहते हो। मैं आपकी बेगम की तरह लगती हूँ क्या?
परवेज: हाँ बेटा तुम एकदम उसकी जैसी हो।
दीदी: अच्छा बताओ किस तरह मैं आपकी बेगम लगती हूँ।
परवेज: बेटा बुरा मत मान।
दीदी: बोलो अंकल जी। नहीं मानूँगी।
परवेज: तुम्हारे ही होठ, तुम्हारी कमर और तुम्हारी बड़ी सी गाँड एकदम मेरी बेगम की तरह है।
दीदी: क्या अंकल जी। कोई ऐसा बोलता है क्या?
परवेज: बेटा मैंने कहा था तुम बुरा मान जाओगी।
दीदी: नहीं अंकल जी लेकिन आपको ऐसा वर्ड यूज नहीं करना चाहिए था।
परवेज: बेटा मुझे क्या पता उसको और क्या बोलते हैं। वैसे तुम्हारी एक चीज मेरी बेगम जैसे नहीं है।
दीदी: क्या अंकल जी?
परवेज: बताऊँ। तुम्हारे चूचे मेरी बेगम से छोटे हैं। इसमें और मेहनत करनी पड़ेगी।
अंकल के बोलने पर दीदी एकदम से शर्मा गईं और बोलीं।
दीदी: अंकल जी आप फिर से!
परवेज: सही में। तुम्हारे मेरी बेगम से छोटे हैं।
अंकल और दीदी की बात सुनते-सुनते मेरा तो लंड पागल सा हो रहा था। और अंकल और दीदी बात करते-करते कब घर आ गए पता ही नहीं चला।
दीदी: ये लो अंकल जी। पता ही नहीं चला कब हम घर आ गए।
परवेज: अच्छा ये है तुम्हारा घर।
चलो फिर मैं चलता हूँ।
दीदी: अरे अंकल आप पहली बार मेरे घर आए हो। कुछ खा-पीकर जाना। वैसे भी अभी धूप है।
परवेज: अच्छा बेटा।
फिर दीदी और परवेज घर गए और मैं भी उनके पीछे-पीछे गया और बाहर खिड़की से अंदर देखने लगा। दीदी ने सारा सामान घर में रख दिया। अंकल सोफे पर बैठ गए और दीदी अंकल के लिए पानी लेकर आईं और जैसे ही दीदी पानी देने के लिए गईं दीदी के हाथ से पानी परवेज के धोती पर गिर गया। और उसका लंड धोती में एकदम शेप में दिखने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: सॉरी अंकल जी। गलती से गिर गया।
परवेज: कोई नहीं बेटा।
दीदी: आप अपनी धोती मेरे को दे दो। मैं धूप में डालकर आती हूँ।
परवेज: अच्छा बेटा।
फिर दीदी अंदर से एक टॉवल लेकर आईं और परवेज को दे दिया। परवेज ने टॉवल को लपेट लिया और धोती दीदी को दे दी। दीदी धूप में डालकर आ गईं। दीदी नीचे आईं और बोलीं।
दीदी: अंकल जी मैं चाय बनाकर आऊँ।
परवेज: बेटा तो मैं इधर क्या करूँगा। चलो मैं भी तुम्हारी हेल्प कर देता हूँ चाय बनाने में।
दीदी चाय बनाने के स्लैब के पास गईं और परवेज दीदी के पीछे खड़ा होकर दीदी की बड़ी गाँड देख रहा होता है।
परवेज: धृति बेटा तुम हो बड़ी खूबसूरत।
दीदी मुस्कुराने लगीं।
दीदी ऊपर डोरे में से सामान निकाल रही थीं लेकिन दीदी का हाथ नहीं पहुँच रहा था तो अंकल एक से पीछे गए और सामान उतारने के बहाने दीदी की गाँड के दरार में अपना लंड रगड़ने लगे जिससे दीदी को एक बहुत बड़ा वाला शॉक लगा।
दीदी ने इस चीज की कल्पना नहीं की थी कि अंकल ऐसा करेंगे। दीदी अंकल से हटने का ट्राई करने लगीं लेकिन अंकल पीछे खड़े थे जिससे दीदी हट नहीं सकीं और अंकल भी फायदा उठाकर दीदी की गाँड में धक्का देने लगे और एक हाथ से दीदी की गाँड पकड़ ली और एक हाथ से सामान उतारने लगे। दीदी बोलीं।
दीदी: अंकल जी क्या कर रहे हो आप?
परवेज: बेटा सामान उतार रहा हूँ।
दीदी: मेरे पीछे आपका कुछ चुभ रहा है।
परवेज: (मुस्कुराकर) बेटा क्या चुभ रहा है?
दीदी: वो…….
परवेज: वो क्या? नाम बताओ।
दीदी: (शर्माते हुए) आपका हथियार।
दीदी गरम सी होने लगीं और शर्माने लगीं। दीदी ने ऐसा कहीं नहीं सोचा था कि कोई ऐसा करेगा।
परवेज: मेरा कौन सा हथियार?
दीदी: आपका जो मेरे पीछे चुभ रहा है।
अंकल ने दीदी को सामान उतारकर दे दिया लेकिन दूर नहीं हटा और दीदी की गाँड एक हाथ से दबाते रहा और एक हाथ से दीदी की कमर को पकड़ रखा था।
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परवेज: क्या चुभ रहा है बेटा? ठीक से बोलो और कहाँ चुभ रहा है।
दीदी: (बहुत धीरे बोलीं) आपका लंड मेरी गाँड पर चुभ रहा है।
दीदी परवेज से थोड़ा खुलने लगी थीं।
परवेज मुस्कुराने लगा और बोला।
परवेज: अच्छा बेटा लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ। मैं तो तुम्हारी मदद कर रहा था।
दीदी: अब तो आप थोड़ा पीछे हटिए।
परवेज: बेटा मैं तो बस देख रहा हूँ।
दीदी: थोड़ा पीछे होकर देखिए अंकल जी। आपका हाथ और आपका हथियार चुभ रहा है।
परवेज: बेटा पीछे से ठीक से नहीं देखेगा।
दीदी: अंकल जी आप तो मेरे को अपनी बेगम ही समझने लगे।
अंकल मुस्कुराने लगा और दीदी की गाँड पर धक्का मारने लगा। मैं ये सब बाहर से देख रहा था। मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा और अंदर देखने लगा।
परवेज: क्या करूँ बेटा। तुम मुझे मेरी बेगम लगती हो।
दीदी: लगती हूँ अंकल जी। हूँ नहीं। अब हटिए। चाय बन गई।
परवेज: अच्छा।
फिर परवेज दीदी से दूर हुआ और दोनों बाहर जाकर चाय पीने लगे। उसके बाद परवेज बोला।
परवेज: बेटा तुम्हारे तरबूज बड़े ही बड़े हैं।
दीदी: क्या? कुछ समझ में नहीं आया। क्या तरबूज?
परवेज: बेटा तुम्हारी गाँड एकदम मेरी बेगम की तरह।
दीदी मुस्कुराने लगीं।
परवेज: पता है बेटा मैं रोज़ उनको रगड़ा करता था।
दीदी को शर्म आने लगी और साथ-साथ दीदी गरम भी होने लगीं। दोनों ऐसे ही बातें करते रहे और 4 बज गए। उसके बाद अंकल अपने घर चले गए। और मैं भी थोड़ी देर बाद घर आ गया। आज दीदी कुछ खुश सी लग रही थीं। ऐसे ही रात हो गई।
हमने डिनर किया। उसके बाद 10 बजे सोने चले गए। दीदी और मैं सोने चले गए थे। मैं अपने रूम में जाकर आज जो हुआ सोचकर दीदी के नाम की हिलाने लगा। हिलाते हुए मेरे फोन पर एक मैसेज आया। वो मैसेज किसी और का नहीं परवेज अंकल का था।
परवेज: हेलो.
दीदी ने मैसेज सीन किया और रिप्लाई किया—
दीदी: हेलो अंकल जी.
परवेज: बेटा क्या कर रही हो.
दीदी: कुछ नहीं बस लेटी हुई हूँ.
परवेज: अकेली या किसी के साथ.
दीदी: अकेली ही हूँ। और किसके साथ सोऊँगी.
परवेज: मैं हूँ ना सोने के लिए (हँसने वाला इमोजी भेज दिया).
दीदी: आपने तो मुझको असली में ही अपनी बेगम मान लिया है.
परवेज: तो बन जाओ ना धृति बेटा.
दीदी: अंकल जी दिन पर दिन आप कुछ ज्यादा शरारती हो गए हो। आज आपने किचन में वो सब जानबूझकर किया था ना.
परवेज: (हँसने वाला इमोजी).
परवेज: क्या करूँ बेटा तुम्हारे तरबूज देखकर कंट्रोल ही नहीं हुआ.
दीदी ने मैसेज सीन करके कुछ रिप्लाई नहीं दिया और शर्माने लगीं।
परवेज: कहाँ चली गई.
दीदी: कहीं नहीं.
परवेज: बेटा एक बात पूछूँ.
दीदी: हाँ पूछिए.
परवेज: बेटा तुमने अभी क्या पहना है.
दीदी: क्यों अंकल जी.
परवेज: बताओ ना बेटा.
दीदी: नाइट सूट पहना है.
परवेज: बेटा अपनी एक फोटो भेजो ना.
दीदी: क्यों..
परवेज: बेटा बेगम की याद आ रही है। तुम्हें देखकर याद नहीं आएगी
दीदी: ठीक है अंकल जी.
दीदी ने अंकल को अपनी एक वीडियो भेजी जिसमें दीदी बहुत सेक्सी लग रही थीं।
परवेज: आह! बेटा तुम कितनी सुंदर हो.
दीदी: आप बस मेरी तारीफ ही करते रहते हो.
परवेज: बेटा अभी मौका दो और कुछ भी कर दूँगा (हँसने वाला इमोजी).
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दीदी अंकल से बात करके गरम हो रही थीं। ऐसे ही दोनों की बातें हुईं फिर दीदी सो गईं और मैं भी दीदी के नाम की मुठ मारके सो गया। सुबह जब सोकर उठा दीदी को गुड मॉर्निंग बोला और जब दीदी को देखा तो आँखें फटी की फटी रह गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी ने आज इतनी सेक्सी साड़ी पहनी थी जिसमें दीदी की क्लीवेज कुछ ज्यादा ही दिख रही थी। साथ में दीदी ने आज अपनी साड़ी अपने नेवल के कुछ ज्यादा ही नीचे पहन रखा था। दीदी आज बहुत ही सेक्सी लग रही थीं। दीदी को देखकर मुझे कंट्रोल नहीं हुआ और बाथरूम में जाकर मुठ मारने लगा और फिर फ्रेश होकर आया।
दीदी: चल आ जा बैठ जा। नाश्ता लगा दिया है
मैं: ठीक है
फिर दीदी और मैं नाश्ता खाने लगे। उसके बाद मैं और दीदी कुछ बातें करने लगे।
दीदी: आज का क्या प्लान है
मैं: कुछ नहीं। आज घर पर रहूँगा। मेरा दोस्त आज कहीं गया है
दीदी: अच्छा
उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया और सेक्स स्टोरीज पढ़ने लगा जिसमें बहन किसी दूसरे से चुदती है और भाई वो देखता है चुपके। और स्टोरी पढ़ते टाइम मैं दीदी को इमेजिन करने लगा और हिलाकर सो गया। जब मेरी आँखें खुलीं तो 4 बज रहे थे। मैंने जब अपना फोन चेक किया तो मैं पागल सा हो गया। दीदी और परवेज ने आज ऐसी बातें की थीं जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
परवेज: गुड मॉर्निंग.
दीदी: गुड मॉर्निंग.
परवेज: क्या कर रही हो बेगम जी.
दीदी: अरे वाह! अंकल जी आज बेटा से सीधा बेगम। आप कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ रहे हो.
परवेज: (हँसने वाला इमोजी).
दीदी: कुछ नहीं अंकल जी बस टीवी देख रही थी.
परवेज: अच्छा बेटा आज मार्केट नहीं आओगी। तुम्हें देखने का मन कर रहा है.
दीदी: नहीं अंकल जी आज नहीं आऊँगी.
परवेज: धृति बेटा बेगम बनोगी मेरी (हँसने वाला इमोजी).
दीदी: कैसी बात कर रहे हो अंकल जी.
परवेज: प्लीज बन जाओ.
दीदी: ओके अंकल जी लेकिन हम बस एक्टिंग करेंगे। ठीक है.
परवेज: ठीक है बेगम साहिबा.
परवेज: बेटा मुझे आज से अंकल मत बोलना। मुझे अब नाम से बुलाना। तुम अब मेरी बेगम हो (हँसने वाला इमोजी).
दीदी: हम तो बस एक्टिंग ही तो कर रहे हैं अंकल जी.
परवेज: फिर से अंकल.
दीदी: ओह सॉरी परवेज जी.
परवेज: और मैं तुमको धृति बोलूँगा। ठीक है बेगम साहिबा.
दीदी: (शर्माकर) ठीक है परवेज जी.
परवेज: बेगम क्या पहना है आज तुमने.
दीदी: साड़ी पहनी है परवेज जी.
परवेज: एक फोटो भेजो ना.
दीदी ने फिर परवेज को एक फोटो भेजी।
परवेज: अरे वाह मेरी बेगम तुम तो मुझे मार ही डालोगी.
दीदी शर्माने लगीं।
परवेज: बेगम एक अपनी वीडियो बनाकर भेजो ना जिसमें तुम्हारे आम भी दिखें.
दीदी: आम?
परवेज: अरे बेगम तुम्हारा चूचा.
दीदी: नहीं परवेज जी मैं वैसा नहीं भेज सकती। आप किसी को दिखा दोगे तो.
परवेज: नहीं दिखाऊँगा बेगम। भेजो तो.
फिर दीदी ने 5 मिनट के बाद एक ऐसी वीडियो भेजी जिसे देखकर मेरा लंड पागल हो गया और उधर परवेज का भी।
परवेज: अरे धृति तुमने तो पागल कर दिया एक मेरे लंड को.
दीदी: कैसी बात कर रहे हो परवेज जी.
परवेज: अब अपनी बेगम से कैसे बात की जाती है.
दीदी: हम तो बस एक्टिंग कर रहे हैं ना.
परवेज: अरे धृति डार्लिंग तुम मेरा लंड देखोगी.
दीदी: नहीं परवेज जी.
परवेज ने दीदी को अपने लंड की फोटो भेज दी। उसका लंड 11 इंच का था बहुत मोटा। जिसे देखकर दीदी परवेज को बोलीं—
दीदी: क्या है अंकल जी ये। मैंने आपको मना किया था फिर क्यों भेजा। बात मत करना मुझसे.
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और दीदी ऑफलाइन हो गईं। परवेज ने उसके बाद माफी भी माँगी लेकिन दीदी ने कोई रिप्लाई नहीं दिया। और फिर मैं 5 बजे थोड़ी देर घर से बाहर चला गया और रात को डिनर के टाइम में आया। हमने डिनर कर लिया। उसके बाद हम टीवी देख रहे थे तो दीदी के फोन पर परवेज का फोन आया और मेरे फोन पर भी। जिसे मैंने दीदी से पूछा तो दीदी हड़बड़ाकर बोलीं—
दीदी: तेरे जीजा का फोन है। मैं जा रही हूँ सोने.
बोलकर दीदी अपने रूम में चली गईं। दीदी ने मुझसे झूठ बोला कि जीजा का फोन है लेकिन फोन परवेज का था।
दीदी रूम में जाकर कॉल उठाया और बोलीं—
दीदी: आपने मुझको कॉल क्यों किया। मेरा भाई भी था मेरे साथ। उसको तो मैं झूठ बोलकर आज बच गई.
परवेज: धृति जी मैंने आज दिन के लिए माफी माँगने के लिए कॉल किया था। क्या झूठ बोला आपने अपने भाई से.
दीदी: (शर्माकर) कि तेरे जीजा का फोन आया है.
परवेज: (खुश होकर) तो आपने क्या झूठ बोला। मैं जीजा ही तो हूँ आपके भाई का बेगम साहिबा.
दीदी ये सुनकर खिलखिलाकर हँसने लगीं और बोलीं—
दीदी: परवेज जी आप और आपकी बातें दोनों मजाकिया हैं.
परवेज: माफ कर दिया ना मुझे.
दीदी: हाँ माफ कर दिया.
परवेज: एक बार पूछूँ बुरा नहीं मानोगी.
दीदी: पूछो.
परवेज: कैसे लगा आपको मेरा लंड.
दीदी सरप्राइज हो गईं।
दीदी: क्या बोल रहे हो आप.
परवेज: मैंने बोला था बुरा मान जाओगे। बताओ ना कैसे लगा.
दीदी: (धीरे से) बड़ा है आपका.
परवेज: आपके हस्बैंड से भी बड़ा.
दीदी: (शर्माकर) हाँ बहुत बड़ा है आपका.
परवेज: क्या बड़ा है। ठीक से बोलो.
दीदी: आपका लंड.
परवेज ने दीदी को गरम कर दिया था।
परवेज: आपने कभी मुँह में लिया है.
दीदी: कैसी बात कर रहे हो। मैं नहीं करती गंदी चीजें.
परवेज: मेरी बेगम तो रोज मेरा मुँह में लेती थी.
दीदी: मैं आपकी सच्ची बेगम थोड़ी हूँ.
परवेज: तो क्या हुआ। बन जाओगी। मौका दो कभी.
दीदी: आप भी ना परवेज जी.
परवेज: अपनी एक ब्रा-पैंटी की फोटो भेजो ना.
दीदी: नहीं परवेज जी.
परवेज: बेगम साहिबा ठीक है। बात मत करो मुझसे.
और परवेज नाटक करने लगा बात न करने का।
दीदी: अरे बुरा मत मानो परवेज जी। मैं ब्रा-पैंटी में नहीं भेज सकती लेकिन साड़ी में भेज सकती हूँ.
परवेज: अच्छा भेजो.
दीदी ने 5 मिनट के बाद एक सेक्सी सी वीडियो भेजी। परवेज को उसे देखकर परवेज ने दीदी को अपनी मुठ मारने की वीडियो भेज दी।
परवेज: देखो क्या हाल हो गया मेरे लंड का.
दीदी शर्माकर हँसने लगीं।
परवेज: धृति जी अगर मैं आपको अपना लंड चूसने के लिए बोलूँ तो आप चूसोगी.
दीदी परवेज से बात करके कुछ ज्यादा ही गरम हो गई थीं। दीदी बात करते-करते अपनी चूत में उँगली कर रही थीं।
दीदी: मैंने कभी ट्राई नहीं किया.
परवेज: जी तो मेरा कर लेना.
दीदी: अच्छा आप मुझको लंड चूसवाओगे.
परवेज: मौका तो दो। मैं तुम्हारी भी मार लेता हूँ.
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दीदी इतनी गरम हो गई थीं कि क्या उनको पता ही नहीं था कि वो क्या बात कर रही हैं परवेज से। और दीदी एकदम से झड़ गईं और परवेज का कुछ भी रिप्लाई नहीं दिया और सो गईं। दीदी मन में सोचने लगीं— ये मैं क्या कर रही थी। मैं इतनी गंदी कैसे हो गई। मैं धोखा नहीं दे सकती अपने हस्बैंड को। दीदी ये सोचकर सो गईं। इधर मैं आज जो हुआ लंड हिला-हिलाकर सो गया। सुबह मैं 10 बजे उठा। दीदी आज एक सेक्सी साड़ी पहनी थीं।
दीदी: आज इतनी लेट क्यों उठा है.
मैं: दीदी सर में दर्द हो रहा था.
दीदी: अच्छा। चल जा जल्दी फ्रेश होकर आ.
मैं फ्रेश होकर आया। दीदी ने नाश्ता लगा दिया और हमने खाना खाया और मैं दीदी से बोलकर चला गया कि मैं आराम करने जा रहा हूँ। मैं थोड़ी देर आराम किया और 2 बजे उठा और फोन चलने लगा। 2:30 बजे परवेज का मैसेज आया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
परवेज: कैसी हो धृति जी.
दीदी: ठीक हूँ.
परवेज: आज आओगी.
दीदी: नहीं.
परवेज: तुम्हें देखने का मन कर रहा है.
परवेज: तुम अकेली हो क्या.
दीदी: नहीं। प्रथम दूसरे कमरे में सो रहा है.
परवेज: ठीक है। मैं घर आ रहा हूँ तुम्हारे.
दीदी: पागल हो क्या। प्रथम ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा.
परवेज: कुछ नहीं होगा.
बोलकर ऑफलाइन हो गया।
10 मिनट बाद परवेज घर आया और दीदी को मैसेज किया—
परवेज: गेट खोलो.
दीदी: पागल हो क्या.
परवेज: खोलो बेगम साहिबा। थोड़ी देर में चला जाऊँगा.
दीदी ने फिर गेट खोला।
दीदी: जल्दी चलो मेरे साथ.
और दीदी ने परवेज को अपने रूम में लेकर चली गईं। मैं ये सब चुपके से देखने लगा।
दीदी: क्या करने आए हो परवेज जी.
परवेज: अपनी बेगम से प्यार करने आया हूँ.
दीदी: अगर प्रथम ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगा। प्लीज चले जाइए.
परवेज: कुछ नहीं होगा बेगम।
दीदी: आप भी ना।
परवेज: आप हमको अपना शौहर मानती हैं ना?
दीदी: हम तो एक्टिंग कर रहे थे ना परवेज जी।
परवेज: बोलो तो।
दीदी: आप भी ना कितने जिद्दी हैं। हाँ लेकिन वो सब नहीं करना जो आप सोच रहे हैं।
परवेज: तो मैं कैसे मान लूँ कि धृति तुम मेरे को शौहर मान रही हो?
दीदी: आप आ गए ना अपने असली रूप में।
परवेज हँसने लगा।
परवेज: अगर पति माना है तो एक किस दो।
दीदी: आप ज्यादा ही जिद्दी हैं।
परवेज बेड पर बैठ गया।
परवेज: आओ धृति डार्लिंग मेरी गोद में बैठो।
दीदी: नहीं परवेज जी।
परवेज ने दीदी का हाथ पकड़ा और अपनी गोद में बिठा लिया। फिर दीदी की पीठ और गर्दन पर किस करने लगा।
परवेज: तुम्हारा हसबैंड कितना लकी है जिसे इतनी बड़ी गाँड वाली पत्नी मिली।
दीदी: अब तो आप भी लकी हो। आपने भी बिठा लिया मुझे अपनी गोद में।
दीदी ब्लश करने लगी। परवेज भी हँसने लगा।
परवेज: धृति डार्लिंग लंड चूसो ना। बड़ा मन कर रहा है।
दीदी: छी! मैं वो सब नहीं करती।
परवेज: करो ना।
दीदी: नहीं करना जी।
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फिर परवेज ने दीदी को अपनी गोद से उठाया और बेड पर बिठा दिया। खुद दीदी के सामने खड़ा हो गया और अपनी पैंट की जिप खोलने लगा।
दीदी: क्या कर रहे हो परवेज जी?
परवेज: देखो तुम।
परवेज ने अपना लंड निकाल लिया। दीदी उसे देखकर चौंक गई। क्योंकि दीदी ने कभी रियल में इतना बड़ा लंड नहीं देखा था।
परवेज: अब चूसो ना।
दीदी: नहीं परवेज जी।
परवेज: तुम नखरे बहुत करती हो।
दीदी: ठीक है परवेज जी।
दीदी ने फिर परवेज के टोपे पर अपनी जीभ से टच किया। जिससे परवेज पागल हो गया।
परवेज: आआआ!!! धृति मेरी जाननन्न… मुँह में लोोोो…
दीदी ने फिर लंड को मुँह में लिया। लेकिन लंड पूरा दीदी के मुँह में नहीं जा रहा था।
परवेज: डार्लिंग पूरा लो ना…
दीदी परवेज का लंड चूस रही थी जितना चूस सकती थी। फिर दीदी उठने लगी।
दीदी: बस परवेज जी।
परवेज: अरे जान अभी और करो ना।
दीदी: नहीं परवेज जी।
लेकिन परवेज दीदी के लंड चूसने से पागल हो गया था। इसलिए उसने दीदी को जबरदस्ती बेड पर बिठाया।
परवेज: डार्लिंग मुँह खोलो।
दीदी: नहीं परवेज जी। मैं नहीं कर रही अब।
फिर परवेज ने दीदी के बाल पकड़े और दीदी का मुँह खुलवा लिया। दीदी के मुँह में लंड देने लगा। पहले तो धीरे-धीरे डाल रहा था लेकिन परवेज लंड चुसाई से पागल हो गया था। इसलिए अब अपना लंड दीदी के मुँह में पूरा डालने लगा। जिससे दीदी की आँखों से आँसू आने लगे। लेकिन परवेज रुका नहीं और करता रहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दस मिनट करते ही वो दीदी के मुँह में झड़ गया। लेकिन उसने लंड नहीं निकाला। वो चाहता था कि दीदी उसका माल पी जाए। दीदी पी नहीं रही थी। दीदी के मुँह से माल गिरने लगा। लेकिन परवेज ने लंड नहीं निकाला। दीदी का मुँह और आँखें लाल हो गई थीं। जिसके कारण दीदी वो माल पी ली। परवेज ने दीदी का लंड मुँह से निकाला। जैसे-तैसे दीदी बाथरूम गई और तीन मिनट के बाद आई।
दीदी: परवेज जी आपने मेरेको अपना माल पिला दिया।
परवेज: कैसा लगा फिर?
दीदी कुछ नहीं बोली और ब्लश करने लगी।
परवेज ने अपनी पैंट ठीक की।
परवेज: अब चुदाई कब करवाओगी बेगम?
दीदी: अभी आपने बहुत कर लिया परवेज जी। अब जाइए इधर से। उससे पहले मेरा भाई हमको इस तरह देख ले।
परवेज: तो देखने दो ना। उसका नया जीजा कैसे उसकी बहन चोदता है।
दीदी मुस्कुराने लगी।
दीदी: आप भी ना। अरे वो क्या सोचेगा जब वो आपको देखेगा कि मैं अपनी बेटी की उम्र की हूँ और आप मेरे साथ ये सब कर रहे हो।
परवेज: बेगम साहिबा अब आप हमारी बेगम हैं। उसको जो सोचना है सोचने दो। अब हम ही हैं आपके पति।
दीदी: अच्छा परवेज जी। अभी तो जाइए। क्या मेरे भाई के सामने भी सब करेंगे?
परवेज: आप मौका तो दो। अभी कर देते हैं आपके भाई के सामने आपकी चुदाई।
दीदी खिलखिलाकर हँसने लगी।
दीदी: अब जाइए आप। जाइए।
जैसे ही परवेज और दीदी रूम से निकलने वाले थे मैं जल्दी से अपने रूम में चला गया। फिर परवेज अपने घर चला गया। दीदी रूम में जाकर नीचे गिरा हुआ स्पर्म साफ करने लगी। देखते-देखते रात हो गई। मैं दिन का सोच-सोचकर पागल सा हो रहा था।
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मैंने कभी सोचा नहीं था कि दीदी एक बुड्ढे के साथ ये करेगी। वो भी एक मोची के साथ। रात के नौ बजे दीदी ने डिनर लगाया। हमने डिनर किया। दीदी आज बहुत ही खुश दिख रही थी। डिनर करने के बाद दीदी अपने रूम में चली गई और मैं अपने रूम में।
रात को ग्यारह बजे परवेज और दीदी की व्हाट्सऐप से बात हुई। मैं आज जो हुआ उसको सोचने लगा कि कैसे परवेज अंकल ने दीदी को अपना लंड चुसवाया और साथ में दीदी को अपना स्पर्म भी पिला दिया। मैं ये सब सोचकर दीदी के नाम की मुठ मारने लगा। करीब साढ़े ग्यारह बजे परवेज का मैसेज आया।
परवेज: हेलो।
दीदी: हाई परवेज जी।
परवेज: आज तो बेगम तुमने मजा दे दिया।
दीदी: आपने अच्छा नहीं किया परवेज जी।
परवेज: मैंने क्या किया? (हँसने वाला इमोजी)
दीदी: अच्छा आपने क्या किया? आपने मेरे मुँह में क्यों निकाला? पता है मेरेको साँस भी नहीं ली जा रही थी।
परवेज: क्या करूँ बेगम। तुम्हारे मुँह में लंड डालने से पागल हो गया था। मैं तो कंट्रोल नहीं हुआ।
दीदी: अच्छा मुझसे बात मत कीजिए।
परवेज: अरे बेगम नाराज मत हो। अब नहीं करूँगा कभी।
दीदी: अब मैं कभी करने भी नहीं दूँगी।
ऐसे ही दीदी और परवेज के बीच थोड़ी देर बात हुई। उसके बाद दीदी सो गई। मैंने भी आज बहुत मुठ मार ली थी जिससे मुझे भी बहुत तेज नींद आ रही थी। तो मैं भी सो गया। सुबह दस बजे उठा। दीदी ने मुझे उठाया।
दीदी: जा जल्दी रेडी हो कर आ। आज हमको मार्केट भी जाना है सामान लाने।
मैं: लेकिन दीदी आज तो मेरेको अपने कॉलेज के एडमिशन के लिए जाना है। नहीं तो शाम को साइट नहीं चलती और आज लास्ट डे है।
दीदी: तो तू वहीं पर करा लियो ना।
मैं: दीदी मैं अपने दोस्त के घर जाकर एडमिशन के लिए अप्लाई करूँगा।
मैं दीदी से झूठ बोल रहा था। मैं देखना चाहता था कि दीदी जब मार्केट जाएगी तो परवेज दीदी के साथ क्या करेगा। इसलिए मैं बहाना बना रहा था। क्योंकि परवेज मेरे सामने दीदी के साथ कुछ नहीं करेगा।
दीदी: अच्छा ठीक है। जा जल्दी से आ। मैं नाश्ता लगा रही हूँ।
उसके बाद मैंने और दीदी ने नाश्ता किया। मैं दीदी को बोलकर चला गया। दीदी घर पर अकेली थी। दीदी सोच रही थी कि अगर मैं शाम को मार्केट जाऊँगी तो भीड़ बहुत होगी। क्यों न अभी जाकर सामान लेकर आ जाया जाए। मेरे जाने के तीस मिनट बाद दीदी घर से निकली।
दीदी ने आज रेड कलर की साड़ी पहनी थी और ब्लैक कलर का ब्लाउज। जिसमें से दीदी के बूब्स बाहर को निकल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि दीदी कोई रंडी है और कहीं अपने कस्टमर के पास जा रही है चुदने। दीदी को देखकर ऐसा ही लग रहा था। मैं अपने घर के पास पार्क में आराम से बैठा था। दीदी का वेट कर रहा था।
फिर दीदी मार्केट की तरफ गई। उस समय दिन के बारह बज रहे थे। दीदी परवेज की दुकान के सामने से निकली। मुझे लगा दीदी परवेज के पास जाएगी। लेकिन वैसा नहीं हुआ। दीदी सीधा मार्केट में चली गई सब्जी लेने। दोपहर के समय बहुत कम लोग आते हैं। ना के बराबर ही लोग आते हैं और ज्यादा दुकानें भी नहीं खुली होती हैं। कुछ दुकानें ही खुली रहती हैं। दीदी मार्केट में जाकर सब्जी लेने लगी।
दीदी: भैया आलू कैसे दिए हैं?
सब्जीवाला: मैडम जी बीस रुपये किलो।
दीदी: अच्छा दो किलो कर दो। और दो किलो प्याज भी कर दो।
सब्जीवाला: ठीक है मैडम जी।
फिर दीदी वो सामान लेकर दूसरी दुकान पर चली गई। दीदी को कुछ फ्रूट लेने थे। तो दीदी मार्केट के एकदम कोने में जाकर एक फ्रूट वाले से फ्रूट लेने चली गई। वो दुकान कोने में थी जहाँ ज्यादा लोग नहीं आते थे। फ्रूट वाला बुड्ढा था जिसका नाम रहीम था।
दीदी: अंकल जी आम कैसे दे रहे हो?
रहीम: मैडम जी आप दस मिनट रुकिए। मैं अभी पेशाब करके आता हूँ।
बोलकर चला गया। दीदी उधर खड़ी उसका वेट ही कर रही थी कि किसी ने दीदी की गाँड पर अपना हाथ रख दिया और दीदी की गाँड को बहुत तेज दबा दिया। दीदी की सिसकी निकल गई।
दीदी: आआआ!!!
दीदी गुस्से में पीछे मुड़ी तो देखा परवेज पीछे खड़ा था।
परवेज: बेगम आज बिना बताए मार्केट आ गई?
दीदी: आप क्या कर रहे थे?
परवेज: अब अपनी बेगम के तरबूज के साथ खेलूँ भी ना।
दीदी: कोई देख लेता तो क्या होता?
परवेज: क्या होता? लोगों को लगता कि हम पति-पत्नी हैं और क्या।
दीदी मुस्कुराने लगी।
दीदी: अरे अपनी एज तो देखो। कौन कहेगा कि आप मेरे पति हैं।
परवेज ने दीदी की गाँड पर चाटा मार दिया और दीदी की गाँड दबाने लगा।
दीदी: छोड़िए। कोई देख लेगा।
परवेज: देख लेने दो। उन लोगों की भी जलनी चाहिए कि मैं इतनी सेक्सी मोहतरमा को अपना बेगम बनाया है।
दीदी: मैं आपकी रियल की बेगम नहीं हूँ परवेज जी।
परवेज: तो बन जाओ मेरी डार्लिंग। कर लो निकाह।
दीदी फिर इस बात पर ब्लश करने लगी।
परवेज: कर लो। मेरे से कंट्रोल नहीं हो रहा तुम्हें चोदे बिना।
दीदी: परवेज जी आप भी ना।
दीदी और परवेज ऐसे ही बात कर रहे थे कि तभी फ्रूट वाला रहीम आ गया।
रहीम: अरे परवेज भाई जान आप इधर?
रहीम और परवेज दोनों दोस्त थे।
परवेज: हाँ रहीम भाई जान। हाँ इधर अपनी होने वाली बेगम को फ्रूट दिलाने आए हैं।
दीदी इस बात पर शॉक हो गई।
दीदी: परवेज जी क्या बोल रहे हैं आप? ऐसा नहीं है अंकल जी। परवेज जी बस मजाक कर रहे हैं।
परवेज: अरे बेगम साहिबा इसको सब पता है हमारे बारे में। आप मिलिए इससे। ये मेरा दोस्त है रहीम। रहीम मैंने तुझे बताया नहीं था धृति के बारे में। ये वही है।
दीदी: क्या बता दिया आपने इनको?
परवेज: सब बता दिया बेगम साहिबा। दोस्त है हमारा। कैसे छुपा सकते हैं।
दीदी: अरे मैं आपकी रियल की बेगम थोड़ी हूँ जो आप सबको बता रहे हैं।
तभी रहीम बोला—
रहीम: नमस्ते भाभी जी। आप तो बहुत ही सेक्सी हो भाभी जी।
परवेज: अरे ठीक से बात कर। भाभी है तेरी।
रहीम: अरे अपनी भाभी से मजाक भी ना करूँ?
दीदी: नमस्ते रहीम जी। रहीम जी मुझे भाभी मत कहिए।
रहीम: अरे आप तो हमारे परवेज भाई की सेटिंग हैं तो भाभी ही तो बुलाऊँगा।
इस बात पर परवेज और रहीम हँसने लगे। दीदी ही ब्लश करने लगी।
परवेज: नाराज मत हो बेगम साहिबा। ये अपने परिवार वाला ही है।
दीदी: ठीक है परवेज जी।
रहीम: भाभी जी क्या चाहिए आपको? कौन सा फ्रूट लोगे आप?
दीदी: रहीम जी एक दर्जन केला दे दो।
इस बात पर रहीम हँसकर बोला—
रहीम: हम कैसे दे दें आपको केला? परवेज भाई नहीं देते क्या आपको केला?
इस पर परवेज भी हँसने लगा।
दीदी: आप भी बड़े मजाकिया हैं।
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फिर रहीम ने एक दर्जन केला पैक कर दिया। जब दीदी ये सब ले रही थी तो परवेज पीछे से दीदी की गाँड को मसल रहा था। गाँड की एक फाँक को अपने हाथ से पूरा पकड़ने की ट्राई कर रहा था। लेकिन पकड़ नहीं पा रहा था। दीदी की गाँड बहुत बड़ी थी। तो उसके हाथ में जितनी भी आई उसने दबा दी। इस पर दीदी की सिसकी निकल गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी: आआआआ…
लेकिन दीदी कुछ नहीं बोली। ऐसे ही परवेज दीदी की गाँड की दरार में अपनी उंगली डालने की ट्राई करने लगा। और उंगलियों को पूरी ताकत के साथ अंदर डालने की कोशिश करने लगा। लेकिन साड़ी के कारण वो अंदर नहीं जा रही थी। लेकिन परवेज फिर से ट्राई करता रहा। और इस बार परवेज की उंगली दीदी के गाँड के छेद के ऊपर साड़ी के ऊपर से ही हल्की सी घुस गई। जिससे दीदी की आआआआह्ह्ह… निकल गई। जिसे सुनकर रहीम हँसने लगा।
रहीम: भाई इतना क्या उतावला हो रहा है? भाभी कहीं भागी जा रही हैं?
फिर परवेज भी हँसने लगा। दीदी की भी हँसी निकल गई। दीदी परवेज की तरफ नकली गुस्से वाले चेहरे के साथ देखने लगी। लेकिन परवेज फिर भी गाँड मसलता रहा।
परवेज: भाई तरबूज कैसे दे रहा है?
इस बार रहीम हँसकर बोला—
रहीम: कौन से? भाभी के या जो इधर रखे हुए बोल रहा है? अगर ये बोल रहा है तो तू फ्री ले जा। और अगर भाभी के बोल रहा है तो उन्हीं से पूछ ले।
इस पर परवेज भी हँसने लगा।
परवेज: बेगम कैसे दे रही हो अपने तरबूज?
दीदी इस पर कुछ नहीं बोली और हँसने लगी। जिसे देखकर रहीम बोला—
रहीम: अगर भाभी के देने वाली चीज होती तो हमको भी दे दो।
और हँसने लगा।
दीदी: रहीम जी आप भी ना।
ऐसे ही दीदी ने सामान ले लिया। उसके बाद दीदी जाने लगी।
रहीम: आते रहना भाभी जान।
फिर परवेज और दीदी सामान लेकर चलने लगे। और मार्केट से बाहर निकल गए। मैं वो सब देखकर सोचने लगा—ये परवेज तो पूरे शहर में बता देगा कि दीदी इसकी बेगम है। उसके बाद दीदी घर आ गई। दीदी परवेज ने जो किया उसको सोचकर खुश सी हो रही थी। क्योंकि मेरा जीजा मेरी दीदी को खुश नहीं कर पाता था।
लेकिन परवेज तो दीदी को गरम ही कर देता था और चूत गीली ही कर देता था। अब दीदी के मन में भी परवेज के लिए प्यार बढ़ सा रहा था। ऐसे ही शाम हो गई। मैं शाम को घर पहुँचा। दीदी ने नाश्ता लगा दिया था। हमने नाश्ता कर लिया। फिर हम टीवी देखने लगे।
दीदी: हो गया तेरा एडमिशन?
मैं: हाँ दीदी।
दीदी: अच्छा।
हम ऐसे ही बात कर रहे थे कि दीदी के फोन पर किसी का मैसेज आया और दीदी अपने रूम में चली गई। जब मैं अपने रूम में गया और फोन चेक किया तो परवेज का मैसेज था।रात को दीदी और परवेज की चैट—
परवेज: क्या कर रही हो धृति बेगम?
दीदी: सोए हुए हूँ परवेज जी।
परवेज: मैं भी आ जाऊँ आपके साथ लेटने?
दीदी: कैसी बात कर रहे हो परवेज जी। (शर्माने वाला इमोजी)
परवेज: बेगम तुम्हारे बिना रहने का मन नहीं करता। तुमने क्या पहना है बेगम?
दीदी: क्या करेंगे जानकर? (हँसने वाला इमोजी)
परवेज: बताओ तो।
दीदी: साड़ी।
परवेज: कौन से कलर की?
दीदी: ब्लैक।
परवेज: अपनी एक फोटो भेजो ना।
दीदी: आप भी परवेज जी।
फिर दीदी ने अपनी फोटो भेजी। उसके बाद परवेज बोला—
परवेज: अरे बेगम थोड़ी अपने बूब्स वाली भेजो। जिसमें तुम्हारे बूब्स दिख रहे हों। बहुत मन कर रहा है तुम्हारे बूब्स देखने को।
दीदी: आप भी ना परवेज जी। कैसी-कैसी बातें करते हो। (शर्माने वाला इमोजी)
परवेज: भेजो ना।
दीदी: ठीक है परवेज जी।
फिर दीदी ने परवेज को अपनी एक फोटो भेजी। जिसमें दीदी लेटी हुई थी। दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में थी। और दीदी के ब्लाउज के हुक खुले हुए थे। उसमें दीदी एक देसी रंडी की तरह लग रही थी। जैसे दीदी किसी को फोन सर्विस दे रही हो। ऐसा लग रहा था।
दीदी की फोटो देखकर मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ। और मेरा माल दीदी के फोटो पर जाकर गिर गया। हिला लेने के बाद मुझे नींद आने लगी और मैं सो गया। उसके बाद दीदी और परवेज ने ऐसी ही बातें कीं जो कि मैं सुबह उसकी चैट देख रहा था।
परवेज: अरे धृति जी तुमने तो मेरेको पागल बना दिया है। मेरे को कंट्रोल नहीं हो रहा।
दीदी: किस चीज का कंट्रोल नहीं हो रहा परवेज जी?
परवेज: तुम्हारे बूब्स चूसने का। काश उसके अंदर दूध होता।
दीदी ने मुस्कुराने वाला इमोजी भेज दिया।
परवेज: कब चुसवा रही हो बेगम अपने बूब्स?
दीदी: जब आप बोलें परवेज जी। (शर्माने वाला इमोजी)
ऐसे ही उनकी बातें हुईं। उसके बाद मैं फ्रेश होकर नीचे चला गया दीदी के पास। दीदी ने आज येलो कलर की सेक्सी सी साड़ी पहनी थी। दीदी दिन पर दिन मुझे एक रंडी की तरह लगने लगी थी। जो कि अपने कस्टमर्स के लिए रोज सेक्सी-सेक्सी साड़ी पहनकर रेडी रहती है चुदने के लिए।
मैं भी दीदी को देख-देखकर पागल सा हो रहा था। दीदी नाश्ता बना रही थी और मैं दीदी की बड़ी सी गाँड हिलते हुए देख रहा था। मन कर रहा था कि दीदी की गाँड में जाकर लंड डाल दूँ। लेकिन कर नहीं सकता था। उसके बाद दीदी ने नाश्ता लगाया और हम नाश्ता करने लगे। उसके बाद मैं अपने दोस्तों के पास चला गया और दीदी घर पर अकेली थी। करीब दो बजे के करीब परवेज ने दीदी को कॉल किया।
परवेज: कैसी हो डार्लिंग?
दीदी: ठीक हूँ।
परवेज: क्या कर रही हो?
दीदी: कुछ नहीं। टीवी देख रही हूँ।
परवेज: सुना बेगम। आज मूवी देखने चलोगी?
दीदी: नहीं परवेज जी। कोई देख लेगा तो क्या होगा?
परवेज: कोई नहीं देखेगा।
दीदी: नहीं परवेज जी।
परवेज: अरे रात को चलेंगे आठ बजे। उस समय कम लोग आते हैं। कोई नहीं देखेगा।
दीदी: रात को कैसे आ सकती हूँ?
परवेज: मैं आ जाऊँगा तुमको लेने।
दीदी: अरे ये बात नहीं है। प्रथम से क्या बोलकर निकलूँगी?
परवेज: बोल देना कहीं जा रही हूँ। लेट आऊँगी।
दीदी: कैसी बात कर रहे हो परवेज जी। कैसे बोल दूँ? मैं कभी रात को नहीं गई बाहर।
परवेज: तो अब चल लेना। मैं टिकट बुक कर दे रहा हूँ। तुम रेडी रहना आठ बजे। ठीक है?
दीदी: अच्छा ठीक है। मैं देखती हूँ।
परवेज: ठीक है। मैं तुमको रात को कॉल करता हूँ। ठीक है।
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उसके बाद कॉल कट हो गया। दीदी आज पहली बार अकेली रात को कहीं जाने वाली थी। मैं ये बात सुनकर रात का वेट करने लगा कि आज रात को दीदी बाहर जाती है कि नहीं। और दीदी मुझसे क्या झूठ बोलती है। मैं अपने दोस्त के घर से पाँच बजे निकला और घर गया। जब घर गया तो दीदी नॉर्मल थी। फिर मैं भी अपने रूम में चला गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
करीब साढ़े सात बजे मैंने दीदी को देखा कि दीदी एकदम रेडी होकर अपने रूम से निकलकर बाहर आई। मैं दीदी को देखकर सरप्राइज सा हो गया था। दीदी ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी। और दीदी ने ब्लाउज ऐसा पहना था जिसमें पीछे एक डोरी से होती है। जिसको खींचने से ब्लाउज खुल जाता है। मैं दीदी को देखकर सोचने लगा कि दीदी आज परवेज से चुदने के लिए ही जा रही है। इतनी सेक्सी बनकर। दीदी मेरे पास आई।
दीदी: प्रथम मैं अपनी फ्रेंड के साथ मूवी देखने जा रही हूँ। रात को थोड़ा लेट आऊँ।
मैं: अच्छा दीदी। लेकिन कौन सी फ्रेंड के साथ?
दीदी अब थोड़ी सोच में पड़ गई कि किसका नाम लूँ। अगर प्रथम ने उसके पास कॉल कर लिया तो क्या होगा। लेकिन दीदी कैसे भी आज परवेज के साथ मूवी देखने जाना चाहती थी।
दीदी: अपनी फ्रेंड सुधा के साथ जा रही हूँ।
मुझे पता था दीदी झूठ बोल रही है।
मैं: अच्छा दीदी।
दीदी: तू खाना बाहर से मँगा लियो। ठीक है?
मैं: ठीक है दीदी।
उसके बाद दीदी के फोन पर फोन आया। दीदी मुझे बाय बोलकर घर से बाहर चली गई। जैसे ही दीदी बाहर गई मैं भी जल्दी से दीदी के पीछे घर से निकल गया। हमारे घर से पाँच मिनट की दूरी पर परवेज दीदी का वेट कर रहा था। मैं बाइक लेकर दीदी को दूर से देखने लगा। कहानी अभी जारी है आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़ते रहिये हमारी वासना.
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