Sexy Malkin Ki Chudai Kahani
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम श्रृष्टि है और मेरी उम्र 34 साल है। फिगर 36-30-38 है। मैं एक अच्छे खानदान से हूं। मेरे पति का नाम विक्रम है। वो एक बड़े मल्टीनेशनल कंपनी में हाई पोस्ट पर हैं। उनका काम ऐसा है कि महीने में 15-20 दिन विदेश में रहना पड़ता है। हमारा घर शहर के सबसे पॉश इलाके में है। Sexy Malkin Ki Chudai Kahani
घर में काम करने के लिए हमारे पुराने नौकर रामू काका थे, लेकिन वो बीमार पड़ गए और फिर उनको हमने उनके गांव भेज दिया। उनकी जगह उनके बेटे अजय को रख लिया गया। अजय की उम्र 24 साल है। वो पढ़ा-लिखा है (बीए किया है), लेकिन परिवार की मजबूरी की वजह से नौकरी कर रहा है।
वो बहुत मेहनती, शांत रहने वाला और ईमानदार लड़का है। घर के सारे काम अच्छे से करता है — सफाई, खाना, बागवानी, गाड़ी चलाना सब। जब भी मेरे पति के विदेश तो उनके बाद घर में मुझे बहुत अकेलापन लगता था। रातें लंबी लगतीं थी और मैं अक्सर वाइन पीकर स्विमिंग पूल के किनारे बैठी रहती थी।
कई बार तो मेरा मन होता कि काही बाहर किसी से चक्कर चला लूँ, लेकिन बदनामी के डर से मै कभी ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर पाई। एक रात मैं स्विमिंग पूल में तैर रही थी। रात के 11:30 बज चुके थे। अजय पूल साफ करने आया। मैंने हल्का बिकिनी पहना हुआ था।
मैंने उसे देखकर कहा, “अजय, तुम कल सुबह साफ करना।”
लेकिन वो बोला, “मेम साहब, आज बाहर आ जो मै आज ही कर लूंगा, कल फिर घर का काम भी करना है।”
मैं पूल से निकली। मेरा शरीर गीला था। अजय ने अपना ट्राउजर उतारा और अपने बरमूडा मे ही पूल की सफाई करने लगा। ये पहली बार था जब मै अजय को बरमूडा मे देख रही थी। जब वो सफाई के लिए झुका तो बरमूडा मे से उसका लंड बाहर दिखने लग गया।
मै हैरान रह गई कि भला बिना खड़े ही किसी का लंड बरमूडा मे से कैसे झांक सकता है। अजय का लंड बहुत लंबा और मोटा था। एक पल के लिए मेरा गला सूख गया और बदन मे झुरझुरी सी दौड़ गई। मैं चुपचाप वहाँ से चली आई, लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आई।
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अजय का वो मोटा लंड बार-बार आंखों के सामने आ रहा था। मेरे पति का लंड उससे काफी छोटा था। मैंने कई सालों बाद किसी दूसरे मर्द के लंड को देखा था। मैंने पहली बार अजय को उस नजर से देखा। मैंने बिस्तर पर करवट बदली। मेरे बूब्स भारी हो रहे थे।
मैंने अपना नाइट सूट ऊपर किया और अपने बूब्स को सहलाने लगी। मेरे निप्पल्स कड़े हो गए थे। फिर मै नीचे हाथ ले गई और अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से रगड़ने लगी। अजय के लंड का वो सीन याद करके मैं तेजी से उंगलियां चला रही थी। “आह्ह्ह… अजय…” मेरे मुंह से अनजाने में निकल गया। मैं दो बार झड़ गई, लेकिन फिर भी मन जैसे तृप्त नहीं हुआ था।
सुबह अजय अपना काम कर रहा था। वो वफादार नौकर था। लेकिन मेरे मन में अब एक नई आग लग गई थी। वो वफादार नौकर की तरह चाय बना रहा था, बागवानी कर रहा था। उसकी नजर में कोई गलत इरादा नहीं था। वो मुझे “मेम साहब” कहकर पुकार रहा था। लेकिन मेरी नजर अब उस पर अलग तरह से पड़ रही थी। अब मैं जानबूझकर उसके सामने हल्के कपड़े पहनने लगी।
घर में रहते हुए मैं अब ज्यादातर शॉर्ट नाइट सूट या लूज टॉप और शॉर्ट्स पहनती। जब वो कमरे में सफाई करता तो मैं जानबूझकर उसके सामने बैठ जाती। एक दिन मैं स्विमिंग पूल में तैर रही थी। अजय पूल के किनारे खड़ा था। मैंने जानबूझकर उसके सामने से निकलते हुए अपना बिकिनी का ऊपरी हिस्सा थोड़ा सरका दिया। मेरे एक बूब्स का निप्पल थोड़ा दिख गया। अजय ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली और शर्म से सिर झुका लिया।
वो बोला, “मेम साहब, मैं पूल साफ कर दूं?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां अजय, कर दो।”
उस दिन शाम को मैं जिम में वर्कआउट कर रही थी। मेरा टॉप पसीने से भीग गया था। अजय पानी लेकर आया। उसकी नजर मेरे भीगे बूब्स पर अटक गई। मैंने देख लिया, लेकिन कुछ नहीं कहा। अजय अभी भी पूरी तरह वफादार था। वो कभी गलत नजर से नहीं देखता था।
लेकिन मैं अब उसे देखकर खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर मैं अजय को याद करके मुठ मारने लगी थी। कभी-कभी मैं जानबूझकर उसे बुलाती और उसके सामने हल्के कपड़ों में घूमती। एक रात बिजली चली गई। पूरा घर मे अंधेरा छा गया था। मैंने अजय को बुलाया। वो टॉर्च लेकर आया। मैंने जानबूझकर हल्का नाइट सूट पहना हुआ था। सूट का एक स्ट्रैप सरक गया था। मेरा एक बूब्स आधा बाहर था।
अजय ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली और बोला, “मेम साहब, मैं जनरेटर ऑन कर दूं?”
मैंने कहा, “अजय, तुम बैठो। अकेले डर लग रहा है।”
उसने मेरे पास बैठकर बातें शुरू कर दीं। उसकी नजर बार-बार मेरे भीगे बूब्स पर जा रही थी। मैंने जानबूझकर स्ट्रैप और सरका दिया। अजय शर्म से सिर झुकाए बैठा था। वो वफादार नौकर की तरह व्यवहार कर रहा था। लेकिन मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
अजय मेरे पास बैठा था। अंधेरे में सिर्फ उसकी टॉर्च की रोशनी थी। मैं जानबूझकर नाइट सूट का स्ट्रैप और सरका दिया था। मेरा एक बूब्स अब पूरा बाहर था। अजय की नजर बार-बार वहां जा रही थी, लेकिन वो तुरंत नजर हटा लेता था। वो बहुत शर्मीला और वफादार था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उसने कहा, “मेम साहब, मैं जनरेटर ऑन कर दूं? अंधेरा है, आपको तकलीफ हो रही होगी।”
मैंने धीरे से कहा, “अजय, अभी मत करो। तुम बैठो। अकेले डर लग रहा है।”
मैंने जानबूझकर उसके और करीब बैठ गई। मेरा घुटना उसके घुटने से टच हो रहा था। अजय थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन हटा नहीं।
मैंने बातें शुरू कीं। “अजय, तुम्हें यहां काम करते हुए कितना समय हो गया?”
वो बोला, “मेम साहब, तीन महीने हो गए। आप और साहब बहुत अच्छे हैं।”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम भी बहुत अच्छे हो अजय। इतने जवान लड़के हो, फिर भी इतनी इज्जत से काम करते हो।”
बातों-बातों में मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। उसका शरीर सख्त था। मैंने हल्का दबाव डाला। अजय शर्म से सिर झुका लिया।
मैंने और करीब सरककर कहा, “अजय, तुम्हें कोई गर्लफ्रेंड है?”
वो बोला, “नहीं मेम साहब।”
उस रात मैं काफी देर तक उसके पास बैठी रही और बातें करती रही। जब वो गया तो मैं बिस्तर पर लेटकर अजय को याद करके मुठ मार रही थी। उसका लंड, उसका शरीर, उसकी शर्म — सब याद आ रहा था। मैं तीन बार उसके लंड को याद करके झड़ गई। सुबह अजय सामान्य था। वो चाय बना रहा था। मैं जानबूझकर शॉर्ट नाइट सूट पहनकर किचन में गई। सूट बहुत छोटा था, मेरी जांघें और बूब्स का बड़ा हिस्सा दिख रहा था। अजय ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली।
वो बोला, “मेम साहब, चाय तैयार है।”
मैंने जानबूझकर झुककर चाय ली। मेरा क्लेवेज साफ दिख रहा था। अजय की सांस तेज हो गई, लेकिन वो कुछ नहीं बोला। वो वफादार नौकर बना हुआ था। दिन भर मैं उसे बार-बार बुलाती। कभी पानी मांगती, कभी कुछ सामान उठवाती। हर बार उसके करीब जाती। शाम को मैं जिम में वर्कआउट कर रही थी। पसीना बह रहा था। अजय पानी लेकर आया। मैंने जानबूझकर उसे रोककर बात की। मेरा टॉप भीगा हुआ था। मेरे बूब्स साफ दिख रहे थे। अजय की नजर अटक गई। वो शर्म से लाल हो गया।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अजय, तुम शर्माते क्यों हो? मैं तुम्हें अपना ही समझती हूं।”
वो बोला, “मेम साहब, आप बहुत अच्छी हैं।”
उस रात मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। अजय का वो लंड, उसकी शर्म, उसकी नजरें — सब याद आ रहा था। मैंने अपना नाइट सूट ऊपर किया और बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगी। फिर उंगलियां चूत में डाल दीं। “अजय… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड…” मैं फुसफुसा रही थी। मैं कई बार झड़ गई, लेकिन मन था की मान ही नहीं रहा था।
अब मैं अजय को देखकर खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। वो वफादार नौकर था, लेकिन मैं उसकी मालकिन बनकर उसकी भूख मिटाना चाहती थी। अजय अब मेरी नजर में एक नौकर नहीं रह गया था। हर बार जब वो मेरे सामने आता, मेरी नजर उसके लंड पर चली जाती।
एक दिन मैं पूल में तैर रही थी। अजय पूल के किनारे खड़ा था। मैंने जानबूझकर उसके सामने से निकलते हुए अपना बिकिनी का ऊपरी हिस्सा थोड़ा सरका दिया। मेरे बूब्स का बड़ा हिस्सा दिख गया। अजय ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली और शर्म से सिर झुका लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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वो बोला, “मेम साहब, मैं पूल साफ कर दूं?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां अजय, कर दो। लेकिन पहले ये पानी का ग्लास ले आओ।”
जब वो ग्लास लेकर आया तो मैं जानबूझकर झुकी। मेरे भीगे बूब्स उसके सामने थे। अजय की सांस तेज हो गई, लेकिन वो कुछ नहीं बोला। एक दिन मैंने जानबूझकर अजय को बुलाया। मैंने हल्का नाइट सूट पहना हुआ था। सूट बहुत छोटा था। मैं बेड पर लेटी हुई थी।
अजय आया तो मैंने कहा, “अजय, मेरी पीठ में दर्द हो रहा है। थोड़ा मालिश कर दो।”
अजय हिचकिचाया, लेकिन बोला, “जी मेम साहब।”
वो मेरे पास आया। मैंने सूट का ऊपरी हिस्सा नीचे सरका दिया। मेरी पूरी पीठ नंगी थी। अजय ने तेल लगाकर मालिश शुरू की। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे। मैं “आह्ह्ह…” कर रही थी। धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया। मैंने जानबूझकर अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई। अजय का हाथ मेरी गांड के पास आ गया। वो काँप रहा था। लेकिन वो वफादार था, उसने कुछ नहीं किया।
मैंने कहा, “अजय, और नीचे भी कर दो।”
उसका हाथ मेरी गांड पर आ गया। मैंने हल्का-हल्का कराहना शुरू कर दिया। अजय की सांस तेज हो गई थी। अब मेरी तड़प दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। अजय का वो मोटा लंड, उसकी शर्मीली नजरें, उसका सख्त शरीर — सब मेरे दिमाग पर छा गया था। मैं अब उसे देखकर खुद को रोक नहीं पा रही थी। एक दिन मैंने जानबूझकर अजय को अपने बेडरूम में बुलाया। मैंने एक हल्का सा शॉर्ट गाउन पहना हुआ था, जिसके नीचे कुछ नहीं था। अजय आया तो मैं बेड पर लेटी हुई थी।
मैंने कहा, “अजय, मेरी टांगों में बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा मालिश कर दो।”
अजय हिचकिचाया, लेकिन बोला, “जी मेम साहब।”
वो मेरे पैरों के पास बैठ गया। मैंने जानबूझकर अपनी टांगें थोड़ी फैला दीं। मेरा गाउन ऊपर सरक गया था। मेरी जांघें और चूत का हिस्सा साफ दिख रहा था। अजय की सांस तेज हो गई। उसने तेल लगाकर मेरी टांगों की मालिश शुरू की। उसके हाथ मेरी जांघों पर घूम रहे थे।
मैं “आह्ह्ह अजय… और ऊपर…” कह रही थी। उसका हाथ मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर आ गया। वो काँप रहा था। मैंने जानबूझकर अपनी टांगें और फैला दीं। मेरा गाउन अब पूरी तरह ऊपर था। मेरी चूत उसके सामने थी। अजय की उंगलियां काँप रही थीं। वो मालिश कर रहा था, लेकिन उसकी नजर मेरी चूत पर अटक गई थी।
मैंने धीरे से कहा, “अजय, तुम डर क्यों रहे हो? मैं तुम्हें अपना ही समझती हूं।”
उसने कुछ नहीं कहा। बस मालिश जारी रखी। लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसनें मालिश खत्म की और वहाँ से चला गया। मै उसके कंट्रोल को देखकर हैरत मे थी और खुश भी थी कि जब इसका मोटा लंबा लंड मेरी प्यासी चूत मे जाएगा तो यकीनन मेरी बरसों की प्यास को बुझा देगा।
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दूसरे दिन मैं जानबूझकर नहाने के बाद सिर्फ टॉवल लपेटकर बाहर आई। अजय हॉल में सफाई कर रहा था। मैंने जानबूझकर टॉवल को थोड़ा ढीला छोड़ दिया। जैसे ही मैं उसके पास से गुजरी, टॉवल सरक गया। मेरे दोनों बूब्स और चूत एक पल के लिए पूरी तरह नंगी हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अजय ने देख लिया। उसकी आँखें फैल गईं। वो तुरंत नजर हटा कर बोला, “माफ कीजिए मेम साहब…” और तेजी से दूसरी तरफ चला गया। मैंने टॉवल ठीक किया और मुस्कुरा दी। उस रात मैं बिस्तर पर लेटकर अजय को याद करके बहुत जोर से मुठ मार रही थी।
“अजय… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड… मुझे चाहिए…” मैं फुसफुसा रही थी। मेरी चूत मे जैसे सैलाब आ गया हो, वो इतना पानी छोड़ रही थी। अब मुझसे एक पल भी रुकना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मुझे हर टाइम बस अजय का बड़ा मोटा लंड मेरी चूत मे घुसा हुआ नजर आ रहा था। तीसरे दिन मैंने अजय को अपने बेडरूम में बुलाया।
मैंने कहा, “अजय, मेरी पीठ में दर्द हो रहा है। ऑयल लगा दो।”
मैंने अपना गाउन उतारकर सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेट गई। अजय ने तेल लगाकर मालिश शुरू की। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे। मैंने जानबूझकर अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई। अजय का हाथ मेरी गांड के पास आ गया।
मैंने धीरे से कहा, “अजय, और नीचे भी करो।”
उसका हाथ मेरी गांड पर आ गया। वो काँप रहा था।
मैंने कहा, “अजय, तुम डर मत। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं।”
अजय कुछ नहीं बोला। बस मालिश करता रहा। लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसका लंड उसकी पैंट में खड़ा हो गया था। मैंने देख लिया। वो बहुत मोटा था। अजय की मालिश के बाद मेरा मन और बेचैन हो गया था। उसकी उंगलियों का स्पर्श मेरी गांड पर अभी भी महसूस हो रहा था।
मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। अजय कमरे से बाहर चला गया था, लेकिन मेरी चूत अभी भी गीली थी। मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। अजय की शर्मीली नजरें, उसके काँपते हाथ, उसका सख्त शरीर — सब याद आ रहा था।
मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। “अजय… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड… मुझे चाहिए…” मैं फुसफुसा रही थी। उस रात मैं चार बार झड़ गई, लेकिन फिर भी संतुष्टि नहीं हुई। अगले दिन मैंने एक नया प्लान बनाया। मैं जानबूझकर घर में हल्के-हल्के कपड़े पहनने लगी।
एक दिन मैंने एक बहुत छोटा सा शॉर्ट गाउन पहना, जिसके नीचे कुछ नहीं था। अजय हॉल में झाड़ू लगा रहा था। मैं जानबूझकर उसके सामने से गुजरी। गाउन का नीचे वाला हिस्सा इतना छोटा था कि मेरी गांड का निचला हिस्सा दिख रहा था। अजय ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली। उसका चेहरा लाल हो गया।
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वो बोला, “मेम साहब, मैं गार्डन में काम कर आऊं?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अजय, पहले ये पानी का ग्लास ले आओ।”
जब वो ग्लास लेकर आया तो मैं जानबूझकर सोफे पर बैठ गई और अपनी टांगें थोड़ी फैला दी। मेरा गाउन ऊपर सरक गया। मेरी चूत का हिस्सा साफ दिख रहा था। अजय ग्लास रखते हुए काँप रहा था। उसकी नजर एक पल के लिए वहां अटक गई। फिर वो तुरंत दूसरी तरफ मुड़ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “अजय, तुम इतने शर्मीले क्यों हो? मैं तुम्हें अपना ही समझती हूं।”
वो बोला, “मेम साहब, आप बहुत अच्छी हैं। मैं आपका नौकर हूं।”
उसकी ये बात सुनकर मेरी चूत और गीली हो गई। वो वफादार था, लेकिन मैं अब उसे अपना बनाना चाहती थी। तीसरे दिन मैंने अजय को पूल साफ करने के लिए बुलाया। मैं पूल के किनारे लेटी हुई थी। मैंने सिर्फ एक छोटा सा बिकिनी पहना हुआ था। अजय पूल साफ कर रहा था। मैंने जानबूझकर अपनी टांगें फैला दीं। मेरा बिकिनी का नीचे वाला हिस्सा थोड़ा सरक गया। मेरी चूत का हिस्सा दिख रहा था। अजय की नजर अटक गई। वो काँप रहा था।
मैंने कहा, “अजय, पानी का ग्लास ले आओ।”
जब वो ग्लास लेकर आया तो मैं जानबूझकर उठी और उसके सामने खड़ी हो गई। मेरा भीगा हुआ शरीर उसके सामने था। अजय की सांस तेज हो गई। उसका लंड पैंट में साफ दिख रहा था।
मैंने कहा, “अजय, तुम्हें कुछ चाहिए तो बताओ।”
वो बोला, “नहीं मेम साहब, मैं ठीक हूं।” लेकिन उसकी आवाज काँप रही थी।
अब मैं फैसला कर चुकी थी। मैं अजय को अपना बनाऊंगी। वो वफादार नौकर है, लेकिन मैं उसकी मालकिन हूं। मैं उसे अपनी भूख मिटाऊंगी। मैं अब अजय को देखकर खुद को रोक नहीं पा रही थी। उसकी शर्म, उसका वफादार व्यवहार, और उसका मोटा लंड — सब मुझे पागल कर रहा था। एक रात मैंने फैसला कर लिया कि अब मैं आगे बढ़ूंगी।
रात के 11:30 बजे थे। मैंने अजय को बुलाया। कुछ देर बाद अजय मेरे बेडरूम में खड़ा था। मैं अपना गाउन उतारकर सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेट गई थी।
मैंने उसे देखकर कहा, “अजय, आज मेरी पूरी बॉडी में दर्द हो रहा है। अच्छे से मालिश कर दो।”
अजय हिचकिचाते हुए मेरे पास आया। उसने तेल की बोतल ली और मेरी पीठ पर तेल लगाना शुरू कर दिया। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे।
मैंने आह भरते हुए कहा, “अजय, तुम्हारे हाथ बहुत अच्छे हैं। और नीचे भी करो।”
उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया। फिर धीरे-धीरे मेरी गांड के ऊपरी हिस्से पर। मैंने जानबूझकर अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई। अजय काँप रहा था। उसकी सांसें तेज हो गई थीं। वो वफादार नौकर था, लेकिन मेरी तड़प अब काबू से बाहर हो रही थी।
मैंने मुड़कर उसे देखा और कहा, “अजय, तुम डर क्यों रहे हो? मैं तुम्हें अपना समझती हूं।”
मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिया। अजय का हाथ काँप रहा था। उसने हल्का-हल्का दबाव डाला। मैं “आह्ह्ह अजय…” कर रही थी। उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे 36 साइज के बड़े बूब्स बाहर आ गए। अजय उन्हें देखकर बोला, “मेम साहब… ये…”
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मैंने उसके सिर को पकड़कर अपने बूब्स पर दबा दिया। उसने एक बूब्स मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगे। मैं उसके बाल पकड़कर कराह रही थी। “आह्ह्ह अजय… और चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने काफी देर तक मेरे दोनों बूब्स को चूसा, चाटा और हल्का-हल्का काटा।
मेरे निप्पल्स लाल हो गए थे। मैं तड़प रही थी। फिर उसका हाथ नीचे सरका। उसने मेरी पैंटी उतार दी। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी। उसने उंगलियों से बाहर से सहलाना शुरू किया। मैंने अपनी टांगें फैला दीं। उसने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। मैं “आह्ह्ह अजय… और अंदर…” कर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। मैं तड़प-तड़पकर कराह रही थी। “अजय… और तेज… आह्ह्ह…” उसने काफी देर तक उंगलियों से मुझे मजा दिया। मैं दो बार झड़ गई। फिर मैंने उसे लिटा दिया। मैंने उसकी पैंट उतार दी। उसका मोटा, लंबा लंड बाहर आ गया। मैंने उसे हाथ में पकड़कर हिलाने लगी। अजय “आह्ह्ह मेम साहब…” कर रहा था।
मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया। मैंने पूरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी। अजय तड़प रहा था। मैं काफी देर तक उसे चूसती रही। फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। उसका लंड मेरी चूत के बिल्कुल मुंह पर था। मैंने धीरे से उसे अंदर लिया। “आह्ह्ह अजय… बहुत मोटा है तुम्हारा लंड… धीरे…”
अजय धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। मैं “आह्ह्ह अजय… और अंदर डालो…” कर रही थी। अजय मेरी गोद में बैठा हुआ था। उसका मोटा लंड मेरी चूत में आधा घुसा हुआ था। मैंने अपनी कमर हिलाकर उसे और अंदर लेने की कोशिश की। “आह्ह्ह अजय… और अंदर… धीरे-धीरे पूरा अंदर डालो…”
अजय काँप रहा था। वो अभी भी शर्मा रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाई और बाकी लंड भी अंदर कर दिया। अब उसका पूरा मोटा लंड मेरी चूत को भर चुका था। मैंने आह भरते हुए कहा, “अजय… बहुत दबा लंड है तुम्हारा, पूरा टाइट फिट हो गया है मेरी चुत मे… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”
अजय ने बहुत धीमी गति से धक्के मारना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ मैं “आह्ह्ह अजय… और अंदर…” बोल रही थी। वो मेरे बूब्स को चूसते हुए धीरे-धीरे चोद रहा था। मैंने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेट लीं और उसे और करीब खींच लिया। “अजय… मुझे और मजा दो… आह्ह्ह…”
करीब 10-12 मिनट तक वो इसी तरह स्लो स्पीड से मुझे चोदता रहा। फिर मैंने उसे लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। अब मैंने उसका लंड अपनी चुत के मुह पर लगाया और उसके लंड पर बैठ गई। उसका लंड करीब 8 इंच का था और पूरा मेरी चुत मे समा चुका था।
अब मै उसके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। अजय नीचे से मेरे बूब्स को दबा रहा था। मैं तेजी से उछल-उछलकर चुदवा रही थी। “आह्ह्ह अजय… बहुत मजा आ रहा है… मैं झड़ने वाली हूं…” मैं पहली बार उसके लंड पर झड़ गई। अजय अभी तक नहीं झड़ा था। उसने फिर मुझे कुतिया बनाया और वो पीछे से मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगा। उसकी टेस्टिस की थैलियाँ मेरी गांड से टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प…” की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
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मैंने कहा, “अजय… और तेज… आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चुत को…”
वो तेजी से चोदने लगा। मैं कई बार झड़ गई थी लेकिन अजय था की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। आखिरकार अजय भी झड़ने वाला था। उसने मेरी चूत के अंदर ही गर्म माल भर दिया। हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। अजय मेरे गले लगकर बोला, “मेम साहब… मैंने गलती कर दी…”
मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “अजय, ये गलती नहीं… ये हम दोनों की इच्छा है।”
उस रात के बाद अजय और मैं दोनों ही बदल गए थे। अजय अभी भी दिन में वफादार नौकर बना रहता था, लेकिन रात में मेरे कमरे में आकर वो मेरी भूख मिटाता। एक रात मैंने उसे बुलाया। मैंने एक सेक्सी रेड नाइट ड्रेस पहना हुआ था। अजय आया तो मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसे चूमने लगी। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस रही थी।
मैंने उसकी शर्ट उतार दी और उसके सीने को चाटने लगी। अजय “मेम साहब… आह्ह्ह…” कर रहा था। मैं नीचे गई और उसके लंड को मुंह में ले लिया। मैं उसे गहरे तक ले रही थी। अजय मेरे बाल पकड़कर मेरा मुंह चोद रहा था। मैंने काफी देर तक उसके लंड को चूसा। फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया। उसका लंड मेरी चूत में घुसा। मैं ऊपर-नीचे हो रही थी। अजय नीचे से मेरे बूब्स को चूस रहा था।
मैंने कहा, “अजय, आज मेरी गांड मारना।”
अजय शर्मा गया। मैंने खुद अपनी गांड पर तेल लगाया और उसके लंड को अपनी गांड पर रखा। मैंने धीरे से उसे अंदर लिया। “आह्ह्ह अजय… बहुत मोटा है… धीरे से अंदर करना…” अजय धीरे-धीरे मेरी गांड चोदने लगा। मैं तड़प रही थी। “अजय… और गहरा… आह्ह्ह…”
वो धीरे-धीरे तेज होता गया। मैंने अपनी चूत को सहलाते हुए उसे गांड चुदवा रही थी। अजय ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारे और तेजी से चोदने लगा। आखिरकार हम दोनों झड़ गए। उस रात के बाद हम दोनों की रिश्ते में एक नया अध्याय शुरू हो गया था। अजय दिन में अभी भी वफादार नौकर बना रहता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो चुपचाप काम करता, मेम साहब कहकर पुकारता। लेकिन रात में मेरे बेडरूम में आकर वो मेरी हर इच्छा पूरी करता। एक रात मैंने उसे बुलाया। मैंने ब्लैक लेस वाली नाइट ड्रेस पहनी थी। अजय आया तो मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसे गहरी किस करने लगी। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस रही थी। मैंने उसकी शर्ट उतार दी और उसके सीने, पेट, नाभि को चाटती हुई नीचे गई।
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मैंने उसके लंड को मुंह में लिया और गहरे तक चूसने लगी। अजय मेरे बाल पकड़कर तड़प रहा था। मैंने उसे लिटाकर अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी। अजय मेरी चूत चाटने लगा। उसकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। मैं उसके चेहरे पर बैठकर उछल रही थी। “आह्ह्ह अजय… और चूसो… आह्ह्ह…” काफी देर बाद मैंने उसे कुतिया बनाया। मैंने पीछे से उसका लंड अपनी गांड में लिया। मैं खुद पीछे हिल रही थी। अजय मेरी कमर पकड़कर धक्के मार रहा था। मैं “अजय… और तेज… मेरी गांड फाड़ दो…” चिल्ला रही थी।
अजय ने मुझे फिर से अपनी गोद में बिठाया। मैं उसके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। वो मेरे बूब्स को चूस रहा था। हम दोनों एक साथ झड़ गए। अब हम दोनों का रिश्ता गहरा हो गया था। अजय अभी भी दिन में नौकर था, लेकिन रात में मेरा प्रेमी। मेरे पति जब विदेश जाते, तो हम दोनों पूरी रात साथ बिताते। कभी पूल के किनारे, कभी जिम में, कभी कार में। मैं अजय को प्यार करने लगी थी। वो भी मुझे बहुत चाहता था। हम दोनों जानते थे कि ये रिश्ता गुप्त है, लेकिन हम दोनों खुश थे।
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