Hot Bahu Sex
मेरा नाम मनीषा है और मैं 36 साल की एक शादी-शुदा और भरपूर जिस्म की मालकिन हूँ मेरे रूप में एक अजीब सा खिंचाव है जिसे मैं खुद भी महसूस करती हूँ मेरा फिगर 36C-32-38 है और मेरे बूब्स का हैवी और पर्फेक्ट्ली शेप्ड होना हर कपडे में उभर कर नज़र आता है. मेरी कमर पतली और गांड बिलकुल टाइट है जो साड़ी या लेग्गिंग्स में और भी ज़्यादा अट्रैक्टिव लगती है. Hot Bahu Sex
मैं अपने लुक्स का ध्यान रखती हूं पर एक डेन्सी और ग्रेस के साथ. घर में सलवार-कुर्ती या कम्फर्टेबल लेग्गिंग्स पहनती हूं अक्सर बिना ब्रा के. बाहर जाते वक़्त जीन्स-टॉप या कभी-कभी एक एलिगेंट साड़ी को चुनना पसंद करती हूं जिसमें मेरी कमर और हिप्स की शेप क्लियर दिखे.
मैं यहाँ अपने सास-ससुर, जेठ-जेठानी और उनके दो बच्चों के साथ रहती हूँ मेरा 14 साल का बेटा बोर्डिंग स्कूल में पढता है और उसकी कमी हर दिन महसूस होती है. पूरा दिन घर के काम रसोई और ज़िम्मेदारियों में गुज़र जाता है. पर जब रात होती है तो अकेलापन चुभने लगता है.
मेरे पति विदेश में है और साल में सिर्फ दो बार कुछ दिनों के लिए घर आते है. वो 10-15 दिन -मेरे लिए एक सपने जैसे होते है. हर रात वो मेरी हर प्यास बुझाते है. मैं उनका प्यार अपने हर अंग से महसूस करती हूँ जब वो मेरे हैवी बूब्स को चाटते है, उनकी जीभ मेरी भीगती चूत पर अपना जादू चलाती है और फिर अपने लंड से मुझे उसी तरह चोदते है जैसे मैं चाहती हु.
एक दिन मैं घर पर बोर हो रही थी और हस्बैंड की गैर-मौजूदगी में सेक्सुअल नीड्स बहुत ज़्यादा महसूस हो रही थी. दोपहर का समय था काम निपटा कर मैं अपने बेडरूम में आयी थोड़ी देर आराम करने. मैं बोर हो रही थी तो मैंने फ़ोन उठाया और नेट पर कुछ रैंडम सर्च करने लगी. कभी शॉपिंग साइट्स कभी यूट्यूब… पर एक बार गलती से एक अजीब सा लिंक क्लिक हो गया.
जैसे ही पेज खुला मैं थोड़ा चौक गयी – एक सेक्स स्टोरी साइट थी. तब से मैंने नेट पर ऐसी स्टोरीज पढ़ना शुरू कर दिया. एक दिन मुझे एक ऐसी स्टोरी मिली जिसमें एक लेडी को उसके जेठ ने चोदा था. वो स्टोरी पढ़ कर मुझे एक अजीब सी झुरझुरी सी हुई. मैंने पहली बार वहां खुद को महसूस किया और मेरे दिमाग में मेरे जेठ नवीन जी का ख़याल आया. मेरी सांसें तेज़ हो गयी थी.
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स्टोरी में जब उसका जेठ उसके ब्लाउज के हुक्स खोलता है मैं अपना कुर्ती का गाला नीचे खींच कर अपने बूब्स को हाथ से दबाने लगी. मेरे निप्पल्स आलरेडी सख्त हो चुके थे. एक हाथ से फ़ोन पकडे थी और दूसरा हाथ लेग्गिंग्स के अंदर जा चुका था. मेरी चूत इतनी गीली थी जैसे किसी ने आलरेडी चाट दिया हो.
मैं धीरे-धीरे अपनी ऊँगली से चूत मसल रही थी और आँखें बंद करके बस जेठ जी के हाथो को महसूस करने की कोशिश कर रही थी. 5 मिनट भी नहीं लगे और मैं ज़ोर से झड़ गयी. सारा बदन कांप गया. बेड शीट भी हलकी सी भीग गयी थी. उस दिन शाम को जब जेठ जी ऑफिस से आये तो जैसे कुछ पल के लिए मेरी सांस ही रुक गयी.
पहले तो मैंने उन्हें हमेशा एक मर्यादा में देखा था अपने पति के बड़े भाई के रूप में. हमेशा रेस्पेक्ट की नज़र से कभी एक पल के लिए भी कोई और सोच नहीं आयी थी. पर आज… आज मैं उन्हें देख कर वही कहानी याद कर बैठी थी जो दोपहर में गलती से पढ़ ली थी.
वो कहानी जो शायद कभी पढ़ना ही नहीं चाहिए था. मेरे अंदर कुछ बदल गया था… कुछ जग गया था. उनका आना वो रोज़ की तरह था – हलकी सी थकान कुछ फाइल्स हाथ में और उनकी कैजुअल सी शर्ट जिसमे कुछ बटन्स खुले थे. पर मुझे आज वो थकान भी सेक्सी लगी…
वो पसीना भी एक अजीब सी खुशबू दे रहा था जो सीधा मेरे अंदर तक घुस रही थी. मुझे आज उनके कदम भी मर्दाना लग रहे थे… वो आँखें वो बॉडी सब कुछ अलग लग रहा था. मुझे खुद पे यकीन नहीं हो रहा था. ये मैं क्या सोच रही हूँ मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था जैसे उसका हर बीट कह रहा हो गलत है. पर न चाह कर भी मुझे ठीक भी लग रहा था.
एक अजीब सी घबराहट थी पर उस घबराहट के पीछे एक छुपी हुई एक्साईटमेंट भी थी. जिस जेठ जी को मैंने हमेशा बड़े भाई का दर्जा दिया था। आज उनकी एक मुस्कान उनकी एक नज़र मुझे कुछ और महसूस करा रही थी. शायद क्यूंकि मैंने दोपहर में वो कहानी सिर्फ पढ़ी नहीं थी जी ली थी. और जो कुछ मेरे जिस्म के साथ हुआ था उससे मैं इग्नोर नहीं कर पा रही थी.
जब उनकी और मेरी आँखें टकराई तो जैसे टाइम रुक गया हो. एक सेकंड… सिर्फ एक सेकंड… पर उस एक पल में जैसे मेरी सारी सोच मेरी सारी मर्यादा मेरी शराफत- सब कुछ बेचैन हो उठी थी. उन्होंने भी मुझे देखा और शायद कुछ अलग महसूस किया. एक नज़र में कुछ तो था.
जैसे मैं उनकी आँखों में पहली बार अपने लिए कुछ और ही देख रही थी – न वो बहु वाली रेस्पेक्ट थी न फॉर्मेलिटी. कुछ और था… कुछ मर्द और औरत के बीच का. उस पल के बाद दोनों ने ही नज़र हटा ली. एक अजीब सी हिचकिचाहट थी. उस दिन के बाद मुझे चैन ही नहीं था.
हर दोपहर जब घर के सारे काम निपटा लेती थी तो मैं अपने बेडरूम में चली जाती. दरवाज़ा बंद करके बेड पे लेट जाती और फ़ोन में वही स्टोरीज ढूंढती – भाभी और जेठ की चुदाई वाली कहानियां. जाने क्यों जब भी किसी औरत का अपने जेठ के साथ फिजिकल रिलेशन होता था न तो मेरे अंदर एक अजीब सी गर्मी उठती थी.
जिस्म में जलन सी महसूस होती थी और चूत में हल्का सा गीला-पन जैसे मेरी चूत भी किसी के लंड का इंतज़ार कर रही हो. स्टोरी पढ़ते हुए मैं अपने पैर चादर के अंदर ले जाती थी उन्हें थोड़ा कस के बंद करती जैसे कोई मुझे ज़ोर से पकड़ रहा हो. कभी-कभी मेरी उँगलियाँ अपने आप ही पैंटी के ऊपर से चूत के पास पहुँच जाती थी. बस थोड़ा सा प्रेशर डालती और पूरा जिस्म कांप उठता था.
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एक रात तो सब हद पार हो गयी. मैंने सपने में देखा की मैं अपने जेठ जी के साथ बेड पे हूँ मेरी नाइटी घुटनो तक चढ़ी है और उनका लंड मेरी चूत के अंदर धीरे-धीरे घुस रहा है. इतना ठोस इतना भरपूर था वो मनीषा की मैं नींद में ही झड़ गयी. जब आँख खुली तो मेरी पैंटी पूरी तरह से गीली थी जैसे किसी ने सच में मेरी चूत को चाट दिया हो या फिर अंदर तक भर दिया हो.
मैं थोड़ा हंसी थोड़ा घबराई लेकिन सबसे ज़्यादा मुझे महसूस हुई अपने अंदर एक औरत की असली भूख जो सिर्फ एक मर्द के लंड से ही शांत होती है. मैंने पैंटी बदली लेकिन नींद वापस नहीं आयी. बेड पे लेटी थी पर आँखों के सामने सिर्फ जेठ जी का चेहरा था. उनकी वो गहरी आँखें वो थोड़ा डार्क स्किन जिसमे एक अलग ही चार्म था… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और सबसे ज़्यादा उनका वो पल जब हमारी नज़र टकराई थी. उस रात मुझे समझ आया… की मेरे अंदर कुछ बदल चुका है. दुसरे दिन जब मैं बेडरूम से बाहर निकली तो मेरी नज़र सीधा उन पर पड़ी. पता नहीं क्यों लेकिन उनको देखते ही मेरे दिल में एक मीठा सा एहसास जाग गया. जैसे आँखों ने जो देखा हो वो सिर्फ आँखों तक नहीं रुका…
उसने दिल को छू लिया हो. मैंने उनको हल्का सा स्माइल दिया और उन्होंने भी मुझे वैसा ही जवाब दिया. लेकिन उनकी आँखों में एक अलग सी चमक थी एक अनजानी सी गर्मी. उस दिन के बाद जब भी वो घर में होते मैं उन्हें छुप-छुप के देखा करती थी. हर बार उनका बदन, उनकी चाल, उनका अंदाज़ सब कुछ मुझे अपनी तरफ खींचता था.
जैसे हर पल हर नज़र मेरी चूत में एक नरमी एक हल्का सा गीला-पन भर देती थी. उनकी हर हरकत चाहे वो ऑफिस जाने के टाइम फॉर्मल पहनते या शाम को घर आने के बाद शॉर्ट्स और टी-शर्ट – मैं सब कुछ नोटिस करती थी. जब मैं कपडे सुखाने के वक़्त उनका अंडरवियर हाथ में लेती थी तो उसमे लंड का अंदाज़ा लगा कर ही मेरी सांस तेज़ हो जाती थी.
मुझे लगता था उनका लंड कैसे दिखता होगा कैसा महसूस होता होगा… ये सोच के ही मेरी चूत भीग जाती थी. मुझे लगता था वो भी ये सब महसूस कर रहे थे. कभी-कभी उनका मुझे लम्बे वक़्त तक देखते रहना मेरी बातों में एक्स्ट्रा इंटरेस्ट लेना… कुछ तो था.
लेकिन हम दोनों ने कभी भी कोई लिमिट क्रॉस नहीं की. सब कुछ सिर्फ आँखों तक था. नज़रों की एक ऐसी भाषा जिसमे सब कुछ था डिजायर समझ और थोड़ा सा डर भी. मैं बहुत कन्फ्यूज्ड थी. क्या ये सिर्फ मेरी तरफ से था? क्या मैं ही ज्यादा सोच रही थी? या फिर उनके दिल में भी कुछ ऐसा था जो उन्होंने छुपा रखा था? हर रोज़ ये सवाल मुझे और बेचैन करता जा रहा था.
एक दिन सब को एक रिश्तेदार के घर फंक्शन में जाना था. मैं तैयार होने के लिए थोड़ा ज़्यादा टाइम लिया क्यूंकि मैं था कुछ अलग पहनने का सोच रही थी। जीमे मै शर्मीली भी लगूँ और थोड़ी सयानी भी. मैंने एक डीप वाइन कलर की ऑर्गेंजा साड़ी निकाली और उसको पहना।
वह साड़ी मैंने ऐसे बांधी जिससे वो ट्रांसलूसेंट सॉफ्ट और बॉडी के हर कर्व पर हलकी सी लिपटी हुई लगे. साड़ी में छोटी-छोटी जरी की कढ़ाई थी जो लाइट में शिम्मरी लग रही थी। उसमे न ज़्यादा चमक न धमक थी बस इतनी की आँखें अटक जाए. ब्लाउज सिल्क का था बोट नेक और एल्बो स्लीव्स पर बैक में वी-कट डिज़ाइन जिसमे मेरी स्मूथ बैक का कर्व ज़्यादा सेंसुअल लग रहा था.
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ब्लाउज थोड़ा टाइट था जिसमे से मेरे बूब्स की राउंड शेप ब्लाउज के कपडे को थोड़ा उभार रही थी बिना ज़्यादा कुछ दिखाये. जैसे छुपा के भी सब कुछ दिख रहा हो. साड़ी मैंने फ्रंट पल्लू स्टाइल में बांधी थी, प्लेट्स टाइट और पल्लू लूस जो एक साइड से मेरी बूब्स के कर्व पर हलकी सी बेचैनी के साथ गिर रहा था.
मेरी कमर पर्फेक्ट्ली एक्सपोज़ हो रही थी और नीचे से साड़ी का कपडा मेरी राउंड और फर्म गांड से चिपक के हर कदम में हिल रहा था बिना कोई बदतमीज़ी के बस एक स्लो पाइजन जैसे. ये लुक मेरे दिल के काफी करीब है. क्यूंकि जब मैं रेडी हो कर हॉल में आयी तो मेरे जेठ जी बस मुझे कुछ पल के लिए तकते ही रह गए.
उनकी आँखों में एक अजीब सी चुप्पी थी न जाने कैसी भूख जो आँखों से झलक रही थी. पहली बार उस दिन मुझे महसूस हुआ की वो मुझे सिर्फ भाभी की नज़र से नहीं एक औरत की तरह देख रहे है. एक ऐसी औरत जिसे वो कभी छू नहीं सकते पर देख कर भी सब कुछ महसूस कर सकते थे.
पूरे फंक्शन के दौरान हम एक-दुसरे को चोरी-चोरी देखते रहे. जैसे आँखों का खेल चल रहा हो. उनकी नज़र कभी मेरी कमर पर टिक जाती तो कभी ब्लाउज के वी-कट पे. मैं भी छुप-छुप कर उनकी तरफ देखती थी. लेकिन हर बार मेरी जेठानी का ख़याल आ जाता जो मेरी हर मूवमेंट पे नज़र रखे थी.
उन्हें शक न हो इसलिए मैंने बैठने की जगह बदल ली पर मेरी आँखों का क्या? वो तो हर पल अपने जेठ जी को ही ढूंढती रही. लगता था उनकी भी यही हालत थी क्यूंकि हर बार जब मैं उनकी तरफ देखती वो मुझे ही देखते मिलते. आँखों में वही अधूरा सा जूनून वो अधूरा सा हक़ जैसे हम दोनों किसी खिंचाव में बंधे हो जिसे हम छुपाना भी चाहे और महसूस भी करते रहे.
उस फंक्शन के बाद सब कुछ अंदर ही अंदर बदल गया था. मेरे और जेठ जी के बीच अब सिर्फ आँखों का रिश्ता नहीं रहा था. अब मैं चाहती थी की उनकी आँखों से कुछ और भी निकले कुछ बेपनाह हवस जिसे मैं महसूस कर सकू. एक बार सुबह का वक़्त था. मैं बाथरूम में नहा रही थी और उस दिन गलती से मैंने डोर का लॉक ठीक से नहीं लगाया था.
नहा कर निकलते वक़्त मैंने बस एक टॉवल अपने आस-पास लपेटा था. हाथ में अपनी ब्रा थी की अचानक से बाथरूम का डोर खुल गया. दरवाज़ा जेठ जी ने खोला था. हम दोनों एक पल के लिए जैसे फ्रीज हो गए. मेरी आँखें उनसे मिली उनकी आँखें तुरंत नीचे झुक गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो हक्के-बक्के हो कर बस “सॉरी!” कह कर डोर बंद कर गए. लेकिन उस एक लम्हे में सब कुछ कह दिया गया था. मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और मेरी सांसें कुछ देर तक रुकी सी थी. मैं एक सेकंड के लिए हिल नहीं पायी. पता नहीं शर्म ज़्यादा थी या कुछ और… लेकिन मेरे गाल लाल हो चुके थे.
थोड़ी देर बाद जब मैं नार्मल कपडे पहन के बाहर आयी वो हॉल में सोफे पर बैठे थे. उनकी आँखों में एक अजीब सी शर्म और बेचैनी थी. मैं उनके पास से गुज़री तो उनका चेहरा देख के मुझे हंसी आ गयी. वो जैसे स्कूल के बच्चे की तरह ब्लश कर रहे थे. मैं हंस पड़ी और उन्होंने भी आँखों से मेरी तरफ देखा.
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फिर हम दोनों के बीच एक छुपी हुई मुस्कराहट ने सब कुछ कह दिया. उस दिन एक नया एहसास एक अंजाना रिश्ता शुरू हुआ था. एक बार जेठ जी और जेठानी उनके एक रिश्तेदार की शादी में जाने वाले थे. जेठानी तैयार हो रही थी. उन्हें साड़ी पहनने में हेल्प चाहिए थी.
उन्होंने मुझे बुलाया था क्यूंकि ब्लाउज पहनने के बाद पल्लू सेट करने में हमेशा मैं ही उनकी मदद करती थी. मैं उनके रूम में गयी तब वो बाथरूम में थी ब्लाउज और पेटीकोट पहने हुए. “मनीषा एक मिनट रुक न… पल्लू सेट करवाना है उन्होंने अंदर से आवाज़ दी. मैं हां कह कर बेड के पास खड़ी हो गयी.
तभी मेरी नज़र जेठ जी पर पड़ी. रूम में सिर्फ मैं और जेठ जी थे. वो अपनी अलमारी के पास खड़े हो कर शर्ट्स निकाल रहे थे और एक-एक करके देखते जा रहे थे की शादी के लिए क्या पहना जाये. उन्होंने मुझे देखा बस एक पल के लिए. लेकिन उस पल में ही आँखों से एक हल्का सा सवाल छुप कर निकल आया.
वो एक-एक शर्ट को छू कर मेरी तरफ देख रहे थे. मैं थोड़ा सा रुकी फिर बिना कुछ कहे एक शर्ट की तरफ इशारा किया. उन्होंने मेरी तरफ नज़र टिकाये-टिकाये वही शर्ट उठायी. फिर बटन लगाते-लगाते फिर से एक बार देखा. पता नहीं क्यों लेकिन उस मोमेंट में मुझे एक बीवी जैसा महसूस हुआ जैसे मैं उनकी बीवी हु.
मेरे अंदर कुछ हलके से गीला सा हुआ एक अनजानी सी कसक एक अजनबी सी ख़ुशी. वो कुछ नहीं बोले पर जैसे उनकी मुस्कान ने सब कुछ कह दिया. अगले ही पल बाथरूम का डोर खुला और जेठानी बाहर आयी. उनकी आवाज़ ने मुझे हक़ीक़त में वापस ला दिया. मैं तुरंत मुस्कुराते हुए उनकी तरफ गयी जैसे कुछ हुआ ही न हो.
“आओ इसे अच्छे से पिन कर देती हु” मैंने कहा और पल्लू उठा कर उनके कंधे पे सेट करने लगी. जेठानी मिरर में खुद को देखती जा रही थी. मैं उनका लुक सेट कर रही थी पर मेरा मन अभी तक पिछले कुछ पलों में अटका हुआ था. मैं बिलकुल नार्मल थी बिलकुल एक संस्कारी बहु जैसे.
लेकिन दिल के कोने में अब भी उन आँखों की मुस्कान बसी हुई थी. वो हल्का सा पल जैसे दिल की छोटी सी डायरी में छुप हो गया हो. एक दिन जेठ जी के मोबाइल में मेरी ननद का कॉल आया. मैं ड्राइंग रूम में थी. मुझे भी एक काम था तो मैंने जेठानी से कहा “आपकी बात हो जाए तो मुझे फ़ोन दे देना.”
उन्होंने फ़ोन मुझे पकड़ा दिया. मैं फ़ोन लेकर अपने बेडरूम में चली गयी और भूल गयी की ये मेरा नहीं जेठ जी का फ़ोन था. रूम लॉक करके मैं बेड पर लेट गयी. कॉल ख़तम हुआ तो मैंने हाथ में फ़ोन चलाते-चलाते वेब ब्राउज़र खोला. तब मुझे याद आया की ये तो जेठ जी का फ़ोन था.
जैसे ही ब्राउज़र ओपन हुआ एक अजीब सी गर्मी मेरे अंदर उठने लगी. कुछ टैब्स आलरेडी खुले हुए थे. क्यूरोसिटी में मैंने एक क्लिक किया, भाभी की चुदाई छोटी भाभी को जेठ ने चोदा, इंडियन मैरिड वुमन सेक्स स्टोरीज और कुछ देसी पोर्न क्लिप्स भी आलरेडी बफर हो चुकी थी.
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मेरे हाथ कांप गए लेकिन आँखें स्क्रीन से हट नहीं रही थी. एक वीडियो प्ले हुआ जिसमे एक औरत अपने ब्लाउज उतारते हुए मर्द के सामने खड़ी थी. उसका फिगर बिलकुल मेरे जैसा था. उसके मेरे जैसे बड़े बूब्स और कमर पे टाइट लेग्गिंग्स थी. मुझे लगा जैसे जेठ जी मुझे ही इमेजिन करके ये सब देखते हो. मेरे अंदर एक अजीब सी आग भड़क उठी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे उस मोमेंट पे कोई शर्म नहीं महसूस हुई. बस एक कसक जाग उठी थी जो कब से दबा के रखी थी. मैंने लेग्गिंग्स के अंदर हाथ डाल दिया. मेरी चूत आलरेडी गीली हो चुकी थी. हर ऊँगली की हलचल से मेरी सांसें तेज़ होने लगी. मेरी कमर उठने लगी. मेरी अंगड़ाई एक-दम से और सेंसुअल हो गयी थी.
तभी ‘नॉक नॉक नॉक’ किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. मैं झट से उठी और हाथ संभालते हुए सारे टैब्स क्लोज किये. हिस्ट्री क्लियर की पूरा फ़ोन साफ़ कर दिया. बस ये भूल गयी की ब्राउज़र अभी भी बैकग्राउंड में ओपन था. कपड़ों को ठीक करके नार्मल सा लुक बना के दरवाज़ा खोला तो सामने जेठ जी खड़े थे.
मेरी सांस रुक गयी. आँखों में एक सेकंड के लिए झनझनाहट सी हुई. उन्होंने मेरे से फ़ोन लिया लेकिन उनकी नज़र मेरी आँखों में थी जैसे कुछ फील कर रहे हो. जैसे जानना चाहते हो क्या सब देख लिया मनीषा ने? उन्होंने तुरंत रीसेंट एप्स ओपन किया. ब्राउज़र अभी भी खुला था टैब्स क्लोज थे. हिस्ट्री क्लियर थी लेकिन स्क्रीन का एक ग्लिम्पस उन्हें सब बता गया.
मैंने हलकी मुस्कान के साथ उनकी आँखों में आँखें डाली और कहा “आपके फ़ोन में थोड़ा बिजी हो गयी थी जेठ जी…” उनकी आँखों में कोई घबराहट नहीं थी बस एक भूख थी. वो मुझे वैसा देख रहे थे जैसे अब पहली बार देख रहे हो. मेरे सीने का तेज़ उठना. मेरी हलकी सी कांपती सांस, उनके चेहरे पर एक अधूरा सा सुकून लाया जैसे कुछ मिल गया हो पर चखना बाकी हो.
मैंने फिर धीरे से कहा “वैसे… आपका कलेक्शन काफी इंटरेस्टिंग था.” एक हलकी टीजिंग सी मुस्कान के साथ मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया. पर अंदर का गर्मी भरा सन्नाटा अब भी मेरे अंदर गूँज रहा था. मुझे अब यकीन हो गया था की मैंने जेठ जी के दिल का एक सीक्रेट कार्नर अनलॉक कर दिया है. और अब उनकी नींद सिर्फ मैं हु.
एक दिन सुबह का वक़्त था. जेठानी बाजार गयी थी सब्ज़ी लेने और मम्मी जी अपने रूम में पूजा में बिजी थी. मैं किचन में थी एक हलकी सी येलो कॉटन की साड़ी पहने हुए वो भी बिना लाइनिंग के. बॉडी के कर्व्स साफ दिख रहे थे. ब्लाउज थोड़ा टाइट था जिसमे बूब्स पर्फेक्ट्ली फिट हो रहे थे.
बूब्स थोड़ा ऊपर उठे हुए थे और पल्लू एक साइड से शोल्डर पे पड़ा था. इससे क्लीवेज हलकी-हलकी झलक दे रहा था. मैं फ्रिज से दही निकालने के लिए थोड़ा झुकी और उसी मोमेंट एक गरम सा सांस का हल्का टच मेरी पीठ पर महसूस हुआ. जेठ जी बिना किसी आवाज़ के मेरे बिलकुल पीछे प्लेटफार्म के पास आ गए थे इतने करीब की उनकी बॉडी की हीट मेरे लोअर बैक तक महसूस हो रही थी.
मेरा झुकने का पोज़ ऐसा था की मेरी गांड टाइट साड़ी के अंदर साफ नुमाया हो रही थी. ब्लाउज थोड़ा सा ऊपर स्लाइड हो गया था जिससे मेरी कमर थोड़ी और एक्सपोज्ड हो गयी थी. उनकी आँखों का प्रेशर सीधा मेरी बॉडी पर महसूस हो रहा था. वो मुझे आँखों से छू रहे थे और मुझे सब कुछ फील हो रहा था.
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मैं धीरे से सीधी हुई और पल्लू एडजस्ट करने का नाटक किया लेकिन जान कर उसे थोड़ा और स्लाइड होने दिया. क्लीवेज और ज़्यादा दिखने लगा. जेठ जी थोड़ा और करीब आये उनकी आँखें अब सीधा मेरे बूब्स पर टिक गयी थी बिलकुल ओपन डिजायर के साथ. फिर उन्होंने हल्की आवाज़ में कहा-
जेठ जी – “मनीषा… आज खाने में क्या बना रही हो?”
मैं हलकी सी मुस्करायी आँखों से उनका सवाल पकड़ लिया… फिर हल्का सा शर्मा कर लेकिन टीजिंग एक्सप्रेशन के साथ कहा “आज आपको क्या खाने का मन है जेठ जी?”
एक पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छाई रही पर उस खामोशी मे इतना कुछ कह दिया गया की शब्दों की ज़रुरत ही नहीं थी. उस दिन के बाद जब भी जेठानी बाथरूम में होती या मम्मी जी टीवी के सामने होती जेठ जी किसी न किसी बहाने से पास आ जाते. कभी उनका हाथ मेरे हाथ से टकरा जाता कभी वो चाय लेते वक़्त मेरे सीने के पास झुक जाते.
एक बार मैं ड्राइंग रूम में डस्टिंग कर रही थी. झुकती तो मेरा लौ-नेक कुरता इतना खिसक जाता की मेरे बूब्स का आधे से ज़्यादा पार्ट साफ दिख जाता. उस दिन भी मैं झुकी थी सोफे साफ़ करते हुए और जेठ जी सामने सोफे पर बैठ कर टीवी ऑन कर लिए. लेकिन उनकी नज़र सिर्फ टीवी पर नहीं थी.
वो मेरे बूब्स पर टिकी थी बिलकुल बेझिझक हवस से भरी. जैसे ही मैं उनकी आँखों का डायरेक्शन पकड़ती वो तुरंत टीवी की तरफ देखने का नाटक करते. लेकिन मैं समझ गयी थी उनका फोकस सिर्फ मेरी बॉडी पर था. मैंने उन्हें थोड़ा और टीज़ करने के लिए एक नॉटी स्माइल दी.
जैसे आँखों ही आँखों में कह रही हु “देखो जितना देखना है लेकिन हाथ लगाने की इजाज़त नहीं.” फिर मैंने हल्का सा दुपट्टा ओढ़ लिया. मन तो नहीं था पर घर में किसी को शक हो जाये ये भी नहीं चाहती थी. उसके बाद मैं एक बड़ा सा टेबल खींच के लायी और उनसे कहा-
मै- “जेठ जी प्लीज ये टेबल पकड़ो न ज़रा… फैन साफ़ करना है.”
वो बिना कुछ बोले ख़ुशी-ख़ुशी टेबल पकड़ने आ गए. अब उनका ध्यान मेरी टाइट लेग्गिंग्स पर था. जिसमे मेरी फूली हुई चुत और हिलती गांड साफ आउटलाइन हो रही थी. मैं टेबल पर चढ़ के फैन साफ़ कर रही थी और जान कर थोड़ा ज़्यादा झुकती कमर हिलाती जैसे उनकी नज़र को इनवाइट कर रही हु. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे महसूस हो रहा था मेरी अदाओं का उनपे कितना स्ट्रांग असर हो रहा है और सच कहूँ मुझे वो असर चाहिए भी था. रात में कभी मैं बालकनी में अकेले हवा ले रही होती तो कुछ ही देर में जेठ जी भी पीछे आ जाते. वो ऐसे करीब आके खड़े हो जाते जैसे सिर्फ एक सांस भर की दूरी हो.
उनका बदन मेरे बिलकुल पास लेकिन बिना टच किये. ठंडी हवा के बीच उनका यूँ पास होना मुझे अंदर तक भीगा जाता. बिना किसी फिजिकल कांटेक्ट के भी मेरी चूत गीली हो जाती थी. ये सब छोटी-छोटी चीज़ें थी. लेकिन हर एक मोमेंट एक नयी चिंगारी जला जाता था.
अब हम दोनों काम के बहाने एक-दुसरे के करीब ज़्यादा रहने लगे थे. मैं भी जान-बुझ के अपना सीना थोड़ा और उभार के रखती थी. टाइट कुरता लेग्गिंग्स कभी-कभी जब हम सब मिल के मूवी देखने जाते या घूमने निकलते तो मैं जीन्स और बॉडी-हग्गिंग टॉप पहनती थी. साड़ी पहनती तो पल्लू हमेशा ढीला रखती थी.
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मुझे मज़ा आता था जब उनकी आँखों में मेरे बूब्स और गांड के लिए टपकती हवस दिखती थी. लेकिन… इस सब के बीच भी जब कभी मेरे हस्बैंड का कॉल आता या बेडरूम में उनकी फोटो देखती थी तो दिल का एक हिस्सा गिलटी फील करता था. वो बेचारे समुन्दर के बीच कहीं अपना फ़र्ज़ निभा रहे थे और मैं यहाँ जेठ जी की आँखों में अपने लिए हवस देख कर खुश हो रही थी.
पर सच कहु मेरी चूत में जो आग लगी थी वो गिल्ट से ज़्यादा पावरफुल थी. उस आग ने मुझे जेठ जी की और खींचना शुरू कर दिया था. एक दोपहर का वक़्त था. घर में सब सो रहे थे. जेठानी अपने कमरे में थी बच्चे अपने बेड्स पर और मेरे जेठ जी ड्राइंग रूम में अकेले टीवी देख रहे थे. मैं अपने रूम से किचन गयी.
उस दिन मैंने एक हल्का कॉटन का कुरता पहना था थोड़ा ढीला लेकिन गला थोड़ा गहरा था. नीचे टाइट लेग्गिंग्स थी बिना दुपट्टे के. कुर्ते का एक शोल्डर हल्का सा गिरा हुआ था और मेरी रेड ब्रा की स्ट्राप साफ दिख रही थी. वाइट कुर्ती के नीचे से ब्रा का शेप और कलर उभर के दिख रहा था.
मुझे उस मोमेंट में एक अजीब सी सेंसुअल गर्मी महसूस हो रही थी. किचन के साइड से मैंने उन्हें देखा उनकी आँखें टीवी पे थी पर मुझे लग गया था वो मेरी प्रजेंस महसूस कर चुके है. उन्होंने आवाज़ लगायी “मनीषा… थोड़ा ठंडा पानी मिलेगा?”
मैं ट्रे में पानी लेकर ड्राइंग रूम आयी. जैसे ही उनके सामने झुकी मेरी कुर्ती का गला और ज़्यादा खुल गया. मेरे बूब्स उनकी आँखों के बिलकुल सामने थे एक टेम्पटिंग नज़ारा. और मैंने झुकने को थोड़ा एक्स्ट्रा खींच दिया. उनकी आँखें टीवी से हट कर एक सेकंड के लिए मेरी क्लीवेज पे रुकी.
उस एक पल ने मुझे पूरा अंदर से सुलगा दिया. मैं कुछ नहीं बोली. बस एक हलकी मुस्कान के साथ ट्रे टेबल पे रखी और जाके उनसे थोड़ा दूर सोफे पर बैठ गयी. पैर फोल्ड करते ही मेरी कुर्ती और ऊपर चली गयी. टाइट लेग्गिंग्स के अंदर मेरी थाइस और गांड साफ उभर के दिख रही थी.
मुझे पता था उनकी आँखों से कुछ भी छुपा नहीं था. टीवी पर चैनल चेंज हुआ और “रेस साँसों की” वाला सेडक्टिव सांग चलने लगा. उस बीट में एक रॉ सेक्सुअलिटी थी – जैसे स्क्रीन से निकल के हमेशा अंदर घुस जाए. मैं टीवी देख रही थी लेकिन मेरी पूरी अवेयरनेस जेठ जी की आँखों पे थी.
अब वो आँखें किसी भाई की नहीं एक मर्द की थी जो मुझे पूरी तरह से स्कैन कर रही थी. मैं धीरे से अपना हाथ गले तक ले गयी और कुर्ते के गले को थोड़ा स्ट्रेच किया. स्ट्राप के पास थोड़ा एडजस्ट किया जैसे नॉर्मल हो रहा हो… पर असल में वो उनके लिए एक ओपन इनविटेशन था.
बिपाशा और सैफ का अंडरवाटर बोल्ड सीन आया और मैंने महसूस किया की उनकी नज़र अब मेरी क्लीवेज से नीचे फिसल चुकी थी मेरी लेग्गिंग्स के अंदर तक मेरे कर्व्स को एक्स्प्लोर कर रही थी. उनकी वो आँखों की जलन मुझे सुकून दे रही थी.
मुझे लग रहा था अब बस एक हाथ का फैसला बचा था. अगर उनका हाथ मुझे छू ले तो मैं कभी नहीं रुक पाऊँगी. मैं चुप थी पर अंदर से पानी-पानी. धड़कन को सँभालते हुए उठ गयी. पलट कर उनकी तरफ देखा. उनकी आँखों में एक प्यासी सी बेचैनी थी. जैसे वो कुछ कहना चाहते हो पर रोक रहे हो.
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“मनीषा… कहाँ जा रही हो?” उनका हल्का सा ब्रोकन सा सवाल था.
मैंने धीरे से कहा “थोड़ा रेस्ट करने.”
वो बोले “अरे बैठो न गाने अच्छे चल रहे है.”
लेकिन मुझे उनकी प्यास को थोड़ा और भड़काना था. एक हलकी सी मुस्कान के साथ जैसे उनकी नज़र मुझे छू गयी हो मैं धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ चल दी. मेरी गांड टाइट लेग्गिंग्स के अंदर होते हुए भी साफ़ हिल रही थी जैसे उनकी आँखों के लिए एक मनीषा छोड़ के जा रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
एक बार सभी लोग किसी शादी में गए हुए थे लेकिन मैं और जेठ जी नहीं जा पाए. मुझे पहले से पता था की सब लोग शाम तक ही लौट कर आएंगे. और वो मंथ एन्ड था तो जेठ जी का ऑफिस से थोड़ा जल्दी आना भी पक्का था. उसी सोच में मैंने अपनी अलमारी से एक ख़ास गहरी लाल जारजट साड़ी निकाली.
पतला फैब्रिक जो मेरी हर कर्व को सोफ्टली हाईलाइट करता है. जब भी मैं इस कपडे को पहनती हूं मेरी अपनी बॉडी का हर कोना ज़िंदा हो जाता है. मेरे मन में सिर्फ एक ख्याल था – “आज जेठ जी ज़रूर नोटिस करेंगे…” साड़ी मैंने जान के थोड़ी नाभि के नीचे बाँधी थी जिससे कमर का झुकाव और हिप्स का राउन्डनेस और ज़्यादा निकल के आ रहा था.
ब्लाउज डीप कट था अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. जब मैं खुद को आईने में देखि तो अपने उभरते बूब्स और ब्लाउज के टाइट फिटिंग से निकलती क्लीवेज को देख के मैं खुद ही थोड़ा थरथराई. मुझे लगा – “अगर मैं अपने आप से इतनी अफेक्टेड हो रही हु… तो जेठ जी पर क्या असर होगा?”
जब वो घर आये… उनकी आँखें मुझ पर अटक गयी. वो सीधे मुझे घूरते रहे. उनकी आँखों में शर्म नहीं थी… सिर्फ एक प्यासी सी चाहत थी. जैसे मेरी एक झलक ने उनके अंदर कुछ जगा दिया हो. मैं उनकी आँखों में आँखों डाल कर हलकी सी मुस्कुरायी.
मैंने थोड़ा नज़ाकत से कहा “अच्छा हुआ आप जल्दी आ गए. कब से घर पर अकेली बोर हो रही थी.”
वो एक्साईटमेंट में बोले “कहाँ गए सब?”
मैंने धीमी सेडक्टिव आवाज़ में कहा- “आप भूल गए आज सब को शादी में जाना था.”
जेठ जी ने नॉटी आवाज़ में कहा “मनीषा… तुम क्यों नहीं गयी?”
मैं कुछ बोल नहीं पायी पर मेरी आँखें सब कह गयी थी. जब मैं खाना परोस रही थी तो हर बार झुकते वक़्त ब्लाउज का क्लीवेज और गहरा दिख रहा था. मैं जान कर उनकी तरफ झुकती थी और हर मूवमेंट में उन्हें टीज़ करती थी. जब वो खा रहे थे मैं उनके सामने स्लैब साफ़ करने लगी – बैक उनकी तरफ टाइट बैकलेस ब्लाउज और साड़ी में मेरी कमर सीधा उनकी आँखों के सामने थी.
मुझे पता था… उनकी सांस रुकी हुई थी. और मुझे वो बेचैनी चाहिए थी. खाना ख़तम करके वो मेरे बिलकुल पीछे आ गए… और मुझे जेंटली पकड़ लिया. उनका हाथ मेरी कमर पर गया उनका स्पर्श एक तेज़ बिजली जैसे जिस्म में दौड़ गया. मैं एक पल के लिए ठिठक गयी, मेरी सांसें तेज़ हो गयी.
मैंने डर उत्तेजना और एक अजीब सी चुभन के साथ अपनी तेज़ सांसें को कण्ट्रोल करते कहा- “जेठ जी… ये… ये क्या कर रहे है आप? कोई आ जाएगा!” जेठ जी ने मेरी कमर को कस कर पकड़ते हुए धीमी गरम आवाज़ में बोले- “आज कोई नहीं आएगा मनीषा. आज सिर्फ हमारी बारी है… तुम्हारी प्यास बुझाने की.”
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वो मुझे पीछे से पकड़ कर मेरी गर्दन और मेरी नंगी बैक पर किश करने लगे. हर एक छुअन से मेरा जिस्म कांप उठता, लेकिन मन का एक कोना गिल्ट से भर गया था. आँखों में आंसू आ गए… पता नहीं वो डर के थे या इस रिश्तों के बंधन के टूटने की चुभन के. मैं अपने आप से लड़ रही थी.
मैं रुकने की कोशिश कर रही थी और आँखों से आंसू टपक रहे थे. मैंने धीमी सहमी हुई आवाज़ में कहा “नहीं… ये… ये गलत है… मैं आपके भाई की बीवी हु… ये रिश्तों की मर्यादा तोड़ रहा है…” जेठ जी ने मेरे कान के पास अपनी गरम सांस भेजते हुए हल्का सा कांपते हुए कहा-
“मनीषा मैं भी जानता हूं ये आसान नहीं है. पर जो तेरी आँखों में दर्द और प्यास देखी है न… वो सिर्फ कोई अपना ही समझ सकता है. तुम अकेली हो… और मैं भी…” मुझे सीधा कर दिया उन्होंने.
मेरी आँखों में आंसू थे –शर्म के दर्द के… और हां प्यास के भी. आज पहली बार किसी गैर मर्द ने मुझे इस तरह छुआ था और वो भी मेरा जेठ… लेकिन मेरा जिस्म… वो सारा विरोध भूल गया था. उन्होंने मेरा सर अपनी तरफ उठाया और मेरे होंठो को चूसने लगे. मैं रोकती रही अपने आप को पर जैसे मेरी बॉडी उनके होंठो के आगे पिघल गयी थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जब उन्होंने साड़ी के ऊपर से मेरे बूब्स को दबाया तो एक ज़बरदस्त झटका मेरी रीढ़ की हड्डी तक गया. मेरे होंठो से एक गहरी सिसकारी निकल गयी. मैं उनके किस में खो गयी थी। मेरी जीभ उनकी जीभ से टकरा रही थी गिल्ट के साथ एक अनजानी सुकून भी था जैसे अंदर की सारी भूख सारी प्यास आज बुझने वाली हो.
कुछ 10 मिनट बाद जब हमारी किस टूटी तब मैं उनसे लिपट कर शर्मा गयी. मेरी सांसें उनके सीने पे पड़ रही थी और दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था… जैसे कुछ गलत कर दिया हो पर मैं उस गलती में ही खो गया हो. उन्होंने मुझे धीरे से गोदी में उठाया मैंने अपनी बाहें उनके गले में डाल दी.
मेरी आँखें उनकी आँखों से नहीं मिल पा रही थी. वो बिना कुछ बोले मुझे बेडरूम ले आये. अंदर एक अजीब सी घबराहट थी लेकिन उससे ज़्यादा एक गहरी प्यास. उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया. उनकी आँखें मेरी तरफ एक अलग ही नज़र से देख रही थी. धीरे से उनका हाथ मेरे पेट पर फिर…
एक हलकी सी कांप उठी मैं. फिर वो मेरे गला गर्दन पीठ और कमर पर किस करने लगे. हर टच में जैसे मेरी साँसों की स्पीड बढ़ रही थी. मैं कभी अपने पैर जोड़ लेती कभी उनके हाथ पकड़ने लगती… पर रोकती नहीं थी. मेरी आँखें बंद थी लेकिन हर जगह उनका स्पर्श महसूस कर रही थी.
उनकी किस्सेस के साथ मेरी सिसकारियां निकल रही थी. दिल कह रहा था की बस यहीं पल रुक जाए. फिर वो मेरे पास लेट गए. उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. उनका चेहरा मेरे बिलकुल सामने था. उनके होंठ मेरे लिप्स को चूसने लगे. मैं अब उन्हें पूरा सपोर्ट कर रही थी.
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अपने हाथो से उनका चेहरा पकड़ के उन्हें चूमना शुरू किया. कभी हलकी सी बाईट तो कभी गाल पे नरमी से किस. मेरी हर सांस उनके साथ जुड़ती जा रही थी. मुझे समझ आ रहा था. मैं उनके लिए पूरी तरह से रेडी थी. अंदर गिल्ट था पर अब उससे ज़्यादा एक औरत का प्यासा तन था जो सिर्फ प्यार नहीं पर अब चूत में लंड मांग रहा था.
वो पलट गए और धीरे से मेरे ऊपर आ कर बैठ गए. उनकी आँखों में कुछ अलग ही था जैसे मुझे पूरा का पूरा समेत लेना चाहते हो. उन्होंने अपने हाथो से मेरा पल्लू हटा दिया. मेरे ब्लाउज के अंदर कुछ नहीं था और ब्लाउज खुद इतना टाइट था की मेरी सांसों के साथ सीने का हर उभार उनके सामने स्पष्ट हो गया था.
उनकी नज़र मेरी क्लीवेज पर जा टिकती जैसे वहां ही डूब जाना चाहते हो. वो झुक कर ब्लाउज के ऊपर से मेरी सीने के बीच किस करने लगे. उनके होंठो का गरम स्पर्श मेरे रोम-रोम को जगा रहा था. मैं आँखें बंद करके बस उनके होंठो की गर्मी महसूस कर रही थी. मेरे अंदर की बेचैनी बढ़ चुकी थी.
फिर वो धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरक गए. उनका चेहरा मेरे पेट पर था अब. उन्होंने वहां भी किस करना शुरू किया हलकी-हलकी जीभ से मेरी नाभि के आस-पास घूमने लगे और फिर एक पल में उनकी जीभ मेरी नाभि के अंदर… आहह… मैं एक थरथराहट से भर गयी थी. जैसे हर नरमी में उनका जूनून छुपा हो.
ये सब तो मैंने कभी महसूस ही नहीं किया था. ये तो कोई अलग ही दुनिया थी. अपने पति के साथ कभी इतना पैशन नहीं देखा था. ये तो एक बेशरम सी चाहत थी जो मुझे अंदर तक गीला कर रही थी. मैं भी अब उनके बालों में हाथ फिरने लगी. कभी उनके सर को अपनी नाभि पर दबाने लगती जैसे मैं भी उन्हें अपने अंदर घुसा लेना चाहती थी.
मैं अपनी साँसों से सुलग रही थी… पूरी तरह उनकी चाहत में भीग चुकी थी. और फिर… उन्होंने मुझे धीरे से खड़ा किया. उनकी उँगलियाँ मेरी साड़ी के पल्लू तक पहुँच चुकी थी और बिना कुछ बोले उन्होंने साड़ी खोलनी शुरू कर दी. मैंने भी उनका साथ दिया. मेरे हाथ हलके-हलके कांप रहे थे पर उनकी छाती की गर्मी के सामने मेरी झिझक पिघलने लगी थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मैं उनके सामने सिर्फ एक टाइट ब्लाउज और साटन सिल्क का पेटीकोट पहने खड़ी थी. मेरी साँसों का उतर-चढाव मुझे खुद सुनाई दे रहा था. इतनी नंगी सी कभी किसी के सामने नहीं खड़ी हुई थी वो भी जेठ जी के सामने. शर्म से मेरी आँखें झुक गयी थी. लेकिन मेरी चूत में जो गर्मी थी वो मेरी शर्म से कहीं ज़्यादा तेज़ थी.
वो आगे बढे और उन्होंने मुझे कमर से पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया. उनका हाथ मेरे पेटीकोट के ऊपर से मेरी गांड की गोलाई पर फिसलने लगा जैसे हर कर्व को महसूस करना चाहते हो. मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गयी. मेरी कमर हलकी सी थरथरा गयी. सिसकारियां मेरी ज़बान तक आ चुकी थी पर मैं चुप थी.
बस आँखें बंद करके उनके टच में खो गयी थी. फिर उन्होंने मुझे धीरे से बेड पर लिटा दिया मेरी आँखों में झांकते रहे जैसे कुछ पूछना चाहते हो. मैं बस उन्हें देख रही थी आँखों से हां कह रही थी. वो अपनी शर्ट के बटन खोलने लगे एक-एक करके. और मैं बिना झिझक उनकी बॉडी को घूर रही थी.
उनके छाती के मसल्स, उनके हाथ और वो छुपी हुई मर्दानगी सब कुछ मुझे खींच रहा था अपनी तरफ. उनके जिस्म से एक अलग ही गर्मी निकल रही थी जैसे बस मुझे अपने अंदर समां लेना चाहते हो. वो मेरे पास आये उनकी आँखों में शिद्दत थी और उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए कहा “मनीषा तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हारी ये फिगर… ये आँखें… मुझे पागल कर रही है. सच में तुम मेरी हर रात की ख्वाहिश बन गयी हो.”
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उन्होंने मेरे ब्लाउज का हुक खोला और मुझे ऊपर से नंगा कर दिया. मैंने शर्मा कर दोनों हाथो से अपने बूब्स छुपा लिए पर उन्होंने मेरे हाथो को हटा दिया और अपना मुँह मेरे बूब्स पर दबा दिया और किस करने लगे. वो मेरे बूब्स मसल रहे थे और साथ में निप्पल चूस रहे थे जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो.
मैं मदहोश हो गयी थी. मेरी आँखें बंद हो गयी और मैंने अपने आप को पूरी तरह उनके हवाले कर दिया. उनका हर स्पर्श मेरे अंदर एक आग सी लगा रहा था और मैं बस उस पल में खो जाना चाहती थी। मेरे होंठो से धीमी-धीमी सिसकारियां निकल रही थी.
उन्होंने मेरी पेटीकोट का नाडा खोल दिया और वो सरक कर मेरे पैरों में आ गया. उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पैंटी को भी खींच कर घुटनों तक कर दिया. मैंने अपनी साफ़-सुथरी चूत छुपाने की कोशिश की पर उन्होंने मेरे हाथो को हटा दिया. वो नीचे बैठ गए और मेरी पैंटी खींच कर फेंक दी. फिर मेरी टांगें फैला कर मेरे चूत पर मुँह लाने लगे.
मैं उनका सर दूर कर रही थी. पर उन्होंने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और मेरी टांगों के बीच आ कर मेरी चूत पर किस करने लगे और चाटने लगे. उनकी गरम जीभ मेरी चूत को जला रही थी और मैं तड़प उठी. मेरी सांसें तेज़ हो गयी और मेरे जिस्म में एक तेज़ करंट सा दौड़ गया. मेरा जिस्म कांप रहा था.
मैंने सिसकते हुए आवाज़ में लड़खड़ाहट हुए कहा “आप ये क्या कर रहे हो जेठ जी?”
जेठ जी मेरी चूत चाटते हुए मस्ती में बोले “मैं तुम्हे संतुष्ट कर रहा हूं मनीषा. तुम्हारी ये प्यास मैं ही बुझा सकता हु.”
उनकी जुबान में जैसे जादू था और मैंने खुद अपनी टांगें फैला दी और अपनी चूत मेरे जेठ जी से चटवाने लगी. मेरी सांसें उखड रही थी और मैं उनके हवाले हो चुकी थी हर एहसास में खो चुकी थी. मैं इतनी बेकाबू हो गयी की मैं उनका सर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी.
उनके बालों को अपनी उँगलियों में फंसा लिया. उन्होंने मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया और मैं तेज़ सिसकारी के साथ झड़ गयी. मेरी पूरी बॉडी में एक तेज़ करंट सा दौड़ा और मैं बिलकुल ढीली पड़ गयी. वो मेरी चूत का रस चाटने लगे हर बूँद का मज़ा ले रहे थे जैसे कोई रसीला फल खा रहे हो.
मैंने हाँफते हुए कमज़ोर आवाज़ में कहा “उफ़… जेठ जी… ये… ये क्या जादू है आपकी जुबान में… मैं तो खुद को रोक ही नहीं पायी.”
जेठ जी ने मेरी चूत को सहलाते हुए मेरी आँखों में देखते हुए शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया “जादू तो तुम्हारी प्यास में है मनीषा. जो इतनी गहरी है की उसको बुझाते-बुझाते मेरा भी हाल बुरा हो गया.”
मैंने भी उनको कोई रेसिस्ट नहीं किया क्यूंकि उनका हर स्पर्श मुझे बेचैन कर रहा था और मैं उस पल को जीना चाहती थी. उन्होंने मेरी चूत को चाटना जारी रखा और फिर उन्होंने मेरे तरफ देखते हुए कहा “मनीषा तुम्हारी ये चूत तो… ये तो मेरी प्यास है. आज से ये सिर्फ मेरी है मेरी जान.”
उसके बाद जेठ जी धीरे से खड़े हुए और मेरे सामने अपनी पैंट खोलने लगे. मेरी नज़र बस उनके हाथो की हर हरकत पर थी… मैं उनका लंड बाहर आता देखना चाहती थी. जैसे ही उन्होंने पैंट के साथ अंडरवियर भी एक झटके में नीचे कर दिया मेरी सांस एक पल के लिए अटक गयी. मेरी आँखें बड़ी हो गयी… सामने उनका लंड था मोटा लम्बा मेरे हस्बैंड से भी कहीं ज़्यादा बड़ा.
मैं उसे देख कर हैरान रह गयी… ऐसा लंड तो मैंने सिर्फ पोर्न में देखा था. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिठा दिया. अब उनका लंड मेरे मुँह के बिलकुल सामने था. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. मैं शर्मा रही थी पर चोरी-चोरी उस पर नज़र डाल रही थी… उसकी हर रग जैसे मुझे अपनी तरफ खींच रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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जेठ जी ने मेरा थोड़ा सा चेहरा उठा कर मेरी आँखों में देखा. मैं समझ गयी… वो क्या चाहते थे. उनकी आँखों में एक भूख थी खुदगर्ज़ पर उतनी ही गहरी और मैं भी उस भूख का हिस्सा बन चुकी थी. मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया… जैसे ही उनके लंड को छुआ मेरे जिस्म में एक तेज़ करंट सा दौड़ गया. वो बहुत सख्त और गरम था… जैसे किसी गरम लोहे का रोड.
मैंने उस पर एक हल्का सा किस किया… फिर उनकी आँखों में देखा. उनकी नज़र में वहीँ हवस थी… एक भूखे शेर की तरह चमक जो मुझे अंदर तक हिला रही थी. मैंने अपनी आँखें बंद की… और बिना कुछ सोचे उनका लंड अपने मुँह में ले लिया. जैसे मैं किसी सपने में खो गयी हु… बेपरवाह हो कर बस चूस रही थी. उनका लंड गरम सख्त… बिलकुल मेरे मुँह में फिट हो रहा था.
मैं अपनी जीभ से उसका हर इंच महसूस कर रही थी… हर एक टेक्सचर का स्वाद ले रही थी. जेठ जी ने प्यार से अपना हाथ मेरे सर पर रखा उँगलियों से बालों को हलकी सी सहला दी. फिर धीरे-धीरे मेरा सर आगे-पीछे करने लगे. उनका लंड मेरी होंठो के बीच से अंदर-बाहर होने लगा.
कभी पूरा गले तक घुस जाता तो कभी सिर्फ उनका सुपाड़ा मेरे होंठो के बीच थिरकता. हर धक्के पर मेरी सांस तेज़ हो जाती सिसकारियां निकल जाती. गले में उनकी गर्मी महसूस होती. मैं पूरी तरह उनके लंड के मज़ा में डूब गयी थी जैसे हर स्ट्रोक के साथ एक नशा चढ़ रहा हो.
जेठ जी ने आँखें बंद करते हुए सिसकते हुए कहा “आह मनीषा… क्या चूसती हो तुम… मज़ा आ गया. तुमने तो मेरी जान निकाल दी.”
उनकी तारीफ सुन कर मुझे और हिम्मत मिली. मैं और तेज़ी से उनका लंड चूसने लगी जैसे कोई प्यासा पानी पी रहा हो. मेरी जीभ उनके लंड के हर हिस्से को चाट रही थी और मैं उसकी नसों को भी महसूस कर रही थी हर चूसने में और गहरा उतार रही थी.
जेठ जी ने मेरा सर पकड़ा और अपने लंड को मेरे गले में और गहरा उतार दिया और सिसकते हुए तेज़ी से बोले “मनीषा… आह मेरी जान… मेरा निकलने वाला है… सब पी जाओ मेरी जान… सब पी जाओ… ये मेरा अमृत है.” मैंने भी बिना सोचे समझे उनका पूरा रस मुँह में ले लिया और उसे पी गयी. वो मेरे मुँह में ही झड़ गए.
उसके बाद वो धीरे से मेरे सर से हाथ-हटा कर पीछे हो गए. मैं हाँफते हुए उनकी तरफ देखा. मेरे मुँह में अभी भी उनके लंड का स्वाद था और एक अजीब सा नशा चढ़ा हुआ था. मेरे मुँह में अभी भी उनके रस का स्वाद था और मैं हलकी सी मुस्कान के साथ हाँफते हुए उनकी तरफ देख रही थी. जेठ जी अपनी सांसें संभाल रहे थे उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और आँखों में शरारत की चमक थी.
वो मुस्कुराते हुए बोले “तो मनीषा… कैसा लगा मेरा टेस्ट? क्या ख़याल है अब? और पिलाऊँ या इतना ही काफी है?”
मैं शरमाते हुए पर आँखों से उनका मज़ाक उड़ाते हुए बोली “आप तो बहुत… बहुत शैतान हो गए हो जेठ जी.”
वो मेरे बिलकुल पास आ गए उँगलियों से मेरे गालों को सहलाते हुए धीमी आवाज़ में बोले “शैतानी तो अब शुरू हुई है मेरी जान… और अब जब तुमने मेरा स्वाद चख लिया है तो क्या ये शेर ऐसे ही सो जायेगा? या तुम्हारा इरादा इसे फिर से जगाने का है?”
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उनकी बातों से मेरे होंठो पर हंसी आ गयी पर दिल में एक नयी आग भड़क उठी. उनका लंड अभी थोड़ा नरम था पर अब भी इतना बड़ा की मेरी नज़र उसी पर अटक गयी. मैं नॉटी स्माइल के साथ उनके लंड की तरफ इशारा करते हुए बोली “आपको लगता है की मैं अपने इस शेर को ऐसे ही सोने दूँगी? अभी तो इससे बहुत काम करवाना है.”
जेठ जी की आँखों में जोश का बिजली सा चमक उतरी. “तो क्या करोगी मेरी जान? कैसे जगाओगी इससे?”मैंने उनका हाथ पकड़ा उन्हें बेड पर अपने पास बिठाया. धीरे से उनका लंड अपनी उँगलियों में लेकर जैसे कोई अनमोल चीज़ हो प्यार से सहलाया. “इससे तो अभी बहुत काम लेना है जेठ जी… आपकी आज की हर बूँद सिर्फ मैं ही पियूँगी.”
मैंने उनका लंड अपने हाथो में ले लिया धीरे-धीरे उसकी गर्मी महसूस करते हुए सहलाने लगी. उसका नरम और भारी एहसास मेरे हाथो में जैसे आग जला रहा था. मैं अपना मुँह उसके करीब ले गयी और सुपाड़े पर हलकी सी किस दी. फिर अपनी जीभ से ऊपर से नीचे तक उसकी लम्बाई को चाटना शुरू किया. जेठ जी की पलकें बंद हो गयी एक गहरी सांस उनके सीने से निकली और उनके होंठो से हलकी सी सिसकी.
वो होठ से मुस्कुराते हुए बोले “आह मनीषा… बस ऐसे ही… तुम्हारे हाथो का जादू अलग ही है… तुम तो मेरी चाहत बन गयी हो.” मैंने उनके लंड को और प्यार से चूमना चाटना शुरू किया कभी टिप पर अपनी जीभ घूमते हुए कभी उसे अपने मुँह में लेकर आगे-पीछे करती.
धीरे-धीरे उसकी नरमी सख्ती में बदल गयी और कुछ ही पलों में वो बिलकुल तन चुका था मोटा लम्बा एक फौलादी रोड की तरह… जो अब मेरी गरम चूत में उतरने को बेचैन था. जेठ जी का मोटा लंड पूरी तरह तन चुका था. उन्होंने मेरी टांगें धीरे से फैलाई और मेरी चूत पर थोड़ा सा थूक गिरा कर ऊँगली से फैला दिया जिससे वो और ज़्यादा चमक उठी.
मेरी चूत अभी भी उनके ओरल pleasure से गीली थी और अब उनका लंड उसमें घुसने को बेचैन था. उसकी गर्मी मैं अपने अंदर तक महसूस कर रही थी. जेठ जी ने एक नॉटी स्माइल दी “अब मैं छोटे की कमी पूरी कर रहा हूं मनीषा… आज तुम्हे असल मज़ा चखने को मिलेगा. जो तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा.” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उनकी बात सुन कर मेरी नज़र अपने आप उनके लंड पर चली गयी. मेरे दिल में एक अजीब सा डर और एक्साईटेमेंट दोनों साथ-साथ चल रहे थे. मैं उनकी आँखों में देखते हुए हलकी सी सांस ले कर बोली “आपका तो बहुत बड़ा है… उनका तो आपके सामने कुछ भी नहीं. क्या मैं इसे पूरा अंदर ले पाऊँगी?” मेरी बात सुन कर जेठ जी के होंठो पर एक और भी नॉटी मुस्कान आ गयी.
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वो मेरी चूत को घूरते हुए बोले “लंड चाहे जितना भी बड़ा हो… औरत की चूत उसे निगल ही लेती है. और आज तुम्हे वही मिलेगा जो तुम हमेशा से चाहती थी. देखना… ये पूरा अंदर जायेगा… और तुम्हे जन्नत का मज़ा दिखायेगा. उन्होंने मेरी गीली चूत पर अपना मोटा लंड धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया. हर रगड़ के साथ मेरी साँसों की रफ़्तार तेज़ होती जा रही थी और मेरे अंदर एक मीठी तड़प उठ रही थी. लगता था जैसे वो जान बुझ कर मुझे तड़पा रहे हो मेरे जिस्म को अपने लंड की प्यास से बेहाल करते हुए.
मेरे होंठो से बेकरारी निकल ही गयी मैं उनकी गर्दन पकड़ कर बोली “क्यों इतना तड़पा रहे हो? अब चोदो मुझे… मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा.” वो सिर्फ मुस्कुराये. एक गहरी सांस लेकर उन्होंने अपना लंड धीरे से मेरी चूत के दरवाज़े पर रखा… और हल्का सा धक्का दिया. जैसे ही उनका मोटा सुपाड़ा अंदर घुसा एक तेज़ दर्द ने मेरी सारी साँसें खींच ली. “आह्हः…” मेरी चीख निकल गयी मेरी आँखों से आंसू टपक पड़े. जेठ जी ने मुझे अपनी बाहों में संभाला मुझे करीब खींच कर धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर उतार दिया और धीरे-धीरे चोदते हुए मेरी पूरी प्यास बुझा दी.
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