Slut Mom Aunty
मेरा नाम ऋषभ है. मैं 19 साल का हूं और अभी कॉलेज में स्टडी कर रहा हूँ हमारी फॅमिली एकदम जॉइंट फॅमिली है जिसमे मेरे पापा-मम्मी, चाचा-चाची और दादा-दादी सब एक साथ रहते है. हम कजिन्स को मिला के टोटल 5 बच्चे है. मैं सबसे बड़ा हूँ मेरी एक छोटी बहन है जो 15 साल की है और अभी स्कूल में पढ़ती है. Slut Mom Aunty
मेरे चाचा के दो लड़के है – एक 12 साल का और एक 8 साल का दोनों स्कूल जाते है. हमारे घर का माहौल हमेशा अच्छा रहता है – दादी-दादा के संस्कार चाचा-पापा की मस्ती और हम बच्चों की शैतानी सब मिल कर घर को एक-दम खुशहाल बना देते है. फेस्टिवल्स और फॅमिली फंक्शन्स में तो और भी मज़ा आता है सब मिल जुल कर एन्जॉय करते है.
पापा का एक किराने का दुकान है जो हमारे एरिया में काफी पुराना और मशहूर है. दिन भर पापा दुकान पे बिजी रहते है और घर आ कर फॅमिली के साथ टाइम स्पेंड करते है. चाचा एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट है. उनका काम भी बहुत रिस्पांसिबिलिटी वाला है इसलिए उनका रूटीन थोड़ा फिक्स रहता है.
मेरी मम्मी का नाम सविता है. उनकी उम्र करीब 42 है. मम्मी एक-दम घरेलु और संस्कारी टाइप की लेडी है. सुबह 5 बजे उठ कर सबसे पहले घर के मंदिर में पूजा करती है. उनका ड्रेसिंग स्टाइल ज़्यादातर साड़ी है. लेकिन मम्मी साड़ी ऐसे पहनती है की उनका फिगर और भी निखर कर सामने आता है.
मम्मी का फिगर लगभग 36-30-38 का है जिसमे उनकी कमर और कमर के ऊपर का कर्व एक-दम नैचुरली सेडक्टिव लगता है. लेकिन उनकी शक्ल और बिहेवियर इतना शरीफ और संस्कारी है की कोई उन्हें देख कर बस “आइडियल बहु” ही कहे. मेरी चाची का नाम प्रिया है. उनकी एज 38 है और वो भी एकदम धार्मिक औरत है.
रोज़ सुबह मम्मी के साथ मिल कर घर के मंदिर में आरती करती है और व्रत-उपवास भी रखती है. चाची भी हमेशा साड़ी पहनती है कभी-कभी सलवार सूट. उनका फिगर मम्मी से थोड़ा स्लिम है लगभग 34-28-36 लेकिन उनकी तेज़ आँख और हमेशा मुस्कुराता हुआ चेहरा उन्हें अलग ही चार्म देता है.
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मम्मी और चाची दोनों घर में अपने-अपने रोल्स में एक-दम परफेक्ट है – एक तरफ वो पूजा-पाठ भजन घर की मर्यादा और दूसरी तरफ अपने सुन्दर और सेक्सी फिगर के वजह से हर जगह नोटिस होती है. घर वाले तो उन्हें बस शरीफ और संस्कारी बहु मानते है लेकिन उनकी नेचुरल ख़ूबसूरती और शरीर की अदा देख कर कोई भी आदमी दिल से दीवाना हो जाए.
एक दिन सुबह मैं कॉलेज के लिए तैयार हो रहा था. बैग कंधे पे डाल कर हॉल में आया तो देखा मम्मी पापा से बात कर रही थी. पापा नाश्ता कर रहे थे और मम्मी उनके पास खड़ी थी. मम्मी ने प्यार से कहा मैं और प्रिया आज शाम को एक सत्संग सभा में जाना चाहते है. अच्छे प्रवचन होते है वहां. आप हमे बस का किराया और कुछ पैसे दे दीजिये.
पापा ने मुस्कुराते हुए तुरंत हाँ कर दी “हां सविता सत्संग जाना अच्छी बात है. तुम दोनों जाओ.”
उन्होंने जेब से कुछ नोट निकाल कर मम्मी के हाथ में दे दिए. मेरे लिए ये एक नार्मल सी बात थी क्यूंकि मम्मी और चाची ऐसे सत्संग सुनने के लिए हर महीने एक दो बार जाती रहती थी. कभी-कभी सुबह से प्रोग्राम में जाती तो सीधा शाम को दोनों आती थी.
दादी हमेशा खुश होती थी और बोलती थी “दोनों बहुएं घर की इज़्ज़त बढाती है भजन-सत्संग में जाती है कितना अच्छा लगता है.” मुझे भी ये सब बिलकुल नार्मल लगा. बस कॉलेज निकलने से पहले मैंने उनकी तरफ देखा और सोचा की मेरी मम्मी और चाची वाक़ई घर की शान है.
उस दिन मैं कॉलेज गया तो पता चला की कैंपस ऑलमोस्ट खाली है. पूरे क्लास में सिर्फ 7-8 स्टूडेंट्स ही आये थे. पता चला की फेस्टिवल चल रहे है इसलिए ज़्यादातर बच्चे बंक कर गए. मैंने भी सोचा “अब यहाँ बोर होने से अच्छा घर ही चला जाऊ.” लेकिन प्रॉब्लम ये थी की उस वक़्त मेरे रूट की बस ही नहीं चल रही थी.
मैं सोच में था की अब घर कैसे जाऊ. तब मैंने डिसाइड किया की थोड़ा आगे तक पैदल चल कर ऑटो ढूंढ लेता हु. मैं रोड के किनारे-किनारे चल रहा था धुप भी तेज़ थी और ट्रैफिक भी कम था. तभी मेरी नज़र आगे गयी… और मैं एक-दम रुक गया. मुझे दूर से दो औरतें दिखाई दी. पहले मुझे लगा की शायद गली के लोग है.
लेकिन ध्यान से देखा तो मेरी आँखें फट गयी. “अरे… ये तो मम्मी और चाची है!” मैं एक-दम कंफ्यूज हो गया. “पर… ये लोग यहाँ क्या कर रही है?” मेरे दिमाग में सवाल उठने लगे. मैं धीरे-धीरे चल रहा था सोच रहा था की उनके पास जा कर पूछू भी या नहीं.
मैं बस उनके करीब ही पहुँचने वाला था की अचानक मैंने देखा मम्मी और चाची दोनों एक अंकल के साथ जा कर उनकी कार में बैठ गयी. और फिर वो कार सीधा चल दी. मैं एक-दम शॉक में आ गया. “ये क्या… ये लोग किसी अंकल के साथ कहीं जा रही है? लेकिन सत्संग तो यहाँ से बिलकुल उल्टा डायरेक्शन में होता है!”
मैंने ध्यान से देखा वो अंकल अभी थोड़ी देर पहले एक मेडिकल शॉप से बाहर निकले थे. तब मेरे मन में ख़याल आया की शायद उस मेडिकल वाले को पता हो की वो अंकल कहाँ रहते है. मैं बिना सोचे समझे सीधा उस मेडिकल स्टोर की तरफ चल पड़ा. मैं धीरे से मेडिकल शॉप के अंदर गया.
तभी सुना वहां काउंटर पर काम करने वाला लड़का सेठ जी से कह रहा था “एक्स्ट्रा डॉटेड कंडोम खत्म हो गए सर.”
सेठ ने थोड़ा हैरान होते हुए कहा “अरे इतना जल्दी कैसे खत्म हो गए?”
वो लड़का बोला “अभी जो कस्टमर आये थे… उन्होंने ही लास्ट के दो पैकेट ले लिए.”
सेठ हंसी दबा कर बोला “हां लगता है आज कुछ बड़ा प्रोग्राम है. फ्लेवर्ड कंडोम और वियाग्रा की गोलियां भी ले गया है.”
ये सुन कर मैं एक-दम कंफ्यूज हो गया. “क्या ये लोग किसी और के बारे में बात कर रहे है? या फिर…?” तभी एक और अंकल जो आलरेडी काउंटर के पास खड़े थे हंस कर बोले “कौन? वो वाइट शर्ट वाला? जो अभी गाड़ी लेकर गया था?”
सेठ जी ने तुरंत हां में सर हिला दिया “हां वही.”
वो तीसरे अंकल थोड़ा हंसी रोक नहीं पाए और बोले “साले के साथ दो-दो माल थी… उफ़ क्या लग रही थी दोनों! लगता है आज जम कर चुदने वाली है.”
मेरी सांसें एक पल के लिए रुक गयी. “दो-दो माल? मतलब मम्मी और चाची की बात कर रहे है क्या…?” मैं शॉक में उनकी बातें सुन रहा था पर दिल मान नहीं रहा था. वो तीखी बात सुन कर एक और अंकल जो वहां दवा लेने आये थे थोड़ा गुस्से में बोल पड़े क्या बकवास कर रहे हो तुम लोग? ज़रा ध्यान से बात करो.
माहौल एक पल के लिए सीरियस हो गया. मैं भी चुप-चाप अपना एक्टिंग करता हुआ काउंटर पर गया और बोला “भैया सर दर्द की कोई दवा दे दो.” मुझे दवा मिल गयी और मैं साइड हो कर वेट करने लगा. धीरे-धीरे सब लोग अपना काम करके निकल गए. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी मेडिकल शॉप के सेठ जी ने अपने PC पर CCTV कैमरा का प्लेबैक खोला. मेरी आँखें खुल गयी स्क्रीन पर वही मोमेंट दिख रहा था. रोड के कार्नर पर मम्मी और चाची साफ खड़ी हुई दिख रही थी. थोड़ी देर बाद वही वाइट शर्ट वाला अंकल आया उनसे बात की और फिर तीनो गाड़ी में बैठ कर चले गए.
सेठ जी ने वीडियो देख कर अपने आप से ही बोला “साली दोनों तो सच में एटम बम है… जिसने भी फसाया उसका दिन बन गया.” मेरी सांसें अटक गयी. कैमरा में जो वाइट शर्ट वाला आदमी था उसका चेहरा ज़ूम हुआ… और मैं शॉक में रह गया. वो और कोई नहीं बल्कि पापा के पुराने दोस्त— जयंत अंकल थे.
जयंत अंकल की बात करू तो वो पापा के सबसे करीब दोस्त है. हमारा उनके घर से पुराना रिश्ता है इसलिए उनका आना-जाना हमारे घर पे आम बात है. मैं भी उनको बचपन से जानता हूं उनकी प्रजेंस घर में बिलकुल फॅमिली मेंबर जैसी होती है. लेकिन अभी मेडिकल शॉप पर जो सुना और देखा… उससे मेरा दिमाग घूम गया.
कंडोम वियाग्रा… और वो भी जयंत अंकल के साथ मम्मी और चाची? ये सोच कर मेरा होश उड़ गया. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मैं अपनी आँखों और कानों पर विश्वास करूँ या नहीं. कुछ पल के लिए तो मेरा दिमाग बिलकुल काम करना बंद हो गया.
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मैंने अपने आप को समझाने की कोशिश की – “नहीं ऋषभ तू गलत सोच रहा है… ये सब मुमकिन ही नहीं. मम्मी और चाची तो इतनी धार्मिक पूजा-पाठ में डूबी रहती है. संस्कारी औरतों की मिसाल है दोनों. और जयंत अंकल… वो तो पापा के इतने करीब दोस्त है फॅमिली के जैसे. वो ऐसा कुछ कर ही नहीं सकते.”
लेकिन दिल कहीं न कहीं मान नहीं रहा था. जितना मैं अपनी सोच को दबाता उतना ही अंदर शक की आग भड़कती जा रही थी. मैं कह रहा था की अगर ये सब बस ग़लतफहमी है तो खुद आँखों से देख लेना ही बेहतर होगा. तभी मुझे याद आया – जिस तरफ कार गयी थी वहीँ तो उनका फार्म हाउस है. वहां हम लोग पहले भी घूमने गए थे मैं वो जगह अच्छी तरह जानता हूँ बस ये याद आते ही मेरी बेचैनी और बढ़ गयी.
मैंने तुरंत एक ऑटो रोका ड्राइवर को एक्स्ट्रा पैसे दिए और बोला – “सीधा उस तरफ चलो” मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था आँखें सिर्फ एक ही चीज़ देखना चाहती थी सच. मैंने फार्म हाउस के थोड़ी दूर ऑटो रोक कर ऑटो वाले को बोला “तू यहीं रुक मैं दो मिनट में आता हु.”
फिर मैं धीरे-धीरे पैदल चल कर जयंत अंकल के फार्महाउस की तरफ बढ़ा. वहां पहुँच कर जो सबसे पहली चीज़ मैंने देखी उसने मेरे होश उड़ा दिए – वहीँ कार फार्म हाउस के बाहर खड़ी थी जो मैंने मेडिकल स्टोर के सामने देखी थी. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. अब शक और पक्का लगने लगा.
मैंने वापस मुड़ कर आटो वाले को पैसे दिए और उसे भेज दिया ताकि मुझे कोई देख न ले. फिर मैं दबे पाँव संभल कर उनके फार्म हाउस का गेट थोड़ा सा खोल कर अंदर घुस गया. हर एक कदम के साथ मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था. मैं चुपके से एक बड़ी खिड़की के पास गया और धीरे से झांक कर अंदर देखा… और जो मैंने देखा उसने मेरी सांसें रोक दी.
अंदर हॉल में मम्मी और चाची सोफे पर बैठी थी. और उनके सामने सिर्फ जयंत अंकल ही नहीं बल्कि पापा के और कुछ दोस्त भी बैठे थे – रौशन अंकल समीर अंकल नरेन्द्र अंकल और मुकेश अंकल. ये सभी हमेशा घर आते-जाते रहते थे. पर अब उन सब को एक जगह देख कर मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये सब यहाँ कर क्या रहे थे.
मम्मी ने आज क्रीम ऑफ-वाइट कॉटन साड़ी पहनी थी जिसमे रेड और ब्लैक मधुबनी स्टाइल का बॉर्डर था. साड़ी का फैब्रिक हल्का और सॉफ्ट था जो उनके फेयर स्किन पर और भी निखरा हुआ लग रहा था. रेड पोल्का डॉट ब्लाउज डीप नेक लाइन के साथ उनके भरे और हॉट सीने को और उभार रहा था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
साड़ी का पल्लू मम्मी ने एक-दम निटली संभाला हुआ था. लेकिन जब भी वो हल्का सा सरकता तो उनकी पतली कमर और गोल नाभि चमक जाती थी. इस साड़ी लुक में मम्मी एक-दम ट्रेडिशनल और ग्रेसफुल लग रही थी. पर उनके कर्व्स और स्माइल में एक छुपा हुआ सेडक्टिव चार्म था. जिससे नज़र हटाना मुश्किल कर रहा था.
चाची ने आज ब्राइट पिंक साड़ी पहनी थी जिसका हल्का ट्रांसपेरेंट फैब्रिक उनके डस्की स्किन टोन पर और भी खूबसूरत लग रहा था. साड़ी के अंदर उनका ग्रीन स्लीवलेस ब्लाउज टाइट फिटिंग था जो उनके 34-28-36 फिगर को और हाईलाइट कर रहा था. बैठते वक़्त साड़ी के प्लेट्स थोड़ी ऊपर हो गयी थी जिसमे उनकी टोंड जाँघों का कर्व हल्का सा नज़र आ गया. उस मोमेंट में उनका लुक इतना सेंसुअल था की मेरी नज़र उनपे टिक कर रह गयी.
दोनों ने सिन्दूर बिंदी और चूड़ियां पहनी थी बिलकुल एक नई नवेली दुल्हन की तरह. लेकिन उनकी सजावट देख कर मुझे कभी समझ नहीं आया की ये दोनों सत्संग के लिए नहीं बल्कि कुछ और ही ख़ास वजह से इतनी सज-धज कर घर से निकलती थी. उनका पूरा लुक ऐसा था जैसे वो किसी मंदिर के लिए जा रही हो पर असल बात तो सीक्रेट महफ़िल के लिए दोनों घर से झूठ बोल कर निकली थी.
इतने में नरेन्द्र अंकल ने मम्मी की तरफ देख कर बोला “भाभी जी… आज तो आप बिलकुल फूल जैसी खिल रही हो देख के मैं मीठा हो गया.”
मम्मी शर्मा के हलकी सी मुस्कान दे दी पर उस शर्माने में भी एक अलग ही जलवा था जो समझना मुश्किल था.
तभी जयंत अंकल ने चाची की तरफ देख कर हंस कर बोला “प्रिया भाभी… आज तो आपने इस साड़ी में बिजली गिरा दी है. संभल के वरना हम जैसे आदमियों को करंट लग जायेगा.”
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चाची ने पलक झुका कर बस एक शरारती सी नज़र उनकी तरफ डाली जैसे उन्हें टीज़ कर रही हो. मैं ये सब खिड़की से देख कर एक-दम कंफ्यूज हो गया. घर पे ये दोनों कभी ऐसे रियेक्ट नहीं करती थी पर यहाँ… जैसे उनका एक अलग ही रूप था. इतने में रौशन अंकल हाथ में दारु की बोतल लेकर आ गए.
सब एक्सपेक्ट कर रहे थे की कोई अंकल बोतल खोलेंगे पर मेरी मम्मी ने खुद बोतल ली और अपने नरम हाथो से उसकी सील तोड़ दी. उसके बाद चाची ने बड़े ही आराम से सब के लिए पेग बनाने स्टार्ट कर दिए. मुझे अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ – जो माँ और चाची घर पे पूजा-पाठ और व्रत करती थी आज वो दोनों खुद शराब सर्व कर रही थी.
पहला पेग सब ने आराम से पिया. थोड़ी ही देर में सब अंकल थोड़ा खुलने लगे हंसी–मज़ाक और थोड़ी नॉटी बातें शुरू हो गयी. नरेन्द्र अंकल मम्मी को देख कर बोले “भाभी जी आपने तो दारू में भी अपनी मिठास घोला है… एक सिप लेने से लगता है जैसे आप ही के होंठ चूम लिए हो.”
मम्मी ने सर झुका लिया पर उसकी आँखों की हलकी सी शरारत भरी चमक मुझे दूर से भी नज़र आयी. चाची पहले थोड़ा मुस्कुरायी फिर झुक कर अपने गिलास से चुस्की ली और जयंत अंकल की तरफ नज़र मिलायी. माँ और चाची जो घर पर संस्कार की मूर्ति बनती थी अब उनका ये रूप अंकल के सामने एक-दम अलग ही खेल दिखाने वाला था.
सभी अंकल के दो-दो पेग हो चुके थे. हंसी–मज़ाक और शरारत भरी बातें अब थोड़ी नॉटी लाइन लेने लगी थी. नरेन्द्र अंकल मम्मी के पास आ कर उनका गिलास भरते हुए बोले “अरे भाभी जी ज़रा सीधा करके गिलास पकड़िए… वरना आपके हाथ की नरमी में पूरा शराब बह जायेगा.”
उनकी ऊँगली मम्मी के हाथ को हलकी सी ब्रश कर गयी. मम्मी ने थोड़ा सांस लेटे हुए मुस्कान दी और आँख झुका ली. रौशन अंकल तब चाची की तरफ बढे उनके गिलास में पेग डालते हुए बोल पड़े “भाभी आप तो पेग बनाते-बनाते हमें भी पी लेने पर मजबूर कर देती हो.”
चाची हंसी दबा गयी और अपना पल्लू थोड़ा सीने पर एडजस्ट करते हुए उनका गिलास वापस पकड़ा दिया. इतने में जयंत अंकल ने अपने गिलास में एक छोटी सी टेबलेट डाली. वो टेबलेट फ़िज़्ज़्ज़्ज़्ज़ करके घुल गयी. उन्होंने सीधा चाची की तरफ देख कर आँख मारी.
चाची पहले तो थोड़ा एक्ट करते हुए पलके झुका गयी फिर हलकी सी मुस्कान दे दी. मेरा दिल ज़ोर–ज़ोर से धड़क रहा था. “ये वही वियाग्रा की गोली थी जो मेडिकल स्टोर वाले कह रहे थे…”ये देख कर मेरा कन्फ़्युशन अब शक में और शक अब पूरी तरह यक़ीन में बदल गया.
अब मुझे पूरी तरह यकीन हो गया की यहाँ कुछ और ही खेल चल रहा है. सभी अंकल अब मम्मी–चाची की ब्यूटी और अदाओं की ओपनली तारीफ कर रहे थे. “भाभी जी आपकी आँखों में डूबने का मैं करता है.” “अरे इनकी मुस्कान में ही नशा है यार.” “क्या फिगर बनाया है भगवन ने साड़ी भी तुमसे ही रोशन हो गयी है.”
मम्मी और चाची दोनों पहले शर्माने की एक्टिंग कर रही थी लेकिन उनकी आँखों में एक अलग चमक थी जैसे उन्हें ये सब सुनना भी पसंद आ रहा था. मैं खिड़की के पीछे खड़ा हर एक बात सुन रहा था. मेरा दिमाग कहता था की भाग जा. लेकिन मेरा दिल चाहता था की और देखु और समझूँ की आगे क्या होने वाला था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मम्मी ने थोड़ा नखरे वाले लेकिन नॉटी अंदाज़ में कहा “अब बस भी कीजिये कितनी दारु पीएंगे आप लोग? आप लोगों का हैंगओवर भी तो हमें ही संभालना पड़ेगा न.”
उनका डायलॉग सुन कर सब अंकल एक-दम ज़ोरदार हंसी में फूट पड़े.
समीर अंकल मम्मी की तरफ देखते हुए बोले “अरे भाभी जी आप संभाल लो तो फिर तो हम चाहे जितना मर्ज़ी पिए. हमें तो कोई टेंशन ही नहीं रहेगी.”
उनकी बात में एक-डबल मीनिंग था और मम्मी ने शरमाते हुए पल्लू से मुँह छुपा लिया.
तभी मुकेश अंकल चाची की तरफ झुक कर बोले “वैसे भाभी आप तो सिर्फ पेग ही नहीं आदमी का दिल भी बना देती हो. आपके हाथ का पेग पी कर लगता है जैसे शराब के साथ थोड़ा प्यार भी मिल रहा हो.”
चाची ने उनकी बात पे हलकी सी सुलझी हुई हंसी छोड़ी और उनका गिलास दोबारा भर दिया. उनकी ऊँगली मुकेश अंकल के हाथ को बस हलकी सी टच कर गयी और दोनों की आँखों ने एक-दुसरे को समझने वाला इशारा कर लिया. माहौल अब पूरे शराबी–मस्ती से आगे बढ़ कर थोड़ा इंटिमेट लगने लगा था.
सब अंकल की आँखें मम्मी और चाची के हॉट फिगर पर घूम रही थी. सारी के पल्लू और चूड़ियां अब उनके बहु वाले रूप के साथ एक छुपा हुआ अट्रैक्शन भी दिखने लगी थी. मैंने खिड़की से देखा मम्मी अपना पेग उठा कर सीधा लिप्स से सिप कर रही थी. उनकी लिपस्टिक का निशान गिलास पर लग गया था.
जिसे देख कर समीर अंकल ने बोला “बस अब तो मेरा मन कर रहा है उसी जगह से पी लू जहाँ आपके होंठों का निशान है.”
मम्मी ने आँखों से उन्हें घूर कर देखा लेकिन उनकी आँखों में भी एक मस्ती चमक रही थी. मम्मी ने अब समीर अंकल का हाथ पकड़ कर बेडरूम की तरफ कदम बढ़ाये पूरे हॉल में एक-दम सन्नाटा सा छ गया. सिर्फ अंकल लोग एक-दुसरे की तरफ स्मिर्क करते हुए देखने लगे.
चाची ने पीछे से मुस्कुराते हुए बोला “एन्जॉय करना भाभी.”
उनकी आवाज़ में जो छेड़खानी और ताना था उसने मेरी सांसें तेज़ कर दी. मेरा दिमाग अभी भी शॉक में था की मम्मी ऐसे ओपनली समीर अंकल के साथ बेडरूम जा रही है. फिर जयंत अंकल ने चाची की तरफ देख कर बोल्ड अंदाज़ में कहा “तो क्या… अब हम भी चले जानेमन?” और उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया.
चाची पहले थोड़ा नखरे दिखाते हुए मुस्कुरायी. फिर सिन्दूर से सजे हुए सर के पल्लू को थोड़ा संभालती हुई उनका हाथ पकड़ लिया. फिर बिना कुछ कहे वो भी बेडरूम की तरफ चली गयी. अब हॉल में बचे थे मुकेश अंकल और नरेन्द्र अंकल. दोनों ने एक-दुसरे की तरफ देखा और हंस रहे थे.
मुकेश अंकल बोले: “अरे वाह… आज तो असली मज़ा आने वाला है यार. दोनों भाभी अपने-अपने पति छोड़ उनके दोस्तों के साथ बेडरूम में चुदाई करवा रही है.”
नरेन्द्र अंकल ने सिगरेट जलाते हुए कहा: “साली दोनों पटाखा है… विनय (पापा) वाली मस्त मलाई और एक अमित (चाचा) वाली फुल टाइट आइटम. अब देखना कौन पहले थक कर बाहर आता है समीर या जयंत.”
फिर दोनों एक साथ हंस पड़े.
मुकेश अंकल ने नॉटी टोन में बोला “बस यार… हम लोगों के लिए भी थोड़ा चांस बचा के रखे. नहीं तो सारा मज़ा ये दो दोस्त ही ले जायेंगे.”
नरेन्द्र अंकल ने अपने गिलास का सिप लेते हुए कहा: “अरे टेंशन मत ले… शाम तक टाइम है. जब दोनों गरम हो चुकी होंगी न… तब हमको भी बुलाएंगी. तब असली मज़ा शुरू होगा.”
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और दोनों एक-दम हँसते हुए बेडरूम की तरफ देखने लगे जैसे अब बस अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हो. मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा था की मम्मी और चाची पापा के दोस्तों के साथ ऐसे चुदाई करवा सकती है. मेरा दिल और दिमाग दोनों इस बात को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे थे.
मैं धीरे-धीरे खिड़की के पास गया. खिड़की थोड़ी सी खुली थी और अंदर की आवाज़े मुझे साफ साफ सुनाई दे रही थी. मैंने धीरे से देखा… और मेरी सांसें रुक सी गयी. समीर अंकल मम्मी के होंठ ज़ोर से चूस रहे थे जैसे उनकी सारी प्यास वहीँ से बुझ रही हो. मम्मी ने भी आँखें बंद करके उनके लिप्स को अपने लिप्स से पकड़ लिया बेचैनी से उन्हें वापस चूसने लगी.
हर किस के साथ मम्मी के होंठ से हलकी सी “मममहह…आह्हः” की आवाज़ निकल रही थी. साड़ी के पल्लू को अंकल ने एक झटके में खींचा. अंकल के हाथ धीरे-धीरे मम्मी के ब्लाउज पर घूमने लगे. एक पल बाद उनके उँगलियों ने मम्मी के बूब्स को दबाया.
मम्मी झटके से हिल गयी लेकिन अगले ही पल उन्होंने खुद अपना बदन उनकी तरफ और झुका दिया. धीरे-धीरे मम्मी का ब्लाउज का हुक खुल गया. सफ़ेद ब्रा के अंदर से उनके गोल-गोल बूब्स उभर आये. अंकल ने बिना देरी किये अपना मुँह वहां रख दिया और मम्मी ज़ोर से आहें भरने लगी-
मम्मी – “आह समीर… रुको थोड़ा… कहीं भागी नहीं जा रही…”
लेकिन उनकी आवाज़ में न तो रुकावट थी न मना करने का इरादा – सिर्फ बेचैनी और सुकून मिला कर रखने वाली ख्वाहिश थी. अंकल ने मम्मी के बूब्स को दोनों हाथो में दबा लिया और उन पर अपनी जीभ घुमाने लगे.
मम्मी के मुँह से निकला: “आहह… बस करो समीर… तुम तो मुझे पागल बना दोगे…”
उनके सुरीली आहों ने पूरा कमरा मदहोश कर दिया था. मम्मी की साड़ी और ब्लाउज नीचे गिरा हुआ था अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी. अंकल ने उनके होंठ वापस पकड़ कर किस किया इस बार और भी गहरा और लम्बा. मम्मी ने भी उनकी गर्दन कस के पकड़ ली और किस में खो गयी. फिर अंकल नीचे झुक गए और मम्मी का पेटीकोट उठा कर उनकी नंगी जाँघों को चूमने लगे. मम्मी का बदन कांप उठा. उनके मुँह से निकला-
मम्मी- “आहहह… बस करो… तुम्हे तो हमेशा जल्दी रहती है…”
लेकिन उसी वक़्त मम्मी ने खुद ही अपना पेटीकोट नीचे कर दिया जैसे उनके अंदर का रोका हुआ जूनून अब बाहर आना चाह रहा हो. अंकल ने मम्मी की पैंटी को एक झटके में खींच कर निकाल दिया और अपनी जीभ उनकी चूत पर रख दी और मम्मी की सांसें तेज़ हो गयी. वो अपनी कमर हिला-हिला कर और भी ज़्यादा फील लेने लगी. मम्मी की आवाज़ निकल रही थी: आहह… और… थोड़ा और… आह… कितना मज़ा आ रहा है…”
कुछ देर बाद मम्मी ने ही अंकल का सर अपने पैरों के बीच दबा लिया. और कुछ समय बाद मम्मी का जिस्म कांपने लगा और मम्मी ने एक झटके से समीर अंकल का सर अपनी चूत से दूर कर दिया और मुस्कुराने लगी. अंकल ने अपना पैंट खोला और अपना मोटा लंड बाहर निकाला. मम्मी की आँखों में चमक आ गयी वो झुक कर उससे अपने होंठो में ले गयी. एक एक बार वो पूरा अंदर तक ले रही थी फिर छोड़ कर गन्दी सी आवाज़ के साथ वापस चूस रही थी.
मम्मी ने उनकी तरफ देखते हुए कहा: “कंडोम लगाओ… आज मैं पूरी तरह से चुदना चाहती हु…”
अंकल ने तुरंत कंडोम खोला और लंड पे चढ़ा लिया. मम्मी बिस्तर पर पलट गयी अपनी चूत को तैयार कर के खोल दिया. और अगले ही पल अंकल ने एक झटके में अपना लंड मम्मी की चूत में घुसा दिया. “आआह्ह्ह्हह… समीरल… मम्मी ज़ोर से चिल्लाई. अंकल ने मम्मी के अंदर घुसते ही एक झटके से स्टार्ट लिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मम्मी के होंठ खुले और उनकी आहें हर एक धक्के के साथ तेज़ हो गयी. “आहह… समीर… बस… और…” उनके मुँह से निकलता जा रहा था. अंकल तेज़-तेज़ लंड घुसा रहा था और मम्मी अपनी कमर हिला रही थी और कहती थी “पूरा अंदर डालो… मुझे ज़ोर से चोदो… आहहहह…”
अंकल ने एक हाथ से उनके बूब्स को दबाया और उनके होंठ चूमे. मम्मी के होंठ से हलकी सी चीख निकली और उनके सीने की हिलती अदा हर एंगल से अंकल के लिए कयामत ला रही थी. मम्मी ने अपने हाथ से अंकल का सर पकड़ कर और ज़ोर से घुमाया और उनकी आँखों में जो चमक थी वो पूरे लस्ट और कण्ट्रोल का मिक्स था.
हर धक्के के साथ उनकी चूत टाइट और मॉइस्ट फील कर रही थी. अंकल ने एक तेज़ झटका दिया और पूरा लंड मम्मी की चूत में घुस गया मम्मी की आहें और तेज़ हो गयी. “आह्ह्ह… समीर… मज़ा आ रहा है और… पूरा अंदर तक…” अंकल के होंठ उनके सीने से नीचे गए और उनकी निप्पल्स को चूमा और काटा हर चुम्बन और टच के साथ उनकी बॉडी और भी गरम होती गयी.
उनकी सिसकियाँ अब लाउड और बेकाबू हो गयी थी. हर धक्के के साथ मम्मी की गांड और कमर का कर्व अंकल के लिए और ज़्यादा टेम्पटिंग लग रहा था. मम्मी की आँखें बंद थी सर झुका हुआ और सिसकियों के साथ उनके चेहरे पर एक बोल्ड और लस्टी एक्सप्रेशन था. “आहहहह… और… और… मम्मी के मुँह से निकला.
अंकल ने उनका बॉडी होल्ड किया और तेज़-तेज़ धक्के मारे. मम्मी के पैर भी हिलते हुए उनके कमर के आस-पास लिपट गए जैसे उनका कण्ट्रोल भी ग्रेजुअली फेल हो रहा हो. मम्मी की आहें और तेज़ हो गयी थी. “आहहहह… और… और… पूरा अंदर तक…” वो अपने होंठ चबा रही थी और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी.
उन्होंने समीर अंकल की पीठ को ज़ोर से खुरचा. अंकल भी अब पूरी स्पीड में धक्के लगा रहे थे. बैडरूम में “थप थप थप” की आवाज़ गूँज रही थी. मम्मी के मुँह से निकल रहा था “अह्ह्ह… समीर… ओह्ह… मैं… जा… रही… हु…” उनका जिस्म कांपने लगा और वो एक ज़ोरदार सिसकारी के साथ झड़ गयी.
समीर अंकल ने भी उनकी चूत में और दो-तीन तेज़ धक्के मारे और ज़ोर से “आह्ह्ह!” करके मम्मी के अंदर ही झड़ गए. दोनों हाँफते हुए एक-दुसरे पर गिर गए. समीर अंकल ने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला और मम्मी की बगल में लेट गए. मम्मी उनकी बाहों में सिमट गयी.
मम्मी ने आँखें खोल कर उनकी तरफ देखा और उनके होंठो पर एक गीली सी मुस्कान थी. उन्होंने समीर अंकल के बालों को सहलाया और उनके सीने पर सर रख कर लेट गयी. दोनों के नंगे जिस्म एक-दुसरे से चिपक कर बेड पर लेट गए. उनकी सांसें अब भी तेज़ थी.
समीर अंकल ने आराम से मम्मी की कमर पर हाथ रखा और उन्हें अपनी तरफ खींचा. “वाह सविता उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा. “तुमने तो बस आज पूरा निचोड़ ही डाला.”
मम्मी शर्मा कर हस्सी “समीर तुम भी… हमेशा इतनी जल्दी रहती है तुम्हे.”
“जल्दी नहीं सविता” समीर अंकल ने उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा “ये तो तुम्हारा असर है जो मुझे इतना बेचैन कर देता है.”
मम्मी ने उनके होंठो पर एक हल्का सा किस किया. “बस अब हो गया है तो बाहर जाओ आपके और दोस्त मुझे चोदने के लिए बेचैन होंगे.”
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समीर अंकल ने उनकी बात सुनी और थोड़ी ही देर में मम्मी की बाहों में सोते हुए उनके होंठ चूम लिए. मैं उन्हें ऐसी हालत में देख कर हैरान था. जिस माँ को मैं मंदिर की देवी मानता था वो आज पापा के एक दोस्त से चुदवाने के बाद दुसरे के लिए तड़प रही थी. मेरा दिमाग घूम गया.
मैं खिड़की से ये सब देख कर वहां से हट गया. मैं बिलकुल पागल हो गया था. मेरे दिमाग में ढेर सारे सवाल घूम रहे थे. मैं सीधा बाजू वाले कमरे की खिड़की के पास गया जहाँ मुझे चाची और जयंत अंकल की चुदाई देखना था. मैंने धीरे से अंदर झाँका… और जो मैंने देखा चाची बिलकुल नंगी हो कर बिस्तर पर लेटी थी और जयंत अंकल उनके ऊपर झुके थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जयंत अंकल ने उनके पेट पर अपना लंड रखा था और उनकी गांड को सहला रहे थे. जयंत अंकल के चेहरे पर एक नॉटी स्माइल थी और उनके होंठ चाची की गर्दन पर चल रहे थे. चाची की आँखें बंद थी और वो धीमी आवाज़ में आहह…आह्ह्ह कर रही थी जैसे उन्हें बहुत मज़ा आ रहा हो.
जयंत अंकल ने चाची की गांड पर हाथ रख कर उसे ज़ोर से दबाया “चल मेरी रानी अब बारी तेरी है वो धीरे से बोले. “खोल अपनी टांगें मैं तुझे और तड़पाना नहीं चाहता.” चाची ने भी धीरे से अपनी टांगें फैला दी. जयंत अंकल ने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया.
चाची ज़ोर से चीख उठी “आह्ह्ह्हह… जयंत… भैया.. आहहहह…” जयंत अंकल ने अब तेज़ धक्के लगाना शुरू कर दिया. चाची भी अपनी गांड उठा-उठा कर उनका साथ दे रही थी. दोनों के जिस्म से “थप थप थप” की आवाज़ आ रही थी. चाची की आँखों में अब दर्द नहीं बल्कि एक अलग ही हवस की चमक थी.
वो अपने होंठ चबा रही थी “और… ओह्ह आराम से!” चाची उनको धीरे से करने को बोल रही थी पर जयंत अंकल उनकी हार्ड चुदाई कर रहे थे. कुछ देर बाद जयंत अंकल ने अपना लंड चाची की चूत से बाहर निकाला और चाची को डोगी स्टाइल में होने के लिए कहा. चाची भी ख़ुशी से तैयार हो गयी.
वो घोड़ी की तरह हो गयी और जयंत अंकल ने उनके पीछे आ कर उनकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया. “अब तेरी गांड की बारी है मेरी रानी वो बोले. “मैं आज तेरी गांड का भोसड़ा बना दूंगा.” चाची ने बस एक तिरछी स्माइल दी. जयंत अंकल ने अपना थूक उनकी गांड पर लगाया और धीरे-धीरे अपना लंड उनकी गांड में घुसाना शुरू कर दिया.
चाची ज़ोर से चीखी “आह्ह्ह… भैया… आराम से… दर्द हो रहा है.”
“दर्द नहीं मेरी रानी जयंत अंकल ने हंस कर कहा. “ये तो सजा है.” जयंत अंकल ने एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया. जयंत अंकल ने चाची की गांड में धक्के लगाना शुरू कर दिया. चाची की आँखों से आंसू निकल गए लेकिन उनके चेहरे पर अब भी एक अजीब सी ख़ुशी थी.
जयंत अंकल ने अब तेज़ धक्के लगाना शुरू कर दिया. चाची भी अब ज़ोर-ज़ोर से “आह्ह्ह आह्ह्ह” कर रही थी. उन्होंने जयंत अंकल से हाँफते हुए पुछा “आज आपको क्या शौंक हुआ गोली खा कर चुदाई करने का?”
जयंत अंकल ने एक तेज़ धक्का मारा और हंस कर कहा “पिछली बार मेरा जल्दी निकल गया था न तो तू मुझे ताना मार रही थी. रंडी आज मैं तेरी सारी गर्मी निकाल दूंगा.”
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जयंत अंकल के मुँह से चाची के लिए “रंडी” शब्द सुनना मुझे अजीब लगा. वो चाची की गांड में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे. चाची अब दर्द से नहीं बल्कि मज़े से चीख रही थी “आह्हः… आअह्ह्ह… और तेज़… मुझे और दर्द दो…” जयंत अंकल ने उनकी गांड को दोनों हाथो से पकड़ कर और भी तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए.
चाची की सिसकारियां पूरे कमरे में गूँज रही थी. उनकी गांड पर अब लाल निशान पड़ गए थे. “आहह… मैं… झड़… रही… हूं चाची ने कहा और उनका जिस्म कांपने लगा. जयंत अंकल ने भी दो-तीन तेज़ धक्के मारे और चाची की गांड में ही झड़ गए. मैं ये सब देख कर वहां से हट गया.
मेरा दिमाग बिलकुल घूम गया था और दिल तेज़-तेज़ धड़क रहा था. मेरे दिमाग में ढेर सारे सवाल घूम रहे थे. मैं सीधा हॉल की तरफ गया और देखा की समीर अंकल बाहर आ रहे थे सिर्फ अंडरवियर में. नरेन्द्र और मुकेश अंकल उनकी तरफ देख कर मुस्कुराये जैसे ये सब उनके लिए नार्मल ही हो.
“समीर क्या हाल है? मज़ा आया न?” नरेन्द्र अंकल ने थोड़ी हंसी के साथ पुछा.
समीर अंकल ने हल्का सा स्माइल करते हुए कहा “भाई सविता भाभी में ऐसा मज़ा है मैं शब्द में नहीं बता सकता.”
“और वो भी बिना किसी नखरे के मुकेश अंकल ने हंसी रोक कर कहा.
“जब उन्हें चोदा उनका जिस्म एक-दम गरम हो गया था. लगता है की वो काफी दिन से प्यासी थी समीर अंकल ने ऐड किया.
“वो तो है नरेन्द्र अंकल ने हां में सर हिलाया.
समीर अंकल थोड़ा हंस कर बोले “लेकिन वो काफी चुदक्कड़ है. अभी बोल रही थी किसी और को भेजो… तो अब आप दोनों में से कौन जा रहा है?”
इतने में जयंत अंकल भी चाची का कमरा छोड़ कर बाहर आ गए. उनका चेहरा नॉटी स्माइल से भरा हुआ था और अंडरवियर में अभी भी हल्का सा खड़ा लंड दिख रहा था शायद वियाग्रा का असर था. नरेन्द्र और मुकेश अंकल उनकी तरफ देख कर हंसी रोक नहीं पाए.
“जयंत क्या बात है? आज काफी टाइम लगाया क्या?” मुकेश अंकल ने छेड़ते हुए पुछा.
जयंत अंकल ज़ोर से हँसे “भाई क्या बताऊँ प्रिया में इतना मज़ा है की मन नहीं भरता. आज उसकी गांड मार कर इतना एन्जॉय किया की मैं खुद हैरान हो गया.”
“क्या बात कर रहा है?” नरेन्द्र अंकल ने हैरानी से पुछा.
“जब उसकी मटकती गांड देखता था मेरा मैं बेकाबू हो जाता था. आज साली की सारी गर्मी निकाल दी जयंत अंकल ने हंस कर कहा.
“वो तो है यार ऐसे तगड़े माल विनय और अमित को कैसे मिल गए?” जयंत अंकल ने हंसी के साथ ऐड किया.
मुकेश अंकल खड़े होकर बोले “जैसे भी मिली हो हमें चोदने मिल रही है हमें और क्या चाहिए.” उनकी बात सुन कर सब अंकल ज़ोर-ज़ोर से हसने लगे.
जयंत अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा “चलो अब तुम दोनों जाओ और मज़ा करो. हम यहाँ आराम से बैठते है.”
समीर और जयंत अंकल सोफे पर बैठ गए पेग्स बना कर दारु पीने लगे. नरेन्द्र अंकल मम्मी वाले कमरे में और मुकेश अंकल चाची वाले कमरे में चले गए. मैं फिर से दबे पाँव चुपके से मम्मी और चाची के कमरे की तरफ बढ़ा. हर कमरे से आती सिसकारियां और थप-थप की आवाज़ों ने मेरे दिल की धड़कन तेज़ कर दी थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने धीरे से खिड़की से झाँका… और जो मैंने देखा उसने मेरी सांसें ही रोक दी. मम्मी जो अब तक समीर अंकल के साथ चुदाई कर रही थी अब नरेन्द्र अंकल का लंड चूस रही थी. उनके होंठो पर नॉटी स्माइल थी और नरेन्द्र अंकल उनकी चूत में अपना लंड ज़ोर से घुसा रहे थे.
हर धक्के के साथ मम्मी की सिसकारियां और तेज़ हो रही थी. दूसरी तरफ चाची अब मुकेश अंकल के साथ बिस्तर पर लेटी थी. मुकेश अंकल उनके ऊपर थे और उनकी चूत में अपना लंड डाल कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे. चाची भी सिसकारियां ले रही थी और हर धक्का उनके लिए गरम और नॉटी थ्रिल लेकर आ रहा था.
थोड़ी देर बाद जयंत अंकल ने मम्मी की और समीर अंकल चाची की चुदाई की. बैडरूम में मेरी मम्मी और चाची की सिसकारियों की आवाज़ गूँज रही थी. एक तरफ मम्मी और जयंत अंकल का जोश हाई था और दूसरी तरफ चाची और समीर अंकल अपनी चुदाई में खो गए. हर धक्का हर टच हर नॉटी टीजिंग साफ दिखाई दे रही थी.
इस बीच मुकेश अंकल ने मम्मी के साथ और नरेन्द्र अंकल ने चाची के साथ चुदाई की. पूरे दिन में हर अंकल ने अपनी हवस मिटाई और मम्मी और चाची दोनों एक ही दिन में चारो अंकल के साथ चुद गयी. हर मोमेंट में उनकी चीखें, स्माइल्स नॉटी एक्सप्रेशंस और हर चुदाई का रिदम सब कुछ एक कामुकता और नग्नता का मिक्स क्रिएट कर रहा था.
मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था और आँखें बस उनसे हट नहीं रही थी. मम्मी और चाची दोनों अब कपडे पहने हुए हॉल में आयी. उनके चेहरे पर अब भी एक अलग ही चमक थी—जैसे अभी-अभी जन्नत से लौट कर आये हो. नरेन्द्र और मुकेश अंकल भी कपडे पहन कर हॉल में आ गए. अब चारों अंकल और मम्मी- चाची एक साथ सोफे पर बैठे थे.
नरेन्द्र अंकल ने मम्मी की तरफ देख कर एक नॉटी स्माइल दी और कहा “क्या भाभी मज़ा आया न?”
मम्मी शर्मा कर हंसी और बोली “तुम लोगों से मज़ा आता है… इसलिए आते रहते है.”
मुकेश अंकल ने चाची की तरफ देखते हुए कहा “ये तो हमें पता ही था… तुम दोनों को देख कर ही लगता है.”
चाची ने भी एक नॉटी स्माइल दी और बोली “तुम सब शैतान हो… हम देवरानी-जेठानी को बस निचोड़ के रख देते हो.”
जयंत अंकल ने हंसी रोकते हुए कहा “आज तुम दोनों से मेरा मन ही नहीं भरा.”
चाची ने उनके लंड की तरफ इशारा करते हुए स्माइल दी “मुझे पता है आज ये इतना फॉर्म में क्यों है.”
समीर अंकल भी हंसी रोक नहीं पाए “तुम दोनों ने आज हम सब का दिन बना दिया.”
सब लोग हसने लगे और एक-दुसरे की तरफ नॉटी नज़र डाल कर टीज़ करने लगे. हर एक ग्लांस हर एक स्माइल और सटल हिंट से रूम का माहौल और भी गरम हो गया. मम्मी और चाची के एक्सप्रेशंस और नॉटी स्माइल, सबको लस्ट और एक्साईटमेंट के मूड में डाल रहे थे. उनके चेहरे पर वो कॉंफिडेंट और शैतानी चमक उनकी आँखों में नॉटी स्पार्कल और उनकी बॉडी लैंग्वेज सब कुछ एक-दम बोल्ड और टीजिंग था.
जैसे पूरा हॉल उनके कामुक ऊर्जा से जीवित हो गया हो. सब अंकल भी इस एनर्जी को एन्जॉय कर रहे थे एक-दुसरे से मस्ती करते हुए और छुप-छुप के नॉटी बातें करते हुए. और मैं बस चुपके से ये सब देख रहा था. जिस माँ और चाची को मैं मंदिर की देवी मानता था वो आज पूरी तरह से पापा के दोस्तों की रंडियां बन चुकी थी.
जयंत अंकल मुस्कुराते हुए बोले “चलो मेरी प्यारी भाभियों अब देर हो रही है. मैं तुम दोनों को घर के तरफ छोड़ देता हूँ वैसे तुम दोनों का संस्कारी रूप देख कर तो मुझे भी पहली बार डर लगा था की उनको कैसे हैंडल करू.”
मम्मी ने छेड़ते हुए जवाब दिया “अरे जयंत भाई ऐसे मत बोलिये. आप में और डर? एक-एक करके कितने दोस्तों के साथ हमें चुदवा लिया.”
उनके होंठो पर स्माइल और आँखों में वही नॉटी चमक थी.
चाची भी हंसी के साथ बोली “हां भाभी सच कह रही हो. शुक्र मनाओ की आज सिर्फ चार ही थे वर्ना मेरी जान निकल ही जाती.”
उनकी बात सुन के मेरी धड़कन रुक सी गयी. “मम्मी और चाची और कितने लोगों के साथ…” ये सोच कर मेरा दिमाग हिल गया.
नरेन्द्र अंकल मुस्कुराते हुए बोले “ऐसा थोड़ी ने तुम्हे परेशान करते आज तुम दोनों ही आने वाले थे इसलिए किसी को बताया नहीं था.”
समीर अंकल पूछ गए “आज प्रेरणा भाभी क्यों नहीं आयी?”
मम्मी ने हल्का सा स्माइल देते हुए कहा “आज सुबह वो पीरियड में आ गयी.”
मैं ये सुन कर और हैरान हो गया. प्रेरणा आंटी मेरी मम्मी की अच्छी दोस्त और उनके हस्बैंड नवीन अंकल भी पापा के ग्रुप में है. और वो दोनों भी काफी भोले है. लेकिन पापा के दोस्त उनकी बीवियों के साथ… बिलकुल हरामी! और मेरी मम्मी और चाची और न जाने कौन सी आंटी उनके साथ अपनी प्यास बुझा रही थी.
कार में बैठते वक़्त मम्मी ने अपनी साड़ी ठीक करते हुए जयंत अंकल की तरफ देखा और आँखों से एक नॉटी सिग्नल दिया. चाची ने भी सीट पर झुकी हुई जयंत अंकल को लिप्स किस दे रही थी. जयंत अंकल ने किस तोड़ कर बोला “चार-चार लोगों से चुदने के बाद भी तेरा मन नहीं भरा?”
मम्मी ने हस्ते हुए बोला “इसकी आग तो आपने ही भड़कायी है अब आप ही सम्भालो.”
मैं चुपके से उन्हें देखता रहा और सोच रहा था की ये दोनों कितनी बड़ी रंडिया है. जैसे ही कार निकल गयी मैं वही दिमाग में हिलते इमोशंस और गुस्से के साथ खड़ा रह गया. घर वापस आके जब मैं अंदर गया तो मम्मी और चाची बिलकुल नार्मल लग रही थी. डिनर टेबल पर सब बैठे थे जैसे कुछ भी हुआ ही न हो. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पापा ने पुछा “सत्संग कैसा था सविता?”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया “बहुत सुकून मिला और मन को एक अलग ही शांति मिली.”
चाची ने कहा “हां जेठ जी.”
उन्होंने अपनी बातें बिलकुल भोले और विनम्र अंदाज़ में कही जैसे पहले वाला मस्ती भरा रूप बिलकुल छुप गया हो.
दादी खुश होते हुए बोली “अच्छा है दोनों इस उम्र में सत्संग में जा रही है. मुझे तो जाने का मन करता है पर तबियत ऐसी है की घर से निकल नहीं पाती.”
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अब मुझे बुरा फील हो रहा था की बेचारी दादी को क्या पता की उनकी दोनों बहु किसी सत्संग में नहीं पर चुदाई करवाने जाती है. मैं ये सब सुन कर हैरान था. जो मम्मी और चाची थोड़ी देर पहले रंडीपना कर रही थी अब बिलकुल संस्कारी और धार्मिक लग रही थी. उनके चेहरे पर वही भोली और प्यारी मुस्कान थी जैसे कुछ हुआ ही न हो. मैं चुप-चाप खाना खाता रहा और दिमाग में बस एक ही ख़याल: “ये मेरी माँ और चाची है या कोई और?” उस दिन मुझे सिर्फ अपनी माँ और चाची का असली रूप ही नहीं,
बल्कि पापा के दोस्त कितने गंदे और हरामी है ये भी पता चला. ये सब अपनी सीधे-साढ़े दोस्तों की बीवियों के साथ चुदाई करते है और पापा को इसकी भनक तक नहीं है.” आज भी पापा का उनके दोस्तों के साथ बहुत अच्छा रिलेशन है. रोज़ मिलते है हंसी-मज़ाक करते है लेकिन मैं अब उन सब को अलग नज़र से देखता हूँ एक तरफ वो पापा के भोले दोस्त है और दूसरी तरफ वो लस्टी और शैतानी ग्रुप है अपने दोस्तों की बीवियों के साथ चुपके से मज़े लेते रहते है.
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