Randi Girls Sex
हैल्लो दोस्तों! मेरा नाम रैना देसारी हैं, उम्र 29 साल, अभी तक अविवाहित हूँ। और मैं दिल्ली में नौकरी करती हूँ, लेकिन दिल अभी भी गाँव में ही बसता है। हमारे गाँव में मार्च के महीने में एक पर्व मनाया जाता है, जिसे हम बहुत धूमधाम से मनाते हैं। Randi Girls Sex
पिछले साल मुझे काम से छुट्टी नहीं मिली थी, इसलिए इस साल मैंने पहले ही दस दिन की छुट्टी ले ली और गाँव आ गई थी। गर्म वसंत का मौसम था, बचपन में तो गर्मी का कुछ एहसास ही नहीं होता था। लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहर में काम करने के बाद मैं अपनी सुंदरता को लेकर काफी संवेदनशील हो गई थी।
पहले मैं काफी सांवली थी, लेकिन दिल्ली जाकर एसी की हवा खा-खाकर और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करके मैं एकदम गोरी-चिट्टी हो गई थी। गाँव आने के बाद मैं सिर्फ शाम को ही बाहर निकलती थी, अपनी सहेली शीतल के साथ। शीतल भी मेरे साथ दिल्ली में रहती थी, हम दोनों गाँव में घूमने के बहाने लौंदाबाजी करने निकलती थीं — ढीली टॉप और मिनी स्कर्ट पहनकर।
आस-पड़ोस टोला के लड़कों को हम ज्यादा भाव नहीं देती थीं। हमें गाँव में सब “दिल्ली गर्ल्स” कहते थे और छेड़ते थे, पहले की बात अलग थी। क्यूँकि तब मांगरू, छापरी जैसे लड़के आसानी से हमें पटा लेते थे और उसी चक्कर में हम उनसे चुद जाती थीं।
इसे भी पढ़े – बहन के हस्बैंड की रखैल बनी मैं
कभी एक से, कभी दो-तीन लड़के हमें चोद-पेलकर छोड़ देते थे। लेकिन अब समय बदल चुका था, हम आस-पड़ोस के लड़कों से न तो बात करते थे, न दिलचस्पी दिखाते थे। हमारे गाँव से कुछ मिनट की दूरी पर एक और गाँव है, जहाँ ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं — या यूँ कह लीजिए कि सिर्फ नाम के मुस्लिम हैं।
क्यूँकि वे शराब का सेवन करते हैं, लेकिन दिखने में हमारे टोला के लड़कों से लाख गुना बेहतर हैं। वे लोग शराब पीने हमारे आस-पड़ोस में आते रहते हैं, ज्यादातर ऑटो चलाते हैं, कुछ का बस चलता है, कुछ हमारे कॉलेज के सहपाठी थे। जब से मैं दिल्ली में थी, तब से जमाल नाम के बंदे से फेसबुक पर चैट करती थी।
फिर कॉल पर बात होने लगी, उसका गाँव-शहर में बस चलता था और वह मेरे भैया का सहपाठी था। इसीलिए जमाल उम्र में मुझसे थोड़ा बड़ा था, वहीं शीतल जमाल के दोसर मुस्तफा से फँसी हुई थी। जमाल और मुस्तफा जिगरी दोस्त थे, जैसे मैं और शीतल।
पिछले दो दिन से हम शाम से थोड़ी रात होने के बाद जमाल और मुस्तफा से मिलने जाते थे। लेकिन ज्यादा कुछ नहीं होता था, सिर्फ बातें, जमाल और मुस्तफा दोनों एक ही बाइक पर आते थे। इसलिए बात नहीं बन पा रही थी, जबकि हम चारों के दिमाग में चोदा-चोदी का प्लान चल रहा होता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन तीसरे दिन दिन के समय मैंने जमाल को कॉल किया “तुम दोनों में से सिर्फ एक ही के पास बाइक है क्या?”
तब जमाल ने जवाब दिया, “अरे ऐसा कोई बात नहीं है, वो तो हम साथ में पीने आते हैं, इसलिए एक ही बाइक में आते हैं।”
मैंने बोली, “ओह, तो आज दोनों अपने-अपने बाइक से आओ न शाम में।”
जमाल बोला “अच्छा, ठीक है!”
फिर अचानक से जमाल ने पूछा, “हमें कहीं पर लेकर जाने का प्लान है क्या, तुम दोनों का?”
मैं हँसते हुए बोली, “बहुत जल्दी समझ गए… हाँ!”
जमाल ने कहा, “फिर तो हमें अपने साथ दो-दो कालीन भी साथ में लेकर आना पड़ेगा।”
इसे भी पढ़े – गर्लफ्रेंड की सील पैक गांड की चुदाई
मेरे बगल में शीतल लेटी हुई थी। वह भी हँसते हुए बोली, “हाँ-हाँ कालीन के साथ दो-दो बीयर भी लेते आना।”
हमें पता नहीं था कि जमाल के साथ मुस्तफा भी स्पीकर पर है, मुस्तफा बोल पड़ा, “अरे शीतल तुम पीती भी हो?”
शीतल मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ पीती हूँ, पिलाओगे क्या?”
तब मुस्तफा कहने लगा “हाँ-हाँ क्यों नहीं, बोलो कितनी बोतल बीयर पियोगी?”
तो मैं कहने लगी कि “बोतल नहीं, बस एक-एक कैन बीयर पिला देना।”
जमाल हँस पड़ा, “सिर्फ एक-एक कैन बीयर? तुम दोनों को देखकर लगता है चार-चार कैन बीयर अकेली पी जाती होगी।”
असल में मैं और शीतल दिल्ली में जिम भी करती थीं, हमारी जिस्म जो कभी गदराई हुई थी। लेकिन अब काफी सुडौल हो गई थी, मेरी फिगर 38-28-40 की थी। शीतल की 36-32-38 की होगी, कद में मैं 5’10” और शीतल 5’8″ की थी, इसी वजह से हम और भी आकर्षक लगती थीं।
मैं हँसते हुए बोली, “अरे नहीं-नहीं, मैं ज्यादा नहीं पीती।”
जमाल ने कहा, “ठीक है लेकर आएँगे हम, आज तो मजा ही आ जाएगा… वैसे कहाँ पीने का प्लान है?”
हम सोचने लगे, फिर शीतल बोली, “दुइ भोंकि पहाड़ी चलेंगे।”
मैंने कहा, “अरे वो थोड़ा दूर नहीं हो जाएगा क्या?”
तो शीतल बोली “अरे ज्यादा दूर थोड़ी है, वो तो हम पैदल जाती हैं इसलिए दूर लगता है।”
फिर हमारे पिने खाने की जगह पक्की हो गई। फिर शाम के 6:30 के आसपास मैं और शीतल तैयार होकर दूसरे रास्ते की तरफ निकल गईं। हमारे टोला का पीछे वाला रास्ता, जिधर से शाम के बाद कोई जाता नहीं था। मैंने जमाल को भी उधर ही आने को बोल दी थी.
इसे भी पढ़े – साली और बीवी दोनों एक साथ चुद गई
हमारे पहुँचने के ठीक पंद्रह मिनट बाद जमाल और मुस्तफा अपनी-अपनी बाइक से आए। फिर हम दोनों उनके बाइक पर बैठकर दुइ भोंकि पहाड़ी की तरफ रवाना हो गईं। वहाँ पहुँचने में करीब पच्चीस मिनट लगे, उस पहाड़ी की खासियत यह थी कि दो पहाड़ों के बीच एक छोटा सा प्राकृतिक जल स्रोत था।
जहाँ का पानी गर्मी में भी नहीं सूखता था, हम वहाँ पहुँचे, फिर सुखी लकड़ियाँ इकट्ठा करके आग जलाई। फिर कालीन बिछाए — जमाल का अलग, मुस्तफा का अलग। मैं बोली तो थी सिर्फ एक-दो बीयर लेकर आने को, लेकिन दोनों हमारे लिए चार-चार बीयर लेकर आए थे, और अपने लिए वे एक-एक व्हिस्की की बोतल लाए थे।
फिर वे दोनों अपना-अपना पैग बनाने लगे और फिर हम चारों ने चीयर्स किया और पीने लगे। मैं और शीतल एक-एक कैन बीयर खत्म करके दूसरी खोल चुकी थीं। थोड़ी पी भी ली थी, लेकिन हमें चढ़ी नहीं थी, शीतल ने मुस्तफा से कहा, “थोड़ा व्हिस्की मेरे कैन बीयर में भी डाल दो।”
हम तीनों चौंक गए, मुस्तफा बोला, “बाप रे… ये तो बहुत ही खतरनाक मालूम पड़ती है।”
हम सब हँस पड़े, मुस्तफा ने शीतल के कैन में व्हिस्की डाल दी, जमाल ने मुझसे पूछा, “तुम भी व्हिस्की लोगी क्या?”
मैंने कहा, “हाँ डाल दो, वैसे भी सिर्फ बीयर पीने में मजा नहीं आ रहा।”
जमाल ने मेरी बीयर में व्हिस्की डाल दी। तभी हमने देखा — शीतल मुस्तफा के पैंट का बेल्ट, हुक और चेन खोल रही है। मैं और जमाल उन्हें देखते हुए पीने लगे, शीतल ने मुस्तफा के नाग जैसे लंबे-मोटे लंड को बाहर निकाली और पकड़कर सहलाने लगी। और एकदम से मुँह में लेकर चूसने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आय–हाय… मुझे देखने में मजा आ रही थी, तभी जमाल ने मेरे कान में धीरे से कहा, “उन्हें देखती रहोगी या मेरे साथ भी कुछ करोगी?”
ऐसा कहते हुए उसने मेरी बायीं चूची को जोर से दबाया ईईस्स्स… अह्ह्ह… मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में हवस साफ झलक रहा था, मैंने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। जमाल ने मेरी टॉप के अंदर हाथ डाल दिया और ब्रा के ऊपर से मेरी 38 साइज की भारी चूचियों को मसलने लगा।
“उउफ्फ… ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह… जमाल…” मैंने आह भरी, तभी उसने मेरे मुँह से अपने मुँह लगा दिया। और जमाल इमरान हाशमी की तरह मुझे चुम रहा था, चाट रहा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लिपट सी गईं थी, गंदा, गीला, जोरदार चुम्मा–चाटी चल रहा था।
वह मेरी जीभ चूस रहा था, मेरे होंठ काट रहा था, एक हाथ से मेरी चूची निचोड़ रहा था। और दूसरे हाँथ से मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर घुस दिया था, मेरी चूत पहले से ही गीली थी। जमाल ने मेरी पैंटी के ऊपर से सहलाया, फिर पैंटी साइड में करके एक उँगली अंदर डाल दी।
इसे भी पढ़े – गाँव की औरतों की चूत का भूत भगाया
“ईईस्स्स… कितनी गीली चूत है तेरी रैना…” उसने मेरे कान में कहा।
तब मैं उसके पैंट के हुक, चेन को खोल रही थी और जैसे ही मैं उसके लंड को बाहर निकाली, मैं उत्तेजित हो गई। क्यूँकि जमाल का लंड चर्बीदार मोटा, लंबा, नसों से भरा हुआ था। जिसे पकड़कर मैं ऊपर-नीचे करना शुरू कर दी, इधर शीतल मुस्तफा का लंड गले तक ले जा रही थी।
मुस्तफा के हाँथ उसके बालों में थे “अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… चूस साली… जोर से चूस…” वह गुर्रा रहा था। जमाल ने मेरी टॉप और ब्रा उतार दिया, मेरी नंगी चूचियाँ आग की रोशनी में चमक रही थीं। उसने एक चूची मुँह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा, दाँत से काटने लगा अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… मैं उसके लंड को और तेज हिलाने लगी।
“ले रैना… मुँह में ले…” उसने कहा।
मैं झुक गई और उसके मोटे लंड को मुँह में ले ली, इतना मोटा था कि जबड़े में दर्द होने लगा। लेकिन मैं ठहरी लंडखोर… गले तक ले जाना शुरू कर दी, जमाल मेरे सिर को दबा रहा था “हाँ… अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह… ऐसे ही… गहरी ले…”
थोड़ी देर बाद उसने मुझे लिटा दिया, मेरी स्कर्ट और पैंटी एक साथ खींचकर उतार डाला। मेरी चूत पूरी तरह खुली थी, गीली थी, जमाल ने मेरे घुटनों को फैलाया और अपना चेहरा मेरी चूत पर रख दिया ईईस्स्स… उउफ्फ्फ… फिर उसने जीभ से लंबा चाटा चाटना शुरू किया, फिर चूत के छेद में जीभ घुसा दी।
“आह्ह्ह… जमाल… धीरे…” मैं कराह उठी।
वह मेरी क्लिट पर घुमा-घुमाकर चाट रहा था, दो उँगलियाँ अंदर डालकर जोर-जोर से हिला रहा था। जिससे मैं अह्ह्ह्ह… अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… उह्ह्ह… करते हुए सिसक और कराह रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर अपनी चूत पर और जोर से दबाने लगी।
“अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… बस कर जमाल अब रहा नहीं जाता चोदो मुझे… चोदो…” मैंने विनती करने लगी।
तब जमाल उठा, उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ा, फिर एक झटके में अंदर घुसा दिया। “अह्ह्ह्हह… ईईस्स्स… मर गई रे…” मेरी आँखें बंद हो गईं, मेरी चूत पूरी तरह फैल गई थी। फिर जमाल धीरे-धीरे आगे-पीछे होने लगा और कहने लगा “ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह… रैना, बहुत गरम है तेरी चूत।”
फिर वो रफ्तार बढ़ाने लगा “और टाइट भी है तेरी चूत रैना… सालों से नहीं चुदी क्या?” वह हँसते हुए बोला।
“हाँ, पुरी तरस गई थी अह्ह्ह्ह… अह्ह्ह्ह… ओर जोर से पेल… ईईस्स्स…” मैं ऐसा उससे कहने लगी।
इसे भी पढ़े – 2 नाईजिरियन लड़कियों ने ऑटो वाले से चुदवाया
फिर वो मेरे पैरों को अपने कंधों पर रख दिया और गहराई तक घुसाने लगा। हर धक्के के साथ थप–थप–थप की आवाज़ आती और मेरी चूचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं उसके गांड को पकड़कर खुद को और ऊपर उठा रही थी ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह… मज़ा ही आ जा रही थी।
इधर शीतल मुस्तफा के ऊपर सवार थी, मुस्तफा लेटा हुआ था और शीतल उसके लंड पर उछल-उछलकर अपनी गांड पटक–पटक कर चुद रही थी। हम दोनों की आहें और गंदे शब्द हवा में गूँज रहे थे। “आह्ह… ईईस्स्स… मुस्तफा… और गहरा… मेरी चूत फाड़ दे…” शीतल चीख रही थी।
जमाल ने मेरी पोजीशन बदली, मुझे घुटनों के बल कर दिया यानि डॉगी पोजीशन में ले आया। फिर उसने पीछे से मेरी 40 साइज की गांड को देख थप्पड़ मारते हुए गांड फैला कर कहने लगा “अहहा… क्या मस्त गांड हैं रे तेरी रैना।” ऐसा कहने के बाद जमाल ने फिर से मेरी गांड पर दो थप्पड़ मारा और मैं “आहहह… आहहह…” करते हुए कराह उठी।
फिर उसने अपना लंड मेरी चूत में धंसाया और जोर-जोर से पेलने लगा। एक हाथ से मेरी चूची मसल रहा था, दूसरे से मेरे बाल पकड़कर सिर पीछे खींच रहा था। “साली दिल्ली वाली… गाँव आकर इतनी रंडी बन गई…” वह गाली दे-देकर चोद रहा था।
मैं कराह रही थी, “हाँ… गाली दे… और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे जमाल…”
फिर थोड़ी देर बाद उसने ज़ोर–ज़ोर के तीन–चार धक्के मारते हुए अपना लंड बाहर निकाला और मेरे मुँह के पास लाया। जमाल के लंड पर मेरी चूत का चिपचिपा पानी लगा हुआ था और उससे मेरी चूत की महक भी आ रही थी। लेकिन फिर भी मैं उसके लंड को मुँह में ले ली और चूसने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जिसमें से मेरी चूत की स्वाद आ रही थी, फिर वो दोबारा से मेरे पीछे आया। और मेरी गांड को फैला कर चाटने लगा आहहह… ईईस्स्स… बड़ा सुकून मिल रही थी। उतने में जमाल मेरी गांड की छेद को देखा और वो एकदम से मेरी गांड की छेद में ऊँगली घुसा दिया। जिससे मैं आहहहह… ईईस्स्स… करते हुए कराह गई.
तब जमाल कहने लगा “अह्ह्ह्ह… रैना गांड भी चुदी है तेरी ईईस्स्स…”
लेकिन मैं जमाल से कहने लगी “अह्ह्ह्ह… उसमें लंड मत डालना प्लीज… प्लीज…”
इसे भी पढ़े – एग्जाम पेपर के लिए रसीली चूत चुदवाई
जबकि मन ही मन कह रही थी कि… “चूत बहुत मार लिए अब मेरी गांड चोद के गांड की खुजली भी मिटा दे।”
तो जमाल कहने लगा “अरे प्यार से धीरे–धीरे चोदुँगा तुझे भी मज़ा आएगा और मुझे भी।”
फिर मैं जमाल से बोली कि “ठीक है फिर… मगर प्यार से ठीक है।”
और पहले तो जमाल मेरी गांड की छेद में थूका फिर बड़े प्यार से अपना लंड का मोटा सिरा घुसाया।
जिससे मैं सिसक उठी “आहहह… ईईस्स्स… जमाल प्यार से।”
और शुरुआत में तो जमाल धीरे–धीरे से अपना लंड मेरी गांड की छेद में घुसा कर आगे–पीछे कर रहा था। जिससे मज़ा आ रहा था और मेरी गांड चोदते हुए जमाल मेरे ऊपर चढ़ गया था इसीलिए वो मेरी दोनों चूचियों को मसल भी रहा था ईईस्स्स… आहहह…
लेकिन जमाल मेरे कान में कह भी रहा था कि “लोग तुम्हारे टोला के बारे सही कहते थे।”
“क्या कहते है लोग मेरे टोला के बारे…आहहह… ईईस्स्स… ज़रा मैं भी तो जानू।” ऐसा मैं बोली।
तो जमाल बोला कि यही कि “बैसी टोला की लोंड़ियों की गांड में जितना लंड डालो वो उतना हँसती हैं।”
और यह बात सुनकर मैं हस पड़ी, जिसके बाद जमाल अचानक से इतनी जोर–जोर से पेलने लगा कि उसके टट्टे मेरी चूत से टकराने लगे। जिससे थप–थप–थप की आवाज़े आने लगी और मैं आहहह… ईईस्स्स… उउह्ह्ह… आहहह… करते हुए कराहने लगी थी। और जमाल एकदम कस–कस के धक्के देते हुए पेल रहा था कि मैं कालीन पर लेट गई थी।
और जमाल पूरा रफ़्तार में मुझे चोदे जा रहा था “ अह्ह्ह्ह… अह्ह्ह्ह… अब निकलने वाला हूँ…” वो कहने लगा। उसी दौरान जमाल ने दो–चार कस–कस के धक्के मारते हुए अपना लंड बाहर निकाला। और मेरी गाँड की दरार पर अपना लंड रखकर जोर-जोर से हिलाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और कुछ ही देर में उसने लछेदार, गर्म वीर्य की धार मेरी गाँड पर छोड़ दी। उसका वीर्य मेरी गाँड की दरार से बहकर मेरी चूत तक आ गया। इधर मुस्तफा भी शीतल की चूचियों की दरार में लंड दबा कर पेलते हुए झड़ गया था। और शीतल उसके लंड को तब भी चूसे जा रही थी, हम चारों कुछ देर तक कालीन पर पड़े रहे। आग की लकड़ियाँ चटचटा रही थीं। ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन हमारे शरीर अभी भी गर्म थे।
इसे भी पढ़े – बहन की चूत पर भाई ने मेहरबानी की
जमाल ने मेरे बाल सहलाते हुए कहा, “कल का क्या प्लान है? कल तो तुम्हारा पर्व है न?”
तो मैं मुस्कुराई और बोली कि “कल आओ… कल भी पिएंगे, मगर… मस्ती मेरे घर में करेंगे… क्या कहते हो?”
तब शीतल भी बोली कि “हाँ–हाँ, वैसे भी रैना का घर तो खाली रहता हैं।”
तो मुस्तफा हसते हुए कहा “ठीक है, कल भी तैयार रहना, ओर जमकर चोदुँगा तुझे।”
फिर हमने कपड़े पहने, कालीन समेटे और बाइकों पर वापस टोला की तरफ रवाना हो गए। रास्ते में ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकरा रही थी, लेकिन अंदर अभी भी जमाल के लंड का एहसास बाकी था। गाँव पहुँचकर हम दोनों चुपके से अपने-अपने घरों में घुस गईं। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। पर्व अभी बाकी था… और अगली रातें भी। कहानी जारी रहेगी…
प्रातिक्रिया दे