Didi Bhai Chudai XXX
दोस्तों, आपने मेरी स्टोरी पढ़ी होगी — दीदी और मैंने जंगल में सेक्स किया। आज मैं उसी के आगे की कहानी बता रहा हूँ। दोस्तों, फॉरेस्ट की चुदाई के बाद मैंने और मेरी बहन ने खूब चुदाई की घर आकर। एक दिन मेरी बहन ने कहा, “कुछ न्यू करना का मूड है।” Didi Bhai Chudai XXX
मैंने बहुत सोचा और बोला, “अच्छा, किसी दिन अकेले होंगे तो एक न्यू चुदाई करूँगा तेरी।”
3 महीने बाद मुझे ऐसा मौका मिल गया। घर में मैं और दीदी ही थे।
दीदी ने मुझसे कहा, “चलो अब उस न्यू स्टाइल से चोदो ना।”
मैं बोला, “हाँ, मैं बाज़ार जा रहा हूँ, थोड़ी देर में आता हूँ। आज कौन सा घर पर कोई है, रात भी हम दोनों अकेले हैं।”
मैं बाज़ार से होकर वापस आया। मेरी बहन नहाकर तैयार हो चुकी थी, मेकअप भी कर लिया था।
मैंने देखा तो पूछा, “चूत की भी सफाई की दीदी तुमने?”
“हाँ जी भाई के लिए सब रेडी है, मगर तू क्या लाया है?”
“हाँ, ये 1st बनाना, मैंगोज, ऑरेंज, लेडी फिंगर (तोरई), लौकी, खीरा, बैंगन लंबा वाला, अंगूर, अनार। पता है कितनी दूर जाना पड़ा तेरी इन चीज़ों के लिए।”
“मैंने तो तुझसे नहीं कहा था।”
“हाँ मगर तुझे डिफरेंट सेक्स चाहिए था ना?”
“हाँ मगर सेक्स और फ्रूट-सब्ज़ियाँ? मैं समझी नहीं।”
“बताता हूँ।”
“मैं भी नहा लूँ?”
“हाँ, ऐसा करो तुम ये सब हमारे रूम में ले आओ।”
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मैं नहाकर टॉवल ले लिया। फिर मैं आकर एक XXX मूवी चला दी। दीदी ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी। पहनी क्या थी, सिर्फ लपेटी थी। नीचे से बिल्कुल नंगी थी। साड़ी भी ट्रांसपेरेंट थी। मैं और दीदी बेड के ऊपर लेट गए। मैंने दीदी के बूब्स पर हाथ रखा तो दीदी ने मेरे लंड पर हाथ रख दिया।
मैं बूब्स दबाने लगा तो दीदी लंड पकड़कर हिलाने लगी। हमारी नज़र मूवी पर थी। मैंने हाथ गला से अंदर डालकर बूब्स को दबाना शुरू किया। पास ही फ्रूट और सब्ज़ियाँ रखी थीं। फिर मैं दीदी की तरफ झुका और दीदी को किस करना लगा। लिप्स पर — पुछ पुछ पुछ पुछ — और फिर चूसने लगा।
दीदी बोली, “तंग मत कर राजीव, मूवी एंजॉय करने दे।”
“सोच लो दीदी छोड़ दूँ।“
मैं जरा सा पीछे हुआ तो दीदी ने पकड़कर ज़ोर से चुम्मा दे दिया और बोली, “बुद्धू, मज़ाक कर रही थी।”
फिर दीदी मुझे किस करती हुई मेरे सीने पर से लुंगी हटाकर चूमने लगी और मेरे बालों को खींचने लगी। जिससे मेरे बदन में करंट सा दौड़ने लगा। फिर मेरे लंड को पकड़कर ज़ोर से दबाने लगी और बोली, “ये तो बहुत बड़ा हो गया है।”
मैं बोला, “हाँ तुमने चूस-चूस कर कर दिया है इतना बड़ा।”
दीदी बोली, “हाय भाई अगर तुझे वर्जिन गर्ल मिली वो तो मर ही जाएगी इतना बड़ा लंड लेकर।”
फिर दीदी ने लुंगी खोलकर साइड पर फेंक दी और मेरे लंड के ऊपर लेग्स के बीच बेड पर उछलकर बैठ गई। और जल्दी-जल्दी मेरे लंड की मुठ मारने लगी।
मैं बोला, “अरे दीदी आराम से करो, पूरी रात है।”
मगर वो सेक्स की प्यासी, भूखी और दीवानी थी। मैं जानता था वो पहली बार इतनी तेज़ से चुदवाती है और कभी-कभी तो मुश्किल से 5 मिनट में दोनों थक जाते हैं। मगर अभी तो ताज़े से लंड की मुठ मारने के बाद मुँह में डालकर चूसने लगी और हाथ से मुठ भी मार रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ऊपर से नीचे तक पूरा लंड पहला मुँह में लेती फिर नीचे से ऊपर तक हाथ से हिलाती। मेरा गीला लंड। थोड़ी देर बाद मैंने रोक दिया और उसके लिप्स के साथ लिप्स लगा कर, चूसने के साथ-साथ एक हाथ बूब्स पर और दूसरा चूत पर फेरने लगा। और इसके साथ दीदी की ब्लैक साड़ी खोलकर दीदी को नंगा कर दिया।
बड़े-बड़े बूब्स 34D के मेरे सामने आकर खड़े थे। दीदी के निप्पल्स भी मेरे लंड की तरह टाइट थे। दीदी की चूत जैसा अभी वो बाल सफाई करके आई थी और चमक रही थी। अंडे की शक्ल की चूत, बाहर को लिप्स निकला हुआ, चूत का फूला हुआ। थोड़ा थूक हाथ पर लगाया और उसकी चूत में घुसा दिया।
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दीदी बोली, “आह राजीव क्या कर रहा है, दर्द होती है।”
मैं बोला, “अभी भी दीदी इतना मोटा लंड लाने के बाद भी, अरे रोज-रोज तो नहीं लेती ना, खुद बता कितने दिनों बाद चोदने लगा है?”
दीदी बोली, “हाँ महीना भर से कुछ ज़्यादा हो गया है।”
फिर मैंने दीदी को बेड पर धकेल दिया और उसके बूब्स को खूब चाटा, निप्पल को बाइट किया जिससे उसके बूब्स और निप्पल पर रेड-रेड मेरे दाँतों के निशान पड़ गए। दीदी तड़पने लगी। जब मैंने दीदी की चूत पर अपनी ज़ुबान रखकर चूत चाटी। साथ में एक फिंगर भी डाल दी और तेज़-तेज़ से दीदी की चूत चाटने लगा और उसमें फिंगरिंग करता रहा।
फिर मैंने दीदी की चूत में 2 फिंगर्स डालकर चाटना और चोदना शुरू किया। जब दीदी की चूत खूब गीली हो गई और उसके जिस्म में खूब गर्मी आ गई और दीदी चूतड़ हिलाने लगी तो मैं रुक गया। सबसे पहले अंगूर का गुच्छा उठाया और दीदी के बूब्स पर अंगूर का जूस निकालकर दीदी के बूब्स गीला कर दिया।
दीदी को थोड़ा आगे किया और उसके बूब्स उसके मुँह के पास ला गया और बोला, “चाटो।” अब उसने बूब्स पर अपनी ज़ुबान रखी तो मैंने भी उसकी ज़ुबान के साथ अपनी ज़ुबान जोड़कर अंगूर का जूस दोनों पीने लगे। फिर मैंने अनार के दाने भर सारा मुँह में डाले जो दीदी ने पहले से ही निकालकर रखे थे। मैंने अपना मुँह में चबाकर दीदी के मुँह में डाल दिए और दीदी ने चबाकर मेरे मुँह में डाल दिए।
दीदी बोली, “मज़ा का है।”
मैं बोला, “हाँ, तेरे मुँह से तो थूक भी निकला वो भी मीठा लगता है।”
मैंने अपना मुँह में रखा हुआ दाना और जूस दीदी की चीक्स और लिप्स पर फेंक दिया। फिर इनको ज़ुबान से चाटकर दीदी के मुँह में डाल देता और दीदी खा जाती। अब मैं दीदी की चूत पर मैंगो निचोड़ दिया और दीदी की खट्टी-मीठी चूत को चाटने लगा।
दीदी बोली, “भाई कैसा ज़ायका है, बहुत मज़ा का खट्टा-मीठा।”
“मुझे भी टेस्ट करवाओ।”
“अच्छा।”
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मैं सीधा लेट गया और दीदी को मैंगो पकड़कर बोला, “मेरे लंड पर निचोड़ दो।”
उसने ऐसा ही किया। अब अंगूर का जूस निकाल निकालो। फिर दीदी ने खुद ही मेरे लंड को चूसना शुरू किया और बोली, “भाई ऐसा तो पहली बार मज़ा आ रहा है।”
“है ना डिफरेंट?” मैं बोला.
“हाँ बहुत ज़्यादा डिफरेंट और टेस्टी भी।”
थोड़ी देर लंड चूसने के बाद दीदी को फिर से लिटाकर बेड पर मैं दीदी की चूत की तरफ बढ़ा। हाथ में छोटी सी लेडी फिंगर लेकर और मुँह में डालकर दीदी से गीला करवा दी उसके मुँह से। अब मैंने तोरई दीदी की चूत में डालकर आगे-पीछे करना शुरू किया। फिर मैंने छोटा सा बैंगन लिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और उसे भी पहले दीदी के मुँह में डालकर गीला किया और फिर अपना मुँह में डालकर चूसा और दीदी की चूत में डाल-डाल के दिया। और चूत बैंगन से मारने लगा। लास्ट में खीरा जो साइज़ में सबसे बड़ा था, इसी तरह गीला कर दीदी की चूत में डाला जिससे दीदी की चूत काफी खुली और बड़ी हो गई। अब लास्ट टाइम मैंने बनाना उठाया और छीलकर दीदी से कहा, “डालूँ?”
दीदी बोली, “ये तो टूट जाएगा।”
मैं बोला, “नहीं इसी लिए पहले तोरई, बैंगन और खीरा इस्तेमाल करके तेरी चूत को खुला कर दिया।
“राजीव ट्राई करो मगर लगता है टूट जाएगा।”
मैं बोला, “बस तुम चूत को दबाना मत, ठीक है।”
मैंने नंगा बनाना दीदी की चूत को फिंगर से खोलकर चूत में डाल दिया जो आराम से चला गया। आगे-पीछे करते कुछ हिस्सा टूट जाता तो वो मैं और दीदी बड़े-बड़े खाने लगे। लास्ट में वो हिस्सा रह गया जो चूत के बिल्कुल अंदर था। मैंने दीदी से कहा, “ज़रा ज़ोर लगाओ।” मतलब बाहर को पुश करो।
दीदी ने लगाया तो पोते की तरह निकल आया चूत में से बनाना का पीस।
मैंने हाथ में लेकर दीदी के मुँह में डाल दिया और बोला, “सारा मत खाना, मुझे भी टेस्ट चेक करना है।”
“हाँ।”
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दीदी ने मुझे नीचे लिटाकर मेरे ऊपर आकर मुँह खोलने को कहा और अपना मुँह में जो कुछ था मेरे मुँह में डाल दिया। आह मज़ा का था।
“दीदी मज़ा आया?”
“हाँ बहुत। एक बार और करो।”
“क्या, बनाना के साथ?”
“नरम-नरम जब मेरी चूत में गया तो मुझे अजीब सा मज़ा आया। ऐसा जो तुम्हारे सख्त लंड से आता है। सॉफ्ट-सॉफ्ट जब मेरी चूत के अंदर लग रहा था तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।” दीदी बोली।
फिर 3 बनाना को ऐसे ही दीदी की चूत में डाला फिर खा लिया दोनों ने।
फिर मैंने पूछा, “दीदी तू अकेले में कैसा सेक्स करती है?”
तो बोली, “अगर नहा रही होती हूँ और तेरी याद आ जाए तो चूत में फिंगर डालकर 2-3 मिनट खूब हिलाती हूँ और बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाती हूँ और सोचती हूँ तेरे साथ कब मौका मिलेगा।”
“और बेड पर?”
“हाँ सारा कपड़ा उतारकर तकिए को चूत के ऊपर रखकर खूब मसलती हूँ पहले और फिर बेड पर उल्टी लेट जाती हूँ और अपनी चूत को बेड के फोम के साथ खूब रगड़ती हूँ। जब स्पर्म निकलने लगा तो फिंगर भी डाल लेती हूँ और फिर तेज़ से बेड के साथ चूत जोड़कर हिलती हूँ। ऐसा करने से बेड की चून-चून की आवाज़ें भी निकलती हैं।”
“अच्छा अभी करके दिखाओ ना, तेरी चूत से तो अभी भी स्पर्म नहीं निकला।”
“हाँ अभी ले, बेड के साथ लगी चेयर पर बैठ, मैं तुझे दिखाती हूँ।”
पहले दीदी ने तकिया उठाया और अपनी चूत के साथ रखकर रगड़ने लगी और आँखें बंद कर लीं और अपना एक लिप टीथ के नीचे फँसाकर मुस्कुराने लगी।
तो मैंने पूछा, “क्या सोच रही हो?”
तो बोली, “तेरा लंड अपनी चूत में रगड़ रही हूँ।”
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फिर वो उल्टी लेट गई और बेडशीट को ज़ोर से पकड़कर चूत को साथ लगा दिया फोम का और आगे-पीछे हिलने लगी, जिससे उसका मोटा चूतड़ भी हिलने लगा।
फिर मैंने पूछा, “अब?”
तो बोली, “तुम मेरी गांड मार रहे हो तेज़ से और नीचे मेरी चूत में फिंगर डालकर चोद रहे हो।”
और उसकी स्पीड बढ़ती गई और बेड की चून-चून की आवाज़ें आने लगी। और तेज़ फिर सिसकारियाँ भरने लगी, “ज़ोर-ज़ोर से चोदो भाई चोदो प्लीज मुझे आकर चोद दो आह…” और बस फिर ऐसा शांत हो गई जैसे बेहोश हो गई। जब थोड़ी देर बाद सीधी हुई तो बेड की शीट पर उसका स्पर्म या पेशाब का कतरा पड़ा हुआ था।
“ये तो था फ्रूट सेक्स, अब असल चुदाई की।” मगर इसके लिए मैं और दीदी थोड़ी देर आराम से लेटे रहे, शांत होकर। थोड़ी देर बाद दीदी का हाथ मेरे लंड पर पड़ा। बस हाथ पड़ने की देर थी और लुल्ले लंड अंकुरित होकर खड़ा हो गया। मैंने भी हाथ दीदी के गोल-गोल बूब्स पर रखकर दबाना शुरू किया। दीदी ने फिर सिर मेरी छाती पर रख दिया और मेरे लिप्स पर फिंगर रखकर चूमने लगी।
“तुमने मुझे पागल कर दिया है, अब तो मैं बस तेरा ही सोचती हूँ। ऐसा क्यों किया तुमने?”
“दीदी जो मैं तुम्हारे बिना पागल होता हूँ वो? दोनों तरफ बराबर की आग है ना तो गीला कैसा?”
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फिर दीदी सीधी हो गई और मैं दीदी के ऊपर अपना वज़न डाल आ गया और दीदी के अंग-अंग चाटने लगा यहाँ तक कि उसके आर्म्स के नीचे के हेयर्स को भी सक किया और चूत चाट-चाटकर फुला दी। और फिर दीदी मेरे लंड की तरफ लेट गई और लंड को मुँह में डालकर खूब चूसा इतना कि शायद मैं सोच भी नहीं सकता था। मज़ा आने लगा। मैं जैसे स्वर्ग में था. तो फिर बस दीदी से अब और नहीं रुका गया। चढ़ गए मेरे लंड पर और चूत में लंड डाल दिया और नीचे बैठ गई।
थोड़ी देर बैठकर मेरे मुँह से मुँह जोड़कर चाटने लगी और मैं भी उसका फेस चाटता रहा। फिर सीधी होकर बूब्स पकड़ लिए और मैंने चूतड़ों पर हाथ रख दिए और दीदी 220 km/h की रफ्तार में फरारी से तेज़ ऊपर-नीचे होने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे आज 1 मिनट में ही चीत कर देना चाहती थी। मगर ऐसा करने से वो बहुत जल्दी थककर मुझसे एक बार फिर चिमट गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“क्या हुआ?”
उसकी साँसें फूली हुई बोली, “थक गई।”
मैं बोला, “अच्छा तो आराम से चुदाओ ना।”
दीदी बोली, “नहीं जल्दी-जल्दी चोदो मुझे, जल्दी धड़क दो।”
मैंने उसे बेड पर गिरा दिया, लंड बीच में ही रहने दिया और बोला, “लो फिर।” और मैं भी उसी स्पीड से दीदी की चूत मारने लगा जिससे वो मरवाना चाहती थी। वो ज़ोर-ज़ोर से आहें भर रही थी, आँखें ज़ोर से बंद थीं और बोल रही थी, “ऐसे ही तेज़ से चोदता रहो, रुकना मत।” मैं भी उसकी सेक्सी आवाज़ों में मस्त रहा और फिर बोली, “मेरा स्पर्म निकल गया।”
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और मुझे भी पता चला कि मेरा लंड उसकी चूत के स्पर्म से गीला हो गया। मैंने आहिस्ता से कहा, “गांड चुदवाओगी?” दीदी बोली, “नहीं, फिर कभी। अभी फुद्दी मारते रहो।” मैं दीदी की चूत में लंड डालकर दीदी को चोदता रहा मगर अब वो सेक्सी आहें नहीं भर रही थी, बस चुदाई में साथ दे रही थी और बोल रही थी, “चोदो चोदो चोदो और चोदो।” ऐसा वो एक बार कहती और नीचे से चूतड़ उठाकर मेरा लंड अपनी चूत में घुसा लेती। फिर कहती, “ज़ोर से चोदो।” तो मैं लंड को पूरा बाहर लेकर अंदर चूत में ज़ोर का झटका से डाल देता।
फिर बोली, “बस अपना लंड मेरे बूब्स में डालकर मुझे बूब्स फक करो।” मैंने अपना लंड उसके बूब्स में डुबा दिया और उसने बूब्स कसकर पकड़ लिए और मैं चोदने लगा। अब बस मेरा भी स्पर्म निकलने लगा था तो बोला, “मुँह में डालूँ या नहीं? स्पर्म निकलने लगा है?” दीदी बोली, “हाँ।” “जल्दी से मेरे मुँह में डाल दो।” और वो मुठ मारने के साथ-साथ लंड को चूसने लगी और मैं भी लंड को उसके हाथ के ऊपर हाथ रखकर तेज़ से हिलाता रहा जिससे मेरा लंड का स्पर्म सारा उसके मुँह में निकल गया और उसने बेड से नीचे थूक दिया।
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