Desi Sexy Makan Malkin Chudai
मैं 23 साल का हूँ और शिमला से हूँ। अब कहानी शुरू करता हूँ। मैं पढ़ाई के सिलसिले में कमरा लेकर रहता था और अकेला था। दोस्तों, अकेले इंसान की ज़िंदगी भी क्या होती है — न कोई बोलने को, न कोई हँसाने-खेलने को। बस कमरे में ही समय निकल जाता था। Desi Sexy Makan Malkin Chudai
अब मकान मालकिन के बारे में बताता हूँ। वह कोई 38 साल की थी, डिवोर्स्ड थी और एक लड़का व एक लड़की थी। जॉब करती थी। देखने में कुछ अच्छी नहीं थी, न ही उसके स्तन बड़े-बड़े थे। बस मैं उससे ज्यादा बात नहीं करता था, अपने आप में मस्त रहता था।
वह पहली मंजिल पर रहती थी और मैं ग्राउंड फ्लोर पर। वह अक्सर अपने कपड़े सुखाने गैलरी में डालती थी। एक बार मैं यूनिवर्सिटी से जल्दी आ गया, करीब 4 बजे, और देखा कि कमरे के बाहर हवा में कपड़े मेरे दरवाजे के सामने गिरे हुए हैं। एक दिल किया कि उठा लूँ, दूसरा नहीं उठाऊँ क्योंकि उनमें उसके सूट, लड़के की पैंट और उसकी ब्रा-पैंटी भी थी। लेकिन सोचा उठा ही लेता हूँ, मजा आएगा।
उसके बाद मैंने उन्हें उठाया और कमरे में रख लिया। ब्रा-पैंटी को देखकर मैं तो होश खो बैठा और उन्हें बेड पर रखकर मुठ मारने लगा। और न जाने कब नींद आ गई। शाम तकरीबन 6 बजे उसने दरवाजे पर दस्तक दी। मैं सोया हुआ था। अचानक नींद खुली। मैंने दरवाजा खोला तो वह थी। वह बोली कि हवा से कपड़े गिरे होंगे।
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मैंने कहा हाँ, मैंने रखे हैं। मैंने कहा, “आंटी आप अंदर आ जाओ, देता हूँ।”
वह बेड पर बैठ गई और उसके ब्रा-पैंटी वहीं थे। मैं तो 2 मिनट के लिए शॉक्ड हो गया कि न जाने क्या बोलेगी। मैंने उसको कपड़े दिए और वह ब्रा-पैंटी को देखकर बोली कि यह भी ले लूँ। मैं शर्माते हुए बोला कि हाँ ले लो। उसके बाद मैंने बहुत दिनों तक उसको शक्ल नहीं दिखाई।
अगले महीने जब मैं रेंट देने गया तो वह बोली कि खाना कहाँ खाते हो। मैंने कहा कि मैं अपने आप बना लेता हूँ। वह बोली, “आज यहीं खा लो, मैं भी अकेली हूँ। अकेले खाना अच्छा नहीं लगता।” मैंने बहुत मना किया लेकिन वह नहीं मानी। आखिर मैंने कहा, “चलो आप खाना बनाओ, जब बन जाएगा मुझे बुला लेना।”
वह बोली, “कोई बात नहीं, मैं बुला लूँगी।”
फिर तकरीबन 9 बजे वह कमरे में आई और बोली खाना रेडी है, कब खाना है। मैंने कहा कि 20-30 मिनट रुक जाओ, फिर खाते हैं।
वह बोली, “मैं यहीं खाना लेकर आती हूँ।”
मैं मान गया। थोड़ी देर बाद वह खाना लेकर आ गई। हम बेड पर बैठ गए और वह सर्व करने लगी। फिर पूछा कि कैसा बना है। मैंने कहा अच्छा है, टेस्टी है। मैंने बहुत कम खाया।
वह बोली, “नहीं तुमने तो कुछ खाया ही नहीं, थोड़ा और खा लो।”
मेरे मना करने पर उसने चावल डाल दिए। मुझे मजबूरन खाना पड़ा। खाना खत्म करने के बाद वह बोली, “प्लीज बर्तन रखने में हेल्प करो।” मैंने प्लेट्स साथ उठाई और उसके साथ चल पड़ा। बर्तन रखने के बाद बोली कि रुको, स्वीट डिश खाते हैं। उसने रसगुल्ले खिलाए और टीवी ऑन कर दिया। मैं उस दिन के बाद से चुप था, मेरी नजरें नहीं मिल रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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वह बोली, “क्या बात है?”
मैंने कहा उस दिन कपड़ों की वजह से गिल्टी फील हो रहा है। वह हँसने लगी और बोली कि मैं तो भूल ही गई थी। मैं फिर नॉर्मल हो गया। उसके बाद बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद वह बोली कि मैं चेंज कर लेती हूँ। दोस्तों, जब वह चेंज करके आई तो नाइटी में थी। मेरे ख्याल से ब्रा नहीं पहन रखी थी। वह बोली कि मैंने तुम्हारे लिए कुछ रखा है। मैंने कहा क्या है। तो उसने बॉक्स दिया और कहा खोल के देखो। मैंने देखा तो बॉक्स में ब्रा-पैंटी थी। मैं हँसने लगा।
वह बोली, “उस दिन तो बेड पर थे, अब यह मेरी तरफ से तुम रख लो।”
मेरी भी हिम्मत बढ़ गई।
मैंने कहा, “मेरे स्तन हैं ही नहीं तो रख के क्या करूँ, यह आप ही रख लो।”
वह हँसने लगी।
वह बोली, “नहीं अब तुम पहनो।”
दोस्तों, मैंने शर्ट खोलकर ब्रा को पहनने लगा।
वह बोली, “मैं हेल्प कर देती हूँ।” कहाँ वह पतली सी लेडी और मैं थोड़ा मोटा, तो वह बहुत टाइट लग रही थी, हुक नहीं लग रहा था। वह फिर बोली, “मेरे तो छोटे-छोटे हैं, मुझे यही साइज लगता है।”
मैंने कहा, “कोई क्रीम लगाया करो, मैंने सुना है कि उससे बड़े होते हैं।”
दोस्तों, मेरा लंड काफी टाइट हो गया था।
वह बोली, “चलो ब्रा छोड़ो, पैंटी पहन लो।”
मैं मना करता रहा।
वह बोली, “पैंट उतारो नहीं तो घर फोन कर दूँगी।”
हार कर मैंने पैंट खोल दी और मेरा खड़ा लंड अंडरवियर से बाहर आने को तरस रहा था।
वह बोली, “बेशर्म यह क्यों खड़ा हो गया?”
मैंने कहा, “पता नहीं।”
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उसने अंडरवियर से ही पकड़ लिया और बोली, “इसको बाहर निकालो, बेचारा तरस रहा है।”
मैंने अंडरवियर उतार दिया और वह लंड को देखकर बोली कि यह इतना बड़ा कैसे।
मैंने कहा, “पता नहीं कैसे।”
वह बालों को देखकर बोली, “यह क्या जंगल है?”
मैंने कहा, “मुझे हेयर वाली पसंद है।”
उसने कहा कि बेड पर लेट जाओ। फिर वह कहीं से शेविंग क्रीम और रेजर लेकर आ गई और बोली, “इसकी शेविंग कर देती हूँ।” वह लंड को पकड़कर उस पर क्रीम लगाने लगी और शेविंग करते-करते मेरा निकल गया। वह बोली कि कंट्रोल नहीं है। मैं हँसता रहा।
फिर वह बोली कि चलो इसको धो कर आओ। मैं बाथरूम गया और खूब अच्छी तरह सफाई करके बाहर आया। वह बोली, “वाह अब कितना क्यूट लग रहा है।” वह बोली, “चलो अब ऑयल लगाते हैं।” वह लंड पर ऑयल लगाने लगी। ऑयल लगाते-लगाते मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। तो वह उसको प्यार से सहलाने लगी और बोली कि मेरे हस्बैंड का इससे छोटा था। अब तो सेक्स किए हुए भी बहुत साल हो गए।
मैंने कहा, “बंदा हाजिर है, जो दिल करता है कर लो।”
वह झट से लंड को मुँह में डालकर बोली, “मुझे इसको खाना है।”
मैंने कहा, “खाना मत, अभी बहुत काम करने हैं इससे।”
चूसते-चूसते वह भी नंगी हो गई। तब मैंने देखा कि उसके स्तन बहुत ही छोटे थे। मैंने कहा कि ये तो नींबू की तरह हैं। वह बोली कि अब मैंने बहुत ट्राई की लेकिन साइज नहीं बढ़ता। लेकिन जब उसकी चूत देखी तब मेरे होश गायब हो गए। वह बहुत खुली थी। मैंने कहा कि ये बड़ी वो छोटे अजीब है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर वह बोली, “मैंने तुम्हारा चूसा, तुम मेरी चूसो।” और वह टाँगें फैलाकर लेट गई। मैं उसकी चूत चाटने लगा और वह ज़ोर से आवाजें निकालने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने कहा, “अब अंदर डालता हूँ।” दोस्तों, मेरा 8 इंच का है लेकिन उसकी चूत में बहुत लूज़ रह रहा था।
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मैंने कहा, “रंडी ये इतनी खुली है, मजा नहीं आ रहा। तुम जरा घोड़ी की तरह हो जाओ, फिर शायद टाइट हो जाए।”
मेरा इरादा उसकी गांड मारने का था। वह शायद समझ नहीं सकी थी। वह घोड़ी बन गई। पहले तो मैंने उसकी चूत में लंड डाला।
वह बोली, “और अंदर करो।”
मैंने कहा, “रुको जरा ऑयल लगाने दो।”
मैंने लंड पर बहुत सा ऑयल लगाया और उसकी गांड का निशाना लगाकर लंड को झटके से घुसाया। वह ज़ोर से चिल्लाई और बोली, “हरामी ये कहाँ डाला?”
मैंने कहा, “चुप साली रंडी, अभी गया कहाँ है।”
फिर थोड़ी देर बाद एक झटका दिया तो लंड आधे से ज्यादा अंदर गया और दर्द से उसका बुरा हाल था। उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे थे लेकिन मैं भी रुका नहीं। जब पूरा अंदर चला गया तब मैं कुछ देर रुक गया और बोला, “सॉरी आगे, मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।”
वह बोली, “प्लीज निकाल लो, दर्द हो रहा है।”
मैंने कहा, “जरा रुक जाओ, दर्द कम हो जाएगा।”
फिर थोड़ी देर बाद मैंने झटके लगाने शुरू कर दिए और देखा कि उसकी गांड से खून निकल रहा था। मैंने उसको नहीं बताया और झटके लगाता रहा। कुछ देर बाद मेरा निकल गया।
वह बोली, “हरामी अंदर ही छोड़ दिया।”
मैंने कहा, “हाँ रंडी, पता नहीं कहाँ-कहाँ चुदवाती है, चूत देखो अपनी भोसड़ा बना हुआ है।”
फिर वह बोली, “अपना आप तो निकल लिया, मैं तो अभी झड़ी नहीं हूँ।”
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मैंने कहा कि अब मेरे में हिम्मत नहीं रही है डालने की लेकिन हाँ फिंगरिंग कर देता हूँ। वह रेडी हो गई। मैं उसकी चूत में फिंगर करने लगा और वह मजा लेने लगी। थोड़ी देर बाद मेरा फिर से खड़ा हो गया। अब मैंने लंड ही अंदर डाल दिया।
वह बोली, “हाँ ये अच्छा है।”
मैंने कहा, “आँखें बंद करो, फिर ज्यादा मजा आएगा।”
मैं कुछ देर बाद झड़ने को रेडी हो गया था। उसकी आँखें बंद थीं। मैंने मौका देखकर सारा माल उसके चेहरे पर डाल दिया। उसने अचानक से आँखें खोली और बोली, “बस यही रह गया था।” दोस्तों, वह माल को साफ करने बोली, “दोबारा चेहरे पर मत डालना।” दोस्तों, उस रात वह मुझे चूसती रही और मैं उसको। बहुत एंजॉय किया। उसके बाद से मैं उसकी गांड रोज मारता था। वह भी अब एंजॉय करने लगी थी और उसको कम का टेस्ट अच्छा लगने लगा था।
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