Free Maa Beta Chudai Kahani
एक दिन मैंने रात में नोट किया कि छोटा भाई बेड हिला रहा था। मैंने जब ध्यान दिया तो पता चला कि वह तो मुठ मार रहा था। मैं वह रूम में अकेला सोता हूँ मगर बेड एक था। मैंने उसे पकड़ लिया और बोला, “यह क्या कर रहा है?” तो वह डर गया। Free Maa Beta Chudai Kahani
मैंने उसे कहा, “मैं यह माँ को बताऊँगा जो तुम कर रहे हो।”
“नहीं भाई प्लीज ऐसा मत करना।”
“क्यों न करूँ? यह तेरी उम्र है इन कामों की?”
“सॉरी भाई, आइंदा नहीं करूँगा प्लीज आप माँ को मत बताना।”
लंड तो मेरा भी खड़ा था। मैंने सोचा क्यों न इसे ही चोदूँ, बुर तो कोई मिलती नहीं।
मैंने कहा, “ठीक है मगर एक शर्त पर।”
उसने बोला, “कौन सी शर्त?”
मैंने कहा, “तुम आँखें बंद करके सो जाओ।”
उसने वैसा ही किया।
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मैंने उसकी लोअर नीचे कर दी, उसने इलास्टिक पहना था। फिर उसकी गांड में फिंगरिंग करने लगा और वह डर गया और बोला, “भाई क्या कर रहे हो?”
तो मैंने कहा, “सो जाओ चुप करके वरना माँ को बोल दूँगा।”
वह चुप हो गया। फिर मैंने अपनी ट्राउजर नीचे की और लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उसकी गांड के अंदर डालने लगा मगर बहुत टाइट थी। फिर मैंने दोबारा अपने लंड पर भी और उसकी गांड में भी थूक लगाया और जोर से झटका दिया जिससे उसकी चीख निकल गई। मैंने जल्दी से ऊपर ब्लैंकेट कर दिया कोई आ न जाए।
थोड़ी देर बाद फिर दोबारा लंड उसकी गांड में डाला। इस बार मैंने उसके मुँह पर हाथ रखकर पूरा ही लंड छोटे की गांड में घुसा दिया। उसकी गांड 20 मिनट मारी होगी, मेरा लंड ने स्पर्म छोड़ दिया। मैं पिछले 6 महीने से उसकी गांड मार रहा था मगर इसी बीच एक दुर्घटना में उसकी राम राम सत्य हो गई। अब मैं फिर से सूराख की तलाश में था जिसमें अपना लंड डाल सकूँ।
एक दिन माँ मेरे पास आई रात में और बोली, “आज तेरा पिता देर से आएगा, मैं यहाँ तेरे पास लेट जाऊँ?”
“हाँ माँ जरूर।”
थोड़ी देर चुप रहने के बाद माँ बोली, “आजकल कैसा गुजारा करता है भाई के बिना?”
मैं डर गया और बोला, “क्या माँ?”
“हाँ भाई नहीं है तो क्या करता है अकेला? नींद आ जाती है?”
फिर मैं शांत हुआ और बोला, “नहीं माँ वो तो छोटा भाई था मेरा और कुछ दोस्त भी।”
“और क्या था?”
“बस यही माँ।”
“तुमने उसके साथ अच्छा नहीं किया वैसा।”
मैंने कहा, “माँ क्या अच्छा नहीं किया?”
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उसने मुझे सब बता दिया था जो तुम करता था उसके साथ। मैं तो अच्छा मौका की तलाश में थी तुझसे बात करने की, मगर वह बेचारा ही गुजर गया।
मैं शर्मिंदा हो गया। माँ ने मेरी तरफ मुँह कर लिया और बोली, “जरूरत तेरी भी है और मेरी भी।”
“ऐं ना हम दोनों……”
“मगर माँ यह ठीक नहीं होगा, पिता जी हैं न आपके पास।”
“नहीं बेटा अब वो तो बस खत्म हैं। मगर मुझे अभी बहुत इच्छा है।”
“मगर माँ.”
“क्या अगर भाई के साथ कर सकता है तो मेरे साथ क्यों नहीं?”
मैं चुप रहा।
“देख बेटा, घर की बात घर में रहने दे, कोई बुरी बात नहीं होती इससे तो घर की बात घर में रहती है। अब मैं बाहर जाकर करवाऊँ तो तुझे अच्छा लगेगा?”
“नहीं माँ।”
“तो इसलिए तू मेरी जरूरत है और मैं तेरी।”
“हाँ यह और बात है। मैं ओल्ड हूँ, अगर तुझे पसंद नहीं तो मैं वापस चली जाती हूँ।”
“नहीं माँ ऐसा मत कहना।” मैंने माँ के मुँह पर हाथ रखकर बोला। “माँ, आपको जो चाहिए मिलेगा और मेरी भी सैटिस्फैक्शन हो जाएगी।”
“ठीक है मगर अभी नहीं, अभी तेरा पिता आने वाला है। सुबह वैसे भी तेरी स्कूल से छुट्टी है।”
“ठीक है माँ मगर अभी तो मेरे पास बैठो, बातें करते हैं।”
“चल ठीक है मगर कोई मस्ती नहीं करना।”
“ठीक है।”
फिर माँ ने मुझसे पूछा, “तुमने छोटे को कैसे पटाया था?”
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तो मैंने सारी बात सच-सच बता दी। माँ यह सुनकर हँसने लगी और बोली, “बहुत चालाक हो गया है तू।” फिर मैंने माँ का हाथ पकड़कर अपना लंड पर रख दिया। पहले तो माँ ने पीछे किया, फिर मैंने प्लीज कहा तो माँ ने मेरा लंड पर हाथ रख दिया और मसलने लगी। मैंने माँ की चूत पर हाथ रखा तो बोली, “प्लीज अभी नहीं, अभी तेरा पिता आने वाला है, वो भी बहुत तंग करता है।”
मैंने अपनी लुंगी खोल दी और माँ के सामने नंगा होकर खड़ा लंड माँ को दिखाने लगा। माँ शर्मा गई।
“क्या डैड का भी इतना बड़ा है?”
“नहीं इससे छोटा।”
“माँ कभी चूसती हो डैड का लंड?”
“हाँ, मुझे बताओ कैसा।”
फिर माँ मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। मुझे लंड पर अजीब सी फीलिंग होने लगी। मैं आराम से बेड पर लेटा था। थोड़ी देर बाद माँ ने अपना मुँह से लंड निकाल लिया और फिर से मेरे साथ बैठ गई और मुठ मारने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“माँ कैसा टेस्ट है?”
“बहुत अच्छा, मीठा-मीठा।”
ऐसा कोई 7-8 मिनट ही किया तो मेरा लंड का स्पर्म निकल आया और स्पर्म इधर-उधर बेड पर और मुझ पर गिर गया। माँ ने जल्दी से बेड मेरी लुंगी से, बेड और अपना हाथ और मेरा लंड को साफ किया और बोली, “मजा आया?”
“हाँ माँ बहुत।”
“मेरी भी बुर में बहुत खुजली हो रही है तेरा लंड लाने की मगर मजबूरी है।”
फिर थोड़ी देर बाद पिता जी आ गए। हमने खाना खाया और पिता जी ने माँ को इशारा किया ऊपर आने का। माँ ने मेरी ओर हँसकर देखा। जब पिता जी ऊपर रूम में चले गए तो माँ बोली, “देखा इन्हें तेरा सा ज्यादा जल्दी है।” फिर मैं टीवी देखने लगा। मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं माँ के बारे में सोच रहा था। रात के 12 बज चुके थे।
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माँ के रूम का दरवाजा ओपन हुआ, माँ बाहर मुझे देखने आई और बोली, “तुम सोए नहीं?”
तो मैंने कहा, “नींद नहीं आ रही।”
“जा सो जा, सुबह जल्दी उठाऊँगी फिर खूब एंजॉय भी तो करना है। ऐसा तो तुझे सुबह नींद आ रही होगी।”
फिर मैं सोने चला गया। माँ ने मुझे सुबह 8 बजे उठाया। माँ ने ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी थी और मेकअप भी किया हुआ था। बहुत खूबसूरत लग रही थीं। मैंने माँ को पकड़ा तो बोली, “गंदा, पहले फ्रेश होकर नाश्ता कर ले, मैंने भी नहीं किया।” मैं जल्दी से फ्रेश हुआ और नीचे डाइनिंग टेबल पर पहुँच गया। वहाँ माँ ब्रेकफास्ट के साथ मेरा इंतजार कर रही थी।
मैंने जल्दी से नाश्ता कर लिया। इसी बीच माँ बोली, “आराम से, अभी कोई नहीं आता।” फिर माँ मुझे अपने रूम में ले गई। माँ ने मुझे बेड पर धक्का देकर गिरा दिया और मेरी लुंगी खोल दी और बनियान भी उतारकर मेरी लेग्स पर बैठकर अपनी साड़ी खोल दी।
फिर अपना ब्लाउज का हुक भी खोल दिया, पेटीकोट भी। फिर माँ ने लेग्स ऊपर करके नाइटी भी खोलकर मेरी लेग्स को अपनी जुबान से चाटना शुरू किया। आहिस्ता से वह मेरे लंड तक पहुँच गई और मेरे लंड को मजबूती से पकड़कर हिलाने लगी। मुझे थोड़ी दर्द हुई मगर मैंने काबू किया। ऐसा करने से मुझे मजा आ रहा था।
माँ ने थोड़ी देर मेरा लंड चूसा और थोड़ी देर ही लंड को चाटा। माँ ने मुझे फिर लिप्स पर किस की। मैं समझ गया और माँ को नीचे लिटाकर ऊपर लेट गया। अब मैंने माँ के लिप्स से लिप्स जोड़कर माँ के 38सी के बूब्स हाथ में पकड़कर मसलता रहा। माँ बहुत हॉट लग रही थी।
फिर मैंने नीचे माँ की चूत को थोड़ी देर मसला और फिर अपनी जुबान इसके बीच में डालकर चाटने लगा। “हाँ ऐसा ही कर, मुझे ऐसा बहुत मजा आता है पर तेरा पिता को बू आती है, वो ऐसा नहीं करता। तू अच्छी तरह से अंदर से साफ कर मेरी चूत को।”
मैंने ऐसा किया और फिर लंड पर और चूत पर थूक लगाया और लंड को चूत के अंदर जोर लगाकर डालने लगा। मुझे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई। मैंने जब पूरा लंड अंदर दिया चूत में तो रुक गया और माँ बोली, “क्या तुम गांड भी डैड से मरवाते हो?”
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“नहीं, मैंने कभी गांड में कुछ नहीं लिया।”
“तो मेरा लंड तो लोगे ना?”
“नहीं प्लीज, अगर तुमने इंसिस्ट किया तो मैं आज के बाद कभी तुमसे नहीं चुदवाऊँगी।”
“ओके माँ मगर मुझे ज्यादा मजा आता अगर तुम अपनी गांड मारने देती।”
“नहीं प्लीज फिर मत कहना।”
फिर मैंने आहिस्ता-आहिस्ता चूत के अंदर धक्का लगाना शुरू किया। आहिस्ता से मेरी स्पीड बढ़ गई और नीचे से माँ भी चूतड़ उठाने लगी जिससे हम दोनों की स्पीड काफी तेज हो गई। मुझे उस वक्त और भी मजा आया जब माँ ने अपनी लेग्स मेरी बैक पर जोर से जकड़ लगा दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इससे मुझे आसानी हो रही थी चूत चोदने में और मेरा लंड भी चूत से बाहर नहीं निकल रहा था, बस अंदर ही अंदर चूत में घुसकर चुदाई करता रहा। थोड़ी देर में मुझे पसीना आने लगा। माँ ने देखा तो मुझे नीचे लिटाकर खुद ऊपर बैठ गई। चूत के नीचे लंड को हाथ से पकड़कर चूत में डालने लगी और ऊपर-नीचे होने लगी।
मुझे तो बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था ऐसा चोदने में। इसमें सब कुछ माँ ही कर रही थी। माँ ने मुझे साथ में बताया भी कैसा चुदाई की जाती है, फीमेल को ज्यादा मजा कब और कैसा चुदवाने में आता है। मगर मेरा पूरा ध्यान अभी चूत का मजा लेने में था और मैं एक सेकंड को भी एंजॉय कर रहा था।
थोड़ी ही देर में माँ बोली, “जरा नीचे से जोर लगा, मेरी चूत शांत होने वाली है।” मैंने नीचे और माँ ने ऊपर जोर-जोर से चुदाई करवाई और माँ की चूत शांत हो गई। माँ अब बेड पर लेट गई और मेरा गीला लंड अपना मुँह में डालकर चूसने लगी रही। फिर माँ ने अपना दोनों बूब्स जोर से पकड़कर दबा लिया और मुझसे कहा कि मैं अपना स्पर्म इन बूब्स को चोदकर निकालूँ।
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मैंने वैसा ही किया। यह भी मेरे लिए न्यू था मगर इंटरेस्टिंग के साथ बूब्स फकिंग का मजा भी था। और ऐसा ही मेरा लंड का स्पर्म सीधा माँ के माउथ पर गिर गया। माँ ने एक बार फिर मेरी लुंगी उठाकर अपना माउथ साफ कर दिया और मेरा लंड भी मेरी लुंगी से साफ कर दिया और थोड़ी देर शांत होकर लेटी और बोली, “आज चुदाई का असल मजा आया। तेरा पिता तो अब बिल्कुल खत्म हो गया है, बस 2 मिनट में ही स्पर्म निकालकर सो जाता है।”
मैंने माँ से कहा, “एक बार और?” माँ बोली, “नहीं बस, अभी मुझे घर का सारा काम करना है।”
“माँ प्लीज।”
“कहा ना बस तो बस। अब 3 दिनों के बाद ऐसी ही चुदाई का मजा फिर लूँगी। इन दिनों के बीच तूने भी कुछ नहीं करना। देख रोज-रोज करने से तेरी सेहत भी खराब हो जाएगी और वो मजा भी नहीं आएगा। तू अगर मुझे झूठा समझता है तो खुद ही आजमा ले, जो तुझे अच्छा लगा।”
मैंने माँ से कहा, “नहीं तुम ठीक बोलती हो। अब 3 दिन बाद ऐसी चुदाई का मजा लूँगा।”
“अच्छा अब कपड़ा पहन और मेरे साथ काम में हाथ बटा।”
“माँ नहा लूँ?”
“आ जा बाद में नहा लेना, अभी तो लिया था।”
फिर मैंने कपड़ा पहना और नीचे माँ के साथ काम करवाने लगा।
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