Group Chudai Game XXX
मैं अमित। सबसे पहले मैं सभी चूत वालियों और लंड वालों को धन्यवाद देता हूँ क्योंकि मेरी कहानियाँ लोगों को काफी पसंद आई हैं। आशा है पिछली कहानियों की तरह यह कहानी भी आप लोगों को पसंद आएगी। एक बार मेरा ट्रांसफर हिमाचल के एक छोटे से गाँव में हुआ था। वहाँ पर सहकर्मी की मदद से मुझे किराए पर एक मकान मिल गया था। Group Chudai Game XXX
उस मकान में कुल 4 सदस्य थे। एक तो नागराज जो दुबला-पतला 32 वर्षीय मकान मालिक था और मजदूरी करके घर का गुजारा करता था। अक्सर वह रात को देसी शराब पीकर नशे में धुत रहता था। उसकी बीवी 28 वर्षीय सुंदर और आकर्षक भरे बदन वाली महिला थी, उसका नाम कम्मो था।
घर में कम्मो की सास थी जो करीब 45+ वर्षीय महिला थी और वह भी काफी आकर्षक कामुकता से भरी महिला थी। उसे मैं दादी कहकर बुलाता था। नागराज की एक बहन थी जिसका नाम रश्मि था। वह करीब 25 वर्षीय सुंदर और भरी-तड़की महिला थी। उसकी शादी नहीं हुई थी। वह एक दूसरे प्राइवेट स्कूल में टीचर का काम करती थी।
उस दिन उनके घर में नागराज की चचेरी बहन और बच्चे आए हुए थे। गर्मी के कारण हम सब आँगन में एक साथ सोते थे। वह जून महीने की पहली तारीख थी और समय रात के करीब बारह बजे थे। मेरी नींद खुल गई और मैं अपने चारों तरफ देखने लगा।
चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था। मैं अपने चारों तरफ आँखें घुमा कर देख रहा था। मैंने देखा कि कुछ जवान लड़कियाँ (चचेरी बहनें) अपने जाँघें और बदन खोले सो रही हैं। उन लड़कियों में से दो लड़कियों के चूचे काफी बड़े-बड़े थे और वह चूचे उनकी साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
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मैं अपने दूसरे तरफ देखा तो देखा कि दादी मेरे बगल में करवट लेकर सो रही थी। दादी की साड़ी और पेटीकोट उनके चूतड़ तक सरके हुए थे और उनकी टाँगें पूरी तरह से नंगी हो गई थीं। कुछ कपड़े उनकी जाँघों के बीच पड़े थे। मेरे दिमाग में उन्हें नंगी देखने की इच्छा जग उठी।
मैं दादी के और करीब हो गया और थोड़ा नीचे की तरफ सरक गया, जिससे कि मेरा हाथ उनके जाँघों के बीच जा सके। फिर मैं उनके तरफ पलट कर लेट गया। धीरे-धीरे मैं अपना हाथ दादी के दोनों जाँघों के बीच बढ़ाया। मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट को पकड़कर धीरे-धीरे खींचने लगा।
फिर मैं अपना सिर उठाकर देखा, दादी की जाँघें पूरी तरह से नंगी हो गई हैं। तो मैंने उनके कपड़ों को और खींचने लगा। कपड़ों को थोड़ा सा और खींचने के बाद मुझे उनकी चूत दिखाई दी। दादी की चूत पूरी तरह से बालों से भरी हुई थी। मैंने अपना सिर फिर तकिए पर रखकर लेट गया।
मैंने अपना हाथ दादी की एक जाँघ पर रखकर जाँघ को ऊपर से नीचे हाथ फेरकर सहलाने लगा। फिर मैंने अपना हाथ धीरे से उनकी चूत पर रख दिया और चूत को हल्का-हल्का हाथ फेरते हुए सहलाने लगा। मेरी इस हरकत से दादी न जागी और न ही हिली-डुली, इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। मैं अपने दूसरे हाथ से लुंगी के अंदर से अपना लंड बाहर निकाल लिया। अब मैं उनकी चूत को और जोर से मसलने लगा और अपना लंड दादी के हाथ पर रख दिया। पता नहीं मैं कितनी देर तक उनकी चूत को मसलता रहा लेकिन जब मैं उनकी तरफ देखा तो मेरी गांड़ फट गई क्योंकि दादी की आँखें खुली थीं और वह जाग रही थीं।
मैं उनको जगते हुए देखकर चौंक गया और झट से अपना हाथ उनकी चूत पर से हटा लिया। लेकिन तभी हमें एहसास हुआ कि दादी अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़े हुए थीं और हथेली से मसल रही थीं। दादी मेरे पास आईं और मेरे पास आकर बैठ गईं। और मुझसे उनके साथ चलने के लिए फुसफुसाकर बोलीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं भी चुपचाप उठकर उनके पीछे-पीछे चल पड़ा। दादी मुझे कमरे में ले गईं। कमरे में ले जाकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और खुद जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेट गईं। जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेटाते ही दादी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट खींचकर अपने कमर तक उठा दिया।
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उनकी खुली चूत हमें दावत दे रही थी। फिर उन्होंने अपने ब्लाउज उतारने लगीं और थोड़ी देर के बाद उनकी दो छोटी-छोटी ढीली-ढाली चूचियाँ बाहर आ गईं। उनकी खुली चूचियाँ और चूत उस समय मेरे लिए दुनिया की सबसे सुंदर चीज लग रही थीं। नानी ने अपने दोनों हाथ उठाकर मुझे उनके पास बुलाया और उठकर बैठ गईं और मुझे नंगा कर दिया।
उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और सहलाने लगीं और फिर लंड के सुपाड़े का घुंघट निकालकर अपने मुठ्ठे में भरकर मुठ मारने लगीं। मेरे लंड को अपने चूचे से सटाकर रगड़ने लगीं और अपने हाथों से मेरे अंडों को दबाने लगीं। उनकी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा हो गया।
फिर दादी बिस्तर पर लेटकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत की छेद से रगड़ना शुरू किया। फिर मैं उनके दोनों टाँगों को फैलाकर लंड का सुपाड़ा चूत के मुहाने पर रखकर एक करारा झटका मारकर आधे से ज्यादा लंड उनकी ढीली चूत में उतार दिया और लंड को अंदर-बाहर करते हुए फिर एक जोरदार शॉट मारा तो पूरा का पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ गहरी घाटी में समा गया।
वह बोलीं, “अमित, वाकई तुम्हारा लंड ज़ोरदार है रे। काफी दिनों से इस चूत को लंड का मजा नहीं मिला। चोद मेरे राजा, चोद… उफ्फ…” और मैं उनकी चूत की चुदाई करता रहा। कुछ देर के बाद उन्होंने भी अपनी कमर उछाल-उछालकर मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगीं और मैं भी जोश में आकर जोर से उनकी चूत में अपने लंड से धक्का मारने लगा।
मुझे उनकी चूत जन्नत का मजा दे रही थी। करीब 15 मिनट तक मैं अपनी नानी की चूत में लंड पेलता रहा। इसी दौरान उनकी चूत ने 2 बार सिकुड़न पैदा करते हुए झर चुकी थी और मैं भी अपने चरम सीमा पर पहुँच चुका था। और फिर उनकी चूत के अंदर झरते हुए उनकी चूत को लंड रस से लबालब भर दिया।
थोड़ी देर तक हम लोग शांत पड़े रहे और जब हम लोगों की साँस ठीक हुई तब दादी ने मुझसे बताया कि करीब आठ साल के बाद उनकी चूत ने आज मेरा लंड खाया। थोड़ी देर के बाद दादी की चूत फिर से लंड खाने के लिए तैयार हो गई और वह मुझसे बोलीं, “क्यों फिर अपनी दादी को चोदेगा?”
यह सुनते ही मैं फिर उनसे लिपट गया और उनके ऊपर चढ़कर फिर से उनकी चूत में लंड डालकर उन्हें चोदने लगा। उस रात हम लोगों ने करीब चार बार चुदाई का आनंद लिया। आखिर बार उन्होंने हाथ और पैर के बल झुककर उल्टी लेट गईं और मुझसे उन्हें पीछे से चोदने के लिए बोलीं और मैं भी उनके पीछे जाकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और कभी उनकी चूचियों और कभी उनकी चूतड़ को सहलाते हुए उन्हें चोदा।
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यह चुदाई का सिलसिला दस दिन तक चलता रहा और मैं रोज रात को अपनी नानी को चोदता रहा और वह मुझसे चुदवा रही थीं। हर रात वह मुझसे तीन या चार बार अपनी चूत में मेरा लंड पिलवाती रहीं और मैं उन्हें पेलता रहा। दसवीं रात को जब मैं उन्हें चार बार चोद चुका तो मैं उनकी चूचियों से खेलते हुए उनसे बोला, “क्या आप अपनी बहू कम्मो को चुदवाओगी?”
तो वह मेरे लंड को अपने मुठ्ठे में लेकर बोलीं, “मैं सब कुछ तेरे कम्मो से कह चुकी हूँ और तेरे कम्मो ने मुझसे वादा किया है कि वह तेरा हर तरह से ध्यान रखेगी और तू जो चाहेगा वह तू उनके साथ कर सकता है। अब तुझको कम्मो की चूत चोदने से मेरी चूत से ज्यादा मजा मिलेगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ये और उसकी बदन भरा पूरा है और उसकी चूचियाँ और चूत भी अभी तक टाइट है। कम्मो की चूचियाँ बड़े-बड़े हैं और उनको दबाने से तुझको बहुत मजा मिलेगा। जब तू उसकी चूचियों को चूसेगा और उसकी चूत में अपना लंड पेलेगा तो तेरे को बहुत मजा मिलेगा। लेकिन, तू मेरे को भूल न जाना, इस बुढ़िया की चूत को ज़रूर चोदना और चोद-चोदकर मेरी चूत की प्यास बुझाना।”
11 जून को मेरी दादी अपने एक रिश्तेदार के यहाँ नागराज की चचेरी बहनों को लेकर दूसरे गाँव चली गईं। मैं रश्मि दीदी के साथ बात करने में समय बिताने लगा। लेकिन कम्मो जब भी हमारे बगल से गुजरती थी तो अपनी चूचियों को मेरे कंधों या मेरे पीठ को टच कर जाती थी। वह ऐसा दो-तीन बार किया।
जब भी कम्मो अपनी चूचियों को मेरी पीठ या कंधों से चुआती तो मुझे उनके चूचियों का करारा और भारी होने का एहसास हो रहा था। उनकी चूचियाँ वाकई में बहुत भारी-भरी थीं और वह काफी टाइट थीं। अगले दिन सुबह और रात को कुछ नहीं हुआ। हमें और कम्मो को अकेले होने का मौका नहीं मिल रहा था।
मैं काफी परेशान हो रहा था और कम्मो भी मेरे अकेले होने के लिए परेशान हो रही थी। 12 जून सुबह जब नागराज बाथरूम में नहा रहे थे और रश्मि रसोई में कुछ काम कर रही थी। तभी कम्मो मेरे कमरे में घुसी और अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। मैं सोने का नाटक करते हुए उनको चोर निगाहों से देख रहा था।
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उनके ब्लाउज के ऊपर के दो-तीन बटन खुले हुए थे और उनकी चूचियों का आधा भाग दिख रहा था, यहाँ तक कि मुझे उनकी निप्पल भी दिख रही थी। फिर अपने कपड़े ठीक किए और किचन चली गई। आज मैं बहुत परेशान था। रात को मैं अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था और अचानक मेरी नींद खुली तो देखा मेरे इस तरफ नागराज लेटा हुआ था और उस तरफ रश्मि लेटी हुई थी।
रश्मि के बगल में कम्मो लेटी थी। रश्मि सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए थी। पेटीकोट रश्मि के घुटनों के ऊपर तक चढ़ा हुआ था और उसकी एक टाँग, जाँघ तक, नंगी थी। मैंने हिम्मत करते हुए रश्मि के और करीब सरक गया और अपना एक हाथ आहिस्ता से उसकी चूचियों पर रखा और धीरे-धीरे चूचियों को दबाने लगा।
मेरी इस क्रिया से वह कुछ भी नहीं बोली लेकिन मैंने महसूस किया कि वह जाग चुकी थी और सोने का नाटक कर रही है। तो मैं अपना हाथ रश्मि दीदी की नंगी टाँग पर रखकर उनकी नंगी जाँघ को सहलाने लगा। फिर रश्मि दीदी ने लेटे-लेटे ही अपना ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज उतार दिया।
ब्लाउज के नीचे रश्मि दीदी सफेद रंग की ब्रा पहने हुए थीं। जब उनको ब्लाउज उतारते देखकर मैं गरम हो गया लेकिन मैं अपने आप पर काबू रखा। मैंने रश्मि उधर पीछे मेरा हाथ दीदी के पीठ से होकर रश्मि दीदी के चूतड़ तक पहुँच चुका था। मैंने अपने हाथों से दीदी के पेटीकोट उनके चूतड़ के ऊपर तक खींच दिया था और इस समय मेरा हाथ उनकी जाँघ और उनकी चूतड़ को सहला रहा था।
रश्मि दीदी तब अपने पीछे हाथ ले जाकर अपने ब्रा का हुक खोल दीं और अपनी ब्रा उतार दी। मैंने फिर रश्मि दीदी की चूचियों को दबाने लगा। चूचियाँ बहुत कड़ी-कड़ी और खड़ी थीं। इस समय जबकि वह मेरी तरफ करवट लेकर लेटी थीं, उनकी चूचियाँ अपने वजन से नीचे की तरफ लुढ़क गई थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रश्मि दीदी की चूचियाँ तो बड़ी-बड़ी थीं लेकिन उनका निप्पल छोटे-छोटे थे और उनका एरोला भी बहुत छोटा था। निप्पल की साइज़ करीब छोटे मूँगफली के दाने समान था। मैंने उनके निप्पल को अपने दो उँगलियों के बीच में लेकर जोर से दबा दिया। वह धीरे से मेरे कान में फुसफुसाकर बोलीं, “आउच, अमित, दर्द करता है, धीरे-धीरे सहलाओ।”
मैं उनकी बात मानकर उनकी निप्पल को धीरे-धीरे सहलाने लगा और फिर उनकी पूरी चूची अपने हाथ में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा। उनकी चूचियों को सहलाते हुए मैंने उनसे पूछा, “पहले किसी ने ऐसे चूचे दबाए हैं? मजा आ रहा है ना?” वह सिसकारी भरती हुई बोलीं, “बहुत मजा आ रहा है। पहले कुछ लड़कों ने कपड़े के ऊपर से चूचे दबाए थे, उसमें मजा नहीं आया था। आज बहुत अच्छा लग रहा है। दबाते रहो।”
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फिर मैं अपने पेट के बल लेट गया और उनकी दोनों चूचियों को अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा और सहलाने लगा। वह अपने चूचे दबवाते हुए मुझसे बोलीं, “ऊफ्फ… तुमने मुझे पागल कर दिया है, मेरे पूरे बदन में चीटियाँ चल रही हैं। गर्मी और बढ़ गई है।”
मैं अपने दोनों हाथों को उनके कंधों के नीचे ले जाकर उसको अपने से लिपटा लिया। उसने भी अपना बदन मेरे से लिपटा लिया। अब उनकी दोनों चूचियाँ मेरी छाती से दब रही थीं और मुझे उनकी गर्मी का एहसास हो रहा था। मैं उसके होंठों को अपने होंठों से लगा कर खूब कसकर चूमा और अपना एक हाथ से उनकी एक चूची को पकड़कर सहलाते हुए दूसरे हाथ उसके शरीर पर फेरने लगा।
उसका बदन बहुत चिकना था। और फिर मैं धीरे से पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया। पेटीकोट के नाड़े को खोलकर मैंने उसको जाँघों के नीचे सरका दिया। अब मेरा हाथ उनकी कोरी बिनचुदी गरम चूत के ऊपर था। रश्मि दीदी की चूत पर झाँटें थीं लेकिन वह मेरे हाथों को रोक नहीं पा रही थी और मेरा हाथ उनकी चूत की होंठों को छूते हुए उसकी चूत के दरवाजे में घुस गया।
जैसे ही मेरी उँगली उसकी चूत के अंदर गई, उसकी जाँघें अपने आप खुल गईं। और मेरी उँगली ठीक तरीके से उसकी चूत में अंदर-बाहर होने लगी। उसने मेरे मुँह को अपने चूचे पर कसकर दबा लिया और अपने जाँघों से मेरा हाथ को दबा लिया और चटपटा कर बोलने लगीं, “ऊफ्फ… उसको मत छुओ, नहीं तो मैं संभाल नहीं पाऊँगी। मेरी जाँघों और चूतड़ को सहलाओ लेकिन अपना हाथ वहाँ से हटा लो।”
फिर भी मैं अपना हाथ उनकी चूत पर फेरता रहा और वह मुझे अपने से लिपटाकर मुझे जोर-जोर से चूमने लगीं। और अपना हाथ लुंगी में डालकर मेरे लंड को निकालकर सहलाने लगीं। उसकी चूत हल्के भूरे रंग की झाँटों से ढँकी हुई थी। अब उसने अपने हाथों से मेरा लंड को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वह धीरे-धीरे मेरे लंड को अपनी चूत के ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर रगड़ रही थीं। पहले तो वह धीरे-धीरे रगड़ रही थीं फिर उनका रगड़ने की स्पीड बढ़ गई और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। थोड़ी देर के बाद मुझे उनकी चूत की चिकनाई मेरे लंड के ऊपर होने का एहसास हुआ।
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मैं नीचे की तरफ देखा तो पाया कि मेरा लंड करीब आधा से ज्यादा उसकी चूत में धँसा हुआ है। फिर मैं जोश में आकर कमर का दबाव डाला तो पूरा का पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ उसके बच्चेदानी से टकरा गया। उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं और वह बोल रही थीं, “आह्ह… ओह्ह… मर गई… आह्ह… बहुत मजा… आह्ह… मैं गई…”
और उनके हाथ एकाएक उसकी चूत ने सिकुड़न पैदा करते हुए झर गई और मैं भी करीब 15-20 धक्कों के बाद उसकी चूत में झर गया। हम दोनों कुछ देर तक शांत पड़े रहे। फिर वह मुझे चूमते हुए बोलीं, “थैंक यू अमित जी, मुझे ऐसा मजा कभी नहीं मिला। तुम बहुत मस्त हो और तुम्हारा लंड खाकर कोई भी लड़की या औरत मस्त हो जाएगी।”
और फिर हमने कपड़े ठीक किए और अपनी-अपनी जगह पर सो गए। बेचारी रश्मि को यह बात नहीं मालूम थी कि उसकी भाभी कम्मो मेरे लंड को अपनी चूत से खाने के लिए तड़प रही है। 15 जून, दिन भर में कई बार कम्मो आते-जाते मेरे शरीर से अपनी चूचियों को रगड़कर निकलीं लेकिन मैं उन चूचियों को पकड़कर दबाने का, मसलने का मौका नहीं पाया।
लेकिन उस दिन एक घटना घटी। पहले तो कम्मो मेरे दफ्तर जाने के बाद नहाती थीं, लेकिन आज शनिवार था और मेरी छुट्टी थी। नागराज और रश्मि अपने-अपने काम पर निकल चुके थे। तब कम्मो मेरे बाथरूम में जाने ठीक पहले बाथरूम में घुस गईं।
रोज की तरह मैं तौलिया लपेटे था और वह सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुई थीं। बाथरूम में जाने से पहले उसने पीछे मुड़कर मुझे इशारा किया कि मैं भी बाथरूम में घुस जाऊँ। इस समय उनके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था जिसको उन्होंने अपनी चूचियों के ऊपर से बाँध रखा था। मैं जल्दी से बाथरूम की तरफ गया और बाथरूम का दरवाजा को धक्का देकर खोल दिया।
बाथरूम में कम्मो नंगी होकर अपने पैरों को फैलाए हुए खड़ी थीं। उनके चूत के ऊपर कोई भी बाल नहीं था। उन्होंने जल्दी से मुझे अपने पास खींच लिया और मुझे अपने से लिपटा लिया और मेरे कान पर फुसफुसाकर बोलीं, “जल्दी से मौका निकालकर मुझे चोदो, मेरी चूत बहुत प्यासी है।” फिर उन्होंने मेरे ऊपर से तौलिया खींचा और जल्दी से मेरा लंड अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगीं।
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तब उन्होंने अपनी एक टाँग को ऊपर उठाकर एक बाल्टी के ऊपर रख लिया और मेरा खड़ा लंड को पकड़कर अपनी चूत से भिड़ा दिया। मैं भी अपने लंड को माँ की चूत से भिड़ा दिया और अपनी कमर हिला कर एक ही झटके से अपना लंड माँ की चूत में घुसेड़ दिया और कमर हिला-हिलाकर उन्हें खड़े-खड़े चोदने लगा। उनकी चिकनी बिना झाँटों वाली गरम चूत को चोद रहा था। वह मुझसे लिपटे हुए बोलीं, “ओह्ह… बहुत अच्छे! साले मदरचोद, चोद साले चोद, मेरी खुली चूत को धुंभार कर चोोोद।
तेरा लंड बहुत मस्त है। मारो धक्का जोर से… मारो… ऐसे ही मारते रहो… आह्ह… बस… मैं अब झरने वाली हूँ। तू धक्का मार और जोर-जोर से मार।” थोड़ी देर के बाद वह ख़लास होकर चुपचाप हो गई। लेकिन मेरा अभी तक पानी नहीं छोड़ा था और मैं चूत के अंदर मेरा लंड पेलता रहा। मैं उनकी दोनों चूचियाँ पकड़कर उनकी चूत के अंदर अपना लंड दनादन पेलता रहा। वह इस समय मेरे साथ अपनी चूत चुदवाकर बहुत खुश थीं। और मैं भी कुछ पलों में उसकी चूत को लंड रस से भर दिया। आज वह काफी संतुष्ट थीं।
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